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कामाग्नि complete

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इतना कह कर राजन चला गया। सोनिया ने समीर और नेहा को भी फ्रेश होने भेज दिया। इतने बेशरम तो हो ही गए थे कि अब साथ नहाने जा सकते थे। समीर का लंड तो वैसे ही सोनिया की ड्रेस देख कर खड़ा था, उसने नेहा को शॉवर में जी भर के चोदा फिर दोनों बाहर आ गए।

नेहा ने भी एक सेमी-ट्रांसपेरेंट टॉप और मिनी-स्कर्ट पहन ली थी। उसने खास तौर पर समीर को ललचाने के लिए अपनी स्कर्ट ऊपर करके दिखाई थी, कि उसने अन्दर पैंटी नहीं पहनी थी। उसकी टॉप देख कर तो कोई भी कह सकता था कि उसके अन्दर ब्रा भी नहीं थी।

सोनिया किचन में व्यस्त थी और नेहा-समीर बाहर टीवी देखने लगे। समीर से रहा ना, गया उसने नेहा को खड़ा किया और अपने शॉर्ट्स को नीचे और उसकी स्कर्ट को ऊपर किया। समीर ने अपने लंड पर थूक लगा कर एक बार में पूरा लंड नेहा की चूत में उतार दिया। एक दो धक्के लगाए ही थे कि नेहा ने रोक दिया।

नेहा- यार देखो! चोदना है तो फिर रुकना मत चाहे दीदी आये या भैया मैं फिर यहीं पूरी चुदाई करवाऊँगी। हिम्मत है तो चोदो, नहीं तो रहने दो।

समीर- लेकिन यार, तू इतनी सेक्सी लग रही है कि कण्ट्रोल नहीं हो रहा। एक काम करता हूँ, तू टीवी देख और जब तक खाना नहीं बनता, तब तक मैं किचन में दीदी से बात करता हूँ।

इतना कह कर समीर किचन में चला गया। सच कहें तो ये बस एक बहाना था। किचन में जाते ही समीर, सोनिया के पीछे जा कर खड़ा हो गया, फिर उसने अपने हाथ सोनिया की ड्रेस के सामने वाले हिस्से से अन्दर डाले और उसके दोनों स्तनों को अपने हाथों में पकड़ कर मसलने लगा। थोड़ी देर बाद उसने एक हाथ से सोनिया की ड्रेस थोड़ी ऊपर की और अपना पहले से तना हुआ गीला लंड सोनिया की चूत पर टिका दिया।

समीर- डाल दूँ?

सोनिया- क्या यार! पहली बार चोद रहे हो वो भी ऐसे। मैंने तो क्या क्या सपने देखे थे, कि भैया के साथ सुहागरात मनाऊँगी।

समीर- अरे यार! कल दोपहर से अब तक हम सब कुछ कर चुके हैं लेकिन बस चुदाई ही नहीं की; अब मुझ से रहा नहीं जा रहा।

सोनिया- अभी पता नहीं खुल्लम खुल्ला कितना चोद पाओगे। पता चला अधूरा छोड़ना पड़ा। अगर पकड़े गए तो और भी मज़ा किरकिरा होगा।

समीर- चिंता ना करो दीदी, नेहा को मैंने पटा लिया है। उसको हमारी चुदाई से कोई शिकायत नहीं होगी।

सोनिया- हाँ हाँ, पता है। वो तो खुद अपने भाई के नाम की उंगली करती है चूत में, उसे क्या शिकायत होगी। लेकिन छिप छिप कर अपने भाई से चुदवाने का मजा ही अलग है।

समीर- अभी कौन सा किसी के सामने चुदवा रही हो दीदी, अभी भी चुपके चुपके ही है। नेहा यहाँ नहीं आएगी, लेकिन आपको कैसे पता कि उसको अपने भाई से चुदवाना है?

सोनिया- मैंने देखा है उसे, चूत में उंगली करते हुए। भैया-भैया बडबड़ाती रहती है।

समीर- तो मिलवा दो ना प्यासे को कुँए से। इसी बहाने हमारा भी रास्ता साफ़ हो जाएगा।

सोनिया- आज रात पार्टी में कुछ जुगाड़ लगाते हैं। तुझे खुल्लम खुल्ला करने का शौक चढ़ा है ना…

इस बात पर दोनों बहुत उत्तेजित हो गए सोनिया पहले ही पीछे गर्दन घुमा कर बात कर रही थी, समीर भी थोड़ा झुका और अपनी बहन के होंठों से होंठ जोड़ दिए। दोनों की आँखें बंद हो गईं और जीभें कुश्ती लड़ने लगीं।

थोड़ी देर तक ऐसे तीव्र चुम्बन के बाद जब साँस लेने के लिए अलग हुए तो…

सोनिया- डाल दे… चोद दे अपनी बहन को यहीं पर…

इतना सुनते ही समीर ने एक धक्का दिया और सोनिया की चूत में लंड टिका कर चूत की गहराइयों में सरसराते हुये उतार दिया। उधर समीर ने सोनिया के चूचुकों को सहलाना और मसलना भी शुरू कर दिया था।

काफी देर तक समीर उसे ऐसे ही चोदता रहा। आखिर जब दोनों झड़ने की कगार पर थे, तो एक बार फिर दोनों के होंठ जुड़ गए। दोनों आनंद के अतिरेक पर सिसकारियां भर रहे थे लेकिन उनकी आवाजें अनके चुम्बन में घुट गई थीं… ऊम्म… उम्म्ह… अहह… हय… याह… आईईईई… ओह्ह!

आखिर झड़ते-झड़ते, सोनिया की चीख निकल ही गई। समीर के लंड ने इतना वीर्य छोड़ा था, कि सोनिया की चूत से बह निकला और दोनों का मिला जुला रस उसकी एड़ी तक जा पहुँचा था। इनकी आवाज़ बाहर नेहा तक जा पहुंची थी।

नेहा- क्या हुआ भाभी?… नेहा ने कमरे से ही चिल्लाते हुए पूछा।

समीर- कुछ नहीं! दीदी का हाथ जल गया था। मैंने जेली लगा दी है। ठीक हो जाएगा।

समीर ने तुरंत पेपर नैपकिन के रोल से एक हिस्सा लिया और सोनिया की एड़ी से लेकर उसकी चूत तक पोंछ दिया और फिर उसे सोनिया को दिखाते हुए जोर से सूंघा।

समीर- जेलीऽऽऽ!

वो धीरे से लेकिन संगीतमय अंदाज़ में बोला, और दोनों दबी दबी हँसी में हँस दिए.

