S
StoryPublisher
Guest
अब जब भी हल्का सा ब्रेक लगता, मेरी उंगलियाँ उसके लंड के ऊपर जाकर उसके डंडे को पकड़ लेती. उसकी वासना बढ़ने लगी और उसकी जांघें थोड़ा खुल गई और कमर मेरी तरफ पीछे झुकने लगी.जैसे-जैसे उसके लंड का तनाव पूरा होता गया उसकी जांघें और चौड़ी होकर मेरे पूरे हाथ को उसके लंड पर ले जाने लगीं.मैंने हाथ हटाना चाहा तो वो बोला- क्या हुआ? पकड़ ले ना डंडा… तुझे गिरने नहीं देगा ये!मैंने कहा- भैया, आप गलत मत समझना लेकिन मेरे मन में अब ऐसा कुछ नहीं है.वो बोला- कोई बात नहीं… मैं कौन सा अपना लंड तुझे मुंह में लेने को कह रहा हूँ. जब तक बाइक पर बैठा है तब तक तो आराम से पकड़ ले.
अनजान रास्ता और अनजान शहर होने के कारण मेरे पास कोई और चारा नहीं था. और रात भी होने लगी थी इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे उसका तना हुआ लंड उसकी पैंट के ऊपर पकड़ना पड़ा.उसके खड़े लंड को मेरे नर्म हाथों ने पूरी तरह कवर कर लिया और उसके मुंह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं, वो बोला- हाय रै लड़के… तू तो छोरी तै भी फालतू सुवाद दे देगा… (हाय रे लड़के… तू तो लड़की से भी ज्यादा मज़ा दे देगा)कह कर वो बाइक पर थोड़ा आगे पीछे होने लगा जिससे मेरा हाथ उसके लंड पर रगड़ मारने लगा.
मैंने पूछा- कितनी दूर है अभी रवि का गांव?तो वो बोला- बस दस मिनट में पहुंच जाएंगे, तू अपना काम करता रह!रात का अंधेरा घिर आया था और रोड पर वाहनों की लाइटें जलनें लगी थीं, मेरा मन थोड़ा घबरा रहा था लेकिन सोचा कि दस मिनट की ही तो बात है, एक बार रवि के पास पहुंच जाऊँ, फिर सब ठीक हो जाएगा.बाइक अंधेरी सड़क पर दौड़ती जा रही थी और संदीप के लंड में तूफान उछाले मार रहा था. तभी मेरी नज़र सामने के ग्रीन साइन बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा था ‘जाखोद खेड़ा- 10 किलोमीटर और साथ में एक और नाम था नेवली खुर्द- 5 किलोमीटर’साइन बोर्ड देखकर मेरी जान में जान आई, मैंने सोचा कि हम पहुंचने वाले हैं. और मैं खुश हो गया.
मैंने पूछा- संदीप भैया, हम पहुंचने वाले हैं न?संदीप ने कोई जवाब नहीं दिया, मैंने सोचा शायद हवा के शोर में उनको सुनाई नहीं दिया.
मैंने उसके लंड को पकड़ कर रगड़ना जारी रखा और लगभग 2 किलोमीटर के बाद बाइक ने सीधे जाखोद खेड़ा का रोड छोड़कर दाहिने हाथ की तरफ नेवली खुर्द गांव की तरफ कट मार दिया और हम रात के अंधेरे में सुनसान गांव की तरफ अंधेरे में गुम हो गए.
रात हो चुकी थी और बाइक पर चलते हुए संदीप ने अपना खड़ा लंड मेरे हाथ में दिया हुआ था. अचानक रोड पर लगे जाखोद खेड़ा गांव का साइन बोर्ड देखकर मैंने सोचा हम पहुंचने वाले हैं और मैं खुश हो गया.मैंने पूछा- संदीप भैया हम पहुंचने वाले हैं न?संदीप ने कोई जवाब नहीं दिया, मैंने सोचा शायद हवा के शोर में उनको सुनाई नहीं दिया.
