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एक अनोखा बंधन**:-कि नई शुरुआत (2) complete

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मैं: WOW !!! You’re looking beautiful!

संगीता: Seriously Jaanu?

मैं: जान... आपने तो मेरी जान ले ली| Killer!

संगीता: आपकी पसंद है.....

संगीता धीरे-धीरे चलती हुई मेरे पास आई, उनकी नंगी कमर छूने को मारा जा रहा था| आज तो वो मुझे full तड़पाने के मूड में थी|

मैं: Hey ...यार क्यों जान ले रहे हो मेरी?

संगीता: Awwwwwwww ..... इतनी आसानी से नहीं!

आखिर वो मेरे पास आ ही गईं.... जैसे ही मैंने उन्हें छूने के लिए अपना दाहिना हाथ बढ़ाया उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया|

मैं: Hey क्या हुआ? मेरा छूना आपको अच्छा नहीं लगा?

संगीता: कैसी बात करते हो? आपके छूना मुझे कभी बुरा लग सकता है! मैं तो आपके लिए कुछ लाई हूँ!

मैंने गौर किया तो पाया की उन्होंने अपने हाथों में कुछ छुपा रखा है|

संगीता: आप आँखें बंद करो?

मैंने बिना कुछ कहे झट से आँखें बंद कर ली| मुझे एहसास हुआ की वो मेरी कलाई पे कुछ बाँध रही हैं|

मैं: यार राखी बांध के भैया बना रहे हो? हा..हा..हा..हा..

संगीता: धत्त! सैंयां को भैया थोड़े ही बनाते हैं| अब आँखें खोल के देखो|

मैंने आँखें खोल के देखा तो वो एक bracelet था!

मैं: WOW ! Where did you get that?

संगीता: जब आप आयुष को Chocolte खिलाने ले गए थे तब|

मैं उठा और उन्हें गले लगा लिया| वो bracelet वाकई में बहुत खूबसूरत था! (पिक्टर देखें)

संगीता: आप इसे हमेशा पहनना|

मैं: ये भी कोई कहने की बात है!

We both knew what’s next so, मैंने बिना समय गवाएं नेहा को गोद में उठाया और उसे सोफे पे लिटा दिया और कम्बल ठीक से ओढ़ा दिया| मेरी ये प्रतिक्रिया उन्हें बहुत अजीब लगी;

संगीता: सोने दो न उसे?

मैं: यार वो अब भी सो रही है| बस I don’t want to wake her up when we’re ….you know! Besides…. I don’t like to make love when she’s sleeping next to us. ये तो मजबूरी है की नेहा मेरे बिना नहीं सोती वरना मैं उसे पिताजी वाले कमरे में ही सुला देता|

And so the Love Session started…and when we were both satisfied, मैंने नेहा को फिर से गोद में उठाया और बीच में सुला दिया| मैं और संगीता नेहा की तरफ करवट ले के लेते थे और हमारा हाथ नेहा की छाती पे था| अचानक से नेहा को मेरी मौजूदगी का जैसे एहसास हुआ और वो मेरी तरफ करवट लेके लेट गई और झप्पी डाल ली|

संगीता: देखा कितना प्यार करती है आप से? नींद में भी इसे आपका एहसास हो जाता है!

मैं: बिलकुल आप पे गई है!

संगीता: जानू....सही कहा| मैंने आप को कभी बताया नहीं...पर जब ये मेरी कोख में थी ना....तो उस समय मैं आपके प्रति बहुत आकर्षित थी, शायद इसी कारन ये आपसे इतना प्यार करती है|

मैं: ह्म्म्म्म्म....तो माँ के गुण बच्चे में आ ही जाते हैं! चलो अब सो जाते हैं...its 01:30 AM now. और कल सुबह घूमने भी तो जाना है?

हम दोनों नींद के आगोश में कुछ इस तरह समा गए की पता ही नहीं चला की कब घडी में सुबह के आठ बज गए? दरवाजे पे हुई दस्तक से में उठ बैठा, नेहा को संगीता के पास छोड़ मैं दरवाजे पे आया तो देखा माँ थी,

माँ: बेटा कब निकलना है? तुम लोग तैयार नहीं हुए अभी तक?

मैं: हाँ ..माँ....वो रात में देर से सोये थे| आप लोग तैयार हो जाइये हम पंद्रह मिनट में आ रहे हैं|

माँ: बेटा ऐसा कर घूमने का प्रोग्राम कल रखते हैं...बहु को सोने दे|

मैं: जी...पर नाश्ता तो करना है?

माँ: अगर बहु नहीं उठती तो आराम करने दिओ|

मैं: जी!

माँ कमरे में चली गईं और मैं दरवाजा बंद कर के मुड़ा| देखा तो दोनों माँ-बेटी सो रहे थे| मैं दबे पाँव संगीता के सिराहने पहुँच गया और और झुक के उनके माथे को चूमा, फिर उनके गालों को चूमते हुए कहा;

मैं: Good Morning Jaan!

संगीता थोड़ा कुनमुनािन और बोलीं;

संगीता: Good Morning जानू! उम्म्म्म....टाइम क्या हुआ है?

मैं: सवा आठ!

संगीता: हाय राम! आपने मुझे पहले क्यों नहीं उठाया| (और वो एक दम से उठ के बैठ गईं|

मैं: मैं तो खुद अभी उठा हूँ...माँ आई थीं|

संगीता: हाय राम...

वो हड़बड़ी में उठने लगी तो मैंने उन्हें रोक दिया;

मैं: माँ का आदेश है की आप को आराम ही करना है!

संगीता: मैं माँ से डाँट खा लुंगी ...पर मैं और आराम नहीं कर सकती| वो उठ के बाथरूम में गईं और फ्रेश हो के आ गईं| कपडे पहने, पर करधनी उतार दी| अब मेरा मुंह बन गया था, क्योंकि मैं चाहता था की वो करधनी पहने|

संगीता: Awwwwwww ..... मेरा बच्चा! मुझे सब के सामने ये पहनने में शर्म आती है| अकेले में मैं इसे हरदम पहने रहूंगी!

पर मैं मैंने वाला नहीं था, मैं अब भी मुंह फुलाये हुए था| मैंने नेहा को गोद में लिया और हम माँ-पिताजी के कमरे में आ गये| वहाँ आके मैंने चाय आर्डर की, नेहा अब भी मेरी गोद में थी और आयुष अभी तक सो रहा था| मैंने नेहा को आयुष के बगल में लिटाना चाहा पर नेहा ने मुझे नींद में भी जकड रक था| ये देख के पिताजी हँस पड़े!

