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एक अनोखा बंधन**:-कि नई शुरुआत (2) complete

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बात हमें समझ आ गई थी..... हमारी शादी ....... इस समाज के लिए चर्चा का बहुत बड़ा topic है.... लोगों को हमारा प्यार नजर नहीं आता..... बल्कि हमें और हमारे परिवार को वो उंच-नीच के बंधनों से बाँध कर रखना चाहते हैं! मैं इनसे प्यार करती हूँ... 'ये' मुझसे प्यार करते हैं... तो दुनिया को प्रॉब्लम क्या है? क्यों हमें हैं से नहीं जीने देती? बाकायदा शादी की है 'इन्होने' मुझसे फिर भी दुनिया को बस हमारी उम्र के अंतर में ज्यादा रूचि है! क्यों हमारे इस प्यार की सजा हमारे बच्चों को दी जाती है?

अब आगे......

पर अभी नेहा की बात पूरी नहीं हुई थी........ 'इन्होने' थोड़ा प्यार से जोर दे कर उससे पूछा; "बेटा... उस लड़के का नाम क्या है जो आपको तंग करता है?" नेहा ने सुबकते हुए अपनी बात पूरी की; "अक्षय....यादव..... वो हमारी..... ही ..... गली में....... रहता है...... हमेशा मुझे tease करता है....... कहता है.... तेरे पापा ने ...... अपने से ........... बड़ी............ लड़की से.......... " बस आगे बोलते-बोलते नेहा फिर से रो पड़ी| इन्होने उसे चुप कराना चाह.... "बस मेरी बच्ची..... बस....."

"वो..... किसी को ...... मेरा .....दोस्त नहीं ........ बनने देता| जब भी. कोई मुझसे........ बात करता... है तो ये......उसे भी चिढ़ाने लगता है........ इसलिए कोई...... मुझसे बात ..नहीं करता|" नेहा ने रोते-रोते कहा .... और फिर उसे खाँसी आ गई| मैंने जल्दी से उठ कर उसे पानी ला कर दिया और इन्होने उसे अपनी गोद में बिठाया हुए पानी पिलाया और उसकी पीठ को सहला कर उसे शांत किया| "बस बेटा.... अब मेरी बच्ची को कोई तंग नहीं करेगा|" नेहा की बातें मेरे दिलों-दिमाग में घर कर गईं.... मुझे खुद से नफरत होने लगी| मेरे एक गलत फैसले ने मेरी बच्ची को इतना दुःख दिया.... सच में मैं बहुत स्वार्थी हूँ...... अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जरा भी नहीं सोचा| अपने प्यार को पाने के लिए मैंने बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा दिया! कैसी माँ हूँ मैं? यही सोच-सोच कर मैं अंदर ही अंदर कुढ़ने लगी थी..... मुझे पता ही नहीं चला कब इन्होने नेहा को गोद में ले कर सुला दिया और उसे आयुष वाले कमरे में लिटा कर आ गए| "संगीता....संगीता.....hey ......" इनकी आवाज सुनकर मैं अपने ख्यालों से वापस आई|"क्या हुआ? क्या सोच यही हो?" 'इन्होने सवाल पूछा... और जो मेरे दिमाग में चल रहा था मैंने वो सब बोल दिया|"

"हमारी एक गलती ने बच्चों की ये हालत कर दी|" मेरे इस पूरे वाक्य में 'इन्हें' "गलती" शब्द बहुत बुरा लगा ... और ये मुझपर बरस पड़े|

