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एक अनोखा बंधन**:-कि नई शुरुआत (2) complete

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अब मेरा मन उनके मुख से शब्द सुनने को तड़पने लगा था;

मैं: प्लीज...प्लीज...कुछ बोलो.... I….I … .. don’t want to upset you…please…..

पर वो कुछ नहीं बोलीं...इतने में माँ हमें ढूंढती हुई आ गईं;

माँ: बहु तू चल मेरे साथ....

मैं: माँ...

माँ: बस! अब बहुत तंग कर लिया तूने बहु को!

मैं सर झुकाये खड़ा था और इतने में पिताजी और बच्चे भी आ गए और बच्चे भागते हुए मेरे पास आ गए| पिताजी ने उन्हें सारी बात कहना चाहा पर मैंने मना कर दिया| बच्चे बहुत खुश थे ....आज पहलीबार बच्चे शहर से बाहर आये थे और मैं उसने उनकी ये ख़ुशी छीनना नहीं चाहता था|

पिताजी: बेटा ...तू किस मिटटी का बना है.... अपनी पत्नी को नाराज कर दिया ...सिर्फ बच्चों की ख़ुशी के लिए? पत्नी को समझा सकता है बच्चों को नहीं?

मैं: पिताजी..... संगीता बच्चों से बड़ी है...उसमें इनसे समझ ज्यादा है ....सोचा था की समझ जाएगी...पर ये तो बच्चे हैं...समझाने से समझेंगे नहीं| फिर इसी तरह मुझसे लिपटे रहेंगे...और कहीं उन्हें गुस्सा आ गया तो ...बच्चे सहम जायेंगे! रही बात उनकी तो...वो भी समझा जाएँगी|

मैंने बच्चों को Ice-cream खरीद के दी और वो ख़ुशी-ख़ुशी खाने लगे| आयुष मेरी दाहिने तरफ था और मेरा दाहिना हाथ पकडे हुए था और नेहा मेरी बायीं तरफ खड़ी थी और मेरा दाहिना हाथ थामे हुए थी| दोनों Ice-Cream खा रहे थे और बड़े भोलेपन से अपनी-अपनी बातें कर रहे थे| मैं दोनों क हाथ पकडे हुए उनकी प्यार-प्यारी बातों में खो गया था! पिताजी,माँ और संगीता ...तीनों मेरे ही कमरे में बैठे थे और मैं बच्चों के साथ चलते हुए होटल के गार्डन में आ गया| नेहा और आयुष घूमने का प्लान बना रहे थे और मैं उनकी हाँ में हाँ मिला रहा था| करीब आधे घंटे बाद हम तीनों गार्डन से निकले .....सामने संगीता खड़ी थी| काफी गंभीर लग रही थीं.... वो चल के मेरे पास आई और मेरे गले लग गईं|

संगीता: I'm SORRY!

मैं: Hey….Hey…..Hey….. its okay, and I’m Sorry too… अब छोडो इन बातों को..... Come on lets have lunch.

मैं जान गया था की उन्हें मेरी बात समझ आ चुकी है...और हम दोनों की Sorry ने दोनों को दिल की व्यथा को एक दूसरे के सामने रख दिया था| खेर माँ-पिताजी, बच्चे और हम दोनों सब ने मिल के लंच किया और अपने-अपने कमरों में आराम करने जाने लगे| पर as usual बच्चे फिर से मुझसे चिपक गए! पर इस बार संगीता ने कुछ नहीं कहा बल्कि आयुष को गोद में उठा लिया और हमारे वाले कमरे में घुस गई, उनके पीछे-पीछे नेहा भी कमरे में घुस गई|

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Shukriya dosto......,✍✍✍//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49e.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svg
 
//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49e.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svgआप सभी को मेरी और साइट राजशर्माकहानियों की तरफ से महाशिवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।।।।//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33f.svg
 
Thanks guys //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49e.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svg
 
अब galery में बस मैं, माँ और पिताजी रह गए थे;

माँ: बेटा...बहु ने हमें सब बताया...जो भी तुम-दोनों की बात हुई! बेटा...वो गलत नहीं है...पत्नी को भी अपने पति से प्यार की उम्मीद होती है..और तुम दोनों तो पहले से ही एक दूसरे को इतना चाहते हो| ऐसे में अचानक तुम्हारा प्यार सिर्फ और सिर्फ बच्चों को मिले ....इससे वो बेचारी तुम्हारे प्यार से वंचित यह जाएगी| मैं जानती हूँ की ये बस शुरुआत है..और धीरे-धीरे तुम सब संभाल लोगे| पर बेटा...इतना याद रखना की वो माँ बनने वाली है.... तुम्हें उसे वो साड़ी खुशियां देनी चाहिए जिसपर उसका हक़ है!

