एसके कांता की दोनो चूचियो को अपनी दोनो हथेलियो मे भरकर मसल्ते हुए अपने होंठो से कांता के रसीले होंठो का रस्पान करते हुए धीरे धीरे अपने लंड को कांता की चूत मे आगे पीछे करने लगा.. जब कांता की चूत का दर्द ख़तम हो गया तो एसके ने अपने धक्को की स्पीड तेज कर दी……. कांता की चूत मे जैसे ही एसके का लंड तेज़ी से अंदर जाता वैसे ही कांता की चूत मे से पॅच………… की आवाज़ निकल रही थी ……….
कुछ ही देर मे एसके ने अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी…… जब धक्के के साथ कांता की जाँघो से एसके की जाँघ टकराती तो फत्त्ततत्त.. की आवाज़ बड़ी तेज़ी से कमरे मे सुनाई दे रही थी…..
कांता भी अपनी गान्ड उचका उचका कर एसके के लंड को घोंट रही थी अपनी चूत मे….. एसके के हर धक्के के साथ कांता का पूरा का पूरा बेड हिल रहा था….. कांता ने अपनी जाँघो का घेरा एसके की कमर पर बना लिया था जिस से कि एसके का लंड उसकी चूत मे ज़्यादा से ज़्यादा गहराई तक उतर सके……..
लगभग 5 मिनट तक एसके ऐसे ही कांता को पेल्ता रहा…….
फिर कांता ने एसके को अपने उपर से हटने के लिए इशारा किया…. फिर उसने एसके को बेड पर लेटने का इशारा किया…… एसके बेड पर लेट गया…. उसका लंड खड़ा होकर छत की तरफ घूर रहा था…….
कांता अपनी टाँगों को चौड़ी करती हुई अपनी चूत के छेद को एसके के सुपाडे पर रख कर अपनी गान्ड को उपर नीचे हिलाने लगी…. चूत गीली होने के कारण एसके का लंड कुछ ही पल मे कांता की चूत मे समा गया……. अब कांता एसके के सीने पर हाथ रखकर अपनी गान्ड को हिला हिला कर एसके का लंड अपनी चूत मे लेने लगी….. कांता जब एसके का लंड अपनी चूत मे लेने के लिए अपनी गान्ड को उपर नीचे करती तो उसके मोटे मोटे कूल्हे बड़ी ही थिरकन के साथ हिलते थे… दोनो चुदाई के परम आनंद मे खोए हुए थे…….. वैसे तो एसके ने कई औरतो को चोदा था पर कांता जैसी चुदक्कड औरत उसने पहली बार देखी थी…….. अपने लंड पर उसके उपर नीचे होते देख एसके समझ गया था कि कांता की भूकि असीमित है 2-4 लंड से उसका कुछ नही होता होगा…………. कांता लगभग 5 मिनट तक उसके लंड पर उछल उछल कर चुदवाती रही.
जब कांता उछल कर एसके के लंड को अपनी चूत मे लेती तो उसके भारी भरकम कूल्हे के वजन से एसके की जाँघो मे भी हल्का दर्द उत्त्पन्न्न कर देती थी........ एसके अपने दोनो हाथो से कांता के बड़े बड़े स्तनों को बड़ी ही बेदर्दी से मसल रहा था.............. फिर एसके ने कांता को अपने उपर से हटने का इशारा किया.
कांता एसके के इशारे का मतलब समझ कर उसके लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त से आज़ाद कर के उठ खड़ी हुई........... जब कांता उठ रही थी तो उसकी चूत का भरपूर नज़ारा एसके अपनी आखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था......... उसकी चूत काम रस से पूरी भीगी हुई थी और भीगी होने की वजह से उसकी चूत की नारगी रंग की फाक चमक रही थी..... कांता की चूत ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे कोई भूकी शेरनी अपना मूँह फाड़कर शिकार निगलने की तैयारी कर रही हो..............
कांता के अपने उपर से हट ते ही एसके उठ गया और कांता को बेड पर लिटाकर उसकी दोनो टाँगों को घुटनो से नीचे बेड पर लटका दिया और कांता की दोनो मांसल जाँघो को चौड़ा करके अपने लंड का सुपाडा कांता की गुलाबी चूत पर टिका दिया और कांता के दोनो स्तनों को थामकर एक नज़र कांता की आँखो मे देखा ................
