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आयशा खान से सच्चा प्यार और चुदाई--4
आयशा बोली '' कोई जान गया तो अब्बु को बता देगी तो अब्बु जान से मार डालेंगे '' तो मैंने कहा की '' तुम्हे मारने वाला कोई पैदा नहीं हुआ , तुम्हे कोई हाथ लगा देगा तो उसके हाथ पाँव तोड़ डालूँगा '' तो आयशा बोली '' मेरे अब्बु मरेंगे तब भी आप ऐसा ही करोगे'' तब मैंने आयशा को बोला '' तुम्हारे अब्बु क्या तुम्हारा खुदा -मेरा भगवान भी तुम्हे मरेगा तो उससे भी लड़ जाउगा '' तो आयशा बोली '' सच में आप इतना प्यार करते हो मुझे '' तो मैंने बोला '' जब आजमाना हो आजमा लेना '' तो आयशा बोली '' मैं आजमा लू तैयार हो आप '' तो मैंने बोला '' हा तैयार हु '' तब आयशा बेड से उठी और किचेन वाले रूम से नुकीला चाक़ू उठा लाइ और बोली '' लो इससे मेरा नाम लिखो अपने हाथ में तब मैंने आयशा के हाथ से चाक़ू लिया और ये सब्द कहते हुए .............
एक बार मेरी वफा का विश्ळास तो कर |
न मिले चाहे पर मिलने की आस तो कर |
यूँ तो मिल जाएंगे दुनियां मेँ आशिक हजारों |
किसकी मुहब्बत सच्ची है एहसास तो कर |
अपने हाथ में ''आयशा '' लिखने लगा , आयशा देखती रही जब मैंने ''आ '' लिख दिया तो हाथ से खून बहने लगा तब आयशा मेरे हाथ से चाक़ू छुड़ा लिया और लिपट गई मेरे से और चूमने लगी मुझे और किचेन में गई चुटकी में हल्दी लाइ और अपने दुपट्टे को फाड़ कर हाथ में हल्दी रखी और बाँध दिया जहा से खून निकल रहा था और को बार बार चूमने लगी तो मैंने आयशा को बोला '' आशा अब अपने घर जाओ '' तो आयशा बोली ''नहीं '' तो मैंने बोला ''अभी तो जाने के लिए छटपटा रही थी और अब हो '' तो आयशा कुछ नहीं बोली और प्यार से मेरे तरफ देखने लगी तो मैंने आयशा का हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा लिया और आयशा को किस करने लगा आधा घंटे के बाद आयशा फिर से चुदाने के लिए तैयार हो गई आयशा इस बार बड़े बेसर्मी के साथ आपने सभी कपडे उतार कर जल्दी से नंगी हो गई और मेरे खड़े लण्ड चूत में घुसेड लिया और बड़े मजे से मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदवाया मेरे हाथ का सारा दर्द गायब हो गया और रात भर में 4 बार आयशा ने चुदवाया सुबह 5 बजे अँधेरे में ही उठकर अपने घर चली गई |
आयशा की 11 वी की एक्जाम हो गई आयशा अच्छे नंबरों से पास होकर 12 वी में चली गई , 12 वी में भी साल भर आयशा को मौका देखकर चोदता रहा पर हम दोनों के रिश्ते के बारे में अभी तक आयशा के अब्बु को नही पता चला,आयशा 12 वी पास होने के बाद एक कालेज में एड्मिसन ले लिया और ट्रेन से रोज अपडाउन करने लगी अब आयशा 21 साल की हो गई आयशा की सुंदरता में और निखार आ गया हम दोनों एक दूसरे को बहुत अधिक दिलोजान से चाहने लगे एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते आयशा 10 बजे कालेज जाती तो साम को 4 बजे वापस आती आयशा के चेहरा तक नहीं देख पाता | आयशा से मिलना दूभर हो गया, आयशा से मिलने और बात करने के लिए मैं भी आयशा के साथ ट्रेन से उसके कालेज तक जाता और दिन भर इधर -उधर घूमता और जब आयशा कालेज से आती तो फिर से आयशा के साथ वापस ट्रेन से आता रास्ते भर बाते करता कई बार ऐसा करने से आयशा के अब्बु को किसी ने बता दिया तो आयशा के अब्बु निगरानी रखने लगे, हम दोनों का मिलना मुस्किल हो गया पर प्यार की आग दोनों को जलाये जा रही थी,आयशा से मिले बिना नहीं पड़ता तो मैंने दूसरा रास्ता निकाल लिया | आयशा कालेज के पहले ही किसी स्टेशन में उत्तर जाती तो मैं आयशा को मेरी बुलट में बिठाकर कही इधर उधर लोगो की नज़रे बचाते हुए घूमते और मौका देख कर किसी होटल में जाते और अपने जिस्म की प्यास बुझाते इस तरह से एक साल तक आयशा और मैं खूब मौज मस्ती किये आयशा को साल भर में कई बार चोदा पर अब जब भी चुदाई करता कंडोम लगा लेता | एक बार नवम्बर के महीने में मैं और आयशा होटल से निकल रहे थे तो आयशा के मामू ने हम दोनों देख लिया और आयशा के अब्बु को बता दिया उस दिन से आयशा का घर से निकलना बंद हो गया, आयशा दूकान में भी नहीं बैठती लगातार 20 दिन से मैंने आयशा को नहीं देखा,
