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नैना वाँंशरूम में बैठी काफी देर तक सिसकती रही, उसकी अब हिम्मत नहीं हो रही थी राजेश का सामना करने की। उसके अंदर का अपराध बोध उसे कचोट रहा था, नैना ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी किसी को धोखा नहीं दिया था और ना ही किसी का बुरा किया था लेकिन उसकी फूटी किस्मत तो देखो कि उसे अपने ही प्यार को धोखा देना पड़ा।
वजह चाहे जो भी हो पर धोखा धोखा ही होता है और धोखा देने वाला जितना करीबी हो, दर्द भी उतना ही गहरा होता है। तभी सारा ने वाँशरूम के दरवाजे पर बाहर से दस्तक दी - अरे यार, पूरा दिन यहीं बैठे रहने का इरादा है क्या? चल जल्दी आ, नए बाँस के साथ सबकी पहली मीटिंग है- कहते हुए वह वहाँ से चली गई।
नया बाँस... राजेश... नहीं मै नहीं जाऊंगी, कैसे सामना करूँगी उसका? उसने तो मेरी ओर देखा तक नहीं, कितनी नफरत होगी उसके दिल में मेरे लिए.... उसकी बेरूखी मै सहन नहीं कर सकती।
तभी एक बार फिर सारा ने दरवाजे पर दस्तक दी - अरे यार, क्या कर रही है? आना जल्दी बाहर।
नैना अब फटाफट उठी और जल्दी से आँसू पोंछ मुँह धोया , रोने के कारण उसकी आँखें लाल हो रही थी तो उसने सोचा कि वह किसी की ओर देखगी ही नहीं और किसी ने कुछ पूछा तो कह देगी कि आँखों में कुछ गिर गया था। नैना नहीं चाहती थी कि उसके आज पर अतीत की परछाई भी पडे इसलिए वह यह नौकरी छोड़ देगी पर आज तो उसे राजेश का सामना करना ही पडेगा , कम से कम वह आज इसी बहाने उसे जी भर कर देख तो लेगी - सोचते हुए नैना वाँशरूम के बाहर निकली और बाकी लोगों के पास चली गई।
जब वह कुलीग्स के पास पहुँची तो देखा वहाँ मौजूद लड़कियाँ और सारा आपस मे गपसप कर रही थी, नैना को देखते ही सारा बोली - कितना टाइम लगा दिया यार? चलो अब सब जल्दी, लेट हो रहा है।
कांफ्रेंस हाँल में राजेश बैठा विशाल से बाते कर रहा था कि सभी लोग वहाँ आकर बैठ गए, नैना को राजेश के ठीक सामने वाली सीट मिली। नैना बस एक बार राजेश को जी भर , के देखना चाहती थी इसलिए उसने धीरे से अपनी नजरें उठा कर राजेश की ओर देखा - कितना बदल गया था उसका राज। उसके चेहरे पर हर वक्त रहने वाली मुस्कान कहीं गायब हो गई थी, उसके चेहरे की मासूमियत को कठोरता ने अपने अंदर कहीं दबा दिया था।
राजेश को इस बात का पूरा एहसास था कि नैना ठीक उसके सामने बैठी लगातार उसे ही देख रही है पर वह भाव शून्य चेहरे के साथ फाईल पडता रहा।
विशाल ने अब मीटिंग की कमान संभाली फिर थोड़ी देर बाद राजेश ने बोलना शुरू किया, वह सबकी ओर देख रहा था सिवाय नैना के। नैना के कानों मे उसकी आवाज मिश्री की भाँति घुलने लगी, वह पुरानी यादों में खो गई कि कैसे राजेश हर वक्त नैना नैना करके उसके पीछे घूमा करता था और उसे तंग करता था, वह कहता था कि नैना तुम्हें देखे बिना मुझे एक पल भी चैन नहीं मिलता पर आज वही राजेश है जो एक बार भी उसकी ओर नहीं देख रहा था ।
नैना यह सब सोच ही रही थी कि उसके हाथ से पेन छिटक कर उसके बगल में बैठी सारा के पास गिरा, नैना ने सारा को धीरे से पुकारा तो उसने कोई रेसपांस नहीं दिया। जब नैना ने सारा की ओर देखा तो पाया कि वह राजेश को घूरे जा रही , थी। यह देख नैना को उस पर बहुत गुस्सा आया कि उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे राजेश.... लेकिन राजेश मेरा भी तो नही है फिर मैं कौन होती हूँ किसी को टोकने वाली, सोच नैना अपनी फाईल पढने लगी पर उसे चैन ना था।
उसने फिर सारा की ओर देखा तो पाया कि अभी भी वह मुस्कुराती हुई राजेश को ही देख रही थी, इस बार नैना खुद पर काबू नहीं रख पाई और सारा के पास खिसक कर धीरे से उसके कान में बोली - ये शादी शुदा है।
यह सुनते ही सारा का चेहरा एकदम से उतर गया और उसने दुखी हो अपना माथा पीट लिया और बोली - मेरी तो किस्मत ही खराब है।
उसकी बात सुन कर नैना मुस्कुराने लगी।
सारा - वैसे सर हैं बहुत क्यूट, है ना?