कांताआ तो चुप थी मगर उसकी आँखे एसके से चीख चीख कर कह रही थी कि ......... उसकी चूत मे अपना लंड घुसा दो.............
एसके ने उसकी आँखो की भाषा समझकर अपने दोनो हाथो से कांता की दोनो चूचियों को ज़ोर से मसलते हुए तीव्र गति का झटका अपनी कमर पर लगाया..................... फहाआक्कककककककककककककचहाआक्ककककककक्की आवाज़ के साथ एसके का लंड कांता की चूत मे विलुप्त हो गया....... एसके ने अब अपनी कमर की हिलाना शुरू कर दिया...........
कांता भी उसका सहयोग करते हुए अपनी दोनो टाँगों का घेरा बना कर एसके की कमर से कस कर लपेट लिया और एसके के हर धक्के के साथ अपनी कमर उचका कर एसके के लंड का मज़ा लेने लगी....... कमरे मे कांता के उपर और नीचे दोनो तरफ के होंठो की सिसकारिया गूंजने लगी थी..... उसकी दोनो सिसकारिया मे फ़र्क इतना था कि उपर के होंठ से आआआअहह.......... ईईईईईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स की आवाज़ निकल रही थी और नीचे वाले होंठ से प्प्प्प्प्प्प्पााअक्कककककककककचह............. प्प्प्प्प्प्प्पााअक्कककककककककचह की आवाज़ निकल रही थी....
दोनो की चुदाई अब चराम पर पहुँच रही थी........... एसके के मुँह से भारी आवाज़ निकलने लगी थी............ कुछ ऐसा ही हाल कांता का भी था.......... कांता के धक्को की स्पीड भी तेज हो गयी थी और ............ दोनो की चुदाई के जबर्जस्त झटको के कारण पलंग हिलने लग गया था........
तभी कांता ने अपनी गान्ड उचकाते हुए कहा ........... आब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब मेरा निकलने वलाल हाइययाआआईयईईईईईईई............ आआअहह...........
एसके ने भी अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी और अगले ही पल दोनो के मुँह से चीख निकल गयी ................ इस चीख के साथ ही कांता बेड पर उठ कर बैठ गयी................ तब उसे महसूस हुआ कि वो कोई सपना देख रही थी.........
ठीक तभी दरवाजे पर नॉक हुआ...... कांता ने अपने कपड़े सही करके दरवाजे को खोला तो सामने देखा कि फूलवा किसी आदमी के साथ खड़ी थी........ उस आदमी के हाथ मे एक बेग था.... उसको देख कर कांता चकित सी रह गयी..... क्योकि सब कुछ वैसा हो हो रहा था जैसा कि उसने सपने मे देखा था........... तभी फूलवा ने कहा कि ये प्लमबर है, बाथरूम का नल ठीक करने आया है.............. फूलवा की बात सुनकर कांता मन ही मन मुस्कुरा उठी......... उसकी मुस्कुराहट का राज ना तो फूलवा के समझ मे आया और ना ही उस प्लमबर के........ लेकिन आप लोग तो समझ गये ना कि कांताआ क्यो मुस्कराई.............. इसके बाद कांता नीचे अपनी सास के रूम की तरफ चली गयी.............
फेब्रुवरी के लास्ट वीक की सुबह ........... अभी भी गुलाबी सर्दी का अहसास मौसम मे बाकी था.......... पेड़ो (ट्रीस) के पत्ते डालियो का साथ छोड़ चुके थे......... लगभग हर पेड़ से खड़खड़ाहट की आवाज़ आने लगी थी....... कुछ पेड़ो पर कोमल कोपले आनी शुरू हो गयी थी.............
. रोज की तरह जानकी लाल हॉल मे बैठे अख़बार मे अपना सिर गड़ाए हुए थे.......... पास मे जया देवी भी बैठी थी................. किचन मे कांता नाश्ता तैयार कर रही थी........ फूलवा भी उसका हाथ बटा रही थी........... नाश्ता की प्लेट लेकर कांता मटकती हुई चाल के साथ डाइनिंग टेबल की तरफ बढ़ चली............. नाश्ते की प्लेट को डाइनिंग टेबल पर रखते हुए बोली:
कांता: अब अख़बार छोड़िए बाबू जी.............. पहले नाश्ता कर लीजिए...... आप भी नाश्ता कर लीजिए माँ जी.................... कांता ने जया देवी की तरफ मुखातिब होकर कहा......... कांता ने सभी लोगो के लिए नाश्ता लगाया और खुद भी प्लेट मे नाश्ता लेकर बैठ गयी............... नाश्ते के साथ बातो की सिलसिला शुरू हो गया.........
