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कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का compleet

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माँ आख़िर लस्त होकर सुख से रोने लगी "चलो, मेरी बेटी खुश तो है! मैं ही जानती हू कि ये चूत की खुजली क्या जानलेवा होती है और सिमर तो मुझसे भी बढ़ कर है चलो मेरा नाम रोशन कर रही है ससुराल में"

मैंने केला उठा लिया और खाने लगा माँ की चूत के रस से लिबलिबा केला खाने में मुझे बचपन से मज़ा आता था जब छोटा था तब माँ कई बार जान बुझ कर मुझे खिलाती थी, बिना बताए कि उस केले से उसने किया क्या है अपने छोटे से बेटे को अपनी चूत का रस चखा कर मन ही मन खुश होती थी बाद में जब मैं जवान हुआ और माँ और दीदी को चोदने लगा, तब मेरे और दीदी के सामने ही केले से मुठ्ठ मारती थी और हम दोनों को खिलती थी

केला खाते हुए मैंने कहा "असली बात तो तुमने सुनी ही नहीं समधनजी ने हम दोनों को बुलाया है, दो हफ्ते के लिए उनके साथ रहने को कहा है"

माँ चकरा कर बोली "मैं क्या करूँगी उधर बेटा? सब के सामने अपनी बिटिया से कुछ कर भी नहीं पाऊन्गि तू यहीं ले आता तो अच्छा होता"

"अरे माँ, तू कितनी भोली है उन्होंने बुलाया है हमें अपनी रास लीला में शामिल करने को तेरे बारे में सुनकर तो वे सब लोग मेरे पीछे ही लग गये कि जाओ, माँ को ले आओ"

"अरे उन्हें पता चल गया हमारे बारे में? कुछ गडबड ना हो जाए बेटा" माँ चिंतित होकर बोली

"खुद दीदी ने सब को बताया है कि उसकी माँ कितनी सुंदर और रसीली है मेरे बारे में भी बताया तो सब ने मेरे हुनर तो देख लिए अब सब को तुझसे मिलना है, ख़ास कर शन्नो जी को, तेरी समधन को बड़ी मतवाली हैं वे माँ और जीजाजी और जेठजी भी आस लगाए बैठे हैं कि उनकी सास आएँ तो उनकी खातिरदारी करें"

माँ को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करे मन में खुशी के लड्डू फूल रहे थे पर थोड़ी परेशान भी थी आज तक उसने बस अपने परिवार में, अपने बेटे और बेटी से संभोग किया था अब दूसरों के साथ करने में जहाँ वह सकुचा रही थी वहीं गरमा भी रही थी मैंने समझाया कि यहाँ तो बस एक लंड मिलता है, वहाँ तो दो और नये लंड मिलेंगे फिर बेटी के अलावा एक और बुर भी मिलेगी मज़ा करने को

माँ जल्द ही मान गयी इतना ही नहीं, फिर गरम होकर मुझपर चढ बैठी जब वह मुझे उपर से चोद रही थी तो मैंने उसे बताया कि समधन ने क्या कहा था "माँ, अभी चोद ले, अब दो दिन उपवास करना उधर वे लोग भी करने वाले हैं अब दावत शुरू होगी जब हम वहाँ पहूचेंगे, और उपवास के बाद और ज़ायक़ा आएगा साथ साथ खाने का

दो दिन हमने आराम किया कठिन था पर माँ ने अपने आप पर काबू रखा जब सामान क्या ले जाना है इसकी तैयारी करने लगी तो मैने बताया "अम्मा, बस दो जोड़ी कपड़े ले चलेंगे वे भी नहीं लगेंगे वहाँ कौन हमे कपड़े पहनने देगा?" माँ शरमा गयी चहरा लाल हो गया इतने दिन बाद माँ को शरमाते हुए देख कर बहुत अच्छा लगा

