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Guest
नेहा-समीर एक बात पुछू?
समीर-हा कुछ भी पूछ सकती हो.
नेहा-क्या तुम्हारी गर्ल फ्रेंड है?
समीर-हा है।
नेहा-कौन है? और क्या तुमने सेक्स किया है?
समीर-मेरे कॉलेज में पढ़ती है दो साल से हम साथ है। मैं उससे सच्चा प्यार करता हु,और मैंने कभी भी सेक्स नही किया है
नेहा-क्या तुम सेक्स करना चाहते हो?
समीर-हा मैं सेक्स करना चाहता हु पर मेरी वाली मानती ही नही।हमने अब तक किस भी नही किया है वह बहुत धार्मिक खयालो वाली है वह अपना कौमार्य शादी के बाद सुहागरात को अपने पति को सौपना चाहती है और मैं उसकी भावनाओं का सन्मान करता हु
नेहा-क्या मेरे साथ सेक्स कर सकते हो?
समीर- अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम नही है तो मुझे क्या प्रॉब्लम है
इतना कह कर समीर पूरी तरह उत्तेजित हो गया और उसने अपने होंठ नेहा के होंठों से लगा दिए। समीर का ये पहला मुख-चुम्बन (फ्रेंच किस) था। मन से तो वो पहले ही उत्तेजित हो चुका था लेकिन नेहा के होंठों का स्पर्श जितना कोमल था उतना ही कठोर अब उसका लिंग हो गया था। नेहा अनुभवी थी, उसने धीरे से अपनी जीभ समीर के होंठों के बीच सरका दी। समीर को एक बिजली का झटका सा लगा और उसने नेहा का एक स्तन अपने हाथों से पकड़ लिया।
एक और दोनों की जीभें एक दूसरे से लिपटने को बेचैन हो रहीं थीं तो दूसरी और दोनों शरीर भी एक दूसरे के और करीब आ जाना चाहते थे। दोनों के बीच से वस्त्र जैसे अपने आप ही सरक कर अलग होते चले गए। समीर का एक हाथ नेहा के एक नग्न स्तन को मसल रहा था तो दूसरा उसे आलिंगन में लिए उसके नितम्बों पर फिसल रहा था। नेहा ने दोनों हाथों से समीर को अपने बाहुपाश में जकड़ा हुआ था।
नेहा एक हाथ से समीर के सर को पीछे से सहारा दे कर चुम्बन में व्यस्त थी। दूसरा हाथ समीर के नितम्बों के साथ खेल रहा था। कभी कभी उन्हें दबा कर नेहा अपनी नर्म जाँघों को समीर के कठोर लिंग से गुदगुदा भी रही थी।
चुम्बन इतना चुम्बकीय था कि दोनों को कुछ समय से ठीक से सांस लेने का मौका भी नहीं मिल पाया था। एक क्षण के लिए जब दोनों सांस लेने के लिए अलग हुए तो दोनों ने अपने सीने के ऊपरी हिस्से में सिमटे टी-शर्ट निकाल फेंके। अब दो पूर्णतः नग्न शरीर एक दूसरे में समा जाने के लिए फिर से मचलने लगे। कभी समीर ऊपर तो कभी नेहा। इस बार जब नेहा ऊपर आई तो उसने समीर के लिंग को अपनी उंगलियों से अपनी योनि का रास्ता दिखा दिया।समीर ने कसकर शॉट मारा उसका आधा लंड अंदर घुस गया नेहा के मुँह से हल्की चीख निकली क्यों कि समीर का लंड राजन से लंबा और मोटा था काफी कसा हुआ अंदर जा रहा था समीर ने पूरी ताकत से शॉट मारा और पूरा लंड अंदर डाल दिया नेहा की चीख निकल गयी पर चुत गीली होने से ज्यादा तकलीफ नही हुई और रोज की चुदाई की वजह से उसे लंड लेने में ज्यादा आसानी हो गई
समीर तो जैसे स्वर्ग की सैर पर निकल गया हो। उसका लिंग आज नेहा की कोमल और चिकनी, रसीली योनि में फिसल रहा था। जल्दी ही वो इस नयी चुत के अहसास की अनुभूति में डूब कर नेहा की चूत में हिचकोले खाने लगा। कभी वो नेहा के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर कर सहलाता तो कभी एक हाथ की उंगलियाँ उसके नितम्बों को सहलातीं और दूसरे से वो नेहा का एक स्तन पकड़ कर उसका रास पीता।
न तो नंगे जिस्मों की मस्ती रुकी और न चुदाई का इंजिन रुका। आज दिन में ही हस्तमैथुन कर लेने के कारण और शायद नशे की खुमारी की वजह से भी वो काफी देर तक नेहा को चोदता रहा और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। नेहा भी झड़ गई थी लेकिन एक बार से उसका क्या होना था। उसने तुरंत पोजीशन बदली और अब समीर के चुम्बन के लिए नेहा के दूसरे होंठ उसके सामने थे।
