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एक अनोखा बंधन**:-कि नई शुरुआत (2) complete

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Guest
मित्रो....... यह कहानी ★एक अनोखा बंधन★ के आगे की उनके नये जीवन की है।। //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f382.svg इसलिए आप सभी मित्रो सहयोग जरूरी है।।।।।।।।।।//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
एक छोटी-सी छलक ; पिछली कहानी की।।।
 
हमने XXXXX PUB जाने का प्लान बनाया| घर से मैं ये बोल के निकल गया की मैं अनिल को साइट पे काम दिखा के आ रहा हूँ| जाते-जाते मैं पिताजी को बता गया की मैं अनिल और दिषु पार्टी करने जा रहे हैं| उन्होंने अपना वादा याद दिलाया और मैंने भी उनका पैर छू के हामी भरी की मैं अपना वादा नहीं भूलूँगा| दिषु ने हमें घर के बाहर से pick किया और हम loud music सुनते हुए Pub पहुँचे! दिषु हम दोनों के लिए टी-शर्ट्स और जीन्स ले आया था, जो हमने गाडी में ही बदल लिए थे| Pub पहुँचते ही दोनों आपे से बाहर हो गए| अनिल और दिषु तो पार्टी में खो गए| मैं बस PUB में बारटेंडर के पास बैठा हुआ था और "पानी" पी रहा था! I mean can you imagine guys ... खेर as usual Music की धुन और शराब से दोनों टुन हो चुके थे! हाँ मैंने उन्हें कोई drug नहीं लेने दिया| वापसी में गाडी में ही ड्राइव कर रहा था| पहले दिषु को उसके घर छोड़ा| दरवाजा उसकी नौकरानी ने खोला और मैं उसे उसके कमरे में लिटा आया| वापसी में उसके पापा दिखे और बोले;

दिषु के पापा: आज फिर पी?

मैं: Sorry अंकल|

दिषु के पापा: पर तुम तो पिए हुए नहीं लग रहे?

मैं: जी...मैंने अपने पिताजी से वादा किया था|

दिषु के पापा: तो ये कैसी Bachelor's party थी? दूल्हे को छोड़ के सबने पी! (वो मुस्कुराने लगे|) वैसे Good बेटा...काश ये पागल भी तुम्हारी तरह होता| तुम चाहो तो यहीं रुक जाओ|

मैं: अंकल...वो मेरा साला गाडी में है..उसे घर छोड़ के गाडी यहीं छोड़ जाता हूँ|

दिषु के पापा: नहीं..नहीं...बेटा...गाडी लेने कल इस पागल को भेज दूँगा|

मैं: Thanks अंकल and Good Night!

दिषु के पापा: Good Night बेटा!

मैं घर पहुँचा..शुक्र था की मेरे पास डुप्लीकेट चाभियां थीं तो मैं बिना किसी को उठाये अंदर aaya और दिषु को अपने कमरे में लेजाने लगा तो देखा वहाँ संगीता और सुमन सो रहे थे| मैं चुप-चाप पीछे हटा और उनके (संगीता) कमरे में उसे लिटा दिया और ऊपर रजाई डाल दी| आयुष तो अपनी दादी जी के पास सो रहा था और नेहा संगीता के पास| मेरे दरवाजा खोलने से शायद वो जाग गई थी| इसलिए जब मैं बैठक में लौटा, की चलो सोफे पर सो जाता हूँ तो नेहा कमरे का दरवाजा खोल के बाहर आई;

नेहा: पापा...आप तो सुबह आने वाले थे?

मैं: Awwww मेरा बच्चा सोया नहीं? आओ इधर! (नेहा आके मुझसे लिपट गई|)

नेहा: पापा आपके बिना नींद नहीं आती|

मैं: Awwwww मेरा बच्चा!

मैं चाहता तो अनिल के साथ उसी कमरे में सो जाता पर अब नेहा साथ थी... और अनिल से शराब की बू आ रही थी, और ऐसे हाल में मुझे ये सही नहीं लगा| अब सोफ़ा छोटा था तो दो लोग उसमें सो नहीं सकते थे| मैंने नेहा को गोद में उठाया और मैं पीठ के बल लेट गया और नेहा मेरे सीने पर सर रख के लेट गई| ऊपर से मैंने रजाई ले ली| नींद कब आई पता नहीं चला| सुबह तक मैं ऐसे ही पड़ा रहा| सुबह संगीता ने नेहा और मेरे ऊपर से रजाई उठाई तब मेरी नींद खुली| घडी में साढ़े पाँच बजे थे;

संगीता: What are you doing here?

