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कांता की कामपिपासा

आफ्टर 5 डेज़

कांता ऑफीस मे लॅपटॉप मे सर खपा रही थी.. शायद मैल सेंड कर रही थी किसी को… तभी ऑफीस का दरवाजा खुलता और जानकी लाल अंदर आकर वहाँ रखे सोफे पर धम्म्म्मम से बैठ गया…. और कुछ देर रुक कर कांता की तरफ मुखातिब होकर बोला…..

जानकी लाल: सारी तफ्तीस कर ली मैने.. जिस पार्टी से बात करने के लिए तुमने कहा था उस से भी बात हुई..

कांता: क्या जवाब दिया पार्टी ने?

जानकी लाल: पार्टी माल लेने के लिए तो तैयार है लेकिन वो उसका कहना है कि उसे वाइट शुगर ही चाहिए वो भी अच्छी क़्वालिटी का…

कांता: तो … इसमे क्या प्राब्लम है? कांता ने लापरवाही से पूछा.

जानकी लाल: क्यो तुम्हे नही पता कि लाखा राम की तरफ से जो भी गन्ने आएँगे उस से ब्राउन शुगर ही बन पाएगी…

कांता: तो हम उसे ब्लीच करवा देंगे.

जानकी लाल: वो तो मुझे भी पता है कि चीनी मे बिना ब्लीचिंग के चमक नही आ पाएगी.. लेकिन ब्लीच करने के बाद भी हम उन्हे वो वाइटनेस नही दे पाएँगे जो उनकी डिमॅंड है.

कांता: हम ज़्यादा वाइटनेस के लिए ज़्यादा ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल करेंगे…

जानकी लाल: उस से तो चीनी की क़्वालिटी मे फरक आ जाएगा… वो उनके मापदंड पे खरी नही उतेरेगी तो वो नही लेंगे हमारा माल………

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कांता: वो तो मैं भी जानती हूँ. लेकिन वो हमारा माल तो टेस्ट के बाद ही लेंगे ना.. और अगर टेस्ट मे हमारा माल ओके आता है तो उन्हे कोई प्राब्लम नही होगी ना…

जानकी लाल: नही होगी.. लेकिन ये इतना आसान नही है जितना तुम समझ रही हो.. टेस्टिंग वो अपने लॅबोरेटरी मे करवाएँगे… अपने आदमी से….

कांता: माल तो इंडिया से ही जाएगा ना.. तो जाहिर है कि माल की टेस्टिंग भी इंडिया मे ही करवाएँगे वो.. क्यो.. है कि नही…

जानकी लाल; हाँ वो तो है.. पर उनकी खुद की लॅबोरेटरी है यहाँ पर.. टेस्टिंग वो वही करवाएँगे..

कांता: तो ठीक है आप तो पता करवाइए उनकी लॅब कहाँ है.. और वहाँ का इंचार्ज कौन है? 15-20 दिनो मे फसल भी काटने लगेगी.. और 20-25 दिनो मे प्रोडक्षन भी शुरू हो जाएगा.. तब हम सॅंपल ले जाकर उनको टेस्ट करवा देंगे…

जानकी लाल: चलो ठीक है.. ये कह कर जानकी लाल मोबाइल से कॉल करके सामने वाले को लॅब के बारे मे पता करने के लिए बोल दिया…

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कांता: माल तो इंडिया से ही जाएगा ना.. तो जाहिर है कि माल की टेस्टिंग भी इंडिया मे ही करवाएँगे वो.. क्यो.. है कि नही…

जानकी लाल; हाँ वो तो है.. पर उनकी खुद की लॅबोरेटरी है यहाँ पर.. टेस्टिंग वो वही करवाएँगे..

कांता: तो ठीक है आप तो पता करवाइए उनकी लॅब कहाँ है.. और वहाँ का इंचार्ज कौन है? 15-20 दिनो मे फसल भी काटने लगेगी.. और 20-25 दिनो मे प्रोडक्षन भी शुरू हो जाएगा.. तब हम सॅंपल ले जाकर उनको टेस्ट करवा देंगे…

जानकी लाल: चलो ठीक है.. ये कह कर जानकी लाल मोबाइल से कॉल करके सामने वाले को लॅब के बारे मे पता करने के लिए बोल दिया…

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आफ्टर 22 डेज़:

शुगर मिल्स के सामने काफ़ी ट्रॅक्टर ट्रॉली और ट्रक खड़े थे जिनमे शुगर केन (गन्ना) भरे हुए थे.. फॅक्टरी के अंदर मशीन चलने की आवाज़ आ रही थी.. कांता अपने कॅबिन मे बैठी हुई किसी फाइल मे उलझी हुई थी तभी जानकी लाल अंदर आया और सोफे पर बैठ गया.. उसके बैठते ही कांता ने पूछा…

कांता: डेट फिक्स हो गयी.. उनसे?

