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वो बाय्स चेज रूम में चला जाता है और उसके पीछे-पीछे ढेर सारी लड़कियाँ भी दौड़ती हैं।
जीशान जब बाय्स चेज रूम से बाहर निकलता है तो उसे लुबना उसका इंतजार करती हुई मिलती है। वो शायद बहुत गुस्से में थी। जैसे ही उसकी नजर जीशान पे पड़ती है वो उसपे टूट पड़ती है-“क्या ज़रूरत थी अपने कपड़े उतारने की? खुद को बहुत मसल-मैन समझते हो ना आप भाई?”
जीशान-“कपड़े कहाँ उतारे? मैंने सिर्फ़ टीशर्ट तो निकाला था वो भी दोस्तों के कहने पे…”
लुबना-“हाँ… वो जो कहेंगी, वैसे आप करोगे, है ना… कल वो कहेंगे यहाँ से कूद जाओ तो आप कूद जाओगे क्या?”
जीशान-“मैं तेरी तरह बेवकूफ़ थोड़ी हूँ । और तू क्यों इतनी गरम हो रही है? बाडी है तो दिखाउन्गा है ना?”
लुबना बुरा सा मुँह बनाते हुये-मुझे अच्छा नहीं लगता।
जीशान उसकी आँखों में झाँकते हुए कहता है-क्यूँ ?
लुबना के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। वो जीशान को घूर ते हुये अपनी क्लास में चली जाती है। तभी वहाँ रूबी और उसकी मोम डाक्टर सोनिया आ जाते हैं।
रूबी-जीशान।
जीशान पलटकर रूबी की तरफ देखता है-जी, कहें।
रूबी-“हाई… जी मेरा नाम रूबी ख़ान है और ये मेरी अम्मी डाक्टर सोनिया ख़ान हैं मैंने इसी साल एडमिशन लिया है। आपकी परफामेंस देखी तो आपको मुबारकबाद कहने चल आई…”
जीशान अपना हाथ रूबी की तरफ बढ़ाते हुये-“हेलो, मेरा नाम जीशान ख़ान है…”
डाक्टर सोनिया-बेटा, आपके फादर का क्या नाम है?
जीशान-अमन ख़ान।
डाक्टर सोनिया की आँखें मोटी हो जाती हैं-“मतलब आप अमन ख़ान जिनकी यहाँ गारमेंट्स की फॅक्टरी है, उनके साहबजादे हो?”
जीशान-बिल्कुल सही पहचाने आपने। आप मेरे अब्बू को जानते हैं?
डाक्टर सोनिया-“बहुत अच्छी तरह से। मेरा मतलब है काफी वक्त पहले जानती थी, आजकल कहाँ है, कोई खैर खबर नहीं …”
जीशान-जी वो बिल्कुल ठीक हैं।
डाक्टर सोनिया की नजरे जीशान से हट ही नहीं रही थी। वो तो जीशान को देखते ही पहचान गई थी। जीशान अपने अब्बू की कार्बन कापी जो था, वही आँखें, वही होंठ, वही बात करने का अंदाज, किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेने वाली वही मुस्कान।
रूबी-अम्मी चलें?
डाक्टर सोनिया-बेटा, अब मैं घर जाउन्गी। मुझे ज़क्लनिक भी जाना है। तुम कार लेकर आ जाना।
रूबी-तो आप घर कैसे जाएँगी?
डाक्टर सोनिया-मैं आटो से चले जाउन्गी।
जीशान-“एक्स क्यूज मी, बुरा ना मानें तो मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर देता हूँ । वैसे भी मुझे घर जाना था इफ यू डोन्ट माइंड…”
डाक्टर सोनिया-ओके।
रूबी कुछ बोलती उससे पहले ही सोनिया ने हाँ कह दी थी। वो तो चाहती भी यही थी कि जीशान से अकेले में कुछ बात करे। दोनों रूबी को बाइ कहकर कालेज के बाहर निकल जाते हैं।
जीशान कार में बैठते हुये-तो आंटी आपका घर कहाँ है?
सोनिया-“प्लीज़्ज़… तुम मुझे आंटी मत कहो। बहुत ओल्ड सा लगता है। अभी मेरी उमर ही क्या है?” दोनों हँसते हुये बातें करने लगते हैं और कार डाक्टर सोनिया के घर की तरफ बढ़ जाती है। कुछ ही पलों में वो दोनों एक दूसरे से काफी घुल मिल गये थे।
घर के सामने पहुँचकर डाक्टर सोनिया कार से बाहर उतर जाती है।
जीशान-अच्छा सोनिया जी, मैं चलता हूँ ।
सोनिया-ऐसे कैसे? पहल बार घर आए हो एक कप कोफी तो पीकर जाओ।
जीशान कार से उतर जाता है और दोनों घर के अंदर दाखिल हो जाते हैं। सोनिया कहती है-“तुम बैठो, मैं जरा चेज करके आती हूँ …”
जीशान इधर-उधर देखते हुई सोफे पे बैठ जाता है। घर काफी खूबसूरत था, अच्छी तरह सजा हुआ। कुछ देर बाद जब सोनिया काफी का कप लेकर वहाँ आई तो जीशान के होश उड़ गये। एक पतली सी नाइटी में वो अपनी गाण्ड मटकाते हुई चली आ रही थी, अंदर शायद कुछ भी नहीं पहना था।
जीशान जब बाय्स चेज रूम से बाहर निकलता है तो उसे लुबना उसका इंतजार करती हुई मिलती है। वो शायद बहुत गुस्से में थी। जैसे ही उसकी नजर जीशान पे पड़ती है वो उसपे टूट पड़ती है-“क्या ज़रूरत थी अपने कपड़े उतारने की? खुद को बहुत मसल-मैन समझते हो ना आप भाई?”