मैं: Good Morning Dear!

संगीता: You didn't answer me?

मैं: (मैंने अपनी एक आँख बंद की) रात को जल्दी लौट आया था!

संगीता: Seriously?

मैं: Yeah !

संगीता: तो यहाँ क्यों सोये हुए हो? और अनिल कहाँ है?

मैं: अंदर है! (मैंने उनके कमरे की तरफ इशारा किया| मैं समझ गया था की आज तो दोनों की शामत है!)

इतने में शोर सुन के पिताजी और माँ भी बाहर आ गए|

पिताजी: क्या हुआ भई? मानु...तू यहाँ क्यों सो रहा है?

मैं: जी वो...

संगीता: पिताजी....पता नहीं दोनों कहाँ गए थे? कपडे देखो इनके? कब आये कुछ पता नहीं? नेहा यहाँ कैसे पहुंची कुछ पता नहीं? अनिल कहाँ है, कुछ पता नहीं?

पिताजी: बेटा बात ये है की ये तीनों.... मतलब ये, अनिल और दिषु Party करने गए थे! मुझे बता के गए थे!

संगीता: Party? मतलब आपने शराब पी?

मैं: No Baby! Remember I promised you and dad!

संगीता: अनिल कहाँ है?

इतने में अनिल अपना सर पकडे बाहर आ गया|
 
अनिल: मैं इधर हूँ दीदी! आह! सर दर्द से फट रहा है!

संगीता समझ चुकी थी की अनिल ने शराब पी रखी है|

दीदी: तूने शराब पी?

अनिल: Sorry दीदी...ये मेरा और दिषु भैया का प्लान था| जीजू ने मन किया था पर हमारे जोर देने पे वो हमारे साथ Bachelor's पार्टी के लिए गए थे| पर उन्होंने एक बूँद भी शराब नहीं पी! उनकी कोई गलती नहीं!

संगीता: तूने शराब कब से पीनी शुरू की?

अनिल: वो roomies के साथ कभी-कभी पी लेता था!

संगीता: देखा पिताजी...!

पिताजी: बेटा आज की young Generation ऐसी ही है| खेर छोडो इस बात को ..आज तुम दोनों की शादी है! मानु की माँ ...अनिल को चाय दो...इसका सर दर्द बंद हो तो ...आगे का काम संभाले|

अनिल: पिताजी...बस एक कप चाय और मेरा इंजन स्टार्ट हो जाएगा|

सुमन: पिताजी: मैं चाय बनाती हूँ|

मैं उठा और अपने कमरे में जाके चेंज करने लगा और फ्रेश होने लगा| तभी पीछे से संगीता आ गईं;

संगीता: Sorry

मैं: Its ओके जानू! Now gimme a kiss and smile!

संगीता: कोई Kiss Wiss नहीं ...जो मिलेगी सब रात को?

मैं: यार... that's not fair! कम से कम सुबह के गुस्से के हर्जाने के लिए एक Kiss दे दो!

उन्होंने ना में गर्दन हिलाई| और मैं बाथरूम जाने को मुदा की तभी उन्होंने अचानक से मुझे अपनी तरफ घुमाया और अपने पंजों पे खड़े हो के मुझे Kiss किया| मेरे दोनों हाथ उनके पीठ पे लॉक हो गए थे और उनके हाथ मेरी पीठ पे लॉक थे| मैं उनके होठों को चूसने में लगा था और उनके बदन की महक मुझे पागल कर रही थी| इतने में सुमन चाय ले के आ गई, हम ये भूल ही गए की दरवाजा खुला है|

सुमना: (खांसते हुए) ahem ! चाय for the love birds!

