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कामाग्नि complete

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समीर- माफ़ करना नेहा, मेरे कारण तुमको तकलीफ उठानी पड़ी। मुझे पता नहीं था कि यहाँ का क्या सिस्टम है।

नेहा- कोई बात नहीं यार, वो तो उस समय मुझे ज़ोर की लगी थी इसलिए गुस्से में बोल दिया था लेकिन तुम दिल पर मत लेना। ठीक है?

समीर मन में ‘दिल पर लेना ही होगा तो तेरे इन दोनों चाँद के टुकड़ों को लूँगा न जानेमन।’

खाना खाने के बाद तीनों मिल कर गप्पें लड़ने लगे। चुटकुले-कहानियां चल रहे थे कि तभी बातों बातों में नेहा ने कहा- पता है भाभी, कल मेरे कॉलेज में हॉस्टल की लड़कियों ने एक जोक सुनाया। एक हॉस्टल में सुबह 6 से 7 का समय जिम का था और अक्सर लड़कियां उस टाइम में साइकिल चलाती थीं।

एक दिन 7 बजे एक लड़की हांफती हुई जिम वाली मैडम के पास आई और बोली- मैडम दस मिनट और साइकिल चला लूँ?

मैडम बोली- ठीक है, लेकिन आगे से ध्यान रखना सात बजे के बाद नहीं।

लेकिन कोई न कोई लड़की रोज़ ऐसा पूछती थी।

एक दिन गुस्से में मैडम चिल्लाई- आज के बाद किसी से एक मिनट भी ज़्यादा समय लगा तो सबकी साइकिल में सीट लगवा दूँगी.

इतना सुनते ही सोनिया ज़ोर से हंसी और नेहा के हाथ से हाथ टकरा कर हाय किया। दोनों पेट पकड़ कर हंस रहीं थीं और समीर के कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था।

आखिर उस से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया कि इसका क्या मतलब हुआ?

सोनिया- अरे मेरे लल्लू… साइकिल में सीट नहीं होगी तो क्या होगा? डंडा ! अब समझ आया?

समीर- ओह्ह तो ये बात थी। अब यार मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि नेहा ऐसा जोक सुना सकती है। और लल्लू किसको बोला? आप इतने ही चालू हो तो ये सवाल का जवाब दो?

तीन लड़कियां कुल्फी खा रहीं हैं। एक पिघला के खा रही है एक चूस के खा रही है और एक काट के खा रही है तो तीनों में से कौन शादीशुदा है?

बताओ?

सोनिया- सिंपल है यार जो चूस के (आँख मारते हुए) खा रही है वो शादीशुदा है।

नेहा- वैसे तो भाभी, चूस के खाने वाली भी कोई ज़रूरी नहीं है कि शादीशुदा ही हो. लेकिन क्या है न कि अपने समीर को उससे ऐसी ‘उम्मीद’ नहीं होगी। हा हा हा…

दोनों फिर पेट पाकर कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं। समीर का तो पोपट हो गया था लेकिन वो न केवल अब उन दोनों से साथ ज़्यादा खुल गया था सोनिया से तो उसे कोई खास उम्मीद नहीं थी क्योंकि वो दीदी थी लेकिन अब उसका मन होने लगा था कि अगर मौका मिले तो वो नेहा को चोद दे। लेकिन अब तक की बातों से तो कोई भी समझ सकता है कि दुनिया समीर की ‘उम्मीदों’ से कहीं आगे जा चुकी है। ओर समीर भी समझ चुका था कि नेहा पहले ही खाई खेली है उसकी बातों से यह जाहिर हो चुका था उसे लगा उसका काम जल्द बनेगा वह अपनी माँ शीतल को बहुत मिस कर रहा था देखते है आगे क्या होगा।

दोस्तो, आपको यह भाई-बहन और उसकी ननद की मस्ती भरी कहानी कैसी लगी आप मुझे ज़रूर बताइयेगा।

कहानी जारी रहेगी.

 
अब तक आपने पढ़ा कि राजन, सोनिया और नेहा ने समीर को अपनी पारिवारिक चुदाई के खेल में शामिल करने की पूरी योजना बना ली थी। तैयारी भी पूरी थी और समीर आते ही सबके साथ घुल मिल भी गया था।

अब आगे…

यूँ ही चुहलबाज़ी करते हुए दिन कब बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को जब राजन वापस आया तो तीनों सोफे पर बैठे सनी लिओनी की जिस्म-2 देख रहे थे। समीर बीच में बैठा था और उसने अपनी दोनों बाँहें सोनिया और नेहा के गले में डाल रखीं थीं। अपनी उंगलियों से वो उनके कंधे सहला रहा था। राजन को ये देख कर ख़ुशी हुई कि समीर जल्दी ही इतना घुल मिल गया था। उसने सोचा, चलो अच्छा है, अब आगे ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी। लेकिन समीर ने जैसे ही देखा कि जीजाजी आ गए हैं उसने अपने दोनों हाथ झट से हटा लिए।

राजन- अरे इतना टेंशन न ले यार, इस घर में हम शर्म लिहाज़ नाम का जीव पालते ही नहीं हैं। हा हा हा…

नेहा- हाँ भैया, यही बात हम इसको दिन भर से सिखा रहे हैं लेकिन ये पता नहीं कहाँ कहाँ की तहजीब और अपेक्षाएं पाल कर बैठा है।

समीर- अच्छा बाबा गलती हो गई। अब यार, हमारे घर में हमारे माँ-बाप ने जैसा माहौल बना कर रखा था वैसा ही सीख गए।

राजन- यार, माहौल तो हमारे घर भी वही था लेकिन अब हम माँ-बाप से दूर यहाँ अकेले रह रहे हैं, तो अब तो खुल कर रह ही सकते हैं न। इसीलिए यहाँ तो सब खुलेआम होता है। तुमको कोई समस्या हो तो बता देना, हम वैसा एडजस्ट कर लेंगे।

समीर- अरे नहीं नहीं, मुझे तो अच्छा लग रहा है। ज़्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं पड़ रही। जैसे नदी की धारा में बहते चले जा रहा हूँ।

नेहा- क्या बात है, समीर तो एक ही दिन में कवि बन गया।

ऐसे ही बातों बातों में समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। सबने खाना भी खा लिया और नेहा ने घोषणा भी कर दी कि वो सोने जा रही है।

सोनिया- तू हमारे कमरे में ही सो जा, समीर और राजन तेरे कमरे में सो जाएंगे।

समीर- अरे दीदी, रहने दो मैं यहीं सोफे पर सो जाऊंगा।

नेहा- भाभी! भैया को क्यों वनवास दे रही हो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है समीर चाहे तो मेरे कमरे में ही सो सकता है।

सोनिया- समीर, तुम नेहा के कमरे में जाओ। राजन को जहाँ सोना होगा वो अपने हिसाब से देख लेगा। दोनों ही बेड काफी बड़े हैं।

सोनिया ने हाथ पकड़ कर नेहा को अपने साथ ले जाते हुए धीरे से कहा- समीर अभी इतना बोल्ड भी नहीं हुआ है। वो तुम्हारे साथ सोने को तैयार नहीं होगा और यहीं सो जाएगा फिर हमको प्लान आगे बढ़ाना और मुश्किल होगा।

नेहा- हम्म… ठीक है अभी आपके साथ ही चलती हूँ, फिर बाद में देखेंगे।

सोनिया और नेहा बैडरूम में चले गए। उधर राजन बाथरूम से हाथ-मुँह धो कर वापस आया तो समीर नेहा के रूम में जा रहा था।

राजन- अच्छा तुम नेहा के रूम में सोने जा रहे हो?