मै आयशा के लिए बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगा एक दिन रात में आयशा मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया तो मैंने दरवाजा खोला और आयशा जल्दी से अंदर आ गई और सारी बात बताया,आयशा के अब्बु आयशा का निकाह करना चाहते थे , मैंने आयशा को बोला मेरे से सादी करोगी तो आयशा तैयार हो गई, उस समय रात के 3 बज रहे थे मैं तुरंत तैयार हुआ और आयशा को बोला की अँधेरे में यहाँ से रोड की तरफ निकलो यहाँ बुलट स्टार्ट करुगा तो उसकी आवाज से पूरा मुहल्ला जाग जाएगा मैंने बुलट को 1 KM तक घसीट कर ले गया वहा पर बुलट स्टार्ट किया और आपने गाँव के घर आ गया और आयशा के बारे में अपनी भाभी से बताया [मेरी भाभी मुझे बहुत चाहती था, मेरी हर खुसी का ख्याल रखती थी मैं उनसे मेरे मन की बाते बताया करता था,आयशा के बारे में भी भाभी को बता रखा था] धीरे धीरे रात में ही ये बात मम्मी पापा को पता चल गई,
घर में कोहराम मच गया पापा की ठाकुरी सिर चढ़कर बोलने लगी पापा दौड़े और बन्दुक उठकर आये और बोले जान से मार दुगा इस ''मुसल्ली '' को तो मैं दौड़कर आयशा के सामने खड़ा हो गया और बोला ''पापा आप मुझे मारने के बाद ही इसे हाथ लगा पायेगे '' तब मम्मी पापा के हाथ से बन्दुक छीन कर पापा को ले गई बड़े भइया भी नराज थे ,पर भाभी और माँ मान गई भाभी जी बोली ''सुन्दर कुड़ी है कर दो सादी क्या बुराई है '' पर घर में पापा और बड़े भाई नहीं तैयार हुए मैं भी गुस्से में अपने कमरे में घुस गया और अंदर से दरवाजा लगा लिया और आयशा से बोला ''तुम साथ तो नहीं छोड़ोगी'' तो आयशा आँखों में आसु भरे हुए बोली '' अब मर भी जाऊ तब भी आपका साथ नहीं छोड़ूगी '' मैंने बोला ठीक है चलो कही भाग जाते है और मंदिर से सादी कर लेते है तो आयशा तैयार होगी तो कुछ देर में भाभी ने दरवाजा खटखटाया तो मैंने दरवाजा होला और भाभी अंदर आई और मुझे समझाने लगी की इसे [आयशा को] इसके घर छोड़कर आ जाओ पर मैंने साफ़ साफ़ मना कर दिया
भाभी को और आयशा को लेकर घर से बाहर आया बुलट में बिठाया और घर से निकलने लगा तो भाभी ने फिर से रोका जब मैं नहीं माना तो भाभी ने आएशा को अपनी स्वेटर और साल दे दिया भाभी के पास कुछ रुपये थे भाभी ने चुपचाप पकड़ा दिया और कान में धीरे से बोली जाओ मंदिर में सादी कर लो बाद में मान जायेगे पापा । फिर मैं सुबह 6 बजे घर से निकल लिया और घर से 200 KM दूर एक शहर आ गए जहा कोई भी जान पहचान का नहीं था वहा पर एक होटल में रुके फ्रेस हुए आराम किया और जेब में हाथ डालकर रुपये निकाले और गिने तो पता चला की 9725 रुपये है फिर मैं आर्य समाज में गया और वहा पर पूरी हकीकत बताई तो आर्यसमाजी मुस्लिम लड़की के कारण पहले आपत्ति उठाया और समझाया पर मैं मेरी जगह अडिग रहा तो ओ सादी कराने को तैयार हो गए और अगले दिन आर्यसमाजियों ने मेरी आयशा के साथ 18 दिसंबर को बिधिवत विवाह कर लिया और होटल के कमरे में आ गए वही पर आयशा के साथ सुहागरात मनाया उस अजनबी शहर में 14 दिन रुके आयशा के लिए साडी -ब्लाउज खरीद दिया आयशा साडी पहन कर साथ जाती मांग में सिंदूर माथे पर बिंदिया लगाती दोनों खूब खुस थे खूब मस्ती किये आयशा को एक दिन में तीन तीन बार चोदता पर जेब धीरे धीरे खाली होने लगी तो आयशा को बोला तो आयशा बोली चलो घर वापस चलते है तो मैंने मना कर दिया और मैं बोला ''यही कही मजदूरी कर लेता हु और कोई सस्ता सा रूम किराए से ले लेता हु और वही रहता हु'' तो आयशा बोली ''आपसे ये सब नहीं होगा'' पर मैं नहीं माना और काम तलास लिया एक मकान बन रहा था वहा मजदूरी करने चला गया आयशा को होटल में छोड़ कर पर मैंने कभी काम नहीं किया था साम को जब वापस आया तो मुझे बुखार आ गई तो आयशा बहुत दुखी हुई और बोली '' चलो घर वापस चलते है मैं आपको परेसान नहीं देख सकती हु '' तो मैंने आयशा को कहा की ''पापा नहीं माने तो '' आयशा बोली
