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कांता की कामपिपासा

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद जानकी लाल ने कांता को अपनी बाहों से मुक्त कर दिया और उसे उठने का इशारा किया……. कांता जानकी लाल के इशारे को समझ कर उठ गयी…… जानकी लाल उठ कर बेड के किनारे पर अपनी दोनो टाँगों को लटका कर बैठ गये….. जानकी लाल का लंड बिल्कुल तन्नाया हुया था……… और छत की तरफ सिर करके खड़ा था………….. जानकी लाल ने कांता को गोद मे आकर अपने लंड पर बैठने का इशारा किया……….. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो को पीछे ले जाकर बेड पर टिका दिया ताकि कांता को बैठने मे आसाने रहे.

कांता अपनी दोनो टाँगो को चौड़ी करके जानकी लाल के लंड पर अपनी चूत की टिकाती हुई जानकी लाल की गोद मे बैठ गयी……. जानकी लाल ने अपने दोनो हाथो से कांता के विशाल कुल्हो को थाम लिया…….. इस पोज़िशन मे जानकी लाल का मुँह कांता की दोनो चूचियो के बीच मे था……. जानकी लाल ने कांता की एक चूची को अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरू किया और कांता के कुल्हो को अपने लंड पर दबाने

लगे………. कांता भी उनके हाथो का इशारा समझ कर धीरे धीरे अपनी गान्ड को आगे पीछे हिलाने लगी और साथ ही साथ जानकी लाल के सिर को पकड़कर अपनी चुचियों पर दबाने लगी…………..

जानकी लाल का लंड किसी मोटे पाइप की तरह कांता की चूत मे आ जा रहा था. कांता बार बार अपने होंठो को दांतो से चबा रही थी. ये इस बात का सबूत था कि कांता को जानकी लाल का लंड अपनी चूत मे लेकर बड़ा मज़ा आ रहा था.. जानकी लाल अपने हाथो से कांता के दोनो कुल्हो को दबाते हुए बोले ……..

जानकी लाल: एक बात कहूँ बहू……….

कांता: (मदहोशी की आवाज़ मे) हहाआआआआअ बाबू जी………………. बोलिए ना…………..

जानकी लाल: तुम्हारे ये कूल्हे बड़े जानलेवा है……………………… सच कह रहा हूँ बहू………

कांता: ऐसी क्या बात है मेरे कुल्हो मे………. सभी औरतो के कूल्हे तो ऐसे ही होते है………………..

जानकी लाल कांता को गोद मे पकड़े हुए ही उठ गये और घूम कर कांता को बेड पर लिटा दिया….. कांता के घुटनो के नीचे पैर बेड के नीचे लटके हुए थे……….. जानकी लाल का लंड कांता की चूत मे ही फ़सा हुआ था…………… कांता के बेड पर लेट ते ही जानकी लाल ने अपने

धक्के फिर से शुरू कर दिए और कांता से बोले…………………

जानकी लाल: अरे बहू तुम्हारे कुल्हो की बात ही कुछ और है…….. अगर इनको मुर्दा भी देख ले तो वो भी तुम्हारी मारने के लिए उठ खड़ा हो…….. ऐसे कातिलाना है तुम्हारे कूल्हे………….

कांता : जाआअन्न्‍नननननननणणनीई दीजिए बाबू जी ……………………………. इतने भी अच्छे नही है मेरे कूल्हे……………..

जानकी लाल: अरे तुम्हे क्या पता कांता……….. इन कुल्हो ने मेरी कितनी नींद हराम कर रखी है……………… जब भी मैं तुम्हे झुका हुआ देखता था तो मन करता था कि बस अभी तुम्हारा पेटिकॉट उठाकर इसकी बॅंड बजा डून……… लेकिन क्या करता मैं मजबूर था………….तुम्हे क्या पता कांता मैने बाथरूम मे कितनी बार हाथ से किया है तुम्हारे कुल्हो के बार मे सोचकर……………

 
जानकी लाल की सेक्स से भरी बाते सुनकर कांता की चूत और पनियाने लगी………………….. कांता को भी जानकी लाल के खुले हुए शब्दो मे बात करना और अच्छा लग रहा था,……………… जानकी लाल को और उकसाने के इरादे से कांता बोली:

कांता: वैसे बाबू जी क्या सोचते थे आप मेरे बारे मे …………….. सच बताईएगा………

जानकी लाल: अरे बेटी मैं तो यही सोचता था कि मैं तुम्हारी गान्ड मार रहा हूँ और तुम भी उछल उछल कर मेरा साथ दे रही हो……………

पहली बार जानकी लाल ने गान्ड शब्द का प्रयोग किया था……………….