पिताजी: 100% तुझी पे गई है तेरी बेटी! खेर बहु...तुम क्यों उठ गई?

माँ: जर्रूर इसी (मैंने) ने उठाया होगा|

पिताजी: क्यों परेशान करता है बहु को?

मैं चुप-चाप था|

संगीता: माँ....पिताजी....वो इन्होने तो मुझे आराम करने को कहा था...पर मुझे थकावट थोड़े ही है| और अगर सोते हुए ही दिन बिताना था तो हम यहाँ क्यों आते?

माँ: बहुत समझदार है हमारी बहु|

पिताजी: हाँ हमने पिछले जन्म में जर्रूर पुण्य किये थे की हमें ऐसी बहु मिली|

संगीता: सौभाग्य तो मेरा है पिताजी की मुझे आप जैसे माता-पिता मिले!

जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी वो ये थी की संगीता माँ-पिताजी को सास-सासुर नहीं बल्कि अपने माता-पिता ही मानती थी| पर खेर मैं तो अब भी नाराज था.....!!! चाय नाश्ता करते-करते बच्चे भी उठ गए थे और हम सब तैयार हो के Mattupetty Dam देखने के लिए निकले| मुन्नार के खुशनुमा मौसम में बहुत मजा आ रहा था और Dam देखते ही बच्चे खुश हो गए थे| ये पहलीबार था की उन्होंने Dam देखा हो| माँ ने तो एक बार अपने बचपन में Dam देखा था, पर पिताजी, मैं और संगीता आज पहली बार इतना विशाल Dam देख रहे थे| दोपहर के lunch के बाद बारी थी Eravikulam National Park देखने की! सब से मजेदार बात ये थी की होटल से बाहर निकलते ही मेरी नाराजगी काफूर हो गई थी| घूमते समय संगीता और मैं साथ-साथ ही चल रहे थे and we were enjoying as we should. मैं इन छुटियों को अपनी नारजगी से बर्बाद नहीं करना चाहता था| इसलिए मैं संगीता को जितना हो सके उतनी ख़ुशी देना चाहता था, और माता-पिता वो तो तो हमारी खुशियाँ देख के ही खुश थे|

National Park में हमें एक हिरन दिखा...ये शायद वो बकरी थी...पता नहीं...क्योंकि वो जानवर बहुत दूर था| हमारे ग्रुप के साथ कुछ Teenagers थे जिन्होंने उस जानवर को देखते ही शोर मचाना शुरू कर दिया और वो जानवर भाग गया| खेर हम लोग dinner ले के होटल पहुंचे और आज तो हम सारे थक चुके थे| इसलिए बच्चे होटल पहुँचते ही सो गए, हालाँकि घडी में अभी नौ ही बजे थे| मैंने सोचा की इस मौके का फायदा उठाना चाहिए;

मैं: माँ...हम दोनों walk लेके आते हैं?

माँ: बेटा बहु थकी हुई है, उसे आराम करने दे|

संगीता: नहीं माँ....इसी बहाने थोड़ी सेर हो जाएगी और खाना भी हजम हो जायेगा| आप भी चलो ना?

मैं मन ही मन सोचने लगा की यार सब को ले चलते हैं!

माँ: नहीं बहु...मुझसे अब और चलना नहीं होगा| मैं तो टी.वी. देखूंगी...तुम लोग जाओ|

इतने में पिताजी बाहर से आये, दरअसल वो बाहर संतोष को फोन कर के काम की खबर ले रहे थे|

पिताजी: कहाँ जा रहे हो तुम दोनों?

मैं: जी walk पे!

पिताजी: अच्छा...अच्छा ...जाओ!

जब हम बाहर आय तो मैंने जानबूझ के फिर से मुंह फुला लिया|

संगीता: Sorry जानू!

मैं: ह्म्म्म्म्म्म.....

संगीता: आप मुझ से नाराज हो? (उन्होंने तुतलाते हुए कहा)

मैं कुछ नहीं बोला| तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया जैसे शादी-शुदा जोड़े बाहों में बाहें डाले चलते हैं|

संगीता: जानू..... अच्छा नहीं लगता की हम दोनों यहाँ अकेले घूमें और माँ-पिताजी अकेले रहे?

मैं: मैं उस वजह से नाराज नहीं हूँ|

संगीता: ओह्ह! पर मैंने तो आपको पहले ही कहा था की मैं करधनी सब के सामने नहीं पहन सकती| अकेले में आपके सामने पहनूँगी ना!

मैं: आज पहलीबार आपने मेरे Gift की कदर नहीं की है| कोई बात नहीं....मैं याद रखूँगा इसे! (मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा)

संगीता: Sorry Again!

मैं: चलो...

संगीता जानती थी की मेरी नाराजगी काम नहीं हुई है| पर चूँकि हम पब्लिक प्लेस में थे तो वो ज्यादा कुछ कर नहीं सकती थी| हाँ अगर हम कमरे में होते तो मुझे पता है की वो मुझे कैसे न कैसे मन ही लेती| पर मैंने सोच लिया था की आज मैं उन्हें इतना तड़पाऊँगा की वो तो देखें की मेरी नाराजगी ऐसी ही कम नहीं होती| खेर अब हम walk पे निकले थे तो हम पार्क में घूम रहे थे, की तभी वहाँ पे हमें एक जोड़ा दिखा जो पेड़ के पास खड़ा था और एक दूसरे को Kiss कर रहा था|

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अब इसे देख के मुझे चुटकी लेने की सूझी;

मैं: Look at them.

संगीता: हाँ...हाँ...देख रही हूँ| और आप क्या सोच रहे हो वो भी जानती हूँ| But you’re not gonna get …what you’re expecting here!!!

मैं: Oooooooo is that so? Okay मैं वापस तब तक नहींजाऊंगा जब तक आप मुझे Kiss नहीं करते!

संगीता: आप मजाक कर रहे हो ना?

मैं: Does it look like I’m joking?

संगीता: But I can’t?

मैं: Okay! मैं ठण्ड में यहाँ ठिठुरता रहूँगा?

संगीता: ठीक है ...फिर मैं भी यहीं आपके पास खड़ी रहूंगी!

