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एक कुँवारी एक कुँवारा
यह मेरे और पायल के बीच के पहले सम्भोग की गाथा है। आज भी जब उन पलों को याद करता हूँ.. तब मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है और उसको याद करके मुठ मार लेता हूँ।
आज मुझे पता नहीं वो कहाँ है.. पर यदि वो इस कहानी को पढ़ रही हो.. तो वो भी उन पलों को याद कर रही होगी।
आगरा के सिकंदरा में किराए का मकान लिया.. जिसमें ऊपरी मंजिल में मकान-मालिक का परिवार और नीचे के दो रूम के सैट में मैं और पीछे के दो रूम के सैट में एक अरोरा परिवार रहता था।
अरोरा साहब के परिवार में मियां-बीवी, एक लड़का और एक लड़की पायल (उम्र 19 साल) रहते थे। उनका लड़का इंग्लैंड में रहता था। हम दोनों के बीच में मकान का आँगन कॉमन था।
पायल एक अल्हड़ सी.. कमनीय काया की स्वामिनी थी। तकरीबन 5’3″ लम्बे कद की उस हिरनी का फिगर 32B-28-30 का था। वो पंजाबी थी.. तो गोरी और मस्त थी जैसा कि ज्यादातर पंजाबी लड़कियाँ होती हैं।
पायल हर समय घर पर ही रहती थी और मैंनेजमेंट के एंटरेन्स एग्जाम की तैयारी कर रही थी।
पिता जॉब पर जाते और देर रात लौटते थे, उसकी माँ एक स्कूल में टीचर थीं और शाम के वक़्त ट्यूशन पढ़ाती थीं।
हम दोनों अक्सर बातें करते थे, मेरा उनके घर पर बहुत आना-जाना था, अक्सर मैं उनके घर पर ही खाना खाता था।
सच कहूँ तो मेरा दिल पायल पर आ गया था, मैं उसको चोदना चाहता था.. पर उसकी इच्छा का मुझको पता नहीं था।
बस इतना मालूम था कि उसको मेरा साथ अच्छा लगता है।
कभी-कभी मैं उसको इधर-उधर छूने भी लगा था.. वो बिल्कुल बुरा नहीं मानती थी.. बल्कि वो एक स्माइल भी देती थी।
एक दिन मैं अपने काम पर नहीं गया और घर पर ही था.. पर यह बात उन सब को पता नहीं थी।
करीब 11 बजे जब मैं आँगन में गया.. तो देखा कि पायल सिर्फ तौलिया में खड़ी थी, वो अभी नहा कर ही निकली थी, तौलिया उसके सीने पर बंधा था और वो जाँघों तक ही था।
मैं सन्न रह कर सिर्फ उसको देखता रह गया।
वो भी सन्न रह गई।
कुछ पलों में उसको होश आया और वो अन्दर भाग गई।
मैं भी कुछ समय के लिए समझ नहीं सका कि क्या करूँ। फिर मैं भी उसके पीछे उसके कमरे में गया और देखा कि वो वैसे ही खड़ी है और उसकी सांसें तेज-तेज चल रही हैं।
मेरे मन में काम-वासना का संचार हो गया। मेरा लण्ड खतरनाक तरीके से खड़ा हो गया था। मैं धीरे से उसके पीछे गया और उसकी नग्न गर्दन पर अपने होंठ रखा कर हल्का सा चुम्बन दिया।
वो काँप से गई और कहने लगी- आप जाओ यहाँ से..
