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कांता की कामपिपासा

उसके अंडरवेर के उपर से ही लाखा राम के लंड की विकरालता सॉफ झलक रही थी …. कांता का पूरा ध्यान लाखा राम की दोनो टाँगों के जोड़ के मध्य था… उसने अपना ध्यान ऐसे केद्रित कर रखा था.. जैसे कि कोई भूखी शेरनी किसी हिरण की गुफा के द्वार पर हिरण का शिकार करने के लिए केंद्रित कर के रखती है… लाखा राम ने अपना हाथ अंडरवेर के अंदर डाला और अपने लिंग को एक झटके से बाहर खीच लिया… लिंग की मोटाई इतनी थी कि एक बार कांता भी कन्फ्यूज़ हो गयी कि उसके लिंग और हाथ की कलाई मे अंतर करने मे………

अपने मूसल लंड को हाथ मे लेकार उसे हिलाते हुए लाखा राम बोला…..

लाखा राम: क्यो कांता …. कैसा लगा मेरा गन्ना………..

लाखा राम के लंड को देख कर कांता की आँखे फटी की फटी रह गयी…..

लाखा राम अपने लंड को कांता के मुँह के पास हिलाते हुए बोला….

लाखा राम: क्यो कांता रानी…. गन्ना ज़्यादा मोटा है क्या…….. चूसने मे डर तो नही लगेगा???????

कांता: लाखा राम के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे आगे पीछे करती हुई बोली.. अरे लाखा राम जी मोटे गन्ने को ही तो चूसने मे मज़ा आता है.. और ये कह कर कांता ने लाखा राम के टमाटर जैसे लाल सुपाडे को अपने गुलाबी होंठो के बीच मे दबा लिया…

कांता के होंठो की तपन अपने लंड के सुपाडे पर पाकर लाखा राम सिहर उठा उसका हाथ कांता के बालो मे चलने लगा….

कांता अपने मुँह को ज़्यादा से ज़्यादा खोलकर लाखा राम का लंड चूस रही थी… हॉल मे लाखा राम की सिसकारी और सेक्स की महक चारो तरफ फैल रही थी… कांता के मुँह मे लाखा राम का आधा लंड जा चुका था… कांता के मुँह से निकली हुई लार की वजह से लाखा राम का लंड भीग चुका था…

इस पोज़िशन मे कांता के मुँह में आधे से ज़्यादा लंड नही जा सकता था.. इसलिए लाखा राम ने कांता को सोफे पर लिटाया और कांता के सिर को सोफे के हत्थे पर पीछे की तरफ लटका कर रख दिया…

कांता समझ गयी कि लाखा राम क्या करना चाहता है…

. लाखा राम ने एक बार फिर अपने लंड को कांता के मुँह के पास किया….

कांता ने उसके इशारे को समझ कर अपना मुँह खोल दिया और लाखा राम अपना लंड कांता के मुँह मे सरकाने लग्गा….. इस बार लाखा राम का लंड आधे से ज़्यादा कांता के मुँह मे चला गया था.. फिर लाखा राम अपनी दोनो हथेलियो मे कांता की मांसल चूचियो को पकड़ कर कांता का मुख चोदन कर लागा… जब लाखा राम का लंड काता के मुँह मे घुसता तो गले पर उसके लंड की छवि सॉफ झलक जाती थी … अब तक लाखा राम का पूरा लंड कांता के मुँह मे जा चुका था… कांता के जोबन को मीस्ते हुए लाखा राम मुख मैथुन करते हुए आनंद की अनुभूति मे सिसकारी लेते हुए बड़बड़ा रहा था

लाखा राम: सस्स्स्स्स्स्सस्स……………आआअहह… क्या चूस्तीईई है……… आआहह… सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………. आज तक बहुतो ने चूसा मेरे गन्ने को….. पर इतना मज़ा किसी ने नही दिया…. कांताआ…………..सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..आआआहह…. चूस्स्सस्स ……….. और चूस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स मेरे गन्ने को……….. चूस चूस के सारा रस निकाल दे मेरे गन्ने का …..आआआआहह पूरे हाल मे लाखा राम की सिसकारिया गूंजने लगी..

कांता भी लाखा राम के लंड को बड़े इतमीनान से चूस रही थी….

 
कांता ने उसके इशारे को समझ कर अपना मुँह खोल दिया और लाखा राम अपना लंड कांता के मुँह मे सरकाने लग्गा….. इस बार लाखा राम का लंड आधे से ज़्यादा कांता के मुँह मे चला गया था.. फिर लाखा राम अपनी दोनो हथेलियो मे कांता की मांसल चूचियो को पकड़ कर कांता का मुख चोदन कर लागा… जब लाखा राम का लंड काता के मुँह मे घुसता तो गले पर उसके लंड की छवि सॉफ झलक जाती थी … अब तक लाखा राम का पूरा लंड कांता के मुँह मे जा चुका था… कांता के जोबन को मीस्ते हुए लाखा राम मुख मैथुन करते हुए आनंद की अनुभूति मे सिसकारी लेते हुए बड़बड़ा रहा था

लाखा राम: सस्स्स्स्स्स्सस्स……………आआअहह… क्या चूस्तीईई है……… आआहह… सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………. आज तक बहुतो ने चूसा मेरे गन्ने को….. पर इतना मज़ा किसी ने नही दिया…. कांताआ…………..सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..आआआहह…. चूस्स्सस्स ……….. और चूस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स मेरे गन्ने को……….. चूस चूस के सारा रस निकाल दे मेरे गन्ने का …..आआआआहह पूरे हाल मे लाखा राम की सिसकारिया गूंजने लगी..

