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आदमी हु आदमी से प्यार करता हु

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अचानक से वो दोनों हंसने लगे, एक ने कहा- भागती कहाँ है जाने-मन… थोड़ा सा प्यार हमें भी दे दे!मैं हैरान रह गया ‘ये दोनों कौन हैं और क्या कह रहे हैं?’

तभी दूसरा बोला- डरती क्यूं है साली रंडी… सुबह तो बड़े मज़े से किसी लौंडे की फ्रेंची को चाट रही थी. हम तो तुझे पूरा लंड ही दे देंगे. हमें खुश कर दे और हम तुझे खुश कर देंगे.मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई, ये दोनों तो वही लड़के हैं जो मुझे सुबह छत पर से देख रहे थे.फंस गया यार… अब क्या करूं?

हालांकि मुझे लड़कों के साथ सेक्स करना पसंद है लेकिन जब किसी के साथ कोई जबरदस्ती करता है तो वो अलग बात हो जाती है… ठीक इसी तरह जब किसी लड़की से जबरदस्ती होती है तो लोग कहते हैं… साली मज़ा तो तुझे भी आया होगा लंड लेने में!लेकिन यह तो वो लड़की ही जानती है कि उसके मन और आत्मा पर क्या बीत रही है.

उन दोनों को मैं पहचान गया, मैंने उनसे कहा- यार मैं ऐसा नहीं हूँ जैसा आप सोच रहे हो!‘अबे चुप कर साले… हमें पता है तू कैसा है! हम जानते हैं और देख भी चुके हैं. अब चुपचाप से कपड़े उतार और सेवा देने के लिए तैयार हो जा!’

मैंने फिर कहा- आप लोग गलत समझ रहे हो, मैं ऐसा काम नहीं करता.तभी उनमें से एक ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुंह को भींचते हुए बोला- साले गांडू, ज्यादा नाटक मत कर, चुपचाप से कपड़े उतार ले नहीं तो हम उतारते हैं!

आज मुझे अपने गे होने पर बहुत दुख हो रहा था ‘क्या गे होना मेरी गलती है?’ अगर नहीं तो दुनिया चैन से जीने क्यों नहीं देती?क्या गे होने का मतलब सिर्फ सेक्स होता है… लौंडेबाजी करना होता है?इन सब सवालों का जवाब मैं आज तक नहीं ढूंढ पाया.

इतनी देर में दूसरे लड़के ने कहा- ये ऐसे नहीं मानेगा.उसने मुझे ज़़मीन पर धक्का देकर पटक दिया और मैं नीचे गिर पड़ा.तब पहले ने कहा- चल सौरभ, इसकी पैंट उतार और इसे नंगा कर… मेरा लंड तो आज सुबह से इसकी मारने के लिए खड़ा हुआ है लेकिन साला अब जाकर हाथ लगा है.

उसने मेरे हाथ पीछे अपने मजबूत हाथों में बांध दिए और सौरभ मेरी पैंट को खींचने लगा.

उसने मेरी पैंट का हुक खोलकर उसे नीचे कर दिया और मैं अब सिर्फ अंडरवियर में था. मैं उन दोनों के सामने गिड़गिड़ाने लगा कि मुझे छोड़ दो.और मेरी हालत देखकर उनको मुझ पर रहम आ ही गया, कपिल बोला- ठीक है, वैसे तो तेरी हरकतें देखकर आज तेरी गांड को चोदे बिना हम जाने वाले नहीं थे लेकिन लगता है तू बाकी सब गांडुओं जैसा नहीं है, इसलिए कभी किसी के सामने आइंदा इस तरह की हरकत मत करना कि तेरी गांड चुदने की नौबत आ जाए.कहकर वो दोनों मन मारकर वहाँ से चले गए.

मैं कुछ देर तक यूं ही वहाँ पर पड़ा रहा, फिर धीरे-धीरे होश संभाला, मैंने गर्दन उठाई तो रात हो चुकी थी, आस-पास सन्नाटा ही सन्नाटा था जिसमें घास-फूस में छिपे छोटे-मोटे जीवों की आवाज़ें आ रही थीं.मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए अपना शरीर संभाला और उठकर बैठ गया.आंखें नम और सीने में गम… क्या गे होना गुनाह है… मैं ऐसा क्यों हूं.. बाकी लड़के भी तो नॉर्मल हैं, फिर मुझे ही क्यों भगवान ने लड़कों के लिए आकर्षण दिया… और अगर दिया तो ऐसे समाज में पैदा ही क्यों किया.ये सब सोच-सोच कर मुझे काफी गुस्सा भी आ रहा था.

खैर जैसे-तैसे मैंने अपने कपड़े पहने और चलने की कोशिश की.

मैं मौसी के घर पहुंचा तब तक रात के 8.30 बज चुके थे.मौसी ने कहा- सोनू तू इतनी रात में बाहर से कहाँ से आ रहा है…अब मौसी को क्या जवाब देता… मैंने कहा- कुछ नहीं मौसी, मैं ऐसे ही पड़ोस के लड़के के साथ खेतों की तरफ टहलने निकल गया था.मौसी बोली- ठीक है, कुछ खा ले और आराम कर ले, तेरी मां भी तेरे लिए परेशान हो रही थी… जाकर उनको बता दे कि तू लौट आया है.मैंने कहा- ठीक है मौसी.

लेकिन मैं मां के पास नहीं गया, मुझे पता था कि अगर मां ने मेरी आंखों में आंसू देखे तो वो पूरी बात पूछे बिना नहीं छोड़ेगी इसलिए मैं सीधा ऊपर वाले कमरे में जाकर गद्दे पर गिर गया.थकान बहुत हो रही थी, इसलिए मुझे खाने-पीने का भी मन नहीं था और कब नींद आ गई मुझे कुछ पता नहीं चला.

सुबह 6 बजे मुर्गे की कुकडू कूँ से फिर आंखें खुलीं तो सूरज निकल चुका था.

मैंने कमरे से बाहर निकल कर देखा तो सामने का नज़ारा देखकर सहम गया. सौरभ और कपिल मेरी तरफ देखकर ज़ोर-ज़ोर से हंस रहे थे. मैं सीधा नीचे भाग गया, मैंने किसी से कुछ बात नहीं की और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया.

शरीर पर मिट्टी लगी थी और दिल में घाव हो गए थे लेकिन पानी से मिट्टी को तो धो लिया परंतु दिल के घावों पर मरहम कौन लगाए. शॉवर के पानी में आंखों से बहते आंसू भी मिल कर मुझे नहला रहे थे।मैं नहाकर बाहर आया और कपड़े बदलकर नाश्ता किया.मैंने मां से कहा कि मुझे अब और नहीं रहना है यहाँ पर… मुझे घर जाना है.तो मां ने कहा- ठीक है, अगर तेरा मन नहीं लग रहा है तो हम आज ही शाम को वापस घर चल पड़ेंगे. वैसे भी शादी की सारी रस्में तो पूरी हो ही गई हैं, अब हम रुककर करेंगे भी क्या यहाँ पर!

मैं टीवी वाले कमरे में चला गया लेकिन किसी चीज़ में मन नहीं लग रहा था.एक तो रवि का जाना और ऊपर से बीती रात की घटना ने मुझे अंदर से तोड़ दिया.

बड़ी मुश्किल से शाम हुई और मैंने मां से कहा- चलो मां, अब किसका इंतजार है?मां ने कहा- ठीक है, तू अपना बैग तैयार कर ले. मैं तेरी मौसी से मिलकर आती हूं.यह कहकर मां चली गई और मैं इतने में अपना बैग उठाकर ले गया.

