• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
"अब । साफ़ बोलो I क्या नाम बताया था तुमने ? मोना चौधरी ?"

'हा I " मोना चौधरी ने होशाग की आखो में देखा…"मुझे चियांग से हिदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है । इस मामले से तुम बखूबी वाकिफ हो होशाग । "

" मैडम मोना । "

" मिस I" मोना चौधरी ने उसे टोका I “

"मिस मोना चौधरी |" होशाग ने कड़वे स्वर में कहा---"तुम्हारे मिस्टर पहाडिया ने चियाग को मजाक समझ रखा हे जो हर बार चियाग से निबटने के लिए हसीन जवान युवती को भेज देता हे । जैसे चियांग उसकी खूबसूरती पर मर मिटेगा और सीक्रेट की फिल्म उसके हवाले कर देगा । पहले रूबी को भेजा और अब तुम्हें I इसमेँ कोई शक नहीं कि तुम्हारी छटाई में पहाडिया ने दिंमाग से काम लिया होगा क्योकि तुम बेपनाह खूबसूरत हो । "

मोना चौधरी हसी I

"मिस मोना चौधरी I" होशाग पहले की तरह एक एक शब्द चबाकर कहने लगा समझदारी इसी में है कि तुन प्लेन पकडो और फौरन हिंदुस्तान चली जाओ I "

" क्यों ?"

" चियाग जैसे इसान से जीतना आसान ही नहीं बल्कि बेहद असभब है I शायद सभव ही नहीं ।"

"फिक्र मत करो I इस मामले में मैं चियाग से बात कर लूगी !"

"मैने बोला तो-कोईं फायदा नहीं I " होशाग ने जैसे निर्णायक अवाज में सिर हिलाया-"वह चियाग है I और वैसे भी हिंदुस्तानी' सीक्रेट का सौदा चीन से पटने जा रहा है । “

मोना चौधरी के होठ' भिच गए I

‘ "अभी पटा तो नहीं ?"

." नहीं I लेकिन ख्याल है कि अगले तीन दिन में सौदा निबट जाएगा ।"

"तीन दिन बहुत होते है I वेसे यह बात तुम्हें कैसे पता चली ?"

होशाग ने मोना चौधरी को घूरा ।

"फालतू के सवाल मत करो । "

मोना चौधरी ने मुस्कराकर कश लिया I

"तुम कहो तो हिंदुस्तान के लिए प्लेन की टिकट मैं बुक करा दू !"

"नहीं I बिना काम पूरा किए मैं बापस नहीं जाऊंगी I "

"यानी कि मरने का पक्का इरादा है है ।" होशाग ने सख्त निगाहों से उसे देखा ।

"ऐसा ही समझ लो । "

"एक ही काम के लिए तुम लोग बार बार आते रहे और ~ असफ़ल होते रहे हो तो कोई बडी बात नहीं कि चियाग की निगाह मुझ पर पड़ जाए I मैँ बेकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहता । "

'"क्या मतलब? "

. . . "मैं इस मामले में अब किसी की सहायता नहीं कर सकता ।" होशाग ने मुट्टिया भीचकरकर कहा ।

मोना चौधरी ने शात निगाहों से होशाग को देखा I

" लेकिन मिस्टर पहाडिया तो कह रहे थे कि मेरी हर बात मानोगे I ”

" नही मान रहा तो तुम्हारी भलाई के लिए I मौत से तुम्हें बचाने के लिए । “

"मुझे अपनी नहीं देश की भलाई चाहिए I " मोना चौधरी ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।

" कह देने से देश की भलाई नहीं हो जाती I और चियाग से निबटना किसी के बस का नहीं है I "

मोना चौधरी सख्त निगाहों से होशाग को घूरने लगीं I

" तुम हिंदुस्तान चली जाओ I ”

"नहीं I काम पूरा किए विना मैं वापस पलटने वाली नहीं' । " मोना चौधरी के दात भिच गए I

" तुम चियाग को नहीं जानती I वह....... I"

" मै सिर्फ अपने मक्सद को जानती हूं जिसके लिए में यहां आई हूं मिस्टर होशाग I "

होशाग ने कठोर नजरों से मोना चौधरी को देखा I

" तुम मौत के कुए मे छलाग लगाने को कह रहीं हो I "

" मामूली बात है मेरे लिए I जिसे तुम मौत का कुआ कह रहे हो वह मेरे लिए ठडे पानी का समदर है I क्योकिं इस काम के पीछे देश-भक्ति का ज़ज्वा हे । तुम शायद मेरी बात न समझ सको । "

"देश-भक्ति का जज्बा यह नहीं कंहत्ता कि अपनी जान के दुश्मन बन जाओ I बल्कि यह कहता है देश की खातिर काम करो I " होशाग ने एक-एक शब्द पर जोर देकर समझाने वाले भाव से कहा ।

"और अगर काम में जान का खतरा हो तो पलटकर भाग . . लो यही ना ?" मोना चौधरी कडबे स्वर मे बोली I

"तुम पागल तो नहीं हो ?"

मोना चौधरी ने मुस्कराकर सिर हिलाया I

होशाग आहत भाव से मोना चौधरी को देखता रहा I

मोना चौधरी ने सिगरेट का कश लिया I

" क्या देख रहे हो होशाग ?" . . .

"तुम्हें I " होशाग का स्वर गभीर था I "

"मुझे ?” मोना चौधरी मुस्कराई ।

"हा I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया-"मैँ यह बात कभी भी पसद नहीं करूगा कि तुम जैसी खूबसूरती दुनिया से उठ जाए I चियाग तुम्हारे शरीर को छलनी छलनी कर दे । "

"तो ?"

"तो । " होशाग ने मोना चौधरी की आखो में झाका-"मै किसी भी सिलसिले में तुम्हारी सहायता नहीँ कर सकता I "

"सोच लिया ?" मोना चौधरी गभीर हो गई I

"पक्की तरह सोच लिया I "

मोना चौधरी ने कश लेकर सिगरेट कमरे के खाली कोने मेँ उछाल दी ।

"एक बात का जवाब तो दो होशाग । " मोना चौधरी उठकर टहलने लगी I

होशाग ने प्रश्न भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखा ।

" तुम क्या समझते हो-तुम्हारे इनकार कर देने से मै हिदुस्तान चली जाऊगी ?”

"मैं कुछ भी नहीं समझता I तुम जो चाहो सोच सकती हो ।" होशाग ने लापरवाही से कहा I

"मैं जो काम करने आई हूं वह हर हाल मेँ पूरा करके ही जाऊगी I

"तुम...." होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"मरने आई हो और मेरे ख्याल में मरकर ही जाओगी। "

"यह भी मेरे काम का ही हिस्सा है I काम पूरा करो या मरो । " मोना चौधरी ने सिर हिलाकर गभीर स्वर मेँ कहा I

होशाग ने सिगरेट सुलगाई और कुर्सी पर बैठकर सुलझे स्वर में बोला---- "मिस मोना चौधरी । मै जो क्रह रहा हू उस पर जरा गोर

करना I इस काम की खातिर दो एजेट पहले भी मर चुके हैं, इस बात से तुम बखूबी वाकिफ हो I और सब कुछ जानते हुए भी तुम फिर मरने को आ गई' I आठ-दस-बारह हजार की तनख्वाह के पीछे अपनी जान गवाना बेवकूफाना हरकत है। समझदारी से काम लो । इस काम से किनारा कर लो I मैँ मिस्टर पहाडिया क्रो मैसेज भेज देता हू कि चियाग और चीन में सौदा पट गया है I और वह फिल्म चीन के पास पहुच गई है , ऐसा करने से सब कुछ ठीक हो जाएगा I "

मोना चौधरी ठिठकी I

उसने होशाग को देखा ।

"देश से गद्दारी करने का तुम मुझे अच्छा सबक पढ़ा रहे हो I ”

"भूल है तुम्हारी I मै' तुम्हारी जान बचाने की चेष्टा कर रहा हू कि तुम । "

"मेरी जान की फिक्र करना तुम छोड़ दो । " मोना चौधरी का स्वर सख्त हो गया।

. . . होशाग ने होठ भीच लिए …

"मिस्टर पहाडिया से तुम्हें हर महीने मोटी रकम मिलती है होशाग I"

"तो...?'

" और वह रकम तुम्हें सिर्फ इसलिए दी जाती है तुम वक्त आने पर पूरी तरह हमारी मदद करो I"

"मैरी की हुई मदद के कारण ही तुमसे पहले आए दोनों एजेट अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।"

"तुम सिर्फ अपने हिस्से का काम करो I कौन मरता है और कौन. जिदा रहता है इससे तुम्हें कोई मतलब नही होना चाहिए । " मोना चौधरी ने गभीर, किंतु सख्त स्वर में कहा ।

"तुम्हारा मतलब कि तुम लोग आते रहो मरते रहो और मैं पत्थर के वुत्त की तरह सब कुछ देखता रहू I "

"हा I यही मतलब है मेरा । "

होशाग ने कश लेकर नकारात्मक मुद्रा में सिर हिलाया I
 
"साॅरी । मिस मोना चौधरी l” होशाग ने सख्त, किंतु निर्णायक स्वर में कहा-"मिस्टर पहाडिया से मैँ मोटी रकम अवश्य लेता हू परंतु हर काम करने का ठेका नहीं लिया I इस सिलसिले में मैं दो एजेटो की हेल्प कर,चुका हूं I दोनों मारे गए। अब तीसरी की हैल्प करना, मेरी जान जाने का कारण बन सकता है I चियाग' सोच सकता हे कि आनन-फानन हिंदुस्तानी एजेट कैसे उस तक बिना किसी रुकावट के पहुच रहे है I चियाग की जरा सी भी छानबीन उसे आसानी से मुझ तक पहुचा सकती है और मेरी जान ली जा सकती है I तुम नहीँ जानतीं कि चियाग के हाथ कितने लंवे हैं । मौत का दूसरा नाम है वह I “

"तुम अब खामखाह की बात छेड रहे हो I "

" खामखाह की नहीं I इस समय मै सबसे अहम बात कर रहा हू।" होशाग ने सपाट स्वर में कहा…"किसी भी कीमत पर न तो तुम्हारा साथ दूगा और न ही किसी प्रकार की सहायता करूंगा । यह मेरा आखिरी फैसला है I "

" कोई दिक्कत नहीं I " मोना चौधरी मुस्कराई-"मुझे तुम्हारा फैसला मजूर है । "

होशाग मोना चौधरी को देखता रहा ।

"काम कैसे करना है और कैसे किया जाता है, मुझे मालूम है मिस्टर होंशाग' I "

होशाग बेचैन निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा I

" एक बात का जबाब दो, फिर में चलू' I "

"क्या ?"