'' नहीं मानेगे तो आपके पास सरकारी नौकरी तो है वही रहेंगे '' तब मैंने बोला ''तुम्हारे अब्बु तुम्हे मार डालेंगे '' तो आयशा बोली '' मार ही डालेंगे और क्या करेंगे पर जब तक रहूगी आपके साथ ही रहूगी '' आयशा का संकल्प देखकर अगले दिन सुबह 7 बजे होटल से निकल लिये और दोपहर के 3 बजे घर आ गए । आयशा को साड़ी और मांग में सिंदूर ,माथे पर बिंदिया देखकर माँ और भाभी बहुत खुस हुई , भाभी ने तो गले लगा लिया आयशा को आयशा ने सभी के पाँव छुआ पापा का भी गुस्सा पुत्र मोह के आगे सांत हो गया घर वालो ने आयशा को अपना लिया, माँ ने आयशा के गले 5 तोले का हार पहना दिया भाभी ने अपनी सोने के पायल और हाथ की चुडिया आयशा को पहना दिया पापा ने अपने गले की मोटी से सोने की चैन आयशा के हाथ में रख दिया, बड़े भाई भी कहा पीछे रहने वाले थे उन्होंने ने भी आयशा के लिए कान की रिंग (बाले) दे दिया, आयशा इतना प्यार और सम्मान पा कर खुसी से फूली नहीं समा रही थी पापा फिर से बिधिवत विवाह का प्लान बनाने लगे पर जब आयशा के अब्बु को ये सब पता चला तो ओ मेरे घर आये और पापा के पाँव पकड़ लिए और बोले ''ठाकुर साहब आपने मेरी बेटी को अपना लिया ये मेरे लिए सम्मान की बात है मुझे खुसी है की मेरी बेटी आपकी बहु बन गई'' पर आयशा के अब्बु के मन में खोट था ओ आयशा को बुलाकर अपने साथ ले गए, दो दिन बाद मैं अपने स्कूल गया जहा सभी बड़े अजीब नजरो से मुझे देख रहे थे , मैं आयशा के घर गया तो आयशा के घर और दूकान में ताला लगा मिला मेरा मन संकित हुआ तो मैंने पास में पूछा तो पता चला की आयशा परसो ही अपने अब्बु के साथ कही चली गई फिर दुबारा आयशा नहीं मिली मुझे आयशा के अब्बु बदनामी से बचने के लिए आनन फानन में आयशा का निकाह कर दिया आयशा के मामू के घर से और आयशा मेरे से बिछड़ गई,मैं आयशा के गम पागल हो गया पाने हाथ में ''आयशा '' लिख लिया चाक़ू से गोद कर और दिन भर उसे चूमता मैं पागलो की तरह इधर उधर भटकने लगा स्कूल जाना बंद कर दिया 6 महीने तक सेविन्ग नहीं किया बाल नहीं कटवाए पागलो जैसी हालत हो गई मेरी मैं दिन भर आयशा के लिए रोता तड़पता मैं जोर जोर से एकांत में रोता |
रोते रोते अचानक मेरी नींद खुल गई [आयशा को याद करते करते कब नींद लग गई पता ही नहीं चला] बगल में मेरी श्रीमती जी लेटी हुई थी ओ मेरी आँखों में बहते हुए आँसू को देखकर समझ गई मैं आयशा को याद कर रहा था क्योकि सादी होने के बाद भी मैं अक्सर आयशा की याद में रोया करता था पर मेरी पत्नी बहुत ही समझदार ,शुशील और गजब की सुन्दर है , उनको मेरे और आयशा के संबधो के बारे में सब पता है और बुरे वक्त में उन्होंने अपने प्यार से मुझे सम्हाल लिया | पत्नी ने बोला ''क्या हुआ फिर से उसका सपना देखा क्या '' तो मैंने मना कर दिया तो पत्नी ने मेरे आसुओ को पोछा और प्यार से गाल में झप्पी पप्पी लिया और बोली '' चलिए उठिए जनाब सुबह हो गई '' और फिर मैं उठ गया और मॉर्निंग वाक के लिए निकल लिया | घूम कर वापस आया फ्रेस हुआ चाय पीया और फिर से आयशा की याद में खो गया आयशा के बिछड़ने के बाद की शेष बाते आगे पढ़ो ………