जानकी लाल: हाँ फिक्स हो गयी… हाँ 25 को सॅंपल लेकर बुलाया है उसने.. मुंबई मे है उनका लॅब.. वही पर जाना पड़ेगा सॅंपल लेकर.. अगर सॅंपल पास हो गया तो .. रेट की कोई बात नही है..

कांता: कौन है वहाँ इंचार्ज?

जानकी लाल: राम प्रकाश तावडे नाम है उसका….. प्रोफेसर है… उसकी मे हाथ सब कुछ है… अगर वो चाहे तो हमारा काम आसानी से हो जाएगा.. उसको सभी लोग प्रोफेसर तावडे कहते है…

कांता: तो ठीक है.. आप चले जाइए सॅंपल लेकर.,. देखिए कैसे भी हो चाहे उसकी कोई भी डिमॅंड हो.. पूरी करे और उसे अपना सॅंपल पास करवाके ले आए…

जानकी लाल: मैं तो कैसे जा पाउन्गा… यहाँ प्रोडेक्शन का काम मेरे बिना हो पाएगा क्या… ऐसा कर ये बॅक ऑफीस का काम तुम्ही करो.. और मुझे यही रहने दो.. तुम चली जाओ मुंबई..

कांता: ठीक है.. जैसे आप की मर्ज़ी… तो कब जाना है मुझे..

जानकी लाल: 24 को निकल जाओ यहाँ से.. मैं प्लेन की टिकेट बुक करवा देता हूँ…

कांता: ओके …………….

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डेट 24

शाम के लगभग 5.00 बज रहे थे.. कांता उस समय मुंबई के एक 5 स्टार होटेल के 1 लग्जरी रूम मे थी.. कमरा काफ़ी आलीशान था.. कमरे मे घुसते ही बड़ा सा ड्रॉयिंग रूम था… उसमे सोफे लगे हुए थे.. बीच मे एक सेंटर टेबल था.. सामने की तरफ दीवार पर एक बड़ी एलईडी लगी हुई थी.. जो इस वक़्त चालू थी.. एमटीवी पर सॉंग्स चल रहे थे… तभी कांता गुनगुनाते हुए बाथरूम से निकली.. उस समय उसने अपने पर एक टवल डाल रखा था.. बड़ी ही सेक्सी लग रही थी… कांता…

हॉल मे आकर उसने अपने हॅंड बॅग से एक कार्ड निकाला और उसपर लिखा नंबर. मोबाइल से डायल करने लगी… कार्ड प्रोफेसर तावडे का था.. कुछ देर रिंग जाने के बाद फोन पिक अप हो गया.. दूसरी तरफ से एक भारी आवाज़ कांता के कानो मे पड़ी..

प्रोफेसर: हेलो…..

कांता: हेलो… आप प्रोफेसर तावडे बोल रहे है?

प्रोफेसर: यस… हू ईज़ दिस?

कांता: प्रोफेसर साहब.. आइ आम कांता? आपकी बात हुई थी जानकी लाल जी से…. सॅंपल टेस्ट के लिए..

प्रोफेसर: ओ हाँ… जानकी लाल जी नही आए?

कांता: नही वो.. नही आ पाए.. उन्होने मुझे ही भेजा है टेस्टिंग के लिए.. क्यो मेरे टेस्टिंग करवाने मे कोई प्राब्लम है आपको. कांता ने हँसते हुए प्रोफेसर से पूछा…

अचानक इस सवाल से एक बार प्रोफेसर भी चकित रह गया.. फिर सम्भल कर बोला

प्रोफेसर: नही.. नही मुझे भला क्या दिक्कत हो सकती है. आपकी टेस्टिंग से.. प्रोफेसर ने भी जान बुझ कर टेस्टिंग शब्द पर ज़ोर दिया… तो कल आ जाइए आप टेस्टिंग करवाने… प्रोफेसर ने भी हँसते हुए कहा…

कांता: जी बिल्कुल.. वैसे आज शाम को क्या कर रहे है आप…. अगर आपके पास थोड़ा वक़्त हो तो मैं कुछ डिस्कशन करना चाहती हूँ..

