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स्वामी जी ने कांता को अपने उपर से उतरने की लिए कहा. कांता जैसे ही स्वामी जी के उपर से उतरी स्वामी जी भी तुरंत उठ गये और कांता
से बोले.
स्वामी जी: कांता , अब तुम घोड़ी बन जाऊऊऊऊऊओ,.. मैं तुम्हे घोड़ी बनाकर चोदुन्गा,,,
कांता बिना समय गवाए तुरंत घोड़ी बन गयी,.
स्वामी जी ने कांता का सर थोड़ा और नीचे झुकाया जिस से की कांता की गान्ड कुछ और बाहर निकल गयी. और उसकी दोनो मोटी मोटी जाँघो के बीच से उसकी फूली हुई चूत भी जाँघो से बाहर झाकने लगी. स्वामी जी अपना मोटा लंड कांता की चूत की फांको के उपर से ही उसकी चूत पर रगड़ने लगे. कांता की चूत का दाना उत्तेजना मे हिलने लग गया. स्वामी जी कांता की उत्तेजना को समझ गये और उन्होने एक
बार फिर अपना लंड कांता की चूत मे ठोक दिया. घोड़ी की पोज़िशन मे लंड सबसे ज़यादा अंदर घुसता है. स्वामी जी का लंड भी कांता की चूत मे अब तक चुदाई मे सबसे ज़्यादा अंदर तक गया इसी कारण कांता के मूह से एक हल्की आहह सी निकल गयी.
अपना लंड कांता की चूत मे घुसाने के बाद स्वामी जी ने कांता की कमर को पकड़ कर कांता की चूत पर धक्का मारना स्टार्ट कर दिए.
कांता के दोनो मोटे मोटे स्तन लटके हुए थे और स्वामी जी द्वारा लगाए जा रहे हर धक्के से उसके स्तन हवा मे झूल रहे थे. दोनो कामलीला के आनंदमयी सागर मे गोता लगा रहे थे. उनकी काम क्रीड़ा को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे की स्वयं कामदेव और रति काम क्रीड़ा कर रहे हो. स्वामी जी ने अपना हाथ कांता की कमर पर से हटा कर कांता की झूलती हुई चूचियो को थाम लिया और अपने दोनो हाथों से उसकी दोनो चूचियो को मसल्ते हुए ज़ोर ज़ोर से झटका लगाने लगे. स्वामी जी धक्के इतने जबारजस्ट तरीके से मार रहे थे कि कांता के दोनो कूल्हे उनके
धक्को की चोट से लाल हो गये थे. अब कांता स्वामी जी के लंड को अपने बच्चेदानि तक महसूस कर रही थी. स्वामी जी भी पुरी ताक़त के साथ अपना लंड कांता की चूत मे पेल रहे थे. और बड़े ही बेदर्दी से उसकी चूचिया मसल रहे थे. इतनी जबर्जस्त चुदाई से कांता के मूह से
हल्की दर्द भरी आह निकलने लग गयी थी.
लेकिन कांता खुद ये समझ नही पा रही थी कि उसे दर्द चूचियो मे हो रहा है या चूत मे. क्योकि दोनो का ही बाजा स्वामी जी बड़े ज़ोर से बजा रहे थे. कांता अब अपनी चुदाइ की चरम सीमा की तरफ बढ़ चली थी. उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी. वो उत्तेजना मे बड़बड़ाने लगी, आआआआहह स्वामी जी और ज़ोर से चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊदिये स्वामी जी ,, और तेज धक्का लगाइए,, फाड़ दीजिए मेरी इस चूत को बहुत चुदासी है ये,,.. और अंदर तक पेलिए, पवित्र कर दीजिए अपना प्रासाद डालकर इसमे,, हह हह हहाअ आईईईईईईईईई राम्म्म्मममममम
अहह मैईईईईईईईईईईई ईईईईईई ईईईईईईईईई. उूुुुुुुउउइईईईईईईई मा आ आम एम्म्म आहहा अहहा अहहा हः आहा ,..
