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आंटी के साथ मस्तियाँ

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आंटी बेड पे लेट गई और मेरे लण्ड को देख के बोलीं – जवान लड़कों की यही बात मुझे पसंद है… तेरी तरह, उनके लण्ड को कभी चैन नहीं मिलता…

मैं उनके ऊपर आ गया और उनके बूब को चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा..

आंटी – आह उनमह इस्स स स स s s s s s s… आह इयाः या या या या या या आया… आराम से राजू… और मैंने आंटी की निप्पल काट ली..

अब आंटी चीखी – अहह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह आ न न न ह ह ह… राजू र र र र र र र र र र… तुम नहीं सुधरोगे…

मैंने आंटी की पैंटी उतार दी और उनकी चूत चाटने लगा..

आंटी मेरा सिर चूत मे दबाने लगीं और आवाज़े निकालने लगीं – ह ह ऊए ऊए ऊए ऊए आह आह आह राजू… खा लो पूरी चूत… खा लो…

अब हम 69 की पोज़िशन में आ गए और आंटी मेरा लण्ड चूसने लगीं..

फिर मैं उठा और आंटी की चूत पे अपना लण्ड रगड़ा और एक झटके मे आधा लण्ड अंदर डाल दिया..

आंटी चीख पड़ीं – राजू आराम से डालो… मार गयी… आ ई ई ई ह ह ह ह ह ह ह ह s s s s s s…

और फिर दूसरे झटके में पूरा लण्ड आंटी की चूत मे समा गया और आंटी बोलीं – आनह मार गयइ… आह आह आह अहह…

फिर मैं शॉट मारने लगा..

आंटी – और तेज़… और तेज़… आह आह आह आह आह आह अहह अहह…

फिर मैं थोड़ी देर बाद झड़ गया और आंटी के ऊपर लेट गया..

मैंने आंटी को लीप किस की और उनके मम्मे दबाने लगा और उनकी चूत मे लण्ड डाला दिया और फिर हम सो गये..

फिर 1 बजे, आंटी ने मुझे उठाया और हमने कपड़े पहने..

जब मैं अपने घर जाने लगा तो आंटी बोलीं – राजू, तुमने कल मेरी रियल सुहागरात मनवाई है… और मुझे लीप किस करने लगीं..

मैंने आंटी को “आई लव यू” बोला और मैं अपना घर चला गया..

उस दिन आंटी को रात भर और सुबह चोदने के बाद, मैं दोपहर में अपने घर आ कर नहाने चला गया, खाना खा कर सो गया..

फिर शाम को, जब 5 बजे उठा तो आंटी के बारे में सोच कर मुस्कुराने लगा और अपने आप से कहने लगा – यार, चलो एक और इनिंग हो जाए..

मैं फ्रेश हुआ और आंटी के घर गया तो वो अपनी बेटी को पढ़ा रही थीं..

मैं उनके पास गया तो आंटी मुझे देखकर मुस्कराने लगीं..

फिर, आंटी ने पढ़ाई ख़तम की तो मैं और उनकी बेटी टीवी देखने लगे तो आंटी बोलीं – राज चाय पीओगे… तो मैंने हाँ बोला और फिर, आंटी चाय बनाने चली गईं..

मैं थोड़ी देर बाद, किचन में गया तो आंटी फ्रिज से दूध निकाल रही थीं..

मैं उनके पास गया और उनकी गाण्ड पे हाथ फेरने लगा तो आंटी के मुंह से सिसकारी निकल गई..

उन्होंने तुरंत, मेरा हाथ हटाया और कहा – नहीं… मेरी बेटी आ जाएगी… अभी नहीं…

मैं बेशरम, कहाँ सुनने वाला था..

आंटी के पीछे गया और उनके सूट में हाथ डाला और उनकी ब्रा खोल दी तो आंटी चिल्लाई – राज… मना किया ना, गधे…

लेकिन, मैंने आंटी को अपनी तरफ किया और कहा – आंटी, प्लीज… बस, मम्मे दबा लेने दो…

आंटी बोलीं – अभी, मेरी बेटी है… उसने देख लिया तो अनर्थ हो जाएगा…

मैं बोला की नहीं देखेगी ना, आंटी…

मेरे बहुत फोर्स करने पे वो बोलीं – तुम पहले मेरी ब्रा का हुक लगाओ… तो मैंने लगा दिया..

वो बोलीं – तुम मेरी बेटी के पास बैठो… मैं आती हूँ… फिर, मौका देखकर उसे खेलने भेजती हूँ…

मैंने ऐसा ही किया और उनकी बेटी के साथ, टीवी देखने लगा..

 


थोड़ी देर बाद, आंटी आईं और हम चाय पीने लगे.. तभी आंटी ने उनके बेटी को खेलने भेज दिया और कमरे का दरवाजा लॉक कर दिया..

और मेरे पास आ कर बोलीं – तुम्हें कितना सेक्स पसंद है… कल रात भर किया और सुबह भी किया… फिर भी कम है… तो मैं बोला – सॉरी, आंटी…

तो आंटी बोलीं – चल ठीक है… पर बेटा, थोड़ा कंट्रोल किया करो… रोज़ रोज़ करने में मज़ा नहीं आता…

मैंने ठीक है बोला… और चुप बैठा रहा तो आंटी बोलीं – अब बैठे क्या हो… जो करना है, करो… थोड़ी देर में ये (उनके पति) आने वाले होंगे…

मैं ये सुनते ही, उनके पास गया और उनके गाल पे अपना एक हाथ रखा और उनके होंठ अपने पास ला कर बोला – आई लव यू… आंटी, हर चीज़ के लिए, धन्यवाद…

तो आंटी बोलीं – हाँ हाँ… ठीक है… अब मस्का मत लगा… आई लव यू, टू… और आंटी मेरे होठों को चूसने लगीं..

मैं आंटी को पूरे जोश में जवाब देने लगा और देखते ही देखते, हम गरम होने लगे तो मुझसे रहा ना गया और मैं उनका सूट उतारने लगा तो वो बोलीं – राज, कपड़े मत उतार… टाइम नहीं है…

इस पर, मैं बोला – प्लीज, आंटी… सिर्फ़ सूट उतार लो…

तो वो मान गई और उन्होंने अपना सूट निकाल दिया…

मैं उनकी काली ब्रा.को ऊपर से ही टच करने लगा और मम्मे दबाने लगा..

फिर मैंने आंटी को बेड पर लिटा दिया और मैं उनकी ब्रा को ऊपर करके, उनके मम्मे दबाने लगा और चूसने लगा..

