ये कह कर रामू ने गाड़ी लाखा राम के घर की तरफ मोड़ ली…. कुछ ही देर बाद गाड़ी लाखा राम के दरवाजे पर खड़ी थी… वहाँ पर और भी गाड़िया खड़ी थी, 4-5 ट्रॅक्टर्स, 3 जीपे और एक ब्लॅक कलर की स्कार्पीओ भी खड़ी थी… वो लाखा राम की पर्सनल गाड़ी है…. ऐसा कांता ने अंदाज़ा लगाया…. रामू कार से नीचे उतकर उस बड़े से मकान के द्वार पर गया….. वहाँ खड़े एक आदमी से उसने कुछ कहा….. वो आदमी उसकी बात सुनकर घर के अंदर गया… कुछ देर बाद वो वापस आया और उसने ड्राइवर से कुछ कहा….उसकी बात सुनकर रामू वापस कार की तरफ आया और कांता से बोला…..
रामू: मालकिन आपको अंदर बुला रहे है……………
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कांता रामू की बात सुनकर कार से नीचे उतर कर लाखाराम के घर के मेन गेट की तरफ चल दी.. पीछे पीछे रामू भी था…. अंदर जाकर कांता ने देखा घर तो पुराना था लेकिन बहुत बड़ा था….. तभी वहाँ खड़ा आदमी ने उनकी एक तरफ इशारे करते हुए उधर की तरफ चलने को कहा….
उस दिशा मे एक बड़ा हॉल था… ड्रॉयिंग रूम टाइप का.. वहाँ पर शानदार सोफे लगे हुए थे… वो आदमी ने उनको व्हा बैठने के लिए कहा और बोला…………… बाबू जी अभी आ रहे है आप लोग तब तक जलपान कीजिए…….
कांता वहाँ रखे सोफे पर बैठ गयी…. हॉल मे ही कुछ दूरी पर रामू खड़ा था…. कुछ देर के बाद हाल मे एक आदमी ने प्रवेश किया… कांता ने नज़रे उठा कर देखा… वो सक्श कोई 50-50 साल का एक लंबी चौड़ी कद काठी का स्वामी था… उसके सिर पर एक सफेद रंग की शानदार पगड़ी थी.. उसने सफेद रंग का चोला पाजामा पहना हुुआ … उसकी मोटी और नुकीली मुच्छे… कुल मिलाकर रौबदार व्यक्तित्व का स्वामी था वो.. उसको देख कर कांता ने सहज ही अंदाज़ा लगा लिया कि ये ही ठेकेदार लाखा राम है…. कांता अपनी जगह पर उठ खड़ी हुई… और मुस्करा कर दोनो हाथो को जोड़ कर उसने लाखा राम का अभिवादन किया… प्रतिउत्तर मे लाखा राम ने भी मुस्कुराते हुए उसका अभिवादन किया… और बोला….
लाखा राम: बैठे रहिए…. बैठे रहिए…… और खुद भी दूसरे सोफे पर कांता के सामने बैठ गया… अपने आदमी से मुखातिब होकर वो बोला … (ड्राइवर की तरफ इशारा करते हुए) इन्हे भी चाइ पानी पीलाओ… हम तब तक बाते कर रहे है…. और हाँ…. अभी किसी और को आने के लिए मना कर देना… हम एक ज़रूरी बात कर रहे है… समझे… (लाखा राम के स्वर मे आदेश था)
वो आदमी रामू को लेकर दूसरी तरफ चला गया… उसके जाने के बाद लाखा राम कांता की तरफ मुखातिब हुया… पहली बार उसने कांता को गौर से देखा………. कांता की बड़ी बड़ी आखे…… रसीले लरजते होंठ……… सुर्ख गाल……………. काली रेशमी जुल्फे… उसकी सुराहीदार गर्दन……… उसके नीचे उसके विशाल जोबन…. गदराया हुआ मांसल जिस्म…. ये सब देख कर उसकी आँखें कांता के जिस्म से चिपक सी गयी………
अपनी आखो से कांता के यौवन का रस्पान करते हुए लाखा राम कांता से बोला….
