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जब मैंने माला से ऐसा करने से मना किया तो वह बोली- साहिब, आपने मुझे माँ बनने का जो सौभाग्य दिया है मैं उसके लिए जीवन भर आपकी सदा ऋणी रहूंगी. मुझे उस मातृत्व सौभाग्य और यौन सुख दिलाने में आपके इस लिंग का बहुत महत्व रहा है इसलिए मैं इसे प्यार कर रही हूँ क्योंकि यह भी मेरे प्यार का बहुत बड़ा हकदार है.
इससे पहले कि मैं कुछ बोलता उस बालक के रोने की आवाज़ सुन कर माला ने उठ कर मुझ से ले लिया. जब माला फिर से फर्श पर बैठने लगी तब मैंने उसे मना किया और पकड़ कर अपने पास बिस्तर पर बिठा लिया.
माला ने मेरे पास बैठते ही अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर अपने ब्लाउज के नीचे के तीन बटन खोल दिए और अपने एक स्तन को बाहर निकला कर उसकी चूचुक को बालक के मुख में दे दी.
लगभग पाँच मिनट तक वह बेटे को दूध पिलाती रही और मैं पास ही बैठा बालक को दूध पीता तथा माला के पहले से अधिक बड़े हो गए स्तन को देखता रहा.
थोड़ी देर के बाद माला ने अपने बेटे को दूसरी ओर पलटी किया और ब्लाउज के बाकी बटन खोल कर दूसरे स्तन को बाहर निकाल कर उसमें से दूध पिलाने लगी.
मैंने देखा कि उसके दोनों स्तनों का अकार पहले से काफी अधिक बढ़ गया था जिस कारण वे बहुत ही अधिक सुन्दर एवम् आकर्षक लग रहे थे.
मैं अपने को अधिक देर रोक नहीं सका और हाथ आगे बढ़ा कर उसके एक स्तन को सहलाने लगा तथा कुछ देर के बाद उसे हल्का सा दबा भी दिया. माला के स्तन को जब मैंने दबाया तब उनकी कठोरता महसूस कर के स्तब्ध रह गया तभी मेरे दबाने के कारण उसके स्तन में से दूध निकल कर मेरे हाथ पर पड़ गया.
अनायास ही मैंने उसे चाट लिया जिसे देख कर माला खिल खिला कर हंस पड़ी और बोली- साहिब, मेरे दूध का स्वाद कैसा लगा? क्या आप भी पीना चाहोगे इसे?
मैंने उत्तर में कहा- स्वाद तो बहुत अच्छा लगा, लेकिन ठंडा हो गया था. अगर तुम गर्म गर्म पिलाओगी तो अवश्य पीना चाहूँगा.
मेरी बात सुन कर माला ने थोड़ा घूम कर उस स्तन को मेरी ओर करते हुए बोली- लीजिये साहिब, जी भर कर ताज़ा गर्म दूध पी लीजिये.
मैं तुरंत नीचे झुक कर उस स्तन की चूचुक को मुंह में ले कर चूसने लगा और उसमें से निकल रहे अमृत को पीने लगा.
दूध पीते हुए अभी दो मिनट ही हुए थे की माला ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- साहिब, एक मिनट रुकिए. बालक सो गया है मैं इसे नीचे लिटा दूँ फिर आप को दोनों तरफ का सारा दूध पिला दूंगी.
माला की बात सुन कर मैंने उसके स्तन से अपना मुंह हटा दिया तब उसने बालक को दूसरी तरफ बिस्तर पर लिटा दिया.
उसके बाद वह मेरी ओर मुड़ कर मेरे सिर को अपनी गोदी में ले लिया और अपने हाथ में स्तन को लेकर उसकी चूचुक मेरे मुंह में डाल दी.
चूचुक के मुंह में आते ही मैंने उसका दूध पीने लगा और वह अपने हाथ को मेरे सिर के बालों में फेरने लगी तथा थोड़ी थोड़ी देर के बाद मेरा माथा भी चूम लेती.