प्रोफेसर: लेकिंग अभी तो मैं लॅब से निकल चुका हूँ.. घर के लिए.. अगर आप को उचित लगे तो आप घर पर आ सकती है… इसी बहाने साथ मे डिन्नर भी कर लेंगे…

कांता: ठीक है… आप मुझे अपना अड्रेस बता दीजिए मैं आ जाती हूँ… प्रोफेसोर का पता नोट करने के बाद कांता ने मोबाइल कट कर दिया. उसके बाद रिसेप्शन पर फोन लगा कर आधे घंटे बाद टॅक्सी के लिए बोल दिया.. लगभग आधे घंटे के बाद कांता तैयार हो चुकी थी.. उसने सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी… बाल खुले हुए थे.. ब्लाउस पीछे से ऐसा था जिसमे से उसकी गदराई हुई पीठ छुपने की बजाय और ज़्यादा उजागर हो रही थी और पीठ भी सेक्सी लग रही थी… आगे से कांता का ब्लाउस काफ़ी डीप था.. जो उसके जोबन की मादकता को और बढ़ा रहा था.. उसके जोबन के बीच की गहरी घाटी किसी भी पुरुष को गिराने के लिए काफ़ी थी..

 
कांता: ठीक है… आप मुझे अपना अड्रेस बता दीजिए मैं आ जाती हूँ… प्रोफेसोर का पता नोट करने के बाद कांता ने मोबाइल कट कर दिया. उसके बाद रिसेप्शन पर फोन लगा कर आधे घंटे बाद टॅक्सी के लिए बोल दिया.. लगभग आधे घंटे के बाद कांता तैयार हो चुकी थी.. उसने सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी… बाल खुले हुए थे.. ब्लाउस पीछे से ऐसा था जिसमे से उसकी गदराई हुई पीठ छुपने की बजाय और ज़्यादा उजागर हो रही थी और पीठ भी सेक्सी लग रही थी… आगे से कांता का ब्लाउस काफ़ी डीप था.. जो उसके जोबन की मादकता को और बढ़ा रहा था.. उसके जोबन के बीच की गहरी घाटी किसी भी पुरुष को गिराने के लिए काफ़ी थी..

टॅक्सी होटेल के पोर्च मे खड़ी थी… कांता के आते ही टॅक्सी ड्राइवर ने बड़े अदब से दरवाजा खोला.. कांता टॅक्सी के अंदर बैठ गयी.. और ड्राइवर को कार्ड देते हुए बोली.

कांता: ड्राइवर इस पते पर चलो.. कुछ पल अड्रेस देखने के बाद ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर दी.. और कुछ ही देर मे कार मेन सड़क पर आ गयी.. कोई आधे घंटे के सफ़र के बाद कार एक पॉश एरिया मे पहुची.. वहाँ पर सभी विला ही थे.. काफ़ी आलीशान थे देखने मे.. सभी की डिजाइन एक सी थी… सबके विला के आगे बोर्ड पर विला नंबर. और उसमे रहने वाले का नाम लिखा हुआ था इसलिए ड्राइवर को अड्रेस ढूँडने मे ज़यादा परेशानी का सामना नही करना पड़ा… ड्राइवर ने एक विला के आगे गाड़ी रोक दी.. और कार से उतर पीछे का गेट खोलते हुए कांता से बड़े अदब से बोला

ड्राइवर: मॅम, आपका अड्रेस आ गया…. कांता ने एक नज़र विला को देखा और फिर कार से उतर गयी.. और फिर ड्राइवर को जाने के लिए कह दिया.. चुकी कार होटेल की थी इसलिए ड्राइवर कार लेकर चला गया… कांता ने दरवाजे के पास पहुच कर बेल बजाई.. कुछ ही देर मे दरवाजा खुला… सामने एक 50-52 साल का आदमी खड़ा था… बाल आधे काले और आधे सफेद थे.. उसे देख कर कांता एक बार चौंक गयी… ना जाने क्यो उसे वो चेहरा ऐसा लगा जैसा पहले भी उसे कहीं देखा हुआ हो… कुछ ऐसी ही स्थिति प्रोफेसर के साथ भी थी.. वो भी कांता को एक टक देख रहा था… पर वो उसे इसलिए नही देख रहा था कि उसने भी उसे पहले देखा है कहीं.. बल्कि इसलिए देख रहा था क्यो कि कांता का बहुत कुछ दिख रहा था उसे..

