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कमसिन शालिनी की सील complete

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‘अच्छा शालिनी, एक बात बता, जब हमने पहली बार चुदाई की थी उसके बाद तुम्हें कैसा लगा था, मतलब चलने फिरने में या उठने बैठने में कोई तकलीफ हुई थी?’

‘हाँ वो… उस दिन अच्छा, आप तो चले गये थे मुझे रगड़ के… मैं आपको दरवाजे तक छोड़ने गई थी उसके बाद मेरे पैर ही ठीक से नहीं पड़ रहे थे; ऐसा लगता था कि पांव रखती कहीं हूँ पड़ता कहीं है. चप्पल पहनने के बाद भी अजीब सी चाल हो गई थी मेरी. सोफे पर बैठी तो भी अटपटा सा लगा था. फिर मैं पानी गर्म किया और गुनगुने पानी से अपनी चूत अच्छे से धोई और सेंकी, पांव भी धोये.’ वो बोली.

‘तेरे भाई को कोई शक नहीं हुआ, तेरी बदली बदली चाल देख के?’

‘हुआ था. मुझसे पूछ रहा था कि मेरे पैर में क्या हो गया. मैंने कह दिया था की बर्तन मांजते समय थाली गिर गई थी पांव पे!

लेकिन अंकल जी आप ये बातें आज क्यों पूछ रहे हो इतने दिनों बाद?’

‘अरे ऐसे ही. लड़की की पहली चुदाई के बाद उसे चलने फिरने में कैसे फील होता है ये जानना था!’

हम लोग ऐसे ही कोई एक घंटे तक बातें करते रहे.

करीब नौ बजे वो बोली- चलो अंकल जी, रूम में खाना खाते हैं.

खाना तो उसने पहले से बना कर रखा था, हम लोगों ने फर्श पर चटाई बिछा कर नंगे ही बैठ कर खाना खाया.

बहुत ही टेस्टी खाना बनाया था उसने, गजब का स्वाद था उसके हाथों में!

किसी नवयौवना के साथ नंगे बैठ के साथ साथ खाना खाना, एक दूसरे को अपने हाथों से खिलाना और एक दूसरे को छेड़ना बहुत ही अच्छा अनुभव लगा मुझे!

खाना खाने के बाद हम लोग एक बार फिर बिस्तर पर गुत्थमगुत्था हो गये और दूसरे दौर की घनघोर चुदाई के बाद नंगे ही लिपट कर सो गये.

जब मेरी शादी हुई थी, उसके बाद सालों तक मैं अपनी पत्नी के साथ नग्न ही सोता था पर अब वो आदत तो छूट गई. उस रात कई सालों बाद कड़क जवान कामिनी को दुबारा चोदने के बाद उससे नंगे लिपट के सोने में जो मज़ा आया उसे शब्दों में बताना लगभग असंभव है. उसके बदन की वो मादक सुगंध, यौवन से भरपूर जिस्म का उष्ण स्पर्श, उसके पुष्ट उरोजों का मेरे सीने पर स्पर्श, एक दूजे से लिपटीं हुईं नंगी टाँगें और धक् धक् करते दो प्यार भरे दिल… सब कुछ जैसे पारलौकिक आनन्द था.

अगले दिन रविवार था, शालिनी को कॉलेज तो जाना नहीं था तो मैं भी देर तक सोता रहा. आठ बजे के बाद ही मैं बिस्तर से बाहर निकला.

तब तक शालिनी नहा धो ली थी और एकदम तरोताज़ा दिख रही थी. मैं भी स्नान वगैरह करके तैयार हो गया.

तभी शालिनी चाय लेकर आ गई और मेरे ही सामने बेड पर बैठ गई.

‘और सुना स्वीटी, तेरी स्टडी कैसी चल रही है और यहाँ कोई परेशानी तो नहीं है न तुझे?’ मैंने यूं ही बात शुरू की.

‘नहीं अंकल, कोई नहीं है, कॉलेज भी पास में ही है, पैदल ही चली जाती हूँ. मेरी स्टडी भी अच्छी चल रही है.’

‘वैरी गुड… और ये तेरे मकान मालिक की फैमिली कैसी है? तुझसे ठीक से तो बिहेव करते हैं न?’

‘हाँ अंकल जी, सब ठीक है, मुझे कोई परेशानी नहीं है, न किसी से कोई प्रॉब्लम नहीं है. मकान मालिक तो पैसे के दास हैं, दोनों बाप बेटे सुबह निकल लेते हैं दूकान पर… फिर शाम को पांच बजे ही आते हैं खाना खाने. खाना खा के फिर चले जाते हैं और रात को दूकान बंद करके नौ साढ़े नौ तक आते हैं. इनके घर में रुपये पैसे की कोई कमी नहीं, बस सुख चैन नहीं है. बेटा भी एक ही है उसकी बीवी को भी कोई सुख नहीं है. न कहीं आना जाना न कोई मनोरंजन. वो बेचारी सोने के जेवरों में कैद घुट घुट के जी रही है बेचारी… इसके माँ बाप गरीब हैं न दहेज़ तो दे नहीं सकते थे तो इस बेचारी को जैसे तैसे इस घर में ब्याह दिया.

‘ओह सो सैड. शालिनी इनके घर में इतनी धन दौलत है, इकलौती बहू है फिर क्या प्रॉब्लम है?’ मैंने चाय की चुस्की ली.

‘अंकल जी, धन दौलत ही तो सब कुछ नहीं है उसके लिए. बेचारी अच्छी जैन फैमिली से आई है. रानी जैन नाम है इसका… अच्छी यूनिवर्सिटी से एम बी ए कर रखा है इसने फायनेंस में, वो जॉब करना चाहती है लेकिन ये लोग करने नहीं देते. बस खाना बनाओ, बर्तन साफ़ करो और झाड़ू पोंछा करते रहो कामवाली की तरह. कोई पढ़ी लिखी वेल एजूकेटिड लड़की भला ऐसे माहौल में कैसे सुखी रह सकती है? मनोरंजन के नाम पर भी कुछ नहीं, घर में टी वी तो है पर केबल नहीं, सिर्फ दूरदर्शन देखते रहो.’

‘रानी भाभी की एक बड़ी बहन भी है वो पी ओ है बैंक में. उसने लव मैरिज कर रखी है, वो मजे से रहती है अपनी गाड़ी बंगला है. उसी से खुद को कम्पेयर करके अपनी किस्मत को कोसती रहती है.’

‘ओह… सो सैड. अपनी अपनी किस्मत है!’ मैंने थोड़ा गंभीर होकर कहा.

‘और सबसे बड़ी बात पति का सुख भी नहीं मिलता रानी भाभी को… प्यासी रहती है हमेशा!’

‘प्यासी? क्या मतलब? उसका पति तो उसकी लेता होगा न?’