"तुम्हारा चियांग से कोई वास्ता तो. नहीं ?"

"क्या मतलब ?" होशाग चौका' I .

~ "हिदुस्तान में जब मुझे तुम्हारे बारे में जानकारी दी गई तो मुझे लगा चियांग से तुम्हारा वास्ता हो सकता है I तुम उसके लिए भी काम करते हो सकते हो I " मोना चौधरी ने उसकी आखों में झाका।।।

,होशाग क्रूर निगाहों से मोना चौधरी को घूरने लगा II

"तुम्हारी इस सोच की खास वजह ?" होशाग ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।

"मालूम नही ।"

"शायद इसलिए कि मैं चीनी हू ? "

'हो सकता है I"

"मिस मोना चौधरी I" होशाग का स्वर क्रूर हो उठा---" तुम्हारे हिंदुस्तान में ऐसे कितने लोग और कितने एजेट होगे' जो पाकिस्तान चीन अमेरिका तथा और भी कईं देशों के लिए काम करते होगे' ? यानी कि डबल एजेट बने हुए हैँ और सिर्फ दौलत के लिए काम करते हैँ I

"तो ?"

"क्या मैं दौलत के लिए अपने देश के खिलाफ चलकर पहाडिया का साथ नहीं दे सकता ?"

" अवश्य दे सकते हो I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा-"'ओर दौलत के लिए चियाग का साथ भी तो दे सकते हो !! हो सकता है पहले दोनों एजेटो के बारे में तुमने ही चियाग को सतर्क किया हो I और अब मेरे बारे में भी कर दो । मैने

गल्त तौ नहीँ कहा मिस्टर हौशाग? "

" सरासर गल्त कहा है I " डोशाग ने सर्द लहजे में कहा ।।

"अच्छी बात हे, गलत ही सही I " मोना चौधरी की आखो में खतरनाक भाव चमके--"और अगर यह गलत किसी तरह से सही हुआ I ” मोना चौधरी ने होशाग' के सिर पर हाथ फेरा मौत-भरे अदाज' में…"तो बहुत बुरी मौत दूगी तुम्हें मैं ! नाम याद रखना, मोना चौधरी कहते हैं मुझे । "

होशाग उठ खडा हुआ I

"यह बात अगर किसी और ने मुझे कही होती । " होंशाग के चेहरे पर दरिंदगी नाच उठी थी…"तो अब तक 'उसकी लाश पडी होती I तुम्हें सिर्फ पहाडिया के कारण छोड रहा हूं I "

"जो मैने' कहा हे तुम सिर्फ उसे याद रखो I " मोना चौधरी ने उसी अदाज में कहा I

"अपनी कहीँ और दूसरों को सुनी बात मैं कभी नहीं भूलता I "

"मुझे एक रिवॉल्वर दे दो ।"

"क्यो ?"

"मेरे पास रिवाॅल्बर नहीं है । "

. "सारी I " होशाग ने सिर हिलाया-"मेरे पास एक ही रिवाल्वर है और वह मैं नहीं दे सकता I मेरा काम धधा ही ऐसा है कि रिवाॅल्बर के दम पर मुझे कभी भी मौत से लडना पढ़ सकता हैं I "

"मुझें रिवाल्वर चाहिए ।"

" जब तुम I " होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"सब काम करने का हौसला रखती हो तो रिवाॅल्बर का भी आसानी से इतजाम कर सकती हो' I यह तो बहुत मामूली बात होगी

तुम्हारे लिए I"

"तुम्हारी जेब में मौजूद रिवॉल्बर को मैं आसानी से हासिल कर सकती हूं ।" मोना चौधरी ने दात भीचकर कहा… लेकिन तुम पर हाथ डालना अभी मैं ठीक नहीं समझती मिस्टर होशांग I"

"तो कब हाथ डालना ठीक समझोगी ?"

"जब मुझे तुम्हारी गद्दारी का विश्वास हो जाएगा I "

जवाब में होशाग सिर्फ हसा I बोला कुछ नहीं I

"गुड बाय मिस्टर होशाग I' कहकर मोना चौधरी पलटी ।

"ठहरो I " होशाग उठ खडा हुआ-…'"मैं तुम्हें इस वस्ती के बाहर तक...,!"

" शुक्रिया I जव आ सकती हूं तो जा भी सकती हूं !"

" 'मालूम है मुझे यह बात भी । लेकिन साथ ही मैं भी हू कि तुम सही सलामत यहा कैसे पहुच गई । यह ऐसे बदमाशों से भरी बस्ती है जहा बाहरी खूबसूरत लडकियों को तो सलामत छोडा ही नहीं जाता I बहुत पुराना दस्तूर है यह और देखने वालों के लिए मामूली हे I मैं तुम्हारे साथ तो नहीं रहूगा फासले पर तुम्हारे पीछे रहूंगा । । मैं नहीं चाहता कि कोई तुम्हें मेरे साथ देखे । "

मोना चौधरी ने कुछ कहने के लिए मुह खोला, फिर होठ~ बद कर लिए और पलटकर बाहर निकल गई I कुछ पलो के उपरात होशाग भी घर से बाहर आ गया I

मोना चौधरी के कानों में सीटियों की आबाजें और रिमार्क कसने की आबाजें पडी I वह उस बस्ती के बीच की सडक पर जा रही थी । गहरा अंधेरा था चारों तरफ । इक्का दुक्का लोग ही आ जा रहे थे, जोकि आखे फाड़-फाढ़कर उसे देख रहे थे ।

रात के ग्यारह बज रहे थे । किसी गली या मोड़ के करीब से गुजरती तो मद्दी पुकारें कानों में अवश्य पड़तीं I मोना चौधरी ने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा था कि होशांग आ रहा है या नहीं I वह सिर्फ चियांग के विचारों में उलझी हुई थी कि कैसे उस तक पहुचकर उससे हिंदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है I

एकाएक मोना चौधरी ठिठकी । ~

आगे जाने का रास्ता ही नहीं था I होता' भी केसे I सामने लंबा-चौड़ा तीस वर्षीय क्रोरियन युवक आ खडा हुआ था I मोना चौधरी ने पहली बार इतना सेहतमद कोरियन देखा था I

जिस जगह पर उसे रुकना पडा था वहां अधेरा था I स्ट्रीट लाइट टूटी पडी थी । मोना चौधरी को इस बात का भी ध्यान आ गया था कि जब उसने बस्ती में प्रवेश किया था तो यह कोरियन युवकं उसे कुछ खास ही धूर रहा था I अब वह मोना चौधरी के ठीक सामने खडा भद्दे अंदाज में उसे घूर रहा था ।

" रास्ता छोडो I" मोना चौधरी ने अग्रेजी लहजे मे कहा I वह अघेरे मे मोना चौधरी की छातियो मे झाकने की चेष्टा कर रहा था ।

मोना चौधरी ने उसकी बगल में से गुजरकर निकल जाना चाहा।

उसने हाथ बढाकर रास्ता रोक लिया ।

"इत्तनी जल्दी भी क्या है जाने की ?"

"क्या मतलब ?"

"मेरे घर चलो I दो दो पैग मारेगे' और करेगे' I " वह हसा ।

" क्या ?" मोना चौधरी ने आखें सिकोडी।

" चलो तो सही I तुम इतनी खूबसूरत हो I कुछ तो करेगे ही ..!"

"शटअप I रास्ता छोडो। मुझे कुछ भी नहीं करना । " मोना चौधरी सख्त स्वर में बोली।

"में बात करने को कह रहा हू। मेरे पास बोदका रखी है I रूस का अमृत I "
 
"तुम्हारी मा नहीं है ? ” मोना चौधरी के दात भिच गए थे ।

" नही ?"

"बहन तो होगी?"

'"वह्र भी नही है ।"

"पडोसन ?

" वह तो है !"

"तो उसे रूस का अमृत पिलाओ I मैँ..... I "

"पडोसन को तो मैँ हर तरह का अमृत पिला चुका हूं। "

वह हसा और उसने मोना चौधरी की बाह पकढ़ ली ।

मोना चौधरी ने बाह छुड़ानी चाही I

परंतु कामकाब नहीँ हो सकी ।

."मेरे साथ चल ।"

"छोढ़ता है कि नहीं ?"

" पकडकर छोडना मर्दो का काम नहीं हे I ” कोरियन युवक कहर भरे स्वर में बोला I

अगले ही पल मोना चौधरी की टाग चली ।

घुटना उसकी टागो के बीच लगा I वह दोनों हाथ टागों के बीच रखते चीख पडा I मोना चौघरी ने उसके बाल पकडकर सिर ऊपर किया और......गुर्राई ।

"तुम जैसों को सीधा करना मुझे आता है । कहने के साथ ही मोना चौधरी¸ ने जोरदार. घुसा उसके गाल पर मारा । वह तुरत नीचे लुढक गया I उसकी टागो के बीच. बेपनाह दर्द हो रहा था । नीचे गिर पडे कोरियन को मोना चौधरी ने तबीयत से ठोकर मारी । वह फौरन दो करवटें ले गया l होठो से जो चीख निकली सो अलग l इसके बाद मोना चौधरी ने आगे बढ़ने के लिए एक ही कदम उठाया था कि ठीक उसी समय. अघेरे से निकलकर पाच आदमियों ने उसे घेर लिया ।

सब के सब खतरनाक थे l तीन चीनी और दो कोरियन l खा जाने वाली निगाहों से बे मोना चौधरी को देख रहे थे l उनके हावभाव देखकर. मोना चौधरी फौरन सतर्क हो गई l

उसके देखते ही देखते दोनों कोरियनों ने जेब से चाकू निकाले और खोल लिए । अघेरे में भी चाकू के फ़ल चमक रहे थे ।

" तुमने… l " तभी एक चीनी ने कहा---"हमारे साथी के साथ दुरव्यवहार किया हे !"

मोना चौधरी ने नीचे पडे कोरियन को देखा l धीरे धीरे उसकी हालत सुधर रही थी l

" यह....!" मोना चौधरी ने चीनी को देखा…"मेरे साथ भी बुरा व्यवहार करने की चेष्टा में था l "

" उसे बुरा व्यवहार नहीं कहते। " चीनी कटुता से बोला-" खूबसूरत मेहमानों का हम इसी प्रकार स्वागत करते है !"

