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रज़िया के मुँह से बस यही निकलता है-“इतना बड़ाऽऽऽ?”
जीशान अभी भी चीख रहा था। रज़िया को जैसे होश आता है और वो काँपते हाथों से जीशान के लण्ड को पकड़ लेती है। रज़िया के हाथ में लेते ही जीशान अपने लण्ड को छोड़ देता है।
रज़िया-“कहाँ काटा? मुझे तो कुछ नहीं दिखाई दे रहा…” रज़िया की आँखें जीशान के लण्ड को हर तरफ से देखने लगती हैं। अपनी दोनों मुत्ठियों में लण्ड को पकड़कर जैसे रज़िया उसका साइज नापने की कोशिश कर रही थी।
जीशान-“मुझे काटा है और आप कुछ नहीं कर रह हो दादी …”
रज़िया-“मैं क्या?” वो जैसे ही बोलने के लिए मुँह खोलती है, जीशान अपने लण्ड को सीधा रज़िया के गले में उतार देता है-गलप्प्प गलप्प्प।
जीशान-“दादी बहुत तड़पाया है मुझे आपने अह्ह… मगर आज नहीं । आज मेरी रात है जो मैं आपके साथ गुजारना चाहता हूँ …”
रज़िया अपने मुँह से लण्ड निकालकर जोर-जोर से साँस लेने लगती है-“अह्ह… मुझे पता था त नाटक कर रहा है जीशान… मगर मैं भी इसे अपने मुँह में लेने के लिए तड़प गई थी गलप्प्प-गलप्प्प। मेरे अमन की याद दिला दिया तूने मुझे… गलप्प्प-गलप्प्प…”
जीशान को यकीन नहीं होता कि रज़िया भी वही चाहती थी, जो वो चाहता था। उसे तो लग रहा था कि उसे कई पापड़ बेलने पड़ेंगे। मगर रज़िया की बातों से साफ जाहिर हो रहा था कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी। जीशान अपनी लाई हुई वो नाइटी रज़िया के जिस्म से अलग कर देता है और रज़िया भी सिर्फ़ पैंटी में रह जाती है। रज़िया तो जैसे लण्ड छोड़ने के लिये तैयार ही नहीं थी।
जीशान-“अह्ह… दादी बस भी करो, पानी तुम्हारे मुँह में निकल जाएगा…”
रज़िया-“मुझे वही पीना है पहले। मैं जानती हूँ तेरा पहला पानी बहुत जल्दी निकल जाएगा, मगर दूसरी बार तू जल्दी ठंडा नहीं होगा गलप्प्प… मैं भी तो देखूं मेरे पोते के पानी में कितनी मिठास है गलप्प्प…”
जीशान सच में काँपने लगता है और झटके मारते हुई पानी अपनी दादी के मुँह में छोड़ने लगता है-“अह्ह… दादी अह्ह…”
रज़िया इस खेल की माहिर खिलाड़ी थी। वो पानी पीने के बाद फिर से जीशान के लण्ड पर मेहनत करने लगती है और उसे अपनी पैंटी निकालकर अपनी चूत दिखाते हुई उसके लण्ड को फिर से चूसने लगती है गलप्प्प-गलप्प्प। छोटा जीशान अपनी दादी की चूत को देखकर फिर से खड़ा होने लगता है, और फिर से अपने असल आकर में आ जाता है।
रज़िया बेड पर लेट जाती है-“चल आ जा…”
जीशान रज़िया को एक करवट लेटा देता है और पीछे से उसे चिपक जाता है।
रज़िया-“उम्ह्ह… अब डाल भी दे… तू भी अपनी रज़िया का मजा चख ले जीशान… तेरे अब्बू ने तो मुझे जवान किया था, अब तेरी बारी है मेरे लाल। कर दे अपनी रज़िया की चूत में तेरे लण्ड के धक्कों के बारिश अह्ह…"
जीशान अपने लण्ड को अपने दादी की चूत में डाल देता है-“दादी जीईई अह्ह… आपकी चूत अह्ह…”
रज़िया-“दादी नहीं , रज़िया जीशान… इस चूत में जो भी आया वो मेरा हो गया हमेशा-हमेशा के लिए… तेरे अब्बू ने मुझे चोदा, वो बेटे से शौहर बन गये। अब तू मेरा पोता इसमें आया है, आज से मैं तेरी दादी नहीं और तू मेरा पोता नहीं अह्ह… बस मैं तेरी गुलाम हूँ , जो करना है कर ले, जैसे करना है कर ले अह्ह… ये रज़िया अब मरते दम तक तुझसे चुदेगी राजा अह्ह… सच कहूँ तो इतनी गहराई तक तो अमन भी नहीं गया कभी उम्ह्ह…”
जीशान अपनी रज़िया को अपने लण्ड के लम्बाई बताने के लिए उसे अपने ऊपर बैठा देता है और लण्ड को और अंदर तक घुसाकर रज़िया को चोदने लगता है-
“रज़िया मेरी जान, मुझे पहले बोल देती तो मैं तुझे कब का चोद देता अह्ह…”
रज़िया-“उम्ह्ह… अब भी देर नहीं हुई… अमन ने मुझे वो तोहफा दिया है तेरी सूरत में उम्ह्ह… मैं भी तुझे पाने के लिए तड़प रही थी, बस अपने दिल के हाथों मजबूर थी बेटा अह्ह…”
अपनी रज़िया की चूत की गर्मी और पहली बार दादी को चोदने के जोश में जीशान का पानी दूसरी बार बाहर निकालने लगता है, और रज़िया की चूत पहली बार अपने जीशान के पानी से नहा लेती है। मगर दोनों जानते थे कि रात तो अभी जवान हुई है, अभी पूरी रात बाकी है, और ये रात रज़िया जीशान को सोने देने वाली नहीं थी। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये अपने रिश्ते को मुकम्मल करने लगते हैं। जीशान बहुत जल्दी दो बार झड़ चुका था। वो रज़िया के बगल में लेटकर लम्बी -लम्बी साँसे लेने लगता है।
रज़िया उसकी छाती पर के घने बालों में अपने उंगलियाँ डालकर उसके गाल को चूमने लगती है-“क्या बात है मेरा शेर तो बड़ी जल्दी थक गया है?”