‘उसका पति? वो क्या लेगा उसकी, उसके बस का हो तब ना. देखा न उसका पेट कैसे किसी मटके की तरह गोल मटोल हो गया है. वो तो रात में दूकान से आ के नोट तिजोरी में रख के सो जाता है, औरत के काम का वो है ही नहीं, सेक्स करना उसके बस की बात नहीं!’ शालिनी बोली

‘अच्छा तुम्हें कैसे पता ये बातें?’ मैंने प्रश्न किया.

‘अरे अब रानी भाभी मेरी पक्की सहेली बन गई है. हम लोग सब कुछ शेयर करते हैं. वो कह रही थी कि पिछले सात आठ महीने से कुछ नहीं किया उसके हबी ने!’

‘अंकल जी वैसे मस्त बॉडी है उसकी. जे जे बड़े मम्में हैं उसके!’ शालिनी ने अपने हाथों से इशारा करके दिखाया मुझे!

‘अच्छा तुझे कैसे पता कि कितने बड़े बूब्स हैं उसके… देखे हैं क्या तूने?’ मैंने आश्चर्य से पूछा.

‘अंकल जी सिर्फ देखे ही नहीं हैं, अपने हाथों में ले के दबाये मसले और चूसे भी हैं मैंने!’ वो धीमे से शर्माती हुई बोली.

‘अरे नहीं, पूरी बात बताओ!’ अब मेरी उत्सुकता बढ़ गई.

‘अंकल… वो क्या है कि शाम को वो अकेली रहती है घर में… उसके पति और ससुर खाना खा के दूकान चले जाते हैं और उसकी सास मंदिर चली जाती है. वो शाम छह से साढ़े आठ तक रोज घर में अकेली रहती है तो मेरे पास आ जाती है कभी कभी बातें करने या मैं नीचे चली जाती हूँ उसके पास. धीरे धीरे हम लोग पक्की सहेलियाँ बन गईं और सेक्स की बातें करने लगीं. मैं उसे अपने मोबाइल से पोर्न फिल्म दिखाने लगी. विदेशी लड़कियों के लेस्बियन सेक्स या काले हब्शी को अपने हाथ भर लम्बे लंड से कमसिन लड़की को चुदते देख देख के हम लोग भी उत्तेजित हो कर पूरी नंगी होकर एक दूसरे से लिपट कर मजे लेने लगीं. वो भी सेक्स की भूखी है, उसे मेरी जरूरत थी और मुझे उसकी… हम लोग अब एक दूसरी से कुछ भी नहीं छिपाती.’ शालिनी ने मुझे बताया.

‘और क्या क्या बातें करती रहती हो तुम लोग? कहीं तुमने उसे मेरे और तुम्हारे रिश्ते के बारे में तो नहीं बता दिया?’ मैंने पूछा क्योंकि मुझे लग रहा था कि जब इन लोगों के इतने अंतरंग रिश्ते बन गए हैं तो फिर अपनी बाकी बातें भी जरूर ही बताई होंगी.

‘हाँ उसे पता है सब!’

‘क्यों बताया उसे?’

‘ऐसे ही… एक दिन बातों बातों में बात चली कि पहली पहली बार किसके साथ सेक्स किया था. तो रानी भाभी ने खुद बताया कि पहली बार उसके सगे मामा ने उसे चोदा था जब वो ग्यारहवीं की परीक्षा के बाद गर्मी की छुट्टी में नाना जी के यहाँ जबलपुर गई थी. फिर दूसरी बार उसके सगे चाचा ने घर में अकेला पा कर उसे चोदा था और फिर उसके जीजा ने भी उसकी चूत मारी थी शादी के पहले और अब शादी के बाद तो तरसती है चुदने के लिए!’ शालिनी बोली

‘हम्म… चलो ठीक है, अपुन को क्या लेना देना. सबकी लाइफ में कुछ न कुछ कमी रहती ही है.’ मैंने कहा.

‘अंकल जी. मैंने आपसे फोन पर कहा था न कि आपको एक सरप्राइज दूंगी!’

‘हाँ, याद आया, ला दे क्या सरप्राइज है मेरे लिए?’ मैंने खुश होकर कहा.

‘अंकल जी. सरप्राइज यहाँ नहीं है. वो तो नीचे मिलेगा!’

‘क्या मतलब? तेरी नीचे वाली तो मैं ले चुका कल रात को दो बार!’

‘अंकल जी, नीचे वाली रानी भाभी की प्यासी जवानी मिलेगी आपको आज सरप्राइज में!’ शालिनी हंसते हुए बोली.

‘अरे… यह कैसे पॉसिबल है. मैंने तो उसे अभी देखा तक नहीं. कोई गड़बड़ हो गई तो तू मुझे भी पिटवायेगी और तुझे भी यहाँ से कमरा खाली करना पड़ेगा.’

‘अरे ऐसा कुछ नहीं होगा अंकल जी, मैंने सब प्लान कर लिया है. जब मैंने रानी भाभी को बताया कि आप भोपाल मुझसे मिलने आ रहे हो तो वो खुद मुझसे मिन्नतें करने लगी, मुझे मनाने लगी कि एक बार मैं उसे भी ये ख़ुशी दे दूं. अंकल जी, प्लीज आप अब मना नहीं करना. मैंने उससे वादा किया है कि आज उसे आपसे चुदाई का भरपूर आनन्द मिलेगा आपसे!’ शालिनी मेरा हाथ पकड़

कर बोली.

अगर तुमने वादा कर ही दिया है तो कोई बात नहीं लेकिन फिर भी एक बार और गहराई से सोच लो.’ मैंने उसे चेताया.

‘अंकल जी सब सोचा है मैंने और रानी भाभी ने… शाम को उसके पति और ससुर छह बजे दूकान चले जायेंगे. आज सन्डे है लेकिन ये लोग आज भी दूकान खोले रहते हैं. रानी भाभी की सास भी खाना खा कर मंदिर चली जायेगी रोज की तरह. मकान का दरवाजा भीतर से बन्द रहेगा. आप और रानी भाभी उसी के बेडरूम में चुदाई करना पूरे दो घंटे! मैं बाहर आँगन में बैठ कर चौकीदारी करती रहूँगी, मान लो कोई आ भी गया तो एकदम से भीतर आ नहीं पायेगा, हमें संभलने का मौका मिलेगा. डरने की कोई बात ही नहीं है.’ शालिनी ने मुझे प्लान समझाया.

‘ओ.के. मैं तैयार हूँ. अच्छा यह बता कि ये तेरी रानी भाभी दिखने में है कैसी?’ मैंने पूछा.

‘अंकल जी मेरे लैपटॉप में फोटो है. दिखाती हूँ.’ वो बोली.

फिर शालिनी ने मुझे रानी के कई सारे फोटोज दिखाये. वाकयी गजब का माल थी ये तो. भरपूर हाईट और गदराया बदन. गोल सुन्दर चेहरा, नशीली आँखें, रसीले भरे भरे होंठ… उम्र भी कोई तेईस चौबीस साल… सब कुछ मस्त लगा. ऐसी हुस्नपरी को कौन नहीं चोदना चाहेगा. रानी के सब फोटो अच्छे थे. हाँ नंगी फोटो कोई नहीं थी.