कांता भी लाखा राम के लंड को बड़े इतमीनान से चूस रही थी….

5 मिनट तक अपना लंड कांता को चूसाने के बाद लाखा राम ने कांता के मूँह मे से अपना लंड बहार खीचा और सोफे के सामने आकर कांता को सोफे पर बिठा दिया.. और फिर कांता के दोनो स्तनों को मसल्ने लगा…. फिर उसने कांता को स्तनों को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर दबाने के लिया कहा…. कांता ने अपनी दोनो बड़ी बड़ी गोलाईयों को एक दूसरे मे दबा दिया फिर उसकी चूचियों की घाटियों के बीच मे नीचे की तरफ से लाखा ने अपना लंड घुसेड दिया…

. कांता समझ गयी कि वो उसके मम्मों को चोदना चाहता है.. इसलिए कांता ने अपने मम्मो को ढीला छोड़ दिया.. अब लाखा राम का लंड कांता की दोनो चुचियों के बीच मे से निकल कर उसकी ठोडी को टच करने लगा .. लाखा राम अपने लंड को आगे पीछ करने लगा जब लाखा राम का लंड उपर की तरफ आता तो कांता उसके लंड के सुपाडे को अपने जीभ से चाट लेती…

कांता की इस हरकत से लाखा राम और रोमांचित हो उठा… और कांता के जोबन का मर्दन करते हुए कांता से बोला ….

लाखा राम: एक बात बताओ… कांता…..आज तक कितने गन्ने चूसे है तुमने…..

कांता: (मुस्कुराती हुई बोली) लाखा राम जी…आप भी कैसे अजीब से सवाल पूछते है????

लाखा राम: तुम्हे देख के लगता है कि तुमने 5-7 गन्ने तो चूसे होंगे…..

कांता: अरे नही …. लाखा राम जी

लाखा राम:. तो फिर तुम्ही बताओ आज तक कितनो के गन्ने चूसे है तुमने???

कांता: अरे लाखा राम जी… आप इतना भी नही समझते… गन्ने चूसने के लिए होते है गिनने के लिए नही… कांता ने बड़ी बेहयाई से मुस्कुराते हुए कहा…

कांता की बात सुनकर लाखा राम समझ गया कि ये लंड की भूकि औरत है… इसको लंड मिले तो किसी का भी लंड ले लेगी……

कांता की मदमस्त बातो ने लाखा राम को और मस्त कर दिया… वो कांता की चूचियो की गहराई से अपने लंड को खिचकर बाहर निकाल लिया और कांता की दोनो मांसल बाजुओं को पकड़ कर कांता को खड़ा कर दिया … एक नज़र कांता की मादक आखो मे देखने के बाद अपने होंठो को कांता के लरजते हुए होंठो पर रख दिया… दोनो के होंठ एक दूसरे के होंठो से गुथ गये… लाखा राम ने अपना हाथ कांता के कुल्हो पर फिराते हुए उसके मांसल चुतड़ों को अपनी हथेलियो मे भरकर मसल्ने लगा… वो कांता की गान्ड की दरार मे अपनी उंगलियो को घुसाने कर प्रयास करने लगा.. लेकिन कांता ने अभी तक पेटिकोट पहना हुआ था जिसकी वजह से लाखा राम की उंगलिया कांता की गान्ड के छोर तक नही पहुच सकी.. वो कांता की गदराई गान्ड मे ही फसी रह गयी. लाखा राम ने अपनी उंगलियो को कांता के गुदा द्वार पर ही काम पर लगा दिया…

 
कांता लाखा राम के हाथो का उतावलापन देख कर उनके मकसद को समझ गयी… कांता लाखा राम के हाथो को छुवन अपनी गान्ड के प्रवेश द्वार पर महसूस कर रही थी लेकिन इसका सबसे ज़यादा असर उसकी योनि द्वार पर हो रहा था… बदन की कार्यशीलता की वजह से उसकी योनि ने पसीने छोड़ने शुरू कर दिए थे और उसकी पैंटी इस योनि के पसीने से सरोबार होना शुरू कर दी थी. कांता और लाखा राम की बिज़्नेस मीटिंग बड़ी ही सीरीयस हो चली थी. दोनो ही पार्टिया अपनी इस डील को बड़ी तन्मयता से पूरी करने मे जुट गयी थी…

लाखा राम ने कांता के होंठो को अपने होंठो से आज़ाद करते हुए कांता की पीठ को अपनी तरफ कर दिया.. और अपने बाए हाथ से कांता की दाई चुची के चूचक को पकड़ कर मसल्ने लगा.. और अपने दाए हाथ से कांता की फूली हुई चूत को अपनी हथेली मे भरकर भीचते हुए कांता के कान के पास धीरे से फुसफुसाते हुए बोला…

लाखा राम:…. क्यो कांता….. मेरा गन्ना कैसा लगा….. चूसने मे मज़ा आया कि नही मेरा गन्ना ….. लाखा राम की बात सुनकर कांता ने मदभरी आवाज़ मे कहा….

