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"आज मौसम बेहद ख़राब लग रहा है लेकिन शूट तो करना ही होगा"..........राम सिगरेट का कश लेते हुए अपने राइटर साहिल से कह रहा था|
"पर आउटडोर में शूट करना मुनासिब रहेगा मुसलसल बारिश हो रही है ऐसे में शूट नहीं हो पायेगा".....साहिल ने जवाब देते हुए कहा
"शूट तो होना ही है आउटडोर से नहीं इंडोर से ही सही खैर बिगनिंग ऑफ़ थे स्टोरी क्या थी तुमने स्क्रीन प्ले रेडी कर लिया है न?".........राम ने साहिल की ओर देखते हुए कहा
"जी बिलकुल शुरुवात में एक हॉट सीन है जिसमें हीरोइन और उसका पति कॉटेज में ख़राब मौसम के चलते रात की पनाह लेने आते है| वीरान कॉटेज को देख वो दोनों यहाँ रात गुज़ारने को तैयार हो जाते है| फिर एक रूम में दोनों के बीच वही से हॉट सन शुरू होता है".........एक एक कश लेते हुए सिगरेट का राम मुस्कुराता है
"फैंटास्टिक नाइस तो फिल्म का फर्स्ट बिगनिंग हम इसी कॉटेज के एक कमरे से करते है क्यों? ऑलराइट"......राम उठ खड़ा हुआ उसने अपने क्रू मेंबर्स को बुलाया
सौम्या चुपचाप सबके साथ साथ हामी में जवाब दे रही थी....कुछ ही देर में सेट लगाया जा चूका था | रैना एक झिल्ली जैसी सफ़ेद गाउन पहने बिस्तर पे बैठी हुयी डायलॉग्स को पढ़ रही थी| उसे डायरेक्शन बताने के बहाने राम उसे कई जगहों पे छू रहा था | ये सब चीज़े सौम्य नोटिस कर रही थी और हीनभावना भरी नज़रो से डायरेक्टर राम को घुर्र रही थी| रैना भी हस हस के जैसे फ्रीली डायरेक्टर राम से बिलकुल चिपककर बैठी उसके साथ काम से ज़्यादा अठखेलिया कर रही थी|
डायरेक्टर राम ने कैमरामैन जावेद से कहा की इस सीन में वो खुद रैना के साथ शूट करेगा.....जावेद ने कैमरा संभाल लिया था | सुनील रैना का जल्दी से मेक अप करते हुए राम के आदेश अनुसार तुरंत सेट से बाज़ू हटके खड़ा हो गया....शूट स्टार्ट हो चुकी थी......रैना के जांघो पे हाथ फेरते हुए राम उससे फ़्लर्ट कर रहा था.....रैना मुस्कुराये उसके हर डायलॉग्स का जवाब मुस्कुराये दे रही थी|
सौम्या की मज़बूरी थी जो उसे डायरेक्टर राम के साथ काम करना पड़ रहा था | डायरेक्टर राम ने उसे कई मौके दिए थे की वो उसकी फिल्म का हिस्सा बने लेकिन सौम्य ने इन्कारी में सर हिलाये रखा था| खुन्नस में डायरेक्टर राम काम का सारा भार उसपे ही छोड़ देता था| सौम्य लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी क्यूंकि उसकी माली हालत ठीक नहीं थी और डायरेक्टर राम के पास काम करने के सिवाह उसके पास कोई चारा भी नहीं था| वो जिस बिग ब्रेक की फिल्मो में इंतजार में लगी हुयी थी वो इंतजार अबतक बस चल ही रहा था |
अचानक जैसे ही शूट प्रोग्रेस में था उसी पल धढ़ से कोई चीज़ आवाज़ की जिसने सेट पे मौजूद हर किसी को चौका दिया....कैमरामैन जावेद एक पल को हड़बड़ा उठा जिससे कैमरा हिल गया.....डायरेक्टर राम और रैना दोनों ने उस आवाज़ को सुना था राम ने थोड़ा चिढ़ते हुए गुस्से में कहा "व्हाट डी हैल ? ये आवाज कहाँ से आयी? क्या जावेद पूरा सीन चौपट कर दिया तुमने"..............जावेद ने मांफी मांगते हुए जैसे खुद को झेप लिया|
"सौम्या देखनाा आवाज कहाँ से आयी?"..............राम ने पास खड़ी सौम्य को कहा....सौम्य हड़बड़ाई पहले तो सहमी फिर उसने बाहर निकलते हुए झाँका चारो ओर खामोशी थी और कोई नहीं था
