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अहसान complete

अपडेट-49

कुछ देर होंठ चूसने के बाद उसने मुझे अपने उपर से उठा दिया जिससे लंड बाहर निकल गया. मुझे समझ नही आया कि उसने लंड क्यो बाहर निकाल दिया इसलिए सवालिया नज़रों से उसकी तरफ देखने लगा. उसने एक नज़र मुझे मुस्कुरा कर देखा ऑर फिर वो भी बेड पर उठ कर बैठ गई ऑर मेरे देखते ही देखते अब वो किसी जानवर की तरह अपने दोनो हाथो ऑर दोनो घुटनो के बल बेड पर खड़ी हो गई. मैं उसको खड़ा देख रहा था कि अब वो क्या करती है. उसने अपनी गर्दन को पिछे घुमाया ऑर एक मुस्कान के साथ मुझे पिछे आने का इशारा किया. मैं मुस्कुरा कर उसके पिछे आ गया ऑर जल्दी से अपनी शर्ट-पेंट ऑर अंडरवेर को अपने जिस्म से आज़ाद किया. अब मैने अपना पूरा लंड पिछे से एक ही झटके मे उसकी चूत मे डाल दिया ऑर उसको कमर से पकड़ कर झटके मारने लगा अब वो बुलंद आवाज़ मे सस्सस्स ससस्स कर रही थी. कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद उसने मेरा एक हाथ अपनी कमर से हटाया ऑर अपने सिर पर रख दिया साथ मे मेरे हाथ मे अपने बाल पकड़ा दिए अब मैं समझ चुका था कि वो क्या चाहती है इसलिए मैने उसको बालो से पकड़ लिया ऑर तेज़-तेज़ झटके मारने लगा... उसकी ससस्स... ससस्स... अब आआहह ऊऊओ आायईयीई मे बदल चुकी थी पूरे कमर मे उसकी आवाज़ ऑर झटको की थप्प्प.... थप्प्प... की आवाज़ ही गूँज रही थी. अचानक उसको चोदते हुए मुझे याद आया कि फ़िज़ा को चोदते हुए भी मैने यही तस्वीर देखी थी इसलिए मैने अपना दूसरा हाथ जो उसकी कमर पर था उसकी गान्ड पर रखा ऑर एक ज़ोर दार थप्पड़ उसकी गान्ड पर मारा. उसने हैरानी से मेरी तरफ पलटकर देखा ऑर एक क़ातिलाना मुस्कान के साथ मुझे सिर हिला कर दुबारा मारने को कहा.

अब मैने एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए थे ऑर दूसरी हाथ से उसकी गान्ड पर थप्पड़ की बरसात कर रहा था कुछ ही देर मे वो दूसरी बार भी फारिग हो चुकी थी इसलिए हाफ्ते हुए वो बेड पर गिर गई थी. मैं भी उसके उपर ही लेटा हुआ था हम दोनो का जिस्म पसीने से नहाया हुआ था. कुछ देर मे जब उसकी साँस दुरुस्त हो गई तो मैने उसके उपर लेटे लेटे ही झटके मारने शुरू कर दिए इसलिए उसने उसी पोज़ीशन मे अपनी दोनो टांगे फैला ली ताकि लंड जड़ तक पूरा अंदर जा सके. इस पोज़ीशन मे मुझे ऑर रूबी दोनो को बेहद मज़ा आ रहा था इसलिए मैने तेज़ रफ़्तार से झटके लगाने शुरू कर दिया कुछ ही देर मे मैं भी अपनी मंज़िल के करीब पहुँच गया ऑर मेरे साथ ही रूबी तीसरी बार फिर से फारिग हो गई. मेरे लंड पूरे प्रेशर से उसकी चूत मे मेरा माल छोड़ रहा था. हम दोनो अब बुरी तरह थक चुके थे ऑर एक दूसरे के उपर पड़े अपनी साँस को दुरुस्त कर रहे थे. हम दोनो ही इतनी जबरदस्त चुदाई से इतना ज़्यादा थक चुके थे कि दोनो मे से किसी की भी कपड़े पहन ने कि हिम्मत नही थी इसलिए हम दोनो ऐसे ही एक चद्दर अपने उपर लेकर लेट गये. रूबी बहुत खुश थी ऑर मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी मैने उसको एक बार फिर से गले से लगा लिया. वो गले लगी हुई ही मेरे उपर आके लेट गई अब हम दोनो ही खामोश थे ऑर थके हुए थे इसलिए कुछ ही देर मे ही रूबी मेरे उपर ही सो गई मुझे गले लगाके ऑर मैं भी उसकी कमर पर हाथ फेरता हुआ जाने कब नींद की वादियो मे खो गया.

हम दोनो सुकून से सोए पड़े थे कि किसी ने आधा रात को हमारा दरवाज़ा खट-खाटाया जिससे रूबी की नींद खुल गई उसने फॉरन मुझे उठाया ऑर कपड़े पहनने का कहा मैने जल्दी मे सिर्फ़ पेंट पहनी ऑर दरवाज़ा खोलने चला गया. इतनी देर मे रूबी ने ज़मीन पर बिखरे अपने कपड़े उठाए ऑर बाथरूम मे भाग गई. मैं आँखें मलता हुआ दरवाज़ा खोला तो सामने रसूल ऑर मेरा ड्राइवर खड़े थे.

मैं : क्या है यार इतनी रात तुमको क्या काम पड़ गया, इतनी अच्छी नींद आ रही थी बेकार मे खराब कर दी.

रसूल : भाई बाबा की तबीयत बहुत खराब हो गई है वो आपको बुला रहे हैं.

ये बात सुन कर मेरी झटके से आँखें खुल गई ऑर मैं बिना कुछ बोले अंदर शर्ट पहन ने चला गया. तब तक रूबी भी कपड़े पहनकर बाहर आ चुकी थी.

रूबी : (दरवाज़े पर देखते हुए) कौन है बाहर शेरा....

मैं : रसूल है... बाबा की तबीयत खराब हो गई है इसलिए मुझे याद कर रहे हैं

रूबी : ओह्ह्ह.... मैं भी चलती हूँ आपके साथ.

मैं : नही तुम रहने दो मैं थोड़ी देर मे आ जाउन्गा तुम दरवाज़ा बंद करके आराम से सो जाओ

रूबी : कोई सीरीयस बात तो नही है ना

मैं : ये तो वहाँ जाके ही पता चलेगा.

रूबी : ठीक है... अगर मेरी ज़रूरत हो तो ड्राइवर को भेज देना.

मैं : (रूबी का सिर चूमते हुए) ठीक है अब तुम आराम करो ऑर सो जाना.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) हमम्म ठीक है.

उसके बाद मैं तेज़ कदमो के साथ घर से बाहर निकल गया ऑर रसूल के साथ गाड़ी मे बैठ कर जल्दी से अपने ठिकाने पर पहुँच गया. वहाँ लाला, गानी ऑर सूमा पहले से मोजूद थे. मैं जल्दी से जाके बाबा के पास बैठ गया.

बाबा : आ गया तू शेरा...

मैं : जी बाबा... आप आराम कीजिए मैं डॉक्टर से बात करके आता हूँ (डॉक्टर को देखते हुए) क्या हुआ है बाबा को?

बाबा : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा...

डॉक्टर : इनको साँस लेने मे तक़लीफ़ हो रही है

मैं : ये ठीक तो हो जाएँगे ना.... अगर आप कहे तो मैं शहर से ऑर डॉक्टर बुलवा लेता हूँ.

डॉक्टर : उसकी कोई ज़रूरत नही है आप ज़रा मेरे साथ आइए आप से बात करनी थी.

मैं : (डॉक्टर को कमरे से बाहर लेके जाते हुए) चलिए....

उसके बाद मैं ऑर डॉक्टर बाहर हॉल मे आ गये मेरे पिछे-पिछे लाला, गानी ऑर सूमा भी आ गये जबकि रसूल बाबा के पास ही बैठ गया.

मैं : कहिए डॉक्टर क्या बात है.

डॉक्टर : देखिए मैं आपको कोई झूठा दिलासा नही देना चाहता इसलिए आपको सच बता रहा हूँ. इनके बॉडी मे काफ़ी गोलियाँ लगी थी कुछ वक़्त पहले आपको तो पता ही होगा.

मैं : ये तो हम जानते हैं इसमे नयी बता क्या है.

डॉक्टर : शायद आपको पता नही है लेकिन 6 गोलियो मे से 5 गोलियाँ तो ऑपरेशन से निकाल दी थी लेकिन 1 गोली इनके दिल के पिछे चली गई थी अगर वो गोली निकलते तो उनकी जान को ख़तरा हो सकता था इसलिए डॉक्टर्स ने वो गोली नही निकाली अब इतने दिन से वो गोली वहाँ रहने की वजह से पूरी बॉडी मे ज़हर फैल गया है इसलिए अब इनका बचना बहुत मुश्किल है. माफ़ कीजिए लेकिन अब इनके पास अब ज़्यादा वक़्त नही है.

मैं : देखिए डॉक्टर साहब आप पैसे की फिकर मत कीजिए पानी की तरह पैसा बहा दूँगा लेकिन वो जो अंदर लेता है वो मेरे लिए मेरा बाप है उनको कैसे भी करके बचा लीजिए मैने आज तक किसी के सामने हाथ नही जोड़े लेकिन आज जोड़ रहा हूँ प्लज़्ज़्ज़्ज़.

डॉक्टर : सॉरी मैं कुछ नही कर सकता अब काफ़ी देर हो गई है.

मैं : अगर बाबा को कुछ हुआ तो तू भी नही बचेगा ये बात समझ ले... लाला ले जा . साले को ऑर इसको डॉक्टरी सीखा.

उसके बाद हम वापिस मायूस दिल के साथ बाबा के पास आके बैठ गये.

बाबा : क्या कहा डॉक्टर ने.

मैं : बाबा आप ठीक हो जाएँगे कुछ नही होगा

बाबा : (मुस्कुराते हुए) तुझे झूठ बोलना भी नही आता. किसको झूठ बोला रहा है शेरा मुझे तेरी रग-रग पता है. मैं जानता हूँ कि अब मेरा आखरी वक़्त आ गया है इसलिए अब जो मैं कहूँगा वो बहुत ध्यान से सुनना तुम सब.

मैं : (रोते हुए) ऐसा मत बोलो बाबा आप बहुत जल्द अच्छे हो जाओगे... एह रसूल फॉरन दूसरे डॉक्टर का इंतज़ाम कर.

रसूल : हाँ अभी जाता हूँ.

बाबा : उसकी कोई ज़रूरत नही है मेरे पास बैठो तुम सारे.

मैं : (बाबा का हाथ पकड़ कर उनके पास बैठ ते हुए ) जी बाबा हुकुम कीजिए.

बाबा : बेटा शेरा अब ये सब कारोबार ये सारे लोग सब तेरी ज़िम्मेदारी है मैं तेरे कंधो पर ये सब कुछ छोड़ कर जा रहा हूँ.

मैं : जी बाबा...

बाबा : लाला, रसूल, सूमा ऑर गानी आज से तेरे दोस्त नही भाई हैं इनका ख़याल तुझे रखना है बस्ती मे जो लोग हैं वो भी तेरे अपने हैं उनको कभी किसी चीज़ की कमी ना होने पाए.

मैं : जी बाबा....

बाबा : तुम चारो भी इसकी हर बात मानना जो ये कहेगा वो मेरा हुकुम समझ कर हर बात की तामील करना हमेशा इसका साथ देना. हमेशा इसके साथ वफ़ादार रहना.

रसूल, लाला, गानी ओर सूमा : जी बाबा.... हम हमेशा हर कदम पर शेरा के साथ हैं.

इतनी बात करके बाबा की साँस उखड़ने लगी ऑर मेरी आँखो के सामने आखरी कलमा पढ़ते हुए मुस्कुरकर वो दुनिया से रुखसत हो गये. हम उनके पास बैठे रात भर रोते रहे लेकिन अब कुछ भी नही हो सकता था. जो चला गया वो अब वापिस नही आ सकता था आज हम सब एक बार फिर से यतीम हो गये थे क्योंकि जिसने सारी उम्र हम को पाला था इस क़ाबिल बनाया था वो इंसान हम को छोड़ कर जा चुका था ऑर उनके जाने की वजह उपर वाला नही था बल्कि उनका ही बेटा छोटा था ये बात याद आते ही मेरा खून खोलने लगा. बाबा के पास बैठे तमाम लोग रो रहे थे लेकिन वो वक़्त रोने का नही खुद को संभालने का था इसलिए मैने अपनी आँख से आँसू सॉफ किए ऑर सब को होसला देने लगा ऑर चुप करवाने लगा. सुबह हमने उनका कफ़न दफ़न का इंतज़ाम किया ऑर उनको आखरी कदम देके रोते हुए वापिस आ गये उनके जनाज़े मे सारी बस्ती के लोग मोजूद थे एक-एक बड़ा ऑर एक-एक बुजुर्ग रो रहा था क्योंकि आज वो इंसान उनको छोड़ कर चला गया था जो हमेशा उनका ख़याल रखता था अब हर इंसान मुझे एक उम्मीद की नज़र से देख रहा था ऑर ये बात अब सच भी थी क्योंकि बाबा की जगह अब मैं था उनके सारे काम अब मुझे ही पूरे करने थे हमारे तमाम दुश्मनो को अब मुझे ही ख़तम करना था. अपनी इन्ही सोचो के साथ मैं वापिस ठिकाने पर आ गया ऑर अकेला उनके बेड के पास आके बैठ गया ऑर बाबा की सिखाई हुई बातो को याद करने लगा.

कुछ देर बाबा के कमरे मे गुज़ारने के बाद मैं वापिस लाला, सूमा, गानी ऑर रसूल के पास आके बैठ गया वो लोग अब भी बुरी तरह रो रहे थे इसलिए सबको चुप करवाता रहा. हमारे कुछ दिन ऐसे ही मातम मे गुज़रे. इस वजह से हम सबका ध्यान अपने-अपने धंधो से हट गया था जिसका फायेदा छोटे ने उठाया. एक दिन मुझे फोन पर मेरे आदमी ने खबर दी कि हमारे विदेश के तमाम क्लाइंट्स ने हमारा माल खरीदने से मना कर दिया है क्योंकि अब वो तमाम गन्स ऑर ड्रग्स का बिज़्नेस हमारे साथ नही बल्कि छोटे के साथ करेंगे. बाबा के जाने की वजह से हम वैसे ही टूट चुके थे उपर से छोटे ने मोक़े पर ऐसी चाल चल कर हम सब का बिज़्नेस भी ख़तम कर दिया था. मुझे जिस दिन ये खबर मिली मेरे दिल मे दबी हुई नफ़रत ऑर गुस्सा उफान पर पा पहुँच गये लेकिन इस वक़्त मैं जोश मे आके कोई कदम नही उठाना चाहता था इसलिए अपने दिमाग़ से काम लिया. मैं चाहे कुछ भी था लेकिन बाबा जो ज़िम्मेदारी मुझे सौंप कर गये थे उसे अब मुझे ही पूरा करना था. मैने फॉरन सारे गॅंग को खंडहर पर बुलाया. कुछ ही देर मे गॅंग के तमाम लोग जो हमारे साथ थे वो वहाँ मोजूद हो गये. मैने सबको एक नज़र देखा ऑर फिर जाके अपनी कुर्सी पर बैठ गया मेरे बैठने के बाद सब लोग अपनी-अपनी कुर्सियो पर जाके बैठ गये. उसके बाद मैने बोला शुरू किया.

मैं : मैने ये मीटिंग इसलिए बुलाई है कि जितने दिन हम सब मातम मे थे छोटे ने हमारा सारा बिज़्नेस टेक-ओवर कर लिया है हमारे तमाम विदेशी क्लाइंट्स ने हम से माल खरीदने से मना कर दिया है क्योंकि छोटा उनको हम से कम कीमत मे माल सप्लाइ कर रहा है.

रसूल : साला कमीना अपने बाप की मौत का भी लिहाज नही रख सका. मैं सोच भी नही सकता था छोटा इतना गिर सकता है.

मैं : रसूल जो इंसान अपने ही बाप पर गोली चला सकता है उसके घटियापन की हद का अंदाज़ा तुम तो क्या कोई भी नही लगा सकता.

सूमा : भाई हमारे लिए बाबा की जगह अब तुम ही हो... तुम बस हुकुम करो कि क्या करना है... हम सब लोग तुम्हारे एक इशारे पर मौत बन कर छोटे ऑर उसके गॅंग पर टूट पड़ेंगे ऑर आज ही साले का किस्सा ख़तम कर देंगे.

मैं : नही सूमा... छोटा अभी तक चुप है क्योंकि वो जानता है कि बाबा के मरते ही हम लोग उस पर पूरी ताक़त के साथ अटॅक करेंगे इसलिए जब हम वहाँ जाएँगे तो वो भी हमारा ही इंतज़ार कर रहा होगा. अगर हम अभी गये तो हम मे से कोई भी वापिस नही आएगा. बाबा ने सिखाया था अगर दुश्मन को ख़तम करना है तो उसकी ताक़त ख़तम करदो फिर दुश्मन भी ख़तम हो जाएगा. हम को इंतज़ार करना होगा सही वक़्त का.

रसूल : तो तुम क्या चाहते हो वो साला वहाँ बाबा की मौत का जशन मनाए हमारा सारा बिज़्नेस ले जाए ऑर हम यहाँ मातम मनाते रहे हिजड़ो की तरह.

मैं : सबसे पहले ये पता करो कि उसके पास माल आया कहाँ से है जहाँ तक मुझे पता है अफ़ीम के सारे खेत तो हमारे क़ब्ज़े मे है ओर दूसरा कौन है जो उसको माल दे रहा है.

लाला : मैने सब पता करवा लिया है उसका एक खास आदमी है पोलीस मे जो उसको हमारा ही पकड़ा हुआ माल सप्लाइ करता है.

मैं : कौन है वो आदमी...

लाला : पता नही कोई इनस्पेक्टर ख़ान करके है नारकोटिक्स डिपार्टमेंट मे उसकी अच्छी चलती है. साला हमारा पकड़ा हुआ माल ही उसको बेच रहा है ऑर छोटा वही माल आगे विदेशो मे बेच रहा है.

रसूल : यार हम को क्या वो साला किसी से भी माल खरीदे हमारे धंधे की तो ऐसी-तैसी हो गई ना अब आगे क्या करना है ये सोचो.

मैं : अगर ख़ान ख़तम हो गया तो समझो छोटे को माल मिलना भी बंद हो जाएगा इसलिए हम को पहले ख़ान को ख़तम करना होगा.

सूमा : शेरा सही कह रहा है साले इस ख़ान का ही कुछ करना पड़ेगा.

रसूल : शेरा भाई हुकुम करो मैं जाता हूँ इस ख़ान को ठोकने के लिए.

मैं : (उंगली से ना का इशारा करते हुए) तुमको क्या लगता है ख़ान अकेला होगा ऑर तुम को बोलेगा आओ भाई मैं तुम्हारे बाप का माल हूँ मुझे ठोक दो.... तुम मे से कोई कही नही जाएगा तुम लोग सिर्फ़ बचा हुआ धंधा सम्भालो ओर उसको ठोकने मैं खुद जाउन्गा.

लाला : ठीक है लेकिन उसके साथ पोलीस वाले भी तो होंगे ना तू उसको मारेगा कैसे.

मैं : फिकर मत कर वो पोलीस वाला अभी तक पैदा नही हुआ जो शेरा को ठोक सके उस हरामखोर को तो मैं ही मारूँगा उसका भी तोड़ मैने सोच लिया है ऑर इस काम के लिए मैं आज ही निकालूँगा.

रसूल : ठीक है जैसा तुम ठीक समझो.

Update-49

Kuch der honth chusne ke baad usne mujhe apne upar se utha diya jisse lund bahar nikal gaya. Mujhe samajh nahi aaya ki usne lund kyo bahar nikal diya isliye sawaliyaa nazaro se uski taraf dekhne laga. usne ek nazar mujhe muskura kar dekha or fir wo bhi bed par uth kar baith gai or mere dekhte hi dekhte ab wo kisi janwar ki tarah apne dono hatho or dono ghutno ke bal bed par khadi ho gai. main usko khada dekh raha tha ki ab wo kya karti hai. usne apni garden ko pichhe ghumaya or ek muskaan ke sath mujhe pichhe aane ka ishara kiya. Main muskura kar uske pichhe aa gaya or jaldi se apni shirt-pent or underwear ko apne jism se azaad kiya. ab maine apna poora lund pichhe se ek hi jhatke me uski chut me daal diya or usko kamar se pakad kar jhatke maarne laga ab wo buland awaaz me sssss ssss kar rahi thi. kuch der aise hi rehne ke baad usne mera ek hath apni kamar se hataya or apne sir par rakh diya sath me mere hath me apne baal pakda diye ab main samajh chuka tha ki wo kya chahti hai isliye maine usko baalo se pakad liya or tez-tez jhatke maarne laga... Uski ssss... ssss... ab Aaaahhh ooooohhh aaaayyiiiii me badal chuki thi poore kamar me uski awaz or jhatko ki thappp.... thappp... ki awaaz hi gunj rahi thi. Achanak usko chodte hue mujhe yaad aaya ki fiza ko chodte hue bhi maine yhi tasveer dekhi thi isliye maine apna dusra hath jo uski kamar par tha uski gaanD par rakha or ek jor daar thappad uski gaanD par maara. Usne herani se meri taraf palatkar dekha or ek qatilana muskaan ke sath mujhe sir hila kar dubara marne ko kaha.

Ab maine ek hath se uske baal pakde hue the or dusri hath se uski gaanD par thappad ki barsaat kar raha tha kuch hi der me wo dusri baar bhi farig ho chuki thi isliye haafte hue wo bed par gir gai thi. main bhi uske upar hi leta hua tha hum dono ka jism paseene se nahaya hua tha. kuch der me jab uski saans durust ho gai to maine uske upar lete hi jhatke maarne shuru kar diye isliye usne usi possition me apni dono taangey faila lee taaki lund jad tak poora andar jaa sake. Iss posstion me mujhe or rubi dono ko behad maza aa raha tha isliye maine tez raftaar se jhatke lagane shuru kar diya kuch hi der me main bhi apni manzil ke kareeb pohonch gaya or mere sath hi rubi teesri baar fir se farig ho gai. Mere lund poore pressure se uski chut me mera maal chod raha tha. hum dono ab buri tarah thak chuke the or ek dusre ke upar pade apni saans ko durust kar rahe the. Hum dono hi itni jabardast chudayi se itna jyaadaa thak chuke the ki dono me se kisi ki bhi kapde pehan ne ki himmat nahi thi isliye hum dono aise hi ek chaddar apne upar lekar let gaye. Rubi bahut khush thi or mujhe muskurakar dekh rahi thi maine usko ek baar fir se gale se laga liya. wo gale lagi hui hi mere upar aake let gai ab hum dono hi khamosh the or thake hue the isliye kuch hi der me hi rubi mere upar hi so gai mujhe gale lagake or main bhi uski kamar par hath ferta hua jane kab neend ki wadiyo me kho gaya.

Hum dono sukoon se soye pade the ki kisi ne adha raat ko hmara darwaza khat-khataya jisse rubi ki jaag khul gai usne forun mujhe uthaya or kapde pehanne ka kaha maine jaldi me sirf pent pehni or darwaza kholne chala gaya. Itni der me Rubi ne zameen par bikhre apne kapde uthaye or bathroom me bhaag gai. Main aankhen malta hua darwaza khola to samne rasool or mera driver khade the.

Main : kya hai yaar itni raat tumko kya kaam pad gaya, itni achhi neend aa rahi thi bekaar me kharab kar di.

Rasool : bhai baba ki tabiyat bahut kharab ho gai hai wo aapko bula rahe hain.

Ye baat sun kar meri jhatke se aankhen khul gai or main bine kuch bole andar shirt pehan ne chala gaya. Tab tak rubi bhi kapde pehankar bahar aa chuki thi.

Rubi : (Darwaaze par dekhte hue) koun hai bahar shera....

Main : rasool hai... baba ki tabiyat kharab ho gai hai isliye mujhe yaad kar rahe hain

Rubi : Ohhh.... main bhi chalti hun aapke sath.

Main : nahi tum rehne do main thodi der me aa jaunga tum darwaza band karke araam se so jao

Rubi : koi serious baat to nahi hai naa

Main : ye to wahan jake hi pata chalega.

Rubi : thik hai... Agar meri jarurat ho to driver ko bhej dena.

Main : (rubi ka sir chumte hue) thik hai ab tum araam karo or so jana.

Rubi : (muskurate hue) Hhhmmm thik hai.

Uske baad main tez kadmo ke sath ghar se bahar nikal gaya or rasool ke sath gaadi me baith kar jaldi se apne thikane par pohonch gaya. Wahan lala, gaani or sooma pehle se mojud the. Main jaldi se jake baba ke pass baith gaya.

Baba : aa gaya tu shera...

Main : ji baba... aap araam kijiye main doctor se baat karke aata hun (Doctor ko dekhte hue) kya hua hai baba ko?

Baba : (haa me sir hilate hue) Achhaa...

Doctor : inko saans lene me taqleef ho rahi hai

Main : ye thik to ho jayenge naa.... Agar aap kahe to main shehar se or doctor bulwa leta hun.

Doctor : uski koi jarurat nahi hai ap zra mere sath aayiye aap se baat karni thi.

Main : (Doctor ko kamre se bahar leke jate hue) chaliye....

Uske baad main or doctor bahar hall me aa gaye mere pichhe-pichhe lala, Gaani or sooma bhi aa gaye jabki rasool baba ke pass hi baith gaya.

Main : kahiye doctor kya baat hai.

Doctor : dekhiye main aapko koi jhootha dilasa nahi dena chahta isliye apko sach bata raha hun. Inke body me kaafi goliyaan lagi thi kuch waqt pehle aapko to pata hi hoga.

Main : ye to hum jante hain isme nayi bata kya hai.

Doctor : shayad aapko pata nahi hai lekin 6 goliyo me se 5 goliyaan to operation se nikaal di thi lekin 1 goli inke dil ke pichhe chali gai thi agar wo goli nikalte to unki jaan ko khatra ho sakta tha isliye doctors ne wo goli nahi nikaali ab itne din se wo goli wahan rehne ki wajah se poori body me zehar fail gaya hai isliye ab inka bachna bahut mushkil hai. Maaf kijiye lekin ab inke pass ab jyaadaa waqt nahi hai.

Main : dekhiye doctor sahab aap paise ki fikar mat kijiye paani ki tarah paisa baha dunga lekin wo jo andar leta hai wo mere liye mera baap hai unko kaise bhi karke bacha lijiye maine aaj tak kisi ke samne hath nahi jode lekin aaj jod raha hun plzzzz.

Doctor : sorry main kuch nahi kar sakta ab kaafi der ho gai hai.

Main : agar baba ko kuch hua to tu bhi nahi bachega ye baat samajh le... Eh lala le jaa iss sale ko or isko doctori seekha.

Uske baad hum wapis mayus dil ke sath baba ke pass aake baith gaye.

Baba : kya kaha doctor ne.

Main : baba aap thik ho jayenge kuch nahi hoga

Baba : (muskurate hue) tujhe jhooth bolna bhi nahi aata. Kisko jhooth bola raha hai shera mujhe teri rag-rag pata hai. Main janta hun ki ab mera akhri waqt aa gaya hai isliye ab jo main kahunga wo bahut dhyaan se sunna tum sab.

Main : (rote hue) aisa mat bolo baba aap bahut jald achhe ho jaoge... Eh rasool foran dusre doctor ka intezaam kar.

Rasool : haa abhi jata hun.

Baba : uski koi jarurat nahi hai mere pass baitho tum sare.

Main : (baba ka hath pakad kar unke pass baith te hue ) ji baba hukum kijiye.

Baba : beta shera ab ye sab karobaar ye sare log sab teri jimmedaari hai main tere kandho par ye sab kuch chod kar jaa raha hun.

Main : ji baba...

Baba : lala, rasool, Sooma or gaani aaj se tere dost nahi bhai hain inka khayaal tujhe rakhna hai basti me jo log hain wo bhi tere apne hain unko kabhi kisi chij ki kami na hone paye.

Main : ji baba....

Baba : tum chaaro bhi iski har baat manna jo ye kahega wo mera hukum samajh kar har baat ki tameel karna hamesha iska sath dena. Hamesha iske sath waffadar rehna.

Rasool, lala, gaani or sooma : ji baba.... Hum hamesha har kadam par shera ke sath hain.

Itni baat karke baba ki saans ukhadne lagi or meri aankho ke samne aakhri kalma padhte hue muskurakar wo duniya se rukhsat ho gaye. Hum unke pass baithe raat bhar rote rahe lekin ab kuch bhi nahi ho sakta tha. Jo chala gaya wo ab wapis nahi aa sakta tha aaj hum sab ek baar fir se yateem ho gaye the kyonki jisne sari umer ham ko pala tha iss qabil banaya tha wo insaan ham ko chod kar jaa chuka tha or unke jana ki wajah upar wala nahi tha balki unka hi beta chhota tha ye baat yaad aate hi mera khun kholne laga. Baba ke pass baithe tamaam log rou rahe the lekin wo waqt rone ka nahi khud ko sambhalne ka tha isliye maine apni aankh se aansu saaf kiye or sab ko hosla dene laga or chup karwane laga. subah hamane unka kafan dafan ka intezaam kiya or unko aakhri kadam deke rote hue wapis aa gaye unke janaze me sari basti ke log mojud the ek-ek bada or ek-ek bujurg rou raha tha kyonki aaj wo insaan unko chod kar chala gaya tha jo hamesha unka khayaal rakhta tha ab har insaan mujhe ek ummeed ki nazar se dekh raha tha or ye baat ab sach bi thi kyonki baba ki jagah ab main tha unke sare kaam ab mujhe hi poore karne the hamaare tamaam dushmano ko ab mujhe hi khatam karna tha. Apni inhi socho ke sath main wapis thikane par aa gaye or akaila unke bed ke pass aake baith gaya or baba ki sikhayi hui baato ko yaad karne laga.

Kuch der baba ke kamre me guzarne ke baad main wapis lala, sooma, gaani or rasool ke pass aake baith gaya wo log ab bhi buri tarah rou rahe the isliye sabko chup karwata raha. Hamaare kuch din aise hi maatam me guzre. Iss wajah se hum sabka dhyaan apne-apne dhandho se hat gaya tha jiska phayeda chhote ne uthaya. ek din mujhe phone par mere aadmi ne khabar di ki hamaare videsh ke tamaam clients ne hmara maal khareedne se mana kar diya hai kyonki ab wo tamaam guns or druggs ka business hamaare sath nahi balki chhote ke sath karenge. Baba ke jane ki wajah se hum waise hi toot chuke the upar se chhote ne moqe par aisi chaal chal kar hum sab ka business bhi khatam kar diya tha. Mujhe jis din ye khabar mili mere dil me dabi hui nafrat or gussa ufaan par pohonch gaya lekin iss waqt main josh me aake koi kadam nahi uthana chahta tha isliye apne dimaag se kaam liya. Main chahe kuch bhi tha lekin baba jo jimmedari mujhe sompkar gaye the usse ab mujhe hi poora karna tha. Maine foran sab gang ko khandhar par bulaya. Kuch hi der me gang ke tamaam log jo hamaare sath the wo wahan mojud ho gaye. Maine sabko ek nazar dekha or phir jake apni kursi par baith gaya Mere baithne ke baad sab log apni-apni kursiyo par jake baith gaye. Uske baad maine bola shuru kiya.

Main : maine ye meeting isliye bulayi hai ki jitne din hum sab maatam me the chhote ne hmara sara business take-over kar liya hai hamaare tamam videshi clients ne humse maal khareedne se mana kar diya hai kyonki chhota unko humse kam keemat me maal supply kar raha hai.

Rasool : sala kameena apne baap ki maut ka bhi lehaaz nahi rakh saka. main soch bhi nahi sakta tha chhota itna gir sakta hai.

Main : rasool jo insaan apne hi baap par goli chala sakta hai uske ghatiyapan ki hadd ka andaza tum to kya koi bhi nahi laga sakta.

Sooma : Bhai hamaare liye baba ki jagah ab tum hi ho... Tum bas hukum karo ki kya karna hai... hum sab log tumhare ek ishare par maut ban kar chhote or uske gang par toot padenge or aaj hi sale ka kissa khatam kar denge.

Main : Nahi sooma... chhota abhi tak chup hai kyonki wo janta hai ki baba ke marte hi hum log uss par poori taqat ke sath attack karenge isliye jab hum wahan jayenge to wo bhi hmara hi intzaar kar raha hoga. Agar hum abhi gaye to hum me se koi bhi wapis nahi aayega. baba ne sikhaya tha agar dushman ko khatam karna hai to uski taqat khatam kardo phir dushman bhi khatam ho jayega. Ham ko intzaar karna hoga sahi waqt ka.

Rasool : To tum kya chahte ho wo sala wahan baba ki maut ka jashan manaye hmara sara business le jaye or hum yahan maatam manate rahe hijado ki tarah.

Main : sabse pehle ye pata karo ki uske paas maal aya kaha se hai jahan tak mujhe pata hai afeem ke sare khet to hamaare kabze me hai or dusra koun hai jo usko maal de raha hai.

Lala : Maine sab pata karwa liya hai uska ek khas aadmi hai police me jo usko hmara hi pakda hua maal supply karta hai.

Main : kaun hai wo aadmi...

Lala : pata nahi koi Inspector khan karke hai Narcotics department me uski achhi chalti hai. Sala hmara pakda hua maal hi usko bech raha hai or chhota wahi maal aagey videsho me bech raha hai.

Rasool : Yaar ham ko kya wo sala kisi se bhi maal khareede hamaare dhandhe ki to aisi-taisi ho gai na ab aagey kya karna hai ye socho.

Main : Agar khan khatam ho gaya to samjho chhote ko maal milna bhi band ho jayega isliye ham ko pehle khan ko khatam karna hoga.

Sooma : shera sahi keh raha hai sale iss khan ka hi kuch karna padega.

Rasool : shera bhai hukum karo main jata hun iss khan ko thokne ke liye.

Main : (ungali se naa ka ishara karte hue) Tumko kya lagta hai khan akela hoga or tum ko bolega aao bhai main tumhare baap ka maal hun mujhe thok do.... tum me se koi kahi nahi jayega tum log sirf bacha hua dhandha sambhalo or usko thokne main khud jaunga.

Lala : Thik hai lekin uske sath police wale bhi to honge naa tu usko maarega kaise.

Main : fikar mat kar wo policewala abhi tak paida nahi hua jo shera ko thok sake uss haramkhor ko to main hi marunga uska bhi tod maine soch liya hai or iss kaam ke liye main aaj hi nikalunga.

Rasool : thik hai jaisa tum thik samjho.

 
अपडेट-50

उसके बाद कुछ देर ऐसे ही बाते चलती रही फिर आख़िर तय ये हुआ कि बाकी सब लोग धंधा संभालेंगे ऑर मैं ख़ान को मारने जाउन्गा. उसके बाद मैने मीटिंग बर्खास्त की ऑर सब को उनके काम पर लगा दिया ऑर खुद अपनी कार मे बैठकर घर आ गया जहाँ मैने जल्दी से कपड़े पॅक करने लगा. अचानक मुझे रूबी का ख्याल आया जो घर मे नही थी उसको बताए बिना जाना मुझे सही नही लगा इसलिए मैने सोचा जाते हुए उससे भी मिल कर जाउन्गा मैं जानता था वो दिन भर कहाँ होती है. इसलिए मैने जल्दी से अपने कपड़े बॅग मे डाले ऑर साथ मे कुछ हथियार ऑर पैसे भी रख लिए. फिर मैं घर के बाहर आ गया जहाँ गॅंग के तमाम लोग मोजूद थे ऑर मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.

रसूल : ये क्या शेरा तुम अभी ही जा रहे हो.

मैं : हां मुझे अभी जाना है लेकिन पहले मैं रूबी से मिलना चाहता हूँ उसके बाद जाउन्गा.

लाला : ठीक है फिर हम भी तुम्हारे साथ ही चलते हैं.

उसके बाद मैं अपनी गाड़ी मे आके बैठ गया ऑर मेरे पिछे तमाम गाडियो का क़ाफ़िला चल पड़ा. कुछ ही देर मे हम यतीम खाने के बाहर थे. वहाँ कुछ बच्चे इधर-उधर घूम रहे थे. मैने बच्चो को देख कर बाकी सब लोगो को बाहर ही रुकने का इशारा किया ऑर खुद यतीम खाने के अंदर चला गया जहाँ बाहर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था वहाँ बहुत सी लड़कियाँ ऑर औरते बच्चों को पढ़ा रही थी. मैने चारो तरफ नज़र घुमाई तो एक पेड़ के नीचे कुछ बच्चों को पढ़ाती हुई मुझे रूबी नज़र आई. रूबी को देखकर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उस वक़्त उसका चेहरा ब्लॅकबोर्ड की तरफ था मैं चुप चाप जाके बच्चों के साथ बैठ गया जिस पर सब बच्चे मुझे देख कर हँसने लगे. रूबी बच्चों को कुछ पढ़ा रही थी ऑर मैं बस खामोशी से बैठा उसको देख रहा था तभी उसकी आवाज़ आई.

रूबी : सबको समझ आ गया ना.

मैं : मुझे समझ नही आया मेडम जी...

रूबी : (पलट ते हुए) शेरा तुम यहाँ....

मैं : मेडम क्वेस्चन मुझे समझ नही आया दुबारा समझाओ.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) आप ऑफीस मे चलिए मैं अभी आती हूँ.

मैं : (सल्यूट करते हुए) यस मेडम....

मेरी इस हरकत पर सब बच्चे हँसने लग गये ऑर रूबी मुझे आँखें दिखाने लग गई इसलिए मैं चुप चाप वहाँ से उठा ऑर जाके उसके ऑफीस मे बैठ गया ऑफीस मे घुसते ही सामने बाबा की तस्वीर लगी थी मैं उनके नूरानी चेहरे को देख रहा था तभी अचानक एक हाथ मेरे कंधे पर आके रुक गया साथ ही एक मीठी सी आवाज़ मेरे कानो से टकराई.

रूबी : आज क्या बात है सूरज कहीं ग़लत साइड से तो नही निकल गया जो तुमने यहाँ दर्शन दे दिए.

मैं : ऐसी कोई बात नही है मैं बस तुमसे मिलने के लिए आया था.

रूबी : (मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठते हुए) नियत तो ठीक है जनाब की... आज दिन मे भी बड़ा रोमेंटिक मूड बना हुआ है.

मैं : (हँसते हुए) नही यार मूड वाली कोई बात नही आक्च्युयली मैं कुछ दिन के लिए बाहर जा रहा था सोचा तुमसे मिल कर नही जाउन्गा तो तुमको बुरा लगेगा.

रूबी : (अपनी कुर्सी से खड़ी होके मेरे गाल खिचते हुए) हाए मेरी जान बड़ा ख़याल रखने लग गये हो मेरा.

मैं : (अपने गाल छुड़ाते हुए) क्या कर रही हो यार बच्चे देखेंगे तो क्या सोचेंगे.