जल्दी ही दोनों खाना लेकर डाइनिंग टेबल पर आये और सब खाना खाने लगे। नेहा इतना तो समझ गई थी कि सोनिया का हाथ नहीं जला था लेकिन उसने ये नहीं सोचा था कि समीर ने उसे चोद ही दिया होगा। अभी सबके दिमाग में जो चल रहा था वो बड़ा रोचक था।

आज शाम की पार्टी में राजन और नेहा कोशिश करने वाले थे कि वो समीर और सोनिया को चुदाई के लिए उकसाएं। दूसरी तरफ सोनिया और समीर, नेहा को राजन से चुदवाने की कोशिश करने वाले थे।

सोनिया तो जानती थी, कि राजन पहले से ही बहनचोद है लेकिन समीर की इच्छा पूरी करने के लिए, वो भी समीर के साथ, नेहा को राजन से चुदवाने में समीर की मदद करने वाली थी।

खाना खाते-खाते सब अपने मन ही मन शाम की योजना बनाने में लगे हुए थे। बातें बहुत ही कम हो रहीं थीं लेकिन ये तूफ़ान के पहले की शांति थी। वो तूफ़ान जो अभी सबके मन में था, और जल्दी ही बाहर आ कर इन चारों की ज़िन्दगी ही बदल देने वाला था।

 
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे समीर ने दिन में ही मौका देख कर अपनी बहन को चोद दिया था। उसे नेहा और राजन के रिश्ते के बारे में पता नहीं था इसलिए उसने सोनिया से ये वादा भी करवा लिया था कि वो अपने पति और उसकी बहन की चुदाई करवाने में समीर की सहायता करेगी।

अब आगे…

बाकी का दिन यूँ ही ख्यालों में गुज़र गया। नेहा ने तो हल्की फुल्की छेड़-छाड़ से मना कर दिया था, लेकिन जब भी समीर को मौका मिलता, तो सोनिया के उरोजों या नितम्बों को मसल देता, या फिर अपना लंड उसकी चूत में डाल के एक दो शॉट मार लेता। आखिर शाम हो गई और राजन पार्टी का सारा सामान लेकर आ गया। स्कॉच तो घर में रहती ही थी, तो लड़कियों के लिए वोड्का और साथ में खाने के लिए कुछ नमकीन वग़ैरा ले आया था।

राजन- देखो सोना, मैं तो अपनी तरफ से सब ले आया हूँ। तुम्हारी क्या तैयारी है?

सोनिया- यार, अब इतनी पार्टी-शार्टी करना है, तो खाना तो ज्यादा खाने का कोई मतलब ही नहीं है। तुम पिज़्ज़ा आर्डर कर दो, और फ्रेश हो जाओ, फिर करते हैं शुरू! बाकी सब तैयारी मैंने कर ली है।

राजन (धीरे से)- और कॉन्डोम्स? भाई-बहन की चुदाई में बच्चा होने का खतरा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

सोनिया- चिंता न करो, जब से हमारा प्लान बना था, नेहा और मैं दोनों ही गोलियां खा रही हैं।

राजन- वाओ यार! डॉक्टर मैं हूँ और मेरी बहन को गोलियां तुम खिला रही हो। गुड जॉब!

इतना कह कर राजन अंदर चला गया, पहले उसने पिज़्ज़ा आर्डर किया, फिर फ्रेश होने चला गया।

जब राजन फ्रेश होकर वापस आया, तो सब टीवी पर कोई कॉमेडी प्रोग्राम देख रहे थे, और खिलखिला कर हँस रहे थे। उसका ध्यान सोनिया की ड्रेस पर गया, वैसे तो उसका पूरा बदन लगभग ढका हुआ ही था, लेकिन उसका एक चूचुक (निप्पल) ड्रेस की पट्टियों से बाहर झाँक रहा था।

दरअसल ऐसा इसलिए हुआ था, क्योंकि पूरे दिन समीर इधर-उधर से आ कर मौका मिलते ही कुछ ना कुछ छेड़खानी कर रहा था, जिसकी वजह से सोनिया बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। उसकी चूत गीली और उसके चूचुक खड़े हो गए थे। इधर ठहाके लगा कर हँसने से ड्रेस हिल रही थी जिससे एक खड़ा हुआ कड़क चूचुक पट्टियों के बीच से बाहर निकल आया था।

राजन ने कुछ कहे बिना, सीधे आ कर उसको अपने होठों में दबा लिया। सोनिया अचानक से सकपका गई और नेहा-समीर का ध्यान भी उनकी ही तरफ चला गया। नेहा को तो जैसे तुरंत समझ आ गया और वो उनको देख कर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी।

सोनिया ने तुरंत राजन को हटाया और अपनी ड्रेस ठीक की- आप सच में बहुत बेशरम हो।

राजन- अब वो बेचारा इतनी मेहनत करके बाहर आया और कोई उसे चूमे भी नहीं? ये तो बड़ी नाइंसाफी हो जाती ना, इसमें बेशर्मी की क्या बात है?

सोनिया- ठीक है, ठीक है… रहने दो।

तभी पिज़्ज़ा आ गया। रात के कुछ नौ बजे होंगे; सब ने मिलकर फैसला किया कि पहले वहीं पिज़्ज़ा खा लेते हैं, फिर अंदर बेडरूम में जा कर पीने और ताश खेलने का कार्यक्रम शुरू करेंगे।

लेकिन ताश कैसे खेलना है वो अभी तय नहीं हुआ था, इसलिए पिज़्ज़ा खाते-खाते ही इस बात पर विचार-विमर्श होने लगा।

समीर- मुझे ताश खेलने का कोई अनुभव नहीं है इसलिए कोई आसान सा खेल होना चाहिए, जो मैं बिना अनुभव के भी खेल सकूँ।

राजन- सत्ती सेंटर कैसा रहेगा?

सोनिया- लेकिन जब तक कुछ दाव पर ना लगाया जाए मजा नहीं आएगा।

नेहा- लेकिन हमारे पास तो पैसे ही नहीं हैं, हम क्या लगा पाएंगे दाव पर।

समीर ने भी नेहा का साथ दिया। काफी बातें करने के बाद राजन ने आखिर एक हल निकाला।

राजन- एक काम करते हैं, सत्ती सेंटर ही खेलते हैं। दाव पर कोई कुछ नहीं लगाएगा लेकिन जीतने वाला हारने वालों से जो चाहे करवा सकता है। मतलब कोई भी टास्क। जैसे वो टीवी पर दिखाते हैं ना एक मिनट में कोई टास्क करने को बोलते हैं।

समीर- लेकिन खेलना कैसे है वो तो बता दो; मुझे तो कुछ भी नहीं आता।

राजन- अरे, बहुत सरल है, देखो! सबको बराबर पत्ते बाँट देते हैं फिर जिसको लाल-पान की सत्ती मिली हो वो उसको बीच में रख देता है और अगले की चाल आती है। उसके पास लाल-पान का अट्ठा या छक्की हो तो वो

इस सत्ती के ऊपर या नीचे रख सकता है। नहीं तो किसी और रंग की सत्ती बाजू में रख सकता है। और वो भी नहीं तो पास बोल दो। अगले वाले कि चाल आ जाएगी। सबसे पहले जिसके पत्ते ख़त्म हुए वो जीत गया समझो।

नेहा- फिर जिसके पास जितने पत्ते बचते हैं उनका जोड़ लगा कर नंबर मिलते हैं।

सोनिया- ठीक है। जिसको सबसे ज्यादा नंबर मिलेंगे उसको सबसे कठिन काम देंगे और सबसे कम नंबर वाले को आसान काम।

राजन- हम्म! और अगर किसी को टास्क नहीं करना हो, तो गेम छोड़ के जा सकता है। कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है; ठीक है?
 
तब तक पिज़्ज़ा भी खत्म होने को आ गया था, और खेल के नियम भी तय हो गए थे। सब लोग हाथ मुँह धो कर बैडरूम में पहुँच गए। लड़कियों ने अपने लिए पहले ही वोड्का मार्टिनी कॉकटेल बना कर रखा था; लड़कों ने अपने-अपने ग्लास में स्कॉच ऑन-द-रॉक्स ले ली। साथ में खाने के लिए सोनिया ने 3-4 तरह की चीज़ें बना रखी थीं, जो हर दो के बीच एक प्लेट में रखी हुई थीं। सबके ड्रिंक्स तैयार होने के बाद, सबने अपने-अपने ग्लास बीच में एक दूसरे से टकराए- चीयर्सऽऽऽ…!

राजन- टू द न्यू लाइफ स्टाइल!

