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Guest
"कर ली कोशिशु !"
मोना चौधरी समझ चुकी थी कि कालिया इन सब बारों से भली भाति वाकिफ हे और बचाव के रास्ते भी जानता है। अगर बिना बताए उसने कालिया की गर्दन को झटका दिया होता तो उस स्थिति ने' कालिया खुद को किसी भी हाल में नहीं बचा सकता था I
"पकड़ तो इसे I " कालिया ने अपने दोनों आदमियों को आदेश दिया I
वे दोनों आगे बढे I . .
मोना चौधरी ने महसूस किया कि वह वास्तव में इनके काबू मे आ सकती है I आखिर कब तक वह तीनों का मुकाबला करेगी I और फिर उनकी रिचाल्बरे' भी कुछ दूरी पर पडी थीं । I दो उससे निबटने में व्यस्त हो सकते थे । तीसरा गोली भरा रिवाॅल्बर उठाकर¸ उस पर तान सकता था । और फिर कालिया ~ ' तो वैसे भी उसे टक्कर का आदमी लग रहा था I मार धाड़, एक्शन में एक्सपर्ट था I
यह सोचने का समय नहीं था I मोना चौधरी ने बिजली की सी गति से कालिया को गर्दन से बाह हटाई और फुर्ती के साथ उसकी कमर को दोनों हाथों से पकडा और तीव्र झटके के . साथ आगे बढ रहे दोनों आदमियों पर उठाकरु उछाल दि’या` I
मोना चौधरी ते कालिया को इस तरह उठा लिया था जैसे वह खिलौना हो I '
कालिया अपने दोनों आदमियों को साथ लिए नीचे जा गिरा I
मोना चौधरी के लिए इतना वक्त काफी था I वह भागी । रफ्तार के साथ वापस दौडी I इस ओर सडक की तरफ जहा कारें खडी थीं I मोना चौधरी ने फिर पीछे नहीं देखा I
जानती थी कि ऐसा मौका उसे फिर नहीं मिलेगा । सास रोके वह वह दौडी जा रही थी ।
मोना चौधरी सडक पर पहुची ।
सबसे आगे कालिया की हरे रग की कार खडी थी I चाबी इम्बीशन में लगी थी I मोना चौधरी ने दरवाजा खोला । एक ही बार चाबी घुमाने पर कार स्टार्ट हो गई । गियर डालकर मोना चौधरी एक्सीलेटर पर पाव दबाते हुए स्टेयरिंग' भी मोढ़ती चली गई ।
ठीक उसी समय कालिया और उसके दोनों आदमी सड़क पर पहुचे I
परंतु अब वे मोना चौधरी को नहीं पक्रड़ सकते थे । उसे कार लेकर भागते देखकर कालिया के चेहरे पर झुझलाहट के भाव मोना चौधरी को स्पष्ट दिखाई दिए I मोना चौधरी मुस्कराई I
"बाय बाय । " मोना चौधरी ने ऊचे स्वर में कहा ओर अगले ही पल कार सीधी होकर रफ्तार के साथ सडक पर सीधी दोड़त्ती चली गई I
मोना चौधरी के चेहरे पर राहत के भाव आ गए थे I उसने. गहरी सास ली । डैशबोर्ड के ऊपरी हिस्से पर कालिया का पैकेट माचिस पडा था उसमे' से उसने सिगरेट सुलगाकर कश लिया I जो भी हो इसमें शक नहीँ रहा था कि कालिया वास्तव में मजेदार आदमी था I
परंतु वह था कौन मोना चौधरी की समझ में यह बात नहीं आ रही थी I उससे क्या चाहता है वह नहीं जान सकी थी I
तभी बेक मिरर में उसकी निगाह पडी तो आखें सिंकुड़ गई I
उसकी अपनी ही कार पीछे आ रही थी I जाहिर था कि उस कार में कालिया और उसके दोनो' आदमी. मौजूद थे ।
यानी कि अभी भी उन्होंने पीछा नहीँ छोडा था I मोना चौधरी के दात मिच गए I
आखो में सख्ती के भाव आ गए I मोना चौधरी जानती थी किं अगले चौराहे को पार करते ही सडकों और गलियों का तगडा जाल था ।