समीर- हाँ, नेहा दीदी के साथ सोने गई है।

राजन- ओह्ह तो मुझे तुम्हारे साथ सोना है।

समीर- अरे नहीं आप चाहो तो नेहा को वापस भेज दो, मैंने तो कहा था मैं सोफे पर सो जाऊंगा।

राजन- अरे नहीं नहीं… ऐसा कैसे? तुम आराम से बेड पर ही सोओ मैं देख लूँगा जो भी होगा।

राजन के ज़ोर देने पर समीर नेहा के बेड पर ही सो गया। ये डबल-बेड ज़रूर था लेकिन उतना बड़ा भी नहीं जितना बैडरूम वाला बेड था। राजन भी दूसरा कोना पकड़ कर लेट गया। कुछ देर तक दोनों ने इधर उधर की बातें कीं और फिर सो गए। समीर को तो अभी नींद नहीं आ रही थी। एक तो वो अपने घर से बाहर कम ही जाता था तो किसी नई जगह पर नींद मुश्किल से ही आती थी, उस पर आज दिन भर में जो कुछ भी हुआ था वो सब उसके दिमाग में घूम रहा था.

अधिकतर वो नेहा के बारे में ही सोच रहा था ‘नेहा कितनी चालू लड़की है न, दीदी भी इतनी बोल्ड होतीं तो पता नहीं शायद हमारे बीच कुछ हो गया होता। जीजाजी बोल रहे थे कि वो कोई लिहाज़ नहीं मानते, कहीं सच में उनका कोई चक्कर तो नहीं हो नेहा के साथ? जैसे मैं अपनी माँ को चोदता हु कही राजन भी अपनी बहन कोतो नहीं चोदता जिस तरह नेहा का शरीर भरा है उससे तो लगता है बहुत खेली खाई होगी अगर ऐसा हो तो मुझे भी नई चुत मिलेगी दिदी का तो पता नही लेकिन नेहा का मेरे साथ तो चक्कर चल ही सकता है। इसमें तो कोई बुराई नहीं है।’

समीर इसी सब सोच में डूबा हुआ था कि उसने देखा की राजन धीरे से उठा और कमरे से बहार चला गया। पहले तो उसे लगा कि शायद पेशाब करने गए होंगे लेकिन जब कुछ देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो वो समझ गया कि जीजाजी बैडरूम में चले गए हैं। समीर फिर सोच में पड़ गया कि कहीं उसका शक सही तो नहीं था। कहीं जीजाजी और नेहा… अरे नहीं, वो तो दीदी के लिए गए होंगे। लेकिन नेहा भी तो वहीं है, तो क्या जीजाजी अपनी बहन के सामने ही दीदी के साथ वो सब करने लग जाएंगे?

 
समीर की उधेड़बुन अभी ख़त्म भी नहीं हुई थी कि उसने किसी को कमरे में आते देखा। लेकिन ये तो साफ़ था की वो उसके जीजाजी नहीं थे। समीर की उलझन तुरंत दूर हो गई जैसे ही नेहा बेड पर आ कर बैठी। उसने एक लम्बा टी-शर्ट पहना हुआ था जिसके नीचे कुछ भी नहीं था। शायद पैंटी होगी लेकिन वो दिख नहीं रही थी क्योंकि वो टी-शर्ट इतना लम्बा था कि घुटनो से थोड़ा ही ऊपर तक आ रहा था।

समीर- क्या हुआ नेहा तुम यहाँ?

नेहा लेटते हुए- हाँ यार मुझे तो पहले ही पता था कि भैया, भाभी की बिना नहीं रह पाएंगे।

समीर- तो मैं बाहर चला जाता हूँ सोफे पर!

नेहा- मैं क्या तुमको ड्रैक्युला जैसी दिखती हूँ?

समीर- नहीं तो!

नेहा- तो फिर सोए रहो न यार, वैसे भी मुझे तुम्हारे जैसे संस्कारी लड़के से कैसा डर?

समीर को लगा जैसे किसी ने उसकी शराफत को चुनौती दे दी हो। वैसे उसको पता था कि वो कोई शरीफ नहीं है। जो लड़का अपनी बहन को नंगी नहाते हुए देख कर मुठ मारता रहा हो और अपनी माँ को चोदता हो वो शरीफ कैसे हो सकता है लेकिन फिर भी जो शराफत की उसकी छवि सब लोगों के मन में बनी हुई थी वो उसको बने रहने देना चाहता था। एक सोनिया ही थी जिसके सामने वो सच में नंगा था क्योकि उसके आलावा बाकी सब उसे शरीफ ही समझते थे।

ऐसा शरीफ जो अपनी माँ को रोज चोदता है और बहन को चोदने की इच्छा है

आखिर अपनी शराफत की चादर ओढ़ कर समीर सो गया। नींद में जैसे उसने कोई सपना देखा हो और उसे लगा कि कोई बिल्ली अचानक उछल कर उसकी कमर पर बैठ गई है। इसी हड़बड़ी में उसकी नींद खुली और उसने देखा कि नेहा करवट बदलते बदलते उसके बिल्कुल पास आ चुकी थी और उसने अपना एक पैर मोड़ कर समीर की कमर पर रख दिया था।

पैर के मुड़ने से उसका लम्बा टी-शर्ट काफी ऊपर तक सरक गया था और उसकी जांघें यहाँ तक कि उसके कूल्हों का निचला भाग तक नंगा हो गया था। लेकिन यहाँ तक भी पैंटी का कोई नामोनिशान नहीं था।

समीर का ईमान डगमगा गया और उसने उसकी जाँघों पर अपना हाथ रख दिया। कुछ देर तक जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो समीर ने नेहा की नंगी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया। इतनी चिकनी और मुलायम त्वचा का अनुभव उसे मस्त कर गया

इस अनुभव ने उसकी हिम्मत को और बढ़ा दिया और उसने हाथ आगे बढ़ा कर नेहा के नितम्बों तक ले गया। भरे मुलायम गोल नितम्बों को हलके से मसलते हुए जब उसने हाथ टी-शर्ट के अंदर तक डाला तो उसे लगा कि वहां कोई पैंटी नहीं थी। इस बात की पुष्टि जैसे ही हुई उसकी धड़कन और तेज़ हो गई और लंड ने एक और अंगड़ाई झटके के साथ ली। कुछ देर तक वो दोनों नितम्बों को अपने हाथ से सहलाता रहा लेकिन फिर जब हिम्मत करके उसने अपन हाथ दोनों के बीच की घाटी में डाला तब समझ आया कि उसने जी-स्ट्रिंग पहनी हुई थी जिसमे केवल योनि के ऊपर एक तिकोना कपड़ा होता है, जिसके तीनों छोर पर डोरियां लगी होती हैं।