मैं कुछ बोलता तभी किसी ने उसके घर की घंटी बजाई और मैं जल्दी से अपने कमरे में चला गया।
थोड़ी देर बाद मैंने बहुत कोशिश की.. पर उसने अपना दरवाज़ा नहीं खोला।
फिर बात आई-गई हो गई।
पर इसके बाद वो मेरे सामने ज्यादा नहीं आती थी। अकेली तो बहुत कम आती थी.. पर हम दोनों की नज़रें बदल गई थीं।
वो अब मुझको बहुत प्यार भरी नज़रों से देखती थी, मैं भी रोज़ उसकी याद में लण्ड का रस निकल देता था।
पर मुझको कोई मौका नहीं मिल रहा था कि मैं कुछ कर पाऊँ।
मैं हर संभव कोशिश कर रहा था कि कोई मौका मिले और इत्तफ़ाक़ से ऐसा मौका मिल भी गया।
हुआ यह कि पायल को दो एग्जाम पेपर देने दिल्ली जाना था। पर उन लोगों को पंजाबी होने के बावजूद दिल्ली का कुछ भी नहीं पता था।
तब उसकी माँ ने मेरे को बुलाया- बेटा, तुम तो दिल्ली बहुत जाते हो.. क्या तुम रोहणी नाम की जगह जानते हो?
मैं- हाँ क्यों?
पायल की माँ- बेटा पायल के एग्जाम का सेंटर है वहाँ.. क्या तुम पायल और अंकल के साथ जाकर उसे एग्जाम दिला दोगे?
मैं- हाँ क्यों नहीं..
मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया कि चलो कुछ पल साथ रहने का मौका मिलेगा और पायल के दिल की बात जानने में भी आसानी होगी।
पायल की माँ- ठीक है फिर मैं तुम तीनों का रिजर्वेशन करवा देती हूँ।
मैं- ठीक है।
हम सबको एक हफ्ते बाद निकलना था।
मैं खुश था.. मैं भी तैयारी में जुट गया।
मैंने एहतियातन एक कंडोम का पैकेट.. नारियल के तेल की शीशी.. आई पिल का पैकेट रख लिया था.. शायद जरूरत पड़ जाए।
आखिर वो पल भी आ गया जब हमको निकलना था, रात की ट्रेन दादर अमृतसर एक्सप्रेस थी, हम सब स्टेशन आ गए।
हम सबकी 2 AC में सीट बुक थीं।
सुबह हम लोग जब दिल्ली पहुँचने वाले थे.. तभी पायल के घर से मकान-मालिक का फ़ोन आया कि पायल की माँ गिर गई हैं.. उनके पैर में काफी चोट आई है।
यह सब सुन कर हम सब घबरा गए.. पर जब मैंने अपने मकान-मालिक से बात की.. तब पता चला कि वो लोग उनको हॉस्पिटल ले गए हैं और अब वो ठीक हैं, दोपहर के बाद उनके पैर का ऑपरेशन होगा.. और उन्होंने बोला कि अंकल का आना जरूरी है।
यह सोच कर हम सबने लौटने का प्लान बनाया.. पर अंकल बोले- अकेला मैं लौट जाता हूँ.. तुम पायल को एग्जाम दिला कर कल आ जाना।
पर मैंने कहा- नहीं.. हम सब वापस चलते हैं।
तब अंकल बोले- बेटा अब जो होना था.. वो हो गया और पायल की पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाएगी.. इसका साल भी ख़राब होगा।
पायल- पर पापा ऐसा कैसे हो सकता है.. मैं कैसे रोहित के साथ..
पर उसके पापा ने उसे बीच में ही रोक के समझाया- बेटा देखो, साल मत ख़राब करो और मैं तो वापस जा ही रहा हूँ न?
मैं- अंकल मैं कैसे पायल के साथ रुकूँगा?
अंकल- देखो रोहित तुम समझदार हो और जिम्मेदार भी हो.. तुम जरूर ठीक से एग्जाम दिला दोगे और फिर एक दिन की ही तो बात है.. कल तो रात तक तुम आ ही जाओगे।
फिर हम दोनों ने मिल कर अंकल को आगरा की ट्रेन में बिठा दिया और वो ट्रेन के जाने के बाद हम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
मैंने देखा कि पायल अपनी माँ के लिए बहुत परेशान है।
मैं- देखो घबराओ नहीं.. सब ठीक हो जाएगा.. और तुम सिर्फ अपने एग्जाम पर ध्यान दो और बाकी सब भगवान पर छोड़ दो.. जो होगा वो अच्छा ही होगा।
पायल- हाँ पर..