कांता: आपके गन्ने की बात ही अलग है … इसको चूसने के बाद आज के पहले के सभी गन्ने मुझे फीके लगने लगे हैं…

लाखा राम ने एक हाथ से कांता की चूत को मसल्ते हुए और दूसरे हाथ से कांता के जोबन का मर्दन करते हुए कहा…..

लाखा राम: कांता…… तुमने मेरा गन्ना तो देख लिया और चूस्स भी लिया… अब ज़रा अपनी मशीन तो दिखाओ हमें… हम भी तो देखे कि तुम्हारी मशीन कैसी है….

मशीन शब्द कहते हुए लाखा राम ने कांता की चूत को ज़ोर से मसल दिया….

लाखा राम की बात सुनकर कांता अपना एक हाथ अपने पेटिकॉट के नाडे पर ले गयी और बड़ी ही अदा से उसकी गाँठ को खोल दिया….

नाडे की गाँठ खुलते ही कांता का पेटिकोट उसकी कमर से सरक कर लाखा राम के हाथ मे.. जो कि कांता की गान्ड की दरार मे फ़सा हुआ था.. उसमे आकर अटक गया… लाखा राम समझ गया की कांता ने अपना नाडा ढीला कर दिया है….. उसने कांता के खुलो के दरार से अपना हाथ बाहर निकाल लिया… जिसके परणाम स्वरूप कांता का पेटिकोट उसके पैरो मे गिर गया…. पेटिकोट के गिरते ही कांता की मांसल टांगे किसी केले के मोटे तने की तरह चमक उठी… उसकी गोरी चिकनी जांघे देख कर लाखा राम और ज़्यादा अधीर हो गया…. गुदाज जाँघो पर हाथ फिराते हुए…. लाखा राम ने कांता के मुँह को अपनी तरफ किया उसके विशाल और उन्नत कुल्हो का जायजा लेने लगा….उफफफफफफफ्फ़…… एक छोटी सी पैंटी कांता के विकराल कुल्हो को छुपाने का असफल प्रयास कर रही थी… लाखा राम कांता को दोनो कुल्हो पर अपने हाथ को फिराते हुए बोला….

लाखा राम: वाकई…. कांता तुम्हारी मशीन का तो कोई जवाब ही नही…. काफ़ी भारी मशीन है तुम्हारी….

 
नाडे की गाँठ खुलते ही कांता का पेटिकोट उसकी कमर से सरक कर लाखा राम के हाथ मे.. जो कि कांता की गान्ड की दरार मे फ़सा हुआ था.. उसमे आकर अटक गया… लाखा राम समझ गया की कांता ने अपना नाडा ढीला कर दिया है….. उसने कांता के खुलो के दरार से अपना हाथ बाहर निकाल लिया… जिसके परणाम स्वरूप कांता का पेटिकोट उसके पैरो मे गिर गया…. पेटिकोट के गिरते ही कांता की मांसल टांगे किसी केले के मोटे तने की तरह चमक उठी… उसकी गोरी चिकनी जांघे देख कर लाखा राम और ज़्यादा अधीर हो गया…. गुदाज जाँघो पर हाथ फिराते हुए…. लाखा राम ने कांता के मुँह को अपनी तरफ किया उसके विशाल और उन्नत कुल्हो का जायजा लेने लगा….उफफफफफफफ्फ़…… एक छोटी सी पैंटी कांता के विकराल कुल्हो को छुपाने का असफल प्रयास कर रही थी… लाखा राम कांता को दोनो कुल्हो पर अपने हाथ को फिराते हुए बोला….

लाखा राम: वाकई…. कांता तुम्हारी मशीन का तो कोई जवाब ही नही…. काफ़ी भारी मशीन है तुम्हारी….

. कांता लाखा राम की बात का मतलब समझ कर बोली….