लाखा राम: हाँ… तो बताइए मेडम…. कैसे तकलीफ़ की आपने…
कांता: लाखा जी…. इसमे तकलीफ़ की क्या बात है…. मुझे आपकी ज़रूरत थी… इसलिए मैं आ गयी… वैसे भी एक कहावत है ना… कि…….. प्यासा ही कुएँ के पास आता है…. कुआँ कभी प्यासे के पास नही जाता…
लाखा: (मुस्कुराते हुए) तो आप अंपनी प्यास बुझाने के लिए आई है मेरे पस्सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………………
कांता लाखा राम की द्विअर्थि बातो का मतलब अच्छी तरफ समझ गयी… उसने भी लाखा की तरफ बड़े खूबसूरत अंदाज़ से देखते हुए कहा………
कांता: जी बिल्कुल…. सही समझ रहे है आप…. अब आगे आपकी मर्ज़ी.. कि आप मुझे प्यासा ही भेजेंगे.. या मेरी प्यास बुझा कर भेजेंगे………………
लाखा राम कांता की बातो को सुनकर मन ही मन बड़ा खुश हुआ.. पर अपनी ख़ुसी को छुपाते हुए वो कांता से बोला……
लाखा राम: इससस्स… शहर मे और भी लोग है .. मेरा मतलब और भी ठेकेदार है.. फिर आप को मेरी ज़रूरत कहाँ आन पड़ी……………
कांता: लाखा राम जी…. ये बात तो सही है कि इसस्स…… शहर मे और भी कई लोग है… लेकिन उन लोगो मे और आप मे एक बहुत बड़ा अंतर है… जो आपके पास है वो किसी के पास नही…. कांता गहरी नज़रो से देखते हुए लाखा राम की आखो मे आखे डालकर जवाब दे रही थी…
लाखा राम: अच्च्छा……….. ऐसी क्या बात है मुझमे जो आपको इतनी दूर खिच कर ले आई…..
लाखा राम ने कांता की आखो मे आँखे डालकर पूछा……………
कांता: अब आपको क्या बताएँ लाखा राम जी…. मेरी ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही है… और मेरी इस ज़रूरत को आपके अलावा और कोई पूरी नही कर सकता… ये बात कहते हुए कांता ने सोफे पर अपने सिर को निढाल कर के अपने दोनो हाथो को सोफे के उपर फैला लिया… उसके इस तरह से बैठने उसके स्तन काफ़ी उभर गये.. और कांता की हर एक साँस के साथ वो उपर नीचे होने लगे…
लाखा राम कांता के मदमस्त कर देने वालो जोबन के उन्नत उठान को अपनी आखो से नाप रहा था………
कांता भी जानती थी कि इस वक़्क लाखा राम की आखे वही देख रही थी.. जो वो उसे दिखाना चाहती है… कांता के जोबन का नयन रस्पान करते हुए अचानक लाखा राम को कुछ याद सा आया और वो कांता से बोला
लाखा राम: आपका तो एक और बिज़्नेस है ना… शायद आप लोग आम एक्सपोर्ट करते है……
कांता: जी… बिल्कुल वाजिब फरमाया आपने….
लाखा राम: मैने तो सुना है कि आपका वो बिज़्नेस काफ़ी अच्छा चल रहा है…. बढ़िया है… तो आप लोगो को अपने आमों का रस पिलाती है… मतलब आप आमरस का बिज़्नेस करती है… लाखा राम ने बात बिगड़ ना जाए इस गरज से बात को थोड़ा सा घूमा दिया…
लेकिन उसका जो मतलब था वो कांता समझ चुकी थी.. लाखा राम के सवाल का जावाब ही कांता ने उसकी हो टोन मे दिया….
कांता: जी बिल्कुल…. हम तो लोगो का ख़याल रखते है…. लोगो की प्यास बुझाते है उन्हे आम रस पिलाकर…………….
लाखा राम की आखो मे अब धीरे धीरे हवस प्रवेश कर रही थी.. .. वो कांता की तरफ भूकि नज़रो से देख कर बोला…………….