उसने जी-स्ट्रिंग के बाजू से दो उँगलियाँ अंदर सरका कर नेहा के भग-प्रदेश को छुआ ही था कि अचानक नेहा ने करवट बदल ली और अपना टी-शर्ट नीचे करके चादर ओढ़ कर सो गई। समीर की धड़कन अभी भी रेलगाड़ी की तरह तेज़ दौड़ रही थी। उसकी उँगलियों ने जिस अहसास को अभी अभी अनुभव किया था वो अभी भी ताज़ा था। पूरी रात वो करवटें बदलता रहा लेकिन नींद नहीं आई।

आखिर भोर के पहले पहर ने उसे सुला ही दिया।

 
अगली सुबह वो काफी देर से उठा तब तक राजन जा चुका था और सोनिया व नेहा फ्रेश हो कर चाय-नाश्ता भी कर चुकी थीं। जाने कहाँ से नेहा को पता चल गया और वो उसके लिए कॉफ़ी लेकर आ गई। उसके व्यवहार से ये बिल्कुल नहीं लग रहा था कि उसे रात के बारे में कुछ भी याद है।

समीर को इस बात से सुकून मिला कि नेहा को कुछ याद नहीं था, वरना वो तो इसी बात से चिंतित था कि कहीं उसे कुछ याद रह गया तो ये जो उनके रिश्ते में थोड़ी नज़दीकियां बनी हैं ये भी कहीं हाथ से निकल न जाएं।

कॉफी पीकर समीर बाहर आया तो सोनिया ने कहा- समीर, नाश्ता लगा दिया है, लेकिन थोड़ा कम ही लेना क्योंकि इतना देर से उठे हो कि खाने का समय भी बस हो ही गया है। नाश्ता करके नहा लेना, फिर सब साथ में खाना खाएंगे।

समीर- जी दीदी!

नाश्ता करके समीर घर में इधर उधर टहलने लगा। नेहा ने अब एक दूसरी ड्रेस पहन ली थी जो उस रात वाले टी-शर्ट से कोई बहुत अलग नहीं थी। फर्क इतना था कि ये थोड़ी कसी हुई थी और इस पर ऊपर से नीचे तक काली और सफ़ेद पट्टियां थीं।

एक बात और, ये घुटनों से काफी ऊपर भी थी और इसकी बाँहें कलाइयों तक पूरी ढकी हुई थीं। नेहा बहुत सेक्सी लग रही थी इसमें। समीर ने तो ऐसी ड्रेस पहने केवल 1-2 लड़कियों को ही देखा था वो भी कॉलेज की पार्टी में।

खाना लगभग तैयार था इसलिए सोनिया ने समीर को जल्दी से जा कर नहाने के लिए कहा तो वो नहाने चला गया।

अभी ठीक से नहाना शुरू भी नहीं किया था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी।

नेहा- बड़ी जल्दी सारा सिस्टम समझ गए समीर! मैं तो डर गई थी कि कहीं आज भी घंटा भर रोक के न रखना पड़े।

समीर को कमोड का ढक्कन खोलने की आवाज़ आई और साथ में ये ख्याल भी कि पर्दा तो शावर में लगा है कमोड तो खुले में है। तब तक नेहा के पेशाब करने की आवाज़ भी आने लगी थी। शस्स्स्सऽऽऽ…

उसने हिम्मत करके स्लाइडिंग दरवाज़े को थोड़ा खोला और परदे के किनारे से आँख लगा कर बाहर देखा। ठीक सामने नेहा कमोड पर बैठ कर पेशाब करती हुई दिखाई दी। उसकी ड्रेस नाभि से ऊपर तक उठी हुई थी, ज़ाहिर है कोई पैंटी नहीं थी और चूत बिल्कुल चिकनी… समीर के मन में रात वाली कोमल अनुभूति ताज़ा हो गई। लेकिन छूने और देखने दोनों की अपनी अलग अनुभूति होती है।

वो डबलरोटी के बन की तरह फूले और आपस में चिपके दो चिकने भगोष्ठ, उनके बीच से बाहर झांकती छोटी सी भगनासा (क्लिट)। उसके नीचे से निकलती पानी की धार… हाँ वो पीली बिल्कुल नहीं थी। बिल्कुल पानी की तरह साफ पेशाब की धार जो सीधा कमोड में गिर रही थी।

समीर ने सोचा था कि पैंटी शायद नीचे पैरों में फंसी होगी लेकिन वो वहां भी नहीं थी। मतलब आज नेहा ने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी?

इसका जवाब भी जल्दी ही मिल गया। नेहा ने बाजू से एक टिश्यू लेकर अपनी चूत को साफ़ किया और खड़ी हो गई। कमोड को बंद करके वो सिंक के पास गई और वहां से अपनी पैंटी (जी-स्ट्रिंग) उठाई। वो उसे पहनने के लिए झुकी लेकिन फिर रुक गई, वापस खड़े हो कर उसने उसे सूंघा और फिर वहीं प्लेटफॉर्म पर रख दिया और खुद को आइने में निहारने लगी।

उसकी वो ड्रेस जो अब तक उसकी नाभि के ऊपर तक चढ़ी हुई थी, उसे नीचे करने की बजाए उसने उसे अब बाहों तक ऊपर चढ़ा लिया। उसके ऐसा करते ही उसके दोनों कबूतर आज़ाद पंछी की तरह फड़फड़ा कर बाहर आ गए।

नेहा ने अपने स्तनों को दोनों हाथों में भर कर सहलाया, थोड़ा दबाया और खेल खेल में उनके चुचूक उमेठ कर खींचे भी। इसी बीच वो अपनी कमर भी हल्के से लहराने लगी जैसे किसी हल्की सी धुन पर नाच रही हो और इससे समीर का ध्यान अपने आप ही उसके नितम्बों की ओर चला गया, ऐसे लग रहे थे जैसे रेगिस्तान में तूफ़ान के बाद रेत के स्तूप बन गए हों, एकदम सुडौल और बेदाग।

अचानक उसकी कमर पेंडुलम की तरह दाएं-बाएं हिलते हिलते, एक ओर रुक गई और जब समीर की नज़र ऊपर गई तो उसे लगा जैसे नेहा दर्पण में से उसी की तरफ देख रही थी। नेहा ने एक आँख मारी और मुस्कुरा दी।

समीर घबरा कर जल्दी से पर्दा छोड़ दिया और स्लाइडर बंद कर लिया।

इस घटना से समीर बहुत उत्तेजित हो गया था और रात वाली बात उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। आखिर उससे रहा नहीं गया और उसने नेहा की कल्पना करते हुआ मुठ मारना शुरू कर दिया। उसे पक्का यकीन नहीं था कि नेहा ने वो आँख उसे देख कर ही मारी थी या वो दर्पण में खुद को देख कर ऐसा कर रही थी लेकिन फिर भी उसका दिल यही चाहता था कि काश वो इशारा उस ही के लिए हो। आज बहुत दिनों के बाद मुठ मारने में उसे इतना मजा आया था।

 
अगली सुबह वो काफी देर से उठा तब तक राजन जा चुका था और सोनिया व नेहा फ्रेश हो कर चाय-नाश्ता भी कर चुकी थीं। जाने कहाँ से नेहा को पता चल गया और वो उसके लिए कॉफ़ी लेकर आ गई। उसके व्यवहार से ये बिल्कुल नहीं लग रहा था कि उसे रात के बारे में कुछ भी याद है।

समीर को इस बात से सुकून मिला कि नेहा को कुछ याद नहीं था, वरना वो तो इसी बात से चिंतित था कि कहीं उसे कुछ याद रह गया तो ये जो उनके रिश्ते में थोड़ी नज़दीकियां बनी हैं ये भी कहीं हाथ से निकल न जाएं।

कॉफी पीकर समीर बाहर आया तो सोनिया ने कहा- समीर, नाश्ता लगा दिया है, लेकिन थोड़ा कम ही लेना क्योंकि इतना देर से उठे हो कि खाने का समय भी बस हो ही गया है। नाश्ता करके नहा लेना, फिर सब साथ में खाना खाएंगे।

समीर- जी दीदी!