हम अलग हुए, और सुमन को मुस्कुराता हुआ देख संगीता ने मेरे सीने में अपना मुँह छुपा लिया| सुमन ने चाय टेबल पे रख दी और हमें देखने के लिए खड़ी हो गई| मैंने सुमन को जाने का इशारा किया..पर वो मस्ती में जानबूझ के खड़ी रही और मुस्कुराती रही| इतने में अनिल वहाँ आ गया और संगीता और मुझे इस तरह गले लगे हुए देख वो समझ गया और उसने सुमन का हाथ पकड़ा और खींच के बाहर ले गया|

मैं: Hey ...they're gone!

संगीता: They?

मैं: हाँ अनिल और सुमन|

संगीता: हे राम!

मैं: चलो जल्दी से Kiss निपटाओ और ....

संगीता: न बाबा ना ...बस अब नहीं...अगर माँ आ गईं तो डाँट पड़ेगी!

खेर मुहूर्त नौ बजे का था ... हमें यहाँ से बरात लेके छतरपुर जाना था| वहीँ का एक फार्महाउस पिताजी ने बुक किया था| संगीता, सुमन, अनिल, दिषु के माता-पीता और हमारे कुछ जानने वाले भौजी की तरफ थे| बरात लेके हम समय से पहुसंह गए और जो भी रस्में निभाईं जाती हैं वो निभाई गईं| अब बारी थी कन्यादान की! जब पंडित जी ने कन्यादान के लिए कहा तो पिताजी स्वयं आगे आये और पूरे आशीर्वाद के साथ उन्होंने कन्यादान पूरा किया| संगीता की आँखों से आंसूं की एक बूँद गिरी| मैंने देख लिया था पर उस समय रस्म चल रही थी तो मैं कुछ नहीं बोला| जैसे ही कन्यादान की रस्म समाप्त हुई मैंने उनके आंसूं पोछे और मेरे ऐसा करने से सब को पता चल गया की वो रो रहीं हैं| माँ उनके पीछे ही बैठी थीं, उन्होंने संगीता को थोड़ा प्यार से पुचकारा और उन्हें शांत किया| खेर इस तरह सारी रस्में पूरी हुईं और हम रात एक बजे के आस-पास घर पहुँचे|

ग्रह प्रवेश की रस्म हुई ... उसके बाद सब बैठक में बैठे थे...मैं और संगीता भी| बच्चे हँस-खेल रहे थे; मैंने उन्हें अपने पास बुलाया और बोला;

मैं: नेहा...आयुष....बेटा अब से आप मुझे सब के सामने पापा "कह" सकते हो!

दोनों ने मुझे सब के सामने पापा कहा और मेरे गले लग गए| दोस्तों मैं बता नहीं सकता मेरी हालत उस समय क्या थी? गाला भर आया था और मैं रो पड़ा| पिताजी उठे और मेरे कंधे पे हाथ रख के मुझे शांत करने लगे|

मैं: पिताजी......मुझे....सात साल लगे....सात साल से मैं आज के दिन का इन्तेजार कर रहा था|

पिताजी: बस बेटा...शांत हो जा...अब सब ठीक हो गया ना! अब तुम दोनों पति-पत्नी हो! बस-बस!

माँ: (मेरे आंसूं पोंछते हुए) बेटा.... तू बड़े surprise प्लान करता है ना? आज मैं तुझे पहला सरप्राइज देती हूँ? ये ले... (उन्होंने एक envolope दिया)

मैं: ये क्या है?

माँ: खोल के तो देख?

मैंने उस envelope को लिया तो वो भारी लगा...उसे खोला तो उसमें से चाभी निकली! इससे पहले मैं कुछ कहता माँ बोलीं;

माँ: तेरी नई गाडी! क्या नाम है उसका?

पिताजी: Hyundai i10!

मैं: Awwwwwwww thanks माँ! मैं उठ के माँ के गले लग गया| Thank You Thank You Thank You Thank You Thank You Thank You !!!

पिताजी: O बस कर thank you ...अब मेरी बारी ये ले... (उन्होंने भी मुझे एक चाभी का गुच्छा दिया|)

मैं: अब ये किस लिए? एक साथ कितनी गाड़ियाँ दे रहे हो आप?

पिताजी: ये तेरे फ्लैट की चाभी है!