जीशान रज़िया की तरफ देखता है-“थका नहीं हूँ , बस उत्तेजना में साँस फूल गई है…”
रज़िया-“कोई बात नहीं , मैं हूँ ना अपने इस जवान शेर को ऐसा ख़ूँख़ार बना दूँगी कि तेरी बीवी तुझसे पनाह माँगेगी…”
जीशान रज़िया को अपने ऊपर खींच लेता है, और दोनों हाथों से उसकी कमर को मसलने लगता है।
रज़िया-“आज तूने मुझे खुश कर दिया है जीशान… बोल तुझे क्या चाहिए? जो माँगेगा वो मैं तुझे दूँगी …”
जीशान-“सोच लो, जान भी माँग सकता हूँ ?”
रज़िया-“माँगकर तो देख? अगर नहीं दूँगी तो मेरा नाम रज़िया नहीं …”
जीशान रज़िया के हाथ में अपना लण्ड थमा देता है-“मुँह में लो इसे…”
रज़िया जीशान के लण्ड के पास बैठ जाती है और अपना सलाइवा उसके लण्ड पे गिराकर उसे मसलने लगती है। जीशान रज़िया को देखकर सोचने लगता है कि सही कहते है लोग कि मरना है तो अच्छे डाक्टर के पास मरो, और चोदना है तो पहले किसी बड़ी औरत को चोदो। रज़िया के हाथों में तो जैसे जादू था जीशान के लण्ड में इतने तेज़ी से जान आने लगती है।
रज़िया जीशान के लण्ड को देखकर मुश्कुरा देती है।
जीशान-क्या हुआ मेरी जान?
रज़िया-कुछ नहीं , आजकल के बच्चे भी ना बहुत जल्दी बड़े हो जाते हैं।
जीशान जोर से रज़िया के निपल्स को मरोड़ देता है और रज़िया अपनी चीख को छुपाने के लिए जीशान के लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगती है-गलप्प्प गलप्प्प।
जीशान-“अह्ह… दादी सच कहूँ आज तक किसी ने ऐसे मुँह में नहीं ल …”
रज़िया-“ओह्ह…” और अपने दाँतों से हल्के से जीशान के लण्ड को काट लेती है-“ऐसे कितनी चूतों में घुस चुका है ये?”
जीशान-“अह्ह… तेरी बेटी को चोदु , काट क्यों रही है?”
रज़िया-गलप्प्प-गलप्प्प।
जीशान के होंठ अपनी रज़िया की चूत को देखकर सूखने लगते हैं वो रज़िया की कमर अपनी तरफ कर लेता है और जैसे ही उसके मुँह के सामने रज़िया की चिकनी चूत और नरम गाण्ड आती है, वो भूखे भेड़िए की तरह उसपे अपना मुँह लगा देता है।
दोनों एक दूसरे की चूत और लण्ड को बुरी तरह चूसने लगते हैं। रज़िया अमन के साथ कई बार ऐसा कर चुकी थी। अमन उसकी गाण्ड को कई बार चाट चुका था, मगर आज उसकी गाण्ड में बेहद उतावलापन रज़िया महसूस कर रही थी। वो अक्सर अमन से कहती भी थी कि उसे चूत से ज्यादा गाण्ड में लेना पसंद है, मगर अमन चूत का भूका था।
पर आज जिस तरह से जीशान अपनी दादी की गाण्ड के पीछे पड़ा हुआ था, उससे रज़िया को समझते देर नहीं लगती कि जीशान उसकी हर ख्वाहिश को बिना बोले पूरे करेगा। जीशान रज़िया को कुतिया की तरह बनने को कहता है। रज़िया जैसे ही अपनी कमर को ऊपर उठाकर जीशान को दिखाती है, जीशान अपने उंगली को पहले अपने मुँह में लेकर गीला करता है, और फिर बिना रज़िया से कुछ कहे वो उंगली उसकी गाण्ड में डाल देता है।
रज़िया-“आह्ह… जीशान शन्न्न उन्ह…”
जीशान की वो उंगली इतनी तेज़ी से अंदर-बाहर होने लगती है कि रज़िया की चूत में पानी आते देर नहीं लगती और टप-टप करके उसकी चूत से चिकने पानी के की बूँदें बेड पर गिरने लगती हैं। रज़िया की गाण्ड चीख-चीख कर जीशान के लण्ड को बुला रही थी। रज़िया चुप थी। वो देखना चाहते थी कि जीशान क्या करता है?