आंटी सिसकारियाँ भरने लगीं – आ ह आ ह आ ह आ ह हह… टाइ गर, आराम से… अन्म उन्ह: आ आ आ आ आ आ आ आ आ…

इधर, राजू सुनते ही, मैंने आंटी का निप्पल काट लिया तो आंटी – आह माह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह s s s s s s s s… अहह s s s… करके चीखीं और मेरा सिर पकड़कर, ऊपर किया और किस करने लगीं..

तभी मैं उनकी चूत पे हाथ फेरने लगा तो आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और बोलीं – नहीं राजू, तुमने सिर्फ़ मम्मे तक कहा था…

मैं बिचारा चुप रह गया..

आंटी बोलीं – अरे, मेरे राज बाबू… उदास मत हो… चोद लो, पर पूरे कपड़े मत उतारो… और बस, एक बार ही चोदना….

इस पर मैं मान गया और उनकी सलवार को खोल के नीचे गिरा दिया और उनकी पैंटी को भी नीचे कर दिया और उनकी चूत की खुशबु लेने लगा..

वाह!! क्या मादक खुशबु थी..

फिर, जैसे ही मैंने आंटी की चूत पे किस किया, आंटी – अहह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह s s s… उम्म्म्म म म म म म म म म… कहने लगीं..

अब मैं उनकी चूत चाटने लगा तो आंटी – आ ह आ ह आ ह… ऊ ऊ ऊऊ… आ ह आ ह आ ह आ ह… और चाटो राजू… आह आह… और, मेरा सिर दबाने लगीं..

 


कुछ देर बाद, मैं उठा और अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी और अपना लण्ड निकाल के आंटी के हाथ में दिया तो आंटी बोलीं – राजू, तुम्हरा लण्ड ना मेरी चूत के लिए बिल्कुल ठीक है… ये मेरी चूत के बिल्कुल आख़िरी कोने तक जाकर, मुझे सुकून देता है…

मैं शरमा गया..

इस पर आंटी बोलीं – ओययी होइई… और मेरा लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगीं और मैं ज़ोर ज़ोर से, उनके मम्मे दबाने लगा और हम 69 की पोज़िशन मे आ गये..

फिर आंटी बोलीं – राजू, ज़्यादा टाइम वेस्ट ना करो… अब डाल दो… ज़्यादा टाइम नहीं है…

अब मैं उठा और लण्ड उनकी चूत पे रखा और एक झटका मारा तो मेरा लण्ड आधा आंटी की चूत में समा गया और आंटी चीखीं – अहह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह s s s s s s s… राजू स स स स s s s s s… आराम से… और फिर मैंने एक झटका मारा तो पूरा लण्ड आंटी की चूत में था और आंटी बोलीं – अहह मर गयइ ई ई ई ईई ई…. ओहंहम्ह आराम से कर…

फिर, मैंने आंटी को लीप किस की और फिर शॉट लगाने शुरू किया तो आंटी आवाज़े निकालने लगीं – आ ह आ ह आ ह आ ह आ ह… ऊ ऊ ऊऊ… आ ह आ ह आ ह… और तेज़ और तेज़… राजू, आ ह आ ह आ ह आ ह s s s s s ss… उ ई ईई…

और आंटी को 2-4 मिनट तक चोदने क बाद, मैं झड़ गया और लण्ड आंटी की चूत में ही रहने दिया और उनके ऊपर लेट गया और बोला – मज़ा आ गया…

तो आंटी बोलीं – हाँ यार, मुझे भी…

फिर आंटी ने मेरा लण्ड अपनी चूत से निकाला और मैं उनके बगल में लेट गया और उनको लीप किस करने लगा और उनके मम्मे दबाने लगा और जैसे ही, मैंने उनके बूब को चूसा और एक निप्पल कटा तो आंटी – अन्ह… बोलीं और मेरे सिर में घुमा कर चाटा मारा और बोलीं – चलो, बस करो…

और, फिर वो उठीं और अपने कपड़े पहनने लगीं और कपड़े पहनने के बाद, मेरे पास आईं और बोलीं – उठो राज, कपड़े पहनो… और मेरे लण्ड को, हाथ में लिया और बोलीं – ये, फिर खड़ा हो गया…

तो, मैं बोला – तुम ही बैठा दो, आंटी…

अब आंटी ने मेरे लण्ड पे, एक किस की और मेरी अंडरवियर पहना दी..

मैं उठा और अपनी पैंट पहनी..

फिर, हम फ्रेश हुए और बैठ गये..

तभी उनके घर की बेल बजी और आंटी ने दरवाजा खोला तो उनकी बेटी, खेल कर आ गई थीं..

अब मैं जाने लगा तो आंटी ने मुझे चुपके से एक सॉफ्ट लीप किस दी और बाय बोला..

मेरा और आंटी का रीलेशन, इसी तरह चलता रहा.. लेकिन, मेरी एक ग़लती की वजह से आंटी ने मुझसे बात करना बंद कर दी थीं..

हुआ ये की एक दिन शाम को, आंटी का मुझे कॉल आया और उन्होंने कहा – राज, मुझे कल अपनी बेटी के स्कूल जाना है… उसके स्कूल में पेरेंट्स टीचर मीटिंग है… पर मेरे इनको छुट्टी नहीं मिल रही है तो तुम मेरे साथ चलना…

इस पर मैंने कहा – ठीक है… कितने बजे चलना है…

तो वो बोलीं – 11 बजे…

मैंने कहा – ठीक है, आंटी…

पर अगले दिन, सुबह 10 बजे मेरे दोस्त घर पे आ गये और मुझे मूवी के लिए ले गये..

मैं भी उनके साथ चला गया और मूवी देखने लगा..

फिर, हम सब ढाबे में खाना खाने चले गये..

वहां पे मैंने अपना मोबाइल चेक किया तो उसमें आंटी के 20 मिस कॉल थे..

ये देखकर, मुझे याद आया की मुझे आंटी के साथ, उनकी बेटी के स्कूल जाना था..

 


मैंने तुरंत आंटी को कॉल किया तो आंटी ने कॉल काट दिया..

आंटी मेरा कॉल नहीं पिक कर रही थीं.. वो बार बार, कॉल काट रही थीं..

फिर, मैं अपने घर आया और आंटी से अकेले मिलने का मौका ढूँढने लगा..

आख़िर, मुझे शाम को मौका मिला.. जब, उनकी बेटी ट्यूशन गई तो मैं आंटी के पास गया..

आंटी, तब एक किताब पढ़ रही थीं..

