Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.
JavaScript is disabled. For a better experience, please enable JavaScript in your browser before proceeding.
You are using an out of date browser. It may not display this or other websites correctly.
You should upgrade or use an
alternative browser .
एक एक आहट "ज़िंदगी" की complete
Thread starter
Thread starter
StoryPublisher
Start date
Start date
Today at 5:00 PM
अंकिता :- आइ आम प्राउड ऑफ यू अंकित..तुम्हारे नंबर...सच में बहुत अच्छे हैं...यू गॉट 93 इन जावा आंड
89 इन वीबी..मेरे सब्जेक्ट्स में तो बहुत ही अच्छे नंबर है..
अंकित :- हाँ तो टीचर अच्छी है तो नंबर तो ऑटोमॅटिकली ही अच्छे आएँगे..
अंकिता :- अच्छा बताऊं तुम्हे फ्लर्टी लड़के.....अब जब मिलोगे तब क्लास लगेगी तुम्हारी..और हाँ पार्टी भी
चाहिए मेरी..
अंकित :- हनहा आप क्लास भी लेना और पार्टी में तो एवेरी रेडी हूँ आपके लिए....
अंकिता :-अच्छा अभी रखती हूँ फ्रेश होने जा रही हूँ...
अंकित :- ओहकक बाए...
अंकिता :- और हाँ..ये मिस क्या होता है जो तुमने शुरू में बोला था और वो गाली जो तुमने दी थी??
अंकित मन में..ओ तेरी की..कहाँ से याद आ गया..
अंकित :- (स्टाइलिश वे में) सूओरयय्यययययी...
अंकिता :- बदमाश....चलो बाइ टाटा..
अंकित :- ओहक बाबयए....टाटा...
(फोन कट)
हइईई.....इस बार तो बच गया हस्शह अंकिता मॅम की वजह से बस...मॅम मॅम
माँ...आपने तो दीवाना बना दिया है...एक तो आपकी हॉट बॉडी उपर से इतना हॉट नेचर कातिलाना..
हर तरफ धमाल मचा रखा है आपने...
और हाँ मॅम फ्रेश होने जा रही थी...ऊओ वाऊओ काश में भी देख सकता....मज़ा ही आ जाता..
हाए सुंदर बदन पे गिरते पानी की बूंदे...सीईईई...मेरे तो रोंगटे खड़े हो रहे हैं और
साथ साथ में कुछ और भी..(और उसका हाथ ऑटोमॅटिकली अपने लंड पे आ जाता है)
और अंकिता को नहाते हुए सोचने लगता है.....
हाँ मॅम यहाँ साबुन लगाओ..में हेलो कर दूँ क्या..हा...उफ़फ्फ़......क्या पैर हैं आपके..इतने
हॉट लेग्स तो मैने किसी के नही देखे...(और उसके हाथ की स्पीड बढ़ जाती है अपने लंड पे)
मॅम यहाँ लगाओ...आपकी इस छांटेकेदार आस पे..हाए कितनी सॉफ्ट है...बेबी टॉय जैसे...आराम आराम
से ळगाउन्गा हाए...(और तेज़ी से हाथ चलने लगते हैं..बस वो अपनी मज़िल के बिल्कुल करीब ही
पहुच चुका था)
तभी...घर के डोर बेल बाज गयी...और अंकित अपने होश में जगा...
अंकित :- व्हाट दा फक...बेह्न्चोद...(खिचते हुए) साला अभी आना था....
और फिर आवाज़ लगाते हुए..कौन है...बोलता हुआ गेट के पास पहुच जाता है.....
अंकित बड़बड़ाता हुआ उठा और बाहर जाके देखा तो उसके सामने एक आदमी हाथ में एक बड़ा
सा बुकेट लिए खड़ा था..
अंकित :- किससे मिलना है.
अंकित साहब से मिलना है..(वो आदमी बोला)
अंकित :- में ही अंकित हूँ..
ओह्ह..सर ये आपके लिए...(वो आदमी बुकेट देता जिसके साइड में ही वो लेटर घुसा हुआ था जिसे
अभी अंकित ने नही देखा था)
अंकित :- किसने भेजा है लेकिन...
सर आप ये ले लीजेए..मेडम ने बोला है कि दे दूं..तो दे रहा हूँ..(वो अंकित के हाथ में थमा
देता है)
अंकित :- हाँ लेकिन तेरी मेडम का कोई नाम तो होगा ही..
वो आदमी अनसुना करते हुए मूड के जाने लगता है..
अंकित :- अबे ओई....साला....बड़ा ही बेह्न्चोद आदमी है...चला गया...वैसे जो भी कहो ये
बुके है बड़ा प्यारा..किसने भेजा होगा...कहीं अंकिता मॅम ने तो नही..(घर के अंदर जाते हुए
अपने आप से बात करते हुए) नही नही..उनसे तो अभी ही बात हुई है इतनी जल्दी वो भी इतनी दूर से कैसे
भेज सकती है....(कमरे में आ जाता है और बुके को घुमाने लगता है और तब उसे वो लेटर
पीछे की तरफ दबा हुआ दिखाई देता है...वो बुके को बेड पे रख के लेटर निकाल लेता है)
अंकित :- लेटर भी है...ओहो...कौन मेहरबान हो गया आज मुझ पर..लगता है आज का दिन अच्छा है..
फिर लेटर खोल के पढ़ने लगता है...
डियर अंकित
कैसे हो?? इट्स बिन आ लोन टाइम मोर दॅन 7 मंत्स...तुम्हे मेरा ये लेटर और ये बुके देख के
अजीब लगेगा कि इतने महीनो तक कहाँ गायब थी...उस दिन के बाद ना तो मेने कोई कॉंटॅक्ट किया
ना कुछ..यही सोच रहे हो है ना...क्यूँ कि में जानती हूँ उस दिन के बाद कॉंटॅक्ट मुझे ही करना
था लेकिन मेने ऐसा कभी नही किया....
यहाँ तक अंकित पढ़ते हुए समझ गया कि ये सब रितिका का ही दिया हुआ है..
अंकित :- इतने महीनो के बाद इन सब का क्या मतलब है..(वो थोड़ा गुस्से में बुदबुडाया और फिर आगे
पढ़ने लगा)
जानती हूँ ये सब पढ़ते वक़्त तुम्हे गुस्सा आ रहा होगा..गुस्सा बहुत जल्दी आता है ना तुम्हे और हाँ
वैसी भी ये एज ही ऐसी है...पर क्या करूँ मेने तुम्हे जान बुझ के कॉंटॅक्ट नही किया उसका एक
रीज़न था बहुत बड़ा रीज़न..
अंकित :- हुहह..बहाने....मेने सोचा था उस दिन के बाद अटलीस्ट फोन कर के एक बार तो कह
ही दोगि कि अंकित मेने तुम्हे माफ़ कर दिया..लेकिन नही...आज इतने टाइम के बाद ये सब..क्या फ़ायदा
जब में आपके नाम का चॅप्टर अपनी ज़िंदगी से क्लोज़ कर ही चुका था तो...(अपनी गर्दन हिलाते
हुए)
रीज़न ये था कि मेने तुम्हे उसी दिन मन ही मन ये वादा दे दिया था कि जब तक में पहले
जैसी...जैसा तुम मुझे कहते थे वैसा नही बन जाती..तब तक तुमसे कोई बात नही करूँगी..और उसी
में ये वक़्त लग गया इतना...ये भी जानती हूँ कि तुम अब मुझसे कभी बात नही करना चाहोगी और
ना ही तुमने मुझे याद किया होगा..लेकिन मेने तुम्हे रोज याद किया...
क्रमशः...........................
आपका इंतजार ख़त्म हुआ पोस्ट अभी आ रहा है
गतान्क से आगे..............
सब कहते हैं लड़कियों को समझना मुश्किल होता है पर तुम जैसे लड़के को में आज तक नही समझ
पाई...प्यार करूँ या नफ़रत कुछ समझ नही आता...जो तुमने उस दिन किया वो ग़लत था या सही नही पता
पर हाँ इतना जान गयी हूँ..कि तुमने जो किया उस दिन सिर्फ़ मेरी भलाई के लिए किया..अगर तुम ऐसा ना
करते तो आज शायद में मेंटल कन्डीशन की उस स्टेज पे पहुच गयी होती जहाँ से बाहर निकलना
नामुमकिन था...लेकिन तुम्हारी कही हुई उन प्यारी बातों से जैसे दिल में अलग नशा सा पैदा कर दिया
हो...जानती हूँ एक पत्नी और एक बेटे की माँ होने के नाते ये सब जो बोल रही हूँ ग़लत है...पर तुमने
सच कहा था एक औरत का जीवन उसका परिवार नही होता...उसका खुद का भी होता है...उसे जीने
का भी पूरा हक है...और बात जब तुम्हारे साथ बिताए उस 15 मिनट की आती है जो तुमने मेरे साथ
किया जानती हूँ कि वो तुमने वो सब वासना में आके नही बल्कि प्यार के नाते किया..उस दिन तुमसे ये
कह ना पाई..लेकिन आज कह रही हूँ..उस दिन तुम्हारा प्यार झलक रहा था..जो शायद हर औरत चाहती
है...हाँ पर तरीका बहुत ग़लत था..शायद हम दोनो का....