मैं जानता था की मेरी चालाकी यहाँ नहीं चलने वाली....तो मैंने अपनी हार मान ली| I knew from the beginbing that she’s not an exbitionist …then why the hell I was pushing her? Maybe I was testing her…. But for what? यही सोचते-सोचते हम होटल की तरफ वापस आने लगे| मैं चुप-चाप चल रहा था और संगीता भी समझ चुकी थी की बात क्या है? पर कहा कुछ नहीं...हम होटल के अंदर आ गए और माँ-पिताजी वाले कमरे में प्रवेश किया| बच्चे सो रहे थे ...मैं जानता था की नेहा जब भी उठेगी मुझे ढूंढेगी इसलिए मैंने उसे गोद में उठाना चाहा ताकि उसे अपने साथ लेके कमरे में आ जाएं;

पिताजी: सोने दे बेटा? जाग गई तो फिर तेरा पीछा नहीं छोड़ेगी|

मैं: वो तो वैसे भी नहीं छोड़ेगी| आधी रात को आपको परेशान करेगी!

माँ: नहीं करेगी...मैं हूँ ना!

मैं: आपसे handle नहीं होगी!

पिताजी: कुछ नहीं होगा बेटा? मैं इसे प्यारी-प्यारी कहानी सुना दूँगा और ये सो जाएगी|

संगीता: क्यों जिद्द करते हो? (उन्होंने खुसफुसाते हुए कहा)

माँ: तुम जा के आराम करो|

अब हम दोनों कमरे में आ गए और संगीता बाथरूम में चली गईं और मैं आके बिस्तर पे औंधा हो के लेट गया| संगीता ने बाथरूम से बाहर निकल के मुझे आवाज दी;

संगीता: सुनिए? जानू........................................सो गए क्या?

मैं कुछ नहीं बोला बस सोने का नाटक करने लगा| दरअसल उन्होंने करधनी पहनी थी जिसे वो मुझे दिखाना चाहती थीं| पर आज मैं उनके किसी भी जाल में फंसने वाला नहीं था| वो जानती थी की मैं सोया नहीं हूँ और अपनी नारजगी व्यक्त कर रहा हूँ| मैं जब भी उसने नाराज हुआ हूँ...मैं गुम-सुम हो जाता हूँ, यही मेर अतरीका है अपनी नारजगी व्यक्त करने का| वो मेरे पास आईं;

संगीता: (अपने कान पकड़ते हुए) Sorry जानू! मुझे माफ़ कर दो! आपने मुझे प्रॉमिस किया था की आप मुझसे कभी गुस्सा नहीं होगे?

मैं: मैंने प्रॉमिस ये किया था की मैं आपसे गुस्सा कभी नहीं हूँगा...पर मैं इस वक़्त नाराज हूँ| तो I don’t think I’m breaking any promise I made!

संगीता: Sorry बाबा! मैं...मैं.....

मैं: Hey ...no need to say sorry. I can understand!

संगीता: तो आप मुझसे नाराज नहीं हैं?

मैं: नहीं

संगीता: तो मेरी तरफ देख के कहो?

मैं ने उनकी तरफ गर्दन घुमाई और कहा;

मैं: मैं आपसे नाराज नहीं हूँ!

संगीता: I knew आप मुझसे ज्यादा देर नाराज नहीं रह सकते| तो?

मैं: Just gimme sometime so I can recollect myself!

संगीता जानती थी की सुबह तक मैं जोरमल हो जाऊँगा और इस समय जोर देना सही नहीं है पर वो फिर भी मेरे चेहरे पे मुस्कान लाने की पूरी कोशिश कर रही थी| तभी दरवाजे पे दस्तक हुई, स्नगीता फ़ौरन बाथरूम में भाग गई ताकि करधनी उतार के दरवाजा खोले पर मैं उठा और दरवाजा खोला;

पिताजी: ले बेटा..संभाल अपनी बेटी को! (नेहा रो रही थी)

मैं: क्या हुआ बेटा?

पिताजी: पता नहीं बेटा अचानक नींद से उठ बैठी और रोने लगी|

मैं:ओह्ह्ह...इसने बुरा सपना देखा होगा|

पिताजी: sorry बेटा तुम्हें disturb किया!

मैं: नहीं पिताजी...हम अभी सोये नहीं थे|

पिताजी: Good Night बेटा| कल सुबह आराम से उठना, तुम्हारी माँ भी थक गई है और मैं भी|

मैं: जी गुड नाईट!

पिताजी के अपने कमरे में घुसने के बाद मैंने दरवजा बंद किया और नेहा को पुचकार के चुप कराया|

मैं: Awww ..... मेरा बच्चा...बेटा वो बस बुरा सपना था| भूल जाओ ...अब आप पापा के साथ हो ना|

मैं उसकी पीठ थप-थापा के सुलाने लगा| दरअसल नेहा को मेरे बिना सोने में डर लगता है...पता नहीं क्यों पर वो अचानक चौंक के उठ जाती है| शायद इसका कारन उसके बचपन से जुडा हुआ है| मैं कमरे में एक कोने से दूरसे कोने तक उसे गोद में ले के घूम रहा था, इतने में संगीता ने बाथरूम से झाँक के पूछा;

संगीता: पताजी चले गए?

मैं: हाँ

मेरी गोद में नेहा को देख के वो बोलीं;

संगीता: तो इस शैतान ने उन्हें तंग किया होगा?

मैं: हाँ..फिर से डर गई थी|

संगीता: Maybe we should consult a doctor?

मैं: हाँ... once we are back in Delhi.

नेहा की आँखें भारी हो चुकी थीं, मैं उसे अपनी छाती से ही लिपटाये सो गया| नेहा का सर मेरी छाती पे था, संगीता ने हम दोनों पे कम्बल डाल दिया और खुद भी उसी कम्बल में लेट गईं और नेहा की पीठ थप-थपाने लगीं|

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दरअसल मेरा हाथ नेहा की पीठ पर ही था और वो मेरे हाथ के ऊपर ही थप-थपा रहीं थीं| वो मुझे मानाने की कोशिश कर रहीं थीं और इधर मैं अपने मन और दिमाग को शांत करने में लगा था की मैं वो Gift वाली बात और Kiss वाली बात भूल जाऊँ| खेर रात भर जब तक मुझे नींद नहीं ऐ मैं उसी बात को सोचता अहा और मैंने realize किया की I was being PUSHY! I mean if she doesn’t want to waer something in public or if she is too shy to Kiss me in public, who I’m to Push her for? She’s my wife and I respect her for that, and yesterday I was asking a lot from her. I decided that the first thing I’m gonna do the next morning is APPOLOGISE for my behaviour!