कांता अपनी चूत जानकी लाल के लंड पर उचकाती हुई बोली…………….

कांता: तो आपको मेरी गान्ड ने बहुत परेशान किया है

जानकी लाल: मत पूछो बेटी……………. इस जालिम ने किस तरह मुझे तडपाया है

कांता: तो ठीक है बाबू जी…………. आज आप भी इसको जी भर के तडपा लीजिए …………………….. आज की रात इसे मैं आपके

हवाले करती हूँ.

असल मे कांता खुद भी जानकी लाल के लंड को अपनी गान्ड मे महसूस करना चाहती थी……………..

ये सुनकर जानकी लाल ने अपना लंड कांता की चूत से बाहर खीच लिया…………. कांता जानकी लाल के लंड को देख कर बोली…………

कांता: लेकिन क्या ये आपका मेरे अंदर चला जाएगा……………

जानकी लाल: (अपने लंड को कांता के मुँह के पास ले जाकर बोले) ये गान्ड और चूत के छेद देखने मे ही छोटे होते है मगर जब अपनी असली

औकात पर आते है तो इसमे कुछ भी समा जाता है…….. अरे बेटी तुम्हारी इस बड़ी गान्ड के आगे मेरे छोटे से लंड की क्या औकात है

…………………………. बस ज़रा सा इसे तुम अपने जीभ से गीला कर दो……. ये कह कर जानकी लाल ने अपना लंड कांता के कामुक

होंठो से सटा दिया……..

कांता ने भी अपना मूह खोलकर गप्प्प्प्प्प्प्प्प से जानकी लाल का लंड अपने मुँह मे ले लिया

 
जल्दी ही जानकी लाल का लंड कांता के थूक से बिल्कुल भीग गया और काफ़ी चिकना हो गया……… तब जानकी लाल ने कांता को बेड पर पेट के बल होने के लिए कहा………. जब कांता बेड पर पेट के बल हो गयी तो जानकी लाल ने उसके पैरो को थोड़ा खीचकर बेड के नीचे लटका दिया……. और उसकी दोनो टाँगों के बीच मे खड़े होकर कांता को अपनी गान्ड उपर उठाने का इशारा किया…………

कांता ने जैसे ही अपनी गान्ड हवा मे उठाई तो उसके दोनो कूल्हे विपरीत दिशा मे फैल गये जिससे कांता की गान्ड का गुलाबी छेद जानकी लाल को नज़र आने लगा….. जानकी लाल ने कांता की गान्ड के छेद पर अपने हाथ की बीच वाली उंगली अपनी थूक मे भिगोकर लगाई……..

वैसे तो कांता की गान्ड कई बार मारी जा चुकी थी लेकिन फिर भी उसकी गान्ड मे काफ़ी कसावट थी….. जानकी लाल ने ज़ोर लगा कर अपनी उंगली कांता की गान्ड के छेद मे घुसाइ…… कांता के मुँह से हल्की आह निकल गयी…… कांता ने अपना सिर घुमा कर जानकी लाल को देखा……… जानकी लाल उसकी नज़रो को देख कर ये भाप गये की कांता क्या कहना चाह रही है…………

जानकी लाल तुरंत अपने कमरे मे रखी हुई ड्रॉयर मे से वॅसलीन निकाली और उसमे अपनी उंगली डुबाकर कांता की गान्ड मे वॅसलीन लगाने लगे………. वॅसलीन की चिकनाई की वजह से अब जानकी लाल की उंगली कांता की गान्ड मे आराम से आ जा रही थी……… जानकी लाल धीरे धीरे अपनी दूसरी उंगली भी कांता की गान्ड मे डाल दिए………… अब कांता की गान्ड चौड़ी हो गयी थी और उसमे जानकी लाल की उंगली को आने जाने मे ज़्यादा मशक्कत नही करनी पड़ रही थी…………………