ये बात समीर को कुछ समझ नहीं आई, लेकिन फिर उसने अपना ध्यान अपनी स्कॉच पर लगाने में ही भलाई समझी। सब ने एक एक घूँट पिया थोड़ा कुछ खाया और फिर राजन ने सबको पत्ते बाँट दिए। सबने पत्ते उठाए और जमाने लगे। लाल पान की सत्ती सोनिया को मिली थी। उसने पहली चाल चली, फिर मदिरा के घूँट और पत्तों की चाल चलती रही और 15 मिनट के अंदर सोनिया के सारे पत्ते खत्म हो गए।

सोनिया- बताओ किसको टास्क देना है… अब आएगा मजा।

राजन- एक मिनट… देखो सबसे ज्यादा नंबर नेहा के हैं, फिर समीर और आखिर में मैं।

सोनिया ने समीर की तरफ देख कर आँखों ही आँखों में इशारा किया “कर दूँ” और समीर ने भी हामी भर दी।

फिर क्या था…

सोनिया- एक मिनट के लिए, समीर नेहा के बूब्स दबाएगा…

राजन- अरे, लेकिन टास्क तो नेहा को देना है न, और मेरा क्या?

सोनिया- बड़ी जल्दी पड़ी है खुद के टास्क की? सुन तो लो… और नेहा राजन को किस करेगी।

राजन- ये क्या बात हुई। नेहा को ये टास्क न करना हो तो?

सोनिया- तो नेहा गेम छोड़ सकती है। क्यों नेहा?

नेहा- कोई और ये टास्क देता तो मैं शायद आपकी तरफ देखती, लेकिन आपने ही दिया है तो ठीक है, मैं कर लूंगी।

नेहा उठकर राजन के पास गई और उसके होठों से होंठ लड़ा दिए। समीर ने भी पीछे से उसके स्तनों को टी-शर्ट के ऊपर से मसलना शुरू कर दिया। पहले तो नेहा के होंठ पास राजन के होंठों पर रखे थे लेकिन जल्दी ही दोनों के होंठ खुल गए और जीभें आपस में अठखेलियाँ करने लगीं। ऐसा लग रहा था जैसे जीभों की कबड्डी चल रही हो और होंठ बीच की लाइन हों।

कभी नेहा जल्दी से जीभ बाहर निकाल कर राजन के होंटों को छू जाती तो कभी राजन नेहा के होंठों को चाट लेता। इस कबड्डी में कभी-कभी दोनों जीभें एक साथ निकल कर एक दूसरे से भिड़ भी जातीं।

इस सब में एक मिनट कब बीत गया पता ही नहीं चला। आखिर सोनिया के कहने पर उनको होश आया कि अब किस करने की ज़रुरत नहीं हैं।

सोनिया- नेहा! मजा आया?

नेहा- क्या भाभी आप भी! पहले खुद टास्क देती हो, और फिर खुद मज़े लेती हो।

सोनिया- वो इसलिए कि मैंने किस करने को कहा था, फ़्रेंच किस करना है ऐसा तो नहीं बोला था…

इतना कह कर सोनिया ने आँख मारी; समीर और सोनिया ठहाका मार कर हँस पड़े। नेहा सकुचा कर रह गई। मन ही मन उसने सोचा कि मेरी बारी आने दो भाभी, फिर देखो मैं क्या करती हूँ।

शायद किस्मत ने नेहा के मन की बात सुन ली और अगला राउंड वही जीत गई। इससे भी बड़ी बात ये हुई कि सबसे ज्यादा पत्ते सोनिया के बचे थे। दूसरे नंबर पर राजन और तीसरे पर समीर था।

नेहा- देखा! सबका दिन आता है भाभी!

सोनिया- ठीक है यार! बता क्या करना है।

नेहा- वही, जो आपने मुझसे कराया था। भैया आपके बूब्स दबाएंगे और आप अपने भाई को किस करोगी… फ़्रेंच किस!

राजन नेहा की बात सुन कर मुस्कुरा दिया। सोनिया ने भी राजन को देख कर एक स्माइल दी और समीर के पास चली गई। नेहा ने राजन के साथ फ़्रेंच किस ज़रूर किया था, लेकिन उसे पकड़ा नहीं था। सोनिया ने समीर को अपनी बाहों में लेकर उसके सर को पीछे से सहारा दे कर बड़े ही कामूकतायुक्त अंदाज़ में किस करना शुरू किया। उनके होंठ एक बार जो जुड़े कि फिर अलग नहीं हुए। दोनों की आँखें भी बंद थीं।

अंदर उनकी जीभें कैसी कुश्ती लड़ रहीं थीं, ये बस उनको ही पता था। बाहर से उनकी जीभे तो नहीं दिखाई दे रहीं थीं.

लेकिन नेहा को समीर के हाथ, सोनिया की कमर सहलाते हुए साफ़ नज़र आ रहे थे। हाथ भले ही उसकी ड्रेस के ऊपर थे, लेकिन उंगलियाँ उन पट्टियों के बीच से उसकी नंगी कमर सहला रहीं थीं। कुछ देर बाद तो उत्तेजना में समीर ने ड्रेस को थोड़ा ऊपर करके अपने दोनों हाथ सोनिया के नग्न नितम्बों पर रख दिए।

लेकिन तभी नेहा चिल्लाई- हो गया एक मिनट, हो गया।

सब अपनी अपनी जगह पर वापस चले गए।

नेहा- क्यों समीर, बड़ा मजा आ रहा था अपनी बहन के साथ। बहुत हाथ चल रहे थे?

समीर- मेरी बारी आने दो, फिर देखता हूँ, तुम क्या-क्या कंट्रोल करती हो।
 
खेल फिर शुरू हुआ, खाली जाम फिर से भर दिए गए। शराब और शवाब दोनों की खुमारी बढ़ती जा रही थी।

खेल खत्म हुआ और राजन जीत गया। सबसे ज्यादा पत्ते समीर के निकले, उसके बाद सोनिया और नेहा के।

नेहा- ये लो, आ गया तुम्हारा नंबर। टास्क, देने का तो पता नहीं, ले ही लो। ही ही ही…

राजन- ठीक है मस्ती कुछ ज्यादा हो गई। अब सिंपल टास्क। समीर तुम अपनी शर्ट निकालो और सोना- नेहा तुम दोनों इसका एक-एक निप्पल चूसो।

समीर- इतना सिंपल भी नहीं है, लेकिन फिर भी ठीक है।

समीर ने शर्ट निकाल दी, नेहा और सोनिया उसके दोनों तरफ आ कर बैठ गईं। दोनों ने समीर के चूचुकों पर अपनी जीभ फड़फड़ाना शुरू किया। अभी कुछ ही सेकंड हुए थे कि नेहा ने सोनिया को आँख मार कर नीचे की तरफ इशारा किया। सोनिया ने देखा, कि नेहा ने अपना हाथ, समीर के शॉर्ट्स के ऊपर से ही, उसके लंड पर रख दिया है, और उसे सहला रही है। ये देख कर सोनिया मुस्कुरा दी, और नेहा भी।

एक मिनट होते होते समीर के लंड ने उसके शॉर्ट्स में तम्बू खड़ा कर दिया था। जब ये दोनों अलग हुईं तो नेहा ने सबको वो तम्बू दिखाया और सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।

अगली पारी के लिए पत्ते बांटे जाने लगे।

समीर- नेहा! अब देख तू! अभी नहीं तो कभी तो मेरी बारी आएगी। जब भी आएगी मैं भी ऐसे ही हँसूँगा।

किस्मत को भी शायद समीर की झुंझलाहट पर दया आ गई। इस बार उसे अच्छे पत्ते मिले और अब तक खेल खेल कर, वो इस खेल की बारीकियां भी समझ गया था। वो अच्छे से खेला और जीत गया। और तो और, इस बार सबसे ज्यादा पत्ते नेहा के ही बचे थे, उसके बाद राजन और सोनिया का नंबर था।

समीर- अब आई ऊँटनी पहाड़ के नीचे… निकाल अपनी शर्ट।

नेहा- मैं लड़की हूँ यार! ऐसे कैसे?