"तो इस प्रकार स्वागत करने वालों का यहीं हाल होता है !" मोना चौधरी कड़वे स्वर में कह उठी।

चीनी के होठो सै गुर्राहट निकली।

"तो फिर हम भी उसे नहीं जाने देते स्वागत समाप्त होने पर ही हम उसे विदा करते है' I " चीनी ने दात किटकिटाए l

दोनो कोरियन चाकू सहित इस तरह फैल गए कि वह भागने की चेष्टा करे तो भाग ना सके ।

मोना चौधरी ने उन दोनों की पोजीशन को अच्छी तरह दिमाग में बिठाया I

तीनों चीनी खतरनाक निगाहों से मोना चौधरी को देख रहे थे ।

मोना चौधरी ने खतरे को पहचाना । "तुम I " चीनी नेता नीचे पडे कोरियन को देखा-"ठीक हो ?" '

"हा I " नीचे पडे व्यक्ति ने गहरी सास लेकर सिर हिलाया-"ठीक हो रहा l"

चीनी नेता ने खतरनाक निगाहों से मोना चौधरी को देखा I

"चुपचाप हमारे साथ चलो । " चीनी ने वहशी स्वर में कहा।

" क्यों ?"

"मालूम है तुम्हें क्यों ? पास में जगह है और तुम खूबसूरत हो।"

"मैं नहीं जाना चाहती !" मोना चौधरी ने सपाट स्वर में कहा I

"नहीं चलोगी ?"

"कोशिश करके देख लो I "

चीनी ने अपने चारों सथियों को देखा I फिर मोना चौधरी को ।

"हम झगडा नहीं चाहते I " चीनी ने कहा…"बोल तेरा भाव क्या हे?"

मोना चौधरी ने मौत भरी निगाहों से उस चीनी को देखा I

"मेरा कोई भाव नहीं I मैं धधा नहीं करती जैसाकि तुम सोच रहे हो I "

"धधा नही करती तो जबरदस्ती ही सहीं I तुम्हें छोडने वाले तो हम नहीं I लगे हाथ दो पैसे कमाने हैं तो कमा लो I नहीँ तो जो काम होना है वह तो होना ही है I "

"नहीं होगा ऐसा कुछ जैसा कि तुम सोच रहे हो I " मोना चौधरी गुर्राई ।

चीनी की आखों में खतरनाक चमक उभरी I

. "पकढ़ लो इसे।" चीनी के कहने की देर थी कि एक तरफ से दोनो चीनी और दूसरी तरफ़ से चाकू थामे वे दोनों कोरियन आगे बढे । चीनी

नेता तीन कदम पीछे हट गया । नीचे पडे कोरियन की हालत भी सभल गई थी I वह अब खडे होने की तैयारी में था ।

मोना चौधरी सतर्क हो उठी I रिवाल्वर की कमी उसे बुरी तरह खलने लगी I वे दोनों कोरियन चाकू लिए तेजी से मोना चौधरी की तरफ

बढे I उनका इरादा मोना चौधरी को फौरन घेरे में ले लेने का था । मोना चौधरी के होठो से हल्की सी गुर्राहट निकली । वह उछली और उसकी टागे एक कोरियन की छाती पर पडी ।

वह उछलकर छ: सात आठ फुट दूर गिरता चला गया ।

दुसरे कोरियन के चेहरे पर मोना चौधरी ने दोनों हाथ बाधकर लगाए I उसके होठो से चीख निकली । वह नीचे गिरा I मोना चौधरी भी नीचे गिरी I उठने को हुई कि तभी दोनों चीनी उसके सिर पर आकर सवार हो गए I

दोनों ने मोना चौधरी की एक एक बाह पकडी और तीव्र झटके के साथ उसे उठाया I मोना चौधरी फौरन खडी ही गई । एक पल भी बिना गवाए मोना चौधरी उछली-उसकी दोनों टागे फैल गई और चीनी के पेट की तरफ बढी I दौनों चीनियों

ने उसकी बाहों को थाम रखा था I

एक ठोकर तो चीनी के पेट में लगी I परंतु दूसरा सतर्क था I मोनी चौधरी की पिंडली उसके हाथ में पड गई I दूसरा चीनी तो बाह छोढ़कर नीचे जा गिरा था । जब दूसरे ने मोना चौधरी की टाग पकडी तो खाली हुए हाथ को घूसे की शक्ल में उसने चीनी के मुह पर मारा I चीनी के होठो से चीख निकली I गाल फ़टा I होठो के कोने से खून की धारा निकली । परतु उसने मोना चौधरी कीं पिंडली नहीं छोडी I मोना चौधरी दात किटक्रिटा उठी I

चीनी नेता आगे आया I उसके चेहरे पर वेहद सख्ती के भाव थे ।

ज्यों ही वह पास पहुचा मोना चौधरी ने दोनों बाहें उसके गले में डालीं और... जिसने उसकी टाग पकडी हुई थी चीनी नेता के गले में झूलकर दूसरी टाग उसकी छाती पर मारी I मोना चौधरी की पिंडली छोडकर वह नीचे लुढ़कता चला गया I

मोना चौधरी फौरन टागों पर खडी हुईं और चीनी नेता को कुछ भी समझने का मौका दिए बिना सिर की टक्कर उसकी छाती पर मारी I

चीनी नेता के पाव उखड गए I वह पीठ के बल नीचे गिरा I

मोना चौधरी पलटी और भागी I

लेकिन नीचे पड़ा पहले वाला कोरियन तब ठीक हो चुका था I इससे पहले कि मोना चौधरी भाग पाती नीचे पडे कोरियन ने उसकी टागों में अपैनी टाग अडा दी I

मोना चौधरी धड़ाम से नीचे गिरी I

इससे पहने कि वह सभल पाती नीचे पडे कोरियन ने उस पर छलाग लगा दी और मोना चौधरी के ऊपर जा गिरा I मोना चौधरी के होठों से कराह निकली I

उसने खुद को आजाद करना चाहा परंतु उस कोरियन ने उसे पूरी तरह पकड रखा था और फिर उसने मोना चौधरी के बाल मुटठी मे जकड लिए ।

मोना चौधरी ने दात भीचे ।

"अब बोल हरामजादी I तूने तो मेरी टागों में घुटना I मारकर मेरी जान ही निकाल दी थ नोई I " वस गुर्राकर खतरनाक लहजे में बोला---" तू क्या समझती थी मैं अकेला हू बेबी,,

हम इकट्ठे हैं और मिल बाटकर खाते है । मैने तो सोचा था कि मैं अकेला ही तुम पर काबू पा लूगा इसलिए बाकी के हिस्सेदार साइड में खडे थे लेकिन तू तो तूफान निकली तोप निकली । "

मोना चौधरी ने खुद को आजाद करना चाहा । परंतु कोरियन ने उसे हर तरफ से जकढ़ रखा था ।

" क्या इरादा है ? कोरियन गुर्राया I

अन्य दोनों चीनी और दोनों कोरियन खडे हो चुके थे I अब वे सब खतरनाक मूड में थे और किसी औरत से पिट जाने के हक मे तो किसी भी हाल मेँ नहीं थे।

मोना चौधरी ने हालात का जायजा लिया I वह वास्तव में घिरी हुई थी। बचने के वहुत कम चासेज थे ।

" तुम जो चाहते हो वहीँ होगा I छोडो I " मोना चौधरी कसमसाई I

"साली सीधी खडी होकर सुर मत… बदल देना । " कोरियन गुर्राया I

"मैँ तुम लोगों के सामने कुछ करने के काबिल नहीं हू I "

मोना चौधरी ने हताश स्वर में कहा ।

"सुना तुमने ? " कोरियन ने चीनी नेता से कहा ।

"सुना I छोड दे बिल्ली को I " चीनी नेता ने सख्त स्वर में कहा ।

"यह उछली तो ?"

"भरेगी I" चीनी ने खतरनाक स्वर में कहा…" 'छोड दे इसे I "

कोरियन ने तीव्र झटका देकर मोना चौधरी के सिर के बाल छोडे I

"सुना तूने ?"

"सुना I " मोना चौधरी ने थके थके से स्वर में ही कहा I

"मैं तुझे बधनो से आजाद कर रहा हू बेबी उछल कूद मत करना I वर्ना मरेगी I "

मोना चौधरी ने कुछ नहीं कहा ।

… कोरियन उसे आजाद, करके उठ गया I

मोना चौधरी ने गहरी सास ली और खडी हुई इस समय वह तीन चीनी और तीन कोरियन व्यक्तियों में घिरी हुई थी । बच पाना उसे आसान नहीं लग रहा था और वे क्या चाहते थे उसे मालूम था और उन बदमाशों का साथ देने को वह किसी भी कीमत पर तैयार नहीं थी । मोना चौधरी ने एक एक करके छः के छः को देखा ।

सब के सब दरिदे लग रहे थे।
 
" हेलो बेबी I" चीनी नेता आगे बढा…"अगर तुम्हारा . दिमाग ठीक हो गया हो तो चलें हैं ?"

"कहा ?" मोना चौधरी शात थी I

"पास ही में हमारा कमरा है I पसद आएगा तुम्हें । वेड के पिल्लो लाजवाब हैं । "

" पिल्लो बढिया हों तो मुझे और भी मजा आता हे I " मोना चौधरी एकाएक मुस्कराई I

" चिता मत करो I हम साथ हों तो पिल्लो से बहुत मजा आता हे चलो।"

मोना चौधरी ने सहमति में सिर हिलाया ।

"चलो I”

अगले ही पल मोना चौधरी ने कोरियन की छाती पर दोनों हाथ रखकर उसे पूरी शक्ति से घक्का दिया और उसका अजाम देख पलटकर भाग खडी हुई I

पल भर के लिए वहा मौत का सन्नाटा छा गया । मात्र कोरियन के गिरने लुढकने की आवाज ही रात के सन्नाटे में गूजी ।

या फिर मोना चौधरी के दौडने की आबाज I

"साली भागती हे I ” चीनी ने खतरनाक आवाज में कहा…"पकडो I ”

अगले ही पल दोनों चीनी और दोनों कोरियन उसके पीछे दौडे । . . नीचे गिरने वाला कोरियन भी उठ खडा हुआ था ।

"बहुत तेज है यह हराभजादी तो I " कोरियन गुर्राया ।

"आओ I ' चीनी ने दात भीचकर कहा I

वे दोनों भी उसी दिशा में भागे जिस तरफ मोना चौधरी भागी थी ।

अगले पाच मिनटों में मोना चौधरी फिर उनके घिराव में थी । … और पुन घेरे में आने का ऐकमात्र यहीँ कारण था कि मोना चौधरी उस इलाके के भीतरी रास्तो से वाकिफ नहीं थी और

उन लोगों ने जाने किन किन रास्तों से निकलकर उसे घेर लिया था ।

अब वह खत्तरनाक निगाहो' से मोना चौधरी को घूर रहे थे और मोना चौधरी भी इस बात को महसूस कर चुकी थी कि....