लेकिन तुम्हारी कही हुई बातों ने दिल को छू लिया और मेने तभी फ़ैसला कर लिया था कि अब में तुम्हारे
लिए सिर्फ़ पहले जैसे बनूँगी...
तुम्हे मेरी बातें बकवास लग रही होंगी..या फिर सोच रहे होगे कि सफाई दे रही हूँ में...पर मेरा
यकीन मानो ऐसा कुछ नही है....
और लिखने के लिए मेरे पास कुछ नही है..बस तुमसे एक रिक्वेस्ट है..कल शाम 4 बजे मेरे घर
में तुम्हारा इंतजार करूँगी..अगर तुम आए तो में समझूंगी कि हम से जो ग़लती हुई वो सिर्फ़ मेरी ही
वजह से हुई थी....
क्यूँ कि जितनी ग़लती तुम्हारी थी उससे कहीं ज़्यादा मेरी...मेरा तरीका बहुत ग़लत था...
लेकिन में दिल से चाहती हूँ कि तुम एक बार आओ...तुमसे मिलने के लिए में बहुत बेचैन हूँ...
रितिका...
अंकित ने आख़िरकार पूरा लेटर पढ़ लिया..उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था..वो अपना सर पकड़ के
बैठ गया...उसे खुद कुछ समझ नही आ रहा था कि जो हो रहा है वो सही है या ग़लत और जो हुआ
वो सही था या ग़लत....अब जब वो रितिका का चॅप्टर अपने लाइफ से बंद कर चुका था तो अचानक ये
सब क्या हुआ.....
अंकित :- ओह्ह शिट..शिट..शिट....ये कहाँ से आ गई..कई बार हम जो चाहते हैं वैसा क्यूँ नही होता..जब
में चाहता था कि रितिका मुझे मिल जाए तब गड़बड़ हो गई..और जब में नही चाहता था कि कभी भी
रितिका सामने आए तो आज .....ये साली लड़कियाँ इतनी ब्लॅक मैल क्यूँ करती है....
यार ये क्या हो गया अब क्या करूँ....(और फिर पलंग पे आँखें बंद कर के पसर जाता है)
अच्छा भला दिन टेन्षन से भर गया था अंकित का..कहाँ तो उसने सोचा था कि आज मज़े से बाहर
जाएगा...लेकिन इस लेटर ने उसका तो क्ल्प्ड कर दिया...ऐसा उसे अभी लग रहा है...
कल का दिन आख़िर आ ही गया....अंकित ने रात भर बहुत सोचा ...
वो जानता है कि उसने रितिका का चॅप्टर क्लोज़ कर दिया था लेकिन वो रितिका से कभी नफ़रत नही करता
था और ना ही कभी कर पाएगा इसलिए उसने जाने का फ़ैसला कल रात को ही कर लिया था..
वो घर से 3:30 ही बाजी तैयार होके निकल गया था....
उधर रितिका ने पूरी तैयारी कर रखी थी....सॉफ सफाई घर की खुद ही की..आर्नव भी आज घर पे नही
था...सब काम किचन के उसने खुद ही किए शायद काम वाली की भी छुट्टी कर रखी थी उसने...
जब उसने घड़ी में देखा कि 3:30 बाज गये तो वो सीधा रूम में घुस गयी तैयार होने के लिए..
4:00 (क्लॉक में टाइम हुए और तभी)
तिंज्गग तोंगगगगगगगगग.....घर में ये आवाज़ गूँजी...रितिका ने रूम का डोर खोला..
आईईई...रितिका बोलते हुए दरवाजे पे जाती है..उसकी दिल की धड़कन तेज हो रही थी...इतने दिनो के बाद
अंकित से मिल रही थी उसके दिल में हलचल हो रही थी..उसने गेट का डोर लॉक पकड़ा और उसे खोल के
गेट को खींचा और मुस्कुराते हुए सामने देखा तो....
गुडआफ्टरनून मॅम..में इस कंपनी से आया था क्या आप ये प्रॉडक्ट लेना चाहेंगी...
सामने एक सेल्स मॅन खड़ा था....रितिका के चेहरे की मुस्कान चली गयी....वो रूड्ली बोली..
नही चाहिए...और उसने गेट को बंद कर दिया बिना उस लड़के की सुने....
एक बार उसे बहुत गुस्सा आया सारे मूड का सत्यानाश हो गया उसका.....
तिंज्ग तोंज्गग.....फिर से एक बार बेल बाजी.....रितिका के दिल की धड़कन एक बार फिर तेज हो गयी....
वो मूडी और गेट का डोर लॉक पकड़ के गेट को खोला...
मॅम एक बार तो प्रॉडक्ट देख लीजिए.....सामने वही सेल्स मॅन खड़ा था...
रितिका एक पढ़ी लिखी वेल मॅनेज्ड आइजुकेड़िट लड़की है..गुस्सा तो शायद ही कभी आता है लेकिन..
इस वक़्त आ गया उसे....
रितिका :- आइ सेड ना आइ डोंट वॉंट .. डोंट यू अंडरस्टॅंड...(चिल्लाते हुई गेट को धडाम से बंद
कर देती है ) इन सब को भी इसी वक़्त आना है...नॉनसेन्स..स्टुपिड..(गुस्से में)
तिंगगगग तोंगगगगगगगगगग....एक बार फिर से बेल बजी....
रितिका का गुस्से का ठिकाना नही रहा वो अपने आप से बोलती हुई...नाउ आइ आम गूना स्लॅप हिम...
गुस्से में बोलती हुई गेट खोलती है..
रितिका :- क्या है..तुम्हे...शरम नही आती बार बार परेशान करते हुए....आइ गॉना कोंपलिन फॉर यू
(वो बिना देखी बोल देती है)
लेकिन जैसे ही शांत होती है और सामने देखती है...तो उसका मूह खुला का खुला रह जाता है..
सामने बेचारा अंकित हाथ में बुके लिए अपने फेस को बचाने के लिए उपर किया हुआ था
जब रितिका का बोलना बंद हुआ तो उसने सामने देखा....और एक डरी हुई हल्की सी स्माइल दी...
रितिका उसको आँखें फाडे तके जा रही थी......
बेचारा अंकित उसको लगा शायद उसने कुछ ग़लती कर दी तो वो घबराते हुए बोला.
अंकित :- स.सस्स..सॉरी...
रितिका होश में आते हुए..
रितिका :- नो नो..आइ आम सॉरी...वो मुझे लगा कि वही सेल्स मॅन है बार बार परेशान कर रहा था..
इसलिए मेने वो सब..
इधर रितिका बोल रही थी...उधर अंकित की आँखें रितिका पर जम गयी बिल्कुल पहले की तरह...लेकिन इस बार
रितिका और खूबसूरत लग रही थी....चेहरे पे एक अलग ग्लो एक अलग ही क्यूट्नेस..चरम्म ब्यूटिफ्युल्नेस..
झलक रहा था ... गुस्से की वजह से रितिका की नाक लाल हो गयी थी जो उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी..
आज एक अलग ही ड्रेस में रितिका को अंकित देख रहा था..सुंदर गोरा चेहरा उसके ना के बराबर का
मेकप और लाल नाक...कातिलाना चेहरा लग रहा था बिल्कुल....
एक पंजाबी सूट रेड कलर का...उसकी चुन्नी साइड से लाते हुई कमर पे बँधी हुई...
उफ़फ्फ़..कोई इतना सुंदर कैसे लग सकता है...अंकित अपने मन में बोला...
अंकित....क्या हुआ..? रितिका अपने हाथ को अंकित के चेहरे के सामने हिलाते हुए बोलती है..
अंकित होश में आता हुआ.....नही..न.आ.ही...कुक..ह नही..
रितिका :- प्लीज़ कम इन..(दरवाजा छोड़ते हुए अंकित को अंदर बुलाती है)
अंकित अंदर आ जाता है और अपने हाथ में पकड़ा बुके रितिका की तरफ बढ़ाता है..