लाखा राम: तो कभी हमारी भी प्यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…………. बुझाआआआअ दीजीइईईईईईईईईईईईई….. मेरा मतलब कभी आमरस सेवन करने का मौका हमे भी तो दीजिए…………..
कांता: जी… बिल्कुल लाखा राम जी…. मैं भी तो यही कह रही हूँ…. कि आप मेरी प्यास बुझाइये.. और मैं आपकी…. फिर बात को थोड़ा घुमाकर बोली… आप जब चाहेंगे… तब मैं आपको आमरस के कार्टून भिजवा दूँगी…………..
लाखा राम: ठीक है……… आपका बहुत शुक्रिया… इस नवाज़ी के लिए… लेकिन वो क्या है कि ये बॉटल मे भरे हुए आम के रस मे वो मज़ा नही होता.. जो मज़ा आम चूसने मे होता है…..
कांता: (लाखा राम की बातो से अज्ञान बाते हुए) मतलब… मैं समझी नही….
लाखा राम: देखिए कांता जी…. ये बात तो आपको भी मान नी पड़ेगी कि नॅचुरल चीज़ नॅचुरल होती है… मतलब आम का जो मज़ा चूसने मे है वो मज़ा आम का रस पीने मे नही… तो मैं तो बस आपके आमो को चूसना चाहता हूँ… जब भी आप मौका देंगी तब………… हहेहेहेहेहहेहहेहहहे … लाखा राम की हसी मे मक्कारी सॉफ झलक रही थी………
कांता: जी क्यो नही… अबकी बार सीज़न आने दीजिए… आपको आम ज़रूर चूसने को मिलेंगे……..
लाखा राम: तो ठीक है मैं भी उस वक़्त का बड़ी बेसरबी से इंतज़ार करूँगा जब मुझे आप अपना आम चूस्वाएँगी…….. ये कहते हुए लाखा राम की आखे कांता की बड़ी बड़ी चूचियों को देख रही तही….
कांता: चलिए…. अब उस बारे मे भी कुछ बात हो जाए जिसकी वजह से हम यहाँ आए है… कांता ने बात को बिज़्नेस की तरफ मोड़ते हुए कहा……
लाखा राम: हाँ…. जी .. मेडम बिल्कुल……. तो अब बताइए कि मैं आपकी क्या खिदमत कर सकता हूँ….
कांता: बाबूजी ने आपको तो बताया ही होगा कि हम लोगो ने शुगर मिल्स का बिज़्नेस्स्स शुरू किया है… हमे कच्चे माल की भरपूर ज़रूरत पड़ेगी… और आपके पास कच्चे माल का सोर्स सबसे ज़्यादा है… इसलिए हम चाहते है कि आप हमें माल दें….
लाखा राम: और बदले मे मुझे क्या मिलेगा……………..?
कांता: आपको अपने माल की वाजिब कीमत..
लाखा राम: क्या कीमत देंगी आप मेरे माल की???????????? लाखा राम की आँखे काफ़ी गंभीर हो चुकी थी…
कांता: ये बात तो माल देखने के बाद ही बता पाउन्गी मैं……….. कांता ने बड़ी सहजता से कहा.
लाखा राम : तो चलिए मैं आपको फार्म हाउस पर ले कर चलता हूँ…. बाकी बाते वही करेंगे…..
ये कह कर लाखा राम अपनी जगह से उठ गया….. और कांता को अपने साथ चलने के लिए कहा…… लाखा राम के मेन गेट पर पहुचते ही उसका ड्राइवर गाड़ी के पास आकर खड़ा हो गया….. लाखा राम ने ड्राइवर से गाड़ी की चाभी खुद ले ली और उसको जाने का इशारा किया.. और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया. दूसरी तरफ का दरवाजा खोल कर कांता को अंदर आने का इशारा किया………… कांता उसके साथ ही आगे की सीट पर बैठ गयी… स्कार्पीओ का शीशा काले रंग का था जिसकी वजह से बाहर से उन्हे कोई नही देख सकता था… लाखा राम ने गाड़ी स्टार्ट की और अपने फार्म हाउस की तरफ चल पड़ा… रास्ते मे कांता ने चारो तरफ लहलहाते हुए खेत देखे… काफ़ी खुला एरिया था… चारो तरफ हरियाली ही हरियाली……
कांता: इस बिज़्नेस का तजुर्बा तो नही है… लेकिन इस से कोई ख़ास्स फ़र्क नही पड़ता….