मैंने हाँ में सर हिलाया और माँ ने सर पे हाथ फेरा और अपने कमरे में दाखिल हो गईं, इस वार्तालाप के दौरान पिताजी बिलकुल खामोश खड़े थे ...उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं कहा| शायद वो जानते थे की मैं सब संभाल लूंगा...अपने पिता और पति होने कर दायित्व को Blance कर लूंगा| वो मुझे देख के मुस्कुराये जैसे कह रहे हों, "बेटा...मुझे तुम पे पूरा भरोसा है"| खेर मैं भी अपने कमरे में आ गया| अंदर घुस के देखा तो आयुष संगीता से चिपक के बैठा था और नेहा टी.वि. के सामने बैठी थी और Ben 10 कार्टून देख रही थी|

मैं भी आके बिस्तर में बैठ गया;

मैं: तो Guys क्या हो रहा है?

नेहा: पापा...देखो....देखो अभी Ben कैसे एलियन बनेगा!

आयुष: दीदी ..हटो ना...आप बीच में आ रहे हो!

संगीता: सुन लिया ? ही...ही...ही....

मैं: हाँ ....

मैं मुस्कुराया क्योंकि नेहा और आयुष दोनों टी.वी. देखने में इतना मग्न थे की मेरी बात सुन ही नहीं रहे थे!

मैं: ओके Guys .... चलो सो जाओ...दो दिन से सोये नहीं आ प लोग...चलो...चलो.....!

आयुष: नहीं पापा....Ben 10 देखना है!

मैं: बेटा...शाम को नया एपिसोड देखना...अभी सो जाओ...

मैं उठा और जिस तरफ मैं लेता था उस तरफ मैंने कुछ कुर्सियां पलंग से सटा के लगा दिन...जिससे थोड़ा extra space बन गया| मैंने बच्चों को बायीं तरफ लिटाया और उनपर कंबल डाल दिया| कुर्सी सटी होने के कारण बच्चे पलंग से गिरते नहीं| संगीता मेरी दायीं तरफ थी...करीब आधे घंटे बाद बच्चे सो गए...तब मैं संगीता की तरफ करवट लेके लेट गया;

मैं: ह्म्म्म्म्म...तो बेगम कहिये क्या हुक्म है?

संगीता: कोई हुक्म नहीं....शिकायत जर्रूर है? आप तो कहते थे की मेरे बिना आपको नींद नहीं आती...तो फिर परसों जब पिताजी ने आपको सोने को कहा तो आप ऊपर वाली birth पे जाके क्यों सो गए?

मैं: जान ....पिताजी का हुक्म था...कैसे ठुकरा देता! वैसे नींद तो फिर भी नहीं आई थी...पर धीरे-धीरे आपके प्यार के एहसास ने सुला दिया|

संगीता: मेरा प्यार का एहसास? वो कैसे? मैं तो नीचे सोई थी?

मैं: जान...आपने अकबर-बीरबल की कहानी नहीं सुनी? एक गरीब आदमी, यमुना के ठन्डे पानी में साड़ी रात सिर्फ महल से आ रहे प्रकाश की गर्मी के बारे में सोच के खड़ा रह सकता है तो ...आप तो बस एक birth नीचे सो रहे थे?

संगीता: आप ना...... आपसे तर्क में कोई नहीं जीत सकता! खेर....अब बताइये की आज का प्लान क्या है?

मैं: सिंपल है ...बच्चों को डिनर के बाद पिताजी और माँ के कमरे में सुला दूँगा| फिर आप और मैं रात को walk पे निकलेंगे| वापस आके....हम्म्म्म....

मुझे आगे कुछ बोलना नहीं पड़ा...संगीता सब समझ गई थी!

रेलगाड़ी के सफर से हम थके हुए थे...तो इसलिए पांच बजे तक सब आराम करते रहे| इधर मेरे कमरे में संगीता और मैं एक दूसरे की तरफ करवट लेके लेते थे और उनका हाथ मेरे कंधे पे और मेरा हाथ उनकी कमर पे था| कुछ देर में आयुष उठा और एकदम से मुझ पे कूदा...इस वजह से हम दोनों की आँखें खुलीं;

आयुष: पापा ...भूख लगी है?

