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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ
दोस्तो कहते हैं शादी के पाँच छः साल तो मस्ती में गुजर जाते है पर बाद में थोड़ी नीरसता आने लगती है इसी नीरसता को किस तरह मैने और मेरे दोस्त समीर ने दूर किया यही इस कहानी का ताना बाना है तो दोस्तो ये सुनिए कहानी समीर की ज़ुबानी ..................................
मैं हूँ समीर । आज मेरी ये सच्ची कहानी आप लोगो से शेयर कर रहा हूँ वात्स्यान ने कामसूत्र में योनी को नारी के शारीरिक आकर के हिसाब से ४ तरह से लिखा , जैसे शशक (खरोगश ), हिरनी , घोड़ी(अश्वनी) और हथनी ...शायद उस वक़्त वात्स्यान के दिमाग में सिर्फ योनी का आकर ही इक महत्वपूर्ण कारक था , इसलिए उसने योनी के आकर के हिसाब से नारी की वयख्या कर दी ...की सबसे छोटे कद की खरोगश और सबसे बड़े कद की हथनी ...और तो और उनके सफल और आनंदायक सम्भोग के लिए उन जैसे साथी का चयन भी बता दिया ...
पर मेरे अनुभव ने नारी की योनी को इन सबसे अलग इक नयी तरीके की वयख्या दी और योनी की सुन्दरता का इक पैमाना बनाया ...मेरे अनुभव ने यह समझाया की किसी भी नारी या पुरुष के शरीर के अनुपात में उसका गुप्तांग हो ऐसा जरुरी नहीं है , इसलिए किसी भारी भरकम नारी जो वात्स्यान के हिसाब से हथनी वाली श्रेणी में आती है की योनी का आकर भी बड़ा होगा और उसे सम्भोग में अपने जैसे हाथी टाइप बड़े आदमी से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी , यह भी इक मिथ है ...
मेने उस दिन और बाद में भी जेंटलमैन क्लब में नारी की कई तरह की योनियाँ देखि , कई बार तो अच्छे लम्बे कद की लड़की की योनी बहुत छोटी और सिकुड़ी सी होती , इसके विपरीत इक छोटे कद की लड़की की योनी बड़े आकर में फैली सी होती और दोनों के योनी मार्ग भी उनकी योनियों के आकर अनुपात के हिसाब से ना होकर कभी बहुत ज्यादा खुले या तंग होते ...
मेने नारी की योनी को इक ऐसी श्रेणी में रखा जिसमे योनी की तुलना हम किसी संकरी सी गली के आगे लगे दरवाजे से कर सकते है ...इसे ऐसा समझे जैसे किसी घर के आगे इक दरवाजा है जिसमे दो पल्ले(कपाट) लगे है यानी दो किवाड़ वाला दरवाजा है ....अब यह उस दरवाजे की हालत पे निर्भर करता है की
1.दोनों कपाट इस तरह से भिड़े है की वह दोनों जुड़ कर लगभग बंद जैसे लगते है और उन दोनों कपाट के जुड़ने से दोनों के बीच में हलकी सी इक झिरी सी दिखती हो या
२. दोनों कपाट अंदर की तरफ थोड़े से खुले है, जैसे किसी ने दोनों दरवाजो को घर के अंदर धकेल का हल्का सा खोल कर छोड़ दिया है या
3. दोनों कपाट बहार की तरफ ऐसे खुले है जैसे किसी ने हड़बड़ी में दरवाजे बहार की तरफ खोल कर छोड़ दिए है या
४. इक कपाट के ऊपर दूसरा कपाट ऐसे सा चढ़ा , जैसे दरवाजा बंद करते वक़्त किसी ने अनाड़ीपन में इक कपाट पे दूसरा कपाट लगा कर छोड़ भर दिया है
मेरे अनुभव ने नारी की योनी को उनकी सुन्दरता , आकर और शारीरिक आकर के हिसाब से देखा और परखा , क्योकि नारी की योनी किसी विशेष समुदाय , देश ,रंग और जीन्स के हिसाब से अपना आकर लेती है और योनी की सुन्दरता और विशेषता या ऐसी नारी के प्रति पुरुषो में इच्छा भी उसके देश में उसी हिसाब से मापी भी जाति है ...