नैना मुस्कुराते हुए बोली - हाँ, बहुत क्यूट।
सारा अब हैरानी से नैना को देखने लगी, नैना ने जब इशारे से इसका कारण पूछा तो वह बोली - बीते दो साल से हम साथ है पर तुने आज तक किसी भी लडके की तारीफ नहीं की , लेकिन आज तुने सर की तारीफ की? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा।
नैना झेंपते हुए बोली - अब क्यूट लगा तुझे तो मैने तो बस हाँ में हाँ मिला दी तेरा दिल रखने के लिए।
सारा कुछ कहती कि विशाल ने मीटिंग खत्म होने की बात कही, अब विशाल और राजेश को छोड़ सभी लोग कांफ्रेंस हाल से बाहर निकल गए, नैना सबसे पीछे थी। वह जैसे ही हाँल से निकलने को हुई कि विशाल की आवाज उसके कानों में पडी।
विशाल - अरे राजेश, ये तेरी आँखें इतनी लाल कैसे हो रही हैं?
यह सुनते ही नैना वहीं रूक गई और पीछे पलट कर राजेश को देखने लगी।
राजेश - कुछ नहीं, थोड़ी देर पहले आँख में कुछ गिर गया था, कहते हुए राजेश ने जैसे ही दरवाजे की ओर देखा तो सामने नैना खडी थी।
उन दोनों की नजरें आपस में मिली और अगले ही पल राजेश , ने अपनी नजरें हटा ली, और फाईल देखने लगा।
नैना अब हाँल से बाहर आ गई पर उसका दिल अंदर राजेश के पास ही रह गया, वह सोच में पड गई कि क्या सच में राजेश की आँखों में कुछ गिर गया था या मुझे देख उसे मेरा धोखा याद आ गया और उसका दर्द आँसू बन कर बाहर निकल आया ? पूरा दिन हो गया पर राजेश ने एक बार भी मुझसे बात नहीं की ना कोई झगड़ा। क्या समझू इस खामोशी को? क्या राजेश मुझे पूरी तरह भूल आगे बढ चुका है या फिर यह किसी तूफान के आने से पहले की खामोशी है?
नैना इस बार एक नई उलझन में फँस गई थी।
नैना अब जाकर अपनी टेबल पर बैठ गई और रेजिगनेशन लैटर लिखने लगी, अभी वह आधा लैटर ही लिख पाई थी कि सारा ने अचानक से आकर वह लैटर नैना के टेबल से उठा लिया और नैना को चिडाने लगी कि किस के लिए लव लैटर लिख रही हो ? जरा हम भी तो पढे - कहते हुए वह भागने लगी। नैना खड़ी हो वह लैटर उसके हाथ से लेने की कोशिश करने लगी - प्लीज सारा, वापस दो यार। बाहर शोर सुनकर राजेश विशाल के साथ अपने कांफ्रेंस हाल से बाहर निकला ही था कि सारा भागते हुए राजेश से टकराकर कर लडखडा , गई जिसे राजेश से पीछे खड़े विशाल ने संभाल लिया और नैना का रेजिगनेशन लैटर राजेश के हाथ में आ गया। यह देख नैना घबरा गई कि पता नहीं राजेश कैसे रिएक्ट करेगा?