So the next morning, मेरे उठने से पहले ही वो उठ चुकी थीं| नेहा अब भी मेरे ऊपर ही सो रही थी| घडी में साढ़े आठ बज रहे थे| मैंने नेहा के सर पे Kiss किया और उसे प्यार से उठाया| उसने भी पलट के मुझे Kiss किया और बाथरूम में चली गई| आसपास संगीता नहीं थी...मैं थोड़ा परेशान हुआ की कहीं वो मेरे रात के बर्ताव से रूठ तो नहीं गईं| मैं उठ के बैठा और उन्हें ढूंढने के लिए जाने ही वाला था की दरवाजे पे दस्तक हुई, देखा तो संगीता ही थी|

मैं: Oh My God ....you scared the hell out of me! Look….I wanna appologise for what I did last night. Okay? I mean I’m sorry for being too pushy. I shouldn’t have done that….from now on I promise that I’ll respect whatever you say, wish or ask for. PROMISE!

संगीता: Really?

मैं: Yup!

संगीता: Okay!

आगे कुछ बात होने से पहले ही माँ आ गईं;

माँ; अरे बहु....ओह्ह तो लाड साहब उठे नहीं?

मैं: Sorry माँ..... वो रात को नींद नहीं आ रही थी|

माँ: कोई बात नहीं...मैं तो यहाँ बताने आई थी की तेरे पिताजी ने डॉक्टर सरिता से नेहा के लिए बात की है| तो वापस जा के सब से पहले नेहा को उनसे मिलवाना है|

मैं: जी बेहतर!

माँ: अरे बहु...मैंने गौर नहीं किया...पर तूने करधनी पहनी है?

मेरी नजर उनकी कमर पे पड़ी और मैं दंग रह गया की वाकई में संगीता ने करधनी पहनी थी!!!

माँ: कौन लाया?

संगीता ने शर्माते हुए मेरी तरफ इशारा किया.....

माँ: ह्म्म्म्म्म..... दिन पर दिन समझदार होता जा रहा है| शाबाश!

माँ ने मेरे सर पे हाथ फेरा, मैं तुरंत उठ के खड़ा हुआ और बोला;

मैं: माँ ये भी तो देखो? (मैंने उन्हें ब्रेसलेट दिखाया)

माँ: वाह...ये जर्रूर बहु लाई होगी?

मैं: आपको कैसे पता?

माँ: पसंद से पता चल जाता है बेटा!

उन्होंने दोनों के सर पे हार रखा और आशीर्वाद देते हुए बोलीं;

माँ: जुग-जुग जियो मेरे बच्चों....हमेशा ऐसे ही हँसते-खेलते रहो!!

माँ के जाने के बाद मुझे ऐसा लगा की संगीता ने सिर्फ मेरी ख़ुशी के लिए ही करधनी पहनी है और मैं नहीं चाहता था की वो जबरदस्ती कुछ भी करें;

मैं: aaaa ... look ... आपको जबरदस्ती ये पहनने की जर्रूरत नहीं है okay?

संगीता: किसने कहा ये मैंने जबरदस्ती पहना है? गलती मेरी थी.... मैं आपकी भावनाओं को समझ नहीं पाई| कोई भी पति अपनी पत्नी को तोहफा देता है क्योंकि उसमें उसका प्यार छुपा होता है| मैं आपके प्यार को ठीक से समझ नहीं पाई और अपनी लाज के आगे उसे दर-गुजर किया! आपने मुझे ये इसलिए दिया ताकि मैं और खूबसूरत लगूँ..... और मैं पागल इसे अपनी लाज से जोड़ने लगी| आपने भी तो मेरा दिया हुआ gift बड़े शौक से पहन लिया|

मैं: तो यार its not necessary की आप इसे हरदम पहने रहो?

संगीता: आप मेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकते हो तो क्या मैं आपके लिए एक करधनी भी नहीं पहन सकती|

मैं: पर आपके ना पहनने से भी मैं खुश हूँ|

संगीता: तो मेरे पहनने से तो आप डबल खुश हो जाओगे?

मैं: यार......

संगीता: Hey..... All I want is you to be happy… और मुझे अब इसकी आदत हो गई है| So आप मुझे मना नहीं करोगे| Okay?

मैं: ठीक है बाबा! and Thanks !!!

इस ख़ुशी के पल के बाद हम दोनों जल्दी से तैयार हुए क्योंकि आज के दिन हमारा Attukal waterfall घूमने का प्रोग्राम था| हम सारे तैयार हो के वॉटरफॉल के लिए निकले| रास्ते में माँ-पिताजी आगे बैठे थे और उनकी गोद में आयुष था और पीछे मैं और संगीता बैठ थे और बगल में नेहा बैठी थी, मौसम का जादू हम पे पूरे जोश में था| दोनों रोमांटिक हो रखे थे...पर पीछे बैठे-बैठे कुछ कर नहीं सकते थे| संगीता ने अपना सर मेरे कंधे पे रखा हुआ था और मेरे बाएं हाथ में उनका हाथ था| मैं उनका हाथ प्यार से मसल रहा था और वो मौका पाते ही मेरी गर्दन पे Kiss करती रहती| I was aroused with this feeling and hardly control myself. खेर हम जब waterfall पहुंचे तो वो नजारा देख के दिल खुश हो गया| वो कल-कल करता हुआ बहता पानी.... झरने का शोर..... ठंडा-ठंडा पानी..... अब बच्चे पानी में खेलने की जिद्द करने लगे और पानी इतना ठंडा था की माँ-पिताजी ने सख्त हिदायत दी की अगर भीग गए तो बीमार पद जाओगे| बच्चे उदास हो गए, माँ-पिताजी तो आगे एक पत्थर के पास बैठे थे और मैं-संगीता और बचे पानी के किनारे बैठ थे| अपने दादा-दादी के दर से बच्चे पानी देख रहे थे...पर मुझे लगा की उनका मन खेलने का है| मैं उठा और एक मिनट में आया बोल के पिताजी के पास आया| पिताजी हमेशा अपने साथ अखबार ले के जाया करते थे क्योंकि सफर में बोर होने से अच्छा वो ताजा खबरें पढ़ लिया करते थे| मैंने उनसे अखबार लिया और वापस आ गया| मैंने अखबार से आयुष और नेहा के लिए कागज़ की नाव बनाई और उसपे दोनों का नाम लिख दिया| नाव देख के दोनों खुश थे अब मैंने उन्हें थोड़ा प्रोत्साहन दिया ताकि वो नाव को पानी में छोड़ें पर किनारे में पानी काम था और किनारे से दूर पानी में जाते तो वो भीग जाते, तो मैंने दोनों को बारी-बारी गोद में लिया और उन्हें लेके पानी में उतर गया| मैंने पेंट को घुटनों तक चढ़ा लिया था, पर जब पानी का एहसास मुझे अपने शरीर पे हुआ तो मेरी कंपकंपी छूट गई| मैं जल्दी से पानी से बाहर आ गया, चूँकि माँ-पिताजी कुछ आगे बैठे थे और बातों में व्यस्त थे तो उनका ध्यान मेरी तरफ नहीं था|

______________________________
 
संगीता: जानू...पानी बहुत ठंडा है...मत जाओ? बीमार पड़ जाओगे?