इन चारो श्रेणी की नारी में योनी का आकार बड़ा या छोटा कुछ भी हो सकता है और किसी व्यक्ति विशेस का अपनी योनी को स्वच्छ और साफ़ सुथरा रखना भी , योनी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है ...एशियाई देश की अधिकतर नारी अपनी योनी के आसपास छोटे बाल रखती है और जापान में ऐसी योनी को बहुत आकर्षक भी माना जाता है ...इसके विपरीत योरोप के देश में अधिकतर नारी क्लीन शेव योनी रखती है या योनी के पास बाल की इक पतली लाइन सी और ऐसी योनी पुरुषो के आकर्षण का केद्र बिंदु भी होती है .....किसी पुरुष को नारी की सुनहरी या सांवली योनी में तो किसी को हलकी गुलाबी योनी में आकर्षण लगता है
मेने जितनी भी तरह की योनी को देखा और परखा , तो लगा योनी की तुलना होठो से की जा सकती है मुझे वह योनी सबसे ज्यादा आकर्षक लगी जिसमे दोनों कपाट जुड़ कर बंद से प्रतीत होते है , क्योकि यह ऐसी प्रतीत होती है जिसे किसी खुबसूरत लड़की के पतले होठ इक लिपस्टिक से सज कर जुड़े से हो , पर होठ अगर ज्यादा मोटे हो यां लटके हो तो उनमे इक तरह की बदसूरती सी आ जाति है , हो सकता है किसी को उस तह के होठ पसंद हो , क्योकि अभी कुछ दिन पहले फ़िल्मी हेरोइनो में मोटे होठो का फैशन बड़े जोरो पर था ...
मेरे अनुभव से किसी योनी के मार्ग में आगे की तरफ लटकी छोटी सी खाल जिसे मेडिकल टर्म में लाबिया मिनोर्मा (लघु कोष्ठ) बोलते है का ज्यादा फैला होना योनी की सुन्दरता को कम कर देता है ...उसका बहुत कम होना भी योनी की सुन्दरता को कम करता है ...अगर यह हद से ज्यादा हो तो सम्भोग में नारी को अनचाही दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है , पर इसके विपरीत अगर यह थोडा आकर में छोटा हो तो , पार्टनर द्वारा मुख मैथुन में नारी को अतिरिक्त संतुष्टि और आनन्द देना वाला भी हो जाता है .... इसके विपरीत इसका ना होने से योनी में इक तह का अपना आकर्षण होता है
कितनी सारी योनियों में कंही किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कंही सिकुड़ा सा होता , कंही लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कंही वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को इक सुरक्षा कवर सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचे या हलके दाने उनके प्रति इक अजीब सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति इक अजीब सी कशिश भी पैदा करती ...
कहने का तात्पर्य यह है की , किसी नारी का चेहरा खुबसूरत, सांचे में ढला बदन और कामुक अदाए हो और उसकी योनी भी सुंदर और आकर्षित हो ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता , कई बार नारी की लापरवाही उनकी योनी में अनजानी बदसूरती भी उड़ेल देती ....जबकि वह नारी हर लिहाज से अनुपम सुन्दरी होती है
दोस्तो कहते हैं शादी के पाँच छः साल तो मस्ती में गुजर जाते है पर बाद में थोड़ी नीरसता आने लगती है इसी नीरसता को किस तरह मैने और मेरे दोस्त समीर ने दूर किया यही इस कहानी का ताना बाना है तो दोस्तो ये सुनिए कहानी समीर की ज़ुबानी ..................................
मैं हूँ समीर । आज मेरी ये सच्ची कहानी आप लोगो से शेयर कर रहा हूँ वात्स्यान ने कामसूत्र में योनी को नारी के शारीरिक आकर के हिसाब से ४ तरह से लिखा , जैसे शशक (खरोगश ), हिरनी , घोड़ी(अश्वनी) और हथनी ...शायद उस वक़्त वात्स्यान के दिमाग में सिर्फ योनी का आकर ही इक महत्वपूर्ण कारक था , इसलिए उसने योनी के आकर के हिसाब से नारी की वयख्या कर दी ...की सबसे छोटे कद की खरोगश और सबसे बड़े कद की हथनी ...और तो और उनके सफल और आनंदायक सम्भोग के लिए उन जैसे साथी का चयन भी बता दिया ...
पर मेरे अनुभव ने नारी की योनी को इन सबसे अलग इक नयी तरीके की वयख्या दी और योनी की सुन्दरता का इक पैमाना बनाया ...मेरे अनुभव ने यह समझाया की किसी भी नारी या पुरुष के शरीर के अनुपात में उसका गुप्तांग हो ऐसा जरुरी नहीं है , इसलिए किसी भारी भरकम नारी जो वात्स्यान के हिसाब से हथनी वाली श्रेणी में आती है की योनी का आकर भी बड़ा होगा और उसे सम्भोग में अपने जैसे हाथी टाइप बड़े आदमी से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी , यह भी इक मिथ है ...
मेने उस दिन और बाद में भी जेंटलमैन क्लब में नारी की कई तरह की योनियाँ देखि , कई बार तो अच्छे लम्बे कद की लड़की की योनी बहुत छोटी और सिकुड़ी सी होती , इसके विपरीत इक छोटे कद की लड़की की योनी बड़े आकर में फैली सी होती और दोनों के योनी मार्ग भी उनकी योनियों के आकर अनुपात के हिसाब से ना होकर कभी बहुत ज्यादा खुले या तंग होते ...