‘अच्छी है, लेकिन इसकी चूत कैसी है शालिनी?’

‘अंकल जी. उसकी वो भी मस्त है, कसी हुई है मेरे ही जैसी, वो कौन से ज्यादा चुदी है जिंदगी में. रानी भाभी की शादी को अभी सिर्फ सवा साल ही हुआ और वो न के बराबर चुदी है. शादी से पहले तीन चार बार और शादी के बाद भी दस बारह बार इससे ज्यादा नहीं, रानी भाभी से ज्यादा तो मैं कुंवारे में ही आपसे चुद चुकी हूँ पच्चीस तीस बार!’ वो इठला के बोली.

‘ओ. के. ठीक है. चलो प्लान पक्का. मैं तैयार हूँ.’ मैंने कहा.

‘ठीक है अंकल जी, मैं अभी रानी भाभी को बता के आती हूँ ये बात!’ शालिनी बोली और तुरंत नीचे चली गई.

फिर वो कोई पंद्रह बीस मिनट बाद ऊपर आई और चहकती हुई बोली- रानी भाभी भी तैयार हैं और खुश हैं कि आप उन्हें चोदने के लिए तैयार हो, एडवांस में थैंक्स भी कहा है आज शाम को आपको सब कुछ चकाचक मिलेगा.

 
शाम होने के पहले मैं एक राऊँड बाज़ार का लगा के आया. मेडिकल शॉप से एक सेक्स वर्धक दवा ले के खा ली क्योंकि पिछली रात ही शालिनी को दो बार चोदा था और आज रात उसकी कड़क जवान भाभी जो कि जनम जनम से लंड की प्यासी थी, उसकी भी पलंगतोड़ चुदाई करके उसकी तपती चूत को शीतल करना था. कहीं मेरी मर्दानगी पर आंच न आ जाए इसलिए एहितयात के तौर पर मेडिसिन ले ली थी.

शाम के छह बज चुके थे और शालिनी अभी नीचे रानी के पास थी. मैं छत पर ही चेयर डाल के बैठा था मेरी नज़र बाहर गली में थी. एक मिनट बाद ही मुझे रानी का पति और ससुर घर से निकल कर जाते दिखे. रानी के पति को देख कर मुझे सच में रानी कि भाग्य से सहानुभूति हुई; उसका पति नाटे से कद का सांवला सा बदसूरत आदमी था. उसका पेट भी सच में किसी बड़े घड़े की तरह बाहर निकला हुआ था. चुदाई की कोशिश करते वक़्त उसका पेट जरूर पहले चूत से जा टकराता होगा; ऐसे लोगों को चूत में लंड घुसाने में बहुत परेशानी होती है. अगर जैसे तैसे लंड चूत में घुसा भी लिया तो फिर धक्के लगाते नहीं बनता… बेचारी रानी!

मैं ये सब सोच ही रहा था तभी मुझे रानी की सास भी घर से निकल के जाती दिखी; मतलब अब लाइन क्लियर हो गई थी.

कुछ ही देर में शालिनी ऊपर आई और बोली- बस दस मिनट और… रानी भाभी अभी अभी नहा कर आई हैं वो कपड़े पहन लें, फिर हम लोग नीचे चलते हैं.

‘गुडिया रानी, जब तेरी रानी भाभी को अभी थोड़ी देर बाद नंगी हो के चुदना ही है तो कपड़े काहे को पहन रही है बेकार में?’ मैंने मजाक किया.

‘अच्छा जी, ये भी कोई बात है. शर्म लिहाज भी तो कोई चीज है. मेरी भाभी ऐसी फूहड़ बेशर्म भी नहीं है कोई!’ वो बोली.

हम लोग ऐसे ही कुछ देर तक हंसी मजाक करते रहे. नई चूत देखने और चोदने के ख्याल से ही मैं उत्तेजित हो रहा था और दिल में धुकधुकी भी मची थी.

थोड़ी ही देर बाद शालिनी बोली- अब चलो अंकल जी, आपका सरप्राइज आपका वेट कर रहा है.

मैं शालिनी के साथ उसका हाथ पकड़े सीढ़ियाँ उतर कर नीचे आया और हम दोनों रानी के बेडरूम में जा पहुंचे.

वो एक कुर्सी पर बैठी कोई पुस्तक के पन्ने पलट रही थी. मुझे देख कर उसने हाथ जोड़ कर नमस्कार किया और मुझे सोफे पर बैठने को कहा.

मैं नमस्ते का जवाब देते हुए सोफे पर बैठ गया.

उसके बेडरूम में धार्मिक फोटो और संत मुनियों के चित्र लगे थे. कोई ऐसी सजावट इत्यादि नहीं दिखी जो वहाँ रहने वालों की रसिकता का परिचय देती. इसके पति से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी.

फिर मैंने रानी की ओर देखा.

जैसा कि शालिनी ने उसके हुस्न के बारे में बताया था वो उससे बढ़ कर निकली. कोई साढ़े पांच फुट कद, गोरी गुलाबी रंगत, चित्ताकर्षक नयन नख्श, चेहरे पर सौम्य मुस्कान और हंसती हुई आँखें… भरा भरा निचला होंठ जिससे रस जैसे टपकने को ही था, उमर कोई ख़ास नहीं, तेईस चौबीस साल की ही लगी मुझे वो…

कॉटन की महरून कलर की साड़ी बांध रखी थी उसने जिसमें से उसके सीने के उभार छुपाये नहीं छुप रहे थे. उसके मम्मे इतने बड़े भी नहीं लगते थे कि भद्दे दिखें. ’34c’ मैंने मन ही मन उसकी ब्रा के साइज़ का अंदाज़ लगाया.

सिर से पांव तक सोने के आभूषणों से सजी थी रानी… गले में, कानों में, हाथों में; कमर में भी सोने कि करधनी और पांव में सोने की पायलें.

किसी को सोने की पायल पहने हुए पहली बार ही देख रहा था. उसके गोरे गोरे मुलायम पैरों में वो सोने कि पायलें बहुत ही जच रहीं थीं.

कुल मिला कर अप्सरा सा रूप लिए कमनीय काया की वो स्वामिनी किसी कुलीन कुल की विदुषी नारी ही लगती थी. उसे देख कर कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता था कि ये स्त्री लंड की प्यासी अपनी चुदास से त्रस्त रहती होगी.

इस तरह कोई दो मिनट तक मैंने उसकी रूपराशि को निहारा. ऐसी मदमाती मस्त जवानी को चोदने के ख्याल से ही मेरे लंड में तनाव भरने लगा. वो मेरी ओर रह रह कर देखती और फिर नज़रें झुका लेती. शायद मेरे इस तरह नज़र गड़ा कर देखने से वो अन इजी फील करने लगी थी.