नाश्ता करके समीर घर में इधर उधर टहलने लगा। नेहा ने अब एक दूसरी ड्रेस पहन ली थी जो उस रात वाले टी-शर्ट से कोई बहुत अलग नहीं थी। फर्क इतना था कि ये थोड़ी कसी हुई थी और इस पर ऊपर से नीचे तक काली और सफ़ेद पट्टियां थीं।

एक बात और, ये घुटनों से काफी ऊपर भी थी और इसकी बाँहें कलाइयों तक पूरी ढकी हुई थीं। नेहा बहुत सेक्सी लग रही थी इसमें। समीर ने तो ऐसी ड्रेस पहने केवल 1-2 लड़कियों को ही देखा था वो भी कॉलेज की पार्टी में।

खाना लगभग तैयार था इसलिए सोनिया ने समीर को जल्दी से जा कर नहाने के लिए कहा तो वो नहाने चला गया।

अभी ठीक से नहाना शुरू भी नहीं किया था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी।

नेहा- बड़ी जल्दी सारा सिस्टम समझ गए समीर! मैं तो डर गई थी कि कहीं आज भी घंटा भर रोक के न रखना पड़े।

समीर को कमोड का ढक्कन खोलने की आवाज़ आई और साथ में ये ख्याल भी कि पर्दा तो शावर में लगा है कमोड तो खुले में है। तब तक नेहा के पेशाब करने की आवाज़ भी आने लगी थी। शस्स्स्सऽऽऽ…

उसने हिम्मत करके स्लाइडिंग दरवाज़े को थोड़ा खोला और परदे के किनारे से आँख लगा कर बाहर देखा। ठीक सामने नेहा कमोड पर बैठ कर पेशाब करती हुई दिखाई दी। उसकी ड्रेस नाभि से ऊपर तक उठी हुई थी, ज़ाहिर है कोई पैंटी नहीं थी और चूत बिल्कुल चिकनी… समीर के मन में रात वाली कोमल अनुभूति ताज़ा हो गई। लेकिन छूने और देखने दोनों की अपनी अलग अनुभूति होती है।

वो डबलरोटी के बन की तरह फूले और आपस में चिपके दो चिकने भगोष्ठ, उनके बीच से बाहर झांकती छोटी सी भगनासा (क्लिट)। उसके नीचे से निकलती पानी की धार… हाँ वो पीली बिल्कुल नहीं थी। बिल्कुल पानी की तरह साफ पेशाब की धार जो सीधा कमोड में गिर रही थी।

समीर ने सोचा था कि पैंटी शायद नीचे पैरों में फंसी होगी लेकिन वो वहां भी नहीं थी। मतलब आज नेहा ने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी?

इसका जवाब भी जल्दी ही मिल गया। नेहा ने बाजू से एक टिश्यू लेकर अपनी चूत को साफ़ किया और खड़ी हो गई। कमोड को बंद करके वो सिंक के पास गई और वहां से अपनी पैंटी (जी-स्ट्रिंग) उठाई। वो उसे पहनने के लिए झुकी लेकिन फिर रुक गई, वापस खड़े हो कर उसने उसे सूंघा और फिर वहीं प्लेटफॉर्म पर रख दिया और खुद को आइने में निहारने लगी।

उसकी वो ड्रेस जो अब तक उसकी नाभि के ऊपर तक चढ़ी हुई थी, उसे नीचे करने की बजाए उसने उसे अब बाहों तक ऊपर चढ़ा लिया। उसके ऐसा करते ही उसके दोनों कबूतर आज़ाद पंछी की तरह फड़फड़ा कर बाहर आ गए।

नेहा ने अपने स्तनों को दोनों हाथों में भर कर सहलाया, थोड़ा दबाया और खेल खेल में उनके चुचूक उमेठ कर खींचे भी। इसी बीच वो अपनी कमर भी हल्के से लहराने लगी जैसे किसी हल्की सी धुन पर नाच रही हो और इससे समीर का ध्यान अपने आप ही उसके नितम्बों की ओर चला गया, ऐसे लग रहे थे जैसे रेगिस्तान में तूफ़ान के बाद रेत के स्तूप बन गए हों, एकदम सुडौल और बेदाग।

अचानक उसकी कमर पेंडुलम की तरह दाएं-बाएं हिलते हिलते, एक ओर रुक गई और जब समीर की नज़र ऊपर गई तो उसे लगा जैसे नेहा दर्पण में से उसी की तरफ देख रही थी। नेहा ने एक आँख मारी और मुस्कुरा दी।

समीर घबरा कर जल्दी से पर्दा छोड़ दिया और स्लाइडर बंद कर लिया।

इस घटना से समीर बहुत उत्तेजित हो गया था और रात वाली बात उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। आखिर उससे रहा नहीं गया और उसने नेहा की कल्पना करते हुआ मुठ मारना शुरू कर दिया। उसे पक्का यकीन नहीं था कि नेहा ने वो आँख उसे देख कर ही मारी थी या वो दर्पण में खुद को देख कर ऐसा कर रही थी लेकिन फिर भी उसका दिल यही चाहता था कि काश वो इशारा उस ही के लिए हो। आज बहुत दिनों के बाद मुठ मारने में उसे इतना मजा आया था।

कहानी जारी रहेगी

 
अगली सुबह वो काफी देर से उठा तब तक राजन जा चुका था और सोनिया व नेहा फ्रेश हो कर चाय-नाश्ता भी कर चुकी थीं। जाने कहाँ से नेहा को पता चल गया और वो उसके लिए कॉफ़ी लेकर आ गई। उसके व्यवहार से ये बिल्कुल नहीं लग रहा था कि उसे रात के बारे में कुछ भी याद है।

समीर को इस बात से सुकून मिला कि नेहा को कुछ याद नहीं था, वरना वो तो इसी बात से चिंतित था कि कहीं उसे कुछ याद रह गया तो ये जो उनके रिश्ते में थोड़ी नज़दीकियां बनी हैं ये भी कहीं हाथ से निकल न जाएं।

कॉफी पीकर समीर बाहर आया तो सोनिया ने कहा- समीर, नाश्ता लगा दिया है, लेकिन थोड़ा कम ही लेना क्योंकि इतना देर से उठे हो कि खाने का समय भी बस हो ही गया है। नाश्ता करके नहा लेना, फिर सब साथ में खाना खाएंगे।

समीर- जी दीदी!

