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कमसिन शालिनी की सील complete

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कमसिन शालिनी की सील

यह कहानी शालिनी जैन की है जो पालम पुर में मेरे ही मोहल्ले में रहती थी.वैसे तो हमारे मोहल्ले में एक से बढ़ कर एक भरपूर जवानियाँ और खिलती कमसिन कलियाँ हैं जिनसे मोहल्ले में रौनक, चहल पहल बनी रहती है, जैसे किसी बाग़ में रंग बिरंगे फूल खिले रहते हैं और तितलियाँ मंडराती रहती हैं और सबको लुभाती रहती हैं. आप सबकी तरह मैं भी हाड़ मांस का बना साधारण इंसान हूँ और ये हुस्न की परियाँ मुझे भी लुभाती रहती हैं और जिनके नंगे जिस्म को अपने ख्यालों में चोदता हुआ न जाने कितनी बार मुठ मार चूका हूँ.

पर बात उन सब की नहीं… शालिनी जैन की है यहाँ. शालिनी जैन जो मेरे ही सामने पैदा हुई थी, खेलते खेलते कब बड़ी हुई और वो नाक बहाती मैली कुचैली सी लड़की कब ‘माल’ में परिवर्तित होती चली गई… समय का कुछ पता ही नहीं चला.

बारहवीं कक्षा तक आते आते वो हाहाकारी हुस्न की मलिका में तबदील हो चुकी थी जिसके मदमस्त यौवन के किस्से गली चौराहों में चलने लगे थे.

साइकिल से स्कूल जाती तो अपने सीने के गदराये हुये अवयवों को निष्ठा पूर्वक दुपट्टे से ढक छुपा लेती लेकिन वो कहाँ छुपने वाले थे, किसी के भी कभी नहीं छुपे, सड़क पर जरा सा ऊंचा नीचा होने से साइकिल जम्प लेती और वो कपोत ऊंची उड़ान भरने लगते.

कोई देख रहा होता तो वो झेंप कर अपना दुपट्टा फिर से यथास्थान कर लेती और अगले को कनखियों से घायल करती हुई जल्दी जल्दी पैडल मारती हुई निकल लेती.

धीरे धीरे उसके मदमस्त यौवन की महक चहूँ ओर फैल गई और उसके इन्तजार में भँवरे टाइप के लौंडे लपाड़े रोमियो गली के मोड़ पर खड़े हो उसे रिझाने की प्रतिस्पर्धा करने लगे.

शालिनी साइकिल से स्कूल और कोचिंग जाती तो कभी कभी मुझसे भी आमना सामना हो जाता. मैं तो बस मुग्ध भाव से उसकी देह यष्टि को निहारता रह जाता. मोहल्ले का ही होने के नाते वो मुझे पहचान कर ‘नमस्ते अंकल जी’ कहती और उसके मोतियों से दांत और हंसती हुई आँखें खिल उठतीं.

‘नमस्ते स्वीटी…’ मैं भी तत्परता से जवाब देता और मेरी नजर उसके सीने के उभारों का जायजा लेती हुई उसकी पुष्ट जंघाओं तक फिसल जाती.

‘अभी से छुरियाँ चलाना सीख गई ये तो!’ मैं मन ही मन सोचता रह जाता.

 
धीरे धीरे शालिनी मेरे दिलो दिमाग पर छाती चली गई और मैं अक्सर उसके नाम की मुठ मारने लगा और कई बार अपनी बीवी को चोदते हुए शालिनी को चोदने का ख्याल मन में लाता और आँख मूंद कर उसे अपने हिसाब से तरह तरह से चोदता जैसे :

‘शालिनी मेरी जान… ये लो मेरा पूरा लंड’ यह सोच कर अपनी बीवी की ढीली ढाली नदिया सी बहती बुर में पूरे दम से धक्के मारता बदले में उसकी इंडिया गेट जैसी बुर में से छपाक छपाक फच फच की प्रतिध्वनि आती और मेरी अर्धांगिनी अपनी कमर उछाल उछाल के मनोयोग से मेरे लंड को प्रत्युत्तर देती.

‘स्वीटी बेटा, कितनी टाइट कसी हुई चूत है तेरी!’ मैं ऐसे सोचता हुआ मन ही मन शालिनी को चूमते हुए अपनी बीवी को चोदता और मेरी बीवी मेरी चुदाई से निहाल तृप्त हो उठती और मुझे चूम चूम के मुझ पे न्यौछावर हो जाती. अब उस बेचारी को क्या पता रहता कि मेरे मन में क्या क्या चलता रहता था और मेरी वो मर्दानगी किसकी खातिर थी.

ज़िन्दगी यूँ ही गुजर रही थी और मुझे कोई शिकायत या चाहत भी नहीं थी इससे ज्यादा क्योंकि मेरी गिनती अंकल टाइप के लोगों में होने लगी थी, हालांकि मेरी उमर उस समय कोई चवालीस पैंतालीस की ही रही होगी, दूसरी बात लड़की पटाने के लिए छिछोरों जैसी हरकतें करना मेरे स्वभाव में कभी नहीं रहा. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि मेरी मान प्रतिष्ठा मोहल्ले में बहुत अच्छी थी अतः मैं किसी भी तरह की कोई भी रिस्क लेने के खिलाफ था या स्थिति में ही नहीं था तो मैं शालिनी का चक्षु चोदन करके और उसे ख्यालों में लाकर अपनी बीवी को चोद चोद कर या मुठ मार कर ही खुश था.

दिन यूं ही गुजरते रहे.

एक दिन की बात, मोहल्ले में एक लड़के की शादी हुई. रिसेप्शन की पार्टी में जाना पड़ा. वैसे मैं शादी ब्याह की पार्टियों में जाने से मैं बचता हूँ क्योंकि आजकल गिद्ध भोज का प्रचलन है. सैकड़ों की भीड़ में अपनी प्लेट लिये खाना ढूँढना और धक्के खाते खाते खाना खाना मुझे पसन्द नहीं आता. जहाँ तक संभव होता है मैं अपने बीवी बच्चों को ही भेज देता हूँ. हाँ, कोई अपना बेहद ख़ास हो तो

बात अलग है.

तो उस पार्टी में मैं गया, सबसे हाय हेलो के बाद मैंने खाना शुरू किया तभी मुझे शालिनी दिखी. वो किसी लड़की से बतियाती हुई खाना खा रही थी. शालिनी को मैंने ज्यादातर कान्वेंट स्कूल की ड्रेस में ही देखा था, वही घुटनों तक के सफ़ेद मोज़े, घुटनों से चार अंगुल ऊपर नीली सफ़ेद चौकड़ी वाली स्कर्ट और उसके ऊपर सफ़ेद शर्ट और गले में लाल टाई…

लेकिन आज वो स्काई ब्लू जींस और नारंगी टॉप पहने थी जिसमें से उसके मम्मों का चित्ताकर्षक उभार सभी के आकर्षण का केंद्र था. नितम्बों में कसी हुई जीन्स उसकी जाँघों का भूगोल बहुत खूबसूरती से दिखला रही थी.