जानकी लाल: (नाश्ता करते हुए).......... अरे जया...... हवन की सब तैयारिया तो लगभग हो चुकी है..... हमे स्वामी जी से कहकर अगले साप्ताह मे हवन करवा लेना चाहिए........ क्यो क्या ख़याल है तुम्हारा.............?
जया देवी: हाँ........... सही कह रहे है आप........ मैं सोच रही हूँ कि होली से पहले ही हवन करवा लिया जाए....... और कांता की तरफ देख कर बोली.... क्यो बहू सही है कि नही?
जवाब मे कांता मुस्कुराती हुई हाँ मे सिर हिला दी........ वैसे वास्तविकता तो ये थी कि वो खुद भी हवन करवाने के लिए बेताब थी....... लेकिन उसने अपने मन की मनसा को किसी पर जाहिर होने नही दिया...........
जानकी लाल: और हाँ.......... विजय को भी बुला ही लो.......... वो भी हवन मे आ जाएगा तो सही रहेगा....... और होली बाद वो वापस चला जाएगा.............
जया देवी: मुझे नही लगता कि हवन मे आएगा......... लेकिन हाँ....... उस से कह तो दो.............. हवन के लिए फोर्स करोगे तब कही जाकर वो होली पे आएगा........... इस बार हम लोग होली यही खेलेंगे...... पिछले दो सालो से तो बहू भी देल्ही मे ही होली खेली है........... ये पहली होली है इसकी यहा पर...... अबकी बार यही होली खेलेंगे........... कैसा रहेगा?
कांता: बिल्कुल सही माँ जी........ ये कह कर कांता डाइनिंग टेबल से उठ गयी...... जानकी लाल और जया देवी भी नास्ता फिनिश कर चुके थे...... फूलवा ने आकर टेबल सॉफ कर दिया......... जया देवी और जानकी लाल दोनो अपने रूम मे आराम करने चले गये......... कांता भी अपने रूम की तरफ बढ़ चली......
इस होली की बात ने उसे पिछली होली याद दिला दी थी...... उस समय वो देल्ही मे थी...... पिछली होली को याद करके उसकी आँखे नशीली होने लगी थी..... वो अपने कमरे मे पहूचकर दरवाजे की कुण्डी बंद कर दी और धडाम से बेड पर गिर पड़ी...... उसके आँखो के सामने होली की यादे किसी चल चित्र की तरह चलने लगी थी.......
होली की सुबह का टाइम था......... लगभग 8 बज रहे होंगे......... अपार्टमेंट के बच्चे .... आपस मे होली खेल रहे थे..... लेकिन अभी कोई बड़ा शख्स उनके इस हुड़दंग मे नही शामिल हुआ था...... विजय को कंपनी की तरफ से एक शानदार 3बीएचके का फ्लॅट मिला हुआ था...... काफ़ी शानदार और बड़ा फ्लॅट था उसका....... घर मे रहले वाले केवल दो इंसान ही थे....... कांता और विजय......... अभी तक विजय सो ही रहा था........ वैसे भी शहर मे होली मे उतना हुड दंग नही होता है जितना की गाओं मे होता है.... यहा पर लोग रंग की बजाय गुलाल से होली खेलते है........ होली भी बड़े मर्यादित रूप से खेलते है..... कोई किसी को ज़बरदस्ती गुलाल नही लगाता....... बस चुटकी भर गुलाल लिया और लगा दिया माथे पर....... कुछ ख़ास दोस्त ज़रूर एक दूसरे को पूरी तरह गुलाल से रंगते है...... वैसे तो विजय को भी होली खेलना कुछ ख़ास अच्छा नही लगता था इसलिए वो उठा और हाथ मुँह धोकर...... सुबह की कॉफी पीकर...... कांता से बोला
विजय: कांता........ मैं ज़रा अपने दोस्तो से मिलकर आता हूँ......... और ये कह कर कार की चाबी उठायी और दरवाजे से बाहर निकाल गया...... बिना कांता का प्रतिउत्तर सुने........