तब तक मां ने भी अपना सामान संभाल लिया था.मौसी ने हमारे लिए रिक्शा का बंदोबस्त किया ताकि वो हमें बस स्टैंड तक पहुंचा दे.

हम बस अड़्डे पर पहुंच गए और बहादुरगढ़ की बस का इंतज़ार करने लगे लेकिन बस का टाइम 6 बजे का था, तब तक हमें वहीं पर वेट करना था.

जैसे-तैसे 6 बजे और बस अपने निर्धारित स्थान पर आकर लग गई और हम बस में बैठ गए. हमारी सीट का नंबर 23 और 24 था और हमारी सीट की ठीक बगल में दूसरी सीट पर एक वैवाहित जोड़ा बैठा हुआ था, लड़की के हाथों में लाल चूड़ियों को जोड़ा था और मांग में सिंदूर… लड़की की उम्र लगभग 20-22 साल की रही होगी जबकि लड़का 26-27 के आस-पास का लग रहा था.लड़की ने लाल रंग का सूट सलवार पहना हुआ और सिर पर चुन्नी ओढ़ रखी थी जबकि लड़के ने सफेद रंग जींस के कपड़े वाली टाइट पैंट और ऊपर गहरे महरून रंग की शर्ट डाली हुई थी.

लड़की ने अपना सीधा हाथ लड़के हाथ में दे रखा था और वो उसके हाथ को अपने बाएं हाथ में रखे हुए अपने सीधे हाथ से सहला रहा था. मेरी नज़र थोड़ी नीचे की तरफ गई तो देखा कि लड़के का लंड उसकी पैंट की चैन के पास एक साइड में किसी मोटे डंडे की तरह तनकर साइड में निकला हुआ है.

आगे की गे स्टोरी जल्दी ही लेकर लौटूंगा.

 
अभी तक आपने मेरी गे कहानी में पढ़ा कि मैं अपनी माँ के साथ अपने घर वापिस आने के लिए बस में बैठा तो पास की सीट पर एक नव विवाहित जोड़ा बैठा था. मैंने देखा कि लड़के का लंड उसकी पैंट की चैन के पास एक साइड में किसी मोटे डंडे की तरह तनकर साइड में निकला हुआ है.

उसका खड़ा लंड देखकर मेरी हवस एक बार फिर से जग गई, मैं उसके लंड को चोरी छुपे देखने लगा, कभी खिड़की से बाहर झांकने के बहाने तो कभी बस में इधर-उधर देखने के बहाने…बार-बार नज़र उसके खड़े लंड पर जाकर टिक रही थी.लड़का भी काफी हैंडसम था.

हालांकि साथ में लड़की भी बैठी थी लेकिन मेरी नज़र उस लड़के के खड़े लंड पर ही बनी हुई थी.ऐसा करते-करते लगभग 10 मिनट बीत चुके थे लेकिन मुझे हैरानी इस बात पर थी कि एक बार भी लड़की ने उस लड़के के लंड की तरफ नहीं देखा और ना ही उसे छूने की कोशिश की जबकि लड़के का लंड पूरा तनकर साइड में झटके मार रहा था.

मैं उसके लौड़े को देख ही रहा था कि अचानक उस लड़के की नज़र मुझ पर चली गई और उसे पता लग गया कि मैं उन दोनों की हरकत को देख रहा हूँ.ऐसा होते ही उसने लड़की का हाथ अपने हाथ से हटा लिया और वो भी इधर-इधर देखने लगा जैसे कि कुछ हुआ ही न हो. और धीरे-धीरे उसका लंड भी नीचे बैठने लगा.पांच मिनट के बाद उसका लंड नॉर्मल पॉजिशन में आ गया लेकिन एडजेस्ट ना होने की वजह से वह एक तरफ ही सोया हुआ दिख रहा था.

बस के चलने का समय 7 बजे का था, अभी 6.30 ही बजे थे, आधा घंटा और वेट करना था इसलिए सब लोग यहाँ वहाँ देखकर टाइम पास कर रहे थे, कोई अपने फोन में मूवी देख रहा था, कोई आईसक्रीम खा रहा था और कोई पानी पीने या पेशाब करने बाहर जा रहा था.गर्मी की वजह से सब पसीने-पसीने हो रहे थे.

एकाएक वो लड़का भी उठा और अपनी सीट से बाहर निकलते हुए बस के बीच से होते हुए नीचे उतर गया. मैं उसको देख रहा था और जब वो नीचे बस की साइड से गुजर रहा था तो उसने भी मुझे देख लिया कि मैं उसको ही देख रहा हूँ. उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया और पानी वाले के पास पानी की बोतल लेने लगा.बोतल लेकर वो वापस बस में चढ़ा और जब वो हमारी तरफ बढ़ रहा था तब भी मेरी नज़र उसके लंड की तरफ ही बनी हुई थी लेकिन अब उसके लंड की पॉजिशन का पता नहीं चल पा रहा था. वो मेरी साइड से गुजरता हुआ अपनी भारी सी गांड को अंदर की तरफ धकेलता हुआ अपनी सीट पर अंदर जाकर बैठ गया.

धीरे-धीरे बस में सवारियां भी बढ़ गई थी, लगभग आधी बस भर चुकी थी लेकिन हमारे आस-पास की सीटें अभी तक खाली ही पड़ी हुई थीं. बस के चलने में करीब 10 मिनट का समय और था. मैं और मां भी गर्मी से परेशान थे, सोच रहे थे कब तक ये बस चलेगी.आखिरकार सात बज गए और बस चल पड़ी. इस वक्त तक सूरज भी ढल गया था, दिन की हल्की हल्की रोशनी बस में आ रही थी. बस स्टैंड के बाहर निकलकर बस की स्पीड तेज हो गई और दरवाजे बंद कर दिए गए.अब सब लोग अपने अपने टाइमपास में बिज़ी हो गए, कोई सीट से पीठ लगाकर आंखें बंद करके आराम कर रहा था, कोई मोबाइल में चैटिंग या वीडियो देखने में मशगूल हो गया, कोई खिड़की से बाहर के नज़ारे देख रहा था तो कोई खाने-पीने की चीजों के साथ बिज़ी था.

मां को भी खिड़की के बाहर देखते देखते नींद सी आ गई, वो भी सोने लगी.

कुछ देर बाद मैंने उसी विवाहित जोड़े की तरफ देखा, देखकर मेरी आंखें वहीं अटक गईं, लड़की का मुंह लड़के की तरफ घूमा हुआ था और वो दोनों सीट से थोड़ा नीचे की तरफ खिसक कर आपस में किस कर रहे थे. पूरी तरह रात भी नहीं हुई थी और दिन भी नहीं रह गया था इसलिए अभी तक बस की लाइटें भी नहीं जलीं थी और वो दोनों इसी का फायदा उठाकर रंगरेलियां मनाने में लगे थे.

मैं देख ही रहा था कि अचानक उस लड़के ने मुझे दोबारा देख लिया और उसने लड़की से कहा कि वो सीधी होकर बैठ जाए तो लड़की सीधी होकर आराम से पीठ लगाकर बैठ गई.लड़के का हाथ लड़की के सिर के ऊपर होता हुआ सीट पर रखा हुआ था… मेरी नज़र थोड़ी़ नीचे गई तो लड़की का हाथ लड़के की जांघ पर रखा हुआ था और लड़की की उंगलियों के आगे ही उसका लंड पैंट में तना हुआ था लेकिन लड़की ने सिर्फ उसकी जांघ पर ही हाथ रखा हुआ था.मेरी नज़र हट गई और मैं सामने देखने लगा लेकिन हवस तो मेरे अंदर भी जाग गई थी.

