• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कामाग्नि complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
काफी देर तक चूसा-चाटी करके जब दोनों झड़ गईं तो शालू ने सासू माँ को लंड दिखाई के बारे में याद दिलाया।

शालू- माँ जी, मैं चलती हूँ। आपको वो लंड देखना हो तो ये दीवार पर जो दर्पण है इसको देखते रहना अब थोड़ी ही देर में इसमें लंड दिख जाएगा।

माँ- काय दुलेन? बावरी हो गई का?

शालू ने बस हल्की सी मुस्कुराहट बिखेरी और बाहर चली गई। सासू माँ इसी असमंजस में थीं कि ये क्या मज़ाक है; दर्पण में लंड कैसे दिखेगा? यही सोचते हुए वो दर्पण के सामने जा कर खड़ी हो गईं। विराज को लगा वो अपना नंगा रूप निहार रहीं हैं तो वो भी देखने लगा कि तभी शालू अन्दर आई। उसने दर्पण बंद किया लेकिन बंद करते करते उसने दूसरी तरफ का दर्पण थोड़ा सा खोल दिया। दर्पण बंद होने के बाद उसने विराज के खड़े हुआ लंड को पकड़ कर अपनी ओर खींचा।

शालू- आजा मेरे राजा! माँ की चूत देख के खड़ा हो गया?

जब सासू माँ ने दर्पण को सरकते हुए देखा तो वो अचंभित रह गईं। उन्होंने जो थोड़ा सा खुल गया था वहां उंगलियाँ डाल कर दर्पण को पूरा सरका दिया और उसके ठीक सामने उसके नंगे बेटा-बहू थे। शालू लंड को पकड़ कर घुटनों के बल बैठी थी। माँ को कुछ सुनाई तो नहीं दे रहा था लेकिन शालू अपने पति के लंड से बच्चों की तरह पुचकारते हुए बात कर रही थी।

शालू- माँ की चूत देख के खड़ा है …? चोदेगा …? मादरचोद बनना है …? ठीक है बन जाना, लेकिन अभी पहले मेरी चुदाई कर।

इतना बोल कर शालू ने विराज को दर्पण की तरफ घुमाया और उसके पीछे बैठ कर उसके अन्डकोषों को पकड़ कर दर्पण में दिखा कर चिढ़ाते हुए बोली कि क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही बड़ा दिख रहा है। दरअसल उसका उद्देश्य इस लंड के दर्शन माँ को पास से कराने का था। फिर शालू ने विराज को बिस्तर पर ऐसे लिटाया कि उसका लंड दर्पण की ओर रहे। फिर ठीक जैसे विराज को माँ की चूत दिखाई थी वैसे ही विराज के मुँह पर चढ़ कर अपनी चूत चुसवाते हुए उसने विराज का लंड चूसना शुरू कर दिया।

जब वो थोड़ा गीला हो गया तो दर्पण की तरफ देख कर उसने ऐसे इशारा किया जैसे बड़ा स्वादिष्ट लंड है। उसके बाद एक मस्त चुदाई हुई जिसमें शालू ने विराज के लंड का भरपूर प्रदर्शन किया। आखिर चुदवा के शालू और विराज सो गए और विराज की माँ अपनी चूत रगड़ती रही। अब विराज को सिर्फ ये पता था कि उसने उसकी माँ को देखा है लेकिन उसकी माँ ने उसे भी देखा ये उसे नहीं पता था। अगले दिन शालू ने अपनी सासू से अकेले में बात की।

शालू- देखा ना फिर आपने जो लंड मैंने दिखाया था। कैसा लगा?

माँ- ना बहू … मैं अपनेई मोड़ा संगे … नईं नईं … जे ना हो सके।

शालू- आपने ही तो कहा था बात बाहर गई तो बदनामी होगी। अब ये तो घर के घर में ही है किसी को कानो कान खबर नहीं होगी। आपको इतना चाहते हैं ये … बड़े प्यार से ही चोदेंगे। इतने प्यार से तो जय के पापा ने भी नहीं चोदा होगा।

माँ- मो से नईं होएगो जे सब। तूई आ जाऊ करे एक चक्कर सोने से पेलम, उत्तोई भोत है।

रात को सोने से पहले शालू अपनी सासू के पास गई एक बार फिर विराज को अपनी चुसाई-चटाई का खेल दिखाया और जब सासू माँ को झड़ा के वापस आ रही थी तो सासू माँ का मन किया कि वो आज फिर उनकी चुदाई देखें। शालू दरवाज़े तक पहुँच ही गई थी कि सासू माँ ने उसे रोका।

माँ- बहू! सुन … आज बी कांच खुल्लो छोड़ दइये नी।

शालू- नहीं, आज खिड़की नहीं दरवाज़ा खुला छोडूंगी; आने का मन हो तो आ जाना। ज्यादा कुछ नहीं तो लंड ही चूस लेना। मैं अपनी चूत इनके मुँह पे दबा के बैठी रहूंगी तो पता नहीं चलेगा कि मैं चूस रही हूँ या तुम।

इतना कह कर शालू चली गई।

माँ कुछ देर तक तो उम्मीद लगाए बैठी रही कि शायद दर्पण खुल जाएगा, लेकिन फिर बैचैनी से कमरे में इधर उधर नंगी ही चक्कर काटने लगी। आखिर सोचा खिड़की ना सहीं दरवाज़ा तो खुला है, क्यों ना वहीं जा कर बहू की चुदाई के दीदार कर लिए जाएं। उसने सोच लिया था कि इससे ज्यादा कुछ नहीं करेगी। बस बहू की चुदाई देखते देखते अपनी चूत में उंगली कर लेगी और वापस आ जाएगी।

विराज के कमरे की अटैच्ड बाथरूम कुछ बड़ी थी और दरवाज़े से लगी हुई थी इस वजह से कमरे का दरवाज़ा पूरा भी खोल दो तो अन्दर का पूरा कमरा दिखाई नहीं देता था। हिम्मत करके माँ ने कमरे के अन्दर नग्नावस्था में ही प्रवेश किया और बाथरूम की दीवार के किनारे खड़े होकर अन्दर झाँका। अन्दर का दृश्य ठीक वैसा ही था जैसा शालू ने वादा किया था।

शालू, विराज के ऊपर चढ़ी हुई थी और वो दोनों एक दूसरे के कामान्गों को चूस व चाट रहे थे। एक तो माँ के दिल की धड़कन तभी से बढ़ी हुई थी जब से वो नंगी अपने बेटे के कमरे में दाखिल हुई थी, ऊपर से ये दृश्य देख कर तो उसके हाथ पैर ही ढीले पड़ने लगे थे। एक तरफ़ा दर्पण के पीछे से चुदाई देखना तो लाइव टीवी जैसा था लेकिन ये सचमुच में आमने सामने का जीवंत अनुभव था।

 
उत्तेजना का मारे माँ की चूत से रस टपकने लगा। लेकिन अब तक भी ये उत्तेजना उसके बेटे के लिए नहीं थी। ये तो बस पहली बार था जब वो अपनी आँखों के सामने चुदाई होते देख रही थी और वो भी जब खुद वहां नंगी खड़ी थी। ये भी सच था कि उसने एक साल से भी ज्यादा समय से लंड नहीं देखा था और ऐसा जवान पहलवान लंड तो पता नहीं कब देखा था उसे याद तक नहीं था। उसकी चूत तो बस वो लंड देख रही थी। वो किसका लंड था ये ना तो उसकी चूत को दिखाई दे रहा था ना उसकी आँखों को; क्योंकि विराज का चेहरा तो शालू की पिछाड़ी के नीचे छिपा पड़ा था।