मुझे देखकर, मुँह बनाते हुए बोलीं – टाइम मिल गया, तुम्हें…

मैं बोला – मुझे माफ़ कर दो, आंटी… मेरे दोस्त घर पे आ गये थे और मुझे मूवी के लिए ले गये… मैं बिल्कुल भूल गया था के मुझे आपके साथ जाना है… माफ़ कर दो ना, आंटी…

इस पर आंटी बोलीं – क्यूँ, सेक्स करना नहीं भूलते तुम… जब लंड में आग लगती है तो तो आंटी फ़ौरन याद आ जाती हैं… और तुम्हें कितने कॉल किए मैने… कॉल क्यों नहीं उठाया…

तो मैंने कहा – वो आंटी, मेरा मोबाइल साइलेंट पे था…

अब आंटी बोलीं – वाह!! कितना अच्छा बहाना है…

मैं बोला – नहीं आंटी, मैं झूठ नहीं बोल रहा…

आंटी बोलीं – वो, जो भी है… तुम्हारी वजह से, मुझे कितनी बातें सुनने को मिलीं, अपने पति से… क्यूंकि, मैं अपनी बेटी के स्कूल नहीं जा पाई… बस चूत चाहिए होती है तो लंड हिलाते हुए, आ जाते हो…

मैंने आंटी को फिर से सॉरी बोला..

अब वो गुस्से में बोलीं – बस, यार… मैं कोई रंडी नहीं हूँ… समझे तुम… अब बहुत हो गया… अब ना ही, मैं तुमसे बात करूँगी और ना ही, तुम मुझसे… हमारा जो भी रीलेशन था… अब ख़तम… और एक बात समझ लो, प्यार – व्यार तो मैं वैसे भी तुमसे नहीं करती थी… वो तो, मैं जो अपने पति के साथ नहीं कर पाती थी, वो तुम्हारे साथ करके अपनी प्यास बुझा लेती थी… तुम मेरे लिए बस एक मस्त लंड हो और कुछ नहीं… अगर, कुछ भी उल्टा सीधा करने की सोची भी तो सबको बता दूँगी की मुझे अकेले पा कर मेरी इज़्ज़त पर हाथ डालने की कोशिश करी, तुमने… समझ आ गया या नहीं…

मैं ये सुनकर रो पढ़ा पर आंटी नहीं मानी और बोलीं – चल बे, अपना ये रोना अपने घर जा के रो… चूतिया साला… भाग यहाँ से…

अब मैंने उनका हाथ पकड़ा तो आंटी मेरा हाथ झटकते हुए बोलीं – हाथ हटा… जा रहा है या चिल्ला कर, लोगों को इक्कठा करूँ…

फिर उन्होंने मुझे दरवाजे की तरफ उंगली दिखाई और दरवाजा बंद कर दिया..

मैं अपने घर आ कर, फूट फूट कर रोने लगा..

फिर, मैंने आंटी को 5 महीनों तक बहुत बार मनाया पर आंटी नहीं मानी..

यहाँ तक उन्होंने मेरे एक भी कॉल को अटेंड तक नहीं किया और ना ही, किसी मैसेज का जवाब दिया..

मैं अंदर से बहुत टूट चुका था..

भगवान से रोज़ दुआ करता था की आंटी मान जाए और आख़िर, वो वक़्त भी आ गया, जब आंटी मान गईं..

हमारे घर के पास एक भैया रहते हैं.. उनकी शादी थी..

हम सब, उनकी बारात में जा रहे थे तो मुझे पता चला की आंटी भी अपने पति और बेटी के साथ जा रही हैं..

मैंने सोच लिया था, चाहे जैसे भी हो, मुझे आंटी को मानना ही है..

फिर, हम लोग बारात के लिए बस से चल पड़े..

मैं जब बस में गया तो देखा की आंटी अपनी बेटी के साथ बैठी थीं तो मैं उनके पास गया और उन्हें कल्टी में एक लेटर दिया..

उसमें लिखा था की आंटी, अब तो माफ़ कर दो… 5 महीने हो गये हैं… मुझसे ग़लती हो गई… अब तो प्लीज माफ़ कर दो, ना… आई मिस यू, सो मच…

आंटी ने वो लेटर पढ़ के फाड़ फेंक दिया और कोई जवाब नहीं दिया..

मैं फिर उदास हो गया और कुछ नया सोचने लगा..

सोचते ही सोचते, हम लोग होटल पहुँच गये.. जहाँ हम लोग रुकने वाले थे..

मैंने अपने दोस्त के साथ वही कमरा लिया, जो आंटी के कमरे के बिल्कुल बगल में था और हमारे फ्लोर में, बस हम दोनों ही के कमरे थे.. बाकी सब के, नीचे वाले फ्लोर में थे..

फिर, हम लोग फ्रेश होने लगे और तैयार हो कर नीचे आ गये..

मैंने नीचे देखा तो आंटी के पति और उनकी बेटी थी.. आंटी नहीं थीं..

मैंने उनकी बेटी से पूछा – मम्मी कहाँ हैं, गुड़िया… तो वो बोली – मम्मी, अभी तैयार हो रही हैं…

मेरे दिमाग़ में अनायास एक आइडिया आया और मैं मेडिकल स्टोर से स्लीपिंग पिल्स की एक स्ट्रीप लेकर, आंटी के रूम पे गया और दरवाजा पे नॉक किया..

आंटी बोलीं – कौन है…

मैं कुछ नहीं बोला और फिर से डोर नॉक किया तो आंटी ने डोर खोला..

आंटी, मुझे देखकर बोलीं – राज, तुम… क्या काम है…

मैं बोला – मुझे आपसे कुछ बात करनी है…

आंटी बोलीं – पर मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी…

अब मैं बोला – आंटी, बस 2 मिनट… प्लीज…

आंटी बोलीं – ठीक है… फिर मैं रूम में गया और रूम लॉक कर दिया..

आंटी, तैयार होने लगीं और बोलीं – जो भी बोलना है, जल्दी बोलो…

मैंने कहा – आंटी, आई लव यू… मैं आपके बिना नहीं जी सकता… जब आप मुझे माफ़ नहीं कर सकती… तो मैं जी कर क्या करूँगा…

फिर, जब मैंने स्लीपिंग पिल्स की स्ट्रीप निकाली तो आंटी उसे देख के बोलीं – राज, तुम पागल हो क्या… फेको उसे… और मेरे हाथ से छुड़ाने लगीं..

फिर, आंटी ने मुझे खींच कर 2 चाटें मारे और स्ट्रीप ले के खिड़की से बाहर फेंक दी..

मेरे आँसू आ गये और मैं बोला – अगर, आपने मुझे आज माफ़ नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा… और, मैं वहाँ से चला गया…

फिर मैं अपने रूम में गया और फ्रेश हो कर, बाहर बारात में चला गया..