लाखा राम: तजुर्बे का फ़र्क तो पड़ता है मेडम……..
कांता: आपकी बात भी सही है लेकिन अब कही ना कही से शुरुआत तो करनी ही पड़ेगी ना… और मुझे तजुर्बा नही है तो क्या हुआ आपको तो खूब तजुर्बा है इस बिज़्नेस का… बस आप मदद कर दीजिएगा…. क्यो करेंगे ना मेरी मदद…. कांता ने मुस्कुराते हुए लाखा राम से कहा…..
कांता की बात सुनकर लाखा राम के चेहरे पर भी मुस्कान खिल गयी … और उसका सिर अपने आप सहमति मे हिल गया…..
लाखा राम: आपको पता है कि आपको कैसे गन्ने खरीदने से फ़ायदा हो सकता है… मतलब गन्ने की क्वालिटी की बारे आप क्या जानती है….
कांता: यही कि गन्ना जितना ज़्यादा लंबा और मोटा होगा रस उतना ही ज़यादा निकलेगा………… कांता ने बातो की रंगीनीया बढ़ा दी……….
लाखा राम: तो आपको भी लंबे और मोटे गन्ने पसंद है…. क्यो…….
कांता: हाँ……………….
लाखा राम: और गन्ने की मिठास को कैसे परखेंगी आप……………..
कांता: अब गन्ने की मिठास का अंदाज़ा तो उसे चूस कर ही लगाया जा सकता है….
लाखा राम: मतलब आप मेरा गन्ना चूस कर भी देखेंगी…… लाखा राम कांता की डबल मीनिंग बातो से मन ही मन बड़ा खुश हो रहा था….
कांता: हाँ …. ज़रूरत पड़ी तो गन्ने को मैं चूस भी सकती हूँ……
कांता की बाते सुनकर लाखा राम के पाजामे मे पड़ा जानवर नींद मे ही करवटें बदलने लगा था…. … कांता भी लाखा राम की बातो से मस्त हो रही थी….
लाखा राम: लेकिन एक बात कहूँ मेडम…………. चूसने गन्ने का रस पूरी तरह से नही निकल पाता है… गन्ने का रस पूरी तरह से निकालने के लिए उसे कोल्हू (एक टाइप की मशीन, जिसमे रस निकालने के लिए गन्ने को पेला जाता है) मे तो डालना ही पड़ता है…
कांता: अगर मेरे चूसने ने गन्ने का रस पूरा नही निकला तो उसे मैं अपनी मशीन मे डालकर उसका पूरा रस निकाल लूँगी…….. कांता ने नहले पे दहला मारा…………………..
अब तक र्ल का फार्म हाउस आ चुका था… फार्म हाउस काफ़ी लंबा चौड़ा था… उसके चारो तरफ काटो वाले तार से बाउंड्री बनी हुई थी ताकि कोई जानवर खेत की फसल को नुकसान ना पहुचा सके… एक तरफ एक बड़ा सारा गेट बना हुआ था…. और उस गेट से एक कच्चा रास्ता बना हुआ था … जो काफ़ी दूर जाने पर एक बड़े से घर से जुड़ा हुआ था… लाखा राम की गाड़ी देख कर खेत मे काम कर रहे मजदूर मे से एक दौड़ता हुआ गाड़ी के पास आ गया… और हाथ जोड़ कर र्ल को नमस्कार किया…. र्ल ने उस से खेत के हाल चाल पूछे … और फिर गाड़ी आगे बढ़ा दी……… कुछ दूर जाने पर कांता को गन्ने के खेत नज़र आने लगे… लाखा राम उन खेत को दिखा कर गन्ने के खेत की तरफ इशारा कर के बोला:
लाखा राम: देख लीजिए मेडम…. ये है मेरा गन्ना…. कैसा लगा … मेरा गन्ना आपको….