उसने राजेश के हाथ से वह लैटर लेने की कोशिश की लेकिन राजेश ने वह लैटर नैना के हाथ ना लगने दिया और खुद वह लैटर पढने लगा।
नैना अंदर ही अंदर डरने लगी लेकिन राजेश ने इस पर कोई रिएक्शन नही दिया, उसने वह लैटर फाड़ कर वहीं पास ही रखी डस्टबिन में डाल दिया और बडे इत्मीनान से वहाँ से सीधे अपने कैबिन में चला गया।
नैना यह देख हैरान रह गई, उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरा रेजीगनेशन लैटर फाड दिया ? यह लैटर देख राजेश चौंका भी नहीं, क्या वह पहले से जानता था कि मै कुछ ऐसा ही करने वाली हूँ? अब राजेश से बात करनी ही होगी, सोचते हुए नैना फिर से अपना रेजीगनेशन लैटर लिख राजेश के कैबिन की ओर बढ़ी।,
नैना वाँंशरूम में बैठी काफी देर तक सिसकती रही, उसकी अब हिम्मत नहीं हो रही थी राजेश का सामना करने की। उसके अंदर का अपराध बोध उसे कचोट रहा था, नैना ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी किसी को धोखा नहीं दिया था और ना ही किसी का बुरा किया था लेकिन उसकी फूटी किस्मत तो देखो कि उसे अपने ही प्यार को धोखा देना पड़ा।
वजह चाहे जो भी हो पर धोखा धोखा ही होता है और धोखा देने वाला जितना करीबी हो, दर्द भी उतना ही गहरा होता है। तभी सारा ने वाँशरूम के दरवाजे पर बाहर से दस्तक दी - अरे यार, पूरा दिन यहीं बैठे रहने का इरादा है क्या? चल जल्दी आ, नए बाँस के साथ सबकी पहली मीटिंग है- कहते हुए वह वहाँ से चली गई।
नया बाँस... राजेश... नहीं मै नहीं जाऊंगी, कैसे सामना करूँगी उसका? उसने तो मेरी ओर देखा तक नहीं, कितनी नफरत होगी उसके दिल में मेरे लिए.... उसकी बेरूखी मै सहन नहीं कर सकती।
तभी एक बार फिर सारा ने दरवाजे पर दस्तक दी - अरे यार, क्या कर रही है? आना जल्दी बाहर।
नैना अब फटाफट उठी और जल्दी से आँसू पोंछ मुँह धोया , रोने के कारण उसकी आँखें लाल हो रही थी तो उसने सोचा कि वह किसी की ओर देखगी ही नहीं और किसी ने कुछ पूछा तो कह देगी कि आँखों में कुछ गिर गया था। नैना नहीं चाहती थी कि उसके आज पर अतीत की परछाई भी पडे इसलिए वह यह नौकरी छोड़ देगी पर आज तो उसे राजेश का सामना करना ही पडेगा , कम से कम वह आज इसी बहाने उसे जी भर कर देख तो लेगी - सोचते हुए नैना वाँशरूम के बाहर निकली और बाकी लोगों के पास चली गई।
जब वह कुलीग्स के पास पहुँची तो देखा वहाँ मौजूद लड़कियाँ और सारा आपस मे गपसप कर रही थी, नैना को देखते ही सारा बोली - कितना टाइम लगा दिया यार? चलो अब सब जल्दी, लेट हो रहा है।
कांफ्रेंस हाँल में राजेश बैठा विशाल से बाते कर रहा था कि सभी लोग वहाँ आकर बैठ गए, नैना को राजेश के ठीक सामने वाली सीट मिली। नैना बस एक बार राजेश को जी भर , के देखना चाहती थी इसलिए उसने धीरे से अपनी नजरें उठा कर राजेश की ओर देखा - कितना बदल गया था उसका राज। उसके चेहरे पर हर वक्त रहने वाली मुस्कान कहीं गायब हो गई थी, उसके चेहरे की मासूमियत को कठोरता ने अपने अंदर कहीं दबा दिया था।
राजेश को इस बात का पूरा एहसास था कि नैना ठीक उसके सामने बैठी लगातार उसे ही देख रही है पर वह भाव शून्य चेहरे के साथ फाईल पडता रहा।
विशाल ने अब मीटिंग की कमान संभाली फिर थोड़ी देर बाद राजेश ने बोलना शुरू किया, वह सबकी ओर देख रहा था सिवाय नैना के। नैना के कानों मे उसकी आवाज मिश्री की भाँति घुलने लगी, वह पुरानी यादों में खो गई कि कैसे राजेश हर वक्त नैना नैना करके उसके पीछे घूमा करता था और उसे तंग करता था, वह कहता था कि नैना तुम्हें देखे बिना मुझे एक पल भी चैन नहीं मिलता पर आज वही राजेश है जो एक बार भी उसकी ओर नहीं देख रहा था ।
नैना यह सब सोच ही रही थी कि उसके हाथ से पेन छिटक कर उसके बगल में बैठी सारा के पास गिरा, नैना ने सारा को धीरे से पुकारा तो उसने कोई रेसपांस नहीं दिया। जब नैना ने सारा की ओर देखा तो पाया कि वह राजेश को घूरे जा रही , थी। यह देख नैना को उस पर बहुत गुस्सा आया कि उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे राजेश.... लेकिन राजेश मेरा भी तो नही है फिर मैं कौन होती हूँ किसी को टोकने वाली, सोच नैना अपनी फाईल पढने लगी पर उसे चैन ना था।
उसने फिर सारा की ओर देखा तो पाया कि अभी भी वह मुस्कुराती हुई राजेश को ही देख रही थी, इस बार नैना खुद पर काबू नहीं रख पाई और सारा के पास खिसक कर धीरे से उसके कान में बोली - ये शादी शुदा है।
यह सुनते ही सारा का चेहरा एकदम से उतर गया और उसने दुखी हो अपना माथा पीट लिया और बोली - मेरी तो किस्मत ही खराब है।
उसकी बात सुन कर नैना मुस्कुराने लगी।
सारा - वैसे सर हैं बहुत क्यूट, है ना?