कुछ पल तक दोनो चुप रहे और उसके बाद कांता ने चुप्पी तोड़ी और पूछा क्या ये प्रोफेसर सहाब का घर है… उसकी खनकदार आवाज़ सुनकर प्रोफेसर की तंद्रा टूटी.. और उसके मुँह से भी अचानक निकल गया.. आप कांता जी है ना…

कांता: जी… कांता मुस्कुराते हुए बोली.

प्रोफेसर: आइए मैं भी आपका ही इंतजार कर रहा था.. और दरवाजे से साइड होते हुए हाथ के इशारे से कांता का अभिवादन किया.. कांता प्रोफेसर के घर मे पहुची.. घर काफ़ी आलीशान था… हाल मे सभी चीज़े बड़ी करीने से सजी हुई थी.. देख कर ही लग रहा था कि प्रोफेसर काफ़ी राजशाही अंदाज वाला था… कांता ने सोफे पर बैठते हुए प्रोफेसर से पूछा,….

कांता: घर मे कोई और नही दिखाई दे रहा है.. मेरा मतलब आपके बीवी .. बच्चे…

प्रोफेसर: मेरी बीवी को गुज़रे हुए 15 साल हो चुके है… मेरा एक बेटा है जो कि पढ़ाई के सिलसिले मे ऑस्ट्रेलिया गया हुआ है…

 
कांता प्रोफेसर को देख कर यही सोच रही थी की इसे कहा देखा है.. तभी सहसा उसेके दिमाग़ मे 5 साल पहले की बाते घूम गयी… एक बार विजय के साथ बिज़्नेस पार्टी मे देखा था इसको.. ये कहीं वहीं तो नही.. कुछ देर और गौर से देखने के बाद सहसा उसके दिमाग़ मे ये आया. अरे ये तो वही है.. विजय का दोस्त.. उस समय वो चीफ केमिकल इंजिनियर था विजय की कंपनी मे… विजय ने इसके बारे मे बताया भी था.. काफ़ी रंगीला आदमी है ये… ये सब बाते याद आते ही कांता को अपना काम आसान लगने लगा तभी उसके ध्यान को प्रोफेसर की आवाज़ ने भंग किया..

प्रोफेसर: तो आप क्या लेना पसंद करेंगी कांता जी.. सॉफ्ट ड्रिंक या हार्ड ड्रिंक…

कांता: आप जो लेंगे मैं भी वही ले लूँगी.

प्रोफेसर: ओके … कह कर वो वहाँ रखे उस आलमरी की तरफ बढ़ गत्या जिसमे कई किस्म की विलायती शराब रखी हुई थी.. वहाँ से एक वाइन की बोटेल और दो ग्लास लेकर वो वापस सेंटर टेबल के पास आकर सोफे पर बैठ गया.. सेंटर टेबल पर सीके हुए काजू और बादाम रखे हुए थे.. वो दोनो ग्लास मे पेग बनाया .. और फिर कांता की तरफ पेग लेने का आग्रह रुपी इशारा किया.. कांता अपने पेग उठाने के लिए सोफे से टेबल की तरफ झुकी.. उसके झुकते ही उसका आँचल उसके कंधे से फिसल कर गिर गया… जैसे ही उसका आँचल फिसला… उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…………. क्या नज़ारा था… उसके डीप गले के ब्लाउस से उसके दोनो दूधिया स्तन उफ्फान मारते हुए ब्लाउस की क़ैद से निकलने की कोशिश कर रहे थे.. प्रोफेसर की आखे ये नज़ारा देख कर पलक झपकाना भूल गयी…

कांता ने अपना ग्लास उठाया और बड़ी ही अदा से अपने आँचल को व्यस्थित करती हुई सोफे पर बैठ गयी .. हालाकी वो जानती थी कि प्रोफेसर उसकी चूचियो की घाटी मे गिर गया है.. लेकिन वो ऐसे सामान्य बनी रही जैसे कि कुछ हुआ ही नही हो.. जब कांता ने अपने दोनो कबूतरो को ढक लिया.. तब प्रोफेसर को होश आया… उसने अपनी हडबडाहत छुपाते हुए अपने पेग को उठा लिया… पेग की सीप लेते हुए वो कांता के खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था..