हम शनिवार सुबह निकलकर दोपहर को वहाँ पहूचे हमारा स्वागत जोरदार हुआ जीजाजी और जेठजी ने माँ के पैर छुए, इतना ही नहीं, लेट कर उसके पाँव चूम भी लिए माँ सकुचा गयी, वैसे माँ के पैर बहुत सुंदर हैं, एकदमा गोरे और नाज़ुक, किसी का भी मन करे उन्हें प्यार करने को, मैं तो अक्सर खेलता रहता हू माँ के चरणों से

दीदी माँ से गले मिली शरमाई हुई माँ ने बस उसका गाल चूम कर उसे अलग कर दिया "अरे समधनजी, इतने दिन बाद मिली हो, ज़रा बेटी की बालाएँ लो, उसे प्यार करो" शन्नो जी ने मज़ाक में कहा जीजाजी बोले "अरे माँ, वे अपनी बेटी से अकेले में मिलना चाहेंगी"

शन्नो जी माँ को गले लगाकर बोलीं "अब तो सब के सामने ही मिलना पड़ेगा भाई हम भी तो देखें माँ बेटी का मिलन" फिर शन्नो जी ने माँ को चूम लिया पहले गालों पर और फिर होंठों पर कस कर उसे बाँहों में जकडकर वे माँ की पीठ को प्यार से सहलाने लगीं माँ शरम से पानी पानी हो रही थी

रजत बोले "अरे अम्मा, अभी से ना जुट जाओ, इन्हें आराम कर लेने दो सिमर, इनको अपने कमरे में ले जाओ आप लोग नहा धो कर आराम कर लो"

क्रमशः………………
 
ससुराल सिमर का—10

गतान्क से आगे……………

हम लोग सिमर के कमरे में गये वहाँ का बड़ा पलंग देख कर माँ भोंचक्की हो गयी "इतना बड़ा पलंग बेटी?"

"माँ, सब साथ सोते हैं इसपर, अब तो तुम दोनों भी आ गये हो" सिमर ने माँ की चुची दबाते हुए कहा फिर कस कर माँ को चूम लिया माँ भी उस से लिपट गयी और दोनों आपस में बुरी तरह चुम्मा चाटी करने लगीं माँ बार बार कह रही थी "मेरी बच्ची, मेरी बेटी, मैं तो तरस गयी तेरे साथ को" मैंने मज़ाक किया "उसके साथ को या उसकी बुर को?"

सिमर दीदी ने किसी तरह उसे अलग किया "रुक जा माँ, मन तो होता है कि अभी तेरी बुर में घुस जाऊ पर ये लोग मुझे मार ही डालेंगे दो दिन से सब तेरा इंतजार कर रहे हैं सबकी चूते गरम हैं और लंड फनफना रहे हैं आज रात तक रुक जाओ " कहकर सिमर चली गयी अपनी माँ बहन की चुम्मा चाटी देख कर मेरा भी खड़ा हो गया था पर मैंने किसी तरह सब्र किया

हम नहाए और सो गये देर शाम को उठे सिमर चाय ले आई उसने खूब सिंगार किया था और बड़ी मस्त साड़ी और चोली पहने थी उसने माँ को भी कहा कि ठीक से तैयार हो "अम्मा, मैं ये शिफान की साड़ी लाई हू, पहन लेना और तेरी नाप की ये काली ब्रा और पैंटी है, वो भी पहन ले तू तो अपने पुराने कपड़े साथ लाई होगी"

माँ ने मेरी ओर देखा "इसी ने कहा था कि कपड़े मत ले चल" मैंने दीदी को कारण बताया तो दीदी मुस्काराकर बोली "बात ठीक है, आज के बाद अम्मा इस कमरे के बाहर कम ही निकलेगी और यहाँ पूरी नंगी रहेगी इनके कमरे के बाहर कतार होगी इनका प्रसाद पाने वाले लोगों की पर आज सब के सामने मैं अपनी ससुराल में दिखाना चाहती हू कि अम्मा कितनी सुंदर है"

