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पहले धीरे धीरे और फिर, सब भूल कर मैं अपनी ही मूत में सनी आंटी की चूत को खूब तेज़ी से चाटने लगा और करीब 5 मिनट चूसने के बाद, आंटी उठीं और मुझे धक्का देकर सीधा किया और सीधे मेरे मुँह पर आकर बैठ गईं..
इसके पहले मैं कुछ समझ पता आंटी ने एक हाथ से मेरा मुँह खोला और सीधे मेरे मुँह के अंदर मूतने लगीं..
आंटी की मूत बहुत गरम थी और सीधे मेरे गले तक जा रही थी, मैं मुँह हिलना चाहता पर आंटी मेरे होंठों के ऊपर ही अपनी चूत लेकर बैठीं थीं..
चाह कर भी, मैं मुँह ज़रा सा भी नहीं हिला पा रहा था..
लगभग 2 मिनट तक, आंटी की गरम गरम मूत सीधे मेरे मुँह से मेरे गले तक जा रही थी..
जब आंटी की टंकी खाली हुई तो वो बहुत ज़ोर से अपनी चूत मेरे होंठों पर और मुँह पर रगड़ने लगीं और बोलीं – इयाहह… मैं आ रही हूँ… इनयः याहह ह ह ह ह ह… उन्हम म म म म म… इस्स स स स स स स स स स स सस्स स.. उन्हममम मम म म म म म म म म म म… इस्स सस स स स स स स स स स स… आह आ आ आ आहह ह ह ह ह ह आ आ आ आ आ आ आ आ आ… इन्यह ह ह ह ह ह… या या या आया आया या आ हा… ज़ोर से चूसो, राजू… अन्म उन्ह म्म… शाबाश… हाँ हाँ हाँ… उफ्फ फ फ फ… और चूसो… और, और ज़ोर से मुझे अपनी चूत चाटने लगीं..
जैसे ही, आंटी झड़ी तो मेरा पूरा मुंह फिर से उनके रस से भर गया..
फिर आंटी मेरे चेहरे से उठ गईं और मेरे ऊपर लेट गईं..
मुझे बड़ी मुश्किल से साँस आ रही थी..
आंटी की मूत से मेरा पूरा गला, जल सा रहा था..
पर सच कहूँ तो फिर भी मुझे मज़ा आया था..
खैर, आंटी अब मेरे पूरे जिस्म को चाटने लगीं और कुछ ही देर में, मेरे गले से मेरे लण्ड पर आ गईं और उसे मुंह में ले लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चाटने लगीं और करीब 2-4 मिनट आंटी के चूसने में ही मैं झड़ गया..
आंटी ने मेरा कुछ रस मुँह में ले लिया और बाकी अपने चुचों पर मल लिया..
फिर मेरा रस अपने होंठों पर लाकर, आंटी मुझे लीप किस करने लगीं और उनके मुँह में भरा पूरा रस मेरे मुँह में उड़ेलने लगीं..
इसके बाद हम थोड़ी देर, ऐसे ही लेटे रहे और बात करते रहे..
मैंने आंटी से कहा – आंटी, ऐसा लग रहा है रेप तो आप मेरा कर रहीं थीं..
आंटी हंसने लगीं और बोलीं – क्यूँ… मज़ा नहीं आया…
फिर वो बोलीं – बच्चू, औरत अपनी पे आए तो बड़े से बड़े मर्द को पानी पीला दे… तू तो फिर भी अभी छोटा है… और, आंटी मेरे लण्ड को फिर से हिलाने लगीं..
इतनी थकान के बाद भी वो फिर खड़ा हो गया और मैं भी उनको किस करने लगा और उनके मम्मे दबाने लगा..
वो ज़ोर ज़ोर से, मेरे लण्ड को मसलने लगीं..
फिर, मैं बोला – आंटी, आज मैं भी आपकी तरह कुछ नया करता हूँ और मैं उनके पेट के ऊपर आ गया और कहा – आज, आपके मम्मे चोदता हूँ…
इस पर वो बोलीं – दो छेद कम थे, जो तीसरा खुद बना लिया…
मैं बोला – आंटी, अब आप देखती जाओ बस…
वो बोलीं – ठीक है… देखते हैं…
आंटी ने खुद ही अपने चुचों को दबा लिया और मैंने अपना लण्ड उनके मम्मे की बीच की दरार में डाला और रगड़ने लगा..
सच में यार, क्या मज़ा आ रहा था..
उनके मम्मे “आइसक्रीम” की तरह, मुलायम थे..