मैं: हम्म्म...चलो अपनी दीदी को उठाओ फिर आपके दादा-दादी के कमरे में चलते हैं और कुछ खाने को आर्डर करते हैं|

मुँह-हाथ धो के हम चारों माँ-पिताजी के कमरे में आ गए| हमने कमरे में ही बैठ के चाय-नाश्ता किया ... घूमने का प्लान कल ही था....तो आज हम सब आराम करने वाले थे| चाय पीने के बाद मैंने सोचा की आस-पास की मार्किट में घुमा-फिरा जाए! पर माँ ने कहा की वो आराम करेंगी...अब जाहिर था की पिताजी भी उनके साथ ही रूकेंगे| शायद वो हम दोनों को कुछ अकेल समय देना चाहते थे...पर बच्चे! वो तो घूमने की बात से ही कूदने लगे! अब मैं उन्हें मन तो कर नहीं सकता था| पिताजी और माँ ने बहुत कोशिश की पर दोनों नहीं माने, और मेरे दोनों हाथ पकड़ के बाहर जाने की जिद्द करने लगे| खेर हम चारों बाहर आ गए और मार्किट में घूमने लगे| एक artificial jewellery की दूकान पे हम रुके....संगीता तो कुिच ज्वेलरी देखने लगी और इधर आयुष चॉकलेट के लिए जिद्द करने लगा|

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मैं: बेटा एक बार मम्मी jewellery देख लें फिर हम सब मिलके चलते हैं|

आयुष: प्लीज पापा...प्लीज...प्लीज...प्लीज ....

संगीता: आप जाओ मैं और नेहा यहीं हैं...!

मैं आयुष को लेके चॉकलेट दिलाने लगा और फिर हम दोनों उसी दूकान पे आ गए|

मैं: क्या लिया आपने?

संगीता: माँ के लिए ये Bangles ली हैं|

मैं: और अपने लिए?

संगीता: अभी कुछ पसंद नहीं आ रहा|

मैं: तो चलो कहीं और चलते हैं?

संगीता: नहीं...देर हो रही है|

मैं: क्यों आपने जा के रोटियाँ पकानी हैं? हम छूटियों पे आये हैं....चलो...वहाँ चलते हैं|

पास ही एक Jewellery store था...तो हम वहां पहुँच गए|

संगीता: पर यहाँ क्या लेंगे?

मैं: कुछ सोचा है मैंने!

हम अंदर घुसे ...और एक लेडी हमारे पास आई और पूछने लगी की हम क्या लेना चाहेंगे?

मैं: उम्म्म.. please show us some design for करधनी!

ये सुनते ही संगीता आँखें बड़ी करके मेरी तरफ देखने लगी|

संगीता: पर मैं.....मैंने कभी नहीं पहनी?

मैं: तो अब पहन लेना?

संगीता: मुझे शर्म आती है!

मैं: यार मेरे लिए पहन लेना? प्लीज!

संगीता: ठीक है...पर पसंद आप करोगे?

मैं: Done!

उस लेडी ने हमें काफी डिज़ाइन दिखाए .... पर मुझे कुछ जच नहीं रहा था| दरअसल उनका साडी पहनने का ढंग बिलकुल भारतीय नारी जैसा था ....100% Traditional !!! उनका नैवेल...वो तो कभी दिखा ही नहीं! इसलिए मुझे डिज़ाइन चुनने में बड़ी दिक्कत आई| वैसे नैवेल दिखाना मुझे भी पसंद नहीं..पर atleast मुझे दिखे? पर नहीं....खेर डेसिग्न्स को दोबार देखने पे आखिर एक डिज़ाइन कुछ ठीक लगा| मैंने वो डिज़ाइन संगीता को पहन के दिखाने को कहा तो वो मुझे घूरने लगी...जैसे की मैं उन्हें Public में Kiss करने को कहा हो?

मैं; ओके...ओके.... आप इसे ही पैक कर दो!

हम billing counter तक आ रहे थे;

संगीता: आपने मुझे उस औरत के सामने try करने को क्यों कहा?

मैं: तो क्या हुआ...वो भी तो औरत ही थी...और कौन सा आपको वहीँ try करना था...अंदर जा के कर लेते!