मेने नारी की योनी को इक ऐसी श्रेणी में रखा जिसमे योनी की तुलना हम किसी संकरी सी गली के आगे लगे दरवाजे से कर सकते है ...इसे ऐसा समझे जैसे किसी घर के आगे इक दरवाजा है जिसमे दो पल्ले(कपाट) लगे है यानी दो किवाड़ वाला दरवाजा है ....अब यह उस दरवाजे की हालत पे निर्भर करता है की
1.दोनों कपाट इस तरह से भिड़े है की वह दोनों जुड़ कर लगभग बंद जैसे लगते है और उन दोनों कपाट के जुड़ने से दोनों के बीच में हलकी सी इक झिरी सी दिखती हो या
२. दोनों कपाट अंदर की तरफ थोड़े से खुले है, जैसे किसी ने दोनों दरवाजो को घर के अंदर धकेल का हल्का सा खोल कर छोड़ दिया है या
3. दोनों कपाट बहार की तरफ ऐसे खुले है जैसे किसी ने हड़बड़ी में दरवाजे बहार की तरफ खोल कर छोड़ दिए है या
४. इक कपाट के ऊपर दूसरा कपाट ऐसे सा चढ़ा , जैसे दरवाजा बंद करते वक़्त किसी ने अनाड़ीपन में इक कपाट पे दूसरा कपाट लगा कर छोड़ भर दिया है
मेरे अनुभव ने नारी की योनी को उनकी सुन्दरता , आकर और शारीरिक आकर के हिसाब से देखा और परखा , क्योकि नारी की योनी किसी विशेष समुदाय , देश ,रंग और जीन्स के हिसाब से अपना आकर लेती है और योनी की सुन्दरता और विशेषता या ऐसी नारी के प्रति पुरुषो में इच्छा भी उसके देश में उसी हिसाब से मापी भी जाति है ...
इन चारो श्रेणी की नारी में योनी का आकार बड़ा या छोटा कुछ भी हो सकता है और किसी व्यक्ति विशेस का अपनी योनी को स्वच्छ और साफ़ सुथरा रखना भी , योनी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है ...एशियाई देश की अधिकतर नारी अपनी योनी के आसपास छोटे बाल रखती है और जापान में ऐसी योनी को बहुत आकर्षक भी माना जाता है ...इसके विपरीत योरोप के देश में अधिकतर नारी क्लीन शेव योनी रखती है या योनी के पास बाल की इक पतली लाइन सी और ऐसी योनी पुरुषो के आकर्षण का केद्र बिंदु भी होती है .....किसी पुरुष को नारी की सुनहरी या सांवली योनी में तो किसी को हलकी गुलाबी योनी में आकर्षण लगता है
मेने जितनी भी तरह की योनी को देखा और परखा , तो लगा योनी की तुलना होठो से की जा सकती है मुझे वह योनी सबसे ज्यादा आकर्षक लगी जिसमे दोनों कपाट जुड़ कर बंद से प्रतीत होते है , क्योकि यह ऐसी प्रतीत होती है जिसे किसी खुबसूरत लड़की के पतले होठ इक लिपस्टिक से सज कर जुड़े से हो , पर होठ अगर ज्यादा मोटे हो यां लटके हो तो उनमे इक तरह की बदसूरती सी आ जाति है , हो सकता है किसी को उस तह के होठ पसंद हो , क्योकि अभी कुछ दिन पहले फ़िल्मी हेरोइनो में मोटे होठो का फैशन बड़े जोरो पर था ...
मेरे अनुभव से किसी योनी के मार्ग में आगे की तरफ लटकी छोटी सी खाल जिसे मेडिकल टर्म में लाबिया मिनोर्मा (लघु कोष्ठ) बोलते है का ज्यादा फैला होना योनी की सुन्दरता को कम कर देता है ...उसका बहुत कम होना भी योनी की सुन्दरता को कम करता है ...अगर यह हद से ज्यादा हो तो सम्भोग में नारी को अनचाही दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है , पर इसके विपरीत अगर यह थोडा आकर में छोटा हो तो , पार्टनर द्वारा मुख मैथुन में नारी को अतिरिक्त संतुष्टि और आनन्द देना वाला भी हो जाता है .... इसके विपरीत इसका ना होने से योनी में इक तह का अपना आकर्षण होता है
कितनी सारी योनियों में कंही किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कंही सिकुड़ा सा होता , कंही लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कंही वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को इक सुरक्षा कवर सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचे या हलके दाने उनके प्रति इक अजीब सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति इक अजीब सी कशिश भी पैदा करती ...
कहने का तात्पर्य यह है की , किसी नारी का चेहरा खुबसूरत, सांचे में ढला बदन और कामुक अदाए हो और उसकी योनी भी सुंदर और आकर्षित हो ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता , कई बार नारी की लापरवाही उनकी योनी में अनजानी बदसूरती भी उड़ेल देती ....जबकि वह नारी हर लिहाज से अनुपम सुन्दरी होती है