मेरे मन ने उड़ान भरी और उसकी चूत के उभरे हुए त्रिभुज की कल्पना की.

मैं अपनी प्लेट लेकर एक तरफ कोने में खड़ा होकर खाने लगा जहाँ से शालिनी के रूप के दर्शन और उसका चक्षु चोदन भी साथ ही करता जा रहा था. फिर एक बार उसकी नज़र मुझसे मिली और उसने सिर झुका कर मेरा अभिवादन किया. मौके का फायदा उठाते हए मैंने भी उसके पास जाकर नमस्ते का जवाब दिया.

फिर हम लोग सामान्य बातें करने लगे. खाना खाते खाते बीच बीच में उसकी क्लीवेज का नजारा भी हो जाता था. उसके गले में पहनी हुई पतली सी सोने की चेन उसके मम्मों के बीच जाकर छुप गई थी.

 


मैं प्लेट से पुलाव खाता हुआ मन ही मन खयाली पुलाव पकाता हुआ बार बार उसकी जाँघों के जोड़ को निहार रहा था जहाँ उसकी जीन्स के नीचे पेंटी होगी और उसके भीतर रोमावली से आच्छादित उसकी कुंवारी योनि या बुर या चूत कुछ भी कह लो, होगी.

‘कहाँ ध्यान है अंकल जी. बड़ी गहरी सोच में हो?’ शालिनी ने मुझे टोका.

‘कुछ ख़ास नहीं बिटिया, कुछ फ्यूचर की प्लानिंग कर रहा था.’ मैंने खुद को थोड़ा गंभीर जताने का जतन किया.

‘ओके अंकल जी, ये अच्छी बात है. मेरी शुभकामनाएं!’ वो हंस कर बोली.

अब उसे क्या अंदाजा था कि मैं उसकी चूत के ख्यालों में खोया उसे देखने, चूमने, चाटने और चोदने की प्लानिंग कर रहा था; और वो मुझे इसी के लिये विश कर रही थी.

‘थैंक्स शालिनी, सो नाईस ऑफ़ यू!’ मैंने प्रत्यक्षतः मुस्कुरा के कहा.

बातचीत का सिलसिला यहीं रोकना पड़ा क्योंकि मेरा कोई परिचित हाय हेल्लो करने आ पहुँचा. मैंने जैसे तैसे उससे पिंड छुड़ाया. इसी बीच शालिनी की सहेली भी अपना खाना खत्म कर बाय करके निकल ली.

अब मैं और शालिनी आमने सामने थे.

मैंने उसे बड़े गौर से देखा क्योंकि इतने नजदीक से देखने का मौका पहले कभी नहीं मिला था. वैसे भी मोहल्ले की कोई कन्या जिसका नाम ले ले के हम सब मुठ मारते हैं या अपनी बीवी को उसी कामिनी का ध्यान लगा के चोदते हैं तो उसे इतने नजदीक से देखने बतियाने का मौका सालों में ही कभी आ पाता है.

अतः मैंने इस मौके को ‘वन्स इन द लाइफ टाइम अपोर्चुनिटी’ मान कर इस्तेमाल करने का फैसला किया. लेकिन कुछ कहने या बात करने का ओर छोर समझ नहीं आ रहा था.

मैंने शालिनी की तरफ प्यार से देखा वो तो अपनी प्लेट से दही बड़े खाने में मगन थी.

मैंने पहले जब भी उसे देखा था तो पोनी टेल स्टाइल में बंधे बाल और वही स्कूल की यूनिफार्म लेकिन आज उसका नजारा ही अलग था. आज उसके बाल खुले खुले घने घनेरे कन्धों और पीठ पर बिछे पड़े थे और उसके जिस्म से एक मस्त मस्त भीनी भीनी सुगंध के झोंके रह रह के उठ रहे थे. जरूर उसने कोई परफ्यूम लगा रखी थी. उसके चेहरे पर बहुत ही हल्का सा मेकअप था लेकिन उसके गालों पर मुहाँसों ने दस्तक देनी शुरू कर दी थी और हल्के हल्के चिह्न उसके गालों पर उभर आये थे.

यह मेरे लिए अच्छा संकेत था. लड़की के मुंह पर मुहाँसे आने का मतलब वो चुदासी होने लगी है. उसकी चूत को लंड से चुदने की चुदास सताने लगी है. उसके इसी वीक पॉइंट को मैंने एनकैश करने का मन बना लिया और उसे नजर गड़ा कर देखने लगा.

वो तो अपने दही बड़ों को चटखारे ले ले के खा रही थी, उसे क्या पता कि मेरे तन मन में क्या चटखारे चल रहे थे. मैं उसे लगातार देखे जा रहा था मुझे पता था कि अभी कुछ ही देर बाद उसकी नज़र मेरी तरफ उठेगी.

हुआ भी वैसा ही…

‘सॉरी अंकल जी, दही बड़े इतने टेस्टी हैं कि मैं तो भूल ही गई थी कि आप मुझसे बात कर रहे थे.’

‘अर्रे… आप तो खाली प्लेट लिए खड़े हो. आपके लिए लेके आऊँ दही बड़े?’ शालिनी बड़ी मासूमियत से बोली.

‘चल, ले आ!’ मैंने कहा.

 
शालिनी ने मेरे हाथ से खाली प्लेट ले के पास के डब्बे में डाल दी और हिरनी जैसे कुलांचे भरती हुई चल दी मैं पीछे से उसके नितम्बों का उतार चढ़ाव देखता रह गया.

दो तीन मिनट बाद ही उसने चाट के स्टाल से दही बड़े ला कर मुझे दे दिए.

‘थैंक्स शालिनी…’ मैंने कहा और दही बड़े खाने लगा साथ में मैं शालिनी को गहरी नज़र से देखता जा रहा था.

शालिनी ने मेरी चुभती नज़र से कुछ विचलित हुई- ऐसे गौर से क्या देख रहे हो अंकल जी?

‘कुछ नहीं शालिनी, तुम बहुत सुन्दर अच्छी हो लेकिन…’ मैंने उसकी तारीफ़ की.

‘लेकिन क्या अंकल जी? आप कहते कहते रुक क्यों गये?’

‘शालिनी, तुम्हारे चेहरे पर ये फुंसियाँ सी कैसी हैं. ये अच्छी नहीं लगतीं, कोई मेडिसिन क्यों नहीं ले लेती?’