मैं: कुछ नहीं होगा|

मैंने हिम्मत जुताई और आयुष को गोद में ले के पानी में उतर गया, ठन्डे पानी ने टांगें सुन्न कर दी थीं पर आयुष की ख़ुशी के आगे सब बर्दाश्त था| मैं थोड़ा सा झुका और आयुष ने अपनी नाव पानी में छोड़ी, नाव ज्यादा आगे नहीं गई और डूब गई पर मैं हैरान था की वो कुछ पलों की ख़ुशी उसे इतनी अच्छी लगी! फिर नेहा को ले के पानी में आया...उसकी नाव आयुष के मुकाबले थोड़ा आगे गई और फिर डूब गई| वो भी खुश थी पर आयुष से थोड़ा ज्यादा...और बार-बार उसे जीभ चिढ़ा के हंस रही थी|

आयुष: पापा...cheating ...Cheating .... मैं दुबारा नाव चलाऊंगा!!!

उसका शोर सुन के पिताजी और माँ का ध्यान मेरी तरफ हुआ, और मुझे पिंडली तक पानी में खड़ा देख पिताजी और माँ दौड़े-दौड़े आये| मैं भी नेहा को गोद में लिए हुए पानी से बाहर अ गया|

पिताजी: पागल हो गया है क्या? कितना ठंडा है पानी? बीमार पड़ गया तो?

माँ: बहु तू तो रोक लेती?

संगीता चुप थी तो मुझे ही सच बोलना पड़ा;

मैं: माँ....उन्होंने रोक था पर मैं नहीं माना| बच्चे उदास हो गए थे!

माँ: देखा? आप (पिताजी) पे गया है?

पिताजी: अरे मैंने क्या किया?

माँ: जब छोटा था तो इसकी हर जिद्द पूरा किया करते थे, मेरे से चोरी-चोरी इसे खिलोने ला के दिया करते थे| यहाँ तक की मैं रोटी बना रही होती थी और ये उतनी देर में इसे गोद में लिए ऑटोरिक्क्षाव किया और घुमा-फ़िर के ले आते थे!

पिताजी हंसने लगे|

पिताजी: बहुत लाड किया है इसने (मैंने)! पर बीटा बीमार पड़ जाओगे?

मैं: कुछ नहीं होगा पिताजी!

मैंने कह तो दिया पर जैसा की आप जानते हैं की ठंडा पानी मुझ पे देर सवेर असर दिखा ही देता है| तो हम होटल आ गए, शाम को डिनर के बाद बच्चे और माँ टी.वी. देखने लगे और पिताजी संतोष से काम की रिपोर्ट लेने के लिए बाहर आ गए| मौके का फायदा उठा के मैं और संगीता भी टहलने के बहाने बाहर आगये| हम टहलते-टहलते उसी जगह आ गए जहाँ हमने कल एक couple को kiss करते हुए देखा| पर मैं आज शांत था...एक तो शरीर में थकावट असर दिखाने लगी थी और दूसरा मैंने सुबह ही प्रॉमिस किया थे की I won't push her again for anything she doesn't like! उस समय रात के नौ बज रहे थे और पार्क लघभग खाली ही था|

संगीता: जानू?

मैं: हम्म्म.....

संगीता: I got a surprise for you!

मैं: okay? (मैंने बड़े उत्साह से पूछा)

संगीता: पहले अपनी आँखें बंद करो|

मैंने आँखें बंद की और मन ही मन सोचने लगा की आखिर gift होगा क्या? क्योंकि उनके हाथ में तो कुछ नहीं था? उन्होंने ने अपनी बाहों को मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द लॉक किया और अपने पंजों पे उठते हुए मुझे KISS किया| मैंने इसका कोई विरोध नहीं किया और पूरा आनंद लिय| कुछ देर बाद,

मैं: Okay ...तो ये kiss किस लिए था?

संगीता: कल का उधार था|

मैं: तो........

संगीता ने मेरी बात काट दी;

संगीता: और ये मैंने अपनी मर्जी से किया| No Questions?

मैंने एक गहरी सांस छोड़ी पर हम बाहों में बहोें डाले होटल लौटे| अब बारी थी सोने की,

आयुष: मैं तो दादाजी के पास सोऊँगा? दीदी तुम भी सो जाओ...दादा जी बहुत अच्छी कहानियाँ सुनाते हैं|

मैं हैरान था...पर खुश भी था की चलो आयुष को वो प्यार मिल रहा है जो उसे मिलना चाहिए| और नेहा...वो भी पिताजी से उतना ही प्यार करती थी और पिताजी भी उसे उतना ही चाहते थे पर नेहा हमेशा मेरे पास रहना ज्यादा पसंद करती थी, कारन तो मैं आपको बता ही चूका हूँ|

नेहा: नहीं..मुझे पापा के पास ही नींद आती है| (और नेहा आयुष को जीभ चिढ़ाने लगी)

मैं: okay बाबा..अब चलो सोने|

सब को goodnight बोल के हम तीनों अपने कमरे में आ गए पर संगीता जी के ऊपर से romance का भूत नहीं उतरा था| उन्होंने नेहा को अपने पास बुलाया और उससे बी आत करने लॉगिन, तब तक मैं भी अपना लैपटॉप on कर के आप लोगों के कमेंट्स पढ़ने लगा|

संगीता: नेहा...बेटा अगर मैं आपसे कुछ मांगू तो आप मुझे दोगे?