"गलती..... मेरे प्यार को तुम गलती का नाम देती हो? आयुष मेरी गलती है? या फिर ये बच्चा जो तुम्हारी कोख में है वो एक गलती है? how could you say this? i don't give a danm what this society thinks of me and you .... what really matters is YOU! और तुम्हें ये प्यार गलती लगता है तो सच में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई|" इसके आगे इन्होने कुछ नहीं कहा और ये कम्बल ओढ़ कर दूसरी तरफ मुँह कर के लेट गए| मुझे एहसास हुआ की मैंने इनका दिल दुखाया है..... हमारे 'पाक़' प्यार को मैंने 'गलती' कह कर इनके प्यार को गाली दी है| जो इंसान मेरे साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने के लिए अपने परिवार से लड़ पड़ा हो ... उसके प्यार को 'गलती' कहना उसके दिल को चोट पहुँचाना हुआ| मैं 'इनकी' बगल में लेट गई और इन्हें sorry बोलने लगी..... "sorry जानू.... प्लीज मुझे माफ़ कर दो! मेरा ये मतलब नहीं था.... प्लीज.... प्लीज...." पर 'इन्होने' कोई जवाब नहीं दिया और दूसरी तरफ करवट किये हुए लेटे रहे| मैंने जोर लगा कर 'इन्हें' अपनी तरफ घुमाया और फिर 'इनके' दाहिने हाथ को अपना तकिया बनाया और अपना दाहिना हाथ 'इनकी' छाती पर रख सो गई| सच में .... चाहे कितनी भी tension हो... गम हो... तकलीफ हो... इनके हाथों को तकिया बनाके कर लेटते ही सब भूल जाती हूँ|इनका दिल इतना बड़ा है की मेरी हर गलती माफ़ कर देते हैं.... रात तीन बजे फिर से दरवाजे पर दस्तक हुई... मैं जानती थी की नेहा होगी... इसलिए मैं जल्दी से उठी और उसे गोद में उठा कर लाइ ... उसके माथे को चूमा और फिर इनकी बगल में लिटा दिया| फिर मैं बाहर गई और आयुष को भी गोद में उठा लाइ और उसे भी नेहा के बगल में लिटा दिया|

सुबह मैं 'इनके' जागने से पहले उठ गई.... माँ-पिताजी को चाय दी और बच्चों को बारी-बारी तैयार कर दिया| जब 'इनकी' चाय ले कर आई तो देखा 'ये' अब भी सो रहे थे| 'इन्हें' सोता हुआ तो मैंने कई बार देखा था.... पर आज कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था 'इन' पर! जैसे एक छोटा बच्चा सोते समय cute लगता है... वैसे ही आज 'ये' भी सोते हुए बहुत cute लग रहे थे| मुझसे खुद पर काबू नहीं रहा .... मैंने चाय 'इनके' सिरहाने राखी और इनके पास बैठ गई और 'इन्हें' प्यार निहारने लगी..... आँखें जैसे तृप्त ही नहीं हो रही थीं.... क़ाश सारी जिंदगी 'इनको' निहारती रहूँ! इनके अधरों को देख ... मेरा मन मचलने लगा था..... और जब खुद पर काबू ना रहा तो मैंने झुक कर उन अधरों को चूम लिया| मेरे दोनों हाथ इनके गालों पर थे .... दिल नहीं कर रहा था की इनके अधरों को अपने होठों की गिरफ्त से आजाद करूँ.... शुरू-शुरू में इनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी..... क्योंकि ये अभी भी नींद में थे| फिर धीरे-धीरे इनके अधरों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया| मेरा दिल नहीं चाहता था की वो परमसुख जो मुझे आज इतने दिनों के बाद मिल रहा है वो ख़त्म हो.... (आयुष के जन्मदिन से ले कर आजतक इन्होने मुझे छुआ नहीं था|) पर किसी न सच ही कहा है... हर अच्छी चीज कभी न कभी ख़त्म हो ही जाती है| वही मेरे साथ उस दिन हुआ.... आयुष एक दम से कमरे में आ गया और उसकी हहलकदमी ने हमारा वो 'चुम्बन' disturb कर दिया| मैं शर्म के मारे बाथरूम में घुस गई... और ये भी उठ बैठे|

मैं बाथरूम में खड़ी दोनों की बातें सुनने लगी....

"पापा कल रात को एक जादू हुआ|"

"अच्छा... क्या जादू हुआ?"