पर वक्त बड़े बड़े घाव को भर देता है माँ और भाभी का प्यार फिर से मुझे सही रास्ते लाया, भाभी मुझे कहने लगी ''सादी कर लो लल्ला साहब ओ तो गई लाखो के गहने लेकर '' तो मैंने भाभी को बोला '' भाभी माँ आप ऐसा नहीं सोचो आयशा धोखा नहीं दे सकती है '' पर मैं नहीं माना और सादी नहीं करने का फैसला कर लिया, पापा ने उस स्कूल से ट्रांसफर करवा दिया मेरा दूसरे शहर में जहा मेरे अतीत को कोई नहीं जानता था, अपने आप को ब्यस्त रखने के लिए मैंने कास्ट्रकसन का बिजनेस सुरु कर लिया सस्ती जमीन खरीदता और उसे नगर निवेश से पास करवाता और फिर मकान बनाकर बेचता, देखते देखते मैं करोड़पति हो गया और 5 साल कब निकल गए पता ही नहीं चला पर मैंने अभी तक सादी नहीं किया जब जब आयशा की याद आती अपने आपको एक कमरे में बंद कर लेता खूब रोता और दिल को हल्का करता और अपने काम में लग जाता , मेरी उम्र 36-37 साल की हो गई मम्मी मुझे लेकर बहुत चिंतित रहने लगी और बीमार पड़ गई और माँ की स्थित मरणासन्न हो गई माँ की एक ही इच्छा थी की मैं सादी कर लू,माँ की जिद के आगे झुक गया और भाभी की सगी छोटी बहन से ही सादी होगी मेरी जो मेरे से उम्र में 16 साल छोटी है गजब की खूबसूरत है मेरी पत्नी , उन्हें सब पता होते हुए भी मुझे बहुत प्यार दिया और आयशा को निकाल दिया मेरे जीवन से मैं मेरे परिवार में खुस रहने लगा और कॉन्सट्रकसन के बिजनेश के साथ साथ नौकरी भी करता, साथ ही साड़ियों की बड़ी से दूकान डाल लिया समय के साथ साथ मैं करोड़पति हो गया दो बच्चे भी हो गए एक लड़का एक लड़की पर अचानक आयशा 20 साल बाद मेरी जिंदगी में फिर से आ गई |
आज मेरे पास 60 करोड़ से भी अधिक की संप्पत्ति है आयशा को अपने साथ रख सकता हु, मन ही मन फैसला कर लिया की अब फिर से आयशा को अपने पास रखूँगा ये सोच ही रहा था की मोबाइल में एक मिस काल आई तो मैंने रिटर्न फोन किया तो आयशा की आवाज सुनाई दिया आयशा ने बताया की उसने नया मोबाइल और नंबर भी ले लिया है आयशा से बात करने के लिए मैं ससुराल के घर से बाहर आ गया और एक सेफ जगह देर तक बाते किया | आयशा को बोला ''चलो मेरे साथ रहो छोड़ दो अपनी ये परेसानी भरी जिंदगी मैं तुम्हारे लड़को को भी पाल पोस लूगा तुम्हारी लड़कियों की निकाह भी करवा दुगा मेरी सम्पत्ति का 25 % तुम्हारे नाम कर दुगा'' तो आयशा बोली ''आप बहुत प्यार करते है मुझे पता है आपका प्यार ही मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है पर मैं अपने शौहर को इस स्थित में छोड़ कर नहीं जा सकती हु '' तब मैंने आयशा से पूछा '' क्या हुआ है तुम्हारे शौहर को '' तो आयशा कुछ नहीं बोली मैंने कई बार पूछा तब भी कुछ नहीं बताया तब मैंने आयशा से बोला मैं मिलना चाहता हु तुम्हारे शौहर से तो पहले आयशा ने मना किया पर मेरे बार बार आग्रह पर बोली आप घर आ जाओ पर इन्हे संका नहीं होनी चाहिए | मैं जल्दी से वहा से चला घर आकर फ्रेश हुआ और आयशा के घर जो की मेरी ससुराल से 2 KM की दूरी पर ही था ''अकरम भाई कबाड़ी वाले '' का नाम पूछते पूछते पहुंच गया आयशा ने पहले ही बोल दिया था की अपनी असली पहचान नहीं बताना तो मैंने आयशा से बोल दिया की मैं फाइनेंसर बन कर आउगा तुम्हारे घर |
आयशा बोली '' कोई जान गया तो अब्बु को बता देगी तो अब्बु जान से मार डालेंगे '' तो मैंने कहा की '' तुम्हे मारने वाला कोई पैदा नहीं हुआ , तुम्हे कोई हाथ लगा देगा तो उसके हाथ पाँव तोड़ डालूँगा '' तो आयशा बोली '' मेरे अब्बु मरेंगे तब भी आप ऐसा ही करोगे'' तब मैंने आयशा को बोला '' तुम्हारे अब्बु क्या तुम्हारा खुदा -मेरा भगवान भी तुम्हे मरेगा तो उससे भी लड़ जाउगा '' तो आयशा बोली '' सच में आप इतना प्यार करते हो मुझे '' तो मैंने बोला '' जब आजमाना हो आजमा लेना '' तो आयशा बोली '' मैं आजमा लू तैयार हो आप '' तो मैंने बोला '' हा तैयार हु '' तब आयशा बेड से उठी और किचेन वाले रूम से नुकीला चाक़ू उठा लाइ और बोली '' लो इससे मेरा नाम लिखो अपने हाथ में तब मैंने आयशा के हाथ से चाक़ू लिया और ये सब्द कहते हुए .............
