S
StoryPublisher
Guest
समीर- माफ़ करना नेहा, मेरे कारण तुमको तकलीफ उठानी पड़ी। मुझे पता नहीं था कि यहाँ का क्या सिस्टम है।
नेहा- कोई बात नहीं यार, वो तो उस समय मुझे ज़ोर की लगी थी इसलिए गुस्से में बोल दिया था लेकिन तुम दिल पर मत लेना। ठीक है?
समीर मन में ‘दिल पर लेना ही होगा तो तेरे इन दोनों चाँद के टुकड़ों को लूँगा न जानेमन।’
खाना खाने के बाद तीनों मिल कर गप्पें लड़ने लगे। चुटकुले-कहानियां चल रहे थे कि तभी बातों बातों में नेहा ने कहा- पता है भाभी, कल मेरे कॉलेज में हॉस्टल की लड़कियों ने एक जोक सुनाया। एक हॉस्टल में सुबह 6 से 7 का समय जिम का था और अक्सर लड़कियां उस टाइम में साइकिल चलाती थीं।
एक दिन 7 बजे एक लड़की हांफती हुई जिम वाली मैडम के पास आई और बोली- मैडम दस मिनट और साइकिल चला लूँ?
मैडम बोली- ठीक है, लेकिन आगे से ध्यान रखना सात बजे के बाद नहीं।
लेकिन कोई न कोई लड़की रोज़ ऐसा पूछती थी।
एक दिन गुस्से में मैडम चिल्लाई- आज के बाद किसी से एक मिनट भी ज़्यादा समय लगा तो सबकी साइकिल में सीट लगवा दूँगी.
इतना सुनते ही सोनिया ज़ोर से हंसी और नेहा के हाथ से हाथ टकरा कर हाय किया। दोनों पेट पकड़ कर हंस रहीं थीं और समीर के कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था।
आखिर उस से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया कि इसका क्या मतलब हुआ?
सोनिया- अरे मेरे लल्लू… साइकिल में सीट नहीं होगी तो क्या होगा? डंडा ! अब समझ आया?
समीर- ओह्ह तो ये बात थी। अब यार मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि नेहा ऐसा जोक सुना सकती है। और लल्लू किसको बोला? आप इतने ही चालू हो तो ये सवाल का जवाब दो?
तीन लड़कियां कुल्फी खा रहीं हैं। एक पिघला के खा रही है एक चूस के खा रही है और एक काट के खा रही है तो तीनों में से कौन शादीशुदा है?
बताओ?
सोनिया- सिंपल है यार जो चूस के (आँख मारते हुए) खा रही है वो शादीशुदा है।
नेहा- वैसे तो भाभी, चूस के खाने वाली भी कोई ज़रूरी नहीं है कि शादीशुदा ही हो. लेकिन क्या है न कि अपने समीर को उससे ऐसी ‘उम्मीद’ नहीं होगी। हा हा हा…
दोनों फिर पेट पाकर कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं। समीर का तो पोपट हो गया था लेकिन वो न केवल अब उन दोनों से साथ ज़्यादा खुल गया था सोनिया से तो उसे कोई खास उम्मीद नहीं थी क्योंकि वो दीदी थी लेकिन अब उसका मन होने लगा था कि अगर मौका मिले तो वो नेहा को चोद दे। लेकिन अब तक की बातों से तो कोई भी समझ सकता है कि दुनिया समीर की ‘उम्मीदों’ से कहीं आगे जा चुकी है। ओर समीर भी समझ चुका था कि नेहा पहले ही खाई खेली है उसकी बातों से यह जाहिर हो चुका था उसे लगा उसका काम जल्द बनेगा वह अपनी माँ शीतल को बहुत मिस कर रहा था देखते है आगे क्या होगा।
दोस्तो, आपको यह भाई-बहन और उसकी ननद की मस्ती भरी कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।
कहानी जारी रहेगी.
नेहा- कोई बात नहीं यार, वो तो उस समय मुझे ज़ोर की लगी थी इसलिए गुस्से में बोल दिया था लेकिन तुम दिल पर मत लेना। ठीक है?
समीर मन में ‘दिल पर लेना ही होगा तो तेरे इन दोनों चाँद के टुकड़ों को लूँगा न जानेमन।’
खाना खाने के बाद तीनों मिल कर गप्पें लड़ने लगे। चुटकुले-कहानियां चल रहे थे कि तभी बातों बातों में नेहा ने कहा- पता है भाभी, कल मेरे कॉलेज में हॉस्टल की लड़कियों ने एक जोक सुनाया। एक हॉस्टल में सुबह 6 से 7 का समय जिम का था और अक्सर लड़कियां उस टाइम में साइकिल चलाती थीं।
एक दिन 7 बजे एक लड़की हांफती हुई जिम वाली मैडम के पास आई और बोली- मैडम दस मिनट और साइकिल चला लूँ?
मैडम बोली- ठीक है, लेकिन आगे से ध्यान रखना सात बजे के बाद नहीं।
लेकिन कोई न कोई लड़की रोज़ ऐसा पूछती थी।
एक दिन गुस्से में मैडम चिल्लाई- आज के बाद किसी से एक मिनट भी ज़्यादा समय लगा तो सबकी साइकिल में सीट लगवा दूँगी.
इतना सुनते ही सोनिया ज़ोर से हंसी और नेहा के हाथ से हाथ टकरा कर हाय किया। दोनों पेट पकड़ कर हंस रहीं थीं और समीर के कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था।
आखिर उस से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया कि इसका क्या मतलब हुआ?
सोनिया- अरे मेरे लल्लू… साइकिल में सीट नहीं होगी तो क्या होगा? डंडा ! अब समझ आया?
समीर- ओह्ह तो ये बात थी। अब यार मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि नेहा ऐसा जोक सुना सकती है। और लल्लू किसको बोला? आप इतने ही चालू हो तो ये सवाल का जवाब दो?
तीन लड़कियां कुल्फी खा रहीं हैं। एक पिघला के खा रही है एक चूस के खा रही है और एक काट के खा रही है तो तीनों में से कौन शादीशुदा है?
बताओ?
सोनिया- सिंपल है यार जो चूस के (आँख मारते हुए) खा रही है वो शादीशुदा है।
नेहा- वैसे तो भाभी, चूस के खाने वाली भी कोई ज़रूरी नहीं है कि शादीशुदा ही हो. लेकिन क्या है न कि अपने समीर को उससे ऐसी ‘उम्मीद’ नहीं होगी। हा हा हा…
दोनों फिर पेट पाकर कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं। समीर का तो पोपट हो गया था लेकिन वो न केवल अब उन दोनों से साथ ज़्यादा खुल गया था सोनिया से तो उसे कोई खास उम्मीद नहीं थी क्योंकि वो दीदी थी लेकिन अब उसका मन होने लगा था कि अगर मौका मिले तो वो नेहा को चोद दे। लेकिन अब तक की बातों से तो कोई भी समझ सकता है कि दुनिया समीर की ‘उम्मीदों’ से कहीं आगे जा चुकी है। ओर समीर भी समझ चुका था कि नेहा पहले ही खाई खेली है उसकी बातों से यह जाहिर हो चुका था उसे लगा उसका काम जल्द बनेगा वह अपनी माँ शीतल को बहुत मिस कर रहा था देखते है आगे क्या होगा।
दोस्तो, आपको यह भाई-बहन और उसकी ननद की मस्ती भरी कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।
कहानी जारी रहेगी.