समीर- वैसे भी, सब तो दिख रहा है। इतनी शर्मीली होतीं तो ऐसा शर्ट पहनतीं क्या?

नेहा- अब यार ऊपर वाले ने इतने मस्त बूब्स दिए हैं तो क्यों छिपाना।

समीर- फिर अच्छे से ही दिखाओ ना, और दीदी-जीजा जी तुम्हारे निप्पल चूसेंगे।

नेहा- नहींऽऽऽ…! नेहा फ़िल्मी स्टाइल में दोनों कान पर हाथ रख कर चीखी।

नेहा ने शर्ट निकाल दिया और राजन-सोनिया उसके निप्पल चूसने लगे। जैसे ही एक मिनट होने वाला था समीर ने सोनिया का हाथ दबा कर इशारा किया और सोनिया ने एक उंगली जल्दी से नेहा की स्कर्ट में डाल दी। नेहा ने अंदर कुछ पहना तो था नहीं, तो उंगली सीधी चूत में चली गई।

इस से पहले नेहा कुछ समझ पाती, समीर ने बोल दिया कि एक मिनट हो गया।

सोनिया ने नेहा की चूत के रस से भीगी उंगली समीर को दिखाई। समीर ने सोनिया का हाथ पकड़ा और नेहा को दिखाते हुए सोनिया की उंगली चूस ली। नेहा ने मुस्कराहट बिखेर के समीर की जीत में भी अपनी ख़ुशी जाहिर की। समीर अपनी जीत और नेहा को गीला कर देने से इतना खुश था, कि अगले गेम में उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और हार गया। इस बार फिर राजन जीता था।

राजन- लगता है मेरी किस्मत में साला ही लिखा है। पिछली बार सिम्पल टास्क दे दिया था लेकिन अब नहीं दूँगा। एक काम करो तुम अपने शॉर्ट्स निकालो।

सोनिया- नहीं!… सोनिया बनावटी शर्म दिखाते हुए अपना चेहरा अपने हाथों से ढक कर बोली।

राजन- तुमको बहुत शर्म आ रही है ना, तुम उसे किस करो फिर तुमको नीचे देखने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी; और नेहा तुम! तुमको बड़ा मजा आ रहा था ना पिछली बार, उसका लंड सहलाने में? अब आराम से नंगा लंड सहलाओ।

समीर ने अपने शॉर्ट्स निकाले और सोनिया ऐसे ही अपना चेहरा ढके हुए उसके पास गई। पास जा के उसने हाथ हटाए और समीर को आँख मार दी। इधर नेहा ने समीर का लंड मुठियाना शुरू कर दिया, उधर सोनिया का चुम्बन पिछली बार से और ज्यादा प्रगाढ़ था। दोनों आँखें बंद किये अपने चुम्बन में खोये हुए थे लेकिन सोनिया इस चुम्बन में समीर की प्रतिक्रियाओं से ही महसूस कर पा रही थी कि नीचे नेहा क्या कर रही है।

समीर ने भी पीछे से सोनिया की ड्रेस में हाथ डाल कर उसके नितम्बों को सहलाना शुरू कर दिया था। ये हरकत राजन तो नहीं देख पा रहा था लेकिन नेहा की तिरछी नज़रें साफ देख पा रहीं थीं। नेहा ने मुठ मारना इतना तेज़ कर दिया कि एक पल तो समीर को लगा कि वो झड़ जाएगा क्योंकि तीन लोगों के सामने नंगे हो कर अपनी बहन के साथ ऐसे चुम्बन का उसका ये पहला अनुभव था और उस पर ये नेहा का हस्तमैथुन।

लेकिन इस से पहले कि कुछ होता, एक मिनट पूरा हो गया।

राजन- मेरा एक सुझाव है गेम को छोटा कर दिया जाए। ऐसा लग रहा है कि सबको खेल में कम और टास्क में ज्यादा दिलचस्पी है तो हम केवल तीन पत्ते देते हैं और उनके नंबर के हिसाब से टास्क देते हैं।
 
सब को राजन का सुझाव सही लगा, लेकिन जब पत्ते बांटे गए तो पता चला राजन ही हार गया। सोनिया ये बाज़ी जीत गई थी।

सोनिया- राजन! तुमने मेरे भाई को नंगा किया, अब तुम्हारी बारी है। समीर तुम इनका शर्ट निकालो और नेहा तुम अपने भाई की चड्डी खिसकाओ।

समीर ने तो राजन का शर्ट निकाल दिया लेकिन जब नेहा ने अपने भाई के शॉर्ट्स नीचे खिसकाए तो उसके टाइट शॉर्ट्स में से उसका तना हुआ लंड स्प्रिंग की तरह निकल कर नेहा के चेहरे पर लगा। इस पर सोनिया और समीर अपनी हँसी रोक न पाए।

अगले राउंड में नेहा जीती और सोनिया हार गई।

नेहा- भाभी! बहुत देर बाद पकड़ में आई हो… कब से मस्ती चालू है आपकी… बहुत मज़े ले लिए सबके अब आपकी बारी है।

सोनिया- यही तो इस गेम का उसूल है। मैं तुम्हारे मज़े नहीं लेती, तो तुमको मेरे मज़े लेने में, मजा कैसे आता?

नेहा- ठीक है, ठीक है! पहले तो आप अपनी ड्रेस निकालो। सबको नंगा करके खुद को महारानी समझ रही हो। भैया! आप भाभी की चूत चाटो और समीर तुम किस कर लो।

सोनिया तो वैसे भी दिन भर से खुद को नंगी ही महसूस कर रही थी। उसने एक सेकंड में अपनी ड्रेस निकाल दी और राजन की तरफ चूत करके बैठ गई। उसके घुटने मुड़े हुए थे और वो अपनी कोहनियों के बल आधी लेटी हुई थी। राजन नीचे झुक के सोनिया की चूत चाटने लगा और समीर घुटनों और हाथों के बल किसी घोड़े की तरह चलता हुआ सोनिया को किस करने पहुंचा।

समीर, सोनिया को किस कर ही रहा था कि नेहा ने चुपके से समीर का लंड ऐसे मुठियाना शुरू किया जैसे कोई गाय का दूध निकालता है। समीर कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया। उसने एक हाथ से सोनिया का एक स्तन मसलना शुरू किया और अपना चुम्बन तोड़ कर दूसरे स्तन के चूचुक को चूसने लगा।

नेहा को लगा समीर कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो रहा है तो उसने उसे छेड़ने के लिए बोल दिया कि एक मिनट हो गया; सब वापस अपनी जगह बैठ गए।

नेहा- तुमसे किस करने को बोला और तुम तो निप्पल ही चूसने लग गए… इतने पसंद आ गए अपनी बहन के बूब्स?

नेहा ने समीर को छेड़ने के अंदाज़ में कहा।

समीर- क्या करता, तुम तो मुझे गाय समझ के मेरे लंड से ही दूध निकालने लग गईं थीं। सोचा थोड़ा अपनी बहन का दूध पी लूँ, ताकि तुमको थोड़ी मलाई ही मिल जाए।

नेहा को इस बात पर थोड़ी हँसी आ गई लेकिन उसने हँसी दबाते हुए मुस्कुरा कर अपनी आँखें नीची कर लीं।

लेकिन बाकी सबने हँसी रोकने की ऐसी कोई कोशिश नहीं की।

अगले राउंड में समीर जीता और नेहा हार गई। समीर को तुरंत मौका मिल गया नेहा के मज़े लेने का।

समीर- सबसे पहले तो ये स्कर्ट निकालो। सबको नंगा करके अब क्या तुमको रानी बनना है?