रूबी : आए... हाए तुम कब्से लोगो की परवाह करने लग गये.

मैं : ज़्यादा शहद मत टपकाओ ऑर मेरी बात सुनो तुमको हर वक़्त मज़ाक ही सूझता है.

रूबी : अच्छा मुझे मज़ाक सूझता है... ऑर वो जो तुम बाहर करके आए हो वो बड़ी सयानी हरकत थी ना यस मेडम...यस मेडम..... तब बच्चों ने नही देखा होगा क्या.

मैं : (कान पकड़ते हुए) अच्छा बाबा ग़लती हो गई माफ़ कर दो आगे से नही करूँगा.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) थ्ट्स लाइक आ गुड बॉय.... अच्छा बताओ यहाँ कैसे आना हुआ.

मैं : मैं कुछ दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ

रूबी : (उदास होते हुए) फिर से जा रहे हो.

मैं : अर्रे मैं हमेशा के लिए नही जा रहा बस कुछ दिन की बात है फिर वापिस आ जाउन्गा.

रूबी : मोबाइल साथ लेके जा रहे हो ना.

मैं : हम्म... क्यो...

रूबी : ठीक है जल्दी वापिस आ जाना ऑर अपना ख़याल रखना ऑर मुझसे रोज़ बात करनी पड़ेगी.

मैं : (हाथ जोड़ते हुए) ऑर कोई हुकुम सरकार.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) अब जल्दी से इधर आओ ऑर पप्पी दो फिर जाओ... बस इतना ही....

मैं : (हैरान होते हुए) अभी.... यहाँ पर....

रूबी : क्यो यहाँ कोई परेशानी है क्या.

मैं : नही परेशानी तो नही है लेकिन कोई बच्चा देख सकता है ना...

रूबी : (अपनी कुर्सी से उठ ते हुए) एक मिंट रूको...

रूबी ने जल्दी से जाके दोनो पर्दो को दरवाज़े के आगे कर दिया जिससे बाहर से कोई भी हम को नही देख सकता था फिर वो जल्दी से आके मेरी गोद मे बैठ गई ऑर अपनी दोनो बाजू मेरे गले मे हार की तरह डाल ली.

मैं : इरादा क्या है सरकार.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) कुछ खास नही तुम्हारी पप्पी लेने का दिल कर रहा है.

मैं : मुझसे तो ऐसे पूछ रही हो जैसे मैं नही कर दूँगा तो नही लोगि....

मेरे इतना कहते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों से जोड़ दिए ऑर एक दिल-क़श अंदाज़ से मेरे होंठ चूसने लगी मैने भी अपनी दोनो बाजू उसकी कमर मे लपेट ली ऑर उसको अपने साथ अच्छी तरह चिपका लिया जिससे उसके मम्मे मुझे मेरी छाती पर चुभने लगे. हम दोनो बड़ी शिद्दत से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे ऑर हम दोनो की मज़े से आँखें बंद थी.

अचानक मुझे ख़याल आया कि सब लोग बाहर मेरा इंतज़ार कर रहे हैं इसलिए ना चाहते हुए भी मैने रूबी को खुद से अलग किया. रूबी कुछ देर वैसे ही मेरे गले मे अपनी दोनो बाजू डाले मेरी छाती पर सिर रख कर बैठी रही. फिर वो मेरे उपर से उठ गई ऑर साइड पर खड़ी हो गई. उसके बाद मैं अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ ऑर एक बार फिर से रूबी को गले से लगा लिया उसके बाद हम दोनो अलग हुए ऑर बाहर आ गये जहाँ बच्चे इधर-उधर भाग रहे थे. रूबी ने सबको डाँट कर उनकी जगह पर वापिस भेज दिया ऑर खुद मेरे साथ यतीम खाने के गेट तक बाहर आ गई जहाँ पर सब लोग मेरा इंतज़ार कर रहे थे. उसके बाद सबसे गले मिलने के बाद सबको उनके हिस्से का काम दुबारा याद करवा दिया फिर आख़िर मे मैं रूबी के पास आया ऑर उसको भी गले लगा लिया.

रूबी : जल्दी आ जाना मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी.

मैं : हमम्म अपना ख़याल रखना.

रूबी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) तुम भी अपना ख़याल रखना ऑर मुझे फोन करते रहना.

मैं : (मुस्कुराते हुए) ठीक है.

उसके बाद सबको अलविदा कह कर मैं वापिस अपनी गाड़ी मे आके बैठ गया ऑर अपने सफ़र के लिए रवाना हो गया. रूबी गेट पर खड़ी मुझे जाता हुआ देखती रही. आज इतने वक़्त के बाद मैं वापिस उसी जगह जा रहा था जहाँ मुझे नयी जिंदगी मिली थी. मुझे अपने गाँव गये पूरे सवा साल हो चुके थे ऑर इन सवा सालो मे जाने क्या-क्या बदल गया होगा. मैं तेज़ रफ़्तार से गाड़ी भगा रहा था साथ मे बाबा, फ़िज़ा, नाज़ी ऑर हीना के बारे मे भी सोच रहा था जाने वो लोग मेरे बिना कैसे होंगे. रास्ता लंबा था ऑर वक़्त था जो बीतने का नाम ही नही ले रहा था एक-एक पल मेरे लिए एक सदी जैसा हो गया था. मैं गाड़ी भी चला रहा था ऑर अपनी बीती हुई जिंदगी को भी याद कर रहा था. अचानक मेरी नज़र उसी पेट्रोल पंप पर पड़ी जिस पेट्रोल पंप से मैने पेट्रोल भरवाया था ऑर जब मैं घायल था तो वहाँ पर खड़े लड़के ने मेरी मदद करने की कोशिश भी की थी. वहाँ कुछ लोग तोड़-फोड़ कर रहे थे. मैने उन लोगो को देख कर गाड़ी वही रोक दी ऑर गाड़ी से बाहर निकल आया. वहाँ पर कुछ लोग उस लड़के को बुरी तरह मार रहे थे. मैं तेज़ कदमो के साथ वहाँ गया ऑर जाते ही सामने खड़े हुए आदमी को लात मारी जो उस लड़के को बुरी तरह पीट रहा था मेरी लात खाते ही वो दूर जाके ज़मीन पर गिर गया.

आदमी : कौन है ओये तू...

मैं : क्यो मार रहे हो इस लड़के को....

आदमी : साले ने हम से ब्याज पर पैसा लिया था अपनी माँ के इलाज के लिए अब इसकी माँ को मरे को इतना वक़्त हो गया है ऑर अभी तक हमारा पैसा वापिस नही किया.

मैं : कितना पैसा है...

आदमी : 20,000 ऑर उपर से 15,000 ब्याज.

मैने बिना कोई सवाल जवाब किए अपने जेब मे हाथ डाला ऑर 50,000 रुपये के नोट का बंडल उस आदमी के मुँह पर फैंक दिया.

मैं : (अपनी जेब से गन निकाल कर उसको लोड करते हुए) अब दफ़ा हो जाओ यहाँ से नही तो तुम मे से कोई भी अपनी टाँगो पर चल कर यहाँ से नही जाएगा.

आदमी : बादशाहो हम को हमारे पैसे मिल गये अब हमने इससे क्या लेना है... शुक्रिया.

मैं : (उंगली से जाने का इशारा करते हुए) दफ़ा हो जाओ.

उसके बाद मैने नीचे पड़े उस लड़के को उठाया ऑर पेट्रोल पंप के अंदर ले गया.

मैं : (घड़े से पानी भरते हुए) तुम ठीक हो.

लड़का : जी साहब मैं ठीक हूँ... मुझे समझ नही आ रहा आपका ये अहसान मैं कैसे उतारूँगा.

मैं : मैने तुम पर कोई अहसान नही किया यही समझ लो तुम्हारी अम्मी ने तुम्हारे लिए पैसे भेजे थे.

लड़का : शुक्रिया साहब.

मैं : (लड़के को पानी देते हुए) क्या नाम है तुम्हारा.

लड़का : (पानी पीते हुए) जी... रुस्तम....

मैं : एक बात समझ नही आई तुम्हारा तो ये पेट्रोल पंप है ना फिर तुम्हारे पास पैसे की क्या कमी है.

लड़का : साहब ये पेट्रोल पंप मेरा नही शेरा भाई जान का है मैं तो यहाँ मुलाज़िम हूँ.

मैं : (हैरान होते हुए) क्या शेरा का है ये पेट्रोल पंप.

लड़का : जी साहब पहले शीक साहब का होता था लेकिन आज कल इस पेट्रोल पंप के मैल्क शेरा भाई जान हैं.

मैं : (मुस्कुराते हुए) तुमने देखा है शेरा को.

रुस्तम : जी नही साहब... बस नाम ही सुना है... बाबा के जनाज़े पर दूर से देखा था एक बार उसके बाद कभी नही देखा.

मैं : (मुस्कुराते हुए) तो अब नज़दीक से भी देख लो....

रुस्तम : (अपनी जगह से खड़ा होते हुए) आप शेरा भाई हो साहब जी...

मैं : (हां मे सिर हिलाते हुए) दुनिया तो यही कहती है...

रुस्तम : (हाथ जोड़ते हुए) आप एक दम बाबा जैसे हो साहब बाबा ने मुझे रोज़ी दी ऑर आपने आज मेरी जान बचाई. मेरी ये जान आज से आपकी अमानत है अगर कभी मैं आपके काम आ सकूँ तो अपनी खुश नसीबी समझूंगा..

Update-50

Uske baad kuch der aise hi baate chalti rahi phir akhir teh ye hua ki baaki sab log dhandha sambhalenge or main khan ko maarne jaunga. Uske baad maine meeting barkhast ki or sab ko unke kaam par laga diya or khud apni car me baithkar ghar aa gaya jahan maine jaldi se kapde pack karne laga. Achanak mujhe rubi ka khyaal aaya jo ghar me nahi thi usko bataye bina jana mujhe sahi nahi laga isliye maine socha jate hue usse bhi mil kar jaunga main janta tha wo din bhar kaha hoti hai. Isliye maine jaldi se apne kapde bag me daale or sath me kuch hathiyaar or paise bhi rakh liye. Phir main ghar ke bahar aa gaya jahan gang ke tamaam log mojud the or mera hi intzaar kar rahe the.

Rasool : ye kya shera tum abhi hi jaa rahe ho.

Main : haa mujhe abhi jana hai lekin pehle main rubi se milna chahta hun uske baad jaunga.

Lala : thik hai phir hum bhi tumhare sath hi chalte hain.

Uske baad main apni gaadi me aake baith gaya or mere pichhe tamaam gaadiyo ka qafilaa chal pada. Kuch hi der me hum yateem khane ke bahar the. Wahan kuch bache idhar-udhar ghum rahe the. Maine bacho ko dekh kar baaki sab logo ko bahar hi rukne ka ishara kiya or khud yateem khane ke andar chala gaya jahan bahar bacho ko padhaya jaa raha tha wahan bahut si ladkiyaan or aurate bacho ko padha rahi thi. Maine charo taraf nazar ghumayi to ek ped ke niche kuch bacho ko padhati hui mujhe rubi nazar aayi. Rubi ko dekhkar mere chehre par ek muskaan aa gai. Uss waqt uska chehra blackboard ki taraf tha main chup chap jake bacho ke sath baith gaya jis par sab bache mujhe dekh kar hasne lage. Rubi bacho ko kuch padha rahi thi or main bas khamoshi se baitha usko dekh raha tha tabhi uski awaaz aayi.

Rubi : Sabko samajh aa gaya naaaa.

Main : Mujhe samajh nahi aya madam ji...

Rubi : (palat te hue) shera tum yahan....

Main : Madam question mujhe samajh nahi aaya dubara samjhao.

Rubi : (muskurate hue) Aap office me chaliye main abhi aati hun.

Main : (salute karte hue) Yes madam....

Meri iss harkat par sab bache hasne lag gaye or rubi mujhe aankhen dikhane lag gai isliye main chup chap wahan se utha or jake uske office me baith gaya office me ghuste hi samne baba ki tasveer lagi thi main unke noorani chehre ko dekh raha tha tabhi achanak ek hath mere kandhe par aake ruk gaya sath hi ek meethi si awaaz mere kaano se takrayi.

Rubi : aaj kya baat hai suraj kahi galat side se to nahi nikal gaya jo tumne yahan darshan de diye.

Main : aisi koi baat nahi hai main bas tumse milne ke liye aya tha.

Rubi : (mere samne wali kursi par baithte hue) niyat to thik hai janab ki... aaj din me bhi bada Romentic mood bana hua hai.

Main : (hansate hue) nahi yaar mood wali koi baat nahi actually main kuch din ke liye bahar jaa raha tha socha tumse mil kar nahi jaunga to tumko bura lagega.

Rubi : (apni kursi se khadi hoke mere gaal khichte hue) haaye meri jaan bada khayaal rakhne lag gaye ho mera.

Main : (apne gaal churwate hue) kya kar rahi ho yaar bache dekhenge to kya sochenge.

Rubi : Aaye... Haaye tum kabse logo ki parvaah karne lag gaye.

Main : jyaadaa shehad mat tapkao or meri baat suno tumko har waqt mazaak hi soojhta hai.

Rubi : achha mujhe mazaak soojhta hai... Or wo jo tum bahar karke aaye ho wo badi seyaani harkat thi naa Yes Madam...Yes Madam..... tab bacho ne nahi dekha hoga kya.

Main : (kaan pakadte hue) Achha baba galati ho gai maaf kar do aagey se nahi karunga.

Rubi : (muskurate hue) thats like a gud boy.... Achha bataao yahan kaise aana hua.

Main : main kuch din ke liye bahar jaa raha hun

Rubi : (Udaas hote hue) phir se jaa rahe ho.

Main : arre main hamesha ke liye nahi jaa raha bas kuch din ki baat hai phir wapis aa jaunga.

Rubi : mobile sath leke jaa rahe ho naa.

Main : Hhhmm... kyo...

Rubi : thik hai jaldi wapis aa jana or apna khayaal rakhna or mujhse roz baat karni padegi.

Main : (hath jodte hue) or koi hukum sarkaar.

Rubi : (Muskurate hue) Ab jaldi se idhar aao or pappi do phir jao... bas itna hi....

Main : (hairaan hote hue) Abhi.... Yahaa par....

Rubi : kyo yahan koi pareshaani hai kya.

Main : nahi pareshaani to nahi hai lekin koi bacha dekh sakta hai naa...

Rubi : (apni kursi se Uth te hue) Ek mint ruko...

Rubi ne jaldi se jake dono pardo ko darwaze ke aagey kar diya jisse bahar se koi bhi ham ko nahi dekh sakta tha phir wo jaldi se aake meri god me baith gai or apni dono baaju mere gale me haar ki tarah daal lee.

Main : Irada kya hai sarkaar.

Rubi : (muskurate hue) Kuch khas nahi tumhari pappi lene ka dil kar raha hai.

Main : Mujhse to aise puch rahi ho jaise main nahi kar dunga to nahi logi....

Mera itna kehte hi usne apne honth mere honthon se jod diye or ek dil-qash andaaz se mere honth chusne lagi maine bhi apni dono baaju uski kamar me lapet lee or usko apne sath achhi tarah chipka liya jisse uske mamme mujhe meri chaatee par chubhne lage. Hum dono badi shiddat se ek dusre ke honth chus rahe the or hum dono ki maze se aankhen band thi. Achanak mujhe khayaal aya ki sab log bahar mera intzaar kar rahe hain isliye naa chahte hue bhi maine rubi ko khud se alag kiya. Rubi kuch der waise hi mere gale me apni dono baaju daale meri chaatee par sir rakh kar baithi rahi. fir wo mere upar se uth gai or side par khadi ho gai. Uske baad main apni kursi se khada hua or ek baar phir se rubi ko gale se laga liya uske baad hum dono alag hue or bahar aa gaye jahan bache idhar-udhar bhaag rahe the. Rubi ne sabko daant kar unki jagah par wapis bhej diya or khud mere sath yateem khane ke gate tak bahar aa gai jahan par sab log mera intzaar kar rahe the. Uske baad sabse gale milne ke baad sabko ko unke hisse ka kaam dubara yaad karwa diya fir akhir me main rubi ke pass aaya or usko bhi gale laga liya.

Rubi : jaldi aa jana main tumhara intzaar karungi.

Main : Hhhmmm apna khayaal rakhna.

Rubi : (haa me sir hilate hue) Tum bhi apna khayaal rakhna or mujhe phone karte rehna.

Main : (muskurate hue) thik hai.

Uske baad sabko alvida keh kar main wapis apni gaadi me aake baith gaya or apne safar ke liye ravaana ho gaya. Rubi gate par khadi mujhe jata hua dekhti rahi. Aaj itne waqt ke baad main wapis usi jagah jaa raha tha jahan mujhe nayi jindagi mili thi. Mujhe apne gaav gaye poore sawaa saal ho chuke the or inn sawaa saalo me jane kya-kya badal gaya hoga. Main tez raftaar se gaadi bhaga raha tha sath me Baba, Fiza, Nazi or heena ke bare me bhi soch raha tha jane wo log mere bina kaise honge. Rasta lamba tha or waqt tha jo beetne ka naam hi nahi le raha tha ek-ek pal mere liye ek sadi jaisa ho gaya tha. Main gaadi bhi chala raha tha or apni beeti hui jindagi ko bhi yaad kar raha tha. Achanak meri nazar usi patrol pump par padi jis patrol pump se maine patrol bharwaya tha or jab main ghayal tha to wahan par khade ladke ne meri madad karne ki koshish bhi ki thi. Wahan kuch log tod-phod kar rahe the. Maine unn logo ko dekh kar gaadi wahi rok di or gaadi se bahar nikal aya. Wahan par kuch log uss ladke ko buri tarah maar rahe the. Main tez kadmo ke sath wahan gaya or jaate hi samne khade hue aadmi ko laat maari jo uss ladke ko buri tarah peet raha tha meri laat khate hi wo door jake zameen par gir gaya.

Aadmi : koun hai oye tu...

Main : kyo maar rahe ho iss ladke ko....

Aadmi : sale ne hum se beyaaj par paisa liya tha apni maa ke ilaaj ke liye ab iski maa ko mare ko itna waqt ho gaya hai or abhi tak hmara paisa wapis nahi kiya.

Main : kitna paisa hai...

Aadmi : 20,000 or upar se 15,000 beyaaz.

Maine bina koi sawaal jawab kiye apne jeb me hath daala or 50,000 rupaye ke note ka bundel uss aadmi ke munh par faink diya.

Main : (Apni jeb se gun nikal kar usko load karte hue) ab daffa ho jao yahan se nahi to tum me se koi bhi apni taango par chal kar yahan se nahi jayega.

Aadmi : badshaho ham ko hamaare paise mil gaye ab hamane isse kya lena hai... Shukriya.

Main : (ungali se jane ka ishara karte hue) daffa ho jao.

Uske baad maine niche pade uss ladke ko uthaya or patrol pump ke andar le gaya.

Main : (ghade se paani bharte hue) tum thik ho.

Ladka : ji sahab main thik hun... Mujhe samajh nahi aa raha aapka ye ahsaan main kaise utarunga.

Main : Maine tum pa koi ahsaan nahi kiya yhi samajh lo tumhari ammi ne tumhare liye paise bheje the.

Ladka : shukriya sahab.

Main : (ladke ko paani dete hue) kya naam hai tumhara.

Ladka : (paani peete hue) ji... Rustam....

Main : ek baat samajh nahi aayi tumhara to ye patrol pump hai naa phir tumhare pass paise ki kya kami hai.

Ladka : sahab ye patrol pump mera nahi shera bhai jaan ka hai main to yahan mulazim hun.

Main : (hiraan hote hue) kyaa shera ka hai ye patrol pump.

Ladka : ji sahab pehle sheikh sahab ka hota tha lekin aaj kal iss patrol pump ke mailk shera bhai jaan hain.

Main : (muskurate hue) tumne dekha hai shera ko.

Rustam : ji nahi sahab... Bas naam hi suna hai... Baba ke janaze par door se dekha tha ek baar uske baad kabhi nahi dekha.

Main : (muskurate hue) to ab nazdeek se bhi dekh lo....

Rustam : (Apni jagah se khada hote hue) Aap shera Bhai ho sahab ji...

Main : (haa me sir hilate hue) Duniya to yhi kehti hai...

Rustam : (hath jodte hue) Aap ek dam baba jaise ho sahab baba ne mujhe rozi di or aapne aaj meri jaan bachayi. Meri ye jaan aaj se aapki amanat hai agar kabhi main aapke kaam aa saku to apni khush naseebi samjhunga..

 
उसके बाद हम कुछ देर बाते करते रहे फिर वहाँ से पेट्रोल भरवा कर उसको कुछ पैसे दिए पेट्रोल पंप की मरम्मत के लिए ऑर कुछ पैसे उसके खुद के इलाज के लिए. फिर मैं अपने सफ़र के लिए वापिस निकल पड़ा. मैं करीब 9 घंटे से लगातार गाड़ी चला रहा था इसलिए बुरी तरह थक गया था ऑर मुझे भूख भी बहुत लग रही थी लेकिन आस-पास कही भी कोई होटेल या ढाबा नही खुला था जहाँ मैं खाना खा सकूँ इसलिए मैने गाड़ी चलाते रहना ही मुनासिब समझा मैं सुबह तक लगातार गाड़ी चलाता रहा. सुबह मैं उस शहर मे आ गया था जहाँ हीना अक्सर मुझे इलाज के लिए लाया करती थी. इसलिए गाड़ी को मैने उसी शॉपिंग माल के सामने रोक दिया जहाँ से रिज़वाना ने मुझे कपड़े दिलवाए थे मैने जल्दी से गाड़ी को पार्क किया ऑर उस माल मे चला गया सुबह का वक़्त था इसलिए पूरा माल खाली नज़र आ रहा था वहाँ कोई भी नही था बस दुकान वाले ही आए हुए थे जो अपना-अपना माल सेट कर रहे थे मैने एक दुकान मे जाके नाज़ी, फ़िज़ा, हीना ऑर बाबा के लिए नये कपड़े लिए ऑर कुछ ऑर समान लेके वापिस गाड़ी मे आके बैठ गया ऑर फिर से अपना सफ़र शुरू कर दिया. उस शहर से मेरा गाँव पास ही था इसलिए जल्दी ही मैं अपने गाव की सरहद मे घुस चुका था जहाँ से मेरा गाव शुरू होता था.

कुछ ही देर मे मैं मेरे गाव के काफ़ी करीब तक पहुँच गया था. लह-लहाते खेत ऑर ताज़ी हवा ने मेरी सारी थकान को एक दम गायब कर दिया गाव की ताज़ी हवा मे साँस लेते ही जैसे मेरा रोम-रोम खिल उठा. मैने गाड़ी साइड पर रोक दी ऑर कुछ देर बाहर आके गाव की ताज़ा हवा ऑर खेतो की हरियाली का मज़ा लेने लगा वही पास ही एक सॉफ पानी का ट्यूब-वेल था जहाँ मैने पानी पीया ऑर चेहरे को धो कर वापिस अपने सफ़र के लिए निकल पड़ा. अब कुछ ही दूरी रह गई थी ऑर अब मैं किसी भी वक़्त मैं मेरे गाव तक पहुँच सकता था इसलिए अब मैने अपनी गाड़ी की रफ़्तार भी बढ़ा दी . मुझे गाव मे घुसते ही एक अजीब सी खुशी महसूस हो रही थी एस लग रहा था जैसे मैं अपने घर वापिस आ गया हूँ. कुछ ही दूरी पर मुझे मेरा खेत नज़र आया जहाँ मैं काम किया करता था. मैने फॉरन गाड़ी रोकी ऑर सबसे पहले अपने खेत मे चला गया वहाँ गन्ने की फसल एक दम तैयार खड़ी थी. मैं कुछ देर अपने खेत मे रुका ऑर फसल का जायेज़ा लेने लगा ऑर सोचने लगा की ज़रूर ये फसल नाज़ी ऑर फ़िज़ा ने उगाई होगी फिर वापिस आके अपनी गाड़ी मे बैठ गया ऑर अपनी गाड़ी को अपने घर की तरह दौड़ा दिया आज मैं बेहद खुश था इसलिए बार-बार अपने घरवालो के लिए खरीदे हुए समान को बार-बार देख रहा था ऑर चूम रहा था.

कुछ ही देर मे मैने मेरी गाड़ी मेरे घर के सामने रोक दी. मैं जल्दी से गाड़ी से उतरा ऑर अपना बॅग ऑर घरवालो के लिए खरीदा हुआ समान निकाला ऑर तेज़ कदमो के साथ अपना घर के दरवाज़े के बाहर खड़ा हो गया. मैं बेहद खुश भी था ऑर डर भी रहा था कि जाने इतने वक़्त के बाद सब लोग मुझे देख कर कैसा बर्ताव करेंगे. फ़िज़ा तो ज़रूर मुझसे नाराज़ होगी ऑर नाज़ी तो ज़रूर मेरे साथ झगड़ा तक कर लेगी लेकिन हाँ बाबा ज़रूर मेरा साथ देंगे ऑर उन दोनो को चुप करवा देंगे ऐसे ही काई अन-गिनत ख़याल ऑर अपने ज़ोर-ज़ोर से धड़कते दिल के साथ मैने दरवाज़ा खट-खाटाया. कुछ देर बाद एक औरत ने दरवाज़ा खोला ऑर मेरे सामने आके खड़ी हो गई.

औरत : हाँ क्या काम है.

मैं : जी मैं नीर हुन्न...

औरत : (बेरूख़ी से) कौन नीर ... किससे मिलना है तुमको.

मैं : आप कौन हो ओर यहाँ क्या कर रही हो.

औरत : अरे अजीब आदमी हो मेरे घर मे मुझ से ही पूछ रहे हो कि यहाँ क्या कर रही हूँ... तुम हो कौन ऑर किससे मिलना है.

मैं : जी आप बाबा नाज़ी या फ़िज़ा मे से किसी को भी बुला दीजिए वो मुझे जानते हैं.

औरत : यहाँ इस नाम का कोई नही है दफ़ा हो जाओ यहाँ से.

इतना कह कर उसने मेरे मुँह पर दरवाज़ा बंद कर दिया. मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि ये क्या हुआ सब लोग कहाँ गये ऑर ये कौन औरत थी जो इतनी बेरूख़ी से मुझसे बात कर रही थी. बाबा कहाँ है, फ़िज़ा कहाँ है, नाज़ी कहाँ है ऐसे ही कई सवाल एक साथ मेरे दिमाग़ मे चल रहे थे जिनका मुझे जवाब ढूँढना था. मैं वापिस उदास ऑर परेशान हालत मे वापिस अपनी गाड़ी के पास आ गया ऑर सारा समान वापिस गाड़ी मे रख दिया. कुछ देर गाड़ी मे बैठने के बाद मैं सोचने लगा कि अब मैं कहा जाउ ऑर किससे पुछु इन्न सब लोगो के बारे मे तभी अचानक मुझे याद आया कि हीना मुझे इन सबके बारे मे बता सकती है. मैने फॉरन गाड़ी स्टार्ट की ऑर गाड़ी को हीना की हवेली की तरफ घुमा दिया. मैं उस वक़्त काफ़ी परेशान था इसलिए बहुत तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था. कुछ ही मिनिट मे मैने गाड़ी को चौधरी की हवेली के सामने रोक दिया. सामने मुझे 2 दरबान बैठे नज़र आए. मैं फॉरन गाड़ी से उतरा ऑर उन दोनो के पास जाके खड़ा हो गया. इन दोनो दरबानो को मैं जानता था इसलिए उनको देखते ही मैने फॉरन पहचान लिया.

दरबान : कौन हो भाई क्या काम है.

मैं : अर्रे भाई मुझे भूल गये क्या मैं नीर हूँ याद आया.

दरबान : (सवालिया नज़रों से मुझे देखते हुए) कौन नीर ... क्या काम है.

मैं : यार भूल गये मैं तुम्हारी छोटी मालकिन को गाड़ी चलानी सिखाता था याद है.

दरबान : (कुछ याद करते हुए) हाँ... हाँ... याद आ गया तुम हैदर बाबा के छोटे बेटे हो ना.

मैं : हाँ मैं उन्ही का बेटा हूँ... मुझे तुम्हारी मेम्साब से मिलना है

दरबान : (हँसते हुए) पागल हो क्या खुद भी मार खाओगे हम को भी मार खिलवाओगे उनसे मिलने की इजाज़त किसी को नही है.

मैं : लेकिन समस्या क्या है यार पहले भी तो मैं उनसे मिलता ही था ना.

दरबान : आज छोटी मालकिन की शादी है इसलिए आज उनसे मिलने की इजाज़त किसी को नही है.

मैं : क्या... आज हीना की शादी है.

दरबान : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हाँ

मैं : देखो यार मेरा उससे मिलना बहुत ज़रूरी है मेरी मजबूरी को समझो.

दरबान : (आपस मे बात करते हुए) ठीक है लेकिन इसमे हमारा क्या फ़ायदा.

मैं : (अपनी जेब से कुछ पैसे निकाल कर दरबान को देते हुए) अब तो मिल सकता हूँ ना.

दरबान : (खुश हो कर नोट गिनते हुए) कितना वक़्त लगेगा.

मैं : बस 10-15 मिनिट ज़्यादा से ज़्यादा नही.

दरबान : ठीक है लेकिन ज़्यादा वक़्त मत लगाना ये मेरा साथी तुमको पिछे के रास्ते से हवेली मे ले जाएगा लेकिन अगर किसी ने तुमको पकड़ लिया तो हम तुमको नही जानते तुम हम को नही जानते बोलो मंज़ूर है.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) मंज़ूर है अब चलो जल्दी.

उसके बाद एक दरबान मुझे हवेली के पिछे की तरफ ले गया जहाँ से एक छोटा सा दरवाज़ा था जिस पर ताला लगा हुआ था उसने मेरे सामने जल्दी से ताला खोला ऑर फिर हम दोनो अंदर चले गये वो चारो तरफ देखता हुआ ऑर लोगो की नज़रों से बचा कर उपर तक ले आया ऑर उंगली से हीना के कमरे की तरफ इशारा कर दिया.

दरबान : (उंगली से इशारा करते हुए) ये वाला कमरा है छोटी मालकिन का अब जल्दी जाओ ओर ज़्यादा वक़्त मत लगाना कही कोई आ ना जाए नही तो दोनो मरेंगे.

मैं : शुक्रिया... मैं जल्दी आ जाउन्गा.

मैं दबे पाँव हीना के कमरे मे चला गया ऑर कमरे को अंदर से कुण्डी लगा ली ताकि कोई भी बाहर का अंदर ना आ सके. मैं जैसे ही कमरे मे घुसा मुझे सामने बेड पर हीना लेटी हुई नज़र आई जिसकी हालत देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि या तो वो बीमार है या फिर वो सो रही है. उसके पास ही मेरा कुर्ता पाजामा पड़ा था जो उसको मैने पहनने के लिए दिया था जिसे मैने फॉरन पहचान लिया. मैं जल्दी से उसके पास गया ऑर उसको कंधे से हिला कर उठाया.

मैं : (दबी हुई आवाज़ मे)उठो हीना.... हीना.... हीनाअ

हीना : (बिना मेरी तरफ देखे) दफ़ा हो जाओ यहाँ से मैने कहा ना मैं ये शादी नही करूँगी.

ये बात सुनकर मुझे भी झटका लगा कि ये हीना क्या कह रही है. लेकिन मैं जानना चाहता था कि असल माजरा क्या है हीना क्यो शादी से मना कर रही है.

मैं : (हीना को पकड़कर उठाते हुए) हीना मैं हूँ देखो मुझे एक बार...

हीना : (थप्पड़ मारने के लिए अपना हाथ उठाते हुए) नीर तूमम्म... तुम वापिस आ गये.

मैं : (मुस्कुराते हुए) हाँ मैं वापिस आ गया हूँ क्या हुआ है... तुमने ये क्या हालत बना रखी है अपनी. (अपने हाथ से हीना के बिखरे हुए बाल संवारते हुए)

हीना : (रोते हुए मुझे गले लगाकर) मुझे ले चलो यहाँ से नीर मैं यहाँ एक पल भी अब रहना नही चाहती.

मैं कुछ समझ नही पा रहा था कि हुआ क्या है. इसलिए बिना उससे कोई ऑर सवाल किए मैं उसको चुप करवाने लगा. कुछ देर रोने के बाद वो चुप हो गई फिर मैने पास पड़े ग्लास से उसको पानी पिलाया.

मैं : अब ठीक हो.

हीना : (पानी पीते हुए हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म.....

मैं : अब मुझे बताओ क्या हुआ है यहाँ.

हीना : तुम्हारे जाने के बाद तुम नही जानते यहाँ बहुत कुछ हो गया है मेरे साथ भी ऑर तुम्हारे घरवालो के साथ भी.

मैं : क्या हुआ है बताओ तो सही...

हीना : तुम्हारे वालिद ऑर फ़िज़ा अब इस दुनिया मे नही हैं.

मैं : (हैरानी से) क्या... कब हुआ ये सब कैसे हुआ.

हीना : तुम्हारे जाने के बाद बाबा की तबीयत बहुत खराब रहने लगी थी इसलिए मैने ऑर नाज़ी ने मिलकर उनको हॉस्पिटल अड्मिट करवा दिया बिचारी नाज़ी ने बहुत उनकी खिदमत की आखरी वक़्त मे लेकिन उपर वाले की मर्ज़ी के आगे किया भी क्या जा सकता है वो नाज़ी ऑर फ़िज़ा को रोता हुआ छोड़ कर चले गये.

मैं : (अपनी आँख से आँसू सॉफ करते हुए) ऑर फ़िज़ाअ...

हीना : बाबा के जाने के कुछ दिन बाद ही क़ासिम जैल से रिहा होके वापिस आ गया ऑर आते ही उसने दोनो लड़कियो पर ज़ुल्म करने शुरू कर दिए. वो पैसे के लिए रोज़ फ़िज़ा को मारता था उस बेगैरत को इतना भी तरस नही आया कि फ़िज़ा माँ बनने वाली है उसने तो यहाँ तक इनकार कर दिया था कि वो बच्चा उसका नही है ऑर वो फ़िज़ा पर गंदे-गंदे इल्ज़ाम लगा के रोज़ उसको मारता था. ऐसे ही एक बार उसने फ़िज़ा के पेट मे लात मार दी जिससे उसकी तबीयत बहुत ज़्यादा खराब हो गई बिचारी नाज़ी भागी-भागी मेरे पास आई हम दोनो मिलकर उसको शहर लेके गये लेकिन डॉक्टर ने कहा कि फ़िज़ा को बचना बहुत मुश्किल है ऑर बच्चे की जान को भी ख़तरा है इसलिए ऑपरेशन करना पड़ेगा लेकिन ऑपरेशन के बाद बच्चा तो बच गया लेकिन फ़िज़ा को डॉक्टर बचा नही सके. लेकिन उसकी निशानी आज भी नाज़ी के पास है. फ़िज़ा के कफ़न दफ़न के बाद क़ासिम ने मकान ऑर खेत पर क़ब्ज़ा कर लिया उसके बाद उसने एक तवायफ़ से शादी कर ली

बिचारी नाज़ी उस बच्चे को भी संभालती थी ऑर दिन भर घर का काम भी करती थी बदले मे उसको 2 वक़्त का खाना भी पूरा नही दिया जाता था क़ासिम की नयी बीवी रोज़ नाज़ी को बहुत मारती थी. फिर एक दिन उस बद-ज़ात औरत ने नाज़ी को भी घर निकाल दिया. क़ासिम के पास जब पैसे ख़तम हो गये तो उसने तुम्हारे खेत मेरे अब्बू को बेच दिए.

मैं : (रोते हुए) नाज़ी ऑर फ़िज़ा का बच्चा कहाँ है.

हीना : (अपने आँसू पोंछते हुए) यही हैं मेरे पास नाज़ी अब हवेली मे ही काम करती है.

मैं : क्या मैं मिल सकता हूँ उन दोनो से.

हीना : हाँ ज़रूर मिल सकते हो लेकिन मुझे नीचे जाने की इजाज़त नही है तुम रूको मैं किसी को भेज कर नाज़ी को बुल्वाती हूँ.

उसके बाद हीना ने मुझे पर्दे के पिछे छुपने को कहा ऑर खुद बाहर खड़े दरबान से नाज़ी को बुला कर लाने का कहा ऑर वापिस आके गेट बंद कर लिया ऑर फिर से आके मेरे पास बेड पर बैठ गई.

मैं : हीना मुझे समझ नही आ रहा मैं ये तुम्हारा अहसान कैसे उतारूँगा तुम नही जानती तुमने मेरे लिए क्या किया है.

हीना : पागल हो क्या मैने कुछ नही किया... ये तो मेरा फ़र्ज़ था तुम्हारे बाद उनका ख़याल मुझे ही तो रखना था ना.

मैं : (हीना के दोनो हाथ चूमते हुए) शुक्रिया... तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया अगर मैं कभी तुम्हारे किसी काम आ सकूँ तो खुद को बहुत खुश नसीब समझूंगा.

हीना : नीर जानना नही चाहोगे मेरी शादी किससे हो रही है.

मैं : (सवालिया नज़रों से हीना को देखते हुए) किस के साथ..?

हीना : तुम्हारे इनस्पेक्टर ख़ान के साथ.

Uske baad hum kuch der baate karte rahe phir wahan se partol bharwa kar usko kuch paise diye patrol pump ki marammart ke liye or kuch paise uske khud ke ilaaj ke liye. Phir main apne safar ke liye wapis nikal pada. Main kareeb 9 ghante se lagatar gaadi chala raha tha isliye buri tarah thak gaya tha or mujhe bhukh bhi bahut lag rahi thi lekin aas-pass kahi bhi koi hotel ya dhaba nahi khula tha jahan main khana khaa saku isliye maine gaadi chalate rehna hi munsahib samjha main subah tak lagataar gaadi chalata raha. Subah main uss shehar me aa gaya tha jahan heena aksar mujhe ilaaj ke liye laya karti thi. Isliye gaadi ko maine usi shoping mall ke samne rok diya jahan se rizwana ne mujhe kapde dilwaye the maine jaldi se gaadi ko park kiya or uss mall me chala gaya subah ka waqt tha isliye poora maal khali nazar aa raha tha wahan koi bhi log nahi the bas dukaan wale hi aaye hue the jo apna-apna maal set kar rahe the maine ek dukaan me jake Nazi, Fiza, Heena or baba ke liye naye kapde liye or kuch or samaan leke wapis gaadi me aake baith gaya or fir se apna safar shuru kar diya. Uss shehar se mera gaav pass hi tha isliye jaldi hi main apne gaav ki sarahad me ghus chuka tha jahan se mera gaav shuru hota tha.