जब एक स्तन का सारा दूध समाप्त हो गया तब माला ने घूम कर दूसरे स्तन की चूचुक मेरे मुंह में दे दी और मेरे माथे को चूमने लगी.
कुछ क्षणों के बाद मुझे एहसास हुआ कि माला ने एक हाथ से वह स्तन पकड़ रखा था जिस में से मैं दूध पी रहा था लेकिन उसका दूसरा हाथ मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लिंग को सहला रहा था.
लगभग दस मिनट के बाद जब मैंने माला के दोनों स्तनों का सारा दूध पी लिया और मेरा लिंग भी खड़ा हो गया था तब मैंने माला को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को अपने होंठों से चिपका दिया.
काफी देर तक एक दूसरे का चुम्बन लेने के बाद जब हम अलग हुए तब मुझे माला की आँखों में यौन क्रिया की लालसा दिखाई दी. मैंने तुरंत उठ कर माला के कन्धों पर उसका लटकता हुआ ब्लाउज और अधखुली साड़ी को खींच कर उसके बदन से अलग कर दिया.
माला ने भी मेरा पूरा साथ दिया और खुद ही अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे गिरने दिया तथा पूर्ण नग्न हो गई. फिर जैसे ही माला ने मेरा लोअर पकड़ कर नीचे खींचा और मेरे शरीर के निचले भाग को नग्न किया मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार कर माला को उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया.
उसके बाद जैसे ही मैं उसके पास लेटा वह तुरंत ऊँची हो कर मेरे लिंग को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और अपने शरीर को घुमा कर अपनी योनि को मेरे मुंह पर रख दिया.
अगले दस मिनट तक हम दोनों 69 की मुद्रा में एक दूसरे की जननेन्द्रियाँ को चूसते एवम् चाटते हुए उत्तेजित करने लगे.
जब हम दोनों की जननेन्द्रियों में से पूर्व रस बहने लगा तब माला मेरे ऊपर आ गई और लिंग को अपनी योनि में प्रवेश करा कर उचक उचक कर अन्दर बाहर करने लगी.
मैं भी नीचे से अपने कूल्हे उठा कर उसका साथ देने लगा और उसकी योनि के अंदर की गर्मी को अपने लिंग पर महसूस करने लगा.
इससे पहले कि मैं कुछ बोलता उस बालक के रोने की आवाज़ सुन कर माला ने उठ कर मुझ से ले लिया. जब माला फिर से फर्श पर बैठने लगी तब मैंने उसे मना किया और पकड़ कर अपने पास बिस्तर पर बिठा लिया.
माला ने मेरे पास बैठते ही अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर अपने ब्लाउज के नीचे के तीन बटन खोल दिए और अपने एक स्तन को बाहर निकला कर उसकी चूचुक को बालक के मुख में दे दी.
लगभग पाँच मिनट तक वह बेटे को दूध पिलाती रही और मैं पास ही बैठा बालक को दूध पीता तथा माला के पहले से अधिक बड़े हो गए स्तन को देखता रहा.
थोड़ी देर के बाद माला ने अपने बेटे को दूसरी ओर पलटी किया और ब्लाउज के बाकी बटन खोल कर दूसरे स्तन को बाहर निकाल कर उसमें से दूध पिलाने लगी.
मैंने देखा कि उसके दोनों स्तनों का अकार पहले से काफी अधिक बढ़ गया था जिस कारण वे बहुत ही अधिक सुन्दर एवम् आकर्षक लग रहे थे.
मैं अपने को अधिक देर रोक नहीं सका और हाथ आगे बढ़ा कर उसके एक स्तन को सहलाने लगा तथा कुछ देर के बाद उसे हल्का सा दबा भी दिया. माला के स्तन को जब मैंने दबाया तब उनकी कठोरता महसूस कर के स्तब्ध रह गया तभी मेरे दबाने के कारण उसके स्तन में से दूध निकल कर मेरे हाथ पर पड़ गया.