जब जानकी लाल ने देखा कि कांता की गान्ड की आंतरिक नसें वॅसलीन की चिकनाई से फ्लेक्सिबल हो गयी तो उसने अपने लंड पर वॅसलीन लगाते हुए टोपे को कांता की गान्ड के छेद पर टिका दिया…….. जानकी लाल के टोपे का गरम स्पर्श अपनी गान्ड पर पड़ते ही कांता समझ गयी क़ि जानकी लाल का वज़ीर अब पिछले दरवाजे यानी उसके गान्ड रूपी महल मे प्रवेश करने वाला है……… कांता को गान्ड मरवाने का काफ़ी एक्सपीरियेन्स था…. इसलिए कांता ने अपनी गान्ड को बिल्कुल ढीला छोड़ रखा था……. जिस से कि जानकी लाल का लंड सरलता से उसकी गान्ड मे घुस सके………… जानकी लाल ने अपने लंड का सुपाड़ा कांता की गान्ड पर रखने के बाद उसकी कमर को पकड़ कर अपने लंड का दबाव कांता की गान्ड के छेद पर डाल दिया……… जानकी लाल का एक्सपीरियेन्स……………. कांता की गान्ड का आकार……………. जानकी लाल के लंड पर वॅसलीन की चिकनाई…………………… कांता की गान्ड की नसों की चिकनाहट…………. और कांता का गान्ड मरवाने का एक्सपीरियेन्स……………………………… इन गान्ड मराई की अनुकूल परिस्थितियो के कारण जानकी के लंड का टोपा बड़े ही आराम से कांता की गान्ड मे समा गया…… सुपाडे का अंदर प्रवेश के बाद अपने दोनो हाथ बढ़ा कर कांता की झूलती हुई मोटी एवं कठोर चूचियो को अपने दोनो हाथो से मसल्ते हुए बोले……………

जानकी लाल: क्यो बहुउऊुुुुुुुुुुुुुउउ…………………. देखा………. अब हमारे वज़ीर ने तुम्हारे पीछे वाले हिस्से पर आक्रमण करना शुरू कर दिया है………….. …………….

 
कांता: अरे बाबू जी…………. मैं भी आपके इस हमले से निपटने के लिए बिल्कुल तैयार हूँ…………………. आप तो अपने वज़ीर से कह

दीजिए की जितनी ताक़त है…………. पूरा ज़ोर लगाकर धावा बोलिए………. वैसे भी मैने ऐसे आक्रमण खूब झेले है………………………

कांता की बाते सुनकर जानकी लाल ने कांता की रोबीली बाते सुनकर अपने दोनो हाथों से कांता के कंधे को पकड़ा और एक तेज का झटका लगा दिया……….. फलस्वरूप जानकी लाल का आधा लंड कांता की गान्ड मे घुस गया……….. जैसे ही लंड कांता की गान्ड मे घुसा कांता के मुँह से एक हल्की चीख निकल गयी…

जानकी लाल कांता की गान्ड मे अपने लंड को आगे पीछे करते हुए बोले…………………..

जानकी लाल;: क्यो बहुउऊुुुुुुुुुुुउउ………….. अभी तो मेरा वज़ीर आधा ही प्रवेश किया है…………….. और तुम्हारे मुँह से अभी से आह

निकलने लग गयी………….

ये कह कर जानकी लाल अपने हाथो मे कांता की चूचियों को लेकर मसल्ते हुए अपनी कमर को आगे पीछे हिलाने लगे…………….. जानकी लाल के लंड पर कांता की गान्ड के छल्ले बिल्कुल कसे हुए थे…….. कुछ देर धक्का लगाने से कांता की गान्ड और फैल गयी और जानकी लाल का लंड कांता की गान्ड मे आराम से अंदर बाहर आने जाने लगा………………………..

कांता ने भी अपनी गान्ड को आगे पीछे हिलाकर ये स्पष्ट कर दिया कि उसका पिच्छला द्वार, अगले हमले के लिए तैयार है…….. …..