उत्तेजना में माँ को होश नहीं रहा कि चूत में उंगली करते करते उसके शरीर के कुछ हिस्से दीवार की ओट से बाहर निकल रहे हैं और ज्यादा हिलने-डुलने के कारण शालू की नज़र में भी आ चुके हैं। अचानक से जब माँ ने देखा कि शालू ने चूसना बंद कर दिया है और वो बस मुठिया रही है तो उनकी नज़र शालू के चेहरे की तरफ गई और देखा कि शालू उनको ही देख कर मुस्कुरा रही है।

शालू ने अपने एक हाथ, चेहरे हाव-भाव और आँखों से ही इशारा करके सासू माँ को कह दिया कि बड़ा मस्त लौड़ा है … एक चुम्मी तो बनती है। माँ से भी रहा नहीं गया। उसे बहू बेटा कुछ याद नहीं रहा, बस उसकी काम-वासना की प्यास बुझाने वाली साथी के हाथ में एक मस्त लंड दिखाई दिया जिसे वो अपने से दूर नहीं रख पाई और शालू के पास चली गई। शालू ने अपने हाथ से लंड का सर माँ की ओर झुका दिया। माँ ने पहले तो विराज के लंड की टोपी पर एक छोटी सी पप्पी ली; फिर उससे रहा नहीं गया तो उसने सीधे उसे शालू के हाथ से छीन कर दोनों हाथों से पकड़ कर अपने मुँह में भर लिया और अपनी जीभ से चाटने लगी जैसे बिल्ली लपलप करके दूध पीती है।

इस सब में एक बात जो माँ के दिमाग को सोचने का मौका नहीं मिला वो ये कि विराज जब 4 हाथ अपने लंड पर महसूस करेगा तो क्या वो समझेगा नहीं कि वहां शालू के अलावा भी कोई है। वही हुआ भी विराज ने तुरंत शालू को अपने ऊपर से अलग किया और सामने देखा कि उसकी वही माँ उसका लंड शिद्दत से चूस रही है जिसने उसे इसलिए दूध पिलाने से मना कर दिया था कि वो अपना लंड सहला रहा था।

विराज- ये क्या कर रही हो माँ!

माँ इतनी मग्न थी कि उसने जवाब देने के लिए लंड चूसना बंद करना ज़रूरी नहीं समझा और शालू की तरफ इशारा कर दिया। शायद वो ये कहना चाह रही थी कि इसकी वजह से वो ये कर रही है; लेकिन शालू ने इस मौके का फायदा उठा कर मस्त जवाब दिया।

शालू- बचपन में जितना दूध पिया है ना माँ का अब माँ को अपने दूध का क़र्ज़ वापस चाहिए।

विराज- क्यों नहीं माँ! तूने जितना भी दूध पिलाया है उसकी मलाई-रबड़ी बना बना के वापस करूँगा। चूस ले माँ … जितना मन करे चूस ले।

शालू- जिस तरह से माँ जी मथ-मथ के चूस रहीं हैं मुझे तो लगता है सीधा घी ही निकलेगा। हा हा हा …

अब माँ अपने बेटे का लंड चूसे और उसमें से प्यार का फ़व्वारा ना छूटे, ऐसा कैसे हो सकता था। जल्दी ही विराज ने अपनी माँ का मुँह मलाई से भर दिया और माँ भी उसे बिना रुके गटक गई। आज माँ ने ना केवल अपने बेटे का बल्कि पहली बार किसी का भी वीर्यपान किया था। अचानक जब उनकी विराज से नज़रें मिलीं तो उसकी वासना का सपना टूटा और उसे अहसास हुआ कि ये क्या हो गया। वो उठ कर जाने लगीं।

माँ- मैं चलत हूँ अब। तुम दोई कर ल्यो अपनो काम।

शालू- अरे माँ जी … अभी से कहाँ … आपने हमको तो मौका दिया ही नहीं अपनी सेवा का।

शालू ने लपक के उनको जाने से रोक लिया और प्यार से पकड़ के पलंग पर बैठा दिया। शालू खुद ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गई और माँ की चूत चाटने लगी। विराज उनके स्तन सहलाने लगा तो माँ भी वैसे ही आँख मूँद कर लेट गई। अब तो विराज को और आसानी हो गई वो दोनों हाथों से माँ के दोनों स्तनों को मसलने लगा और बारी बारी से दोनों के चूचुक भी चूसने लगा। उधर शालू भी एक हाथ से अपने पति के लंड को मसल मसल कर खड़ा करने लगी।

जैसे ही लंड खड़ा हुआ, शालू ने उसे खींच कर अपनी तरफ आने का इशारा किया। विराज समझ गया और आगे सरक गया। शालू ने उसे अपने मुँह में ले कर बस गीला करने के लिए ज़रा सा चूसा और फिर अपने हाथ से विराज के लंड को उसकी माँ की चूत पर रगड़ कर सही जगह सेट कर दिया और विराज के नितम्बों पर एक चपत लगा कर उसे चुदाई शुरू करने का सिग्नल भी दे दिया।

 
विराज ने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर की ओर धकेलना शुरू किया। माँ की चूत ज्यादा टाइट तो नहीं थी लेकिन इतनी ढीली भी नहीं थी कि कसावट महसूस ना हो। एक तो काफी समय से ये चूत चुदी नहीं थी तो थोड़ी कसावट आ गई थी उस पर ऐसा मुशटंडा लौड़ा तो ज़माने बाद उनकी चूत में घुसा था। माँ तो उस लौड़े को अपनी चूत में महसूस करते करते एक बार फिर भूल गईं थीं कि ये उनके बेटे का ही लंड था। विराज ने धीरे धीरे चुदाई शुरू कर दी। उधर स्तनों का मसलना और चूसना अभी भी वैसे ही जारी था, और अब तो शालू ने भी एक चूचुक चूसने की ज़िम्मेदारी खुद ले ली थी।

दोनों स्तनों को एक साथ मसला और चूसा जा रहा था और ज़माने बाद इतना मस्त लंड माँ की चूत चोद रहा था। माँ तो मनो जन्नत की सैर कर रही थी। इस सबके ऊपर शालू ने एक और नया काम कर दिया। वो अपना हाथ माँ-बेटे के नंगे जिस्मों के बीच ले गई और अपनी उंगली से माँ की चूत का दाना सहलाने लगी। ये तो जैसे सोने पर सुहागा हो गया। माँ का बदन इस चौतरफा सनसनी तो बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो झड़ने लगी। लेकिन विराज तो अभी अभी झड़ के निपटा था वो अभी कहाँ झड़ने वाला था तो कोई नहीं रुका सब वैसे ही चलता रहा और माँ झड़ती रही।

थोड़ी देर बाद जब अतिरेक की भी अति हो गई तो झड़ना बंद हुआ लेकिन चुदाई अभी भी वैसी ही चल रही थी। आखिर जब माँ दूसरी बार भी झड़ गई तो शालू ने विराज को रुकने को कहा। फिर शालू नीचे लेटी और माँ को अपने ऊपर आ कर एक दूसरे की चूत चाटने की मुद्रा में लेटने को कहा। शालू और विराज की माँ एक दूसरे की चूत चाट रहीं थीं और ऐसे में विराज ने फिर से माँ चोदना शुरू किया। शालू अब भी माँ कि चूत का दाना चूस रही थी और अपने दोनों हाथों से उनके स्तन मसल रही थी।

इस बार जब माँ ने झड़ना शुरू किया तो वो पागलों की तरह शालू की चूत चाटने लगीं और विराज ने भी ये देख कर जोश में चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी। आखिर माँ का झड़ना बंद होते होते शालू और विराज भी झड़ गए। विराज ने अपना लंड तब तक माँ की चूत से नहीं निकाला जब तक उसके लंड से वीर्य की आखिरी बूँद तक नहीं निकल गई। लेकिन जब उसने लंड बाहर निकाला तो शालू ने माँ की चूत को चूस चूस के सारा वीर्य अपने मुँह में भर लिया फिर उसने पलट कर माँ को सीधा किया और उनको फ्रेंच किस करके अपने मुँह में भरा सारा माल माँ के मुँह में डाल दिया। माँ ने भी झट उसे पी लिया।

शालू- आपके दूध का क़र्ज़ है मैं क्यों उसमें मुँह मारूं? हे हे हे …

इस बात पर सभी हंस दिए और इस तरह विराज मादरचोद बन गया।

विराज को तो उसका पहला प्यार चोदने को मिल गया लेकिन क्या शालू को भी एक नए लंड की ज़रुरत पड़ेगी। अगर हाँ तो वो लंड किसका होगा?