नेहा: हाँ (उसने बड़े तपाक से जवाब दिया)

संगीता: बेटा आज रात आप अपने दादा-दादी के पास सो जाओगे?

नेहा: पर क्यों मम्मी? (नेहा के सवाल पे मुझे हंसी आ रही थी और मैं जानने को व्याकुल था की वो क्या जवाब देती हैं|)

संगीता: उम्म्म्म्म्म... बेटा मुझे आपके पापा से कुछ बात करनी है?

नेहा: तो करो...मैंने कब रोका है?

ये सुन के तो मेरी हंसी छूट गई! संगीता के होठों पे भी मुस्कान आ गई थी;

संगीता: बेटा....उम्म्म..... आपके सामने वो बात नहीं हो सकती| वो बस अकेले में ही होती है? आप बड़े हो गए हो...आपको अब अकेले सोने की आदत डालनी चाहिए! कबतक आप पापा की गोद में चढ़े रहोगे?

नेहा खामोश हो गई और उसका मुंह उतर गया| वो दरवाजे की ओर जाने लगी ओर मुझे उस पर बहुत तरस आया, इससे पहले मैं कुछ कहता वो रूक गई ओर मेरी तरफ बढ़ी ओर बोली;

नेहा: पापा आप भी चाहते हो मैं यहाँ से चली जाऊँ?

सच कहूँ तो मैं कतई नहीं चाहता था की वो चली जाए पर मैं संगीता को भी उदास नहीं करना चाहता था| पर मैं जानता था की अगर अमीने "हाँ" कहा तो नेहा का दिल टूट जायेगा ओर शायद वो फिर कभी मेरे पास नहीं आएगी ...मरते क्या न करते मुझे संगीता को for granted लेना पड़ा;

मैं: नहीं बेटा.... बिलकुल नहीं| आप मेरे पास ही सोओगे|

नेहा: Thank You पापा!

उसकी ख़ुशी के आगे मैं झुक गया ओर अपना लैप-टॉप बंद कर दिया| मुझे लगा था की संगीता नाराज होंगी पर वो हम दोनों को देख के मुस्कुरा रहीं थीं|

संगीता: आप इससे बहुत प्यार करते हो! जानती थी की आप इसका दिल कभी नहीं तोड़ोगे...Thank You!

फिर हम तीनों एक साथ सो गए| रात के दो बजे मुझे सांस लेने में दिक्का थुई| मेरी नाक बंद हो चुकी थी और गाला choke हो चूका था| कुछ भी बोलने में बड़ी दिक्कत हो रही थी| साफ़ था ठण्ड अपना असर दिखा रही थी| मैं नहीं चाहता था की मेरी वजह से संगीता और नेहा बीमार पढ़ें तो मैं उठ के सोफे पे जाके सो गया और कम्बल से खुद को ढक लिया| सुबह कब हुई इसका होश नहीं था....जब संगीता ने कम्बल हटा के मेरा माथा छुआ तो उनके ठन्डे हाथ ने मेरी नींद भगाई|

संगीता: आपको तो बुखार है? (वो बहुत डरी हुई थी)

मैं: हाँ...रात .....

गला choke होने के कारण बोलने में दिक्कत हो रही थी| वो भाग के गईं और माँ और पिताजी को बुला लाईं|

माँ: मैंने कहा था न की बीमार पड़ जायेगा? देख...हो गया ना बीमार?

मैं चुप-चाप दांत सुनता रहा| सबसे पहले तो मुझे अदरक वाली चाय पिलाई गई उसके आधे घंटे बाद कुछ शब्द फूटने लगे फिर डॉक्टर को बुलाया गया|

डॉक्टर: आपको इस तरह ठण्ड में .... गीला नहीं चाहिए था? Hypothermia हो जाता तो? आप ये दवाई लो और आराम करो|

पिताजी: डॉक्टर साहब दरअसल 1 तरीक को हमारी वापसी की flight है| तो तब तक तो ये?

डॉक्टर: हाँ-हाँ... दवाई समय पे लें तो ठीक हो आजायेंगे|

डॉक्टर के जाने के बाद सारे जाने मुझे घेर के बैठ गए....

संगीता: आपने मुझे रात को उठाया क्यों नहीं?

माँ: हाँ.... नहीं तो हमें उठा देता?

मैं: मैंने सोचा...कोण आपको तंग करूँ| हल्का सा बुखार है...ये तो डॉक्टर बढ़ा-चढ़ा के कह रहा था| मैं अब बेहतर महसूस कर रहा हूँ|

पिताजी: चुप-चाप आराम कर| हम भी आराम ही करते हैं...चलो जी

तो माँ और पिताजी अपने कमरे में चले गए|

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I'm Back to Complete My Story !!!
 
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इधर संगीता ने फिर से सवाल पूछा;

संगीता: मुझे ये बताओ आपने मुझे उठाया क्यों नहीं?

मैं: यार आप सब थके हुए थे...सोचा क्या उठाऊँ...|

संगीता: ठीक है....तो आगे से मैं बीमार पड़ी तो मैं भी आपको नहीं बताउंगी|

मैं: Sorry यार! मैं सीरियसली तुम्हें तंग नहीं करना चाहता था...मैंने इसे Lightly लिया....SORRY !

संगीता: ठीक है ...इस बार माफ़ किया!

इतने में फ़ोन की घंटी बज उठी| ये दिषु का फ़ोन था और उसने हाल-चाल पूछने को फ़ोन किया था| मेरे फोन उठाने से पहले ही संगीता ने फ़ोन मुझ से ले लिया और फ़ोन को लाउड स्पीकर पे डाल के खुद बात करने लगी;

संगीता: हेल्लो नमस्ते भैया!

दिषु: नमस्ते भाभी जी, मानु है?

संगीता: हैं पर उनकी तबियत खराब है|

दिषु: वहां जाके भी बीमार पड़ गया?

संगीता: हाँ कल बच्चों के साथ झरने के पानी में खेल रहे थे| अब बुखार चढ़ा हुआ है!

दिषु: ओह्ह...ऐसा करो उसे RUM पिला दो! टनटना जायेगा!!!!

मैं: अबे...तेरा दिमाग खराब है?

दिषु: सही कह रहा हूँ यार...!!!

मैं: साले....मैं दवाई खा के ही खुश हूँ|

दिषु: भाई मैं तो सलाह दे रहा था, आगे तेरी मर्जी| अच्छा ये बता कब आ रहा है?

मैं: 2 जनवरी को|

दिषु: तो New Year वहीँ मनाएगा?