"सर बाहर तो कोई नहीं है"..........सौम्य ने अंदर आते हुए कहा
"उफ़ हो डिस्ट्रक्ट हो गया क्या जावेद कैमरा पूरा हिला दिया तुमने अब ये सीन फिर शूट होगा एंड डिस टाइम नो डिस्टर्बेंस प्लीज".........कहते हुए शूटिंग फिर शुरू हुयी|
सौम्या का लेकिन मन स्थिर नहीं था........उसने बाहर जाके मुआना किया....सीढिया सामने उसे दिखी जो ऊपर के माले की और जा रही थी...जहा वो खड़ी थी वो बड़ा सा लम्बा सा हॉल रूम था......उसने एक बार दोनों तरफ की ओर देखा....सूरज बदलो में एकदम कही चुप गया था मुसलमुसल बारिश के वजह से एक दम कोहरा और अँधेरा छा सा गया था| सौम्या ने आगे बढ़ते हुए सीढ़ियों से ऊपर चढ़ना शुरू किया...आज सुबह ही उसने वह जाके बाकी क्रू मेंबर के साथ चेक किया था| कई कमरों में ताला झूल रहा था एक कमरा डायरेक्टर का था दूसरा जिसमे वो और रैना के सोने का इंतजाम किया गया था | जबकि तीसरा कमरा जावेद और सुनील का था....अचानक सौम्या अभी सोचते हुए उलटे पाव जा ही रही थी की अचानक उसने पाया की सामने खिड़की पे किसी का अक्स मौजूद था| एकदम से उसने घूमके सामने की उस खिड़की ओर देखा जो की जंगलो की ओर खुलता था| एका एक कदम बढ़ाते हुए जब वो वहा पहुंची तो वहा कोई नहीं था|
सौम्या ने खिड़की को आहिस्ते से झटका देके खोल दिया तो बाहर की सर्द हवा उसे अपने चेहरे पे यूँ लगी जैसे जैसे हवाएं उसपे झपटी हो....अपनी आँखों से धुल साफ़ करते हुए सौम्या ने बाहर देखा तो बदलो में बिजलियों की गरगराहट शरू हो चुकी थी| उसने जल्दी से खिड़किया लगायी तो बाहर से अंदर आती हवाओ का शोर भी थम गया | सौम्या अपने कमरे में आयी उसने आस पास की चीज़ो को देखा सब कितने पुराने थे कुछ दराज़ें तो दीमक खायी बुरी तरीके से ख़राब हो चुकी थी| सौम्या कुर्सी पर ही बैठते हुए सोच में दुब गयी की वो आवाज़ आयी तो ऊपर से थी पर किधर से आयी थी?
सौम्या को अचानक अहसास हुआ की ठीक सामने आईने में कोई ठीक उसके बगल में खड़ा मौजूद है....सौम्य का ध्यान जब आईने पे होने लगा तो उसे सचमुच किसी के होने का अहसास अपने पास लगा...उसने झट से आईने की तरफ देखा तो वह कोई नहीं था| सौम्या अकेले उस रूम में और ज़्यादा देर ठहर नहीं पायी और रूम का दरवाजा लगाए झटपट सीढ़ियों से नीचे उतर गयी|
शूट हो चूका था | सौम्या को जब कमरे में आते डायरेक्टर राम ने देखा तो जैसे उसपे बरस पड़ा...."सौम्या कहाँ चली गयी थी तुम ? there was a Shoot happening and u just disappeared कितनी आवाज़ें दी मैंने तुम्हें?".........राम की बात सुनके सौम्या चुपचाप हो गयी
"वो दरअसल? मैं उस आवाज़ के पीछे ऊपर गयी मैंने किसी को ऊपर फील किया जैसे कोई परछाई"
"व्हाट रब्बिश? परछाई किसकी आत्मा की हाहाहा"..........राम जैसे सौम्या का मज़ाक उडाता हुआ बोला....साथ में खरे सारे क्रू मेंबर भी हस पड़े
"सर आई ऍम नॉट लाइंग मैं सच कह रही हूँ |"
"लुक सौम्या आई डॉन'ट वांट की तुम बाकियो को भी अपने इलुशन से डराओ मैं नहीं चाहता यहाँ कोई भी किसी भी किस्म का सीन क्रिएट हो अंडरस्टैंड दू यू अंडरस्टैंड?"...............राम के हिदायत भरी बातों से सौम्या को खामोशी ही साधके मानना पड़ा
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