ये हम देखेंगे अगले भाग में।

URL]


 
दोस्तो, आपने पिछले भाग में पढ़ा कि कैसे शालू ने अपने काम जीवन में नए रंग भरने के लिए पहले अपनी सास के साथ समलैंगिक समबन्ध बनाए और फिर विराज को उसके बचपन की चाहत उसकी माँ की चूत दिलवा दी। आखिर विराज मादरचोद बन गया।

अब आगे…

शेर एक बार आदमखोर हो गया तो बस हो गया; फिर वो वापस साधारण शेर नहीं बन सकता। विराज को भी अपनी माँ की चूत की ऐसी चाहत लगी कि अगले कई दिनों तक उसने शालू के साथ मिल कर अपनी माँ को बजा बजा के पेला लेकिन माँ की उमर जवाब दे चुकी थी।

माँ ने एक दिन बोल ही दिया कि अब वो केवल कभी कभी चुदवाया करेंगी लेकिन विराज ने भी चालाकी दिखा दी- देख माँ! बाक़ी तेरा जब मन करे चुदवा, ना चुदवा… तेरी मर्ज़ी! लेकिन शालू की माहवारी के दिनों में मेरी मर्ज़ी चलेगी। बोलो मंज़ूर है?

माँ- हओ बेटा, तेरे लाने इत्तो तो करई सकत हूँ। अबे इत्ति बुड्ढी बी नईं भई हूँ के मइना में 3-4 बखत जा ओखल में तुहार मूसल की कुटाई ना झेल सकूँ।

उसके बाद माँ अपने तरफ का दर्पण हमेशा खुला रखतीं थीं और रोज़ बेटे बहु की चुदाई देखती थीं। कभी अगर देर से नींद खुलती तो नहाने के लिए बेटा-बहू के साथ ही चली जातीं थीं। तीनो फव्वारे के नीचे एक साथ नहाते, एक दूसरे को साबुन लगते और नहाते नहाते माँ की चुदाई तो ज़रूर होती ही थी।

इसके अलावा जब भी मन करता तो कभी कभी रात को बेटे के बेडरूम में जाकर खुद भी बेटे से चुदवा आतीं थीं; नहीं तो महीने के उन दिनों में तो विराज खुद आ जाता और पटक पटक के अपनी माँ की चूत चोदता था। कभी कभी माँ-बेटे की चुदाई देख कर, शालू माहवारी के टाइम पर भी इतनी गर्म हो जाती कि वो भी आ कर अपनी गांड मरवा लेती थी।

कभी शालू को बोल दिया जाता कि राजन का ध्यान रखे और फिर दिन दिहाड़े किचन या बाहर के कमरे में माँ बेटा की चुदाई हो जाती। यह सुविधा शालू को भी मिलती थी; बस इतना बोलने की ज़रूरत होती थी कि माँ जी ज़रा राजन का ध्यान रखना, मैं रसोई में चुदा रही हूँ।

जब सब मज़े में चल रहा होता है तो समय भी जैसे पंख लगा कर उड़ने लगता है। राजन छह साल का हो गया था और जय और शीतल की बेटी सोनिया दो से ऊपर की थी जब खबर मिली कि शीतल एक बार फिर गर्भवती हो गई है। पिछली बार उसके पेट से होने पर जय ने शालू को चोद कर ना केवल खुद बहुत मज़े किये थे बल्कि शालू ने भी अपनी दो लंडों से चुदाने की इच्छा पूरी कर ली थी।

इसी सबको याद करते करते एक रात विराज और शालू पुरानी यादों में खोए हुए थे।

विराज- उस बार तुमने जय से माँ के कमरे में जा के चुदाया था ना? तब तो तुमने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन तुम माँ के इतने करीब आ जाओगी।

शालू- हाँ, तब तो उनके कमरे में चुदवाना ही मुझे बड़े जोखिम का काम लगा था तब क्या पता था कि एक दिन मैं उनको उनके बेटे से ही चुदवा दूँगी और फिर उनके साथ मिल कर चुदाई किया करुँगी।

विराज- अरे हाँ इस बात से याद आया। तुमको वादा किया था कि अगर तुमने मुझे माँ की चूत दिलवा दी तो जो तू मांगेगी वो दिलवाऊंगा।

शालू- हाँ कहा तो था लेकिन…

विराज- लेकिन क्या? तू बोल के तो देख?

शालू- मेरा तो फिर से दो लौड़ों से एक साथ चुदाने का मन कर रहा है।

विराज- अरे, इसमें मांगने जैसा क्या है ये तो बिना मांगे मिला था ना जब जय आया था। हाँ लेकिन अब तो वो आएगा नहीं… देख शालू, मैं तो बिल्कुल राजी हूँ। तू कहे तो एक बार जा के जय को मना के लाने की कोशिश भी कर सकता हूँ लेकिन उसका आना मुश्किल है। और तेरे ही भले के लिए मैं नहीं चाहता कि अपन किसी ऐरे-गैरे को अपनी चुदाई में शामिल करें। अब तू ही बता कैसे करना है? तू जो कहेगी मुझे मंज़ूर है।

शालू- आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं भी किसी गैर से चुदाना नहीं चाहती। एक अपना है अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो लेकिन उसके पहले मुझे एक राज़ की बात बतानी पड़ेगी।

विराज- राज़ की बात? मुझे तो लगा तुमने मुझसे कभी कुछ नहीं छिपाया। सुहागरात पर ही सब सच सच बता दिया था। फिर कौन सी राज़ की बात?

शालू- सुहागरात पर जो बताया वो सब सच ही था। एक शब्द भी आज तक आपसे झूठ नहीं बोला लेकिन एक बात थी जो बस बताई नहीं थी। आप पहले ही गुस्से में थे और मुझे डर था कि अगर ये बात बता दी तो कहीं आप मुझे छोड़ ही ना दो।

विराज- तो फिर अब क्यों बता रही हो? अब डर नहीं है? मन भर गया क्या मेरे से?

शालू- अरे नहीं, अब डर नहीं अब भरोसा है। अब हमारे बीच प्यार इतना गहरा है कि मुझे पता है कुछ नहीं होगा। और सबसे बड़ी बात यह कि अब मुझे पता है कि आपको यह बात शायद इतनी बुरी ना लगे जितना मैंने सोचा था।

विराज- अब पहेलियाँ ना बुझाओ! बता भी दो!