नैना मुस्कुराते हुए बोली - हाँ, बहुत क्यूट।
सारा अब हैरानी से नैना को देखने लगी, नैना ने जब इशारे से इसका कारण पूछा तो वह बोली - बीते दो साल से हम साथ है पर तुने आज तक किसी भी लडके की तारीफ नहीं की , लेकिन आज तुने सर की तारीफ की? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा।
नैना झेंपते हुए बोली - अब क्यूट लगा तुझे तो मैने तो बस हाँ में हाँ मिला दी तेरा दिल रखने के लिए।
सारा कुछ कहती कि विशाल ने मीटिंग खत्म होने की बात कही, अब विशाल और राजेश को छोड़ सभी लोग कांफ्रेंस हाल से बाहर निकल गए, नैना सबसे पीछे थी। वह जैसे ही हाँल से निकलने को हुई कि विशाल की आवाज उसके कानों में पडी।
विशाल - अरे राजेश, ये तेरी आँखें इतनी लाल कैसे हो रही हैं?
यह सुनते ही नैना वहीं रूक गई और पीछे पलट कर राजेश को देखने लगी।
राजेश - कुछ नहीं, थोड़ी देर पहले आँख में कुछ गिर गया था, कहते हुए राजेश ने जैसे ही दरवाजे की ओर देखा तो सामने नैना खडी थी।
उन दोनों की नजरें आपस में मिली और अगले ही पल राजेश , ने अपनी नजरें हटा ली, और फाईल देखने लगा।
नैना अब हाँल से बाहर आ गई पर उसका दिल अंदर राजेश के पास ही रह गया, वह सोच में पड गई कि क्या सच में राजेश की आँखों में कुछ गिर गया था या मुझे देख उसे मेरा धोखा याद आ गया और उसका दर्द आँसू बन कर बाहर निकल आया ? पूरा दिन हो गया पर राजेश ने एक बार भी मुझसे बात नहीं की ना कोई झगड़ा। क्या समझू इस खामोशी को? क्या राजेश मुझे पूरी तरह भूल आगे बढ चुका है या फिर यह किसी तूफान के आने से पहले की खामोशी है?
नैना इस बार एक नई उलझन में फँस गई थी।
नैना अब जाकर अपनी टेबल पर बैठ गई और रेजिगनेशन लैटर लिखने लगी, अभी वह आधा लैटर ही लिख पाई थी कि सारा ने अचानक से आकर वह लैटर नैना के टेबल से उठा लिया और नैना को चिडाने लगी कि किस के लिए लव लैटर लिख रही हो ? जरा हम भी तो पढे - कहते हुए वह भागने लगी। नैना खड़ी हो वह लैटर उसके हाथ से लेने की कोशिश करने लगी - प्लीज सारा, वापस दो यार। बाहर शोर सुनकर राजेश विशाल के साथ अपने कांफ्रेंस हाल से बाहर निकला ही था कि सारा भागते हुए राजेश से टकराकर कर लडखडा , गई जिसे राजेश से पीछे खड़े विशाल ने संभाल लिया और नैना का रेजिगनेशन लैटर राजेश के हाथ में आ गया। यह देख नैना घबरा गई कि पता नहीं राजेश कैसे रिएक्ट करेगा?
उसने राजेश के हाथ से वह लैटर लेने की कोशिश की लेकिन राजेश ने वह लैटर नैना के हाथ ना लगने दिया और खुद वह लैटर पढने लगा।
नैना अंदर ही अंदर डरने लगी लेकिन राजेश ने इस पर कोई रिएक्शन नही दिया, उसने वह लैटर फाड़ कर वहीं पास ही रखी डस्टबिन में डाल दिया और बडे इत्मीनान से वहाँ से सीधे अपने कैबिन में चला गया।
नैना यह देख हैरान रह गई, उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरा रेजीगनेशन लैटर फाड दिया ? यह लैटर देख राजेश चौंका भी नहीं, क्या वह पहले से जानता था कि मै कुछ ऐसा ही करने वाली हूँ? अब राजेश से बात करनी ही होगी, सोचते हुए नैना फिर से अपना रेजीगनेशन लैटर लिख राजेश के कैबिन की ओर बढ़ी।,