मैं- देखो अंकल गए हैं . और भी लोग है वहाँ.. वो सब उनकी ठीक से देखभाल करेंगे। तुम परेशान होगी.. तो तुम्हारा पेपर भी ख़राब होगा और फिर माँ क्या सोचेगी.. इसलिए तुम सिर्फ एग्जाम में ध्यान दो और फिर मैं हूँ ना।
पायल- हाँ तुम साथ तो हो।
यह कह कर उसके मासूम से चेहरे पर मुस्कान आ गई। यह देख कर मैं खुश हो गया और उसका हाथ हल्के से पकड़ कर बाहर चल दिया।
जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा.. उसने मेरी तरफ देखा.. पर बोली कुछ नहीं।
मैंने पहाड़गंज में होटल श्री राम में एक AC रूम ले लिया। यह वही होटल था जहाँ मैं अक्सर दिल्ली आकर रुकता था.. सो हमको रूम आसानी से मिल गया।
एग्जाम पेपर दिन में 3 बजे से था और हमको 2 बजे तक वहाँ पहुँचना था।
मैंने टाइम देखा तो सिर्फ 6 बज रहे थे मेरे पास उसको पटाने के लिए बहुत टाइम था।
कमरे में आकर मैंने चाय आर्डर की और हम दोनों बैठ कर उसकी मम्मी के बारे में बात करने लगे।
मैंने देखा कि पायल बहुत ही ज्यादा परेशान थी और नर्वस भी थी।
शायद मेरे साथ अकेले कमरे में होने की बात को जान कर वो ज्यादा दिक्कत में थी।
यह देख कर मैंने भी उसको प्रभावित करने के लिए एक चाल चली, मैंने उससे कहा- देखो पायल, तुम इस तरह परेशान होगी तो तुम्हारा पेपर ख़राब हो जाएगा और तुम मैंनेजमेंट नहीं कर पाओगी।
वो चुप रही।
फिर मैं थोड़ा रुक कर बोला- और एक बात.. इस बात के लिए मत परेशान हो कि तुम मेरे साथ अकेली हो और मैं तुम्हारे साथ कुछ कर दूँगा। तुम मेरी जिम्मेदारी हो और मैं उसको बखूबी निभाऊँगा।
मेरी इस बात का असर तुरंत हुआ, वो हल्के से मुस्कराई और मेरी तरफ देख कर बोली- मैं जानती हूँ।
जहाँ तक मेरा मन था.. मैं यह बात जानता था कि इससे अच्छा मौका मेरे को कभी नहीं मिलेगा। जब मैं इस अल्हड़ से कुंवारी पंजाबी कन्या को चोद सकता हूँ।
अचानक पायल बोली- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं- नहीं..
पायल- क्यों?
मैं- क्या करूँ.. कोई मुझको पसंद ही नहीं करता।
पायल- अच्छा..
मैं- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?
पायल- नहीं..
‘ओह्ह..’
पायल से इस तरह बात शुरू हुई और मुझको कुछ तसल्ली हुई।
मेरी आँखें उसकी मस्त और सेक्सी बॉडी को घूर रही थीं। उसके छोटे-छोटे से उरोज़.. गालों की लाली.. मुझको दीवाना बना रही थी।
मेरे बॉक्सर में मेरा लण्ड आकार लेने लगा था.. सो मैंने किसी भी तरह के परेशानी से बचने के लिए उस पर एक तकिया रख लिया ताकि पायल मेरे उठे हुए लण्ड को न देखे।
पायल मेरे को इस तरह से घूरते देख कर शर्माने लगी और उसके गालों की लाली बढ़ गई.. जो मुझको और वासना की आग में झोंक रही थी।
वो बोल- क्या देख रहे हो रोहित.. क्या मेरे को पहले कभी देखा नहीं है?