 


थोड़ी देर बाद, आंटी नीचे आईं तो मैं उन्हें देख कर दंग रह गया..

क्या लग रही थीं, यार..

काली साड़ी, डीप कट स्लीव लेस ब्लाउज.. वो भी बैकलेस.. बाल खुले हुए.. और वो कमरधनी तो उनके गोरे चिकने पेट पर, सोने पे सुहागा लग रही था..

एक दम अप्सरा लग रही थीं..

उनको तो देख के, किसी भी आदमी का लण्ड अपनी आप झड़ जाए..

वो एक दम कहर बरपा रही थीं..

उनकी क्लीवेज से साफ दिख रहा था की आंटी ने आज, ब्रा नहीं पहनी है.. क्यूंकि उनके मम्मे ब्लाउज फाड़ कर, आज़ाद होने को मचल रहे थे..

तभी मेरे दोस्त ने मुझे हिलाया और बोला – क्या देख रहा है, गान्डू… शादीशुदा है… पिटवाएगा क्या…

मैं बोला – अरे नहीं भाई, कुछ नहीं… और तब अहसास हुआ की मैं क्या कर रहा हूँ.. सब मिलकर मारेंगें..

और मैं फिर से उदास हो गया और पूरी बारात में, ऐसे ही उदास ही रहा और बाकी सब नाचते गाते मैरिज गार्डेन पहुँच गये..

वहाँ, जय माला होने लगीं और मैं एक कोने में बैठ गया और दूर से आंटी को देखने लगा..

मैं आंटी के फिगर के हर हिस्से को गौर से देख रहा था और पुराने दिन, याद करने लगा..

फिर, थोड़ी देर बाद सब खाना खाने चले गये पर मैं नहीं गया..

आंटी ने वहां मुझे नहीं देखा तो 5 महीने बाद, उनका पहला मैसेज आया की कहाँ हो, राज…

उनका मैसेज देखकर, मैं खुशी से पागल हो गया और आंटी को जवाब किया की स्टेज के पास हूँ…

आंटी का जवाब आया की खाना खाने, आओ…

मैंने जवाब दिया की मुझे खाना नहीं खाना…

आंटी का जवाब आया – क्यों नहीं खाना…

इस पर, मैंने जवाब दिया की जब तक आप मुझे माफ़ नहीं करोगी, मैं खाना नहीं खाऊँ गा…

आंटी बोलीं – राज, मैंने तो तुम्हें कब का माफ़ कर दिया… मैं तो तुम्हें सबक सीखना चाहती थीं की किसी को प्रॉमिस करो तो उसे पूरा करो, तोडो मत…

अब मैंने जवाब दिया की हाँ आंटी, मेरी ग़लती थी… मुझे माफ़ कर दो…

आंटी का जवाब दिया – ठीक है… चलो, अब खाना खाने आओ…

मैंने जवाब दिया – अपने मुझे सही में माफ़ कर दिया ना…

तो आंटी का जवाब आया – हाँ बाबा, माफ़ कर दिया… जल्दी आओ, मैं इंतेज़ार करूँगी…

फिर, मैं खाने वाले एरिया में गया..

वहां एक टेबल पर, आंटी के साथ उनकी बेटी और 4-5 दोस्त बैठे थे..

मैं वहां पहुँचा तो सबने मुझे खाना खाने को कहा..

मैंने बोला – रूको, मैं प्लेट ले कर आता हूँ…

इस पर, आंटी बोलीं – अरे!! राज बाबू, इसी में खा लो…

तो मैं उनके बगल में बैठ गया और खाना खाने लगा..

खाना खाते खाते, आंटी की तरफ जब मैंने गौर से देखा तो लण्ड खड़ा हो गया…

तभी, आंटी धीरे से बोलीं – राजू, खुद पर कंट्रोल करो… मुंह से लार टपक रही है… साफ नज़र आ रहा है…

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने चुपके से उनके पेट पे हाथ रख दिया..

आंटी ने मुझे आँखें दिखाईं और इशारों में हाथ हटाने को बोला पर मैं ढीट, कहाँ मानने वाला था..

इसी तरह, मैं खाना खाते खाते आंटी से फ्लर्ट करने लगा और खाना खाने के बाद, मैं बोला – आंटी, अब तो हलुआ खाने का मन कर रहा है…

ये सुनकर, आंटी को ठस्का लग गया और मैंने उन्हें पानी दिया..

तभी एक दोस्त बोला – यार राज, खाने में तो हलुआ है ही नहीं… तू कहाँ से खाएगा…

मैं हंस पड़ा और बोला – यार, हलुआ तो मैं ज़रूर खाऊंगा… आख़िर, 5 महीने से नहीं खाया है…

फिर, आंटी थोडा ग़ुस्से में वहां से उठ कर, वहां से चली गईं और मुझे कॉल किया..

मैंने बोला – हाँ, आंटी…

आंटी बोलीं – राज क्या है… क्या तमाशा है ये… कौन सा हलुआ खाना है तुम्हें… क्या नाटक कर रहे हो, सबके सामने…

तो मैं बोला – क्यूँ आंटी… क्या किया मैंने…

अब आंटी बोलीं – पागल हो गये हो, क्या… देखो, राज तुम्हारे इसी उतावले पन की वजह से मैंने तुमसे पला झाड़ लिया था… मरने मूरने का नाटक नहीं करते तो अभी भी मैं नहीं मानती… तुम्हारी समझ में क्यूँ नहीं आता, मैं शादीशुदा हूँ… मेरे लिए मेरे पति और परिवार से बढ़ कर, ना तुम हो ना तुम्हारा लंड…

मैं बोला – देखो आंटी, वो सब ठीक है पर आज मैं कंट्रोल नहीं कर सकता… प्लीज, आज मना मत करो…

आंटी बोलीं – उफ्फ!! राज तुझ से बड़ा चूतिया आशिक़ मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा… वैसे मैंने भी बहुत दिनों से किसी जवान लंड के साथ ताबड़ तोड़ चुदाई नहीं की… चूत में तो मेरी भी कई महीनों से आग लगी है… पर, अगर मैं मान भी गई तो हम कहाँ करेंगे… अगर सीधी साधी चुदाई करनी होगी तो पति के नीचे ही, चूत लेकर लेट जाउंगी ना… इतनी रिस्क क्यूँ लूँगी…

इस पर मैं बोला – आंटी, आप चिंता मत करो… आपको जैसी पसंद है, वैसी ही चुदाई होगी… बस, आप सब मुझे पे छोड़ दो…

आंटी बोलीं – चल, ठीक है… मूत पिएगा ना, मेरी…

मैं बोला – हाँ आंटी, बिल्कुल… आज तो आप कहोगी तो आपकी टट्टी भी खा लूँगा… बस, एक बार चोद लेने दो… नहीं तो सच में आंटी, मेरा लंड फट ही जाएगा…