 
शालू- ठीक है बताती हूँ। जैसा मैंने आपको बताया था कि कामदार को मार-पीट कर भगाने के बाद भैया मुझे समझा रहे थे कि कैसे ये सब ऐसे काम वालों के साथ करने से नाम तो हमारा ही ख़राब होगा ना। मुझे उनकी बात भी समझ आ रही थी लेकिन इस सारे टाइम ना तो मैंने अपने कपड़े वापस पहने थे और ना उन्होंने मुझे पहनने को कहा था।

मुझे भैया की बात से लग रहा था कि उनको मेरी फिकर है और वो मुझे प्यार करते हैं इसलिए नहीं चाहते कि मेरे साथ कुछ गलत हो। इन सब से शायद मन ही मन उनके लिए मेरा विश्वास बढ़ गया और मेरे जो हाथ अब तक मेरी गोलाइयों और इस मुनिया को छिपाने की कोशिश कर रहे थे वो साधारण रूप में आ गए और मैं उनके सामने वैसे ही नंगी बैठी थी।

अचानक मेरा ध्यान गया कि भैया के पजामे में तम्बू बन रहा है। आखिर पप्पू है तो नंगी लड़की देख कर खड़ा तो होगा ही, फिर वो लड़की बहन हो या माँ ही क्यों ना हो? सही बोल रही हूँ ना?

विराज- हम्म्म… बात तो सही है। मुझे समझ भी आ रहा है कि तुम्हारी कहानी किस तरफ जा रही है लेकिन अब मेरा पप्पू बोल रहा है कि सुन ही लेते हैं पूरी कहानी। आगे सुनाओ!

शालू- मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने आखिर बोल ही दिया…

शालू और उसके भाई की कहानी:

शालू- भैया! मैं कोई उस कामदार से प्यार नहीं करती, मुझे तो ये बाबा की किताबों में जो फोटो हैं ये सब करने का मन किया इसलिए मैंने उसको डरा धमका के बुलाया था। बहुत दिनों से ये सब देख रही हूँ और ये कहानियां पढ़ के काफी कुछ सीखा है। जब अपनी बुर का दाना रगड़ती हूँ तो बड़ा मज़ा आता है। सोचा अगर इसमें इतना मज़ा आता है तो इसके आगे जो करते हैं उसमे कितना मज़ा आता होगा।

सुनील भैया- ठीक है, तुम्हारी बात भी सही है। मैंने भी ये किताबें पढ़ी हैं और मैं भी ये सब फोटो देख-देख कर मुठ मार चुका हूँ और चाहता तो मैं भी बाबा की तरह किसी काम वाली को चोद सकता था लेकिन मैंने सुना है बहार लोग बाबा के बारे में क्या क्या बातें करते हैं। उनकी तो ज़मीदारी में बात चल गई। लोग राजा समझते हैं तो कम से कम सामने तो सब इज्ज़त करते हैं लेकिन अब हमारी पीढ़ी में ये सब नहीं चलेगा। वो ज़माने गए अब ये सब करेंगे तो कोई हमारी इज्ज़त नहीं करेगा।

शालू- बात तो भैया आप सही कह रहे हो। लेकिन…

सुनील- मैं समझ रहा हूँ तू क्या कहना चाह रही है। तुझे ऐतराज़ ना हो तो हम एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।

शालू- आप चोदोगे मुझे?

सुनील- अरे नहीं ऐसे नहीं। कल को तेरी शादी होगी तो दूल्हा समझ जाएगा कि तू कुंवारी नहीं है। गलती से भी शादी के पहले चुदाई ना कर लेना।

शालू- फिर कैसे हम एक दूसरे की ठरक ठंडी करेंगे?

सुनील- हाँ… ठरकी बाप की ठरकी औलादें हैं कुछ तो करना पड़ेगा। मैंने एक फोटो में देखा था लड़के ने लड़की की गुदा में अपना लिङ्ग डाला हुआ था। लड़कियों को शायद वहां भी मज़ा आता होगा। तूने कभी कोशिश की है क्या वहां उंगली करने की?

शालू- नहीं की… अभी करके देखूं?

सुनील- रुक, तू पलट के लेट जा मैं करता हूँ।

शालू पेट के बल लेट गई और सुनील ने अपनी छोटी बहन के दोनों पुन्दे अलग करके गुदा का छेद चौड़ा किया फिर उसके बीच में अपने मुँह की थोड़ी लार टपका दी। फिर धीरे से नितम्बों वो वापस ढीला छोड़ दिया और उनके साथ दोनों हाथों से खेलने लगा। वो पहले दोनों तरफ से उनको दबाता फिर छोड़ देता और उन्हें खुद-ब-खुद हिलते हुए देखता। थोड़ी देर बाद उसने फिर दोनों नितम्बों को अलग करके पीछे वाले छेद में थोड़ी लार टपकाई और फिर धीरे से बंद करके खेलने लगा।

शालू- ये क्या कर रहे हो भैया? डालो ना उंगली!

सुनील- अरी मेरी भोली बहन! चूत तो तेरी इतनी गीली हो रही है। अब गांड तो अपने आप गीली नहीं होगी ना। उसको अन्दर तक गीली करने के लिए ये सब किया है। अब डालता हूँ उंगली।

सुनील ने अपनी उंगली अपने मुख में डाल कर अच्छी तरह से लार में भीगा कर गीली की और जैसे ही अपनी बहन की गांड के छेद पर रखी, गांड सिकुड़ के कस गई। सुनील ने अपने दूसरे हाथ से शालू के नितम्बों से पीठ तक सहलाया और उसे अपनी गांड ढीली छोड़ने को कहा। जब वो ढीली हुई तो सुनील ने उंगली घुसाई लेकिन अभी बस नाखून जितनी उंगली अन्दर गई थी कि गांड फिर सिकुड़ गई। सुनील ने धीरज से फिर इंतज़ार किया और आखिर 2-3 बार कोशिश करने के बाद पूरी उंगली अन्दर गई। फिर ऐसे ही धीरे धीरे करके उसने उसे अन्दर बाहर करना शुरू किया और साथ में अपनी बहन के पुन्दे मसलता रहा।

 
सुनील- मज़ा आ रहा है क्या?

शालू- मज़ा तो आ रहा है। थोड़ा अलग तरह का है लेकिन कुछ कुछ चूत में उंगली करने जैसा भी लग रहा है।

सुनील- ठीक है फिर हम यही किया करेंगे। लेकिन अभी तो इसमें उंगली ही बड़ी मुश्किल से जा रही है लंड कैसे जाएगा? कुछ सोचना पड़ेगा। आज इसे छोड़ के बाकी तू जो चाहे सब कर लेते हैं।

शालू- बाकी सब बाद में कर लेंगे कोई बात नहीं लेकिन अभी कपड़े उतार के नंगे तो हो। शर्म नहीं आती नंगी बहन के सामने पूरे कपड़े पहन कर खड़े हो! जल्दी उतारो मुझे बड़ा प्यार आ रहा है आप पर, अपने नंगे भाई को गले लगाने का मन कर रहा है।

फिर जैसे ही सुनील नंगा हुआ शालू उस से ऐसे चिपक गई जैसे बन्दर का बच्चा बंदरिया को कस के पकड़कर चिपका रहता है। उस दिन पहले तो दोनों भाई बहन ने बहुत साड़ी नंगी मस्ती की फिर अलग अलग तरह के चुम्बन और आलिंगन जो उन किताबों में बताए थे वो सब करके देखे। आखिरी में भाई ने बहन की चूत और बहन ने भाई का लंड चूस कर एक दूसरे को झड़ाया। अगले दिन सुनील गाँव के बढ़ई से एक कंगूरे जैसा कुछ बनवा लाया।

गांड का गुल्ला

बढ़ई को तो उसने यही कहा था कि पलंग का कंगूरा टूट गया है तो बना दो लेकिन सच तो कुछ और ही था। शहर जा कर वो एनिमा लगाने का सामान भी ले आया था।