मैंने उसके लंड को पकड़ कर रगड़ना जारी रखा और लगभग 2 किलोमीटर के बाद बाइक ने सीधे जाखोद खेड़ा का रोड छोड़कर दाहिने हाथ की तरफ नेवली खुर्द गांव की तरफ कट मार दिया और हम रात के अंधेरे में सुनसान गांव की तरफ अंधेरे में गुम हो गए.
कुछ देर चलने के बाद दूर दराज कुछ लाइटें जलतीं दिख रही थीं. मैंने पूछा- संदीप भैया हम पहुंचने वाले हैं क्या?वो गुस्से में बोला- साले चैन नहीं है तुझे…लंड लेने की ज्यादा ही जल्दी पड़ी है क्या… तुझसे बोला था ना आराम से बैठा रह!मैं घबरा गया… संदीप के तेवर बदले-बदले से लग रहे थे.
रवि के गांव का मेन रोड छोड़कर हम किस रास्ते पर जा रहे थे मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था. लिहाज़ा मैं चुपचाप उसके पीछे बैठा रहा. मैंने सोचा, शायद किसी गांव से कोई शॉर्ट कट होगा, यही सोचकर मैं मन को तसल्ली दे रहा था.लेकिन जो गांव दूर दिखाई दे रहा था उससे पहले ही संदीप ने वीराने में एक कच्ची रेतीली पगडंडी पर बाइक खेतों की तरफ मोड़ दी. मेरा शक गहराने लगा… लेकिन करता भी तो क्या, घबरा कर चुपचाप बैठा रहा, मेरा हाथ उसके लंड से हटने लगा.
मेरा ध्यान अब उसके लंड पर नहीं लग रहा था…वो फिर गुस्से में बोला- साली रंडी, मन भर गया क्या तेरा मेरा लंड पकड़ते-पकड़ते? नखरे मत कर और चुपचाप मेरी पैंट की चेन खोल!मैंने कुछ ना बोलते हुए चलती बाइक पर उसकी पैंट की जिप खोल दी.वो बोला- हाथ अंदर डाल!
मैंने हाथ अंदर डाला तो लंड से निकल रहा प्री कम उसके अंडरवियर को गीला कर चुका था.वो बोला- लंड को बाहर निकाल ले!मैंने चलती बाइक पर उसके लंड को अंडरवियर के कट से बड़ी मुश्किल से निकालते हुए उसकी चेन के बाहर लाकर आजा़द कर दिया. उसके 9 इंच लौड़े का टोपा प्रीकम से सना हुआ था और लंड उसकी पैंट के जिप के बीच से निकल कर किसी मोटे सांप की तरफ आसामान की तरफ सलामी दे रहा था.
वह थोड़ा सा पीछे की तरफ झुका और अपने बाएं हाथ को मेरी गर्दन पर लपेटते हुए मेरी गर्दन को आगे खींचते हुए अपनी जिप के बीच में ले जाकर मेरे होठों में अपना लंड फंसा दिया. उसकी आह निकल गई और बाइक का बैलेंस बिगड़ने लगा. उसने एकदम से ब्रेक लगाए और उसका मोटा लौड़ा मेरे गले में जा फंसा. उसने बैठे-बैठे ही मेरी गर्दन दबोचे हुए मेरा मुंह अपने लंड पर ऊपर नीचे धकेलना शुरू कर दिया.
उसकी हवस इतनी बढ़ गई थी मानो वह कह रहा हो कि मैं आज तुझे अपना लंड खिला ही दूंगा. वो मेरे मुंह को वहीं बाइक पर बैठे-बैठे चोदने लगा. मेरी गर्दन उसकी बगल में फंसी हुई थी और लंड मुंह में फंसा हुआ था. मेरी छुड़ाने और शोर मचाने की हर कोशिश नाकाम ही साबित होती.वो ‘आह.. आह…’ की आवाजें करता हुआ अपना लंड मेरे गले में पेल रहा था. मेरा दम घुटने लगा और गर्दन में दर्द भी हो रहा था.