"मैं कल अपने कमरे में सोया था... और सुबह उठा तो आपके बेड पर था|" ये सुन कर 'ये' हँस पड़े.... और तभी मैं भी बाहर आ गई| मुझे देख इन्होने कहा; "बेटा ... ये जादू आपकी माँ का है| आज सुबह मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.... मैं तो सपना देख रहा था की मैं. आप और नेहा hide and seek खेल रहे हैं.... आप दोनों छुपे हुए हो और मैं आप दोनों को ढूँढ रहा हूँ….. की नजाने कहाँ से एक परी आ गई... और मुझसे बात कर रही है| फिर अचानक से...." इनकी बात पूरी होने से पहले आयुष बोल उठा; "और मम्मी ने आपको kiss किया| ही...ही...ही...ही..." उसकी बातें सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए| तभी नेहा भी आ गई और आयुष को गुस्सा करने लगी; "शैतान..... बहुत बदमाश हो गया है तू! मम्मी..... सब लड़के एक जैसे होते हैं|" ये कहते हुए नेहा ने मेरा पक्ष लिया..... ये मेरे लिए पहलीबार था! 'ये' मेरी तरफ देख मुस्कुरा रहे थे और मेरे गाल लाल हो रहे थे......!

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धन्यवाद मित्र //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
मुझे देख इन्होने कहा; "बेटा ... ये जादू आपकी माँ का है| आज सुबह मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.... मैं तो सपना देख रहा था की मैं. आप और नेहा hide and seek खेल रहे हैं.... आप दोनों छुपे हुए हो और मैं आप दोनों को ढूँढ रहा हूँ….. की नजाने कहाँ से एक परी आ गई... और मुझसे बात कर रही है| फिर अचानक से...." इनकी बात पूरी होने से पहले आयुष बोल उठा; "और मम्मी ने आपको kiss किया| ही...ही...ही...ही..." उसकी बातें सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए| तभी नेहा भी आ गई और आयुष को गुस्सा करने लगी; "शैतान..... बहुत बदमाश हो गया है तू! मम्मी..... सब लड़के एक जैसे होते हैं|" ये कहते हुए नेहा ने मेरा पक्ष लिया..... ये मेरे लिए पहलीबार था! 'ये' मेरी तरफ देख मुस्कुरा रहे थे और मेरे गाल लाल हो रहे थे......!

अब आगे.........

बच्चे स्कूल चले गए..... और उनके जाते ही मैंने फिर से ‘इनपर’ chance मारा! ‘ये’ कमरे में शर्ट पहन रहे थे ... और टाई बाँध रहे थे| मैंने पीछे से आ कर ‘इन्हें’ जकड लिया.... पर ‘इन्होने’ ने कुछ नहीं कहा|

"कहाँ जाने की तैयारी हो रही है? वो भी इतना बन-ठन कर" मैंने पूछा|

"स्कूल" ‘इन्होने’ बस एक शब्द में जवाब दिया|

"क्यों ?" मैंने हैरान होते हुए पूछा|

"नेहा..." ‘इन्होने’ काफी गंभीर होते हुए कहा|

"मैं भी चलूँगी|" मुझे डर था की गुस्से में आ कर ये कहीं कुछ ऐसा-वैसा ना कर दें|

"ठीक है... जल्दी तैयार हो जाओ| हमें लंच टाइम तक पहुँचना है|" इतना कह कर ‘ये’ अपना ब्लेजर उठा कर बाहर चले गए| मैं भी जल्दी से तैयार हो कर बाहर आ गई... 'इनका' मन पसंद नाश्ता बनाया और साढ़े दस बजे हम निकल पड़े| रास्ते भर 'इन्होने' कुछ नहीं कहा... और मुझसे हिम्मत नहीं हुई की मैं कुछ कहूँ| रास्ते में एक जगह रुक कर इन्होने दो polythene भरकर कुछ सामान लिया| उसमें से मुझे कुछ खाने की खुशबु आ रही थी... पर मैंने कुछ पूछा नहीं| पर ‘इन्हें’ मेरी हालत के बारे में पता चला गया; "don't worry मैं लड़ाई करने नहीं जा रहा|" और फिर मुस्कुराने लगे| ये सुन कर मेरे दिल की हलचल शांत हुई| आखिर हम स्कूल पहुंचे... और क्या timing पर पहुँचे! हम क्लास के बाहर खड़े ही हुए थे की bell बज गई और नेहा की subject teacher निकली| वो 'इन्हें' जानती थी... तो hi - hello हुई और 'इन्होने' मेरा introduction टीचर जी से कराया| "ये नेहा और आयुष की मम्मी हैं| वो actually हम नेहा से मिलने आये थे|"