इन सडकों और गलियों के जाल में प्रवेश करके वह पीछे आ रहे कालिया को आसानी से धोखा दे सकती थी I
परंतु चौराहे पर, पहुचते ही उसके दात भिच गए I लाल बत्ती थी I दो कारें पहले ही इस प्रकार खडी थी कि वह लाल बत्ती भी पार नहीं कर सकती थी । बैक मिरर पर निगाह
मारी I पीछे आ रही कार की गति अब कम होनी शुरू हो गई थी ।
यानी कि अगले चंद पलो में फिर कालिया से टकराव I
मोना चौधरी ने कार रोकी l दरवाजा खोला बाहर निकली और सढ़क पार खडे वाहनों के बीच में से गुजरती रफ्तार के साथ वह सामने नजर आ रहे अपार्टमेंट' की तरफ भागती चली गई I अपार्टमेट के गेट से भीतर प्रवेश करते हुए उसने गर्दन घुमाकर¸ पीछे देखा I
कालिया साए की तरह उसके पीछे था I
"उल्लू का पट्ठा I" दात भीचकर मोना चौधरी बढ़बडा … उठी. I
अपार्टमेंट के दरबाजे को पार करते ही बाई तरफ छोटा सा रिसेप्शन था I जिस पर बीस बाईस बरस की उम्र का युवक मौजूद था । मोना चौधरी क्रो इस तरह भागकर भीतर आते देखकर वह हैरान-सा हुआ I उसकी हैरानी मोना चौधरी के… लिए मुसीबत खडी कर सकती थी इसलिए वह क्षणभर के लिए रिसेप्शन पर ठिठकी I उस युवक के कुछ कहने से पहले हीँ मोना चौधरी जल्दी से कह उठी ।
"सुनो l मेरे पीछे कुछ बदमाश लगे हैं I अगर वे भीतर. आए तो कह देना मैं यहा नहीं आई I कुछ देर क्रे लिए मै
भीतर कहीँ छिप जाती हूं I ओके I"
युवक ने एक निगाह में उसके तबाही हुस्न का नजारा कर लिया ।
" ठीक है I" युवक ने फौरन कहा-पहली मजिल पर कोने वाला कमरा मेरा है I उस दरवाजे पर नीले रंग का पेंट है । तुम उसमेँ चली जाओ मेरी डूयूटी खत्म होने वाली है। मैँ वहीँ आजाऊगा ।"
मोना चौधरी ने सिर हिलाया और सामने दिखाई दे रही सीढियों की तरफ भागती चली गई I
और देखते ही देखते सीढियों से चढकर निगाहों से ओझल हो गई । युवक ने गहरी सासं ली और सिगरेट सुलगाकर कश लिया I
मोना चौधरी के जिस्म. का तबाही नजारा उसकी आखों के सामने घूम रहा था I
अभी उसने दो कश ही लिए होगे कि कालिया और उसके दोनों आदमियों ने भीतर प्रवेश किया I उनकी हालत देखकर ही वह समझ गया कि वहीँ लोग उसके पीछे पडे होगे I
वे रिसेप्शन पर ठिठके I कालिया बोला I
"अभी अभी यहा एक युवती आई है I स्कर्ट और शर्ट पहने I ”
"स्कर्ट और शर्ट पहने ?" युवक ने आश्चर्य जाहिर किया I
"हा I पतली I लबी I खूबसूरत ऐसी कि देखने वाला … देखता ही रह जाए I "
. . युवक लापरवाहीँ से मुस्कराया I
"साहब I आपको गलतफहमी हुई है I यहा ऐसी कोई भी युवती नहीं आई।"
कालिया का चेहरा कठोर हो गया I क्रोध तो आना ही था उसके इस सवाल पर क्योकि कुछ पल पूर्व उसने खुद मोना चौधरी को यहा आते देखा था I
"नहीं आई ? " कालिया ने सख्त स्वर में कहा I
"नहीं I ” युवक ने पूर्ववत स्वर में कहा I
कालिया के दात भिच गए I
"बेटे I तुम ज्यादा ही हवा में उड़ने की चेष्टा कर रहे हो I " कालिया ने एक एक शब्द चबाकर कढ़वे स्वर में कहा-"लेकिन कोई बात नहीं' हम उसे खुद तलाश कर लेंगे वह भीतर ही है । वस एक बात बता दो।"
"क्या ?'”
