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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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अगर मैं पुरुष होती तो तुझे छोडती नहीं। और तू भी तो बड़ी तेज निकली। आज तुमने वह कर दिखाने की हिम्मत की जो अक्सर शादी शुदा औरतें अपने पति के उकसाने पर भी नहीं कर पाती हैं। अगर कुछ करती भी हैं, तो चोरी छुपके। पर हम सब आज एक साथ हैं। राज ने जो पहले कहा था की हम दोनों पत्नियां इन दोनों पतियों को अपना पति माने यह बात आज वास्तविक रूप में सार्थक हुई। यह सब हमारे पतियों की लंपटता से मुमकिन हुआ।“

तब मेरे पति राज ने रुखसार को खिंच कर अपनी बाहों में ले लिया और हंसकर बोले, “जब तुमने हमें लम्पट करार कर ही दिया है और फिर अब जब हम एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह जान ही गए हैं, तो तुम वहाँ कपडे पहने हुए क्यों खड़ी हो? मेरी बांहों में आ जाओ। मैं तुम्हें तुम्हारे पति समीर और मेरी बीबी डॉली के सामने ही निर्वस्त्र करने की घृष्टता करता हूँ। आशा है वह मुझे क्षमा करेंगे।“

और राज ने मेरे और समीर के सामने ही कुछ असमंजस में खड़ी हुयी रुखसार को बोलने का मौक़ा न देते हुए, अपनी बाहों में जकड लिया और उसे अपनी और खिंच अपनी गोद में बिठाकर चूमने लगे और उसके कमीज़ के बटन खोलने में लग गए।

 
तब मेरे पति राज ने रुखसार को खिंच कर अपनी बाहों में ले लिया और हंसकर बोले, “जब तुमने हमें लम्पट करार कर ही दिया है और फिर अब जब हम एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह जान ही गए हैं, तो तुम वहाँ कपडे पहने हुए क्यों खड़ी हो? मेरी बांहों में आ जाओ। मैं तुम्हें तुम्हारे पति समीर और मेरी बीबी डॉली के सामने ही निर्वस्त्र करने की घृष्टता करता हूँ। आशा है वह मुझे क्षमा करेंगे।“

और राज ने मेरे और समीर के सामने ही कुछ असमंजस में खड़ी हुयी रुखसार को बोलने का मौक़ा न देते हुए, अपनी बाहों में जकड लिया और उसे अपनी और खिंच अपनी गोद में बिठाकर चूमने लगे और उसके कमीज़ के बटन खोलने में लग गए।

मैं मेरे पति की निर्लज्जता से बड़ी दुखी हो गयी। अपने पति के बारे में ऐसी बातें सुनना और उनको अपनी आँखों के सामने किसी और औरत को प्यार करते हुए देखने में बहुत अंतर है यह मैंने तब अनुभव किया। तब तो वह मात्र रुखसार को चूम रहे थे और उसके कपड़ों को हटा ने की चेष्टा कर रहे थे। जब वह उसे चोदेंगे तो मुझ पर क्या बीतेगी यह सोचना भी मेरे लिए मुश्किल था। हालांकि मैं जानती थी की उनका रुखसार को चोदने का यह कोई पहला मौका नहीं था।

फिर क्या था? समीर को तो जैसे खुला लाइसेंस मिल गया। अब तो वह जैसा मेरा पति हो ऐसा अधिकार जताते हुए निःसंकोच मेरे सारे अंगों को चूमने लगे। एक और मैं अपने पति की निर्लज्जता के बारे में सोच रही थी, तो दुसरी और मैं स्वयं भी तो नग्न अवस्था में किसी और मर्द की बाहों में थी न? मैं बड़ी दुविधामें डूबी जा रही थी।

पर कहावत है न की जब सर ओखल में रखा तो फिर मुशल से क्या डरना? एक बार जब मनमें निश्चय कर ही लिया था तो अब पीछे हटने का तो कोई सवाल ही नहीं था, और ना हीं में हटना चाहती थी। मैं भी पूरी तरह अपनी लज्जा का चोला फैंक देते हुए मेरे पति राज से थोड़ी दूर हट कर मेरे पागल भोंदू प्रेमी समीर के साथ लेट गयी। समीर ने मुझे अपनी दो टांगों के बीच में जकड लिया। मैं भी समीर के बटनों के साथ खेलते हुए उन्हें खोलने में लग गयी। समीर अब पूरी तरह नग्न थे। उनकी बालों से भरी हुई छाती मेरे स्तनों से रगड़ रही थी।