तैयार होकर हम नीचे खाने आए सभी सज धज कर बैठे थे मैंने रजत ने और जीजाजी ने तो बस सिल्क के कुर्ते पाजामे पहने थे शन्नो ज़ीने सलवार कमीज़ पहनी थी उनके मोटे बदन पर भी वह फॅब रही थी क्योंकि शायद कस के ब्रा बाँधी थी इसलिए उनकी उस तंग कमीज़ में से उनके विशाल चुचियाँ तो पहाड़ों जैसी तन कर खडी थीं तंग सलवार में से उनके मोटे चूतड उभर कर दिख रहे थे

दीदी साड़ी ब्लओज़ में बहुत खूबसूरत लग रही थी स्लीवलेस ब्लओज़ के कारण उसकी गोरी चिकनी बाहें निखर आई थीं माँ तो आज ऐसी लग रही थी कि मेरी भी नज़र नहीं हटती थी, लगता था कि क्या यही मेरी माँ है? बात यह थी कि अब माँ को कपड़ों में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी उसे तो एक बात अच्छी लगती थी कि अपने बेटे और बेटी से चिपट कर कैसे बेडरूम में टाइम बिताया जाए इसलिए वह कपड़ों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देती थी आज बहुत दिन बाद वह ठीक से सजी थी

माँ ने जूडा बाँध लिया था और उसमें वेणी गूँध ली थी दीदी के ज़िद करने पर हल्का लिपस्टिक लगा लिया था जिससे उसके होंठ गुलाब की कली जैसे मोहक लग रहे थे लो कट ब्लओज़ में से उसकी काली ब्रा उसके गोरे रंग पर मस्त जच रही थी माँ का बदन अब भी काफ़ी छरहरा था, उसकी चुचियाँ छरहरे बदन के कारण और उठ कर दिखती थीं

"आहा, हमारी समधनजी तो परी हैं एकदम सिमर, ये तेरी माँ नहीं बड़ी बहन लगती हैं अरे इनकी तो भी शादी करा दो ऐसा रूप है इनका" शन्नो जी ने चुटकी ली वे भूखी मदभरी आँखों से माँ के रूप को घूर रही थीं

"आज रात शादी भी हो जाएगी माँ, सब के साथ, और फिर सुहाग रात भी मना लेंगे"रजत ने कहा

माँ शरमाती रही पर मन में बहुत खुश थी उसका हाथ बार बार अपनी कमर के नीचे साड़ी ठीक करने पहूच जाता मैं समझ गया, चूत कुलबुला रही थी और ना रह कर माँ उसे बार बार हाथ लगा रही थी खाना खाने तक ऐसा ही हँसी मज़ाक चलता रहा खाने के बाद सब दीदी के कमरे में इकठ्ठ हुए

शन्नो जी ने अपने बेटों को कुछ इशारा किया वे दोनों जाकर दीदी के कपड़े उतारने लगे खुद शन्नो जी मेरे पास आईं और मेरे कपड़े उतार दिए फिर हम दोनों को कुर्सी में नंगा बिठा कर शन्नो जी की चार पाँच बड़ी साइज़ की ब्रेसियरों से बाँध दिया गया
 
दीदी हँस रही थी पर कुछ नाराज़ थी उसे पता था कि क्या होने वाला है "अरे छोडो मेरे को, ये क्या बचपना है"

शन्नो जी बोलीं "बेटी, अब तमाशा देखो और ज़रा और मस्त हो लो तुम दोनों को इसलिए बाँध दिया कि कोई दखलंदाजी ना करो अब समधनजी के बेटे और बेटी के सामने हम उनको नंगा करेंगे और फिर छोड़ेंगे अपने बच्चों के सामने चुदती माँ को देखने में जो मज़ा आएगा वो और किसी में नहीं"

फिर उन्होंने अपने अपने कपड़े निकाले माँ पलंग पर बैठ कर सहमी सहमी हमें देख रही थी जीजाजी और रजत के कसे नंगे बदन और उनके तन्नाए हुए लंड देखकर उसकी आँखें पथरा गयीं और जब उसने शन्नो जी का भरा पूरा मांसल बदन देखा तो अपने आप को ना रोक पाई उसका हाथ अपनी बुर पर चला ही गया कभी वह मेरे लंड को देखती, कभी दीदी की नंगी जवानी को और कभी उन माँ बेटों के नंगे शरीर को