"वह तुम्हें ऐसा क्या दिखा गई जो तुम आधे मिनट में ही उसकी खातिर झूठ बोलने पर आमादा हो गए? "
मोना चौधरी समझ चुकी थी कि कालिया इन सब बारों से भली भाति वाकिफ हे और बचाव के रास्ते भी जानता है। अगर बिना बताए उसने कालिया की गर्दन को झटका दिया होता तो उस स्थिति ने' कालिया खुद को किसी भी हाल में नहीं बचा सकता था I
"पकड़ तो इसे I " कालिया ने अपने दोनों आदमियों को आदेश दिया I
वे दोनों आगे बढे I . .
मोना चौधरी ने महसूस किया कि वह वास्तव में इनके काबू मे आ सकती है I आखिर कब तक वह तीनों का मुकाबला करेगी I और फिर उनकी रिचाल्बरे' भी कुछ दूरी पर पडी थीं । I दो उससे निबटने में व्यस्त हो सकते थे । तीसरा गोली भरा रिवाॅल्बर उठाकर¸ उस पर तान सकता था । और फिर कालिया ~ ' तो वैसे भी उसे टक्कर का आदमी लग रहा था I मार धाड़, एक्शन में एक्सपर्ट था I
यह सोचने का समय नहीं था I मोना चौधरी ने बिजली की सी गति से कालिया को गर्दन से बाह हटाई और फुर्ती के साथ उसकी कमर को दोनों हाथों से पकडा और तीव्र झटके के . साथ आगे बढ रहे दोनों आदमियों पर उठाकरु उछाल दि’या` I
मोना चौधरी ते कालिया को इस तरह उठा लिया था जैसे वह खिलौना हो I '
कालिया अपने दोनों आदमियों को साथ लिए नीचे जा गिरा I
मोना चौधरी के लिए इतना वक्त काफी था I वह भागी । रफ्तार के साथ वापस दौडी I इस ओर सडक की तरफ जहा कारें खडी थीं I मोना चौधरी ने फिर पीछे नहीं देखा I
जानती थी कि ऐसा मौका उसे फिर नहीं मिलेगा । सास रोके वह वह दौडी जा रही थी ।
मोना चौधरी सडक पर पहुची ।
सबसे आगे कालिया की हरे रग की कार खडी थी I चाबी इम्बीशन में लगी थी I मोना चौधरी ने दरवाजा खोला । एक ही बार चाबी घुमाने पर कार स्टार्ट हो गई । गियर डालकर मोना चौधरी एक्सीलेटर पर पाव दबाते हुए स्टेयरिंग' भी मोढ़ती चली गई ।
ठीक उसी समय कालिया और उसके दोनों आदमी सड़क पर पहुचे I
परंतु अब वे मोना चौधरी को नहीं पक्रड़ सकते थे । उसे कार लेकर भागते देखकर कालिया के चेहरे पर झुझलाहट के भाव मोना चौधरी को स्पष्ट दिखाई दिए I मोना चौधरी मुस्कराई I
"बाय बाय । " मोना चौधरी ने ऊचे स्वर में कहा ओर अगले ही पल कार सीधी होकर रफ्तार के साथ सडक पर सीधी दोड़त्ती चली गई I
मोना चौधरी के चेहरे पर राहत के भाव आ गए थे I उसने. गहरी सास ली । डैशबोर्ड के ऊपरी हिस्से पर कालिया का पैकेट माचिस पडा था उसमे' से उसने सिगरेट सुलगाकर कश लिया I जो भी हो इसमें शक नहीँ रहा था कि कालिया वास्तव में मजेदार आदमी था I
परंतु वह था कौन मोना चौधरी की समझ में यह बात नहीं आ रही थी I उससे क्या चाहता है वह नहीं जान सकी थी I
तभी बेक मिरर में उसकी निगाह पडी तो आखें सिंकुड़ गई I
उसकी अपनी ही कार पीछे आ रही थी I जाहिर था कि उस कार में कालिया और उसके दोनो' आदमी. मौजूद थे ।
यानी कि अभी भी उन्होंने पीछा नहीँ छोडा था I मोना चौधरी के दात मिच गए I
आखो में सख्ती के भाव आ गए I मोना चौधरी जानती थी किं अगले चौराहे को पार करते ही सडकों और गलियों का तगडा जाल था ।