उस रात सुनील ने वो लकड़ी का कंगूरा एक घी के डब्बे में डुबो कर रख दिया। उस रात दोनों भाई बहन साथ ही सोये और उन्होंने नंगे-पुंगे काफी मस्ती की चुदाई नहीं की। अभी घर वालों को शादी से वापस आने में 2-3 दिन और बाकी थे।

अगली सुबह शालू जब संडास से वापस आई तो सुनील ने उसे एनिमा लगाया और जब उसका मलाशय पूरा साफ़ हो गया तो उसी एनिमा की नली से उसकी गुदा में ४-६ बड़े चम्मच घी अन्दर डाल दिया और फिर घी में रात भर से डूबा हुआ वो लकड़ी का कंगूरा उसके गुदाद्वार पर रख कर दबाया तो फिर वही सिकुड़ने वाली समस्या सामने आई लेकिन ये सुनील ने लकड़ी का खिलौना बनवाया था इसमें ३ कंगूरे थे सबसे छोटा, मंझोला और फिर सबसे बड़ा और उसके बाद चपटा था जो अन्दर नहीं जा सकता था। धीरे धीरे करके सुनील ने तीनों कंगूरे शालू की गांड में डाल दिए। पर्याप्त मात्रा में घी होने की वजह से ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

उसके बाद शालू अपने रसोई के काम में लग गई। शुरू शुरू में खिनचाव के कारण पिछाड़ी में थोड़ा दर्द था लेकिन धीरे धीरे वो काम काज में सब भूल गई और दो तीन घंटे में दर्द ख़त्म भी हो गया।

दोपहर में दोनों ने हल्का फुल्का ही खाना खाया और उसके बाद बेडरूम का दरवाज़ा बंद करके दोनों भाई-बहन अपनी उस अवस्था में आ गए जैसा ऊपर वाले ने उन्हें इस दुनिया में भेजा था।

नंगी शालू बिस्तर पर पलटी मार के लेट सुनील उसकी जाँघों के दोनों और अपने पैर घुटनों के बल टिका कर बैठ गया। उसका लंड उसकी नंगी बहन की खूबसूरती को सलाम ठोक रहा था। सुनील ने उस लकड़ी के चपटे हिस्से को पकड़ कर धीरे धीरे खींचना शुरू किया। पहला कंगूरा निकलने में थोड़ी मुश्किल हुई क्योंकि ये सबसे बड़ा था। थोड़ा दर्द भी हुआ लेकिन बीच वाला कंगूरा बिना किसी दर्द के निकल गया और छोटा वाला तो पता ही नहीं चला कि कब निकल गया।

सुनील ने बिना समय गंवाए अपने लंड पर थूक लगाया और शालू की गांड में डाल दिया। पर ये क्या उसके लंड का मुंड ही अन्दर गया था और शालू की गांड ने उसे कस कर पकड़ लिया। दरअसल अभी जो कंगूरे निकाले थे उनके निकलने की अनुभूति अलग थी और कोई भी गांड किसी वास्तु को निकालने में तो अभ्यस्थ होती है लेकिन अन्दर लेने के लिए नहीं … इसलिए ऐसा हुआ था।

खैर सुनील ने धीरज रखी और थोड़ी देर बाद जब गांड ढीली पड़ी तब धीरे धीरे लंड अन्दर डाला।

हालाँकि घी ने शालू की गांड काफी नरम और चिकनी कर दी थी और इतनी देर उस लकड़ी के डुच्चे की वजह से भी कुछ फर्क पड़ा था। आखिर लंड पूरा अन्दर गया और फिर सुनील ने अपनी बहन की गांड मारनी शुरू की। कुछ देर तक लेटे-लेटे गांड मराने के बाद शालू घोड़ी बन गई और फिर सुनील ने उसके दोनों स्तनों को अपने हाथों से मसलते हुए पकड़ा और शालू को ऊपर खींच लिया अब शालू भी घुटनों के बल खड़ी थी और सुनील पीछे से उसके उरोजों को मसलते हुए उसके साथ गुदा-मैथुन कर रहा था।

शालू के हाथ ऊपर उठे हुए थे और वो अपने पीछे खड़े अपने भाई के सर को अपनी ओर खींच रहे थे। इस अवस्था ने दोनों होंठों से होंठ जोड़ का चुम्बन भी कर रहे थे।

तभी सुनील ने अपना एक हाथ शालू के स्तन से हटा कर उसकी योनि की तरफ बढ़ाया। जैसे ही सुनील ने अपनी बहन की चूत का दाना छुआ, शालू ऊह-आह की आवाजें निकालने लगी। और जब सुनील ने उसे मसलना और रगड़ना शुरू किया तो शालू पगला गई और कुछ तो भी बड़बड़ाने लगी।

शालू- ऊऽऽऽह… आऽऽऽह… सुनील… सुनील… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मज़ा आ रहा है सुनील… और करो… मस्त चोद रहे हो यार…

यह पहली बार था जब उसने अपने भाई को नाम से बुलाया था लेकिन वो अपने आपे में नहीं थी।

जल्दी ही दोनों भाई बहन झड़ने लगे। सुनील ने अपना सारा वीर्य शालू की गांड में ही छोड़ दिया जो इतनी कस गई थी कि सुनील का ढीला पड़ा लंड भी आसानी से नहीं निकल पाया। उसने कोशिश भी नहीं की और दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी समय तक वैसे ही पड़े रहे।

इस तरह शालू ने पहली बार अपने ही भाई से गांड मराई। उसके बाद वो अक्सर अपने भाई के साथ कामक्रीड़ा करती लेकिन हमेशा गुदा या मुख मैथुन ही होता था। कभी उसके भाई ने उसे चोदा नहीं था। गांड मराई के अवसर भी परिवार के साथ होने के कारण कम ही मिल पाते थे लेकिन लंड चूसने का काम तो हर एक दो दिन में हो ही जाता था। घर का शायद ही ऐसा कोई कोना हो जिसमें उसने अपने भाई का लंड नहीं चूसा हो।

विराज ने सपने भी नहीं सोचा था कि शालू ने इतना बड़ा राज़ उस से छिपाया था। क्या विराज शालू से खफा हो जाएगा या उसे उसके भाई से पहली बार चुदवाने के लिए इजाज़त दे देगा? ये हम देखेंगे अगले भाग में।

दोस्तो, भाई बहन के सेक्स आनन्द से भरपूर मेरी कहानी का यह भाग आपको कैसी लगा?

 
दोस्तो, आपने पिछले भाग में पढ़ा कि कैसे शालू ने दो लंडों से चुदवाने की इच्छा ज़ाहिर की और दूसरे लंड के लिए अपने सगे भाई का प्रस्ताव रखा। शालू ने अपने पुराने राज़ खोले कि कैसे उसकी कामुकता ने उसे अपने भाई के नज़दीक पहुंचाया और कैसे अपने भाई से केवल गांड मरवा कर वो शादी तक अपनी चूत कुंवारी रखी।

अब आगे…

*नीचे सैंया ऊपर भैया*

यह सारी कहानी सुनाने के बाद शालू ने विराज से पूछा कि वो ये सब सुन कर नाराज़ तो नहीं है?