कांता चाह कर भी कुछ नही के पाई..... उसको बुरा लगा कि आज त्योहार के दिन भी घर पर टाइम नही दे रहे है...... लेकिन वो भी विजय की आदतो के अनुसार अपने आपको ढाल चुकी थी.... सो इतना बुरा भी नही लगा........ कुछ देर तक कांता यू ही कुछ सोचती रही.... फिर कुछ गुलाल की थैली लेकर अपने फ्लॅट से बाहर निकली......... आस पास की औरतो और लड़कियो को हल्के फुल्के रंग लगाया...... कुछ गॅप शॅप किया और हॅपी होली बोलकर वापस चली आई........ वापस आकर उसने घड़ी पर नज़र मारी.. तो 11.30 बज चुके थे... उसने विजय को फोन लगाया.......
विजय: हेलो........ हाँ कांता बोलो... कैसे फोन किया?
कांता: कब तक आएँगे आप......... और लंच मे क्या बनाऊ आपके लिए..........
विजय: कांता तुम मेरे लिए कुछ मत बनाना...... आक्च्युयली मुझे आने मे शाम हो जाएगी..... तुम ऐसा करो तुम लंच कर लो....... शाम को साथ मे डिन्नर करेंगे ......... ओके .......... और बिना कांता की बात सुने विजय ने फोन काट दिया............ विजय का जवाब सुनकर कांता कुछ उदास हो गयी.......... और बिस्तर पर अनमने ढंग से लेट गयी....... ना जाने कब उसकी आँखे बोझिल हो गयी...... उसको खुद भी नही पता चला.......
तभी दरवाजे की बेल ने उसकी नींद मे खलल डाल दिया..... आवाज़ सुनकर कांता की आँखे खुली...... उसने एक नज़र गाड़ी पर दौड़ाइईईईई........... 12.15 हो चुके थे...... इस समय कौन होगा..... ये सोचती हुई कांता ने अपने दुपट्टे को सही किया...... और दरवाजे की तरफ बढ़ चली........ उसने जैसे ही दरवाजा खोला........ सामने वाले इंसान को देख कर वो चौक पड़ी...... और खुशी और आश्चर्य की आवाज़ मे बोली...................
कांता: अरे मामा जी आआआप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प......... अचानाक.............
मामा जी: मैने सोचा अचानक होली पर पहुच कर सरप्राइज कर दूँगा..... और होली भी खेल लूँगा................
कांता: आपने बिल्कुल सही किया मामा जी............ ये कहकर कांता ने उनके हाथो से सूटकेस लिया और अंदर आती हुई बोली...... आइए मामा जी अंदर आइए......
मामा जी कांता के पीछे पीछे अंदर आ गये....... पीछे होने के कारण उनकी नज़रें अनायास ही कांता की उभरी हुई गान्ड पर चली गयी जो कि पंजाबी सलवार सूट मे बड़ी ही मादक लग रही थी....... शादी के पहले की अपेक्षा कांता का शरीर अब भर गया था..... उसका गदराया हुआ जिस्म देख कर ना चाहते हुए भी मामा जी के मुँह से आह निकल गयी........
अंदर जाकर कांता ने मामा जी से कहा..........
कांता: मामा जी आप पहले हाथ मुँह धो लीजिए मैं तब तक आपके लिए कॉफी बना देती हूँ... और ये कह कर कांता ने मामा जी को बाथरूम की ओर इशारा किया........ उसका इशारा समझ कर मामा जी उठकर बाथरूम की तरफ बढ़ गये................
चूकि उस फ्लॅट मे कांता और विजय के अलावा कोई नही रहता था.... इसी वजह से कांता काफ़ी बेफिक्री से घर मे रहती थी... बाथरूम मे कांता के अंतः वस्त्र लगभग बिखरे से पड़े थे....... सारे वस्त्र काफ़ी कीमती थे............ ना चाहते हुए भी मामा ने उसकी ब्रा को हाथो से छू लिया...... जैसे ही मामा की उंगलिया कांता की रेशमी ब्रा से टकराई..... मामा का पूरा शरीर झंझणा उठा.......... उसके खून मे चीटिया सी रेंगने लगी......... उसके लंड मे कडापन अपने आप आने लगा......