मैंने कुछ सेकेन्ड्स बाद देखा तो लड़की ने उसके लंड पर हाथ रखा हुआ है और लड़के की टांगें पहले की अपेक्षा थोड़ी फैल गईं थी और हवस के कारण उसके होंठ खुले हुए थे. वो आंखें बंद करके लड़की का हाथ अपने लंड पर रखवा कर आनन्द ले रहा था. लड़की भी आराम से उसके लंड को सहला रही थी… कभी उंगलियों से पकड़ लेती तो कभी पूरा हाथ रख देती थी.वो लड़का धीरे से अपनी गांड को हरकत देता हुआ आगे पीछे हो रहा था जैसे उसके हाथ को चूत समझकर चोद रहा हो. दोनों अपनी मस्ती में मस्त थे.

मेरे अंदर सामने के नज़ारे ने तूफान भर दिया और मैं भी बेशर्मों की तरह उनके इस खेल को देखने लगा.

 
लड़की बार-बार उसके लंड को सहला रही थी और साथ में ध्यान भी रख रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है. लेकिन जैसे ही वो बस में यहाँ वहाँ देखती, मैं सीट से कमर लगाकर आँख बंद कर लेता था और हल्के से गर्दन उनकी तरफ टेढ़ी करके फिर देखने लगता.

अब सहलाते-सहलाते वह लड़का काम वासना में भर चुका था और उस लड़की के सूट के ऊपर से उसकी चूचियों पर अपना हाथ फेरने लगा था. वो धीरे-धीरे प्यार से उसकी चूचियों को दबा रहा था और वो लड़की उसके लंड को पूरा हाथ में भर लेती थी और मसल रही थी.लड़के का लंड तनकर पैंट में किसी रॉड की तरह लगने लगा था.

अब लड़के ने लड़की के सूट के नीचे से हाथ उसकी छाती की तरफ बढ़ा दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके चूचों को मसलने लगा. दोनों अपनी हवस में मशगूल हो चुके थे.लड़के से रहा नहीं गया और उसने अपनी पैंट की जिप खोल दी और लंड को अंडरवियर से बाहर निकालते हुए लड़की के हाथ में दे दिया. वो लड़की उसके खड़े लंड को हाथ में लेकर उसकी मुट्ठ मारने लगी और लड़के ने जोश में आकर लड़की का मुंह अपनी तरफ करते हुए उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया. वो एक हाथ से उसकी चूचियों को मसल रहा था और दूसरा हाथ लड़की के सिर के पीछे रखकर उसको किस कर रहा था.

इधर लड़की धीरे धीरे उसके लंड को हाथ में लेकर सहला रही थी और चूड़ियों की खन-खन मेरे कानों तक भी पहुंच रही थी.

अब लड़के ने उस लड़की को सीधा कर दिया और उससे सलवार की गांठ खोलने का इशारा किया. लड़की ने फिर यहाँ वहाँ देखा और मैंने नजरें हटा लीं. कुछ सेकेन्ड बाद लड़की ने अपनी सलवार की गांठ खोल दी और लड़के ने उसकी सलवार में हाथ डाल दिया. लड़की हवस में पागल हो गई और कमर अपनी सीट से लगाकर आँख बंद करके आराम की मुद्रा में बैठ गई. उसकी फैलती हुई टाँगें बता रही थीं कि लड़का उसकी चूत को सहला रहा है, वो होठों को दबाती हुई इस क्रिया का आनन्द ले रही थी.

इधर लड़के का लंड सांप की भांति उसकी जिप से बाहर निकला हुआ था जिसकी टोपी को वो लड़की ऊपर नीचे करते हुए लड़के को बेकाबू किए जा रही थी. अब लड़के के सब्र का बांध टूट गया और उसने लड़की का सिर अपनी गोद में रखवाने का नाटक करते हुए सीधा खड़ा हुआ लंड उसके मुंह में दे दिया लेकिन लड़की ज्यादा हरकत नहीं कर रही थी. वो बस लंड को मुंह में लेकर लेटी हुई थी.

इतने में उस लड़के की नज़र फिर मुझ पर चली गई लेकिन मैंने भी इस बार नज़र नहीं हटाई और वो मेरी तरफ देखकर मुस्करा दिया और बदले में मैं भी…अब उसने लड़की का सिर पकड़कर ऊपर नीचे करना शुरु कर दिया और बड़े प्यार से लड़की उसका लंड चूसने लगी.लड़के के आनन्द का ठिकाना न रहा… वो कभी मेरी तरफ देखता और कभी अपना सिर सीट से लगाकर लंड चुसाई का आनन्द लेने लगता.

मेरी हवस मेरे काबू से बाहर हो गई थी… मैं भी चाह रहा था कि कोई लंड मेरे मुंह में भी चला जाए और मैं उसको ऐसे ही प्यार से चूसूं…

कुछ देर बाद लड़के ने उसके सिर से पकड़ ढीली कर दी… मैं समझ गया कि उसका वीर्य निकल चुका है जिसे उस लड़की ने पी लिया.लड़की सीधी होकर बैठ गई और लड़के ने अपना आधा सोया हुआ लंड जिप के अंदर वापस डाल लिया और दोनों पहले वाली पॉजिशन में आराम से बैठ गये.

इतने में खरखौदा का स्टैंड भी आने ही वाला था और कुछ देर में बस खरखौदा स्टैंड पर पहुंच गई. अब रात हो चुकी थी और बस की लाइटें जला दी गईं. बस आधा रास्ता तय कर चुकी थी और आधा अभी बाकी था.कंडक्टर ने आवाज़ लगाई कि जिसको भी पेशाब वगैरह करना है जाकर कर सकता है इसके बाद बस सीधी बहादुरगढ़ जाकर ही रुकेगी.

यह सुनकर कई सवारियाँ अंगड़ाई लेते हुए बस से बाहर जाने लगीं और वह लड़का भी उठ खड़ा हुआ क्योंकि वीर्य छूटने के बाद अक्सर पेशाब का प्रेशर बन जाता है और शायद वह लड़का भी पेशाब करने ही जा रहा था.मैंने सोचा कि इसका लंड करीब से देखने का अच्छा मौका है इसलिए मैं भी साथ ही बस से नीचे उतर गया और उसके पीछे-पीछे चलने लगा.

खरखौदा का स्टैंड ज्यादा बड़ा नहीं था इसलिए रात के वक्त अक्सर लौंडे बाहर ही पेशाब करने लगते हैं. और वो लड़का भी दूर के एक कोने की तरफ अपनी भारी सी गांड मटकाता हुआ और अंगड़ाई लेता हुआ पेशाब करने के लिए चला जा रहा था. उसकी चाल से तो वो भी जाट ही लग रहा था. मैं उसके पीछे-पीछे अपनी हवस से बेबस होकर उसके लंड को करीब से देखने की चाह में बढ़ा जा रहा था.

 
वहीं बस स्टैंड की साइड में कुछ झाड़ियाँ थीं जहाँ पर बस अड्डे की हल्की हल्की रोशनी आ रही थी, वो जाकर वहाँ पर पेशाब करने लगा और ठीक उसके साथ ही मैं भी जाकर खड़ा हो गया.वो दोनों हाथ कमर पर टिकाए हुए वहाँ पर सुकून से मूत रहा था… मतलब उसने अपना लंड पकड़ भी नहीं रखा था फिर भी उसकी धार काफी दूर तक जा रही थी. यानि मैं समझ गया कि इसका लंड काफी लंबा और मोटा है जिसको मूतते समय पकड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.और वाकयी था भी उसका भारी भरकम लंड जिसने उस लड़की को बस में उसे अपने मुंह में लेने पर मजबूर कर दिया.