‘अंकल जी, ये फुंसियाँ नहीं मुहाँसे है. बहुत सी मेडिसिन्स ट्राई की, डॉक्टर को भी दिखाया, टीवी पर जितने एड आते हैं सब के सब ट्राई कर के देख लिए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ!’ वो बड़े उदास स्वर में बोली.

अच्छा दिखना सुन्दर दिखना हर लड़की की इच्छा होती है और मैंने शालिनी की कमजोर नस पर हाथ रख दिया था और मुझे यकीन था कि अगर मैंने सब्र से काम लिया तो उसकी चूत के दर्शन तो पक्का हो ही जायेंगे और हो सकता है कि मेरा काला कलूटा मूसल जैसा लंड भी उसकी गोरी गुलाबी मुलायम कुंवारी चूत की सील तोड़ने में कामयाब हो जाए!

‘शालिनी, इन मुहाँसों का इलाज नैचुरोपेथी या आयुर्वेद से ही संभव हैं. इन अंग्रेजी दवाइयों से कुछ नहीं होगा, उल्टे इनके साइड इफेक्ट्स बहुत ज्यादा होते हैं.’ मैंने बड़ी गंभीरता से कहा.

‘अच्छा. अंकल जी, ये नेचुरोपेथी क्या होती है?’

‘नेचुरोपेथी का मतलब प्राकृतिक चिकित्सा. किसी रोग या कष्ट का कारण समझ कर उस कारण का निदान करना और सहज प्राकृतिक जीवन जीना नेचुरोपेथी कहलाता है. जब हमारे भीतर कोई गड़बड़ हो रही होती है, शरीर के हारमोंस ठीक से बन नहीं पाते या हम अपने शरीर के सभी अंगों का समुचित इस्तेमाल नहीं करते अथवा अन्य प्रकार के रस, द्रव जो शरीर से बाहर निकल जाने चाहियें वो निकल नहीं पाते तो ये सब लक्षण प्रकट होते हैं. जैसे शरीर पर फुंसियाँ होना, मुहाँसे हो जाना, मुंह में छाले हो जाना, पेट दर्द हो जाना… ये सब सिम्पटम्स हैं, लक्षण हैं स्वयं में कोई रोग नहीं हैं ये तो सिर्फ सिग्नल्स हैं कि शरीर में रोग कहीं भीतर है और उसका उपचार इन पर दवाई लगाने से नहीं बल्कि भीतर की जरूरतों को पूरा करने से ही होगा!’ मैंने उसे लम्बा चौड़ा व्याख्यान दे डाला.

मेरी बातों का उस पर फ़ौरन असर हुआ, उसके चेहरे के भाव बदल गये, वो बात को गहराई से समझने का प्रयास करने लगी. यही मैं चाहता था कि उसके दिमाग में यह बात बैठ जाए कि मुहाँसे मिटाने का पक्का इलाज कोई लंड ही कर सकता है चूत में घुस के.

‘अंकल जी, मैं आपकी बात ठीक से समझ नही पा रही हूँ. थोड़ा और समझा के कहिये न प्लीज!’ इस बार वो बड़ी कोमल और धीमी आवाज में बोली.

‘देखो शालिनी, जब बात चल ही पड़ी है तो मैं तुम्हें सब डिटेल्स में समझा दूंगा लेकिन प्रॉमिस करो कि मेरी किसी बात का बुरा नहीं मानोगी?’ मैंने उसे प्यार से कहा.

‘प्रॉमिस अंकल जी… मैं किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी. आप जो भी कहोगे मेरी भलाई के लिए ही तो कहोगे ना!’ वो विश्वास से बोली.

चिड़िया मेरे जाल में फंसती नज़र आ रही थी. अगर मैंने आगे का खेल ठीक से खेला तो पक्का वो मेरे लंड के नीचे होगी, बहुत जल्दी!’ मैंने मन ही मन खुश होते हुए सोचा.

‘तो फिर ठीक है. चलो हम लोग वहाँ चेयर्स पर बैठ के बात करेंगे ठीक से!’ मैंने कहा और अपनी दही बड़े की खाली प्लेट पास की डस्टबिन में डाल दी.

 
‘कॉफ़ी पियोगे अंकल जी?’ उसने पूछा.

मैंने हाँ में सर हिलाया.

फिर उसने मुझे कहा कि वो कॉफ़ी ले के आ रही है. मैं दूर के कोने में दो कुर्सियाँ रख के बैठ गया.

जल्दी ही शालिनी भी कॉफ़ी ले के आ गई और मुझे एक कप पकड़ा दिया और मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गई.

‘हाँ, अंकल जी. अब बताओ ठीक से?’ वो थोड़ा व्यग्र स्वर में बोली.

‘शालिनी, एक बात बताओ. तुमने किसी और लड़की के मुंह पर मुहाँसे देखे हैं पहले?’ मैंने सवाल किया.

‘हाँ अंकल जी, देखे हैं न… बहुत सारी लड़कियों के देखे हैं. मेरी फ्रेंड्स, रिश्तेदार वगैरह बहुत गर्ल्स के देखे हैं!’ वो बोली.

‘तो ये भी देखा होगा कि उन लोगों ने बहुत इलाज किया होगा लेकिन मुहाँसे दूर नहीं हुए होंगे लेकिन जैसे ही उनकी शादी हुई होगी, मुहाँसे गायब हो गये होंगे और चेहरा फूल सा खिल गया होगा.’ मैंने कॉफ़ी का घूंट भरते हुए कहा.

‘हाँ अंकल जी, सच कह रहे हो आप, देखा है मैंने ऐसा. मुझे अपनी कजिन सिस्टर की याद है. उसे भी बहुत मुहाँसे थे बड़े बड़े बहुत भद्दे दिखते थे लेकिन शादी के बाद तो वो पहचान में नहीं आ रही थी, उसका फेस इतना सुन्दर और गाल इतने मस्त चिकने हो गये थे.’ वो जल्दी से बोली.

‘तो फिर सोचो कि शादी के बाद ऐसा क्या होता है जिसके असर से मुहाँसे चले जाते हैं और स्किन चमकने दमकने लगती है?’ मैंने कहा.

मेरी बात का अर्थ समझ के उसके चेहरे पर लाज की लाली दौड़ गई और उसने सर झुका दिया. वो बहुत देर तक सर झुकाये सोचती रही.

अंकल जी, इसका मतलब मेरे मुहाँसे भी शादी के बाद ही जायेंगे? पर मेरी उमर तो अभी बहुत छोटी है मेरी शादी तो कई सालों बाद होगी!’ वो चिंतित स्वर में बोली.

‘अब जो है सो है जो सच है वो मैंने तुम्हें बता दिया!’ मैंने कहा.

