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कांता की कामपिपासा

स्वामी जी ने कांता को अपने उपर से उतरने की लिए कहा. कांता जैसे ही स्वामी जी के उपर से उतरी स्वामी जी भी तुरंत उठ गये और कांता

से बोले.

स्वामी जी: कांता , अब तुम घोड़ी बन जाऊऊऊऊऊओ,.. मैं तुम्हे घोड़ी बनाकर चोदुन्गा,,,

कांता बिना समय गवाए तुरंत घोड़ी बन गयी,.

स्वामी जी ने कांता का सर थोड़ा और नीचे झुकाया जिस से की कांता की गान्ड कुछ और बाहर निकल गयी. और उसकी दोनो मोटी मोटी जाँघो के बीच से उसकी फूली हुई चूत भी जाँघो से बाहर झाकने लगी. स्वामी जी अपना मोटा लंड कांता की चूत की फांको के उपर से ही उसकी चूत पर रगड़ने लगे. कांता की चूत का दाना उत्तेजना मे हिलने लग गया. स्वामी जी कांता की उत्तेजना को समझ गये और उन्होने एक

बार फिर अपना लंड कांता की चूत मे ठोक दिया. घोड़ी की पोज़िशन मे लंड सबसे ज़यादा अंदर घुसता है. स्वामी जी का लंड भी कांता की चूत मे अब तक चुदाई मे सबसे ज़्यादा अंदर तक गया इसी कारण कांता के मूह से एक हल्की आहह सी निकल गयी.

अपना लंड कांता की चूत मे घुसाने के बाद स्वामी जी ने कांता की कमर को पकड़ कर कांता की चूत पर धक्का मारना स्टार्ट कर दिए.

कांता के दोनो मोटे मोटे स्तन लटके हुए थे और स्वामी जी द्वारा लगाए जा रहे हर धक्के से उसके स्तन हवा मे झूल रहे थे. दोनो कामलीला के आनंदमयी सागर मे गोता लगा रहे थे. उनकी काम क्रीड़ा को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे की स्वयं कामदेव और रति काम क्रीड़ा कर रहे हो. स्वामी जी ने अपना हाथ कांता की कमर पर से हटा कर कांता की झूलती हुई चूचियो को थाम लिया और अपने दोनो हाथों से उसकी दोनो चूचियो को मसल्ते हुए ज़ोर ज़ोर से झटका लगाने लगे. स्वामी जी धक्के इतने जबारजस्ट तरीके से मार रहे थे कि कांता के दोनो कूल्हे उनके

धक्को की चोट से लाल हो गये थे. अब कांता स्वामी जी के लंड को अपने बच्चेदानि तक महसूस कर रही थी. स्वामी जी भी पुरी ताक़त के साथ अपना लंड कांता की चूत मे पेल रहे थे. और बड़े ही बेदर्दी से उसकी चूचिया मसल रहे थे. इतनी जबर्जस्त चुदाई से कांता के मूह से

हल्की दर्द भरी आह निकलने लग गयी थी.

लेकिन कांता खुद ये समझ नही पा रही थी कि उसे दर्द चूचियो मे हो रहा है या चूत मे. क्योकि दोनो का ही बाजा स्वामी जी बड़े ज़ोर से बजा रहे थे. कांता अब अपनी चुदाइ की चरम सीमा की तरफ बढ़ चली थी. उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी. वो उत्तेजना मे बड़बड़ाने लगी, आआआआहह स्वामी जी और ज़ोर से चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊदिये स्वामी जी ,, और तेज धक्का लगाइए,, फाड़ दीजिए मेरी इस चूत को बहुत चुदासी है ये,,.. और अंदर तक पेलिए, पवित्र कर दीजिए अपना प्रासाद डालकर इसमे,, हह हह हहाअ आईईईईईईईईई राम्म्म्मममममम

अहह मैईईईईईईईईईईई ईईईईईई ईईईईईईईईई. उूुुुुुुउउइईईईईईईई मा आ आम एम्म्म आहहा अहहा अहहा हः आहा ,..

 
अब कांता स्वामी जी के लंड को अपने बच्चेदानि तक महसूस कर रही थी. स्वामी जी भी पुरी ताक़त के साथ अपना लंड कांता की चूत मे पेल रहे थे. और बड़े ही बेदर्दी से उसकी चूचिया मसल रहे थे. इतनी जबर्जस्त चुदाई से कांता के मूह से

हल्की दर्द भरी आह निकलने लग गयी थी.