इन सडकों और गलियों के जाल में प्रवेश करके वह पीछे आ रहे कालिया को आसानी से धोखा दे सकती थी I
परंतु चौराहे पर, पहुचते ही उसके दात भिच गए I लाल बत्ती थी I दो कारें पहले ही इस प्रकार खडी थी कि वह लाल बत्ती भी पार नहीं कर सकती थी । बैक मिरर पर निगाह
मारी I पीछे आ रही कार की गति अब कम होनी शुरू हो गई थी ।
यानी कि अगले चंद पलो में फिर कालिया से टकराव I
मोना चौधरी ने कार रोकी l दरवाजा खोला बाहर निकली और सढ़क पार खडे वाहनों के बीच में से गुजरती रफ्तार के साथ वह सामने नजर आ रहे अपार्टमेंट' की तरफ भागती चली गई I अपार्टमेट के गेट से भीतर प्रवेश करते हुए उसने गर्दन घुमाकर¸ पीछे देखा I
कालिया साए की तरह उसके पीछे था I
"उल्लू का पट्ठा I" दात भीचकर मोना चौधरी बढ़बडा … उठी. I
अपार्टमेंट के दरबाजे को पार करते ही बाई तरफ छोटा सा रिसेप्शन था I जिस पर बीस बाईस बरस की उम्र का युवक मौजूद था । मोना चौधरी क्रो इस तरह भागकर भीतर आते देखकर वह हैरान-सा हुआ I उसकी हैरानी मोना चौधरी के… लिए मुसीबत खडी कर सकती थी इसलिए वह क्षणभर के लिए रिसेप्शन पर ठिठकी I उस युवक के कुछ कहने से पहले हीँ मोना चौधरी जल्दी से कह उठी ।
"सुनो l मेरे पीछे कुछ बदमाश लगे हैं I अगर वे भीतर. आए तो कह देना मैं यहा नहीं आई I कुछ देर क्रे लिए मै
भीतर कहीँ छिप जाती हूं I ओके I"
युवक ने एक निगाह में उसके तबाही हुस्न का नजारा कर लिया ।
" ठीक है I" युवक ने फौरन कहा-पहली मजिल पर कोने वाला कमरा मेरा है I उस दरवाजे पर नीले रंग का पेंट है । तुम उसमेँ चली जाओ मेरी डूयूटी खत्म होने वाली है। मैँ वहीँ आजाऊगा ।"
मोना चौधरी ने सिर हिलाया और सामने दिखाई दे रही सीढियों की तरफ भागती चली गई I
और देखते ही देखते सीढियों से चढकर निगाहों से ओझल हो गई । युवक ने गहरी सासं ली और सिगरेट सुलगाकर कश लिया I
मोना चौधरी के जिस्म. का तबाही नजारा उसकी आखों के सामने घूम रहा था I
अभी उसने दो कश ही लिए होगे कि कालिया और उसके दोनों आदमियों ने भीतर प्रवेश किया I उनकी हालत देखकर ही वह समझ गया कि वहीँ लोग उसके पीछे पडे होगे I
वे रिसेप्शन पर ठिठके I कालिया बोला I
"अभी अभी यहा एक युवती आई है I स्कर्ट और शर्ट पहने I ”
"स्कर्ट और शर्ट पहने ?" युवक ने आश्चर्य जाहिर किया I
"हा I पतली I लबी I खूबसूरत ऐसी कि देखने वाला … देखता ही रह जाए I "
. . युवक लापरवाहीँ से मुस्कराया I
"साहब I आपको गलतफहमी हुई है I यहा ऐसी कोई भी युवती नहीं आई।"
कालिया का चेहरा कठोर हो गया I क्रोध तो आना ही था उसके इस सवाल पर क्योकि कुछ पल पूर्व उसने खुद मोना चौधरी को यहा आते देखा था I
"नहीं आई ? " कालिया ने सख्त स्वर में कहा I
"नहीं I ” युवक ने पूर्ववत स्वर में कहा I
कालिया के दात भिच गए I
"बेटे I तुम ज्यादा ही हवा में उड़ने की चेष्टा कर रहे हो I " कालिया ने एक एक शब्द चबाकर कढ़वे स्वर में कहा-"लेकिन कोई बात नहीं' हम उसे खुद तलाश कर लेंगे वह भीतर ही है । वस एक बात बता दो।"
"क्या ?'”
"वह तुम्हें ऐसा क्या दिखा गई जो तुम आधे मिनट में ही उसकी खातिर झूठ बोलने पर आमादा हो गए? "