आंटी बोलीं – हट… घिने कहीं के… चल रखती हूँ…

 


फ़ोन रख कर, मैं प्लान बनाने लगा और थोड़ी देर बाद, आंटी को कॉल किया तो आंटी बोलीं – हाँ राज, बोलो…

मैंने कहा – आंटी, आपके हब्बी तो ताश खेलने में मस्त हैं और आपकी बेटी अपने दोस्तों के साथ, खेल रही है…

वो बोलीं – हाँ तो…

मैंने कहा – आंटी, मैं बाहर कार में आपका इंतेज़ार कर रहा हूँ… जल्दी से, आ जाओ… हम होटल में चलते हैं…

आंटी बोलीं – पगला तो नहीं गया है, राजू… कोई भी मुझे आते हुए देख लेगा…

मैं बोला – क्या आंटी, कोई बहाना बना कर आ जाओ…

आंटी बोलीं – अच्छा ठीक है… थोड़ी देर में, मौका देख कर आती हूँ…

फिर थोड़ी देर बाद, आंटी का कॉल आया – राज, कार का दरवाजा खुला रखो… मैं आ रही हूँ…

मैंने दरवाजा खोल दिया और थोड़ी देर बाद, आंटी आ गईं और कार में बैठ गई..

फिर वो बोलीं – तुम ना, एक दिन मरवाओगे… और फिर बोलीं – चलो ना अब, जल्दी… कोई देख लेगा तो तुम्हारा लंड उखाड़ के फेंक दूँगी…

इस पर, मैं हंस दिया और गाड़ी चलाने लगा..

आंटी ने एक मेडिकल स्टोर पे गाड़ी रुकवाई और बोलीं – राज जाओ, कंडोम ले आओ…

मैं बोला – अरे नहीं, आंटी… ऐसे ही, करने दो ना… बिल्कुल मज़ा नहीं आता है, कंडोम पहन के… एक बार तो करने दो… आपकी चूत का गरम गरम रस मेरे लंड पे बहेगा तो मज़ा आ जाएगा…

आंटी बोलीं – अच्छा, बड़ा आया… रस बहने दो… सीधे सीधे बताओ, चोदना है की नहीं…

मरता क्या ना करता, चुपचाप जाकर मैं कॉन्डोम ले आया..

आंटी ने कहा – चलो अब… कोई टेंशन नहीं है…

फिर वो बोलीं – राज, आज कुछ स्पेशल चीज़ मत करना…

तो मैं बोला – स्पेशल, मतलब…

आंटी बोलीं – वही, तुम्हारी आइस क्रीम और फिर चासनी…

मैं बोला – क्यों, आंटी…

आंटी बोलीं – यार, दो घंटे नहाने के बाद, मेरे बदन से चिपचिपाहट गई थी… समझे की नहीं…

तो मैं बोला – ठीक है, आंटी… कोई बात नहीं…

कुछ देर में हम होटल पहुँच गये और हम अपने फ्लोर पे गये तो आंटी बोलीं – किस के रूम मे…

मैं बोला – आपके… आपके रूम में, कोई नहीं आएगा…

आंटी बोलीं – ठीक है…

फिर हम अपने रूम में गये और मैंने डोर लॉक किया और फिर आंटी के पास गया और उनके चेहरे पे उंगलियाँ फेरते हुए बोला – आंटी जान, आज 5 महीने बाद आपको छू रहा हूँ…

आंटी ने मेरे हाथ पे किस किया और बोलीं – तो राजू किसका वेट कर रहे हो… आओ, अपनी प्यास बुझा लो…

मैं आंटी के होंठों को अपने होठों में लेकर, चूसने लगा और खूब चूसा..

हम दोनों की जीभ, आपस में मिलने लगी..

फिर, मैं आंटी के मम्मे दबाने लगा..

आह!! क्या मज़ा आ रहा था, यार..

मेरा अंदाज़ा था की आज आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी..

 


मैं बहुत ही ज़ोर ज़ोर से, आंटी की मम्मे दबाने लगा और फिर मैंने आंटी की पीठ पे हाथ ले जाकर, आंटी का ब्लाउज खोल दिया और मम्मे एक दम से खुल के सामने आ गये..

तो आंटी बोलीं – आराम से राजू… तू इतना बेसब्र क्यूँ हैं… और फिर, मैंने आंटी का ब्लाउज उतार कर, आंटी को बेड पे लिटा दिया और उनको लीप किस करना लगा और मम्मे दबाने लगा…

कुछ देर धीरे धीरे, और फिर ज़ोर से मम्मे दबाने पर आंटी सिसकारियाँ करने लगीं – आ ह आ ह आ ह आ ह अहह उन्म्म… इनयः इयाः उफ्फ फू या ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह s s s s s… आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ… और, फिर मैंने उनके निप्पल पे जीभ रखी तो आंटी लगभग चिल्ला पड़ीं – ई ई या ह म्म ह आ ह्मः माह स स स स स स स स स स s s s s s…

फिर, मैं आंटी के निप्पल को चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा आंटी लगातार – आ ह आ ह आ ह आ ह ऊ ऊ ऊ ऊ… आ ह आ ह आ आ आअशह इश् इस्स इयाः म्म ह ह ह ह ह s s s s s… और मैंने आंटी की निप्पल काटी तो आंटी चीखीं – अहह मर र र र र र र र गयइ राजू झ ह ह ह ह ह ह ह ह ह s s s s s…

अब मैं आंटी की टुंडी पे किस करने लगा और उनकी कमर पर पहनी, कमरधनी को किस करने लगा और उसे धीरे से उतार दिया..

इसके बाद, उनकी चूत पे ऊपर से हाथ फेरने लगा और फिर मैंने जल्दी से आंटी की साड़ी और पेटीकोट उतार दिया और आंटी की पैंटी देखी तो मज़ा आ गया..

छोटी सी काली पैंटी थीं..

एक दम टाइट, वो उनकी चूत और गाण्ड में घुसी जा रही थी..

मैं आंटी की झांट के बाल, साफ देख सकता था..

वो पैंटी के ऊपर से भी दिख रहे थे..

मैं आंटी की पैंटी को सूंघने लगा..

यार, क्या मादक महक थी.. मज़ा आ गया.. एक नशा सा चढ़ गया, मुझे..

फिर, मैंने आंटी की पैंटी उतारी तो मैं दंग रह गया..

आंटी की चूत पे लंबे और मस्त काले घने बाल थे..

इतने बाल की उनके चूत के छेद को ढूँढना मुश्किल था..