लेकिन कांता खुद ये समझ नही पा रही थी कि उसे दर्द चूचियो मे हो रहा है या चूत मे. क्योकि दोनो का ही बाजा स्वामी जी बड़े ज़ोर से बजा रहे थे. कांता अब अपनी चुदाइ की चरम सीमा की तरफ बढ़ चली थी. उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी. वो उत्तेजना मे बड़बड़ाने लगी, आआआआहह स्वामी जी और ज़ोर से चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊदिये स्वामी जी ,, और तेज धक्का लगाइए,, फाड़ दीजिए मेरी इस चूत को बहुत चुदासी है ये,,.. और अंदर तक पेलिए, पवित्र कर दीजिए अपना प्रासाद डालकर इसमे,, हह हह हहाअ आईईईईईईईईई राम्म्म्मममममम

अहह मैईईईईईईईईईईई ईईईईईई ईईईईईईईईई. उूुुुुुुउउइईईईईईईई मा आ आम एम्म्म आहहा अहहा अहहा हः आहा ,..

स्वामी जी भी कांता की बड़बड़ाहट सुनकर ताबड़तोड़ धक्के मारते हुए उत्तेजना मे चिल्लाने लगे,.. आआआअ आहह हह ये लो, और अंदर तक लो कांता रानी ,, आज तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना दूंगाआ आ आअ,,, बड़ी मटक मटक के चलती हो नाआआ,, आज तुम्हारी इस चूत का कचूमर बना दूंगाअ,.. ये लो मेरी रानी और अंदर तक लूऊऊऊ,.

कांता : आआअहह. स्वामी जी ,,. अब मैं झड़ने वाली हूँ स्वामी जी ,,,,आआआः आआआ आ स्वामी जी मैं झड रहीईई ईएईईईईईई ईईूऊऊओ स्वामी जी आआआअ एयाया आहह ,और कांता का बदन अकड़ने लगा,.. कांता का शरीर कापने सा लगा था. ,. और फिर कांता ने अपने शरीक को एक झटका दिया. ,.. इसके साथ ही स्वामी जी का लंड कांता के गरम वीर्य से भीग गया. स्वामी जी का लंड कांता की चूत मे होने

के बाद भी कांता की चूत से वीर्य टपक रहा था.

स्वामी जी ने वैसे ही कांता की चूत मे लंड डाले डाले ही कांता को पीठ के बल लिटाया और अपना धक्का स्टार्ट कर दिया, स्वामी जी भी अब झड़ने वाले थे. ,,. वो भी धक्को की स्पीड दुगुना करके बड़बड़ाने लगे,, हीईीईईईईईई कांता ,.. तुम तो बड़ी चुदासीईईए हो, मज़ा आ गया ,, ये

लो कांता मेरा पूरा लो,आआआआहह. मैं झड़ने वाला हूँ काँताअ,, अब तुम्हारे हवन कुंड मे मेरा घी गिरने वाला है, आआअहह काँताअ ,, आहह,आ ,आहह ये कहने के साथ ही स्वामी जी का शरीर झटका खाने लगा,, और वो भी कांता की चूत मे अपना वीर्या छोड़ने लगे, दोनो ने

एक दूसरे को बुरी तरह जकड़ा हुआ था. स्वामी जी 4-5 झटके लगाने के बाद शांत हो गये,. कांता भी अर्ध बेहोशी की हालत मे लेटी हुई थी.

दोनो के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे. और क्यो ना हो आख़िर दोनो का हवन पूरा जो हो गया था…...

.....................................................

 
कांता स्वामी जी के साथ अपने हवन को पूरा करके शाम को वापस घर चली आई. हवेली पर आते ही वो कार से उतरकर सबसे पहले अपनी

सास के पास गयी जो कि बिस्तर पर लेटी हुई थी. उसको देखते ही सास बोली (आपको यहाँ बता दें कि उसकी सास का नाम जया देवी था)

जया: अरे अऊऊओ बेटी आऊऊऊऊ......... बड़ी देर लग गयी हवन करने मे.

कांता: हााआआ........... स्वामी जी ने पूरी विधि के साथ हवन किया...... इसलिए थोड़ी देर हो गयी...

जया: कोई बात नही ............. हवन तो सही तरीके से हो गया ना.......?

कांता: हाँ माँ जी......................... स्वामी जी ने बड़ी लगन के साथ हवन किया.

जया: हााआआ...... बेटी अगर स्वामी जी किसी को खुश होकर आशीर्वाद दे देते है तो उसका तो बेड़ा पार हो जाता है.....

कांता: स्वामी जी मुझसे बहुत खुश हुए और मुझे आशीर्वाद भी दिया......... वो कह रहे थे कि तुम मे बिज़्नेस संभालने के सारे गुण है. अगर तुम बिज़्नेस करोगी तो ये बिज़्नेस एक नयी उचाई को छूएगा.