फिर उसने अचानक मेरी गर्दन पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी और बोला- साले तू लड़की होता तुझे इतना चोदता… इतना चोदता कि हर महीने तेरे पेट से बच्चा बाहर निकलता!कह कर उसने मुझे पीछे कर दिया और फिर से बाइक आगे कच्चे रास्ते पर दौड़ा दी. उसका लंड अभी भी उसकी पैंट में ही तना हुआ बाहर निकला हुआ था और बाइक एक कोठरी की तरफ बढ़ रही थी जिसके अंदर एक धीमी सी रोशनी थी.
अनजान रास्ता और अनजान शहर होने के कारण मेरे पास कोई और चारा नहीं था. और रात भी होने लगी थी इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे उसका तना हुआ लंड उसकी पैंट के ऊपर पकड़ना पड़ा.उसके खड़े लंड को मेरे नर्म हाथों ने पूरी तरह कवर कर लिया और उसके मुंह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं, वो बोला- हाय रै लड़के… तू तो छोरी तै भी फालतू सुवाद दे देगा… (हाय रे लड़के… तू तो लड़की से भी ज्यादा मज़ा दे देगा)कह कर वो बाइक पर थोड़ा आगे पीछे होने लगा जिससे मेरा हाथ उसके लंड पर रगड़ मारने लगा.
मैंने पूछा- कितनी दूर है अभी रवि का गांव?तो वो बोला- बस दस मिनट में पहुंच जाएंगे, तू अपना काम करता रह!रात का अंधेरा घिर आया था और रोड पर वाहनों की लाइटें जलनें लगी थीं, मेरा मन थोड़ा घबरा रहा था लेकिन सोचा कि दस मिनट की ही तो बात है, एक बार रवि के पास पहुंच जाऊँ, फिर सब ठीक हो जाएगा.बाइक अंधेरी सड़क पर दौड़ती जा रही थी और संदीप के लंड में तूफान उछाले मार रहा था. तभी मेरी नज़र सामने के ग्रीन साइन बोर्ड पर पड़ी जिस पर लिखा था ‘जाखोद खेड़ा- 10 किलोमीटर और साथ में एक और नाम था नेवली खुर्द- 5 किलोमीटर’साइन बोर्ड देखकर मेरी जान में जान आई, मैंने सोचा कि हम पहुंचने वाले हैं. और मैं खुश हो गया.
मैंने पूछा- संदीप भैया, हम पहुंचने वाले हैं न?संदीप ने कोई जवाब नहीं दिया, मैंने सोचा शायद हवा के शोर में उनको सुनाई नहीं दिया.
मैंने उसके लंड को पकड़ कर रगड़ना जारी रखा और लगभग 2 किलोमीटर के बाद बाइक ने सीधे जाखोद खेड़ा का रोड छोड़कर दाहिने हाथ की तरफ नेवली खुर्द गांव की तरफ कट मार दिया और हम रात के अंधेरे में सुनसान गांव की तरफ अंधेरे में गुम हो गए.
रात हो चुकी थी और बाइक पर चलते हुए संदीप ने अपना खड़ा लंड मेरे हाथ में दिया हुआ था. अचानक रोड पर लगे जाखोद खेड़ा गांव का साइन बोर्ड देखकर मैंने सोचा हम पहुंचने वाले हैं और मैं खुश हो गया.मैंने पूछा- संदीप भैया हम पहुंचने वाले हैं न?संदीप ने कोई जवाब नहीं दिया, मैंने सोचा शायद हवा के शोर में उनको सुनाई नहीं दिया.
मैंने उसके लंड को पकड़ कर रगड़ना जारी रखा और लगभग 2 किलोमीटर के बाद बाइक ने सीधे जाखोद खेड़ा का रोड छोड़कर दाहिने हाथ की तरफ नेवली खुर्द गांव की तरफ कट मार दिया और हम रात के अंधेरे में सुनसान गांव की तरफ अंधेरे में गुम हो गए.