कांता ने देखा कि गन्ने की फसल काफ़ी अच्छी थी… गन्ने काफ़ी लंबे लंबे थे उन्हे देख कर सहज ही ये अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वो काफ़ी रसीले होंगे… कांता खेत की तरफ देखती हुई बोली…
कांता: देखने मे तो काफ़ी अच्छी फसल है… रस तो भरपूर मात्रा मे निकलना चाहिए इनसे…
लाखा राम: अरे मेडम आप कहें तो अभी मैं आपको अपना गन्ना चुस्वा दूं….
कांता: चूस लूँगी लाखा राम जी….आपका गन्ना भी चूस लूँगी .. पहले थोड़ा रेट्स की बाते तो तय कर लें..
लाखा राम: हाँ… हाँ क्यो नही… चलिए बैठ कर आराम से बाते करते है… ये कह कर लाखा राम ने गाड़ी उस घर की तरफ बढ़ा दी. कुछ ही देर मे गाड़ी एक शानदार से बंगले नुमा घर के पोर्च मे खड़ी थी… लाखा राम गाड़े से उतरते हुए बोला…
लाखा राम : ये है मेरा छोटा सा फार्महाउस….. आइए अंदर चलकर बैठ कर बाते करते है…..
अंदर एक काफ़ी बड़ा हॉल था… उसके साइड मे एक तरफ …. शराब की एक से बढ़कर एक बॉटल्स रखी हुई थी… उसके अंदर आते ही एक नौकर दौड़ता हुआ आया और हाथ जोड़कर खड़ा हो गया… लाखा राम ने उसे कुछ नाश्ता लाने के लिए कहा…….. कांता को सोफे पर बैठने का इशारा किया….. हॉल काफ़ी शानदार था… उसके एक तरफ ज़मीन पर ही बड़ा और मोटा गद्दा बिच्छा हुआ था… उसपर 4-5 मसंद रखे हुए थे…. कुछ ही देर मे नौकर नाश्ते की प्लेट वहाँ के सेंटर टेबल पर ले आया… लाखा राम ने उसे जाने को कहा. और ये भी कहा कि उसे कोई डिस्ट्रब ना करे वो एक ज़रूरी कागजात तैयार कर रहे है… नौकर ने एक नज़र कांता को देखा और फिर बाहर चला गया…. उसके जाने के बाद लाखा राम कांता से बोला….
लाखा राम: तो कांता जी… क्या लेना पसंद करेंगी आप…. उसका इशारा शराब की तरफ था……
कांता: नही … लाखा राम जी… रहने दीजिए मैं कुछ नही लूँगी…..
लाखा राम: अरे कांता जी हम इतने बड़े बिज़्नेस की डील करने जा रहे है… अगर बात खुल के होगी तभी मज़ा आएगा…… एक पेग ले लीजिए कुछ नही होगा…. काफ़ी लाइट है ये… ये कहते हुए लाखा राम ने दो ग्लास मे जाम डाल दिए…. कुछ आइस क्यूब मिलाकर सोडे और पानी के साथ कांता की तरफ बढ़ा दिया…. कांता ने भी बिना किसी नाज़ नखरे के लाखा राम के हाथो से जाम ले लिया…
लाखा राम भी अपने जाम को लेकर सोफे पर बैठ गया…. उसने कांता की तरफ हाथ बढ़ाकर चेअर्स का इशारा किया.. जवाब मे कांता ने भी अपने पेग को उठा दिया… और दोनो ने जाम को अपने होंठो से लगा लिया……. कांता ने एक घूट ही भरा … लेकिन लाखा राम ने ग्लास को लगभग आधा खाली कर दिया….. ग्लास को टेबल पर रख कर लाखा राम कांता की तरफ देखते हुए बोला….