खैर यह सब सोच ही रहा था मैं, तभी उसने मेरी तरफ देखा… मैं उसके लंड भरपूर देखने की कोशिश कर रहा था.तभी वो बोला- क्या देख रहा है भाई?मैं थोड़ा हिचका और कहा- कुछ नहीं. मैं तो ऐसे ही यहाँ पर आपके पीछे पेशाब करने चला आया.अगले पल उसने कहा- पेशाब करने आया है या तुझे भी लंड लेने का शौक है?वो समझ गया कि मैं गे हूँ, पर मैंने कहा- नहीं, ऐसी तो बात नहीं है… मैं तो बस यूं ही… देख रहा था.

उसने कहा- अच्छा… ले तो फिर ढंग से ही देख ले.कहकर वो मेरी तरफ घूम गया और उसके लंड पर बस अड्डे की तरफ से आ रही लाइट पड़ने लगी. उसका लंड अभी भी आधा खड़ा हुआ था और लगभग 6 इंच का लग रहा था. पैंट में से उसके लटकते लंड को देखकर मेरी हवस ने उछाला मारा.और जब उसने देखा कि मैं उसके लंड को ध्यान से देख रहा हूँ तो उसका लंड अपने आकार में आने लगा और देखते ही देखते 8 इंच तक लंबा हो गया.

अब मेरी जीभ मेरे होठों पर बाहर निकल आई और उसने भी भांप लिया कि मैं उसके लंड को चूसना चाहता हूँ.यह देखकर उसने अपना 8 इंच का लौड़ा अपने हाथ में लिया और उसको एक दो बार मुझे दिखाते हुए हिलाया… हिलाने के बाद वो और टाइट होकर तन गया और लगभग 9 इंच तक पहुंच गया और 4 इंच तक मोटा हो गया.

‘बाप रे…’ मेरे मुंह से अचानक ही ये शब्द निकले.उसने हवस भरी आवाज़ में पूछा- क्या हुआ… डर गया क्या देखकर?मैंने कहा- इसे देखकर तो कोई भी डर जाएगा.उसने कहा- नहीं, ऐसी बात नहीं है, जो इसको प्यार करता है ये भी उसको खुश कर देता है, अगर यकीन न हो तो इसको टच करके देख ले.

अब मैं सोचने लगा… ये खुद ही मुझे अपने लंड को हाथ में लेने के लिए कह रहा है… एक बार देखूं तो सही कैसा लगता है इतना बड़ा लंड हाथ में लेकर…उसने कहा- चल थोड़ा और अंधेरे में चलते हैं, यहाँ कोई न कोई देख लेगा.कहकर हम आगे झाड़ियों के पीछे चले गए. वहाँ जाकर मैंने उसके लंड को हाथ में ले लिया और हाथ में लेते ही मेरी काम वासना उबाल खाने लगी. इतना बड़ा़ लंड मैंने कभी हाथ में नहीं लिया था. मेरे मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगीं… जैसे-जैसे मैं उसके लंड के टोपे को आगे पीछे कर रहा था वैसे वैसे उसका लंड और कड़ा हो रहा था.

मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसको मुंह में लेकर चूसने के लिए नीचे बैठ गया और बैठते ही उसके खडे़ लंड को मुंह में भर लिया जिससे उसकी भी आह निकल गई. लंड इतना बड़ा़ था कि मेरे मुंह में आधा ही जा रहा था.चूंकि उसने अभी कुछ देर पहले ही अपनी पत्नी को माल पिलाया था तो वो ज्यादा जोश में नहीं था और जैसे मैं चाह रहा था अपनी मर्जी से उसके लंड को लॉलीपोप की तरह चूस रहा था.उसके लंड से वीर्य की तेज गंध आ रही थी जो कुछ ज्यादा ही तीखी थी.

फिर उसने अपने आँड भी बाहर निकाल लिए… बोला- ज़रा इनको भी प्यार कर दे…और मैं उसके बड़े-बड़े आँडों को जीभ से चाटने लगा.

अब उसके हाथ मेरे सिर पर पकड़ बना रहे थे, उसको अच्छा लग रहा था और वो अपनी गांड आगे धकेलता हुआ मुझे अपने आँड चुसवा रहा था. मेरे हाथ उसकी मोटी गांड पर कसने लगे थे. दोनों मस्ती में होने लगे… वो चुसवाने की और मैं चूसने की!

5-7 मिनट तक उसके लंड को मैंने खूब चूसा, कभी उसके आँडों को और कभी उसकी झाटों को… लेकिन वो था कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.उसने कहा- जल्दी कर साले, बस चलने वाली है.मैं और तेज-तेज उसके लंड पर चोपे मारने लगा.उसने कहा- ये बात… अब आ रहा है मज़ा…कहकर उसने पूरा लंड मेरे घुसेड़ना चाहा लेकिन इतना बड़ा लंड अंदर जाता कैसे? इसलिए मेरी सांस घुटने लगी… पूरा घुसेड़ने के बाद भी उसका रॉड जैसा लंड 3 इंच तक बाहर ही था… मेरी आँखों से पानी आना शुरु हो गया.

और उधर से कंडक्टर ने सीटी मार दी- बहादुरगढ़ वाली बस चलने वाली है, कोई सवारी बाहर है तो बस में आकर बैठ जाए.यह सुन कर उसने कहा- चल तेरे बस का नहीं है. ये लड़कियों के मुंह में जाकर ही झड़ता है.कहकर उसने मेरे थूक से सना हुआ अपना लौड़ा हाथ से हिलाना शुरु कर दिया और मुझे वहीं अपने सामने बिठाए रखा… उसके हाथ की स्पीड बहुत तेज थी, वो इस्स आह… इस्स आह… करता हुआ अपना लंड अपने हाथ में भरकर तेज तेज मेरी नाक के सामने मुट्ठ मार रहा था. उसके बड़े-बड़े आँड उसके हाथ से टकरा कर फट्ट फट्ट की आवाज कर रहे थे… उसकी स्पीड और जोश थोड़ा और बढ़ा वो थोड़ा झुकने लगा और 2 मिनट के अंदर ही उसके वीर्य की पिचकारी मेरे चेहरे पर आकर लगी.

वीर्य छूटते ही उसने अपना लंड मेरे होठों पर रगड़ना शुरु कर दिया और जब तक उसने बदन ने झटके मारना बंद नहीं किया वो अपने लौड़े को मेरे होठों पर रगड़ता रहा. मेरा सारा चेहरा उसके वीर्य से सन गया और वो जल्दी से अपना लंड पैंट के अंदर वापस फंसाकर झाड़ियों के पीछे से निकल गया.

रूमाल से चेहरा पौंछते हुए मैं भी वहाँ से निकल आया. वो वहीं पर पानी की टंकी के पास हाथ धो रहा था और मैं वहाँ जाकर अपना मुंह धोने लगा.हाथ धोते हुए उसने पूछा- कितनी बार चुदा है अभी तक?मैंने कहा- दो बार!तो वो बोला- मुझसे चुदना चाहेगा?मैंने कहा- आपकी तो नई-नई शादी हुई है, और बीवी भी है… आपको गांड की क्या जरूरत?उसने कहा- वो मेरी बीवी नहीं है, मेरे दोस्त की वाइफ है जिसको मैं सोनीपत से उसके ससुराल छोड़ने जा रहा हूँ.