मैं: मेरा फ्लैट? पर किस लिए? और मैं क्या करूँ इसका? Wait ...wait ....Wait .... आप मुझे अलग settle कर रहे हो! Sorry पिताजी.... मैं ये नहीं लेने वाला|

पिताजी: बेटा...तुम लोग अपनी अलग जिंदगी शुरू करो| कब तक हमसे यूँ बंधे रहोगे|

संगीता उठी और मेरे हाथ से चाभी ली और पिताजी को वापस देते हुए बोली;

संगीता: Sorry पिताजी! हम आपके साथ ही रहेंगे...एक ही शहर में होते हुए आपसे अलग नहीं रह सकते| मुझे भी तो माँ-बाप का प्यार चाहिए! और आप मुझे इस सुख से वंचिंत करना चाहते हो?

माँ: देख लिया जी...मैंने कहा था न दोनों कभी नहीं मानेंगे| मुझे अपने खून पे पूरा भरोसा है| अच्छा बहु ये चाभी तू अपने पास ही रख|

मैं: (संगीता से चाभी लेते हुए) ये आप ही रखो... हमें नहीं चाहिए|

पिताजी: अच्छा भई...ये बाद में decide करेंगे| अभी बच्चों को सुहागरात तो मनाने दो|

अनिल और सुमन जो अभी तक चुप-चाप बैठे थे और हमारा पारिवारिक प्यार देख रहे थे वो आखिर बोले;

अनिल: जीजू...आप का कमरा तैयार है? चलिए !

हम कमरे में घुसे तो अनिल और सुमन दोनों ने कमरे को सजा रखा था| सुहाग की सेज सजी हुई थी और मैं देख के हैरान था...की wow ....!!! इतने मैं आयुष और नेहा भागते हुए आये और जगह बनाते हुए मेरी टांगों में लिपट गए|

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आयुष: मैं तो यहीं सोऊँगा|

नेहा: मैं भी पापा के पास सोऊँगी|

अनिल: ओ हेल्लो... ये तुम दोनों के लिए नहीं है| आपके मम्मी-पापा के लिए है| आप आज सुमन जी के साथ सो जाओ|

बच्चे जिद्द करने लगे....

मैं: कोई बात नहीं यार... सोने दे|

इतने में पिताजी बोले;

पिताजी: बच्चों ...आप में से किस को कल Special वाली Treat चाहिए?

दोनों एक साथ बोले; "मुझे"

पिताजी: तो फिर आज आप दोनों दादी और सुमन "मामी" के साथ सोओगे|

मैं: मामी? (अनिल के और सुमन के गाल लाल हो गए|)

पिताजी: हाँ भाई... अब सिर्फ शादी अटेंड करने के लिए तो कोई नहीं आता ना?

पिताजी की बात बिलकुल सही थी और सब समझ चुके थे की अनिल का इरादा क्या है? खेर सब बाहर गए और मैंने कमरा लॉक किया और उनकी तरफ मुड़ा;

मैं: FINALLY !!!! WE'RE TOGETHER !!!

संगीता: नहीं अभी नहीं...अब भी पाँच फुट का गैप है! ही...ही...ही...ही...

खेर वो रात मेरे लिए कभी न भूलने वाली रात थी! उस रात मैंने जो चाहा वो सब मिल गया| Thanks भगवान...and Thanks to you guys! सुहागरात के बारे में मैं कुछ नहीं लिख सकता क्योंकि NOW Its PERSONAL! Hope You'll understand !!!

A SWEET BEGINNING !!!
 
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परसों ससुर जी और सासु माँ आये थे जिनके बारे में मैंने आपको बहुत Brief में बताया था, तो उस बारे में भी आपको बता दूँ की आखिर बात क्या हुई| सुबह उठ के हम चाय पि रहे थे और बच्चे भी अभी नहीं उठे थे| दरवाजे पे दस्तक हुई, संगीता ठ के दरवाजा खोलने जा रही थी की मैंने उसे रोका और खुद ही दरवाजा खोलने चला गया| दरवाजा खोलते ही सामने देखा तो ससुर जी और सासु माँ खड़े थे| मैं एक दम से झुक के उनके पाँव हाथ लगाने लगा तो उन्होंने मुझे आधे में ही रोक लिया और ससुर जी ने मुझे अपने गले लगा लिया| इतने में पिताजी भी पीछे से आ गए;

पिताजी: समधी जी आप?