नाश्ता करके समीर घर में इधर उधर टहलने लगा। नेहा ने अब एक दूसरी ड्रेस पहन ली थी जो उस रात वाले टी-शर्ट से कोई बहुत अलग नहीं थी। फर्क इतना था कि ये थोड़ी कसी हुई थी और इस पर ऊपर से नीचे तक काली और सफ़ेद पट्टियां थीं।

एक बात और, ये घुटनों से काफी ऊपर भी थी और इसकी बाँहें कलाइयों तक पूरी ढकी हुई थीं। नेहा बहुत सेक्सी लग रही थी इसमें। समीर ने तो ऐसी ड्रेस पहने केवल 1-2 लड़कियों को ही देखा था वो भी कॉलेज की पार्टी में।

खाना लगभग तैयार था इसलिए सोनिया ने समीर को जल्दी से जा कर नहाने के लिए कहा तो वो नहाने चला गया।

अभी ठीक से नहाना शुरू भी नहीं किया था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी।

नेहा- बड़ी जल्दी सारा सिस्टम समझ गए समीर! मैं तो डर गई थी कि कहीं आज भी घंटा भर रोक के न रखना पड़े।

समीर को कमोड का ढक्कन खोलने की आवाज़ आई और साथ में ये ख्याल भी कि पर्दा तो शावर में लगा है कमोड तो खुले में है। तब तक नेहा के पेशाब करने की आवाज़ भी आने लगी थी। शस्स्स्सऽऽऽ…

उसने हिम्मत करके स्लाइडिंग दरवाज़े को थोड़ा खोला और परदे के किनारे से आँख लगा कर बाहर देखा। ठीक सामने नेहा कमोड पर बैठ कर पेशाब करती हुई दिखाई दी। उसकी ड्रेस नाभि से ऊपर तक उठी हुई थी, ज़ाहिर है कोई पैंटी नहीं थी और चूत बिल्कुल चिकनी… समीर के मन में रात वाली कोमल अनुभूति ताज़ा हो गई। लेकिन छूने और देखने दोनों की अपनी अलग अनुभूति होती है।

वो डबलरोटी के बन की तरह फूले और आपस में चिपके दो चिकने भगोष्ठ, उनके बीच से बाहर झांकती छोटी सी भगनासा (क्लिट)। उसके नीचे से निकलती पानी की धार… हाँ वो पीली बिल्कुल नहीं थी। बिल्कुल पानी की तरह साफ पेशाब की धार जो सीधा कमोड में गिर रही थी।

समीर ने सोचा था कि पैंटी शायद नीचे पैरों में फंसी होगी लेकिन वो वहां भी नहीं थी। मतलब आज नेहा ने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी?

इसका जवाब भी जल्दी ही मिल गया। नेहा ने बाजू से एक टिश्यू लेकर अपनी चूत को साफ़ किया और खड़ी हो गई। कमोड को बंद करके वो सिंक के पास गई और वहां से अपनी पैंटी (जी-स्ट्रिंग) उठाई। वो उसे पहनने के लिए झुकी लेकिन फिर रुक गई, वापस खड़े हो कर उसने उसे सूंघा और फिर वहीं प्लेटफॉर्म पर रख दिया और खुद को आइने में निहारने लगी।

उसकी वो ड्रेस जो अब तक उसकी नाभि के ऊपर तक चढ़ी हुई थी, उसे नीचे करने की बजाए उसने उसे अब बाहों तक ऊपर चढ़ा लिया। उसके ऐसा करते ही उसके दोनों कबूतर आज़ाद पंछी की तरह फड़फड़ा कर बाहर आ गए।

नेहा ने अपने स्तनों को दोनों हाथों में भर कर सहलाया, थोड़ा दबाया और खेल खेल में उनके चुचूक उमेठ कर खींचे भी। इसी बीच वो अपनी कमर भी हल्के से लहराने लगी जैसे किसी हल्की सी धुन पर नाच रही हो और इससे समीर का ध्यान अपने आप ही उसके नितम्बों की ओर चला गया, ऐसे लग रहे थे जैसे रेगिस्तान में तूफ़ान के बाद रेत के स्तूप बन गए हों, एकदम सुडौल और बेदाग।

अचानक उसकी कमर पेंडुलम की तरह दाएं-बाएं हिलते हिलते, एक ओर रुक गई और जब समीर की नज़र ऊपर गई तो उसे लगा जैसे नेहा दर्पण में से उसी की तरफ देख रही थी। नेहा ने एक आँख मारी और मुस्कुरा दी।

समीर घबरा कर जल्दी से पर्दा छोड़ दिया और स्लाइडर बंद कर लिया।

इस घटना से समीर बहुत उत्तेजित हो गया था और रात वाली बात उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी। आखिर उससे रहा नहीं गया और उसने नेहा की कल्पना करते हुआ मुठ मारना शुरू कर दिया। उसे पक्का यकीन नहीं था कि नेहा ने वो आँख उसे देख कर ही मारी थी या वो दर्पण में खुद को देख कर ऐसा कर रही थी लेकिन फिर भी उसका दिल यही चाहता था कि काश वो इशारा उस ही के लिए हो। आज बहुत दिनों के बाद मुठ मारने में उसे इतना मजा आया था।

 
अब तक आपने पढ़ा कि समीर को हालातों के चलते नेहा के साथ सोना पड़ा था और रात को नींद में जब नेहा उसके काफी नज़दीक आ गई तो उसने उसे छू लिया था। अगले दिन सुबह नहाते वक़्त नेहा पेशाब करने आई तो समीर ने उसे नंगी देखा और उसे लगा कि शायद नेहा ने उसे आँख भी मारी थी। इस सब से वो बहुत उत्तेजित हो गया था और उसने नहाने से पहले मुठ मार ली।

अब आगे…

मुठ मारने के बाद नहा-धो कर जब समीर टब से बाहर आया तो उसने देखा कि नेहा की पैंटी अभी भी सिंक वाले प्लेटफॉर्म पर ही पड़ी थी। उसने उठा कर उसे सूंघा… वाह! क्या खुशबू थी जवानी की। उसने उसे अपनी चड्डी में डाल लिया ताकि बाद में भी उसकी खुशबू ले सके। बाथरूम से बाहर आया तो सोनिया ने कहा कि जल्दी से तैयार हो जाओ और खाना खा लो।

समीर अपने (नेहा के) कमरे में गया और वो नेहा की पैंटी उसने अपने सूटकेस में छिपा कर रख दी। फिर टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहन कर वो बाहर आ गया। नेहा पहले ही डाइनिंग टेबल पर बैठी थी और सोनिया खाना लगा रही थी। तभी सोनिया के हाथों से कुछ चम्मचें नीचे गिर गईं।

सोनिया उठाने के लिए झुक ही रही थी कि समीर ने कहा- रहने दो दीदी आप खाना लगाओ मैं उठा देता हूँ।

जैसे ही वो टेबल के नीचे गया नेहा ने अपने पैर चौड़े कर दिए और उनको एड़ी ऊपर नीचे करके हिलने लगी जिससे अनायास ही समीर का ध्यान उसकी तरफ चला गया। जो उसने देखा उससे एक बार फिर उसकी धड़कनों ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और लंड वापस नींद से जाग गया। वही एकदम चिकनी चूत… उसके आँखों के सामने थी जो उसने थोड़ी देर पहले दूर से देखी थी, वो फूली हुई चूत ठीक उसके सामने थी।

समीर मन भर कर उसे देखना चाहता था लेकिन तभी नेहा ने कहा- क्या हुआ समीर, चम्मच नहीं मिल रहे क्या?

