सुबह 8:00 बजे-
पूरे दिन के आराम के बाद अमन की आँख खुल जाती है। उसके आजू-बाजू चारों औरतें नंगी पड़ी हुई थीं। उसे अपनी किस्मत पे बहुत फख्र हो रहा था। वो रजिया के बाल को सहलाता हुआ उसे जगा देता है, वो उसकी छाती पे सर रखे हुए सोई थी।
रजिया-“गुड मॉर्निंग जानू मुआह्म्मह…” उसके रसीले होंठ अमन के होंठों से मिल जाते हैं।
अमन गुज़रे हुए हालात और बातों को दोहराना नहीं चाहता था। वो हुआ वो पास्ट था और अमन प्रेजेंट में आकर फ्यूचर बनाना चाहता था। वो रजिया के होंठों को चूसता चला जाता है। जिससे रजिया को ये एहसास हो जाता है कि अमन अब उसका है। हमेशा-हमेशा के लिये दिल से अमन को खो देने वाला डर रात के अंधेरे की तरह चला गया था, और आने वाली सुबह एक नई उम्मीद की किरण लेकर इन सभी की जिंदगी में आई थी।
रजिया अपने महबूब की बाहों में मर जाना चाहती थी। उसका दिल वो कह रहा था वो उसे करना चाहती है। और अमन के लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर देती है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” ये चुसाई रोज की तरह की नहीं थी, इसमें वो खुशी भी थी वो रजिया के पेट में पल रही थी। अपने बेटे को बाप बनने की अद्भुत खुशी।
अमन आज रजिया को रोकने वाला नहीं था। वो आज बहुत खुश था और रजिया के बालों को सहलाता हुआ अपना लण्ड बड़े प्यार से रजिया के गले तक डाल रहा था-“अह्म्मह… आराम से सोना बेटा… आराम से कर मेरी जान, मेरा बच्चा है…”
अमन के मोहब्बत भरे शब्द वहाँ रजिया का दिल पिघला रहे थे। वहीं रेहाना और अनुम के साथ-साथ फ़िज़ा भी जाग चुकी थी, और वो सब भी अमन को चूमे जा रही थीं।
अमन रजिया को अपने नीचे ले लेता है, और उसकी आँखों में देखते हुए बड़े प्यार से कहता है-“नयी जिंदगी मुबारक हो मेरी जान… आज से मैं तुझसे वादा करता हूँ कि इन आँखों में कभी आँसू नहीं आएंगे, बस प्यार प्यार और सिर्फ़ प्यार होगा अह्म्मह… अह्म्मह…” और उसका मजबूत लण्ड रजिया की चूत की दीवारों में धंसता चला जाता है।
रजिया-“हाँ उंह्म्मह… जानू… मेरे जानू… चोदो अपनी जान को… मुझमें आपकी जान पनप रही है… चोदो रजिया को जान उंन्ह… मेरे बादशाह अह्म्मह… जम के चोदो अपनी रजिया को अह्म्मह…” वो चिल्लाती जा रही थी।
और अमन लगातार पिस्टन की तरह अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता चला जा रहा था-“अह्म्मह… हाँ रजिया हाँ… आज से तुम सब यहीं मेरे पास सोओगी… ऐसे ही चोदूंगा मैं तुम सबको… और सबसे ज्यादा मेरी रजिया को अह्म्मह…”
डोरबेल बजती है-टटंग-टोंग टटंग-टोंग
अनुम जानती थी कि इस वक्त दूध वाली लड़की आई होगी। वो अपने नाइटी पहनकर वहाँ से उठकर दूध लेने चली जाती है।
रेहाना और फ़िज़ा एक दूसरे से चिपकी रजिया और अमन की चुदाई देख रही थीं उनकी चूत में भी चीटियाँ रेंगने लगी थीं। रेहाना अपना मुँह फ़िज़ा की चूत पे लगा देती है, और फ़िज़ा रेहाना की चूत पे। दोनों माँ-बेटी अमन और रजिया की बाजू में 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चूत चाटने लगती हैं।