शन्नो जी उसके पास जाकर बैठीं और उसके साड़ी खोलने लगीं जीजाजी ने उसका ब्लओज़ उतारा और रजत उसका पेटीकोट उतारने लगे माँ शरमा कर नहीं नहीं करने लगी

"अरे समधनजी, अपना यह रूप अपने बच्चों पर इतने दिन लुटाया है, अब ज़रा हमें भी चखने दो तुम्हारी बेटी जब से इस घर की बहू बनकर आई है, और अपनी माँ के जोबन के बारे में बताया है, तब से तुम्हारे इन गदराए फलों को खाने को हम मरे जा रहे हैं अब नखरा ना करो"

माँ चुपचाप अपने कपड़े उतरवा रही थी काफ़ी गरम हो गयी थी थोड़ी शरमाते हुए बोली "आप मुझसे बड़ी हैं, मुझे समधनजी क्यों कहती हैं? अपनी छोटी बहन समझिए मुझे मेरे नाम से बुलाए - बीना"

माँ और कुछ बोलना चाहती थी पर शन्नो जी ने उसके मुँह को अपने मुँह से बंद कर दिया रजत माँ का पेटीकोट उतार कर उसकी गोरी मांसल जांघों को चूम रहे थे "वाह क्या जांघें हैं हमारी सासूजी की, जांघें इतनी रसीली हैं तो उनके बीच का खजाना क्या रसीला होगा!"

अब तक जीजाजी ने माँका ब्लओज़ निकाल डाला था और ब्रा के उपर से ही मांकी चुचियाँ दबा रहे थे "मस्त मम्मे हैं अम्मा, स्पंज के गोले लगते हैं" वे बोले

रजत जी ने अब तक माँ के पैंटी भी उतार दी थी और उसकी झांतों पर हाथ फेर रहे थे "सिमर, अब समझ आया तेरी झांतें इतनी घनी और घूघराली कैसे हैं, बिलकुल अपनी माँ पर गयी है"

माँ को पूरा नंगा करके सबने पलंग पर लिटा दिया और चढ बैठे "बड़ी लज़ीज़ चीज़ है अम्मा हमारी सासूजी, चोद डालें?" जीजाजी माँ के मम्मे मसलते हुए बोले

मैं चिल्ला उठा माँ

माँ की आँखों की कामना मुझे सहन नहीं हो रही थी, मैं जानता था कि उसका क्या हाल होगा "अरे चोद डालिए जीजाजी, उसे ऐसे ना तडपाइये बेचारी कई दिनों की भूखी है, उसे आदत नहीं है भूखा रहने की"

दीदी भी बोल पडी "अजी सुनो, अब मुझे खोल दो, अम्मा की चूत का स्वाद लिए महीनो हो गये, पहले मुझे चूस लेने दो, फिर चोदना"

शन्नो जी मुस्कराई और बोलीं "हल्ला ना करो, सबको चखने मिलेगी ये मिठाई अभी चोदो नहीं, मुँह से स्वाद लो इनके जोबन का पेट भर के चूस लो, फिर चोद लेना अब तुम दोनों ज़रा हटो, पहला हक मेरा है"

शन्नो जी माँ के पैरों के बीच में बैठ गयीं और उसकी चूत को उंगली से खोल कर देखने लगी "एकदम गुलाबी और रसीली है" उंगली अंदर डाल कर उन्होंने अंदर बाहर की और फिर चाट कर बोलीं "शहद है शहद, बीना रानी, अब ज़रा हमारी भूख मिटाओ चूत में ढेर सा शहद है ना? हम सब को चखना है" फिर झुक कर माँ की बुर में मुँह डाल कर लेट गयीं वहाँ उनकी जीभ चली और यहाँ माँ तडप कर चूतड उछालने लगी "दीदी बहुत अच्छा लग रहा है हाय मेरी बेटी के भी क्या भाग हैं जो ऐसी सास मिली है"