तब ससुर जी ने मुझे छोड़ा और मैं सासु माँ के पाँव चुने लगा| पिताजी की आवाज सुन के माँ और संगीता भी उठ के आ गए और अपने माता-पिता को देख संगीता की आँखें भर आईं पर वो अपनी जगह से हिली नहीं| पिताजी और ससुर जी गले मिले और इधर माँ और सासु माँ गले मिले| इस मिलनी का फायदा उठा के मैं संगीता के पास पहुँचा;

मैं: जान...आप खड़े क्यों हो? मम्मी-डैडी से गले नहीं मिलोगे?

संगीता रो पड़ी और मेरे कंधे पे सर रख के बोली;

संगीता: पिताजी ने आपकी इतनी बेइज्जती की और आप....

मैं: (मैंने उनकी बात काट दी) Hey ...वो बड़े हैं..गुस्से में थे..कुछ कह दिया तो क्या हुआ? और आपने आज देखा ना...उन्होंने मुझे गले लगा लिया, अब इससे ज्यादा और क्या चाहिए आपको?

संगीता अब भी हिचक रही थी|

मैं: okay बाबा..माँ से तो मिलो? उन्होंने ने तो कुछ नहीं कहा था ना?

मैं उन्हें अपने साथ ले के मम्मी जी के पास लाया और वो उनसे गले मिली| मम्मी ने उनका माथा चूमा और तभी डैडी ने उनसे कहा;

ससुर जी: बेटी मुझसे गले नहीं लगेगी? अब तक नाराज है मुझ से?

संगीता उनके पास नहीं गई;

मैं: Hey? Come on ..

ससुर जी: बेटा (मैं) मुझ से गलती हो गई (उन्होंने हाथ जोड़े)...

पिताजी: (उनकी बात काटते हुए) नहीं ..नहीं समधी जी... आप ये क्या कर रहे हैं? कोई बात नहीं है...ये आपका भी उतना ही बेटा है जितना मेरा है| गुस्से में हो गया सो ओ गया..आप आइये और बैठिये|

ससुर जी: नहीं समधी जी...मैंने अपने सारे अधिकार खो दिए| मैं गुस्से से अँधा हो गया था| मुझे सब कुछ बाद में पता चला.. मानु ने जो हमारे परिवार के लिए किया ...वो सब जानने के बाद सच कहूँ तो ...मेरी हिम्मत नहीं होती की मैं आपके सामने भी खड़ा रह सकूँ| (वो झुक के पिताजी के आंव छूने लगे तो पिताजी ने उन्हें रोक दिया|) मैंने उसे इतना गलत समझा...उसे इतना भला-बुरा कहा और आज उसने मुझे देखते ही पाँव छुए.... मैं शर्मसार हूँ!

पिताजी: नहीं समधी जी... जो हुआ सो हुआ... मिटटी डालिये उन बातों पर| मानु की माँ...चाय रखो!

ससुर जी: अरे नहीं समधी जी...बेटी के घर का तो पानी भी नहीं पी सकते|

पिताजी: अरे समधी जी..वो सब पुरानी बातें हैं|

मैं: डैडी ..प्लीज ....

पिताजी: बस समधी जी... अब आप मना नहीं करेंगे|

ससुर जी ने मुझे अपने बॉस बिठा लिया और ये देख के संगीता अंदर अपने कमरे में आ गई थी| मैं उठा और अपने कमरे में आ गया| बच्चे अभी भी नहीं उठे थे, और संगीता बेड के किनारे खड़ी थी|

मैं: Hey ... listen to me ... आप मुझसे प्यार करते हो ना?

संगीता ने हाँ में सर हिलाया|

मैं: तो मेरे लिए प्लीज मेरे लिए...डैडी जी से मिल लो!

संगीता आ के मेरे गले लग गई| फिर वो मेरा हाथ पकड़ के बाहर आईं और अपने पिताजी से गले मिलीं और रो पड़ीं| डैडी जी ने बहुत कोशिश की पर वो चुप नहीं हुईं और अब तो डैडी जी की आँखें भी छलक आईं| आखिर वो मेरे गले लगीं और फिर मैंने उनके सर पे और बालों में हाथ फेरा तब जाके वो चुप हो गईं|

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I'm Back to Complete My Story !!!
 