समीर ने ऐसा कहने के बाद सोनिया की तरफ देखते हुए गर्दन हिलाई, जैसे इशारे में कह रहा हो, कि मैंने आपका बदला ले लिया। सोनिया ने भी इसका जवाब अपना सर हिलाते हुए मुस्कुरा कर दिया।

समीर- दीदी! आप इसके बूब्स के साथ खेलो और जीजाजी आप अपनी बहन की चूत चाटो।

सोनिया- नहीं यार! भाई बहन हैं। थोड़ा आराम से खेलो, इतना फ़ास्ट मत जाओ।

समीर- ठीक है, तो आप अपने टास्क अदला-बदली कर लो।

अब नेहा उस ही स्थिति में थी जैसे थोड़ी देर पहले सोनिया आधी लेटी हुई थी। इस बार सोनिया अपनी ननद की चूत चाट रही थी और नेहा का भाई उसके बगल में घुटनों के बल खड़ा हो कर अपनी बहन के स्तनों के साथ खेल रहा था। कभी वो उनको उंगलियों से धक्का दे कर हिलता तो कभी चूचुकों को उमेठ देता। घुटनों को बल खड़े होने की वजह से उसका लंड भी नेहा के स्तनों के पास ही था।

नेहा ने अपने एक हाथ से अपने भाई के लंड को पकड़ कर अपने स्तन पर मारना शुरू कर दिया। समीर नेहा की इस हरकत से बड़ा उत्तेजित हो गया और अपनी बहन के नंगे नितम्बों को सहलाने लगा; ना केवल हाथों से, बल्कि अपने गालों से भी वो सोनिया की तशरीफ़ सहला रहा था। उसे उसकी बहन की चूत की खुशबू मदमस्त कर रही थी।

उधर नेहा ने भी जब समीर को ऐसा करते देखा तो अपने भाई का लंड मुँह में ले लिया लेकिन तब तक एक मिनट हो चुका था; सब लोग वापस अपनी जगह पर आ गए।

इस बार राजन जीता और नेहा हारी।

राजन- अब ये एक मिनट का प्रतिबंध, मजा कम और सजा ज़्यादा लग रहा है। अब ये आखिरी टास्क है, इसके बाद जिसको जो करना है कर सकता है। ठीक है?

सबको राजन का प्रस्ताव पसंद आया और सबने हामी भर दी।
 
राजन- ठीक है, आज शाम को नेहा ने हमको अपनी चुदाई दिखाने का आमंत्रण दिया था, तो अब यही उसका टास्क है। रही बात सोनिया की तो अभी मैंने देखा समीर बड़ा व्याकुल हो रहा था तुम्हारी चूत चाटने के लिए, तो तुम जा कर अपने भाई से अपनी चूत चटवाओ।

इतना सुनते ही नेहा ने समीर को धक्का दे कर उसे लेटा दिया और खुद उसके खड़े लंड पर जा कर बैठ गई।

सोनिया भी समीर के सर के दोनों तरफ घुटनों के बल खड़ी हो गई। सोनिया ने अपने घुटनों को इतना मोड़ा कि उसकी चूत उसके भाई के मुँह को छूने लगे और फिर बाक़ी का काम समीर की जीभ ने सम्हाल लिया।

तब तक नेहा ने भी समीर का लंड अपनी चूत में डाल कर उस पर उछलना शुरू कर दिया था।

राजन भी जल्दी ही वहीं बाजू में आ कर घुटनों के बल खड़ा हो गया और अपनी बहन और बीवी को अपनी बाहों में ले लिया। नेहा ने अब उछलने की बजाए अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था। नेहा और सोनिया दोनों के एक-एक स्तन राजन के सीने से दबे हुए थे। तीनों पास आये और एक त्रिकोणीय चुम्बन में रम गए।

तीनों की जीभें और होंठ आपस में ऐसे गुँथ गए थे जैसे कुश्ती में पहलवान आपस भी भिड़ जाते हैं।

थोड़ी देर बाद चुम्बन टूटा लेकिन ज़्यादा समय के लिए नहीं क्योंकि अब राजन पूरा खड़ा हो गया था, और उसका लंड नेहा और सोनिया के होंठों के बीच में था। ननद-भोजाई मिल कर अपने भैया-सैंया का लंड एक साथ चूसने-चाटने लगीं। कभी कभी दोनों के होंठ या जीभ एक दूसरे को छू जाती, तो अपने आप दोनों के चेहरे पर एक मुस्कुराहट खिल जाती।

नेहा ने जब देखा कि उसके भाई का लंड चट्टान बन चुका है तो वो समीर के लंड पर से उठ गई। उसने बहुत घुड़सवारी कर ली थी, अब वो खुद, अपने भाई के लिए घोड़ी बन कर खड़ी हो गई।

नेहा- भाभी! दोनों लंड अब चुदाई के लिए तैयार हैं। अब आप भी भाई चोद बन ही जाओ।

सोनिया ने एक झटके में अपना आसन बदल लिया और उसकी चूत उसके भाई के मुँह से हट के लंड पर आ टिकी। उसने अपने भाई का लंड अपनी चूत पर ठीक से जमाया और सट्ट से बैठ गई। उसकी चूत ने भी समीर का लंड गप्प से अन्दर ले लिया।

उधर समीर ने देखा कि राजन भी अपना लंड अपनी बहन की चूत पर रगड़ रहा है। इधर सोनिया ने भी उछल-उछल कर चुदाई शुरू कर दी। समीर ने नेहा की तरफ देखा तो उसके चेहरे के भावों से ही पता चल गया कि राजन ने भी अपनी बहन की चूत में लंड उतार दिया है।

नेहा- तुम जानना चाहते थे ना, कि वो कौन था, जिसने मुझे पहली बार चोदा था? ये ही थे, मेरे राजन भैया; और तुम्हारी दीदी ने ही चुदवाया था मुझे इनसे।

सोनिया- अब यार, ये समीर को तो इतने साल लग गए मेरी चुदाई तक आने में, सोचा तब तक तुम्हारी चुदाई देख कर ही खुश हो लूँ?

समीर- दीदी! …आप? …कब से?

सोनिया- जब से तुझे बाथरूम में शो दिखाना शुरू किया था तब से, भोंदू!

तब तक दोनों भाई-बहन के जोड़ों की चुदाई भी ज़ोर पकड़ चुकी थी। समीर इन नई-नई बातों से और भी उत्तेजित हो गया था। उसने सोनिया को खींच कर अपने सीने से लगा लिया। सोनिया के स्तनों की नरमाहट और चूत की गर्माहट ने समीर को इतनी ताकत दी, कि वो पूरी रफ़्तार से लंड उछाल-उछाल कर नीचे से ही अपनी बहन चोदने लगा।

नेहा ने भी उसका जोश बढ़ाया- चोद, भेनचोद! चोद अपनी बहन को; पता नहीं कब से तेरे लंड की प्यासी है तेरी बहन की चूत; आज बुझा दे इसकी प्यास।

इन सब बातों ने समीर और सोनिया को इतना उत्तेजित कर दिया कि दोनों भाई-बहन ज़ोर से झड़ने लगे “आँ… आँ… आँ… आँ… उम्मम्मम… आहऽऽऽ…!”

