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लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद जानकी लाल ने कांता को अपनी बाहों से मुक्त कर दिया और उसे उठने का इशारा किया……. कांता जानकी लाल के इशारे को समझ कर उठ गयी…… जानकी लाल उठ कर बेड के किनारे पर अपनी दोनो टाँगों को लटका कर बैठ गये….. जानकी लाल का लंड बिल्कुल तन्नाया हुया था……… और छत की तरफ सिर करके खड़ा था………….. जानकी लाल ने कांता को गोद मे आकर अपने लंड पर बैठने का इशारा किया……….. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो को पीछे ले जाकर बेड पर टिका दिया ताकि कांता को बैठने मे आसाने रहे.
कांता अपनी दोनो टाँगो को चौड़ी करके जानकी लाल के लंड पर अपनी चूत की टिकाती हुई जानकी लाल की गोद मे बैठ गयी……. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो से कांता के विशाल कुल्हो को थाम लिया…….. इस पोज़िशन मे जानकी लाल का मुँह कांता की दोनो चूचियो के बीच मे था……. जानकी लाल ने कांता की एक चूची को अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरू किया और कांता के कुल्हो को अपने लंड पर दबाने
लगे………. कांता भी उनके हाथो का इशारा समझ कर धीरे धीरे अपनी गान्ड को आगे पीछे हिलाने लगी और साथ ही साथ जानकी लाल के सिर को पकड़कर अपनी चुचियों पर दबाने लगी…………..
जानकी लाल का लंड किसी मोटे पाइप की तरह कांता की चूत मे आ जा रहा था. कांता बार बार अपने होंठो को दांतो से चबा रही थी. ये इस बात का सबूत था कि कांता को जानकी लाल का लंड अपनी चूत मे लेकर बड़ा मज़ा आ रहा था.. जानकी लाल अपने हाथो से कांता के दोनो कुल्हो को दबाते हुए बोले ……..
जानकी लाल: एक बात कहूँ बहू……….
कांता: (मदहोशी की आवाज़ मे) हहाआआआआअ बाबू जी………………. बोलिए ना…………..
जानकी लाल: तुम्हारे ये कूल्हे बड़े जानलेवा है……………………… सच कह रहा हूँ बहू………
कांता: ऐसी क्या बात है मेरे कुल्हो मे………. सभी औरतो के कूल्हे तो ऐसे ही होते है………………..
जानकी लाल कांता को गोद मे पकड़े हुए ही उठ गये और घूम कर कांता को बेड पर लिटा दिया….. कांता के घुटनो के नीचे पैर बेड के नीचे लटके हुए थे……….. जानकी लाल का लंड कांता की चूत मे ही फ़सा हुआ था…………… कांता के बेड पर लेट ते ही जानकी लाल ने अपने
धक्के फिर से शुरू कर दिए और कांता से बोले…………………
जानकी लाल: अरे बहू तुम्हारे कुल्हो की बात ही कुछ और है…….. अगर इनको मुर्दा भी देख ले तो वो भी तुम्हारी मारने के लिए उठ खड़ा हो…….. ऐसे कातिलाना है तुम्हारे कूल्हे………….
कांता : जाआअन्न्नननननननणणनीई दीजिए बाबू जी ……………………………. इतने भी अच्छे नही है मेरे कूल्हे……………..
जानकी लाल: अरे तुम्हे क्या पता कांता……….. इन कुल्हो ने मेरी कितनी नींद हराम कर रखी है……………… जब भी मैं तुम्हे झुका हुआ देखता था तो मन करता था कि बस अभी तुम्हारा पेटिकॉट उठाकर इसकी बॅंड बजा डून……… लेकिन क्या करता मैं मजबूर था………….तुम्हे क्या पता कांता मैने बाथरूम मे कितनी बार हाथ से किया है तुम्हारे कुल्हो के बार मे सोचकर……………
कांता अपनी दोनो टाँगो को चौड़ी करके जानकी लाल के लंड पर अपनी चूत की टिकाती हुई जानकी लाल की गोद मे बैठ गयी……. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो से कांता के विशाल कुल्हो को थाम लिया…….. इस पोज़िशन मे जानकी लाल का मुँह कांता की दोनो चूचियो के बीच मे था……. जानकी लाल ने कांता की एक चूची को अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरू किया और कांता के कुल्हो को अपने लंड पर दबाने
लगे………. कांता भी उनके हाथो का इशारा समझ कर धीरे धीरे अपनी गान्ड को आगे पीछे हिलाने लगी और साथ ही साथ जानकी लाल के सिर को पकड़कर अपनी चुचियों पर दबाने लगी…………..
जानकी लाल का लंड किसी मोटे पाइप की तरह कांता की चूत मे आ जा रहा था. कांता बार बार अपने होंठो को दांतो से चबा रही थी. ये इस बात का सबूत था कि कांता को जानकी लाल का लंड अपनी चूत मे लेकर बड़ा मज़ा आ रहा था.. जानकी लाल अपने हाथो से कांता के दोनो कुल्हो को दबाते हुए बोले ……..
जानकी लाल: एक बात कहूँ बहू……….
कांता: (मदहोशी की आवाज़ मे) हहाआआआआअ बाबू जी………………. बोलिए ना…………..
जानकी लाल: तुम्हारे ये कूल्हे बड़े जानलेवा है……………………… सच कह रहा हूँ बहू………
कांता: ऐसी क्या बात है मेरे कुल्हो मे………. सभी औरतो के कूल्हे तो ऐसे ही होते है………………..
जानकी लाल कांता को गोद मे पकड़े हुए ही उठ गये और घूम कर कांता को बेड पर लिटा दिया….. कांता के घुटनो के नीचे पैर बेड के नीचे लटके हुए थे……….. जानकी लाल का लंड कांता की चूत मे ही फ़सा हुआ था…………… कांता के बेड पर लेट ते ही जानकी लाल ने अपने
धक्के फिर से शुरू कर दिए और कांता से बोले…………………
जानकी लाल: अरे बहू तुम्हारे कुल्हो की बात ही कुछ और है…….. अगर इनको मुर्दा भी देख ले तो वो भी तुम्हारी मारने के लिए उठ खड़ा हो…….. ऐसे कातिलाना है तुम्हारे कूल्हे………….
कांता : जाआअन्न्नननननननणणनीई दीजिए बाबू जी ……………………………. इतने भी अच्छे नही है मेरे कूल्हे……………..
जानकी लाल: अरे तुम्हे क्या पता कांता……….. इन कुल्हो ने मेरी कितनी नींद हराम कर रखी है……………… जब भी मैं तुम्हे झुका हुआ देखता था तो मन करता था कि बस अभी तुम्हारा पेटिकॉट उठाकर इसकी बॅंड बजा डून……… लेकिन क्या करता मैं मजबूर था………….तुम्हे क्या पता कांता मैने बाथरूम मे कितनी बार हाथ से किया है तुम्हारे कुल्हो के बार मे सोचकर……………