‘आप लोग बैठो मैं चाय बनाती हूँ!’ वो बोली और उठने लगी.

‘रहने दो भाभी… चाय पानी के चक्कर में टाइम ख़राब मत करो; आप लोग तो जल्दी से चुदाई का चक्कर चलाओ अब. देखो साढ़े छह तो हो ही गए हैं. हम लोगों के पास सिर्फ डेढ़ दो घंटा ही बचा है. मैं तो बाहर दरवाजे के पास जाकर बैठूंगी. आप लोग अपना मिलन शुरू करो!’ शालिनी बोली और रानी का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर लिया और मेरे पास लाकर उसका हाथ मेरे हाथ में दे दिया.

‘ये लो अंकल जी मेरी प्यारी भाभी… ज्यादा मत सताना इसे… और भाभी तुम भी ज्यादा मत शरमाना, ऐसा मौका ज़िन्दगी में फिर मिले न मिले इसलिये एक एक पल की कीमत समझो और बेझिझक खूब एन्जॉय करो. ध्यान रखना कि टाइम कम है और काम ज्यादा करना है. ओके… मैं बाहर ही रहूँगी अगर कोई खतरा दिखा तो मैं सावधान कर दूंगी!’ ऐसे कहते हुए शालिनी ने रानी को मेरे हवाले किया और बाहर निकल गई.

मैंने भी दरवाजे को यूं ही भिड़ा दिया अन्दर से कुण्डी नहीं लगाई और रानी के साथ बेड पर बैठ गया.

वो सकुचाती सिमटी हुई सी मेरे पास बैठ गई. मैंने उसके गले में हाथ डाल उसे अपनी ओर खींचा उसका गाल चूमते हुए उससे हल्की फुल्की बातें करने लगा जैसे घर में कौन कौन है, एजुकेशन क्या है. इन जनरल बातों से वो भी थोड़ी सी सामान्य हुई और मेरे और निकट खिसक आई. वो अभी अभी नहा कर आई थी अतः उसके बदन की ताजगी, नमी और भीनी भीनी सुगंध मुझे उतावला करने लगी.

मैंने उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके ब्लाउज के हुक खोल दिये. उसने हल्का सा प्रतिरोध किया, लेकिन मैंने उसे समझाया कि अपने पास समय कम है सब कुछ जल्दी जल्दी ही करना है.

फिर उसने खुद ही अपना ब्लाउज खोल दिया मैंने उसे उसके बदन से अलग किया और फिर उसकी ब्रा को भी उससे जुदा कर दिया.

दो भरे भरे अमृत कलश मेरे सामने थे, एल ई डी बल्ब की तेज रोशनी में उसके मम्में दमक उठे. मम्मों के ऊपर जैसे भूरे रंग के अंगूर चिपके हुए थे.

मैंने देर न करते हुए उन्हें चूसना शुरू कर दिया और दबाना मसलना शुरू कर दिया. ऐसे करने से रानी की आँखें नशीली हो चलीं और वो बिस्तर पर पैर फैला कर लेट गई. मैंने भी अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपने नंगे सीने से उसके बूब्स दबा कर उसे अपने बाहुपाश में जकड़ लिया और उसका निचला होंठ चूसने लगा.

रानी भी अपनी बाहें मेरे गले में पहना कर मेरे चुम्बन का जवाब देने लगी. हमारी जीभ आपस में टकराती और गजब की सनसनी जिस्म में दौड़ जाती.

रानी की सोने की चूड़ियाँ आपस में टकरा के खनक बिखेर रहीं थीं.

उसने कब अपनी जीभ मेरे मुंह में धकेल दी, पता ही नहीं चला, मैं उसे चूसता रहा और फिर दोनों बूब्स दबाता मसलता रहा.

रानी भी मेरी पीठ सहलाये जा रही थी, कभी कभी अपने नाखून भी गड़ा देती और मुझे कसकर भींच लेती. उसकी कजरारी आँखों में अब वासना के गुलाबी डोरे तैरने लगे थे.

अचानक उसने अपना मुंह खोल दिया ‘आ’…मैंने भी उसका इशारा समझ के अपना मुंह उसके मुंह के ऊपर खोल दिया. लार का पतला सा तार मेरे मुंह से निकला और उसके मुंह में समाने लगा.

फिर मैंने उसे बाहों में बांध के करवट ली और वो मेरे ऊपर आ गई और अपना मुंह खोल दिया इस तरह उसका मुखरस मेरे मुंह में अमृत की बूंदों की तरह गिरने लगा और फिर हमारे होंठ फिर से जुड़ गए.

उफ्फ… कितना अपनापन, कितनी गर्माहट थी उसके चुम्बन में… मेरा बस चलता तो मैं सारी रात यूं ही चूमने चाटने और अधर चुम्बन में गुजार देता!

लेकिन समय की बंदिश थी, एक एक पल कीमती था, अतः मैं उसके ऊपर से थोड़ा उठा और उसका पेट नाभि चूमते हुये उसकी साड़ी निकाल दी और पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी जांघें सहलाने लगा. चिकनी गुदाज जंघाओं का वो उष्ण स्पर्श पाकर मेरी उंगलियाँ उसकी चूत की तरफ बढ़ चलीं और मैंने उसकी चूत को पेटीकोट के ऊपर से ही मुट्ठी में भर लिया, लगा कि जैसे नीचे पेटीकोट के अलावा अन्य कोई आवरण चूत के ऊपर नहीं था और चूत मध्य रेखा में अपनी तर्जनी उंगली फिराई जिससे चूत का चीरा दिखने लगा और चूत का गीलापन झलकने लगा.

 
मैंने बरबस ही अपना मुंह वहाँ रख दिया और पेटीकोट के ऊपर से ही चाटने लगा.

धीरे से पूरी चूत मुंह में ले के दांतों से पकड़ कर हिलाने लगा.

रानी कसमसाई और उसने पेटीकोट का नाड़ा खोल कर ढीला किया और अपनी कमर उठा कर पेटीकोट अपने नीचे से निकाल दिया. मैंने भी देर न करते हुए पेटीकोट निकाल के फर्श पर फेंक दिया. रानी का अनावृत, नग्न जिस्म मेरे सामने था.

सांचे में ढला हुआ बदन, गोरा गुलाबी रंग जैसे दूध में केसर घोल दी हो! वासना की अगन में जलती हुई नवयौवना का मादरजात नंगा बेदाग़ जिस्म मुझे जैसे चीख चीख कर पुकार रहा था कि आओ और रौंद डालो मुझे…

उसके दोनों पुष्ट स्तन भी अभिमान से जैसे सिर उठाये मुझे चुनौती देने के अंदाज़ में तने हुए थे. उसकी कमर में दमकती सोने की करधनी जिसकी कई लड़ियाँ उसकी चूत के ऊपर तक आ रहीं थीं, उनके नीचे उसकी चकाचक फक्क गोरी बिना झांटों वाली चूत!