"ओह.... no problem!" और टीचर जी चली गईं| अभी कोई भी बच्चा क्लास से निकला नहीं था.... सब अपना-अपना lunch box हाथ में लिए खड़े थे और बाहर जाने ही वाले थे| "hey guys!" 'इनकी' आवाज सुन सबका ध्यान इनकी ओर हुआ..... "umm .. i'm neha's father ....." और नेहा 'इनके' पास आकर खड़ी हो गई| "आप मे से अक्षय यादव and party कौन है?" सब चुप हो गए.... और एक साथ सबकी नजर आखरी वाली लाइन के तीसरे desk पर बैठे लड़के की तरफ घूम गई| "ओह्ह!!! there you are .... come here" 'इन्होने' उसे अपने पास बुलाया| वो बेचारा हिचकता हुआ आया और इनके सामने आ कर खड़ा हो गया| "हाँ तो क्या प्रॉब्लम है तुम्हें नेहा से?"

"अंकल ... वो..... मतलब..... कुछ नहीं|" वो हकलाते हुए बोलने लगा| उसकी शकल देख कर पता चल रहा था की वो कितना डरा हुआ है|

"हम्म्म.... कोई जवाब नहीं? अच्छा तो राम यादव जी के लड़के हो ना?" 'इन्होने' पूछा|

"हाँ"

"हम्म्म.... क्यों tease करते हो मेरी बेटी को?"

"सॉरी अंकल"

"क्या कहते हो तुम....वो.... हाँ.... तेरे पापा ने अपने से ज्यादा उम्र वाली लड़की से शादी की... and all ..... बच्चों आपको पता है इस तरह की बातें तो जनानियाँ करती हैं|" ये सुन कर सब उस लड़के पर जोर से हँस पड़े... और सबको हँसता देख वो बेचारा शर्म से जमीन में गड़ने लगा|

"वैसे तुम्हारे पापा को ये सब सुन कर अच्छा नहीं लगेगा की उनका लड़का जनानियों वाली हरकतें करता है!" बच्चे और भी ज्यादा दहाड़ें मार कर हँसने लगे.... और अब तो मेरी भी हँसी छूट गई| पर उस लड़के की तो जैसे बैंड ही बज गई थी.... "sorry अंकल...." इतना कहते-कहते वो रो पड़ा|

"बेटा कैसा लगा जब खुद का मज़ाक बनता है? और sorry मझे नहीं नेहा को बोलो... तुम्हें पता है उसके दिल को कितनी चोट पहुँचती थी जब तुम ऐसी बातें उसे बोलते थे? उसने ये बात हमसे भी छुपाई.... बहुत जोर देने पर हमें पता चला की आखिर बात क्या है|"

"sorry नेहा.... मैं आगे से कभी ऐसा मज़ाक नहीं करूँगा| really sorry ..." उसने रोते-रोते कहा|

"its okay ... i forgive you" नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा|

"चलो भई मैं और आपकी आंटी आपके लिए कुछ लाये हैं|" एक पॉलिथीन मेरे पास थी और एक इनके पास.... इनकी पॉलिथीन में समोसे थे और मेरी वाली में cup cakes! हमने मिलकर सभी को दो-दो समोसे और एक-एक cup cake बातें| सारे बच्चे बहुत खुश थे..... और नेहा के चेहरा तो सब से ज्यादा खिला हुआ था|

"तो बच्चों अब तो आपको नेहा से दोस्ती करने में कोई problem नहीं है?" ये सुन कर सब बच्चे हँस पड़े|

