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मामा: लो इसमे क्या बुराई है भाई………… अब ऐसा तो होगा नही कि तुम ने कभी भी बिल्कुल भी नही पी हो
कांता कभी कभी 1-2 पेग विजय के साथ पी लिया करती थी….. मगर विजय की बात और थी….. मामा जी की बात और थी……. यही सोचकर कांता ने मामा जी को इनकार कर दिया…. अपना प्लेन फैल होता देख कर मामा ने फिर दूसरा पैतरा चला
मामा: तो ठीक है बेटी……….. अगर तुम मेरा साथ नही दोगि तो मैं भी नही लूँगा (और ये कह कर मामा थोड़ा सीरीयस हो गया, कांता ने उसका चेहरा देख कर ताड़ लिया की मामा जी को उसका इनकार करना बुरा लगा, इसलिए कांता मे मामा जी का दिल रखने के लिए कहा)
कांता: ठीक है मामा जी अगर आप इंती ज़िद करते है तो मैं आपका साथ दूँगी…. मगर सिर्फ़ एक पेग लूँगी……… इस से ज़्यादा नही…..
मामा की तो जैसे लॉटरी लग गयी हो उसने अपनी कामना को दबाते हुए कहा……….
मामा: ओके बेटी………. बस एक पेग ही ले लो………..
मामा जी की बात सुनकर कांता किचन मे स्नॅक्स के लिए चली गयी.. चूकि विजय पीने का शौकीन था… इसलिए वो घर मे कई तरह की कीमती शराब की बॉटले रखी हुई थी, मामा ने उसमे से एक स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की स्मीरान ऑफ वोड्का की बॉटल निकाल ली
कांता जब किचन मे से आई तो उसके हाथ मे एक ट्रे मे दो शीशे के ग्लास प्लेट मे कुछ स्नॅक्स और भुने हुए काजू के टुकड़े थे…. ट्रे मे आइस क्यूब भी रखा हुआ था… कांता ने वो ट्रे लाकर वहाँ रखे सेंटर टेबल पर रख दिया………
तब तक मामा जी ने भी बॉटल ओपन कर ली थी……… उन्होने कांता को लिम्का की बॉटल लाने के लिए कहा……. कांता जैसे ही लिम्का की बॉटल लेने के लिए किचन की तरफ गयी…… मामा ने झट से उसके ग्लास मे एक बड़ा सा पेग उडेल दिया और उपर से आइस के दो टुकड़े भी डाल दिए… ताकि पेग के बड़ा होने का अंदाज़ा ना लग सके…. और अपने ग्लास मे भी पेग बना लिया और उसमे भी आइस डालने लगे…..
तब तक कांता भी किचन से लिम्का की बॉटल लेकर आ गयी… वहाँ रखे सोफे पर बैठ गयी……….
कांता कभी कभी 1-2 पेग विजय के साथ पी लिया करती थी….. मगर विजय की बात और थी….. मामा जी की बात और थी……. यही सोचकर कांता ने मामा जी को इनकार कर दिया…. अपना प्लेन फैल होता देख कर मामा ने फिर दूसरा पैतरा चला
मामा: तो ठीक है बेटी……….. अगर तुम मेरा साथ नही दोगि तो मैं भी नही लूँगा (और ये कह कर मामा थोड़ा सीरीयस हो गया, कांता ने उसका चेहरा देख कर ताड़ लिया की मामा जी को उसका इनकार करना बुरा लगा, इसलिए कांता मे मामा जी का दिल रखने के लिए कहा)
कांता: ठीक है मामा जी अगर आप इंती ज़िद करते है तो मैं आपका साथ दूँगी…. मगर सिर्फ़ एक पेग लूँगी……… इस से ज़्यादा नही…..
मामा की तो जैसे लॉटरी लग गयी हो उसने अपनी कामना को दबाते हुए कहा……….
मामा: ओके बेटी………. बस एक पेग ही ले लो………..
मामा जी की बात सुनकर कांता किचन मे स्नॅक्स के लिए चली गयी.. चूकि विजय पीने का शौकीन था… इसलिए वो घर मे कई तरह की कीमती शराब की बॉटले रखी हुई थी, मामा ने उसमे से एक स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की स्मीरान ऑफ वोड्का की बॉटल निकाल ली
कांता जब किचन मे से आई तो उसके हाथ मे एक ट्रे मे दो शीशे के ग्लास प्लेट मे कुछ स्नॅक्स और भुने हुए काजू के टुकड़े थे…. ट्रे मे आइस क्यूब भी रखा हुआ था… कांता ने वो ट्रे लाकर वहाँ रखे सेंटर टेबल पर रख दिया………
तब तक मामा जी ने भी बॉटल ओपन कर ली थी……… उन्होने कांता को लिम्का की बॉटल लाने के लिए कहा……. कांता जैसे ही लिम्का की बॉटल लेने के लिए किचन की तरफ गयी…… मामा ने झट से उसके ग्लास मे एक बड़ा सा पेग उडेल दिया और उपर से आइस के दो टुकड़े भी डाल दिए… ताकि पेग के बड़ा होने का अंदाज़ा ना लग सके…. और अपने ग्लास मे भी पेग बना लिया और उसमे भी आइस डालने लगे…..
तब तक कांता भी किचन से लिम्का की बॉटल लेकर आ गयी… वहाँ रखे सोफे पर बैठ गयी……….