आंटी बोलीं – राजू, क्या देख रहे हो…

मैं बोला – आपके चूत का जंगल… अपने अपनी झांट के बाल, कब से नहीं बनाए…

आंटी बोलीं – बहुत दिन से, यार… तेरे भैया को तो कोई मतलब है नहीं… 4-6 दिन में कभी मूड हुआ तो गाउन या साड़ी उठा कर 5-10 धक्के लगा देते हैं… और फिर, तेरे जैसे कोई दूसरा जवान चूतिया लंड नहीं मिला ना…

मैं ये सुन कर, थोडा उदास हो गया तो आंटी बोलीं – अरे मज़ाक कर रहीं हूँ, मेरे सावरे बलम… तू तो ज़रा ज़रा सी बात पर मुँह बना लेता है… चल अब, क्या देखता ही रहेगा… आ जा मैदान में…

मैं बालों वाली चूत को आज पहली बार देख रहा तो मुझसे रहा ना गया और मैं आंटी की चूत को चाटने लगा..

मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही आंटी – स स्स्स्स्स् शह… करने लगीं..

उनकी मदहोशी देख कर, मैं आंटी की चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा और आंटी – उनमह इस्स इयाः या माह ह ह ह आ ह आ ह आ ह आ ह आ ह आ ह आ ह हह स स स स… राज य य य य य य य… और ज़ोर से… और ज़ोर से… खा जा, अपनी आंटी की छीनाल चूत… इयाः माह आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ ह ह ह ह ह ह ह s s s s s s… उफ्फ फ फ्फ फ़फ्फ़… और वो मेरा सिर चूत में ज़ोर से दबाने लगीं और थोड़ी देर मे आंटी झड़ गईं..

 


फिर, आंटी मेरे ऊपर आईं और मुझे लीप किस करने लगीं और मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लण्ड को बुरी तरह मसलने लगीं और बोलीं – लगता है, तेरे लण्ड को कुछ ज़्यादा ही जल्दी है… अभी से झटके मार रहा है…

मैं बोला – आंटी तो शांत कर दो ना…

आंटी ने मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं – वाह!! क्या मज़ा आ रहा था… मैं तो बस आंटी के सिर को अपने लण्ड की तरफ धकेल रहा था..

फिर थोड़ी देर बाद, हम 69 की पोज़िशन में आ गये और खूब मज़े लेने लगे..

अब मैं सीधा हुआ और आंटी को लीप किस करके, बोला – तैयार हो, आंटी राजू की सवारी के लिए…

तो वो बोलीं – आ जा, मेरे राजू…

मैंने तुरंत अपने लण्ड को आंटी की चूत पे रखा और एक झटका मारा तो लण्ड का टोपा थोड़ा अंदर गया तो आंटी चीखीं – आईं ई ई या याश्न मम हह हः आइ इयाः s s s s s… अह आअहह आ आ आ… मर गयइ s s s… अहह आराम से, राजू…

मैं समझ गया की आंटी की चूत बहुत दिनों से नहीं चुदीं है…

थोड़ा और झटका मारने पे, आधा लण्ड अंदर गया तो आंटी चीखीं – अहह ह ह ह ह ह ह ह ह ह… उ ई ई ई या… आईं ई ई अहह s s s…

फिर तीसरे झटके में, लण्ड अंदर गया और आंटी चिल्ला पड़ीं – उन्हम्म… आईं ईई अहह मर गयइ… और मे आंटी को लीप किस करने लगा और उनके मम्मे दबाने लगा तो आंटी मेरी पीठ में नाख़ून चुभाने लगीं..

एक बार फिर, आंटी का दर्द शांत होने पर मैंने शॉट लगाने शुरू किए..

आंटी – आ ह आ ह आ ह आ ह आ ह ऊ ऊ ऊ ऊ… आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आइन्या या या… ई इम्ह स स स स स स स s ss s ss.. और तेज़… और तेज़… आह आह आह आ आए आ आए आए… फाड़ दो, राजू… आ ह आ ह आ ह आ ह… और, पूरा कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से गूंजने लगा..

मैं आंटी को 5 मिनट तक चोदने के बाद, बोला – आंटी, मैं आ रहा हूँ…

तो आंटी बोलीं – समा जाओ, मुझमे ही राजू…

मैं आया.. आया.. .. और मैं आ गया.. .. ..

और… … अपना सारा रस आंटी की चूत में डाल दिया और आंटी के बगल में लेट गया और उनको लीप किस करने लगा..

कुछ देर बाद ही, मैं आंटी की मम्मे दबाने लगा और आंटी मेरे लण्ड को हिलाने लगीं.. जिससे, मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया तो आंटी बोलीं – उफ्फ मां!! ये तो फिर जाग गया…

मैं बोला – अभी सुला देता हूँ, आंटी जान… और, मैं उनकी गाण्ड पे हाथ फेरने लगा..

तो आंटी बोलीं – प्लीज, राज आज गाण्ड मत मारना… बहुत दर्द होता है… और, यहाँ तो कुछ है भी नहीं, जो तुम अपने लण्ड पे लगाओ और आराम से चला जाए…

इस पर, मैं बोला – आप चिंता मत करो… मैं सब कर लूँगा…

अब मैं उठा, आंटी को उल्टा किया और उनकी गाण्ड को सूंघने लगा..

क्या खुशबु थी, यार..

एक दम नशीली और मदमस्त गाण्ड..

अब मैंने आंटी की गाण्ड में, उंगली अंदर डाली तो आंटी बोलीं – आईं ईए या या हुम इस्मह इयान्ह अहह… आराम से…

और मैं धीरे धीरे, उंगली अंदर बाहर करने लगा और फिर धीरे से दूसरी उंगली भी डाल दी..

आंटी तो बस चिल्लाए ही जा रहीं थीं – आइन्या या या या आया आ औया माह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह आ ह आह आ ह आह माह इस्स स स स स स स स स स स s s s ss sss… आराम से, राजू…

फिर, मैंने अपना लण्ड आंटी से चुस्वाया और उनकी गाण्ड में रख के झटका मारा तो लण्ड फिसल गया..

अब मैंने आंटी की गाण्ड पे, ढेर सारा थूक लगाया और फिर झटका मारा तो लण्ड का टोपा अंदर गया तो आंटी चीखीं – आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ इयाः या या आया आ… अहह आईं ईई ई ह उईई… प्लीज नही ह ह ह ह हह स स स स स स स स स s s s ss s sss…

मैंने परवाह किए बिना, थोड़ी देर बाद फिर एक झटका मारा तो आधा लण्ड अंदर गया तो आंटी ज़ोर से चीखीं – नहीं स स स स स स स स स स स स स स स स स s s ss sss sssss…

फिर मैंने देर ना करते हुए, पूरा लण्ड अंदर डाल दिया और आंटी बोलीं – मर गयइ ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई… प्लीज राजू र र र र र र र र र, निकाल लो स स स स स s s s ss ss ss ssssss…

आंटी के आँसू आ गये थे तो मैं थोड़ा रुका और आंटी के मम्मे दबाने लगा और आंटी का दर्द शांत होने के बाद, मैं शॉट लगाने लगा..