विराज- नहीं यार, अब क्या नाराजगी? मुझे वैसे भी गांड मारने का कोई खास शौक नहीं है। तूने मुझे कुँवारी चूत का मज़ा दिला दिया और क्या चाहिए? रही बात भाई की … तो अब उस बात पे क्या नाराज़ होऊंगा, अब तो मैं खुद मादरचोद बन के बैठा हूँ।

शालू- तो फिर अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो मुझे आपसे चूत और भैया से गांड एक साथ मरवाने में बड़ा मज़ा आएगा।

विराज- ऐतराज़ क्या होगा? एक काम कर अभी राखी आने वाली है तो सुनील को यहीं बुलवा ले। बाकी सब मैं सम्हाल लूँगा।

अगले ही दिन शालू ने अपने भाई को संदेश भिजवा दिया कि इस साल राखी पर वो ही आ जाए और साथ में इशारे के तौर पर ये भी लिख दिया कि कुछ पुरानी यादें ताज़ा करनी हैं।

यह पढ़ कर सुनील समझ गया कि शायद उसकी बहन राखी पर उपहार में उसका लंड चाहती है। यह इशारा इसलिए था ताकि सुनील अकेला ही आये।

राखी को ज्यादा समय बचा भी नहीं था। सुनील ने अकेले जाने का कोई बहाना सोच लिया।

एक समस्या और थी वो ये कि माँ को बताना है या नहीं। शालू ने इस बारे में विराज को कहा तो उसने कहा कि वो माँ से बात करके पता करेगा।

फिर एक रात विराज सोने के समय अपनी माँ के कमरे में पहुँच गया और शालू के सरदर्द का बहाना बना कर उसने अपनी माँ को चोदा और चुदाई के बाद जब लंड चूत में ही फंसा था, वो अपनी माँ से चिपका उनके स्तनों को सहला रहा था।

विराज- माँ… एक बात बता?

माँ- पूछ?

विराज- मेरी कोई बहन होती तो तू उसको चोदने देती क्या?

माँ- चोदन तो तोय जा चूत बी ना मिलती… अब का करूँ, मो सेई चुदास सेन नी भई।

विराज- मेरा मतलब अगर मेरी बहन होती और हमसे भी रहा नहीं जाता और हम दोनों चुदाई करने लगते तो तू मना करती क्या?

माँ- और नी तो का…! अब बा की चूत बा के खसम के लाने… पर तू काय इत्तो खोद खोद के पूछ राओ है। थारी तो कोई भेन हैइज नी।

विराज- कुछ नहीं ऐसे ही पड़े पड़े मन में ख्याल आया इसलिए पूछ लिया। चल अब तू सो जा। मैं चलता हूँ अब।

विराज ने और ज्यादा पूछना सही नहीं समझा क्योंकि माँ को शक होने लगा था कि बात क्या है। इन सब बातों से ये भी नहीं लगा कि माँ को भाई-बहन की चुदाई मंज़ूर हो सकती है। विराज ने ये बात शालू को बताई और दोनों ने निर्णय लिया कि माँ को ये बात ना बताई जाए।

शालू- लेकिन फिर कैसे करेंगे? माँ की खिड़की तो आजकल सारा टाइम खुली रहती है। इतने दिन के बाद मस्त चुदाई मिलेगी। मुझे वो छोटे से मेहमानों के कमरे में नहीं चुदाना। ऊपर से बेचारे भैया ने आज तक हमेशा गांड ही मारी है कभी चोदा नहीं। पहली बार उनसे चुदवाऊँगी तो कुछ तो ख़ास होना चाहिए ना।

विराज- एक काम करेंगे, मैं सुनील के पास चला जाऊँगा और तुम माँ को कुछ बहाना बना कर वो कांच बंद कर देना।

आखिर राखी वाले दिन सुबह सुनील आ गया। रक्षाबंधन का मुँहूर्त दोपहर का था तो विराज सुनील से खेती-किसानी की बातें करने लगा। शालू जल्दी से नाश्ता ले कर आ गई। उसने विराज और सुनील को नाश्ता दिया और वापस रसोई में खाना बनाने के लिए जाने लगी तो सुनील ने उसे वहीं उनके साथ बैठने को कहा।

शालू ने विराज से नज़रें बचाते हुए सुनील से कहा- मैं तो अपना नाश्ता कर ही लूंगी.

और फिर आँख मार कर अपनी एक उंगली बड़े कातिलाना अंदाज़ में ऐसे चूसी जैसे लंड चूस रही हो।

सुनील समझ गया कि आज तो ये उसका लंड चूस कर ही राखी मनाने वाली है। लेकिन मौका कब मिलेगा ये सुनील को नहीं पता था।

सच तो ये था कि जब तक शालू और सुनील के बाबा जिंदा थे तब तक उन्होंने कभी सुनील को अपनी बहन से मिलने नहीं दिया। पिछली बार उनके गुजरने के बाद के कार्यक्रम में ही दोनों मिले थे लेकिन तब माहौल थोड़ा ग़मगीन भी था और भीड़-भाड़ भी बहुत थी। उसके बाद से अब तक मिलने का कभी मौका ही नहीं मिला था।

बहरहाल, नाश्ते के बाद खाना और खाने के बाद राखी बाँधने का कार्यक्रम हुआ और फिर सब बैठ कर परिवार और रिश्तेदारी की बातें करते रहे। थोड़ी देर बाद माँ तो अपने पोते राजन के साथ खेलने चली गईं और थोड़ी देर बाद विराज भी बोला कि वो पेशाब करने जा रहा है। जैसे ही कमरे में शालू और सुनील के अलावा कोई ना बचा वैसे ही शालू सुनील पर झपट पड़ी। वो उसके ऊपर चढ़ गई और उसके मुँह में अपनी जीभ डाल कर एक गहरा चुम्बन लिया, फिर उसका लंड सहलाने लगी।

 
शालू- अच्छे से तैयार कर लो इसको … आज रात को ये पहली बार मेरी चूत में घुसेगा।

सुनील- माना तेरी शादी हो गई, बच्चा भी हो गया लेकिन अभी यहाँ इन सब के बीच ये सब ना कर बहना। पकड़े गए तो सारी जिंदगी का रोना हो जाएगा।

शालू- वो सब आप मुझ पर छोड़ दो। आप तो बस आज अपनी बहन चोदने की तैयारी करो।

सुनील- क्या बात है! तेरे तो लगता है काफी बड़े बड़े पर निकल आये हैं।

शालू- इनको पर नहीं मम्मे कहते हैं भैया! बड़े तो भाभी के भी हो गए होंगे एक बच्चे के बाद!

शालू ने अपने स्तनों को मसलते हुआ कहा और फिर वापस अपनी जगह जा कर बैठ गई।

थोड़ी देर में विराज भी आ गया और उसने सुनील को खेत पर चलने के लिए पूछा। फिर दोनों खेत देखने चले गए।

शाम को आये, खाना वाना खाया और विराज सुनील को मेहमानों वाले कमरे में ले गया। वहां बैठा कर वो एक पुरानी स्कॉच की बोतल निकाल लाया जो उसे जय ने यूरोप से ला कर दी थी।

आज उसका साला जो आया था कुछ खास करना तो बनता था।

शालू ने चखना लाकर दे दिया।

विराज- सुनो! माँ सो जाएं तो बता देना।

शालू- ठीक है।

विराज ने दरअसल इशारे में शालू को वो खिड़की बंद करने को कहा था जिससे माँ उनके कमरे में देख सकती थी। इधर जीजा-साले की दारू पार्टी शुरू हुई उधर शालू माँ के पास गई।

शालू- माँ जी, ये तो भैया के साथ मेहमानों वाले कमरे में हैं। जीजा-साले की पार्टी चल रही है। कहो तो आपकी चूत-सेवा कर दूं? नहीं तो मैं फिर सोने जाती हूँ।

माँ- नईं री। आज तो भोत थक गई।

शालू- ठीक है फिर मैं जाती हूँ… अरे ये कांच! इसको बंद कर देती हूँ, भैया ने देख लिया तो अजीब लगेगा।

ऐसे बहाना बना कर शालू ने कांच पूरा ही बंद कर दिया। अब उसे केवल शालू-विराज के कमरे से खोला जा सकता था। उसके बाद शालू ने विराज को बता दिया कि माँ सो गईं हैं और वो भी सोने जा रही है। तब तक इन दोनों का पहला ही पैग चल रहा था। जब वो ख़त्म हुआ तो विराज ने भी अपने बेडरूम जाने की बात कही।

विराज- चलो साले साहब चलते हैं।

सुनील- अरे! अभी तो बस एक ही पैग हुआ है। चले जियेगा जल्दी क्या है?