....मामला अब पहले जैसा सरल नहीं रहा । उन सबकी आखों में खूनी भेडिए जैसे भाव थे I एव पहले वाला कोरियन तो उसे फाड़कर खा जाने वाली निगाहों से धूर रहा था I ~

जबकि चीनी नेता के होठ कठोरता भरे अदाज में भिचे हुए थे ।

मोना चौधरी को पुन रिवाॅल्बर की कमी का एहसास हुआ I अगर रिबाल्बर पास में होती तो इस मामले को कब का खत्म कर चुकी होती । उसके पास ज्यादा वक्त नहीं था I चियांग कभी भी हिंदुस्तान की सीक्रेट फिल्म का सौदा चीन से कर सकता था I होशाग ने स्पष्ट तौर पर उसका साथ देने से इनकार कर दिया था । यानी कि अब जो भी करना था,, उसे करना था । और फौरन ही करना था और यह चीनी कोरियनन बदमाश । खामखाह ही उसके काम में रुकावट पेदा कर रहे थे । मात्र उसका शरीर हासिल काने के लिए I

. . "क्यों साली I" कोरियन गुर्राया-"हमारे हाथों से निक्लकर भागती हे ?"

मोना चौधरी ने सख्त निगाहों से उसे देखा । ~ कोरियन आगे बढा I घुसा मोना चौधरी के चेहरे पर मारना चाहा I परंतु मोना चौधरी ने उसकी कलाई पकड़ी और घुसा उसके गाल पर दे मारा I वह हल्की सी कराह के साथ दो तीन कदम पीछे गया I अगले ही पल चीनी नेता ने रिवाॅल्बर निकालकर मोना चौधरी की तरफ कर दी I

"अगर अब तुमने कोई गलत हरकत की तो मैं तुम्हें शूट कर दूगा I ” चीनी ने खतरनाक स्वर में कहा I

मोना चौधरी ने उसे कहर भरी निगाहो से देखा ।

"तुम लोग मुझ पर हाथ उठाओगे तो ऐसा ही होगा । "

"तुमने ही हमेँ मज़बूर किया है ऐसा करने को । " उसने गुर्राकर कहा-"अगर तुम आराम से तैयार हो जाती तो यह सब न होता I हम तुझे खा जाने के लिए तो नहीं ले जा… रहे थे। फिर तू भागी क्यों ?"

मोना चौधरी ने जल्दी से कहा I

" भागती नहीं तो और क्या करती I तुम लोग छ हो और मै एक । हर बात की हद होती है I "

चीनी नेता ने सिर हिंलाकर कोरियन को देखा I

"कह तो यह ठीक रही है ।"

जवाब में कोरियन सिर्फ गुर्राका रह गया । .. .

. "ठीक हे चलो ।"

"क्या ठीक है ?”

"तुम तीन को निबटाओगी I "

" तीन ज्यादा हैँ।"

" ज्यादा है I आजकल तो चार…चार को निबटा..... I "

" उनका यह सब करना धंधा होगा I मैं वैसी नहीँ हू I " . . मोना चौधरी बोली I …

" तो ? "

"दो से ज्यादा बिल्कुल नहीं I हा है तो ठीक नहीं तो मैं तैयार नहीं हूं I "

क्षण भर की चुप्पी के बाद चीनी ने सिंर हिलाया ।

" ठीक है आओ I"

" यह तुम क्या कह रहे हो I" कोरियन गुर्राया ।

" मैं भी ठीक कह रहा हू और यह लडकी भी ठीक कह रही है! चीनी ने शात लहजे में कहा-- " काम वही अच्छा जो खामोशी और शाति से निबट जाए I "

कोरियन के चेहरे पर असहमति के भाव छाए रहे I

"अब तुम चल रही हो या नहीँ ? " चीनी ने कठोर निगाहो से मोना चौधरी को देखा ।

" चलो ।" मोना चौधरी मुस्कराई I

चीनी ने हाथ में थाम रखी रिवाॅल्बर जेब में डाल ली I उन सबने मोना चौधरी को घेरे मे लिया और आगे बढने लगे ।

मोना चौधरी खुद को कुछ हद तक बेबस महसूस कर रही थी । वक्त कम था I वह चियाग की तरफ ध्यान देना चाहती थी, परंतु वे लोग उसे सूखा सूखा छोडने को तेयार नहीं थे ।

एवबारगी इनका मुकाबला करके भागने कां भी प्रयत्न कर लेती परंतु चीनी के पास रिबाल्बर थी I वह उसे शूट कर सकता था ।

मोना चौधरी उनके इशारे पर उनके घेरे में आगे बढती रही I

वे लोग उसे लेकर. एक गदी सी गली में पहुचे और फिर ऊपरी कमरे में पहुचने के लिए वे सीढिया चढने लगे I गली से ही ऊपर बने कमरे की तरफ सीढिया जा रही थीं I

सीढियां समाप्त होते ही मोना चौधरी ठिठकी I

चीनी उसके बराबर में था । पहला कोरियन उसके पीछे।

बाकी के चार अभी भी सीढियों पर ही थे I

चीनी ने दरवाजा खोला भीतर लाइट आन की I

“ चलो I"

"चलो क्या होता है l पीछे बारात्त नज़र नहीं आ रही ?"

मोना चौधरी उखड़े स्वर में बोली I

"क्या मतलब? "

"इन्हें चलता करो I मेरे साथ सिर्फ दो ही भीतर जाऐगे बाकी नहीं I "

चीनी नेता ने क्षणभर के लिए सोचा फिर सिर हिलाकर पहले कोरियन से कहा I

"तुम मेरे साथ अदर चलो I वाकी चारों थोडी देर टहल लेगे I "

कोरियन ने सिर हिलाया I

"हमें सूखा ही छोड. दोगे ? " सीढियों पर खडे चारों मेँ से एक ने कहा ।

"चुप रहो I इससे निबटकर किसी और को दूढ लेगे।" कोरियन कह उठा।

"लेकिन हमें यह कुछ खास लग रही है । इसके साथ ही ठीक रहेगा !"

"नहीं इसके साथ हम दो ही रहेगे I जो बात तय हैं वह तय है । कोई गडबड़ नहीं। "

चीनी नेता और पहले बाला कोरियन मोना चौधरी को लेकर भीतर पहुचे और दरवाजा भीतर से बद कर लिया । कमरे, मे बेड था I एक तरफ चार कुर्सिया और टेबल पडी थी I

"कपंडे उतारो I " कोरियन बोला I

मोना चौधरी कमीज के बटन खोलने लगी ।

चीनी नेता और कोरियन की निगाहे मिलीं ।मोना चौधरी ने कमीज उतारकर वेड पर उछाल दी I

आकर्षक ब्रा में उसकी जानलेवा छातियां नजर आने लगीं I और कोरियन की आखो में तीव्र चमक लहरा उठी ।

"लगती तो जानदार है I " कोरियन के होठो से निकला I

चीनी ने आगे बढकर मोना चौधरी को बाहों के घेरे में ले लिया । चीनी के लिए दिक्कत तो यह रही कि उसका कद छोटा था और मोना चौधरी का लबा I

और अगले ही पल मौत से भरी बिजली चमकी ।

रिवाॅल्बर चीनी की जेब से निकलकर सोना चौधरी के हाथ में आ गई I मोना चौधरी ने नीचे झुके चीनी की गर्दन से रिवाॅल्बर की नाल टिकाईं और ट्रेगर दबा दिया I

फायर का कानों को फाड़ देने वाला तेज स्वर गूजा I चीनी छिटककर दूर जा गिरा I उसकी गरदन के चीथड़े चीथड़े उड़ गए थे I

खून के छोटे दूर दूर तक जा बिखरे थे । कोरियन जोकि ऊपरी हिस्से से चिपका हुआ था वह हक्का वक्का रह गया I

मोना चौधरी ने दात किटकिटाकर रिवाल्वर का रुख उसकी तरफ़ किया और ट्रेगर दबा दिया I दूसरे धमाके के साथ गोली उसके पेट मे चली गई I मोना चौधरी के चेहरे पर क्रुरता के भाव फैले हुए थे । उसने रिवाॅल्बर को दातो मे दबाया , और कमीज पहनकर . रिवॉल्वर हाथ मे ली और दरवाजा खोला I … बाहर उनके चारों साथियों मे से कोई भी नहीं था ।

या तो वे फायर की आवाज के साथ ही खिसक गए थे या फिर अपने लिए किसी मुर्गी की तलाश में पहले ही जा चुके थे I, बहरहाल बाहर कोई नहीं था I अलबत्ता रात के इस अंधेरे में आस पडोस वाले खिड़कियां खोलकर बाहर झाकना शुरू हो गए थे कि कौन मरा ? किसने मारा ? अब रुक्ले का तो सवाल ही नहीं था I हाथ में रिवाॅल्बर पकडे मोना चौधरी सीढिया उतरी और तेजी से आगे बढती चली गई । कोई नहीं था I कोई था भी तो उसने रास्ता रोकने की चेष्टा नैहीँ की । उस बस्ती से बाहर आने पर ही मोना चौधरी ने रिवाॅल्बर जेब में डाला I कुछ आगे जाकर स्टैड से उसने टैक्सी ली होटल जाने के लिए I . . .

~ होटल रूम में पहुचते ही सबसे पहले मोना चौधरी कपडे उतारकर बाथरूम मे प्रवेश कर गई I नहा धोकर उसने खुद को हल्का महसूस किया .I उसके मस्तिष्क में सिर्फ चियाग धूम रहा था कि चियाग से हिंदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हथियानी है I होशाग उसका साथ देने में पीछे हट चुका था I अब मोना चौधरी का मस्तिष्क मिस्टर पहाडिया की कही उन बातों पर जा रहा था जो उसके लिए मार्गदर्शक बन सकती थीं I

बाथरत्म से बाहर आकर उसने कपडे पहने I चीनी से छीनी रिवाॅल्बर जेब में डाली I उसके बाद कमरे में निगाह मारी I सब कुछ वैसा ही था जैसा वह छोडकर गई थी I उसका इरादा आराम करने का तो जरा भी नहीं था I वह चियाग तक पहुचने के लिए रास्ता साफ करना चाहती थी । तभी डोरबेल बजी । मोना चौधरी की आखें सिकुड गई I इस समय कौन हो सकता है ?