जया: हां..... बेटी हम लोग भी तो यही चाहते है...... विजय को तो बिज़्नेस मे इंटेरेस्ट ही नही है...... और तुम्हारे बाबू जी को तो तुम जानती ही

हो......... अब वो भी पूरी तरह बिज़्नेस मे ध्यान नही दे पाते. मेरी भी यही इक्षा है कि तुम बिज़्नेस मे अपने बाबू जी का हाथ बँटाओ.

कांता तो खुद भी यही चाहती थी इसलिए तो उसने स्वामी जी को खुश किया था ताकि उसके इस काम मे उसे स्वामी जी का सहयोग भी मिल

सके. कांता इन्ही खवालो मे खोई हुई सी थी तभी उसके कानो मे जया देवी की आवाज़ पड़ी:

जया : अरे बेटी ............... तुम भी बहुत थक गयी होगी.... सुबह से ही तुम्हे आराम करने का मौका भी नही दिया होगा स्वामी जी ने.......... अब तुम अपने कर्मरे मे जाकर थोड़ा आराम कर लो. मैं खाना भी ऊपर ही भिजवा दूँगी.

जया देवी की बात सुनकर कांता ने मन ही मन कहा कि स्वामी जी ने तो सचमुच ही आराम नही करने दिया. जब एक बार शुरू हुए तो हवन पूरा होने के बाद ही मुझे छोड़ा. कांता अपनी सास को आराम करने के लिए बोलकर स्वयं सीढ़ियो को तरफ बढ़ चली. आज कांता की चाल कुछ ज़्यादा ही नशीली लग रही थी. और लगती भी क्यो नही स्वामी जी से अपने हर छेद मे स्वामी जी का मोटा वाला इंजेक्षन जो घुस्वाया था. कांता अपने कुल्हो को मटकाती हुई अपने कमरे मे प्रबेश कर गयी. कामेर मे जाते ही कांता ने अपनी पल्लू को गिराकर अपनी साड़ी खोल दी और पेटिकोट और ब्लाउस मे ही बेड पर धम्म से गिर पड़ी. आज स्वामी जी ने उसको बुरी तरह थका दिया था. स्वामी जी के हाथ से दबाए जाने के कारण उसके स्तन अभी भी लाल हो रहे थे. वो सोच रही थी कि स्वामी जी संभोग मे कितने खिलाड़ी आदमी है. उन्होने कांता को पूरी तरह से तृप्त कर दिया था. यही सोचते हुए कांता का हाथ सरक कर अपनी चूत पर चला गया. और जब उसने अपनी चूत पर हाथ फेरा तो उसे हल्के से दर्द का अहसास हुआ. कांता उठकर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गयी. उसने एक बार अपने आपको गौर से शीसे मे निहारा. उसको अपने स्तन सुबह की अपेक्षा अभी ज़यादा बड़े नज़र आ रहे थे. और बड़े क्यो ना होते, स्वामी जी की बालिश्ट हथेलियो के द्वारा बुरी तरह मसले जो गये थे.

 


कांता ने जब अपने दोनो हाथो से अपने बूस को दबाया तो ऐसा लगा कि उसका ब्लाउस आगे से फट जायगा. कांता का हाथ अपनी चूचियो से हटकर अपनी कमर पर बँधे पेटिकॉट के नाडे पर सरक गया. और कुछ ही देर बाद उसका पेटिकोट ज़मीन पर गिरा हुआ था. कांता ने अपने पैरो मे फँसे हुए अपने पेटिकोट को अपनी लात से ही एक तरफ सरका दिया. और फिर अपने हाथ को अपनी पीठ के पीछे ले जाकर अपने उस ब्लाउज की डोरी खोल दी जो कि स्वामी जी से कुछ देर पहले ही उसने बँधवाया था. ब्लाउस की डोरी खुलते ही उसके दो पपीते भी बाहर आ गये. पपीते भी सूजे हुए थे मानो कह रहे हो आज तो अच्छी पिटाइ हुई हमारी. कांता ने अपने दोनो हाथो से अपनी दोनो चूचियो के निपल को हाथ मे लेकर हल्के से दबाया. स्वामी जी के चूसने से ये भी लाल हो रहे थे. उसके शरीर पर सुगंधित तेल की खुसबू अब भी आ रही थी जिसको लगाकर स्वामी जी ने उसे शुद्ध किया था. कुछ देर अपनी चूचियो पर हाथ फेरने के बाद कांता घूमी और अपनी गान्ड को शीशे के