गुलाबी गोरी गदराई जाँघों के बीच वो सुन्दर सी चूत देख कर दिल खुश हो गया, ज्यादातर भारतीय लड़कियों की चूत श्यामलता लिए हुए सांवली सी होती है परन्तु रानी की चूत और उसकी जाँघों की स्किन एक ही रंगत की थी जिसे देख के चित्त प्रसन्न हो गया.

चूत का चीरा, आकार भी सामान्य से बड़ा था जो उसके डील डौल के अनुसार ही मनोरम था. मैंने उसकी ओर मुग्ध भाव से देखा, वो मेरी ही तरफ देख रही थी, मेरी आँखों में प्रशंसा का भाव पढ़ कर वो धीमे से मुस्कुराई.

‘ऐसे क्या देख रहे हो अंकल?’

‘तुम्हारा निश्छल सौन्दर्य निहार रहा हूँ रानी. कितनी प्यारी योनि है तुम्हारी किसी कुंवारी बालिका की तरह मासूम सी!’

‘आपके लिये ही चिकनी की है अंकल जी. और ये योनि व्योनि जैसे वजनदार शब्द मुझे इस टाइम अच्छे नहीं लगते अंकल जी, आज पहली बार मैंने अपनी चूत क्लीन शेव की हैं. पहले जब ये बाल ज्यादा लम्बे हो जाते थे तो इन्हें कैंची से कुतर देती थी. मैंने अपनी सुहागरात को भी चूत चिकनी नहीं की थी क्योंकि मेरी शादी मेरी मर्जी के खिलाफ इस बदसूरत से आदमी से हुई थी. मेरे पापा गरीब हैं न, दहेज़ तो दे नहीं सकते थे… खैर जाने दो इन बातों को!’

रानी के मुंह से चूत शब्द सुनकर मुझे आनन्द आ गया. रानी बिंदास स्वभाव की है ‘ये तो मस्त होकर चुदवायेगी’ मुझे लगा.

‘अंकल जी अब देखने में समय न गंवाओ. मुझे भोगो, चोदो जल्दी से. और कोई समय होता तो मैं शरमाती, लाज की गठरी बन जाती; आपको कहीं भी हाथ न लगाने देती आसानी से लेकिन आज इन सब बातों का समय नहीं है. कितने तरसने के बाद आज ये पल आये हैं मेरे जीवन में!’

‘अंकल जी… समय कम है मैं इस एक घंटे में सारा जीवन जी लेना चाहती हूँ. जो भी मेरे मन में रहता है मुझे बेचैन किये रहता है उसे मैं अभी पा लेना चाहती हूँ, भोग लेना चाहती हूँ… बस जैसे मैं चाहूँ, जैसे कहूँ आप बस वैसे ही चोदना मुझे. मैं शादी शुदा होकर भी कुंवारी जैसी ही हूँ और आपकी शालिनी से भी कम चुदी हूँ. मुझे चूत लंड चुदाई शब्द खूब अच्छे लगते हैं इसलिए आप तो खुल कर खेलो मेरे साथ, मुझे कुछ भी बोलो! मैंने सारे शब्द बिना लाज शर्म के मुंह से निकाल दिये ताकि आपकी झिझक भी ख़त्म हो जाए और हम चुदाई का भरपूर मज़ा ले सकें.’

‘और अंकल जी, मेरी तमन्ना है कि मेरा पुरुष मुझे तरह तरह से चोदे, जैसे मैं चाहूँ वैसे मुझे रगड़ रगड़ कर रगड़े, मेरी प्यासी चूत को फाड़ के रख दे. मेरे ये सपने मेरा नाकारा पति तो पूरे नहीं कर सकता. आपसे उम्मीद है इसलिए आज मैंने सिर्फ आपके लिए अपनी चूत को आज पहली बार क्लीन शेव्ड किया है; यह मेरा उपहार है आपके लिए इसे स्वीकार करो!’ रानी कातर स्वर में बोली और उसकी आँखें नम हो गईं.

उसकी बातें सुनकर मेरा प्यार भी उस पर उमड़ आया और मैंने उसे हृदय से लगा लिया और उसके मस्तक को प्रेम से चूम लिया.

फिर उसके पैर ऊपर उठा के मोड़ दिये. पैर ऊपर मोड़ने से उसकी सोने की पायलें खिसक कर पिंडली में फंस गईं. जैसे ही मैंने रानी की टाँगें ऊपर कीं, उसने भी तुरंत अपनी चूत अपने हाथों से खोल दी.

मैंने प्यार से बहु रानी की चिकनी चूत को चूमा और खुली हुई चूत में जीभ रख दी. जीभ का स्पर्श चूत में पाते ही रानी के मुंह से कामुक कराह निकली- आह, प्यारे अंकल… आज पहली बार किसी मर्द की जीभ ने मेरी चूत को छुआ है. मेरी हमेशा से तमन्ना थी कि कोई पुरुष मेरी चूत भी चाटे!’ वो बोली और उसने अपनी चूत ऊपर उठा दी.

‘क्यों रानी, तेरा पति नहीं चाटता तेरी इस प्यारी चूत को?’

‘उसका तो नाम मत लो मेरे सामने. वो क्या चाटेगा. वो तो अपना लंड भी मुझे चूसने नहीं देता, कहता है गन्दी बात होती है!’ रानी थोड़ा तैश में आके बोली.

‘कमाल का चूतिया आदमी है? ऐसे आदमी को तो गोली मार देनी चाहिए!’ मैंने मन ही मन सोचा लेकिन कहा कुछ नहीं और रानी की चूत चाटता रहा.

 
उसकी चूत में से एक परिचित विशिष्ट गंध आ रही थी जो मुझे हमेशा अच्छी लगती है. ज्यों ही मैंने उसकी चूत के दाने पर अपनी जीभ फिराई वो उछली, जैसे करेंट लगा हो, उसने मेरे हाथ पकड़े और उठा कर अपने मम्मों पर रख लिये. चूत चाटने की धुन में मैं उसके मम्में जैसे भूल ही बैठा था.

उसके निप्पल को चुटकी में दबाये हुए मैं चूत को चाटता रहा.

‘बस अब नहीं. अब आप अपना लंड निकालो जल्दी से!’ रानी उत्तेजित स्वर में बोली. मैंने अपनी पेंट और शॉर्ट्स तुरंत निकाल फेंके. मेरा लंड मेरे पेट तक जम्प लगा के रानी को जैसे विश करने लगा. अब वो अब अपनी पूरी आन बान और शान से फहरा रहा था रानी बहू रानी की चूत के सामने!

‘वाओ… ग्रेट!’ रानी चहक कर बोली और मेरा लंड थाम लिया अपने हाथ में फिर इसे ऊपर नीचे कर के चार पांच बार मुठियाया और इसे मसल कर दबा कर इसकी कठोरता को परखा और संतुष्ट होकर मेरी तरफ मुस्कुरा के देखा.

रानी के हाथ में जाकर तो लंड और भी अकड़ गया जैसे ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा हो!