‘तो अंकल जी शादी की सिवाय और कोई उपाय नहीं है?’ उसने बेचैनी से पूछा.

‘शालिनी, मैंने यह नहीं कहा कि शादी ही एकमात्र उपाय है. मेरा कहने का मतलब समझने की कोशिश करो.’ मैंने उसे समझाते हुए कहा.

‘अंकल जी, ठीक से कहो न साफ़ साफ़ कि और क्या उपाय है?’ वो बोली.

‘शालिनी, इस विषय को कैसे समझाऊं मैं समझ नहीं पा रहा. अब तुम छोटी बच्ची नहीं रही, मेरी बात का मतलब तुम भी समझती होगी.’ मैंने कहा.

‘हाँ अंकल जी, आपके कहने का अर्थ मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा है लेकिन मुहाँसे चले जाने का कारण समझ नहीं आ रहा. आप अच्छे से समझा कर कहिये न?’ वो सर झुकाये हुए बोली.

‘ठीक है, बताता हूँ, लेकिन वादा करो कि मेरी किसी बात का बुरा नहीं मानोगी और जो बातें हमारे बीच होंगी उनके बारे में तुम कभी भी किसी को नहीं बताओगी?’ मैंने थोड़ा जोर देकर कहा.

‘ओके अंकल जी, आप सब कुछ खुल के कहिये, मैं प्रोमिस करती हूँ कि इस बारे में कभी भी किसी से कुछ नहीं कहूँगी.’ वो बोली.

 


‘फिर ठीक है, देखो शालिनी, मेरे कहने का मतलब है कि शादी के बाद पति पत्नी प्राकृतिक रूप से मिलते हैं और सेक्स क्रिया करते हैं तो शरीर के जो अंग शिथिल पड़े रहते हैं पति-पत्नी के शारीरिक मिलन से उनमें रक्त रस का संचार ठीक ढंग से होने लगता है, स्त्री पुरुष की कामेन्द्रियों के परस्पर घर्षण से शरीर में आनन्द की हिलोरें उठतीं हैं और काम रस का विसर्जन या स्खलन होता है जिससे चरमानन्द की प्राप्ति होती है. शरीर में स्फूर्ति और उमंग भर जाती है. सांसों के उतार चढ़ाव के साथ साथ पूरे बदन का रक्त संचार तीव्रतम होकर सामान्य होने लगता है. पसीना निकल जाता है. इससे शरीर के हारमोन्स ठीक से काम करने लगते हैं. और कई मानसिक और शारीरिक बीमारियाँ स्वतः ही ठीक हो जाती हैं.’ मैंने उसे समझाया.

‘थैंक्यू अंकल जी, यह उपाय मेरे लिए नहीं हैं. बने रहने दो मुहाँसे… कौन से मेरे अकेले के हैं. सभी के होते हैं. जब इन्हें जाना होगा चले जायेंगे अपने आप ही. अब मैं जाती हूँ. मम्मी इन्तजार करती होंगी.’ वो बोली और जाने के लिए खड़ी हो गई.

चिड़िया हाथ से निकलते देख मैंने एक बार और कोशिश की. आखिर मोहल्ले की जिस कन्या पर आप हाथ फेरना चाहते हैं या हाथ साफ़ करना चाहते हैं उससे इतनी नजदीकी, इतने अपनेपन से बात करने का मौका बार बार तो नहीं मिलता न… हज़ारों बार दूर दूर से उसकी उफनती जवानी पर नज़रें गड़ा कर आँखे सेंकने के बाद यह मौका हासिल होता है.

‘अरे दो मिनट और बैठ ना. ये क्या बात हुई… अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई और तुम जा रही हो?’

‘अंकल जी, मेरी कोचिंग जाने का टाइम हो गया, मुझे जाना है अब. और हाँ आपको थैंक्स वो सब बताने के लिए. मैं वो सेक्स क्रिया वाले उपाय नहीं कर सकूँगी!’ वो बोली.

‘पगली है तू एकदम से… अरे शालिनी बिटिया मैं कौन सा सेक्स क्रिया करने की बात कर रहा हूँ, अभी जो मैंने कहा उसके अलावा और भी तो उपाय हैं न… एक तरह की प्रोब्लम का इलाज करने के कई एक तरीके होते हैं.’ मैंने उसे फिर से समझाया.

‘ठीक है अंकल जी, अब जो भी कहना हो लास्ट टाइम बोल दो जल्दी. मेरा कोचिंग का टाइम हो गया, सर जी डांटेंगे अगर लेट हो गई तो!’ वो जल्दी से बोली.

‘ठीक है शालिनी बिटिया, पहले मुझसे एक बार और प्रॉमिस करो कि जो मैं बताऊंगा वो बातें कभी भी किसी से भी नहीं ओपन करोगी?’

‘ओफ्फो, अंकल जी आप भी ना… अरे वो प्रॉमिस तो मैं पहले ही कर चुकी हूँ. बाई गॉड फिर से रिपीट करती हूँ कि इन बातों को कभी भी किसी से नहीं कहूँगी… ओके?’

‘ओके ओके. अच्छा सुन. एक उपाय और भी है लेकिन वो मैं कह नहीं सकता. दिखा सकता हूँ. अगर तुझे देखना हो तो एक वीडियो है मेरे फोन में, कहो तो ट्रान्सफर कर दूं तेरे फोन में?’

‘ठीक है भेज दीजिये!’ वो जल्दी से बोली.

‘तुम अपना शेयर इट ऑन करो, मैं सेंड करता हूँ!’ मैंने कहा और अपने फोन का शेयर इट ओपन कर दिया.

‘ये लो अंकल जी, मेरा शेयर इट भी ओपन है.’ वो बोली.

मेरा फोन उसके फोन से कनेक्ट हो गया था उसके शेयर इट का नाम था ‘हिरनी’ मैंने झट से एक पोर्न विडियो उसे भेज दिया. उसने भी मेरी फाइल को एक्सेप्ट किया और वो पोर्न क्लिप उसके फोन में चली गई.

‘थैंक्स अंकल जी. घर जा के बाद में देखूंगी कोचिंग के बाद!’ वो बोली.

‘ओके देख लेना… और हाँ तेरा फोन नंबर तो बोल एक बार?’ मैंने कहा.

उसने अपना नंबर बताया जिसे मैंने मिस्ड काल देकर सेव कर लिया.

मैंने जो छोटी सी पोर्न क्लिप शालिनी के मोबाइल में ट्रान्सफर की थी उसमें एक कमसिन सी भारतीय लड़की अपने दादा जी की उम्र के आदमी के साथ बिस्तर पर बैठी थी. लड़की का चेहरा, पहनावा मध्य वर्गीय उत्तर भारतीय लड़की की तरह था.