मैं- तुम बहुत खूबसूरत हो पायल.. देखा तो बहुत बार है.. और एक बार तो बहुत अच्छे से भी देखा है (मेरा इशारा उस तौलिया वाली घटना की तरफ था) पर इतना पास से.. और इतने इत्मीनान से पहली बार देख रहा हूँ।
पायल मेरी इस बात को समझ कर और भी शर्मा गई, उसके गाल और लाल हो गए।
शायद पायल के दिमाग में भी मेरे जैसा ही शायद चल रहा था.. पर उसकी हिचकिचाहट उसे आगे बढ़ने से रोक देती थी।
पायल- ऐसा क्या देखा मेरे अन्दर.. जो किसी और में नहीं देखा?
मैं- आज तक इतने ध्यान से किसी को देखा ही नहीं यार.. जितने पास से तुमको देखा। क्या नहीं है तुम्हारे पास.. और जो तेरे पास है.. उस जैसा शायद ही किसी लड़की के पास हो।
यह कह कर मैंने उसकी आँखों में झाँका.. तो उसने शर्मा कर नजरें झुका लीं।
इस एक झलक में उसने मेरी आँखों में खुद के लिए अपनापन और प्यार को अच्छे से देख लिया था।
मैं जानता था कि मैं आगे बढ़ सकता हूँ.. पर मन के किसी कोने में डर भी था कि वो कहीं भड़क न जाए।
बिस्तर पर तकिये के सहारे दीवार से लगकर मैं आधा लेटा हुआ था और पायल मेंरे पैर की तरफ बिस्तर के एक कोने में बैठी थी।
मैं- पायल एक बात पूछूँ?
पायल- पूछो..
मैं- तुमको मैं कैसा लगता हूँ.. मेरा मतलब है कि तुम मेरे बारे में क्या फील करती हो?
पायल मेरे सवाल पर कुछ नहीं बोली.. एकदम चुप से हो गई। उसने मेरी तरफ एक बार देखा और नजरें झुका लीं।
‘बोलो न पायल..’
पायल- रोहित तुम एक अच्छे लड़के हो.. मेरे दिल में एक सॉफ्ट कार्नर भी तुम्हारे लिए है.. पर मैं वैसा नहीं सोचती जो किसी लड़की को एक लड़के के लिए सोचती है। तुम समझ रहे हो न रोहित?
पायल से एक लम्बी चुप्पी के बाद बड़ा सा स्टेटमेंट दिया.. जो मेरे लिए एक शुभ संकेत था। मैं भी कोई रिलेशन में नहीं जाना चाहता था। मेरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उसको चोदना था।
मैं- देखो पायल मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ.. पर मैं भी कोई रिलेशनशिप अभी नहीं चाहता.. क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी? देखो तुम पर कोई दबाव नहीं है.. तुम चाहो तो मना भी कर सकती हो। मुझको बुरा नहीं लगेगा। देखो जो मेरे दिल में होता है.. वही मेरी जुबान पर भी होता है। मैं बहुत साफ और खुले दिल का इंसान हूँ।
पायल- वो मैं जानती हूँ।
फिर थोड़ी से चुप्पी के बाद बोली- मुझे आपकी गर्लफ्रेंड बन कर अच्छा लगेगा.. पर मैं कोई आपको वादा नहीं कर सकती।
मैं- मैंने कब कहा तुम कोई वादा करो.. देखो हम दोनों का ही कोई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड नहीं है.. सो हम दोनों एक-दूसरे के बन सकते हैं और भविष्य किसने देखा है?
पायल मेरी बात सुनकर मुस्कराई.. शायद वो भी समझ चुकी थी कि मैं क्या कहना चाहता हूँ.. फिर भी वो अनजान बनी रही।
मैंने टाइम देखा अभी सिर्फ 8 बजे थे। अब भी बहुत टाइम था हमारे पास और मैं चाहता था कि वो बात करती रहे। मैं इस बात को किसी तरह सेक्स चैट की तरफ ले जाना चाहता था।
‘पायल मेरे पास आकर बैठो न..’