दोनों अब भी एक दूसरे से वैसे ही नंगे लिपटे थे बस फर्क ये था कि अब वो दोनों एक दूसरे के होठों को नहीं बल्कि एक दूसरे के गुप्तांगों को चूम रहे थे। समीर ने आज न केवल नेहा की चूत को चूमा था बल्कि पहली बार उसने अपने ही वीर्य का स्वाद भी चखा था। इन सब के साथ नेहा ने इस निपुणता से समीर के लंड को चूसा दो मिनट में वो वापस फौलाद का लंड बन गया और एक बार फिर समीर के इंजिन का पिस्टन फुल स्पीड पर चल पड़ा।
अभी तक तो नेहा बस एक बार ही झड़ी थी लेकिन इस बाद तो उसके झड़ने की कोई गिनती ही नहीं थी। समीर उसे चोदता रहा और वो झड़ती रही। एक के बाद एक जैसे झड़ने की झड़ी लगी हो। इतना मज़ा तो उसे उसके भाई के साथ भी कभी नहीं आया था। आखिर जब समीर झड़ा तो उसने अपनी कमर उत्तेजना में ऊपर उठा दी और नेहा उसके ऊपर निढाल पड़ी रही। समीर का लंड उसकी चूत में फव्वारे पर फव्वारे छोड़ रहा था और नेहा की चूत उसके लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई स्ट्रॉ से जूस चूसता है।
इन सब में कब सारी रात निकल गई थी पता ही नहीं चला। लेकिन जब दोनों की सांस में सांस आई तो समीर ने कहा।
समीर-तुम तो बहुत मस्त सेक्स करती हो मजा आया तुम्हे तो काफी एक्सपीरियंस होगा सेक्स का.
नेहा-अपने भैया भाभी का करते हुये देखकर सिख गयी कभी कभी उंगली कर लेती हूं.
(समीर मन मे साली मुझे चुतिया समझती है साली खूब खेली खाई है चुत का भोसड़ा हुआ पड़ा है पर मुझे क्या चुतिया बनने में भी अपना मजा है चाहे किससे भी चुदती फिरे मुझे क्या मेरा तो काम बन गया मैं पहले ही अपनी गर्ल फ्रेंड को बहुत बार चोद चुका हूं और माँ को भी जब चाहे चोदता हु फिर भी फ्री में चोदने को कोई भी चलेगी)
प्रकट में “ओह यह बात है”
और दोनों वैसे ही नींद के आगोश में खो गए।
समीर-हा कुछ भी पूछ सकती हो.
नेहा-क्या तुम्हारी गर्ल फ्रेंड है?
समीर-हा है।
नेहा-कौन है? और क्या तुमने सेक्स किया है?
समीर-मेरे कॉलेज में पढ़ती है दो साल से हम साथ है। मैं उससे सच्चा प्यार करता हु,और मैंने कभी भी सेक्स नही किया है
नेहा-क्या तुम सेक्स करना चाहते हो?
समीर-हा मैं सेक्स करना चाहता हु पर मेरी वाली मानती ही नही।हमने अब तक किस भी नही किया है वह बहुत धार्मिक खयालो वाली है वह अपना कौमार्य शादी के बाद सुहागरात को अपने पति को सौपना चाहती है और मैं उसकी भावनाओं का सन्मान करता हु
नेहा-क्या मेरे साथ सेक्स कर सकते हो?
समीर- अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम नही है तो मुझे क्या प्रॉब्लम है
इतना कह कर समीर पूरी तरह उत्तेजित हो गया और उसने अपने होंठ नेहा के होंठों से लगा दिए। समीर का ये पहला मुख-चुम्बन (फ्रेंच किस) था। मन से तो वो पहले ही उत्तेजित हो चुका था लेकिन नेहा के होंठों का स्पर्श जितना कोमल था उतना ही कठोर अब उसका लिंग हो गया था। नेहा अनुभवी थी, उसने धीरे से अपनी जीभ समीर के होंठों के बीच सरका दी। समीर को एक बिजली का झटका सा लगा और उसने नेहा का एक स्तन अपने हाथों से पकड़ लिया।
एक और दोनों की जीभें एक दूसरे से लिपटने को बेचैन हो रहीं थीं तो दूसरी और दोनों शरीर भी एक दूसरे के और करीब आ जाना चाहते थे। दोनों के बीच से वस्त्र जैसे अपने आप ही सरक कर अलग होते चले गए। समीर का एक हाथ नेहा के एक नग्न स्तन को मसल रहा था तो दूसरा उसे आलिंगन में लिए उसके नितम्बों पर फिसल रहा था। नेहा ने दोनों हाथों से समीर को अपने बाहुपाश में जकड़ा हुआ था।
नेहा एक हाथ से समीर के सर को पीछे से सहारा दे कर चुम्बन में व्यस्त थी। दूसरा हाथ समीर के नितम्बों के साथ खेल रहा था। कभी कभी उन्हें दबा कर नेहा अपनी नर्म जाँघों को समीर के कठोर लिंग से गुदगुदा भी रही थी।