मामा का दूसरा हाथ अपने आप ही अपने लंड की तरफ सरक गया..... मामा अपने लंड को मसलते हुए दूसरे हाथ से कांता की ब्रा को लेकर उसे सूंघने लगा........ ब्रा की मादक खुश्बू मामा के नथुनो से उसके अंदर प्रवेश कर रही थी........... मामा किसी शिकारी कुत्ते की तरह कांता की ब्रा को शुंघ रहा था....... उसकी ब्रा की मादक खुसबु से उसके लंड और भी तन गया...... मामा ने अपने पाजामे के नाडे को ढीला कर दिया, फलस्वरूप मामा का पाजामा कुछ ही देर मे धरती चाट ते नज़र आने लगा........ पाजामा सरकने के उपरांत मामा ने अपने लंड को अपने अंडरवेर की क़ैद से भी आज़ाद कर दिया...... मामा का लंड तन तना गया था, अगर मामा अपने अंडरवेर को नही उतारते तो उनका लंड अंडरवेर फाड़ के बाहर निकल जाता. इस बात मे तो कोई दो राय नही थी..... वैसे तो मामा की उमर लगभग 58-60 साल के करीब थी लेकिन इस उमर मे भी उनका लंड का कडापन किसी ब्लू फिल्म के हीरो की तरह था..... उनके लंड की नसों मे उत्तेजना के मारे खून भर गया था जिसके कारण उनके लंड की नसे बड़ी ही सपष्ट उभर रही थी......... फूली हुई नसों के कारण लंड पर जगह जगह कट्स से प्रतीत हो रहे थे...... उनका सुडोल लंड किसी पहलवान की तरह अपनी सुदृढ़ता को दर्शा रहा था........ मामा अपनी आखे बंद किए हुए अपने हाथ से लंड को सहला रहा था........... अचनाक कुछ सोचते हुए मामा तेज़ी से अपने लंड को हाथ मे लेकर आगे पीछे करने लगा.... मामा के मुँह से दबी दबी और घुटी घुटी आवाज़े निकलने लगी थी......
मामा: ..........आआआआअहह........... काआन्न्न्न्न्न्न्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्ताआआआअ.आ........ मेर्रर्र्र्र्र्र्र्रृिईईईईईईई............... ज़ाआआन्न्नननननननणणन्............. बस एक बार मेरा माल भी चख कर देख लूऊऊऊओ मेरी जाआनीईएमांन.............. बस एक बाआररर्र्र्र्र्ररर मेरी प्याअसस्स्स्सस्स बुझाआाद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्डूऊऊऊऊऊऊऊऊऊ मेरी ................................. जाआअ................... आहह........... हाआाईयईईईईईईईईईईईई........... कितना.................... गदराया हुआअ जिस्म है तुम्हाराआ................ आहह ......................... और यही सब सोचते हुए मामा और तेज़ी से मूठ मारने लगा................. जल्द ही उसके लंड के छेद से एक वीर्य की तेज धार निकलने लगी............ उसके वीर्य की धार इतनी तेज थी कि प्रेशर के साथ बाथरूम की दीवार पर पड़ने का कारण आवाज़ आने लगी थी...... मामा के लंड से 4-5 बार वीर्य की मोटी धार निकल कर दीवार से टकराई......... फिर मामा ने कांता की ब्रा से अपने लंड को सॉफ किया. तभी उन्हे ये आभास हुया कि बाथरूम के दरवाजे पर कोई खड़ा है..... वो कुछ देर शांति से आहट लेने की कोशिश करने लगे. लेकिन दोबारा कोई सुगबुगाहट नही हुई....
कही वो कांता तो नही थी........ अगर उसने मेरी आवाज़ सुन ली होगी तो क्या सोचेगी..... ऐसा उनके मन मे ख़याल आया..... फिर उसने सोचा.......... सुन लिया होगा तो.... सुन लिया होगा.......... जो होगा...... देखा जाएगा ऐसा सोचकर वो नहाने के लिए बैठ गये........... कुछ देर बाद जब वो नहा कर निकले और हॉल मे रखे सोफे पर आ कर बैठ गये........ जहाँ वो बैठ थे वहाँ से किचन सामने पड़ता था........ सामने कांता नाश्ता प्लेट मे लगा रही थी....... फिर कोफ़ी और कुछ स्नॅक के साथ कांता किचन से बाहर निकली और सोफे के सामने रखे सेंटर टेबल पर नाश्ते की प्लेट रखने के लिए जैसे ही झुकी.. उसका दुपट्टा भी झूल गया और उसके गले मे से उसकी कठोर और उन्नत चूचियों का नज़ारा मामा के सामने था..... कांता की चूचिया शादी के बाद काफ़ी बड़ी हो गयी थी.... और होती भी क्यो ना......... रोज रात को उनकी मिसाई जो होती थी........ मामा ये सोचते हुए कांता के भरे हुए जिस्म को देखने लगे.......