जानकी लाल ने फिर से अपना हाथ चूचियो से हटाकर कांता के कंधे को थाम लिया………… और अपने धक्को को वैसे ही रखा…….. जब जानकी लाल को लग गया कि……… अब कांता नॉर्मल है तो धक्के लगाते लगाते अचानक ही एक बड़ा प्रहार जानकी लाल ने अपने लंड से

कांता की गान्ड पे किया…….. फलस्वरूप जानकी लाल का लंड कांता की गान्ड के भीतरी छल्ले को पार करते हुए पूरा का पूरा अंदर समा

गया……………………

लंड के अंदर घुसते ही कांता के मूँह से एक लंबी आआआअहह निकल गयी…………….

कांता: अहह………….. सीईईईईईई ……………. आप ने तो मेरी जान ही निकाल दी बाबू जीिइईईईईईईईईईईईई……………..

ये सुनकर जानकी लाल थोड़ा रुक गये और होंठो को कांता की गर्दन के पास फेरते हुए………… कांता की चूचियो को मसल्ने

लगे……………

 
कुछ ही देर मे कांता की गान्ड का दर्द बिल्कुल ख़तम हो गया………………… कांता ने जानकी लाल से कहा………..

कांता: बाबू जी. अब अपने वज़ीर को अंदर खड़ा ही रखेंगे क्या……….. दौड़ाएंगे नही इसे…………………..

जानकी लाल कांता की बातो का अर्थ समझकर धक्का लंगाना स्टार्ट कर दिया……………………… पहले तो जानकी लाल ने धीरे धीरे धक्का लगाना शुरू किया…….. हर धक्के के साथ कांता की गान्ड की नसों का लचीलापन बढ़ता जा रहा था……………… और उसके साथ ही जानकी लाल भी अपने धक्को की स्पीड को बढ़ाते जा रहे थे………………… कुछ ही देर मे धक्को की स्पीड बहुत ही तीव्र हो गयी……….. अब जानकी लाल अपने लंड को लगभग पूरा बाहर निकालते और एक जबर्जस्त झटके के साथ वापस कांता के गान्ड मे पेल देते…………

कांता को भी अब जानकी लाल के लंड का सुखमय अहसास अपनी गान्ड मे हो रहा था…………

कुछ ही देर मे जानकी लाल ने धक्को की स्पीड इतनी बढ़ा दी थी कि पता ही नही चल पा रहा था कि कब लंड गान्ड के अंदर गया…….. और कब वापस बाहर आ गया………………..

कांता भी पूरे जोश के साथ अपनी गान्ड मरवाने मे जानकी लाल का साथ दे रही थी……………. जैसे ही जानकी लाल लंड को कांता की गान्ड से निकालकर थोड़ा पीछे खिचते……….. वैसे ही कांता अपनी गान्ड को जानकी लाल की तरफ खिसका देती…….. मगर अगले ही पल जानकी लाल का एक तूफ़ानी प्रहार कांता के विशाल चुतड़ों पर पड़ता…. कांता का पूरा शरीर आगे की तरफ चला जाता…………. और फिर जब जानकी लाल धक्का देने के लिए अपने लंड को बाहर निकालते तो कांता फिर अपनी गान्ड को पीछे खिसका देती…………

इस अनोखे मॅच मे दर्शक तो थे नही जो कि तालियाँ बजाते……. लेकिन जानकी लाल जब धक्का मारते तो उनकी जाँघो का अगला हिस्सा .. कांता के विशाल कुल्हो से टकराता और फॅयाट्ट्ट्ट की आवाज़ आती……….. और ये सब इतनी तेज़ी से हो रहा था कि पूरे कमरे मे फत्त्तटटटटतत्त……. फहााआटततटटटटटटटटटटतत्त की आवाज़ गूँज रही थी…….. ऐसा लग रहा था जैसे इस मॅच पर लोग तालिया बजा रहे

हो……………………….

जानकी लाल हुमच हुमच कर कांता की गान्ड मे अपना लंड पेल रहे थे……………. जानकी लाल और कांता की चुदाई ऐसे चल रही थी जैसे चुदाई नही बोरिंग की खुदाई चल रही हो.