 
कांता ने अपना ग्लास उठाया और बड़ी ही अदा से अपने आँचल को व्यस्थित करती हुई सोफे पर बैठ गयी .. हालाकी वो जानती थी कि प्रोफेसर उसकी चूचियो की घाटी मे गिर गया है.. लेकिन वो ऐसे सामान्य बनी रही जैसे कि कुछ हुआ ही नही हो.. जब कांता ने अपने दोनो कबूतरो को ढक लिया.. तब प्रोफेसर को होश आया… उसने अपनी हडबडाहत छुपाते हुए अपने पेग को उठा लिया… पेग की सीप लेते हुए वो कांता के खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था..

कांता पेग लेते हुए नज़र उठाकर प्रोफेसर को देखी तो समझ गयी कि वो उसे देख रहा है.. कांता ने सीप लेते हुए प्रोफेसर से पूछा..

कांता: प्रोफेसर साहब … क्या देख रहे है इतने गौर से… कांता से इस प्रकार के सवाल की उम्मीद नही थी प्रोफेसर को.. अचनाक हुए इस सवाल को सुनकर वो थोड़ा सकपका गया.. लेकिन उसने अपनी सकपकाहट को कांता पर जाहिर नही होने दिया. कांता की तरफ देख कर गंभीर मुद्रा मे बोला…

प्रोफेसर : कुछ नही कांता जी.. आपको देख कर किसी का चेहरा जेहन मे आ रहा है..ऐसा लग रहा है जैसे वो आप ही हो.. लेकिन मुझे ये पता है कि आप वो नही हो.. बस .. इसलिए आपको देख रहा था

कांता: (खिलखिलाते हुए बोली) आप का कहने का मतलब ये है कि मेरा कोई डबल रोल भी है.. बात पूरी करने के बाद कांता जानबूझ कर हंस पड़ी… ताकि प्रोफेसर को ऐसा लगे कि वो उसकी बात को मज़ाक समझ रही है.. और हुआ भी यही.. प्रोफेसर का लगा कांता मज़ाक समझ रही है.

प्रोफेसर: (सीरीयस होते हुए बोला) मैं मज़ाक नही कर रहा हूँ.. वास्तव मे वो भी आप जैसी ही लगती थी.. इस बात को सुनकर कांता की खिलखिलाहट एक बार फिर शुरू हो गयी.. फिर उसने हँसते हुए प्रोफेसर से कहा

कांता: ठीक है .. मैं मान लेती हूँ की एक शकल के दो इंसान हो सकते है.. वैसे ये तो बताइए वो थी कौन.. मुझे देख कर जिसकी याद आ गयी आपको.. कांता ने हल्के से मुस्कुराते हुए पूछा….

प्रोफेसर: (अपने ग्लास को खाली करते हुए बोला).. अब जाने दीजिए.. अगर उसके बारे मे बताउन्गा… तो आप को कुछ अजीब सा लगेगा…

कांता: प्रोफेसर साहब … हम यहाँ एक दोस्त की तरह बैठ कर ड्रिंक कर सकते है तो अपनी हल्की फुल्की यादो को भी बाँट सकते है… बताइए ना आप.. किसकी बात कर रहे है.. कांता ने ज़ोर देते हुए कहा..

प्रोफेसर ने तब तक दूसरा पेग बना दिया था.. कांता की तरफ एक ग्लास पकड़ाते हुए प्रोफेसर बोला.. बात 5-6 साल पहले की थी.. मैं देल्ही की एक कंपनी मे केमिकल इंजिनियर की पोस्ट पर था… हमारी कंपनी मल्टिनॅशनल लेवेल की थी.. कंपनी की तरफ से हर साल आन्यूयल फंक्षन मे कंपनी के सभी ऑफीसर को फॅमिली पार्टी दी जाती थी.. उसमे लगभग सभी लोग अपनी फॅमिली के साथ आते थे.. कुछ लोग मेरी तरह भी थे.. जो वहाँ अकेले ही आते थे… प्रोफेसर ने अपने ग्लास से एक सीप लिया.. और अपनी बात जारी रखते हुए बोला.. उसी कंपनी मे एक विजय नाम का मार्केटिंग मॅनेजर था… चुकि उसका डिपार्टमेंट अलग था. इसलिए हम लोगो मे ज़्यादा जान पहचान नही थी.. लेकिन मैं उसको उस पार्टी मे उसकी वाइफ के साथ देखा था.. ज़रा सा रुक कर प्रोफेसर ने फिर से कहना शुरू किया… उसकी वाइफ की उमर लगभग आप की उमर की ही थी.. वही हाइट… वही शकल.. और वही बदन… सच कह रहा हू कांता जी.. अगर आप देल्ही मे मिली होती तो मैं तो आपको विजय की वाइफ ही समझता लेकिन मुझे पता है.. कि वो अब भी देल्ही मे है है.. और उसकी वाइफ शायद अब भी एक हाउस वाइफ ही है.. बस यही बात थी.. इसलिए आपको देख कर मैं खो सा गया…………. आप जैसी ही खूबसूरत लग रही थी वो