हम दोनों भी ख़ुशी-ख़ुशी क्लास से बाहर आ गए| स्कूल की canteen में छोले-कुलचे बहुत famous हैं तो मैंने वो खाने की जिद्द की तो हम canteen पहुँच गए| वहां पत्थर की सीढ़ियां बानी हुई थीं... तो मैं वहाँ बैठ गई और ये मेरे लिए छोले-कुलचे ले आये| तभी वहाँ आयुष आ गया..... और उसके साथ उसकी girlfriend भी थी| बहुत ही sweet थी वो..... जैसे ही उसने मुझे नमस्ते बोला मैंने एकदम से बोला; "ओह! तो ये तेरी girlfriend है?" ये सुनकर आयुष के गाल शर्म से लाल-लाल हो गए (जैसे सुबह मेरे गाल लाल हो गए थे) और वो चिल्लाया... "मम्मी!!!" और आँखों से मुझे गुस्सा दिखने लगा जिसे देख मुझे बहुत हँसी आ गई| फिर वो जा कर अपने पापा के पीछे छुप गया... अब बात इन्हें संभालनी थी क्योंकि शर्म से उस बच्ची के भी गाल लाल होने लगे थे| इन्होने अपनी हँसी सँभालते हुए आयुष से कहा; "बेटा अपनी दोस्त को कुछ खिलाओगे नहीं? ये लो ... एक प्लेट छोले कुलचे ले आओ|" मैं इस बात पर भी चुटकी लेने से नहीं छूटी; "एक प्लेट में दो लोग कैसे खाएंगे?" ये सुन कर इनकी भी हँसी छूटने लगी पर पता नहीं कैसे इन्होने अपनी हँसी पर काबू किया| इधर आयुष की हालत देखने लायक थी!

आयुष के जाने के बाद मैंने उस प्यारी सी बच्ची को अपने पास बुलाया और उसे अपनी बगल में बिठाया| मैं उससे प्यार से बात करने लगी ... उसके घरवालों के बारे में सवाल करने लगी| जैसे की मैं आयुष के रिश्ते की बात कर रही हूँ| (ही...ही...ही...) हम खा ही रहे थे की नेहा हमें ढूढ़ती हुई आ गई और आ कर सीधा इनसे लिपट गई| "hey ... my baby .... क्या हुआ?" इन्होने कुलचा मुझे थमाया और अपने हाथ पांच कर नेहा के आँसूं पोंछने लगे| "क्या हुआ बेटा? किसी ने कुछ कहा क्या?" आखिर नेहा ने अपने रोने पर काबू पाया और कहा; "thank you पापा"

"बेटा.... बस... अब रोना नहीं| मेरा sweet baby है ना? और बेटा अब आपको खुद के लिए stand लेना सीखना होगा| मम्मी-पापा हर जगह नहीं होते... तब आपको खुद के लिए स्टैंड लेना होगा.... fight करना होगा.... so you have to be strong! okay? मेरी बहादुर बेटी है ना?"

नेहा ने हाँ में सर हिलाया और फिर इन्हें गाल पर kiss किया| इन्होने एक कौर नेहा को खिलाया और फिर उसे लाड करने लगे|

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हम खा ही रहे थे की नेहा हमें ढूढ़ती हुई आ गई और आ कर सीधा इनसे लिपट गई| "hey ... my baby .... क्या हुआ?" इन्होने कुलचा मुझे थमाया और अपने हाथ पांच कर नेहा के आँसूं पोंछने लगे| "क्या हुआ बेटा? किसी ने कुछ कहा क्या?" आखिर नेहा ने अपने रोने पर काबू पाया और कहा; "thank you पापा"

"बेटा.... बस... अब रोना नहीं| मेरा sweet baby है ना? और बेटा अब आपको खुद के लिए stand लेना सीखना होगा| मम्मी-पापा हर जगह नहीं होते... तब आपको खुद के लिए स्टैंड लेना होगा.... fight करना होगा.... so you have to be strong! okay? मेरी बहादुर बेटी है ना?"

नेहा ने हाँ में सर हिलाया और फिर इन्हें गाल पर kiss किया| इन्होने एक कौर नेहा को खिलाया और फिर उसे लाड करने लगे|

अब आगे.....