आंटी लगातार – आइयै यान इयान्यः इस्स स स स आह आ ह आह आ ह अहह आईंईईर उईई आह आह आह अहह आह… नहीं राजू नहीं स स स स स स sssssss… आ ह आह आ ह आह आहआह आ ह आह… आईं ईई अहह… कर रहीं थीं..

और मैं 2-4 मिनट तक चोदने के बाद, झड़ गया और फिर से आंटी की बगल में लेट गया..

फिर थोड़ी देर बाद, आंटी को लीप किस की तो आंटी बोलीं – बस राज, अब और नहीं… हमें गार्डेन भी जाना है…

मैंने तुरंत अपने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 2:30 बज गये थे तो आंटी बोलीं – राज 4 बजे का अलार्म लगा दो और सो जाओ…

फिर हम बिछड़े, तोता मैना एक दूसरे की बाहों में सो गये..

4 बजे मेरा अलार्म बजा तो मैं जाग गया और आंटी को देखा तो वो सो रही थीं..

उफफ्फ़!! कितनी प्यारी लग रही थीं..

उनके चेहरे पे, उनके बाल आ रहे थे..

 


मैंने आंटी के चेहरे से बाल हटाए और उनके माथे पे एक किस की तो आंटी उठ गईं और बोलीं – 4 बज गये, क्या…

मैं बोला – हाँ…

आंटी उठने लगीं तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर, अपने पास खींच लिया तो वो बोलीं – राजू छोड़ो… अब जाना है…

मैंने आंटी को लीप किस की तो आंटी बोलीं – मना कर दिया ना, अब… बस हो गया…

मैंने आंटी से पूछा – आंटी, पर आप ने अभी मुता तो है ही नहीं… आप जानती हो मुझे ये कितना पसंद है…

तो आंटी बोलीं – अच्छा जी… तो ये बताओ अपने ऊपर मुतवाना पसंद है या मेरी गरमा गरम मूत पीना पसंद है…

और, वो ज़ोर से हंस पड़ीं..

फिर वो फ़ौरन उठ गईं और फ्रेश हो कर कपड़े पहने और तैयार हो गईं..

मैं भी जल्दी जल्दी तैयार हो गया और हम गार्डेन के लिए निकल पड़े..

गार्डेन पहुँच कर, मैंने आंटी से बोला – आंटी, आप अंदर जाओ और अंदर सब ठीक हो तो मुझे मैसेज कर देना…

आंटी बोलीं – ठीक है…

और, मेरे लीप पे एक किस की और बोलीं – यार, मज़ा आ गया आज…

मैं बोला – मुझे भी…

थोड़ी देर बाद, आंटी का मैसेज आया की सब ठीक है…

फिर मैं अंदर गया और दोस्तों के साथ बाते करते करते, मैं वही सोफे पे सो गया..

सुबह 7 बजे, मेरे दोस्त ने मुझे उठाया और मैं फ्रेश हो कर बैठ गया..

थोड़ी देर बाद, आंटी मेरे पास आए और मुझे गुड मॉर्निंग विश किया और मुझे चाय दी..

आंटी ने अब सूट पहना हुआ था तो मैंने पूछा – आंटी, आपने कपड़े कब बदल लिए तो वो बोलीं – तेरे भैया को भी मुझे खुश रखना पड़ता है… और उन्होंने मुझे आँख मार दी..

मैंने पूछा – तो, कैसी लगीं रात को राजू की सवारी…

आंटी बोलीं – यार, ऐसा लगा जैसे पहली बार सवारी की हो… मज़ा आ गया…

अब मैंने पूछा – आंटी, भैया या और किसी ने पूछा नहीं की रात भर कहाँ थीं…

आंटी बोलीं – पूछा तो था, पर मैंने बोल दिया की बात करते करते मेरी आँख लग गई थी, औरतों के एक रूम में…

खैर, हम थोड़ी देर बाद बिदाई करा कर घर लौटने लगे..

और थोड़ी देर बाद हम घर पहुँच गए, एक यादगार और शानदार शादी को एन्जॉय करके.. ..

आखिरकार, मैंने फिर से आंटी को पटा ही लिया.. ..

मेरी और आंटी की प्यार और सेक्स लाइफ, दोनों ही मस्त चल रही थीं..

हम हफ्ते में मौका मिलते ही, कम से कम एक बार तो सेक्स कर ही लेते थे और कभी कभी तो 2-3 बार भी..

आंटी भी आज कल, मेरी सेहत का बहुत ख़याल रखने लगीं थीं..

अक्सर, वो मुझे जिनजर जूस और बाय्ल्ड अंडे देती रहती थीं..

मैं उनसे पूछता था तो वो बोलती थीं – इससे तुम्हारा सेक्स स्टेमिना बढ़ेगा..

मैं भी बड़ी खुशी से पी लेता था..

हम काफ़ी एंजाय कर रहे थे और ऐसे ही, हमें एक साल हो गया..

हमारी चुदाई की सालगिरह आने वाली थीं.. जब मैंने पहली बार, आंटी को चोदा था..

मैं बहुत खुश था और सोच रहा था की इसे अलग स्टाइल से मनाऊंगा..

तो, हमारी सालगिरह के दो दिन पहले, मैं आंटी से फोन पर बात कर रहा था..