एक बार मेरी वफा का विश्ळास तो कर |
न मिले चाहे पर मिलने की आस तो कर |
यूँ तो मिल जाएंगे दुनियां मेँ आशिक हजारों |
किसकी मुहब्बत सच्ची है एहसास तो कर |
अपने हाथ में ''आयशा '' लिखने लगा , आयशा देखती रही जब मैंने ''आ '' लिख दिया तो हाथ से खून बहने लगा तब आयशा मेरे हाथ से चाक़ू छुड़ा लिया और लिपट गई मेरे से और चूमने लगी मुझे और किचेन में गई चुटकी में हल्दी लाइ और अपने दुपट्टे को फाड़ कर हाथ में हल्दी रखी और बाँध दिया जहा से खून निकल रहा था और को बार बार चूमने लगी तो मैंने आयशा को बोला '' आशा अब अपने घर जाओ '' तो आयशा बोली ''नहीं '' तो मैंने बोला ''अभी तो जाने के लिए छटपटा रही थी और अब हो '' तो आयशा कुछ नहीं बोली और प्यार से मेरे तरफ देखने लगी तो मैंने आयशा का हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा लिया और आयशा को किस करने लगा आधा घंटे के बाद आयशा फिर से चुदाने के लिए तैयार हो गई आयशा इस बार बड़े बेसर्मी के साथ आपने सभी कपडे उतार कर जल्दी से नंगी हो गई और मेरे खड़े लण्ड चूत में घुसेड लिया और बड़े मजे से मेरे ऊपर कूद कूद कर चुदवाया मेरे हाथ का सारा दर्द गायब हो गया और रात भर में 4 बार आयशा ने चुदवाया सुबह 5 बजे अँधेरे में ही उठकर अपने घर चली गई |
आयशा की 11 वी की एक्जाम हो गई आयशा अच्छे नंबरों से पास होकर 12 वी में चली गई , 12 वी में भी साल भर आयशा को मौका देखकर चोदता रहा पर हम दोनों के रिश्ते के बारे में अभी तक आयशा के अब्बु को नही पता चला,आयशा 12 वी पास होने के बाद एक कालेज में एड्मिसन ले लिया और ट्रेन से रोज अपडाउन करने लगी अब आयशा 21 साल की हो गई आयशा की सुंदरता में और निखार आ गया हम दोनों एक दूसरे को बहुत अधिक दिलोजान से चाहने लगे एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते आयशा 10 बजे कालेज जाती तो साम को 4 बजे वापस आती आयशा के चेहरा तक नहीं देख पाता | आयशा से मिलना दूभर हो गया, आयशा से मिलने और बात करने के लिए मैं भी आयशा के साथ ट्रेन से उसके कालेज तक जाता और दिन भर इधर -उधर घूमता और जब आयशा कालेज से आती तो फिर से आयशा के साथ वापस ट्रेन से आता रास्ते भर बाते करता कई बार ऐसा करने से आयशा के अब्बु को किसी ने बता दिया तो आयशा के अब्बु निगरानी रखने लगे, हम दोनों का मिलना मुस्किल हो गया पर प्यार की आग दोनों को जलाये जा रही थी,आयशा से मिले बिना नहीं पड़ता तो मैंने दूसरा रास्ता निकाल लिया | आयशा कालेज के पहले ही किसी स्टेशन में उत्तर जाती तो मैं आयशा को मेरी बुलट में बिठाकर कही इधर उधर लोगो की नज़रे बचाते हुए घूमते और मौका देख कर किसी होटल में जाते और अपने जिस्म की प्यास बुझाते इस तरह से एक साल तक आयशा और मैं खूब मौज मस्ती किये आयशा को साल भर में कई बार चोदा पर अब जब भी चुदाई करता कंडोम लगा लेता | एक बार नवम्बर के महीने में मैं और आयशा होटल से निकल रहे थे तो आयशा के मामू ने हम दोनों देख लिया और आयशा के अब्बु को बता दिया उस दिन से आयशा का घर से निकलना बंद हो गया, आयशा दूकान में भी नहीं बैठती लगातार 20 दिन से मैंने आयशा को नहीं देखा,