विराज- यार इस शराब में वो नशा कहाँ जो तुम्हारी बहन में है। मैं तो कहता हूँ तुम भी चलो; दोनों मिल के साथ मज़े करेंगे।

सुनील- क्या जीजाजी आप तो एक ही पैग में टल्ली हो गए। वो मेरी बहन है। चलो ठीक है आप जा के मज़े करो, मैं यहीं रुकता हूँ।

विराज- अरे नहीं यार, मुझे चढ़ी नहीं है। और तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे बहन है तो तुमने कुछ किया ही नहीं कभी। जो इतनी सब बातें करते थे लोग … वो क्या मुझे पता नहीं?

सुनील- अरे नहीं जीजाजी, आप गुस्सा मत हो वो सब तो अफवाहें उड़ा दी थीं लोगों ने आप भी कहाँ लोगों की बातों में आ गए।

विराज- अच्छा!!! अफवाहें थीं? चलो फिर मेरे साथ तुम्हारी बहन से ही पूछ लेते हैं।

इतना कह कर विराज सुनील का हाथ पकड़ कर साथ में अपने बेडरूम में ले गया। दरवाज़ा आधा खुला हुआ था, लाइट जल रहीं थीं और शालू एक चादर ओढ़ कर लेटी हुई थी।

विराज- शालू बताओ अभी तुम्हारे और सुनील के बीच क्या क्या हुआ है?

सुनील- देखो ना यार शालू, जीजाजी को एक पैग में ही चढ़ गई है पता नहीं क्या क्या बोल रहे हैं।

शालू ने एक झटके में अपनी चादर झटक कर अलग कर दी और बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई। चादर के अन्दर वो पूरी नंगी थी। सुनील तो सकते में आ गया उसे समझ ही नहीं आया कि हो क्या रहा है। वो इधर उधर देखने का नाटक करने लगा।

सुनील- शालू, ये क्या है तुमने भी पी रखी है क्या? ऐसे मेरे सामने नंगी क्यों आ रही हो?

शालू- इनको दारू नहीं, मेरा नशा चढ़ा है भैया। एक बार मेरे होंठों से पी लो तो तुमको भी चढ़ जाएगा।

इतना कह कर नंगी शालू ने अपने भाई को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों को चूसने लगी। सुनील उत्तेजना में पागल हुआ जा रहा था लेकिन फिर भी ऐसा दिखा रहा था जैसे खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा हो।

 
तभी विराज ने उसकी ग़लतफ़हमी दूर की- साले साहब शरमाओ नहीं, मुझे लोगों ने नहीं खुद शालू ने सब कुछ विस्तार से बता दिया है कि कैसे आपने इसकी गांड मारना शुरू किया था। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। शालू की इच्छा थी कि वो हम दोनों से एक साथ चुदाए और गांड मराए, इसीलिए आपको बुलवाया था।

शालू- हाँ भैया, ये सच बोल रहे हैं मैंने ही इनको सब बताया था और इनको कोई तुम्हारे साथ मेरी चुदाई करने में मज़ा ही आएगा। तुम फिकर ना करो। हमाम में सब नंगे हैं।

तब तक विराज ने अपने कपड़े निकाल फेंके थे और वो शालू के साथ सुनील के कपड़े निकालने में उसकी मदद करने लगा। कुछ ही पलों में तीनों नंगे हो चुके थे लेकिन घबराहट के मारे सुनील का लंड खड़ा नहीं हुआ था।

शालू तुरंत घुटनों के बल बैठ कर अपने भाई का लंड चूसने लगी। सुनील ने अपने जीजा की तरफ देखा तो वो शालू को लंड चूसते हुए देख रहे थे और अपना लंड मुठिया रहे थे। अचानक दोनों की नज़रें मिलीं तो विराज मुस्कुरा दिया। इस से सुनील को बहुत साहस मिला और अब वो शालू का सर पकड़ कर अपनी कमर हिलाते हुए अपनी बहन का मुँह चोदने लगा।

विराज- ये हुई ना बात साले साब। आब आये ना सही लाइन पे।

सुनील- क्या जीजाजी! कौन पति अपने सामने अपनी बीवी को चुदवाता है? वो भी उसके भाई से? अब इतनी बड़ी बात हज़म करने में टाइम तो लगेगा ना।

विराज- और कौन लड़की चुदाई से पहले अपनी गांड मरवाती है? वो भी अपने भाई से? ये बात तो बड़ी जल्दी समझ आ गई थी साले साहब! हा हा हा…

इस बात पर सभी हँस पड़े। शालू को भी हँसी आ गई और उसने लंड-चुसाई छोड़ दी। माहौल हल्का होने से सुनील की घबराहट भी ख़त्म हो गई थी और उसका लंड भी अब अपनी बहन को सलामी देने लगा था।

विराज को लगा अब सब गर्म हो गए हैं और शालू नाम के मसालेदार गोश्त को बीच में डाल कर सैंडविच बनाने का समय आ गया है। लेकिन जब उसने शालू को बिस्तर की तरफ ले जाने के लिए हाथ बढ़ाया तो शालू ने बड़े ही घिघियाते हुए उस से अनुरोध किया- सुनो ना… भैया को आज पहली बार मौका मिल रहा है। हमेशा से मेरी चूत कुंवारी रखने के चक्कर में बस गांड ही मारते थे, कभी चोदा नहीं। आज राखी का दिन भी है तो पहले ज़रा भैया से चुदवा लेने दो ना। उसके बाद आप भी आ जाना हमारे साथ। प्लीज़…

जब भी मायके से कोई आता है तो बीवियों का सारा झुकाव उन्हीं की तरफ हो जाता है। जो बीवी, पति को अपनी जूती की नोक पर रखती हो, वो भी गिड़गिड़ाने लगती है। पति को भी पता होता है कि अभी विनती कर रही है लेकिन अगर बात ना मानी तो कल बेलन भी फेंक कर मार सकती है तो अक्सर पति अपना बड़प्पन दिखाते हुए हाँ कर ही देते हैं। विराज ने भी वही किया; ड्रेसिंग टेबल का स्टूल एक कोने में सरका कर बैठ गया।

उधर शालू अपने भैया का लंड पकड़ कर बड़े प्यार से उसे बिस्तर तक ले गई और उसे वहां लेटा कर खुद उसके ऊपर लेट गई। विराज ने पहले शालू को अपने परमप्रिय मित्र जय से चुदवाया था लेकिन तब वो भी चुदाई में शामिल था। आज जो दृश्य उसके सामने था वो तो विराज के लिए बिल्कुल नया था। उसकी धर्मपत्नी अपने नंगे भाई के गठीले बदन पर नंगी पड़ी हुई थी। उसके सुडौल स्तन उसके भाई के सबल सीने पर जैसे मसले जा रहे थे। उसकी कमर इस तरह लहरा रही थी मानो अपने भाई के लंड के साथ अठखेलियाँ कर रही हो।