मैं: हाँ भाई!

दिषु: चल सही है...enjoy बच्चों को मेरा प्यार देना| Bye !

मैं: Bye !

फ़ोन रखने के बाद, संगीता की आँखें चमकने लगी थीं;

मैं: उस बारे में सोचना भी मत?

वो उठी और बिना कुछ कहे माँ के कमरे में भाग गई| जब वापस आई तो साथ में माँ भी थी| पिताजी बच्चों को लेके घूमने निकल गए थे|

माँ: बहु ने बताया मुझे..... अगर उससे तू जल्दी ठीक होता है तो पी ले? कौन सा पूरी बोतल पीनी है? दो ढक्कन ही तो पीने हैं?

मैं: आप भी किस पागल की बातों में आ रहे हो? अगर RUM पीने से बिमारी खतम होती तो कंपनी वाले अमीर हो जाते| दवाई ले रहा हूँ, ठीक हो जाऊँगा|

माँ: पर तेरी वजह से बहु-बच्चे घूमने नहीं जा सकते उसका क्या?

मैं: मैं अब पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूँ| शाम से ही हम घूमना RESUME करते हैं|

संगीता: नहीं...जबतक आप पूरी तरह ठीक नहीं होते आप यहाँ से हिलओगे भी नहीं!

मैं: Ohhh Come on यार!

संगीता: ना!!!

माँ: बिलकुल सही कह रही है बहु|

मैं: माँ मैंने पिताजी से promise किया था की मैं शराब को हाथ नहीं लगाउँगा|

माँ: बेटा दवाई की तरह पीना है....शराबियों की तरह नहीं?

मैं: Sorry माँ...मैं दवाइयों से ठीक हो जाऊँगा|

माँ: अच्छा अगर तेरे पिताजी कहेंगे तब तो पीयेगा ना?

मैं: ना

माँ: ठीक है! पर ये जानके अच्छा लगा की तो अपने वादे पे अटल है|

माँ कमरे में चली गईं और संगीता मुझे देखने लगीं;

संगीता: एक बात पूछूँ?

मैं: हम्म्म्म....

संगीता: आपका Drink करने का मन करता है?

मैं: हमने तुम्हारे हुस्न का रास चख लिया है ...

अब शराब में क्या रखा है?

हमें बहकाने के लिए तेरी एक मुस्कान ही काफी है!

जानता हूँ काफ़िया नहीं मिला...पर जो दिल में आया कह दिया!!!

संगीता: वाह!!!वाह!!!वाह!!!

मैं: ये कैसा जादू किया तेरे इश्क़ ने ....

एक काफ़िर को शायर बना दिया!!!

संगीता: वाह!!वाह!!!वाह!!! अच्छा बहुत होगी शायरी अब आप आराम करो, मैं आपके पास बैठती हूँ|

मैं: नहीं...आपको भी exposure हो जायेगा?

संगीता: नहीं मैं तो यहीं बैठूंगी!

मैं: यार मना करो? आप लोगों को एक्सपोज़र ना हो इसलिए तो मैं रात को सोफे पे सोया था| (इस बार मैंने कठोरता दिखाते हुए कहा)

वो उठीं और माँ के पास चली गईं| वैसे पिछले कुछ दिन से मेरी बहुत शिकायत की जा रही थी!!! फिर से माँ उनके साथकमरे में आ गईं,

माँ: क्यों रे? बहुत तंग कर रहा है बहु को?

मैं: मैंने क्या किया?

माँ: बहु तेरा सर दबाना चाहती है और तू उसे मना कर रहा है? अब अगर उसके सर दबाने से तुझे नींद आ जाएगी तो क्या बुराई है इसमें?

मैं: माँ वो....ये प्रेग्नेंट हैं और इन्हें एक्सपोज़र हो गया तो? ये भी बीमार पड़ जाएँगी और फिर ऐसी हालत में जब ये माँ बनने वाली हैं इनका बीमार पड़ना होने वाले बच्चे के लिए सही नहीं|

माँ: ऐसा कुछ नहीं होगा? मामूली सी सर्दी-खांसी तो लगी रहती है| वैसे भी अपनों में बीमारी ऐसे ही नहीं फ़ैल जाती|

अब माँ से तर्क कौन करे? कौन उन्हें समझाए की ये सर्दी खांसी communicable disease होते हैं| मैंने हाथ जोड़े और माफ़ी माँगी| I believe की अगर आप जीत नहीं सकते तो माफ़ी मांग लो भाई! खेर माँ फिर से चली गईं और उन्होंने दरवजा लॉक किया और मेरे पास आके कम्बल में बैठ गईं|

मैं: हम्म्म...तो आपने माँ से शिकायत की?

संगीता: करनी पड़ी....आप मेरी बात तो मानते नहीं?

मैं: यार I'm very particular about you .... !!!

संगीता: तो इसका मतलब आप मुझे खुद से दूर कर देंगे?

मैं: यार ये कोई इतनी बड़ी बिमारी नहीं की मैं महीनों तक बिस्तर पे पड़ा रहूँ|

संगीता: लगता है आप ऐसे नहीं मानोगे? मैं माँ को बुलाती हूँ....

वो उठ के जाने लगीं तो मैंने उनका हाथ पकड़ के उन्हें रोक लिया|

मैं: Sorry ...Sorry ..... Sorry ..... Sorry .......

संगीता वपस मेरे पास बैठ गईं और सर दबाने लगीं| मेरे दिमाग में अब भी एक्सपोज़र वला ख्याल घूम रहा था तो मन जानबूझ के दूसरी तरफ करवट ले के लेट गया ताकि मेरी साँसों के जरिये कहीं वो बीमार न पड़ जाएं|

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पर वो मेरे दिल की हर बात जानती थी;

संगीता: हम्म्म....clever .....

वो भी मेरे से सट के लेट गईं और मेरी कमर पे हाथ रखा ...फिर धीरे-धीरे हाथ मेरी छाती तक जा पहुंचा और वो मुझसे कस के लिपट गईं|

संगीता: जानू....आपको याद है..... एक बार मैं बीमार पड़ी थी...तब आपने साड़ी रात जाग के मेरा ख्याल रखा था?

मैं: हम्म्म.....

संगीता: रात में मुझे फिर से बुखार चढ़ा था और आपने कैसे अपने शरीर से मुझे गर्मी दी थी?

मैं: हम्म्म्म ....