संगीता: मुझे शर्म आती है! और इसे भी मैं सिर्फ तभी पहनूंगी जब हम दोनों अकेले होंगे!

मैं: ठीक है बाबा...I won't force you ....

बिल pay करके हम होटल वापस आ गए| पर संगीता ने करधनी की बात किसी को नहीं बताई! माँ ने जब चूड़ियाँ देखीं तो बोलीं;

माँ: बहु.... तू अपने लिए कुछ नहीं लाइ?

संगीता ने शर्म से सर झुकाया और ना में सर हिलाया|

माँ: क्यों? तो मेरे लिए चड्डियाँ क्यों लाई? बेटा हम यहाँ तुम दोनों के लिए आये हैं...खरीदारी तुम लोगों करनी चाहिए अपने लिए ना की हमारे लिए| हम तो बूढ़े हो गए हैं!

संगीता: माँ.... साड़ी उम्र आप ने बच्चों के लिए कुछ न कुछ खरीदा है...तो क्या बच्चों का फ़र्ज़ नहीं बनता की वो अपने माँ-बाप के लिए कुछ खरीदें? जब से मैं आई हूँ आप को अपने लिए कुछ भी खरीदते हुए नहीं देखा? हमेशा तो ये (मैं) ही आप सब के लिए कुछ न कुछ ले आते हैं| तो मैंने सोचा की इस बार मैं आपके लिए कुछ लाऊँ|

माँ ने उन्हें गले लगा लिया....और उनका माथा चूमते हुए बोलीं;

माँ: बेटी....तू बहु नहीं मेरी बेटी है! और तू (मैं) सुन ले...अगर तूने इसे कभी दुखी किया ना तो तेरी खेर नहीं|

पिताजी: हाँ बेटा... अगर बहु कभी उदास दिखी ना तो गिर तेरी सुताई पक्की है!!!

ये सुन के सारे हँस पड़े!

मैं: यार ये सही है......सब के सब आपकी तरफ हो गए? मैं अकेला रह गया?

आयुष: नहीं पापा मैं आपकी तरफ हूँ|

नेहा: और मैं भी हूँ!

पिताजी: ले भाई तेरी टीम भी तैयार है! हा..हा...हा....

मैं: काहे की टीम....जब पिटाई होगी तो सब से पहले ये ही भाग जायेंगे!!!! हा..हा...हा...

ये सुन के सब जोरों से हँस पड़े!!! खेर खाने का समय हो गया था, अब ठण्ड में कौन बाहर जाए तो मैंने खाना कमरे में ही मंगा लिया| खाने के बाद, माँ और संगीता तो सोफे पे बैठे सीरियल देखने लगे| पिताजी संतोष को फोन करने के लिए बाहर चले गए|

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//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg धन्यवाद मित्रों।।।।।।।
 
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मैंने मौके का फायदा उठाने के लिए बच्चों को पिताजी के बेड पे लिटा दिया;

मैं: किसे कहानी सुन्नी है?

दोनों तैयार हो गए और आके मेरी अगल बगल लेट गए| मैं दोनों का सर थप-थापा के सुलाने लगा और कहानी सुनाने लगा| संगीता मुझे देख-देख के हँस रही थी.... मैं भी मुस्कुरा रहा था| दस बजे पिताजी फोन पे बात खत्म कर के आये;

मैं: कैसा चल रहा है काम?

पिताजी: ठीक ठाक चल रहा है.... पर overtime नहीं हो रहा है| Deadline 4 जनवरी की है ...मुझे तो लगता है की काम खतम होने से रहा|

मैं: आप चिंता ना करो.... हम तो दो को ही घर पहुँच जायेंगे ...उसी दिन रात से ओवरटाइम करवा के मैं काम खतम करवा दूँगा|

मैंने बच्चों की तरफ देखा तो दोनों सो गए थे...या कम से कम मुझे तो लगा की वो सो गए हैं! मैं धीरे से उठा और पिताजी को good night कह के अपने कमरे में जाने लगा की इतने में नेहा उठ के बैठ गई;

नेहा: पापा...प्लीज...मुझे आपके बिना नींद नहीं आती!

पिताजी: बेटा तू यहाँ सो जा...मैं तुझे एक बहुत अच्छी कहानी सुनाऊंगा! (पिताजी ने उसे प्रलोभन दिया)

नेहा: नहीं दादा जी...मैं पापा के पास सोऊँगी!