Kuch hi der me main mere gaav ke kaafi kareeb tak pohonch gaya tha. Leh-lahate khet or taazi hawa ne meri saari thakaan ko ek dam gayab kar diya gaav ki taazi hawa me saans lete hi jaise mera rom-rom khil utha. Maine gaadi side par rok di or kuch der bahar aake gaav ki taza hawa or kheto ki haryaali ka maza lene laga wahi pass hi ek saaf paani ka tube-well tha jahan maine paani peeya or chehre ko dho kar wapis apne safar ke liye nikal pada. Ab kuch hi doori reh gai thi or ab main kisi bhi waqt main mere gaav tak pohonch sakta tha isliye ab maine apni gaadi ki raftaar bhi badha di . Mujhe gaav me ghuste hi ek ajeeb si khushi mehsoos ho rahi thi ess lag raha tha jaise main apne ghar wapis aa gaya hun. kuch hi doori par mujhe mera khet nazar aya jahan main kaam kiya karta tha. maine foran gaadi roki or sabse pehle apne khet me chala gaya wahan ganne ki fasal ek dam teiyaar khadi thi. Main kuch der apne khet me ruka or fasal ka jayeza lene laga or sochne laga ki jarur ye fasal nazi or fiza ne ugaayi hogi fir wapis aake apni gaadi me baith gaya or apni gaadi ko apne ghar ki tarah dauda diya aaj main behad khush tha isliye bar-bar apne gharwalo ke liye khareede hue samaan ko bar-bar dekh raha tha or chum raha tha.

Kuch hi der me maine meri gaadi mere ghar ke samne rok di. Main jaldi se gaadi se utara or apna bag or gharwalo ke liye khareeda hua samaan nikala or tez kadmo ke sath apna ghar ke darwaze ke bahar khada ho gaya. Main behad khush bhi tha or darr bhi raha tha ki jane itne waqt ke baad sab log mujhe dekh kar kaisa bartaav karenge. Fiza to jarur mujhse naraz hogi or naazi to jarur mere sath jhagda tak kar legi lekin haa baba jarur mera sath denge or unn dono ko chup karwa denge aise hi kayi an-ginat khayaal or apne jor-jor se dhadakte dil ke sath maine darwaza khat-khataya. Kuch der baad ek aurat ne darwaza khola or mere samne aake khadi ho gai.

Aurat : haa kya kaam hai.

Main : ji main Neer hunn...

Aurat : (berukhi se) koun Neer ... kisse milna hai tumko.

Main : Aap koun ho or yahan kya kar rahi ho.

Aurat : Aree ajeeb aadmi ho mere ghar me mujh se puch he ho ki yahan kya kar rahi hun... tum ho koun or kisse milna hai.

Main : ji aap baba nazi ya fiza me se kisi ko bhi bula dijiye wo mujhe jante hain.

Aurat : yahan iss naam ka koi nahi hai daffa ho jao yahan se.

Itna keh kar usne mere munh par darwaza band kar diya. mujhe kuch bhi samajh nahi aa raha tha ki ye kya hua sab log kaha gaye or ye koun aurat thi jo itni berukhi se mujhse baat kar rahi thi. Baba kaha hai, fiza kaha hai, Nazi kaha hai aise hi kai sawaal ek sath mere dimaag me chal rahe the jinka mujhe jawab dhundhna tha. Main wapis Udaas or pareshaan halat me wapis apni gaadi ke pass aa gaya or sara samaan wapis gaadi me rakh diya. Kuch der gaadi me baithne ke baad main sochne laga ki ab main kaha jau or kisse puchu inn sab logo ke bare me tabhi achanak mujhe yaad aya ki Heena mujhe inn sabke bare me bata sakti hai. Maine foran gaadi start ki or gaadi ko heena ki haveli ki taraf ghuma diya. Main uss waqt kaafi pareshaan tha isliye bahut tez raftaar se gaadi chala raha tha. kuch hi minute me maine gaadi ko choudhary ki haveli ke samne rok diya. samne mujhe 2 darbaan baithe nazar aaye. main foran gaadi se utaraa or unn dono ke pass jake khada ho gaya. Inn dono darbano ko main janta tha isliye unko dekhte hi maine foran pehchaan liya.

Darbaan : koun ho bhai kya kaam hai.

Main : arre bhai mujhe bhul gaye kya main Neer hun yaad aya.

Darbaan : (sawaliya nazaro se mujhe dekhte hue) koun Neer ... kya kaam hai.

Main : yaar bhul gaye main tumhari choti malkin ko gaadi chalani seekhta tha yaad hai.

Darbaan : (kuch yaad karte hue) haa... haa... yaad aa gaya tum haidar baba ke chhote bete ho naa.

Main : haa main unhi ka beta hun... mujhe tumhari memsaab se milna hai

Darbaan : (hansate hue) pagal ho kya khud bhi maar khaoge ham ko bhi maar khilwaoge unse milne ki ijajat kisi ko nahi hai.

Main : lekin samasya kya hai yaar pehle bhi to main unse milta hi tha naa.

Darbaan : aaj choti malkin ki shaadi hai isliye aaj unse milne ki ijajat kisi ko nahi hai.

Main : kya... aaj heena ki shaadi hai.

Darbaan : (haa me sir hilate hue) haa

Main : dekho yaar mera usse milna bahut jaruri hai meri majboori ko samjho.

Darbaan : (aapas me baat karte hue) thik hai lekin isme hmara kya phayeda.

Main : (apni jeb se kuch paise nikaal kar darbaan ko dete hue) ab to mil sakta hun naa.

Darbaan : (khush ho kar note ginte hue) kitna waqt lagega.

Main : bas 10-15 minute jyaadaa se jyaadaa.

Darbaan : Thik hai lekin jyaadaa waqt mat lagana ye mera sathi tumko pichhe ke rastey se haveli me le jayega lekin agar kisi ne tumko pakad liya to hum tumko nahi jante tum ham ko nahi jante bolo manzoor hai.

Main : (haa me sir hilate hue) manzoor hai ab chalo jaldi.

Uske baad ek darbaan mujhe haveli ke pichhe ki taraf le gaya jahan se ek chhota sa darwaza tha jis par taala laga hua tha usne mere samne jaldi se taala khola or phir hum dono andar chale gaye wo chaaro taraf dekhta hua or logo ki nazaro se bacha kar upar tak le aya or ungali se heena ke kamre ki taraf ishara kar diya.

Darbaan : (ungali se ishara karte hue) ye wala kamra hai choti malkin ka ab jaldi jao or jyaadaa waqt mat lagana kahi koi aa na jaye nahi to dono marenge.

Main : shukriya... main jaldi aa jaunga.

Main dabe paav heena ke kamre me chala gaya or kamre ko andar se kundi laga lee taaki koi bhi bahar ka andar naa aa sake. Maine jaise hi kamre me ghusa mujhe samne bed par heena leti hui nazar aayi jiski haalat dekh kar andaza lagaya ja sakta tha ki ya to wo bimaar hai ya phir wo so rahi hai. uske pass hi mera kurta pajama pada tha jo usko maine pehanne ke liye diya tha jisse maine foran pehchaan liya. main jaldi se uske pass gaya or usko kandhe se hila kar uthaya.

Main : (dabi hui awaz me)Utho Heenaaa.... Heenaa.... Heenaaa

Heena : (bina meri taraf dekhe) daffa ho jao yahan se maine kaha naa main ye shaadi nahi karungi.

Ye baat sunkar mujhe bhi jhatka laga ki ye heena kya keh rahi hai. Lekin main janna chahta tha ki asal majra kya hai heena kyo shaadi se mana kar rahi hai.

Main : (heena ko pakadkar uthate hue) Heena main hun dekho mujhe ek baar...

Heena : (Thappad maarne ke liye apna hath uthate hue) Neer tummm... tum wapis aa gaye.

Main : (muskurate hue) ha main wapis aa gaya hun kya hua hai... tumne ye kya halat bana rakhi hai apni. (Apne hath se heena ke bikhre hue baal sawarte hue)

Heena : (rote hue mujhe gale lagakar) mujhe le chalo yahan se Neer main yahan ek pal bhi ab rehna nahi chahti.

Main kuch samajh nahi paa raha tha ki hua kya hai. Isliye bina usse koi or sawaal kiye main usko chup karwane laga. kuch der rone ke baad wo chup ho gai phir maine pass pade glass se usko paani pilaya.

Main : ab thik ho.

Heena : (paani peete hue haa me sir hilate hue) Hhhmmm.....

Main : ab mujhe bataao kya hua hai yahan.

Heena : tumhare jane ke baad tum nahi jante yahan bahut kuch ho gaya hai mere sath bhi or tumhare gharwalo ke sath bhi.

Main : kya hua hai bataao to sahi...

Heena : tumhare walid or fiza ab iss duniya me nahi hain.

Main : (hairaani se) kya... kab hua ye sab kaise hua.

Heena : tumhare jane ke baad baba ki tabiyat bahut kharab rehne lagi thi isliye maine or naazi ne milkar unko hospital admit karwa diya bichari nazi ne bahut unki khidmat ki aakhri waqt me lekin upar wale ki marzi ke aagey kiya bhi kya jaa sakta hai wo nazi or fiza ko rota hua chod kar chale gaye.

Main : (apni aankh se aansu saaf karte hue) or fizaaa...

Heena : baba ke jane ke kuch din baad hi qasim jail se riha hoke wapis aa gaya or aate hi usne dono ladkiyo par julm karne shuru kar diye. wo paise ke liye roz fiza ko marta tha uss begairat ko itna bhi taras nahi aya ki fiza maa banne wali hai usne to yahan tak inkaar kar diya tha ki wo bacha uska nahi hai or wo fiza par gande-gande iljaam laga ke roz usko marta tha. aise hi ek baar usne fiza ke pet me laat maar di jisse uski tabiyat bahut jyaadaa kharab ho gai bichari nazi bhagi-bhagi mere pass ayi hum dono milkar usko shehar leke gaye lekin doctor ne kaha ki fiza ko bachana bahut mushkil hai or bache ki jaan ko bhi khatra hai isliye operation karna padega lekin operation ke baad bacha to bach gaya lekin fiza ko doctor bacha nahi sake. lekin uski nishani aaj bhi nazi ke pass hai. Fiza ke kafan dafan ke baad qasim ne makaan or khet par kabza kar liya uske baad usne ek tavayaf se shaadi kar lee bichari nazi uss bache ko bhi sambhalti thi or din bhar ghar ka kaam bhi karti thi badle me usko 2 waqt ka khana bhi poora nahi diya jata tha qasim ki nayi biwi roz nazi ko bahut marti thi. Phir ek din Uss bad-zaat aurat ne nazi ko bhi ghar nikal diya. Qasim ke pass jab paise khatam ho gaye to usne tumhare khet mere abbu ko bech diye.

Main : (Rote hue) Naazi or fiza ka bacha kaha hai.

Heena : (apne aansu ponchte hue) yhi hain mere pass nazi ab haveli me hi kaam karti hai.

Main : kya main mil sakta hun unn dono se.

Heena : haa jarur mil sakte ho lekin mujhe niche jane ki ijajat nahi hai tum ruko main kisi ko bhej kar nazi ko bulwati hun.

Uske baad heena ne mujhe parde ke pichhe chupne ko kaha or khud bahar khade darbaan se nazi ko bula kar laane ka kaha or wapis aake gate band kar liya or phir se aake mere pass bed par baith gai.

Main : heena mujhe samajh nahi aa raha main ye tumhara ahsaan kaise utarunga tum nahi janti tumne mere liye kya kiya hai.

Heena : pagal ho kya maine kuch nahi kiya... ye to mera farz tha tumhare baad unka khayaal mujhe hi to rakhna tha na.

Main : (Heena ke dono hath chumte hue) shukriya... tumhara bahut-bahut shukriya agar main kabhi tumhare kisi kaam aa saku to khud ko bahut khush naseeb samjhunga.

Heena : Neer janna nahi chahoge meri shaadi kisse ho rahi hai.

Min : (sawaliya nazaro se heena ko dekhte hue) kis ke sath..?

Heena : tumhare Inspector khan ke sath.

 


अपडेट-51

ये मेरे लिए एक ऑर बड़ा झटका था क्योंकि उसी को तो मैं यहाँ मारने आया था.

मैं : क्य्ाआ...

हीना : मैं उस बेगैरत इंसान से शादी नही करना चाहती नीर क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ उस कमीने ने मेरे अब्बू को भी पता नही कैसे शादी के लिए राज़ी कर लिया है जानते हो जिस कमीने पर तुम अपने परिवार की ज़िम्मेदारी छोड़ कर गये थे उसने एक बार भी आके ये नही देखा कि वो लोग ज़िंदा है या मर गये. बस डॉक्टर रिज़वाना कभी-कभी आती थी जो नाज़ी ऑर फ़िज़ा को कुछ पैसे दे जाया करती थी घर खर्च के लिए उसके बाद उसने भी आना बंद कर दिया सुना है उसकी किसी कार आक्सिडेंट मे मौत हो गई थी. मुझे वो इंसान बिल्कुल पसंद नही है जो इंसान अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नही संभाल सकता क्या गारंटी है कि वो मेरा ख़याल रख लेगा.

मैं : तुम मुझसे प्यार करती हो हीना...??

हीना : (मुस्कुरा कर नज़रें नीचे करके हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म... क्या तुम्हारी जिंदगी मे कोई ऑर लड़की है.

मैं : (मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूं लेकिन हीना का मुझ पर अहसान था इसलिए मैने बिना कुछ सोचे समझा उसको हाँ कहने का फ़ैसला कर लिया) नही यार ऐसी कोई बात नही है मुझे भी तुम बहुत पसंद हो. लेकिन तुम मेरी जिंदगी के बारे मे कुछ नही जानती एक बार मेरा सच सुन लो उसके बाद जो तुम्हारा फ़ैसला होगा मुझे मंज़ूर होगा.

हीना : मुझे कुछ नही पता मुझे सिर्फ़ इतना पता है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ तुम मुझे जिस हाल मे भी रखोगे मैं रह लूँगी ऑर बहुत खुश रहूंगी तुम्हारे साथ.

मैं : लेकिन मैं एक गॅंग्स्टर हूँ ऑर मेरा नाम नीर नही शेरा है.

हीना : तो क्या हुआ गॅंग्स्टर शादी नही करते क्या. मुझे उससे कोई फरक नही पड़ता मैं बस तुमसे प्यार करती हूँ इससे ज़्यादा मुझे कुछ नही पता अब बोलो मुझसे शादी करोगे या नही.

मैं : (बिना कुछ बोले हीना का चेहरा पकड़ कर उसके होंठ चूमते हुए) मिल गया जवाब.

हीना : (आँखें फाड़-फाड़ कर मुझे देखते हुए) हाँ....

तभी किसी ने दरवाज़ा खट-खाटाया तो हम लोग दूर होके बैठ गये. हीना ने मुझे दुबारा पर्दे के पिछे छुप जाने का इशारा किया ऑर खुद दरवाज़ा खोलने चली गई. उसके बाद मुझे 2 आवाज़े सुनाई देने लगी क्योंकि मैं पर्दे के पिछे था इसलिए कुछ भी देख नही पा रहा था इनमे से एक आवाज़ हीना की थी ऑर दूसरी नाज़ी की थी.

नाज़ी : अपने मुझे बुलाया छोटी मालकिन.

हीना : कहाँ थी इतनी देर चल अंदर आ तेरे लिए एक तोहफा है मेरे पास.

नाज़ी : कौनसा तोहफा मालकिन?

हीना : पहले तू अंदर तो आ फिर दिखाती हूँ ऑर आते हुए दरवाज़ा बंद कर देना अंदर से.

नाज़ी : अच्छा.

उसके बाद कुछ देर कमरे मे खामोशी छा गई फिर मैं बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगा कि कब हीना मुझे आवाज़ दे ऑर मैं बाहर निकलु.

नाज़ी : बंद कर दिया दरवाज़ा छोटी मालकिन.

हीना : तुझे एक जादू दिखाऊ.

नाज़ी : कौनसा जादू.

हीना : शर्त लगा ले तेरी आँखें बाहर आने को हो जाएँगी मेरा जादू देख कर.

नाज़ी : मैं कुछ समझी नही मालकिन.

हीना : समझती हूँ रुक... अब देख मेरा जादू... 1.... 2.... 3.....

3 कहने के साथ ही झटके से हीना ने मेरे सामने आया हुआ परदा हटा दिया. नाज़ी मुझे आँखें फाड़-फाड़ कर देखने लगी ऑर मैं भी इतने वक़्त के बाद नाज़ी को देख रहा था इसलिए उसी जगह पर किसी पत्थर की तरह खड़ा उसको देखने लगा. नाज़ी पहले से बहुत कमज़ोर हो गई थी ऑर शायद रो-रो कर उसके आँखो के नीचे काले दाग पड़ गये थे. हम दोनो की ही आँखों मे आँसू थे ऑर बिना पलक झपकाए एक दूसरे को देख रहे थे. नाज़ी बिना कुछ सोचे समझे भाग कर मेरे पास आई ऑर मेरे गले से लग कर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी. मैं भी उसके सिर पर हाथ फेर कर उसको चुप करवाने लगा मुझे समझ नही आ रहा था कि उसको क्या कहूँ ऑर कहाँ से बात शुरू करू. वो किसी छोटे बच्चे की तरह लगातार सिसक-सिसक कर मुझसे लिपट कर रो रही थी. मैने हीना को इशारा से पानी लाने को कहा तो वो भागती हुई बेड के पास पड़ा आधा ग्लास पानी ही उठा लाई मैने वो पानी नाज़ी को पिलाया ऑर चुप करवाया ऑर उसको पकड़ कर बेड तक ले आया ऑर उसको बेड पर बिठा दिया ऑर खुद भी उसके साथ बैठ गया. काफ़ी देर रोने के बाद नाज़ी का मन हल्का हो गया था इसलिए अब वो बेहतर लग रही थी.

नाज़ी : तुम कहाँ थे इतने दिन नीर तुम नही जानते तुम्हारे पिछे हमारे साथ क्या-क्या हो गया बाबा ऑर फ़िज़ा भाभी... (उसने फिर से रोना शुरू कर दिया)

मैं : मैं सब जान गया हूँ नाज़ी मुझे हीना ने सब बता दिया है. फिकर मत करो मैं अब आ गया हूँ ना तुम्हारे साथ जो बुरा होना था हो गया अब रोने की उनकी बारी है जिन्होने हमारे परिवार को इतना रुलाया है.

हीना : नाज़ी अकेली आई हो नीर कहाँ है.

मैं : तुम्हारे सामने तो बैठा हूँ.

हीना : (हँसते हुए) तुम नही हमारा छोटा नीर .

मैं : (सवालिया नज़रों से हीना को ऑर नाज़ी को देखते हुए) छोटा नीर ...???

हीना : फ़िज़ा के बेटे का नाम भी हमने नीर ही रखा है क्योंकि ये नाम हमने नही बल्कि खुद फ़िज़ा ने ही रखा है वो चाहती थी कि उसका बेटा बड़ा होके तुम जैसा बने.

नाज़ी : (अपने आँसू सॉफ करते हुए) मैं अभी लेके आती हूँ.

हीना : यहाँ मत लेके आना उसको... तुम ऐसा करो हवेली के पिछे वाले रास्ते पर पहुँचो हम दोनो अभी वही आ रहे हैं.

मैं : अभी नही शाम को जाएँगे.

हीना : पागल हो गये हो शाम को ख़ान ऑर उसके लोग यहाँ आ जाएँगे तब निकलना ना-मुमकिन होगा.

मैं : कुछ नही होगा मुझ पर भरोसा रखो आज ख़ान को मारे बिना मैं भी यहाँ से जाने वाला नही हूँ.

हीना : वो पोलीस वाला है उसको मारोगे तो सारे पोलीस वाले हमारे पिछे पड़ जाएँगे.

मैं : वो पोलीस वाला है तो अब मैं भी कोई मामूली आदमी नही हूँ पोलीस के हर रेकॉर्ड मे हमारा नाम शान से मोस्ट वांटेड की लिस्ट मे टॉप पर लिखा जाता है (मुस्कुरा कर) अब चाहे कुछ भी हो जाए उसको मारे बिना मुझे चैन नही आएगा या तो मर जाउन्गा या उस हरामखोर को मार दूँगा. हीना मैने मेरे परिवार के 2 अज़ीज़ लोग खोए हैं ऑर वो सब उस कमीने की वजह से क्योंकि मैं जाने से पहले अपने परिवार की ज़िम्मेदारी उसको देके गया था. वैसे भी उसके साथ मेरा कुछ पुराना हिसाब भी है वो नुकसान तो मैं उसको माफ़ भी कर देता अगर उसने मेरे परिवार का ख़याल रखा होता. लेकिन यहाँ आके जो मुझे पता चला है उसके बाद अगर मैने उसको ज़िंदा छोड़ दिया तो लानत है मुझ जैसे बेटे पर जो अपने बाप की मौत का बदला भी नही ले सका.

हीना : मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ.

नाज़ी : नीर तुमको क्या लगता है सिर्फ़ ख़ान ही दोषी है बाबा की ऑर फ़िज़ा भाभी की मौत का.... तुम नही जानते क़ासिम ने भी हम पर कम ज़ुल्म नही किए आज अगर फ़िज़ा भाभी हमारे बीच नही है तो वो सिर्फ़ उस कमीने की वजह से नही है.

मैं : (नाज़ी का हाथ पकड़कर उसको खड़ा करते हुए) चलो पहले ये हिसाब ही बराबर कर लेते हैं.

हीना : अब तुम कहाँ जा रहे हो.

मैं : मैं ज़रा क़ासिम से मिल कर आता हूँ... तब तक तुम किसी से कुछ मत कहना बस शादी के लिए तेयार हो जाओ.

हीना : ठीक है लेकिन शाम तक तुम आ जाओगे ना.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म... फिकर मत करो.

हीना : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) ठीक है जैसे तुम कहो.

मैं : नाज़ी तुम नीचे जाओ ऑर छोटे नीर को लेके तुम मुझे हवेली के पिछे वाले गेट पर मिलो.

नाज़ी : अच्छा...

उसके बाद नाज़ी ऑर मैं हीना के कमरे से बाहर निकल आए. नाज़ी वापिस तेज कदमो के साथ सीढ़ियो से नीचे उतर गई ऑर मैं उस दरबान के साथ दूसरी सीढ़िया उतरता हुआ हवेली के दरवाज़े के पिछे के रास्ते पर आ गया.

दरबान : क्या भाई कितनी देर लगा दी तुमने मेरी तो जान निकल रही थी डर से.

मैं : तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया तुमने मेरी बहुत मदद की है ( अपनी जेब से कुछ ऑर पैसे निकालते हुए) ये लो रखो.

दरबान : नही भाई तुमने पहले ही काफ़ी पैसे दे दिए हैं

मैं : अर्रे रख ले यार तेरे काम आएँगे.

दरबान : (नज़रे नीचे करके मुस्कुराते हुए) शुक्रिया... ऑर कोई काम हो तो याद कर लेना.

मैं : फिकर मत करो शाम को ही तुमसे एक ऑर काम है मुझे.

दरबान : अच्छा...

उसके बाद हम दोनो पिच्चे के रास्ते से हवेली के बाहर निकल गये ऑर वापिस हवेली के सामने वाले दरवाज़े पर आ गये वहाँ से मैं अपनी गाड़ी मे बैठ गया ऑर वो दरबान अपनी जगह पर जाके बैठ गया. मैने गाड़ी स्टार्ट की ऑर वापिस हवेली के पिछे के दरवाज़े की तरफ ले गया वहाँ नाज़ी पहले से खड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी उसने एक छोटे से बच्चे को भी पकड़ रखा था. मैने जल्दी से गाड़ी का दरवाज़ा खोला ऑर उसको अंदर आने का इशारा किया वो बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर गाड़ी के अंदर बैठ गई.

नाज़ी : (मुस्कुराते हुए) ये देखो हमारा छोटा नीर ... सुंदर है ना

मैं बिना कुछ बोले उस बच्चे को अपने गोद मे उठाया ऑर उसको देखने लगा बहुत ही मासूम ऑर खूबसूरत था उसका नाक एक दम फ़िज़ा जैसा था ऑर आँखें एक दम मेरे जैसी. आख़िर था भी तो मेरा खून उसको मैं जी भर के देखता रहा ऑर खुशी से मेरी आँखो मे आँसू आ गये मैने उसको अपने चेहरे के करीब किया ऑर उसका माथा चूम लिया ऑर वापिस नाज़ी को पकड़ा दिया. उसके बाद मैने गाड़ी को अपने पुराने घर की तरफ वापिस घुमा दिया जहाँ अब क़ासिम रहता था.

नाज़ी : हम कहाँ जा रहे हैं नीर .

मैं : हम क़ासिम से मिलने जा रहे है.

नाज़ी : नही मैं वहाँ कभी नही जाउन्गी उस ज़लील इंसान का मैं मुँह भी नही देखना चाहती.

मैं : तुम्हारे सामने ही सारा हिसाब बराबर करके जाउन्गा मैं.

नाज़ी बिना कुछ बोले नज़रे झुका कर बैठ गई. कुछ ही देर मे मैने घर के सामने गाड़ी को रोक दिया.

मैं : नाज़ी तुम यही बैठो मैं अभी आता हूँ.

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए ) अच्छा.

उसके बाद मैं गाड़ी से उतरा ऑर जाके घर के दरवाज़े के सामने खड़ा हो गया. मैने 1-2 बार दरवाज़ा खट-खाटाया जब किसी ने दरवाज़ा नही खोला तो मैने एक जोरदार लात दरवाज़े पर मारी जिससे झटके से दरवाज़े का एक हिस्सा टूट गया ऑर हवा मे लटकने लगा दरवाज़ा खुल गया था मैं बिना कुछ बोले अंदर चला गया ऑर चारो तरफ देखने लगा पूरा घर वैसे का वैसा था लेकिन समान काफ़ी बदल गया था टूटी-फूटी चीज़ो की जगह नयी ऑर महँगी चीज़े आ गई थी. अभी मैं घर को देख ही रहा था कि एक औरत मेरी तरफ भाग कर आई.

औरत : कौन है तू ऑर इस तरह मेरे घर मे घुसने की तेरी हिम्मत कैसे हुई.

मैं : (उस औरत को गर्दन से पकड़ कर उपर हवा मे उठाते हुए) जिस घर को तू अपना कह रही है वो मेरा घर है मेरे बाबा का घर जिस पर तू ऑर तेरे मादरचोद शोहार ने क़ब्ज़ा किया है अब या तो तू उसको बाहर निकाल नही तो मैं तेरी जान ले लूँगा.

औरत : (हवा मे पैर चलाते हुए ऑर उंगली से बाबा के कमरे की तरफ इशारा करते हुए) उधर... उधहाअ...उधाअरररर....

मैं : (बिना कुछ बोले उस औरत को छोड़ते हुए) क़ास्स्सिईइम्म्म्म..... बाहर निकल.

मेरे ज़ोर से उसका नाम पुकारने पर क़ासिम शराब के नशे मे धुत्त लड़-खडाता हुआ बाहर आया उसके हाथ मे अब भी शराब की बोतल थी.

क़ासिम : कौन है ओये... नीर तू यहानाअ....

मैं : मेरे घरवाले कहाँ है क़ासिम.

क़ासिम : क्या बताऊ यार सब मर गये मैने उनको बचाने की बहुत कोशिश की बाबा तो मेरे आने से पहले ही गुज़र चुके थे फ़िज़ा ऑर नाज़ी भी एक दिन मर गई.

मैं : (गुस्से मे तेज़ कदमो के साथ क़ासिम के पास जाके उसके मुँह पर थप्पड़ मारते हुए) मादरचोद झूठ बोलता है तूने मारा है मेरी फ़िज़ा को तूने घर से निकाला नाज़ी को दर-दर की ठोकर खाने के लिए साले शरम आती है कि तू उस फरिश्ते जैसे इंसान का बेटा है.

क़ासिम : मैं... मैं... मैं क्या करता मुझे नबीला से प्यार जो था ऑर वैसे भी फ़िज़ा बहुत गिरी हुई लड़की थी साली मेरे जैल जाने के बाद दूसरो के साथ सोती थी हरामजादी.

मैं : भेन्चोद एक बार ऑर तूने फ़िज़ा को गाली निकली तो यही गाढ दूँगा तुझे.

क़ासिम : साली बाज़ारु को बाज़ारु ही कहूँगा ना पता नही किसका पाप मेरे गले डाल रही थी कमीनी.... अच्छा हुआ मर गई. (हँसते हुए)

मैं : (बिना कुछ बोले अपनी गन निकाली ऑर उसके सिर मे 2 फाइयर कर दिए) मादरचोद.... अब बोल... बोल हरामख़ोर फ़िज़ा के बारे मे क्या बोलेगा तू.... (क़ासिम की लाश को लात मारते हुए) ऐसे ही लात मारी थी ना फ़िज़ा को अब मार लात दिखा कितनी ताक़त है तुझ मे दिखा मुझे.

मैं गुस्से मे पागल हो चुका था ऑर लगातार उसके पेट मे ठोकर मार रहा था मुझे इस बात की भी परवाह नही थी कि वो मर चुका है. तभी मुझे नाज़ी की आवाज़ सुनाई दी...

नाज़ी : (रोते हुए) बस करो नीर वो मर चुका है.

मैं : हरामख़ोर फ़िज़ा को बाज़ारु बोलता है.

नाज़ी : चलो यहाँ से तुमको मेरी कसम है चलो.

मैं बिना कुछ बोले हाथ मे गन पकड़े वहाँ से चलने लगा तभी मेरी नज़र उस औरत पर पड़ी जो ज़मीन पर गिरी पड़ी थी मुझे देखते ही वो रेंगते हुए मेरे पास आ गई ऑर मेरे पैर पकड़ लिए.

औरत : मुझे माफ़ कर दो मुझे जाने दो मैने तो कुछ नही किया.

नाज़ी : (उस औरत को लात मारते हुए) क़ासिम को इंसान से जानवर बनाने वाली तू ही है कमीनी.

मैं : (बिना कुछ बोले अपनी गन को दुबारा लोड करते हुए ) चलो नाज़ी... (ये बोलते ही मैने 1 गोली उस औरत के सिर मे भी मार दी ऑर नाज़ी को लेके घर से बाहर निकल आया)

उसके बाद हम दोनो गाड़ी मे आके बैठ गये ऑर नाज़ी ने बच्चे को अपनी गोदी मे रख लिया ऑर फिर से मेरे कंधे पर सिर रख कर रोने लगी.

मैं : चुप हो जाओ नाज़ी सब ठीक हो जाएगा मैं हूँ ना.

नाज़ी : मुझे समझ नही आ रहा मैं क्या कहूँ नीर एक तुम हो जो गैर होके भी हमारे अपने से बढ़कर निकले ऑर एक ये क़ासिम था जो मेरा सगा भाई होके भी इतना बेगैरत निकला.

मैं : (नाज़ी के आँसू सॉफ करते हुए) चलो चुप हो जाओ ऑर मुझे बाबा ऑर फ़िज़ा के पास ले चलो उनको मिट्टी देना तो मेरे नसीब मे नही था कम से कम एक बार उनको देख कर आना चाहता हूँ.

नाज़ी : (चुप होते हुए) चलो गाँव के पुराने कब्रस्तान की तरफ गाड़ी घुमा लो.

उसके बाद हम दोनो पुराने कब्रिस्तान की तरफ चले गये वहाँ बाबा ऑर फ़िज़ा की कब्र के पास बैठ कर मैं काफ़ी देर तक रोता रहा. कुछ देर जी भर के रो लेने के बाद अब काफ़ी बेहतर महसूस कर रहे था मैने उनके लिए खरीदे हुए कपड़े उनकी क़ब्र पर ही रख दिए ऑर नाज़ी के पास वापिस आ गया. नाज़ी गाड़ी के पास खड़ी थी ऑर बच्चे को चुप करवा रही थी क्योंकि शायद बच्चा गोली की आवाज़ से डर गया था ऑर लगातार रो रहा था.

नाज़ी : नीर बहुत भूखा है काफ़ी देर से इसको दूध नही मिला है इसलिए.

मैं : तो अब क्या करे.

नाज़ी : हमें हवेली वापिस जाना होगा वहाँ मेरे कमरे मे इसकी दूध की बोतल है.

मैं : ठीक है हम पहले हवेली ही चलते हैं.

Update-51

Ye mere liye ek or bada jhatka tha kyonki usi ko to main yahan maarne aya tha.

Main : kyaaaa...

Heena : main uss begairat insaan se shaadi nahi karna chahti Neer kyonki main tumse pyaar karti hun uss kameene ne mere abbu ko bhi pata nahi kaise shaadi ke liye raazi kar liya hai jante ho jiss kameene par tum apne parivaar ke jimmedaari chod kar gaye the usne ek baar bhi aake ye nahi dekha ki wo log zinda hai ya mar gaye. bas Doctor rizwana kabhi-kabhi aati thi jo nazi or fiza ko kuch paise de jaya karti thi ghar kharch ke liye uske baad usne bhi aana band kar diya suna hai uski kisi car accident me maut ho gai thi. mujhe wo insaan bilkul pasand nahi hai jo insaan apni jimmedaari thik se nahi sambhaal sakta kya garrenty hai ki wo mera khayal rakh lega.

Main : tum mujhse pyaar karti ho heena...??

Heena : (muskurakar nazare niche karke haa me sir hilate hue) Hhhmmm... kya tumhari jindagi me koi or ladki hai.

Main : (mujhe kuch bhi samajh nahi aa raha tha ki main kya jawab doo lekin heena ka mujh par ahsaan tha isliye maine bina kuch soche samjha usko haa kehne ka faisla kar liya) nahi yaar aisi koi baat nahi hai mujhe bhi tum bahut pasand ho. Lekin tum meri jindagi ke bare me kuch nahi janti ek baar mera sach sun lo uske baad jo tumhara faisla hoga mujhe manzoor hoga.

Heena : mujhe kuch nahi pata mujhe sirf itna pata hai ki main tumse bahut pyaar karti hun tum mujhe jis haal me bhi rakhoge main reh lungi or bahut khush rahungi tumhare sath.

Main : lekin main ek gangster hun or mera naam Neer nahi shera hai.

Heena : to kya hua gangster shaadi nahi karte kya. mujhe usse koi pharak nahi padta main bas tumse pyaar karti hun isse jyaadaa mujhe kuch nahi pata ab bolo mujhse shaadi karoge ya nahi.

Main : (bina kuch bole heena ka chehra pakad kar uske honth chumte hue) mil gaya jawab.

Heena : (aankhen phaad-phad kar mujhe dekhte hue) haaaa....

Tabhi kisi ne darwaza khat-khataya to hum log door hoke baith gaye. Heena ne mujhe dubara parde ke pichhe chhup jane ka ishara kiya or khud darwaza kholne chali gai. uske baad mujhe 2 awaaze sunayi dene lagi kyonki main parde ke pichhe tha isliye kuch bhi dekh nahi paa raha tha inme se ek awaz heena ki thi or dusri naazi ki thi.

Naazi : apane mujhe bulaya choti malkin.

Heena : kaha thi itni der chal andar aa tere liye ek tohfa hai mere pass.

Naazi : Kounsa tohfa malkin?

Heena : pehle tu andar to aa phir dikhati hun or aate hue darwaza band kar dena andar se.

Naazi : achha.

Uske baad kuch der kamre me khamoshi chha gai phir main bahar nikalne ka intzaar karne laga ki kab heena mujhe awaaz de or main bahar nikalu.

Nazi : band kar diya darwaza choti malkin.

Heena : tujhe ek jaadu dikhau.

Nazi : kounsa jadu.

Heena : shart laga le teri aankhen bahar aane ko ho jayengi mera jaadu dekh kar.

Naazi : main kuch samjhi nahi malkin.

Heena : samjhati hun ruk... ab dekh mera jaadu... 1.... 2.... 3.....

3 kehne ke sath hi jhatke se heena ne mere samne aya hua parda hataa diya. Nazi mujhe aankhen phaad-phaad kar dekhne lagi or main bhi itne waqt ke baad nazi ko dekh raha tha isliye usi jagah par kisi pathar ki tarah khada usko dekhne laga. Nazi pehle se bahut kamzor ho gai thi or shayad rou-rou kar uske aankho ke niche kaale daag pad gaye the. Hum dono ki hi aankhon me aansu the or bina palak jhapke ek dusre ko dekh rahe the. Nazi bina kuch soche samjhe bhag kar mere pass ayi or mere gale se lag kar jor-jor se rone lagi. Main bhi uske sir par hath fer kar usko chup karwane laga mujhe samajh nahi aa raha tha ki usko kya kahu or kaha se baat shuru karu. Wo kisi chhote bache ki tarah lagataar sisak-sisak kar mujhse lipatak kar rou rahi thi. Maine heena ko ishara se paani laane ko kaha to wo bhagti hui bed ke pass pada adha glass paani hi utha layi maine wo paani nazi ko pilaya or chup karwaya or usko pakad kar bed tak le aaya or usko bed par bitha diya or khud bhi uske sath baith gaya. Kaafi der rone ke baad nazi ka man halka ho gaya tha isliye ab wo behtar lag rahi thi.

Nazi : tum kaha the itne din Neer tum nahi jante tumhare pichhe hamaare sath kya-kya ho gaya baba or fiza bhabhi... (usne phir se rona shuru kar diya)

Main : main sab jaan gaya hun naazi mujhe heena ne sab bata diya hai. phikar mat karo main ab aa gaya hun naa tumhare sath jo bura hona tha ho gaya ab rone ki unki baari hai jinhone hamaare parivaar ko itna rulaya hai.

Heena : Nazi akeli aayi ho Neer kaha hai.

Main : tumhare samne to baitha hun.

Heena : (hansate hue) tum nahi hmara chhota Neer .

Main : (sawaliya nazaro se heena ko or nazi ko dekhte hue) chhota Neer ...???

Heena : fiza ke bete ka naam bhi hamane Neer hi rakha hai kyonki ye naam hamane nahi balki khud fiza ne hi rakha hai wo chahti thi ki uska beta bada hoke tum jaisa bane.

Nazi : (apne aansu saaf karte hue) main abhi leke aati hun.

Heena : yahan mat leke aana usko... tum aisa karo haveli ke pichhe wale rastey par pohoncho hum dono abhi wahi aa rahe hain.

Main : abhi nahi shaam ko jayenge.

Heena : pagal ho gaye ho shaam ko khan or uske log yahan aa jayenge tab nikalna na-mumkin hoga.

Main : kuch nahi hoga mujh par bharosa rakho aaj khan ko maare bina main bhi yahan se jane wala nahi hun.

Heena : wo police wala hai usko maroge to sare policewale hamaare pichhe pad jayenge.

Main : Won policewala hai to ab main bhi koi mamooli aadmi nahi hun police ke har record me hmara naam shaan se most wanted ki list me top par likha jata hai (Muskurakar) ab chahe kuch bhi ho jaye usko maare bina mujhe chain nahi aayega ya to mar jaunga ya uss haramkhor ko maar dunga. Heena maine mere parivaar ke 2 azeez log khoye hain or wo sab uss kameene ki wajah se kyonki main jane se pehle apne parivaar ki jimmedari usko deke gaya tha. Waise bhi uske sath mera kuch purana hisaab bhi hai wo nuksaan to main usko maaf bhi kar deta agar usne mere parivaar ka khayaal rakha hota. lekin yahan aake jo mujhe pata chala hai uske baad agar maine usko zinda chod diya to lahant hai mujh jaise bete par jo apne baap ki maut ka badla bhi nahi le saka.

Heena : main hamesha tumhare sath hun.

