S
StoryPublisher
Guest
अजय घर पर सो रहा था और मानव ,दीपाली खेत घूम रहे थे...............बेचारी हर्षा ऐसे ही अपना टाइम पास कर रही थी..रास्ते मे घर वापस जा ही रही थी कि अचानक उसे आभास हुआ कि पीछे से कोई बोहोत तेज़ी से दौड़ कर उसके करीब आ रहा है..हर्षा ने पीछे मूड कर देखा तो गाओ का बड़ा भारी सा बैल उसके पास तेज़ी से दौड़ते हुए आ रहा था...हर्षा ने उपेर लाल सुर्ख रंग का टॉप पहना था..उसकी हवाइयाँ उड़ गई और सारी स्वीट्स नीचे गिर गयीं ..हर्षा अपने होश खो बैठी थी..और ज़ोर ज़ोर से बदहवास सी रोने लगी..बैल उसके पास आ चुका था और अपने मूह नीचे बैठी हर्षा के घुटनो पर मर रहा था....................गाओ का देसी बैल जैसे हर्षा ने ज़िंदगी मे नहीं देखा था..उसके लिए वो यमराज से कम नहीं था..अचानक एक नौजवान ने बैल की डोर को थाम लिया और उसे पीछे की और घसीट लिया..वो वहाँ का लड़का हरिसिंघ था..प्यार से लोग उसे हरिया बुलाते थे ...देखने मे एक दम सख़्त था..कुर्ता पाज़मा पहने और सिर पर पगड़ी बाँधे उँचा पूरा दिखाई देने वाला आकर्षक मर्द था उसकी उम्र ज़्यादा नहीं थी..हर्षा से लग भाग थोड़ा ही बड़ा था...उसने हर्षा को देखा हर्षा को तो जैसे सुध ही नहीं थी ..खौफनाक घटना से वो घबरा चुकी थी आँखों मे सिर्फ़ आँसू थे ..ऐसा लग रहा था कि अब हर्षा मारे ख़ौफ़ के बेहोश होने वाली है.....हरिया ने उसे देखा और उसे उठाने की कोशिश करने लगा ..वहाँ से बैल का मालिक दौड़ कर हाफ्ते हुए आया"का हुआ भैया कछु गड़बड़ तो नाही हो गयी ना हमरे बैल से उ का है कि ये भाग गया था सुक्रिया आपने पकड़ लिया"
हरिया"तो समहालो ना अपने बैल को .. किसी की जान ही निकलवाकर दम लोगे..अभी हम ना आते तो तुम्हारा बैल ए छ्छोकरी को मार ही ना देता बड़े आए बैल समहालने वाले"हरिया की आँखों मे गुस्से का सैलाब था
बैल का मालिक"अरीय बीबीजी हम का माफ़ केरदीजिए हम ऐसा ना करेंगे कभी ..हमेशा इसको साथ रखेंगे आप चुप हो जाइए"कहकर वो वहाँ से चला गया लेकिन हर्षा तो जैसे ख़ौफ़ के मारे ही मारी जा रही थी..उसे अपने दोस्तो के पास जाना था ..हरिया ने उस रोती हुई शहेर की मेम को देखा तो जैसे वो खो ही गया था...."का सचमुच ऐसे भी कपड़े पेहेन्ते हैं लोग और इतने खूबसूरत होते हैं"सोच रहा था ..हरिया उसके पास बैठ गया "बीबीजी आप ठीक हैं मत रोइए देखिए ओ चला गिया है..चुप हो जाइए"
हर्षा की तो हिचकी पर हिचकी बँध रही थी रोना तो जैसे अब बंद ही नहीं हो रहा था..इतना ख़तरनाक जानवर आख़िर ज़िंदगी मे पहेली बार उसके इतने करीब था सोच सोच कर हर्षा का दम निकाला जा रहा था..
हरिया से अब उसे चुप नहीं कराया जा रहा था उसे मालूम था कि पास वाले घर मे गुड्डू भैया के यहाँ सहर से कुछ लोग घूमने आए हैं..उसने हर्षा को अपनी बाहों में उठा लिया और चल दिया उसे छ्चोड़ने ...हरिया को तो जैसे लगा कि वो फूल सी नाज़ुक गुड़िया को उठाकेर ले जा रहा है..उसके हाथ हर्षा की टाँगों के नीचे और कमर के नीचे थे ...ज़्यादा ज़ोर से भी अगर हाथों को दबाया तो फूल सी गुड़िया टूट कर बिखर जाएगी...हर्षा की झाघों का स्पर्श मुलायम था और कमर एकदम पतली सी थी..उसे नहीं मालूम था के कॉन उसे उठा कर लाया था वो तो बस सदमे में ही थी...
हरिया"तो समहालो ना अपने बैल को .. किसी की जान ही निकलवाकर दम लोगे..अभी हम ना आते तो तुम्हारा बैल ए छ्छोकरी को मार ही ना देता बड़े आए बैल समहालने वाले"हरिया की आँखों मे गुस्से का सैलाब था
बैल का मालिक"अरीय बीबीजी हम का माफ़ केरदीजिए हम ऐसा ना करेंगे कभी ..हमेशा इसको साथ रखेंगे आप चुप हो जाइए"कहकर वो वहाँ से चला गया लेकिन हर्षा तो जैसे ख़ौफ़ के मारे ही मारी जा रही थी..उसे अपने दोस्तो के पास जाना था ..हरिया ने उस रोती हुई शहेर की मेम को देखा तो जैसे वो खो ही गया था...."का सचमुच ऐसे भी कपड़े पेहेन्ते हैं लोग और इतने खूबसूरत होते हैं"सोच रहा था ..हरिया उसके पास बैठ गया "बीबीजी आप ठीक हैं मत रोइए देखिए ओ चला गिया है..चुप हो जाइए"
हर्षा की तो हिचकी पर हिचकी बँध रही थी रोना तो जैसे अब बंद ही नहीं हो रहा था..इतना ख़तरनाक जानवर आख़िर ज़िंदगी मे पहेली बार उसके इतने करीब था सोच सोच कर हर्षा का दम निकाला जा रहा था..
हरिया से अब उसे चुप नहीं कराया जा रहा था उसे मालूम था कि पास वाले घर मे गुड्डू भैया के यहाँ सहर से कुछ लोग घूमने आए हैं..उसने हर्षा को अपनी बाहों में उठा लिया और चल दिया उसे छ्चोड़ने ...हरिया को तो जैसे लगा कि वो फूल सी नाज़ुक गुड़िया को उठाकेर ले जा रहा है..उसके हाथ हर्षा की टाँगों के नीचे और कमर के नीचे थे ...ज़्यादा ज़ोर से भी अगर हाथों को दबाया तो फूल सी गुड़िया टूट कर बिखर जाएगी...हर्षा की झाघों का स्पर्श मुलायम था और कमर एकदम पतली सी थी..उसे नहीं मालूम था के कॉन उसे उठा कर लाया था वो तो बस सदमे में ही थी...