सामने कर दिया. कांता ने शीशे मे देखा कि उसके कूल्हे अब भी लाल हो रहे थे. कांता थोड़ी सी झुकी जिससे उसकी गान्ड की दरार खुल गयी. उसने अपने गुदा द्वार मे हाथ फिराया जिसमे हल्की हल्की सूजन आ गयी थी और दर्द भी हो रहा था. कांता को फिर वो मंज़र नज़र आने लगा जब स्वामी जी ने अपना बड़ा और मोटा लंड उसकी गान्ड मे डालकर उसकी गान्ड को बुरी तरह मार रहे थे. कांता ने अपने आप से ही कहा. "अरे स्वामी जी आपने तो वास्तव मे मेरी गान्ड का बाजा बजा दिया". फिर वो शीशे के सामने अपना मूह करके अपनी कसी हुई चढ्ढी

की कमर मे अपनी उंगली को फ़साया और अपनी गान्ड को हिलाती हुई अपने बड़े कुल्हो से अपनी छोटी सी पैंटी उतारने लगी. पेंटी उतारने के बाद उसने एक नज़र अपनी चुदि हुई चूत पर डाली. उसकी चूत की दशा इस बात की गवाही दे रही थी की स्वामी जी के घोड़े ने खूब दौड़ लगाई है आज कांता की चूत पर. अपनी चूत पर हाथ फेरती हुई कांता अपने आप से बोल उठी

अरे स्वामी जी अब तो लगता है कि आपसे यग्य भी करवाना ही पड़ेगा ये कहकर कांता बाथरूम मे चली गयी.

जब कांता बाथरूम से बाहर निकली तो उसके शरीर पर एक तौलिया था जो कि बड़ी मुस्किल से उसकी जोबन और कुल्हो को ढक पा रहा था. उसके बाल भीगे हुए होने के कारण उसके बालो की लटो के आखरी सिरे पर पानी की बूंदे किसी शबनम की तरह लग रही थी. नहाने के बाद उसके चेहरे पर से हवन के सफल होने का एक संतुष्टि की झलक सॉफ नज़र आ रही थी. बड़ी ही प्यारी लग रही थी कांता इस समय

कुछ देर के बाद कांता ने दूसरे टवल से अपने आपको सुखाया और एक सेक्सी सी नाइटी पहन कर बिस्तर पर लेट गयी. हवन मे धमा चौकड़ी की वजह से और नहाने की वजह से जल्द ही वो नींद के आगोश मे खो गयी.

 
दो दिन बाद

सुबह के 9.00 बज चुके थे. कांता अपने रूम से निकल कर सीढ़ियो से होती हुई नीचे के उस कमरे मे पहुचि जहाँ पर उसकी सास जया देवी बिस्तर पर तकिये का सहारा लेकर बैठी हुई अख़बार और सुबह की चाई दोनो का मज़ा ले रही थी. कांता ने एक नज़र किचन की तरफ

दौड़ाया तो देखा कि फूलवा किचन के काम मे व्यस्त थी. कांता ने जाते ही अपनी सासू माँ के चरणो को स्पर्श किया.

जया देवी: जुग जुग जियो बेटी.......... सदा सुहागन रहो........... (उसकी तरफ मुस्करा कर देखती हुई बोली) बेटी हमने ज़रूर पिछले जनम मे

कोई बहुत बड़ा पुन्य का काम किया होगा तभी तो हमे तुम्हारी जैसी शुशील, गुणवान और समझदार बहू मिली.

ये बात सुनकर कांता का मन खुशी से बाग बाग हो गया. तभी जया देवी ने कांता से कहा

जया: हाँ,........ बेटी तुम्हे मैं बताना भूल ही गयी. तुम्हारे बाबू जी आज वापस आ रहे है देल्ही से........ रामू तो उन्हे लेने भी चला गया है गाड़ी

लेकर. एक डेढ़ घंटे मे वो आने वाले होंगे.

कांता: ........ अरे माँ जी ...... बाबू जी आ रहे है और आपने मुझे बताया भी नही.

जया: अरे बेटी तुम सो रही थी......... इसलिए मैने तुम्हे जगाना मुनासिब नही समझा.......... अब जल्दी से जाकर तुम भी नहा धो लो.

कांता: माँ जी...... बाबू जी जिस काम के लिए गये थे वो पूरा हुआ कि नही......

जया: क्या पता बेटी मेरी इस बारे मे उनसे कोई बात नही हो पाई. अब आ ही तो रहे है वो................. तुम खुद ही पूछ लेना.

