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Guest
कुछ ही देर बाद जानकी लाल को किसी के सीडियो से उतरने की आवाज़ सुनाई दी…… जानकी लाल समझ गये कि कांता नीचे आ रही है…………….. जानकी लाल जया देवी के कमरे से बाहर निकले तो कांता सीढ़ियो से नीचे उतर रही थी…… जानकी लाल ने जब अपनी नज़रे
उठाकर कांता को देखा तो देखते ही रह गये…………
आँखो मे काजल………….. बालो मे मोगरे के फूलो का गजरा……… बालो की सिंगल लंबी चोटी जो कि कांता के कुल्हो तक आ रही थी…….. नारंगी कलर की डिज़ाइनर वाली साड़ी….. उसी को मॅच करता हुआ ब्लाउस……….. पाओ मे उची हील की सॅंडल…………..
होंठो पे लाल रंग की लिपीसटिक………………… हाथो मे चूड़िया…… कुल मिलाकर एक अप्सरा सी लग रही थी कांता – सुन्दर और कामुक अप्सरा
सीढ़ियो से उतरने के बाद कांता अपनी सास के पास पहुचि और उनके पैर छुकर जाने की इजाज़त माँगी……..
रामू दोनो के सामान को कार की डिग्गि मे रख चुका था……. जानकी लाल ने एक नज़र अपनी कलाइए पर बधी हुई घड़ी पर डाली और कांता की तरफ मुखातिब होकर बोले………..
जानकी लाल: अब चलो बहू……….. 10.30 हो गये है………… वरना हम कल पहुचने मे लेट हो जाएँगे………. ये कह कर जानकी लाल बाहर खड़ी कार की तरफ बढ़ गये……. उनके पीछे पीछे कांता भी कार की तरफ बढ़ गयी……….
रामू ने जानकी लाल को आता देख कर कार का दरवाजा खोल दिया… जानकी लाल पीछे की सीट पर बैठ गये……… और उन्होने कार के दूसरी तरफ का दरवाजा अंदर से अनलॉक कर दिया……… कांता कार के दूसरे दरवाजे से पीछे वली सीट पर बैठ गयी……….. जानकी लाल ने रामू से कहा…………..
जानकी लाल: चलो रामू…………………………
जानकी लाल का आदेश होते ही रामू ने गाड़ी को हवेली के मेन गेट की तरफ बढ़ा दिया …………. कुछ ही देर मे गाड़ी सुनसान और सीधी सड़क पर दौड़ रही थी…….. गाड़ी एर-कंडीशन थी, इसलिए ठंड का असर तीनो मे से किसी के उपर नही दिखाई दे रहा था……………….. जानकी लाल ड्राइवर के सामने किसी प्रकार की कोई हरकत करके उसकी नज़र मे नही आना चाहते थे…… कांता का
भी कुछ ऐसा ही ख़याल था. इसलिए दोनो चुपचा बैठे थे. कुछ ही देर मे जानकी लाल को झपकी सी आने लगी और वो पीचली सीट पर अपना सिर टिका कर उंघने लगे. कुछ देर बाद कांता का भी यही हाल था….. फिर दोनो कब गहरी नींद मे चले गये.
उठाकर कांता को देखा तो देखते ही रह गये…………
आँखो मे काजल………….. बालो मे मोगरे के फूलो का गजरा……… बालो की सिंगल लंबी चोटी जो कि कांता के कुल्हो तक आ रही थी…….. नारंगी कलर की डिज़ाइनर वाली साड़ी….. उसी को मॅच करता हुआ ब्लाउस……….. पाओ मे उची हील की सॅंडल…………..
होंठो पे लाल रंग की लिपीसटिक………………… हाथो मे चूड़िया…… कुल मिलाकर एक अप्सरा सी लग रही थी कांता – सुन्दर और कामुक अप्सरा
सीढ़ियो से उतरने के बाद कांता अपनी सास के पास पहुचि और उनके पैर छुकर जाने की इजाज़त माँगी……..
रामू दोनो के सामान को कार की डिग्गि मे रख चुका था……. जानकी लाल ने एक नज़र अपनी कलाइए पर बधी हुई घड़ी पर डाली और कांता की तरफ मुखातिब होकर बोले………..
जानकी लाल: अब चलो बहू……….. 10.30 हो गये है………… वरना हम कल पहुचने मे लेट हो जाएँगे………. ये कह कर जानकी लाल बाहर खड़ी कार की तरफ बढ़ गये……. उनके पीछे पीछे कांता भी कार की तरफ बढ़ गयी……….
रामू ने जानकी लाल को आता देख कर कार का दरवाजा खोल दिया… जानकी लाल पीछे की सीट पर बैठ गये……… और उन्होने कार के दूसरी तरफ का दरवाजा अंदर से अनलॉक कर दिया……… कांता कार के दूसरे दरवाजे से पीछे वली सीट पर बैठ गयी……….. जानकी लाल ने रामू से कहा…………..
जानकी लाल: चलो रामू…………………………
जानकी लाल का आदेश होते ही रामू ने गाड़ी को हवेली के मेन गेट की तरफ बढ़ा दिया …………. कुछ ही देर मे गाड़ी सुनसान और सीधी सड़क पर दौड़ रही थी…….. गाड़ी एर-कंडीशन थी, इसलिए ठंड का असर तीनो मे से किसी के उपर नही दिखाई दे रहा था……………….. जानकी लाल ड्राइवर के सामने किसी प्रकार की कोई हरकत करके उसकी नज़र मे नही आना चाहते थे…… कांता का
भी कुछ ऐसा ही ख़याल था. इसलिए दोनो चुपचा बैठे थे. कुछ ही देर मे जानकी लाल को झपकी सी आने लगी और वो पीचली सीट पर अपना सिर टिका कर उंघने लगे. कुछ देर बाद कांता का भी यही हाल था….. फिर दोनो कब गहरी नींद मे चले गये.