‘मस्त है… इसे कहते हैं लंड…’ वो बोली और सुपारा चूम लिया. उसके मुंह से लंड शब्द सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया.

‘चूस लूं इसे एक मिनट?’ उसने मेरी ओर देख के पूछा.

‘एक मिनट क्या… जितनी देर चाहो उतनी देर चूसो. अब तुम इसकी मालकिन हो!’

‘टाइम कम है. एक मिनट ही लूंगी मुंह में… अंकल जी, मुझे लंड चूसने से बहुत आत्म संतुष्टि मिलती है पता नहीं क्यों… आज बहुत दिनों बाद चूस रही हूँ. पहली बार मेरे मामा जी ने लंड चुसवाया था अपना लंड. ब्लू फिल्म में भी मुझे लंड चूसने के सीन बहुत अच्छे लगते हैं. कभी फिर मौका मिला तो सारे अरमान अच्छे से पूरे करूंगी अगली बार!’ वो बोली और लंड को चूसने लगी.

‘जरूर बहू रानी जी. एक बार पालम पुर आना शालिनी के साथ फिर तुम्हारे सारे अरमान रात भर में पूरे कर दूंगा!’

‘आ सकी तो जरूर आऊंगी.’ वो लंड को बाहर निकाल कर बोली और फिर चूसने लगी.

‘बस अंकल, अब चढ़ जाओ मेरे ऊपर और ले लो मेरी चूत जी भर के… देखो कैसी गीली हो कर बह रही है. मैं ज्यादा देर नहीं रुक पाऊँगी, लगता है कि मैं बस झड़ने ही वाली हूँ!’ वासना की अगन में जलती हुई वो कामुक आवाज में बोली.

उसके मुंह से चूत लंड शब्द सुनकर मुझे मज़ा आ रहा था. चुदाई के टाइम मैं भी चाहता हूँ कि मेरे नीचे लेटी चूत वाली लाज संकोच शर्म त्याग के पूरी तरह लंड का मज़ा ले और चूत का मज़ा दे.

मैंने भी देर नहीं की और उसके दोनों पैर अच्छे से फैला लिए और दोनों के बीच में बैठ कर मम्में पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा. रानी भी चुम्बन का जवाब देने लगी साथ में वो अपना एक हाथ नीचे लाई और मेरे लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर लगा लिया और अपनी एड़ियों पर उचक कर अपनी कमर उछाली.

लंड ने सट्ट से चूत में गोता लगाया. चूत की संकरी गली में मेरा बड़े आंवले जैसा सुपारा तमाम अवरोधों को दूर हटाता उसकी प्यासी चूत में धंस गया.

रानी के मुंह पर पीड़ा के चिह्न उभरे लेकिन वो दर्द को पी गई पर मुंह से कुछ न बोली.

‘आह राजा… आज पूरे साढ़े आठ महीने बाद लंड मिला है मेरी चूत को!’ वो मुझे चूमते हुए बोली.

‘रानी, मेरी जान, बहुत कसी हुई चूत है तेरी तो. बिल्कुल कुंवारियों की तरह लग रही है.’

‘मेरे राजा, अभी ये चुदी ही कहाँ है ढंग से. आज आप इसके पूरे कस बल निकाल दो, ढीली ढाली कर दो इसे चोद चोद के!’

‘तो ये ले फिर!’ मैं बोला और लंड को जरा सा पीछे ले के फिर धकेल दिया उसकी चूत की गहराई में. मेरी झांटें उसकी चूत से जा मिलीं.

 
‘उई माँ…’ उसके मुंह से निकला और उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिये जोर से!

शुरूआती धक्के तो मैंने आराम से धीरे धीरे लगाए, जब चूत थोड़ी खुल गई और लंड सरपट दौड़ने लगा तो मैंने टॉप गियर में चुदाई शुरू की.

जल्दी ही बहूरानी की चूत गीत गाने लगी… फच फच फचाफाच की मुधुर ध्वनि से कमरा गूँज उठा.

मुश्किल से दो मिनट ही बीते होंगे कि रानी का बदन अकड़ने लगा.

‘मेरे राजा सुनो, धक्के लगाना बन्द करो और चुपचाप पड़े रहो चूत में लंड फंसाए, आप हिलना नहीं बिल्कुल. मैं बस आ ही गई; इस पल को अच्छे से महसूस करना चाहती हूँ; लंड की धड़कन को, इस सुखद अनुभूति को अपनी यादों में बसा लेना चाहती हूँ हमेशा के लिए!’ वो मेरा माथा चूमती हुई बोली और अपनी चूत ऊपर की ओर उठा दी.

उसकी बात सुनकर मैंने धक्के लगाना बन्द कर दिया और चुपचाप उसके ऊपर लेटा रहा.

‘हाँ… ऐसे ही अपना लंड मेरी चूत में दिये पड़े रहिये… मैं झड़ने वाली हूँ… लेकिन आप नहीं हिलना बस… थोड़ा सा ऊपर हो जाओ ताकि मैं अपनी चूत ऊपर उठा के दे सकूं आपको… इसे उलीच सकूँ आपके लंड पे!’ वो कामाग्नि में जलती हुई बोली.

उसकी बातें सुनता हुआ मैं शान्त चुपचाप पड़ा रहा उसके ऊपर!

‘राजा तुम धक्के मत लगाना… हाँ मैं आई… आ गई… मेरे दूध कस के पकड़ लो… मैं चुद रही हूँ अपने स्वप्न पुरुष से… झड़ रही हूँ अब… ये लो ये लो आह… आज मैं तृप्त हुई अंकल राजा!’ वो मिसमिसाते हुए ऐसे बोल बोल के झड़ने लगी.

मैंने भी उसके दोनों बूब्स कस के दबोच लिए. उसने मुझे अपने बाहुपाश में पूरी ताकत से जकड़ लिया साथ में अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट के किसी आक्टोपस की तरह मुझे अपनी गिरफ्त में ले लिया.

कोई दो तीन मिनट तक वो यूं ही मुझसे चिपटी रही उसकी चूत की मांसपेशियाँ स्वतः ही मेरे लंड को जकड़ती रहीं. फिर उसका भुजबंधन शिथिल पड़ गया. सम्भोग श्रम से उसके माथे पर पसीना छलकने लगा था.

‘थैंक्स अंकल!’ वो बोली.

मैंने समय देखा तो अभी सिर्फ सात बजकर दस मिनट ही हुए थे. मैंने अंदाज़ लगाया कि उसकी चूत में लंड पेलने के कोई चार पांच मिनट में ही अपने चरम पर पहुँच गई थी, कई महीने बाद चुदी थी शायद इसलिए!

लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था- ये क्या बहू रानी जी, तुम तो इतनी जल्दी निपट लीं. मेरा क्या होगा?’ मैंने उससे शिकायत की.