मैं आंटी से बोला – आंटी, हमारी सालगिरह आने वाली है… तो आंटी बोलीं – कौन सी सालगिरह, भाई…

तो, मैं बोला – हमारी पहली चुदाई की…

इस पर आंटी हंस पड़ीं और बोलीं – अच्छा जी, तुझे याद है…

मैं बोला – हाँ!! क्यों नहीं… इस दिन को मैं कैसे भूल सकता हूँ, जब मैंने पहली बार एक अप्सरा को चोदा था…

आंटी बोलीं – ओह ओ!! अच्छा जी…

मैं बोला – हाँ आंटी, बिल्कुल…

आंटी बोलीं – वैसे मुझे भी ये दिन जिंदगी भर, याद रहेगा… जब मैंने एक राजू के लण्ड को, चूत के अंदर लिया था और उसके उपर मुता था…

मैं बोला – ह्म्म्म्म… क्या आंटी, आप भी…

आंटी बोलीं – अच्छा चल, वैसे सालगिरह का क्या प्लान है…

मैं बोला – प्लान क्या है… बस, पूरी रात और दिन आप में ही खोना है…

आंटी बोलीं – ठीक है…

मैं बोला – वाह!! आंटी आप तो तुरंत मान गईं…

आंटी बोलीं – पर, ये कैसे होगा…

मैं बोला – आप हो ना… कैसे भी करो… मुझे मालूम है, आपका दिमाग़ कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है… परसो रात और अगला दिन, आप मेरी ही हो…

आंटी बोलीं – ज़िद मत करो, राज… सब घर पर हैं… मैं कितना भी दिमाग़ चला लूँ, ऐसा नहीं हो सकता…

तो मैं बोला – प्लीज आंटी… कैसे भी करो… ये काफ़ी ख़ास दिन है, मेरे लिए और मैं इसे वेस्ट नहीं जाने दे सकता… मैं तो सेलिब्रेट ज़रूर करूँगा…

अब आंटी, कुछ सोच कर बोलीं – चल, अच्छा देखती हूँ…

मैं बोला – मुझे कल शाम तक बताओ…

आंटी बोलीं – देख, मैं वादा तो नहीं करती पर कोशिश करती हूँ… और, बाय बोल के फोन रख दिया..

फिर, मैं आंटी से बात करके अपने दोस्त के साथ घूमने चला गया और रात को सोते वक़्त, सोचने लगा – आंटी को क्या गिफ्ट दूँ..

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था..

 


मैं बहुत परेशान था..

तभी, मैंने सोचा – क्यों ना, आंटी को एक साड़ी गिफ्ट करूँ… जो वो हमेशा पहन सके… और, मैं साड़ी कन्फर्म करके, उस रात के सपने देखने लगा और सो गया..

फिर, मैं सुबह उठा और आंटी को मैसेज किया की कुछ बात बनी…

इस पर, आंटी का जवाब आया की कल शाम को ही तो अपनी बात हुए थी… थोड़ा टाइम तो दो…

मैंने, ठीक है… बोल दिया और नाश्ता करके आंटी के लिए, साड़ी लेने चला गया..

मुझे बड़ी मुश्किल से एक साडी पसंद आईं..

वो, डार्क ग्रीन रंग की थी..

मैंने वो साडी पैक करा ली और वो गिफ्ट, अपने घर में छुपा कर रख दिया और लंच करके सो गया..

फिर, शाम को जब आंटी का कॉल आया तो मैं उठा..

आंटी बोलीं – राज, देख कल हम सालगिरह सेलिब्रेट नहीं कर सकते…

मैं बोला – क्यों, आंटी… ऐसा क्यूँ…

आंटी बोलीं – देख, सब घर पे है… कोई, कहीं नहीं जा रहा…

तो मैं गुस्से में बोला – आप झूठ बोल रही हो ना…

आंटी बोलीं – नहीं, यार तुम्हारी कसम…

मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं बोला – आंटी, मैं कुछ नहीं जानता… अगर कल हमने सालगिरह नहीं सेलिब्रेट की तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा…

आंटी बोलीं – प्लीज, राज… देखो, मान जाओ… ऐसा मत करो… पर मैं नहीं माना और कॉल रख दिया..

आंटी कॉल करती रही पर मैंने नहीं उठाया और ना ही, किसी मैसेज का जवाब किया..

फिर, अगले दिन सुबह आंटी का मैसेज आया..

सालगिरह की बधाई…

मैंने भी – आपको भी… लिख कर, भेज दिया और नहाने चला गया..

नहाने के बाद, मैंने नाश्ता किया और मौका देखकर, आंटी के घर गया गिफ्ट लेकर..

आंटी, टीवी देख रही थीं..

वो मुझे देख कर खुश हुई और बोलीं – आओ राज, बैठो…

मैं बोला – मैं ऐसे ही, ठीक हूँ…

वो बोलीं – बड़ा गुस्सा आता है, तुझे…

तो मैंने कुछ नहीं बोला और फिर थोड़ी देर बाद कहा – आपको तो इस दिन की कोई परवाह नहीं है… पर मुझे है, इसलिए ये आपके लिए गिफ्ट और सालगिरह की बधाई… और, वहाँ से चला आया..

आंटी पीछे से बुलाती रहीं पर मैं नहीं रुका..

मैं उस पूरा दिन, बहुत उदास था.. कुछ समझ नहीं आ रहा था, क्या करूँ.. इसलिए, मैं दिन भर सोता रहा और मैंने आंटी के किसी भी मैसेज या कॉल का जवाब नहीं दिया..

फिर, मैं फ्रेश हो गया और अपनी बाल्कनी में खड़े हो कर, चाय पीने लगा..

तभी थोड़ी देर बाद, आंटी अपने दरवाजे पर आई और मुझे देखकर मुस्कराने लगीं..

मैंने उन्हें इग्नोर किया और चला गया, अपने रूम में..

मेरा मूड, बहुत खराब हो रखा था..

कहीं मन नहीं लग रहा था और मैंने, रात का खाना भी नहीं खाया था और तभी रात के करीब 9 बजे, आंटी मुझे फोन करने लगीं..

मैंने फोन नहीं उठाया..

फिर कई बार फोन करने के बाद, उनका एक मैसेज आया की प्लीज, फोन उठाओ… ज़रूरी काम है…

मैसेज पढ़कर, मैंने सोचा – फोन कर ही लेता हूँ…

तो आंटी ने फोन उठाते ही बोला – क्या बदतमीज़ी है ये, फोन क्यों नहीं उठा रहे थे…

मैंने बोला – आपको पता है, क्यों नहीं उठा रहा था…

तो वो बोलीं – हाँ!! मुझे पता है… पर, जब रात में कॉल किया तो कोई ज़रूरी कम ही होगा ना…

मैं बोला – हाँ, ठीक है… अब बताओ तो क्या ज़रूरी काम है…

इस पर, आंटी बोलीं – हाँ तो सुनो… जल्दी से, तैयार हो जाओ… अपनी सालगिरह सेलिब्रेट करने को…

मैंने कहा – मतलब…

आंटी बोलीं – वो बाद में समझाउंगी… बस में तुम्हें 10:30 बजे कॉल करूँगी तो आ जाना… मैं घर का दरवाजा खुला रखूँगी…

अब मैं बोला – अरे, पर बाकी के घर वाले कहाँ गये तो आंटी बोलीं – तुम्हें क्या करना है… तुम्हें जैसा बोला है, वैसा करो… और ऐसा कहकर, उन्होंने फोन रख दिया..

 
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