कांता: अरे लाखा राम जी…. भारी मशीन ही तो आपके मोटे गन्ने का रस अच्छी तरह निकालेगी….. आप के मोटे गन्ने के लिए तो मेरे जैसी भारी मशीन की ही ज़रूरत है… कांता ने मुस्कुराते हुए कहा.. लाखा राम तो कांता की गान्ड मे ऐसे खो गया… जैसे वो कांता की गान्ड नही बल्कि ब्रह्मांड हो……

लाखा राम कांता के भारी भरकम चुतड़ों पर अपनी हथेलिया फिरा रहा था… लाखा राम ने कांता को नीचे बिछे हुए कालीन पर पेट के बल लिटा दिया… कांता के मोटे कूल्हे लाखा राम को और निमंत्रण दे रहे थे.. लाखा राम कांता के केले के तने जैसे चिकने पैरो को नीचे से सहलाता हुआ उपर की तरफ धीरे धीरे खिसक रहा था… उसके रूखे हाथो की मीठी चुभन कांता अपने पैरो पर महसूस कर सिहर उठी…. धीरे धीरे लाखा राम कांता के दोनो चूतड़ो को सहलाते हुए उसपर हल्के हाथ से थपकी मारने लगा… जैसे ही लाखा राम की हथेलियाँ कांता के कुल्हो से टकराती तो कांता के कूल्हे ऐसे हिलते जैसे वो दो बड़ी बड़ी रबर की गेंद हो… कांता के कुल्हो की थिरकन काफ़ी मदहोश कर देने वाली थी…

लाखा राम ने कांता की कमर मे फसि हुई नाम मात्र की पैंटी के दोनो तरफ से किनारों मे अपनी उंगली घुसाई और नीचे खिसकाने लगा…

कांता ने भी उसका सहयोग किया. अब कांता पूरी नंगी कालीन पर लेटी हुई थी…

लाखा राम कांता की दोनो आंतरिक जाँघो को सहलाने लगा…..

अपनी आंतरिक जाँघो पर लाखा राम की हथेलियो की स्पर्श पाकर कांता ने अपनी दोनो टांगे और चौड़ी कर दी… जिससे कि लाखा राम की हथेलिया और उचाईया छू सके…

लाखा राम अपने दोनो हाथो के अंगूठे को कांता की गुदाज गान्ड की दरार मे डालकर उसके गुदा द्वार को दबा दिया….

अपने पीछे के द्वार पर लाखा राम के अंगूठे के स्पर्श ने कांता को और मदहोश बना दिया…

लाखा राम ने कांता के दोनो कुल्हो को पकड़ कर विपरीत दिशा मे खीच दिया.. जिस से उसके दोनो कूल्हे रबर के गेंद की भाति थिरकन करने लगे.. लाखा राम एक पल उसकी गान्ड को एक टक देखता रहा… फिर कुछ सोच कर उठ गया… और कुछ दूरी पर रखे एक मेज की दराज को खोल कर उसमे कुछ ढूँढने लगा….

 
कांता की नज़रे भी यही देख रही थी कि लाखा राम अब क्या कर रहा है… कुछ देर बात ही कांता को उसका जवाब मिल गया… जब लाखा राम वापस आया तो उसके हाथ मे एक शीशी थी जिसमे आयिल बॉडी मसाज था

लाखा राम ने कांता को और तड़पाने की गरज से कांता की चूत मे अपनी दो उंगलिया डाल दी…

जैसे ही कांता की चूत मे लाखा राम ने अपनी उंगलिया घुसाइ.. कांता को ऐसा लगा जैसे उसकी चूत मे किसी ने गरम गरम रोड डाल दी हो…..कांता के मुँह से एक गरम आआआहह निकल गयी….

ठीक इसी प्रकार का अनुभव लाखा राम की उंगलियो को भी हुआ… उसे ऐसा लगा जैसे उसने किसी तपती हुई भट्टी मे अपनी उंगलिया घुसेड दी हो… कांता की योनि से योनि रस ऐसे चूह रहा था जैसे किसी गरम गरम जलेबी से चासनी टपक रही है…. कांता की चूत की गर्मी से लाखा राम के लंड के मुँह पर भी पसीना आने लगा था… लाखा राम ने कांता की चूत मे अपनी उंगली को आगे पीछे किया… चूत की भीतरी सतह रस से इतनी चिकनी हो गयी थी कि उसकी उंगलिया बड़े आराम से कांता की चूत मे सरक रही थी ….

उसकी उंगलियो के मर्दन से कांता की नसों मे आग दौड़ने लगी…. उसकी सिसकारी पूरे हॉल मे गूंजने लगी… कांता अपने चुतड़ों को उठाकर अपनी चूत को बड़ी ही बेचैनी के साथ लाखा राम की उंगलियो पे दबाती जिस से कि ज़्यादा से ज़्यादा लाखा राम की उंगलिया उसकी चूत के अंदर जा सके…

लाखा राम उसकी व्याकुलता को समझकर कांता को पीठ के बल होने का इशारा किया…

कांता उसके इशारे को समझकर करवट बदल कर लेट गयी.. अब उसका मुँह छत की तरफ था….

कांता की दोनो रानो को सहलाते हुए एक हवस भरी नज़र लाखा राम ने कांता की तरफ डाली… कांता की आँखे कह रही थी… कुछ करो… कुछ करो…… कांता की रानों को सहलाते हुए लाखा राम ने कांता की दोनो टाँगों को चौड़ा कर दिया…

कांता समझ गयी कि अब लाखा राम क्या करेगा…. ये अहसास होते ही कांता की आँखे अपने आप ही बंद हो गयी…. और उसके चेहरे पर एक अजीब प्यास उजागर हो गयी…

कांता के चेहरे को कुछ पल देखने के बाद उसने अपने होंठ कांता के दहक्ते हुए नीचे के होंठ पर रख दिए….