"कौन? " दरवाजे के करीब पहुचकर मोना चौधरी ने पूछा I

"पुलिस । " अग्रेजी में कहा गया…"फौरन इसी समय दरवाजा खोलो देर नहीँ होनी चाहिए । "
 
मोना चौधरी के दात मिच गए I पुलिस का बात करने का अदाज बता रहा था कि उनकी नीयत कुछ ठीक नहीं हैं I क्षणिक सोच के पश्चात मोना चौधरी ने सिटकनी हटा दी ।

दरबाजा खुला ।

मोना चौधरी ने सामने दो पुलिसमैन और उस ड्राइवर को खडे पाया जो अपनी टैक्सी में उसे होटल तक छोड गया था I साथ में होटल का असिस्टेंट मैनेजर था और साथ में थे उस चीनी नेता के दो साथी I मोना चौधरी चद पलो के लिए वैसी की वैसी ही खड्री रह गई I कुछ समझ नहीं पाई कि क्या करे ।

"यही है यही है वह I" चीनी नेता का साथी क्रोध भरे स्वर में कह उठा I

मोना चौधरी अपने चेहरे पर अजीब से भाव ले आई ।

" यस I " मोना चौधरी ने पुलिसमैन को देखा… " क्या बात है ?"

"सर !" चीनी नेता का साथी बोला…" यही है वह, जिसने उन दोनों को शूट किया है I "

मोना चौधरी चेहरे पर असमजस के भाव ले आई I उसने असिस्टेंट' मैनेजर को देखा I

"यह सब क्या हो रहा है ? "

असिस्टेट मेनेजर जल्दी से बोला I

"यह...!" उसने चीनी नेता के साथी की तरफ इशारा किया…"साहब कहते हैँ कि आप दो को शूट करके आई हैं I. इन्होने आपका पीछा किया और मालूम किया कि आप इस होटल में हैं I इन्होनै उस टेक्सी ड्राइवर को भी साथ ले लिया जिसने आपको होटल तक पहुचाया। उसके बाद पुलिस को खबर की । यह बाद की बात हे कि किसने क्या किया है और क्या नहीं I बेहतर होगा कि हम भीतर पहुचकर बात करे!"

मोना चौधरी ने सबके चेहरों पर एक एक निगाह मारी फिर पीछे हट गई I वे सब भीतर आ गए I

" तुमने कत्ल किया ?" पुलिसमैन ने पूछा ।

" प्लीज I" मोना चौधरी ने झल्लाए स्वर में कहा-"ऐसी बात मत्त करे जो ठीक न हीं I"

"यह मरनै वालों का साथी है और इसी ने रिपोर्ट की हे I ” पुलिसमैन कठोर स्वर में बोला-"झूठ बोलकर तुम बच नहीँ सकती' I कुछ देर पहले तुम उस बस्ती में थीं ?"

" थी । " मोना चौधरी ने सिर हिलाया-"उस बस्ती के पास से ही वह टैक्सी ड्राइवर मुझे यहा लाया था I "

"मतलब कि जब तुमने टैक्सी पकड़ी तो दो कत्ल कर चुकी थीं ?" दूसरा पुलिसमैन बोला ।

"आप लोग बार बार मुझे कातिल क्यों कह रहे हैं ? ” मोना चौधरी तीव्र स्वर में बोली…"क्रोई किसी के कातिल होने को कहकर रिपोर्ट करेगा तो आप उसे कातिल करार दे देगे?"'

"हो सकता है इसी ने क्या किया हो और... ।"

"म.... मेने' ?" वह हडबड़ाया। . .

तभी होटल का मैनेजर बोला I

"बेहत्तर होगा कि आप यह मामला फौरन निबटाए । हमारे ~ कस्टमर को परेशानी हो रही है । "

"आप बस्ती में किससे मिलने गई र्थी ?' पुलिसमैन ने पूछा I

"मैं नहीं बता सकती I"

" क्यो ?"

" यह मेरा पर्सनल मामला है । "

"मत्त भूलिए कि पुलिस वाले यह बात पूछ रहे हैं वह भी दो'दो मर्डर की इनंक्वायरी के एवज में I हमारी बातों का सही ज़वाब देना ही आपके हक में बेहतर होगा I " पुलिसमैन ने

कहा I

"मैँ वहा अपने दोस्त से मिलने गई थी और उसके बारे में मैँ नहीं बता सकती I " मोना चौधरी बोली I

दोनों पुलिसमैनों ने पुन: एक दूसरे को देखा I

.

"जोर देने की जरूरत नहीं I जरूरत पडी तो बाद मेँ बता देगी I " एक ने दूसरे पुलिसमैन से कहा---" फिर चीनी नेता के साथी से बोला…"तुम्हारे पास कोई मामूली सा भी साबुत है कि---उन दोनो' को इसने शूट किया है .? "

"सबूत ?" चीनी क्षण भर के लिए सकपकाया---" ये कम हे कि मैने यह बता दिया कि…उन दोनों को इसने शूट किंया हे ? सबूत तलाश करना तो आपका काम है । मेरा तो नही । कातिल आपके सामने मौजूद है I

दोनो पुलिसमैनो ने मोना चौधरी को देखा ।

"आपके पास रिवाॅल्बर हैं ?"

. . मोना चौधरी को.. जेब में मौजूद रिवाॅल्बर की चुभन' का एहसास हुआ I

"नही । भला मेरे रिवाल्वर का क्या काम ?" .

"ठीक है । हम आपकी तलाशी लेगे I इस कमरे' की तलाशी लेगे I अगर रिवाॅल्बर मिला, उसमे से गोली चली हुई तो मजबूरन आपको लाॅकअप में बद करना पडेगा, नहीं तो आप आजाद है I” पुलिसमैन ने कहा…"एक विदेशी नागरिक होने के कारण हम आपको सस्ते में छोड़ रहे हैँ I इसकी तलाशी लो I "

उसने दूसरे पुलिसमैन से कहा।

" खतरा I" मोना चौधरी के जिस्म में तनाव भर गया । उसकी जेब से रिवाॅल्बर बरामद होने की देर थी कि उसने बुरी तरह फस जाऩा था I उसकी तलाशी लेने के लिए पुलिसमैन आगे बढा ।

अब वक्त ही नहीँ कुछ सोचने के लिए।

इससे पहले कि पुलिसमैन उसके पास पहुचता और उसकी तलाशी लेता !

मोना चौधरी के हाथ में रिवाॅल्बर चमकी। पुलिसमैन ठिठका I उसकी आखे फैल गई' I इसके अलावा वह और कुछ न कर सका… .

मोना चौधरी ने किंसी को कुछ समझने का मौका ही नही दिया ।

चार गोलियां बची थी ।
 
मोना चौधरी ट्रेगर दबाती चली गई I साथ ही साथ रिवाॅल्बर का रूख भी मुडता चला गया ।

कानों को फाढ़ देने वाले चार धमाके गूंजे और कुछ सुनाईं देना बद हो गया ।

दोनों पुलिसमैन' और चीनी नेता के दोनों साथी नीचे मरे पडे थे I दो के सिर में एक की छाती में और एक के ठीक दिल पर गोली लगी थी ।

होटल का मैनेजर हक्का बक्का बिना सास लिए खडा था I मोना चौधरी. ने खाली हो चुकी रिवाॅल्बर पुलिसमैन की लाश पर पेल्की और उसके होल्लसटर में से 0.38 की पुलिस रिवाॅल्बर हाथ मे ले ली जो क्रि आम रिंवाल्वरों से भारी थी ।

मैनेजर ने घबराकर सूखे होठो पर जीभ फेरी I मोना चौधरी उसकी तरफ मुडी ।

"हेलो I" सोना चौधरी के चेहरे पर मस्ती` के भाव थे ।

"म मुझे मत मारना I ” मेनेजर के होठो से सूखा स्वर मिक्ला I

"नहीं मारती I मेरे पास आओ I " मैनेजर भय की` मूर्ति बना वही खडा रहा I हिला तक नहीं ।

"मेरे पास आओ I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा I

"मुझे I " वह हिला आगे बढा I खौफ़ में डूबा हुआ था…"मत मारना । "

मोना चौधरी उसे देखती रही । वह पास पहुचा ।

"पलटो I " मोना चौधरी ने कहा ।

"प्लीज I मुझें मत मारना । " वह जैसे गिड़गिडा उठा I

"जल्दी पलट । नहीं मारती I " मोना चौधरी ने दात भीचकर कहा I

वह पलटा I मोना चौधरी ने फुर्ती के साथ तगड़ा बार… उसको कनपटी पर किया ।

मेनेजर के होंठो से कराह निकली I

उसके घुटने मुड़ते चले गए । दूसरा वार करने' की ज़रूरत ही नहीं' पडी I वह बेहोश होकर नीचे जा गिरा I उसके हाथ-पाव फैल गए। टैक्सी ड्राइवर का भी यहीँ हाल किया I

मोना चौधरी को आखों में कहर बरस रहा था I उसने रिवॉल्वर जेव मे डाली I लंबी सास लेकर चेहरे को फ्रेश किया ।

अब वह पहले की ही तरह सामान्य लग रही थी । फिर वह दरवाजे की तरफ बढी ।

दरवाजा खोले , बाहर की तरफ़ कदम बढाया I

तभी _उसकी आखो के सामने होशाग का चेहरा नाचा ।

होशाग ने उसके कधे पर हाथ रखकर जोर से धक्का दिया ।

वह लडखडाकर तीन-चार कदम भीतर आ गई । होशाग जल्दी से भीतर आया । दरवाजा बद किया और चद गहरी गहरी सासे लेने के पश्चात मोना चौधरी को देखा. I

"तुम यहा कैसे ?" मोना चौधरी के होठो से निकला I

होशाग ने कमरे में बिछी लाशों पर निगाह मारी ।

बेहोश मैनेजर को भी देखा I फिर मोना चौधरी को ।

" तुम इस समय भारी खतरे में हो I बाहर चार हथियारबद पुलिसमैन मौजूद थे I जोकि फायर की आवाज सुनते ही भीतर आ गए I और अब यह जानने की चेष्टा कर रहे हैं कि उनके दोनों पुलिसमैन साथी किस कमरे में गए हैँ I उन्हें पूरा यकीन है कि फायर वहीँ से हुए हैं I मेरे ख्याल से ज्यादा समय नहीं है . वे इस बात को जान लेगे कि उनके पुलिसमैन साथी इस कमरे में आए हैं I "

मोना चौधरी की निगाहें होशाग पर टिकी थीं I

" लेकिन । " मोना चौधरी ने कुछ कहना चाहा I

"सवाल नहीं I सवाल नहीं l" होशाग' हाथ उठाकर जल्दी ' से बोला…" यहां से निकलने की कोशिश करो I सीधे रास्ते से जाने से तुम .फस भी सकती हो, 'क्योकि' पुलिसमैन जानते हैं कि इस मामले में खूबसूरत' लडकी फिट है । वे तुम्हें देखते ही फोरन पूछताछ के लिए रोक लेगे' I दो पुलिसमैन होटल के मुख्य द्धार पर खडे हैं । इसलिए बेहतर यही होगा कि पीछे से खिसकने की कोशिश करो I इस खिडकी से । "

मोना चौधरी ने होठ' सिक्रोड़कर, खिडकी को देखा I होशाग ने आगे बढकर खिढ़की. खोली I तीस फीट नीचे जमीन थी I होशाग पलटा।

" कम आन I रुकने सोचने का समय नही' है । अब तुम्हारे साथ में भी फस सकता हू। "

मोना चौधरी भी वहीँ खडी रहकर समय बरबाद नहीँ करना चाहती थी । वह आगे बढी । होशाग खिडकी की चौखट पर चढा फिर चौखट पकड़कर लटक गया I हाथ चौखट से हटाते ही वह जमीन पर था । ठीक इसी तरह मोना चौधरी भी कमरे से बाहर पिछवाडे वाली जमीन पर आ गई ।

"सुनो । " होशाग ने कहा---"हमारा इकटठा दिखाईं दिया जाना ठीक नहीं I तुम्हारे साथ साथ मैं भी फसूगा I बैसे. अब खास खतरा नहीं है I होटल के साथ साथ घूमती हुई मुख्य गेट से बाहर आ जाओ I मैं बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा हू !"

