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रजिया-“मुझे देखने दो…” और रजिया अमन के लण्ड को अपने हाथ में लेकर देखने लगती है, पूछा-“अभी भी तकलीफ हो रही है क्या?”
अमन-नहीं, अब ठीक है।
रजिया-“डाक्टर ने क्या कहा?” वो अमन के लण्ड को सहला रही थी। आज रजिया का दिल जमकर चुदाई का था। कुछ दिनों से उसकी चूत प्यासी थी। उसे पानी चाहिए था अमन का।
अमन-“अह्म्मह… धीरे कर छिनाल। डाक्टर ने कहा था कि इसे नरम जगह पर सुलाना और रात भर गीला रखना सूखने नहीं देना…”
रजिया-“ऐसी जगह कहाँ है?” वो अमन की आँखों में देख रही थी।
अमन उसे अपने से चिपकाते हुए-“तेरे नरम चूत है ना रजिया… वहीं रखूंगा…” और अमन रजिया की चुचियाँ मसलने लगता है।
रजिया-“उंह्म्मह… मुझे नहीं रखना इसे। अब तो इसे कुँवारी चूत मिलने वाली है। है ना…” और रजिया बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है।
अमन उसे पटक के बेड पे लेटा देता है, और खुद उसके ऊपर चढ़ जाता है-“तेरी बहन को चोदूं… नाटक करती है साली। नहीं चाहिए तो यहाँ क्यों आई है?” और अमन अपने हाथ से रजिया की चूत रगड़ देता है।
रजिया-“अह्म्मह… नहीं ना जी… बेटा अमन… उंह्म्मह…”
अमन-तेरे चूत गीली क्यों है। छिनाल नहीं चुदाना चाहती तो जा फिर।
रजिया अमन के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए-“कैसे चली जाऊँ? ये मेरा है, सबसे पहला हक मेरा है इसपे। कोई भी छिनाल आ जाए इसे मुझसे नहीं छीन सकती…” वो अमन के लण्ड को अपने नरम हाथों में मसल रही थी।
अमन-“हाँ मेरी जान, तेरा ही तो है। आज तो तुझे ऐसे चोदूंगा रजिया की तेरी चूत भी मुझसे पनाह माँगेगी…”
रजिया-“हाँ मैं भी रगड़ना चाहती हूँ तुम्हारे नीचे इसे। सुनिए, मुँह में डालिये ना…”
अमन रजिया के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर कर लेता है, और खुद नीचे लेट जाता है-“चल, ले साली…”
रजिया-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… गलप्प्प-गलप्प्प…” करके अपने मुँह का सलाइवा गिरा-गिरा के अमन का लण्ड चूसने लगती है। वो एक हाथ से अपनी नाइटी निकालकर फेंक देती है। अब वो पूरी तरह नंगी थी और अमन के लण्ड को जैसे किसी लोलीपोप की तरह चूसे जा रही थी।
अमन-“अह्म्मह… साली मुझे भी तेरी चूत चाटनी है। ऐसे घूम जा…”
और रजिया 69 की पोजीशन में आ जाती है।
अमन-“तेरे माँ की चूत… कितनी चिकनी लग रही है, आज ये?”
रजिया-हाँ मेरे जानू, अपने बेटे के लिये आज ही सारे बाल निकाल दिए मैंने अह्म्मह… तुझे ऐसी ही चिकनी चूत चाहिए ना? गलप्प्प-गलप्प्प…”
अमन रजिया की चूत को चूमते हुए-“हाँ ऐसी ही चिकनी अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…”
दोनों माँ बेटे एक दूसरे की चूत और लण्ड को अंदर तक चाट रहे थे। अमन अपने दोनों हाथों से रजिया की नरम गाण्ड दबाने लगता है-“अह्म्मह… काट मत छिनाल अह्म्मह…”
आज अमन के मुँह से ऐसी गंदी गालियाँ सुनकर रजिया को और मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी चूत से आज रात का पहला पानी अमन के मुँह पे गिरने लगता है। जिसे अमन चाटता चला जाता है-“नमकीन पानी अह्म्मह… तेरी चूत तो बहुत मीठी है रजिया…”
रजिया-“हाँ आपकी तो है। अह्म्मह… मेरा बच्चा अपनी अम्मी की चूत को और चूसो बेटा अह्म्मह…”
अमन रजिया को अपने नीचे कर लेता है। और रजिया के दोनों पैर रजिया की छाती से चिपका देता है। जिससे रजिया की चूत सामने की तरफ आ जाती है। रजिया को थोड़ा दर्द होता है। पर चूत की आग के सामने ये दर्द कुछ भी नहीं था।
अमन-“रजिया आज तेरा बेटा तुझे रंडी की तरह चोदेगा। बोल चुदेगी मेरे रंडी बनकर?”