लाखा राम: हाँ तो बताइए कांता जी…. क्या रेट देंगी आप मुझे मेरे माल के बदले मे….
कांता: वही जो… सेठ जमुनादास दिया करते थे….
लाखा राम: अरे कांता जी … अगर सेठ जमुनादास मुझे वाजिब पैसे देते तो मैं अपना माल उनको क्यो ना बेचता.. ये कह कर लाखा राम ने फिर से अपने ग्लास को उठा लिया और अपने होंठो से लगा लिया…. कांता ने भी अपने जाम को लगभग आधा खाली कर दिया…….
कांता: वो रेट तो वाजिब ही दे रहे थे…. मगर आप की डिमॅंड कुछ ज़्यादा थी….
लाखा राम: माल के हिसाब से डिमॅंड बिल्कुल ठीक थी कांता जी… आपने तो खुद ही देखा कि मेरे गान्ने कितने अच्छे है…. लाखा राम एक बिज़्नेसमॅन की तरह बोला………..
कांता लाखा राम के बात करने के अंदाज़ से समझ गयी कि वो इस ट्रॅक से बात करेगा तो बात नही बन पाएगी… इसलिए कांता ने बात के ट्रॅक को थोड़ा सा मोड़ते हुए कहा….
कांता: अरे लाखा राम जी अभी मैने आपके गन्ने को ठीक से देखा ही कहाँ है…… कांता ने गन्ने शब्द पर इतना ज़ोर डाला कि उसका अर्थ ही बदल गया…………
कांता की बाते सुनकर लाखा राम का मूड भी बिल्कुल बदल गया… वो कांता के जिस्म को घूरते हुए बोला…
लाखा राम: कांता जी…. मैं तो खुद आपको अपना गन्ना दिखाना चाहता हूँ.. मगर आप रेट्स को इतना ना गिरा दें कि मेरे गन्ने की वॅल्यू ही कम हो जाए………
अब तक दोनो ने अपने अपने ग्लास खाली कर दिए थे…. लाखा राम अपने खाली ग्लास मे दोबारा से शाराब की बॉटल उडेल रहा था… कांता भी अपने खाली ग्लास को सेंट्रल टेबल पर रखने के लिए आगे की तरफ झुकी… उसके झुकते ही उसका पल्लू सरक कर नीचे गिर गया… कांता ने जो ब्लाउस पहना हुआ था उसका गला काफ़ी डीप था. पल्लू के हटते ही कांता की बड़ी बड़ी चूचिया लाखा राम के सामने नुमाया हो उठी…….. उफ्फ क्या कयामत लग रही थी…….
लाखा राम कांता का ग्लास उठाते हुए उसकी दोनो चूचियों को भूखी नज़रो से देख रहा था… कांता भी ये जान रही थी… उसने अपने पल्लू को गिरे ही रहने दिया… उसे उठाया नही… और वैसे ही अपने पैर को सोफे पर फैला कर सोफे के हत्थे पर सिर टिका कर अधलेटी सी हो गयी….
कांता की इस हरकत से लाखा राम की हिम्मत और बढ़ गयी और उसने पेग बनाते हुए कांता से कहा……………..
लाखा राम: एक बात तो है कांता जी…. आपके आम बड़े जबरदस्त है… कई लोग इन्हे चूसने के लिए लालायित रहते होंगे…
कांता: (सोफे पर ही अंगड़ाई लेती हुई) मेरे आम है ही इतने रसीले कि हर कोई इन्हे चूसना चाहता है… और वैसे भी वो आम ही क्या जिसे देख कर लोगो के मूँह मे पानी ना आ जाए…………
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लाखा राम कांता को पेग पकड़ाने के बहाने उसके सिर की तरफ आ गया जिस से कि वो कांता के रसील जोबन का दीदार और अच्छी तरह कर सके…. कांता को पेग पकड़ा कर वो कांता के सिर के पास ही अपना ग्लास हाथ मे लेकर खड़ा हो गया….. और कांता से बोला..