क्रमशः………………
 
ससुराल सिमर का—11

गतान्क से आगे……………

जीजाजी अब माँ के चुंबन ले रहे थे, उसके रसीले मुँह को चूसते हुए माँ के मम्मे मसल रहे थे "मांजी, लौडा कहाँ लेंगी मेरा? मुँह में या चूत में? आपका यहा दामाद आज आपको खुश कर देगा"

"मुझे चोद डालो बेटे, अब ना तडपाओ तुम्हारी माँ जो जुलम कर रही है वो मैं सह ना पाऊन्गि" माँ हाथ में जीजाजी का लंड पकडकर बोली अब उसकी पूरी शरम खतम हो गयी थी

रजत माँ के पेट पर हाथ फेरते हुए दूसरे हाथ से उसके चूतड सहला रहे थे "मैंने तो अपनी जगह बुक कर ली मांजी आपके इन मतवाले गद्दों के बीच"

माँ थोड़ी घबराई रजत के लंड को टटोल कर बोली "बेटा, ऐसा मत करना, मैं सह नहीं पाऊन्गि, तेरा तो मेरे बेटे से भी बड़ा है लगता है"

रजत माँ के चूतडो को मसलते हुए बोले "अरे नहीं मांजी, आपके बेटे का लंड बहुत मस्त है, पर मैंने सुना है कि ये आप की बहुत मारता है, तो मेरे लंड से आप को कोई तकलीफ़ नहीं होगी"

माँ फिर बोली "मुझे दुखेगा मेरे बेटे, आओ मैं चूस देती हू"

मैंने रजत को आँख मारी कि परवाह मत करो दीदी अब गरम होकर अपने चूतड कुर्सी पर रगड रही थी

उधर जीजाजी ने माँ का सिर अपनी गोद में लिया और उसके मुँह में लंड डाल दिया माँ आँखें बंद करके चूसने लगी शन्नो जी अब माँ की जांघें पकडकर उसकी बुर चूस रही थी माँ को झडाकर उन्होंने उसके रस को चाटा और फिर उठ कर रजत को कहा कि अब वह चख ले तीनों ने मिलकर बारी बारी से माँ की चूत चुसी इस बीच लगातार माँ की चुचियाँ वे दबा रहे थे बीच बीच में कोई उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगता

फिर दोनों भाई माँ को उठाकर हमारे पास लाए माँ अब तक दो तीन बार झडकर मस्त हो गयी थी उसकी बहती बुर से पता चल रहा था माँ को वैसे ही उठाए हुए पहले वी दीदी के पास गये और दीदी का मुँह माँ की चूत पर लगा दिया "ले सिमर, देवी माँ का प्रसाद ले ले, जल्दी चख, फिर तेरे भाई को चखाना है"

दीदी और मुझे माँ की बुर का स्वाद देकर वे माँ को फिर पलंग पर ले गये "चलो अब चोदो साली को" शन्नो जी ने कहा माँ उनकी ओर देखने लगी फिर उसे याद आया कि मैंने बताया था कैसे ये लोग गाली गलौज करते हैं

जीजाजी माँ पर चढ गये और उसकी बुर में लंड डाल दिया फिर वे नीचे हुए और रजत ने चढ कर माँ की गान्ड में लंड पेलना शुरू किया माँ कराह उठी "नहीं बेटे, दुखता है, सच में दुखता है, अमित को मैं हमेशा कहती हू पर ये नहीं मानता, तू रुक ना, दामाद जी के बाद मुझे चोद लेना, मेरी गान्ड मत मारो"

शन्नो जी ने अपनी टाँगें फैलाकर माँ के मुँह को बुर से लगा लिया और कस कर टाँगों में उसका सिर दबा लिया फिर माँ के मुँहे पर धक्के मारते हुए बोलीं "तू पेल रजत इसकी बात मत सुन आख़िर ससुराल में पूरी आवभगत करनी है, ऐसे थोड़े एक छेद छोड़ देंगे"