‘अंकल जी, मैं बहुत हॉर्नी फील कर रही थी. मुझे तो लग रहा था कि मैं बिना चुदे ही झड़ने वाली हूँ. लेकिन मैं हूँ न अभी आपके पास! अभी एक घंटा और है अपने पास जैसे चाहो चोद लो मुझे फिर मेरे भीतर ही झड़ जाना आप! मैं आपके वीर्य को भी महसूस करना चाहती हूँ अपने भीतर, अगर आपका बीज मुझमें अंकुरित हो गया तो मुझे और ख़ुशी होगी.’ वो हर्षित होकर बोली.

उसकी बात सुनकर मैंने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला और पेटीकोट से उसकी चूत को और अपने लंड को अच्छे से पोंछा फिर लंड को उसके मुंह के आगे कर दिया.

मेरा इशारा समझ वो सुपारा मुंह में ले गई और इसे खूब गीला करके चूसने लगी जैसे पाइप से कोल्ड ड्रिंक चूसते हैं.

लंड अब अच्छी तरह से टनटना गया था. मैंने रानी कि कमर के नीचे तकिया लगाया, उसके दोनों पैर अपने कन्धों पर रखे और मम्में जकड़ कर लंड को पूरी दम से पेल दिया उसकी चूत में… एक ही वार में लंड जड़ तक फिट हो गया उसकी बुर में.

‘उफ्फ… धीरे… ऐसी बेरहमी मत दिखाओ अपनी रानी पर!’ वो विचलित होती हुई बोली.

लेकिन मैं उसकी बात अनसुनी करके अपने हिसाब से चोदने लगा उसे… मेरे आड़े तिरछे सीधे गहरे शॉट्स उसे पागल किये दे रहे थे और वो तेज आवाज में जोर जोर से चोदने के लिए मुझे उकसा रही थी.

मैंने उसके पैर अपने कन्धों से उतारे और मोड़ कर उसी को पकड़ा दिये इससे उसकी चूत अच्छी तरह से उठ गई; अब मैंने चूत में चक्की चलाना शुरू की… सीधी फिर उल्टी.. फिर सीधी…

इस तरह की चुदाई रानी के लिए एकदम नया अनुभव था. वो भी अपनी कमर हिला हिला कर मुझे प्रोत्साहित करने लगी- अंकल जीईईई… हाँ ऐसे ही… फाड़ डालो इसे… कुचल दो इस हरामन चूत को! बहुत परेशान करती है मुझे ये! हाँ… और तेज… यस… यस मैं फिर से आ रही हूँ मेरे राजा… लो संभालो मुझे!

इस बार वो और खुल के झड़ी जैसे सुनामी आ गई हो उसकी चूत में!

 


मेरी झांटें तक भीग गईं उसके रस से… मैंने घड़ी की ओर देखा साढ़े सात हो चुके थे, अब मैं भी जी तोड़ कोशिश कर रहा था कि जल्द से जल्द मेरी भी छूट हो जाय लेकिन लंड तो लोहे की गर्म रॉड की तरह हो रहा था और झड़ने की फीलिंग अभी दूर दूर तक नहीं थी.

जल्दी झड़ने के लिए मैंने पोज चेंज किया और अपने हाथ पैरों के सहारे थोड़ा सा ऊपर उठ गया. अब सिर्फ मेरा लंड ही उसकी चूत में था बाकी मेरे शरीर का कोई अंग उससे स्पर्श नहीं कर रहा था. मैंने इसी पोज में उसकी चूत को ठोकना शुरू किया तो रानी फिर से जोश में आकर मेरे लंड से अपनी चूत लड़ाने लगी और मिसमिसा कर अपने दूध खुद ही मसलने लगी.

फिर उसने मेरे गले में हाथ डालकर मुझे झुका लिया और मेरे होंठ काटने लगी ‘हाय राजा, चोदो मुझे… मस्त चुदाई करते हो आप! बेरहमी से फाड़ो मेरी बुर आज! पता नहीं फिर लंड कब मिले मुझे, अच्छी तरह से चटनी बना दो चूत की! हाँ हाँ… और जोर से… जल्दी जल्दी… मैं फिर से झड़ने पे आ रही हूँ… हाय रे!

ऐसे बड़बड़ाते हुए उसके मुंह से किलकारियाँ निकलने लगीं. मैं नहीं चाहता था कि वो फिर से जल्दी झड़ जाए इसलिए मैंने पोज बदलने की सोची.

‘रानी, मेरी जान. चल अब तू घोड़ी बन जा फिर चोदता हूँ तुझे’ मैंने कहा और रानी को फर्श पर खड़ा करके उसे बेड पर झुका दिया

और लंड फिर से चूत में पेल के ताबड़तोड़ धक्के देने लगा, नीचे उसके मम्में झूला झूलने लगे जिन्हें मैंने मुट्ठी में भर के खूब अच्छे से मसल दिया.

फिर मैंने रानी की चोटी अपने हाथ में लपेट के खींच ली जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और पूरी बेरहमी से चोदने लगा.

‘आह अंकल जी, धीरे… अब इतने बेरहम भी न बनो मेरे साथ!’ उसके मुंह से कराह निकली.

लेकिन मैं उसे अनसुना करके अपनी ही धुन में लंड पेलता रहा. मैं जोर का धक्का मारता तो लंड घुसने के साथ साथ मेरी जांघें उसके नितम्बों से टकराती और चट पट की आवाजें निकलतीं. ऐसे चोदने से उसकी चूत बुरी तरह पनियाँ के पानी छोड़ने लगी जो उसकी जाँघों पर से नीचे बहने लगा.

मैं इसी पोज में धक्के लगाने के साथ साथ उसकी पीठ को चूमता हुआ हिप्स पर चांटे भी मारता जा रहा था जिससे वो और उत्तेजित हो हो कर कमर हिला रही थी.

‘अब छोड़ो अंकल जी. मैं थक गई ऐसे में… मुझे लिटा लो और फिर दम से चोदो मुझे. लेकिन जल्दी जल्दी करना, मैं बस झड़ने के करीब ही हूँ!’

मैंने उसे छोड़ दिया और बिस्तर पर ही औंधा लिटा के उसके दोनों पैर बेड के किनारे लम्बाई दायें बाएं फैला दिये इस तरह वो उल्टी T के आकार में हो गई, उसके पेट के आगे का हिस्सा बिस्तर पर था और दोनों पैर पलंग की पाटी पर दायें बाएं फैले थे, उसकी गांड अच्छे से उभर आई थी और चूत का छेद भी एक रुपये के सिक्के के बराबर खुला हुआ दिख रहा था.

मैंने चूत पर लंड टिका के पेल दिया और उसकी पीठ चूमते हुए उसके कंधे पकड़ के चोदने लगा. यह पोज मुझे बहुत पसंद है, इसमें लंड भी अच्छा टाइट जाता है चूत में और धक्के मारने में

लड़की के हिप्स का सपोर्ट भी मिलता है जिससे आनन्द और बढ़ जाता है.