Nazi : Neer tumko kya lagta hai sirf khan hi doshi hai baba ki or fiza bhabhi ki maut ka.... tum nahi jante qasim ne bhi hum par kam zulm nahi kiye Aaj agar fiza bhabhi hamaare bich nahi hai to wo sirf uss kameene ki wajah se nahi hai.

Main : (Nazi ka hath pakadkar usko khada karte hue) chalo pehle ye hisaab hi barabar kar lete hain.

Heena : ab tum kaha jaa rahe ho.

Main : main zra qasim se mil kar aata hun... tab tak tum kisi se kuch mat kehna bas shaadi ke liye teiyaar ho jao.

Heena : thik hai lekin shaam tak tum aa jaoge naa.

Main : (haa me sir hilate hue) hhhmmm... fikar mat karo.

Heena : (haa me sir hilate hue) thik hai jaise tum kaho.

Main : naazi tum niche jao or chhote Neer ko leke tum mujhe haveli ke pichhe wale gate par milo.

Nazi : Achhaa...

Uske baad naazi or main heena ke kamre se bahar nikal aaye. Nazi wapis teaz kadmo ke sath seedhiyo se niche utar gai or main uss darbaan ke sath dusri seedhiya utarta hua haveli ke darwaze ke pichhe ke raste par aa gaya.

Darbaan : kya bhai kitni der laga di tumne meri to jaan nikal rahi thi darr se.

Main : tumhara bahut-bahut shukriya tumne meri bahut madad ki hai ( apni jeb se kuch or paise nikalte hue) ye lo rakho.

Darbaan : nahi bhai tumne pehle hi kaafi paise de diye hain

Main : arre rakh le yaar tere kaam aayenge.

Darbaan : (nazre niche karke muskurate hue) shukriya... or koi kaam ho to yaad kar lena.

Main : fikar mat karo shaam ko hi tumse ek or kaam hai mujhe.

Darbaan : achha...

Uske baad hum dono pichhe ke rastey se haveli ke bahar nikal gaye or wapis haveli ke samne wale darwaze par aa gaye wahan se main apni gaadi me baith gaya or wo darbaan apni jagah par jake baith gaya. Maine gaadi start ki or wapis haveli ke pichhe ke darwaze ki taraf le gaya wahan nazi pehle se khadi mera intzaar kar rahi thi usne ek chhote se bache ko bhi pakad rakha tha. Maine jaldi se gaadi ka darwaza khola or usko andar aane ka ishara kiya wo bina kuch bole muskurakar gaadi ke andar baith gai.

Nazi : (muskurate hue) ye dekho hmara chhota Neer ... sunder hai naa

Main bina kuch bole uss bache ko apne god me uthaya or usko dekhne laga bahut hi masoom or khubsurat tha uska naak ek dam fiza jaisa tha or aankhen ek dam mere jaisi. Akhir tha bhi to mera khun usko main jee bhar ke dekhta raha or khushi se meri aankho me aansu aa gaye maine usko apne chehre ke kareeb kiya or uska matha chum liya or wapis nazi ko pakda diya. Uske baad maine gaadi ko apne purane ghar ki taraf wapis ghuma diya jahan ab qasim rehta tha.

Nazi : hum kaha jaa rahe hain Neer .

Main : hum qasim se milne jaa rahe hai.

Nazi : nahi main wahan kabhi nahi jaungi uss zaleel insaan ka main munh bhi nahi dekhna chahti.

Main : Tumhare samne hi sara hisaab barabar karke jaunga main.

Nazi bina kuch bole nazre jhuka kar baith gai. kuch hi der me maine ghar ke samne gaadi ko rok diya.

Main : naazi tum yhi baitho main abhi aata hun.

Nazi : (haa me sir hilate hue ) achha.

Uske baad main gaadi se utra or jake ghar ke darwaze ke samne khada ho gaya. Maine 1-2 baar darwaza khat-khataya jab kisi ne darwaza nahi khola to maine ek jordaar laat darwaze par maari jisse jhatke se darwaze ka ek hissa toot gaya or hawa me latakne laga darwaza khul gaya tha main bina kuch bole andar chala gaya or charo taraf dekhne laga poora ghar waise ka waisa tha lekin samaan kaafi badal gaya tha tooti-phunti chijo ki jagah nayi or mehangi chije aa gai thi. Abhi main ghar ko dekh hi raha tha ki ek aurat meri taraf bhaag kar aayi.

Aurat : koun hai tu or iss tarah mere ghar me ghusne ki teri himmat kaise hui.

Main : (uss aurat ko garden se pakad kar upar hawa me uthate hue) jis ghar ko tu apna keh rahi hai wo mera ghar hai mere baba ka ghar jis par tu or tere madarchod shohar ne kabza kiya hai ab ya to tu usko bahar nikaal nahi to main teri jaan le lunga.

Aurat : (hawa me pair chalate hue or ungali se baba ke kamre ki taraf ishara karte hue) Uddh... Udhhaaa...udhaaarrrr....

Main : (bina kuch bole uss aurat ko chhorte hue) Qaasssiiiimmmm..... bahar nikal.

Mere jor se uska naam pukarne par qasim sharab ke nashe me dhutt lad-khadata hua bahar aaya uske hath me ab bhi sharaab ki bottal thi.

Qasim : koun hai oye... Neer tu yahanaaa....

Main : mere gharwale kaha hai qasim.

Qasim : kya batau yaar sab mar gaye maine unko bachane ki bahut koshish ki baba to mere aane se pehle hi guzar chuke the fiza or nazi bhi ek din mar gai.

Main : (gusse me tez kadmo ke sath qasim ke pass jake uske munh par thappad marte hue) madarchod jhooth bolta hai tune maara hai meri fiza ko tune ghar se nikala nazi ko dar-dar ki thokar khane ke liye sale sharam aati hai ki tu uss farishtey jaise insaan ka beta hai.

Qasim : main... main... main kya karta mujhe nabeela se pyaar jo tha or waise bhi fiza bahut giri hui ladki thi sali meri jail jane ke baad dusro ke sath soti thi haramzadi.

Main : bhenchod ek baar or tune fiza ko gaali nikali to yhi gaadh dunga tujhe.

Qasim : sali bazaru ko bazaru hi kahunga naa pata nahi kiska paap mere gale daal rahi thi kameeni.... achha hua mar gai. (hansate hue)

Main : (bina kuch bole apni gun nikali or uske sir me 2 fire kar diye) madarchod.... ab bol... bol haramkhor fiza ke bare me kya bolega tu.... (qasim ki laash ko laat marte hue) aise hi laat maari thi naa fiza ko ab maar laat dikha kitni taqat hai tujh me dikha mujhe.

Main gusse me pagal ho chuka tha or lagatar uske pet me thokar maar raha tha mujhe iss baat ki bhi parvaah nahi thi ki wo mar chuka hai. tabhi mujhe nazi ki awaz sunayi di...

Nazi : (rote hue) bas karo Neer wo mar chuka hai.

Main : haramkhor fiza ko bazaru bolta hai.

Nazi : chalo yahan se tumko meri kasam hai chalo.

Main bina kuch bole hath me gun pakde wahan se chalne laga tabhi meri nazar uss aurat par padi jo zameen par giri padi thi mujhe dekhte hi wo rengte hue mere pass aa gai or mere pair pakad liye.

Aurat : mujhe maaf kar do mujhe jane do maine to kuch nahi kiya.

Nazi : (uss aurat ko laat marte hue) qasim ko insaan se janwar banane wali tu hi hai kameeni.

Main : (bina kuch bole apni gun ko dubara load karte hue ) chalo nazi... (ye bolte hi maine 1 goli uss aurat ke sir me bhi maar di or nazi ko leke ghar se bahar nikal aya)

Uske baad hum dono gaadi me aake baith gaye or nazi ne bache ko apni godi me rakh liya or fir se mere kandhe par sir rakh kar rone lagi.

Main : chup ho jao naazi sab thik ho jayega main hun naa.

Nazi : mujhe samajh nahi aa raha main kya kahu Neer ek tum ho jo gair hoke bhi hamaare apne se badhkar nikale or ek ye qasim tha jo mera saga bhai hoke bhi itna begairat nikla.

Main : (nazi ke aansu saaf karte hue) chalo chup ho jao or mujhe baba or fiza ke pass le chalo unko mitti dena to mere naseeb me nahi tha kam se kam ek baar unko dekh kar aana chahta hun.

Nazi : (chup hote hue) chalo gaav ke purane kabrastaan ki taraf gaadi ghuma lo.

Uske baad hum dono purane kabarstaan ki taraf chale gaye wahan baba or fiza ki kabar ke pass baith kar main kaafi der tak rota raha. kuch der jee bhar ke rou lene ke baad ab kaafi behtar mehsoos kar rahe tha maine unke liye khareede hue kapde unki qabar par hi rakh diye or nazi ke pass wapis aa gaya. Nazi gaadi ke pass khadi thi or bache ko chup karwa rahi thi kyonki shayad bacha goli ki awaz se dar gaya tha or lagatar rou raha tha.

Nazi : Neer bahut bhukha hai kaafi der se isko doodh nahi mila hai isliye.

Main : to ab kya kare.

Nazi : hume haveli wapis jana hoga wahan mere kamre me iski doodh ki bottal hai.

Main : thik hai hum pehle haveli hi chalte hain.

 
अपडेट-52

उसके बाद मैं ओर नाज़ी वापिस हवेली के पिछे वेल गेट पर चले गये वहाँ मैने अपनी गाड़ी खड़ी की ऑर नाज़ी के पीछे-पीछे उसके कमरे तक आ गया. हवेली का पिच्छला हिस्सा एक दम खाली रहता था इसलिए वहाँ किसी के आने का भी डर नही था. इसलिए हम बे-ख़ौफ्फ होके नाज़ी के कमरे मे चले गये. नाज़ी का कमरा कुछ ख़ास नही था बहुत छ्होटा सा कमरा था ऑर एक चारपाई के अलावा गिनती का समान था ऑर एक पुराना सा संदूक था जिसमे शायद नाज़ी ऑर बच्चे के कपड़े थे. मैं जाके सामने पड़ी चारपाई पर बैठ गया ऑर नाज़ी बच्चे को बोतल से दूध पिलाने लगी. दूध पी कर कुछ ही देर मे वो सो गया. इसलिए नाज़ी ने बच्चे को चारपाई पर मेरे साथ ही लिटा दिया.

मैं : नाज़ी मुझे भी भूख लगी है कुछ खाने को मिल सकता है.

नाज़ी : (यहाँ वहाँ देखते हुए) तुम रूको मैं अभी तुम्हारे लिए कुछ खाने को लाती हूँ.

उसके बाद मैं वहाँ आराम से बैठ गया अपने बच्चे को देखने लगा ऑर नाज़ी के आने का इंतज़ार करने लगा. कुछ ही देर मे नाज़ी एक प्लेट के साथ कमरे मे वापिस आ गई.

नाज़ी : (मुस्कुराते हुए कमरे मे घुसते हुए)ये लो जी खाना आ गया.

मैं : (बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर नाज़ी से प्लेट लेते हुए) बहुत भूख लगी है यार कल रात से कुछ नही खाया मैने.

नाज़ी : (मुझसे प्लेट लेते हुए) हटो... मैं खिलाती हूँ.

नाज़ी ने मुझसे प्लेट लेली ऑर खुद मुझे अपने हाथो से खाना खिलाने लगी. मैने भी प्लेट से एक रोटी उठाई ऑर सालान के साथ रोटी लगाकर नाज़ी को खिलाने लगा. हम दोनो मुस्कुरा रहे थे ऑर एक दूसरे को खाना खिला रहे थे. खाना खाने के बाद नाज़ी ने बर्तन चारपाई के नीचे रख दिए ऑर हम हाथ मुँह धो कर वापिस चारपाई के पास आ गये ऑर बच्चा सोया हुआ था इस वजह से मैं ज़मीन पर ही लेट गया.

नाज़ी : अर्रे ज़मीन पर क्यो लेट रहे हो.

मैं : बच्चा जाग जाएगा इसलिए...

नाज़ी : रूको मैं नीचे चद्दर बिच्छा देती हूँ फिर तुम आराम से लेट जाओ.

उसके बाद नाज़ी ने ज़मीन पर मेरे लिए पुरानी सी चद्दर बिछा दी ऑर मैं उस पर लेट गया कुछ देर बाद नाज़ी भी मेरे साथ आके लेट गई ऑर मुझे गले से लगा लिया. मैने बिना कुछ बोले उसको एक नज़र देखा ऑर उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसको अपने उपर लिटा लिया वो बिना कुछ बोले मेरे उपर आ गई ऑर मेरे चेहरे को देखने लगी.

नाज़ी : नीर तुम इतना वक़्त कहाँ थे.

मैं : (मैने अपनी सारी असलियत नाज़ी को बता दी)

नाज़ी : हमम्म तभी मैं सोचु इतनी आसानी से गोली कैसे चला दी तुमने.

मैं : क्या तुम मुझसे नाराज़ हो.

नाज़ी : क्यो नाराज़ क्यो होना है.

मैं : मैने क़ासिम को मार दिया इसलिए...

नाज़ी : मेरे बस मे होता तो मैं उसको कब की मार चुकी होती ऑर तुमने कोई ग़लत काम नही किया उसके जैसे घटिया इंसान को जीने का कोई हक़ नही था. लेकिन नीर एक परेशानी हो सकती है.

मैं : क्या....

नाज़ी : आज हीना की शादी है तो यहाँ बहुत से पोलीस वाले आएँगे ना अगर किसी को पता चल गया कि तुमने क़ासिम को मारा है तो वो लोग तुमको पकड़ लेंगे ना...

मैं : (मुस्कुराते हुए) आज कोई भी आ जाए मुझे पकड़ नही पाएगा ऑर तुम देखना शाम को तुम्हारे सामने कितने पोलीस वालों को मार कर जाउन्गा मैं यहाँ से.

नाज़ी : अपना भी ख़याल रखा करो तुमको कुछ हो गया तो तुम्हारे बाद मेरा इस दुनिया मे कौन है बताओ...

मैं : (मुस्कुराते हुए) क्यो ये छोटा नीर है ना...

नाज़ी : मज़ाक मत करो ना तुम्हारी जगह वो थोड़ी ले सकता है. अच्छा हाँ याद आया तुम तो मुझसे नाराज़ थे ना.

मैं : किस बात पर नाराज़ था मुझे तो याद नही.

नाज़ी : भूल गये....

मैं : (सवालिया नज़रों से नाज़ी को देखते हुए) नही... मुझे नही याद...

नाज़ी : तुमको मैने थप्पड़ मारा था अब याद आया.

मैं : (कुछ याद करते हुए) हाँ यार मैं तो भूल ही गया मैं अब भी तुमसे नाराज़ हूँ.

नाज़ी : अच्छा जी तो मनाने के लिए क्या करना पड़ेगा.(मेरे सिर मे अपनी उंगालिया घूमाते हुए)

मैं : जो पहले करती थी. (मुस्कुरा कर)

नाज़ी : तुम कभी नही सुधर सकते ना...

मैं : अब क्या करे फ़ितरत ही कुछ एसी है.

नाज़ी : अच्छा ठीक है लेकिन सिर्फ़ एक मिलेगा.

मैं : ठीक है तुम एक ही दे दो बाकी मैं खुद ले लूँगा.

नाज़ी : पहले अपनी आँखें बंद करो मुझे शरम आती है.

मैं : (आँखें बंद करते हुए) ठीक है....

उसके बाद नाज़ी ने बिना कुछ कहे अपने रसीले होंठ मेरे होंठ पर रख दिए धीरे-धीरे मैने अपने होंठ थोड़े से खोले ऑर उसके होंठों को अपने मुँह मे आने का रास्ता दे दिया ऑर धीरे-धीरे उसके होंठ को चूसने लगा. साथ ही अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख दिए. हम काफ़ी देर एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे. नाज़ी की ऑर मेरी दोनो की साँसे काफ़ी तेज़ हो गई थी इसलिए हमारे चूमने मे भी शिद्दत सी आ गई थी हम दोनो एक दूसरे मे समा जाने को तेयार थे लेकिन वो जगह ऐसी नही थी कि मैं उसके साथ कुछ कर सकता इसलिए ना चाहते हुए भी मैने खुद को काबू किया ऑर उसका चेहरा पकड़ कर खुद से अलग किया लेकिन नाज़ी की आँखें बंद थी ऑर वो बहुत ज़्यादा गरम हो गई थी इसलिए बार-बार मेरे हाथ अपने चेहरे से हटा कर मेरे होंठ चूस रही थी. इसलिए मुझे भी खुद को काबू करना मुश्किल हो रहा था नीचे से मेरा लंड भी पेंट फाड़ने को तेयार था . मैने नाज़ी को कमर से पकड़ कर नीचे लिटा दिया ऑर खुद उसके उपर आ गया. अब मैने उसको शिद्दत से चूम रहा था. वो मुझे चूम रही थी ऑर बॅड-बड़ा रही थी.

नाज़ी : मैने बहुत इंतज़ार किया है तुम्हारा अब मुझसे कभी दूर मत जाना.

मैं : (नाज़ी के होंठ चूमते हुए) नही जाउन्गा.

उसके बाद मैने नाज़ी का चेहरा चूमना शुरू कर दिया ऑर चेहरे से होते हुए मैं उसके गले को चूमने ऑर चूसने लगा. उसने एक नज़र मुझे देखा ऑर खुद ही मेरा एक हाथ अपने मम्मे पर रख दिया ऑर फिर से आँखें बंद कर ली. उसके बाद मैं उसके गले को चूस्ते हुए उसके मम्मे दबाने लगा नाज़ी की सांस अब काफ़ी तेज़ हो गई थी ऑर वो अपने दोनो हाथो से मेरे चेहरे को अपने मम्मों पर दबा रही थी. मैने एक हाथ से कंधे के एक साइड से उसकी कमीज़ को नीचे कर दिया ऑर उसके कंधे को चूमने ऑर चूसने लगा साथ ही अपने एक हाथ उसकी कमीज़ के अंदर डाल कर उसके पेट पर अपना हाथ फेरने लगा. कुछ ही देर मे मेरा हाथ बढ़ते हुए उसके मम्मों के उपर आ चुका था अब मैं उसकी ब्रा के उपर से ही उसके मम्मों को दबा रहा था. नाज़ी नीचे से अपनी गान्ड उठा कर मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़ रही थी जिससे मेरा लंड भी खड़ा होने की वजह से दुखने लगा था. मैने अपना दूसरा हाथ भी उसकी कमीज़ मे डाल दिया ऑर उसकी ब्रा को एक झटके से कमीज़ के अंदर से उपर कर दिया जिससे उसके आधे मम्मे बाहर आ गये. उसके निपल किसी तलवार की तरह एक दम सख़्त हो चुके थे मैने अपनी एक उंगली से उसके एक निपल को हल्का सा हिलाया ऑर फिर अपनी उंगली ऑर अंगूठे की मदद से उसके निपल को पकड़ लिया ऑर मरोड़ने लगा. इससे शायद नाज़ी को बहुत मज़ा आया था इसलिए उसके मुँह से एक तेज़ आआहह निकल गई. उसने जल्दी से दोनो हाथ मेरी पीठ पर रखे ऑर पिछे से मेरी कमीज़ को पेंट मे से बाहर खींचने लगे थोड़े से खिचाव से मेरी कमीज़ पेंट से बाहर आ गई. अब उसने अपने दोनो हाथ मेरी कमीज़ के अंदर डाल कर मेरी पीठ पर अपने दोनो हाथ फेरने ऑर नाख़ून मारने शुरू कर दिए. मैने जल्दी से उसकी कमीज़ सामने से उपर करदी जिसमे नाज़ी ने अपनी गान्ड उठा कर मेरी मदद की .

कमीज़ उपर होते ही उसके गोल-गोल मम्मे बाहर आ गये जिस पर किसी भूखे बच्चे की तरफ मैं टूट पड़ा ऑर उन्हे चूसना शुरू कर दिया. नाज़ी आअहह ओह्ह्ह सस्स्सिईइ करती हुई मेरा सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी. मैं उसकी निपल को चूस ऑर काट रहा था. मुझे उसके निपल चूसने मे परेशानी हो रही थी इसलिए मैने अपने हाथ दोनो पिछे ले जाकर उसकी ब्रा के स्टाप को खोल दिया ऑर फिर से उसके निपल चूसने मे लग गया. मैं जाने कितनी देर तक उसके मम्मों को चूस्ता रहा तभी उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रखा ऑर मुझे रुकने का इशारा किया. मैने अपने चहरा उपर करके उसको देखा ऑर रुक गया ओर उसके उपर से उठ गया मेरे साथ ही वो भी उठ गई ऑर मेरे चेहरे को पकड़ कर फिर से मेरे होंठ चूसने लगी ऑर साथ ही मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी उसका एक हाथ मेरी शर्ट के बटन खोल रहा था ऑर दूसरा हाथ मेरी छाती पर घूम रहा था शर्ट खुलते ही उसने झटके से मेरी शर्ट उतार दी ऑर मेरी छाती पर चूमने लगी.

मैने भी उसकी कमीज़ के दोनो सिरों को पकड़ा ऑर उपर की तरफ खींचा जिस पर उसने अपनी दोनो बाज़ू हवा मे उपर उठा दी पिछे से ब्रा खुली होने की वजह से उसकी कमीज़ के साथ उसकी ब्रा भी उतर गई. उसने एक नज़र मुझे देखा ऑर नज़रे नीची करके अपने दोनो हाथ अपनी छाती पर रख लिए ओर फिर से नीचे लेट गई ऑर अपनी आँखें बंद कर ली. मैं वापिस उसके उपर लेट गया ऑर उसके दोनो हाथ उसकी छाती से हटा कर अपनी पीठ पर रख लिए अब उसके दोनो मम्मे मेरी छाती के नीचे दबे हुए थे ऑर उसके तीखे निपल मुझे अपनी छाती पर चुभ रहे थे. मैं उसका चेहरा चूम रहा था. कुछ देर बाद मैं फिर से नीचे की तरफ बढ़ने लगा ऑर उसके कंधो को चूमने ऑर चूसने लगा. उसका अब एक हाथ मेरी पीठ पर था ऑर दूसरा हाथ पिछे से मेरे सिर को सहला रहा था. उसके निपल इस वक़्त एक दम सख़्त हुए पड़े थे ऑर बाहर को निकले हुए थे. मैने अपना एक हाथ उसके एक मम्मे पर रखा ऑर उसके मम्मों को अपने हाथ से पकड़ लिया. अब मैने पकड़े हुए मम्मे पर अपना चेहरा रखा ऑर उसे शिद्दत से चूसने लगा मैं उसके निपल को मुँह से पकड़ कर चूस रहा था ऑर अपने मुँह मे अंदर की तरफ खींच रहा था जिसकी वजह से उसको इंतेहा मज़ा आ रहा था ऑर उसके मुँह से सस्सस्स सस्स्सस्स निकल रहा था. नीचे से उसने अपनी दोनो टांगे मेरी कमर पर रख ली थी ऑर अपनी टाँगो की मदद से मेरी कमर को जकड लिया था अब पेंट के उपर से मेरे लंड का निशाना उसकी चूत के उपर था जिसको कि वो अपनी गीली हुई चूत से बुरी तरह से रगड़ रही थी. इधर मेरा लंड भी अब बाहर निकलने का रास्ता तलाश कर रहा था इसलिए मैने अपनी कमर को थोड़ा सा उपर उठा कर अपनी बेल्ट ऑर पेंट के बटन को एक साथ खोल दिया जिसको नाज़ी ने अपनी टाँगो की मदद से मेरे घुटने तक नीचे कर दिया. मेरे लंड ने आज़ाद होते ही अंडरवेर मे एक टेंट सा बना लिया था जो सीधा नाज़ी की सलवार के उपर से उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था. नाज़ी को शायद इस ठोकर से बे-इंतेहा मज़ा मिल रहा था इसलिए उसने अपने दोनो हाथ मेरी गान्ड पर रखे ऑर मेरी गान्ड को अपनी चूत पर दबाने लगी. मैने धीरे से नाज़ी के कान मे कहा....

मैं : सलवार भी उतार दूं....

नाज़ी : (बिना कुछ बोले हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

उसके बाद मैने जल्दी से अपना अंडरवेर ऑर पेंट दोनो को अपनी टाँगो से आज़ाद किया ऑर उसकी सलवार को नीचे खींचने लगा नाज़ी ने भी अपनी गान्ड उठा कर सलवार उतारने मे मदद की. अब मैं ऑर नाज़ी दोनो एक दम जनम-जात वाली हालत मे थे. नाज़ी के उपर दुबारा लेट ते ही मुझे ऐसा लगा जैसे लंड को पानी मे डुबो दिया हो क्योंकि नाज़ी की चूत बुरी तरह पानी छोड़ रही थी ऑर पूरी गीली हुई पड़ी थी जिसमे मेरे लंड के उपर वाले हिस्सो को भी अपनी पानी से नहला दिया था मैने थोड़ी सी अपनी गान्ड उपर की ऑर अपने लंड को चूत की छेद पर सेट किया ऑर नाज़ी की तरफ देखने लगा.

नाज़ी : दर्द नही होगा मैने सुना है पहली बार बहुत दर्द होता है?

मैं : हमम्म पहली बार दर्द होता है उसके बाद सब ठीक हो जाता फिर भी तुमको दर्द हो तो बता देना मैं रुक जाउन्गा ठीक है.

नाज़ी : अच्छा....

उसके बाद मैने वापिस अपने लंड को चूत के निशाने पर रखा ऑर चूत की छेद पर लंड से दबाव बनाने लगा. चूत सच मे बहुत टाइट थी मेरे लंड की टोपी भी अंदर नही जा रही थी लंड बार-बार फिसल कर उपर को चला जाता था. इसलिए मैने नाज़ी की दोनो टाँगो को फैला दिया ऑर लंड पर ढेर सारा थूक लगा कर चूत पर थोड़ा सा जोरदार निशाना लगाया जिससे लंड की टोपी अंदर चली गई ऑर नाज़ी के मुँह से एक तेज़ सस्स्स्सस्स की आवाज़ निकली. मैं कुछ देर रुक गया ऑर नाज़ी का दर्द कम होने का इंतज़ार करने लगा साथ ही नाज़ी का चेहरा चूमने लगा. कुछ ही देर मे उसका दर्द गायब हो गया ऑर वो फिर से मेरे होंठों पर टूट पड़ी ऑर बुरी तरह चूसने लगी. जब मैने उसे बेहतर हालत मे महसूस किया तो मैने थोड़ा जोरदार एक ऑर झटका मारा जिससे 1/4 लंड अंदर दाखिल हो गया उसने फिर से दर्द के मारे अपनी आँखें बंद कर ली ऑर मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे रुकने का इशारा किया. मैं फिर से कुछ देर रुक गया ऑर उसके निपल्स को चूसने लगा कुछ ही देर मे वो थोड़ी बेहतर लगने लगी ऑर नीचे से गान्ड हिलाने लगी जिससे मुझे अंदाज़ा हो गया कि अब उसको पहले से बहुत कम दर्द हो रहा है. अब मैं आगे को ज़ोर दे रहा था लेकिन लंड आगे नही जा पा रहा था इसलिए मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया ऑर फिर से ढेर सारा थूक लंड पर लगाया ऑर लंड को चूत मे दाखिल कर दिया लंड के अंदर जाते ही उसके मुँह से फिर से एक दर्द भरी सस्स्सस्स आयईयीई की आवाज़ निकली लेकिन अब पहले जितना दर्द नही था अब मैं अगले झटके के लिए कुछ देर रुक गया ऑर उसके नॉर्मल होने का इंतज़ार करने लगा

जब उसका दर्द पहले से काफ़ी कम हो गया तो मैने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए ऑर उसके होंठ चूसने लगा क्योंकि मैं नही चाहता था कि अगले झटके से वो चीख पड़े ऑर उसकी आवाज़ बाहर कोई सुन ले इसलिए मैने उसको होंठों को अपने होंठों से जकड लिया ऑर नीचे लंड का एक जोरदार झटका मारा जिससे लंड उसकी चूत की सील को तोड़ता हुआ अंदर दाखिल हो गया अब करीब आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत के अंदर था ऑर चूत की दीवारों ने उसे बुरी तरह जकड रखा था. मेरा अंदाज़ा सही था लंड के अंदर जाते ही उसने चीखना चाहा था लेकिन मेरे होंठ उसके होंठ के उपर होने की वजह से उसकी आवाज़ मेरी मुँह मे ही दब गई. वो मेरे कंधे पर ज़ोर-ज़ोर से मारने लगी ऑर साथ मे रोने लगी.

मैं : बस...बस... हो गया पूरा चला गया.

नाज़ी : ससस्स आईइ... बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा

मैं : बस 5 मिंट वेट कर लो लंड अंदर जगह बना लेगा तो दर्द भी ख़तम हो जाएगा.

नाज़ी : ससस्स थोड़ी देर के लिए बाहर निकाल लो मेरी दर्द से जान जा रही है.

मैं : (नाज़ी के आँसू सॉफ करते हुए) बस हो गया ना अभी ठीक हो जाएगा मैने बोला था ना पहली बार दर्द होता है उसके बाद मज़ा आएगा.

उसका ध्यान दर्द से हटाने के लिए मैं वापिस उसके होंठ ऑर चेहरे को चूमने लगा उसको शायद काफ़ी दर्द हो रहा था इसलिए अब वो मेरा साथ नही दे रही थी मैं बिना हिले उसके उपर लेटा रहा ऑर एक बार फिर से उसके निपल्स को चूसने लगा क्योंकि मैं जानता था उसके मम्मे ही उसका सबसे वीक पार्ट है जहाँ उसको सबसे ज़्यादा मज़ा आता है. कुछ ही देर मे उसका दर्द अब पहले से कम हो गया ऑर उसने भी नीचे से अपनी गान्ड को उपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया.

नाज़ी : अब ऑर अंदर मत करना आगे ही बहुत दर्द हो रहा है बस इतने से ही कर लो.

मैं : अच्छा ठीक है ऑर अंदर नही करूँगा.

अब मेरा लंड जितना अंदर था मैने उसी को थोड़ा सा बाहर निकलता ऑर फिर से पहले जितना ही अंदर कर देता कुछ देर उसको झटको से दर्द होता रहा लेकिन फिर उसकी चूत ने मेरे लंड के लिए रास्ता खोल दिया ऑर उसकी चूत की दीवारो की पकड़ भी पहले से ढीली हो गई थी. कुछ ही देर मे उसको भी मज़ा आने लगा अब वो भी मेरा थोड़ा-थोड़ा साथ देने लगी थी लेकिन ज़ोर से झटका नही मारने दे रही थी शायद उसको दर्द हो रहा था. मैं अब अपने लंड को उसकी चूत मे जहाँ तक जा सकता था बिना दर्द के डाला ऑर अपनी गान्ड को गोल-गोल घुमाने लगा जिससे उसको बेहद मज़ा आने लगा. अब उसने भी अपनी दोनो टांगे उठा ली थी ऑर वापिस मेरी कमर पर अपनी दोनो टाँगो को लपेट लिया था.

नाज़ी : हाँ ऐसे ही करो मज़ा आ रहा है झटका मत मारना दर्द होता है.

मैं : हमम्म्मम

कुछ ही देर मे उसको बेहद मज़ा आने लगा ऑर वो फारिग होने के करीब पहुँच गई.

नाज़ी : तेज़ करो मुझे मज़ा आ रहा है.

मैं : हमम्म्म

उसके बाद मैने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू कर दिए कुछ देर झटके लगने के बाद अब उसको भी मज़ा आने लगा था इसलिए अब मैं थोड़ा तेज़-तेज़ झटके मारने लगा ऑर लंड को भी जितना हो सकता था अंदर से अंदर तक डालने लगा. कुछ ही देर मे वो फारिग हो गई उसकी गान्ड हवा मे अकड़ गई ऑर फिर धडाम से ज़मीन पर गिर गई शायद वो फारिग हो चुकी थी इसलिए अब उसकी टांगे भी काँप रही थी. मैं कुछ देर उसकी कमर पर हाथ फेरता रहा ऑर उसके निपल को चूस कर फिर से उससे गरम करने लगा साथ-साथ नीचे से झटके भी मारता रहा. अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे जा रहा था लेकिन उसको दर्द नही हो रहा था बल्कि मज़ा आ रहा था इसलिए मैने उसकी कमर के नीचे हाथ डाला ऑर चूत मे लंड डाले ही पलट गया अब वो मेरे उपर थी ऑर मैं उसके नीचे था उसको कुछ समझ नही आया कि क्या करना है इसलिए वो मुझे सवालिया नज़रों से देखने लगी.

मैं : मेरे लंड पर उपर नीचे करो अपनी चूत को

वो काफ़ी देर कोशिश करती रही लेकिन उससे हुआ नही सही से इसलिए मैने उसको अपने उपर लिटा लिया ऑर उसकी गान्ड पर हाथ रख कर उसकी गान्ड को थोड़ा सा उपर को उठा दिया जिससे मैं नीचे से झटके लगा सकूँ मेरे ऐसा करने से शायद उसको ऑर भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था इसलिए वो मेरे उपर लेटी मेरी छाती को चूम रही थी. कुछ ही देर मे वो फिर से अपनी मंज़िल के करीब आ गई ऑर झटके खाते हुए मेरे उपर ही फारिग होके मेरी छाती पर ढेर हो गई ऑर तेज़-तेज़ साँस लेने लगी. मैं भी अपनी मज़िल के करीब ही था इसलिए मैं रुकना नही चाहता था इसलिए तेज़-तेज़ झटके मारने जारी रखे लेकिन शायद अब उसको दर्द हो रहा था.

नाज़ी : झटके मत दो अब दर्द हो रहा है वैसे ही पहले जैसे गोल-गोल करो उसमे मज़ा आता है.

मैं : ठीक है

उसके बाद मैं अपनी गान्ड को गोल-गोल घुमाने लगा जिससे लंड अंदर चूत की दीवारो टकरा रहा था.

नाज़ी : अंदर जलन हो रही है इसको फिर से गीला कर लो ना.

मैं : हमम्म

मैं लंड को चूत से बाहर निकाला ऑर अपने हाथ पर ढेर सारा थूक इकट्ठा करके अपने लंड पर लगा लिया अब मैने लंड को फिर से चूत के निशाने पर रखा ऑर धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा जिससे नाज़ी को फिर से दर्द होने लगा इसलिए उसने सस्सस्स के साथ अपनी फिर से आँखें बंद कर ली.

लंड डालने के बाद मैं कुछ देर वैसे ही चूत मे लंड डाले पड़ा रहा जब नाज़ी का दर्द कम हो गया तो मैने फिर से झटके लगाने शुरू कर दिए इस बार नाज़ी भी अपनी गान्ड को नीचे की तरफ दबा रही थी ऑर साथ मे मेरे होंठ चूस रही थी हम दोनो ही अब मज़िल के करीब थे कुछ तेज़ ऑर ज़ोरदार झटको के साथ मैं ऑर नाज़ी दोनो एक साथ अपनी मज़िल के करीब पहुँच गये मेरा लंड एक के बाद एक झटके से पिचकारियाँ मारने लगा ऑर मेरा सारा माल नाज़ी की चूत की गहराइयो मे उतरने लगा मेरे लंड की हर पिचकारी के साथ वो मज़े से सस्सस्स अहह सस्स्सस्स ऊओह कर रही थी हम दोनो बुरी तरह हाँफ रहे थे ऑर पसीने से भीगे पड़े थे वो मेरी छाती पर सिर रख कर अपनी साँस को दुरुस्त करने लगी कुछ देर मे ही हम दोनो एक दम नॉर्मल हो गये थे ऑर मेरा लंड भी अपनी खुंराक मिलने के बाद शांत होके बैठ चुका था. साँस के दुरुस्त होने के बाद नाज़ी मेरे उपर से उठी ऑर मेरा लंड पुउउक्ककक की आवाज़ से उसकी चूत से बाहर निकल आया साथ ही मेरा ऑर उसका माल भी उसकी चूत से बहता हुआ मेरी रान पर गिरने लगा. साथ ही मेरे कानो मे नाज़ी की आवाज़ टकराई....

नाज़ी : हाए ये खून कहाँ से आ गया.

मैं : तुम्हारा निकला है... जब पहली बार करते हैं तो निकलता है.

नाज़ी : इतना सारा खून.

मैं : कुछ नही होता पहली बार आता है.

उसके बाद वो बिना कुछ कहे खड़ी हुई ऑर इधर उधर देखने लगी ऑर फिर संदूक खोलकर एक कपड़ा उठा लाई जिससे पहले उसने मेरी रान सॉफ की ऑर फिर उसी कपड़े से अपनी चूत को अच्छे से सॉफ किया मैं लेटा उसको देख रहा था ऑर मुस्कुरा रहा था. वो भी मुझे देख रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी.

नाज़ी : ये क्या किया है.... गंदे कही के.... (मुँह बना कर)

मैं बिना कुछ बोले उसको देख कर मुस्कुरा रहा था. फिर उसने जल्दी से अपने कपड़े उठाए ऑर कमरे मे ही एक कौने पर जाके अपनी चूत को पानी से धो कर सॉफ करने लगी. मैं भी खड़ा हुआ ऑर उसके पिछे चला गया उसने पानी डाल कर मेरे लंड को भी अच्छे से सॉफ किया जो कि उसके खून ऑर हम दोनो के माल से भरा पड़ा था. उसके बाद हमने कपड़े पहने ऑर वापिस उसी चद्दर की एक तरफ जहाँ सॉफ थी वहाँ जाके लेट गये नाज़ी इस बार भी मेरे उपर ही लेटी थी ऑर मेरी छाती पर हाथ फेर रही थी. अब मैं आँखें बंद किए लेटा था ऑर ख़ान के आने का इंतज़ार कर रहा था कि कब ख़ान आए ऑर उसको मार कर मैं अपने बिज़्नेस का लॉस ऑर मेरे परिवार के साथ हुई ज़्यादती का बदला ले सकूँ.

मैं नाज़ी के साथ सेक्स करके काफ़ी थक गया था इसलिए कुछ ही देर मे मुझे नींद ने अपनी आगोश मे ले लिया. अभी मुझे सोए हुए कुछ ही देर हुई थी कि मेरी जेब मे पड़ा मेरा फोन बजने लगा जिससे अचानक मेरी आँख खुल गई. मैने अपने उपर लेटी नाज़ी को जल्दी से साइड पर किया ऑर खुद बैठ कर जेब मे हाथ डाल कर फोन देखने लगा. मैने फोन देखा तो डिसप्ले पर रसूल लिखा था. मैने जल्दी से फोन कान को लगाया ऑर नाज़ी के पास बैठकर ही रसूल से बात करने लगा.

मैं : हां रसूल भाई क्या हाल है.

रसूल: मैं खेरियत से हूँ भाई तुम कैसे हो.

मैं : मैं भी ठीक हूँ. बताओ कैसे फोन किया था.

रसूल : भाई मुझे अभी खबर मिली है कि तुम्हारे शिकार ख़ान की आज शादी है ऑर वो एक गाव मे जा रहा है.

मैं : (हँसते हुए) यार तुम्हारी गर्दन बड़ी लंबी है वहाँ बैठे हुए भी सब जगह मुँह मारते रहते हो.