अपने लण्ड को रज़िया की चूत से गीला करने के बाद जीशान उसे रज़िया के दोनों सुराखों पर घिसने लगता है।
रज़िया-“उन्ह… डाल भी दे अब आह्ह…”
जीशान-किसमें डालूँ रज़िया?
रज़िया-“उन्ह… जिसमें तेरे दिल कहे आज से हर सुराख तेरा है आह्ह…” रज़िया का दिल खुश हो जाता है क्योंकी जीशान ने भी वही सुराख चुना था जिसमें रज़िया उसका लण्ड लेना चाहती थी-“आह्ह… अजइईई आराम से ना आह्ह…”
रज़िया के आँखों के सामने अपने दोनों शौहर घूम जाते हैं। अमन और उसके अब्बू ने कभी रज़िया की इस बेरहमी के साथ गाण्ड नहीं मारी थी जिस अंदाज में जीशान रज़िया की गाण्ड मार रहा था।
जीशान रज़िया के बाल पकड़कर सटासट अपने लण्ड को उसकी गाण्ड में धूँसाते चला जा रहा था। रज़िया अपने मुँह में तकिया फँसाए अपनी चीखों को किसी तरह छुपा रही थी, मगर जीशान के झटके इतने तेज थे कि बार-बार उसका मुँह खुल जाता और वो अपने सिर को इधर-उधर पटक पटक के अपनी गाण्ड के दर्द को बर्दाश्त करने लगती
जीशान-“रज़िया, मैं जो माँगूंगा मुझे तू वो देगी ना? हाँ…”
रज़िया-“हाँ दूँगी दूँगी मेरे राजा आह्ह…”
जीशान-“मुझे सोफिया को चोदना है तेरे साथ एक बिस्तर पर पूरी नंगी करके आह्ह…”
रज़िया-“उन्ह… नहीं , उसे नहीं जीशान…”
जीशान-“क्या नहीं ? आह्ह…”
रज़िया की गाण्ड से पच-पच की आवाज़ें निकलने लगती हैं। चूत से लगातार पानी नीचे गिरने लगता है। उसे महसूस होने लगता है कि आज जीशान उसे जान से मार देगा।
जीशान-“अगर नहीं बोलेगी तो समझ ले ये आख़िरी बार इसमें गया है, आइन्दा नहीं जाएगा…”
रज़िया-“नहीं नहीं … ऐसा मत बोल्ल्ल्ल्ल बेटा, सोफिया क्या तू जिससे कहेगा मैं उसके सामने तुझसे चुदूँगी , बस अपने लण्ड को कभी दूर मत रखना मेरे से आह्ह…”
रज़िया जानती थी कि अगर उसने जीशान को मना भी किया तो जीशान उसकी बात मानेगा नहीं , और एक ना एक दिन वो सोफिया को ज़रूर चोदेगा। ये जानकर उसकी चूत और पनिया गई थी कि जीशान बहुत जल्दी माँ-बेटी को एक बिस्तर पर लेकर चोदेगा। वो रात रज़िया की एक हसीन तरीन रात साबित हुई। अपने पोते की बाहों में रज़िया को कई दिनों बाद बहुत सकून मिला था। अमन के जाने के बाद जो बिस्तर उसे काटने को दौड़ता था, आज उसी बिस्तर पे अमन का बेटा अपनी रज़िया को सकून पहुँचा रहा था। दोनों की आँखों से नींद गायब हो चुकी थी।
एक दूसरे के इतने करीब वो दोनों कभी नहीं आए थे और जब आए तो एक दूसरे से अलग होने को उनका दिल नहीं कर रहा था। जीशान सुबह के 4:00 बजे तक रज़िया को रूम में हर जगह चोदता रहा। आखिरकार, रज़िया को ही उसे कहना पड़ा कि जा जाकर सो जा वरना सुबह देर से उठेगा। रज़िया एक पेशेवर घुड़सवार की तरह अपने घोड़े को पहली ही रेस में थका देना नहीं चाहती थी। जीशान को वो लम्बी रेस का घोड़ा बनाना चाहती थी।