कांता: ह्म्‍म्म्ममममममममममममम

कुछ सोचने के अंदाज़ मे उठती हुई उपर अपने कमरे मे चली गयी. उपर जाकर वो कुछ देर तक बैठे बैठे अपने मन मे ही कोई मंत्रणा करती रही. फिर अचानक से उसके चेहरे पर ऐसी खुशी दौड़ी जैसे उसे अपनी किसी बड़ी समस्या का हल मिल गया हो. और तेज़ी से बाथरूम मे घुस गयी.

नहाने के बाद कांता ने अपने आपको शीशे मे देखा. उसकी नज़रें आज किसी को अपना निशाना बनाने की फिराक़ मे थी. उसने अपने बालो को तौलिए से सुखाया. उसके बाद उसने आलमरी मे से एक बड़ी ही सेक्सी सी ब्रा और पैंटी निकाली. दोनो ही कहने के लिए थे. बाकी उनके पहनने से कोई ख़ास फरक नही पड़ा. कांता के बड़े बड़े स्तन और कूल्हे उस छोटी सी ब्रा और पैंटी मे और भी सेक्सी लग रहे थे. कांता ने आलमारी मे से एक ब्लॅक रंग की शिफॉन की साड़ी और उसके ही मॅचिंग का ब्लाउस निकाला और पहेन लिया. शिफॉन की साड़ी काफ़ी

पतली होने के कारण वो कांता के शरीर से बिल्कुल चिपकी हुई प्रतीत हो रही थी. कांता का ब्लाउस भी पीछे से काफ़ी खुला हुआ था. जिस से उसकी गोरी और चिकनी पीठ का आधे से अधिक हिस्सा दिखाई दे रहा था. कांता का ब्लाउस भी आगे से काफ़ी डीप था जिसमे से उसकी

दोनो बड़ी बड़ी चूचियों की सकरी घाटी सॉफ नज़र आ रही थी. जब कांता ने अपने स्तनों पर पल्लू डाला तो साड़ी काफ़ी बारीक और झीनी

होने के कारण उसकी घाटियाँ ब्लाउस के अंदर से सॉफ झलक रही थी.

 
कांता ने अपने आपको शीशे मे देखते हुए अपने पल्ल्लू की साड़ी को तीन तह कर के पल्लू को अपने सीने पर डाला जिससे कि उसकी दिखती हुई घाटी साड़ी की तह के नीचे ओझल हो गयी. कांता ने अपने पैरो मे एक उँची हील के अपने कपड़ो से मॅच करती हुई सॅंडल अपने पैरो मे डाली. अपने मादक होटो पर हल्के संतरे रंग की लिपीसटिक लगाई, आपनी बड़ी बड़ी आँखो मे काजल लगाया और अपने सिर पर

अपने पल्लू का एक हिस्सा रख लिया. और वापस अपने आप को शीशे मे देखा. इस समय कांता एक सुशील बहू नज़र आ रही थी. तभी उसे मैन गाते के बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ सुनाई दी, आवाज़ सुनकर कांता समझ गयी थी कि उसके ससुर जानकी लाल आ गये. उसने दरवाजे को थोड़ा सा खोलकर बाहर झाँका तो उसके ससुर जी मेन गेट मे दाखिल होते हुए नज़र आए, और आते ही फूलवा से पूछा

जानकी लाल: अरे फूलवा बड़ी मालकिन कहाँ है ..................

(फोन पर जानकी लाल को ये बात पता चल चुकी थी कि जया देवी के पैर मे मोच आ गयी है)

पूलवा: वो नीचे के बेडरूम मे है मालिक............

जानकी लाल तेज कदमो से बेडरूम मे दाखिल हुया, और जाते ही जया से बोला:

जानकी लाल: ये सब कैसे हो गया........... आप को ध्यान रखना चाहिया अपना......... अब कैसा दर्द है.

जया देवी: अरे............ अब क्या करें पैर फिसल गया तो............. वैसे भी इतनी घबराने वाली कोई बात नही है. और 2-3 दिन के आराम के

बाद मैं चल सकती हूँ......... बस मोच ही तो आई है............. कोई पैर टूटा थोड़े ही है.......

जानकी लाल: वो सब तो ठीक है लेकिन दर्द तो हुआ ही ना आपको..... कितनी बार कहा है कि आप ध्यान रखा कीजिए खुद का...... मगर आप तो बस .................

तब तक कांता भी अपने कमरे से निकल का नीचे वाले बेडरूम मे आ गयी थी. उसने झुक कर जानकी लाल के पैर छुये........

जानकी लाल: आऊूऊ बेटी बैटूऊऊऊऊऊओ............

तब तक फूलवा गिलास मे पानी लेकर आ गाई. जानकी लाल ने पानी पिया, और बोले.