समीर इतनी ज़ोर की चुदाई के बाद बिल्कुल बेदम हो गया था। सोनिया भी उसके ऊपर निढाल पड़ी हुई थी। समीर उसकी पीठ और नितम्ब सहला रहा था।

इस तरह भाई से बहन ने अपनी चूत की चुदाई करवा ली. थोड़ी देर बाद जब जान में जान आई तो सोनिया उठी और देखा कि नेहा उसे इशारे से बुला रही थी।

वो नेहा के पास गई, और नेहा उसकी चूत चाटने लगी। सोनिया की चूत से अब तक उसके भाई का वीर्य निकल रहा था; नेहा सब चाट गई। उधर समीर ने भी सोनिया से अपना लंड चटवा के साफ़ करा लिया।

समीर और सोनिया अब नेहा और राजन का उत्साह बढ़ाने लगे। सोनिया नेहा के नीचे 69 की की पोजीशन में आ गई। सोनिया, नेहा की चूत का दाना चूसने लगी जबकि राजन उसे चोद भी रहा था।

ऐसे ही नेहा भी सोनिया की चूत का दाना चूस रही थी और समीर ने साथ में अपनी बहन की चुदाई शुरू कर दी।

ननद भौजाई एक दूसरे की चूत का दाना चूस भी रहीं थीं और साथ-साथ अपने-अपने भाइयों से चुदवा भी रहीं थीं।

ऐसे ही पोजीशन बदल बदल कर अलग अलग तरह से चुदाई करते करते, आखिर सब थक कर सो गए। किसी को होश नहीं था कि कौन कितनी बार झड़ा और किसने किसको कितनी बार चोदा। ये सब हिसाब तो अब कल सुबह ही होगा जब सबकी नींद खुलेगी।

दोस्तो, इस कहानी में मैंने ज्यादा ऊह-आह नहीं डाला है क्योंकि कम से कम मेरे अनुभव के हिसाब से असल ज़िन्दगी में सेक्स वैसा नहीं होता जैसा पोर्न विडियोज़ में होता है। इसलिए कोशिश की है कि कहानी ज्यादा हो और सेक्स का दिखावा कम।....sid4you
 
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे खेल खेल में भाई बहनों ने धीरे धीरे बेशर्मी की सीमाएं लांघते हुए आखिर में कैसे सामूहिक बहन चुदाई का खेल खेला और रात भर दोनों भाई अपनी बहनों को चोदते चोदते आखिर सो गए।

अब आगे…

सूरज की सुनहरी किरणें पर्दों से छन-छन कर बेडरूम में दाखिल हो रहीं थीं। चार नंगे जिस्म एक बड़े से बिस्तर पर गोलाकार बनाए हुए अभी भी नींद की गोद से निकले नहीं थे। सूरज भी सोच रहा होगा कि भला ये कौन सा तरीका हुआ सोने का? लेकिन ये लोग ऐसे क्यों सोए थे इसके पीछे रात की अंधाधुंध चुदाई थी। शरीर थक कर चूर हो गया था नशा सर चढ़ चुका था लेकिन दिल है कि मानता नहीं।

आखिर सबने निश्चय किया कि कुछ ऐसा करते हैं कि आराम भी मिले और सेक्स का मजा भी। सब एक गोला बना कर, एक दूसरे की जाँघों को तकिया बना कर लेट गए। लड़के अपनी पत्नी या प्रेमिका की जांघ पर और लड़कियां अपने भाइयों की जाँघों पर सर रख कर लेट गईं।

समीर नेहा की चूत चाट रहा था; नेहा, राजन का लंड चूस रही थी; राजन सोनिया की चूत में घुसा पड़ा था और सोनिया, समीर लंड निगलने की कोशिश में लगी हुई थी।

इस तरह सब आराम से लेटे हुए भी थे और सबको मजा भी मिल रहा था। इसी तरह एक दूसरे के गुप्तांगों को चाटते चूसते सब आखिर सो गए थे।

सूरज की किरणों की थपकी से जब राजन की आँख खुली तो सामने सोनिया की चूत थी। उसने उनींदी आँखें ठीक से खोले बिना उसे चाटना शुरू कर दिया। इस से सोनिया की नींद भी टूटी और वो अपने भाई का लंड बेड-टी समझ कर चूसने लगी। ऐसे ही समीर और नेहा भी जाग गए।

थोड़ी देर ऐसी ही चटाई चुसाई के बाद सब उठे और नंगे ही रोज़मर्रा के कामों में लग गए। लेकिन आज काम के साथ साथ, काम वासना का खेल भी चल रहा था। जिसको जहाँ मौका मिल रहा था थोड़ी थोड़ी चुदाई कर ले रहा था। किचन में, बाथरूम में, बेडरूम में; लेकिन आखिर सब शॉवर में मिले और उस छोटी सी जगह में जहाँ मुश्किल से दो लोगों के लिये नहाने की जगह थी, चार लोगों ने अच्छे से मस्त खड़े खड़े चुदाई की।

इसका भी अलग मजा था।

समीर, नेहा को और राजन, सोनिया को चोद रहा था लेकिन साथ ही भाई-बहनों के नंगे शरीर भी आपस ने रगड़ रहे थे। कभी कमर, तो कभी भाई बहन के पुन्दे आपस में टकरा कर एक दूसरे

को धक्के मारने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। चुदाई से ज्यादा मजा इस मस्ती में आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे लंड को चूत में घुसाने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे के नितम्बों से अपने चूतड़ टकराने की गद्देदार अनुभूति के लिए धक्के मारे जा रहे थे।

इस चुदाई स्नान के बाद सब फ्रेश हो कर बाहर आए। राजन और समीर ड्राइंग-रूम में नंगे ही बैठे बातें करने लगे, तब तक नेहा और सोनिया भी तैयार हो कर और पूजा की थाली सजा कर ले आईं थीं।

लेकिन कुछ अजब ही तरीके से तैयार हुईं थीं दोनों। बालों में गजरा, चेहरे पर सुन्दर मेक-अप, कानो में झुमके, गले में भरा हुआ सोने का हार, हाथों में मेंहदी और पैरों में महावर। दोनों बिल्कुल दुल्हन लग रहीं थीं, लेकिन एक ही बात थी जो अलग थी। दोनों ने कपड़ों के नाम पर बस एक लाल थोंग पहनी थी।

समीर- ये क्या रक्षाबंधन की तैयारी है? ऐसा है तो चलो हम भी कपडे वपड़े पहन कर तैयार हो जाते हैं।

नेहा- रात भर मस्त अपनी बहन चोदने के बाद, तुमको रक्षाबंधन मनाना है?

समीर- तो फिर ये पूजा की थाली क्यों? और उसमें राखी भी रखी है।

सोनिया- अब यार, भेनचोद भाई के हाथ में राखी बाँधने का तो कोई मतलब है नहीं; लेकिन तू यहाँ राखी मनाने ही आया था, तो बिना राखी घर जा के क्या जवाब देगा?

समीर- तो फिर ये नेहा मना क्यों कर रही है?

नेहा- क्योंकि हम रक्षाबंधन नहीं मनाएँगे; हम चुदाई-बंधन मनाएँगे।

समीर- अब ये क्या नया आइटम ले कर आई हो तुम? चुदाई-बंधन!

नेहा- ये रक्षा-बंधन का सेक्सी रीमिक्स है। ही ही ही…

इस बात पर सभी थोड़ा बहुत तो हंस ही दिए। समीर की नज़रें राजन पर टिक गईं क्योंकि ऐसे ज्ञान की बातों में उसकी विशेष टिप्पणी ज़रूरी थी। समीर के देखने के तरीके से ही राजन समझ गया कि समीर उसकी राय जानना चाहता है। पिछले कुछ दिनों में उसने समीर को ऐसे विषयों पर कुछ ज्यादा ही ज्ञान दे दिया था।

राजन- देखो समीर ऐसा है, रक्षाबंधन का मतलब है कि भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वो उसकी रक्षा करेगा। अब लड़कियों की रक्षा का मतलब अक्सर उनकी इज्ज़त, लाज या अस्मिता की रक्षा करना होता है। यहाँ तो हमने ही अपनी बहनों को चोद दिया है; तो अब उस वचन का को कोई खास मतलब रह नहीं जाता। बाकी हिफाज़त तो हम अपने परिवार के सभी लोगों की करते ही हैं।
 
समीर- ठीक है रक्षाबंधन ना मनाओ, लेकिन अब ये चुदाई-बंधन का क्या वचन देना है?