रितिका :- इसकी क्या ज़रूरत थी..(हाथ से बुके लेते हुए)
अंकित :- ह्म्म बस...इतने दिनो के बाद आया था तो खाली हाथ तो नही आ सकता था ना इसलिए ले आया..
रितिका :- ह्म्म बैठो पंनी लाती हूँ...(और फिर रितिका मटकते हुए पानी लेने चली जाती है)
लेकिन अंकित ने इस बार रितिका की चाल पर ध्यान नही दिया और वो वहीं सोफे पे बैठ गया.....
थोड़ी देर बाद.....
अंकित और रितिका एक ही सोफे पे कुछ ही डिस्टेन्स पे बैठे थे..बिल्कुल चुप...दोनो में से कोई
कुछ नही बोल रहा था....शायद वक़्त इतना गुज़र गया था कि कुछ कहने के लिए नही था और वैसे
भी आखरी मुलाकात भी कुछ ज़्यादा अच्छी नही थी.....
कुछ देर ऐसे ही आपस में उंगलियाँ घिसने के बाद रितिका ने चुप्पी थोड़ी जो शायद अंकित भी
यही चाहता था...
रितिका :- तुम बिल्कुल भी नही बदले....वैसी ही हो..
अंकित उसकी तरफ मुड़ते हुए देखता है..
अंकित :- लेकिन आप बहुत बदल गयी हैं ... थॅंक यू....
रितिका :- थॅंक यू क्यूँ?
अंकित :- अपने मेरी बात रख ली...
रितिका :- उसके लिए तो मुझे थॅंक यू बोलना चाहिए तुम्हे....
अंकित :- नही..आप क्यूँ थॅंक यू बोलोगे जब कि ग़लती तो मेने की थी
रितिका :- नही..ग़लती हम दोनो की थी..लेकिन मेरी ग़लती का एहसास तुमने दिलाया और तुम्हे अपनी ग़लती का एहसास
खुद हुआ...ना जाने में क्या कर रही थी..अगर कोई और होता..तो वो सच में मेरे साथ सब कुछ
आसानी से कर जाता और ना जाने फ्यूचर में वो और क्या क्या करता...(बोलते हुए उसका गला भारी हो
गया आँखें नम हो गयी नाक बिल्कुल लाल हो गयी)
अंकित को लगा कि महॉल फिर से पहले जैसा हो रहा है और वो नही चाहता था कि पहले जैसा माहौल एक बार
फिर से बन जाए..
अंकित :- आपकी नोज...बिल्कुल ऐसी रेड हो गयी मानो किसी ने लिपस्टिक लगा दी हो....
रितिका अंकित की तरफ देखते हुए उसकी बात सुन के हल्का सा मुस्कुरा देती है...
वो उस चेहरे पे मुस्कुराहट ने अंकित के दिल पे एक गहरा वार कर दिया इतनी प्यारी हँसी इतना प्यारा
एहसास था वो अंकित के लिए...अंकित रितिका को घूर्ने लगा उसके चेहरे को अपनी आँखों से निहारने लगा..
रितिका ने देख लिया..लेकिन उसने कुछ कहा नही..वो भी उसकी आँखों में देखने लगी और फिर बोली..
रितिका :- क्या किया तुमने इतना टाइम?
अंकित होश में आते हुए..
अंकित :- बस कुछ पुरानी यादों को भुला के आगे बढ़ गया था और लाइफ के आने वाले टाइम को
अच्छा बनाने की तैयारी...
रितिका :- इसका मतलब तुम मुझे भी भूल गये थे?
अंकित :- नही....में अपनी यादों को भुला था..और यादें उसकी होती है जिसे इंसान अपनी ज़िंदगी में दफ़न
कर देता है...मेने वो वक़्त दफ़न किया जिसमे मेने आप जैसी इतनी प्यारी इंसान के साथ ग़लत किया...
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
रितिका अंकित की आँखों में देखने लगी..जिसमे उसे वही चीज़ दिखी जो उसे आखरी टाइम अंकित के साथ
बेड पे दिखी थी...
रितिका का हाथ अपने आप उपर उठता चला गया और अंकित के हाथों पे रख दिया....
अंकित चौंक गया उसने नज़रे नीचे करते हुए रितिका के हाथ को अपने हाथों पर देखा लेकिन रितिका
तो बस सामने अंकित को देख रही थी.....
फिर अंकित ने रितिका के चेहरे की तरफ देखा....
अंकित :- क्या ये सही है?
रितिका :- सही और ग़लत की क्या डेफ़िनेशन है...
अंकित :- नही पता...क्या सही है और क्या ग़लत....मुझे तो बस इतना पता है कि में इस वक़्त अपनी
ज़िंदगी के सबसे बेहतरीन लम्हे में हूँ....
रितिका :- तो फिर इस लम्हे को अच्छी तरह जियो....
अंकित :- नही....इसे आगे बढ़ाने का मतलब है कि ..
रितिका :- (अंकित के होंठो पे अपनी उंगली रखते हुए) सस्शह....इस लम्हे को ऐसी बातों में मत
गँवाओ....
अंकित अपने मन में सोचने लगा...ये क्या हो रहा है....वैसी तो आज रितिका जी इतनी प्यारी लग रही है कि
कोई भी आज इन्हे जितना प्यार दे वो कम है.....
रितिका :- अंकित जो सोच रहे हो उसे करने में इतनी देर क्यूँ..
अंकित रितिका को घूर्ने लगा मानो रितिका ने उसके मन की बात सुन ली हो....
रितिका आगे बढ़ के अंकित के गले लग जाती है....अंकित के शरीर में उपर से लेके नीचे तक एक
करंट सा फैल जाता है...और रितिका के हाथ अंकित की पीठ पे कस जाते हैं...इधर अंकित सोच रहा था
कि वो क्या करे...वो तो अपने हाथ की मुट्ठी बार बार बना रहा था और खोल रहा था....
(चाहे अंकित हर लड़की को अपनी नज़रों से ताड़ता हो जो कि आज के यंग्स्टर की आदत सी बन गयी है..
चाहे गुस्सा बहुत आता हो और गुस्से में कुछ भी बोल दे लेकिन दिल का घटिया इंसान था नही कि बस
वो सब कुछ कर दे)
रितिका :- अंकित आइ आम सॉरी...मुझे उस दिन ऐसा कुछ नही करना चाहिए था...शायद मेरा तरीका बिल्कुल
ग़लत था..मेने तुम्हे एक घटिया और गिरा हुआ इंसान समझ लिया था..लेकिन तुम बिल्कुल भी ऐसे नही
हो...ग़लती कर के उसे कबूलना और उसका पछतावा करना सबसे बड़ी बात होती है और ये काम कोई
गिरा हुआ इंसान नही कर सकता....तुम दिल के बहुत अच्छे हो....सच में....
रितिका की इन बातों से अंकित के हाथ भी उठने लगे...और धीरे धीरे रितिका की पीठ को सहलाते हुए
आख़िर उस पे रख दिए...
इस बार करंट लगने की बारी रितिका के शरीर की थी..उसने अपनी आँखें बंद कर ली..
(आख़िर इतने टाइम के बाद ये सुख मिला था)
अंकित कुछ नही बोला और उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपने हाथों से रितिका की पीठ को सहलाए
जा रहा था...उधर रितिका की आँखें बंद हो गयी थी.....
अब आपको लग रहा होगा कि लास्ट टाइम ही तो रितिका के उपर अंकित चढ़ गया था लेकिन ये भी तो सोचिए
कि उस वक़्त रितिका किस हालत में थी और अंकित किस जगह पर....
शरीर का असली मिलन तो आज ही शुरू हुआ है....
अंकित कुछ नही बोला और उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपने हाथो से रितिका की पीठ को सहलाए
जा रहा था...उधर रितिका की आँखें बंद हो गयी थी.....
दोनो ऐसे ही एक दूसरे के गले लग रहे थे...दिलो में एक अजीब सी धड़कन धड़क रही थी शायद
आने वाले पल में जो होने वाला है उसको सोच के.....
फिर अंकित के हाथ रितिका की पीठ को सहलते हुए थोड़ा उपर आने लगे...अब सूट पहनने की वजह से उपर
का हिस्सा खुला था पीछे से और उसकी उपरी पीठ पे कोई कपड़ा नही था...अंकित का हाथ नीचे से सहलाता
हुआ उसकी नंगी पीठ पर जा पहुचा और जैसे ही अंकित के हाथ उस कोमल पीठ पर पड़े....तो
बस अंकित का तो बुरा हाल हो गया उसका तंबू पेंट के अंदर बनने लगा....और रितिका के भी
मूह से हल्की सी ससिईइ ह..सिसकी निकल गयी..ठंडे हाथों का स्पर्श उसके जलते हुए जिस्म पे जब पड़ा तो
उससे भी कंट्रोल नही हुआ....