संगीता: वो मेरे लिए ऐसा लम्हा था जिसे मैं हमेशा याद किया करती थी| सोचती रहती थी की मैं कब बीमार पडूँ और आप मेरी देखभाल करने के लिए भाग के मेरे पास आ जाओ!

मैं: तो इस बार कहीं फिर से बीमार पड़ने का इरादा तो नहीं?

संगीता: क्या मुझे बीमार पड़ने की जर्रूरत है? अब तो हम हमेशा संग रहते हैं| आप तो पहले से ही मेरा इतना ख्याल रखते हो.... और इन दिनों तो कुछ ज्यादा ही!

मैं: भई रखना ही पड़ेगा.... आप माँ जो बनने वाले हो|

संगीता: हाँ..I'm very excited about this. इस बार आप मेरे साथ होगे ना?

मैं: मैं तो हमेशा आपके संग हूँ|

संगीता: नहीं...मेरा मतलब है जब डिलीवरी होगी तब?

मैं: देखो अगर doctors ने aloow किया तो जर्रूर हूँगा|

संगीता: नहीं...Promise Me ...आप मेरे साथ रहोगे?

मैं: अच्छा बाबा PROMISE!

संगीता: Thank You! तो अब तो मेरी तरफ घूम जाओ?

मैं: यार....

संगीता: जानू प्लीज!!!!!!

मैं: ठीक है ....

मैंने उनकी तरफ करवट ले ली| हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे...और देखते-देखते कब शाम हुई पता ही नहीं चला| मेरी वजह से उन्होंने Lunch तक skip कर दिया| मैं घडी देखि तो पांच बज रहे थे;

मैं: Hey ...आपने खाना खाया?

संगीता: नहीं

मैं: क्यों?

संगीता: आपने भी तो नहीं खाया?

मैं: यार.... मुझे भूख नहीं है| रुको I'll order something.

संगीता: अभी कुछ नहीं मिलेगा| आप ऐसा करो चाय ही बोल दो और हम माँ के कमरे में चलते हैं| चाय पीते-पीते, गप्पें मारते-मारते पिताजी और बच्चे भी आ गए| रात को खाना खा के सोने का समय था तो पिताजी ने सख्त हिदायत दी की आज बाहर घूमने नहीं जाना है| तो हम तीनों अपने कमरे में वापस आ गए| अब नेहा को कैसे समझों की वो मुझसे दूर रहे ....... मेरी इस मजबूरी का आनंद सबसे ज्यादा कोई अगर ले रहा था तो वो थीं संगीता जी! वो तो जैसे सांस रोके देख रही थीं की मैं नेहा से क्या तर्क करूँगा?

मैं: नेहा ...

नेहा: हाँ जी पापा?

मैं: बेटा आओ बैठो मेरे पास..कार्टून बाद में देखना|

नेहा आके मेरे पास कम्बल में बैठ गई|

मैं: okay बेटा....तो ....... aaaaaaaaa

मुझे शब्द नहीं मिल रहे थे की शुरूरत कैसे करूँ? मैंने संगीता की तरफ देखा तो वो हँसने के लिए तैयार कड़ी थीं...की मैं कुछ बोलूँ और नेहा तपाक से जवाब दे और वो खिलखिला के हँस सके|

मैं: बेटा...आप जानते ही हो की मुझे जुखाम और खांसी है....और ये communcable disease है...अगर आप मेरे साथ सोओगे तो आपको भी हो जायेगा! फिर आप स्कूल कैसे जाओगे ...पढ़ाई कैसे करोगे....और फिर आयुष आपके साथ खेलता है तो उसे भी बिमारी लग जाएगी.....फिर धीरे-धीरे सब बीमार हो जायेंगे| तो क्या आप यही चाहते हो?

नेहा: नहीं...पर मम्मी? वो तो आपके साथ.....

मैं: (नेहा की बात काटते हुए) बिलकुल नहीं...मैं सोफे पे सोऊँगा और आप दोनों Bed पे|

संगीता एक दम से बोली;

संगीता: अरे ....मुझे क्यों फंसा रहे हो?

मैं आदि से जोर से हँसा...

मैं: क्यों बड़ी हँसी आ रही थी ना आपको?

नेहा कुनमुनाते हुए बोली;

नेहा: पर पापा मैं....

मैं: बेटा आपको सुला के ही मैं सोऊँगा...और फिर मैं इसी कमरे में ही तो हूँ? आपको डर नहीं लगेगा|

नेहा: पापा आप surgical mask पहन लो?

मैं: (हँसते हुए) पर बेटा वो मेरे पास नहीं है?

नेहा: Idea ...

नेहा बिस्तर से उठी और cupboard में कुछ ढूंढने लगी| मैंने हैरान होते हुए संगीता की तरफ देखा की शायद उन्हें कुछ पता हो पर वो भी अनजान थी;

संगीता: ये नहीं मानने वाली| बिना आपको साथ लिए ये सोने वाली नहीं है| आपकी गैर मौजूदगी की बात और है पर आओके सामने होते हुए, मजाल है ये बिना आपके सो जाए?

मैं मुस्कुरा दिया....तभी नेहा अपने हाथ में कुछ छुपाये हुए आ गई| फिर अचानक से बोली;

नेहा: पापा आँखें बंद करो?

मैंने आँखें बंद की, अगले पल मुझे एहसास हुआ की मेरे मुंह पे कपडा बंधा जा रहा है| जब आँख खोली तो पाया, नेहा ने मेरी नाक और मुँह पे रुमाल बांधा था| ये देख के संगीता खिल-खिला के हँस पड़ी|

नेहा: लो पापा...अब हम में से कोई बीमार नहीं पड़ेगा|

मैं उसका तर्क देख के मुस्कुरा रहा था....

संगीता: Fantastic idea बेटा! अब बोलो क्या कहना है?

मैं: I GIVE UP!!!

बच्चों से हारने में एक अलग ही आनंद होता है| खेर हम तीनों एक साथ सो गए, नेहा बीच में थी और मेरा और स्नगीता का हाथ उसकी छाती पे था| कहानी सुनते-सुनते दोनों सो गयेपर मेरा मन अब भी बेचैन था ...तो मैं चुप-चाप उठा और सोफे पे जाके लेट गया| comfortable तो नहीं था...पर ADJUST तो करना ही था| करीब रात के दो बजे किसी ने कम्बल हटाया...मुझे लगा की संगीता होगीं पर जब मैंने आँख खोल के देखा तो नेहा थी....

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