मै आयशा के लिए बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगा एक दिन रात में आयशा मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया तो मैंने दरवाजा खोला और आयशा जल्दी से अंदर आ गई और सारी बात बताया,आयशा के अब्बु आयशा का निकाह करना चाहते थे , मैंने आयशा को बोला मेरे से सादी करोगी तो आयशा तैयार हो गई, उस समय रात के 3 बज रहे थे मैं तुरंत तैयार हुआ और आयशा को बोला की अँधेरे में यहाँ से रोड की तरफ निकलो यहाँ बुलट स्टार्ट करुगा तो उसकी आवाज से पूरा मुहल्ला जाग जाएगा मैंने बुलट को 1 KM तक घसीट कर ले गया वहा पर बुलट स्टार्ट किया और आपने गाँव के घर आ गया और आयशा के बारे में अपनी भाभी से बताया [मेरी भाभी मुझे बहुत चाहती था, मेरी हर खुसी का ख्याल रखती थी मैं उनसे मेरे मन की बाते बताया करता था,आयशा के बारे में भी भाभी को बता रखा था] धीरे धीरे रात में ही ये बात मम्मी पापा को पता चल गई,
घर में कोहराम मच गया पापा की ठाकुरी सिर चढ़कर बोलने लगी पापा दौड़े और बन्दुक उठकर आये और बोले जान से मार दुगा इस ''मुसल्ली '' को तो मैं दौड़कर आयशा के सामने खड़ा हो गया और बोला ''पापा आप मुझे मारने के बाद ही इसे हाथ लगा पायेगे '' तब मम्मी पापा के हाथ से बन्दुक छीन कर पापा को ले गई बड़े भइया भी नराज थे ,पर भाभी और माँ मान गई भाभी जी बोली ''सुन्दर कुड़ी है कर दो सादी क्या बुराई है '' पर घर में पापा और बड़े भाई नहीं तैयार हुए मैं भी गुस्से में अपने कमरे में घुस गया और अंदर से दरवाजा लगा लिया और आयशा से बोला ''तुम साथ तो नहीं छोड़ोगी'' तो आयशा आँखों में आसु भरे हुए बोली '' अब मर भी जाऊ तब भी आपका साथ नहीं छोड़ूगी '' मैंने बोला ठीक है चलो कही भाग जाते है और मंदिर से सादी कर लेते है तो आयशा तैयार होगी तो कुछ देर में भाभी ने दरवाजा खटखटाया तो मैंने दरवाजा होला और भाभी अंदर आई और मुझे समझाने लगी की इसे [आयशा को] इसके घर छोड़कर आ जाओ पर मैंने साफ़ साफ़ मना कर दिया
भाभी को और आयशा को लेकर घर से बाहर आया बुलट में बिठाया और घर से निकलने लगा तो भाभी ने फिर से रोका जब मैं नहीं माना तो भाभी ने आएशा को अपनी स्वेटर और साल दे दिया भाभी के पास कुछ रुपये थे भाभी ने चुपचाप पकड़ा दिया और कान में धीरे से बोली जाओ मंदिर में सादी कर लो बाद में मान जायेगे पापा । फिर मैं सुबह 6 बजे घर से निकल लिया और घर से 200 KM दूर एक शहर आ गए जहा कोई भी जान पहचान का नहीं था वहा पर एक होटल में रुके फ्रेस हुए आराम किया और जेब में हाथ डालकर रुपये निकाले और गिने तो पता चला की 9725 रुपये है फिर मैं आर्य समाज में गया और वहा पर पूरी हकीकत बताई तो आर्यसमाजी मुस्लिम लड़की के कारण पहले आपत्ति उठाया और समझाया पर मैं मेरी जगह अडिग रहा तो ओ सादी कराने को तैयार हो गए और अगले दिन आर्यसमाजियों ने मेरी आयशा के साथ 18 दिसंबर को बिधिवत विवाह कर लिया और होटल के कमरे में आ गए वही पर आयशा के साथ सुहागरात मनाया उस अजनबी शहर में 14 दिन रुके आयशा के लिए साडी -ब्लाउज खरीद दिया आयशा साडी पहन कर साथ जाती मांग में सिंदूर माथे पर बिंदिया लगाती दोनों खूब खुस थे खूब मस्ती किये आयशा को एक दिन में तीन तीन बार चोदता पर जेब धीरे धीरे खाली होने लगी तो आयशा को बोला तो आयशा बोली चलो घर वापस चलते है तो मैंने मना कर दिया और मैं बोला ''यही कही मजदूरी कर लेता हु और कोई सस्ता सा रूम किराए से ले लेता हु और वही रहता हु'' तो आयशा बोली ''आपसे ये सब नहीं होगा'' पर मैं नहीं माना और काम तलास लिया एक मकान बन रहा था वहा मजदूरी करने चला गया आयशा को होटल में छोड़ कर पर मैंने कभी काम नहीं किया था साम को जब वापस आया तो मुझे बुखार आ गई तो आयशा बहुत दुखी हुई और बोली '' चलो घर वापस चलते है मैं आपको परेसान नहीं देख सकती हु '' तो मैंने आयशा को कहा की ''पापा नहीं माने तो '' आयशा बोली