बाहर निकलते हुए समीर- नहीं चम्मच तो मिल गए थे, लेकिन कुछ और भी मिल गया था, वही देख रहा था।

इतना कह कर समीर ने भी धीरे से आँख मार दी।

सोनिया ने कहा कि वो उनके लिए गरमा-गर्म फुल्के बना कर ला रही है इसलिए वो बाद में खाना खा लेगी। समीर और नेहा ने खाना शुरू किया और मौका देख कर समीर ने धीमी आवाज़ में बात आगे बढ़ने की कोशिश की- तुम रात को कमरे में वापस क्यों आ गईं थीं? क्या हुआ था बैडरूम में?

नेहा- बताया तो था कि भैया से रहा नहीं गया तो वो और भाभी लगे हुए थे। मेरी नींद डिस्टर्ब हो रही थी तो मैं अपने रूम में आ गई।

समीर- लगे हुए थे मतलब?

उसने आश्चर्य से पूछा.

नेहा- अब यार हस्बैंड-वाइफ बैडरूम में और किस काम में लगे हो सकते हैं? सेक्स कर रहे थे और क्या?

समीर- क्या बात कर रही हो यार! तुम्हारे भैया तुम्हारे सामने ही?

नेहा- अरे बताया था न, यहाँ हम ज़्यादा लिहाज़ नहीं पालते।

समीर- हाँ लेकिन फिर भी… कुछ पहना था या नहीं?

नेहा- कोई कपड़े पहन कर सेक्स करता है क्या?

समीर- मतलब तुमने दीदी-जीजाजी को नंगे सेक्स करते हुए देखा है?

नेहा- हाँ यार, तभी तो मैं अपने रूम में आ गई थी न।

समीर- लेकिन तुम्हारे आने से तो उनको पता चल गया होगा न कि तुमने उन्हें देख लिया है?

नेहा- हाँ तो… मैं तो उनको बोल कर आई कि आप लोग एन्जॉय करो, मैं अपने रूम में जा रही हूँ।

समीर- सही है यार! तुम्हारी फॅमिली तो कुछ ज़्यादा ही ओपन है।

नेहा- अब यार सब तुम्हारी वजह से हुआ। कल तुम मेरे रूम में सोने से इतना न शर्माते तो ये सब होता ही नहीं न।

तभी सोनिया रोटियां देने आ गई और कुछ देर तक चुप्पी रही फिर जब सोनिया वापस किचन में गई तो नेहा ने थोड़े शैतानी अंदाज़ में धीरे से कहा- वैसे ये पहली बार नहीं था, जब मैंने भैया को नंगा देखा था। पहले भी कई बार मैं उनको नहाते हुए देख चुकी हूँ।

नेहा ने आँख मारते हुए कहा।

समीर- क्या बात कर रही हो! कैसे?

नेहा- एक पर्दा ही है यार। थोड़ा सा सरका कर चुपके चुपके देख लेती थी।

समीर- लेकिन फिर तो उनको भी दिख जाता होगा न की तुम देख रही हो?

नेहा- पता नहीं, मुझे ऐसा कभी लगा तो नहीं की उनको पता चला हो क्योकि मैं नीचे के कोने से देखती थी जहाँ नज़र काम ही जाती है, लेकिन क्या पता देख भी लिया हो इसीलिए शायद अब उनको मेरे सामने शर्म नहीं आती।

तब तक दोनों का खाना हो चुके थे और सोनिया भी किचन के काम से फुर्सत हो गई थी।

सोनिया- बहुत गर्मी है यार। तुम लोग टीवी देखो मैं तो नहा कर आती हूँ, उसके बाद ही खाना खाऊँगी।

नेहा और समीर टीवी पर कोई कॉमेडी प्रोग्राम देखने लगे और सोनिया नहाने चली गई। थोड़ी देर बाद समीर के दिमाग में कुछ ख्याल आया और उसने पेशाब जाने का बहाना बनाया और बाथरूम में आ गया। जैसा कि नेहा ने बताया था, उसने भी नीचे के कोने से परदे को थोड़ा सा हटाकर अंदर देखा तो बहुत दिनों के बाद अपनी बहन का वही हसीन नंगा बदन देख कर सिहर उठा। वो वहीं बैठ कर देखने लगा और उसने अपना लंड भी बाहर निकाल लिया।

उसने अपने लंड को सहलाना शुरू किया ही था कि नेहा की आवाज़ आई- समीर क्या हुआ! ज़िप में फंस गई क्या? हा हा हा…

 
समीर को होश आया कि उसने पेशाब का बहाना बनाया था तो वो ज़्यादा देर नहीं रुक सकता था, उसने जल्दी से अपने शॉर्ट्स ऊपर किये और बाहर आ गया।

नेहा- क्या कर रहे थे?

समीर- पेशाब करने गया था यार बहुत समय से नहीं की थी इसलिए इतना टाइम लग गया।

नेहा- तुम्हारा ये तो कुछ और ही कह रहा है।

नेहा ने समीर के शॉर्ट्स में बने तम्बू की तरफ इशारा करते हुए कहा।

समीर ने तुरंत अपने खड़े लंड को दोनों हाथों से छुपाया और सकपका कर वहीं बैठ गया।

नेहा- टेंशन मत ले यार, ये काम हमने भी किये हैं। अभी ही तो बताया था न तुझे…

नेहा ने माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा।

समीर धीरे से- इसीलिए तो सोचा, मैं भी आज़मा के देख लूँ।

और फिर दोनों हंसने लगे।

तब तक सोनिया भी वापस आ गई थी। वो डाइनिंग टेबल पर अपने खाने की तैयारी में लग गई और इधर सोफे पर नेहा और समीर की खुसुर-फुसुर शुरू हो गई।

नेहा- वैसे जितना तम्बू अभी देखने को मिला उस हिसाब से तुम्हारा हथियार भैया से कम तो नहीं होगा।

समीर- मुझे क्या पता उनका तो तुमने ही देखा है।

नेहा- तुमने भाभी को आज आज पहली बार देखा है या… इतना कह कर नेहा ने एक शैतानी मुस्कराहट के साथ अपनी भवें उछालते हुए सवाल किया।

समीर शरमाते हुए- पहले भी देखता था घर पर।

नेहा- क्या बात है दोस्त फिर तो हम एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हुए। और बताओ न कुछ… कैसे देखते थे? उनको कभी पता चला या नहीं? बताओ बताओ…

नेहा ने ये सारा खेल समीर से ये सारी बातें उगलवाने के लिए ही रचा था। वो ये सब पहले से जानती थी लेकिन प्लान के हिसाब से उसे ये सब समीर से ही उगलवाना था। समीर ने अपनी पूरी कहानी बता डाली की कैसे शुरुवात सोनिया ने ही की थी लेकिन बाद में उन दोनों को पता चल गया था कि वो एक दूसरे को नहाते हुए देखते हैं। फिर वो एक दूसरे के लिए नहाते वक़्त सेक्सी हरकतें भी करने लगे थे और मुठ भी मारते थे, लेकिन उससे आगे बढ़ने की कभी हिम्मत नहीं हुई।

इससे पहले की बात आगे बढ़ती, सोनिया अपना खाना ख़त्म करके आ गई और समीर के दूसरे बाजू में बैठ गई।

सोनिया- चलो तो आज फिर कौन सी फिल्म देखनी है?

नेहा- रंगरसिया कैसी रहेगी?