जानकी लाल: सफ़र मे थोड़ा सा थक गया हूँ. मैं जाकर नहा लेता हूँ उसके बाद साथ बैठकर नाश्ता करेंगे.

ये कहकर जानकीलाल अपने कमरे की तरफ चले गये.

जया देवी: अरे बेटी कांता............. फूलवा से बोल दो कि वो साहब का नाश्ता तैयार कर दे.

कांता: माँ जी............. मैं खुद ही बना दूँगी नाश्ता बाबू जी के लिए......... आप तो दूध पीकर दवा खा लीजिए और आराम कीजिए.

ये कहकर कांता ने फूलवा को बुलाया और उस से एक ग्लास दूध मँगाया फिर जया को दूध और दवाई देकर उनको बिस्तर पर लिटा दिया और खुद किचन को तरफ मूड गयी. किचन मे जाकर कांता ने खुद अपनी हाथो से नाश्ता तैयार किया. तब तक जानकी लाल भी नहा कर फ्रेश हो चुके थे और डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ चुके थे. जब कांता ने उनको डाइनिंग टेबल पर बैठे देखा तो कांता ने फूलवा से कहा.

कांता: अरे फूलवा तुम नाश्ता ट्रे मे रख दो मैं खुद नाश्ता लेकर जाउन्गी बाबू जी के लिया.

 
फूलवा ने उसकी बात पर सहमती मे सिर हिलाते हुए ट्रे मे नाश्ता सजाने लगी. चूकि फूलवा नाश्ता लगाने मे मगन थी इस लिए उसने कांता की तरफ ध्यान नही दिया. कांता ने बड़ी ही सफाई से अपने पल्लू को फिसलने से रोकने के लिए ब्लाउस मे लगे क्लिप को निकाल दिया.

और फिर नाश्ता की ट्रे को उठाकर डाइनिंग टेबल पर चली गयी, जहा जानकी लाल बैठे बैठे अख़बार पढ़ रहे थे. कांता ने बड़े ही धीमे से

नाश्ता की ट्रे डाइनिंग टेबल पर रखी, और जानकी लाल के हाथो से अख़बार को लगभग छीनते हुए बोली:

कांता: अब बाबू जी अख़बार छोड़िए ....................... पहले नाश्ता फिर सब उसके बाद...........

जानकी लाल अपनी बहू की इस अदा को देख कर मुस्करा उठे.......... कांता ने नाश्ते के लिए प्लेट जानकी लाल के आगे रख कर नाश्ता परोसने लगी. कांता नाश्ता परोसने के लिए बार बार अपने हाथो को जानकी लाल की प्लेट की तरफ कर रही थी, जिस से उसके कंधे पर रखा हुआ पल्लू धीरे धीरे सरक रहा था. कांता बीच बीच मे अपने हाथो से पल्लू को संभाल भी रही थी ताकि जानकी लाल को किसी प्रकार को कोई संदेह ना हो, जब कांता ने प्लेट मे नाश्ता लगा दिया तो जानकी लाल ने कांता से कहा.

जानकी लाल: बेटी कांता…. तुम भी बैठ जाओ……… और नाश्ता कर लो. जया तो हमारे साथ नाश्ता कर नही पायगी.

ये सुनकर कांता भी जानकी लाल के ठीक सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी और एक प्लेट मे अपने लिए नाश्ता डाल लिया और दोनो नाश्ता करने लगे. नाश्ता करते हुए कांता ने जानकी लाल से पूछा……….

कांता: बाबू जी……….. आप जिस काम के लिए गये थे वो पूरा हुआ कि नही?

जानकी लाल: अरे बेटी यू समझो हो भी गया और हुआ भी नही …………..

कांता : मैं कुछ समझी नही बाबू जी……..

जानकी लाल: अरे बेटी मैने सारे डॉक्युमेंट सब्मिट कर दिया है…….. रेट भी मैने औरो से कम रखे है……….. अब टेंडर खुलने के बाद ही

पता चल सकता है कि क्या होगा. काम हमे मिलेगा कि नही………..

कांता: आप किसी की अप्रोच क्यो नही लगाते? आप तो जानते है कि सरकारी टेंडर बिना अप्रोच के किसी को नही मिल पाते?

जानकी लाल: हाँ ये बात तो तुम ठीक कह रही हो. इसलिए मैने इस टेंडर के ऑतरिज़्ड ऑफीस के पीए से बात की है. उसने मुझसे कहा कि

मैं तो ज़्यादा से ज़्यादा आप को साहब से मिलवा सकता हूँ. आगे का काम आप को ही देखना होगा .

 
कांता: तो आप उस से मिलकर बात कर लेते?