" ओके !"

मोना चौधरी ने होले से सिर हिलाया!!

होशाग तेजी से आगे बढ़ गया । .

होटल का पिछबाड़ा रोशन था I मोना चौघरी ने हर तरफ़ निगाह मारी । इत्तफाक ही था कि इस समय वहा कोई नही' था I मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया । तभी वह चौकी I उसके होठ' भिच' गए I जिस्म में तनाव भर गया ।

आखें कठोर हो गई I दरवाजा थपथपाने की आवाज उसके कानों में पड़ने लगी थी I यानी कि पुलिसमैनों को यह मालूम हो गया था कि उसके दोनों साथी किस कमरे में आए हैँ I उन्हें तलाशते पुलिसमैन वहा तक आ पहुचे थे I दरवाजा न खुलने पर वे दरवाजा तोढ़ सकते थे । या फिर उनका ध्यान पिछवाडे की तरफ भी जा सकता था ।

बहा खडे रहना खत्तरे से खाली नहीं था । मोना. चौधरी वहा से हिली और तेजी से आगे बढ गई ।
 
होटल की इमारत के बगल मे चलकर मुख्य गेट तक पहुची । फिर गेट से बाहर सडक पर I वह जानती थी कि लाशे' मिलते ही वहां हगामा खडा हो जाना था लेकिन तब उसने कहा' होना था I मोना चौधरी ने आसपास निगाह घुमाई । होशाग कही भी नजर नहीं आया । तभी उसके कानों में हार्न की हल्की सी आवाज़ पडी ।

मोना चौधरी की निगाहें हार्न की तरफ उठ गईं I जो सढ़क पर से आईं थी । वहा नीले रग की कार खडी थी I डोम लाइट आन थी और ड्राइविग' सीट पर. होशाग का चेहरा नजर आया I

किसी तरह मोना चौधरी ने भीड भाड वाली सडक पार की और कार के करीब पहुचकर दरवाजा खोलते हुए होशाग की बगल में जा बैठी ।

होशाग ने कार… आगे बढा दी I

@@@

@@@

@@@

कश लेकर मोना चौधरी ने सिगरेट खिडकी के बाहर उछाल दी ।

"इससे पहले कि तुम कोई बात करो मैं कुछ पुछना चाहती हू !"

"पूछो I " होशाग सामान्य गति से कार ड्राइव कर रहा था |

"जब मैं तुम्हारे घर से निकली तो तुमने कहा था तुम मेरे पीछे हो ?"

"हा I"

"तो तुम्हारी बस्ती में जो मेरे साथ हुआ तुमने देखा क्या ?" मोना चौधरी ने उस पर निगाह मारी I

"'देखा I मेरी आखो' के सामने ही तो सब कुछ हो रहा था ।"

"तो फिर तुमने आगे आकर मुझे बचाया क्यों नहीं ?"

"जरूरत नही समझी !"

"क्यों ? " मोना चौधरी के माथे पर बल पड गए I

"मैने सोचा I " होशाग एकाएक हसा…"जो चियाग से टकराने का दावा करती हो I खुद को तोप समझ रही हो उसे मामूली सी सहायता की क्या जरूरत I खुद निबट ले I ठीक 'सोचा ना मैने ?"

"हा ,ठीक सोचा l’" मोना चौधरी का. चेहरा कठोर हो गया I

"वह चीनी और कोरियन बस्ती के पहुचे हुए बदमाश थे I " होशाग बोला ।

"होगें !"

"जब तुम्हें होटल मे पुलिसमैनों ने घेरा तो मैं बाहर था I तुम्हारा पीछा करता हुआ ही आया था मैं I चाहता तो तुम्हें पहले ही खबर कर सकता था कि पुलिसमैन तुम्हारी तरफ जा रहे हें । परतु मैने ऐसा नहीं किया । सोचा क्या जरूरत है। जो चियाग से निबटने हिंदुस्तान' से यहा तक आ गई हो वह इन मामूली सै मसलों को तो आसानी से हल कर लेगी I "

होंशाम के होठो पर मुस्कान नाच रही थी ।

"यह भी ठीक सोचा I " मोना चौधरी ने होशांग के चेहरे ..पर निगाह मारी ।

. "तुमने एक घटे में ही छ को शूट कर दिया I ऐसे में अगर पुलिस के हाथ लग गई तो जानती हो...?"

"बेकार की बात मत करो । मेरे लिए यह मामूली बातें हैं I " मोना चौधरी ने… तीखे स्वर में कहा-"पुलिस का खौफ I उसे दिखाना जो इनकमटैक्स देता हो समझे मिस्टर होशाग' I"

"मतलब कि तुम इनकमटैक्स नहीं देतीं ?"

"देती हू I लेकिन मेरा देने का अदाज दूसरा है । मैं कैश में इनकमटैक्स नहीं देती I "

"तो कैसे देती हो ?"

"छोडो तुम्हारी समझ में नहीँ आएगा I"

"इशारा ही दे दो I मैँ समझ जाऊँगा I " होशाग ने मोना, चौधरी के चेहरे पर निगाह मारी ।

"मिस्टर होशाग I" मोना चौधरी ने सपाट स्वर में कहा…"मेरे पास बेकार की बातों के लिए वक्त नहीं है I तुम जानते हो कि मैं यहा किस काम की खातिर आई हू I और वह काम मुझें फौरन करना हे । "

होशाग ने गम्भीरता से सिर हिलाया I

"पैं तुम्हारा साथ दूगा । "

" तुम? "

" हा I इसमे हैरान होने की क्या जरूरत है I"

" तुम तो इनकार कर चुके हो । "

"तो क्या हुआ -! अब तो मैँ हा कर रहा हूं I " होशाग ने गम्भीरता से कहा-"दरअसल मैंने तुम्हें मात्र बीज समझा था परंतु अब समझ चुका हू कि तुम्हारी खूबसूरती मात्र दिखावा है I तुम तो मौत का बीज हो I चियाग से टक्कर लेने की चेष्टा कर सकती हो तुम I दम है तुममें l"

मोना चौधरी ने होशाग को देखा I

"जो मामूली सी बात पर फौरन छ: कत्ल कर दे वह कुछ भी कर सकती है । "

"गुड I मोना चौधरी मुस्कराई---" मुझे खुशी है कि तुम मेरा साथ देने जा रहे हो । " ~

"हा I साथ तो देने जा रहा हूं लेकिन सारा काम सावधानी से होगा अब I मुझें शक हे कि चियाग को इस बात का एहसास हो चुका हे कि हिंदुस्तानी एजेट उसके पीछे है । उससे फिल्म छीनना चाहते हैँ । "

मोना चौधरी कुछ नही बोली ।

होशाग ने कुछ देर बाद कार को पार्किग स्थल पर रोका और सिगरेट सुलगाकर इजऩ बंद करके मोना चौधरी को देखा I

चेहरे पर सोच के भाव नाच रहे थे ।

"तुम कुछ कहान चाहते हो ?" मोना चौधरी ने अंधेरे में उस पर निगाह मारी ।"

"हा I "

" क्या ?"

"इस काम को हम अकेले नहीं कर सकेगे । बहुत खतरा है । हमें किसी की सहायता लेनी पडेगी ।"

"लेकिन कोई हमारी सहायता क्यों करेगा ? " मोना चौधरी ने कहा ।

होंशाग इस समय वेहद गम्भीर नजर आ रहा था ।

"मिस मोना चौधरी ! " होशांग ने कहा…"मैँ यहाँ का एक खतरनाक मेम्बर, हूं I और हमारा गैग इतना जबरदस्त है कि पुलिस भी एकबारगी सामने पडने के लिए सोचती हे I हमारा गैग कोई आम बदमाशों का ग्रुप नहीं है I हमारे गैंग मे एक से. …एकं खतरनाक लोग भरे पडे हैं । अगर हमारा गैंग तुम्हारी . सहायता करने पर आ जाए तो कोई बडी बात नहीं' कि चियाग को शिकस्त देकर, सीक्रेट की वह फिल्म हम हासिल कर ही ले ! लेकिन एक दिक्कत, हमारे सामने आ रही हे I"

"क्या ?" मोना चौधरी दिलचस्पी से होशाग को देख रही थी I
 
~ "कि हमारा गैग तुम्हारा काम क्यों करे ? गैंग के तौर पर हम उसी काम में हाथ डालते हैं जिसमें `हमेँ दौलत हासिल हो । और. तुम दोलत दे नही सकती । "

"लेकिन मेरा देश तो दे सकता है I " मोना चौधरी बोली |

" हा I लुम्हारा देश हिंदुस्तान इस मामले में फौरन दौलत दे देगा l फिर वह तुम्हें जवाब दे देगा I ऐसे में एक दो दिन लग जाएगें I जबकि हमारे पास तो एक एक मिनट' की मिंट की कमी हे । " होशाग ने अपने एक एक शब्द पर जोर देकर कहा ।

होशाग ठीक ही तो कह रहा था ।

एकाएक मोना चौधरी को उन पचास ताख का ध्यान आया जो मिस्टर पहाडिया उसे इस काम को करने की रजामंदी की एवज में उसे देवे को तैयार थे ।

"मिस्टर होशाग I पचास लाख देनें को. गारंटी तो मैं अभी दे सक्ली हू I "

" पचास लाख डालर... I"

" नहीं । रुपए I "

""कम हैं I काम जितना खतरनाक है उस हिसाब से कम है I" होशाग ने सिर हिलाया I

" इससे ज्यादा की बात मैं नहीं कर सकती I " मोना चौधरी की निगाह होशाग पर थी I .