अब अंकित वहाँ बराबर अपने हाथों से सहलाए जा रहा था..दोनो की गर्दन हिल रही थी जिससे दोनो के
गॉल आपस में घिस रहे थे...या फिर यूँ कहिए कि जान बुझ के हिला रहे थे...जिसे दोनो के गाल
एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे....
रितिका का चेहरा लाल हो गया था वहाँ अंकित भी अब अपने आप पर काबू नही कर पा रहा था...
फिर अंकित ने अपना शरीर रितिका से थोड़ा हटाया और अपने हाथ ले जाके रितिका के कंधे पे रख दिए
और रितिका के फेस को अपनी आँखों से देखने लगा..उसने तो अपनी आँखें ही बंद कर रखी थी...
अंकित ने उस प्यारे से खुबुसूरत चेहरा को देखा और फिर अपने होंठ आगे बढ़ाता हुआ...
रख दिए रितिका के कान पे..और रितिका के कान को अपने होंटो के बीच में दबा के उन्हे
प्यार चूमने लगा...
रितिका के शरीर में झुनझुनी फैल गयी और उसके हाथ की पकड़ अंकित के शरीर पे कस गयी....
अंकित ने अपने होंठो से उसके कान को अच्छी तरह से चूमा अपनी जीभ बाहर निकाल के थोड़ी सी गुलगुली
भी की....रितिका तो जैसे इतने में ही मदहोशी के सागर में डूब गयी उसकी साँसें उपर नीचे
ज़ोरों से होने लगी....
फिर अंकित कानो के नीचे अपने निचले होंठो को फिराने लगा...और फेरता हुआ रितिका के चेहरे की तरफ
बढ़ने लगा और अपनी निचले होंठो को उसके गालों पे फेरने लगा...रितिका के हाथ अंकित की पीठ को
सहला रहे थे...उसकी आँखें तो खुल ही नही रही थी.....
अंकित अपना एक हाथ रितिका के कंधे से हटा के....रितिका की चुन्नी पे ले गया और उसे उसके शरीर
से अलग कर उसे नीचे ज़मीन पे फैंक दिया.....अब रितिका की चुन्नी उसके शरीर पे नही थी...
तो अब उसके धके हुए बूब्स वाला हिस्सा चुन्नी से अब बेपर्दा हो गया...
उसके वो चुचे उस सूट में ऐसे लग रहे थे मानो टोकरी में रखे हुए दो बड़े बड़े फल
और उस टोकरी को उपर से पॅक किया हो....
अंकित तो उन रसीले चुचों को देखता ही रह गया...असल में उस सूट में हल्का सा क्लीवेज भी
दिख रहा था...रितिका के चुचों की दरार दिखाई दे रही थी...अंकित की नज़रे वहाँ गुम सी हो गयी...
रितिका को जब कोई हरकत महसूस नही हुई तो उसने अपनी आँखें हल्की सी खोली ये देखने के लिए कि
अंकित क्या कर रहा है ..... लेकिन वो ढंग से आँखें खोल पाती..इससे पहले..
अंकित ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और रितिका के गले पे अपना हाथ फेरने लगा और हाथ फेरता
हुआ थोड़ा नीचे आने लगा...और हाथ को थोड़ा टेडा कर के..ठीक चुचों के उपरी हिस्से
को अपने हाथ से सहलाने लगा...अपनी उंगलियों से उसके शरीर को स्पष्ट महसूस करने लगा..
लेकिन उसके बूब्स को नही छू रहा था....
रितिका अंकित की इस हरकत से अपने शरीर को स्म्भाल नही पाई..और पीछे लुड़कने को गयी..लेकिन अंकित ने
अपना हाथ पीछे ले जाके उसे वहाँ पकड़ लिया....और हाथ से रितिका के शरीर पे प्रेशर डाल के
उसे आगे करने लगा.....
और फिर अपना दूसरा हाथ गले पे फिराते हुए पीछे गर्दन पे ले गया और रितिका के फेस को अपने
फेस के ठीक सामने ले आया....अब दोनो एक दूसरे की साँसें को सॉफ महसूस कर पा रहे थे....
रितिका ने बड़ी मुश्किलो से आँखें खोल के अंकित की आँखों में देखा...
दोनो की आँखों में ना तो वासना थी और ना ही प्यार.....सिर्फ़ एक ही चीज़ थी वो थी मदहोशी....
रितिका के चेहरे पे बाल की एक लट आ रही थी...अंकित ने उसे अपनी उंगली से हटा के ले जाके कान के पीछे
रखी और फिर अपनी उसी उंगली को फिराता हुआ माथे पे ले गया और फिर सहलाते हुए धीरे धीरे...
उसकी नाक के रास्ते से नीचे आने लगा...और होंठो पे आके रुक गया...
होंठो पे अपनी उंगली को अच्छी तरह से सहलाया क्या मुलायम और मस्त होंठ है रितिका के
फिर नीचे चीन से होके....उसकी गर्दन पे आने लगा...रितिका ने मदहोशी मे अपनी गर्दन उपर कर
ली....उसकी साँसें ज़ोरों से चल रही थी..जिसकी वजह से उसके वो शानदार बड़े बड़े बूब्स उपर नीचे
उपर नीचे हो रहे थे......
अंकित ने अपनी उंगली सहलाते हुए नीचे लानी शुरू करी और धीरे धीरे..वो चुचों की तरफ बढ़ने
लगा और बस जहाँ तक वो दरार दिख रही थी वहाँ पे जाके अपनी उंगली रख दी......
रितिका का तो बुरा हाल हो चुका था.....उसके लिए एक एक एहसास ऐसा था कि बताना मुश्किल है कि उस वक़्त
वो कैसा फील कर रही थी...(शायद कोई लड़की ही अच्छी तरह से बता पाए)
फिर अंकित ने अपने काँपते होंठो को रितिका की चुचों की दरार के ठीक उपर रख दिया....
ना चाहते हुए भी रितिका के मूह से हल्की सी आह...निकल गयी...
अंकित अपने होंठो को रगड़ता हुआ धीरे धीरे उस कोमल सुंदर रितिका के जिस्म पे फिराते हुए उपर
लाने लगा...और गले पे से होता हुआ चिन पे रख दिया और वहाँ अपने होंठ खोल के
उसकी चिन को अपने होंठो में दबा के बड़े प्यार से जैसे आइस क्रीम चूस्ते हैं वैसे ही
चूसने लगा लेकिन केवल होंठो से बड़े प्यार से और आराम से...
रितिका धीरे धीरे गहरे नशे में उतरती जा रही थी...उसके हाथ खुद ब खुद अंकित के पीछे उसके
सर में बालों के अंदर घूम रहे थे....
अंकित उसकी चिन को ऐसे प्यार करने के बाद..वहाँ से हटा और अपने होंठ ले जाके गाल पे
रख दिए....और अपने उपर वाले होंठ से उसे कुरेदने लगा...
रितिका की गर्म सांस अंकित के चेहरे पे पड़ रही थी...जो अंकित और दीवाना बना रही थी.....
अंकित ने अपने होंठ रितिका के होंटो के ठीक नीचे रख दिए और वहाँ उन्हे फिराने लगा...
दोनो के होंठो के मिलन में ज़्यादा दूरी नही थी.....
एक हाथ बढ़ता हुआ अंकित का रितिका की कमर पे से होता हुआ ठीक उसके पेट के उपर आ गया..
उस पतले से सूट के उपर अंकित का हाथ दबाब बना रहा था..उसे सहला रहा था...
रितिका की तो साँसें उपर नीचे होने लगी....बड़ी तेज़ी सी उसकी धड़कने तेज चलने लगी...
रितिका के होंठ हल्के से खुल गये और उनमे से निकल रही गरम साँसें अंकित के होंठो पे पड़ रही
थी..
अंकित ने अपनी नज़रे उठा के रितिका की तरफ देखा तो रितिका का चेहरा पूरा लाल पड़ चुका था..
आँखें बंद और चेहरा सॉफ कह रहा था...रूको मत..जो करना है वो करो.....
इस वक़्त मदहोशी ने दीवाना बना रखा था.....
अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ाए धीरे धीरे...और अपने दोनो होंठो को खोल के सीधे
रितिका के उन तड़पते निचले होंठ के उपर रख दिया....और अपने दोनो होंठो के बीच दबा लिया..
और उन्हे प्यार करने लगा....रितिका की तरफ से कोई रेस्पॉन्स नही था..शायद उसको इतना मज़ा आ रहा था
कि वो सिर्फ़ अंकित को ही सब कुछ करने देना चाहती थी....