पिताजी: देख बेटा फिर मैं तुझसे कभी बात नहीं करूँगा? कट्टी!

नेहा उनके पास गई और उनके पाँव छू के बोली;

नेहा: sorry दादा जी..... मुझे माफ़ कर दो! पर मुझे पापा के बिना नींद नहीं आती|

पिताजी: अच्छा ये बता ...जब तेरा बाप रात-रात भर घर नहीं आता और काम में व्यस्त होता है तब तू कैसे सोती है?

संगीता: पिताजी...ये बड़ी शैतान है...ये तब भी नहीं सोती| मुझसे फोन करवाएगी इनको (मुझे) और आधा-आधा घंटा फोन पे बात करती है...कहानियां सुनती है...तब जाके सोती है| और तो और अगर सुबह 3 - 4 बजे अगर ये आ जाएं और बिस्तर में लेते तो पता नहीं कैसे इसे पता चल जाता है और अपने आप इन्हें झप्पी डाल के सो जाती है|

पिताजी: ह्म्म्म्म्म...बहु तुम्हें पता नहीं...पर ये (मैं) भी ऐसा ही था| कहते है ना की बाप और बेटी का रिश्ता और माँ और बेटे का रिश्ता बड़ा करीबी होता है| पर जब ये छोटा था तो मुझसे लिप्त रहता था....माँ के पास तो ये सिर्फ खाने-पीने जाता था| बाकी घूमना-फिरना, सोना, खेलना...सब मेरे साथ| बिलकुल मानु जैसी आदतें हैं नेहा की... (और पिताजी मुस्कुराने लगे)

मैं: चलो बेटा|

मैं, नेहा और संगीता अपने कमरे में आ गए| नेहा तो कमरे में घुसते ही पलंग पे जा चढ़ी और बीच में लेट गई| मैं और संगीता अभी दरवाजे के पास ही खड़े थे| उसकी ये हरकत देख के संगीता खिल-खिला के हँस पड़ी!

मैं अपना सर पकडे दरवाजे पे खड़ा था....अब मैं कैसे नेहा को समझाऊँ?

मैं:अच्छा नेहा बेटा...एक बात बताओ?

नेहा: जी

मैं: आप मुझे प्यार हो और मेरे साथ चिपक के सोना चाहते हो .........आपकी मम्मी भी मुझे प्यार करती हैं और मेरे साथ सोना चाहती हैं............ और मैं तो आप दोनों से प्यार करता हूँ........... तो मैं कैसे मैनेज करूँ? अगर आपके साथ सोया तो आपकी मम्मी नाराज हो जाएँगी....और उनके साथ सोऊँ तो आप नाराज हो जाओगे? तो मैं यहाँ इस सोफे पे सो जाता हूँ|

नेहा कुछ सोचने लगी और फिर तपाक से बोली;

नेहा: नहीं पापा...एक आईडिया है...आप बीच में सो जाओ और हम दोनों आपसे लिपट के सो जाते हैं!

उसके भोलेपन पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था और संगीता उसके पास जा पहुंची और उसके माथे को चूमते हुए बोली;

संगीता: Awwwwwwww ...... देखा? बिलकुल आप पे गई है! हर समस्या का हल कितनी आसानी से निकाल लेती है|

मैं: आखिर बेटी किस की है?

संगीता: तो आ जाओ ...बीच में.....ही...ही...ही...ही....

I had no choice…except to sleep in between them. मैं बीच में लेट गया...बड़ी अजीब सी feeling हो रही थी! मेरे लेटते ही संगीता ने मेरी दाहिनी बाजू को अपना तकिया बना लिया और नेहा ने मेरी बायीं बाजू को अपना तकिया बना लिया, फिर दोनों मुझे झप्पी डाल के सो गए| हम दोनों जानते थे की नेहा ऐसे सोने वाली नहीं है, और बिना उसके सोये हमें अकेले में बात करने का समय नहीं मिलेगा| तो मैंने संगीता की गर्दन के नीचे से अपना हाथ निकला और मैं नेहा की तरफ करवट ले के लेट गया ताकि उसका सर थप-थापा के उसे जल्दी सुला दूँ| जैसे ही मैंने नेहा की तरफ करवट ली, संगीता बोली;

संगीता: ठीक है भई....हो जाओ बाप-बेटी एक तरफ! (वो नाराज नहीं थीं पर चुटकी ले रही थीं|)

मैं: यार बरी-बारी सुला रहा हूँ...पहले नेहा...और फिर आप!