सोनिया- ओये होये! किसके रंग की रसिया हो रही हो आज? चलो ठीक है, मैंने भी नहीं देखी है, मुझे भी देखनी थी वो।

और ठीक कल की तरह समीर बीच में बैठा था और नेहा-सोनिया उसके दोनों तरफ। सब कल की ही तरह फिल्म देख रहे थे, लेकिन आज नेहा का हाथ समीर की जांघ पर रखा था और समीर भी कन्धों से नीचे नेहा की बाँहें अपनी उंगलियों से सहला रहा था। उधर जैसे वो उसकी बांह सहलाता वैसे ही नेहा की उंगलियाँ समीर की जांघ पर थिरकती थीं। थोड़ी हिम्मत करके समीर 1-2 उंगलियों से नेहा के स्तन के बाजू में छूने और कुरेदने लगा। नेहा ने भी अपना हाथ थोड़ा ऊपर कर लिया और वो अब उसके लंड के काफी करीब थी।

तभी फिल्म में वो सीन आया जिसमे हीरो-हीरोइन नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे को रंगों से सरोबार कर रहे थे और नंगे ही काफी तरह की मस्तियाँ कर रहे थे। समीर का लंड खड़ा तो पहले से ही था लेकिन ये देख कर और कड़क हो गया और उसने नेहा के स्तन को पूरी तरह से पकड़ का भींच दिया और उसे मसलने लगा। नेहा भी उस सीन से काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उस पर समीर की हरकत ने उसे हरी झंडी दिखा दी और उसने भी समीर का लंड पकड़ कर उसे ज़ोर से दबा दिया।पर लंड पकड़ते ही वह चौंक गयी समीर का लंड उसके भाई के लंड से बहुत मोटा और लंबा था उसकी चुत में सुरसुराहट होने लगी

आम तौर पर लंड को इतनी ज़ोर से दबाने पर किसी भी लड़के की दर्द से चीख निकल सकती थी लेकिन वो इतना कड़क हो चुका था कि समीर को ज़्यादा फर्क नहीं पड़ा। जब सीन ख़त्म हुआ और समीर को थोड़ा होश आया तो उसने देखा कि सोनिया फिल्म को नहीं बल्कि इन दोनों को ही देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।

समीर थोड़ा झिझक गया और उठ कर पानी पीने चला गया।

फिल्म ख़त्म होते होते राजन भी वापस आ चुका था। राजन बाथरूम में फ्रेश होने गया और नेहा अपने रूम में किसी काम से गई तो सोनिया ने समीर को पास बुला कर कहा- मैंने सोचा था नेहा के साथ रह कर तुम लड़कियों से बात करना सीख जाओगे लेकिन तुम तो…

समीर- सॉरी दीदी, अब बस हो गया और वो भी तो साथ दे रही थी ना।

सोनिया- अरे मेरा वो मतलब नहीं था, मेरी तरफ से तो पूरी छूट है, जो करना है कर। अगर तू कहेगा तो मैं तो इससे तेरी शादी तक करवा सकती हूँ। जिस काम से तुझे ख़ुशी मिले उससे तो मैं खुश ही होऊँगी ना।

 
सोनिया ने पहले अपनी ननंद नेहा को अपने पति और उसके सगे भाई से चुदवाया और अब वह खुद अपने भाई से चुदवाने के लिये नेहा को अपने भाई के गले मे डालना चाहती थी वह नेहा की शादी समीर से करवाना चाहती थी ताकि आगे भी वह समीर से चुदवा पर नेहा जो एकदम कैरेक्टर लेस थी ना सिर्फ अपने भाई से बल्कि कॉलेज में कई लड़को से चुदवाती थी और यह सब सोनिया को पता था फिर भी वह अपने छोटे भाई की लाइफ बर्बाद करने जा रही थी क्यों कि नेहा के जीवन का एक ही फंडा था प्यार एक से करो चुदवाने के लिये दुनिया पड़ी है पर क्या समीर मासूम था नही जो अपनी माँ को चोद चूंका था अपनी बहन को चोदना चाहता हों वह हरगिज मासूम नही था पर शादी के लिये प्यार होना जरूरी था सेक्स के लिये प्यार की जरूरत नही होती वह नेहा को सिर्फ चोदना चाहता था प्यार वह अपनी गर्लफ्रेंड को करता था और शादी भी उसी से करना चाहता था पर वह सबसे ज्यादा प्यार अपनी माँ और बहन से करता था।

तभी राजन वापस आ गया और डिनर की तैयारी होने लगी। डिनर के बाद राजन ने कहा- आज तो ड्रिंक करने का मन कर रहा है, चलो समीर 1-1 पेग हो जाए।

समीर- नहीं मैं नहीं पीता।

राजन- अरे! तुम्हारी दीदी तो पीती है, तुम नहीं पीते?

समीर- दीदी! आपने कब से पीना शुरू कर दिया?

समीर ने सोनिया को पुकारते हुए कहा।

सोनिया- अरे नहीं, किसी खास मौके पर इनके साथ ही थोड़ी ले लेती हूँ।

दोनों जीजा साले बाहर बालकनी में कुर्सी लगा कर बैठ गए और राजन ने दो पेग बनाए। नेहा ने नमकीन काजू की एक प्लेट ला कर रख दी और कहा- मैं सोने जा रही हूँ। समीर, ज़्यादा नखरे करने की जरूरत नहीं है, सीधे मेरे कमरे में आकर सो जाना। भैया आप समझाओ न इसे।

इतना कह कर नेहा तो चली गई, राजन समीर से बोला- हाँ यार, देख अब तू बाहर न सोये इसलिए तेरी दीदी ने कल नेहा को अंदर सुला लिया था और उस चक्कर में फिर… अब यार मैं तेरी दीदी के बिना नहीं रह सकता। समझ रहा है न?

समीर- हाँ, नेहा ने मुझे बताया था।

राजन- तो भाई तू नेहा के रूम में ही सो जाना। देख तुझे मैंने पहले ही बोल दिया था हमारे यहाँ ये सब लिहाज़ वाली बातें नहीं मानते और फिर नेहा ने खुद तुझे कहा है न आने को।

समीर- हाँ लेकिन फिर भी वो आपकी बहन है, इसलिए मैं थोड़ा…

अब तक दोनों के पेग लगभग ख़त्म हो चुके थे और थोड़ा सुरूर भी चढ़ गया था।

राजन- ये बात तो सही है, वो मेरी बहन है। उसकी मर्ज़ी के खिलाफ किसी ने उसको हाथ भी लगाया तो कमीने का हाथ तोड़ दूंगा। पर तू ही बता, अभी मैं तेरी बहन के साथ बैडरूम में क्या करने वाला हूँ, तुझे पता है न। फिर भी तुझे तो बुरा नहीं लगेगा न? तो यार मेरी बहन की मर्ज़ी से कोई कुछ भी करे मैं बुरा क्यों मानूं।

समीर- तो मतलब आपकी बहन की मर्ज़ी से मैं अभी उसके साथ कुछ कर लूँ, तो आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा?

राजन- यार तू किसी भी लड़की की मर्ज़ी से उसके साथ कुछ भी कर। जब तक लड़की की मर्ज़ी से है, सब सही है। फिर वो मेरी बहन हो या तेरी।

इतना कह कर राजन ने बॉटम-अप किया और बैडरूम की तरफ चला गया। समीर वैसे ही नशे में था। आज उसने पहली बार पी थी। ऊपर से ये आखिरी में जीजाजी जो बोल गए थे वो उसके दिमाग में घूम रहा था और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस बात का वो क्या मतलब निकाले ‘फिर वो मेरी बहन हो या तेरी!’