रसूल: (हँसते हुए) भाई मैं तो तुम्हारा काम ही आसान कर रहा हूँ जल्दी से सुल्तानपूरा के लिए निकल जाओ वहाँ आज ख़ान ज़रूर आएगा शादी करने के लिए.

मैं : तुम्हारे खबरी ने तुमको ये नही बताया कि मैं कहाँ हूँ.

रसूल : कहाँ हो भाई...?

मैं : मैं इस वक़्त ख़ान के कभी ना होने वाले ससुराल मे बैठा उसका इंतज़ार कर रहा हूँ.

रसूल : वाह... क्या बात है च्छा गये यार शेरा भाई.... लेकिन यार तुमको पता कैसे चला कि ख़ान आज सुल्तानपूरा आएगा.

मैं : किस्मत भी कोई चीज़ होती है यार मैं तो यहाँ कुछ ऑर काम से आया था लेकिन साला पंगा कुछ ऑर ही हो गया फिर मुझे ख़ान का पता चला तो मैं यही रुक गया.

रसूल : भाई तुमको वहाँ किस आदमी से काम पड़ गया ऑर वहाँ तुम्हारा कौन है.

मैं : यार ये वही गाव है जहाँ मुझे नयी ज़िंदगी मिली थी मैं तो यहाँ उन फरिश्तो से मिलने आया था लेकिन यहाँ जब ख़ान का पता चला तो मैं यही रुक गया.

रसूल : अच्छा... तो ये बात है.... भाई आपको कुछ बताना था.

मैं : वो छोड़ पहले मेरी बात सुन... तुझसे एक काम था यार

रसूल : हुकुम करो भाई जान हाज़िर है.

मैं : असल मे यार एक पंगा हो गया है.

रसूल : क्या हुआ भाई सब ख़ैरियत तो है.

मैं : (खड़ा होके कमरे से बाहर जाते हुए) यार एक मिंट होल्ड कर...

(नाज़ी को देखते हुए) नाज़ी तुम रूको मैं ज़रा बात करके आया

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

मैं : यार रसूल दरअसल पंगा ये हुआ है कि जिस लड़की से ख़ान की शादी होने वाली है वो लड़की मुझसे प्यार करती है ऑर वो मुझसे शादी करना चाहती है ऑर जिन्होने मेरी जान बचाई थी वो भी अब इस दुनिया मे नही रहे बिचारी उनकी लड़की एक दम अकेली हो गई है.

रसूल : भाई तो इसमे सोचना कैसा आप उनको भी यही ले आओ ना ख़ान को मारने के बाद.

मैं : वही तो बता रहा हूँ ना यार....

रसूल : जी भाई बोलो...

मैं : ख़ान यहाँ अकेला नही आएगा उसके साथ काफ़ी लोग होंगे अगर मुझे कुछ हो जाए तो इन दोनो को मैं वहाँ गाव मे तुम्हारे पास भेज दूँगा तुम इनका ख़याल रखना.

रसूल : भाई कैसी बात कर रहे हो तुमको कुछ नही होगा तुम इनको खुद लेके आओगे ऑर मुझे तुम्हारे निशाने पर पूरा ऐतबार है ऑर फिर मुझे लगा शायद तुमको पता नही होगा इसलिए मैने उस गाव मे अपने कुछ आदमी भी भेजे हैं जो आपकी मदद कर सके.

मैं : (हैरान होते हुए) क्या.... कौन्से आदमी कौन लोग आ रहे हैं यहाँ...

रसूल : भाई मुझे लगा आपको शायद पता नही होगा इसलिए हम ही ख़ान का गेम बजा देंगे इसलिए मैने वहाँ अपने लोग भेज दिए हैं.

मैं : अच्छा किया अब मुक़ाबला बराबरी का होगा वो लोग कब तक यहाँ पहुँच जाएँगे.

रसूल : भाई आप लाला को फोन करके पूछ लो ना अपने तमाम लोगो के साथ वही आ रहा है अब तो शायद पहुँचने वाले भी होंगे.

मैं : अच्छा... चलो ठीक है अब तुम फोन मत करना.... हम जल्द ही मिलेंगे.

Update-52

Uske baad main or nazi wapis haveli ke pichhe wale gate par chale gaye wahan maine apni gaadi khadi ki or nazi ke piche-piche uske kamre tak aa gaya. Haveli ka pichhla hissa ek dam khali rehta tha isliye wahan kisi ke aane ka bhi darr nahi tha. Isliye hum be-khauff hoke nazi ke kamre me chale gaye. Nazi ka kamra kuch khaas nahi tha bahut chhota sa kamra tha or ek charpayi ke alawa ginti ka samaan tha or ek purana sa sandook tha jisme shayad nazi or bache ke kapde the. main jake samne padi charpayi par baith gaya or nazi bache ko bottal se doodh pilane lagi. doodh pee kar kuch hi der me wo so gaya. isliye nazi ne bacho ko charpayi par mere sath hi lita diya.

Main : nazi mujhe bhi bhukh lagi hai kuch khane ko mil sakta hai.

Nazi : (yahan wahan dekhte hue) tum ruko main abhi tumhare liye kuch khane ko laati hun.

Uske baad main wahan araam se baith gaya apne bache ko dekhne laga or naazi ke aane ka intzaar karne laga. Kuch hi der me nazi ek plate ke sath kamre me wapis aa gai.

Nazi : (muskurate hue kamre me ghuste hue)Ye lo ji khana aa gaya.

Main : (bina kuch bol muskurakar nazi se plate lete hue) bahut bhukh lagi hai yaar kal raat se kuch nahi khaya maine.

Nazi : (mujhse plate lete hue) hato... main khilati hun.

Nazi ne mujhse plate leli or khud mujhe apne hatho se khana khilane lagi. maine bhi plate se ek roti uthayi or salaan ke sath roti lagakar naazi ko khilane laga. Hum dono muskura rahe the or ek dusre ko khana khila rahe the. Khana khane ke baad nazi ne bartan charpayi ke niche rakh diye or hum hath munh dho kar wapis charpayi ke pass aa gaye or bacha soya hua tha iss wajah se main zameen par hi let gaya.

Nazi : arre zameen par kyo let rahe ho.

Main : bacha jaag jayega isliye...

Nazi : ruko main niche chaddar bichha deti hun phir tum araam se let jao.

Uske baad nazi ne zameen par mere liye purani si chaddar bicha di or main uss par let gaya kuch der baad nazi bhi mere sath aake let gai or mujhe gale se laga liya. maine bina kuch bole usko ek nazar dekha or uski kamar me hath daal kar usko apne upar lita liya wo bina kuch bole mere upar aa gai or mere chehre ko dekhne lagi.

Nazi : Neer tum itna waqt kaha the.

Main : (maine apni saari asliyat naazi ko bata di)

Nazi : Hhhmmm tabhi main sochu itni asani se goli kaise chala di tumne.

Main : kya tum mujhse naraz ho.

Nazi : kyo naraz kyo hona hai.

Main : maine qasim ko mar diya isliye...

Nazi : mere bas me hota to main usko kab ki maar chuki hoti or tumne koi galat kaam nahi kiya uske jaise ghatiya insaan ko jeene ka koi haq nahi tha. Lekin Neer ek pareshani ho sakti hai.

Main : kyaa....

Nazi : aaj heena ki shaadi hai to yahan bahut se policewale aayenge naa agar kisi ko pata chal gaya ki tumne qasim ko mara hai to wo log tumko pakad lenge naa...

Main : (muskurate hue) aaj koi bhi aa jaye mujhe pakad nahi payega or tum dekhna shaam ko tumhare samne kitne policewalo ko maar kar jaunga main yahan se.

Nazi : apna bhi khayaal rakha karo tumko kuch ho gaya to tumhare baad mera iss duniya me kaun hai bataao...

Main : (muskurate hue) kyo ye chhota Neer hai naa...

Nazi : mazaak mat karo naa tumhari jagah wo thodi le sakta hai. Achha haa yaad aya tum to mujhse naraz the naa.

Main : kis baat par naraz tha mujhe to yaad nahi.

Nazi : bhul gaye....

Main : (sawaliyaa nazaro se nazi ko dekhte hue) nahi... mujhe nahi yaad...

Nazi : tumko maine thappad mara tha ab yaad aya.

Main : (kuch yaad karte hue) haa yaar main to bhul hi gaya main ab bhi tumse naraz hun.

Nazi : achha ji to manane ke liye kya karna padega.(mere sir me apni ungaaliyan ghumate hue)

Main : jo pehle karti thi. (muskurakar)

Nazi : tum kabhi nahi sudhar sakte naa...

Main : ab kya kare fitrat hi kuch esi hai.

Nazi : achha thik hai lekin sirf ek milega.

Main : thik hai tum ek hi de do baaki main khud le lunga.

Nazi : pehle apni aankhen band karo mujhe sharam aati hai.

Main : (aankhen band karte hue) thik hai....

Uske baad naazi ne bina kuch kahe apne raseele honth mere honth par rakh diye dheere-dheere maine apne honth thode se khole or uske honthon ko apne munh me aane ka rasta de diya or dheere-dheere uske honth ko chusne laga. sath hi apne dono hath uski kamar par rakh diye. hum kaafi der ek dusre ke honth chuste rahe. Nazi ki or mere dono ki saanse kaafi tez ho gai thi isliye hamaare chumne me bhi shiddat si aa gai thi hum dono ek dusre me sama jane ko teiyaar the lekin wo jagah aisi nahi thi ki main uske sath kuch kar sakta isliye naa chahte hue bhi maine khud ko kaabu kiya or uska chehra pakad kar khud se alag kiya lekin nazi ki aankhen band thi or wo bahut jyaadaa garam ho gai thi isliye bar-bar mere hath apne chehre se hata kar mere honth chus rahi thi. Isliye mujhe bhi khud ko kaboo karna mushkil ho raha tha niche se mera lund bhi pent phaadne ko teiyaar tha . Maine nazi ko kamar se pakad kar niche lita diya or khud uske upar aa gaya. Ab maine usko shiddat se chum raha tha. wo mujhe chum rahi thi or bad-bada rahi thi.

Nazi : maine bahut intzaar kiya hai tumhara ab mujhse kabhi door mat jana.

Main : (nazi ke honth chumte hue) nahi jaunga.

Uske baad maine naazi ka chehra chumna shuru kar diya or chehre se hote hue main uske gale ko chumne or chusne laga. usne ek nazar mujhe dekha or khud hi mera ek hath apne mamme par rakh diya or phir se aankhen band kar lee. uske baad main uske gale ko chuste hue uske mamme dabane laga naazi ki sans ab kaafi tez ho gai thi or wo apne dono hatho se mere chehre ko apne mummo par daba rahi thi. maine ek hath se kandhe ke ek side se uski kameez ko niche kar diya or uske kandhe ko chumne or chusne laga sath hi apne ek hath uski kameez ke andar daal kar uske pet par apna hath pherne laga. kuch hi der me mera hath badhte hue uske mummo ke upar aa chuka tha ab main uski bra ke upar se hi uske mummo ko daba raha tha. Nazi niche se apni gaanD utha kar mere lund par apni chut ko ragad rahi thi jisse mera lund bhi khada hone ki wajah se dukhne laga tha. Maine apna dusra hath bhi uski kameez me daal diya or uski bra ko ek jhatke se kameez ke andar se upar kar diya jisse uske adha mamme bahar aa gaye. Uske nipple kisi talwaar ki tarrah ek dam sakht ho chuke the maine apni ek ungali se uske ek nipple ko halka sa hilaya or phir apni ungali or anguthe ki madad se uske nipple ko pakad liya or marodne laga. isse shayad nazi ko bahut maza aaya tha isliye uske munh se ek tez aaaahhh nikal gai. usne jaldi se dono hath meri peeth par rakhe or pichhe se meri kameez ko pent me se bahar khinchne lage thode se khichaav se meri kameez pent se bahar aa gai. Ab usne apne dono hath meri kameez ke andar daal kar meri peeth par apne dono hath pherne or nakhun maarne shuru kar diye. Maine jaldi se uski kameez samne se upar kardi jisme nazi ne apni gaanD utha kar meri madad ki kameez upar hote hi uske gol-gol mamme bahar aa gaye jiss par kisi bhukhe bache ki taraf main toot pada or unhe chusna shuru kar diya. Naazi aaahhhhh ohhh ssssiiii karti hui mera sir apne mummo par daba rahi thi. main uski nipple ko chus or kaat raha tha. mujhe uske nipple chusne me pareshani ho rahi thi isliye maine apne hath dono pichhe le jakar uski bra ke stap ko khol diya or phir se uske nipple chusne me lag gaya. main jane kitni der tak uske mummo ko chusta raha tabhi usne apne ek hath mere kandhe par rakha or mujhe rukne ka ishara kiya. maine apne chahra upar karke usko dekha or ruk gaya or uske upar se uth gaya mere sath hi wo bhi uth gai or mere chehre ko pakad kar fir se mere honth chusne lagi or sath hi meri shrt ke button kholne lagi uska ek hath meri shrt ke button khol raha tha or dusra hath meri chaatee par ghum raha tha shrt khulte hi usne jhatke se meri shrt utaar di or meri chaatee par chumne lagi.

Maine bhi uski kameez ke dono seero ko pakada or upar ki taraf khincha jis par usne apni dono baazu hawa me upar utha di pichhe se bra khuli hone ki wajah se uski kameez ke sath uski bra bhi utar gai. usne ek nazar mujhe dekha or nazre nichi karke apne dono hath apni chaatee par rakh liye or phir se niche let gai or apni aankhen band kar lee. main wapis uske upar let gaya or uske dono hath uski chaatee se hata kar apni peeth par rakh liya ab uske dono mamme meri chaatee ke niche dabe hue the or uske teekhe nipple mujhe apni chaatee par chubh rahe the. main uska chehra chum raha tha. kuch der baad main phir se niche ki taraf badhne laga or uske kandho ko chumne or chusne laga. uska ab ek hath meri peeth par tha or dusra hath pichhe se mere sir ko sehla raha tha. uske nipple iss waqt ek dam sakht hue pade the or bahar ko nikle hue the. maine apna ek hath uske ek mamme par rakha or uske mummo ko apne hath se pakad liya. ab maine pakde hue mamme par apna chehra rakha or usse shiddat se chusne laga main uske nipple ko munh se pakad kar chus raha tha or apne munh me andar ki taraf khinch raha tha jiski wajah se usko intehaa maza aa raha tha or uske munh se sssss ssssss nikal raha tha. Niche se usne apni dono taangey meri kamar par rakh lee thi or apni taango ki madad se meri kamar ko jakad liya tha ab pent ke upar se mere lund ka nishana uski chut ke upar tha jisko ki wo apni geeli hui chut se buri tarah se ragad rahi thi. Idhar mera lund bhi ab bahar nikalne ka rasta talaash kar raha tha isliye maine apni kamar ko thoda sa upar utha kar apni belt or pent ke button ko ek sath khol diya jisko naazi ne apni taango ki madad se mere ghutne tak niche kar diya. Mere lund ne azaad hote hi underwear me ek tent sa bana liya tha jo seedha nazi ki salwar ke upar se uski chut par thokar maar raha tha. Nazi ko shayad iss thokar se be-intehaa maza mil raha tha isliye usne apne dono hath meri gaanD par rakhe or meri gaanD ko apni chut par dabane lagi. Maine dheere se naazi ke kaan me kaha....

Main : salwar bhi utaar doo....

Nazi : (bina kuch bole haa me sir hilate hue) Hhhmmm

Uske baad maine jaldi se apna underwear or pent dono ko apni taango se azaad kiya or uski salwar ko niche khinchane laga nazi ne bhi apni gaanD uthke salwar utarne me madad ki. ab main or nazi dono ek dam janam-jaat wali haalat me the. Nazi ke upar dubara let te hi mujhe aisa laga jaise lund ko paani me dubo diya ho kyonki naazi ki chut buri tarah paani chod rahi thi or poori gili hui padi thi jisme mere lund ke upar wale hisso ko bhi apni paani se nahlaa diya tha maine thodi si apni gaanD upar ki or apne lund ko chut ki ched par set kiya or naazi ki taraf dekhne laga.

Nazi : Dard nahi hoga maine suna hai pehli bar bahut dard hota hai?

Main : Hhhmmm pehli baar dard hota hai uske baad sab thik ho jata phir bhi tumko dard ho to bata dena main ruk jaunga thik hai.

Nazi : achhaa....

Uske baad maine wapis apne lund ko chut ke nishane par rakha or chut ki ched par lund se dabav banane laga. Chut sach me bahut tight thi mera lund ki topi bhi andar nahi jaa rahi thi lund bar-bar phisal kar upar ko chala jata tha. isliye maine nazi ki dono taango ko faila diya or lund par dher sara thook laga kar chut par thoda sa jordaar nishana lagaya jisse lund ki topi andar chali gai or nazi ke munh se ek tez sssssss ki awaaz nikali. main kuch der ruk gaya or nazi ka dard kam hone ka intzaar karne laga sath hi nazi ka chehra chumne laga. kuch hi der me uska dard gayab ho gaya or wo phir se mere honthon par toot padi or buri tarah chusne lagi. jab maine usse behtar halat me mehsoos kiya to maine thoda jordaar ek or jhatka maara jisse 1/4 lund andar dakhil ho gaya usne phir se dard ke maare apni aankhen band kar lee or mere kandhe par hath rakh kar mujhe rukne ka ishara kiya. main phir se kuch der ruk gaya or uske nipples ko chusne laga kuch hi der me wo thodi behtar lagne lagi or niche se gaanD hilane lagi jisse mujhe andaza ho gaya ki ab usko pehle se bahut kam dard ho raha hai. ab main aggey ko jor de raha tha lekin lund aagey nahi jaa paa raha tha isliye maine apna lund bahar nikaal liya or phir se dher sara thook lund par lagaya or lund ko chut me dakhil kar diya lund ke andar jaate hi uske munh se phir se ek dard bhari ssssss aayyiiiii ki awaaz nikali lekin ab pehle jitna dard nahi tha ab main agle jhatke ke liye kuch der ruk gaya or uske normal hone ka intzaar karne laga jab uska dard pehle se kaafi kam ho gaya to maine apne honth uske honth par rakh diye or uske honth chusne laga kyonki Main nahi chahta tha ki agle jhatke se wo cheekh pade or uski awaaz bahar koi sun le isliye maine usko honthon ko apne honthon se jakad liya or niche lund ka ek jordaar jhatka maara jisse lund uski chut ki seal ko todta hua andar dakhil ho gaya ab kareeb adha se jyaadaa lund uski chut ke andar tha or chut ki dewaaro ne usse buri tarah jakad rakha tha. Mera andaza sahi tha lund ke andar jaate hi usne cheekhna chaha tha lekin mere honth uske honth ke upar hone ki wajah se uski awaz meri munh me hi dab gai. wo mere kandhe par jor-jor se marne lagi or sath me rone lagi.

Main : bas...bas... ho gaya poora chala gaya.

Nazi : ssss aayii... bahar nikalo bahut dard ho raha

Main : bas 5 mint wait kar lo lund andar jagah bana lega to dard bhi khatam ho jayega.

Nazi : ssss thodi der ke liye bahar nikaal lo meri dard se jaan jaa rahi hai.

Main : (naazi ke aansu saaf karte hue) bas ho gaya naa abhi thik ho jayega maine bola tha naa pehli baar dard hota hai uske baad maza aayega.

Uska dhyaan dard se hatane ke liye main wapis uske honth or chehre ko chumne laga usko shayad kaafi dard ho raha tha isliye ab wo mera sath nahi de rahi thi main bina hile uske upar leta raha or ek baar phir se uske nipples ko chusne laga kyonki main janta tha uske mamme hi uska sabse weak part hai jahan usko sabse jyaadaa maza aata hai. kuch hi der me uska dard ab pehle se kam ho gaya or usne bhi niche se apni gaanD ko upar ki taraf uthana shuru kar diya.

Nazi : ab or andar mat karna aagey hi bahut dard ho raha hai bas itne se hi kar lo.

Main : achha thik hai or andar nahi karunga.

Ab mera lund jitna andar tha main usi ko thoda sa bahar nikalta or phir se pehle jitna hi andar kar deta kuch der usko jhatko se dard hota raha lekin phir uski chut ne mere lund ke liye rasta khol diya or uski chut ki deewaro ki pakad bhi pehle se dheeli ho gai thi. Kuch hi der me usko bhi maza aane laga ab wo bhi mera thoda-thoda sath dene lagi thi lekin jor se jhatka nahi marne de rahi thi shayad usko dard ho raha tha. Main ab apne lund ko uski chut me jahan tak jaa sakta tha bina dard ke daala or apni gaanD ko gol-gol ghumane laga jisse usko behad maza aane laga. ab usne bhi apni dono taangey utha lee thi or wapis meri kamar par apni dono taango ko lapet liya tha.

Nazi : haa aise hi karo maza aa raha hai jhatka mat marna dard hota hai.

Main : Hhhmmmmm

Kuch hi der me usko behad maza aane laga or wo farig hone ke kareeb pohonch gai.

Nazi : Tez karo mujhe maza aa raha hai.

Main : hhmmmm

Uske baad maine dheere-dheere jhatke lagane shuru kar diye kuch der jhatke lagne ke baad ab usko bhi maza aane laga tha isliye ab main thoda tez-tez jhatke maarne laga or lund ko bhi jitna ho sakta tha andar se andar tak daalne laga. kuch hi der me wo farig ho gai uski gaanD hawa me akad gai or phir dhadaam se zameen par gir gai shayad wo farig ho chuki thi isliye ab uski taangey bhi kaamp rahi thi. main kuch der uski kamar par hath ferta raha or uske nipple ko chus kar phir se usse garam karne laga sath-sath niche se jhatke bhi marta raha. Ab mera poora lund uski chut me jaa raha tha lekin usko dard nahi ho raha tha balki mazaa aa raha tha isliye maine uski kamar ke niche hath dala or chut me lund dale hi palat gaya ab wo mere upar thi or main uske niche tha usko kuch samajh nahi aya ki kya karna hai isliye wo mujhe sawaliya nazaro se dekhne lagi.

Main : mere lund par upar niche karo apni chut ko

Wo kaafi der koshish karti rahi lekin usse hua nahi sahi se isliye maine usko apne upar lita liya or uski gaanD par hath rakh kar uski gaanD ko thoda sa upar ko utha diya jisse main niche se jhatke laga saku mere aisa karne se shayad usko or bhi jyaadaa maza aa raha tha isliye wo mere upar leti meri chaatee ko chum rahi thi. kuch hi der me wo phir se apni manzil ke kareeb aa gai or jhatke khate hue mere upar hi farig hoke meri chaatee par dher ho gai or tez-tez saans lene lagi. Main bhi apni mazil ke kareeb hi tha isliye main rukna nahi chahta tha isliye tez-tez jhatke maarne jaari rakhe lekin shayad ab usko dard ho raha tha.

Nazi : jhatke mat do ab dard ho raha hai waise hi pehle jaise gol-golo karo usme maza aata hai.

Main : thik hai

Uske baad main apni gaanD ko gol-gol ghumane laga jisse lund andar chut ki deewaro takra raha tha.

Nazi : andar jalan ho rahi hai isko phir se geela kar lo naa.

Main : Hhhmmm

Main lund ko chut se bahar nikala or apne hath par dher sara thook ikatha karke apne lund par laga liya ab maine lund ko phir se chut ke nishane par rakha or dheere-dheere andar bahar karne laga jisse nazi ko phir se dard hone lagi isliye usne sssss ke sath apni phir se aankhen band kar lee.

Lund dalne ke baad main kuch der waise hi chut me lund daale pada raha jab nazi ka dard kam ho gaya to maine phir se jhatke lagane shuru kar diye iss baar nazi bhi apni gaanD ko niche ki taraf daba rahi thi or sath me mere honth chus rahi thi hum dono hi ab mazil ke kareeb the kuch tez or zordaar jhatko ke sath main or nazi dono ek sath apni mazil ke kareeb pohonch gaye mera lund ek ke baad ek jhatke se pichariyaan maarne laga or mera sara maal nazi ki chut ki gehrayiyo me utarne laga mere lund ki har pichari ke sath wo maze se sssss ahhhh ssssss ooohh kar rahi thi hum dono buri tarah haanf rahe the or paseene se bheege pade the wo meri chaatee par sir rakh kar apni saans ko durust karne lagi kuch der me hi hum dono ek dam normal ho gaya the or mera lund bhi apni khunraak milne ke baad shaant hoke baith chuka tha. saans ke durust hone ke baad naazi mere upar se uthi or mera lund puuukkkk ki awaz se uski chut se bahar nikal aya sath hi mera or uska maal bhi uski chut se behta hua meri raan par girne laga. sath hi mere kaano me nazi ki awaaz takrayi....

Nazi : haaye ye khun kaha se aa gaya.

Main : tumhara nikla hai... jab pehli baar karte hain to nikalta hai.

Nazi : itna sara khun.

Main : kuch nahi hota pehli baar ata hai.

Uske baad wo bina kuch kahe khadi hui or idhar udhar dekhne lagi or phir sandook kholkar ek kapda utha layi jisse pehle usne meri raan saaf ki or phir usi kapde se apni chut ko achhe se saaf kiya main leta usko dekh raha tha or muskura raha tha. wo bhi mujhe dekh rahi thi or muskura rahi thi.

Nazi : ye kya kiya hai.... Gande kahi ke.... (munh bana kar)

Main bina kuch bole usko dekh kar muskura raha tha. Phir usne jaldi se apne kapde uthaye or kamre me hi ek koune par jake apni chut ko paani se dho kar saaf karne lagi. main bhi khada hua or uske pichhe chala gaya usne paani daal kar mere lund ko bhi achhe se saaf kiya jo ki uske khun or hum dono ke maal se bhara pada tha. uske baad hamane kapde pehne or wapis usi chaddar ki ek taraf jahan saaf thi wahan jake let gaye nazi iss baar bhi mere upar hi leti thi or meri chaatee par hath fer rahi thi. Ab main aankhen band kiye leta tha or khan ke aane ka intzaar kar raha tha ki kab khan aaye or usko maar kar main apne business ka loss or mere parivaar ke sath hui zadti ka badla le saku.

Main nazi ke sath sex karke kaafi thakk gaya tha isliye kuch hi der me mujhe neend ne apni aagosh me le liya. abhi mujhe soye hue kuch hi der hui thi ki meri jeb me pada mera phone bajne laga jisse achanak meri jaag khul gai. Maine apne upar leti nazi ko jaldi se side par kiya or khud baith kar jeb me hath daal kar phone dekhne laga. Maine phone dekha to display par rasool likha tha. Maine jaldi se phone kaan ko lagaya or nazi ke pas baithkar hi rasool se baat karne laga.

Main : Haa rasool bhai kya haal hai.

Rasool: main kheriyat se hun bhai tum kaise ho.

Main : main bhi thik hun. Bataao kaise phone kiya tha.

Rasool : bhai mujhe abhi khabar mili hai ki tumhara shikaar khan ki aaj shaadi hai or wo ek gaav me jaa raha hai.

Main : (hansatey hue) yaar tumhari garden badi lambi hai wahan baithe hue bhi sab jagah munh maarte rehte ho.

Rasool: (hansatey hue) Bhai main to tumhara kaam hi asaan kar raha hun jaldi se sultaanpura ke liye nikal jao wahan aaj khan jarur aayega shaadi karne ke liye.

Main : Tumhare khabari ne tumko ye nahi bataayaa ki main kaha hun.

Rasool : kaha ho bhai...?

Main : Main iss waqt khan ke kabhi naa hone wale sasural me baitha uska intzaar kar raha hun.

Rasool : waah... kya baat hai Chha gaye yaar shera bhai.... Lekin yaar tumko pata kaise chala ki khan aaj sultanpura ayega.

Main : kismat bhi koi chij hoti hai yaar main to yahan kuch or kaam se aya tha lekin sala panga kuch or hi ho gaya phir mujhe khan ka pata chala to main yhi ruk gaya.

Rasool : bhai tumko wahan kis aadmi se kaam pad gaya or wahan tumhara koun hai.

Main : yaar ye wahi gaav hai jahan mujhe nayi zindagi mili thi main to yahan unn farishto se milne aya tha lekin yahan jab khan ka pata chala to main yhi ruk gaya.

Rasool : Achha... to ye baat hai.... bhai aapko kuch batana tha.

Main : Wo chod pehle meri baat sunn... tujhse ek kaam tha yaar

Rasool : hukum karo bhai jaan hazir hai.

Main : Asal me yaar ek panga ho gaya hai.

Rasool : kya hua bhai sab khairiyat to hai.

Main : (khada hoke kamre se bahar jate hue) Yaar ek mint hold kar...

(Nazi ko dekhte hue) Nazi tum ruko main zra baat karke aaya

Nazi : (haa me sir hilate hue) Hhhmmm

Main : yaar rasool darasal panga ye hua hai ki jis ladki se khan ki shaadi hone wali hai wo ladki mujhse pyaar karti hai or wo mujhse shaadi karna chahti hai or jinhone meri jaan bachayi thi wo bhi ab iss duniya me nahi rahe bichari unki ladki ek dam akeli ho gai hai.

Rasool : bhai to isme sochna kaisa aap unko bhi yhi le aao naa khan ko marne ke baad.

Main : wahi to bata raha hun naa yaar....

Rassol : ji bhai bolo...

Main : khan yahan akela nahi aayega uske sath kaafi log honge agar mujhe kuch ho jaye to inn dono ko main wahan gaav me tumhare pass bhej dunga tum inka khayaal rakhna.

Rasool : bhai kaisi baat kar rahe ho tumko kuch nahi hoga tum inko khud leke aaoge or mujhe tumhare nishane par poora aitbaar hai or fir mujhe laga shayad tumko pata nahi hoga isliye maine uss gaav me apne kuch aadmi bhi bheje hain jo aapki madad kar sake.

Main : (hairaan hote hue) kya.... kounse aadmi koun log aa rahe hain yahan...

Rasool : bhai mujhe laga aapko shayad pata nahi hoga isliye hum hi khan ka game baja denge isliye maine wahan apne log bhej diye hain.

Main : achha kiya ab muqabla barabari ka hoga wo log kab tak yahan pohonch jayenge.

Rasool : bhai aap lala ko phone karke puch lo naa apne tamaam logo ke sath wahi aa raha hai ab to shayad pohonchne wale bhi honge.

Main : achha... chalo thik hai ab tum phone mat karna.... hum jald hi milenge.

 


अपडेट-53

उसके बाद मैने फोन रख दिया ऑर आने वाले लम्हे के बारे मे सोचने लगा शाम हो चुकी थी पूरी हवेली किसी नयी-नवेली दुल्हन की तरह रोशनी से जग-मगा रही थी ख़ान के भी आने का वक़्त हो गया था. अभी मैं अपनी सोचो मे गुम था कि पिछे से अचानक मुझे नाज़ी ने पकड़ लिया ऑर मेरी पीठ पर अपना सिर रख लिया ओर वैसे ही मुझसे चिपक कर खड़ी हो गई.

नाज़ी : मैने सब सुन लिया है... जो कुछ तुम अपने दोस्त को कह रहे थे

मैं : (पलट ते हुए) क्या सुन लिया है...

नाज़ी : मैं तुमको एक बात बहुत अच्छे से बता देती हूँ मेरा इस दुनिया मे तुम्हारे ऑर नीर के सिवाए कोई नही है अगर तुमने मुझे अकेले कही भेजने का सोचा भी तो मैं खुद अपनी जान ले लूँगी.

मैं : बकवास मत करो.... मैने जो भी किया वो सिर्फ़ तुम्हारी हीना की ऑर नीर की सेफ्टी के लिए किया तुम जानती हो बाहर ख़ान के कितने लोग आ गये होंगे. बाहर कुछ भी हो सकता है यार.

नाज़ी : मुझे नही पता जाएँगे तो सब साथ जाएँगे नही तो मैं भी नही जाउन्गी.

मैं : यार नीचे जब गोलियाँ चलना शुरू होंगी तो मैं तुम तीनो को संभालूँगा या उनका मुक़ाबला करूँगा.

नाज़ी : (मुँह फेरते हुए) मुझे कुछ नही पता...

मैं : अच्छा बाबा ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी... अब तो खुश....

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाके मुस्कुराते हुए मुझे गले से लगा कर) हमम्म...

तभी पटाखो की ऑर ढोल के नगाडो की आवाज़ सुनाई देने लगी ऑर लोगो का शोर-शराबा भी सुनाई देने लगा.

मैं : लगता है वो लोग आ गये हैं... चलो अब तुम जल्दी से तेयार हो जाओ तब तक मैं गाड़ी मे से असला ऑर गोलियाँ ले आता हूँ ठीक है.

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) अच्छा...

मैं : कुछ भी हो जाए तुम हवेली की उस तरफ नही आओगी समझ गई तुम नीर को लेके गाड़ी मे बैठो मैं हीना को लेके आता हूँ तुम गाड़ी के पास ही हमारा इंतज़ार करना....

नाज़ी : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) ठीक है.... अपना ख़याल रखना.

मैने बिना कुछ बोले एक नज़र नाज़ी को मुस्कुरा कर देखा फिर पलटकर जहाँ नीर सोया हुआ था वहाँ गया उसके माथे को चूमा ऑर वापिस दरवाज़ा खोलकर तेज़ कदमो के साथ बाहर की तरफ निकल गया. छोटे गेट से बाहर जाने से पहले मैने एक बार फिर पलट कर देखा नाज़ी अब भी मुझे ही देख रही थी उसके चेहरे से मेरे लिए फिकर सॉफ दिखाई दे रहा था. उसके बाद मैं बाहर आया ऑर अपनी गाड़ी की डिग्जी मे से हथियार निकालने लगा. मैने जल्दी से अपना बॅग खोला उसमे से जल्दी से एक पेन ऑर एक काग़ज़ का टुकड़ा निकाला जिस पर मैने अपने गाव तक जाने का पता ऑर रास्ता लिखा ऑर उससे अपनी जेब मे डाल लिया. मैं मन ही मन दुआ करने लगा कि इसकी ज़रूरत ना पड़े. अब मेरा एक ही टारगेट था ख़ान ऑर उसके आदमी इसलिए अब मेरी कही हुई बात पूरी करने का वक़्त आ गया था.... या तो मरना था या मार देना था. मैने अपने बॅग मे से अपने कपड़े एक साइड पर किए ऑर जल्दी से 2 पिस्टल उठाई ऑर उसकी मग्जिन चेक करके मैने दोनो पिस्टल को अपने जूतो की ज़ुराबो मे डाल लिया एक रिवॉल्वार मे मैने गोलियाँ भरी ऑर उसके अपनी पेंट मे बेल्ट के पास फिट कर लिया. अब मेरे पास बॅग मे सिर्फ़ 3 पिस्टल ही बची जिनमे से एक को मैने कार के आगे वाले हिस्से मे स्टारिंग व्हील के पास रख दिया ऑर बाकी 2 पिस्टल को मैने अपनी पेंट के पिछे वाले हिस्से मे टाँग लिया ऑर अपनी शर्ट बाहर निकाल ली जिससे किसी को मेरी पिस्टल नज़र ना आए. उसके बाद मैने गाड़ी की डिग्जी को बंद किया फिर मैने जल्दी से लाला को फोन किया कुछ ही पल मे उसने फोन उठा लिया.

मैं : कहाँ है लाला...

लाला :(खुश होते हुए) भाई ख़ान का काम करने जा रहा हूँ... सुल्तानपूरा गाव मे.

मैं : ख़ान को मारने के लिए...

लाला : हाँ भाई... क्यो मानते हो ना अपने भाई के दिमाग़ को... तुम उसको कहाँ-कहाँ ढूँढ रहे थे ऑर मैने उसको एक झटके मे ढूँढ लिया.

मैं : मैं सुल्तानपूरा मे ही हूँ तुम जल्दी से जल्दी यहाँ पहुँचो शाम होने वाली है ऑर मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा हूँ.

लाला : भाई इसका मतलब तुम पहले से वही मोजूद हो.

मैं : लाले जिस स्कूल मे तू मुझे पढ़ा रहा है वहाँ का प्रिन्सिपल आज तक मुझसे ट्यूशन लेता है जो तुम लोग सोचते हो उससे पहले वो बात मैं सोच चुका होता हूँ.

लाला : (हँसते हुए) बस भाई अब तो गाव के पास ही हैं हम कुछ ही देर मे पहुँच जाएँगे आप बस हमारा इंतज़ार करो हम कुछ ही देर मे आ रहे हैं.

मैं : ठीक है तुम अंदर ही आ जाना मैं अंदर जा रहा हूँ.

लाला : पागल जैसी बात मत कर यार भाई तू अकेला है अंदर ख़ान के बहुत लोग होंगे.

मैं : अब तो कितने भी लोग हो... बाबा की दुआ से आज मैं सब पर अकेला भी भारी हूँ.

लाला : भाई बात तो सुनो...

उसके बाद मैने बिना उसकी कोई बात सुने फोन रख दिया ऑर भागता हुआ हवेली की आगे की तरफ चला गया जहाँ गेट पहले से खुला हुआ था ऑर काफ़ी लोग दरवाज़े के सामने खड़े थे. मैं इन लोगो के होते हुए अंदर नही जा सकता था क्योंकि लोग मेरी उम्मीद से भी ज़्यादा थे. मैं जल्दी से एक पेड़ के पिछे छिप गया ऑर सही मोक़े का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद एक पोलीस वाला मुझे पेड़ की जानिब आता हुआ दिखाई दिया इसलिए मैं जल्दी से पेड़ का तना पकड़कर उपर चढ़ गया. वो आदमी झून्मता हुआ आ रहा था शायद वो नशे मे था उसने चारो तरफ देखा ऑर फिर अपनी पेंट की ज़िप्प खोलकर उसी पेड़ के सामने पेशाब करने लगा जिसके उपर मैं बैठा था. मुझे एक तरक़ीब सूझी मैने जल्दी से अपनी टांगे पेड़ की शाख मे फसाई ऑर उल्टा होके उस आदमी को गर्दन से पकड़ लिया ऑर उपर को खींचकर उसकी गर्दन को झटके से मरोड़ दिया वो आदमी बिना कोई आवाज़ किए वही मर गया उसके बाद मैने उस आदमी को भी पेड़ के उपर खींच लिया. फिर उसके सारे कपड़े उतारे ऑर उसके कपड़े खुद पहन लिए वो आदमी वर्दी मे था इसलिए अगर उसकी वर्दी मैं पहन लेता तो मुझ पर कोई भी शक़ नही कर सकता था. लेकिन समस्या अब पिस्टल को रखने का था क्योंकि शर्ट अंदर करने की वजह से पिस्टल बाहर से दिखाई दे सकती थी इसलिए मैने 2 पिस्टल को वापिस अपने जूतो मे डाल लिया ऑर 2 पिस्टल को शर्ट के अंदर वैसे ही रख लिया ऑर 1 पिस्टल को मैने अपनी टोपी के नीचे रख लिया. अब 3 पिस्टल बची थी 2 मेरी खुद की ऑर एक उस पोलिसेवाले की सर्विस रिवॉल्वार जो शायद अंदर मेरे काम आ सकती थी. मैं जल्दी से पेड़ से नीचे उतरा ऑर 2 रिवॉल्वार को वही पास ही एक झाड़ियो मे रख दिया ऑर 1 उस पोलिसेवाले की रिवॉल्वार जो उसकी वर्दी मे ही फिट थी उसको वैसे ही रहने दिया. अब मैं बिना कोई आवाज़ किए सामने खड़ी भीड़ मे शामिल हो गया ऑर उन लोगो के साथ मैं भी अंदर घुस गया अब मैं चारो तरफ देख रहा था लेकिन मेरी नज़रें सिर्फ़ ख़ान को ही ढूँढ रही थी. तभी एक पोलीसवाला मेरे पास आया ऑर मेरे कंधे पर हाथ रख दिया.