जानकी लाल: हाँ मैने कोशिस किया मगर पीए ने बताया कि साहब अभी देल्ही से बाहर गये हुए है 5-7 दिन बाद ही मैं मीटिंग करवा सकता हूँ. तो मैं सोचा 5-7 दिन बाद वापस देल्ही आकर मीटिंग कर लूँगा. इसलिए मैं चला आया.

दोनो बाते करते हुए नाश्ता भी कर रहे थे. कांता ने देखा कि जानकी लाल की प्लेट मे कुछ नही है तो वो उनको कुछ देने के लिए खड़ी हुई और ट्रे मे से नाश्ता निकाल कर जानकी लाल की प्लेट मे देने लगी. कांता जानकी लाल के सामने खड़ी और कांति लाल की प्लेट तक थोड़ी सी आगे की ओर झुकी हुई थी. तभी कांता का आँचल फिसल कर गिर गया और जानकी लाल की आँखो के सामने कांता की दोनो मोटी मोटी

चुचियाँ डीप कट ब्लाउस मे से उजागर हो गयी.

वैसे तो जानकी लाल को पहले से ही अंदाज़ा था की कांता के चूचियो का आकर काफ़ी बड़ा है. लेकिन अपनी आँखो से वो पहली बार कांता के अधखुले स्तनों को देख रहे थे. उनकी आँखे कांता की दोनो चूचियो की घाटी पर जम सी गयी थी

कांता ने भी सहज ही अंदाज़ा लगा लिया कि जानकी लाल क्या देख रहे है. कुछ सेकेंड के लिए उसने अपना पल्लू को यू ही गिरा रहने दिया. और फिर ऐसी उठी जैसे कि यह सब कुछ अंजाने मे हो गया हो. और अपने पल्लू को वापस अपने कंधो पर रखकर खाने की टेबल पर बैठ गयी. लेकिन इस बार उसका पल्लू केवल सिंगल पर्त मे था, जिसमे से कि उसकी गोरी गोरी और मांसल चूचियाँ सॉफ झलक रही थी. जानकी लाल कांता के स्तनों की झलक से असहज हो गये थे. वो अपना ध्यान नाश्ते की तरफ लगाने की कोशिश करने लगे. कुछ देर बाद दोनो का नाश्ता हो चुका था. कांता ने नाश्ते की ट्रे को उठाया और किचन की तरफ चल पड़ी.

जानकी लाल ने जाती हुई कांता को पीछे की तरफ से देखा, (वैसे तो कांता को रोज ही देखते थे मगर अभी उनकी नज़रें कुछ और ही देख रही थी.) कांता की कमर बिल्कुल गोरी थी उसका कटाव भी बहुत गहरा था. जानकी लाल को कांता के मस्त चूतड़ कुछ और भी बड़े नज़र आने लगे थे. तभी जानकी लाल ने कुछ सोच कर अपने आप से कहा…

अरे जानकी लाल ये क्या सोचने लगा,…………….. कांता तेरी बहू है……… और ये सोच कर जानकी लाल ने अपना सिर को झटका दिया और अपना ध्यान अख़बार मे लगाने लगे.

कांता ने अपना पहला तीर बड़े ही सटीक अंदाज मे फेका था. पूरे दिन कांता अपने रसीले यौवन को अपनी झीनी साड़ी मे से कांति लाल को दिखाती रही और पूरे दिन जानकी लाल इसी पेशोपश मे रहे कि ये दिख रहा है या दिखाया जा रहा है. लेकिन कांता की इस हरकत ने जानकी लाल के मन मे 50% ये बात डाल दी थी कि ये सब कांता उसे जानबूझ कर दिखा रही है. कांता समझ गयी थी कि अब जानकी लाल उसके जिस्म मे रूचि लेने लगे थे.

 
कांता ने अपना पहला तीर बड़े ही सटीक अंदाज मे फेका था. पूरे दिन कांता अपने रसीले यौवन को अपनी झीनी साड़ी मे से कांति लाल को दिखाती रही और पूरे दिन जानकी लाल इसी पेशोपश मे रहे कि ये दिख रहा है या दिखाया जा रहा है. लेकिन कांता की इस हरकत ने जानकी लाल के मन मे 50% ये बात डाल दी थी कि ये सब कांता उसे जानबूझ कर दिखा रही है. कांता समझ गयी थी कि अब जानकी लाल उसके जिस्म मे रूचि लेने लगे थे.

रात को जया देवी को खाना खिलाकर और दवाई देकर कांता ने उन्हे आराम करने के लिए कहा. जब कांता जया देवी के कमरे से बाहर जाने लगी तो जया देवी ने कहा.