यह मेरे और पायल के बीच के पहले सम्भोग की गाथा है। आज भी जब उन पलों को याद करता हूँ.. तब मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है और उसको याद करके मुठ मार लेता हूँ।
आज मुझे पता नहीं वो कहाँ है.. पर यदि वो इस कहानी को पढ़ रही हो.. तो वो भी उन पलों को याद कर रही होगी।
आगरा के सिकंदरा में किराए का मकान लिया.. जिसमें ऊपरी मंजिल में मकान-मालिक का परिवार और नीचे के दो रूम के सैट में मैं और पीछे के दो रूम के सैट में एक अरोरा परिवार रहता था।
अरोरा साहब के परिवार में मियां-बीवी, एक लड़का और एक लड़की पायल (उम्र 19 साल) रहते थे। उनका लड़का इंग्लैंड में रहता था। हम दोनों के बीच में मकान का आँगन कॉमन था।
पायल एक अल्हड़ सी.. कमनीय काया की स्वामिनी थी। तकरीबन 5’3″ लम्बे कद की उस हिरनी का फिगर 32B-28-30 का था। वो पंजाबी थी.. तो गोरी और मस्त थी जैसा कि ज्यादातर पंजाबी लड़कियाँ होती हैं।
पायल हर समय घर पर ही रहती थी और मैंनेजमेंट के एंटरेन्स एग्जाम की तैयारी कर रही थी।
पिता जॉब पर जाते और देर रात लौटते थे, उसकी माँ एक स्कूल में टीचर थीं और शाम के वक़्त ट्यूशन पढ़ाती थीं।
हम दोनों अक्सर बातें करते थे, मेरा उनके घर पर बहुत आना-जाना था, अक्सर मैं उनके घर पर ही खाना खाता था।
सच कहूँ तो मेरा दिल पायल पर आ गया था, मैं उसको चोदना चाहता था.. पर उसकी इच्छा का मुझको पता नहीं था।
बस इतना मालूम था कि उसको मेरा साथ अच्छा लगता है।
कभी-कभी मैं उसको इधर-उधर छूने भी लगा था.. वो बिल्कुल बुरा नहीं मानती थी.. बल्कि वो एक स्माइल भी देती थी।
एक दिन मैं अपने काम पर नहीं गया और घर पर ही था.. पर यह बात उन सब को पता नहीं थी।
करीब 11 बजे जब मैं आँगन में गया.. तो देखा कि पायल सिर्फ तौलिया में खड़ी थी, वो अभी नहा कर ही निकली थी, तौलिया उसके सीने पर बंधा था और वो जाँघों तक ही था।
मैं सन्न रह कर सिर्फ उसको देखता रह गया।
वो भी सन्न रह गई।
कुछ पलों में उसको होश आया और वो अन्दर भाग गई।
मैं भी कुछ समय के लिए समझ नहीं सका कि क्या करूँ। फिर मैं भी उसके पीछे उसके कमरे में गया और देखा कि वो वैसे ही खड़ी है और उसकी सांसें तेज-तेज चल रही हैं।
मेरे मन में काम-वासना का संचार हो गया। मेरा लण्ड खतरनाक तरीके से खड़ा हो गया था। मैं धीरे से उसके पीछे गया और उसकी नग्न गर्दन पर अपने होंठ रखा कर हल्का सा चुम्बन दिया।
वो काँप से गई और कहने लगी- आप जाओ यहाँ से..