'' नहीं मानेगे तो आपके पास सरकारी नौकरी तो है वही रहेंगे '' तब मैंने बोला ''तुम्हारे अब्बु तुम्हे मार डालेंगे '' तो आयशा बोली '' मार ही डालेंगे और क्या करेंगे पर जब तक रहूगी आपके साथ ही रहूगी '' आयशा का संकल्प देखकर अगले दिन सुबह 7 बजे होटल से निकल लिये और दोपहर के 3 बजे घर आ गए । आयशा को साड़ी और मांग में सिंदूर ,माथे पर बिंदिया देखकर माँ और भाभी बहुत खुस हुई , भाभी ने तो गले लगा लिया आयशा को आयशा ने सभी के पाँव छुआ पापा का भी गुस्सा पुत्र मोह के आगे सांत हो गया घर वालो ने आयशा को अपना लिया, माँ ने आयशा के गले 5 तोले का हार पहना दिया भाभी ने अपनी सोने के पायल और हाथ की चुडिया आयशा को पहना दिया पापा ने अपने गले की मोटी से सोने की चैन आयशा के हाथ में रख दिया, बड़े भाई भी कहा पीछे रहने वाले थे उन्होंने ने भी आयशा के लिए कान की रिंग (बाले) दे दिया, आयशा इतना प्यार और सम्मान पा कर खुसी से फूली नहीं समा रही थी पापा फिर से बिधिवत विवाह का प्लान बनाने लगे पर जब आयशा के अब्बु को ये सब पता चला तो ओ मेरे घर आये और पापा के पाँव पकड़ लिए और बोले ''ठाकुर साहब आपने मेरी बेटी को अपना लिया ये मेरे लिए सम्मान की बात है मुझे खुसी है की मेरी बेटी आपकी बहु बन गई'' पर आयशा के अब्बु के मन में खोट था ओ आयशा को बुलाकर अपने साथ ले गए, दो दिन बाद मैं अपने स्कूल गया जहा सभी बड़े अजीब नजरो से मुझे देख रहे थे , मैं आयशा के घर गया तो आयशा के घर और दूकान में ताला लगा मिला मेरा मन संकित हुआ तो मैंने पास में पूछा तो पता चला की आयशा परसो ही अपने अब्बु के साथ कही चली गई फिर दुबारा आयशा नहीं मिली मुझे आयशा के अब्बु बदनामी से बचने के लिए आनन फानन में आयशा का निकाह कर दिया आयशा के मामू के घर से और आयशा मेरे से बिछड़ गई,मैं आयशा के गम पागल हो गया पाने हाथ में ''आयशा '' लिख लिया चाक़ू से गोद कर और दिन भर उसे चूमता मैं पागलो की तरह इधर उधर भटकने लगा स्कूल जाना बंद कर दिया 6 महीने तक सेविन्ग नहीं किया बाल नहीं कटवाए पागलो जैसी हालत हो गई मेरी मैं दिन भर आयशा के लिए रोता तड़पता मैं जोर जोर से एकांत में रोता |
रोते रोते अचानक मेरी नींद खुल गई [आयशा को याद करते करते कब नींद लग गई पता ही नहीं चला] बगल में मेरी श्रीमती जी लेटी हुई थी ओ मेरी आँखों में बहते हुए आँसू को देखकर समझ गई मैं आयशा को याद कर रहा था क्योकि सादी होने के बाद भी मैं अक्सर आयशा की याद में रोया करता था पर मेरी पत्नी बहुत ही समझदार ,शुशील और गजब की सुन्दर है , उनको मेरे और आयशा के संबधो के बारे में सब पता है और बुरे वक्त में उन्होंने अपने प्यार से मुझे सम्हाल लिया | पत्नी ने बोला ''क्या हुआ फिर से उसका सपना देखा क्या '' तो मैंने मना कर दिया तो पत्नी ने मेरे आसुओ को पोछा और प्यार से गाल में झप्पी पप्पी लिया और बोली '' चलिए उठिए जनाब सुबह हो गई '' और फिर मैं उठ गया और मॉर्निंग वाक के लिए निकल लिया | घूम कर वापस आया फ्रेस हुआ चाय पीया और फिर से आयशा की याद में खो गया आयशा के बिछड़ने के बाद की शेष बाते आगे पढ़ो ………
