अचानक अंकित ने अपना चेहरा उठाया और रितिका की आँखों में देखने लगा....
अंकित :- आज मेने अपनी वर्जिंटी आपको दी है....कितना लकी हूँ में कि आपने मेरी विर्ग्निटी ली है...थॅंक यू सो मच रितिका थॅंक यू सो मच.....
और फिर आगे बढ़ के रितिका के होंठो को चूम लेता है..
अंकित :- थॅंक यू....(बोलता है और साइड में आके लेट जाता है और अपनी टाँगें रितिका की कमर में डाले रखता है...रितिका कुछ नही बोलती बस देखती रहती है उसको और बालों में हाथ फिराए जा रही थी..उसकी साँसे अभी भी तेज चल रही थी..)
फिर रितिका भी अपनी टाँग उठा के अंकित के कमर पे रख देती है...अंकित थोड़ा खिसकते हुए रितिका से दुबारा चिपक जाता है..रितिका के बूब्स अंकित की चेस्ट में धँस जाते हैं दोनो के चेहरे एक दूसरे से बस कुछ ही दूरी पे थी...
अंकित अपने पैर से रितिका की गान्ड को सहलाने लगता है...ऐसा करने पर..अंकित का लंड खुद ब खुद खड़ा होने लगता है और पैर ऐसे रखने पर उसका लंड सीधे रितिका की चूत पे जाके ठोकर मार रहा था...मानो दरवाजा ठोक रहा हो अंदर आने के लिए.....
रितिका के चेहरे पे एक स्माइल आ जाती है.....
रितिका :- फिर से......
अंकित के चेहरे पे एक स्माइल आ जाती है..
अंकित :- क्या करूँ....मन ही नही कर रहा है हटाने का......(और अपने हाथों को रितिका की पीठ पे सहलाने
लगता है)
रितिका की आँखें मदहोशी में बंद हो जाती है..ये देख के अंकित अपने होंठ आगे बढ़ा के उसके होंठों पे रखता है और दोनो एक बेहद फ्रेंच स्मूच में घुस जाते हैं..कभी अपर लिप्स तो कभी लोवर लिप्स का मिलन हो रहा था....(अंकित के हाथ खिसकते हुए रितिका की गान्ड पर चले जाते हैं और उन्हे बड़े प्यार से दबाने लगता है और गान्ड भी फ्लफी होके अंदर बाहर होने लगती है)
रितिका के हाथ भी अंकित की पीठ पे घूम रहे थे......रितिका फिर से गर्म होने लगी थी किस नही बल्कि अंकित के खड़े लंड से जो बार बार उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था......
अचनाक... फोन की रिंग बजी....
जिसे दोनो ने किस तोड़ी....फोन रितका का था.....रितिका ने हाथ साइड ले जाके फोन देखा..
रितिका :- सर का फोन है...
अंकित :- आटेंड करना ज़रूरी है...
रितिका :- ह्म्म्म्म....
फिर अंकित बुझे मन से रितिका को छोड़ देता है.....रितिका के चेहरे पे एक प्यारी स्माइल आ जाती है वो अंकित के होंठों पे एक प्यारी सी किस देके कमरे में ही फोन रिसेव कर लेती है और रूम में टहलते हुए बात करने लगती है....
अंकित मन में...अच्छा हुआ फोन आ गया इसके बॉस का..नही तो ऐसा नज़ारा देखने को कहाँ मिलता...(वो अपनी कोनी को तकिये में गढ़ाए और हथेली को सर पे रख के सामने का नज़ारा देखने लगा)
रितिका रूम में नंगी फोन पे बात करते हुए टहल रही थी..जो बहुत ही कामुक नज़ारा था अंकित के लिए...या फिर किसी भी लौन्डे के लिए लड़की को ऐसे नंगा चलते हुए देखना....
अंकित का हाथ अपने आप लंड पे चला गया...और उसे हल्का हल्का दबाने लगा......
रितिका :- यस सर..डिफिनेट्ली ... आइ विल मॅनेज टूमारो बाए सर. (बोलते हुए वो मुड़ती है और उसकी नज़र अंकित पे पड़ती है जो उसे ही घूर रहा होता है..)
उसने अपने गर्दन नीचे करी और अपनी हालत को देखा....एक शानदार सेक्स के पूर्ण आनंद में डूबने के
बाद शरीर की चमक और बढ़ रही थी रितिका के..