आगे की गे स्टोरी जल्दी ही अगले भाग में…

 
अभी तक आपने मेरी इंडियन गे सेक्स स्टोरीज में पढ़ा कि मैं मां के साथ सोनीपत वाली बस में अपने घर बहादुरगढ़ जा रहा था और उसी में साथ वाली सीट पर एक लड़का-लड़की जिनको देखकर लग रहा था कि नई-नई शादी हुई है, रंगरेलियाँ मनाते हुए आ रहे थे, लड़का चलती बस में अपना लंड लड़की को चुसा चुका था और बस खरखौदा बस स्टैंड पर कुछ देर के लिए रूकी थी. वो लड़का पेशाब करने बाहर निकल गया और उसके साथ मैंने भी जाकर पेशाब करने के बहाने उसके 9 इंच के लंड को खूब चूसा, उसने अपना वीर्य मेरे मुंह पर झाड़ दिया और झाड़ियों के पीछे से बाहर आ गया. उसने बताया कि वो उसकी बीवी नहीं है, उसके दोस्त की बीवी है.अब आगे:

मैं वहीं हक्का बक्का उस लड़के के मुंह की तरफ देखता रहा तो उसने मेरे चेहरे के भाव देखते हुए पूछा- ऐसे क्या देख रहा है? वो मेरे दोस्त की वाइफ है, वो किसी काम से बाहर गया हुआ था इसलिए मैं उसकी वाइफ को उसके ससुराल छोड़ने जा रहा हूँ.मैंने हैरानी से पूछा- तो आप अपने दोस्त की बीवी को अपना लंड चुसा रहे थे?उसने कहा- क्यूं इसमें इतने हैरान होने वाली कौन सी बात है… मैं तो उसकी चूत भी मार चुका हूँ.

मेरी जिज्ञासा और बढ़ गई… मैंने कहा- पत्नी तो वो आपके दोस्त की है, तो आपने उसकी चूत कैसे मारी?तो उसने बोला- बहुत लंबी कहानी है… जैसे तुझे मेरा लौड़ा पसंद आ गया, वैसे ही इसको भी मेरा लौड़ा पसंद आ गया था. बस वहीं से हम दोनों में चुदाई का खेल शुरु हो गया. लेकिन तू ये सब क्यों पूछ रहा है. तुझे मेरा लंड लेना है तो बता, नहीं तो निकल ले!

मैंने कहा- यार, आपका लंड तो बहुत अच्छा है, चूसने में बड़ा मज़ा आता है लेकिन मैं गांड में नहीं लेता, मुझे बहुत दर्द होता है, और वैसे भी मैं किसी और को चाहता हूँ.अब उसने इंटरेस्ट लेते हुए पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड भी है क्या?मैंने कहा- मुझे लड़कों में इंटरेस्ट है और यहाँ सोनीपत में मौसी के लड़के की शादी में मुझे एक लड़के से प्यार हो गया और उसने मेरी गांड भी मार ली.

तो वो हंसने लगा- साले लड़के लड़के में प्यार होता है कभी?मैंने कहा- हाँ, होता है, सब कुछ होता है और प्यार में मैंने उसे गांड भी दे दी.तो वो बोला- फिर मुझे भी दे दे अपनी गांड… फिर देख कैसा मज़ा आता है तुझे!मैंने कहा- नहीं भैया, मैं उसके सिवा किसी और के बारे में सोचता भी नहीं.तो वो बोला- अभी तो तू मेरे लंड को बड़े मज़े से चूस रहा था… और अभी कह रहा है कि किसी और के बारे में सोचता भी नहीं?

मैंने कहा- लंड चूसना अलग बात है, वो तो मैंने आपके लंड को अपनी आंखों के सामने खड़ा होते हुए देखा तो मुझसे रहा नहीं गया इसलिए चूस लिया लेकिन गांड तो मैं उसी को दे सकता हूँ जिसने परसों रात मुझे इतना प्यार दिया कि मैं कभी उसको नहीं भूल पाऊँगा.उसने कहा- अच्छा… मुझे भी तो बता ज़रा कैसे प्यार किया उसने तुझे… कौन है वो और कहाँ का रहने वाला है, क्या नाम है?

इतने में ही बस के चलने के आवाज़ सुनाई दी और हम दौड़कर बस में चढ़ गए.

उसने कहा- बता यार, मैं भी सुनूं कि गांडू को कौन प्यार दे रहा है और कैसे दे रहा है. वो भी तेरे जैसा गांडू है क्या?मैंने कहा- नहीं, वो तो असली मर्द है.उसने कहा- अच्छा, कहाँ का रहने वाला है?मैंने कहा- हिसार.उसने तपाक से कहा- फिर तो जाट होगा.मैंने कहा- हाँ, रवि नाम है.वो बोला- पूरा नाम बता?मैंने कहा- रवि जाखड़!

इतनी बातें करते हुए हम अपनी सीट तक पहुंच गए और अपनी अपनी सीट पर जाकर बैठ गए लेकिन वो लड़का मेरी तरफ इशारा करते हुए उस लड़की को कुछ समझा रहा था और अगले 2 मिनट बाद ही उस लड़की ने कहा- भैया, आप कुछ देर के लिए मेरी सीट पर आ जाओ, मैं आपकी सीट पर आकर बैठ जाती हूँ, ये भैया आपसे कुछ बात करना चाहते हैं.

यह कह कर वो लड़की अपनी सीट से उठ गई और मैं अपनी सीट से उठ कर उसकी जगह जा बैठा और वो मेरी मां के पास आकर बैठ गई.बस की लाइटें दोबारा बंद हो चुकी थीं और सब लोग सफर के आखिरी पड़ाव में झपकी लेने की मुद्रा में चले गए थे.

उसने फिर से बात शुरु की, वो बोला- हाँ तो कहाँ थे हम?मैंने कहा- रवि की बात बता रहा था मैं!वो बोला- हाँ, अब बता कैसे-कैसे क्या-क्या हुआ तुम्हारे बीच में और कैसे उसने गांड मारी तेरी?मैंन कहानी बताना शुरु किया कि कैसे मैंने रवि को पहली बार देखा और उस पर फिदा हो गया… पहली रात कैसे उसके लंड को चूसा और अगले दिन बारात में लेकर जाते हुए कार में फिर उसके लंड को चूसा. फिर हम बारात लेकर लड़की वालों के घर गए और वहाँ पर रवि ने कैसे एक लड़की की चूत मारी.

 
मैं ये सब बातें उसको बता ही रहा था कि उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया जो अब तक उसकी पैंट में तनकर झटके मार रहा था.इस सफर में उसका लंड तीसरी बार तन चुका था. उसने मेरे राइट हैंड को पकड़ा और मेरे कोमल हाथ को अपने लंड पर रगड़ने लगा. पैंट के ऊपर से छूते हुए उसका लंड और मोटा महसूस हो रहा था. जैसे-जैसे मेरा हाथ उसके हाथ के नीचे दबा हुआ उसके लंड पर रगड़ खा रहा था. वैसे-वैसे उसकी जांघें चौड़ी होकर फैलती जा रही थीं.

उसका लंड पूरे उफान पर आ गया… और वो बोला- रूक क्यूं गया, बता ना मेरी जान… आगे क्या हुआ?मैंने आखिरी रात की बात बतानी शुरु की कि कैसे रवि नशे की हालत में मेरे कमरे में आया और मेरे ऊपर गिर पड़ा और…आगे कुछ बताता… इससे पहले उसने कहा- मेरे लंड को पकड़ ले!

मैं भी कामुक हो चुका था, मैंने उसका लंड उसकी पैंट के ऊपर से ही अपने राइट हैंड में उंगलियों से पकड़ लिया.उसके मुंह से आह निकल गई और बोला- अब आगे बता क्या हुआ?मैंने कहा- रवि मेरे ऊपर गिरा हुआ था और मेरी टांगें उठाकर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ रहा था.