अनायास ही मैंने उसे चाट लिया जिसे देख कर माला खिल खिला कर हंस पड़ी और बोली- साहिब, मेरे दूध का स्वाद कैसा लगा? क्या आप भी पीना चाहोगे इसे?
मैंने उत्तर में कहा- स्वाद तो बहुत अच्छा लगा, लेकिन ठंडा हो गया था. अगर तुम गर्म गर्म पिलाओगी तो अवश्य पीना चाहूँगा.
मेरी बात सुन कर माला ने थोड़ा घूम कर उस स्तन को मेरी ओर करते हुए बोली- लीजिये साहिब, जी भर कर ताज़ा गर्म दूध पी लीजिये.
मैं तुरंत नीचे झुक कर उस स्तन की चूचुक को मुंह में ले कर चूसने लगा और उसमें से निकल रहे अमृत को पीने लगा.
दूध पीते हुए अभी दो मिनट ही हुए थे की माला ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- साहिब, एक मिनट रुकिए. बालक सो गया है मैं इसे नीचे लिटा दूँ फिर आप को दोनों तरफ का सारा दूध पिला दूंगी.
माला की बात सुन कर मैंने उसके स्तन से अपना मुंह हटा दिया तब उसने बालक को दूसरी तरफ बिस्तर पर लिटा दिया.
उसके बाद वह मेरी ओर मुड़ कर मेरे सिर को अपनी गोदी में ले लिया और अपने हाथ में स्तन को लेकर उसकी चूचुक मेरे मुंह में डाल दी.
चूचुक के मुंह में आते ही मैंने उसका दूध पीने लगा और वह अपने हाथ को मेरे सिर के बालों में फेरने लगी तथा थोड़ी थोड़ी देर के बाद मेरा माथा भी चूम लेती.
जब एक स्तन का सारा दूध समाप्त हो गया तब माला ने घूम कर दूसरे स्तन की चूचुक मेरे मुंह में दे दी और मेरे माथे को चूमने लगी.
कुछ क्षणों के बाद मुझे एहसास हुआ कि माला ने एक हाथ से वह स्तन पकड़ रखा था जिस में से मैं दूध पी रहा था लेकिन उसका दूसरा हाथ मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लिंग को सहला रहा था.
लगभग दस मिनट के बाद जब मैंने माला के दोनों स्तनों का सारा दूध पी लिया और मेरा लिंग भी खड़ा हो गया था तब मैंने माला को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को अपने होंठों से चिपका दिया.
काफी देर तक एक दूसरे का चुम्बन लेने के बाद जब हम अलग हुए तब मुझे माला की आँखों में यौन क्रिया की लालसा दिखाई दी. मैंने तुरंत उठ कर माला के कन्धों पर उसका लटकता हुआ ब्लाउज और अधखुली साड़ी को खींच कर उसके बदन से अलग कर दिया.
माला ने भी मेरा पूरा साथ दिया और खुद ही अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे गिरने दिया तथा पूर्ण नग्न हो गई. फिर जैसे ही माला ने मेरा लोअर पकड़ कर नीचे खींचा और मेरे शरीर के निचले भाग को नग्न किया मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार कर माला को उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया.
उसके बाद जैसे ही मैं उसके पास लेटा वह तुरंत ऊँची हो कर मेरे लिंग को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और अपने शरीर को घुमा कर अपनी योनि को मेरे मुंह पर रख दिया.
अगले दस मिनट तक हम दोनों 69 की मुद्रा में एक दूसरे की जननेन्द्रियाँ को चूसते एवम् चाटते हुए उत्तेजित करने लगे.
जब हम दोनों की जननेन्द्रियों में से पूर्व रस बहने लगा तब माला मेरे ऊपर आ गई और लिंग को अपनी योनि में प्रवेश करा कर उचक उचक कर अन्दर बाहर करने लगी.
मैं भी नीचे से अपने कूल्हे उठा कर उसका साथ देने लगा और उसकी योनि के अंदर की गर्मी को अपने लिंग पर महसूस करने लगा.