और फिर सामने अंकित की नज़रों को देखा..जो उसके शरीर को अपनी आँखें गढ़ाए घूर रहा था.....बस
इसी एहसास ने रितिका का बुरा हाल कर दिया...उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी....और धक धक करते हुए
तेज़ी से चलने लगी...उसका चेहरा शरम से लाल हो गया उसका हाथ अपने कान पे जो फोन के साथ था वो
धीरे धीरे नीचे आ गया...
साँसे तेज़ी से लेने की वजह से उसकी जो तनी हुई चुचियाँ थी उन्होने अपने होने का प्रमाण दिया कि हम भी है यहाँ पे....
वो चुचियाँ भी बुरी तरह से उपर नीचे उपर नीचे होने लगी.....ये देख के अंकित का तो बॅंड बज गया उसका लंड उसके पेट पे ज़ोर ज़ोर से मारने लगा....और उसने अपने होंठो को गोल कर लिया मानो
बोल रहा हो वाऊऊओ.....
अंकित को ऐसा करता देख रितिका को कुछ अंदाज़ा हुआ..उसने अपनी आँखें नीचे की तो देखा तेज़ी से सांस
लेने की वजह से उसकी बेहद खूबसूरत ब्रेस्ट तेज़ी से उपर नीचे हो रही है.....वो शरम से पानी पानी
हो गयी..उसने फट से अपने हाथों को अपने उन रसीले चुचों पे रखा उन्हे ढकने के लिए लेकिन वो हाथों के पीछे कहाँ छुपने वाले थे......
अंकित हल्का सा मुस्कुराया और घूर्ने लगा...रितिका को थोड़ा अच्म्बा हुआ कि वो क्या घूर रहा है.....फिर
उसने ध्यान दिया..कि उसके अलावा उसके पास एक और बेहद खूबसूरत सी चीज़ है......
उसके गाल ये सोचते ही बेहद लाल हो गये....वो बहुत ज़्यादा शर्मा गयी...(अब जब उस शरीर से जुड़ी वासना की कमी दूर हो गयी तो एक औरत का शरमाना तो लाजमी है..)
वो शरमाती हुए मूड गयी और दीवार से जाके सट गयी.....और अपना चेहरा हल्का सा दीवार से हटा के
एक बेहद प्यारी मुस्कान अपने चेहरे पे फैला देती है...जो अंकित पीछे लेटे देख पा रहा था...
अंकित तो वो नज़ारा देख के ही फ्लॅट हो जाता है...अपने मन में..
इस नज़ारे को देखने के बाद तो कोई भी आपसे प्यार कर बैठे रितिका जी...पर में...नही नही...नही कर सकता क्यूँ कि मुझे पता है उस प्यार का कोई वजूद नही रहेगा और ना ही कोई रिज़ल्ट रहेगा बचेगा तो सिर्फ़ एक दुख ... पर इस वक़्त आपसे प्यारा इस पूरी दुनिया में कोई नही होगा...यू आर दा बेस्ट फॉर मी ऑल्वेज़ हमेशा के लिए...(अपने मन में रितिका के लिए एक रेस्पेक्ट एक प्यार को बढ़ावा देता है)
अंकित के चेहरे पे एक प्यार था रेस्पेक्ट के साथ रितिका के लिए...वो बेड से खड़ा हुआ...और चलते हुए
रितिका के पास जाने लगा....रितिका अपनी तिरछी नज़रों से उसे आते हुए देख रही थी...जिससे उसके
दिल की धड़कने और ज़ोर से बीट हो रही थी.....
अंकित रितिका के पास पहुचा और उससे बस कुछ ही फीट दूरी पे खड़ा हो गया...और रितिका को उपर से लेकर नीचे तक निहारने लगा....
वो गोरी पीठ...और नीचे उसकी बाहर की तरफ निकल रही उस लाजवाब गान्ड को कैसे ना निहारे जबकि वो बिल्कुल नंगी थी.....इतनी सुंदर इतनी सॉफ्ट दिख रही थी कि किसी का भी मन ललचा जाए और उसे चबा जाए...लेकिन फिलहाल अंकित के दिल में एक प्यार उमड़ आया था चाहे हो थोड़ी देर के लिए ही क्यूँ ना हो....
अंकित ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियाँ रितिका की पीठ पे रख दी और उन्हे वो बड़े ही नर्म
हाथों से सहलाता हुआ नीचे लाने लगा...