मैं कुछ बोलता तभी किसी ने उसके घर की घंटी बजाई और मैं जल्दी से अपने कमरे में चला गया।
थोड़ी देर बाद मैंने बहुत कोशिश की.. पर उसने अपना दरवाज़ा नहीं खोला।
फिर बात आई-गई हो गई।
पर इसके बाद वो मेरे सामने ज्यादा नहीं आती थी। अकेली तो बहुत कम आती थी.. पर हम दोनों की नज़रें बदल गई थीं।
वो अब मुझको बहुत प्यार भरी नज़रों से देखती थी, मैं भी रोज़ उसकी याद में लण्ड का रस निकल देता था।
पर मुझको कोई मौका नहीं मिल रहा था कि मैं कुछ कर पाऊँ।
मैं हर संभव कोशिश कर रहा था कि कोई मौका मिले और इत्तफ़ाक़ से ऐसा मौका मिल भी गया।
हुआ यह कि पायल को दो एग्जाम पेपर देने दिल्ली जाना था। पर उन लोगों को पंजाबी होने के बावजूद दिल्ली का कुछ भी नहीं पता था।
तब उसकी माँ ने मेरे को बुलाया- बेटा, तुम तो दिल्ली बहुत जाते हो.. क्या तुम रोहणी नाम की जगह जानते हो?
मैं- हाँ क्यों?
पायल की माँ- बेटा पायल के एग्जाम का सेंटर है वहाँ.. क्या तुम पायल और अंकल के साथ जाकर उसे एग्जाम दिला दोगे?
मैं- हाँ क्यों नहीं..
मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया कि चलो कुछ पल साथ रहने का मौका मिलेगा और पायल के दिल की बात जानने में भी आसानी होगी।
पायल की माँ- ठीक है फिर मैं तुम तीनों का रिजर्वेशन करवा देती हूँ।
मैं- ठीक है।
हम सबको एक हफ्ते बाद निकलना था।
मैं खुश था.. मैं भी तैयारी में जुट गया।
मैंने एहतियातन एक कंडोम का पैकेट.. नारियल के तेल की शीशी.. आई पिल का पैकेट रख लिया था.. शायद जरूरत पड़ जाए।
आखिर वो पल भी आ गया जब हमको निकलना था, रात की ट्रेन दादर अमृतसर एक्सप्रेस थी, हम सब स्टेशन आ गए।
हम सबकी 2 AC में सीट बुक थीं।
सुबह हम लोग जब दिल्ली पहुँचने वाले थे.. तभी पायल के घर से मकान-मालिक का फ़ोन आया कि पायल की माँ गिर गई हैं.. उनके पैर में काफी चोट आई है।
यह सब सुन कर हम सब घबरा गए.. पर जब मैंने अपने मकान-मालिक से बात की.. तब पता चला कि वो लोग उनको हॉस्पिटल ले गए हैं और अब वो ठीक हैं, दोपहर के बाद उनके पैर का ऑपरेशन होगा.. और उन्होंने बोला कि अंकल का आना जरूरी है।
यह सोच कर हम सबने लौटने का प्लान बनाया.. पर अंकल बोले- अकेला मैं लौट जाता हूँ.. तुम पायल को एग्जाम दिला कर कल आ जाना।
पर मैंने कहा- नहीं.. हम सब वापस चलते हैं।
तब अंकल बोले- बेटा अब जो होना था.. वो हो गया और पायल की पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाएगी.. इसका साल भी ख़राब होगा।
पायल- पर पापा ऐसा कैसे हो सकता है.. मैं कैसे रोहित के साथ..
पर उसके पापा ने उसे बीच में ही रोक के समझाया- बेटा देखो, साल मत ख़राब करो और मैं तो वापस जा ही रहा हूँ न?
मैं- अंकल मैं कैसे पायल के साथ रुकूँगा?
अंकल- देखो रोहित तुम समझदार हो और जिम्मेदार भी हो.. तुम जरूर ठीक से एग्जाम दिला दोगे और फिर एक दिन की ही तो बात है.. कल तो रात तक तुम आ ही जाओगे।
फिर हम दोनों ने मिल कर अंकल को आगरा की ट्रेन में बिठा दिया और वो ट्रेन के जाने के बाद हम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
मैंने देखा कि पायल अपनी माँ के लिए बहुत परेशान है।
मैं- देखो घबराओ नहीं.. सब ठीक हो जाएगा.. और तुम सिर्फ अपने एग्जाम पर ध्यान दो और बाकी सब भगवान पर छोड़ दो.. जो होगा वो अच्छा ही होगा।
पायल- हाँ पर..