 
कांता को लाखा राम के होंठ ऐसे लगे जैसे उसकी चूत पर जलते हुए अंगारे रख दिए हो किसी ने… लाखा राम के होंठो को स्पर्श अपनी चूत पर पाकर कांता अंदर से पिघल गयी… और उसके योनि द्वार से कुछ द्रव सा निकलने लगा….

लाखा राम कांता की चूत की दोनो फाको को फैलाकार उसमे अपनी जीब डालकर कांता की योनि का रस्पान करने लगा…. कांता का हाथ अपने आप ही लाखा राम के सिर पर चला गया.. और उसके बालो मे उलझ गया… कांता उत्तेजना के मारे अपने होंठ को अपने दांतो के बीच दबाने लगी….

लाखा राम किसी कर्तव्यनिष्ठ इंसान की तरह अपना काम कर रहा था… कांता लाखा राम की चूत चाटने से उत्तेजना के मारे अपनी गान्ड को उठाकर लाखा राम के मूह पर रगड़ते हुए बड़बड़ाने लगी….

कांता: सस्स्स्स्स्स्सस्स….और चूसूऊऊऊओ…….आआहह… अरे लाखा राम जी… आपने तो मेरी मशीन के पुर्ज़े ही ढीले कर दिए…………

लाखा राम कांता की बात सुनकर बोला…

लाखा राम: ढीली ही नही कांता…. मैने तुम्हारी मशीन के पुर्जो को गीला भी कर दिया है…. ये कह कर लाखा राम और ज़ोर ज़ोर से कांता की चूत को चाटने लगा….

कांता की रसभरी चूत से लाखा राम का पूरा मुँह सरोबार हो चुका था… कांता के जिस्म की गर्मी.. उसके चुदक्कड होने की कहानी को चीख चीख कर बयान कर रही थी…

लाखा राम कांता के भारी भरकम कुल्हो के नीचे दोनो हथेलियाँ लगाकर कांता की चूत की गुलाबी फाको मे अपनी जीभ फिरा रहा था ,,,,,,,,,

तभी दोनो के इस वासनामय काम मे मोबाइल की घंटी सुनाई दी.. जिसने दोनो के काम मे अवरोध पैदा कर दिया… मोबाइल की रिंग टोन से कांता समझ गयी कि बजने वाला मोबाइल उसी का है…

लाखा राम कांता के मोबाइल को, जो कि पास ही सेंटर टेबल पर रखा था.. उसको उठाकर कांता की तरफ बढ़ा दिया… कांता मोबाइल को लेकर वापस पेट के बल अपनी कोहनी के सहारे कालीन पर लेट गयी.. अब एक बार फिर कांता की विकराल गान्ड का ब्रह्मांड लाखा राम की आखो के सामने घूमने लगा…

 
कांता ने मोबाइल को पिक करते हुए उसके स्पीकर को ऑन कर दिया.. और बड़ी ही मस्ती के अंदाज मे बोला…..

कांता: हेलो………………

दूसरी तरफ से जानकी लाल (कांता के ससुर की आवाज़ मोबाइल पर उभरी…. ये बात लाखा राम को पता नही थी कि कांता अपने सासुर से बात कर रही है… लाखा राम अपने हाथ को एक बार फिर कांता के सुडोल चुतड़ों पर रख दिया…

जानकी लाल: और कांता मेडम…. क्या रहा .. मामला सेट हुआ कि नही… ये बात सुनकार लाखा राम समझ गया.. कि वो सख्स जो भी है कांता को अच्छी तरह जानता है.. और उसे ये पता है कि कांता यहा पर बिज़्नेस के सिलसिले मे आई हुई है… शायद कंपनी का मॅनेजर होगा…. ऐसा लाखा राम सोच रहा था…

कांता: हाँ… बस मामला सेट करने मे ही लगी हुई हूँ… उम्मीद है कि मामला सेट हो जाएगा… ये कहकर कांता अपने चेहरे को लाखा राम की तरफ घुमा कर मुस्करा दी…

जानकी लाल: उम्मीद नही … ये डील पूरी होनी ही चाहिए… वरना एक बड़ा नुकसान हो जाएगा हम लोगो को…..

कांता: हाँ जानती हूँ मैं भी…. बस बात चीत चल ही रही है…

जानकी लाल: अच्छा.. ये तो बताओ कि गन्ने कैसे है… मेरा मतलब उनकी क्वालिटी तो सही है ना… गन्ने देखे कि नही तुमने…..