आहह अंकित.त...अब और...प्लीस.ए...हमम्म्ममममममम....रितिका का इस एहसास से शरीर में एक अजीब सी फीलिंग फैल गयी..और उसकी आँखें बंद हो गयी....
अंकित अपनी उंगलियों का कमाल दिखाता हुआ नीचे गान्ड तक आ गया.....और फिर लेग्स की पीछी से होते हुए नीचे तक चला गया...इसी बीच रितिका की सिसकियाँ निकल रही थी..
सीईईईईईईईई आहह अंकित..प्लीज़..मत करो....कुच्छ हो रहा है...
लेकिन अंकित तो यही चाहता था कि वो रितिका को जितना हो सके उतना अच्छे तरीके से प्यारा एहसास दे सके.........
फिर अंकित खड़ा हुआ और अपने हाथ ले जाके रितिका के कंधे पे रख दिए.....रितिका ने अपनी आँखें बंद कर ली और फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा की रितिका की गर्दन के नीचे रख दिए...
रितिका कसमसा सी गयी और अपनी गर्दन को हिलाने लगी......पर अंकित उसके शोल्डर को पकड़ते हुए अपने होंठ
नीचे तक लाने लगा घसीटता हुआ...और सीधे पहुच गया रितिका की गान्ड पे....
अपने हाथों से उसे हिलाने लगा....जैसा पानी से भरी थैली को नीचे सेहाथ पर हिलाते हैं....
बिल्कुल वैसे ही रितिका की उस भारी गान्ड को वो ऐसे हिलाता रहा और फिर वहाँ पे अपने हाथ रख के
चुम्म लिया..
सीईईईईई हा ओह्ह्ह्ह प्लीज़...नो.....डोंट..डू........ (थोड़ी देर वहाँ उसकी गान्ड को सहलाता रहा फिर उपर उठ गया)
रितिका के कंधो पे हाथ रख के उसे चिपक गया...और अपनी जीब बाहर निकाल के उसके कानो में घुमाने लगा.....
रितिका कसमसा सी गयी उसने अपनी गर्दन हिलानी शुरू कर दी..
सस्स्स्स्स्स्सह अंकित बोलता हुआ उसके होंठो पे उंगली रख देता है...
अंकित :- अभी कुछ नही...बोलना..मुझे करने दो...इस वक़्त बस करने दो दिल बोल रहा है इस लड़की को जितना प्यार दे सकता है दे दे...बस वही देने की कॉसिश कर रहा हूँ...
रितिका के दिल में एक अजीब सा एहसास होता है अंकित की ये बात सुन के....वो कुछ नही बोलती...
अंकित तो कानो को छोड़ के रितिका की गर्दन पे चूमने चाटने लगता है..रितिका की आँखें बंद हो जाती है...
ऐसा करते हुए अंकित रितिका को घुमा के अपने सामने की तरफ कर लेता है ... रितिका ने अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढक रखा था...
अंकित अपने हाथ से धीरे धीरे उन हाथों को उस लाजवाब चुचों के उपर से अलग करता है और उन्हे साइड हटा देता है..
रितिका का सर दीवार से लगा हुआ था आँखे बंद थी और साँसे तेज चल रही थी...जिसकी वजह से उसकी चुचियाँ ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी......अभी तो अंकित ने कुछ ज़्यादा नही किया था और रितिका की चूत जिसने थोड़ी देर पहले ही सैलाब निकाला था एक बार फिर से वहाँ नमी आनी शुरू हो गयी थी...
अंकित रितिका के चेहरे को देखते हुए अपने हाथों को रितिका की गर्दन पे रख के अपनी उंगलियों से उसके शरीर को सहलाते हुए नीचे आने लगता है...
नीचे आते हुए बीच में पहले उन उंगलियो को एक सख़्त पहाड़ का सामना करना पड़ा जिसपे एक कड़क बिंदु भी लगी हुई थी....फिर उसके नीचे कँपता हुआ सपाट पेट और सहलता हुआ जा पहुचा एक खड्डे में
जो कि हल्का सा गीला था यानी कि चूत पे......
आहससिईई..हल्की सी सिसकियाँ लेते हुए रितिका ने अपनी उंगली मुँह में डाल दी..और आँखें टाइट करते हुए मिच ली....