आप सभी मित्रो का तह'दिल से धन्यवाद।।।।।।।//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
Aap SBI dosto ka Bahut-2 sukriya //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svg
 
ससुर जी: समधी जी ...आज दोनों को ये प्यार देख के मुझे यकीन हो गया की मेरी बेटी ने सही वर चुना है|

अब शर्म से मेरे गाल लाल हो गए थे!

मैं: डैडी जी...मैं आप को और मम्मी जी को ...एक खुशखबरी देना चाहता हूँ! संगीता प्रेग्नेंट है...उसे डेढ़ महीना हो गया है!

सासु माँ: बधाई हो समधन जी!

ससुर जी: बधाई हो समधी जी..और तुम दोनों को भी बधाई हो! ये बड़ी जबरदस्त खुशखबरी है! इसे मैं ऐसे नहीं जाने दूँगा... मैं अभी आया|

मैं: डैडी जी..आप कहाँ जा रहे हो?

ससुर जी: मिठाई लेने

माँ: अरे समधी जी ये लीजिये मुँह मीठा कीजिये|

माँ ने मिठाई का एक डिब्बा फ्रिज से निकाल के पिताजी को दिया और पिताजी ने मिठाई का एक पीस अपने हाथ से डैडी जी को खिलाया और इस तरह सब को मिठाई खाने-खिलाने का दौर चल पड़ा| सब बहुत खुश थे तभी डैडी जी बोले;

ससुर जी: बेटा तब तो कुछ दिन बाद मैं दुबारा तुम्हें लेने आऊँगा?

संगीता: जी पर क्यों?

ससुर जी: बेटा..तुम माँ बनने वाली हो ....मायके तो आना ही होगा? फिर नेहा और आयुष भी तो....

मैं: (उनकी बात काटते हुए) Sorry डैडी जी, पर मैं संगीता का पूरा ख्याल रखूँगा!

ससुर जी: पर बेटा ... तुम काम में बिजी रहोगे और फिर समधन जी को अकेले सब सम्भालना पड़ेगा|

मैं: नहीं.. डैडी जी... मैं काम पे जाना छोड़ दूँगा...पिताजी संभाल लेंगे!

पिताजी: समधी जी, बात ये है की ये दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकते! इसने तो अभी से इसकी देखबाल शुरू कर दी है| एक नौकरानी आती है जो कपडे, झाड़ू और बर्तन कर के जाती है और पिछले तीन दिनों से तो ये लाड-साहब खाना भी बना रहे हैं|

ये सुन के सारे हँस पड़े और मेरी भी हँसी छूट गई|

घर में हँसी-ख़ुशी का माहोल था और ये हँसी ठहाका सुन बच्चे भी बाहर आ गए और नाना-नानी को देख मेरे पास खड़े हो गए|

मैं: बच्चों ...नाना-नानी के पाँव छुओ!

मेरी बात सुन के दोनों ने जाके उनके पाँव छुए और डैडी जी और मम्मी जी उन्हें दुलार करने लगे|

ससुर जी: बेटा...तुमहरा दिल बहुत बड़ा है...तुमने दोनों को इस तरह अपना लिया जैसे ये दोनों तुम्हारा ही खून हैं|

मैं: Actually ..डैडी जी...आयुष ...मेरा ही खून है और रही नेहा की बात तो...मैंने उसे उसके असल बाप से भी ज्यादा प्यार किया है| मैंने कभी दोनों में फर्क नहीं किया और ना ही उस नए मेहमान के आने के बाद करूँगा|

ससुर जी और सासु माँ हैरान हुए, होना भी था पर अगले पल दोनों के मुख पे मुस्कान आ गई|

सासु माँ: बेटा...तो क्या जब तुम गाँव आये थे तब....(उन्होंने बात आधी छोड़ दी|)

मैं: जी... उन दिनों में हम बहुत नजदीक आ गए और ....

फिर मैंने उन्हें सारी कहानी शुरू से आखिर तक सुना दी|

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