पोर्न क्लिप शुरू होते ही वो बुजुर्ग आदमी लड़की को सहलाना चूमना शुरू करता है और वो लड़की शरमाती हुई आदमी के हाथों को दूर हटाती है बार बार.

लेकिन वो आदमी नहीं मानता और उसे छेड़ता रहता है. उसकी कुर्ती में हाथ घुसा के उसकी चूचियाँ मसलता है और उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाता है. फिर वो आदमी उस किशोरी के कपड़े उतारना शुरू करता है, लड़की विरोध करती है लेकिन उसके बदन से एक एक कपड़ा उतरता जाता है, पहले दुपट्टा फिर कुर्ती फिर शमीज फिर उसकी ब्रा और उसके समोसे जैसे छोटे छोटे मम्मे नंगे हो जाते हैं. लड़की दोनों हाथों से अपने मम्मे छुपाने की चेष्टा करती है लेकिन वो उसे रोक नहीं पाती और वो आदमी उसकी चूचियाँ चूसने लगता है.

कुछ ही देर बाद उसकी सलवार का नाड़ा खुलता है और सलवार उतर जाती है. नीचे उसने सफ़ेद रंग की चड्डी पहनी हुई है. वो आदमी चड्डी भी उतारता है, लड़की विरोध करती है, अपने पैर सिकोड़ के भींच लेती है लेकिन वो आदमी ताकत से उसकी चड्डी भी उतार कर फेंक देता है और उसके पैर खोल कर उसकी चूत पर मुंह लगा देता है.

अगले शॉट में वो किशोरी बिल्कुल नंगी होकर अपने घुटने मोड़ कर जांघों को पूरी तरह फैला के अपनी चूत अपने ही हाथों ओपन किये हुए लेटी थी और वो आदमी उसकी अर्धविकसित चूचियों को चुटकियों में मसलता हुआ उसकी खुली हुई चूत में जीभ घुसा कर चाट रहा था और लड़की पूरी तरह से उत्तेजित हो कर कामुक आवाजें निकाल रही थी.

अगले शॉट में वो किशोरी बिल्कुल नंगी होकर अपने घुटने मोड़ कर जांघों को पूरी तरह फैला के अपनी चूत अपने ही हाथों ओपन किये हुए लेटी थी और वो आदमी उसकी अर्धविकसित चूचियों को चुटकियों में मसलता हुआ उसकी खुली हुई चूत में जीभ घुसा कर चाट रहा था और लड़की पूरी तरह से उत्तेजित हो कर कामुक आवाजें निकाल रही थी.

फिर लड़की की चूत का क्लोजअप दिखता है और वो आदमी उस किशोरी का भगान्कुर अपने दांतों से धीरे धीरे कुतरने लगता है और चूत के उस हिस्से को होठों में दबा के चूसने लगता है. ऐसे करते ही मानो लड़की के बदन में भूचाल आ जाता है और वो अपने दांत भींच कर बिस्तर की चादर अपनी मुट्ठियों में जकड़ के अपनी चूत उठा उठा के हवा में उछालने लगती है और बेहद कामुक किलकारियाँ निकालने लगती है.

 


इस क्लिप में उस किशोरी की चूत के कितने ही क्लोज अप शॉट्स थे. उसकी चूत पर हल्की हल्की काली काली रेशमी झांटें थीं. उसकी चूत का वो नन्हा सा छेद जिसमें लंड घुसता है और वो छोटी सी भगनासा जिसे वो आदमी किसी कुत्ते की तरह लप लप करके चाट रहा था.

अब आप लोग अंदाजा लगा सकते हो कि यह कितनी उत्तेजक क्लिप थी और इसे देखने के बाद शालिनी की क्या हालत होगी, उसकी चूत से रस की नदिया बहना तो तय था. और उसे हस्तमैथुन तो करना ही पड़ेगा, ये भी पक्का था. हाँ, इस क्लिप में चुदाई नहीं थी सिर्फ उसकी चूत चटाई थी.

और हाँ, इस पोर्न क्लिप के अंत में वो कमसिन किशोरी की चूत बुरी तरह झरने की तरह झड़ती है और उसकी चूत से रस की पिचकारियाँ किसी फव्वारे की तरह निकलने लगतीं हैं. इसके बाद वो पलट के लेट जाती है और वो आदमी भी उस पर छा जाता है और नीचे हाथ घुसा कर उसकी चूचियाँ दबोच लेटा है और उसके गोल गोल मुलायम गोरे गुलाबी नितम्ब चूमने लगता है.

बस यहीं पर वो क्लिप खत्म हो जाती है.

तो दोस्तो, उस दिन शादी की पार्टी से शालिनी के जाने के बाद मेरी थोड़ी थोड़ी फट भी रही थी कि अगर शालिनी ने मेरी शिकायत कर दी और उसने वो क्लिप अपने घर पर या मेरे घर आकर मेरी वाइफ को दिखा दी तो…

उस बात की कल्पना करके ही मुझे पसीने आने लगे थे. हालांकि इस तरह की उम्मीद कम ही थी क्योंकि मैंने शालिनी से प्रॉमिस करवा लिया था कि वो इन बातों का जिक्र किसी से नहीं करेगी लेकिन दिमाग में संशय तो चल ही रहा था.

अब जो भी हो…

घर जाकर उस रात मैंने अपनी बीवी को शालिनी समझ के दो बार बेरहमी से चोदा. अपनी कल्पना में शालिनी को बसा कर उसकी चूचियाँ पकड़ कर उसकी चूत में आड़े तिरछे सीधे गहरे उथले जबरदस्त शॉट्स लगाए और लंड से उसकी चूत में चक्की भी चलाई.

इस दौरान मेरी बीवी न जाने कितनी बार झड़ी, उस रात और मुझसे लिपट लिपट के मुझे चूम चूम के उसने अपना आभार जताया.

अब वो बेचारी भोली भाली क्या जाने कि मेरे मन में क्या क्या चल रहा था और मैं अपनी फंतासी में किसे चोद रहा था.

अगले दिन से अब मुझे शालिनी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार था. उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.

दिन पर दिन बीतते चले गये वो मुझे दिखी भी नहीं… हालांकि मेरे पास उसका फोन नंबर था लेकिन मैंने उसे फोन करना ठीक नहीं समझा क्योंकि हो सकता था कि वो मुझसे बहुत नाराज़ रही हो! पता नहीं बात करे या ना करे?

इसी तरह करीब पन्द्रह बीस दिन निकल गये. अब मुझे भी टेंशन होने लगी थी उसके बारे में सोच कर… मैं उसे देखने और उसका रिएक्शन जानने को एक तरह से तड़प रहा था.