आदमी: भाई माचिस है क्या सिग्रेट जलानी है.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) नही... (मैं नही चाहता था कि वो पोलिसेवला मेरा चेहरा देखे इसलिए उसकी तरफ पीठ करके ही खड़ा रहा)

आदमी : कौन्से डिपार्टमेंट से हो जनाब....

मैं : नारकॉटैक्स डिपार्टमेंट

आदमी : नारकॉटैक्स से तो मैं भी हूँ क्या नाम है भाई (मुझे पलट ते हुए)

मैं : (उसकी तरफ पलट ते हुए) शेराअ....

आदमी : (अपनी पिस्टल निकाल कर मेरे सिर पर तानते हुए) कौन है ओये तू...

मैं : (उसके मुँह पर हाथ रख कर उसके सिर मे ज़ोर से कोहनी मारते हुए) तेरा बाप...

वो आदमी बेहोश होके वही गिर गया वहाँ काफ़ी लोग थे इसलिए मैने उसको कंधे का सहारा देके अपने साथ खड़ा कर लिया ऑर उसको कही गिराने की जगह देखने लगा. पास ही मुझे एक बड़ा सा फूल दान नज़र आया मैने उसको उसके पीछे गिरा दिया ऑर अंदर चला गया जहाँ जशन का महॉल था सब लोग हाथ मे जाम लिए खड़े थे. मेरी नज़रें चारो तरफ ख़ान को ढूँढ रही थी लेकिन ख़ान मुझे कही भी नज़र नही आ रहा था. मैं वक़्त ज़ाया नही करना चाहता था इसलिए हॉल के चारो तरफ घूमने लगा ऑर वहाँ खड़े लोगो के हथियारो का जायेज़ा लेने लगा जिससे मुझे ये पता चल सके कि मुझ पर कितने लोग गोलियाँ चला सकते हैं. वहाँ ज़्यादातर लोग तो सादे कपड़े मे ही नज़र आ रहे थे सिर्फ़ गिनती के कुछ ही लोग थे जो मेरी तरह वर्दी मे मोजूद थे. मैं नही चाहता था कि जब मैं ख़ान पर गोली चलाऊ तो मुझ पर भी गोलियो की बारिस शुरू हो जाए इसलिए मैने एक-एक करके सबको खामोशी से ख़तम करने का सोचा. मैं जल्दी से जाके एक पर्दे के पिछे छिप गया जहाँ 2 पोलिसेवाले खड़े थे. मैं उनके पिछे से गया उनके मुँह पर हाथ रखा ऑर ज़ोर से उनका सिरों को खंबे मे मारा जिससे वो दोनो बेहोश हो गये उसके बाद मैने दोनो को पर्दे के पिछे ही खींच लिया ऑर वही गिरा दिया उसके बाद मैं पर्दे के पिछे से होता हुआ आगे बढ़ा तो मुझे एक ऑर आदमी वर्दी मे नज़र आया. मैने जल्दी से जाके उसको भी पिछे से पकड़ लिया ऑर अपनी दोनो बाजू मे उसकी गर्दन को पकड़ कर झटके से तोड़ दिया ओर उसको भी पर्दे के पिछे कर दिया.

अब मैं आगे नही जा सकता था क्योंकि आगे परदा नही था ऑर लोगो की काफ़ी भीड़ भी थी इसलिए मैने चारो तरफ नज़र दौड़ाई ऑर सामने मुझे कुछ लोग बैठे हुए नज़र आए मैं चुप-चाप जाके उन लोगो मे ही बैठ गया ऑर किसी को शक़ ना हो इसलिए एक जाम अपने हाथ मे लोगो को दिखाने के लिए पकड़ लिया. कुछ देर वहाँ बैठे रहने के बाद मुझे सीढ़ियो से नीचे उतरता हुआ ख़ान नज़र आया वो सामने जाके स्टेज पर बैठ गया उसके पास ही चौधरी (हीना का बाप) भी खड़ा था. मेरे पास अच्छा मोक़ा था उससे मारने का लेकिन मैं चाहता था कि उसको पहले पता चले कि उसको क्यो मारा गया इसलिए मैने अपना हाथ पिस्टल से हटा लिया ऑर मुँह नीचे करके बैठ गया ताकि वो मुझे देख ना सके. अभी मुझे वहाँ बैठे कुछ ही देर हुई थी कि एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा ऑर पिछे से आवाज़ आई...

आदमी : ओये खाबीज़ तुझे यहाँ बड़े लोगो मे बैठने को किसने बोला है चल बाहर दफ्फा हो ऑर सेक्यूरिटी का ख़याल रख साले को दारू पीने की पड़ी है.

मैं : (बिन कुछ बोले अपनी कुर्सी से खड़ा होते हुए) जी जनाब.

मैं उठकर बाहर जाने लगा तो उस आदमी ने पिछे से एक पिस्टल मेरी पीठ पर रख दी.

आदमी : अपने आप को बहुत होशियार समझता है शेरा... तुझे क्या लगता है तू यहाँ आके हमारे लोगो को मारेगा ऑर हम को पता भी नही चलेगा अब बिना कोई आवाज़ किए चुप-चाप मेरे साथ चल नही तो यही गोली मार दूँगा.

मैं बिना कुछ बोले उसके आगे चलने लगा. वो मुझे सीढ़ियो से उपर की तरफ ले गया मैं नही जानता था कि वो आदमी कौन है ऑर मुझे कैसे जानता है. मेरे सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उसने मेरी कमर पर लटकी पिस्टल भी उतार ली ऑर मेरी कमर पर हाथ रख कर चेक करते हुए मेरी कमीज़ मे मोजूद 2 पिस्टल भी निकाल ली अब मेरे पास सिर्फ़ 3 पिस्टल थी 1 जो मेरी टोपी मे मोजूद थी ऑर बाकी 2 मेरे जुत्तो मे थी. मैं चुप चाप धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ रहा था ऑर उस आदमी से नीज़ात पाने का रास्ता सोच रहा था.

आदमी : ख़ान भाई सही थे तू साला यहाँ ज़रूर आएगा ऑर देखो आ भी गया यहाँ मरने के लिए.

मैं : मदारचोड़ ठोकना है तो गोली चला दिमाग़ मत चाट मेरा.

आदमी : तू चल तो सही बेटा इतनी भी क्या जल्दी है मरने की... एक बार ख़ान भाई का निकाह हो लेने दे तुझे तो फ़ुर्सत से मारेंगे साले गद्दार.

मैं : गद्दार मैं नही तेरा हरामखोर ख़ान है जिसने हर कदम पर मेरे साथ फरेब किया है.

हम लोग बातें करते हुए उपर आ गये वो आदमी मुझे एक कमरे मे ले गया जहाँ पहले से कुछ लोग मोजूद थे. उन्होने मुझे एक कुर्सी पर बिठाया ओर बाँध दिया साथ ही मेरे सिर से टोपी उतार दी जिसमे मैने एक पिस्टल भी रखी हुई थी.

आदमी : ओये नवाब ये ले ख़ान भाईजान का तोहफा संभाल कर रख मैं उनको बताके आता हूँ कि आशिक़ कुत्ते की मौत मरने को खुद ही आ गया है.

मैं : मरने नही भेन्चोद तुम्हारी मारने आया हूँ अगर एक बाप का है तो खोल मेरे हाथ फिर तुझे बताता हूँ कि मैं यहाँ मारने आया हूँ या तुम सब की क़बर बनाने आया हूँ.

आदमी : मेरे मुँह पर मुक्का मारते हुए.... सस्स्सस्स ज़ोर से तो नही लगी शेरा.

मैं : अगर मेरे हाथ आज़ाद हो गये तो तुझे फ़ुर्सत से मारूँगा भेन्चोद शेर को बाँध कर मर्दानगी दिखाता है साले ना-मर्द.

नवाब: (मुझे लात मारते हुए) साले मे गर्मी बहुत है यार इसका तो इलाज मैं करता हूँ तू जा फ़ारूख़ यहाँ से ऑर ख़ान भाई को लेके आ.

उसके बाद वो फ़ारूख़ नाम का आदमी कमरे से बाहर चला गया अब मेरे आस-पास कुछ लोग मोजूद थे जिन्होने मुझ पर लातों ऑर मुक्को की बरसात शुरू करदी. मैं बँधा हुआ था इसलिए जवाब भी नही दे सकता था लिहाजा पड़ा रहा ऑर उनकी मार ख़ाता रहा. कुछ देर मुझे मारने के बाद वो लोग वापिस बेड पर जाके बैठ गये ऑर शराब पीने लगे. मैने ज़मीन पर कुर्सी से बँधा हुआ गिरा पड़ा था ऑर वो लोग मुझसे एक दम बे-फिकर थे मैने अच्छा मोक़ा जान कर अपने बँधे हुए हाथो पर पूरा ज़ोर लगा दिया जिससे मेरे हाथो पर बँधी रस्सी टूट गई ऑर मेरा एक हाथ आज़ाद हो गया मैने जल्दी से अपने दूसरे हाथ की रस्सी भी खोली ऑर वैसे ही पड़ा रहा. अब मैं सही मोक़े के इंतज़ार मे था कि कब उनकी मुझसे नज़र हटे ताकि मैं अपने पैरो की रस्सी खोल सकूँ. लेकिन कुछ ही देर मे फ़ारूख़ वहाँ वापिस आ गया इसलिए मैं वापिस बँधी हुई हालत मे ही रस्सी को अपने दोनो हाथो से पकड़े हुए लेटा रहा.

फ़ारूख़ : ओये कमीनो अपने बाप को उठा तो देते सालो इतना मारने को किसने बोला था.

आदमी : यार हम क्या करते साला बहुत कड़वा बोलता है हमारा भेजा घुमा रहा था अब देख कैसे खामोश होके पड़ा है.

फ़ारूख़ : ख़ान भाई ने बोला है कि निकाह के बाद वो इसका भी काम कर देंगे तब तक इसको बाँध कर रखो.

आदमी : ठीक है...

उसके बाद अचानक फ़ारूख़ के पिछे-पिछे वहाँ ख़ान भी आ गया...

ख़ान : अर्रे वाह आप भी शरीक है जनाब इस मुबारक मोक़े पर... बताने की ज़हमत उठाएँगे कि किस खुशी मे यहाँ आना हुआ.

मैं : तेरी मारने आया हूँ मादरचोद.

ख़ान : (हँसते हुए) साले तेरी गर्मी कभी नही जाएगी ना... (मेरा मुँह पकड़ते हुए) तू चीज़ क्या है यार साला तुझे 5-5 गोली मारो तब भी तू बच जाता है. कोई भी लड़की हो साला तुझे देखते ही कपड़े उतार कर खड़ी हो जाती है वो साली डॉक्टर्नी.... क्या नाम था उसका.... हाँ याद आया रिज़वाना.... वो भी साले तेरे चक्कर मे फस गई ऑर मुझसे बग़ावत कर गई ऑर राणा को भेज दिया तेरे पास मेरी सच्चाई बताने को... ये तो अच्छा हुआ कि वक़्त पर मुझे पता चल गया ऑर मैने राणा ऑर रिज़वाना को वक़्त पर ख़तम करवा दिया वरना मेरा काम तो बहुत खराब हो जाना था.

मैं : क्या रिज़वाना ऑर राणा को तूने मरवाया था ऑर मुझे गोली तुमने मारी थी? (मतलब रिज़वाना का प्यार झूठ नही सच था ऑर मैं उस बिचारी को कितना ग़लत समझ रहा था जिसने मेरे लिए अपनी जान दे दी)

ख़ान : हाँ... छोटे के साथ पार्ट्नरशिप जो करनी थी. चल आज लगे हाथ तेरी याददाश्त को भी थोड़ा सा ताज़ा कर देता हूँ.

मैं : लेकिन मेरे साथ तूने धोखा क्यो किया मैं तो तेरा साथ देने तक को राज़ी था ऑर मुझे कुछ याद भी नही था.

ख़ान : देख यार बुरा मत मान लेकिन बिज़्नेस का असूल है अगर खुद उपर जाना है तो किसी ना किसी को तो नीचे गिराना ही पड़ेगा मेरे पास माल था लेकिन कोई तगड़ी कीमत देने वाला बाइयर नही था इसलिए मैने छोटे से हाथ मिला लिया. लेकिन तेरा शीक बाबा इस बात की इजाज़त कभी नही देता क्योंकि ड्रग्स का सारा धंधा तू संभालता था ऑर जब तक तू था तेरे बाबा शीक को भी हम रास्ते से नही हटा सकते थे क्योंकि उनकी ढाल तू था. इसलिए हमने सोचा कि पहले तुझे ही रास्ते से हटा देते हैं फिर बूढ़ा तो तेरे गम मे ही मर जाएगा ऑर छोटे भी बाबा शीक की कुर्सी पर बैठ जाएगा लेकिन अफ़सोस वो साला भी बच गया.

मैं : (ख़ान की बात सुन कर मुझे सब याद आने लगा कि कैसे मैं उस दिन डील करने के लिए जा रहा था जब पोलीस की एक जीप मेरे पिछे पड़ गई ऑर मुझ पर अँधा-धुन्ध गोलियाँ चलाने लगी जिससे एक गोली मेरी गाड़ी के टाइयर पर लगी ऑर गाड़ी का बॅलेन्स बिगड़ गया गाड़ी एक चट्टान के साथ जाके टकराई ऑर मेरा स्टारिंग व्हील से सिर टकरा गया ऑर वो ख़ान ही था जिसने मुझे गाड़ी से निकाल कर मुझ पर गोलियाँ चलाई थी ऑर फिर मुझे मरा हुआ समझ कर गाड़ी समेत खाई से नीचे धक्का दे दिया. मुझे सब कुछ याद आ गया था कि यही वो हरामखोर था जिसने मुझ पर गोली चलाई थी)

मादरचोद आज तक वो गोली नही बनी जो शेरा को मार सके ऑर हीना से निकाह के सपने देखना छोड़ दे उससे पहले ही मैं तुझे जहन्न्नुम पहुँचा दूँगा ऑर याद रखना मेरी एक गोली भी तेरी गान्ड फाड़ने के लिए काफ़ी है... क्योंकि शेरा की मार ऑर शेरा का वार कभी खाली नही जाता ऑर जिस पर पड़ता है वो आदमी सारी जिंदगी उठ नही सकता.

ख़ान : (हँसते हुए) सपना अच्छा है... साले तू तो खुद मेरे रहम-ओ-करम पर है तू मुझे मारेगा... मैं चाहूं तो तुझे अभी मसल सकता हूँ लेकिन पहले निकाह हो जाए फिर आके तेरी खबर लेता हूँ. वैसे भी वो हीना साली बहुत तारीफ करती है तेरी... तू देखना तेरे सामने हीना को नंगी करके सुहागरात मनाउन्गा ऑर फिर उसकी आँखो के सामने तुझे गोली मारूँगा. ओये नवाब इसका ख़याल रखना बहुत हरामी है देखना ये खुलने ना पाए.

नॉवब : जी ख़ान साहब.

उसके बाद ख़ान कमरे से बाहर चला गया ऑर फ़ारूख़ को मेरे सामने बिठा कर चला गया.

मैं : ओये चूतिए... मुझे पानी पिला भोसड़ी के...

फ़ारूख़ : (गुस्से से मेरा कॉलर पकड़ते हुए) साले चूतिया किसको बोला....

मैं : तेरे को बोला गंदी नाली के कीड़े...

फ़ारूख़ : (गुस्से ) आआववव.... क्यो मरना चाहता है साले ख़ान भाई का हुकुम नही होता तो अभी तुझे गोली मार देता.

मैं : साले हर काम ख़ान की गान्ड मे घुस कर ही करता है या खुद मे भी दम है.

फ़ारूख़ : (मेरे पेट मे मुक्का मारते हुए) साले दम देखना है तुझे मेरा दिखाता हूँ तुझे दम ... (ये बोलने के साथ ही उसने 2 मुक्के ऑर मेरे पेट मारे) हवा निकली साले...

मैं : क्यो भोसड़ी के थक गया या गान्ड फॅट गई....

फ़ारूख़ : ये मरेगा आज मेरे हाथ से... (ये बोलते ही उसने मेरे मुँह पर मुक्का मारा)

मैने तेज़ी से अपना हाथ आगे कर लिया ऑर उसका मुक्का हवा मे ही पकड़ लिया. जिसे देखकर उसकी आँखें बाहर आने को हो गई.

मैं : मादरचोद बोला था तुझे कि मुझे ठोक दे तू नही माना.... अब देख मैं तुम सबकी यहाँ कैसे क़बर बनाता हूँ.

मैं कुर्सी से बँधा हुआ ही खड़ा हो गया ऑर फ़ारूख़ को बालो से पकड़ कर उसका सिर कुर्सी पर ज़ोर से मारा जिससे कुर्सी बैठने वाली जगह से टूट गई ऑर फ़ारूख़ ज़मीन पर अपना सिर पकड़ कर गिर गया. अब सिर्फ़ कुर्सी की आगे वाली टांगे ही मेरी टाँगो से बँधी हुई थी. इतने मे वहाँ बैठे सब लोग खड़े हो गये ऑर मुझे पकड़ने के लिए मेरी तरफ लपके जिनमे से एक को मैने गर्दन से पकड़ कर दूसरे के सिर मे पकड़े हुए आदमी का सिर मारा वो दोनो वही गिर गये. तभी एक आदमी छलाँग लगाके मेरे उपर गिर गया जिससे मैं खुद को संभाल नही सका ऑर मैं भी ज़मीन पर उसके साथ ही गिर गया. मैने जल्दी से उसका एक बाजू पकड़ा ऑर अपनी टाँग के नीचे से निकाल कर टाँग को मोड़ दिया जिससे उसकी गर्दन मेरे घुटने पर आ गई मेरे पैर के साथ कुर्सी की टाँग बँधे होने की वजह से मैं टाँग को मोड़ नही सकता था इसलिए मैने उसकी गर्दन को अपनी सीधी हुई टाँग पर ही दबा दिया ऑर गर्दन के पिछे की तरफ अपने हाथ का ज़ोर से वार किया जिससे उसकी गर्दन टूट गई ऑर उसके मुँह से खून निकलने लगा इतनी देर मे बाकी बचे 2 लोगो ने मेरे सिर मे शराब की बोतल फोड़नी शुरू करदी जिससे मेरे सिर मे से भी खून आने लगा.

उनमे से एक आदमी का मैने हाथ पकड़ा ऑर नीचे की तरफ खींच लिया जिससे वो आदमी मेरे उपर ही गिर गया मैने शराब की टूटी हुई बोतल उसके हाथ से छीन ली ऑर उसके गले मे टूटे हुए हिस्से से वार किया जिससे उसकी गर्दन मे काँच धँसते चले गये ऑर उसमे से पानी की तरह खून निकलने लगा जबकि दूसरा आदमी दरवाज़े की तरफ भागा मैने हाथ मे पकड़ी बोतल हवा मे उछाल कर उसके सिर मे मारी जिससे बोतल फुट गई ऑर वो दरवाज़े मे जाके लगा मैने बेड का सहारा लेके खुद को खड़ा किया ऑर जल्दी से अपनी टाँग से बँधी कुर्सी की टाँग की रस्सी को खोल दिया अब मैने वही कुर्सी की टाँग उठाई ऑर उसके सिर मे मारी जिससे कुर्सी की टाँग टूट गई ऑर उसके सिर से भी खून निकलने लगा. वो आदमी ज़मीन पर गिर गया ऑर मुझसे रहम की भीख माँगने लगा मैने टूटी हुई कुर्सी का टुकड़ा उठाया ऑर उसके मुँह मे डाल कर ज़ोर से पैर को कुर्सी के बाहर निकले हिस्से पर दबा दिया जिससे कुर्सी का नीचे वाला हिस्सा जो उसके मुँह मे घुसा हुआ हलक तक को चीर गया ऑर वो वही तड़प-तड़प के मर गया. अब मैने जल्दी से दूसरी टाँग पर बँधी कुर्सी भी खोली ऑर कमरे मे बने बाथरूम मे चला गया खुद के चेहरे पर लगे ज़ख़्म को देखने लगा फिर मैने अपने सिर को पानी से धोया ऑर चेहरे पर लगा खून सॉफ किया. उसके बाद मैं जल्दी से बाहर आया ऑर पोलीस वाली वर्दी उतार कर उन मरे हुए लोगो का कोट-पेंट पहन लिया क्योंकि लड़ाई के दोरान उन लोगो का काफ़ी खून वर्दी पर लग गया था. मैं हवेली के इस वक़्त आखरी हिस्से मे खड़ा था जहाँ से हीना का कमरा काफ़ी दूर था इसलिए मैं बाल्कनी के रास्ते से पाइप पर लटक कर हीना के कमरे की तरफ चला गया. जहाँ पहले से काफ़ी लड़कियाँ मोजूद थी ऑर हीना को तेयार कर रही थी.

Update-53

Uske baad maine phone rakh diya or aane wale lamhe ke bare me sochne laga shaam ho chuki thi poori haveli kisi nayi-naweli dulhan ki tarah roshni se jag-maga rahi thi khan ke bhi aane ka waqt ho gaya tha. Abhi main apni socho me gumm tha ki pichhe se achanak mujhe nazi ne pakad liya or meri peeth par apna sir rakh liya or waise hi mujhse chipak kar khadi ho gai.

Nazi : maine sab sunn liya hai... jo kuch tum apne dost ko keh rahe the

Main : (palat te hue) kya sun liya hai...

Nazi : main tumko ek baat bahut achhe se bata deti hun mera iss duniya me tumhare or Neer ke siwaye koi nahi hai agar tumne mujhe akele kahi bhejne ka socha bhi to main khud apni jaan le lungi.

Main : bakwas mat karo.... maine jo bhi kiya wo sirf tumhari heena ki or Neer ki safety ke liye kiya tum janti ho bahar khan ke kitne log aa gaye honge. Bahar kuch bhi ho sakta hai yaar.

Nazi : mujhe nahi pata jayenge to sab sath jayenge nahi to main bhi nahi jaungi.

Main : yaar niche jab goliyaan chalna shuru hongi to main tum teeno ko sambhalunga ya unka muqabla karunga.

Nazi : (munh pherte hue) mujhe kuch nahi pata...

Main : achha baba thik hai jaisi tumhari marzi... ab to khush....

Nazi : (haa me sir hilake muskurate hue mujhe gale se laga kar) Hhhmmm...

Tabhi patakho ki or dhol ke nagado ki awaaz sunayi dene lagi or logo ka shor-sharaba bhi sunayi dene laga.

Main : Lagta hai wo log aa gaye hain... chalo ab tum jaldi se teiyaar ho jao tab tak main gaadi me se asla or goliyaan le aata hun thik hai.

Nazi : (haa me sir hilate hue) achha...

Main : kuch bhi ho jaye tum haveli ki uss taraf nahi aaogi samajh gai tum Neer ko leke gaadi me baitho main heena ko leke aata hun tum gaadi ke pass hi hmara intzaar karna....

Nazi : (haa me sir hilate hue) thik hai.... Apna khayaal rakhna.

Maine bina kuch bole ek nazar nazi ko muskura kar dekha fir palatkar jahan Neer soya hua tha wahan gaya uske maathe ko chuma or wapis darwaza kholkar tez kadmo ke sath bahar ki taraf nikal gaya. Chhote gate se bahar jane se pehle maine ek baar phir palat kar dekha nazi ab bhi mujhe hi dekh rahi thi uske chehre se mere liye fikar saaf dikhayi de raha tha. Uske baad main bahar aaya or apni gaadi ki diggi me se hathiyaar nikalne laga. Maine jaldi se apna bag khola usme se jaldi se ek pen or ek kaagaz ka tukda nikala jiss par maine apne gaav tak jane ka pata or rasta likha or usse apni jeb me daal liya. Main mann hi mann dua karne laga ki iski jarurat na pade. Ab mera ek hi target tha khan or uske aadmi isliye ab meri kahi hui baat poori karne ka waqt aa gaya tha.... yaa to marna tha yaa maar dena tha. maine apne bag me se apne kapde ek side par kiye or jaldi se 2 pistol uthayi or uski magzine check karke maine dono pistol ko apne jootoki zuraabo me daal liya ek revolver me maine goliyaan bhari or uske apni pent me belt ke pass fitt kar liya. Ab mere pass bag me sirf 3 pistol hi bachi jinme se ek ko maine car ke aagey wale hisse me stairing wheel ke pass rakh diya or baaki 2 pistol ko maine apni pent ke pichhe wale hisse me taang liya or apni shrt bahar nikaal lee jisse kisi ko meri pistol nazar naa aaye. uske baad maine gaadi ki diggi ko band kiya Fir maine jaldi se lala ko phone kiya kuch hi pal me usne phone utha liya.

Main : kaha hai lala...

Lala :(khush hote hue) bhai khan ka kaam karne jaa raha hun... sultanpura gaav me.

Main : khan ko maarne ke liye...

Lala : haa bhai... kyo maante ho naa apne bhai ke dimaag ko... tum usko kaha-kaha dhundh rahe the or maine usko ek jhatke me dhundh liya.

Main : main sultanpura me hi hun tum jaldi se jaldi yahan pohoncho shaam hone wali hai or main tumhara hi intzaar kar raha hun.

Lala : bhai iska matlab tum pehle se wahi mojud ho.

Main : laale jis schunl me tu mujhe padha raha hai wahan ka principal aaj tak mujhse tution leta hai jo tum log sochte ho usse pehle wo baat main soch chuka hota hun.

Lala : (hansatey hue) bas bhai ab to gaav ke pass hi hain hum kuch hi der me pohonch jayenge aap bas hmara intzaar karo hum kuch hi der me aa rahe hain.

Main : thik hai tum andar hi aa jana main andar jaa raha hun.

Lala : pagal jaisi baat mat kar yaar bhai tu akela hai andar khan ke bahut log honge.

Main : Ab to kitne bhi log ho... Baba ki dua se aaj main sab par akela bhi bhaari hun.

Lala : bhai baat to suno...

Uske baad maine bina uski koi baat sune phone rakh diya or bhagta hua haveli ki aagey ki taraf chala gaya jahan gate pehle se khula hua tha or kaafi log darwaze ke samne khade the. Main inn logo ke hote hue andar nahi jaa sakta tha kyonki log meri ummeed se bhi jyaadaa the. main jaldi se ek ped ke pichhe chhip gaya or sahi moqe ka intzaar karne laga. Thodi der baad ek police wala mujhe ped ki janib aata hua dikhayi diya isliye main jaldi se ped ka tana pakadkar upar chadh gaya. wo aadmi jhunmta hua aa raha tha shayad wo nashe me tha usne charo taraf dekha or fir apni pent ki zipp kholkar usi ped ke samne peshaab karne laga jiske upar main baitha tha. Mujhe ek tarqeeb soojhi maine jaldi se apni taangey ped ki shaakh me phasayi or ulta hoke uss aadmi ko garden se pakad liya or upar ko khinchkar uski garden ko jhatke se marod diya wo aadmi bina koi awaaz kiye wahi mar gaya uske baad maine uss aadmi ko bhi ped ke upar khinch liya. Fir uske sare kapde utaare or uske kapde khud pehan liye wo aadmi wardi me tha isliye agar uski wardi main pehan leta to mujh par koi bhi shaq nahi kar sakta tha. Lekin samasya ab pistol ko rakhne ka tha kyonki shrt andar karne ki wajah se pistol bahar se dikhayi de sakti thi isliye maine 2 pistol ko wapis apne jooto me daal liya or 2 pistol ko shrt ke andar waise hi rakh liya or 1 pistol ko maine apni topi ke niche rakh liya. Ab 3 pistol bachi thi 2 meri khud ki or ek uss policewale ki service revolver jo shayad andar mere kaam aa sakti thi. Main jaldi se ped se niche utra or 2 revolver ko wahi pass hi ek jhadiyo me rakh diya or 1 uss policewale ki revolver jo uski wardi me hi fitt thi usko waise hi rehne diya. Ab main bina koi awaaz kiye samne khadi bheed me shamil ho gaya or unn logo ke sath main bhi andar ghus gaya ab main charo taraf dekh raha tha lekin meri nazare sirf khan ko hi dhundh rahi thi. Tabhi ek policewala mere pass aya or mere kandhe par hath rakh diya.

Aadmi: bhai machis hai kya cigratte jalani hai.

Main : (naa me sir hilate hue) nahi... (main nahi chahta tha ki wo policewala mera chehra dekhe isliye uski taraf peeth karke hi khada raha)

Admi : kounse department se ho janab....

Main : Narcotics Department

Admi : Narcotics se to main bhi hun kya naam hai bhai (mujhe palat te hue)

Main : (uski taraf palat te hue) Sheraaa....

Admi : (apni pistol nikal kar mere sir par taante hue) koun hai oye tu...

Main : (uske munh par hath rakh kar usk sir me jor se kohni maarte hue) Tera baap...

Wo aadmi behosh hoke wahi gir gaya wahan kaafi log the isliye maine usko kandhe ke sahara deke apne sath khada kar liya or usko kahi girane ki jagah dekhne laga. pass hi mujhe ek bada sa Phunl daan nazar aya maine usko uske piche gira diya or andar chala gaya jahan jashan ka mahol tha sab log hath me jaam liye khade the. Meri nazare charo taraf khan ko dhundh rahi thi lekin khan mujhe kahi bhi nazar nahi aa raha tha. Main waqt zaya nahi karna chahta tha isliye hall ke charo taraf ghamane laga or wahan khade logo ke hathiyaro ka jayeza lene laga jisse mujhe ye pata chal sake ki mujh par kitne log goliyaan chala sakte hain. Wahan jyaadaatar log to saade kapde me hi nazar aa rahe the sirf ginti ke kuch hi log the jo meri tarah wardi me mojud the. Main nahi chahta tha ki jab main khan par goli chalau to mujh par bhi goliyo ki bareesh shuru ho jaye isliye maine ek-ek karke sabko khamoshi se khatam karne ka socha. Main jaldi se jake ek parde ke pichhe chhip gaya jahan 2 policewale khade the. Main unke pichhe se gaya unke munh par hath rakha or zor se unka sir khambe me maara jisse wo dono behosh ho gaye uske baad maine dono ko parde ke pichhe hi khinch liya or wahi gira diya uske baad main parde ke pichhe se hota hua aagey badha to mujhe ek or aadmi wardi me nazar aaya. maine jaldi se jake usko bhi pichhe se pakad liya or apni dono baaju me uski garden ko pakad kar jhatke se tod diya or usko bhi parde ke pichhe kar diya.

Ab main aagey nahi jaa sakta tha kyonki aagey parda nahi tha or logo ki kaafi bheed bhi thi isliye maine charo taraf nazar daudayi or samne mujhe kuch log baithe hue nazar aaye main chup-chap jake unn logo me hi baith gaya or kisi ko shaq na ho isliye ek jaam apne hath me logo ko dikhane ke liye pakad liya. Kuch der wahan baithe rehne ke baad mujhe seedhiyo se niche utarta hua khan nazar aaya wo samne jake stage par baith gaya uske pass hi chaudhary (heena ka baap) bhi khada tha. Mere pass achha moqa tha usse maarne ka lekin main chahta tha ki usko pehle pata chale ki usko kyo maara gaya isliye maine apna hath pistol se hata liya or munh niche karke baith gaya taaki wo mujhe dekh naa sake. Abhi mujhe wahan baithe kuch hi der hui thi ki ek hath mere kandhe par pada or pichhe se awaaz aayi...

Aadmi : oye khabiz tujhe yahan bade logo me baithne ko kisne bola hai chal bahar daffa ho or security ka khayaal rakh sale ko daru peene ki padi hai.

Main : (bin kuch bole apni kursi se khada hote hue) ji janab.

Main uthkar bahar jane laga to uss aadmi ne pichhe se ek pistol meri peeth par rakh di.

Aadmi : apne aap ko bahut hoshiyaar samjhta hai sheraaa... tujhe kya lagta hai tu yahan aake hamaare logo ko maarega or ham ko pata bhi nahi chalega ab bina koi awaz kiye chup-chap mere sath chal nahi to yhi goli maar dunga.

Main bina kuch bole uske aagey chalne laga. wo mujhe seedhiyo se upar ki taraf le gaya main nahi janta tha ki wo aadmi koun hai or mujhe kaise janta hai. Mere seedhiyan chadhte hue usne meri kamar par latki pistol bhi utaar lee or meri kamar par hath rakh kar check karte hue meri kameez me mojud 2 pistol bhi nikal lee ab mere pass sirf 3 pistol thi 1 jo meri topi me mojud thi or baaki 2 mere jutto me thi. Main chup chaap dheere-dheere seedhiyan chadh raha tha or uss aadmi se nizaat paane ka rasta soch raha tha.

Aadmi : khan bhai sahi the tu sala yahan jarur aayega or dekho aa bhi gaya yahan marne ke liye.

Main : Madarchod thokna hai to goli chala dimaag mat chaat mera.

Aadmi : tu chal to sahi beta itni bhi kya jaldi hai marne ki... Ek baar khan bhai ka nikaah ho lene de tujhe to fursat se marenge sale gaddar.

Main : gaddar main nahi tera haramkhor khan hai jisne har kadam par mere sath fareb kiya hai.

Hum log baaten karte hue upar aa gaye wo aadmi mujhe ek kamre me le gaya jahan pehle se kuch log mojud the. Unhone mujhe ek kursi par bithaya or baandh diya sath hi mere sir se topi utaar di jisme maine ek pistol bhi rakhi hui thi.

Aadmi : oye nawab ye le khan bhaijaan ka tohfa sambhaal kar rakh main unko batake aata hun ki aashiq kutte ki maut marne ko khud hi aa gaya hai.

Main : Marne nahi bhenchod tumhari maarne aaya hun agar ek baap ka hai to khol mere hath phir tujhe batata hun ki main yahan marne aaya hun yaa tum sab ki qabar banane aaya hun.

Aadmi : Mere munh par mukka maarte hue.... ssssss zor se to nahi lagi shera.

Main : Agar mere hath azaad ho gaye to tujhe fursat se maarunga bhenchod sher ko bandh kar mardangi dikhata hai sale na-mard.

Nawab: (mujhe laat marte hue) sale me garmi bahut hai yaar iska to ilaaj main karta hun tu jaa farookh yahan se or khan bhai ko leke aa.

Uske baad wo farookh naam ka aadmi kamre se bahar chala gaya ab mere aas-pass kuch log mojud the jihone mujh par laate or mukko ki barsaat shuru kardi. Main bandha hua tha isliye jawab bhi nahi de sakta tha lihaja pada raha or unki maar khata raha. Kuch der mujhe maarne ke baad wo log wapis bed par jaake baith gaye or sharab peene lage. Maine zameen par kursi se bandha hua gira pada tha or wo log mujhse ek dam be-fikar the maine achha moqa jaan kar apne bandhe hue hatho par poora zor laga diya jisse mere hatho par bandhi rassi toot gai or mera ek hath azaad ho gaya maine jaldi se apne dusre hath ki rassi bhi kholi or waise hi pada raha. Ab main sahi moqe ke intzaar me tha ki kab unki mujhse nazar hate taaki main apne pairo ki rassi khol saku. Lekin kuch hi der me farookh wahan wapis aa gaya isliye main wapis bandhi hui halat me hi rassi ko apne dono hatho se pakde hue leta raha.

Farookh : oye kameeno apne baap ko utha to dete salo itna maarne ko kisne bola tha.

Aadmi : yaar hum kya karte sala bahut kadwa bolta hai hmara bheja ghuma raha tha ab dekh kaise khamosh hoke pada hai.

Farookh : Khan bhai ne bola hai ki nikaah ke baad wo iska bhi kaam kar denge tab tak isko baandh kar rakho.

Aadmi : thik hai...

Uske baad achanak farookh ke pichhe-pichhe wahan khan bhi aa gaya...

Khan : Arre waah aap bhi shareek hai janab iss mubarak moqe par... Batane ki zehmat uthayenge ki kis khushi me yahan aana hua.

Main : teri maarne aaya hun madarchod.

Khan : (hansatey hue) sale teri garmi kabhi nahi jayegi naa... (mera munh pakadte hue) Tu chij kya hai yaar sala tujhe 5-5 goli maro tab bhi tu bach jata hai. koi bhi ladki ho sala tujhe dekhte hi kapde utaar kar khadi ho jati hai wo sali doctorni.... kya naam tha uska.... haa yaad aaya Rizwana.... wo bhi sale tere chakkar me phas gai or mujhse baghawat kar gai or rana ko bhej diya tere pass meri sachhayi batane ko... ye to achha hua ki waqt par mujhe pata chal gaya or maine rana or rizwana ko waqt par khatam karwa diya warna mera kaam to bahut kharab ho jana tha.

Main : kya Rizwana or rana ko tune marwaya tha or Mujhe goli tumne maari thi? (Matlab rizwana ka pyaar jhooth nahi sach tha or main uss bichari ko kitna galat samajh raha tha jisne mere liye apni jaan de di)

Khan : Haaaa... Chhote ke sath partnership jo karni thi. Chal aaj lage hath teri yaddasht ko bhi thoda sa taaza kar deta hun.

Main : lekin mere sath tune dhokha kyo kiya main to tera sath dene tak ko raazi tha or mujhe kuch yaad bhi nahi tha.

Khan : Dekh yaar bura mat maan lekin business ka asool hai agar khud upar jana hai to kisi na kisi ko to niche girana hi padega mere pass maal tha lekin koi tagdi keemat dene wala buyer nahi tha isliye maine chhote se hath mila liya. Lekin tera sheikh baba iss baat ki ijajat kabhi nahi deta kyonki druggs ka sara dhandha tu sambhalta tha or jab tak tu tha tere baba sheikh ko bhi hum rastey se nahi hata sakte the kyonki unki dhaal tu tha. Isliye hamane socha ki pehle tujhe hi rastey se hata dete hain fir budha to tere ghum me hi mar jayega or chhote bhi Baba sheikh ki kursi par baith jayega lekin afsos wo sala bhi bach gaya.

Main : (khan ki baat sunn kar mujhe sab yaad aane laga ki kaise main uss din deal karne ke liye jaa raha tha jab police ki ek jeep mere pichhe pad gai or mujhe par andha-dhundh goliyaan chalane lagi jisse ek goli meri gaadi ke tyre par lagi or gaadi ka balance bigad gaya gaadi ek chattaan ke sath jake takaayi or mera stairing wheel se sir takra gaya or wo khan hi tha jisne mujhe gaadi se nikaal kar mujh par goliyaan chalayi thi or fir mujhe mara hua samajh kar gaadi samet khayi se niche dhakka de diya. Mujhe sab kuch yaad aa gaya tha ki yhi wo haramkhor tha jisne mujh par goli chalayi thi) Madarchod aaj tak wo goli nahi bani jo shera ko maar sake or heena se nikaah ke sapne dekhna chhor de usse pehle hi main tujhe jahannnum pohoncha dunga or yaad rakhna meri ek goli bhi teri gaanD phaadne ke liye kaafi hai... Kyonki shera ki maar or shera ka waar kabhi khaali nahi jata or jis par padta hai wo aadmi saari jindagi uth nahi sakta.