जानकी लाल ने कांता के गान्ड मारते हुए कांता से पूछा

जानकी लाल: क्यो कांता…………….कैसा लगा मेरा वज़ीर……………

कांता: आर्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर बबुउुुुुुुुुुुुुुउउ जीिइईईईईईईईईईई आपका वज़ीर तो वाकई मे बड़े कमाल का है……………….. बहुत तबाही मचा रहा

है ये मेरे पीछले वाले एरिया मे………………

जानकी लाल: मैने कहा था ना बहू………………. बहुत तगड़े शॉट मारता हूँ मैं……………….अब तो मान गयी ना तुम मैं एक अच्छा

खिलाड़ी हूँ…………………………

कांता: हाआआआअ बाबू जी………………. आप वास्तव मे कमाल के खिलाड़ी हो………………….

जानकी लाल: अर्र्र्र्रररीईईईई कमाल की तो तुम भी हो बहू…………… आज तक चुदाई मे इतना मज़ा नही आया जितना कि तुम्हे चोदने मे

आया है ...... तुम चुदाई मे बिल्कुल खुल कर साथ देती हो………………..

कांता: आररीईए…….. बाबू जी बड़े बुज़ुर्गो ने कहा है कि अगर………….. औरत को किचन मे एक रसोइए की तरह………………………. घर मे एक शुशील बहू की तरह………………… खाने के टेबल पर एक माँ की तरह………………………………………. और बिस्तर पर के रंडी की तरह बन जाना चाहिए तभी वो सभी को खुश रख सकती है……………..

 
कांता: आररीईए…….. बाबू जी बड़े बुज़ुर्गो ने कहा है कि अगर………….. औरत को किचन मे एक रसोइए की तरह………………………. घर मे एक शुशील बहू की तरह………………… खाने के टेबल पर एक माँ की तरह………………………………………. और बिस्तर पर के रंडी की तरह बन जाना चाहिए तभी वो सभी को खुश रख सकती है……………..

लगभग 5-6 मिनट तक जानकी लाल बड़ी ही भयंकर स्पीड के साथ कांता की गान्ड मारते रहे… फिर उन्होने अपना लंड कांता की गान्ड से निकाला और कांता को पीठ के बल लेटने के लिए कहा……………………………….. जैसे ही कांता पीठ के बल बिस्तर पर लेटी जानकी लाल ने अपना हलब्बी लंड कांता की चूत मे डाल दिया और उसकी दोनो चूचियो को मसल्ते हुए ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगे……… उनके धक्को से कमरे मे एक बार फिर पछ्ह्ह्ह्ह्ह फककककक…… पचह की सुरीली धुन तेज हो गयी थी………………

कांता अपनी गान्ड उचका उचाकर कर जानकी लाल का साथ दे रही थी………….

जानकी के हर धक्के से ऐसा लग रहा था कि वो कांता की चूत मे लंड के साथ अपनी कमर को भी घुसा देना चाहता था… यही हाल कांता का भी था……….. दोनो की ये जबरदस्त चुदाई 10 मिनट तक चलती रही……….. तभी कांता का मुँह खुला और भारी भारी सासे उसके मुँह से बाहर आने लगी ………….. उसके होंठ उत्तेजना मे कापने से लगे…………….. उसकी आँखे और फैल गयी…………. उसका सरीर

अकड़ने सा लगा…………………. उसके धक्को की स्पीड और तेज हो गइईई………….. उसका हाथ स्वतः ही अपनी चूचियो को बुरी तरह मसल्ने लगाआा…………… अचानक एक ज़ोर का झटका खाया कांता के बदन ने……………..और उसके मुँह से एक आवाज़ निकली

आआआअहह………………………. इसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………………. म्‍म्म्मममममममममममममम. हह……………. और अगले ही पल कांता की चूत मे से ऐसे पानी बहने लगा जैसे 4-5 रसगुल्ले निचोड़े दिए गये हो एक साथ कांता की चूत मे…………………………..

इधर जानकी लाल भी बुरी तरह हाफने से लगे थे…………………………….. उनका शरीर भी अकड़ने लगा था ………….. उसकी स्पीड भी बढ़ गयी…….. और फिर अचानक उसका सरीर भी झटके खाने लगा………….. 3-4 जबरदस्त झटके लगे…….. जानकी लाल के शरीर को………… और बहुत सारा वीर्य उन्होने कांता की चूत मे उडेल दिया……………..

दोनो निढाल होकर बिस्तर पर पड़ गये…………. जैसे कोई बड़ा युद्ध जीतने के बाद योद्धा शांत हो जाता है वैसे ही दोनो शांत हो गये

थे…………………… और कांता ने आख़िर जानकी लाल को अपना दूध पिला ही दिया.