तो क्या अगर मैं सोनिया की मर्ज़ी से उसे चोद दूँ तो जीजाजी को इस बात से भी फर्क नहीं पड़ेगा?

यही सब सोचते सोचते वो नेहा के कमरे की ओर चल पड़ा। मन तो उसने पूरा बना लिया था कि आज की रात वो नेहा को चोद ही देगा लेकिन अब जब बात मर्ज़ी की भी है तो ये सोचना भी ज़रूरी है कि उसको चुदाई के लिए कैसे राज़ी करें। एक तो ये पीने का बाद दिमाग वैसे ही धीरे काम कर रहा है।

 
अब तक आपने पढ़ा कि नेहा ने समीर से अपनी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही बढ़ा ली थीं। उधर सोनिया और राजन ने भी उसको पूरी छूट दे दी थी। समीर नेहा को अपने सारे राज़ बता चुका था और उसके साथ थोड़ी मस्ती भी हो गई थी। लेकिन अब वो सोने के लिए नेहा के कमरे में जा रहा था.

अब आगे…

आखिर समीर ने सब सोचना बंद करके सीधे बात करने की ठान ली। एक बात तो सच है कि शराब पीने के बाद दिमाग भले ही कम काम करे, लेकिन शायद इसी वजह से इंसान में हिम्मत बहुत आ जाती है क्योंकि दिमाग फिर बार-बार रोक-टोक नहीं करता।

समीर सीधे नेहा के रूम में गया और उसके बाजू में धड़ाम से जा कर लेट गया।

नेहा- क्या हुआ? एक ही पेग में चढ़ गई?

समीर- पता नहीं यार, पहली बार पी है तो समझना मुश्किल है कि चढ़ी या नहीं लेकिन इतना पक्का है कि तुम अभी तक दो तो दिखाई नहीं दे रही हो।

नेहा- हुम्म्म… मतलब ज़्यादा नहीं चढ़ी है।

समीर- अब यार कितनी चढ़ी है वो तो पता नहीं लेकिन अभी इतना दिमाग काम नहीं कर रहा कि तुमको सेक्स के लिए पटा पाऊं। सुबह से जो भी तुम इशारे कर रही हो उनसे ये तो समझ आ गया है कि करना तुम भी चाहती हो लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों सही से मूड नहीं बन पा रहा।

नेहा- तुम्हारा मलतब जैसा मूड फिल्म देखते समय बना था वैसा?

समीर- हुम्म्म!

इतना कह कर नेहा समीर के पास आ गई और उस से चिपक कर लेट गई। दरअसल समीर को नशे की वजह से इतनी हिम्मत तो मिल गई थी कि उसने सबकुछ साफ़ साफ़ बेझिझक कह दिया लेकिन उसी नशे की वजह से उसका सारा शरीर ही धीमा हो चुका था और वो कोई उत्तेजना महसूस नहीं कर पा रहा था। नेहा को चोदना चाहता तो था, और नेहा ने मना भी नहीं किया था लेकिन चोदने के लिए लंड भी तो खड़ा होना ज़रूरी था।

वैसे तो लंड को भी हिला के रगड़ के खड़ा किया जा सकता था। जैसे अलाउद्दीन के चिराग को रगड़ने से जिन्न निकल आता है वैसे ही लंड भी खड़ा किया जा सकता है, लेकिन फिर जिन्न को काम क्या दोगे? खम्बे पर चढ़ने और उतरने का? चुदाई की सबसे बड़ी समस्या जो लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर जाते हैं, वो यही है। लंड को उत्तेजित करना कोई बड़ी बात नहीं है, उस से ज़्यादा ज़रूरी है दिमाग़ को उत्तेजित करना।

कामशास्त्र का इतना ज्ञान समीर को तो नहीं था, लेकिन फिर भी उसकी सोच यही थी और वो समझ नहीं पा रहा था कि कमी किस बात की है? खुशकिस्मती से नेहा को इतना अनुभव हो गया था की वो समझ गई। उसने मामले को सही लाइन पर लाने के लिए विषय बदला।

नेहा- अच्छा ये बताओ कि दोपहर को जो तुम अपनी दीदी और अपनी कहानी सुना रहे थे वो आगे क्यों नहीं बढ़ी। तब भी ऐसा ही कुछ हुआ था क्या? सही मूड नहीं बन पाया?

समीर- नहीं यार, तब तो सारा टाइम मूड बना रहता था लेकिन हिम्मत नहीं हुई?

नेहा- किस बात के डर से हिम्मत नहीं हुई? कहीं दीदी मम्मी को न बता दे?

समीर- वो तो बाद की बात है। पहली बात तो यही है न की अगर दीदी को बुरा लग जाता, तो जो हमारा लुका-छिपी में खेल चल रहा था वो भी खत्म हो जाता। असली डर तो ये था।

नेहा- अच्छा मान लो अगर तुमको भरोसा हो जाए कि दीदी को बुरा नहीं लगेगा तो क्या तुम उनको चोद दोगे?

समीर- क्या बात है यार, तुम तो एकदम सीधे सीधे बोल देती हो।

नेहा- यार, सीधे बोलने से ही तो मूड बनता है न।

इतना कह कर नेहा ने समीर का लंड पकड़ कर हल्का सा दबा दिया। वो केवल ये देखना चाहती थी कि समीर कितना उत्तेजित हुआ है। अभी तक समीर का लंड थोड़ा बड़ा तो हो ही गया था लेकिन नेहा के छूने से थोड़ा कड़क भी हो गया।

नेहा- बताओ न?

समीर- अब यार… अब तो उनकी शादी हो गई है न और वो भी तुम्हारे भाई से तो अब मैं क्या बोलूं?

नेहा- अरे यार मुझसे क्या शर्माना, मैं कौन सी दूध की धुली हूँ?

समीर- अरे हाँ! दोपहर को तुमने बताया था। मुझसे तो सारी कहानी पूछ ली थी लेकिन खुद की कहानी नहीं बताई थी। अब तो पहले तुम बताओ।

नेहा- क्या बताऊँ यार, बता तो दिया था कि मैं भैया को नहाते हुए देखती थी। लेकिन तुम्हारे जैसा कुछ नहीं हुआ था हमारे बीच। मुझे कभी नहीं लगा कि उन्होंने कभी मुझे देखा हो।

समीर- हाँ लेकिन तुम्हारा कभी मन नहीं हुआ आगे कुछ करने का?

नेहा- होता तो था… भैया के लंड के बारे में सोच सोच के अपनी चूत में उंगली कर लिया करती थी।

नेहा के मुँह से ऐसी बात सुन कर समीर की आँखों में थोड़ी चमक आई और उसके लंड ने भी अंगड़ाई ली। उसने नेहा को अपनी बाँहों में ले कर कहा।

समीर- मतलब अगर तुमको मौका मिलता तो तुम अपने भाई से चुदवा लेतीं?

नेहा- मौका मिले, तो मैं तो अब भी चुदवा सकती हूँ। और तुम?

समीर- अब तक तो कभी हिम्मत नहीं हुई थी लेकिन अब अगर मौका मिला तो चोद दूंगा।

 
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