यह सुनकर उसकी हवस और बढ़ गई और उसने अचानक से मेरी गर्दन पकड़़कर मेरे होंठ अपने खड़े लंड पर रगड़वा दिए और पूछा- फिर?मैंने उठते हुए कहा- फिर रवि ने अपनी फ्रेंची निकली और मेरे सामने लेटकर अपनी गांड मेरे मुंह में दे दी, मैं उसकी गांड को चाटने लगा.वो बोला- तू तो पूरी रंडी है यार! फिर क्या हुआ?मैंने कहा- फिर रवि मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना 8 इंच का लंड मेरी गांड में अंदर धकेलना शुरू कर दिया और मेरे मुंह पर हाथ रखकर मेरी गांड मारने लगा.

यह सुनकर वो लड़का कामुक सिसकारियाँ लेता हुआ मेरे निप्पल को मसलने लगा, कभी मेरे होठों को अपनी पैंट में खड़े लंड पर फिरा देता और कभी लंड मेरे हाथ से रगड़वाने लगता. हवस में उसकी गांड आगे पीछे होने लगी थी. जैसे वो मेरे मुंह को चोदना चाह रहा हो.

मैंने आगे की बात बताना शुरु की ही थी कि कंडक्टर ऩे आवाज़ लगाई- बहादुरगढ़ की सवारियाँ उतरने के लिए तैयार हो जाओ!

बस बहादुरगढ़ के स्टैंड पर पहुंच वाली थी और बस की लाइटें जला दी गई, उसने एकदम से अपनी पैंट की चेन खोलकर अपना लंड पैंट के हुक के नीचे दबाकर शर्ट के तले छिपा दिया और चेन बंद कर ली ताकि किसी को उसका खड़ा लंड दिखाई न दे।उसने मुझसे मेरा नंबर मांगा, तो मैंने अपना नंबर बता दिया.

मैंने पूछा- आप कहाँ जा रहे हो?तो उसने कहा- मैं यहाँ से आगे हिसार जाऊँगा.कह कर वो बस स्टैंड में हिसार के प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ गया और हम अपने रास्ते की तरफ…

हमारा घर बस स्टैंड से ज्यादा दूरी पर नहीं था तो 10 मिनट के अंदर हम घर पहुंच गए और नहा धोकर डिनर किया और सोने की तैयारी करने लगे. रात के 11 बज चुके थे और घर के सब सदस्यों ने अपने-अपने बिस्तर संभाल लिये थे.

लेकिन मेरा मन अभी भी उचटा हुआ था, न जाने कयूं मुझे बस में मिले लड़के की बातें बार-बार कचोट रही थीं. उसके वो शब्द कि ‘अभी तो तू मेरा लंड बड़े मजे से चूस रहा था और अब कह रहा है कि तू रवि के अलावा किसी के बारे में सोचता भी नहीं…’मैं सोचने पर मजबूर था कि क्या मैं रवि से सच में प्यार करता हूँ या यह सिर्फ उसके मजबूत सेक्सी जिस्म और उसके लंड की तरफ मेरा आकर्षण ही है. लेकिन अगर यह सिर्फ आकर्षण होता तो मेरा दिल उसके लिए क्यों रोता.

इन्हीं सब ख्यालों में मैं रात के 12 बजे तक छत पर टहलता रहा. और जब टहलते हुए थक गया तो बिस्तर पर जाकर गिर गया. पता नहीं कल का दिन कौन सा नया मोड़ लेकर आने वाला है. ये बातें दिमाग में चलते-चलते मुझे नींद आ गई और सुबह 8 बजे मां ने मुझे फिर उठा दिया.

वैसे तो मैं सुबह 5-6 बजे उठ जाता हूँ लेकिन शादी में थकान होने के कारण मां ने सोचा होगा कि आज इसको आराम करने दिया जाए… क्योंकि मां तो आखिर मां ही होती है ना… वो अच्छी तरह जानती है कि उसके बच्चे को कब किस चीज़ की कहाँ पर क्या ज़रूरत है.

खैर उठने के बाद मैंने नहा धोकर नाश्ता किया और अपने एक दोस्त के पास किसी काम से चला गया. सारा दिन वहाँ वक्त बिताने के बाद शाम को डिनर के टाइम पर ही वापस आया.लेकिन ना तो मेरा मन किसी काम में ही लग रहा था, न ही खाने-पीने में… मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मेरे साथ चल क्या रहा है, मुझे क्या चाहिए… और मैं किसके पास जाऊँ ताकि मेरा मन थोड़ा शांत हो जाए.

 
एक तरफ रवि के साथ जो हुआ और दूसरी तरफ उस लड़के की बातों का असर, उसके लंड की तरफ बार-बार मेरा झुकाव… आखिर एक समलैंगिक को चाहिए क्या… लड़कों के साथ सेक्स, उनका प्यार… या अपनी हवस को शांत का करने का ज़रिया… मेरे ही सवाल मुझे ही अंदर-अंदर नोच रहे थे.

मैंने सोच लिया कि मुझे रवि के पास जाना ही पड़ेगा, उससे मिलकर ही मुझे पता लग पाएगा कि मेरे साथ आखिर ये सब हो क्या रहा है.मैंने हिसार जाने का मन बना लिया.

अगले दिन मैंने सुबह ही मां को बोल दिया कि मैं अपने दोस्त के साथ हिसार जा रहा हूँ. हमारे एक कॉमन फ्रेंड की बर्थ डे पार्टी है और मैं एक-दो दिन बाद ही लौटूंगा.

तैयार होकर मैं बस स्टैंड की तरफ निकल पड़ा और बस अड़्डे पर जाकर हिसार जाने वाली बस का वेट करने लगा… आधा घंटा वेट करने के बाद सीधा हिसार जाने वाली बस आ गई और मैं बस में चढ़ गया.

बस में एक ही सीट खाली थी जहाँ पर पुलिस की वर्दी में एक 28-30 साल का नौजवान बैठा हुआ था. मैं उसी के पास जाकर बैठ गया, मैंने उसके बैज की तरफ देखा तो उस पर नवीन जाखड़ लिखा हुआ था और वो हरियाणा पुलिस में सिपाही था. उसका शरीर काफी भरा हुआ था और उसने हाफ बाजू की शर्ट पहन रखी थी, नीचे खाकी पैंट और पैरों में काले चमड़े के जूते… उसकी जांघें काफी मोटी और मांसल थी… और टांगें फैला कर लगभग पूरी सीट पर उसी का कब्जा बना हुआ था लेकिन फिर भी मैं एडजस्ट होकर उसके साथ बची हुई जगह में बैठ गया.मुझे लगा कि शायद ये भी हिसार ही जा रहा है.

बस वहाँ से निकल पड़ी और रोहतक रोड पर चढ़ते ही बस ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहादुरगढ शहर से बाहर निकलते ही बस हवा से बातें करने लगी क्योंकि हरियाणा की सड़कें काफी चौड़ी और ट्रेफिक फ्री होती हैं, यहाँ की बसें बहुत स्पीड से चलती हैं.

कुछ देर बाद मैंने देखा कि वो पुलिस वाला नींद में हो गया था और बस की सीट के साथ गर्दन कमर लगाकर खर्रांटे भर रहा है. अब मैंने ध्यान से उसकी बॉडी की तरफ देखा, उसके हाथ काफी मजबूत थे और उसने अपने दोनों हाथों को अपनी जिप के पास नीचे ले जाकर एक दूसरे हाथ में उंगलियाँ फंसाकर रखा हुआ था जिससे उसकी जिप वाला भाग उसके हाथों के नीचे दबा हुआ था.मैंने उसकी छाती की तरफ देखा जो काफी मजबूत थी और उसकी खाकी शर्ट का ऊपर का बटन खुला हुआ था। उसकी जांघें फैली होने की वजह से उसके घुटने मेर पैरों पर आकर टकरा रहे थे। मैं उसकी जिप की तरफ देख ही रहा था कि स्पीड ब्रेकर आ गया और अचानक उसकी आंख खुलीं और उसकी नज़र सीधी मेरी नज़रों पर गई.मैंने उसको देख लिया कि वो मुझे देख रहा है लेकिन उसने आंखें दोबारा बंद कर लीं और अपने दोनों हाथ अपनी थाई से हटाकर अपने सिर के पीछे बांध लिये आराम से सोने लगा.

