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अब स्वामी जी को कांता की कसी हुई गान्ड का द्वार नज़र आने लगा था. अब स्वामी जी ने कांता की गान्ड पर अपना हाथ फिराया और फिर उसके दोनो कुल्हो को अपने हाथों मे पकड़ कर खेलने लगे.
कांता जानती थी कि अब जल्द ही स्वामी जी का केला उसकी गान्ड मे जाने वाला है.
स्वामी जी ने अपनी हाथो मे तेल लगाया और फिर एक बार कांता की पुष्ट गान्ड की दरार मे अपना हाथ घुमाने लगे. कांता का सिर नीचा होने के कारण उसकी पुष्ट गान्ड अपने विकराल रूप मे उभर कर बाहर की तरफ निकल रही थी. स्वामी जी कांता की गान्ड के छेद मे अपनी एक तेल से डूबी हुई उंगली घुसाने लगे. थोड़े से ही प्रयास के बाद स्वामी जी की मोटी उंगली फिसलती हुई कांता की गान्ड मे घुस गयी. उंगली जैसे ही कांता की गान्ड मे घुसी कांता चिहुन्क उठी.
तब स्वामी जी कांता से बोले
स्वामी जी: कांता अभी तो उंगली मे ही ये हाल है तो जब मेरा लंड तुम्हारी गान्ड मे जाएगा तो क्या होगा तुम्हारा?
कांता: अरे स्वामी जी आप जानते है कि ये तो बस देखने मे ही छोटी होती है, लेकिन जब अपनी पर आती है तो बड़ी से बड़ी चीज़ भी घोंट लेती है तो आपके केले की क्या चिंता.
स्वामी जी कांता की हिम्मत देख कर समझ गये कि ये भी इस खेल की बहुत बड़ी खिलाड़ी है.स्वामी जी ने अपने लंड पर भी तेल लगाया और फिर कांता से बोले:
स्वामी जी: बेटी मेरा वज़ीर अब तुम्हारे एरीया मे जा रहा है इसका स्वागत करना:
कांता: जी स्वामी जी मैने अपने पीछले द्वार को आपके वज़ीर की स्वागत के लिए खोल दिया है.
स्वामी जी कांता की गान्ड के छेद पर अपने विशाल लॅंड का टोपा रखा और कांता की गान्ड पर दबाब बढ़ाने लगे चुकि कांता ने पहले भी आपनी गान्ड मरवाई हुई थी इस लिए स्वामी जी को ज़यादा मशकक्कत नही करनी पड़ी अपने सुपाडे को कांता की गान्ड मे घुसाने के लिए.
जैसे ही स्वामी जी के लंड का सुपाड़ा कांता की गान्ड मे घुसा तो कांता सिसकारी लेते हुए बोली.
कांता: मेरे अंदर आपके वज़ीर का स्वागत है स्वामी जी.
स्वामी जी ने कांता की कमर को थाम कर एक और झटका दिया जिस से उनका लंड करीब आधा कांता की गान्ड मे समा गया. स्वामी जी का आधा लंड कांता की गान्ड मे घुस चुका था. स्वामी जी ने कांता से कहा:
स्वामी जी: एक बात तो है कांता तुम्हरी गान्ड खूब गहरी है?
कांता: तभी तो आपके लंबे केले से तेल लगवा रही हूँ ताकि पूरी गहराई तक मेरी गान्ड शुद्ध हो सके .
कांता जानती थी कि अब जल्द ही स्वामी जी का केला उसकी गान्ड मे जाने वाला है.
स्वामी जी ने अपनी हाथो मे तेल लगाया और फिर एक बार कांता की पुष्ट गान्ड की दरार मे अपना हाथ घुमाने लगे. कांता का सिर नीचा होने के कारण उसकी पुष्ट गान्ड अपने विकराल रूप मे उभर कर बाहर की तरफ निकल रही थी. स्वामी जी कांता की गान्ड के छेद मे अपनी एक तेल से डूबी हुई उंगली घुसाने लगे. थोड़े से ही प्रयास के बाद स्वामी जी की मोटी उंगली फिसलती हुई कांता की गान्ड मे घुस गयी. उंगली जैसे ही कांता की गान्ड मे घुसी कांता चिहुन्क उठी.
तब स्वामी जी कांता से बोले
स्वामी जी: कांता अभी तो उंगली मे ही ये हाल है तो जब मेरा लंड तुम्हारी गान्ड मे जाएगा तो क्या होगा तुम्हारा?
कांता: अरे स्वामी जी आप जानते है कि ये तो बस देखने मे ही छोटी होती है, लेकिन जब अपनी पर आती है तो बड़ी से बड़ी चीज़ भी घोंट लेती है तो आपके केले की क्या चिंता.
स्वामी जी कांता की हिम्मत देख कर समझ गये कि ये भी इस खेल की बहुत बड़ी खिलाड़ी है.स्वामी जी ने अपने लंड पर भी तेल लगाया और फिर कांता से बोले:
स्वामी जी: बेटी मेरा वज़ीर अब तुम्हारे एरीया मे जा रहा है इसका स्वागत करना:
कांता: जी स्वामी जी मैने अपने पीछले द्वार को आपके वज़ीर की स्वागत के लिए खोल दिया है.
स्वामी जी कांता की गान्ड के छेद पर अपने विशाल लॅंड का टोपा रखा और कांता की गान्ड पर दबाब बढ़ाने लगे चुकि कांता ने पहले भी आपनी गान्ड मरवाई हुई थी इस लिए स्वामी जी को ज़यादा मशकक्कत नही करनी पड़ी अपने सुपाडे को कांता की गान्ड मे घुसाने के लिए.
जैसे ही स्वामी जी के लंड का सुपाड़ा कांता की गान्ड मे घुसा तो कांता सिसकारी लेते हुए बोली.
कांता: मेरे अंदर आपके वज़ीर का स्वागत है स्वामी जी.
स्वामी जी ने कांता की कमर को थाम कर एक और झटका दिया जिस से उनका लंड करीब आधा कांता की गान्ड मे समा गया. स्वामी जी का आधा लंड कांता की गान्ड मे घुस चुका था. स्वामी जी ने कांता से कहा:
स्वामी जी: एक बात तो है कांता तुम्हरी गान्ड खूब गहरी है?
कांता: तभी तो आपके लंबे केले से तेल लगवा रही हूँ ताकि पूरी गहराई तक मेरी गान्ड शुद्ध हो सके .