कांता अब फोन लेकर सीधा लेट गयी अब लाखा राम और कांता दोनो के चेहरे आमने सामने थे… स्पीकर ऑन होने की वजह से लाखा राम को दूसरी तरफ की बाते आराम से सुनाई दे रही थी… कांता ने मुस्कुराते हुए कहा…

कांता: अरे… अब गन्ने के बारे मे क्या कहूँ…. तबीयत खुश हो गयी लाखा राम के गन्ने को देख कर.. ये कहते हुए कांता ने एक आँख लाखा राम की तरफ दबा दी… अपने गन्ने की तारीफ़ सुनकर लाखा राम भी खुश हो गया… फिर कांता ने बात जारी रखते हुए कहा…. सच कहूँ.. आज तक मैने इतना लंबा और मोटा गन्ना नही देखा…

जानकी लाल: लेकिन एक बात तुम्हे समझा दूँ कांता जी… हमें गन्ने की मोटाई ही नही देखनी बल्कि बाकी चीज़े भी उसमे होनी चाहिए…..

कांता: बाकी चीज़ो से क्या मतलब है आपका………….

जानकी लाल: पहली चीज़ तो ये कि गन्ने मे मिठास होनी चाहिए… और दूसरी ये कि गन्ने से रस भरपूर मात्रा मे निकलना चाहिए… वैसे एक बात तो बताओ कि तुमने गणना चूस्कर देखा कि नही… लाखा राम दोनो के द्विअर्थि सवाद को सुनकर और जोश से भर गया… उसने फिर अपनी उंगली कांता की गीली चूत मे घुसा दी..

कांता: हाँ… लाखा राम का गन्ना मैने चूसा… और आपको क्या बताऊं… उनका गन्ना इतना मोटा था कि मुँह मे ही नही समा रहा था.. पर मैने भी आखीर मे उसे पूरा चूस कर ही छोड़ा… उसकी मीठास का अहसास अब भी मेरे होंठो पर है.. कसम से मज़ा आ गया गन्ना चूसने मे… कांता की गरम बातो ने महॉल को और ज़्यादा गरम कर दिया..

 
जानकी लाल: पहली चीज़ तो ये कि गन्ने मे मिठास होनी चाहिए… और दूसरी ये कि गन्ने से रस भरपूर मात्रा मे निकलना चाहिए… वैसे एक बात तो बताओ कि तुमने गणना चूस्कर देखा कि नही… लाखा राम दोनो के द्विअर्थि सवाद को सुनकर और जोश से भर गया… उसने फिर अपनी उंगली कांता की गीली चूत मे घुसा दी..

कांता: हाँ… लाखा राम का गन्ना मैने चूसा… और आपको क्या बताऊं… उनका गन्ना इतना मोटा था कि मुँह मे ही नही समा रहा था.. पर मैने भी आखीर मे उसे पूरा चूस कर ही छोड़ा… उसकी मीठास का अहसास अब भी मेरे होंठो पर है.. कसम से मज़ा आ गया गन्ना चूसने मे… कांता की गरम बातो ने महॉल को और ज़्यादा गरम कर दिया..

जानकी लाल: हाँ… कांता .. जानता हूँ मैं तुम्हे… खूब मोटे मोटे गन्ने चूसे है तुमने… तो फिर लाखा राम के गन्ने की क्या बिसात है.. और ये कह कर जानकी लाल हँस पड़ा… उनका ये द्विअर्थी संवाद लाखा राम ने भी सुना.. और वो ये समझ गया कि वो सख्स जो भी है.. उसका और कांता का अंतरंग संबंध ज़रूर होगा… पर इन बातो से भला लाखा राम को क्या परेशानी हो सकती थी.. इसलिए उसने अपना ध्यान कांता की चूत की तरफ ही रखा..

कुछ देर हँसने के बाद जानकी लाल कुछ सीरीयस होते हुए बोला.. अच्छा जाने दो.. ये बताओ की गन्ने से रस कितना निकला… जानकी लाल की आवाज़ से जाहिर हो गया कि वो अब बेहद संजीदा है बिज़्नेस के लिए…

कांता: अब चूसने से तो अच्छी तरफ रस कहाँ निकल पाता है.. इसलिए मैने तो लाखा राम को कह दिया कि आप एक बार मुझे मशीन मे डालकर गन्ने का रस निकाल कर दिखाए.. तभी मैं आगे आपके गन्ने के बारे मे कुछ कह पाउन्गी….

जानकी लाल: तो लाखा राम ने क्या कहा ………..

कांता: वो बोला कि कांता जी… मशीन तो कयी दिनो से बंद पड़ी है.. क्योकि अभी फसल कटने मे 10-15 दिन बाकी है..

जानकी लाल: फिर………

कांता: फिर क्या.. मैने कह दिया कि आप मशीन तैयार करवाइए… मुझे एक बड़े से गन्ने को मशीन मे डलवाकर देखना है… तो बस लाखा राम जी मशीन तयार करने मे लगे हुए है….

जानकी लाल: मतलब???????????

कांता: मतलब क्या… मशीन के कलपुर्जों मे तेल लगा रहे है.. और लाखा राम की तरफ देख कर एक बेशर्मी की मुस्कान फेक दी… प्रतिउत्तर मे लाखा राम भी मुस्कुरा दिया..