उधर अंकित निचले होन्ट को अपने होंठो के बीच में दबा के उस के रस को पीने की कॉसिश कर रहा
था और नीचे उसका हाथ रितिका के पेट से फिसलता हुआ नीचे रितिका के उस पतले से पाजामे के उपर
आते हुए...उसकी थाइस पे आ गया और अपने हल्के हाथ से रितिका की थाइस को सहलाने लगा...
रितिका के शरीर एक बार पूरी तरह से हिल गया....उसके हाथ अंकित के हाथो के उपर आ गये शायद
उसे रोकने के लिए लेकिन सिर्फ़ हाथ उपर रख दिया रोकने की कोशिस नही की....और वो भी अंकित के हाथ
के साथ अपनी ही छाती को सहला रही थी......
उधर फर्स्ट टाइम रितिका ने भी रेस्पॉन्स किया.....
रितिका ने अपने होंठ और थोड़े खोल दिए और अपने उपर वाले होंठ से अंकित के उपर वाले होंठो
को दबा दिया....ऐसा करने से एक लिपलोक्क बन गया था...
रितिका का हाथ अंकित की चेस्ट की तरफ बढ़ गया था और अंकित की चेस्ट को सहला रही थी.....
ना जाने क्या सूझा अंकित को उसने अपने होंठ रितिका से अलग कर लिए...एक दम ऐसे अलग होने से
रितिका को थोड़ा अजीब लगा उसने बड़ी मुस्किलों से आँखें खोली और सामने देखा...
रितिका की आँखें एक दम लाल हो चुकी थी और एक दम नशीली भी....उधर अंकित ने अपने हाथ जो
रितिका की थाइस पे रखे थे वो भी हटा लिए और रितिका के हाथ को अपनी चेस्ट पे से हटा दिया..
अंकित रितिका की आँखों में देखते हुए खड़ा हो गया...रितिका उसे देखे जा रही थी मानो पूछ
रही हो क्या हुआ...क्यूँ इतना प्यारा लम्हा तोड़ दिया तुमने...
लेकिन शायद अंकित के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था.......
अंकित ने पहले तो अपनी पहली हुई सैंडल उतार के एक तरफ कर दी...फिर वो घुटनो के वल बैठ गया
और अपने हाथ आगे बढ़ा के रितिका का एक पैर उपर उठाया...और रितिका ने जो स्लीपर पहनी हुई थी उसे निकाल के साइड में फैंक दिया...
फिर अंकित ने अपने हाथों से रितिका के पैर पे हाथ फिराते.....वाहह कितने ज़्यादा सॉफ्ट है ये..अंकित ने अपने मन में सोचा...फिर सामने उसने दूसरे पैर के साथ भी किया....
दोनो पैरो को अपनी हथेली में लेते हुए देखने लगा...कितने सुंदर छोटे छोटे सॉफ्ट पैर है..
क्रमशः...........................
गतान्क से आगे..............
रितिका सोच रही थी और अंकित की तरफ देख रही थी की आख़िर ऐसा क्या देख रहा है अंकित....वो इतना सोच ही
रही थी..कि अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ाए और रितिका के पैरों की उंगलियों को अपने मूह में
लेके उन्हे सक करने लगा......
आहह...हल्की सी सिसकी निकल गयी रितिका के मूह से और उसकी आँखें बंद हो गयी...उसे बिल्कुल उम्मीद नही
थी कि अंकित ऐसा भी कुछ कर सकता है.....
फिर अंकित ने उंगली को मूह हे बाहर निकाला...और दूसरी उंगली मूह में लेके सक करने लगा...ऐसे करते
करते वो एक के बाद एक उंगली मूह में लेके सक करने लगा..
आह.....न...न.न..नू.....आन्कि..त..त.....(रितिका नो तो कर रही थी लेकिन उसकी नो में वो शक्ति नही थी जो होनी चाहिए
थी...उसकी तो साँसें तेज चलने लगी....जिसकी वजह से उसके वो बेहद अट्रॅक्टिव बूब्स उपर नीचे हो
रहे थे तेज़ी से)
अंकित ने उंगलियो को अच्छी तरह चूमने के बाद .... वो धीरे धीरे अपने होंठो की छाप छोड़ते
हुए उपर बढ़ने लगा...
रितिका ने जो पाजामा पहना था वो छुरिदार था इसलिए अंकित उससे ज़्यादा उपर नही कर पाया..थोड़ा सा
ही कर पाया पर जितने भी कर पाया उसमे रितिका के हॉट लेग्स की कुछ झलक तो मिल ही गयी और
इस बार उसने अपने होंठ के साथ साथ अपनी जीभ भी बाहर निकाल के वहाँ फिरा दी...एक दम चिकनी
लेग्स थी रितिका की..
जीभ टच होते ही रितिका को गुदगुदी होने लगी ... लेकिन उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था...
उसके हाथ आगे बढ़ते हुए अंकित के सर पे चले गये......
अंकित को ये तो पता चल गया था कि रितिका एंजाय कर रही है....इसलिए अंकित को और मस्ती की सूझी उसने
रितिका के लेग्स पे अपने दाँत गढ़ा दिए और हल्का हल्का बाइट करने लगा....
आअहह....इस बार थोड़ी तेज दर्द भरी मस्त सिसकी निकल गयी रितिका के मूह से...उसने
अपनी आँखें खोली....और अपनी हाथ की ताक़त लगा कर अंकित के सर को पकड़ा और अपने उपर खिच
लिया..और दोनो पीछे की तरफ सिफ़े पे गिर गये....
अंकित को एक पल के लिए समझ नही आया कि इतनी ताक़त कहाँ से आ गयी रितिका के पास....फिर उसने सोचा जाने
दो क्या करना है...इस पल का मज़ा लो....और वाकई में ये सीन दोनो की जान निकाल देना वाला
था...
नीचे से शुरू करे तो..जीन्स में अपना पूरा अवतार ले चुका अंकित का लंड जीन्स के आगे से
उभार बना चुका था.....और ये उभार सॉफ सॉफ रितिका महसूस कर पा रही थी....क्यूँ कि अंकित का लंड
आधा तो रितिका की चूत के उपरी हिस्से पे था और आधा लंड रितिका के पेट पे था..इसलिए रितिका को सॉफ
महसूस हो रहा था उसका भारीपन.....इसलिए रितिका बिल्कुल मदमस्त हो गयी और उसकी आँखें बंद
थी....
उधर रितिका के वो हेवी सॉफ्ट शेप्ड बूब्स अंकित की चेस्ट में जा धन्से थे...अंकित रितिका के
उपर था जिसकी वजह से उसकी चेस्ट में रितिका के वो थोड़े मोटे और थोड़े लंबे बूब्स के निपल
चुभ रहे थे..जो एक अलग ही मज़ा दे रहे थे....
अंकित को ऐसा लग रहा था मानो किसी स्पंच पे उसको लिटा दिया हो इतने सॉफ्ट और मुलायम था रितिका
का जिस्म...इसलिए उसकी आँखें भी बंद हो चुकी थी....
दोनो के चेहरे बिल्कुल आमने सामने थी...रितिका से निकल रही उसकी गरम साँसें अंकित के चेहरे पे पड़
रही थी और अंकित से निकल रही गरम साँसें...रितिका के चेहरे पे पड़ रही थी उससे और ज़्यादा गरम कर रही
थी..
महॉल एक दम गरम हो गया......गर्मी का सीज़न वैसा ही था उपर से दोनो की तपिश...
रितिका के शरीर से सहन नही हुई...और उसके माथे से पसीना बहता हुआ गले से होते हुए
ठीक चुचों की दरार के उपर आके रुक गया.....
अंकित ने अपनी आँखें खोली तो उसको नज़र आया ... उसने अपनी गर्दन थोड़ी नीचे कर के...रितिका
के चुचों के ठीक थोड़ा उपर जहाँ वो बूँद आके रुकी थी..वहाँ अपनी जीभ निकाली..और वहाँ से
चाट्ता हुआ उपर की तरफ आने लगा..और रितिका के गले को गीला करते हुए उसके गालों तक पहुच
गया और माथे तक चाट डाला...
रितिका के शरीर में झुरजूरी सी फैल गई उसके हाथ अंकित की पीठ पे कस गये...होंठ तो खुल गये
लेकिन उसमे से कुछ नही निकल पाया.....
फिर रितिका ने आँखें खोली और एक जंगली बिल्ली की तारह अंकित के बाल पकड़ के खिचे जिससे अंकित थोड़ा पीछे
की तरफ और और फिर पीछे हाथ का ज़ोर डाल के अंकित के होंठ अपने होंठ पे रख दिए और फिर शुरू हुआ
एक घमासान युद्ध....