नेहा- ये हुआ ना सही सवाल!

सोनिया- सिंपल है यार, तुम कसम खाओगे कि जब भी मैं तुमको चोदने को कहूँगी तो तुम मुझे ज़रूर चोदोगे। बीवी बाद में बहन पहले। चुदाई का वचन, चुदाई-बंधन! समझे?

समीर- समझ गया, ठीक है फिर बाकी सब तो वही है ना? वचन तो पहले भी कौन सा बोल कर देते थे वो तो मन में ही हो जाता था।

नेहा- नहीं यार! अपन नए ज़माने के लोग हैं। जब राखी का मतलब बदल गया, तो तरीका भी तो बदलना जरूरी है ना? मैंने कहा ना, सेक्सी रीमिक्स है। अभी तुम बताओ पहले राखी कैसे मनाते थे?

समीर- देखो, सबसे पहले तो नहा-धो कर तैयार हो कर आमने-सामने बैठ जाते थे। फिर… दीदी मेरे हाथ में नारियल देती थी; फिर मुझे माथे पर तिलक लगाती थी; फिर मेरी आरती उतारती थी;

उसके बाद मुझे राखी बांधती थी; फिर वो मुझे मिठाई खिलाती थी और मैं उसे कोई गिफ्ट या पैसे देता था। बस…

नेहा- हाँ तो बस यही करना है लेकिन थोडा तरीका बदल गया है। एक काम करो पहले तुम ही आ जाओ मैं बताती जाऊँगी क्या करना है।

आसन तो थे नहीं, तो दो योगा मैट बिछा कर उन पर ही समीर सोनिया, दोनों आमने सामने बैठ गए और बीच में पूजा की थाली रख दी गई। नेहा किसी पंडित की तरह उनको निर्देश देने लगी।

नेहा- हम्म, तो अब नारियल की जगह बहन अपनी इज्ज़त भाई के हाथ में देगी…

सोनिया ने उठ का अपनी लाल थोंग बड़े ही मादक तरीके से कमर मटकाते हुए निकाली और वापस बैठ कर उसे समीर के हाथ में रख दिया।

समीर ने अपनी बहन की चिकनी चूत को देखते हुए उस थोंग को सूंघा और फिर गोद में रख लिया।

नेहा- अब बहन, भाई को तिलक लगाएगी। इसके लिए थाली में खाने में डालने वाला लाल रंग रखा है, उसे बहन अपने भागोष्ठों (चूत के होंठों) पर लगा कर फिर भाई के माथे पर लगाए। ये बहन की चूत की सील है जो सबको बताएगी कि ये लड़का भगिनीगामी (बहनचोद) है।

इस बात पर सब के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई। सोनिया ने खाने के रंग को अपनी चूत पर लगाया और खड़ी हो कर समीर के पास अपने दोनों पैर चौड़े करके खड़ी हुए और उसका सर अपने पैरों के बीच ठीक से सेट करके अपनी चूत से चिपका दिया। सोनिया ने ना जाने कितनी बार अपने पैरों के बीच राजन का सर दबाया था लेकिन हमेशा उसकी चूत राजन के मुह पर होती थी। ये माथे पर चूत लगाने का उसका पहले अनुभव था।

नेहा- अब आरती उतारने की जगह बहन अपने भाई का लंड खड़ा करेगी. अपनी श्रद्धानुसार चूस कर या हिला कर आप ये क्रिया संपन्न कर सकती है।

नेहा के बोलने के तरीके ने एक हँसी मजाक जैसा माहौल बना दिया था। लेकिन फिर भी उत्तेजना की कोई कमी नहीं थी, इसीलिए समीर का लंड सोनिया के हाथ लगाते ही खड़ा हो गया, और एक दो झटकों में एकदम कड़क भी हो गया।

नेहा- अब बहन अपने भाई के तने हुए लंड पर राखी बांधे।

राजन- राखी तुम हाथ पर ही बाँध देना। लंड के लिए मैंने बेशरम की वेबसाइट से ये कॉक-रिंग आर्डर कर दी थीं। लंड पर तुम इसे पहना दो।

राजन ने वो कॉक-रिंग सोनिया को देते हुए जब ऐसा कहा तो सब की नज़र उस कॉक-रिंग पर ही थी।

सोनिया उसे समीर के लंड पर पहनाने लगी।

नेहा- अब ये क्या बला है?

राजन- देखो जो लंड होता है वो खून के दबाव से खड़ा होता है। जैसे कार के टायर में हवा भर के कड़क करते हैं वैसे ही लंड में खून भरा होता है। धमनियां खून लाती हैं और शिराएँ उसे वापस ले जाती हैं लेकिन उत्तेजना के समय धड़कन बढ़ जाने से, धमनियां तो बहुत खून लाती हैं लेकिन शिराएं सिकुड़ का खून को वापस जाने से रोक देती हैं और इससे उसमे दबाव के साथ खून भर जाता है और लंड खड़ा हो जाता है।
 
सोनिया- वो सब तो ठीक है लेकिन इन सब बातों का इस लंड की अंगूठी से क्या वास्ता?

राजन- ये वास्ता है कि ये रबर की बनी है और लंड को हल्का सा दबा के रखती है। धमनियां शरीर में अन्दर गहराई में होती हैं लेकिन शिराएं काफी ऊपर होती हैं तो ये हल्का दबाव शिराओं को सिकोड़ कर रखता है और लंड खड़ा ही रहता है। इस तरह से ये अंगूठी लंड को ज्यादा देर तक खड़ा रखने में मदद करती है। जब नेहा ने पहली बार बताया था कि वो राखी कुछ अलग ढंग से मनाने वाली है तभी मैं समझ गया था, और मैंने ये आर्डर कर दी थी।

समीर- बात तो जीजाजी बिलकुल सही कह रहे हैं। इन्होने इतना ज्ञान पिला दिया लेकिन लंड अभी भी खड़ा हुआ है बैठा नहीं। मतलब काम तो करती है ये चीज़।

इस बात पर सब हंस पड़े।

लेकिन अभी तो बहुत कुछ बाकी था। नेहा ने सोनिया को कहा कि वो अपने भाई को मिठाई खिलाए। सोनिया थाली से उठा कर एक छोटा रसगुल्ला, समीर को खिलाने लगी लेकिन नेहा का कुछ और ही प्लान था।

नेहा- अरे नहीं भाभी ऐसे नहीं… रसगुल्ला अपनी चूत में डाल लो फिर समीर अपने मुंह से चूस कर निकालेगा और खाएगा। अब समझ आया आपको कि तिलक के लिए चूत पर खाने वाला रंग क्यों लगवाया था?

सोनिया ने वैसा ही किया, और अब उसे ये भी समझ आ गया कि ये रसगुल्ले रस में डूबे हुए क्यों नहीं मंगवाए थे, क्योंकि उनको चूत के रस में जो डूबना था।

सोनिया ने रसगुल्ला अपनी रसीली चूत में डाला और नीचे लेट कर दोनों टाँगें ऊपर कर दीं। समीर ने आ कर सोनिया की चूत को बहुत चूसने के बाद रसगुल्ला आखिर निकाल ही लिया और खा लिया।

नेहा- मिठाई खा ली! अब गिफ्ट में अपना लंड दे दो अपनी बहन की चूत में और चोद दो। हो गया चुदाई बंधन!