जीशान-“कपड़े कहाँ उतारे? मैंने सिर्फ़ टीशर्ट तो निकाला था वो भी दोस्तों के कहने पे…”
लुबना-“हाँ… वो जो कहेंगी, वैसे आप करोगे, है ना… कल वो कहेंगे यहाँ से कूद जाओ तो आप कूद जाओगे क्या?”
जीशान-“मैं तेरी तरह बेवकूफ़ थोड़ी हूँ । और तू क्यों इतनी गरम हो रही है? बाडी है तो दिखाउन्गा है ना?”
लुबना बुरा सा मुँह बनाते हुये-मुझे अच्छा नहीं लगता।
जीशान उसकी आँखों में झाँकते हुए कहता है-क्यूँ ?
लुबना के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। वो जीशान को घूर ते हुये अपनी क्लास में चली जाती है। तभी वहाँ रूबी और उसकी मोम डाक्टर सोनिया आ जाते हैं।
रूबी-जीशान।
जीशान पलटकर रूबी की तरफ देखता है-जी, कहें।
रूबी-“हाई… जी मेरा नाम रूबी ख़ान है और ये मेरी अम्मी डाक्टर सोनिया ख़ान हैं मैंने इसी साल एडमिशन लिया है। आपकी परफामेंस देखी तो आपको मुबारकबाद कहने चल आई…”
जीशान अपना हाथ रूबी की तरफ बढ़ाते हुये-“हेलो, मेरा नाम जीशान ख़ान है…”
डाक्टर सोनिया-बेटा, आपके फादर का क्या नाम है?
जीशान-अमन ख़ान।
डाक्टर सोनिया की आँखें मोटी हो जाती हैं-“मतलब आप अमन ख़ान जिनकी यहाँ गारमेंट्स की फॅक्टरी है, उनके साहबजादे हो?”
जीशान-बिल्कुल सही पहचाने आपने। आप मेरे अब्बू को जानते हैं?
डाक्टर सोनिया-“बहुत अच्छी तरह से। मेरा मतलब है काफी वक्त पहले जानती थी, आजकल कहाँ है, कोई खैर खबर नहीं …”
जीशान-जी वो बिल्कुल ठीक हैं।
डाक्टर सोनिया की नजरे जीशान से हट ही नहीं रही थी। वो तो जीशान को देखते ही पहचान गई थी। जीशान अपने अब्बू की कार्बन कापी जो था, वही आँखें, वही होंठ, वही बात करने का अंदाज, किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेने वाली वही मुस्कान।
रूबी-अम्मी चलें?
डाक्टर सोनिया-बेटा, अब मैं घर जाउन्गी। मुझे ज़क्लनिक भी जाना है। तुम कार लेकर आ जाना।
रूबी-तो आप घर कैसे जाएँगी?
डाक्टर सोनिया-मैं आटो से चले जाउन्गी।
जीशान-“एक्स क्यूज मी, बुरा ना मानें तो मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर देता हूँ । वैसे भी मुझे घर जाना था इफ यू डोन्ट माइंड…”
डाक्टर सोनिया-ओके।
रूबी कुछ बोलती उससे पहले ही सोनिया ने हाँ कह दी थी। वो तो चाहती भी यही थी कि जीशान से अकेले में कुछ बात करे। दोनों रूबी को बाइ कहकर कालेज के बाहर निकल जाते हैं।
जीशान कार में बैठते हुये-तो आंटी आपका घर कहाँ है?
सोनिया-“प्लीज़्ज़… तुम मुझे आंटी मत कहो। बहुत ओल्ड सा लगता है। अभी मेरी उमर ही क्या है?” दोनों हँसते हुये बातें करने लगते हैं और कार डाक्टर सोनिया के घर की तरफ बढ़ जाती है। कुछ ही पलों में वो दोनों एक दूसरे से काफी घुल मिल गये थे।
घर के सामने पहुँचकर डाक्टर सोनिया कार से बाहर उतर जाती है।
जीशान-अच्छा सोनिया जी, मैं चलता हूँ ।
सोनिया-ऐसे कैसे? पहल बार घर आए हो एक कप कोफी तो पीकर जाओ।
जीशान कार से उतर जाता है और दोनों घर के अंदर दाखिल हो जाते हैं। सोनिया कहती है-“तुम बैठो, मैं जरा चेज करके आती हूँ …”
जीशान इधर-उधर देखते हुई सोफे पे बैठ जाता है। घर काफी खूबसूरत था, अच्छी तरह सजा हुआ। कुछ देर बाद जब सोनिया काफी का कप लेकर वहाँ आई तो जीशान के होश उड़ गये। एक पतली सी नाइटी में वो अपनी गाण्ड मटकाते हुई चली आ रही थी, अंदर शायद कुछ भी नहीं पहना था।