रितिका तो जैसे आज अंकित को खा जाना चाहती थी बिल्कुल वैसी ही टूटती पड़ी हुई थी....अपने होंठो
को अंकित के होंठो पे रख के पूरी ताक़त से उन्हे चूस रही थी..अंकित तो कुछ नही कर रहा था
बस रितिका के होंठो का मज़ा ले रहा था..बीच बीच में रितिका होंठो के साथ साथ अपनी जीभ बाहर
निकलती और अंकित के होंठ गीले कर देती...और फिर अपने होंठो से चूस्ते हुए उन्हे सुखा कर
देती..फिर जीभ निकालती और होंठो को गीला कर के इस बार अपनी जीभ को अंकित के मूह के अंदर घुसा
दिया और अंकित के मूह के अंदर घुमाने लगी...
अब अंकित से भी नही रहा गया...इसलिए उसने अपनी जीभ हिलानी शुरू कर दी और दोनो की जीभ आपस
में लड़ने लगी...कभी अंकित की जीभ उपर होती तो कभी रितिका अपनी जीभ का दबाब बना के
उसे नीचे कर देती.....कुछ सेकेंड तक दोनो जीब ऐसी ही लड़ती रही...लेकिन इन दोनो का प्यार ख़तम नही
हो रहा था बढ़ता ही जा रहा था......
फिर दोनो ने अपनी अपनी जीभ बाहर निकाली और इस बार मूह के बाहर से जीभ से लड़ाई करने लगे...
जीभ बार बार फिसल जाती और दोनो के मूह पे लग जाती..इसे दोनो के होंठ और उसके आस पास की जगह दोनो
के थूक से भीग गयी थी......फिर अंकित ने अपनी जीभ हटा ली....
और अपने होंठो से रितिका की जीभ को पकड़ लिया और उसे चूसने लगा...और जैसे आइस क्रीम का
कोन खाते हैं..उसी तरह अंकित रितिका की जीभ को अंदर निगलते हुए उसके होंठो पे आ गया
और और होंठो को चूसने लगा....उफफफफफफफ्फ़ क्या सीन था इन दोनो की किस्सिंग का....कोई भी देख ले
तो उसका तो वहीं बॅंड बाज जाए......
अंकित तो इतना पागल हो गया था किस करने में....कि उसने रितिका के कंधो को ज़ोर से पकड़ा हुआ
था.....और साथ साथ तो उसने अपनी कमर धीरे धीरे हिलानी भी शुरू कर दी थी....और उसकी गान्ड उपर
जाती फिर नीचे आती...अंकित जीन्स के उपर से ही अपने लंड को रितिका के उपर से उसकी चूत और पेट पे
रगड़ रहा था...
रितिका की तो आँखें पूरी खुल गयी...वो तो जैसी मानो अंदर से बुरी तरह से जल रही हो...उसकी तो
साँसें अटक रही थी....उसके मूह से......उंगग्घह उंह की आवाज़ें आ रही थी बॅस
बाकी तो अंकित अपने मूह के अंदर ही सोख रहा था....रितिका के हाथ अंकित की कमर पे बुरी
तारह से कसे हुए थे....
अंकित के ऐसे हिलने की वजह से रितिका की चुचियाँ अंकित की चेस्ट मे धँस चुकी थी और उसकी
वजह से वो अंकित की चेस्ट के साथ साथ उपर नीचे हो रही थी....
ओफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़........ऐसा नज़ारा देख के तो किसी का भी निकल जाए....इतना गरम दृश्य..हालत ही बुरी कर दी......
रितिका का तो बुरा हाल था....उससे अपनी पेंटी गीली होती हुई सॉफ महसूस हो रही थी..वो भी इतनी कि अगर
उससे निचोड़ दिया जाए तो आधा ग्लास पानी भर जाए....
अंकित ने ऐसे ही किस करते हुए अपनी कमर हिलानी नही बंद करी.....उसे तो पता भी नही था वो
क्या कर रहा है...वो तो अपने किस में ही मशगूल था...
वो तो रितिका थी जो इतनी तरफ से हमले झेल रही थी..एक किस..एक उसकी चुचे बुरी तरह धन्से होना
और हिलना..और दूसरी तरफ एक जवान तगड़ा लंड उसकी चूत के और पेट के उपर रगड़ खा रहा था...
(सच में एक औरत ही इतना झेल सकती है...मर्द तो कब का हार मान चुका होता)
किस तो जैसे मानो तोड़ने का मन ही ना हो अंकित का.....रितिका की हालत बुरी हो रही थी (किस करने
की वजह से नही) बल्कि अंकित के घिसाव से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी...
लेकिन अंकित तो मानो अपने होंठो से और अपनी जीभ से रितिका की जीभ और होंठो पे ऐसे टूटा पड़ा
हुआ था मानो ये आखरी बार है और उसके बाद वो रितिका को ऐसी किस कर ही नही पाएगा...
रितिका से अब सांस लेना मुश्किल हो रहा था....वो खुल के सांस लेना चाहती थी लेकिन अंकित की वजह से वो
ऐसा नही कर पा रही थी....उधर अंकित तो अपनी कमर हिलाए जा रहा था दोनो ने कपड़े पहन
रखे थे लेकिन जो गर्मी पैदा हो रही थी दोनो के ऐसे मिलन से उससे दोनो के बदन के अंदर
अलग ही आग लगी हुई थी...जिसका असर रितिका की उस तपती चूत पे हो रहा था जहाँ गर्मी की वजह से
उसने अपना पसीना निकालना शुरू कर दिया था...उधर अंकित का लंड इस गर्मी की वजह से अपने लंड की
नसें फुला बैठा था मानो गरम तवे पे रोटी सिक रही हो.....
.
रितिका को कुछ सूझ नही रहा था एक तरफ तो उससे इतना मज़ा आ रहा था मानो ये वक़्त चलता रहे
और ख़तम ही ना हो...और दूसरी तरफ उसकी साँसें भारी हो रही थी....और वो ढंग से सांस भी नही ले
पा रही थी..क्यूँ कि अंकित की चेस्ट से रितिका के बूब्स बुरी तरह से दबे हुए थे....
आख़िर रितिका को कुछ ना सूझा तो उसने अपने बड़े बड़े नखुनो वाला आइडिया निकाला...और उन्हे
अंकित की पीठ में गढ़ा दिया.....लेकिन ऐसे गढ़ाया जैसी उसे मज़ा आ रहा हो....
पर.................................................
पर रितिका का ये वॉर बिल्कुल उल्टा पड़ गया....अंकित को जब रितिका के नखुनो का आभास हुआ तो वो
और जोश में आ गया....और पागल सा हो गया...बुरी तरह सी रितिका के फेस पे टूट पड़ा...
हाए ऐसी जबरदस्त किस्सिंग तो शायद ही कहीं पॉर्न में भी देखी होगी....चेहरे पे हर जगह
दोनो की थूक के निशान बन रहे थे.....और तो और...ऐसे नाख़ून गढ़ने की वजह सी अंकित के धक्के
और भी ज़्यादा तेज हो गये...और भी ज़्यादा तेज हो गये थे....
सॉफा भी हिलने लगा अब तो.....रितिका की एक टाँग ज़मीन पे पड़ी थी..और एक लेग सोफे के उपरी
हिस्से पर...मतलब ये पोज़िशन बनी हुई थी..और अंकित उपर से धक्के लगा रहा था....वो भी
अब तेज़ी सी.....जीन्स के अंदर से अंकित का अब विकराल रूप ले रखा लंड और रितिका की उस पाजामी के
अंदर छुपके से बैठी वो रॉंडो चूत....आपस में घिसे जा रहे थे...एक अजीब सा सेक्स था
.. कपड़ों के साथ..लेकिन दोगुना मज़े दे रहा था..........
रितिका सोचने लगी कि ये तो और ज़्यादा भड़क गया..इसलिए उसने नाख़ून गढ़ाने बंद कर दिए उसकी
हालत और खराब हो गयी....लेकिन शायद अंकित अब भड़क चुका था....इसलिए उसका एक हाथ रितिका के
चुचों की तरफ बढ़ता हुआ नीचे आने लगा....
अब रितिका के चुचे तो दबे हुए थे अंकित की चेस्ट में..लेकिन दबने की वजह से साइड से वो
बाहर निकल रहे थे...
अंकित का हाथ सीधे वहाँ पहुच गया साइड से निकल रहे ज़रा से फूले हुए चुचों पर और
वहाँ जाके जैसे किसी गुबारे को दबाते हैं बिल्कुल वैसे दबाने लगा...