होशाग के चेहरे पर सोच के भाव छाए रहे I कार में कई पलो तक खामोशी छाई रही I

एकाएक होशाग' 'ने कार में लगे' टेलीफोन का रिसीवर उठाया और नम्बर डायल करने, लगा I ’ इसके साथ ही 'होशाग' ' ने मोना चौधरी' क्रो देखा I

" गैंग के चद खास मेम्बरों के पास ऐसी ही कारें हैं, जिनमें फोन या फिर दुश्मन से निबटने का हर तरह का सामान है I " होशाग' ने बताया । "

"तुम खास मेम्बरों में आते हो गैग' के ?"

"हा I"

मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया I

"किसे फोन कर रहे हो ?"

तब तक लाइन मिल गई थी!

"हेलो I " होशाग ने कहा ।

"किससे मिलना है ?”

"डबल फोर हियर सिक्स से मेरी बात कराओ I " होशाग बोला I

"यस सर I करीब एक मिनट आपको होल्ड करना पडेगा I ” उधर से आवाज़ आई I

"एक मिनट ? " होशाग की आवाज सख्त हो गई I

"सर l नम्बर सिक्स किसी से बात कर रहे हैं I ऐसे में एक मिनट तो.... I”

"ओके! हरी अप...।"

लाइन पर खामोशी छा गई I

होंशाग ने माउथपीस पर हाथ रखकर कहा ।

" मेरे पास किसी. चीज की कमी नहीं I परंतु जिस गदी बदनाम बस्ती मेँ मैं रहता हूं वहा पर रहना ही मेरे लिए मेरे हक में बेहतर है I पुलिस को कभी भी मेरी जरूरत पड सकती है और ऐसी बस्ती में वह मुझे फौरन हासिल नही' कर सकेगे' I उससे पहले ही खबर मुझ तक पहुच जाएगी। उस बस्ती में पचास प्रतिशत से ज्यादा गुडे बदमाश रहते हैं I ऐसो जगह पर पुलिस भी जाने से पहले दस बार सोचती है I पुलिस का सोचना ही हम जैसों को बचा जाता है I "

~ मोना चौधरी ने समझने वाले भाव मेँ सिर हिलाया I

"यह फोन किसे कर रहे हो ?” मोना चौधरी ने पूछा I

" अपने गैंग के नेता को! "

"क्यों ?"

"अभी मालूम हो जाएगा I पहले बात कर लेने दो। "

होशाग ने गम्भीर स्वर में कहा I

"तुम्हारे गैग' का नेता कैसे वना जाता है ?" मोना चौधरी बोली ।

"गैंग के बाकी मेम्बर ही चुनते हैं । "

"और उसे नेतापन से हटाना हो तो ?

"तो भी गैंग के मेम्बर ही यह काम करते हैं । " होशाग ने मोना चौधरी को देखा…"और नेता को हटाया नहीं जाता। शूट कर दिया जाता है । तब जबकि उसके फैसलों से गैग को नुकसान पहुचना शुरू हो जाए I "

" शूट क्यों करते है उसे ?"

"मज़बूरी है I गैग का नेता बाद में गैंग' का मेम्बर बनकर तो काम करने से रहा I ऐसे में वह किसी भी तरह की बगावत करने पर उतारू हो सकता है जो गैग के हक मे नुकसानदेह साबित हो सकती है ।"

मोना चौधरी ने होठ सिकोढ़ लिए ---- "इस बात से नेता वाकिफ होता है कि उसके साथ ऐसा भी ही सकता है ?"

"हा I इसी कारण जिसकी निगाहें उसके खिलाफ़ उठती हैं , गैंग का नेता हर सम्भव चेष्टा करता हे कि उसे रास्ते से हटा दे | इसके लिए वह बाहरी हत्यारों का भी इस्तेमाल कर लेता है, चूकि कोई सबूत नहीं मिल पाता इसलिए गैंग. का नेता सुरक्षित रहता हे।"

"मतलब कि गैग के नेता को खुद को बनाए रखने के लिए काफी जोढ़ तोड करनी पढ़त्ती है ?"

"हा I नेता बनना आसान काम नहीं है I " होशाग के होठो पर मुस्कान उभरी I

तभी होशाग के कानो में आवाज पडी I

" . . "हैलो I"

. . . "सर I मैँ डबल फोर....!"

"कहो I "

" एक काम हाथ लगा है I किया जाए तो नुकसान नहीं . .होगा । "

"क्या काम है ?"

" किसी से कोई चीज खींचनी है I " होशाग सतर्क स्वर मे कह रहा था ।

"किससे ?"

"किसी से भी । हमे काम की कीमत सही मिल रही है और हम सिर्फ काम की कीमत देखते हैं I यह हमारे गैग का उसूल है I यह नहीं देखते कि खतरा कम है या ज्यादा ।"

दो पल के लिए लाइन पर खामोशी रही ।

कितनी कीमत ?"

"फौऩ पर बातें करना ठीक नहीं I कोई और भी सुन सकता है I "

"कहा से बोल रहे हो ?"

"'मै पार्टी को लेकर आ जाता हू I " होशाग ने कहा I

"पार्टी के बारे में तुमने तसल्ली कर ली हे ? " स्वर आया I

" हा I"

"ठीक है ले आओ I " पुन स्वर आया-"आखों पर वैल्ट लगा देना पार्टी की । "

"ओके I " कहने के साथ ही होशाग ने रिसीवर वापस रख दिया ।

मोना चौधरी असमज़स भरी निगाहो से उसे देख रही थी I
 
"मैं समझी नहीं तुम क्या कर रहे हो । " मोना चौधरी बोली I

होशाग ने गम्भीरता भरे अंदाज में सिगरेट सुलगाकर कश लिया

"तुम्हारा काम ही करवा रहा हू। "

"लेकिन मेरे पास तुम्हारे गैग को देने के लिए पैसे ही कहा है I"

होशाग ने सीट के नीचे हाथ डालकर काले रग की इलास्टिक की बेल्ट निकाली और उसे मोना चौधरी को थमाकर बोला I

"जब मैं कहूं इसे आखों पर चढा लेना I इस तरह कि कुछ भी नजर न आए I "

मोना चौधरी बैल्ट को हाथ में लेकर उसे देखने लगी I

"आज के वक्त में समझदार इंसान वहीँ हे जो अपना काम निकाल ले I" होशाग ने कहा-" तुम भी अपना काम निकालो I चियाग के कब्जे से सीक्रेट की वह फिल्म निकाली जानी चाहिए सबसे पहले उसके बाद जो होगा, उसी के मुताबिक काम करेगे I अगर चियाग ने चीन से उस फिल्म का सौदा कर लिया तो फिर तुम्हारे हाथ कुछ भी नहीं लगने चाला I "

"लेकिन मिस्टर होशाग...!"

"मिस मोना चौधरी I." होशाग' ने उसकी बात काटकर गम्मीर स्वर मेँ कहा…"मैं तुम्हें अपने गैग के नेता के पास ले जा रहा हू I वहा पर उससे, और अन्य मौजूद साथियों से कैसे .बात करनी हे वह मैँ तुम्हें बता देता हू समझा देता हू। आगे . I तुम्हारी समझदारी I "

"मुझे हिंदुस्तानी सीक्रेट की वह फिल्म चाहिए । उसे हासिल करने की एवज में मुझे जो भी करना पडा, वह मैं करूंगी । " मोना चौधरी ने दृढ स्वर में कहा । ~

"गुड I तो अब तुम मेरी बात ध्यान से सुनो और उस पर समझदारी से अमल करना । "

@@@

मोना चौधरी की आखो से जब पट्टी हटाई गई तो दो पल के लिए उसे सिवाय अधेरे के और कुछ भी नजर नहीं आया ।

वहा फैली तेज रोशनी ने जैसे उसे अंधा कर दिया था I फिर.....

धीरे धीरे उसकी आखें अघेरे मेँ देखने की अभ्यस्त होती चली गई ।

वह दस बाई दस का कमरा था I

कमरे के बीचो-बीच गोल टेबल के गिर्द पाच कुर्सिया थीं । जिस पर तीन व्यक्ति मौजूद थे I एक चीनी था और दो लोकल ही लग रहे थे परंतु चीनी नस्ल का मिश्रण उनमें था I उसकी अपनी बगल मे होशाग खडा था I

मोना चौधरी ने उन तीनों को गहरी निगाहों से देखा I मिश्रित नस्ल वाला ही उसे गैंग का लीडर लगा I जोकि पैनी निगाहों… से उसे सिर से पाव तक बारबार देख रहा था।

खासतौर से उसकी छातियों की तरफ I. उसकी आखै बता रहीँ थी कि अगर उसका बस चलता तो सब कुछ वह अभी कर गुजरता । लेकिन वह खुद को रोके, बेहद शालीन तरीके से बैठा था ।।

अन्य दोनों भी उसके जिस्म की तरफ़ तचल्जी दे रहे थे ।

"सर I " होशाग ने उसे ही कहा जिसे कि मोना चौधरी गेंग का नेता समझ रही थी…"यह खडी है पार्टी । आप लोग इससे बात कर सकते हैं।"

नेता सतर्क नज़र आने लगा I

होशाग आगे बढकर कुर्सी पर जा बैठा ।

"क्या चाहती है यह I" नेता ने होशाग से पूछा परंतु निगाह मोना चौधरी पर थी ।

"आप खुद ही बात कर लीजिए मिस्टर शागली ।" होशाग ने कहा ।

~शांगली ने सिगरेट सुलगाते हुए मोना चौधरी से कहा I

" बैठो !"

मोना चौधरी आगे बढकर खाली पडी पाचवीं कुर्सी पर जां बैठी ।

"क्या नाम हे तुम्हारा ?"

"मोना चौधरी ! ”

"हिंदुस्तानी हो ?"

"हा । "

शागली ने -कश लेकर अपने साथियों को देखा । फिर मोना चौधरी को ।

"यह तुम्हे कहा मिलीं ?” शागली ने होशाग को देखा ।

होशाग अपने माथे पर बल ले आया । उसने अन्य दोनों साथियों को देखा फिर शागली पर निगाहें टिकाकर अप्रसन्न स्वर में बोला-"मिस्टर शागली आप बेहद ही अजीब सा सवाल कर रहे हैँ ।"

"क्या मतलब? ” शागली ने होशाग को घूरा !!