अंकित को चूत पे गीला पन सॉफ महसूस हो रहा था...उसने अपना हाथ हटाया चूत के उपर से और घुटनो के बल बैठ गया और चूत को घूर घूर के देखने लगा...
रितिका की चूत फडक रही थी उसकी चूत की फाके हिल रही थी और खुल बंद सी हो रही थी....
अंकित ने ऐसा पहली बार देखा था अपनी ज़िंदगी में ... पॉर्न तो बहुत देखी थी..लेकिन उसने आज तक ऐसा कभी कुछ नही देखा था जो आज वो देख रहा है...
ये देखने के बाद अब जो वो करने जा रहा था वो खुद ब खुद हो रहा था ... उसका चेहरा चूत की तरफ बढ़ता गया.....और चूत के बेहद करीब पहुच के उसकी साँसे तेज हो गयी
चूत पे अंकित की गरम साँसे पड़ने से रितिका के शरीर में लग रही आग को और भड़का दिया और उससे जुलसने लगी...रितिका का हाथ खुद बा खुद नीचे की तरफ बढ़ता हुआ अंकित के सर पे चला गया...
अंकित ने अपनी जीब बाहर निकाली और जीब को आगे बढ़ा के चूत के एक हिस्से को उठाने की कॉसिश करने लगा..और वहाँ अपनी जीब से चाटने की कॉसिश भी करने लगा....(बिना अपने हाथ का इस्तेमाल करे)
रितिका को ये एहसास पहली बार हुआ था अपनी लाइफ में वो खड़े खड़े ही उछल सी रही थी उसके पंजे अपने आप उपर की तरफ उसे उठा रहे थे....
अंकित उस फाँक को उठा के वहाँ अपनी जीब से चाटने की पूरी कॉसिश कर रहा था जिसकी वजह से चूत में से निकल रहा रस उसके चेहरे और नाक में घुसने की कॉसिश कर रहा था..
फिर उसने अपनी जीब वहाँ से हटा ली और अपनी उंगलियों की मदद से दोनो फांकों को अलग कर के अंदर के रेड
रेड मास पे अपनी जीब रख दी और वहाँ के अदभुत टेस्ट के मज़े लेने लगा..
आहह (इस बार रितिका के मुँह से लंबी सिसकी निकल गयी और उसके हाथ अंकित के सर पे और कड़े हो गये)
अंकित ने अपनी जीब अंदर रख कर वहाँ घुमानी शुरू कर दी....चूत का छेद अंदर से कभी बंद होता तो कभी खुल जाता..अंकित को बड़ा मज़ा आ अरहा था ऐसे चूसने में...वो उस छेद के अंदर अपनी जीब फँसा देता और गोल गोल करके घुमाने लगता...इससे रितिका का तो हाल इतना बुरा था कि वो हाल उसकी चूत बयान कर रही थी ... चूत में से पानी बहने लगा...निकला हुआ पानी आधा मुँह के अंदर और आधा नीचे गिर रहा था...
डाइयिंग...प्लीज़.ए.....ससीसीईईईईईईईईईई आहह(रितिका तेज़ तेज़ गहरी सानें लेते हुए सिसकी ले रही थी...उसके चेहरे पे अपनी चूत की इतनी शानदार चटाइ का आनंद अलग ही नज़र आ रहा था)
अंकित ने अपनी 2 उंगली उठाई और धीरे धीरे चूत की तरफ बढ़ता हुआ उसके छेद पे ले गया और घुसा दी अंदर...सर्र्र्र्र्र्र्ररर..करते हुए अंदर घाप स घुस गयी अंदर जाके चूत के छेद ने उसे पकड़ लिया मानो कह रही हो यहीं रह कहीं मत जा..लेकिन अंकित के ज़ोर लगाने की वजह से वो स्टूप्प्प्प्प्प पानी में भीगति हुई बाहर आ गयी.....
और फिर तो ये सिलसिला चालू हो गया.....होंठों के बीच फसा चूत का दाना और छेद में अंदर बाहर होती दो उंगलियाँ......
रितिका की तो बुरी तरह से बॅंड बज गयी...चूत में से तो आमरस बहता हुआ नीचे गिरा जा रहा था
रितिका पागलों की तरह सिसकियाँ ले रही थी...