उफफफफफफफफफ्फ़...रितिका की तो हालत इतनी खराब हो गयी...कि अब सारी सहेन शीलता टूट चुकी थी...जहाँ उसकी
चूत थोड़ी देर पहले पसीना बहा रही थी...अब वो धीरे धीरे पानी की धार छोड़ने लगी थी
जैसे नल खोलने पर पानी निकलता है सेम वैसे ही....लेकिन अभी तक वो झड़ी नही थी..ये तो सिर्फ़
उसकी गर्मी थी जो इतने सालो से शरीर में दबी हुई थी....
रितका का अब सांस लेना लगभग नामुमकिन सा लग रहा था....वो अंकित को ऐसे धक्का देके उसे
निराश भी नही करना चाहती थी....वो सोच ही रही थी कि क्या करे..तभी उसको एक और आइडिया आया..कि
वो अंकित के होंठो को काट ले...शायद इससे वो हट जाए...लेकिन फिर दूसरे ही पल उसने सोचा नही..वो
ऐसे अपने मतलब के लिए दर्द नही देना चाहती....
(वाहह री दुनिया...ये प्यार है कि क्या....खुद को सांस नही आ रही पर दर्द नही देंगी ये)
लेकिन अचनक अंकित ने अपनी जीभ और होंठ चलाने बंद कर दिए और एक दम से उसने अपने होंठ
रितिका के मूह से अलग कर लिए......और रितिका को देखने लगा...
हाए रितिका का चेहरा बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे कोई नवजात शिशु...बुल्कुल लाल हो रखा चेहरा..
नाक उससे भी ज़्यादा लाल टोमॅटो जैसी...आँखें आधी खुली हुई.. और होंठ खुले हुए आधे जिसमे से
तेज गहरी साँसें निकल रही थी....
क्रमशः.......................
गतान्क से आगे..............
रितिका मन ही मन उसे थॅंक्स बोल रही थी.....लेकिन तभी अंकित ने ध्यान दिया कि वो अपनी कमर
हिला रहा है तो उसने अचनाक कमर हिलानी बंद कर दी....और फिर उसने सर झुका लिया वो रितिका से
आँखें नही मिला पा रहा था....
रितिका समझ गयी......लेकिन पहले उसने खूब गहरी गहरी साँसें ली...जिसके लिए वो कब से बेकरार थी...
फिर उसने अपने हाथों को अंकित के चेहरे पे ले झटके उसे अपनी तरफ किया....अंकित ने अपनी आँखें
उस वक़्त भी नीचे कर रखी थी....
फिर रितिका ने अंकित के चेहरे को अपने चेहरे के करीब किया...और अपनी साँसें चेहरे पे छोड़ने लगी
फिर और करीब कर लिया अंकित के चेहरे को...इससे दोनो की नाक आपस में टकरा गयी.....
टकराने की वजह सी अंकित की नज़रे रितिका पे पड़ी....
रितिका के चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी..और वो मुस्कान इतनी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी उस वक़्त उस
चेहरे पर कि अंकित भी बिना मुस्कुराए नही रह पाया....
रितिका ने अंकित के चेहरे को थोड़ा पीछे किया और फिर अपने होंटो से अंकित की नाक पे किस किया फिर
उसकी आँखों पे फिर उसके चीक्स पे...और फिर उसके होंठो पे एक प्यार भरी छोटी सी किस कर दी
और फिर दोनो एक दूसरे की आँखों में देखने लगे......
अंकित और रितिका दोनो की आँखों में एक नशा सेक्स का नशा था फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा
के रितिका के गले में चूमना शुरू कर दिया कभी होंठ तो कभी जीभ से रितिका के गाल
को चाटने लगा...रितिका अपने हल्के होंठ खोले अपनी गरम साँसें बाहर निकाल रही थी....और अंकित
के बालों में हाथ फिरा रही थी......
कुछ सेकेंड बाद अंकित गालो पे अपने होंठ फेरता हुआ नीचे आने लगा...और रितिका के चुचों के
बीच की दरार पे अपने होंठ फेरता हुआ नीचे आने लगा..और पेट की नाभि पे आके रुक
गया...और वहाँ सूट के उपर अपने होंटो से पकड़ कस लिया और नाभि को चूसने लगा...
रितिका का पूरा शरीर बुरी तरह से कांप गया इससे.....वो अपनी कमर उछालने लगी......
अहहह..नो...अंकित.....आ...ह....(हल्की हल्की सिसकी निकलने लगी रितिका के मूह से)
फिर अंकित खड़ा हुआ और उसने सूट को उपर करना चालू किया..रितिका ने अपना हाथ आगे बढ़ा के उसे
रोकने की कॉसिश करी....नो नो करके बोलने भी लगी..(लेकिन उसके बोलने में झलाक नही रहा था कि वो
सच में ना कर रही है) अंकित ने रितिका के उपर ध्यान ना देते हुए उसका सूट आधा उपर कर
दिया जिससे उसका वो सपाट सुंदर पेट अंकित के सामने आ गया...रितिका ने अपनी आँखें हल्की बंद
कर रखी थी.....
अंकित की आँखों में एक चमक आ गयी...ठीक नाभि के उपर एक छोटा सा तिल था..जिसे अंकित ने
पहली बार देखा था....फिर अंकित की नज़र थोड़ी नीचे गयी..तो ठीक पाजामे के उपर लाल निशान
और थोड़ा सा पेट पे गड्ढा सा पड़ा हुआ था....
अंकित सोचने लगा कि ये शायद उसके हिलने की वजह से हो गया होगा...अंकित को अपने उपर गुस्सा
आया....
फिर उसने अपनी उंगलियो आगे बढ़ा के वहाँ निशान पे फिराने लगा...और उपर ले जाके नाभि के
चारों तरफ फिराने लगा....रितिका का तो जलता बदन और सुलगता जा रहा था...उसकी कमर हवा
में उछलने लगी....जब अंकित की ठंडी उंगलिया उसके गरम बदन पर हिचकोले खा रही थी..
फिर अंकित ने अपने होंठ रख दिए..और बड़े प्यार से उस सुंदर पेट पे फिराने लगा...और हर
तरफ अपने चुंबन की छाप छोड़ने लगा....फिर नाभि की तरफ अपनी जीभ निकाल के उसमे घुसा
दी और वहाँ अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगा.....
आ..ह.ह..ह.ह अंक....ई.ई....त.त..त......रितिका ने सिसकी लेते हुए उसके सर को पकड़ लिया......उसे बड़ी गुलगुली हो रही
थी पर साथ साथ में काफ़ी मज़ा भी आ रहा था......अंकित उसके तिल को अपने होंटो के बीच में
दबा के सक करने लगा....रितिका का तो रोम रोम हिल चुका था...उसकी कंट्रोल करने की शक्ति
ख़तम हो रही थी..
एक तरफ अंकित के होंठ उसके गरम पेट को ठंडा करने की कॉसिश कर रहे थे...दूसरी तरफ अंकित ये सब
करते हुए अपने हाथ रितिका के दोनो थाइस्स पे फिरा रहा था.....
और जब वो हाथ उसकी चूत के करीब जाते तो..रितिका की चूत की फांके खुल के अंदर से बारिश की बूंदे
बाहर टपका देती और उसकी पेंटी को गीला कर देती....अब तो हाल इतनी बुरा हो गया था कि पेंटी के
साथ चूत वाले एरिया के उपर पाजामा भी गीला होने लगा था....
अच्छी तरह से चाटने के बाद अंकित ने अपने होंठ हटा लिए.....लेकिन उसके हाथ नही रुके ...
और वो रितिका के चेहरे की तरफ देखने लगा...जो एक दम किसी देसी पहाडन की तारह लाल सुर्ख हो चुका था
और ऐसा लग रहा था मानो कोई ज़िंदा डॉल उसके सामने लेटी हो......
देखते देखते अंकित ने अपने हाथ अपनी जीन्स की तरफ किए और वहाँ से अपनी बेल्ट खोल के जीन्स
में से निकाल दी.....और जीन्स का बटन खोल के जीन्स को खिसका कर नीचे कर दिया...ज़्यादा नही पर उतनी
कि अब उसका अंडरवेर और उसके अंदर बैठा उसका शैतान लंड जो अंदर से इस खूबसूरत बाला को
सलामी ठोक रहा था जो उसे दिखाई दे रही थी...और एक दम से अंकित रितिका के उपर लेट गया....
रितिका की आँखे अचनाक पूरी खुल गयी और अंकित की नज़रे जो उसके बिल्कुल करीब थी उसको देखने लगी..