रजत ने माँ के चूतड पकडकर अपना लंड उसके गुदा के अंदर उतार दिया माँ छटपटाई पर उसका मुँह शन्नो जी की बुर में दबा होने से बस गों गों करके रह गयी लंड अंदर उतार कर रजत ने उसकी गान्ड मारना शुरू कर दी
 
अगले आधे घंटे हम दोनों बँधे भाई बहन के आगे उन तीनों ने माँ को पटक पटक कर तीनों तरफ से चोदा बीच में वे छेद बदल लेते माँ पर वे ऐसे चढे थे जैसे शैतान बच्चे गुडिया को तोड़ने मरोडने में लगे हों पीछे से माँ को चिपट कर गान्ड मारते हुए जेठजी माँ के स्तनों को कस के दबा और कुचल रहे थे जैसे भोम्पू हों शन्नो जी ने माँ का सिर इस तरह से जांघों में दबा लिया था जैसे दबा कर कुचल देना चाहती हों

मेरी लंड माँ की होती ठुकाई देखकर सनसना रहा था दीदी भी भयानक उत्तेजना में गालियाँ दे रही थी "अरे भोसडीवालो, माँ को छोडो, मेरी ओर ध्यान दो, साले जेठजी, आज तुझे अपनी बुर में ना घुसा लिया तो कहना और मेरी चुदैल सासूमा, आज तेरी बुर को चूस कर मैं आम जैसा पिलपिला कर दूँगी सब चुदाई भूल जाएगी"

उसकी बात अनसुनी करके तीनों माँ को चोदते रहे आख़िर जब वे झडे और अपने अपने लंड और चूत माँ के बदन से अलग करके उठे तो माँ थकी हुई पलंग पर पडी रही कुछ बोली नहीं पर जब उसने हमारी ओर देखा तो उसके चेहरे पर एक गहरी तृप्ति थी माँ के चेहरे पर मैंने बहुत दिनों में यह सुख देखा था मैंने दीदी को कहा "देख दीदी, माँ को क्या खलास किया है तेरे ससुराल वालों ने मिलकर"

शन्नो जी मेरे पास आईं और बोलीं "अब तुम दोनों माँ के पास जाओ, उसकी सेवा करो उसके छेद से जो रस बह रहा है वह पाओ तब तक हम आराम करते हैं"

जीजाजी उठकर मेरे पास आए और अपना झडा लंड मेरे मुँह में देते हुए बोले "पहले ये चख लो अमित, तेरे पसंद का है, तेरी दीदी को चोदने वाले उसके पति का और तेरी माँ का" मैंने मन लगाकर उनका झडा लंड चूसा उधर जेठजी दीदी को लंड चुसवा रहे थे

हमारे हाथ पैर खुलते ही हम भाग कर माँ के पास गये दीदी माँ की चूत में घुस गयी और मैंने उसे पलट कर माँ के चूतडो के बीच अपना मुँह डाल दिया दोनों छेदों से रस बह रहा था माँ सीत्कारी भरते हुए मुझे और दीदी को अपने बदन से चिपटाकर बोली "मेरे बच्चों, आज मैं निहाल हो गयी, बहुत प्यार से चोदा मुझे समधन और उनके दो बेटों ने तेरी ससुराल याने स्वर्ग है बेटी, तू बड़ी भाग्यवान है जो ऐसा घर तुझे मिला"

माँ की गान्ड खाली करके मैं माँ को पलटाकर चढ गया और उसकी गान्ड में लंड डाल दिया फिर उसपर लेट कर उसकी गान्ड मारने लगा मेरा कस के खड़ा था और मैं बहुत उत्तेजित था लगता था कि माँ की इतनी मारूं की फाड़ डालूं दीदी भी माँ से सिक्सटी नाइन करने में जुट गयी थी बेचारी बहुत देर से गरम थी, माँ की जीभ चूत में जाते ही झड गयी