. कांता ने कॉफी का कप मामा जी की तरफ बढ़ाया..... और खुद भी..... एक कप लेकर पास मे रखे दूसरे सोफे पर बैठ गयी.......... कॉफी की चुस्की लेते हुए मामा ने बातो का सिलसिला शुरू किया
. कांता ने कॉफी का कप मामा जी की तरफ बढ़ाया..... और खुद भी..... एक कप लेकर पास मे रखे दूसरे सोफे पर बैठ गयी.......... कॉफी की चुस्की लेते हुए मामा ने बातो का सिलसिला शुरू किया
मामा: अरे बेटी......... विजय जी कहाँ है ............... हम तो उन्ही के साथ होली खेलने के खातिर इतनी दूर से आए है..........
कांता: वो ज़रा अपने दोस्तो के साथ निकल गये होली खेलने के लिया....... बस आने ही वाले होंगे ..........(ये कहकर कांता विजय को फोन लगाने लगी.... मामा ने भी अपना फोकस कॉफी पर किया....... 2 मिनट फोन करने के बाद कांता मामा जी से बोली)..... अभी 25-30 मिनट मे आ जायंगे वो...........
मामा: ठीक है कोई बात नही.... तब तक वेट कर सकते है (और कांता की तरफ देख कर मुस्कुराए......... जवाब मे कांता भी मुस्कुरा दी)
मामा: एक बात तो है बेटी......... शादी के बाद तुम पहले से ज़यादा सुंदर हो गयी हो.............
मामा जी की बात सुनकर कांता स्तब्ध रह गयी, क्योकि वो ये बात अच्छी तरफ जानती थी कि शादी के बाद उसकी सुंदरता कहाँ कहाँ से बढ़ गयी थी.... अचानक इस अकाल्पनिक प्रशंसा ने कांता को मूक कर दिया था.... उसको समझ मे नही आ रहा था कि वो मामा जी के इस प्रश्न का जवाब क्या दे और कैसे दे? अतहह कांता अपने कप को खाली करती हुई मामा जी से बोली:
कांता: मामा जी ..... आप तब तक आराम कीजिए........ मैं भी फ्रेश हो लेती हूँ. तब तक वो (विजय) आ जाएँगे......... ये कह कर कांता जल्दी से उठकर अपने बेडरूम की तरफ चली गयी........ अंदर जाकर कांता ने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया......... बाहर बैठे मामा जी के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान छाती चली गयी...................
लगभग 30 मिनट के बाद कांता अपने रूम से निकली…. दरवाजे खुलने की आवाज़ सुनकर मामा जी ने अपनी नज़रे उठाई और सामने कांता के रूप लावण्य को देख कर उनकी आखे फटी की फटी ही रह गयी……… उफफफफफफफफफफफफ्फ़………………… क्या कातिल लग रही थी कांता…….. उसके भीगे हुए बाल की लटो के आख़िरी छोर पर पानी की बूंदे किसी शबनम से कम नही लग रही.. थी… उसकी साड़ी काफ़ी झीनी थी…… जिसमे से उसकी गहरी नाभि और सपाट पेट स्पष्ट रूप से झलक रहे थे……. उसके सुडोल और बड़े बड़े स्तन आँचल से ढके होने के बावजूद भी अपनी तरफ जबरन आकर्षित कर रहे थे….. कमर का कटाव की गहराई किसी हंस की गर्दन के कटाव की तरह गहरी थी. और कमर के नीचे का हिसा साड़ी मे से जैसे निकलने के लिए बेताब हो रहा था……. उसके कुल्हों के भारीपन को मामा जी ने अपनी पारखी नज़र से साड़ी के उपर से ही भाप लिया था……. वास्तव मे काम देवी लग रही थी कांता…….