कुछ देर चलने के बाद दूर दराज कुछ लाइटें जलतीं दिख रही थीं. मैंने पूछा- संदीप भैया हम पहुंचने वाले हैं क्या?वो गुस्से में बोला- साले चैन नहीं है तुझे…लंड लेने की ज्यादा ही जल्दी पड़ी है क्या… तुझसे बोला था ना आराम से बैठा रह!मैं घबरा गया… संदीप के तेवर बदले-बदले से लग रहे थे.
रवि के गांव का मेन रोड छोड़कर हम किस रास्ते पर जा रहे थे मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था. लिहाज़ा मैं चुपचाप उसके पीछे बैठा रहा. मैंने सोचा, शायद किसी गांव से कोई शॉर्ट कट होगा, यही सोचकर मैं मन को तसल्ली दे रहा था.लेकिन जो गांव दूर दिखाई दे रहा था उससे पहले ही संदीप ने वीराने में एक कच्ची रेतीली पगडंडी पर बाइक खेतों की तरफ मोड़ दी. मेरा शक गहराने लगा… लेकिन करता भी तो क्या, घबरा कर चुपचाप बैठा रहा, मेरा हाथ उसके लंड से हटने लगा.
मेरा ध्यान अब उसके लंड पर नहीं लग रहा था…वो फिर गुस्से में बोला- साली रंडी, मन भर गया क्या तेरा मेरा लंड पकड़ते-पकड़ते? नखरे मत कर और चुपचाप मेरी पैंट की चेन खोल!मैंने कुछ ना बोलते हुए चलती बाइक पर उसकी पैंट की जिप खोल दी.वो बोला- हाथ अंदर डाल!
मैंने हाथ अंदर डाला तो लंड से निकल रहा प्री कम उसके अंडरवियर को गीला कर चुका था.वो बोला- लंड को बाहर निकाल ले!मैंने चलती बाइक पर उसके लंड को अंडरवियर के कट से बड़ी मुश्किल से निकालते हुए उसकी चेन के बाहर लाकर आजा़द कर दिया. उसके 9 इंच लौड़े का टोपा प्रीकम से सना हुआ था और लंड उसकी पैंट के जिप के बीच से निकल कर किसी मोटे सांप की तरफ आसामान की तरफ सलामी दे रहा था.
वह थोड़ा सा पीछे की तरफ झुका और अपने बाएं हाथ को मेरी गर्दन पर लपेटते हुए मेरी गर्दन को आगे खींचते हुए अपनी जिप के बीच में ले जाकर मेरे होठों में अपना लंड फंसा दिया. उसकी आह निकल गई और बाइक का बैलेंस बिगड़ने लगा. उसने एकदम से ब्रेक लगाए और उसका मोटा लौड़ा मेरे गले में जा फंसा. उसने बैठे-बैठे ही मेरी गर्दन दबोचे हुए मेरा मुंह अपने लंड पर ऊपर नीचे धकेलना शुरू कर दिया.
उसकी हवस इतनी बढ़ गई थी मानो वह कह रहा हो कि मैं आज तुझे अपना लंड खिला ही दूंगा. वो मेरे मुंह को वहीं बाइक पर बैठे-बैठे चोदने लगा. मेरी गर्दन उसकी बगल में फंसी हुई थी और लंड मुंह में फंसा हुआ था. मेरी छुड़ाने और शोर मचाने की हर कोशिश नाकाम ही साबित होती.वो ‘आह.. आह…’ की आवाजें करता हुआ अपना लंड मेरे गले में पेल रहा था. मेरा दम घुटने लगा और गर्दन में दर्द भी हो रहा था.
फिर उसने अचानक मेरी गर्दन पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी और बोला- साले तू लड़की होता तुझे इतना चोदता… इतना चोदता कि हर महीने तेरे पेट से बच्चा बाहर निकलता!कह कर उसने मुझे पीछे कर दिया और फिर से बाइक आगे कच्चे रास्ते पर दौड़ा दी. उसका लंड अभी भी उसकी पैंट में ही तना हुआ बाहर निकला हुआ था और बाइक एक कोठरी की तरफ बढ़ रही थी जिसके अंदर एक धीमी सी रोशनी थी.