ये देखकर अमन और जोर-जोर से अपना लण्ड रजिया की चूत में पेलने लगता है।
जब अनुम दरवाजा खोलती है तो उसे झटका सा लगता है। सामने हीना और शीबा खड़ी थीं।
हीना-“अमन कहाँ है। कल रात बाजी का फोन आया की उसकी तबीयत खराब है…” और वो ये कहती हुई अमन के रूम की तरफ बढ़ जाती है।
अनुम बुरी तरह घबरा जाती है-“खाला आप यहाँ बैठो ना हाल में। मैं अभी अम्मी को बुलाकर लाती हूँ…”
पर हीना वो अमन की बीमारी की खबर सुनकर बेचैन हो गई थी, भागते हुए अमन के रूम में पहुँच जाती है। उसके पीछे शीबा भी आ जाती है। सामने का मंज़र उन दोनों का दिल दहलाने के लिये काफी था।
अमन के नीचे रजिया अपने दोनों पैर खोले अपने चूत में सटासट लण्ड ले रही थी। अमन की रफ़्तार काबिल-ए-तारीफ थी। इस जोश और जुनून से तो उसने हीना को भी नहीं चोदा था।
पर शीबा, वो अब तक कुँवारी थी और हर एक राज से अंजान थी। उसके लिये ये सब एक हारर फिल्म से कम नहीं था। उसकी होने वाली सास अपने सगे बेटे के नीचे चिल्ला-चिल्लाकर लण्ड का मज़ा ले रही थी, और बगल में चाची सास अपनी बेटी की चूत के दाने को काट-काटकर उसका पानी निकाल रही थी, उन दोनों की आँखें फटी की फटी रह गईं।
पीछे से अनुम रजिया को आवाज़ देती है-“अम्मी…”
अमन और रजिया उसे देखते हैं, और उन्हें यकीन नहीं होता की हीना और शीबा उनके सामने खड़ी हैं। पर उस वक्त अमन और रजिया चरम पे थे, दोनों उस चरम पोजीशन में थे कि अगर मौत का फरिश्ता भी उन्हें लेने आता तो वो जा नहीं सकते थे। एक चीख के बाद अमन अपना गाढ़ा-गाढ़ा पानी रजिया की चूत में उड़ेल देता है अह्म्मह… अह्म्मह।
उसके साथ-साथ रजिया भी चीखती हुई-“उंन्ह… उंह्म्मह… उंन्ह…” कहकर झड़ने लगती है।
शीबा के लिये ये सब और देखना मुमकिन नहीं था। वो भागती हुई अनुम के रूम में घुस जाती है, और जोर-जोर से रोने लगती है।
हीना अमन के पास आती है-“ह्म्मम्म्म्म… मुझे तो लगा था कि बाजी से कभी बात नहीं करोगे, पर यहाँ का मंज़र तो खूब है। भाई वाह… एक बेड पे चाची भी और अम्मी भी…” वो जैसे अमन को ताना दे रही थी।
अमन हीना का हाथ पकड़कर बेड पे लेटा देता है-“क्यूँ तेरी चूत में जलन हो रही है क्या?”
रजिया-“हाँ अमन, लगता है कि तुम्हारी खाला को भी कुछ चाहिए…”
हीना डर के मारे वहाँ से भागना चाहती है। पर अमन के कहने पर रेहाना, फ़िज़ा और रजिया, हीना को कसकर पकड़ लेती हैं। और अनुम अपनी खाला की शलवार उतारने लगती है।
हीना-“बेशमों छोड़ो मुझे… ये क्या बदतमीजी है अमन? रजिया बाजी, छुड़ाओ ना मुझे, आप भी इन सबका साथ दे रही हो उंह्म्मह…” वो पल भर में पूरी नंगी हो गई थी।
अमन अपना मुरझाया हुआ लण्ड हीना के मुँह में डालने लगता है-“अह्म्मह… लो चूसो सासू माँ…”
हीना-“नहीं, मुझे जाने दो प्लीज़्ज़ज्ज्ज… छोड़ो मुझे…”