पर संगीता को मस्ती सूझ रही थी| उन्होंने पीछे से मेरी कमर में झप्पी डाली और मेरी गर्दन के पीछे अपने ठन्डे होंठ रख दिए और मुझे Kiss किया!

मैं: आप ना....

पर वो नहीं मानी और kiss करती रही! करीब आधे घंटे बाद नेहा सो गई और मैं ने नेहा को कम्बल ओढ़ा दिया और फिर संगीता की तरफ करवट ले के लेट गया|

मैं: अच्छा जान....वो करधनी तो पहन के दिखाओ?

संगीता: हम्म्म....

फिर वो उठीं और पर्स से करधनी निकालने लगीं;

मैं: Hey ....साडी थोड़ा ढंग से बांधना|

संगीता: मतलब?

मैं: साडी नैवेल से नीचे बांधना...तब करधनी पहनना ....sexy लगोगे!

संगीता: ठीक है... अभी आई|

वो बाथरूम में घुस गेन और साडी वैसे ही बाँधी जैसे मैंने कहा और जब वो करधनी पहन के आइन तो मैं उन्हें देख के उठ के बैठ गया!

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Thanks dosto......Ydi aap SBI ka saath isi tarh RHA to roj update jarur duga //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f64f.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49e.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svg
 
मैंने मौके का फायदा उठाने के लिए बच्चों को पिताजी के बेड पे लिटा दिया;

मैं: किसे कहानी सुन्नी है?

दोनों तैयार हो गए और आके मेरी अगल बगल लेट गए| मैं दोनों का सर थप-थापा के सुलाने लगा और कहानी सुनाने लगा| संगीता मुझे देख-देख के हँस रही थी.... मैं भी मुस्कुरा रहा था| दस बजे पिताजी फोन पे बात खत्म कर के आये;

मैं: कैसा चल रहा है काम?

पिताजी: ठीक ठाक चल रहा है.... पर overtime नहीं हो रहा है| Deadline 4 जनवरी की है ...मुझे तो लगता है की काम खतम होने से रहा|

मैं: आप चिंता ना करो.... हम तो दो को ही घर पहुँच जायेंगे ...उसी दिन रात से ओवरटाइम करवा के मैं काम खतम करवा दूँगा|

मैंने बच्चों की तरफ देखा तो दोनों सो गए थे...या कम से कम मुझे तो लगा की वो सो गए हैं! मैं धीरे से उठा और पिताजी को good night कह के अपने कमरे में जाने लगा की इतने में नेहा उठ के बैठ गई;

नेहा: पापा...प्लीज...मुझे आपके बिना नींद नहीं आती!

पिताजी: बेटा तू यहाँ सो जा...मैं तुझे एक बहुत अच्छी कहानी सुनाऊंगा! (पिताजी ने उसे प्रलोभन दिया)

नेहा: नहीं दादा जी...मैं पापा के पास सोऊँगी!

पिताजी: देख बेटा फिर मैं तुझसे कभी बात नहीं करूँगा? कट्टी!

नेहा उनके पास गई और उनके पाँव छू के बोली;

नेहा: sorry दादा जी..... मुझे माफ़ कर दो! पर मुझे पापा के बिना नींद नहीं आती|

पिताजी: अच्छा ये बता ...जब तेरा बाप रात-रात भर घर नहीं आता और काम में व्यस्त होता है तब तू कैसे सोती है?

संगीता: पिताजी...ये बड़ी शैतान है...ये तब भी नहीं सोती| मुझसे फोन करवाएगी इनको (मुझे) और आधा-आधा घंटा फोन पे बात करती है...कहानियां सुनती है...तब जाके सोती है| और तो और अगर सुबह 3 - 4 बजे अगर ये आ जाएं और बिस्तर में लेते तो पता नहीं कैसे इसे पता चल जाता है और अपने आप इन्हें झप्पी डाल के सो जाती है|