मुझसे रहा नहीं गया तो एक दिन मैं उसके कोचिंग जाने के टाइम पर उसके घर के पास रास्ते में एक मोड़ पर खड़ा हो गया. वो अपने समय पर निकली और जैसे ही उसने मुझे देखा उसके चेहरे पर घबराहट के चिन्ह उभरे और उसने झट से अपना सिर झुका लिया और स्पीड से साइकिल चलाती हुई निकल गई. ऐसे मैं तीन चार बार उसके रास्ते में खड़ा हुआ और हर बार वो इसी तरह देख कर भी अनदेखा करके निकल जाती.

मुझे लगने लगा कि उसे वो विडियो क्लिप अच्छी नहीं लगी तभी वो मुझे इग्नोर कर रही है और अब इस तरह उसके सामने आने से कोई फायदा नहीं और उसे भूल जाना ही बेहतर है. अतः मैंने उसका फोन नम्बर डिलीट कर दिया उन सब बातों से अपना ध्यान हटा लिया और मेरी ज़िन्दगी पहले की तरह चलने लगी.

इसी तरह एक डेढ़ महीने से ज्यादा निकल गया.

 


एक दिन मैं ऑफिस में अपने काम में व्यस्त था कि दोपहर बाद कोई साढ़े पांच बजे मेरा फोन बजा. देखा तो किसी अनजान नम्बर से कॉल आ रही थी.

मैंने कॉल एक्सेप्ट की और हेलो बोला.

‘अंकल जी, नमस्ते!’ दूसरी तरफ से आवाज आई. वो आवाज सुनकर मेरा दिल जोर से धड़का. आवाज मैंने साफ़ पहचानी, शालिनी बोल रही थी.

‘नमस्ते. आप कौन बोल रही हैं?’ मैंने जानबूझ कर न पहचानने का दिखावा किया.

‘अंकल जी. मैं हूँ शालिनी! उस दिन शादी की पार्टी में आप से बात हुई थी न?’

‘ओह, हाँ याद आया. कैसी हो शालिनी… आज कैसे याद किया?’

‘ठीक हूँ अंकल जी. बस ऐसे ही फोन किया था. आप कहाँ हो इस टाइम?’ उसने पूछा.

‘इस समय तो मैं ऑफिस में हूँ. कोई काम हो तो बोलो?’ मैंने कहा.

‘कोई नी अंकल जी. बस वो मैं इस तरफ किसी काम से आई थी, आपके ऑफिस के बाहर ही हूँ. आप फ्री हो गये क्या?’ वो बोली.

‘हाँ हाँ, अभी अभी फ्री हुआ हूँ. तुम रुको मैं बाहर ही आ रहा हूँ दो मिनट में!’ मैंने कहा और फोन काट दिया.

शालिनी का फोन सुनने के बाद मैं जैसे हवा में उड़ रहा था, मेरे चारों ओर जैसे फूल ही फूल खिल उठे थे. मैं झट से ऑफिस के टॉयलेट में गया और थोड़ा बन संवर के बाहर निकला.

शालिनी मेरे ऑफिस के बाहर एक स्टेशनरी की दूकान पर अपनी साइकिल लिए खड़ी थी.

मुझे देखते ही उसने नमस्ते की, मैंने भी जवाब दिया.

उस दिन उसने सफ़ेद सलवार और हल्के पीले रंग का कुर्ता पहना हुआ था जिनमें से उसकी सुडौल जांघों और ठोस मम्मों के प्यारे प्यारे उभार मुझे आकर्षित और विचलित कर रहे थे.

‘कैसी हो शालिनी, आज इस तरफ कैसे?’ मैंने पूछा.

‘बस ऐसे ही… मार्किट में कुछ पर्चेजिंग करनी थी. इस तरफ से निकली तो आपका ऑफिस देख के मन हुआ कि आप से कुछ बातें ही हो जायें, बहुत दिन हो गये आप से बात किये हुए!’

‘जरूर, चलो वहाँ बैठ कर कोल्ड ड्रिंक पीते पीते बातें करेंगे!’ मैंने उससे कहा और हम लोग पास की ही दूकान से कोल्ड ड्रिंक्स लेकर पीने लगे.

‘हाँ, गुड़िया, अब बोलो क्या बात है?’ मैंने अपनी ड्रिंक सिप करते हुए पूछा.

‘कुछ ख़ास नहीं अंकल जी. बस वो वो…’ इतना बोल के वो रुक गई.

‘वो वो क्या शालिनी… साफ़ साफ़ कहो न क्या बात है?’

‘अंकल जी, वो मेरे मुहाँसे तो ठीक ही नहीं हो रहे!’ वो उदास स्वर में बोली.

‘शालिनी उस दिन मैंने तुम्हें सब कुछ तो अच्छी तरह से समझा दिया था. मुहाँसे होने का कारण और उपचार सब बता दिया था. और मैंने तुझे एक वीडियो भी शेयर किया था. देखा था न वो?’

‘जी, अंकल जी, देखा था.’ वो धीमे से बोली.

‘कैसा लगा?’ मैंने पूछा.

मेरी बात सुनकर वो चुप रही, कोई जवाब नहीं दिया.

‘बताओ न कैसा लगा?’ मैंने अपनी बात दोहराई.

‘अंकल जी, मैं कैसे कुछ बता सकती हूँ वैसे वाले वीडियो के बारे में… लेकिन मेरे मुहाँसे तो ज्यों के त्यों हैं.’ वो उलझन भरे स्वर में बोली.

शालिनी की बात का मतलब मैं समझ गया था. शायद वो कहना चाह रही थी कि वो वीडियो देखने के बाद वो अपनी चूत से खेली थी, झड़ी भी थी लेकिन मुहाँसे नहीं जा रहे थे. यह बात विस्तार से जानने के लिए मैंने उसे और कुरेदा- शालिनी, मैं समझा नहीं. देखो पहेलियाँ मत बुझाओ जो कहना चाहती हो साफ़ साफ़ कहो?

मैंने कहा.

‘अंकल जी, मैं ज्यादा नहीं बता सकती बस, आप तो मेरे मुहाँसे मिटाने के लिए कुछ और बताओ प्लीज. कॉलेज में सब लोग मुझे चिढ़ाते हैं!’

‘अच्छा ठीक है, नहीं बताना चाहती तो मत बताओ. मैं समझ गया पूरी बात. अब मैं बताऊंगा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ है. सही गलत पर तुम हाँ या ना में जवाब तो दे सकोगी ना?’ मैंने कहा.

‘ठीक है अंकल जी!’ वो बोली.