आहह उूुुुुुुुुुउउ ओह....अंकित्त्त...यू अर्र वेरी बॅड.द...अहह ओह्ह्ह्ह उफफफ्फ़..........सीईईईईईईईईई ... आइ कॅन्न्न्ट टेक इट ममोरी....आइ आम जूसत्त.....अहह ओह्ह......(रितिका तेज़ तेज़ सिकियाँ ले रही थी उसके पैर कांप रहे थे)
और फिर उसकी कमर ने झटके पे झटके मारे.....और अपने हाथ से अंकित का सर चूत में कस के दबा दिया...और अपने शरीर का कामरस एक बार फिर बहाने लगी......अंकित ने बिना एक बूँद नीचे गिराए सारा अपने मुँह के अंदर भर लिया......
रितिका बुरी तरह से थक गयी थी उसने अपनी कमर मोड़ ली और नीचे की तरफ झूल गयी..उसके बाल आगे आ गये जिससे अंकित का चेहरा पूरा ढक गया...
फिर अंकित वहाँ से थोड़ा पीछे हुआ तो रितिका घिसती हुई नीचे बैठ गई अंकित ने अपने हाथ रितिका के शोल्डर्स पे रख दिए...
रितिका ने अंकित की आँखों में देखा और उसके सीने से तेज़ी से आ लगी..जिससे अंकित का बॅलेन्स बिगड़ गया वो पीछे ज़मीन पे गिरा और रितिका भी उसी के उपर जा गिरी....
कुछ देर दोनो ऐसे ही पड़ी रही........
उसके बाद रितिका बोली..
रितिका :- अंकित तुमसे कुछ कहना है
अंकित :- ह्म
रितिका :- मुझे 1 हफ्ते के लिए यूएस जाना है काम से...(बोलते हुए रितिका ने अपनी गर्दन उठा के अंकित को देखा
इतना सुनते ही अंकित की आँखें बड़ी हो गयी और वो भी घूर्ने लगा रितिका को..
रितिका :- मुझे ऑफीस के काम से 1 वीक के लिए यूएस जाना है (रितिका ने अंकित की तरफ देखते हुए कहा)
अंकित उसको घूरे जा रहा था.....कुछ मिनट तक उसे ऐसे ही देखने के बाद वो बोला..
अंकित :- मतलब आपसे 1 हफ़्ता दूर रहना पड़ेगा...आपसे उफ़फ्फ़...कैसे होगा यार...(मुस्कुराते हुए बोला)
रितिका के चेहरे पे भी मुस्कान आ गयी...क्यूँ कि उसे लग रहा था कि अंकित गुस्सा हो जाएगा...लेकिन रितिका मेडम आपको क्या पता आज अंकित को इतना प्यार आ रहा है आपके उपर की आज आप कुछ और भी बोलती तो भी इसे गुस्सा नही आता...
रितिका खुशी में आगे बढ़ी और अंकित के होंठो को अपने होंठों में क़ैद करके उसे बड़ा प्यारा एहसास छोड़ दिया...
20 मिनट बाद फ्रेश होकर दोनो कपड़े पहन कर रेडी हो गये और अंकित जाने के लिए रेडी था दोनो हॉल में खड़े थे..
अंकित :- अब...7 दिन बाद मिलना पड़ेगा..ओह्ह..कितना मुश्किल है ...
रितिका :- ह्म....इतना दिल मत लगाओ अगर कभी असलियत में हमेशा के लिए अलग होना पड़ा तो बहुत दुख होगा...(रितिका ने ये बात भले ही मज़ाक में कही हो क्यूँ कि वो जानती थी कि अंकित उसे कभी वो प्यार नही करेगा...)
एक औरत अपना दिल बड़ी जल्दी दे बैठी है अगर कोई भी मर्द उसे ज़रा सा भी प्यार दे दो तो बिना उसकी उमर देखे लेकिन कभी खुद ही नही दिखाती...(सच औरत का दिल बेहद नाज़ुक और कोमल होता है कभी झाँक के असलियत देखो तो सॉफ पता चलेगा)
लेकिन ये बात अंकित को थोड़ी चुभि..वो भी जानता था क्यूँ पर उसे कुछ हुआ... एक अजीब सा एहसास...वो आगे बढ़ा और कस के रितिका को अपनी बाहों में जाकड़ के उसे ये दर्शाया कि ऐसा नही होना चाहिए कभी भी....रितिका का चेहरा थोड़ा सा गंभीर हो गया आँखों में पानी उभर आया पर अपने आप को उसने एक मजबूत लड़की की तरह कंट्रोल किया..और फिर मस्ती करते हुए बोली..