लाखा राम: कांता जी…. एक बार अगर आपने मेरा गन्ना चूस लिया तो बस आप मेरे गन्ने की दीवानी हो जाएँगी……
कांता: मैं तो खुद ही आपका गन्ना चूसना चाहती हूँ… लेकिन आप खुद नही चूसाना चाहते है अपना गन्ना मुझे…. कांता की आवाज़ मे शराब घूल चुकी थी.. अगर आप ये डील पक्की कर लें तो मैने पूरे साल भर तक आपका गन्ना चूसुन्गी………… कांता ने एक ही लाइन मे दोनो बात कह दी लाखा राम को….
लाखा राम: (शराब के घूट भरता हुआ बोला) वो सब तो ठीक है कांता जी….. लेकिन मैं बिज़्नेसमॅन हूँ थोड़ा बहुत तो फ़ायदा मिलना चाहिए मुझे… अब लाखा राम कांता की जवानी की आग से पीघलने लगा था….
कांता भी समझ गयी कि अब लोहा गर्म हो चुका है वार करने का यही सही मौका है… इसलिए कांता ने तुरंत लाखा राम से कहा…. चलिए आप की बात रखते हुए मैं आपका और ठेकेदार से अधिक रेट्स पर माल लूँगी….. अब आपका गन्ना मेरा हुआ…………………. ये कह कर कांता ने अपने ग्लास को होंठो से लगा लिया …
लाखा राम बिज़्नेस का मैदान छोड़ रहा था और हवस के मैदान मे प्रवेश कर चुका था… वो कांता के सिहराने बैठते हुए हवस भरी आवाज़ मे बोला… कांता जी आपने मेरे गन्ने को चूसने का हक़ तो मुझसे ले लिया…. लेकिन अभी तक आपने अपने आम चूसने ना हक़ मुझे नही दिया……………….
कांता: (जानबूझ का अंजान बनती हुई) बिल्कुल सीज़न तो आने दीजिए आमो को… जी भर के चूसिएगा आम. कांता लाखा राम को तड़पाते हुए बोली………..
लाखा राम: अरे… काांतत्त्टटटटटत्त्ताआआआ……… तुम्हारे पास आम ही आम है… तुम जब चाहो, जहाँ चाहो.. वहाँ आम चूस्वा सकती हूँ…………..
कांता: कहाँ है मेरे पस्सस आमम्म्मममम…. आपको आम दिखाई दे रहे है????????????
लाखा राम: हाँ मुझे तो बड़े बड़े दो दो आम दिखाई दे रहे है…………………
कांता: कहाँ दिखाई दे रही है ज़रा बताइए तो………….. कांता ने लाखा राम को उकसाते हुए कहा……….
कांता की उत्तेजित करने वाली बाते सुनकर लाखा राम अपना आपा खो बैठा और अपनी दोनो हथेलियो से कांता की दोनो चूचियो को पकड़ कर उनको ज़ोर से मसल्ते हुए बोला……….. ये रहे रसीले आआआमम्म्ममममममममम…………… लाखा राम कांता के स्तनों को उसके ब्लाउस के ऊपर से ही मसल्ने लगा…
उसकी बेताबी को वो अपनी चूचियो पर महसूस कर रही थी… लाखा राम कांता के अधखुले जोबन को ब्लाउस के अंदर हाथ डाल कर मसल रहा था… कांता के चूचक भी लाखा राम की हथेलियो के स्पर्श से कड़े हो चुके थे.. कांता के चूचक सेन्सिटिव होने से लाखा राम भी कांता की गर्मी को भाप गया और ग्रीन सिग्नल मिलते ही उसने अपने होंठ कांता के लरजते हुए होंठो पर टिका दिए…
कांता ने भी लाखा राम को पूरा रेस्पॉन्स दिया…. दोनो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे …. हॉल मे कांता की सिसकारिया बढ़ने लगी थी…. कुछ देर तक कांता के होंठो को चूसने के बाद लाखा राम कांता के साथ ही सोफे पर आ गया… कांता की आँखो मे वासना के डोरे तैर रहे थे…. कांता अब भी उसी तरफ सोफे के हत्थे पर अढ़लेटी हुई पड़ी थी…… कांता ने कसमसाती हुई आवाज़ मे लाखा राम से पूछा…..