मैंने उनको अपने ऊपर चढ़ने को प्रेरित किया और मेरे होंठ को चूमने के लिए मैं अपने होंठ की चूमने की मुद्रा बना ली वह मुझ पर झुक कर मेरे होठों को बड़े दुलार से चूमने लगे। मुझे अब मेरे पति और रुखसार की कोई शर्म न थी और ना ही उनसे कोई जलन। पर स्त्री सहज उत्सुकता जरूर थी।

मैंने जब मुड़कर देखा तो पाया की राज रुखसार को करीब पूरी तरह निर्वस्त्र कर चुके थे। मैं तो रुखसार की नग्न छबि देखती ही रह गयी। उसकी नग्नता में उसका सौन्दर्य इतना निखर रहा था की जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा नीचे उतर आयी हो। मैं मन ही मन मुस्करा ने लगी। भाई इतनी सुन्दर एवं सेक्सी स्त्री को देख कर भी अगर मेरे पति का मन न ललचाता तब तो मुझे भी उनकी पौरुषता पर शक होता। मुझे मेरे पति पर दया आगयी। मैं उनको भली भाँती जान गयी थी। राज इतने रसिक (या फिर लम्पट कह लीजिये) थे की इतने सालोँ से एक मात्र स्त्री के साथ ही सम्भोग करना उनके लिए बहुत कठिन रहा होगा। मैं भी तो उस सम्भोग के नित्यक्रम से ऊब ही गयी थी न? सालों से हररोज रोटी सब्जी खाने वाले को अगर खीर नजर आये तो उसका मन तो लचायेगा ही।

मैंने समीर के कानों में कहा, “एक मिनट” और पलट कर मैं मेरे पति के पास गयी जो के रुखसार के उरोजों और उसके रसीले नितम्ब को कभी सहलाते तो कभी चूंटी भर रहे थे। रुखसार के हाथ में मेरे पति का लन्ड था और उसे वह प्यार से सहला रही थी। मैंने राज को खिंच कर मेरी बाहोंमें लिया और कहा, “राज, प्यारे, तुम मेरे सर्वस्व हो। आज मैं खुश हूँ और मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है। तुम दोनों खुल कर चोदो और सम्भोग का पूरा आनंद लो। पर याद रहे रुखसार तुम्हारी प्रेमिका और शय्या सह भागिनी भले ही हो पर हमेशा के लिए तुम्हारी धर्म बीबी तो मैं ही रहूंगी।”

 
राज मेरी और थोड़ा आश्चर्य से देखते रहे फिर बोले, “मेरी अपनी डॉली! मैं तुम्हारा ही था, हूँ और हमेशा रहूंगा। रुखसार कभी भी मेरी धर्म बीबी नहीं बन सकती। उसका पति उसीका है और मैं हमेशाके लिए तुम्हारा ही हूँ। यह तो हम एक प्रयोग कर रहे हैं, पर यह प्रयोग हमारा जीवन नहीं बदल सकता। हमारे बच्चे है, रिश्तेदारी है, समाज है। पति बीबी हमेशा पति बीबी ही रहेंगे। तुम निश्चिन्त होकर जाओ और तुम्हारे प्रेमी के साथ उच्छ्रुन्ख्लता से चुद्वाओ और चोदो।”

अब मैंने अपने आपको पूरी तरह स्वतंत्र पाया। मेरे मन में कोई दोष या अपराधी भाव नहीं रहा। अब मैं मेरे प्रेमीको पूरी तरह मेरा शारीरिक भोग करनेके लिए आझाद थी। समीर भी हमारा संवाद सुन रहा था। उसने सब सुन सके ऐसे कहा, “पति और बीबी के बीच में मात्र शारीरिक सम्बन्ध के अलावा सामाजिक, आर्थिक और मानसिक सम्बन्ध भी होता है और वह ऐसे प्रयोगों से आहत नहीं होना चाहिए। पति हमेशा अपनी बीबी के साथ बंधा हुआ है और होना भी चाहिए। हमने तो मात्र एक ऐसा प्रावधान चुना है की जिससे हम मर्यादित दायरेमें अपनी कामुकता को थोड़ी छूट दे सकें।”