मैं- देखो अंकल गए हैं . और भी लोग है वहाँ.. वो सब उनकी ठीक से देखभाल करेंगे। तुम परेशान होगी.. तो तुम्हारा पेपर भी ख़राब होगा और फिर माँ क्या सोचेगी.. इसलिए तुम सिर्फ एग्जाम में ध्यान दो और फिर मैं हूँ ना।
पायल- हाँ तुम साथ तो हो।
यह कह कर उसके मासूम से चेहरे पर मुस्कान आ गई। यह देख कर मैं खुश हो गया और उसका हाथ हल्के से पकड़ कर बाहर चल दिया।
जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा.. उसने मेरी तरफ देखा.. पर बोली कुछ नहीं।
मैंने पहाड़गंज में होटल श्री राम में एक AC रूम ले लिया। यह वही होटल था जहाँ मैं अक्सर दिल्ली आकर रुकता था.. सो हमको रूम आसानी से मिल गया।
एग्जाम पेपर दिन में 3 बजे से था और हमको 2 बजे तक वहाँ पहुँचना था।
मैंने टाइम देखा तो सिर्फ 6 बज रहे थे मेरे पास उसको पटाने के लिए बहुत टाइम था।
कमरे में आकर मैंने चाय आर्डर की और हम दोनों बैठ कर उसकी मम्मी के बारे में बात करने लगे।
मैंने देखा कि पायल बहुत ही ज्यादा परेशान थी और नर्वस भी थी।
शायद मेरे साथ अकेले कमरे में होने की बात को जान कर वो ज्यादा दिक्कत में थी।
यह देख कर मैंने भी उसको प्रभावित करने के लिए एक चाल चली, मैंने उससे कहा- देखो पायल, तुम इस तरह परेशान होगी तो तुम्हारा पेपर ख़राब हो जाएगा और तुम मैंनेजमेंट नहीं कर पाओगी।
वो चुप रही।
फिर मैं थोड़ा रुक कर बोला- और एक बात.. इस बात के लिए मत परेशान हो कि तुम मेरे साथ अकेली हो और मैं तुम्हारे साथ कुछ कर दूँगा। तुम मेरी जिम्मेदारी हो और मैं उसको बखूबी निभाऊँगा।
मेरी इस बात का असर तुरंत हुआ, वो हल्के से मुस्कराई और मेरी तरफ देख कर बोली- मैं जानती हूँ।
जहाँ तक मेरा मन था.. मैं यह बात जानता था कि इससे अच्छा मौका मेरे को कभी नहीं मिलेगा। जब मैं इस अल्हड़ से कुंवारी पंजाबी कन्या को चोद सकता हूँ।
अचानक पायल बोली- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं- नहीं..
पायल- क्यों?
मैं- क्या करूँ.. कोई मुझको पसंद ही नहीं करता।
पायल- अच्छा..
मैं- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?
पायल- नहीं..
‘ओह्ह..’
पायल से इस तरह बात शुरू हुई और मुझको कुछ तसल्ली हुई।
मेरी आँखें उसकी मस्त और सेक्सी बॉडी को घूर रही थीं। उसके छोटे-छोटे से उरोज़.. गालों की लाली.. मुझको दीवाना बना रही थी।
मेरे बॉक्सर में मेरा लण्ड आकार लेने लगा था.. सो मैंने किसी भी तरह के परेशानी से बचने के लिए उस पर एक तकिया रख लिया ताकि पायल मेरे उठे हुए लण्ड को न देखे।
पायल मेरे को इस तरह से घूरते देख कर शर्माने लगी और उसके गालों की लाली बढ़ गई.. जो मुझको और वासना की आग में झोंक रही थी।
वो बोल- क्या देख रहे हो रोहित.. क्या मेरे को पहले कभी देखा नहीं है?