 
कांता: हमम्म्मममममममम……… हो सकता है.. लेकिन बात सिर्फ़ इतनी सी तो नही हो सकती.. केवल इतनी सी बात के लिए भला कोई किसी को क्यो याद रखेगा… कांता ने सीप लेते हुए कहा

प्रोफेसर: (थोड़ा सा सकुचाते हुए) हाँ. ये तो है… आक्च्युयली मे दिल मे उसकी खूबसूरती घर कर गयी… गये दिनो तक उसका चेहरा मेरी आखो के सामने नाचता रहा… दिल मे एक ख्वाइश थी कि कभी उस से मुलाकात हो.. कुछ बात करे हम लोग.. लेकिन उस पार्टी के बाद मुझे कभी उसे देखने का मौका ही नही मिला… हलाकि मैं जानता हूँ कि ये ग़लत होता. लेकिन क्या करे कभी कभी आदमी कितना भी समझदार क्यो ना हो.. नादान बन ही जाता है… बस मैं भी उसको लेकर कुछ ऐसा ही हो गया.. 4-5 महीने बाद मुझे दूसरी कंपनी का ऑफर मिल गया.. जॉब पहले से ज़्यादा बेटर थी.. इसलिए मैं देल्ही छोड़कर मुंबई चला आया.. और अब आपके सामने हूँ.. बस इतनी सी कहानी है.. लेकिन जो कुछ भी था सब मेरी तरफ से था.. वो मेरे बारे मे क्या सोचती है.. या सोचती है भी कि नही .. ये मुझे नही पता…

प्रोफेसर की बाते सुनकर कांता के दिमाग़ मे एक विचार आया.. विचार आते ही एक कुटिल मुस्कान के साथ कांता ने कहा..

कांता: आपने उसे 1 बार पार्टी मे देखा और वो आपके जेहन मे बस गयी.. और वो भी इस कदर कि 5 साल बाद भी उसका चेहरा नही भुला सके अप.. और मैने आकर आपके उस हसीन जखम को और हरा कर दिया.. क्यो सही कह रही हू ना मैं.. कांता मुस्कुराती हुई बोली..

प्रोफेसर: अब आप जो भी समझिए लेकिन .. जो बात मेरे दिल मे वो बता दी मैने..

कांता: तो ठीक है .. अगर मेरी वजह से आपके दिल की पुरानी चिंगारी भड़क गयी है .. तो इसे बुझाने का भी फ़र्ज़ मेरा ही बनता है…

प्रोफेसर कांता की बात का मतल्ब नही समझ पाया और वो उसकी तरफ मूक प्रश्न के साथ देखने लगा…

कांता उसकी चेहरे के हाव भाव से समझ गयी कि वो क्या पूच्छना चाहता था…

कांता: वैसे कांता कपड़े कैसे पहनती थी.. आइ मीन सलवार कमीज़.. साड़ी या… कुछ और..

प्रोफेसर: क्या पहनती थी ये पता नही.. लेकिन उस दिन उसने साड़ी ही पहन रखी थी.. और साड़ी पहनने का अंदाज भी लगभग आप जैसा ही था..

 
कांता उसकी चेहरे के हाव भाव से समझ गयी कि वो क्या पूच्छना चाहता था…

कांता: वैसे कांता कपड़े कैसे पहनती थी.. आइ मीन सलवार कमीज़.. साड़ी या… कुछ और..

प्रोफेसर: क्या पहनती थी ये पता नही.. लेकिन उस दिन उसने साड़ी ही पहन रखी थी.. और साड़ी पहनने का अंदाज भी लगभग आप जैसा ही था..

कांता: ये तो और भी अच्छी बात है.. अब आप ऐसा सपोज़ करो कि आप उसी पार्टी मे हो.. और जिस औरत को आपने उस पार्टी मे देखा था.. वो मैं हूँ.. अब मुझे आप ये बताओ कि आप क्या करते उस दिन अगर वो आपके साथ होती…

प्रोफेसर: क्या करता.. पहले उसे कुछ ड्रिंक वगेरह के बारे मे पूछता..