जया देवी: बेटी कांता अपने बाबू जी को खाना खिला देना. और हाँ कांता खाना खाने के बाद उन्हे दूध का ग्लास ज़रूर दे देना.

कांता: (मन ही मन अपने आप से बोली खाना क्या मैं तो उन्हे सब कुछ खिला दूँगी, और दूध का ग्लास क्या मैं तो दूध की हांड़ी ही पिला दूँगी)

जी माँ जी आप चिंता मत कीजिए. ये कहकर कांता उपर अपने कमरे मे चली गयी. कमरे मे जाकर उसने अपनी साड़ी और ब्लाउस उतार दिया. और एक ऐसी नाइटी पहन ली जिसमे से उसका जिस्म तो नही दिख रहा था लेकिन उसके जिस्म का हर कटाव सॉफ झलक रहा था. मसलन ब्रा की सारे किनारे उस नाइटी से पता चल रहे थे. उसकी नाइटी को उपर से ही देख कर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि उसकी ब्रा उसकी चूचियो का कितना हिस्सा ढक पा रही थी. नाइटी उसके शरीर से बिल्कुल चिपकी हुई थी. जिसके कारण उसकी पैंटी के किनारे भी ये दर्शा रहे थे कि उसके कूल्हे कितने विशाल है. कुल मिलाकर कुछ भी नही दिख रहा था उस नाइटी के उपर से लेकिन फिर भी सब कुछ दिख रहा था.

कांता अपनी कमर मटकाती हुई वापस दिनिनिग हॉल मे आ गयी जहाँ जानकी लाल उसके आने का वेट कर रहे थे, जैसे ही जानकी लाल की नज़र कांता पे पड़ी वो उसके शरीर को अपनी आखो मे कांता के आंतरिक वस्त्र नाचने लगे. कांता उस नाइटी मे बड़ी ही मादक लग रही थी. कांता को देख कर जानकी लाल बिल्कुल खो से गये.

कांता भी यही चाहती थी. कांता चुप चाप आ कर खाने की टेबल पर जानकी लाल के बिल्कुल सामने बैठ गयी. कांता ऐसे बिहेव कर रही थी कि जैसे की सब कुछ नॉर्मल हो. जानकी लाल उसके व्यवहार से समझ नही पा रहे थे कि ये सब क्या हो रहा है आज उनके साथ. कांता ने

अपनी और जानकी लाल की प्लेट मे खाना लगाया और दोनो खाना खाने लगे. जानकी लाल बिल्कुल असहज हो गये थे. उन्होने ठीक से खाना भी नही खाया और हाथ धोकर कर उठते हुए कांता से बोले:

जानकी लाल: बेटी मैने तो खाना खा लिया…………. अब मैं अपने रूम मे जा रहा हू आराम करने.

कांता ने सहमति मे सिर हिलाया. कांता समझ गयी थी कि अब ज़्यादा वक़्त नही लगेगा जानकी लाल को अपने हथियार डालने मे. ये सोचकर उसके होंठो पर एक कुटिल मुस्कान फैल गयी.

कांता ने अपना खाना फिनिश किया उठकर जया देवी के कमरे मे उनको देखने चली गयी. जया देवी बिस्तर पर बड़ी ही गहरी नींद मे सो रही थी. कांता उनको देख कर वापस किचन मे आ गयी, जहाँ फूलवा जल्दी जल्दी किचन की सफाई का काम कर रही थी. उसको देख कर कांता ने सहज ही अंदाज़ा लगा लिया की फूलवा को घर जाने की जल्दी हो रही थी. उसने फूलवा से कहा.

कांता: अरे फूलवा आज तो तूने बड़ी देर कर दी सफाई करने मे?

फूलवा: हाँ मालकिन थोड़ा वक़्त लग गया, लेकिन मैं अभी सफाई कर दूँगी.

कांता: घर पे तेरा पति इंतज़ार नही करता होगा तेरा?

फूलवा (नज़रे झुका कर) वो तो है मालकिन……. लेकिन काम भी तो ज़रूरी ही है.

कांता: तू अभी तो बहुत लेट हो जाएगी, तू ऐसा कर अभी तो चली जा सुबह जल्दी आकर काम ख़तम कर देना.

फूलवा कांता की बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी. उसने जल्दी से अपने हाथ धोए और दूध के बर्तन मे से एक ग्लास मे दूध डालने लगी. ये देख कर कांता ने पूछा,

कांता: अरे फूलवा ये क्या कर रही है तू?

फूलवा: वो बड़े साहब के लिए दूध लेकर जा रही हूँ.

कांता: रहने दे, उनको दूध मैं दे दूँगी, जा तू घर जा.

 
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