जानकी लाल: मजाकिया लहजे मे… मतलब कि तुम पहले उस से तेल लगवा रही हो… उसके बाद डलवाओगी… मेरा मतलब कोल्हू मे गन्ना डालके उसका रस निकालोगी…

कांता: और क्या… मैं बिज़्नेस मे कोई कसर नही छोड़ती…

जानकी लाल: वो तो मैने भी जानता हूँ.. मगर एक बात का ख़याल रखना… जानकी लाल फिर सीरीयस होते हुए बोला…

जानकी लाल को सीरीयस होता देख कांता भी थोड़ी संजीदा हो गयी और उसके मुँह से उत्सुकतावश निकल पड़ा …..

कांता: कौन सी बात का….

जानकी लाल: ध्यान रखना कि वो गन्ना अपने कोल्हू (गाँव मे गन्ने पेलने की मशीन को कोल्हू कहा जाता है) मे डाले.. कहीं ऐसा ना हो कि…. और जानकी लाल ने अपना वाक्य जानबूझ कर अधूरा छोड़ दिया… वैसे कांता उस अधूरे वाक्य को समझ तो गयी थी मगर फिर भी अंजान बनते हुए जानकी लाल से पूछा…

कांता: कहीं ऐसा ना हो कि……… कांता ने वाक्य को पूरा करवाने की गरज से जानकी लाल को उकसाया…

जानकी लाल: कही ऐसा ना हो कि लाखा राम अपना गन्ना कोल्हू मे पेलने की बजाय तुम्हारे कुल्हों मे पेलने लग जाए. और वाक्य पूरा करने के साथ ही बेशरम हसी शुरू कर दी…

 
कांता जानकी लाल की बाते सुनकर मुस्कुराती हुई बोली..

कांता: अब ये तो लाखा राम जी की मर्ज़ी है.. अब चाहे तो वो अपना गन्ना कोल्हू मे डाले.. और चाहे मेरे कुल्हों मे.. दोनो ही स्तिथि मे रस तो गन्ने का निकल ही जाएगा.. और फिर जानकी लाल और कांता दोनो एक साथ हंस पड़े…. उनकी इस हँसी मे लाखा राम भी अपनी मुस्कान के साथ शामिल हो गया… कांता और जानकी लाल की बाते सुनकर अब उसका भी मन पहले कांता के कुल्हो की तरफ ही जाने लगा… कांता ने फोन कट करने की गरज से जानकी लाल से कहा….

कांता: अच्छा सुनो… मैं अभी फोन रख रही हूँ…. लाखा राम आ रहा है.. शायद उसने कोल्हू मे तेल लगा दिया है.. ये कहते हुए कांता ने अपनी गान्ड की तरफ देखा… अब मैं उसके गन्ने को अपने कुल्हो मे… सॉरी.. सॉरी……… कोल्हू मे डलवाकर उसका रस निकलवाती हूँ.. और फिर दोनो एक बार हंस पड़े और इसके साथ ही कांता ने फोन कट कर दिया. और उसे कालीन पर कुछ दूर फेक दिया… और लाखा राम की तरफ कातिलाना नज़रो से देखती हुई बोली..

कांता: क्यो लाखा राम जी… तेल लगा दिया अपने कोल्हू मे……………

लाखा राम: अपने हाथ मे अपने लंड को लेकर मसलता हुआ बोला… मैं तो कब्से तैयार हूँ आपके कोल्हू मे अपना गन्ना डालने के लिया.. बस आप तैयार हो जाएँ डलवाने के लिए…

लाखा राम की बात सुनकर कांता बोली

कांता: मैं भी बड़ी उतावली हूँ आपका गन्ना अपने कोल्हू मे डलवाने के लिए.. आज अपने कोल्हू मे दबाकर आपके गन्ने का पूरा रस निचोड़ दूँगी….

अब दोनो के अंदर उत्तेजना इतनी बढ़ गयी गयी कि अब दोनो को इसे बर्दाश्त करना बस की बात नही थी.. लाखा राम ने कांता को उठाया और उसको सोफे पर घुटनों के बल बिठाकर उसके सिर को नीचे कर दिया.. कांता की गान्ड उपर हवा मे उठ गयी और उसके दोनो कूल्हे विपरीत दिशा मे फैल गये… लाखा राम ने कांता की गान्ड के छेद पर और तेल गिराया और अपने लंड को भी तेल से सरोबार कर दिया कांता की गान्ड को फैलाते हुए लाखा राम ने अपने अंगूठे को उसकी गान्ड के छेद पर रख कर दबाया.. गान्ड पहले से आयिली थी इसलिए बिना किसी परेशानी के लाखा राम का अंगूठा कांता की गान्ड मे घुस गया… लाखा ने अपने लंड को कांता की गान्ड के छेद पर टिकाया..