पर वक्त बड़े बड़े घाव को भर देता है माँ और भाभी का प्यार फिर से मुझे सही रास्ते लाया, भाभी मुझे कहने लगी ''सादी कर लो लल्ला साहब ओ तो गई लाखो के गहने लेकर '' तो मैंने भाभी को बोला '' भाभी माँ आप ऐसा नहीं सोचो आयशा धोखा नहीं दे सकती है '' पर मैं नहीं माना और सादी नहीं करने का फैसला कर लिया, पापा ने उस स्कूल से ट्रांसफर करवा दिया मेरा दूसरे शहर में जहा मेरे अतीत को कोई नहीं जानता था, अपने आप को ब्यस्त रखने के लिए मैंने कास्ट्रकसन का बिजनेस सुरु कर लिया सस्ती जमीन खरीदता और उसे नगर निवेश से पास करवाता और फिर मकान बनाकर बेचता, देखते देखते मैं करोड़पति हो गया और 5 साल कब निकल गए पता ही नहीं चला पर मैंने अभी तक सादी नहीं किया जब जब आयशा की याद आती अपने आपको एक कमरे में बंद कर लेता खूब रोता और दिल को हल्का करता और अपने काम में लग जाता , मेरी उम्र 36-37 साल की हो गई मम्मी मुझे लेकर बहुत चिंतित रहने लगी और बीमार पड़ गई और माँ की स्थित मरणासन्न हो गई माँ की एक ही इच्छा थी की मैं सादी कर लू,माँ की जिद के आगे झुक गया और भाभी की सगी छोटी बहन से ही सादी होगी मेरी जो मेरे से उम्र में 16 साल छोटी है गजब की खूबसूरत है मेरी पत्नी , उन्हें सब पता होते हुए भी मुझे बहुत प्यार दिया और आयशा को निकाल दिया मेरे जीवन से मैं मेरे परिवार में खुस रहने लगा और कॉन्सट्रकसन के बिजनेश के साथ साथ नौकरी भी करता, साथ ही साड़ियों की बड़ी से दूकान डाल लिया समय के साथ साथ मैं करोड़पति हो गया दो बच्चे भी हो गए एक लड़का एक लड़की पर अचानक आयशा 20 साल बाद मेरी जिंदगी में फिर से आ गई |
आज मेरे पास 60 करोड़ से भी अधिक की संप्पत्ति है आयशा को अपने साथ रख सकता हु, मन ही मन फैसला कर लिया की अब फिर से आयशा को अपने पास रखूँगा ये सोच ही रहा था की मोबाइल में एक मिस काल आई तो मैंने रिटर्न फोन किया तो आयशा की आवाज सुनाई दिया आयशा ने बताया की उसने नया मोबाइल और नंबर भी ले लिया है आयशा से बात करने के लिए मैं ससुराल के घर से बाहर आ गया और एक सेफ जगह देर तक बाते किया | आयशा को बोला ''चलो मेरे साथ रहो छोड़ दो अपनी ये परेसानी भरी जिंदगी मैं तुम्हारे लड़को को भी पाल पोस लूगा तुम्हारी लड़कियों की निकाह भी करवा दुगा मेरी सम्पत्ति का 25 % तुम्हारे नाम कर दुगा'' तो आयशा बोली ''आप बहुत प्यार करते है मुझे पता है आपका प्यार ही मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है पर मैं अपने शौहर को इस स्थित में छोड़ कर नहीं जा सकती हु '' तब मैंने आयशा से पूछा '' क्या हुआ है तुम्हारे शौहर को '' तो आयशा कुछ नहीं बोली मैंने कई बार पूछा तब भी कुछ नहीं बताया तब मैंने आयशा से बोला मैं मिलना चाहता हु तुम्हारे शौहर से तो पहले आयशा ने मना किया पर मेरे बार बार आग्रह पर बोली आप घर आ जाओ पर इन्हे संका नहीं होनी चाहिए | मैं जल्दी से वहा से चला घर आकर फ्रेश हुआ और आयशा के घर जो की मेरी ससुराल से 2 KM की दूरी पर ही था ''अकरम भाई कबाड़ी वाले '' का नाम पूछते पूछते पहुंच गया आयशा ने पहले ही बोल दिया था की अपनी असली पहचान नहीं बताना तो मैंने आयशा से बोल दिया की मैं फाइनेंसर बन कर आउगा तुम्हारे घर |