चुम्बन इतना चुम्बकीय था कि दोनों को कुछ समय से ठीक से सांस लेने का मौका भी नहीं मिल पाया था। एक क्षण के लिए जब दोनों सांस लेने के लिए अलग हुए तो दोनों ने अपने सीने के ऊपरी हिस्से में सिमटे टी-शर्ट निकाल फेंके। अब दो पूर्णतः नग्न शरीर एक दूसरे में समा जाने के लिए फिर से मचलने लगे। कभी समीर ऊपर तो कभी नेहा। इस बार जब नेहा ऊपर आई तो उसने समीर के लिंग को अपनी उंगलियों से अपनी योनि का रास्ता दिखा दिया।समीर ने कसकर शॉट मारा उसका आधा लंड अंदर घुस गया नेहा के मुँह से हल्की चीख निकली क्यों कि समीर का लंड राजन से लंबा और मोटा था काफी कसा हुआ अंदर जा रहा था समीर ने पूरी ताकत से शॉट मारा और पूरा लंड अंदर डाल दिया नेहा की चीख निकल गयी पर चुत गीली होने से ज्यादा तकलीफ नही हुई और रोज की चुदाई की वजह से उसे लंड लेने में ज्यादा आसानी हो गई
समीर तो जैसे स्वर्ग की सैर पर निकल गया हो। उसका लिंग आज नेहा की कोमल और चिकनी, रसीली योनि में फिसल रहा था। जल्दी ही वो इस नयी चुत के अहसास की अनुभूति में डूब कर नेहा की चूत में हिचकोले खाने लगा। कभी वो नेहा के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर कर सहलाता तो कभी एक हाथ की उंगलियाँ उसके नितम्बों को सहलातीं और दूसरे से वो नेहा का एक स्तन पकड़ कर उसका रास पीता।
न तो नंगे जिस्मों की मस्ती रुकी और न चुदाई का इंजिन रुका। आज दिन में ही हस्तमैथुन कर लेने के कारण और शायद नशे की खुमारी की वजह से भी वो काफी देर तक नेहा को चोदता रहा और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। नेहा भी झड़ गई थी लेकिन एक बार से उसका क्या होना था। उसने तुरंत पोजीशन बदली और अब समीर के चुम्बन के लिए नेहा के दूसरे होंठ उसके सामने थे।
दोनों अब भी एक दूसरे से वैसे ही नंगे लिपटे थे बस फर्क ये था कि अब वो दोनों एक दूसरे के होठों को नहीं बल्कि एक दूसरे के गुप्तांगों को चूम रहे थे। समीर ने आज न केवल नेहा की चूत को चूमा था बल्कि पहली बार उसने अपने ही वीर्य का स्वाद भी चखा था। इन सब के साथ नेहा ने इस निपुणता से समीर के लंड को चूसा दो मिनट में वो वापस फौलाद का लंड बन गया और एक बार फिर समीर के इंजिन का पिस्टन फुल स्पीड पर चल पड़ा।
अभी तक तो नेहा बस एक बार ही झड़ी थी लेकिन इस बाद तो उसके झड़ने की कोई गिनती ही नहीं थी। समीर उसे चोदता रहा और वो झड़ती रही। एक के बाद एक जैसे झड़ने की झड़ी लगी हो। इतना मज़ा तो उसे उसके भाई के साथ भी कभी नहीं आया था। आखिर जब समीर झड़ा तो उसने अपनी कमर उत्तेजना में ऊपर उठा दी और नेहा उसके ऊपर निढाल पड़ी रही। समीर का लंड उसकी चूत में फव्वारे पर फव्वारे छोड़ रहा था और नेहा की चूत उसके लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई स्ट्रॉ से जूस चूसता है।
इन सब में कब सारी रात निकल गई थी पता ही नहीं चला। लेकिन जब दोनों की सांस में सांस आई तो समीर ने कहा।
समीर-तुम तो बहुत मस्त सेक्स करती हो मजा आया तुम्हे तो काफी एक्सपीरियंस होगा सेक्स का.
नेहा-अपने भैया भाभी का करते हुये देखकर सिख गयी कभी कभी उंगली कर लेती हूं.
(समीर मन मे साली मुझे चुतिया समझती है साली खूब खेली खाई है चुत का भोसड़ा हुआ पड़ा है पर मुझे क्या चुतिया बनने में भी अपना मजा है चाहे किससे भी चुदती फिरे मुझे क्या मेरा तो काम बन गया मैं पहले ही अपनी गर्ल फ्रेंड को बहुत बार चोद चुका हूं और माँ को भी जब चाहे चोदता हु फिर भी फ्री में चोदने को कोई भी चलेगी)
प्रकट में “ओह यह बात है”
और दोनों वैसे ही नींद के आगोश में खो गए।