‘देखो शालिनी, उस वीडियो को तुमने कई कई बार देखा होगा और देखते देखते हर बार तुम्हारी जाँघों के बीच में तुम्हारी सू सू करने वाली जगह गीली हो गई होगी और उसमें सनसनाहट भरी खुजली सी मची होगी, है ना?’ मैंने उसकी जांघों के बीच उसकी चूत की तरफ इशारा करके कहा.

जवाब में शालिनी का मुंह लाज से लाल हो गया और उसने सर झुका के सहमति में अपना सर हिला दिया.

‘फिर तुमने अपने सारे कपड़े उतार के अपनी उंगली से इस अंग को छेड़ा होगा, रगड़ा होगा, मुट्ठी में भर कर दबाया होगा, इसके बाल भी खींचे होंगे और इस पर चिकोटी भी काटी होगी, साथ में अपने ये भी मसले और दबाये होंगे. जवाब दो हाँ या ना?’ मैंने उसके मम्मों की तरफ इशारा करके कहा.

जवाब में वो कुछ नहीं बोली सिर्फ हाँ में गर्दन हिला कर सर झुका लिया.

‘अच्छा तो फिर यह बताओ कि वो सब करते हुए तुम्हें कैसा लगा?’

मेरी बात सुनके वो चुप रह गई, अब भी कुछ न बोली.

आखिर लड़की थी बोलती भी क्या. इतना तो मैं समझ गया था कि अब ये बहुत जल्दी चुद जायेगी मुझसे लेकिन मुझे हर कदम फूंक फूंक कर रखना था. वो अभी कमसिन कच्ची कली थी. ऊपर से अपने ही मोहल्ले की थी. अपनी इज्जत के साथ साथ मुझे उसकी इज्जत, मान सम्मान का भी पूरा पूरा ध्यान रखना था.

‘ठीक है. वो नहीं बताना चाहो तो मत बताओ लेकिन इतना तो बता दो कि अपने इस अंग से खेलते खेलते तुम्हें लास्ट में कैसा फील हुआ था? जैसे उस वीडियो में उस लड़की की योनि से रस की फुहारें छूटती हैं वैसी ही पिचकारियाँ तुम्हारी चूत से भी …सॉरी चूत नहीं तुम्हारी योनी से भी निकली थीं?’

मैंने चूत शब्द जानबूझ कर कहा था.

 


मेरे मुंह से चूत शब्द सुनकर उसके चेहरे पर एक क्षण के लिए मुस्कान खिली फिर वो सामान्य हो गई और चुप ही रही.

‘बताओ न गुड़िया, देखो शालिनी, अगर तुम मेरे साथ कोआपरेट नहीं करोगी तो फिर मैं तुम्हारे मुहाँसों के लिए कुछ नहीं कर पाऊंगा.’ मैंने उसकी दुखती नस पर हाथ रखा.

‘क्या बताऊँ अंकल जी?’ वो मरियल सी आवाज में बोली.

‘मैंने पूछा है कि जब तुम अपनी सूसू में उंगली या मोमबत्ती वगैरह घुसा कर अन्दर बाहर करती हो तो चरम स्थिति में पहुँच कर तुम्हारी उस जगह से रस की फुहारें छूटती हैं जैसी उस वीडियो में उस लड़की की सूसू से निकलतीं हैं?’ मैंने थोड़ा जोर देकर पूछा.

‘नहीं अंकल जी. वैसा कुछ नहीं होता. गीलापन तो खूब हो जाता है पर पिचकारी जैसी नहीं धार नहीं निकलती.’ वो धीमे से बोली.

‘हूँ हम्म्म्म…’ मैंने हुंकार भर के कुछ सोचने का नाटक किया जैसे यह बहुत गंभीर स्थिति हो शालिनी के लिए- तभी तो मुहाँसे जा नहीं रहे हैं. देखो गुड़िया रानी. जब तक अन्दर जमा हुआ रस पूरी ताकत से पिचकारी की तरह बाहर नहीं आयेगा तब तक न तुम्हें सम्पूर्ण आनन्द प्राप्त होगा और न तुम्हारा चेहरा निखरेगा!’

मैंने उसे समझाया.

‘तो अब मैं क्या करूं?’ उसने बड़ी आशा से मुझसे पूछा.

‘पहले ये बताओ कि तुम अपनी नीचे वाली में किस चीज से करती हो. उंगली से क्या किसी और वस्तु से?’

‘कभी कभी उंगली से एक दो बार मोमबत्ती घुसा के भी…’ वो बोलकर चुप हो गई.

‘मोमबत्ती कितने अन्दर तक घुसाती हो?’ मैंने बड़ी मासूमियत से पूछा.

जवाब में उसने अपनी बीच वाली उंगली खड़ी करके दिखा दी. मतलब वो अपनी चूत में बीच वाली उंगली से कुछ और ज्यादा गहराई तक मोमबत्ती घुसा के खुद को चोदती है. इसका मतलब उसने अपनी सील खुद ही तोड़ ली है.

‘हम्म्म्म… शुरुआत में एकाध बार थोड़ा खून भी निकला था?’ मैंने पूछा.

‘जी अंकल जी. एक बार निकला था. दर्द भी हुआ था. पर अब नहीं निकलता.’ वो शरमा कर बोली.

यह जानकर मुझे अफ़सोस हुआ कि उसकी चूत की सील तोड़ने का सौभाग्य मेरे लंड की किस्मत में नहीं था यह सोचते हुए मैंने गंभीरता से सोचने का नाटक किया.

देखो गुड़िया बेटा, तुम्हारे बदन के हार्मोन्स कामरस बहुत ज्यादा बनाते हैं और वो तुम्हारी इसमें भरा पड़ा है. जब तक वो जमा हुआ पुराना रस इस अंग से शीघ्रता से स्खलित नहीं होगा तब तक ये मुहाँसे नहीं जायेंगे.’ मैंने उसकी चूत की तरफ इशारा करके कहा.

‘अंकल जी, मैं कोशिश तो करती हूँ लेकिन उस वीडियो की तरह नहीं होता मेरा!’ वो झिझकते हुए बोली.

‘शालिनी बेटा, जैसे उस वीडियो में उस लड़की की चूत से जो रस की फुहारें छूटती हैं वैसा स्खलन या तो सेक्स करने से होता है या फिर कोई आदमी चूत को चाटे तब होता है. सेक्स करने से या चूत को चाटने से चूत में आनन्द की हिलोरें उठती हैं जो जमे हुए पुराने रस में हिलोरें उठतीं हैं और उसमें बाढ़ लाकर उसे तेजी से चूत से बाहर बहा देती हैं,’ मैंने उसे कुटिलता से समझाया.

अब मैं उसके साथ बातें करते हुए बार बार चूत शब्द का इस्तेमाल जानबूझ कर कर रहा था.