पिताजी: ह्म्म्म्म्म...बहु तुम्हें पता नहीं...पर ये (मैं) भी ऐसा ही था| कहते है ना की बाप और बेटी का रिश्ता और माँ और बेटे का रिश्ता बड़ा करीबी होता है| पर जब ये छोटा था तो मुझसे लिप्त रहता था....माँ के पास तो ये सिर्फ खाने-पीने जाता था| बाकी घूमना-फिरना, सोना, खेलना...सब मेरे साथ| बिलकुल मानु जैसी आदतें हैं नेहा की... (और पिताजी मुस्कुराने लगे)

मैं: चलो बेटा|

मैं, नेहा और संगीता अपने कमरे में आ गए| नेहा तो कमरे में घुसते ही पलंग पे जा चढ़ी और बीच में लेट गई| मैं और संगीता अभी दरवाजे के पास ही खड़े थे| उसकी ये हरकत देख के संगीता खिल-खिला के हँस पड़ी!

मैं अपना सर पकडे दरवाजे पे खड़ा था....अब मैं कैसे नेहा को समझाऊँ?

मैं:अच्छा नेहा बेटा...एक बात बताओ?

नेहा: जी

मैं: आप मुझे प्यार हो और मेरे साथ चिपक के सोना चाहते हो .........आपकी मम्मी भी मुझे प्यार करती हैं और मेरे साथ सोना चाहती हैं............ और मैं तो आप दोनों से प्यार करता हूँ........... तो मैं कैसे मैनेज करूँ? अगर आपके साथ सोया तो आपकी मम्मी नाराज हो जाएँगी....और उनके साथ सोऊँ तो आप नाराज हो जाओगे? तो मैं यहाँ इस सोफे पे सो जाता हूँ|

नेहा कुछ सोचने लगी और फिर तपाक से बोली;

नेहा: नहीं पापा...एक आईडिया है...आप बीच में सो जाओ और हम दोनों आपसे लिपट के सो जाते हैं!

उसके भोलेपन पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था और संगीता उसके पास जा पहुंची और उसके माथे को चूमते हुए बोली;

संगीता: Awwwwwwww ...... देखा? बिलकुल आप पे गई है! हर समस्या का हल कितनी आसानी से निकाल लेती है|

मैं: आखिर बेटी किस की है?

संगीता: तो आ जाओ ...बीच में.....ही...ही...ही...ही....

I had no choice…except to sleep in between them. मैं बीच में लेट गया...बड़ी अजीब सी feeling हो रही थी! मेरे लेटते ही संगीता ने मेरी दाहिनी बाजू को अपना तकिया बना लिया और नेहा ने मेरी बायीं बाजू को अपना तकिया बना लिया, फिर दोनों मुझे झप्पी डाल के सो गए| हम दोनों जानते थे की नेहा ऐसे सोने वाली नहीं है, और बिना उसके सोये हमें अकेले में बात करने का समय नहीं मिलेगा| तो मैंने संगीता की गर्दन के नीचे से अपना हाथ निकला और मैं नेहा की तरफ करवट ले के लेट गया ताकि उसका सर थप-थापा के उसे जल्दी सुला दूँ| जैसे ही मैंने नेहा की तरफ करवट ली, संगीता बोली;

संगीता: ठीक है भई....हो जाओ बाप-बेटी एक तरफ! (वो नाराज नहीं थीं पर चुटकी ले रही थीं|)

मैं: यार बरी-बारी सुला रहा हूँ...पहले नेहा...और फिर आप!

पर संगीता को मस्ती सूझ रही थी| उन्होंने पीछे से मेरी कमर में झप्पी डाली और मेरी गर्दन के पीछे अपने ठन्डे होंठ रख दिए और मुझे Kiss किया!

मैं: आप ना....

पर वो नहीं मानी और kiss करती रही! करीब आधे घंटे बाद नेहा सो गई और मैं ने नेहा को कम्बल ओढ़ा दिया और फिर संगीता की तरफ करवट ले के लेट गया|

मैं: अच्छा जान....वो करधनी तो पहन के दिखाओ?

संगीता: हम्म्म....

फिर वो उठीं और पर्स से करधनी निकालने लगीं;

मैं: Hey ....साडी थोड़ा ढंग से बांधना|

संगीता: मतलब?

मैं: साडी नैवेल से नीचे बांधना...तब करधनी पहनना ....sexy लगोगे!

संगीता: ठीक है... अभी आई|

वो बाथरूम में घुस गेन और साडी वैसे ही बाँधी जैसे मैंने कहा और जब वो करधनी पहन के आइन तो मैं उन्हें देख के उठ के बैठ गया!

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