कांता: तो ठीक है ड्रिंक पिलाए मुझे.

कांता की बात को समझ नही पाया प्रोफेसर..

कांता ने फिर कहा.. अरे अब आप उस पार्टी मे है ..और आपने मुझे ड्रिंक के लिए पूछा.. तो मैने कहा हाँ.. अब मुझे आप ड्रिंक पिलाएँ..

अब प्रोफेसर समझ गया कि कांता फोरप्ले का रोल कर रही है.. इसलिए उसने बिना देरी किए दो ड्रिंक फिर से बना दिया…. और फिर दोनो ने फिर से चेअर्स किया और ग्लास को होंठो से लगा लिया.. अब प्रोफेसर भी थोड़ा खुल गया था कांता से..

कांता: तो फिर बताइए. उसके बाद आप क्या करेंगे…. कांता की आखे शराब के नशे से और भी नशीली हो चली थी… जिसका अंदाज़ा प्रोफेसर भी लगा चुका था… उनसे घूट भरते हुए कांता से कहा…

प्रोफेसर: अब जब कुछ हुआ ही नही तो आगे क्या बताया जाए आपको… आपको कहें तो मैं कर के दिखाऊ… ये कहते हुए प्लेट से काजू के टुकड़े उठाकर खाने लगा…

कांता तो खुद ही उसे अपनी खूबसूरती के जाल मे फसाना चाहती थी.. जब प्रोफेसर खुद ही फस रहा था तो उसे क्या आपत्ति हो सकती थी..

कांता: तो ठीक है.. जैसी आपकी मर्ज़ी… लेकिन याद रहे हम पार्टी मे है.. यहाँ पर और भी लोग है.. कांता ने मुस्कुराते हुए कहा..

प्रोफेसर उसके कहने का मतलब समझ गया था.. वो कांता की तरफ 1 मिनट का पर्मिशन लेने जैसा इशारा करके वहाँ रखे म्यूज़िक सिस्टम की तरफ बढ़ गया… ड्रॉयर मे से एक सीडी निकाल कर प्लेयर मे डाल दी.. सीडी प्ले होते है… एक किशोर कुमार का पुराना गाना प्ले होने लगा.. गाने के बोल थे शमा है सुहाना.. सुहाना.. नशे मे जहान है… किसी को किसी की खबर ही कहाँ है.. हाल दिल मे देखो मोहब्बत जवान है.. हहूंम्म्मममममममम..हुउऊुुुुुुुुुुुुुुउउ (दोस्तो कभी जिंदगी की भाग दौड़ से वक़्त मिले तो सुनीएगा ये गाना.. आपको किसी अपने, किसी ख़ास के साथ बिताए हुए पल याद आएँगे.. ये मेरा दावा है).. गाना प्ले करने के बाद ड्रॉयिंग रूम मे जल रही ट्यूबलाइट को प्रोफेसर ने ऑफ कर दिया.. और एक रंगीन लाइट जिसकी रोशनी मध्यम थी उसे जला दी.. वाक़ई उस गाने और हल्की रोशनी ने शमा को और रंगीन कर दिया.. उसके बाद प्रोफेसर कांता के सामने आकर खड़ा होकर बड़े ही अदब से पूछा…

प्रोफेसर: डू यू लाइक टू डॅन्स वित मी, मॅम?

कांता: या… वाइ नोट.. कह कर कांता ने अपना ग्लास सेंटर टेबल पर रख दिया.. और खड़ी हो गयी और अपना एक हाथ प्रोफेसर के कंधे पर रख दिया दूसरे हाथ को प्रोफेसर ने अपने हाथ मे थाम लिया और बड़े ही अदब से अपना हाथ कांता की कमर पर रख दिया.. फिर दोनो एक दूसरे के साथ ड्राइंगरूम मे हल्के हल्के थिरकने से लगे.. कुछ लाइट की रोशनी कम होने के कारण दोनो की नज़रें एक दूसरे से नही मिल पा रही थी.. लेकिन दोनो के जिस्म एक दूसरे से धीरे धीरे घुल मिल रहे थे…