कांता के मदमस्त यौवन को देख कर मामा जी की ज़ुबान मे जैसे लकवा मार गया हो ….. मामा जी को तब होश आया जब कांता उनके सामे सोफे पर आकर बैठ गयी और मामा जी से बोली:
कांता: अरे मामा जी कहाँ खो गये आप्प्प्प्प्प्प्प्प?
मामा जी: (हड़बड़ा कर) आआआआअ हह….. वो मैं ये सोच रहा था कि अभी तक विजय नही आया (मामा ने असली बात गोल कर दी)
कांता: हाँ……….. बोलता तो था कि 25-30 मिनट मे आ जाउन्गा………. लेकिन अभी तक आए नही…… मैं फोन कर के देखती हूँ. (ये कह कर कांता उठ खड़ी हुई और क्रेडल से रिसीवर को उठा कर नंबर. डाइयल करने लगी……….. इस वक़्त उसकी पीठ मामा की तरफ थी….. कांता का ब्लाउस पीछे से काफ़ी खुला हुआ था जिसमे से उसकी मांसल, गुदाज और गोरी पीठ बड़ी ही सेक्सी लुक के साथ प्रदर्शित हो रही थी)
उसकी मांसल पीठ मे ब्लाउस की डोरी धसी हुई थी… मामा का गला सूखने लगा…….. उनकी ज़ुबान लपलपाने लगी कांता की जवानी देख कर……….
कुछ देर तक बात करने के बाद कांता ने रिसीवर को क्रेडल पर पटक सा दिया…….. और जब वो मूडी तो उसके चेहरे के भाव सॉफ बता रहे थे कि वो थोड़ी मायूस है….. उसका उतरा हुआ चेहरा देख कर मामा बोला:
मामा : क्या हुआ बेटी……… अचानक तुम उदास क्यो हो गयी………………..
कांता: (उदासी भरे लहजे मे) वो कह रहे है कि…….. मैं तो शाम तक ही आ पाउन्गा… त्योहार के दिन भी इनको घर के लिए टाइम नही मिलता (कांता थोड़ा गुस्सा करते हुए बोली)
मामा कांता के मनोभाव को देख कर समझ गये कि विजय ज़्यादा नही देता है कांता को… इस बात को सोचकर मामा खुश हो गया……….. अपनी चाल चलते हुए मामा बोला:
मामा: ठीक है बेटी………. अब विजय जी तो शाम से पहले आएँगे ही नही……… मैं तो सोचा था कि तुम दोनो के साथ मिलकर होली खेलूँगा लेकिन….. लगता है कि अब मुझे बिना होली खेले ही जाना होगा……………….
मामा जी की निराशा को देख कर कांता विचलित हो गयी.. और ये होना स्वाभाविक था.. क्योकि मामा जी एक मेहमान थे कांता के घर मे… …….. इसलिए उसने मामा जी से कहा
कांता: अरे मामा जी…………… वो नही है तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि आप ऐसे ही चले जाएँगे……… मैं तो हूँ ना………. आप मुझसे ही होली खेल लीजिए…….
कांता की बाते सुनकर मामा को अपनी चाल कामयाब होती नज़र आने लगी……
लेकिन मामा ने बड़ी चतुराई के साथ अपनी खुशी को छुपाते हुए बड़ी ही अनमने ढंग से कहा:
मामा: अरे बेटी………….. आक्च्युयली तुम तो मेरी आदत जानती ही हो………. मैने सोचा विजय साथ होगा तो मैं उसके साथ बैठकर थोड़ी ड्रिंक कर लूँगा………. इसलिए मैं विजय के आने का वेट कर रहा था.
कांता: तो क्या हुआ मामा जी विजय नही आया तो………. आप ड्रिंक ले लीजिए ……. वैसे भी मेरे सामने ड्रिंक लेना आपके लिए कोई नयी बात तो है नही……… आप आराम से अपना ड्रिंक ले लीजिए ………..
मामा: अरे बात वो नही है जो तुम समझ रही हो…….. आक्च्युयली मैं कभी भी अकेले ड्रिंक नही करता हूँ…… हाँ…….. अगर तुम साथ दो तो एक दो पेग ज़रूर ले लूँगा ……. (और कांता की तरफ के आस भरी नज़रो से देखा)
कांता: मैं………… क्या मामा जी …………. आआप्प्प्प्प्प्प्प्प भी नाआ………. बस……….