‘छीः अंकल जी. विडियो सिनेमा की बातें अलग होती हैं. ये लड़कियाँ अंग्रेजन हेरोइनों की देखादेखी पैसे के लिए कुछ भी कर लेतीं हैं, सचमुच में कोई कैसे उस गन्दी जगह पर अपना मुंह लगा सकता है?’

‘अरे कोई जगह गन्दी होती है तो फिर साफ़ भी तो हो जाती है कि नहीं?’

‘अंकल जी, साफ़ करने से क्या. रहेगी तो वो वही ना?’

‘पगली है तू, अरे कोई जगह हमेशा के लिए गन्दी नहीं होती. देखो शालिनी, टॉयलेट में खुद को साफ़ करते समय तुम्हारे हाथ भी तो गन्दे होते होंगे. लेकिन साफ़ करने के बाद कोई गन्दगी नहीं रहती, उन्ही हाथों से तुम खाना भी बनाती होती, आटा भी गूंथती होगी, पूजा भी करती होगी… है ना? और चूत को अच्छी तरह से साफ़ करके चाटा जाता है. मैं भी तो तुम्हारी आंटी की चूत खूब चाटता हूँ चोदने से पहले!’ मैंने कहा.

 


इस तरह बार बार चूत चुदाई जैसी बातें सुन कर भी वो कोई ऑब्जेक्शन नहीं कर रही थी, न ही उसके चेहरे से पता चल रहा था कि उसे वैसी बातें अरुचिकर लग रहीं थीं, मतलब इस तरह की नॉनवेज बातचीत उसे भी अच्छी लगने लगी थी. यही मैं चाहता भी था.

मेरी बातें सुनकर शालिनी सोच में पड़ गई.

मैं धीरे धीरे उसे लाइन पर ला रहा था, मैं चाहता था कि वो एक बार अपनी चूत मुझसे चटवाने को तैयार हो जाए, फिर उसके बाद उसकी चूत में लंड पेलने का कोई न कोई रास्ता निकल ही आयेगा.

यह सोचते सोचते मैं चुप रहा, मैं चाहता था कि अब शालिनी ही बात को आगे बढाए.

‘अंकल जी मेरा मन इस बात को मानने को तैयार नहीं होता कि कोई उसे सच में चाट सकता है?!’ वो अनिश्चितता से बोली.

‘अरे यार, तुझे नहीं मानना तो मत मानो…. मेरा क्या, मुहाँसे तुम्हारे ठीक होने हैं, मेरा क्या. नहीं मानना तो मत मानो! चलो घर चलते हैं अब!’ मैंने थोड़ा झुंझला कर कहा.

‘अच्छा अंकल जी, सच्ची सच्ची बताओ, आप आंटी जी की उस जगह को सच में चाट लेते हो?’ वो मेरी बात को अनसुनी करके बोली.

‘अरे मैं झूठ क्यों बोलूंगा. यह तो प्राकृतिक क्रिया है. इससे चुदाई का आनन्द कई गुना बढ़ जाता है. तुम चाहो तो मैं तुम्हारी चूत भी चाट के दिखा सकता हूँ. जैसे उस वीडियो में वो आदमी चाटता है, फिर तो विश्वास हो जाएगा न?’ मैंने कहा.

मेरी बात सुनकर वो फिर सोच में पड़ गई. यह मेरे लिए अच्छा संकेत था.

‘अंकल जी, उससे मुहाँसे पक्का मिट जायेंगे न?’ वो थोड़ी अनिश्चितता से बोली.

‘गुड़िया बेटा, अब मैं कोई अन्तर्यामी तो हूँ नहीं… जो कुछ देखा सुना है वही तुझे बताया है. मैं तो तेरा भला चाहता हूँ बस अब आगे तेरी मर्जी!’ मैंने उसे प्यार से समझाया.

मेरी बात सुनकर वो चुप रही और पांव के अंगूठे से जमीन कुरेदती रही.

मैं भी चुप रहा.

मैं जान गया था कि लड़की लाइन पर आ चुकी है, बस थोड़ी सी झिझक, थोड़ा सा डर बाकी है, वो भी अपने आप निकलेगा और वो खुद आगे आकर कदम बढ़ायेगी.

‘अंकल जी आप और कुछ तो नहीं करोगे न मेरे साथ में?’ उसने चिंतित स्वर में पूछा.

‘अरे बाबा, तेरी मर्जी के खिलाफ कुछ भी नहीं करूंगा मैं!’ मैंने कहा.

‘पहले प्रॉमिस करो और भगवान की कसम खाओ?’ वो मासूमियत से बोली.

‘पक्का प्रॉमिस और मुझे भगवान की कसम अगर तुम्हारी मर्जी के खिलाफ मैंने कुछ भी किया तो!’ मैंने वादा किया.

‘और किसी को इस बारे में बताओगे भी नहीं कभी, ये भी वादा करो?’ वो बोली.

‘अरे पक्का वादा. मैं क्यों किसी को बताऊंगा. तेरी इज्जत का मुझे पूरा पूरा ख्याल है.’ मैंने प्यार से कहा.

कितनी भोली थी बेचारी… मासूमियत से भरी हुई… मुझसे वादे मांग रही थी, कसमें खिला रही थी. उसे क्या पता था कि जब मैं उसकी दोनों चूचियाँ पकड़ के उसकी चूत चाटूंगा, चूत के दाने को चुभलाऊंगा तो वो खुद लंड मांगेगी, चोद डालने की विनती करेगी.

लेकिन वो घड़ी अभी दूर थी.

‘ठीक है अंकल जी, मैं आपको फोन करुँगी बाद में!’ वो बोली.

‘ओके शालिनी, जब तुम ठीक समझो, मुझे फोन कर देना और किसी बात का टेंशन नहीं लेना!’ मैंने उसका गाल थपथपाते हुए कहा.

उसने सहमति में सर हिलाया और अपनी साइकिल पर बैठ गई. साइकिल पर बैठते समय उसकी कुर्ती ऊपर चढ़ गई जिससे उसकी सफ़ेद सलवार के अन्दर से उसकी गुलाबी जांघों और सफ़ेद पेंटी की झलक मिली जिसे देखकर ही चित्त प्रसन्न हो गया.

और वो तेजी से पैडल चलाती हुई निकल ली.

अब मैं खुश होकर हवा में उड़ने लगा था, रह रह कर उसके नंगे जिस्म की कल्पना में खो जाता और उसकी चूत चटाई और चुदाई के दिवा स्वप्न देखता रहता.

कुछ दिन यूं ही इंतज़ार में निकल गये शालिनी का फोन नहीं आया. हालांकि उसका फोन नएम्बार मेरे पास था लेकिन मैंने उसे फोन करना ठीक नहीं समझा.

 
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