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आफ्टर थ्री डेज़

दोपहर का टाइम

जया देवी के पाओं का दर्द लगभग ख़तम हो गया था लेकिन अब भी उनको चलने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ती थी………. जानकी लाल और कांता दोनो ने अपने व्यवहार से किसी को भी अपने मॅच की भनक नही लगने दी थी……. हाँ अगर दोनो की नज़रे टकराती तो एक अर्थपूर्ण मुस्कान के साथ दोनो एक दूसरे को देखते थे………..

घर का मोहल बिल्कुल नॉर्मल था……….. कांता एक अच्छी बहू की तरह जया देवी का पूरा ख़याल रख रही थी…….. फूलवा किचन की सफाई मे लगी हुई थी……….. तभी हॉल मे रखी हुई फोन की घंटी घनघना उठी……….. ट्र्र्र्र्र्रृिईईईईईईईईईईन्न्नननननननणणन् … ट्र्र्र्र्र्रृिईईईईईईईईईईन्न्नननननननणणन् ………….. जानकी लाल ने क्रेडल पर रखा हुया रिसीवर उठाकर अपने कान से लगाया

जानकी लाल: हेलो……………… जी बोलिए……………………….. हाँ मैं जानकी लाल ही बोल रहा हूँ………………… हाँ हाँ……………… अच्छे……… कब का टाइम दिया है……………………………. 01 जन्वरी को……………….. ठीक है …….. मैं आ

जाउन्गा…………. अरे हाँ बिल्कुल………………………. अरे अगर मुझे ये टेंडर मिल गया तो मैं तुम्हारा मुँह रुपयो से भर

दूँगा……………. ठीक है मैं पहुच जाउन्गा…….. ओके

और रिसीवर को वापर क्रेडल पर रख दिया………….. फोन पर बात करने के बाद जानकी लाल के चेहरे पर चमक आ गयी थी………………………… वो हाल से सीधे जया देवी के कमरे मे गये जहाँ पर जया देवी और उनकी बहू कांता आपस मे कुछ बाते कर

रही थी………. जानकी लाल को देख कर कांता पलंग से उठ कर खड़ी हो गयी (क्यो कि वो एक शुशील बहू जो थी)….. जानकी लाल के चेहरे को देख कर दोनो समझ गये कि कोई अच्छी खबर देने वाले है जानकी लाल.

जया देवी: क्या बात है………. बड़े खुश नज़र आ रहे हो…….. किसका फोन था……………………

जानकी लाल: अरे वो टेंडर की बात चल रही है ना……….. प्रेम सिंग पूनिया के साथ ……………..

जया और कांता दोनो ने ही प्रशन्सुचक निगाह से जानकी लाल को देखा…………

जानकी लाल: अरे वो आम के बागान के टेंडर की बात चल रही है ना…… उसी के अधिकारी का नाम है प्रेम सिंग पूनिया…….. काफ़ी काइया किस्म का आदमी है ………… अगर वो चाहे तो हमे ये टेंडर मिल सकता है…… अच्छे दामो मे………. उसी के पीए का फोन था………

कह रहा था कि मैने साहब से बात कर ली है और 1 जनवरी का टाइम भी ले लिया है…………………. इसलिए हमे 31 को देल्ही जाना पड़ेगा………………….. अगर ये टेंडर हमे मिल जाए तो रुपयो की बरसात ही हो जाएगी हम पर…………….

 
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ये बात सुनकर कांता और जया के चेहरे पर भी मुस्कान छा गयी…… जानकी लाल के साथ कांता भी देल्ही जाएगी ये बात जया को जानकी

लाल ने पहले ही बता दिया था…………. जानकी लाल ने अपनी बहू से कहा

जानकी लाल: अरे बहू………. ऐसा करते है कि हम लोग ………….. 30 को ही यहाँ से बाइरोड चल चलते है 31 को वहाँ आराम करेंगे…….. 1 जनवरी को मीटिंग अटेंड करके हम 2 जनवरी को सुबह जल्दी ही बाइरोड हम लोग वापस यहाँ आ जाएँगे ……………………. जानकी लाल की बात पर कांता ने अपना सिर सहमति मे हिला दिया………………….