 
कांता की सासो की खुसबु प्रोफेसर अपने नथुनो मे महसूस कर रहा था.. उसका भरा हुआ गुदाज संगमरमरी बदन उसके हाथो मे था… इस समय प्रोफेसर अपने आपको दुनिया का सबसे खुसकिस्मत इंसान समझ रहा था… कुछ देर यू ही डॅन्स करने के बाद प्रोफेसर ने कांता के दूसरे हाथ को भी अपने कंधे पर रख दिया. और अपने दूसरे हाथ को भी कांता की कमर पर रख दिया.. अभी तक तो प्रोफेसर के हाथ स्थिर ही थे.. लेकिन कुछ ही देर मे उसकी हाथो ने हरकत करना शुरू कर दिया.. और कांता की चिकनी कमर पर उसका हाथ फिसलने लगा…

लगभग 3.30 मिनट के बाद वो गाना ख़तम हो गया… और 2 सेकेंड के गॅप के बाद हाल मे लता मंगेशर का एक और ही बड़ा दिलकश और रोमॅंटिक गाना प्ले होने लगा… बाहो मे चले आऊऊऊ… हम से सनम क्या परदा… इस गाने ने दोनो की धड़कनो की गती को और तेज कर दिया.. इस गाने के चलते ही कांता के चेहरे पर अपने आप ही एक मुस्कान खिल उठी…

प्रोफेसर का हाथ अब कांता की कमर से फिसल कर उसके बड़े कुल्हो को नापने की तयारी करने लगा था… और कुछ ही पल मे प्रोफीसोर की दोनो हथेलिया कांता के विशाल कुल्हो के भूगोल को नापने मे व्यस्त हो गयी… हल्के हल्के झूमने की वजह से कांता का आँचल धीरे धीरे फिसल कर नीचे लुढ़क कर उसकी बाहो मे आ फ़सा….. इस वक्त प्रोफेसर कांता के एक दम पास था…कांता के स्तन मात्र उसके चेहरे से 9-10 इंच की दूरी पर थे.. कांता के दोनो पुष्ट के उभार देख कर किसी भी मर्द को ध्यान भटकना लाजमी था.. उसकी अधनगी चूचियो को देखकर प्रोफेसर के मन मे भूचाल सा आ गया.. लेकिन इस भूचाल का असर उसकी कमर के नीचे वाले हिस्से मे ज़यादा हो रहा था.. उसके दोनो स्तन किसी बॉम्ब से कम नही थे.. वाकई बॉम्ब थे वो बूब्स बॉम्ब थे इन बिना धामाके वाले बॉम्ब का असर प्रोफेसर के हाथ पर भी हुआ था.. जिसका असर कांता अपनी गान्ड पर महसूस कर रही थी.. प्रोफेसर के हाथ कांता की गान्ड को पकड़ने का असफल प्रयास कर रहे थे..

तभी गाना ख़तम होने से म्यूज़िक बंद हो गया.. कांता ने प्रोफेसर से कहा..

कांता: अरे प्रोफेसर साहब.. हम लोग पार्टी मे है.. यहाँ और भी लोग है.. याद है ना आपको… मैने क्या कहा था…

प्रोफेसर कांता की बात समझ रहा था.. कांता की बात सुनकर उसके हाथ की पकड़ कांता के कुल्हो पर कम पड़ गयी. लेकिन उसके हाथ अब भी कांता के कुल्हो पर ही थे.. कांता की बात सुनकर वो कांता से बोला..

प्रोफेसर: ठीक है तो अब हम पार्टी से निकल कर अपनी पार्टी मे आ जाते है…अपने काम की बात कुछ कर ले..

कांता: हाँ.. हाँ.. बिल्कुल.. क्यो नही.. इसलिए तो मैं आई हूँ.

प्रोफेसर: आप क्या चाहती है…

कांता: बस यही.. कि आप मेरा सॅंपल टेस्ट कर के उसे ओके कर दे..

अब तक प्लेयर मे लता मंगेशर का एक दूसरा गाना चलने लगा था. दूरी ना रहे कोई.. तुम इतने करीब आओ… मैं तुम मे समा जाउ. तुम मुझमे समा जाओ……

प्रोफेसर: पर मैं क्यो चाहूँगा आपका सॅंपल टेस्ट करना?

कांता: क्यो कि इस से आपको भी फ़ायदा होगा.. आपको भी कमिशन मिलेगा इसमे..

प्रोफेसर: कमिशन तो मुझे मिलना ही चाहिए मुझे आपकी कंपनी दे या कोई दोसरी कंपनी दे. प्रोफेसर ने लापरवाही से कहा..

 
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