रजिया-“हाँ चुदूंगी अमन… अपने बेटे की रंडी हूँ मैं। चोदो मुझे अमन्न् अह्म्मह…”
अमन अपने लण्ड को रजिया की चूत पे टिकाकर जोरदार झटका अंदर मार देता है-“अह्म्मह… ले रंडी ले अह्म्मह…”
रजिया की सांस जैसे रुक गई थी। इतने जोर से इससे पहले अमन ने उसे कभी नहीं चोदा था। उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है-“अमन जी अह्म्मह… उंन्ह…”
अमन उसके मुँह पे हाथ रखकर दनादन अपना लण्ड उसकी चूत में पेलने लगता है– “चिल्ला मत रजिया, नहीं तो तेरी बेटी भी आ जायेगी चुदाने… साली अह्म्मह…”
अमन का लण्ड सीधा रजिया की बच्चेदानी के दीवार से टकरा रहा था जिससे रजिया के रोंगटे खड़े होने लगे थे-“उंह्म्मह… नहीं अमन… मेरी चूत फट जायेगी बेटा अह्म्मह… धीरे मार झटके अमन अह्म्मह…”
अमन-“तू ऐसे नहीं मानेगी…” वो साइड में पड़ी रजिया की नाइटी को रजिया के मुँह में ठूंस देता है, और पीछे से गांठ बांध देता है, जिससे रजिया की घुन-घुन की आवाज़ आ रही थी-“तेरी बहन को चोदूं, साली चिल्लाती है… ले अब्ब अह्म्मह…”
अमन-नहीं, अब ठीक है।
रजिया-“डाक्टर ने क्या कहा?” वो अमन के लण्ड को सहला रही थी। आज रजिया का दिल जमकर चुदाई का था। कुछ दिनों से उसकी चूत प्यासी थी। उसे पानी चाहिए था अमन का।
अमन-“अह्म्मह… धीरे कर छिनाल। डाक्टर ने कहा था कि इसे नरम जगह पर सुलाना और रात भर गीला रखना सूखने नहीं देना…”
रजिया-“ऐसी जगह कहाँ है?” वो अमन की आँखों में देख रही थी।
अमन उसे अपने से चिपकाते हुए-“तेरे नरम चूत है ना रजिया… वहीं रखूंगा…” और अमन रजिया की चुचियाँ मसलने लगता है।
रजिया-“उंह्म्मह… मुझे नहीं रखना इसे। अब तो इसे कुँवारी चूत मिलने वाली है। है ना…” और रजिया बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है।
अमन उसे पटक के बेड पे लेटा देता है, और खुद उसके ऊपर चढ़ जाता है-“तेरी बहन को चोदूं… नाटक करती है साली। नहीं चाहिए तो यहाँ क्यों आई है?” और अमन अपने हाथ से रजिया की चूत रगड़ देता है।
रजिया-“अह्म्मह… नहीं ना जी… बेटा अमन… उंह्म्मह…”
अमन-तेरे चूत गीली क्यों है। छिनाल नहीं चुदाना चाहती तो जा फिर।
रजिया अमन के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए-“कैसे चली जाऊँ? ये मेरा है, सबसे पहला हक मेरा है इसपे। कोई भी छिनाल आ जाए इसे मुझसे नहीं छीन सकती…” वो अमन के लण्ड को अपने नरम हाथों में मसल रही थी।
अमन-“हाँ मेरी जान, तेरा ही तो है। आज तो तुझे ऐसे चोदूंगा रजिया की तेरी चूत भी मुझसे पनाह माँगेगी…”
रजिया-“हाँ मैं भी रगड़ना चाहती हूँ तुम्हारे नीचे इसे। सुनिए, मुँह में डालिये ना…”
अमन रजिया के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर कर लेता है, और खुद नीचे लेट जाता है-“चल, ले साली…”
रजिया-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… गलप्प्प-गलप्प्प…” करके अपने मुँह का सलाइवा गिरा-गिरा के अमन का लण्ड चूसने लगती है। वो एक हाथ से अपनी नाइटी निकालकर फेंक देती है। अब वो पूरी तरह नंगी थी और अमन के लण्ड को जैसे किसी लोलीपोप की तरह चूसे जा रही थी।
अमन-“अह्म्मह… साली मुझे भी तेरी चूत चाटनी है। ऐसे घूम जा…”
और रजिया 69 की पोजीशन में आ जाती है।
अमन-“तेरे माँ की चूत… कितनी चिकनी लग रही है, आज ये?”