और फिर उसने मेरे होठों पर अपने होंठ ऐसे दबाये की मैं देखती ही रह गयी। समीर का लन्ड बड़े उफान पर था। मैं जानती थी की वह मुझे चोदने के लिए बडा ही उतावला हो रहा था। मैं आज उससे बहुत बहुत प्यार करना चाहती थी। मेरे मनमें भी जो घुटन थी वह आज अनावृत हो रही थी। मैं आज पूरी उच्छ्रुन्ख्लता से समीर और राज दोनों से चुदवाना चाहती थी।

मैंने समीर के लन्ड को जोर से हिलाना शुरू किया। मेरे नरम हाथों से अपना लन्ड फुर्ती से हिलाने के कारण समीर के मुंहसे अनायास ही आह.. निकल पड़ती थी। जिसे सुन रुखसार अपने पति की और टेढ़ी नजर से देखना और कटाक्ष भरी मुस्कुरान देना नहीं चुकती थी। समीर का लन्ड एकदम स्निग्ध हो चुका था। समीर झुक कर मेरे मम्मों को चाटने लगा।

अपना एक हाथ उसने मेरी फुद्दी पर रखा और मेरी साफ़ स्निग्ध फुद्दी को महसूस करने लगा। फिर धीरे से उसने मेरी फुद्दी में अपनी दो उंगलियां डाल दी। उसका दुसरा हाथ मेरी गांड को प्यारसे सहलाने, दबाने और हल्कीसी चूंटी भरने में जुटा हुआ था। समीर की यह कारवाई से मैं गरम होती जा रही थी। पुरे कमरे का माहौल सेक्स की खुशबु से जैसे लिप्त था। बीच बीच में हम में से किसी न किसी के मुंह से हलकी सी आह या सिसकारी निकल पड़ती थी जिससे हम दोनों युगल एक दूसरे की गति विधियां एक तिरछी नजर देख लेते थे।

उधर मैंने देखा की मेरे पति राज और रुखसार रुक रुक कर मेरी और समीर की प्रेम क्रीड़ा देख कर जैसे उसका आस्वादन कर रहे थे। मेर पति रुखसार की चूँचियों को झुक कर बड़े प्यार से चाट रहा था और एक हाथसे रुखसार की फुद्दी सहला रहा था। शायद उसकी उंगलियां भी रुखसार की फुद्दी की गहराईयों का मुआइना कर रही थी जिस कारण रुखसार भी काफी गरम लग रही थी और अपना फुद्दीड गद्दे पर रगड़ रही थी। रुखसार के हाथ मेरे पति का कड़क और चिकनाई से पूरी तरह लिप्त लन्ड को प्यार से धीरे धीरे सहला रहे थे। पर यह सब करते हुए भी उनकी नजरें हम पर टिकी हुयी थीं।

मैंने अपना हाथ बढाकर रुखसार का हाथ मेरे हाथ में लिया। रुखसार ने भी बड़े प्यार से मेरे हाथ में अपना हाथ दिया और वह मेरी उँगलियों और मेरे हाथ को प्यार से दबा कर जैसे अपने मन के अंदर हो रही हलचल से मुझे अवगत करा रही थी। उस समय मुझे औरतों को अपने प्रिय पराये मर्द से पहली बार चुदवाने में कैसी उत्तेजना, झिझक और रोमांच का अनुभव होता है उसका कुछ आभास हो रहा था। यह एक ऐसा अनुभव है जिसको समझना शायद आदमियों के लिए नामुमकिन है।