Khan : (hansate hue) Sapna achha hai... sale tu to khud mere reham-o-karam par hai tu mujhe marega... Main chahu to tujhe abhi masal sakta hun lekin pehle nikaah ho jaye fir aake teri khabar leta hun. Waise bhi wo heena sali bahut tareef karti hai teri... Tu dekhna tere samne heena ko nangi karke suhaagraat manaunga or phir uski aankho ke samne tujhe goli marunga. Oye nawab iska khayaal rakhna bahut harami hai dekhna ye khulne naa paye.

Nawab : ji khan sahab.

Uske baad khan kamre se bahar chala gaya or farookh ko mere samne bith kar chala gaya.

Main : Oye chutiye... Mujhe paani peela bhosdi ke...

Farookh : (gusse se mera kolar pakadte hue) sale chutiya kisko bola....

Main : tere ko bola gandi naali ke keedey...

Farookh : (gusse ) Aaaawww.... kyo marna chahta hai sale khan bhai ka hukum nahi hota to abhi tujhe goli maar deta.

Main : sale har kaam khan ki gaanD me ghus kar hi karta hai yaa khud me bhi dum hai.

Farookh : (mere pet me mukka marte hue) Sale dum dekhna hai tujhe mera dikhata hun tujhe dum ... (ye bolne ke sath hi usne 2 mukke or mere pet maare) Hawa nikali sale...

Main : kyo bhosdi ke thakk gaya yaa gaanD phat gai....

Farookh : Ye marega aaj mere hath se... (ye bolte hi usne mere munh par mukka maara)

Maine tezi se apna hath aagey kar liya or uska mukka hawa me hi pakad liya. jisse dekhkar uski aankhen bahar aane ko ho gai.

Main : madarchod bola tha tujhe ki mujhe thok de tu nahi maana.... Ab dekh main tum sabki yahan kaise qabar banata hun.

Main kursi se bandha hua hi khada ho gaya or farookh ko baalo se pakad kar uska sir kursi par zor se maara jisse kursi baithne wali jagah se toot gai or farookh zameen par apna sir pakad kar gir gaya. ab sirf kursi ki aagey wali taangey hi meri taango se bandhi hui thi. Itne me wahan baithe sab log khade ho gaye or mujhe pakadne ke liye meri taraf lapke jinme se ek ko maine gardan se pakad kar dusre ke sir me pakde hue aadmi ka sir maara wo dono wahi gir gaye. Tabhi ek aadmi chalaang lagake mere upar gir gaya jisse main khud ko sambhaal nahi saka or main bhi zameen par uske sath hi gir gaya. Maine jaldi se uska ek baaju pakda or apni taang ke niche se nikaal kar taang ko mod diya jisse uski gardan mere ghutne par aa gai mere pair ke sath kursi ki taang bandhe hone ki wajah se main taang ko mod nahi sakta tha isliye maine uski gardan ko apni seedhi hui taang par hi daba diya or gardan ke pichhe ki taraf apne hath ka jor se waar kiya jisse uski garden toot gai or uske munh se khun nikalne laga itni der me baaki bache 2 logo ne mere sir me sharab ki bottal phodni shuru kardi jisse mere sirf me se bhi khun aane laga.

Unme se ek aadmi ka maine hath pakda or niche ki taraf khinch liya jisse wo aadmi mere upar hi gir gaya maine sharab ki tooti hui bottal uske hath se chhin lee or uske gale me toote hue hisse se waar kiya jisse uski gardan me kaanch dhansate chale gaye or usme se paani ki tarah khun nikalne laga jabki dusra aadmi darwaze ki taraf bhaga maine hath me pakdi bottal hawa me uchhal kar uske sir me maari jisse bottal phunt gai or wo darwaze me jake laga maine bed ke sahara leke khud ko khada kiya or jaldi se apni taang se bandhi kursi ki taang ki rassi ko khol diya ab maine wahi kursi ki taang uthayi or uske sir me maari jisse kursi ki taang toot gai or uske sir se bhi khun nikalne laga. Wo aadmi zameen par gir gaya or mujhse reham ki bheekh maangne laga maine tooti hui kursi ka tukda uthaaya or uske munh me daal kar jor se pair ko kursi ke bahar nikle hisse par daba diya jisse kursi ka niche wala hissa jo uske munh me ghusa hua halak tak ko cheer gaya or wo wahi tadap-tadap ke mar gaya. Ab maine jaldi se dusri taang par bandhi kursi bhi kholi or kamre me bane bathroom me chala gaya khud ke chehre par lage zakham ko dekhne laga phir maine apne sir ko paani se dhoya or chehre par laga khun saaf kiya. uske baad main jaldi se bahar aaya or police wali wardi utaar kar unn mare hue logo ka coat-pent pehan liya kyonki ladayi ke doraan unn logo ka kaafi khun vardi par lag gaya tha. Main haveli ke iss waqt aakhri hisse me khada tha jahan se heena ka kamra kaafi door tha isliye main balcony ke rastey se pipe par latak kar heena ke kamre ki taraf chala gaya. Jahan pehle se kaafi ladkiyaan mojud thi or heena ko teiyaar kar rahi thi.

 
अपडेट-54

अब मैं हीना के कमरे मे भी नही जा सकता था इसलिए पाइप के सहारे ही लटकता हुआ आगे की तरफ बढ़ने लगा जहाँ नीचे मुझे हॉल ऑर स्टेज नज़र आया जहाँ पर ख़ान बैठा था. उँचाई काफ़ी ज़्यादा थी इसलिए मैं सीधा नीचे छलाँग नही लगा सकता था इसलिए मैं इधर उधर कोई रस्सी देखने लगा जिससे लटक कर मैं नीचे तक जा सकूँ क्योंकि अब मुझे सिर्फ़ ख़ान को ही मारना था. तभी मुझे सामने एक झुम्मर लटका हुआ नज़र आया मुझे बस वहाँ तक किसी भी तरह से पहुँचना था क्योंकि वहाँ से स्टेज की उँचाई काफ़ी कम थी ऑर मैं आसानी से छलाँग भी लगा सकता था. मैने इधर उधर देखा ऑर पाइप के सहारे हवेली की छत की तरफ बढ़ने लगा जिससे लटक कर मैं उपर की एक बाल्कनी मे पहुँच गया बाल्कनी से झूमर पर छलाँग लगाना आसान था इसलिए मैं बाल्कनी की रेलिंग पर पैर रख के खड़ा हो गया ऑर नीचे झूमर के उपर छलाँग लगा दी. झूमर ज़ंजीरो से बँधा हुआ था इसलिए उसने मेरा वजन तो उठा लिया लेकिन मेरे गिरने से बहुत ज़ोर की आवाज़ हुई ऑर काफ़ी बल्ब भी टूट गये जिससे सबका ध्यान उपर की तरफ चला गया.

चौधरी : ओये कौन है उपर....

झूमर से नीचे की दूरी काफ़ी कम थी इसलिए मैने बिना कोई जवाब दिए नीचे स्टेज पर छलाँग लगा दी ऑर मैं सीधा ख़ान के उपर आके गिर गया जिससे उसकी कुर्सी टूट गई ऑर ख़ान को काफ़ी चोट आई मैने जल्दी से अपने दाए पैर को उपर उठाया ऑर उसमे फँसी एक पिस्टल निकाल कर ख़ान के सिर पर रख दी.

मैं : मादरचोद मैने कहा था ना आज तू निकाह नही जहन्न्नुम क़बूल करेगा.

ख़ान : गन नीचे कर ले शेरा नही तो मेरे लोग यहाँ खड़े तमाम लोगो को मार डालेंगे.

मैं : अगर तेरे एक आदमी की भी गोली चली तो तेरा भेजा यही बाहर निकाल दूँगा इसलिए अपने कुत्तो से बोल बंदूक नीचे रख दें नही तो तेरा पोस्टमॉर्टम मैं यही खड़े-खड़े कर दूँगा.

ख़ान : (अपने लोगो को गन नीचे करने का इशारा करते हुए) नीचे करो...

मैं : ये हुई ना बात चल अब शराफ़त से मुझे बाहर लेके चल तुझे तो मैं अपने गाँव लेके जाउन्गा जहाँ सब तेरा सीक कबाब बनाएँगे साले...

तभी फ़ारूख़ हीना के सिर पर बंदूक लगाए सीढ़ियो से उतरता हुआ नज़र आया.

फ़ारूख़ : इतनी जल्दी भी क्या है शेरा... गन नीचे कर नही तो तेरी डार्लिंग तो गई.

चौधरी : ये क्या बदतमीज़ी है ख़ान साहब अपने आदमी से कहो छोड़ दे मेरी बेटी को नही तो अच्छा नही होगा.

ख़ान : वाह फ़ारूख़ वाह... चुप कर बूढ़े... साले तेरी बेटी के चक्कर मे हम अपनी क़ुर्बानी तो नही दे सकते ना....

हीना : (चलते हुए स्टेज के पास आते हुए) सुन लिया अब्बू.... यही वो लड़का था ना जो आपने मेरे लिए चुना था.

चौधरी : मुझे माफ़ कर दे बेटी...

फ़ारूख़ : ओये तुम बाप-बेटी अपना ड्रामा बंद करो... शेरा तुमने सुना नही मैने क्या बोला घोड़ा नीचे कर नही तो मैं इस लड़की को गोली मार दूँगा.

चौधरी ये सब देख नही सका ऑर जल्दी से फ़ारूख़ से पिस्टल छीन ने लगा. तभी ख़ान ने अपनी जेब से पिस्टल निकाल कर चौधरी को 3 गोली मार दी जिससे चौधरी वही ज़मीन पर गिर गया ढेर हो गया.

ख़ान : शेरा अपनी पिस्टल नीचे कर नही तो अगली गोली हीना पर चलेगी.

मैं अब मजबूर था इसलिए चाह कर भी ख़ान पर गोली नही चला सकता था इसलिए अपनी पिस्टल ख़ान को दे दी.

हीना : (रोते हुए) नही नीर ऐसा मत करो मार दो इस कुत्ते को इसने मेरे अब्बू को मारा है.

ख़ान ने मुझसे पिस्टल ले ली ऑर एक ज़ोरदार तमाचा मेरे मुँह पर मारा तभी ख़ान के कुछ आदमियो ने मुझे पिछे से आके पकड़ लिया ऑर एक रस्सी से दुबारा मेरे हाथ बाँध दिए. ख़ान ने अपनी पिस्टल वापिस अपनी जेब मे डाली ऑर क़ाज़ी को आवाज़ लगाई.

ख़ान : क़ाज़ी साहब कहाँ हो यार जल्दी करो निकाह नही करवाना क्या हमारा.

क़ाज़ी : मैं लड़की की मर्ज़ी के खिलाफ उसकी शादी नही करवा सकता ये गुनाह है.

ख़ान : गुनाह किस बात का क़ाज़ी साहब आप देखना ये लड़की आपके सामने मुझे क़बूल करेगी नही तो मैं इसके आशिक़ को गोली मार दूँगा.

हीना : (रोते हुए) नही... नीर को कुछ मत करना तुम जो बोलोगे मैं वो करूँगी.

ख़ान : देखा क़ाज़ी साहब मैं ना कहता था... चलिए निकाह की तेयारी कीजिए अभी ऑर भी बहुत से काम ख़तम करने हैं.

तभी पिछे से अँधा-धुन्ध गोलियाँ चलने की आवाज़ आने लगी ऑर एक-एक करके ख़ान के सब आदमियो पर गोलियाँ चलने लगी. मुझे ये समझते एक पल भी नही लगा कि मेरा यार लाला आ गया है ऑर मेरे आदमियो ने पूरी हवेली को चारो तरफ से घेर लिया है अब हवेली के चप्पे-चप्पे पर मेरे आदमी बंदूक लिए खड़े थे ऑर सारी बाज़ी ही पलट गई थी.

लाला : (ताली बजाते हुए) क्या बात है भाई यहाँ तो पूरी महफ़िल लगी है लगता है मैं वक़्त पर ही आ गया... मैने कहा ख़ान साहब सलाम क़बूल कीजिए लाला का... अगर आप नही चाहते कि मैं आपकी गान्ड पर लात मारूं तो अपने आदमियो को प्यार से बोलो कि मेरे भाई ऑर भाभी को शराफ़त से खोल दे नही तो ये आपकी सेहत के लिए अच्छा नही होगा.... (मुस्कुराते हुए)

मैं : (मुस्कुराते हुए) कहाँ मार गया था साले 5 मिनिट ऑर नही आता तो हमारी लाशे मिलनी थी तुझे साला कोई काम का नही है तू.....

लाला : (स्टेज पर चढ़ते हुए) ओये क्या आदमी है साला अहसान तो मानता ही नही किसी का... अब फँस गया तो सारा बिल मेरे नाम पर फाड़ रहा है... मैने नही बोला था कि कुछ देर रुक जा मैं आ जाउ फिर साथ मे मिलकर इस कुत्ते की गान्ड मारेंगे तब तो बड़ा चौड़ा होके अकेला ही भिड़ गया था सबके साथ.

मैं : अच्छा ठीक है अब नाटक मत चोद ऑर आके मेरे हाथ खोल.

लाला : (अदब से मेरे सामने झुकते हुए) जो हुकुम मेरे आका...

उसके बाद लाला ने पहले ख़ान को एक ज़ोरदार तमाचा मारा ऑर फिर मेरी रस्सी भी खोल दी. हीना जल्दी से भाग कर मेरे पास आई ऑर मेरे गले से लग कर रोने लगी.

लाला : (मुस्कुराते हुए हीना को देख कर) मैने कहा सलाम क़बूल करो अपने देवर का होने वाली भाभी जी.

हीना : (मुझे गले से लगाए हुए लाला को देखने लगी) नीर ये कौन है.

मैं : (मुस्कुरा कर) मेरा बचपन का दोस्त है

लाला : चलो ख़ान साहब मरने के लिए रेडी हो जाओ ऑर हमने तो अपने ग़रीब खाने मे काफ़ी इंतज़ाम किया था लेकिन शेरा भाई का हुकुम है कि आपको ठोकना है... ये लैला मजनू को लगे रहने दो आप फिलहाल मेरे साथ ही काम चलाओ अभी तो सिर्फ़ मैं ही आपकी मारूँगा. (ख़ान की गान्ड पर लात मारते हुए) चल भोसड़ी के देखता क्या है... शेरा को भाभी से फ्री होने दे तेरी तो यही मारेगा... बोल भाई शेरा इसका क्या करना है.... ठोक दूं क्या...

मैं : नही... इसको गाड़ी मे डाल ऑर लेके चल अपने ठिकाने पर मेरा मूड बदल गया है अब इसको मारेंगे नही बल्कि इसकी मारेंगे (आँख मारते हुए) ऑर फिर अभी तो इससे छोटे के भी बहुत से राज़ उगलवाने हैं.

लाला : (पलट ते हुए) मुझे आज तू कुछ बदला-बदला सा लग रहा है यार...

मैं : (मुस्कुराते हुए) साले मुझे सब कुछ याद आ गया है...

लाला : (हवा मे फाइयर करते हुए) ओये यारा खुश कर दिया.... ब्बबुऊउर्र्रााहह... चल तू भाभी को लेके बाहर आजा फिर देखते हैं क्या करना है.

मैं : तुम लोग चलो मैं अपनी गाड़ी मे ही आउन्गा.

लाला : ओये मैं बाहर से ही आया हूँ वहाँ तेरी गाड़ी नही खड़ी.

मैं : यार मेरी गाड़ी हवेली के पिछे खड़ी है ऑर साथ मे मेरे कुछ ऑर लोग भी हैं जिनको साथ ही लेके जाना है.

लाला : अच्छा तो तू चल मैं ज़रा अपने हाथ की खुजली ख़तम कर लून.... (अपना हाथ खुजाते हुए)

मैं : ठीक है लेकिन साले ज़्यादा मत मारना ये अपने जैसा नही है... ज़रा करारे 4 हाथ पड़ गये तो मर ही ना जाए....

लाला : (ख़ान के मुँह पर मुक्का मारते हुए) तू जा यार मुझे डिस्टर्ब मत कर अभी मैं बिजी हूँ देखता नही इतने दिन बाद तो किसी को तसल्ली से धोने का मोक़ा मिला है...

मैं : अच्छा ठीक है लेकिन 5 मिनिट मे बाहर आ जाना इसको लेकर ज़्यादा देर नही करना.

लाला : (ख़ान के पेट मे लात मारते हुए) तू जा ना यार मैं आ जाउन्गा इसके लिए तो 5 मिनिट भी बहुत है उसमे ही इसकी फॅट के हाथ मे आ जाएगी... (ज़ोर से हँसते हुए)

हीना अपने अब्बू को गले लगा कर काफ़ी देर रोती रही फिर जब मैने उसके पास जाके उसके आगे हाथ बढ़ाया तो वो बिन कुछ बोले मेरा हाथ पकड़कर खड़ी हो गई. मैने सबसे पहले हीना के आँसू सॉफ किए उसके बाद मैं ऑर हीना जल्दी से हवेली से बाहर निकले ऑर हवेली के पिछे की तरफ चले गये जहाँ पर मैने अपनी गाड़ी खड़ी की थी गाड़ी के पास ही मुझे नाज़ी बैठी हुई नज़र आई जो बार-बार इधर उधर देख रही थी उसके चेहरे से मेरे लिए फिकर दूर से ही दिखाई दे रही थी. मुझे ऑर हीना को दूर से आता हुआ देखकर जैसे उसका चेहरा खुशी से खिल गया वो तेज़ कदमों के साथ नीर को गोद मे उठाए हमारी तरफ बढ़ने लगी ऑर आते ही मुझे गले से लगा लिया ऑर खुशी से मुस्कुराने लगी.

नाज़ी : कितनी देर कर दी आने मे मैं तो बहुत डर गई थी... तुम ठीक तो हो ना....

मैं : कैसा लगता हूँ...

नाज़ी : ये सिर मे चोट कैसे लगी...

मैं : वो सब जाने दो ये थोड़ा बहुत तो चलता रहता है अब तुम जल्दी से गाड़ी मे बैठो हम को हमारे नये घर जाना है.

नाज़ी : (खुश होके हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म चलो...

हीना : लाओ छोटा नीर मुझे दे दो ऑर तुम आगे बड़े वाले नीर के साथ बैठ जाओ.

उसके बाद मैं ऑर नाज़ी आगे बैठ गये ऑर नीर को हीना ने पकड़ लिया ऑर वो खुद ही पिछे बैठ गई. मैने जल्दी से गाड़ी स्टार्ट की ऑर उसको हवेली के अगली तरफ ले आया ऑर हवेली के बड़े गेट के सामने रोक दिया जहाँ मेरे साथियो की गाडियो का क़ाफ़िला पहले से मोजूद था. उसके बाद मैने अपने आदमियो से चलने का इशारा किया ऑर वो लोग मेरा इशारा पाते ही अंदर गये ऑर लाला ऑर ख़ान को ले आए. लाला ने कुछ ही देर मे ख़ान की बहुत बुरी हालत कर दी थी. ख़ान के चेहरे से ऑर सिर से पानी की तरफ खून टपक रहा था ऑर कुछ आदमी उसको ज़मीन पर घसीटकर ला रहे थे.

मैं : ओये साले मार तो नही दिया उसको.

लाला : (अपना हाथ रुमाल से सॉफ करते हुए) नही भाई ज़िंदा है कुत्ता... इसको तो अड्डे पर ले-जाकर तसल्ली से सब भाई मिल कर मारेंगे.

मैं : चल गाड़ी मे बैठ चलने का वक़्त हो गया है.

लाला : (मुझे सल्यूट करते हुए) ओके बॉस...

उसके बाद हम सब गाड़ी मे बैठे ऑर अपने गाँव, अपने घर की तरफ गाडियो के क़ाफ़िले को बढ़ा दिया. हीना मुझे कुछ उदास लग रही थी लेकिन नाज़ी बहुत खुश थी ऑर अपने नये घर का सुनकर बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड थी.

मेरी गाड़ी सबसे आगे थी ऑर बाकी गाड़ियाँ मेरी गाड़ी के पिछे चल रही थी ऑर कुछ फ़ासले पर थी कुछ ही देर मे हम अपनी गाँव की सरहद से काफ़ी दूर निकल आए थे. हम को गाँव से निकले अब काफ़ी वक़्त हो गया था लेकिन हीना मुझे अब भी उदास लग रही थी इसलिए मैने इशारे से अपने साथ बैठी नाज़ी को अपने पास किया ऑर उसको पिछे जाने का इशारा किया ताकि दोनो बातें कर सके ऑर हीना का भी मन बहल जाए. नाज़ी चलती हुई गाड़ी मे ही सीट को नीचे करके पिछे चली गई ऑर हीना के साथ बैठ गई ऑर कुछ ही देर मे दोनो की बाते शुरू हो गई ऑर अब हीना भी पहले से काफ़ी बेहतर नज़र आ रही थी. मेरी तरक़ीब ने अपना कम दिखा दिया था क्योंकि 2 औरते एक साथ चुप तो कभी बैठ ही नही सकती इसलिए बात होना लाज़मी था इसी तरह हीना का मूड भी अब अच्छा हो गया था. ऐसे ही गुज़रते वक़्त के साथ हम अपनी रफ़्तार से मंज़िल को बढ़ रहे थे कि अचानक मुझे सामने एक चेक पोस्ट नज़र आई हम वो क्रॉस करके नही जा सकते थे क्योंकि हम सब के पास काफ़ी असला था ऑर ख़ान के साथ होने की वजह से हमारे पकड़े जाने का भी डर था

Update-54

Ab main heena ke kamre me bhi nahi jaa sakta tha isliye pipe ke sahare hi latakta hua aagey ki taraf badhne laga jahan niche mujhe hall or stage nazar aaya jahan par khan baitha tha. Unchaayi kafi jyaadaa thi isliye main seedha niche chalaang nahi laga sakta tha isliye main idhar udhar koi rassi dekhne laga jisse latak kar main niche tak jaa saku kyonki ab mujhe sirf khan ko hi marna tha. Tabhi mujhe samne ek jhunmar latka hua nazar aaya mujhe bas wahan tak kisi bhi tarah se pohonchna tha kyonki wahan se stage ki unchayi kaafi kam thi or main asani se chalaang bhi laga sakta tha. maine idhar udhar dekha or pipe ke sahare haveli ki chhat ki taraf badhne laga jisse latak kar main upar ki ek balcony me pohonch gaya balcony se jhumar par chalaang lagana asaan tha isliye maine balcony ki railing par pair rakh ke khada ho gaya or niche jhumar ke upar chalaang laga di. Jhumar zanjeero se bandha hua tha isliye usne mera wajan to utha liya lekin mere girne se bahut jor ki awaaz hui or kaafi bulb bhi toot gaye jisse sabka dhyaan upar ki taraf chala gaya.

Chaudhary : oye koun hai upar....

Jhumar se niche ki doori kaafi kam thi isliye maine bina koi jawab diya niche stage par chalaang laga di or main seedha khan ke upar aake gir gaya jisse uski kursi toot gai or khan ko kaafi chot aayi maine jaldi se apne daye pair ko upar uthaya or usme tangi ek pistol nikaal kar khan ke sir par rakh di.

Main : madarchod maine kaha tha naa aaj tu nikaah nahi jahannnum qabool karega.

Khan : gun niche kar le shera nahi to mere log yahan khade tamaam logo ko maar dalenge.

Main : agar tere ek aadmi ki bhi goli chali to tera bheja yhi bahar nikaal dunga isliye apne kutto se bol bandook niche rakh de nahi to tera postmortem main yhi khade-khade kar dunga.

Khan : (apne logo ko gun niche karne ka ishara karte hue) niche karo...

Main : Ye hui naa baat chal ab sharafat se mujhe bahar leke chal tujhe to main apne gaav leke jaunga jha sab tera seekh kabaab banayenge sale...

Tabhi farookh heena ke sir par bandook lagaye seedhiyo se utarta hua nazar aaya.

Farookh : itni jaldi bhi kya hai shera... gun niche kar nahi to teri darling to gai.

Chaudhary : ye kya badtameezi hai khan sahab apne aadmi se kaho chhor de meri beti ko nahi to achha nahi hoga.

Khan : waah farookh waah... Chup kar budhe... sale teri beti ke chakkar me hum apni qurbaani to nahi de sakte naa....

Heena : (chalte hue stage ke pass aate hue) Sunn liya abbu.... yhi wo ladka tha naa jo aapne mere liye chuna tha.

Chaudhary : mujhe maaf kar de beti...

Farookh : Oye tum baap-beti apna Drama band karo... shera tujhe suna nahi maine kya bola ghoda niche kar nahi to main iss ladki ko goli maar dunga.

Chaudhary ye sab dekh nahi saka or jaldi se farookh se pistol chhin ne laga. Tabhi khan ne apni jeb se pistol nikaal kar chaudhary ko 3 goli maar di jisse chaudhary wahi zameen par gir gaya dher ho gaya.

Khan : shera apni pistol niche kar nahi to agli goli heena par chalegi.

Main ab majboor tha isliye chah kar bhi khan par goli nahi chala skata tha isliye apni pistol khan ko de di.

heena : (rote hue) Nahi Neer aisa mat karo maar do iss kutte ko isne mere abbu ko mara hai.

Khan ne mujhse pistol le lee or ek zordar tamacha mere munh par mara tabhi khan ke kuch aadmiyo ne mujhe pichhe se aake pakad liya or ek rassi se dubara mere hath baandh diye. Khan ne apni pistol wapis apni jeb me daali or qaazi ko awaaz lagayi.

Khan : Qaazi sahab kaha hai yaar jaldi karo nikaah nahi karwana kya hmara.

Qaazi : main ladki ki marzi ke khilaaf uski shaadi nahi karwa sakta ye gunah hai.

Khan : gunah kis baat ka qaazi sahab aap dekhna ye ladki aapke samne mujhe qabool karegi nahi to main iske aashiq ko goli maar dunga.

Heena : (rote hue) nahi... Neer ko kuch mat karna tum jo bologe main wo karungi.

Khan : dekha qaazi sahab main naa kehta tha... chaliye nikaah ki teiyaari kijiye abhi or bhi bahut se kaam khatam karne hain.

Tabhi pichhe se andha-dhundh goliyaan chalne ki awaaz aane lagi or ek-ek karke khan ke sab aadmiyo par goliyaan chalne lagi. Mujhe ye samajhte ek pal bhi nahi laga ki mera yaar lala aa gaya hai or mere aadmiyo ne poori haveli ko charo taraf se gher liya hai ab haveli ke chappe-chappe par mere aadmi bandook liye khade the or saari baazi hi palat gai thi.

Lala : (Taali bajate hue) kya baat hai bhai yahan to poori mehfil lagi hai lagta hai main waqt par hi aa gaya... Maine kaha khaan sahab Salaam qabool kijiye lala ka... agar aap nahi chahte ki main aapki gaanD par laat maaru to apne aadmiyo ko pyaar se bolo ki mere bhai or bhabhi ko sharafat se khol de nahi to ye aapki sehat ke liye achha nahi hoga.... (muskurate hue)

Main : (muskurate hue) kaha mar gaya tha sale 5 minute or nahi aata to hamaari laashe milni thi tujhe sala koi kaam ka nahi hai tu.....

Lala : (Stage par chadhte hue) Oye kya aadmi hai sala ahsaan to maanta hi nahi kisi ka... Ab phas gaya to sara bill mere naam par phaad raha hai... Maine nahi bola tha ki kuch der rukjaa main aa jau phir sath me milkar iss kutte ki gaanD maarenge tab to bada chouda hoke akela hi bheed gaya tha sabke sath.

Main : achha thik hai ab naatak mat chod or aake mere hath khol.

Lala : (adab se mere samne jhukte hue) Jo hukum mere aakaa...

Uske baad lala ne pehle khaan ko ek zordaar tamacha maara or phir meri rassi bhi khol di. Heena jaldi se bhaag kar mere pass ayi or mere gale se lag kar rone lagi.

Lala : (Muskurate hue heena ko dekh kar) maine kaha salaam qabool karo apne devar ka hone wali bhabhi ji.

Heena : (Mujhe gale se lagaye hue lala ko dekhne lagi) Neer ye koun hai.

Main : (muskurakar) Mera bachpan ka dost hai

Lala : Chalo khan sahab marne ke liye ready ho jao or Hamane to apne gareeb khane me kaafi intezam kiya tha lekin shera bhai ka hukum hai ki aapko thokna hai... Ye laila majnu ko lage rehne do aap filhaal mere sath hi kaam chalao abhi to sirf main hi aapki maarunga. (khan ki gaanD par laat marte hue) chal bhosdi ke dekhta kya hai... Shera ko bhabhi se free hone de teri to yhi maarega... Bol bhai shera iska kya karna hai.... thok doo kya...

Main : Nahi... isko gaadi me daal or leke chal apne thikaane par mera mood badal gaya hai ab isko maarenge nahi balki iski maarenge (aankh maarte hue) or phir abhi to isse chhote ke bhi bahut se raaz ugalwane hain.

Lala : (palat te hue) Mujhe aaj tu kuch badla-badla sa lag raha hai yaar...

Main : (muskurate hue) sale mujhe sab kuch yaad aa gaya hai...

Lala : (hawa me fire karte hue) Oye yaraa khush kar diya.... bbbuuurrraaahhhhh... Chal tu bhabhi ko leke bahar aaja fir dekhte hain kya karna hai.

Main : tum log chalo main apni gaadi me hi aaunga.

Lala : oye main bahar se hi aaya hun wahan teri gaadi nahi khadi.

Main : yaar meri gaadi haveli ke pichhe khadi hai or sath me mere kuch or log bhi hain jinko sath hi leke jana hai.

Lala : achha to tu chal main zra apne hath ki khujli khatam kar loo.... (Apna hath khujate hue)

Main : thik hai lekin sale jyaadaa mat marna ye apne jaisa nahi hai... zra karaare 4 hath pad gaye to mar hi naa jaye....

Lala : (Khan ke munh par mukka marte hue) tu jaa yaar mujhe disturb mat kar abhi main bussy hun dekhta nahi itne din baad to kisi ko tasalli se dhone ka moqa mila hai...

Main : achha thik hai lekin 5 minute me bahar aa jana isko lekar jyaadaa der nahi karna.

Lala : (Khan ke pet me laat marte hue) tu jaa naa yaar main aa jaunga iske liye to 5 minute bhi bahut hai usme hi iski phat ke hath me aa jayegi... (zor se hansatey hue)

Heena apne abbu ko gale laga kar kaafi der roti rahi fir jab maine uske pass jake uske aagey hath badhaya to wo bin kuch bole mera hath pakadkar khadi ho gai. Maine sabse pehle heena ke aansu saaf kiye uske baad main or heena jaldi se haveli se bahar nikale or haveli ke pichhe ki taraf chale gaye jahan par maine apni gaadi khadi ki thi Gaadi ke pass hi mujhe nazi baithi hui nazar aayi jo bar-bar idhar udhar dekh rahi thi uske chehre se mere liye fikar door se hi dikhayi de rahi thi. Mujhe or heena ko door se aata hua dekhkar jaise uska chehra khushi se khil gaya Wo tez kamdo ke sath Neer ko god me uthaye hamaari taraf badhne lagi or aate hi mujhe gale se laga liya or khushi se muskurane lagi.

Nazi : Kitni der kar di aane me main to bahut darr gai thi... tum thik to ho naa....

Main : kaisa lagta hun...

Nazi : Ye sir me chot kaise lagi...

Main : wo sab jane do ye thoda bahut to chalta rehta hai ab tum jaldi se gaadi me baitho ham ko hamaare naye ghar jana hai.

Nazi : (khush hoke haa me sir hilate hue) Hhhmmm chalo...

Heena : laao chhota Neer mujhe de do or tum aagey bade wale Neer ke sath baith jao.

Uske baad main or naazi aagey baith gaye or Neer ko heena ne pakad liya or wo khud hi pichhe baith gai. Main jaldi se gaadi start ki or usko haveli ke agli taraf le aya or haveli ke bade gate ke samne rok diya jahan mere sathiyo ki gaadiyo ka qafila pehle se mojud tha. Uske baad maine apne aadmiyo se chalne ka ishara kiya or wo log mera ishara pate hi andar gaye or lala or khan ko le aaye. Lala ne kuch hi der me khan ki bahut buri halat kar di thi. khan ke chehre se or sir se paani ki taraf khun tapak raha tha or kuch aadmi usko zameen par ghasitkar laa rahe the.

Main : oye sale maar to nahi diya usko.

Lala : (apna hath rumaal se saaf karte hue) nahi bhai zinda hai kutta... isko to addey par le-jakar tasalli se sab bhai mil kar marenge.

Main : chal gaadi me baith chalne ka waqt ho gaya hai.

Lala : (mujhe salute karte hue) Ok boss...

Uske baad hum sab gaadi me baithe or apne gaav, apne ghar ki taraf gaadiyo ke qafile ko badha diya. Heena mujhe kuch udaas lag rahi thi lekin nazi bahut khush thi or apne naye ghar ka sunkar bahut jyaadaa excited thi.

Meri gaadi sabse aagey thi or baaki gaadiyan meri gaadi ke pichhe chal rahi thi or kuch fasle par thi kuch hi der me hum apni gaav ki sarahad se kaafi door nikal aaye the. Ham ko gaav se nikale ab kaafi waqt ho gaya tha lekin heena mujhe ab bhi udaas lag rahi thi isliye maine ishare se apne sath baithi naazi ko apne pass kiya or usko pichhe jane ka ishara kiya taaki dono baaten kar sake or heena ka bhi mann behal jaye. Nazi chalti hui gaadi me hi seat ko niche karke pichhe chali gai or heena ke sath baith gai or kuch hi der me dono ki baate shuru ho gai or ab heena bhi pehle se kaafi behtar nazar aa rahi thi. Meri tarqeeb ne apna kam dikha diya tha kyonki 2 aurate ek sath chup to kabhi baith hi nahi sakti isliye bat hona lazmi tha isi tarah heena ka mood bhi ab achha ho gaya tha. Aise hi guzarte waqt ke sath hum apni raftaar se manzil ko badh rahe the ki achanak mujhe samne ek check post nazar aayi hum wo cross karke nahi jaa sakte the kyonki hum sab ke pass kaafi asla tha or khan ke sath hone ki wajah se hamaare pakde jane ka bhi darr tha

 
54A

इसलिए मैने जल्दी से अपनी जेब से अपना फोन निकाला ऑर लाला को फोन करके अपनी गाड़ी के पिछे आने का हुकुम दिया ऑर अपनी गाड़ी को एक जंगल की तरफ घुमा दिया मेरे पिछे-पिछे ही बाकी गाडिया भी जंगल मे घुस गई कुछ दूर जाके मैने गाड़ी को रोक दिया क्योंकि मुझे आगे किस तरफ जाना है ये समझ मे नही आ रहा था इसलिए मैने गाड़ी से बाहर निकल कर लाला की गाड़ी को भी रुकने का इशारा किया मेरे नज़दीक आके उसकी गाड़ी भी रुक गई ऑर लाला गाड़ी से बाहर आ गया.

लाला : हाँ भाई यहाँ बीच जंगल मे कहाँ ले आया यार अब आगे कहाँ जाना है.

मैं : यार आगे चेक पोस्ट थी इसलिए मैने गाड़ी को जंगल मे घुमा लिया लेकिन अब आगे किस तरफ जाना है ये मुझे भी समझ नही आ रहा शायद हम भटक गये हैं.

लाला : लो जी कर लो बात... अब बीच जंगल मे क्या करेंगे यार दिन भी ढलने वाला है ऐसा करते हैं वापिस चलते हैं वहाँ से हाइवे पर हो जाएँगे.

मैयाँ : पागल हो गया है क्या... आगे चेक पोस्ट थी इसलिए तो मैने गाड़ी जंगल मे घुसा दी थी ऑर तू फिर से वही जाने की बात कर रहा है अब तक ये कुत्ते (ख़ान) के चमचे भी इसको ढूँढने निकल पड़े होंगे.

लाला : फिर क्या है यार साला डरता कौन है अपने पास हथियार की कमी है क्या साला जो भी आएगा मार कर निकल जाएँगे ऑर क्या चल भाई वापिस ही चलते हैं.

अभी हम दोनो बात ही कर रहे थे की अचानक ख़ान गाड़ी से मुँह बाहर निकाल कर चिल्लाया...

ख़ान : कमीनो तुम यहाँ से ज़िंदा नही जा सकते तुमने मुझे अगवा करके अपनी मौत को दावत दी है अभी तुम मुझे जानते नही हो.

लाला : (गुस्से मे ) अर्रे यार भाई तू तो भाभी के साथ मज़े से बैठ गया ऑर ये हरामी को मेरे साथ डाल दिया साला भेजा खा गया मेरा कितना बोलता है ये.... (अपने आदमियो से) यार कोई गंदा कपड़ा ढुंढ़ो इसका मुँह बाँधने को...

मुन्ना (हमारा आदमी) : भाई एक ही पट्टी थी वो भी ये साला कुत्ता काट गया ऑर पट्टी फॅट गई.

लाला : (कुछ सोचते हुए ऑर हँस कर) इसका इलाज तो मैं करता हूँ...

मैं : (सवालिया नज़रों से लाला को देखते हुए) ओये मार मत देना ये ज़िंदा चाहिए मुझे समझा अभी इससे बहुत कुछ उगलवाना है.

लाला : भाई फिकर मत कर मार कौन रहा है मेरा तो कुछ ऑर ही मूड है (आँख मारते हुए).

मैं : क्या करने जा रहा है तू...

लाला : (हँसते हुए) तू बस भाभी को गाड़ी से बाहर मत आने देना इसकी ऐसी-तैसी तो मैं करता हूँ साला मुँह खोलने के लायक नही रहेगा....

इतना कह कर वो अपना जूता उतारने लगा ऑर फिर अपनी ज़ुराब भी उतार ली ऑर फिर से जूता पहन लिया ऑर अपनी गंदी बद-बू-दार ज़ुराब उठा कर एक झाड़ी के पिछे चला गया मैने भी नाज़ी ऑर हीना को गाड़ी से बाहर निकलने से मना कर दिया. कुछ देर बाद लाला जब हँसता हुआ वापिस आया तो उसकी ज़ुराब गीली थी ऑर उससे पानी टपक रहा था.

मैं : (हँसते हुए) ये क्या है कमीने...

लाला : (हँसते हुए) इस कुत्ते का मुँह बंद करने का इलाज... चल भाई मुँह खोल इसका... लगे हाथ दोनो काम हो गये साला मेरा भी काफ़ी देर से प्रेशर बना हुआ था साला पेट भी खाली हो गया ऑर इसका भी इलाज हो गया.