से बोले.
स्वामी जी: कांता , अब तुम घोड़ी बन जाऊऊऊऊऊओ,.. मैं तुम्हे घोड़ी बनाकर चोदुन्गा,,,
कांता बिना समय गवाए तुरंत घोड़ी बन गयी,.
स्वामी जी ने कांता का सर थोड़ा और नीचे झुकाया जिस से की कांता की गान्ड कुछ और बाहर निकल गयी. और उसकी दोनो मोटी मोटी जाँघो के बीच से उसकी फूली हुई चूत भी जाँघो से बाहर झाकने लगी. स्वामी जी अपना मोटा लंड कांता की चूत की फांको के उपर से ही उसकी चूत पर रगड़ने लगे. कांता की चूत का दाना उत्तेजना मे हिलने लग गया. स्वामी जी कांता की उत्तेजना को समझ गये और उन्होने एक
बार फिर अपना लंड कांता की चूत मे ठोक दिया. घोड़ी की पोज़िशन मे लंड सबसे ज़यादा अंदर घुसता है. स्वामी जी का लंड भी कांता की चूत मे अब तक चुदाई मे सबसे ज़्यादा अंदर तक गया इसी कारण कांता के मूह से एक हल्की आहह सी निकल गयी.
अपना लंड कांता की चूत मे घुसाने के बाद स्वामी जी ने कांता की कमर को पकड़ कर कांता की चूत पर धक्का मारना स्टार्ट कर दिए.
कांता के दोनो मोटे मोटे स्तन लटके हुए थे और स्वामी जी द्वारा लगाए जा रहे हर धक्के से उसके स्तन हवा मे झूल रहे थे. दोनो कामलीला के आनंदमयी सागर मे गोता लगा रहे थे. उनकी काम क्रीड़ा को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे की स्वयं कामदेव और रति काम क्रीड़ा कर रहे हो. स्वामी जी ने अपना हाथ कांता की कमर पर से हटा कर कांता की झूलती हुई चूचियो को थाम लिया और अपने दोनो हाथों से उसकी दोनो चूचियो को मसल्ते हुए ज़ोर ज़ोर से झटका लगाने लगे. स्वामी जी धक्के इतने जबारजस्ट तरीके से मार रहे थे कि कांता के दोनो कूल्हे उनके
धक्को की चोट से लाल हो गये थे. अब कांता स्वामी जी के लंड को अपने बच्चेदानि तक महसूस कर रही थी. स्वामी जी भी पुरी ताक़त के साथ अपना लंड कांता की चूत मे पेल रहे थे. और बड़े ही बेदर्दी से उसकी चूचिया मसल रहे थे. इतनी जबर्जस्त चुदाई से कांता के मूह से
हल्की दर्द भरी आह निकलने लग गयी थी.
लेकिन कांता खुद ये समझ नही पा रही थी कि उसे दर्द चूचियो मे हो रहा है या चूत मे. क्योकि दोनो का ही बाजा स्वामी जी बड़े ज़ोर से बजा रहे थे. कांता अब अपनी चुदाइ की चरम सीमा की तरफ बढ़ चली थी. उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी. वो उत्तेजना मे बड़बड़ाने लगी, आआआआहह स्वामी जी और ज़ोर से चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊदिये स्वामी जी ,, और तेज धक्का लगाइए,, फाड़ दीजिए मेरी इस चूत को बहुत चुदासी है ये,,.. और अंदर तक पेलिए, पवित्र कर दीजिए अपना प्रासाद डालकर इसमे,, हह हह हहाअ आईईईईईईईईई राम्म्म्मममममम
अहह मैईईईईईईईईईईई ईईईईईई ईईईईईईईईई. उूुुुुुुउउइईईईईईईई मा आ आम एम्म्म आहहा अहहा अहहा हः आहा ,..