कांता: आज तो आप मेरे आम चूस कर ही रहेंगे…… क्यो………….
कांता ने भी लाखा राम को पूरा रेस्पॉन्स दिया…. दोनो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे …. हॉल मे कांता की सिसकारिया बढ़ने लगी थी…. कुछ देर तक कांता के होंठो को चूसने के बाद लाखा राम कांता के साथ ही सोफे पर आ गया… कांता की आँखो मे वासना के डोरे तैर रहे थे…. कांता अब भी उसी तरफ सोफे के हत्थे पर अढ़लेटी हुई पड़ी थी…… कांता ने कसमसाती हुई आवाज़ मे लाखा राम से पूछा…..
कांता: आज तो आप मेरे आम चूस कर ही रहेंगे…… क्यो………….
लाखा राम कांता के ब्लाउस के हुक को खोलते हुए बोला………. हाँ…. कांता…. जब से मैने तुम्हे देखा है बस तब से ही मुझे तुम्हारे आम चूसने की ललक पैदा हो गयी थी… मैने सोच लिया था कि मैं तुम्हारे आम चूसे बिना तुम्हे यहाँ से नही जाने दूँगा….. ब्लाउस के हुक ख़ूलते ही कांता की कसी हुई चूचिया खुलकर सामने आ गयी… उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़……….. कितनी गोरी थी कांता की चूचिया…. जितनी ज़्यादा गोरी थी… उतनी ही आकार मे बड़ी भी… उसके दोनो निपल किसी काले अंगूर के मानिंद लग रहे थे… लाखा राम एक हाथ की उंगली से कांता की चूचक को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा…
. कांता दर्द के मारे और सिसकारने लगी…..
लाखा राम अपने तपते होंठो मे कांता की दूसरी चूची को मूह मे भरकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा….
कांता को भी बड़ा मज़ा आ रहा था लाखा राम की इस हरकतसे….. कांता ने लाखा राम के सिर को अपनी चुचियों पर और ज़ोर से दबाते हुए कहा……
कांता: और ज़ोर से चूसो इन्हे……….. आज पूरा रस निकाल दो मेरे आमो का………. कई दिनो से इन्हे चूसवाने के लिए बेकरार हो रही थी. मैं….. आआआहह……… और चूसो इन्हे… आआआआअहह………….उूउउम्म्म्मममममममममममममममममम….
कांता की मस्ती भरी आवाज़ लाखा राम को और जोश दिला रही थी… वो और ज़ोर से कांता की चूचियो को चूसने लगा………. लाखा राम कांता के आम चूस्ते हुए बोला………..
लाखा राम: काआन्त्त्त्त्त्त्ताआआ……… तुम्हारे आम तो बहुत मस्त है…….. अब तुम्हे मैं भी अपना गन्ना ऐसा चुस्वाउन्गा. कि तुम भी मस्त हो जाओगी…………….
कांता: ज़रा अपना गन्ना तो दिखाऊूऊ…………. लाखा राम जी……………….
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कांता की बात सुनकर लाखा राम ने उसकी चूचियो से अपना मुँह हटाया और सोफे पर बैठे ही बैठे अपना चोला उतार दिया……………. चोले के अंदर लाखा राम ने बाजू वाली बनियान पहनी हुई थी जिसमे से उसकी मर्दाना छाती पर उगे हुए बाल कांता को और आकर्षित करने लगे… लाखा राम ने अपना चोला वहाँ पड़े दूसरे सोफे की तरफ फेक दिया…. फिर अपने पाजामे के नाडे को खोलने लगा…
कांता भी उसके पाजामे की तरफ बड़ी उत्सुकता से देख रही थी.. पाजामे के खुलते ही कांता ने एक बड़ा से शंकु टाइप टेंट देखा लाखा राम के अंडरवेर मे .. उसके टेंट का आकार देख कर ही कांता लाखा राम के गन्ने का अंदाज़ा लगा लिया………..