असल मे जानकी लाल ने सोच रखा था कि प्लेन की बजाय कार से जाने मे ज़्यादा वक़्त वो कांता के साथ बिताए…… और रास्ते मे किसी अच्छे से होटेल मे रुक कर………….. कांता के साथ एक मॅच खेले……. यही सोचकर जानकी लाल ने कार से देल्ही जाने का प्लान बनाया था……………….

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नेक्स्ट डे इन आफ्टरनून

जानकी लाल अपने ड्राइवर रामू को कार चेक करने के लिए कह रहे थे……… रास्ते मे किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो इसके लिए जानकी लाल ने रामू से कहा की ठीक तरह से कार को चेक कर ले……. सफ़र काफ़ी लंबा है…………….

रामू को हिदायत देने के बाद जानकी लाल जया देवी के कमरे मे आए जहाँ…. कि कांता जया देवी को दवा खिला रही थी………….अंदर आकर जानकी लाल जया से बोले

जानकी लाल: हम दोनो आज रात को निकल जाएँगे…………. वैसे तो हम जाते नही लेकिन तुम तो जानती हो कि ये टेंडर कितना अहम है

हमारे लिए…… अगर तुम नॉर्मल होती तो तुम भी हमारे साथ चलती………….

जया देवी ने जानकी लाल की बात को बीच से काटते हुए कहा

जया देवी : ओूऊऊऊऊ आप मेरे लिए इतना परेशान मत होइए……… यहाँ फूलवा है…………. हरिया है……….. दीनू काका (माली) भी है……….. मैं कोई अकेले थोड़ी ना हूँ…………….. और फिर दो दो सेक्यूरिटी गार्ड है……. जॅकी (डॉग’स नेम) है……………. आप मेरी

फिकर छोड़िए और अपने काम पर ध्यान दीजिए………. वैसे भी 2-3 दिनो के ही बात तो है……… आइ विल मॅनेज…… आप तो भगवान का नाम लेकर जाइए और टेंडर लेकर ही आइए………………………..

जया देवी की बातो से जानकी लाल जया देवी की तरफ से बिल्कुल आस्वस्त हो गये….. उन्होने कांता से कहा

जानकी लाल: बहू…………… हम लोग करीब 10 बजे रात को यहाँ से निकलेंगे………………………… तुम पॅकिंग कर लेना……………..

और हाँ मैने टेंडर के सारे ज़रूरी कागजात की कॉपी एक फाइल मे रखी हुई है उसे लेना मत भूलना…………………. ठीक है……….

कांता हाँ मे सिर हिलाकर अपने कमरे मे पॅकिंग के लिए चली

रात 10 बजे

जानकी लाल हॉल मे तैयार बैठे थे……………………. रामू उनके सामान को गाड़ी मे लोड कर रहा था.. फूलवा कांता का बेग भी नीचे ले आई थी……….. रामू ने कांता का बेग भी कार की डिग्गी मे डाल दिया…………… जब जाने की सब तैयारी गयी तो जानकी लाल जया देवी

के कमरे मे गये……….. जया देवी बेड पर तकिये का सहारा लेकर बैठी हुई थी…………

वहाँ जाकर जानकी लाल ने जया से कहा…………

जानकी लाल: ठीक है……. जया ………. मैं अब निकलता हूँ…… काफ़ी लंबा सफ़र है …………. टाइम से पहुचना है………… और हाँ तुम अपना ध्यान रखना…………….. अरे फूलवा , फूलवा कहाँ हो इधर आऊऊऊओ….

जानकी लाल की आवाज़ सुनकर फूलवा जल्दी से जया के कमरे मे आई……..

जानकी लाल: देखो फूलवा……… मालकिन का पूरा ख्याल रखना……… दवाई टाइम पर खिला देना ………….. कोई लापरवाही मत करना इसमे……

जानकी लाल ने सखत लहजे मे कहा………. फूलवा ने हामी भरी…………………

जानकी लाल: जाओ बहू से कहो कि अब चले………… वरना देर हो जाएगी…………………………….. फूलवा उपर के कमरे मे कांता के पास गयी और 2 मिनट बाद ही आकर जानकी लाल से बोली……….

फूलवा: मालिक…… छोटी मालकिन आ रही है अभी………

 
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