रजिया-हाँ मेरे जानू, अपने बेटे के लिये आज ही सारे बाल निकाल दिए मैंने अह्म्मह… तुझे ऐसी ही चिकनी चूत चाहिए ना? गलप्प्प-गलप्प्प…”
अमन रजिया की चूत को चूमते हुए-“हाँ ऐसी ही चिकनी अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…”
दोनों माँ बेटे एक दूसरे की चूत और लण्ड को अंदर तक चाट रहे थे। अमन अपने दोनों हाथों से रजिया की नरम गाण्ड दबाने लगता है-“अह्म्मह… काट मत छिनाल अह्म्मह…”
आज अमन के मुँह से ऐसी गंदी गालियाँ सुनकर रजिया को और मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी चूत से आज रात का पहला पानी अमन के मुँह पे गिरने लगता है। जिसे अमन चाटता चला जाता है-“नमकीन पानी अह्म्मह… तेरी चूत तो बहुत मीठी है रजिया…”
रजिया-“हाँ आपकी तो है। अह्म्मह… मेरा बच्चा अपनी अम्मी की चूत को और चूसो बेटा अह्म्मह…”
अमन रजिया को अपने नीचे कर लेता है। और रजिया के दोनों पैर रजिया की छाती से चिपका देता है। जिससे रजिया की चूत सामने की तरफ आ जाती है। रजिया को थोड़ा दर्द होता है। पर चूत की आग के सामने ये दर्द कुछ भी नहीं था।
अमन-“रजिया आज तेरा बेटा तुझे रंडी की तरह चोदेगा। बोल चुदेगी मेरे रंडी बनकर?”
रजिया-“हाँ चुदूंगी अमन… अपने बेटे की रंडी हूँ मैं। चोदो मुझे अमन्न् अह्म्मह…”
अमन अपने लण्ड को रजिया की चूत पे टिकाकर जोरदार झटका अंदर मार देता है-“अह्म्मह… ले रंडी ले अह्म्मह…”
रजिया की सांस जैसे रुक गई थी। इतने जोर से इससे पहले अमन ने उसे कभी नहीं चोदा था। उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है-“अमन जी अह्म्मह… उंन्ह…”
अमन उसके मुँह पे हाथ रखकर दनादन अपना लण्ड उसकी चूत में पेलने लगता है– “चिल्ला मत रजिया, नहीं तो तेरी बेटी भी आ जायेगी चुदाने… साली अह्म्मह…”
अमन का लण्ड सीधा रजिया की बच्चेदानी के दीवार से टकरा रहा था जिससे रजिया के रोंगटे खड़े होने लगे थे-“उंह्म्मह… नहीं अमन… मेरी चूत फट जायेगी बेटा अह्म्मह… धीरे मार झटके अमन अह्म्मह…”
अमन-“तू ऐसे नहीं मानेगी…” वो साइड में पड़ी रजिया की नाइटी को रजिया के मुँह में ठूंस देता है, और पीछे से गांठ बांध देता है, जिससे रजिया की घुन-घुन की आवाज़ आ रही थी-“तेरी बहन को चोदूं, साली चिल्लाती है… ले अब्ब अह्म्मह…”