अब उसकी जांघों के बीच में उसके लंड वाला भाग मेरी आंखों के सामने था। एक तो पुलिस वालों की वर्दी ही इतनी मोटी होती है और दूसरी ओर उसकी जांघें मोटी होने की वजह से जिप वाले भाग पर तंबू सा बना हुआ था जिससे ना तो उसके लंड की पॉजिशन का पता लग पा रहा था और ना ही उसके साइज़ का… क्योंकि मर्दों के दीवाने उनकी चैन के पैकेज को देखकर ही अंदाज़ा लगा लेते हैं कि सामने वाले का औजार कितना बड़ा है.

मैं उसके लंड वाले भाग की तरफ देख ही रहा था कि एक और स्पीड ब्रेकर आया और वो दोबारा जग गया… और सीधी उसकी नज़र मेरी नज़रों पर ही पड़ी जो उसके लंड को उसकी पैंट में टटोलने की कोशिशों में लगी हुई थीं.अब शायद वो भी समझ गया कि मैं कहाँ और क्यों देख रहा हूँ लेकिन उसने फिर से आँखें बंद कर लीं और ऐसा करते हुए एक बार अपनी जिप वाला भाग हल्के से खुजला दिया और ऐसा करने से उसका सोया हुआ लंड उसके लेफ्ट हैंड की तरफ साइड में दिखने लगा.

आगे की गे सेक्स स्टोरीज जल्दी ही लेकर लौटूंगा.

 
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अभी तक मेरी गांड की चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा कि मैं हिसार जा रही बस में एक पुलिस वाले सिपाही के साथ बैठा हुआ था और उसके लंड को उसकी पैंट में टटोलने की कोशिशों में लगा हुआ था. अब शायद वो भी समझ गया कि मैं कहाँ और क्यों देख रहा हूँ… लेकिन उसने फिर से आँखें बंद कर लीं और ऐसा करते हुए एक बार अपनी जिप वाला भाग हल्के से खुजला दिया, ऐसा करने से उसका सोया हुआ लंड उसके लेफ्ट हैंड की तरफ दिखने लगा.

एक तरफ तो वो पुलिस वाला गबरु जवान और साइड में दिख रहा उसका लंड… मेरा मन ललचाया कि किसी तरह इसके लंड को छू लूं… इस पर हाथ फेरूं, लेकिन फिर अंदर से आवाज़ आई ‘ये मैं क्या कर रहा हूँ… जहाँ भी लंड देखा बस उसी के पीछे चल दिया… नहीं, ये गलत है… लंड चाहे कितना भी अच्छा और मोटा क्यों न हो… मर्द चाहे कितना भी हैंडसम और जवान क्यों न हो… जो प्यार मुझे रवि ने दिया, वो कोई और नहीं दे सकता.’मैंने अपनी भावनाओं को अपनी हवस के वश में नहीं होने दिया और चुपचाप आराम से सीट से कमर लगाकर सोने की कोशिश करने लगा क्योंकि लगभग 130 किलोमीटर का सफर था जिसमें करीब 2.30 घंटे लगने थे और मेरे पास टाइम पास करने के लिए कोई साधन भी नहीं था इसलिए मैंने सोना ही बेहतर समझा.

बस चलती रही और सफर घटता रहा. लगभग एक घंटे बाद मेरी आँख खुली तो देखा कि फोन पर किसी अनजान नंबर से मिसकॉल आई हुई है. मैंने सोचा कहीं रवि का ही फोन तो नहीं आ रहा? क्या पता मौसी से वो मेरा नंबर लेकर गया हो… और मुझे याद कर रहा हो.

मैंने दोबारा क़ॉल लगाई तो फोन एक लड़के ने उठाया, मैंने पूछा- आप कौन बात कर रहे हैं, आपके फोन से मिसकॉल आई हुई है.तो लड़के ने कहा- मैं संदीप बोल रहा हूँ, जो तुझे सोनीपत से बहादुरगढ़ की बस में मिला था. जिसका लौड़ा देखकर तू चूसने के लिए मजबूर हो गया था.मुझे एक बार तो अटपटा सा लगा कि इसको बात करने की तमीज़ भी नहीं है लेकिन फिर मैंने कहा- हाँ भैया, कैसे हो आप?वो बोला- मैं तो ठीक हूँ, तू बता कब आ रहा है मेरा लंड लेने?मैंने कहा- भैया मैं रवि से मिलने हिसार जा रहा हूँ. उस रात तो मैं ऐसे ही बहक गया था इसलिए आपके लंड को चूस लिया था लेकिन मैं रवि के सिवा किसी के साथ खुश नहीं रह पाऊँगा.

तो उसने कहा- तो मैं कौन सा तुझसे शादी करने वाला हूँ, एक बार गांड दे दे जानेमन… लंड तो तू बहुत अच्छा चूसता है, एक बार मुझसे भी गांड की चुदाई करवा के भी देख ले कि मैं कैसे चोदता हूँ.मैंने कहा- नहीं भैया, अब मैं रवि के पास ही जा रहा हूँ और किसी के पास ऐसा गलत काम नहीं करना चाहता.तो वो बोला- आ जा ना गांडू… क्यों नखरे कर रहा है, मैं तुझे खुश कर दूंगा.

मैंने अपने आप से कहा- गांडू अगर दिल से किसी को चाहे और सेक्स के लिेए मना करे तो नखरे दिखते हैं, और किसी को मना ना करे तो रंडी कहलाता है… उसका खुद का कोई स्टैंड ही नहीं होता क्या यार!

उसने फिर पूछा- आ रहा है क्या?मैंने कहा- नहीं भैया, मैं रवि से मिलने हिसार जा रहा हूँ, सॉरी, मैं नहीं आ पाऊँगा.तो वो बोला- कोई बात नहीं, मैं भी हिसार में ही रुका हुआ हूँ अभी, मैं तुझे रवि से मिलवा दूंगा. और तेरा मन करे तो मेरा चूस लियो नहीं तो कोई जबरदस्ती नहीं है.मैंने सोचा ‘इनकी मदद से मैं रवि तक पहुंच सकता हूँ.’तो मैंने उससे मिलने के लिए हाँ कर दी,

उसने कहा- तू हिसार के बस स्टैंड पर आकर मुझे फोन कर लियो, मैं तुझे रवि के पास पहुंचा दूंगा.मैं यह सुनकर खुश हो गया और कहा- थैंक यू भैया, मैं वहाँ पहुंच कर आपको फोन करता हूँ.मैंने फोन रख दिया.

मैंने साथ में बैठे पुलिस वाले की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्करा रहा था. मैं समझ गया कि इसने सारी बातें सुन ली हैं.मैंने उसकी जिप की तरफ देखा तो उसका लंड भी अब जाग चुका था और वो उसको अपने हाथ से सहला रहा था.

लेकिन मैंने अनजान बनते हुए वहाँ से नज़रें हटा लीं और वापस सीट से कमर लगाकर लेट गया. मैंने अपने आप से कहा ‘अब से मैं किसी पराये मर्द की तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देखूंगा.और ऐसा सोचते हुए मुझे अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा था. मैंने ठान लिया था कि मैं सिर्फ रवि का बनकर रहूँगा वो चाहे मुझे कैसे भी ट्रीट करे, मैं उसके सिवा किसी और को टच भी नहीं करुंगा.ये सब सोचते हुए मैं मन ही मन खुश हो रहा था और अब इंतज़ार कर रहा था कि कब ये सफर खत्म हो और मैं जाकर रवि को अपने दिल की बात बता दूँ. उसके बाद जो वो चाहेगा, वही करुंगा.