" मैं किसी को लाया हूं । वह कोई काम चाहती है और हम वह काम कर सकते हैं अगर हमें पूरी कीमत मिले तो । अब इस सवाल की गुजाइश ही कहा रह जाती है कि यह मेम साहब मुझे कहा मिली और कहा नहीं । आप इससे बात कीजिए । मामला तय कीजिए, नहीं तय होता तो इसे बाहर पहुचा देते हैं ।

"लेकिन I ” शागली के चेहरे पर सख्ती नाची-" मेरी बात का जबाब देने में तुम्हें क्या एतराज है I”

"बेकार के सवालों का जबाव देने में एतराज होता ही है I होशाग ने शात स्वर में कहा…"मुझे आशा है किं भविष्य में आप ऐसा कोई सवाल नहीं पूछेगे I इस वार ज़वाब दे देता हूं I मात्र तीन घटे पहले यह मुझे एक रेस्टोरेटे में परेशानी की अवस्था में बैठी नज़र आई I खूबसूरत तो हे ही आप देख ही रहे हैँ I विदेशी भी है I यह सोचकर इसके पास पहुच गया कि इसे किसी प्रकार की सहायता की जरूरत ना हो I उसके बाद मेरे और मोना चौधरी के ब्रीच जो भी हुआ, उसे बताने की मैं जरूरत नहीं समझता। अत में यह मेरे सामने खुल गई कि असल में यह क्या चाहती. है I "

शागली की निगाह पुन मोना चौधरी पर जा टिकी I गैग के चुप बैठे अन्य दो ओहदेदारों में से एक बोला ।

"यस मिस मोना चौधरी I आप हमसे क्या करबाना चाहती हैं ?”

सबकी निगाहे मोना चौधरी पर थीं I

मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाई औंर सब पर भरपूर निगाह डाली ।

"काम बहुत ही अहम और गोपनीय हे । " मोना चौधरी ने. होठ खोले I

"वहीँ तो हम जानना चाहते हैँ I ” शागली ने सपाट स्वर में कहा ।

"जानना तो आप अवश्य चाहते हैं-लेकिन मैं आपको बताना भी ठीक नहीं समझती I मैं इस बात का विश्वास केसे कर लू कि हममें मामला पट जाएगा। ना पटने की सूरत में बात लीक हो जाएगी I और ऐसा होना हमारे लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो सकता हे । "

चारों ने एकदूसरे को देखा ।

फिर मोना चौधरी को I

"बात लीक कैसे होगी ?'"

"आप लोगो के द्वारा... ।"

"लेकिन हम क्यों लीक करेगे ?" गैग का ओहदेदार बोला ।।
 
"सौदा न पटने की सूरत में ऐसा हो सकता है । आप लोग किसी से इस बात कां जिक्र कर सकते है' I "

शागली ने नकारात्मक अदाज में सिर हिलाया' I

" नही , हमारे यहा ऐसा कभी नहीं होता । भरोसे पर ही हमारे. धघे टिके हुए है I इस तरह बातें लीक होने लगी तो हमारे पास आएगा कौन ? " कहकर शागली ने अपने सिर पर हाथ फेरा ।

" तो मै I आप लोगों पर विश्वास करके अपनी बात शुरू ~ करू' ?"

. "बेशक ! "

मोना चौधरी ने कश तिया और गम्भीर स्वर' मेँ कह उठी ।

“ चियांग के बारे मेँ तो आप बखूबी वाकिफ होगे?"

"चियाग !" दोनों ओहदेदार और शांगली चौका । . »

. "हां ! चियांग I" मोना चौधरी का स्वर सख्त गया । " उसी चियाग की बात कर रही हूं जिसका नाम सुनते ही आप चौके I जो चीन का नम्बर वन पिट्ठू हे I "

शागली की आखे सिकुड गई ।

"तुम्हारा चियाग से क्या वास्ता ? " शागली ने पूछा ।

"वही तो बताने जा रही हू। "

"पहले तुम अपने बारे मेँ बताओ I तुम कौन हो ?"

"मैं हिंदुस्तानी मिलिटरी सीक्रेट सर्विस की ऐजेंट हूं। " मोना चौधरी ने सपाट स्वर में कहा ।

शांगली चौका । हैरानी से उसकी आखें चौडी हुईं ।।

दोनों ओहदेदार फौरन सीधे हो गए I

’होशाग' इस दोरान आराम से बैठा रहा I

कई पलों तक वहां मौत का सा सन्नाटा छाया रहा I

"तुम...!" शांगली ने होशाग को देखा…"जानते थे कि यह हिंदुस्तानी एजेट है ? "

" हां !"

" जिक्र नही किया ?"

" क्या जरूरत थी I इसने जिक्र कर ही देना था । " होशाग ने शात स्वर में कहा ।

शांगली की निगाह पुन मोना चौधरी पर जा टिकी।

"अब बोलो क्या चाहती हो तुम? " एक ओहदेदार बोला।

मोना चौधरी ने कश लिया ओर कह उठी ।

"चीनी एजेट हमारे सीक्रेट की फिल्म बनाकर यहा आ गया था । यहां उसने, अपने साथी एजेंट को सीक्रेट की फिल्म सौंपनी थी, परतु चियाग को पहले से ही इस सारे मामले की भनक थी I उसने उस एजेट की हत्या कस्के सीक्रेट की फिल्म अपने कब्जे में कर ली और चीन से उसका सौदा करने-लगा I हमारे दो एजेट पहले भी चियाग से फिल्म हासिल करने आ चुके हैं । परंतु चियाग ने उनकी जान ले ली । अब मैं आई हूं I और इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हू कि बिना किसी की सहायता से काम पूरा नहीँ हो सकता । यह तो इत्तफाक ही रहा कि रेस्टोरेंट में मिस्टर होशाग से मुलाकात हो गई ओर.....!" मोना चौधरी ने शब्द अधूरे छोढ़ दिए।

"तो तुम चाहती हो कि हम चियाग से सीक्रेट फिल्म हासिल करने में तुम्हारी मदद करें ? " ओहदेदार बोला

" … हा I"

शागली ने सोच-भरी मुद्रा मेँ नईं सिगरेट सुलगा ली थी I

"तुम्हें मालूम है चियाग से कुछ भी हासिल करना बेहद असम्भव काम है I " दूसरे ओहदेदार ने कहा ।

" मालूम है I ” मोना चौधरी ने सिर हिलाया-"तभी तो आप लोगों की सहायता माग रही हू I"

होशाग ने शागली को देखा I

दोनों ओहदेदार भी अब शागली को ही देखने लगे थे । मोना चौधरी एक एक के चेहरे को परख रही थी ।

"मेरे ख्याल मे । " होशाग ने कहा…"यह काम हमारे बस का नहीँ है । "

एक ओहदेदार ने फौरन सिर हिलाया I

"मेरा भी यहीँ ख्याल हैं I यह चियाग जैसे इसान से ताल्लुक रखता मामला है । "

"और भविष्य मेँ चियाग को इस बात की हबा भी मिल गई कि हमने उनके खिलाफ हिदुस्तानी एजेंट-का साथ-दिया था वह हमारे गैग क्रो पूरी तरह तबाह कर देगा। लाशे बिछा देगा ।" दूसरे ओदेदार ने कहा ।

" चियाग के मामले मे दखल देना ठीक नहीI" उसने पुन कहा I

मोना चौधरी बेहद शात बैठी थी I

होशाग की निगाह शागली पर थी ।

" बोलो शांगली !" मोना चौधरी बोली…"तुमने क्या सोचा ?"

"सारी मिस मोना चौधरी।" ओहदेदार ने कहा---"यह काम नहीं हो सकेगा । "

' "शटअप I " शागली ने सख्त निगाहों से ओहदेदार कौ देखा…" तुम्हें बीच में बोलने को किसने कहा ? " ओहदेदार खामोश हो गया ।

~ शामली ने मोना चौधरी को देखा।

"तुम चियाग तक पहुचना चाहती हो ?”

"हा I "

" चियाग से हम तुम्हारा हाथ तो मिलाएंगे नहीं । अलबत्ता I कुछ पहले से ही तुम्हें यह बता देगे कि उस जगह पर चियाग है I आगे तुम जानो और तुम्हारा काम कि फिल्म ला पाती हो या नहीं I

"मजूर है । "

शागली ने होशाग को देखा I .

" चियांग इस वक्त कहा है ?’”

" अपने टापू पर I"

शामली ने होठ भीचकर मोना चौधरी को. देखा I

"ओके I हम तुम्हें चियांग तक पहुचा देगे I परंतु इस काम में खतरा बहुत हे।"

"काम करोगे तो खतरा तो उठाना ही पडेगा !"

"बदले में हमें क्या मिलेगा ?"

" तुम बोलो, क्या चाहते हो ?"

"यहीँ तो मैं तुमसे जानना चाहता हू कि तुम क्या दे सकती हो ?"

"मेरी बात छोडो I मैं तो बहुत कुछ दे सकती हू ! लेकिन शायद. तुममे ही ले पाने की हिम्मत ना हो I ”

"तुम देने की बात करो । " शागली बोता…"मैँ ले लूंगा I "

दोनों कई पलो तक एक दूसरे की आखों में देखते रहे I

"मुह तुम खोलोगे शागली । " मोना चौधरी ने सिर हिलाकर कहा ।

शागली ने कश लेकर सिगरेट ऐश ट्रे मेँ मसली फिर कह उठा I

"पच्चीस करोड अमरीकी डालर I "

"दिमाग तो नहीं खराब हो गया तुम्हारा I" मोना चौधरी फौरन उठ खडी हुई--।

"क्या मतलब ? ”

शामली के माथे पर बल पड गए ।

" पच्चीस हजार डालर तो तुम तब कहो, जब तुम चियाग से वह फिल्म मुझे लाकर देने का वायदा करो l‘ मुझे मात्र चियाग तक पहुचाने और दूर से उसका ठिकाना दिखाने की एवज में पच्चीस हजार डालर भी बहुत ज्यादा हैं I ”

"चियाग के ठिकाने को दूर से दिखाना भी हिम्मत का काम है I" शागली ने कडवे स्वर में कहा ।

"यह हिम्मत का काम तो थोडे बहुत पैसे लेकर कोई भी कर सकता हे I"

"भूल हे तुम्हारी I तुम नहीँ जानतीं कि रास्तों मे कैसी केसी अडचने हैं I "

"जब अढ़चने आएगी, मै देख लूगी I तुम काम की कीमत ठीक बोलो नहीं तो मैँ चलू I मेरे पास एक और रास्ता भी है I वहा कम कीमत में अच्छे ढग से काम होगा I "

"कैसा रास्ता ?"

" वान ली I "

"वह हरामजादा I " शामली दात भीचकर बडड़ाया l

" मूझे नहीं मालूम वह हरामजादा है कि नहीं I लेकिन मेरे पास उसका पता है और मेरे चीफ ने किसी प्रकार की दिक्कत आने पर, वान ली से सौदा पटाने और बात करने को कहा था I "
 
Back
Top