रितिका :- अरे छोड़ दे..अगर किसी ने देख लिया तो कहेंगे की शरम नही आती अपने स बड़ी उमर की औरत के साथ मज़े ले रहा है...
अंकित ने उसे अपने से अलग किया और वो भी हँसने लगा...
अंकित :- ह्म्म चलता हूँ... (बोलते हुए उसने माथे पे एक प्यारी सी किस दी)
और मूड के गेट खोलने ही लगा था...कि रितिका ने उसके कंधे को पकड़ के पीछे मोड़ा और फिर अपने होंठ अंकित के होंठों से जोड़ दिए और बड़े ही प्यारे तरीके से दोनो एक बार फिर उस किस में खो गये और एक दूसरे के होंठों को चूमने चाटने लगे..
रितिका :- (हान्फते हुए) मिस यू अंकित..
अंकित :- मी टू...
और फिर गेट खोल के चला जाता है और रितिका उसे गेट पे खड़ी टाटा करती है और फिर गेट बंद कर देती है...
अंकित सोचते हुए धीरे धीरे....चल रहा था..
आख़िर रितिका की उस बात पर क्यूँ मुझे ऐसा लगा कि कोई अपना डोर चला जाएगा आख़िर ऐसा क्यूँ..कहीं मुझे उससे प्यार..नही नही..ये तो पासिबल ही नही है यार..ऐसा नही हो सकता...
(बोलता हुआ पॉकेट से अपना फोन निकालता है ये सोच के कि रितिका को एक मसेज कर देगा लेकिन जब उसे दिखता है फोन में 8 मिस कॉल थी वो चोंक जाता है आज से पहले इतने मिस कॉल कभी नही आई थी उसके फोन में)
उसने फ़ोन चेक किया..
अंकित :- दिशा...इसको आज क्या हुआ जो इतने फोन कर दिए...फोन कर के पूछूँ तो सही...(वो कॉल करता है 10 सेकेंड तक रिंग बजती है और फिर फोन पिक होता है सामने से)
ओहो मिल गया टाइम मिस्टर चेकाउट को..वैसे तो मार्केट में इतनी बड़ी बातें बोल रहे थे..कि कभी कॉंटॅक्ट नही रखा ये आंड वो और अब देखो खुद रिसीव ही नही करना था फोन जब सामने से खुद मेने किया वो भी कितनी बार.....
(फोन पिक होते ही दिशा ने तो अपना शुरू कर दिया)
अंकित अपने मन में...ये लड़कियाँ इतना सब इकट्ठा करती कहाँ से हैं और कहाँ से कहाँ की बात को जोड़ के कैसे उसका एक निबंध तैयार करके सुनाने लगती है..
अब क्या में ही बोलती रहूंगी कि तू भी कुछ बोलेगा....दिशा ने फाइनली बोलते हुए यहाँ स्टॉप किया..
अंकित :- बोलूँगा तो तभी जब तू चुप होगी...बोलने का मौका तो दे...
दिशा :- यॅ यॅ वॉटेवर....अच्छा ये बता फोन क्यूँ नही पिक किया था मेरा..
अंकित :- बस थोड़ा बिज़ी था?
दिशा :- ऐसा क्या कर रहा था....(शकिया अंदाज़ में)
अंकित :- नतिंग...बस ऐसे ही फोन पे ध्यान नही गया साइलेंट पे था...(नॉर्मल वे में आन्सर देते हुए)
दिशा :- क्क्या क्या पता है..मुझे सब पता है कि लड़के अपना फोन साइलेंट पे कब रखते हैं..
अंकित :- कब रखते हैं..
दिशा :- जब वो पॉर्न देखते हैं...हाहहहहहहाः...(बोल के हँसने लगी)
अंकित भी इधर मुस्कुरा पड़ा...और सोचने लगा...सच में ग़ज़ब की लड़की है यार इसे तो कोई डर नही लगता कि क्या किसके सामने क्या बोल रही है...
अंकित :- चल हॅट ऐसा नही है..में पॉर्न नही देखता..
दिशा :- व्हाट...तू नही देखता..में तो मान ही नही सकती..
अंकित :- अरे इसमे मानने वाली बात क्या है नही देखता ... बोरियत हो गयी है..बार बार एक ही चीज़..(अब अंकित भी पूरा फ्रॅंक होके बोल रहा था अब जब लड़की ही खुलेआम बोल रही है तो लड़के को क्या शरम)
दिशा :- ओह्ह बोरियत फिर भी तुम लड़के उसी चीज़ के पीछे भागते हो..