समीर ने वैसा ही किया। कॉक-रिंग की वजह से उसका लंड पहले से ही पत्थर के जैसे कड़क था, वो अपनी बहन को वहीं योगा-मेट पर चोदता रहा और नेहा-राजन उन दोनों का हौसला बढ़ाते रहे। आखिर समीर अपनी बहन की चूत में ही झड़ गया लेकिन तब भी उसका लंड ढीला नहीं पड़ा और वो उसके बाद भी कुछ देर तक चुदाई करता रहा और तब तक सोनिया दोबारा झड़ चुकी थी।

उसके बाद राजन और नेहा ने भी ऐसे ही अपना चुदाईबंधन मनाया।

तो इस तरह भाई-बहनों की इस चौकड़ी ने एक नए त्यौहार की शुरुआत की।

दोस्तो, मैंने रिश्तों में चुदाई को लेकर कई कहानियां पढ़ी हैं जिसमें होली के माहौल में भाई बहन चुदाई करते हैं। यहाँ तक कि दीवाली और अन्य त्यौहार भी कई बार इन कहानियों में देखे हैं मगर कभी रक्षाबंधन से सम्बंधित कोई खास कहानी पढ़ने को नहीं मिली थी, इसलिए मेरा मन था कि मैं एक ऐसी कहानी लिखूं।

अब मेरी वो तमन्ना तो पूरी हो गई है। अगले भाग में इस कहानी का समापन हो जाएगा। अगर आपको यह विषय पसंद न आया हो तो क्षमा चाहता हूँ लेकिन भाई-बहन में चुदाई के उदाहरण मैंने अपने असली जीवन में भी देखे हैं इसलिए यह कहानी लिखने का विचार स्वाभाविक था।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं। ...sid4you
 
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे भाई बहनों के दो जोड़ों ने रक्षाबंधन के प्यार भरे त्यौहार को अपने जैसे वासना में भीगे हुए परिवारों के हिसाब से ना केवल पुनः परिभाषित किया बल्कि उसे एक उत्तेजक रूप और एक नया

नाम भी दिया- चुदाईबंधन! इसके साथ ही कहानी अपने आखिरी मोड़ पर है।

अब आगे…

चुदाईबंधन के इस अनोखे त्यौहार को मनाने के बाद चारों बहुत थक गए थे। रात भर की चुदाई के बाद सुबह से भी कम से कम दो बार सबने बहुत अच्छे से चुदाई कर ली थी। सबको ज़ोरों की भूख लगी थी इसलिए सबने ज्यादा बातें ना करते हुए पूरा ध्यान खाने पर लगाया और पेट भर खाने के बाद सबको नींद सताने लगी। रात भर की नींद भी बकाया थी और वैसे भी त्योहारों पर खाना ज्यादा खाने के बाद नींद आने लगती है।

खाने के बाद सब जा कर बेडरूम में सो गए लेकिन इस बार व्यवस्था थोड़ी अलग थी। सोनिया समीर के साथ नेहा के कमरे में सोई और नेहा अपने भैया राजन के साथ उनके बेडरूम में। यूँ तो सब नंगे ही थे लेकिन अभी चुदाई से ज्यादा नींद की ज़रुरत महसूस हो रही थी। लेकिन फिर भी दोनों भाई बहन एक दूसरे से नंगे लिपट कर ही नींद के आगोश में गए थे।

तीसरे पहर तक तो किसी ने करवट तक नहीं बदली। फिर धीरे धीरे होश आना शुरू हुआ तो कभी भाई ने बहन स्तनों को सहला दिया या कभी बहन ने भाई का लंड पकड़ लिया ऐसे उनींदे छोटी मोटी हरकतें करते करते पाँच, साढ़े पाँच तक नींद खुली और फिर शुरू हुआ चुम्बनों और आलिंगनों का सलोना सा खेल। ये मासूम सा खेल धीरे धीरे कब चुदाई में बदल गया पता ही नहीं चला।

हर चुदाई का अंत होता है इनका भी हुआ। दो अलग कमरों में दो बहनें एक बार फिर अपने भाइयों से चुद गईं थीं, लेकिन कल रात से इतनी चुदाई हो चुकी थी कि अब आगे और करने की कशिश बाकी नहीं रह गई थी।

लेकिन इतनी चुदाई के बीच बातें करने का मौका कम ही मिला था।

सोनिया- एक बात पूछूँ?

समीर- हम्म…

सोनिया- अगर तुम्हारी पहले से ही कोई गर्लफ्रेंड होती, जैसे अभी नेहा है, तो फिर भी क्या तुम मुझे बाथरूम के छेद से देखते?

समीर- पता नहीं! अब तो ये कहना मुश्किल है, लेकिन शुरुआत तो आपने ही की थी ना। आप ने वो छेद बनाया ही ना होता और मुझे देखना शुरू ना किया होता तो मुझे शायद ये बात दिमाग में ना आती।

सोनिया- हाँ, लेकिन फिर भी अगर उस वक़्त तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड होती तो क्या करते?

समीर- शायद मैं वो छेद बंद कर देता। हो सकता है मम्मी पापा से शिकायत भी करता। लेकिन आप ये क्यों पूछ रही हो?

सोनिया- इसलिए कि उस रात जब मैंने खिड़की से तुमको मुठ मारते हुए देखा था तो मैं अन्दर तक हिल गई थी। मैं भाई बहन का रिश्ता भूल गई थी और मुझे बस तुम्हारा लंड नज़र आ रहा था। मुझे लगता है अगर मैंने तुम्हारा लंड उस दिन ना देखा होता तो ये सब कुछ नहीं होता।

समीर- हम्म… मुझे तो वैसे भी इस सब की उम्मीद नहीं थी। मेरा काम तो बाथरूम के छेद से ही चल रहा था।

सोनिया- हाँ, इस से याद आया… तू क्या अब मम्मी को देखने लगा है, उस छेद से?

समीर- उम्म्म… हाँ, तुम चली गईं तो समझ नहीं आया क्या करूँ इसलिए…

सोनिया- अब कल जाने के बाद भी करोगे?

समीर- पता नहीं।

उधर दूसरे कमरे में राजन और नेहा ने भी कई दिनों के बाद अकेले में चुदाई की थी। लेकिन उनका मन भी काफी हद तक भर गया था इसलिए वो भी अब चुदाई के बाद बतियाने लगे।

राजन- समीर और तुम पढ़ाई पूरी करके पक्का शादी करने वाले हो ना?

नेहा- अब तो और भी पक्का हो गया है?

राजन- ‘अब तो…’ मतलब?

नेहा- एक तो मुझे पहले ही लगा था कि समीर और मैं एक दूसरे के लिए ही बने हैं, लेकिन अब हम चारों के बीच जिस तरह का रिश्ता बना है उसको देखते हुए समीर से बेहतर लड़का मिल ही नहीं सकता। किसी और के साथ रही तो अपना रिश्ता छिपा कर रखना पड़ेगा और फिर वो सब टेंशन लेकर जीने का क्या फायदा?

राजन- हाँ वो तो है। मतलब तुम शादी के बाद भी मेरे साथ रिश्ता बना कर रखना चाहती हो?

नेहा- अब हमारा कोई ‘वन नाईट स्टैंड’ जैसा तो है नहीं कि एक बार चोदा और भूल गए। खून का रिश्ता है, और दिल का भी, तो आगे भी साथ तो रहेगा ही। और जो शेर एक बार आदमखोर हो जाए वो आगे जा के सुधर जाए ऐसा तो होता नहीं ना?

राजन- अरे वाह, मेरी शेरनी! क्या बात कही है!

इस बात पर दोनों खिलखिला कर हँस पड़े।
 
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