वो इसलिए हुआ..कि रितिका के पेट पे अंकित का लंड पड़ा था सिर्फ़ अंडरवेर था जो दोनो के मिलन में
अड़ा हुआ था...लेकिन रितिका उसे सॉफ बिल्कुल सॉफ महसूस कर रही थी....उसकी शक्ति को उसके वेट को अपने
उपर महसूस कर रही थी...
अंकित ने एक मुस्कान दी और रितिका के होंठो को गिरफ़्त में लेके उन्हे चूसने लगा...
रितका भी डबल मज़ा लेते हुए होंटो में गुम हो गयी..और बेइन्तिहा दोनो एक दूसरे के होंटो
को और जीभ को चाटने लगे.........
बीच बीच रितिका थोड़ी ज़्यादा वोलेंट हो जाती क्यूँ कि अंकित का लंड अंडरवेर में से हिचकोले ख़ाता
जिससे रितिका के पेट पे ऐसा लगता मानो कोई नरम चीज़ पर हठोड़ा पड़ रहा हो....
रितिका को वोलेंट देख अंकित भी पागल हो गया..और पहली बार अपने हाथ नीचे ले जाके रितिका के
सूट के उपर से उसके लेफ्ट चुचे पे हाथ रख दिया...
क्या एहसास था ये अंकित के लिए कपड़ों के उपर से ही वो ऐसे नरम सख़्त शेप चुची लग
रही थी कि बस अभी उन्हे बाहर निकाल के उनका सारा दूध अंदर का पिए जाए और उसे खाली कर
दे.....रितका के निपल भी और सख़्त हो गये अंकित का स्पर्श पा कर..
अंकित को भी वो निपल्स अपनी हथेली पे सॉफ सॉफ महसूस होने लगी......फिर अंकित ने अपनी हथेली को
ज़रा सा बंद किया तो वो चुची भी हल्के से दब गयी.....वाहह कितना मज़ा आया
अंकित को ऐसे दबाने में...वो उसका लंड दिखा रहा था क्यूँ कि वो हिचकोले ख़ाता हुआ
फिर से रितिका के पेट पे लग जाता....
दो तरफ इस गंभीर हमले से रितिका और भी ज़्यादा पागल हो गयी....उसने अपना एक हाथ तो अंकित की गर्दन
में जैसे साँप लिपटा होता है वैसे लिपटा रखा था..और दूसरा हाथ ले जाके सीध अंकित की गान्ड के
उपर रख दिया अंडरवेर के उपर से....और वहाँ उसे सहलाने लगी....
दोनो एक दूसरे को आग दे रहे थे...लेकिन कोई किसी को ठंडा नही कर पा रहा था..महॉल और भी
ज़्यादा गरम होता जा रहा था किसी भट्टी से भी ज़्यादा...दोनो एक दूसरे की आग को और भड़काने
में मशगूल थे....ठंडा पानी कौन गिराएगा इस आग में अभी वो तय नही कर पाया दोनो में से
कोई......
अंकित ने रितिका के चुचों को हथेली से कस के अंदर की तरफ दबा दिया...और उन्हे ज़ोर ज़ोर से दबाने
लगा मानो कोई हॉर्न बजा रहा हो........वो जितना दबाता उतना रितिका उसके होंठो को अपने जीभ से चाटती
अंकित ने चुचो के निपल्स को कपड़े के बाहर से ही पकड़ लिया और उन्हे अपनी उंगलियो से ट्विस्ट
करने लगा...कभी आधा लेफ्ट की तरफ घूमता कभी राइट की तरफ...मानो कोई निपल नही हो पानी का नल
हो.....
रितिका के लिए ये सब एक नया और बेहद कामुक और शरीर को तरसा देना वाला पल था जो उसने आज तक
ना ही झेला था...वो तो इस वक़्त सागर की गहराइयों में डूब चुकी थी और वहाँ के वातावरण का
मज़ा ले रही थी.....इसलिए वो भी पीछे रहने वाली नही थी...
अंकित की गान्ड पे जो उसका हाथ था वहाँ वो अंकित की गान्ड को दबाने लगी वो भी बिल्कुल वैसा
कर रही थी जैसा अंकित उसके चुचों को दबा रहा था....
दोनो ही कम नही थे......जैसा कि कहा मेने..दोनो एक दूसरे के अंदर आग लगा रहे थे लेकिन
ठंडा नही कर रहे थे........
अंकित भी कहाँ पीछे रहने वाला था उसने इस लड़ाई को और बढ़ा दिया और शुरू हो गया.......
रितिका के इस वार से अंकित और भी ज़्यादा उतेज़ित हो गया और उसने फिर से दुबारा अपनी कमर हिलानी शुरू
कर दी.........और अपने पूरे लंड को सिर्फ़ रितिका के पेट के उपर ही घिसने लगा...
रितिका की आँखें पूरी खुल गयी....उंगघह उःम्म्म्ममम की आवाज़ें अंकित के मूह के अंदर
जाने लगी....
अब अंडरवेर के अंदर लंड रितिका के नंगे पेट के उपर घिसा जा रहा था और दूसरी तरफ से एक
हाथ उसके चुचों को मसले जा रहा था...(आँखें फटना लाज़मी है)
अंकित अपनी कमर तेज़ी से हिला रहा था..रितिका की तो बॅंड ही बज रही थी...
अंकित के कमर हिलने की वजह से रितिका का जो हाथ अंकित के गान्ड पे चल रहा था वो उपर नीचे
हो रहा था..और तभी रितिका की नखुनो की वजह से अंकित की कच्छि थोड़ी उपर उठी और अंकित के
आगे की तरफ धक्का लगाने की वजह से रितिका का हाथ कच्चे के अंदर चला गया और अंकित की नंगी
और ठंडी गान्ड के उपर आ गया..
उंगघह उःम्म्म्मममममममम इस बार सिसकी लेने की बारी अंकित की थी....क्यूँ कि रितिका का गरम
हाथ उस ठंडी गान्ड पे ऐसा पड़ा था मानो किसी गरम तवे पे पंनी छिड़क दिया जाए तो
कैसी भाँप निकलती है....सेम अंकित का भी यही हाल था...
अंकित ने आख़िर किस तोड़ डाली (आज दोनो ने किस का तो रेकॉर्ड बना लिया था) दोनो के चेहरे पे
एक दूसरे का रस भरमार लगा हुआ था...दोनो एक दूसरी की आँखों में देखने लगी....
अंकित की कच्छि थोड़ी सी खिसक गयी नीचे की तरफ रितिका के हाथ अंदर जाने से...जिसकी वजह से
अंकित के लंड का लाल रंग का सुपाडा उसकी कच्छि से बाहर आ गया और रितिका के पेट को छू गया...
एयेए.....ह.ह..ह.ह.ह.....ह.ह.ह.ह..ह....म.....एम्म.म.....रितिका के मूह से ये सिसकी निकली तो ह...ओ..उ..उ.उ.....
अंकित के मूह से भी ये सिसकी निकल गयी...
दोनो जानते थे कि क्या हुआ है....लेकिन अगले ही पल रितिका का हाथ बाहर निकल गया और कच्छि अपनी
जगह पर सेट हो गयी....और सुपाडा भी अंदर चला गया.....
रितिका का हाथ अंकित की कमर में था.....
रितिका और अंकित दोनो को एक पल के लिए बुरा लगा लेकिन जो एहसास उन्हे कुछ सेकेंड पहले मिला था
उसकी खुशी ने सारा गम भुला दिया......
अंकित ने अपनी कमर हिलानी तेज़ी कर दी...और दूसरा हाथ ले जाके रितिका के चुचे पे रख दिया
और उसे भी कस कस के दबाने लगा..
आहहह ह्ह्म.म........सस्स्सिईईई...ओह्ह्ह.ह.ह.....रितिका के मूह से ये आवाज़ें निकल रही थी..उसके दोनो
हाथ अंकित की टीशर्ट के अंदर से उसकी कमर पे...वो बुरी तरह से हिल रही थी...
दूर से देखने पर यही लगेगा कि दोनो सेक्स कर रहे हैं..लेकींन ऐसा था ही नही....
अंकित ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाता हुआ.........
अंकित :- आ...रीत...ई...का.......
और अपना मूह आगे बढ़ाने लगा..रितिका भी गरम साँसें छोड़ रही थी...अंकित की इस स्पीड को देख
कर वो समझ चुकी थी की अंकित अब जाने वाला है..और वो खुद भी जानती थी..कि उसका भी जो रस इतने
सालों से इकट्ठा कर रखा था अब उसके निकलने का समय था..दोनो के होंठ आपस में जुड़ने
ही वाले थे कि तभी....
तभी डोर पे एक के बाद एक बेल बजने लगी...........
क्रमशः......................