बस तेज गति से सड़क पर दौड़ रही थी और मेरी धड़कन मेरे दिल में उससे भी तेज गति से दौड़ रही थी.

आधे घंटे के बाद बस हिसार जिले की सीमा में प्रवेश कर गई. कंडक्टर की आवाज़ सुनकर मेरी कच्ची नींद पूरी तरह से खुल गई और 5 मिनट बाद बस स्टैंड पर पहुंचकर बस खाली होने लगी.मैंने बस से नीचे उतर कर संदीप को फोन लगाया तो उसने सेकेण्ड्स में ही फोन उठा

लिया जैसे मेरे ही फोन का इंतज़ार कर रहा हो.

मैंने कहा- संदीप भाई, मैं हिसार पहुंच गया हूँ. आपने कहा था कि आप मुझे यहाँ से रवि के गांव में ले जाओगे.संदीप ने कहा- तू वहीं पर रुक, मैं अभी आता हूँ तुझे लेने.कह कर उसने फोन रख दिया और मैं वहीं पर संदीप का इंतज़ार करने लगा.

 
मुझे हिसार के जाखोद खेड़ा गाँव में जाना था जैसा कि रवि ने मौसी को उस कागज़ पर लिख कर दिया था.शाम का समय हो रहा था और लंबे सफर के बाद मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी, मैंने बस अड्डे पर बने एक स्टॉल पर जाकर चाय बनवा ली. चाय पीकर थोड़ी थकान दूर हुई.मैंने आसमान की तरफ देखा तो गर्मियों की शाम लाल रोशनी की चादर ओढ़े हुए आसमान को अपने आगोश में लेती हुई दिखाई दे रही थी.

मैं वहीं पर बैठकर ढलते सूरज को देखता हुआ रवि से मिलने के हसीन सपने बुनने लगा था. रवि के साथ ये मेरी दूसरी सुहागरात होगी. उसके जिस्म के हर एक रोम को चूमने का ख्वाब मेरी आँखों में था. और साथ ही उसके साथ बिताए गए लम्हों की यादें एक बार फिर से मेरी आँखों के सामने तैरने लगीं जब मैंने उसको पहली बार देखा था, उसके मर्दाना जिस्म की तरफ मेरा इतना आकर्षित हो जाना… रात में उसके लंड का अमृत पीना… उसकी कातिल मुस्कानें… उसकी भरी-भरी मोटी मांसल जांघों में फंसती उसकी पैंट में बनता लंड का उभार… उसकी मोटी बालों भरी गांड को चाटना… उसके लंड को अपनी गांड के अंदर समाते हुए उससे जुड़ने का अहसास… और नशीले होठों की नमी और उसके मर्दाना जिस्म से आती मदमस्त करने वाली मर्दों की खुशबू को अपनी सांसों में भरना… उसके मर्दाना गांड की चुदाई के बाद उसके लंड से निकले गर्म लावा को अपनी गांड में महसूस करने का सुखद अहसास और उसका थक कर मेरे सीने के ऊपर गिर जाना.

अचानक फोन की वाइब्रेशन के साथ मेरी खुली आँखों में चल रहा उसके प्यार का सपना टूटा और फोन बजने लगा. फोन की स्क्रीन पर संदीप का नंबर फ्लैश हो रहा था, मैंने फोन उठा कर पूछा-हाँ संदीप भैया, कहाँ हो आप?संदीप- मैं यहीं बस स्टैंड के एक्जिट पर बाइक लेकर खडा़ हूँ, तू बाहर निकल आ!मैंने कहा- ठीक है आता हूँ!

मैं जल्दी से चलकर बस स्टैंड से बाहर जाने वाले रास्ते से मेन रोड पर आ गया और सामने पल्सर बाइक पर संदीप हेल्मेट हाथ में लिए मेरा इंतज़ार कर रहा था. वो बाइक के साथ अपनी गांड लगाकर खड़ा हुआ था, उसने दोनों हाथ छाती के पास लाकर बांध रखे थे और उसकी खाकी पैंट में से उसका मोटा सा सोया हुआ सा लंड अलग से दिख रहा था जो आधी सोई हुई अवस्था में मालूम हो रहा था. उसने छाती पर सी ग्रीन रंग की हल्के शेड वाली शर्ट पहनी हुई थी जिसका ऊपर वाला बटन खुला हुआ था. उसके चौड़े कंधों पर फंसी हुई शर्ट उसके डोलों पर आकर और फंस गई थी.

इस पोज़ में खड़ा हुआ संदीप बहुत ही सेक्सी लग रहा था लेकिन मैंने दिल को रोका और कहा- मैं सिर्फ रवि का हूँ और उसी का रहूँगा!यह सोचकर मैंने उसके बदन से ध्यान हटाया और रोड के पार दूसरी तरफ उसके पास जाकर बोला- थैंक्यू भैया, आप मेरी हेल्प करने के लिए यहाँ तक आए.उसने कहा- कोई बात नहीं लाडले, चल बाइक पर बैठ तुझे तेरे रवि के पास पहुंचा देता हूँ. बता कौन से गांव जाना है तुझे?मैंने कहा- जाखोद खेड़ा!उसने कहा- ठीक है, बैठ पीछे जल्दी!

कह कर उसने हेल्मेट पहना और अपनी भारी भरकम दाहिनी जांघ को घुमाते हुए अपनी मोटी गांड को बाइक सीट पर टिका दिया. उसके वज़न के नीचे बाइक भी दबी हुई महसूस हो रही थी. मैं भी झट से बाइक पर बैठ गया और बाइक स्टार्ट करके हम निकल पड़े.मैंने पूछा- रवि का गांव कितनी दूर है?

तो उसने कहा- ज्यादा दूर नहीं है बस 20 किलोमीटर के आस पास है यहाँ से.मैं खुश हो गया कि आज रात रवि के साथ दूसरी सुहागरात मनाने की घड़ी नज़दीक आ रही है.

शहर से बाहर निकल कर उसने बाइक की स्पीड बढ़ा दी और बाइक हवा से बातें करने लगी लेकिन जब भी स्पीड ब्रेकर आता मैं एक फीट तक ऊपर उछल जाता और बड़ी मुश्किल से बैलेंस संभालता.संदीप ने कहा- मुझे अच्छी तरह पकड़ ले नहीं तो नीचे गिर जाएगा.मैंने दोनों तरफ से संदीप की कमर को घेरते हुए सामने उसके पेट पर हाथ बांध लिए.वो बोला- क्या कर रहा है, मुझे गुदगुदी हो रही है…ज़रा नीचे से पकड़!मैंने हाथ उसकी पैंट के हुक पर लाकर बांध लिए.

उसने कहा- यहाँ भी गुदगुदी हो रही है, तू एक काम कर मेरी जांघों पर हाथ रख ले.मैंने उसकी मोटी कसी हुई जांघों पर हाथ रख दिए और उसने बाइक की स्पीड और तेज कर दी. जब भी स्पीड ब्रेकर आता..मेरे हाथ उसकी जांघों पर फिसल जाते और मेरी पकड़ उसकी जांघों के बीच में बने लंड के एरिया के पास जाकर मजबूत हो जाती. ऐसा करते हुए कई बार तो मेरा लेफ्ट हैंड उसके लंड को टच कर चुका था. और दो-तीन बार ऐसा होने के बाद उसका लौड़ा एक तरफ पैंट में तनकर बड़ा हो चुका था.

 
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