लाला के साथ बैठे आदमियो ने ख़ान का मुँह पकड़ लिया ऑर ज़बरदस्ती पेशाब से गीली की हुई ज़ुराब ख़ान के मुँह मे डाल दी ऑर उसी फटी हुई पट्टी को दुबारा उसके मुँह पर बाँध दिया वो किसी बिन पानी की मछली की तरफ छट-पटा रहा था ऑर अपनी गर्दन को हवा मे इधर उधर कर रहा था. सब ये देख कर ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे ऑर हीना ऑर नाज़ी जो कि अब भी गाड़ी मे बैठी थी वो मुझे सवालिया नज़रों से देख रही थी.

हीना : क्या हुआ सब हँस क्यो रहे हैं.

मैं : (हँसते हुए) कुछ नही तुम्हारे काम की बात नही है.... यार हम रास्ता भटक गये हैं आगे किस तरफ जाना है समझ नही आ रहा तुमको यहाँ से आगे जाने का रास्ता पता है क्या.

नाज़ी : (बीच मे बोलते हुए) मुझे पता है किस तरफ जाना है मैं बचपन मे स्कूल इसी रास्ते से जाया करती थी.

मैं : तो पहले बताया क्यो नही कितनी देर से हम बेकार मे भटक रहे हैं.

नाज़ी : (मुँह बनाते हुए) तुमने पूछा ही नही...

मैं : क्या यार तुम भी कमाल हो... (अपने सारे आदमियो से) चलो ओये गाड़ी मे बैठो सारे रास्ते का पता लग गया है.

उसके बाद सब आदमी वापिस गाडियो मे बैठ गये ऑर ख़ान को भी वापिस गाड़ी मे डाल लिया ऑर हम सब नाज़ी के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने लगे ऑर कुछ ही देर मे हम हाइवे पर आ गये अभी हमें कुछ ही देर हुई थी कि मेरा फोन बजने लगा. मैने जेब से फोन निकाला तो स्क्रीन पर रूबी लिखा आ रहा था. मुझे समझ मे नही आ रहा था कि नाज़ी ऑर हीना के सामने रूबी से बात कैसे करूँ लेकिन फोन उठाना भी ज़रूरी था इसलिए कुछ सोचकर मैने फोन उठा लिया.

मैं : हंजी सरकार हुकुम कीजिए...

रूबी : कहाँ हो तुम... मुझे फोन क्यो नही किया... मैने कहा था ना पहुँच कर मुझे फोन कर देना... जानते हो कितनी फिकर हो गई थी तुम्हारी....

मैं : बस... बस... बस... साँस तो लेलो... एक ही साँस मे सब कुछ पूछ लिया... यार मुझे बोलने का मोक़ा तो दो...

रूबी : ठीक है बोलो... फोन क्यो नही किया ऑर वापिस कब आ रहे हो.

मैं : मैं कल सुबह तक वापिस आ जाउन्गा ऑर जिस काम के लिए गया था वो पूरा हो गया है...

रूबी : सच्ची.... कमाल है इतनी जल्दी वापिस आ रहे हो...

मैं : तुम कहो तो 4-5 दिन ऑर रुक जाता हूँ

रूबी : नही... मेरे कहने का वो मतलब नही था....

मैं : अच्छा एक काम की बात सुनो...

रूबी : हम्म.... बोलो...

मैं : मेरे साथ कुछ मेहमान भी आ रहे हैं जो हमारे घर मे ही रहेंगे हमारे साथ...

रूबी : मेहमान है तो उनको हवेली मे रखो ना घर लाने की क्या ज़रूरत है.

मैं : अर्रे यार वो काम वाले मेहमान नही है मेरे मेहमान है ऑर बहुत ख़ास है अब से वो भी हमारे साथ ही रहेंगे तो तुम उन लोगो के रहने का इंतज़ाम कर देना ठीक है...

रूबी : हम्म ठीक है लेकिन तुमने ये तो बताया ही नही कितने लोग हैं.

मैं : (हँसते हुए) 2 औरत है ऑर एक छोटा सा शेर भी है उनके साथ.

रूबी : औरत कौन है...

मैं : अर्रे यार तुमको आके सब बताउन्गा बस अभी जितना कह रहा हूँ उतना कर लो.

रूबी : अच्छा... जल्दी आ जाना मैं इंतज़ार करूँगी...

मैं : हमम्म चलो अब फोन रख दो मैं गाड़ी चला रहा हूँ...

रूबी : उउउहहुउ.... कितनी बार कहा है गाड़ी चलाते हुए बात ना किया करो....

मैं : तुम्हारा भी पता नही चलता यार फोन उठा लो तो मुसीबत ना उठाओ तो मुसीबत...

रूबी : अच्छा अब फोन बंद करो ऑर ध्यान से गाड़ी चलाओ.

उसके बाद मैने फोन रख दिया अब मुझे एक नयी फिकर होने लगी थी कि मैं घर जाके रूबी को इन दोनो के बारे मे क्या बताउन्गा इसलिए आगे के बारे मे सोचने लगा ऑर चुप-चाप गाड़ी चलाने लगा. कुछ देर बाद हम एक ढाबे पर रुके जहाँ हम सब ने मिलकर खाना खाया. खाना खाते हुए कुछ लोग हमें अज़ीब नज़रों से घूर-घूर कर देख रहे थे लेकिन मैने नज़र अंदाज़ कर दिया ऑर खाने पर ध्यान देने लगा क्योंकि उस वक़्त हम सब को बहुत ज़ोर की भूख लगी हुई थी. खाना खाने के बाद हम सब वापिस अपनी गाडियो मे बैठ कर अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ने लगे. कुछ दूर जाने के बाद मुझे लाला का फोन आया कि पोलीस की कुछ गाड़ियाँ हमारी गाडियो के पिछे आ रही हैं. ये सुनकर मुझे समझ आ गया कि ढाबे पर वो कौन लोग थे जो हम को घूर-घूर कर देख रहे थे. इसलिए मैने सबको बिना कोई खून-खराब किए वहाँ से शांति से चलने का हुकुम दे दिया क्योंकि अब रात के वक़्त मैं एक ऑर खून-ख़राबा नही चाहता था इसलिए मैने सबको गोली चलाने से मना कर दिया. लेकिन वो पोलीस की गाड़ियाँ लगातार अपना साइरन बजाते हुए हमारी गाडियो के पिछे आ रही थी ऑर हम को रुकने के लिए कह रही थी. कुछ देर बाद हमारी सबसे पिछे वाली गाड़ी पर फाइयर होने शुरू हो गये.

अब हम लोग कुछ नही कर सकते थे ना चाहते हुए भी हम को जवाब मे गोली चलानी ही थी इसलिए अब चलती गाडियो मे ही दोनो तरफ से फाइयर होना शुरू हो गये मेरी गाड़ी उस वक़्त सबसे आगे थी ऑर मेरे साथ नाज़ी, छोटा नीर ऑर हीना भी थी इसलिए मैं सिर्फ़ गाड़ी चलाने पर ही ध्यान देने लगा. कुछ देर बाद एक पोलीस की जीप पिछे की तमाम गाडियो को ओवर टेक करती हुई एक दम मेरे बराबर मे आ गई ऑर लगातार मेरी कार पर गोलियाँ चलाने लगी मैने जल्दी से हीना ऑर नाज़ी को नीचे झुका दिया ताकि उनको गोली ना लग जाए लेकिन एक गोली मेरे कंधे पर लग गई ऑर गाड़ी का बॅलेन्स बिगड़ने लगा. मैने जल्दी से स्टेरिंग के सामने रखी अपनी रेवोल्वर उठाई ऑर सामने वाली जीप पर जवाबी गोलियाँ चलाने लगा 5 ही फाइयर मे मेरी रेवोल्वर खाली हो गई थी ऑर अब मेरे पास कारतूस भी नही थे क्योंकि बाकी हथियार ऑर कारतूस कार की दिग्गी मे पड़े थे ऑर कार रोकने का मेरे पास मोक़ा नही था. लेकिन जीप मे से अब भी फाइरिंग जारी थी अब मेरे पास दूसरा कोई असला नही था इसलिए मैने एक रिस्क उठाया मैने अपनी गाड़ी की स्पीड कम की ऑर अपनी गाड़ी को उस जीप के एक दम साथ मे कर लिया ऑर नाज़ी ऑर हीना को झुके रहने का कहकर ज़ोर से अपनी गाड़ी को उस जीप मे धकेल दिया जिससे उनकी जीप का बॅलेन्स बिगड़ गया ऑर वो सामने वाली चट्टान मे जाके टकरा गई ऑर जीप पलट गई. अब मेरा उस जीप से तो पीछा छूट गया था लेकिन मेरे आदमियो की गाडियो के पिछे अब भी काफ़ी पोलीस की जीप लगी हुई थी ऑर दोनो तरफ से फाइयर हो रहे थे. मेरे कंधे मे भी गोली लग चुकी थी जिस वजह से तेज़ दर्द उठ रहा था ऑर अब मुझसे गाड़ी भी नही चलाई जा रही थी लेकिन फिर भी मैं हिम्मत करके गाड़ी चलाता रहा. मेरी अब हिम्मत जवाब दे रही थी क्योंकि बाजू से काफ़ी खून निकल रहा था इसलिए मैने लाला की गाड़ी को हाथ से इशारा करके मेरी गाड़ी के बराबर आने को कहा कुछ ही सेकेंड्स मे उसकी गाड़ी रफ़्तार पकड़ती हुई एक दम मेरी गाड़ी के साथ आ गई.....

मैं : (चिल्लाते हुए) मेरे कारतूस ख़तम हो गये हैं ऑर मुझे गोली भी लगी है मुझे हथियार वाला बॅग दे लाला....

लाला : (हाथ से इशारा करते हुए) देटाअ हुंओ....

हम दोनो ने एक ही वक़्त पर चलती कार का दरवाज़ा खोल दिया ऑर अपनी दोनो गाडियो को बराबर पर लाके मैने एक हाथ से हथियार वाला बॅग अंदर खीच लिया साथ ही मैने अपने एक आदमी को मेरी गाड़ी मे आने को कहा ताकि वो कार चला सके. हम दोनो की गाडियो की रफ़्तार काफ़ी तेज़ थी इसलिए गाड़ी बराबर आने मे दिक्कत हो रही थी कुछ एफर्ट्स के बाद मैने उस आदमी को अपनी गाड़ी मे खींच लिया. अब वो मेरी जगह गाड़ी चला रहा था ऑर मैं साथ वाली सीट पर बैठा बॅग से हथियार निकाल रहा था बॅग खोलते ही मेरी नज़र बाज़्ज़ुक़ा पर पड़ी मैने जल्दी से उसमे बॉम्ब लोड किया ऑर अपनी जेब से फोन निकाला ऑर लाला को फोन किया...

क्रमशः…………

isliye maine jaldi se apni jeb se apna phone nikala or lala ko phone karke apni gaadi ke pichhe aane ka hukum diya or apni gaadi ko ek jungle ki taraf ghuma diya mere pichhe-pichhe hi baaki gadiya bhi jungle me ghus gai kuch door jake maine gaadi ko rok diya kyonki mujhe aagey kis taraf jana hai ye samajh me nahi aa raha tha isliye maine gaadi se bahar nikal kar Lala ki gaadi ko bhi rukne ka ishara kiya mere nazdeek aake uski gadi bhi ruk gai or lala gaadi se bahar aa gaya.

Lala : haa bhai yahan bich jungle me kaha le aaya yaar ab aagey kaha jana hai.

Main : yaar aagey check post thi isliye maine gaadi ko jungle me ghuma liya lekin ab aagey kis taraf jana hai ye mujhe bhi samajh nahi aa raha shayad hum bhatak gaye hain.

Lala : loh ji kar lo baat... ab bich jungle me kya karenge yaar din bhi dhalne wala hai aisa karte hain wapis chalte hain wahan se highway par ho jayenge.

Maian : pagal ho gaya hai kya... aagey check post thi isliye to maine gaadi jungle me ghusa di thi or tu phir se wahi jane ki baat kar raha hai ab tak ye kutte (khan) ke chamche bhi isko dhundhne nikal pade honge.

Lala : phir kya hai yaar sala darta koun hai apne pass hathiyaar ki kami hai kya sala jo bhi aayega maar kar nikal jayenge or kya chal bhai wapis hi chalte hain.

Abhi hum dono baat hi kar rahe the ki achanak khan gaadi se munh bahar nikaal kar chillaya...

Khan : kameeno tum yahan se zinda nahi jaa sakte tumne mujhe agwa karke apni maut ko daavat di hai abhi tum mujhe jante nahi ho.

Lala : (gusse me ) Arre yaar bhai tu to bhabhi ke sath maze se baith gaya or ye harami ko mere sath daal diya sala bheja khaa gaya mera kitna bolta hai ye.... (apne aadmiyo se) Yaar koi ganda kapda dhundho iska munh bandhne ko...

Munna (Hmara aadmi) : Bhai ek hi patti thi wo bhi ye sala kutta kaat gaya or patti phat gai.

Lala : (kuch sochte hue or hass kar) iska ilaaj to main karta hun...

Main : (sawaliya nazaro se lala ko dekhte hue) Oye maar mat dena ye zinda chahiye mujhe samjha abhi isse bahut kuch ugalwana hai.

Lala : bhai fikar mat kar maar koun raha hai mera to kuch or hi mood hai (aankh marte hue).

Main : kya karne laga hai tu...

Lala : (hansate hue) Tu bas bhabhi ko gaadi se bahar mat aane dena iski aisi-taisi to main karta hun sala munh kholne ke layak nahi rahega....

Itna keh kar wo apna joota utarne laga or phir apni zuraab bhi utaar lee or phir se joota pehan liya or apni gandi bad-boo-daar zuraab utha kar ek jhaadi ke pichhe chala gaya maine bhi naazi or heena ko gaadi se bahar nikalne se mana kar diya. kuch der baad lala jab hasta hua wapis aaya to uski zuraab geeli thi or usse paani tapak raha tha.

Main : (Hansatey hue) ye kya hai kameene...

Lala : (hansatey hue) Iss kutte ka munh band karne ka ilaaj... Chal bhai munh khol iska... lage hath dono kaam ho gaye sala mera bhi kaafi der se pressure bana hua tha sala pet bhi khaali ho gaya or iska bhi ilaaj ho gaya.

Lala ke sath baithe aadmiyo ne khan ka munh pakad liya or jabardasti peshaab se geeli ki hui zuraab khaan ke munh me daal di or usi phati hui patti ko dubara uske munh par baandh diya wo kisi bin paani ki machali ki taraf chat-pata raha tha or apni garden ko hawa me idhar udhar kar raha tha. Sab ye dekh kar zor-zor se hass rahe the or heena or nazi jo ki ab bhi gaadi me baithi thi wo mujhe sawaliya nazaro se dekh rahi thi.

Heena : kya hua sab hass kyo rahe hain.

Main : (hansatey hue) kuch nahi tumhare kaam ki baat nahi hai.... Yaar hum rasta bhatak gaye hain aagey kis taraf jana hai samajh nahi aa raha tumko yahan se aagey jane ka rasta pata hai kya.

Naazi : (bich me bolte hue) Mujhe pata hai kis taraf jana hai main bachpan me schunl isi rastey se jaya karti thi.

Main : To pehle bataayaa kyo nahi kitni der se hum bekaar me bhatak rahe hain.

Naazi : (munh banate hue) tumne puchaa hi nahi...

Main : Kya yaar tum bhi kamaal ho... (apne saare aadmiyo se) Chalo oye gaadi me baitho saare rastey ka pata lag gaya hai.

Uske baad sab aadmi wapis gaadiyo me baith gaye or khan ko bhi wapis gaadi me daal liya or hum sab Nazi ke bataye rastey par aagey badhne lage or kuch hi der me hum highway par aa gaye abhi hume kuch hi der hui thi ki mera phone bajne laga. Maine jeb se phone nikala to screen par rubi likha aa raha tha. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki nazi or heena ke samne rubi se baat kaise karu lekin phone uthana bhi jaruri tha isliye kuch sochkar maine phone utha liya.

Main : Hanji sarkaar hukum kijiye...

Rubi : Kaha ho tum... mujhe phone kyo nahi kiya... maine kaha tha naa pohonch kar mujhe phone kar dena... jante ho kitni fikar ho gai thi tumhari....

Main : bas... bas... bas... Saans to lelo... ek hi saans me sab kuch puch liya... Yaar mujhe bolna ka moqa to do...

Rubi : thik hai bolo... phone kyo nahi kiya or wapis kab aa rahe ho.

Main : Main kal subah tak wapis aa jaunga or jis kaam ke liye gaya tha wo poora ho gaya hai...

Rubi : Sachhiii.... kamaal hai itni jaldi wapis aa rahe ho...

Main : tum kaho to 4-5 din or ruk jata hun

Rubi : Nahi... mere kehne ka wo matlab nahi tha....

Main : achha ek kaam ki baat suno...

Rubi : Hhhmm.... bolo...

Main : mere sath kuch mehmaan bhi aa rahe hain jo hamaare ghar me hi rahenge hamaare sath...

Rubi : Mehmaan hai to unko haveli me rakho naa ghar laane ki kya jarurat hai.

Main : Arre yaar wo kaam wale mehmaan nahi hai mere mehmaan hai or bahut khaas hai ab se wo bhi hamaare sath hi rahenge to tum unn logo ke rehne ka intezaam kar dena thik hai...

Rubi : Hhhmm thik hai lekin tumne ye to bataayaa hi nahi kitne log hain.

Main : (hansatey hue) 2 aurat hai or ek chhota sa sher bhi hai unke sath.

Rubi : Aurat koun hai...

Main : Arre yaar tumko aake sab bataunga bas abhi jitna keh raha hun utna kar lo.

Rubi : achha... Jaldi aa jana main intzaar karungi...

Main : Hhhmmm Chalo ab phone rakh do main gaadi chala raha hun...

Rubi : Uuuhhuu.... kitni baar kaha hai gaadi chalate hue baat naa kiya karo....

Main : tumhara bhi pata nahi chalta yaar phone utha lo to musibat na uthao to musibat...

Rubi : achha ab phone band karo or dhyaan se gaadi chalao.

Uske baad maine phone rakh diya ab mujhe ek nayi fikar hone lagi thi ki main ghar jake rubi ko inn dono ke bare me kya bataunga isliye aagey ke baare me sochne laga or chup-chap gaadi chalane laga. Kuch der baad hum ek dhaabe par ruke jahan hum sab ne milkar khana khaya. khana khate hue kuch log hume azeeb nazaro se ghur-ghur kar dekh rahe the lekin maine nazar andaaz kar diya or khane par dhyaan dene laga kyonki uss waqt hum sab ko bahut zor ki bhukh lagi hui thi. Khana khane ke baad hum sab wapis apni gaadiyo me baith kar apni manzil ki taraf badhne lage. Kuch door jane ke baad mujhe Lala ka phone aaya ki police ki kuch gaadiyan hamaari gaadiyo ke pichhe aa rahi hain. Ye sunkar mujhe samajh aa gaya ki dhaabe par wo koun log the jo ham ko ghur-ghur kar dekh rahe the. Isliye maine sabko bina koi khun-kharab kiye wahan se shaanti se chalne ka hukum de diya kyonki ab raat ke waqt main ek or khun-kharaba nahi chahta tha isliye maine sabko goli chalane se mana kar diya. Lekin wo police ki gaadiyaan lagatar apna siren bajate hue hamaari gaadiyo ke pichhe aa rahi thi or ham ko rukne ke liye keh rahi thi. kuch der baad humari sabse pichhe wali gaadi par fire hone shuru ho gaye.

Ab hum log kuch nahi kar sakte the naa chahte hue bhi ham ko jawab me goli chalani hi thi isliye ab chalti gaadiyo me hi dono taraf se fire hona shuru ho gaye meri gaadi uss waqt sabse aagey thi or mere sath nazi, chhota Neer or heena bhi thi isliye maine sirf gaadi chalane par hi dhyaan dene laga. Kuch der baad ek police ki jeep pichhe ki tamaam gaadiyo ko over take karti hui ek dam mere barabar me aa gai or lagatar meri car par goliyaan chalane lagi maine jaldi se heena or nazi ko niche jhuka diya taaki unko goli naa lag jaye lekin ek goli mere kandhe par lag gai or gaadi ka balance bigadne laga. maine jaldi se stairing ke samne rakhi apni revoler uthayi or samne wali jeep par jawabi goliyaan chalane laga 5 hi fire me meri revolver khaali ho gai thi or ab mere pass kartoos bhi nahi the kyonki baaki hathiyaar or kartoos car kidiggi me pade the or car rokne ka mere pass moqa nahi tha. lekin jeep me se ab bhi firing jaari thi ab mere pass dusra koi asla nahi tha isliye maine ek risk uthaya maine apni gaadi ki speed kam ki or apni gaadi ko uss jeep ke ek dam sath me kar liya or nazi or heena ko jhuke rehne ka kehkar jor se apni gaadi ko uss jeep me dhakel diya jisse unki jeep ka balance bigad gaya or wo samne wali chattan me jake takra gai or jeep palat gai. ab mera uss jeep se to pichha chhut gaya tha lekin mere aadmiyo ki gaadiyo ke pichhe ab bhi kaafi police ki jeep lagi hui thi or dono taraf se fire ho raha tha. Mere kandhe me bhi goli lag chuki thi jis wajah se tez dard uth raha tha or ab mujhse gaadi bhi nahi chalayi jaa rahi thi lekin fir bhi main himmat karke gaadi chalata raha. Meri ab himmat jawab de rahi thi kyonki baaju se kaafi khun nikal raha tha isliye maine lala ki gaadi ko hath se ishara karke meri gaadi ke barbar aane ko kaha kuch hi seconds me uski gaadi raftaar pakadti hui ek dam meri gaadi ke sath aa gai.....

Main : (Chillate hue) Mere kartoos khatam ho gaye hain or mujhe goli bhi lagi hai mujhe hathiyaar wala bag de lalaaa....

Lala : (Hath se ishara karte hue) Detaaa huno....

Hum dono ne ek hi waqt par chalti car ka darwaza khol diya or apni dono gaadiyo ko brabari par laake maine ek hath se hathiyaar wala bag andar khich liya sath hi maine apne ek aadmi ko meri gaadi me aane ko kaha taaki wo car chala sake. Hum dono ki gaadiyo ki raftaar kaafi tez thi isliye gaadi barabar aane me dikkat ho rahi thi kuch efforts ke baad maine uss admi ko apni gaadi me khinch liya. Ab wo meri jagah gaadi chala raha tha or main sath wali seat par baitha bag se hathiyaar nikaal raha tha bag kholte hi meri nazar Bazzuka par padi maine jaldi se usme bomb load kiya or apni jeb se phone nikala or lala ko phone kiya...

kramashah…………

 
अपडेट-55

मैं : लाला एक आइडिया आया है मैं गाड़ी की छत पर जा रहा हूँ जब मैं इशारा करूँगा तब अपने आदमियो को बोलना कि सब अपनी अपनी गाड़ियों को बाई तरफ कर ले ऑर एक दम से अपनी सब गाडियो की रफ़्तार बढ़ा दे...

लाला : ठीक है.... भाई मैं अभी सबको फोन करके कह देता हूँ....

उसके बाद मैने फोन रख दिया ऑर लाला के इशारे का इंतज़ार करने लगा क्योंकि उसके बाद ही मैं गाड़ी की छत पर जा सकता था. तभी मुझे हीना की आवाज़ आई...

हीना : नीर तुम ठीक तो हो ना....

मैं : मैं ठीक हूँ फिकर मत करो तुम नीचे रहो....

हीना : तुम्हारी बाजू से तो बहुत खून निकल रहा है...

मैं : कोई बात नही अभी सब ठीक हो जाएगा तुम दोनो नीचे रहो बाहर फाइरिंग हो रही है....

तभी मुझे लाला ने गाड़ी से हाथ बाहर निकाल कर अपने हाथ का अंगूठा दिखाते हुए डन का इशारा किया. मैने जल्दी से गाड़ी का दूसरी तरफ का दरवाज़ा खोला ऑर बाज़्ज़ुक़ा लेकर गाड़ी की छत पर बैठ गया ऑर बाज़्ज़ुक़ा को अपने कंधे पर सेट कर लिया ऑर पोलीस की बीच वाली गाड़ी का निशाना लगाया ताकि धमाके से आगे ऑर पिछे दोनो तरफ की गाड़िया उड़ जाए लेकिन उससे पहले मुझे मेरे आदमियो को इशारा करना था इसलिए मैं कुछ सेकेंड्स के लिए अपना बॅलेन्स बनाता हुआ गाड़ी की छत पर सीधा खड़ा हो गया जिससे मेरे सब आदमियो ने मुझे देख लिया ऑर अपनी सारी गाडियो को एक साथ बाई तरफ कर लिया. मेरे पास यही सही मोक़ा था मेरी इस चाल को कोई भी पोलीस वाला समझ नही पाया ऑर वो एक सीध मे ही गाड़ी चलाते रहे तभी मैने बाज़्ज़ुक़ा का ट्रिग्गर दबा दिया ऑर उनकी बीच वाली जीप पर फाइयर कर दिया.

मेरा आइडिया कामयाब रहा 3 जीप धमाके से एक साथ उड़ गई ऑर बाकी 7 जीपों ने वही अपनी गाड़ी को रोक लिया. लाला ये देख कर काफ़ी खुश लग रहा था ऑर गाड़ी के शीशे से मुँह बाहर निकाल कर ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था ऑर उन पोलीस वालों को गालियाँ निकाल रहा था. मैने एक नज़र मुस्कुरा कर उसको देखा ऑर फिर बाज़्ज़ुक़ा गाड़ी के अंदर फैंक कर खुद भी गाड़ी के अंदर जाके बैठ गया. गाड़ी के अंदर आते ही हीना ऑर नाज़ी ने मेरा बाजू पकड़ लिया ऑर देखने लगी...

हीना ऑर नाज़ी : तुम ठीक हो ना...

मैं : मैं एक दम ठीक हूँ तुम दोनो फिकर मत करो यार...

हीना : फिकर कैसे नही करे तुमको गोली लगी है देखो कितना खून निकल रहा है

इतना कह कर उसने खून वाली जगह पर अपना हाथ रख दिया ताकि खून रुक सके...

हीना : (ड्राइवर को देखते हुए) अपने आदमी से कहो किसी डॉक्टर के पास लेके चले खून बहुत निकल रहा है.

मैं : बीच हाइवे मे अब मैं डॉक्टर कहाँ से लेके आउ अब तो शहर जाके ही डॉक्टर मिलेगा ऑर तुम लोग फिकर मत करो यार मैं एक दम ठीक हूँ.

उसके बाद कोई खास बात नही हुई हीना पूरे रास्ते मेरी बाजू पकड़ कर बैठी रही. कुछ ही देर मे शहर आ गया जहाँ लाला गन पॉइंट पर एक डॉक्टर को उठा लाया जिसने मेरी बाजू से गोली निकाली ऑर गाड़ी मे ही मेरी मरहम पट्टी भी करदी. डॉक्टर के दिए हुए पेन किल्लर से दर्द तो कम हुआ ही साथ ही मुझे नींद आने लगी ऑर मैं सो गया. सुबह जब आँख खुली तो हम अपनी बस्ती के काफ़ी करीब थे कुछ ही देर हम बस्ती पहुँच गये जहाँ रसूल हमारे तमाम आदमियो के साथ हमारा इंतज़ार कर रहा था. जैसे ही मेरी गाड़ी रुकी मेरे सब लोग दौड़कर मेरी गाड़ी के पास आ गये ऑर एक आदमी ने जल्दी से मेरी गाड़ी का दरवाज़ा खोला सामने रसूल अपनी सदा-बाहर मुस्कान के साथ मेरा इंतज़ार कर रहा था उसने आते ही मुझे गले से लगा लिया. वही पास ही मेरे घर के बाहर रूबी भी खड़ी थी जो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.

रसूल : वाह भाई वाह मान गये शेरा... कमाल कर दिया यार तूने....

मैं : मैने क्या किया यार....

रसूल : भाई अकेले ही इस कुत्ते को उठा के वहाँ से ले आया ये क्या छोटी बात है...

लाला : (भाग कर हमारे पास आते हुए) कमीनो मुझे क्यो भूल जाते हो... ऑर ये तुम्हारा शेर वही ढेर हो जाता अगर मैं वक़्त पर नही आता.... बड़ा आया कमाल करने वाला...

रसूल : अच्छाअ.... ठीक है यार.... वैसे वो हमारा नया मेहमान है कहाँ ज़रा दर्शन तो करवाओ.

लाला : होना कहाँ है वही गाड़ी मे पड़ा है.

मैं : रसूल यार तू ज़रा इस ख़ान के बच्चे को देख मैं ज़रा रूबी से मिलकर आता हूँ.

रसूल : ठीक है भाई...

उसके बाद मैने अपनी गाड़ी का पिछे का दरवाज़ा खोला ऑर नाज़ी, नीर ऑर हीना को लेकर अपने घर की तरफ बढ़ने लगा. नाज़ी ऑर हीना दोनो बड़े गौर से चारो तरफ के महॉल ऑर लोगो को देख रही थी.

नाज़ी : हम लोग यही रहेंगे क्या...

मैं : हमम्म क्यो जगह पसंद नही आई क्या...

नाज़ी : नही वो बात नही है लेकिन यहाँ पर बहुत सारे लोग हैं तो इन सबके सामने अजीब सा लगता है. अपने गाँव मे तो हम चन्द ही लोग रहते थे ना.

मैं : (मुस्कुराते हुए) यहाँ के लोग भी बहुत अच्छे हैं ऑर तुम्हारा ख़याल रखेंगे तुम जैसे चाहो यहाँ रह सकती हो तुम यहाँ एक दम महफूज़ हो.

हीना : यहाँ पर सब लोग तुमको शेरा कह कर क्यों बुला रहे हैं.

मैं : क्योंकि मेरा असल नाम शेरा ही है नीर नही भूल गई मैने तुम्हे बताया तो था.

ऐसे ही बाते करते हुए हम सब मेरे घर के सामने पहुँच गये जहाँ रूबी गेट के सामने खड़ी हमारा इंतज़ार कर रही थी. रूबी को देखते ही मैं उसको साइड पर ले गया जहाँ मैने उसको दोनो की सारी कहानी बता दी इसलिए रूबी ने बहुत अच्छे से उनका स्वागत किया ऑर उनको घर के अंदर ले गई. मैं उन तीनो के साथ बैठा था लेकिन मुझे उस वक़्त बहुत अजीब सा महसूस हो रहा था ऑर मैं एक अजीब सी दिमागी जंग से गुज़र रहा था समझ नही आ रहा था कि इन तीनो को एक साथ यहाँ कैसे रखूं. अगर तीनो मे से किसी ने भी पूछ लिया कि बाकी 2 से तुम्हारा क्या रिश्ता है तो मैं क्या जवाब दूँगा. ऐसे ही कई सवाल अब घर आके एक दम से मेरे दिमाग़ मे चलने लगे थे. अभी तो हम सब साथ मे बैठे थे लेकिन बोलने की हिम्मत कोई भी नही कर पा रहा था हीना ऑर नाज़ी नये महॉल ऑर गुज़रे हुए वक़्त की वजह से चुप थी, रूबी उन दोनो के साथ मेरे रिश्ते को शायद समझ नही पा रही थी इसलिए चुप थी ऑर मैं इन तीनो मे फँस गया था क्योंकि तीनो ही मुझे प्यार करती थी ऑर मैं किसी का भी दिल नही तोड़ना चाहता था. एक तरफ हीना ऑर नाज़ी थी जो मुझ पर भरोसा करके सिर्फ़ मेरे लिए यहाँ तक आ गई थी दूसरी तरफ रूबी थी जो हमेशा से ही मेरे साथ थी ऑर हमेशा मुझे खुश रखने की कोशिश मे लगी रहती थी. ऐसे ही कई सवाल थे जिनके जवाब हम मे से किसी के पास नही थे. तभी रसूल आ गया ऑर उसने हमारे बीच बनी खामोशी को एक दम से तोड़ दिया.

Update-55

Main : Lala ek idea aaya hai main gaadi ki chhat par jaa raha hun jab main ishara karunga tab apne aadmiyo ko bolna ki sab apni gaadi ko baayi taraf kar le or ek dam se apni sab gaadiyo ki raftaar badha de...

Lala : Thik hai.... bhai main abhi sabko phone karke keh deta hun....

Uske baad maine phone rakh diya or lala ke ishare ka intzaar karne laga kyonki uske baad hi main gaadi ki chhat par jaa sakta tha. Tabhi mujhe Heena ki awaaz aayi...

Heena : Neer tum thik to ho naa....

Main : Main thik hun fikar mat karo tum niche raho....

Heena : tumhari baaju se to bahut khun nikal raha hai...

Main : koi baat nahi abhi sab thik ho jayega tum dono niche rho bahar firing ho rahi hai....

Tabhi mujhe lala ne gaadi se hath bahar nikaal kar apne hath ka angutha dikhate hue done ka ishara kiya. Maine jaldi se gaadi ka dusri taraf ka darwaza khola or bazzuka lekar gaadi ki chhat par baith gaya or bazzuka ko apne kandhe par set kar liya or police ki bich wali gaadi ki nishana lagaya taki dhamake se aagey or pichhe dono taraf ki gaadiya udd jaye lekin usse pehle mujhe meri aadmiyo ko ishara karna tha isliye main kuch seconds ke liye apna balance banata hua gaadi ki chhat par seedha khada ho gaya jisse mere sab aadmiyo ne mujhe dekh liya or apni saari gaadiyo ko ek sath baayi taraf kar liya. Mere pass yhi sahi moqa tha meri iss chaal ko koi bhi policewala samajh nahi paya or wo ek seedh me hi gaadi chalate rahe tabhi maine bazzuka ka trigger daba diya or unki bich wali jeep par fire kar diya. Mera idea kamyab raha 3 jeep dhamake se ek sath udd gai or baaki 7 jeep ne wahi apni gaadi ko rok liya. Lala Ye dekh kar kaafi khush lag raha tha or gaadi ke sheeshe se munh bahar nikaal kar jor-jor se chilla raha tha or unn policewalo ko gaaliyaan nikaal raha tha. Maine ek nazar muskurakar usko dekha or phir bazzuka gaadi ke andar faink kar khud bhi gaadi ke andar jake baith gaya. Gaadi ke andar aate hi Heena or nazi ne mera baaju pakad liya or dekhne lagi...

Heena or naazi : tum thik ho naa...

Main : Main ek dam thik hun tum dono fikar mat karo yar...

Heena : fikar kaise nahi kare tumko goli lagi hai dekho kitna khun nikal raha hai

Itna keh kar usne khun wali jagah par apna hath rakh diya taaki khun ruk sake...

Heena : (Driver ko dekhte hue) apne aadmi se kaho kisi doctor ke pass leke chale khun bahut nikal raha hai.

Main : Bich highway me ab main doctor kaha se leke aau ab to shehar jake hi doctor milega or tum log fikar mat karo yaar main ek dam thik hun.

Uske baad koi khas baat nahi hui Heena poore rastey meri baaju pakad kar baithi rahi. Kuch hi der me shehar aa gaya jahan lala gun point par ek doctor ko utha laya jisne meri baaju se goli nikali or gaadi me hi meri maraham patti bhi kardi. Doctor ke diye hue pain killer se dard to kam hua hi sath hi mujhe neend aane lagi or main so gaya. Subah jab aankh khuli to hum apni basti ke kaafi kareeb the kuch hi der hum basti pohonch gaye jahan rasool hamaare tamaam admiyo ke sath hmara intzaar kar rahe the. Jaise hi meri gaadi ruki mere sab log daudkar meri gaadi ke pass aa gaye or ek aadmi ne jaldi se meri gaadi ka darwaza khola samne rasool apni sada-bahar muskaan ke sath mera intzaar kar raha tha usne aate hi mujhe gale se laga liya. Wahi pass hi mere ghar ke bahar rubi bhi khadi thi jo mujhe dekh kar muskura rahi thi.

Rasool : Waah bhai waah Maan gaye shera... kamaal kar diya yaar tune....

Main : maine kya kiya yaar....

Rasool : bhai akele hi iss kutte ko utha ke wahan se le aaya ye kya choti baat hai...

Lala : (Bhaag kar hamaare pass aate hue) kameeno mujhe kyo bhul jate ho... Or ye tumhara sher wahi dher ho jata agar main waqt par nahi aata.... bada aaya kamaal karne wala...

Rasool : Achhaaa.... thik hai yaar.... Waise wo hamra naya mehmaan hai kaha zra darshan to karwao.

Lala : Hona kaha hai wahi gaadi me pada hai.

Main : Rasool yaar tu zara iss khan ke bache ko dekh main zra rubi se milkar aata hun.

Rasool : Thik hai bhai...

Uske baad maine apni gaadi ka pichhe ka darwaza khola or Nazi, Neer or heena ko lekar apne ghar ki taraf badhne laga. Nazi or heena dono bade gaur se charo taraf ke mahol or logo ko dekh rahi thi.

Nazi : Hum log yhi rahenge kya...

Main : Hhhmmm kyo jagah pasand nahi aayi kya...

Nazi : nahi wo baat nahi hai lekin yahan par bahut sare log hain to inn sabke samne ajeeb sa lagta hai. apne gaav me to hum chand hi log rehte the naa.

Main : (muskurate hue) yahan ke log bhi bahut achhe hain or tumhara khayaal rakhenge tum jaise chaho yahan reh sakti ho tum yahan ek dam mehfooz ho.

Heena : Yahan par sab log tumko Shera keh kar kyo bula rahe hain.

Main : kyonki mera asal naam shera hi hai Neer nahi bhul gai maine tumhe bataayaa to tha.

Aise hi baate karte hue hum sab mere ghar ke samne pohonch gaye jahan rubi gate ke samne khadi hmara intzaar kar rahi thi. Rubi ko dekhte hi main usko side par le gaya jahan main usko dono ki saari kahani batadi isliye rubi ne bahut achhe se unka swaagat kiya or unko ghar ke andar le gai. Main unn teeno ke sath baitha tha lekin mujhe uss waqt bahut ajeeb sa mehsoos ho raha tha or main ek ajeeb si dimagi jung se guzar raha tha samajh nahi aa raha tha ki inn teeno ko ek sath yahan kaise rakhu. Agar teeno me se kisi ne bhi puch liya ki baaki 2 se tumhara kya rishta hai to main kya jawaab dunga. Aise hi kai sawaal ab ghar aake ek dam se mere dimaag me chalne lage the. yuh to hum sab sath me baithe the lekin bolne ki himmat koi bhi nahi kar paa raha tha Heena or naazi naye mahol or guzre hue waqt ki wajah se chup thi, Rubi unn dono ke sath mere rishtey ko shayad samajh nahi paa rahi thi isliye chup thi or main inn teeno me phas gaya tha kyonki teeno hi mujhe pyaar karti thi or main kisi ka bhi dil nahi todna chahta tha. Ek taraf heena or naazi thi jo mujh par bharosa karke sirf mere liye yahan tak aa gai thi dusri taraf rubi thi jo hamesha se hi mere sath thi or hamesha mujhe khush rakhne ki koshish me lagi rehti thi. Aise hi kai sawaal the jinke jawab hum me se kisi ke pass nahi the. Tabhi rasool aa gaya or usne hamaare bich bani khamoshi ko ek dam se tod diya.

 
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