घर वापस लौटते समय 'ये' बहुत खुश थे.... और मैं मन ही मन सोच रही थी की आज एक और chance मारूँ 'इन' पर|इसलिए जैसे ही हम घर पहुंचे ... 'ये' change करने washroom में चले गए| मैंने दरवाजा बंद किया और कमर में हाथ रखे 'इनके' बाहर निकलने का इन्तेजार करने लगी| जैसे ही washroom के दरवाजे की कुण्डी खुलने की आवाज आई मैं दरवाजे की तरफ बढ़ी और 'इनके' बाहर निकलते ही 'इनके' सीने से लग गई| हाय! वो गर्माहट जो 'इनके' सीने से निकल रही ही... उसे महसूस कर मैं आँख मूंदें खड़ी हो गई| 'इनके' बोलने पर मेरी तन्द्रा टूटी; "यार... site पर जाना है.... छोडो|" मैंने आलिंगन तोड़ दिया.... पर 'इनका' हाथ थाम लिया; "न जाओ साईंयाँ, छुड़ा के बैइय्याँ... कसम तुम्हारी, मैं रो पडूँगी|" 'इन्होने' उसका जवाब भी गाने के रूप में दिया; "जाने दो, जाने दो मुझे जाना है.... वाद जो किया है वो निभाना है|" मेरा जवाब भी गाने के रूप में था; तू न जा मेरे बादशाह... एक वादे के लिए... एक वादा तोड़ के!" आखिर 'ये' मुस्कुरा दिए और बोले; "बोलो क्या काम है?"

"काम तो कुछ नहीं.... बस आपका साथ चाहिए|" अब मैंने पहल करते हुए 'इन्हें' दिवार के सहारे खड़ा कर दिया और 'इन्हें' दिवार और मेरे बीच दबा दिया|

"आज कुछ ज्यादा ही रोमांटिक नहीं हो रही हो?" 'इन्होने' पूछा|

"जी हमें तो हर वक़्त आपको देखते ही रोमांस छूट जाता है|" मैंने अपना निचला होंठ दबाते हुए कहा|

"वैसे आज का romance का कोटा पूरा हो गया.... अब जाने दो|" 'इन्होने' निकलने की कोशिश की पर मैंने 'इन्हें' दबाये रखा|

"ऐसे कैसे छोड़ दें!" मैंने थोड़ा villain वाले अंदाज में कहा|

"already आज सुबह धोके से तुमने मुझे kiss किया ना?"

"तो? क्या कभी पहले नहीं किया?"

"किया था.... पर तब मुझे तुम्हें छूने की छूट थी... पर अब नहीं है.... इसलिए!" ये कहते हुए 'इन्होने' खुद को मेरे चंगुल से छुड़ा लिया|

"i'm really sorry जी.... अब तो माफ़ कर दो! आगे से फिर कभी ऐसा नहीं करुँगी... प्लीज" पर 'इन्होने' कुछ जवाब नहीं दिया और site पर चले गए| उस पल मैंने खुद को सैकड़ों गालियाँ दी... बहुत कोसा खुद को की मैंने उस दिन इनका दिल तोड़ दिया| वो अधिकार जो मैंने इन्हें अपनी ख़ुशी से दिया था वो इनसे खुद छीन लिया|अब मुझे कैसे ना कैसे 'इन्हें' seduce करना था.... by hook or by crook! तभी 'ये' पिघलेंगे और उन बातों को भूलेंगे..... पर बदकिस्मती से मेरा दिमाग इनकी तरह नहीं चलता ना! दोपहर में जब बच्चे लौटे तो नेहा में आज एक अलग ही आत्मविश्वास दिखा| वो पहले से ज्यादा चहक रही थी.... मेरी गुड़िया आज बहुत खुश थी! उसके सभी दोस्तों ने आज उसके पापा की बहुत तारीफ की थी! """""""""""""""""""""^इस तरह इनकी अपनी जिंदगी मे सफलता और खुशीयाँ मिलती गयीं।

***********"**"*************************************$$$$$$$$$$$$$$******समाप्त******$$$$$$$$$$$$*******

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इसलिए उसे # खुश रखो चाहे वो # अपना हो या # अपनों का.//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg
 
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दुनिया में रहने की सबसे अच्छी दो जगह ‘किसी के दिल में’ या ‘किसी की दुआओं में’ !!❤//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg☘//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f497.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f49e.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f496.svg
 
धन्यवाद शुभ चिंतक Sexi Rebel//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg
 
धन्यवाद मित्र naik//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg
 
धन्यवाद Raj Bhai //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f339.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f337.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
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