अंकित :- ओह्ह रियली.....तो फिर तुम लड़कियाँ भागने की वजाय पास क्यूँ नही आ जाती..
(नहले पे दहला फेंकने वाली बातों में कोई इन जनाब से सीखे)
दिशा :- स्मार्ट हाँ....वैसे इसी की वजह से आइ लाइक यू...
अंकित :- तो फिर कब कर रहे हैं हम...
दिशा :- क्या?
अंकित :- यू सेड यू लाइक मी..तो मेने सोचा कुछ बात आगे बढ़ानी चाहिए ना..
दिशा :- हाँ हाँ जब तू बोले..
अंकित को इस जवाब की उम्मीद नही थी...वो फिर से सोच में डूब गया....ये तो लगता है इसी इन्विटेशन के इंतजार में बैठी है...बस इधर मेने दिया ये तो सब कुछ खोल के किसी खुले हुए गिफ्ट की तरह मेरे सामने पसर जाएगी...
अंकित :- हाँ बिल्कुल यार..उसमे क्या है...आइ आम ऑल्वेज़ रेडी कल ही मिलते है...(अंकित भी थोड़ा आगे बढ़ा बस ये सोच के थोड़े सा मज़ाक ही तो चल रहा है)
दिशा :- नही यार कल तो में बिज़ी हूँ..लेट नाइट तुझे चलेगा..
अंकित की फिर लग गयी...
अंकित :- ओये में तो मस्ती कर रहा था..तू सीरियस हो गयी..
दिशा :- हाहहहहहहः...बस हवा टाइट हो गयी बच्चू...मेने तुझे कहा था ना कि में किसी को भी चाहू अपने क़ब्ज़े में कर सकती हूँ..
अंकित :- हाँ वो पता चलता है...तेरी बातों से
दिशा :- क्या मतलब (थोड़ी गुस्से की टोन में)
अंकित :- ये मतलब कि अब तुझसे बाद में बात करूँगा..ओके...
दिशा :- ओके..फिर मिलने का प्लान कब है तेरा?
अंकित :- ह्म्म्म्म जब तू बिल्कुल फ्री हो तो मूवी का प्लान बनाते हैं
दिशा :- चल में बताती हूँ...जब भी फ्री होती हूँ आइ विल कॉल यू..
अंकित :- ओके देन..बाबयए स्वीटी..
दिशा :- बाबयए ... हॅंडसम....
(फोन कट)
अंकित अपने आप से..........उफ्फ ये लड़की तो सच में........(बोलता हुआ रुक जाता है और मुस्कुरा देता है)
अगले कुछ दिन कॉलेज नही जाना था..असल में कॉलेज ट्रिप पे गया हुआ है...लेकिन अंकित इसलिए नही गया क्यूँ कि अंकिता मॅम लीव पर थी और अपने घर गयी हुई थी..उनकी फॅमिली में किसी की तबीयत खराब थी..तो भाई साहब अंकिता मॅम नही गयी तो खुद भी नही गये...विकी ने तो बहुत बार चलने को पूछा लेकिन अंकित ने हाँ नही किया....बाकियों से अंकित की पटती कम ही थी क्लास में....लड़कियों की तरफ तो वो देखता ही नही था...
ऐसे करते करते 5 दिन गुज़र गये....
सॅटार्डे टाइम 4 के आस पास..
नोएडा सेक्ट 19 में...एक ब्लू कलर की बहुत बड़ी बिल्डिंग....उसके अंदर ऑफीस में ढेर सारे स्टाफ और अपने कॅबिन में बैठी....
रितिका....
वो कुछ काम कर रही थी कि तभी उसके सेल पे कॉल आया...वो नंबर देख के थोड़ा सरप्राइज हो गयी..उसने रिसीव किया...
रितिका :- हाउ यू नो...(वो बस इतना ही बोल पाई कि सामने से फोन पे किसी ने कहा) क्या...नो वे...कहाँ पर..नही में आ रही हूँ...बिल्कुल नही..आइ सेड ना...जस्ट वेट आइ आम देअर् इन 5 मिनट..
(फोन कट)
ओह्ह गॉड....रितिका बोलते हुए फाइल बंद करी और कॅबिन से निकल के जाने लगी....