अभी दोनों भाई बहन बस चुम्बन और आलिंगन में ही व्यस्त थे। ऐसा नहीं था कि लंड खड़ा नहीं था या चूत को गीली होने में कोई कसर बाकी थी लेकिन इतने सालों के बाद ये दो बदन मिल रहे थे, और वासना कोई लिंग-योनि के समागम का ही तो खेल नहीं है। और भी बहुत कुछ होता है जिसकी कामना मन और शरीर दोनों को होती है। काफी देर तक दोनों एक दुसरे की जीभें और होंठ चूसते-चाटते रहे। इसके साथ साथ सुनील अपने हाथों को अपनी बहन के पूरे नंगे शरीर पर फेर कर पुरानी यादें ताज़ा कर रहा था और शालू हल्के हल्के अपने तन को लहराते हुए मानो अपना नाज़ुक जिस्म अपने भाई की बलिष्ठ काया पर मसल रही थी।

विराज के मन में कहीं ना कहीं जलन की भावना भी आने लगी थी, उसके मन में प्यार भरी गाली उमड़ी ‘बहन का लौड़ा’

जैसे नाचने का मज़ा अलग होता है और नृत्य देखने का अलग वैसे ही ये जो वासना का नंगा नाच विराज की आँखों के सामने चल रहा था वो उसे कुछ ज्यादा ही मोहक लग रहा था। कई तरह के चुम्बनों और आलिंगनो ने बाद शालू उठी और उसने सुनील का लंड अपनी चूत के मुँह पर रख दिया।

शालू- बोलो, बना दूँ बहनचोद?

सुनील- जल्दी से बना दे मेरी बहन … बना दे अपने भाई को बहनचोद।

भाई बहन की चुदाई की कहानी जारी रहेगी

 
सुनील ने शालू के दोनों उरोज अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसलते हुए कह दिया। सुनील अब अधीर हो चुका था, शालू ने भी उसकी धीरज का इम्तेहान नहीं लिया और उसकी बात ख़त्म होने से पहले ही गप्प से अपने भाई का लंड पूरा अपनी चूत में घुसा कर उस पर बैठ गई। उसकी आँखें बंद हो गईं और वो किसी और ही दुनिया में खो गई। शायद वो अपने भाई को अपने अन्दर महसूस कर रही थी। फिर वो ऐसे लहराने लगी जैसे उसे ही देख कर कटरीना ने शीला की जवानी पर कमर हिलाना सीखा हो।

विराज के दिल में तो आग लगी हुई थी। उसका बस चलता तो अभी जाकर शालू को चोद डालता। आखिर उससे सहन नहीं हुआ और अपने आप उसका हाथ उसके लंड पर चला गया। जिंदगी में पहली बार वो खुद की मुठ मार रहा था। शुरू से ही वो और जय एक दूसरे की मुठ मारा करते थे। लेकिन आज इस कामुक नज़ारे को देख कर विराज बेबस हो गया था।

उधर शालू ने पहले लंड पर बैठे बैठे आगे-पीछे कमर हिला कर चुदाई की फिर कुछ समय तक घुड़सवारी की तरह उछल उछल कर अपने भाई के लंड को अपनी चूत में अन्दर-बाहर किया। ऐसे में उसके उछलते स्तनों को देख कर विराज की मुठ मारने की रफ़्तार अपने आप बढ़ गई।

आखिर जब थक गई या शायद उत्तेजना कुछ ज्यादा बढ़ गई तो उसने अपने स्तन अपनी भाई की चौड़ी छाती पर चिपका कर उसके अधरों से अधर जोड़ चूसने लगी। अब उसकी कमर ठीक वैसे ही हिल रही थी जैसे पुरुष चुदाई के समय हिलाते हैं। फर्क सिर्फ इतना था कि यहाँ एक बहन अपने भाई को चोद रही थी।

आखिर सुनील और विराज दोनों एक साथ झड़ गए। सुनील का फव्वारा अपनी बहन की चूत में छूटा और विराज का हवा में लेकिन उस बारिश की कुछ बूँदें शालू की नंगी पीठ पर भी गिरीं और तब उसे होश आया कि उसका पति भी उसी कमरे में है। उसने विराज की तरफ देखा और वैसे ही अपने भाई की छाती पर पड़े पड़े उंगलियों के इशारे से उसे अपनी ओर बुलाया। ना जाने अचानक उसे अपने पति की इस हालत पर प्यार आया या तरस लेकिन उसने विराज के वीर्य में सने लिंग को चूमा फिर सारा वीर्य चाट कर साफ़ कर दिया।

अगले दौर में विराज को भी शामिल होना था लेकिन अभी तो दोनों जीजा-साले के लंड झड़ के मुरझाए हुए थे। शालू ने दोनों के लंड एक साथ चूसने की कोशिश की लेकिन वो इतने छोटे थे कि अभी दोनों को इतना पास लाने का कोई मतलब नहीं था।

शालू अभी तक झड़ी नहीं थी तो वो एक एक करके दोनों के लंड चूसने में मूड में नहीं थी। ऐसे में उसको एक ही उपाय नज़र आया- सुनो जी! आप भैया का लंड चूस दो ना। जय भाईसाब का भी तो चूसते थे।

विराज- अरे लेकिन जय की बात अलग थी।

सुनील- क्या बात कर रही है शालू? जीजाजी क्या लौंडेबाज हैं?

शालू- अरे नहीं भैया, वो तो इनके बचपन के दोस्त हैं। दोनों ने साथ मुठ मारना सीखा था इसलिए। और आप भी ना… ये भी मेरे भैया ही तो हैं कोई गैर थोड़े ही हैं। मेरे भाई के लिए इतना नहीं कर सकते क्या?

शालू ने फिर अपने वही बच्चों वाले लहजे में कहा और विराज पिघल गया। वैसे भी ‘सारी खुदाई एक तरफ और जोरू का भाई एक तरफ!’

तो विराज ने सुनील का लंड चूसना शुरू किया और शालू ने विराज का। इधर सुनील ने शालू की टांगें पकड़ कर अपनी तरफ खींचीं और उसकी चूत चाटने लगा। विराज भी भले ही अपने साले का लंड चूस रहा था लेकिन उस पर लगा हुआ रस शालू की चूत का ही था। उसकी चूत की खुशबू और लंड की चुसाई ने दोनों लंडों को फिर खड़ा होने में देर नहीं लगने दी।

शालू तो वैसे ही झड़ने की तलब में तड़प रही थी। वो तुरंत विराज के लंड पर चढ़ बैठी और अपने भैया को गुदा-मैथुन का आमंत्रण दे दिया। फिर सारी रात शालू की चूत और गांड की वैसी ही कुटाई हुए जैसे दो मूसलों से एक ओखली में मसाला कूटा जाता है।

अगले दिन तीनों देर से उठे और फिर तीनों साथ में नहाये। वहां भी खड़े खड़े विराज और सुनील ने शालू के दोनों छेदों को खाली नहीं रहने दिया।

इस सब में सब लोग माँ को तो भूल ही गए थे। वो थोड़ी अनमनी सी नज़र आ रही थी। सुबह का नाश्ता आज लगभग खाने के टाइम पर मिला था।

शालू को लगा कि शायद इसी वजह से नाराज़ होंगी। जो भी हो, दिन इधर उधर की बातों और काम में निकल गया।

सुनील को वापस जाना था लेकिन उसे एक और रात के लिए रोक लिया। वो भी मना नहीं कर सका … कौन नहीं चाहेगा कि उसे एक और रात अपनी बहन चोदने को मिले।

 
Back
Top