अपनी गान्ड पर लाखा राम के लंड की छुवन पाकर कांता और बेचैन हो गयी…

 


अब दोनो के अंदर उत्तेजना इतनी बढ़ गयी गयी कि अब दोनो को इसे बर्दाश्त करना बस की बात नही थी.. लाखा राम ने कांता को उठाया और उसको सोफे पर घुटनों के बल बिठाकर उसके सिर को नीचे कर दिया.. कांता की गान्ड उपर हवा मे उठ गयी और उसके दोनो कूल्हे विपरीत दिशा मे फैल गये… लाखा राम ने कांता की गान्ड के छेद पर और तेल गिराया और अपने लंड को भी तेल से सरोबार कर दिया कांता की गान्ड को फैलाते हुए लाखा राम ने अपने अंगूठे को उसकी गान्ड के छेद पर रख कर दबाया.. गान्ड पहले से आयिली थी इसलिए बिना किसी परेशानी के लाखा राम का अंगूठा कांता की गान्ड मे घुस गया… लाखा ने अपने लंड को कांता की गान्ड के छेद पर टिकाया..

अपनी गान्ड पर लाखा राम के लंड की छुवन पाकर कांता और बेचैन हो गयी…

लाखा राम कांता की गान्ड के छेद पर अपने लंड को सेट करते हुए कांता से पूछा…

लाखा राम: क्यो कांता रानी… मेरा गन्ना अपने कोल्हू मे डलवाने के लिए तैयार हो ना….

कांता: अब आपके गन्ने को कोल्हू मे डालने की नही बल्कि मेरे कुल्हों मे डालने की ज़रूरत है… अब जल्दी से इसे मेरे कुल्हो मे डाल दो………..

कांता की बात पूरी होते ही लाखा राम ने अपने दोनो हाथो से कांता की कमर को पकड़ कर एक जोरदार प्रहार उसकी गान्ड मे किया… और अगले ही पल लाखा राम का मोटा लंड कांता की गान्ड को चौड़ा करते हुए आधे तक अंदर समा गया… लाखा राम के इस तगड़े प्रहार से कांता के मुँह से भी आह निकल गयी… लाखा राम ने कांता की गान्ड मे अपना लंड घुसाए हुए पूछा…

लाखा राम: दर्द तो नही हुआ कांता…. अभी तो आधा ही अंदर गया है…..

कांता: दर्द तो बहुत हो रहा है लाखा राम जी…. मगर इसलिए नही कि आपका आधा अंदर घुसा हुआ है.. बल्कि दर्द इसलिए हो रहा है कि अभी भी आपका आधा बाहर ही है… कांता ने लाखा राम को उकसाते हुए कहा…

कांता की बात सुनकर लाखा राम ने अपने लंड को कांता की गान्ड से थोड़ा बाहर खीचा और फिर बड़ी ही तेज गती से कांता की गान्ड मे दोबारा घुसेड दिया.. इस बार उसका लंड जड़ तक कांता की गान्ड मे घुस गया.. कांता के मुख से दोबारा सिसकारी निकल गयी.. पूरा लंड घुसाने के बाद लाखा राम ने अपने लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया. कांता की अनुभवी गान्ड ने लाखा राम के मोटे लंड को कुछ ही झटको मे अपने भीतर सेट कर दिया.. जब लाखा राम ने देखा कि उसका लंड अब आसानी से कांता की गान्ड मे अंदर बाहर होने लगा तो उसने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा थी… वो अपने एक हाथ से कांता के कंधो को पकड़ कर तेज गति से कांता की गान्ड पर प्रहार करने लगा.. जब उसका प्रहार कांता की मोटी गान्ड से टकराता तो ठप की आवाज़ से पूरा हाल गूंजा जाता और कांता की गान्ड भी उसके इस तेज प्रहार से थिरकने लगती.. अभी उसकी थिरकान बंद भी नही होती कि दूसरा तेज प्रहारा फिर कांता की गान्ड पे पड़ जाता.. अब हाल मे ठप्प्प्प्प्प्प…. ठप्प्प्प्प्प्प्प्प्प… की आवाज़ के साथ कांता की सिसकारी भी गुज़्ने लगी थी.. चुदाई का महॉल अपने चरम पे था… हहस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स………ठप्प्प्प्प्प्प….. ठप्प्प्प्प्प्प्प……….आआहह….तहााअहप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प..सस्स्स्स्सस्स…………

लाखा राम का लंड कांता की गान्ड की पूरी गहराई को नाप रहा था . कांता भी अपनी गान्ड मराई का भरपूर आनंद ले रही थी.. लगभग 5 मिनट तक लाखा राम कांता की गान्ड इसी पोज़िशन मे मारता रहा… लाखा राम के तगड़े लंड की अनुभूति अपनी गान्ड मे करते हुए उसे स्वामी जी की याद आ गयी…. और वो सोचने लगी कि इन दोनो का लंड कितना तगड़ा,….. है .. ये दोनो कितनी अच्छी तरफ चोदते है.. अगर ये दोनो एक साथ करे तो……… ये सोच कर कांता का मज़ा दुगुना हो गया….. लाखा राम ने अपनी स्पीड कम कर के कांता को सोफे पर लेटने को कहा.. लाखा राम का लंड कांता की गान्ड मे अब भी फ़सा हुआ था

 
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