इस तरह मैं उसे लगातार चोदता रहा. जल्दी ही मैं झड़ने की कगार पर आ गया और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारियाँ छूटने लगीं.

‘हाय अंकल.. मैं फिर से आ गई. कितना अच्छा लग रहा है आपका भी साथ साथ झड़ना… ऐसे ही झड़ते रहो मेरी चूत में… अभी लंड बाहर मत निकालना. लंड का पानी अच्छे से मेरे गर्भाशय में जाने दो, मेरी गोद हरी हो जायेगी.’ उसने कहा.

मैं भी उसके ऊपर यूं ही पड़ा रहा, उसकी चूत संकुचित हो हो कर लंड से वीर्य की एक एक बूँद निचोड़ती रही.

जब लंड पूरी तरह से निचुड़ गया तो उसकी चूत अपने आप सिकुड़ गई और लंड महाराज भी मुंह लटकाये बाहर आ गए.

 


मैं उठ के खड़ा हो गया रानी भी मेरे पास आकर खड़ी हो गई और अपनी बाहों का हार मेरे गले में पहना के चूम लिया मुझे!

‘थैंक्स अंकल जी, आज मैं तृप्त हुई!’ वो बोली और अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया.

मैंने भी उसे अपनी बांहों में बांध लिया प्यार से… कुछ देर हम दोनों यूं ही दीन दुनिया को भूले हुए एक दूजे से लिपटे खड़े रहे.

फिर शालिनी की आवाज ने हमें चौंकाया- अरे, अब आप लोग संभल भी जाओ. घड़ी तो देखो, आठ बीस हो गए!’

शालिनी कमरे में आ गई थी.

रानी शर्माते हुए मेरी बाहों से निकल के दूर खड़ी हो गई.

हम दोनों अभी नंगे ही थे किसी ने भी खुद को छिपाने का जतन नहीं किया.

‘आय हाय ये तो देखो… चुदाई का रस भाभी की जाँघों पर से बह रहा है. अब पौंछ भी लो भाभी अपनी चूत और टाँगें! तुम्हारी सासू माँ आती ही होंगी अब!’ शालिनी बोली.

रानी ने झेंप कर पास में रखा तौलिया उठाया और अपनी चूत अच्छे से पौंछ ली और ब्लाउज पहन कर साड़ी अच्छे से बाँध ली और मेरे पास आकर मेरा लंड भी तौलिये से अच्छे से पौंछ दिया और गीला तौलिया बिस्तर के गद्दे के नीचे छिपा दिया.

‘थैंक्स अंकल जी. आप मुझे हमेशा याद रहोगे! कोशिश करूंगी पालम पुर आने की!’ रानी मुझसे बोली.

‘जरूर आना बहू रानी, मैं हमेशा इंतज़ार करूंगा तुम्हारा!’ मैंने भी गंभीरता से कहा.

‘चुद लीं न अच्छे से भाभी जी?’ शालिनी रानी को चिकोटी काटते हुए बोली.

‘हाँ मेरी प्यारी ननद रानी, चुदवा ली. मस्त मज़ा आ गया. अब तू भी जा ऊपर और रात भर चुदवा अपने अंकल से!’ रानी शालिनी का बूब मसलते हुए बोली.

‘रानी, एक बात कहूँ?’ मैं बोला.

‘हाँ अंकल जी, कहिये न?’ वो बोली.

‘देखो बहूरानी, तुम्हारे बारे में शालिनी ने मुझे सब कुछ बता दिया है. मैंने भी तुम्हारे बारे में काफी सोचा है. इस तरह यहाँ घुट घुट के जीने का कोई मतलब नहीं है. तुम पढ़ी लिखी हो सुन्दर हो, तुमने एम बी ए कर रखा है, तुम्हारी उम्र भी अभी कोई ज्यादा नहीं, तेईस चौबीस की ही होगी तुम… यहाँ अपने टैलेंट को यूं बर्तन मांज के रोटी बना के बर्बाद करने का कोई अर्थ नहीं है. मेरा विचार है कि तुम अपने मायके चली जाओ और जैसे बने अपने नाकारा पति से तलाक ले लो और कोई अच्छी जॉब ट्राई करो. आजकल ढेरों जॉब्स निकल रहीं हैं. इससे तुम्हारा जीवन सुखी हो जाएगा.’ मैंने उसे समझाया.

‘अंकल जी, आप सही कह रहे हैं. मैं अभी साढ़े चौबीस साल की ही हूँ, मैंने भी यही सब सोच रखा है लेकिन कुछ कहने करने की हिम्मत ही नहीं होती. अब आपने हिम्मत बंधाई है तो जल्दी ही किसी बहाने मम्मी के पास चली जाऊँगी फिर लौट के नहीं आना है इस घर में. जॉब के लिए बैंक या रेलवे में ट्राई करूंगी!’ वो विश्वास से बोली.

तभी रानी की सास की आवाज बाहर से आई, वो दरवाजा खोलने के लिए चिल्ला रही थी.

मैं और शालिनी दबे पांव वहाँ से निकल लिये.

तो मित्रो, अब आगे लिखने के लिई कुछ शेष नहीं है. हाँ अगले दिन मैं वापस पालम पुर आ गया और ज़िन्दगी फिर से अपनी तरह चलने लगी.

जैसा कि मैंने पहले ही लिखा है कि नवम्बर में दीवाली थी सो शालिनी दीपावली कि छुट्टियों में घर आई, एक दिन मौका मिलते ही हम लोग कहीं दूर एकांत में मिले भी. वो भी पहले की तरह सलवार कुर्ता पहन के आई थी. सलवार की सिलाई भी पहले की तरह ही उधड़ी हुई थी.

निपटने के बाद मैंने रानी के बारे में पूछा तो वो बोली- आपका बीज जम गया है और वो अब प्रेगनेंट है और बहुत खुश रहती है और हाल फिलाहल तो वो अपने मायके चली गई है. मुझसे कह के गई है अब कभी नहीं लौटेगी भोपाल.

मित्रो, इन बातों को कई वर्ष बीत चुके हैं. शालिनी का विवाह भी हो चुका और दो बच्चे भी हैं उसके अब. जब भी पालम पुर आती है तो मुझसे ‘मिल’ कर ही जाती है. उसका स्नेह प्यार अभी भी पहले जैसा ही है.

रानी के बारे में भी उसने एक बार फोन पर बताया था कि उसे जुड़वां बेटे हुए थे और उसने अपने नाकारा पति से तलाक लेकर एक प्रतिष्ठित बैंक में जॉब करनी शुरू कर दी थी और अब दूसरी शादी भी कर ली है और बहुत खुश है.

यह सब जान कर मुझे अच्छा लगा और संतोष भी हुआ कि चलो अब रानी का जीवन भी सुखमय हो गया.

तो मित्रो, यह सेक्सी कहानी आपको कैसी लगी. अपने विचार मुझे जरूर नीचे लिखे

samapt

 
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