 
उधर मैंने देखा की मेरे पति राज और रुखसार रुक रुक कर मेरी और समीर की प्रेम क्रीड़ा देख कर जैसे उसका आस्वादन कर रहे थे। मेर पति रुखसार की चूँचियों को झुक कर बड़े प्यार से चाट रहा था और एक हाथसे रुखसार की फुद्दी सहला रहा था। शायद उसकी उंगलियां भी रुखसार की फुद्दी की गहराईयों का मुआइना कर रही थी जिस कारण रुखसार भी काफी गरम लग रही थी और अपना फुद्दीड गद्दे पर रगड़ रही थी। रुखसार के हाथ मेरे पति का कड़क और चिकनाई से पूरी तरह लिप्त लन्ड को प्यार से धीरे धीरे सहला रहे थे। पर यह सब करते हुए भी उनकी नजरें हम पर टिकी हुयी थीं।

मैंने अपना हाथ बढाकर रुखसार का हाथ मेरे हाथ में लिया। रुखसार ने भी बड़े प्यार से मेरे हाथ में अपना हाथ दिया और वह मेरी उँगलियों और मेरे हाथ को प्यार से दबा कर जैसे अपने मन के अंदर हो रही हलचल से मुझे अवगत करा रही थी। उस समय मुझे औरतों को अपने प्रिय पराये मर्द से पहली बार चुदवाने में कैसी उत्तेजना, झिझक और रोमांच का अनुभव होता है उसका कुछ आभास हो रहा था। यह एक ऐसा अनुभव है जिसको समझना शायद आदमियों के लिए नामुमकिन है।

समीर ने मुझे पलंग पर लीटा दिया और धीरे से मेरे ऊपर चढ़ने को तैयार हुआ। जैसे ही समीर ने मुझे अपनी टांगों के बीच में लिया की मैंने अपनी टांगें समीर के कन्धों पर रख दी। समीर को मेरी गीली और रस बहाती हुई फुद्दी अपनी आखों के सामने नजर आ रही थी। मेरी नंगी फुद्दी देख कर उसकी हालत क्या रही होगी यह समझना कठिन नहीं था। समीर ने झुक कर मेरी फुद्दी को प्यार से चूमा और उसे वह अपनी जीभ से चाटने लगा। फिर अपनी जीभ का सिरा मेरी फुद्दी में डाल कर मुझे चुदवाने के लिए उकसाने लगा। मैं तो वैसे ही मेरी गरमाई फुद्दी मैं उसका लन्ड डलवाने के लिए पागल हो रही थी।

जब समीर मुझे चोदने के लिए अग्रसर हुए और अपना लन्ड मेरी फुद्दी के आसपास लहराने लगे तो मैंने उसे बड़े प्यार से पकड़ा और धीरे धीरे से उसे सहलाते हुए मेरी फुद्दी के केंद्र बिन्दु पर रखा। फिर उसे मेरी फुद्दी में दबा कर मैंने जैसे समीर को अपना लन्ड मेरी फुद्दी में डालने के लिए आमंत्रित किया। यह करते हुए मेरे दिल की धड़कनें कितनी तेजी से चल रही थीं और मेरे मन का क्या हाल हो रहा होगा यह तो वाचक (और खासकर महिलाएं जिन्हें ऐसा करने का मौक़ा मिला है) ही समझ सकते है।

उस समय समीर ने मेरी भावनाओं को समझते हुए अपना लन्ड मेरी फुद्दी में डालने से पहले झुक कर मेरे होठों पर अपने होंठ रखे और मुझे प्यार भरा चुम्बन करते हुए बोले, “डॉली, मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ और जब से हम मिले तब से तुम्हें चाहने और चोदने की इतनी प्रबल प्रगाढ़ इच्छा थी की मैं पागल हो रहा था। पर मैं तुहारी भावनाओं का सम्मान करता हूँ और तुमने मुझे अपना सर्वस्व देकर जो सम्मानित किया है इससे मैं अभिभूत हूँ। मैं और रुखसार आप और राज के पति बीबी के रिश्ते का पूरा आदर करते हैं और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ की न तो मैं आप पर और न ही रुखसार आप के पति पर किसी भी तरह का अधिपत्य जमाने की इच्छा रखेंगे या कोशिश करेंगे। हमारे एक दूसरे से सेक्स करने से हमारे मूल संबंधों में कोई भी तरह की दरार या दुरी नहीं आएगी बल्कि पति बीबी के रिश्ते और मजबूत होंगे यह विश्वास आपको दिलाना चाहता हूँ।”