मैं- तुम बहुत खूबसूरत हो पायल.. देखा तो बहुत बार है.. और एक बार तो बहुत अच्छे से भी देखा है (मेरा इशारा उस तौलिया वाली घटना की तरफ था) पर इतना पास से.. और इतने इत्मीनान से पहली बार देख रहा हूँ।
पायल मेरी इस बात को समझ कर और भी शर्मा गई, उसके गाल और लाल हो गए।
शायद पायल के दिमाग में भी मेरे जैसा ही शायद चल रहा था.. पर उसकी हिचकिचाहट उसे आगे बढ़ने से रोक देती थी।
पायल- ऐसा क्या देखा मेरे अन्दर.. जो किसी और में नहीं देखा?
मैं- आज तक इतने ध्यान से किसी को देखा ही नहीं यार.. जितने पास से तुमको देखा। क्या नहीं है तुम्हारे पास.. और जो तेरे पास है.. उस जैसा शायद ही किसी लड़की के पास हो।
यह कह कर मैंने उसकी आँखों में झाँका.. तो उसने शर्मा कर नजरें झुका लीं।
इस एक झलक में उसने मेरी आँखों में खुद के लिए अपनापन और प्यार को अच्छे से देख लिया था।
मैं जानता था कि मैं आगे बढ़ सकता हूँ.. पर मन के किसी कोने में डर भी था कि वो कहीं भड़क न जाए।
बिस्तर पर तकिये के सहारे दीवार से लगकर मैं आधा लेटा हुआ था और पायल मेंरे पैर की तरफ बिस्तर के एक कोने में बैठी थी।
मैं- पायल एक बात पूछूँ?
पायल- पूछो..
मैं- तुमको मैं कैसा लगता हूँ.. मेरा मतलब है कि तुम मेरे बारे में क्या फील करती हो?
पायल मेरे सवाल पर कुछ नहीं बोली.. एकदम चुप से हो गई। उसने मेरी तरफ एक बार देखा और नजरें झुका लीं।
‘बोलो न पायल..’
पायल- रोहित तुम एक अच्छे लड़के हो.. मेरे दिल में एक सॉफ्ट कार्नर भी तुम्हारे लिए है.. पर मैं वैसा नहीं सोचती जो किसी लड़की को एक लड़के के लिए सोचती है। तुम समझ रहे हो न रोहित?
पायल से एक लम्बी चुप्पी के बाद बड़ा सा स्टेटमेंट दिया.. जो मेरे लिए एक शुभ संकेत था। मैं भी कोई रिलेशन में नहीं जाना चाहता था। मेरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उसको चोदना था।
मैं- देखो पायल मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ.. पर मैं भी कोई रिलेशनशिप अभी नहीं चाहता.. क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी? देखो तुम पर कोई दबाव नहीं है.. तुम चाहो तो मना भी कर सकती हो। मुझको बुरा नहीं लगेगा। देखो जो मेरे दिल में होता है.. वही मेरी जुबान पर भी होता है। मैं बहुत साफ और खुले दिल का इंसान हूँ।
पायल- वो मैं जानती हूँ।
फिर थोड़ी से चुप्पी के बाद बोली- मुझे आपकी गर्लफ्रेंड बन कर अच्छा लगेगा.. पर मैं कोई आपको वादा नहीं कर सकती।
मैं- मैंने कब कहा तुम कोई वादा करो.. देखो हम दोनों का ही कोई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड नहीं है.. सो हम दोनों एक-दूसरे के बन सकते हैं और भविष्य किसने देखा है?
पायल मेरी बात सुनकर मुस्कराई.. शायद वो भी समझ चुकी थी कि मैं क्या कहना चाहता हूँ.. फिर भी वो अनजान बनी रही।
मैंने टाइम देखा अभी सिर्फ 8 बजे थे। अब भी बहुत टाइम था हमारे पास और मैं चाहता था कि वो बात करती रहे। मैं इस बात को किसी तरह सेक्स चैट की तरफ ले जाना चाहता था।
‘पायल मेरे पास आकर बैठो न..’