समीर की बात सुनकर मेरी आँखें नम हो रही थी। तब समीर ने एक हल्का धक्का देकर मेरी गीली फुद्दी में अपना स्निग्ध, तना हुआ मोटा लंबा लन्ड घुसेड़ा। मेरी फुद्दी की भग्न रेखा से अंदर जाते हुए मुझे पहली बार समीर के लन्ड के स्पर्श और घर्षण से इतनी उत्तेजना और रोमांच का अनुभव हुआ जिसे वर्णन करना मेरे लिए संभव नहीं है। बस मैं इतना ही कहूँगी की मैं अपने आपको बड़ा भाग्यशाली मान रही थी की मुझे ऐसा अवसर प्राप्त हुआ जिसमें मुझे मेरे पति को किसी तरह के अँधेरे में रखने की जरुरत नहीं पड़ी और फिर भी मुझे ऐसा रोमांचक अनुभव हो रहा था।

जैसे समीर ने मुझे चोदने की फुर्ती बढ़ाई वैसे ही मैं भी अपने फुद्दीड़ को उठा उठा कर समीर के धक्कों का जव्वाब दे रही थी जिससे मैं उसका लन्ड मेरे पुरे अंदरूनी सुरंग में ले पाऊं। मेरे पुरे बदन में समीर की चुदाई से जैसे आग फ़ैल रही थी। मैं समीर को और चोदने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी। मैं बोल पड़ी, “समीर आज मुझे खूब चोदो। मेरे पति और तुम्हारी बीबी को भी आज हम दिखाएँगे की हम भी कुछ कम नहीं। तुम बे झिझक मेरी गर्म फुद्दी में अपना सारा वीर्य उंडेल दो।”

 
मेरी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी। अचानक मेरे पुरे बदन में एक झटका सा लगा और मेरी फुद्दी में से जैसे फव्वारा निकल पड़ा। मैं ऐसे झड़ रही थी जैसे मैं पहली बार राज से उस जंगल में पेड़ के नीचे चोदने पर झड़ी थी। मेरे बदन की हलचल देख समीर भी तेजी से अपनी चुदाई की गति बढ़ाते हुए अकडने लगे और एक जोरदार धक्का देकर कराहते हुए उन्होंने अपना वीर्य मेरी फुद्दी में एक फव्वारे की तरह छोड़ा। समीर के गरमा गर्म वीर्य से मेरी फुद्दी भर गयी और मेरी कोख जैसे संतृप्त हो गयी। मेरी और समीर की चिकनाहट से भरा वीर्य मेरी फुद्दी में से उभर कर गद्दे पर गिरने लगा।

तब मेरे पति राज और रुखसार मिलकर तालियां बजाने लगे। मैंने शर्माते हुए जब उनकी और देखा तो रुखसार बोली, “आज मेरी प्यारी डॉली भाभी जान, न सिर्फ मेरी भाभी जान रही बल्कि मेरी सौतन भी बन गयी। पर मैं अब तुम्हें मेरी बड़ी प्यारी मीठी और अपनी सौतन बहन कहूँगी और तुम भी मुझे ऐसे ही बुला सकती हो। पर हम एक दूसरे के पति को छिनने नहीं बल्कि अपने पति को एक दूसरे से बांटने के लिए ही अग्रसर रहेंगे और हमारे इस नए रिश्तों का आस्वादन करेंगे। हमारे पति तो हमारे ही रहेंगे।”

और फिर मेरे और समीर के कहने पर मेरे पति राज और मेरी सौतन बहन रुखसार एक दूसरे पर ऐसे झपट कर चुदाई में लग गए की मैं और समीर देखते ही रह गए।

हमारी कहानी करीब दो साल तक ऐसे ही चलती रही। कभी मैं मेरे दोनों पतियों से चुदती रही तो कभी रुखसार। तो कभी मैं और रुखसार पूरी रात एक दूसरे के आगोश में एक दूसरे के बदन का आनंद लेते रहे। आगे भी काफी कुछ हुआ। पर वो कभी और।

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