कुछ देर बाद शन्नो जी, रजत और जीजाजी उठाकर पलंग पर आ गये शन्नो जी बोलीं "आज की रात बहू की माँ के लिए है बेटो इन्हें खूब चोदो, इनका कोई छेद, इनके शरीर का कोई भाग अनछुआ ना रहे एक मिनिट के लिए भी रजत चल तू आजा और चूत में लंड डाल, दीपक बेटे, अपनी सास को लंड चुसवाओ बहू, चल अपन दोनों मिलकर इनके जोबन को गूंधते हैं" उन्होंने और दीदी ने माँ की एक एक चुची मुँह में ली और उसे चूसते हुए मसलने लगीं

हम सब माँ के शरीर को घेरकर उसे भोगने लगे ऐसा लग रहा था जैसे कई शिकारी मिलकर एक शिकार पर झपट पड़े हों पर माँ के लिए यह बहुत मीठा शिकार था जिस तरह से वह तडप रही थी और हाथ पैर फेक रही थी, उससे जाहिर था कि उससे यह सुख गवारा नहीं हो रहा था हमारे धक्कों से माँ का शरीर इधर उधर हो रहा था पलंग हिल रहा था जैसे तूफान आ गया हो

माँ को हमने एक पल नहीं छोड़ा ना उसके मुँह को खुलने दिया कि वह कुछ कह सके लंड झडते ही शन्नो जी या दीदी माँ का मुँह चूसने लगतीं या उसमें चूत लगा देतीं फिर जब किसीका लंड खड़ा हो जाता तो वह माँ के मुँह में घुसेड देता वैसे ही जब माँ की गान्ड या चूत लम्ड निकलने से खाली होती तो सब उन छेदों पर टूट पड़ते, चूस कर सॉफ करते और फिर कोई अपना लंड खाली छेद में डाल देता

आख़िर हम सब जब पूरी तरह से निढाल हो गये तब हमने माँ को छोड़ा कोई कहीं लुढक गया कोई कहीं माँ अब चुद चुद कर बेहोश हो गयी थी उसके मम्मे मसले कुचले जाने से लाल हो गये थे, पूरे गोरे बदन पर चुदाई और मसलने के निशान पड गये थे

क्रमशः……………..
 
ससुराल सिमर का—12

गतान्क से आगे……………

सुबह जब आँख खुली तो देखा कि माँ शन्नो जी की गोद में सिर रखकर रो रही थी दीदी, जीजाजी और जेठजी गायब थे, शायद नहाने चले गये थे मुझे लगा कि माँ को दर्द हो रहा होगा, कल रात हमसे ज़्यादती हो गयी

शन्नो जी माँ को चूमती हुई बोलीं "हमारा तो यह फ़र्ज़ था समधन, तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत रोज थोड़े मिलती है, ऐसी समधन या सास सब बच्चों को कहाँ नसीब होती है तुम तो अप्सरा हो बहुत मज़ा लिया बच्चों ने, भरपूर स्वाद पाया तुम्हारे बदन का"

माँ सिसकते हुए बोली "मैं निहाल हो गयी दीदी इतना सुख मिला कि स्वर्ग में भी नहीं मिलेगा अब तो बस आप लोगों की ऐसी ही सेवा होती रहे मुझसे, और मेरे बच्चों से, यही मनाती हू मैं" याने माँ सुख से रो रही थी मुझे काफ़ी गर्व हुआ, क्या चुदैल छिनाल नारी थी मेरी माँ!

"अब आज आराम करो दिन भर सब कोई सीधे रात को इकठ्ठे होंगे अभी तो और जान पहचान होना है हमारे तुम्हारे परिवार में अमित बेटे, तू भी आराम कर ले, आज रात को तेरा ख़ास काम है" शन्नो जी बोलीं

मैं और माँ दिन भर सोते रहे बस बीच में नहाने खाने को उठे शाम तक हमें फिर ताज़गी महसूस होने लगी बाकी सब भी आराम करके फ्रेश लग रहे थे सब माँ के साथ मज़ाक कर रहे थे

"मांजी, कल कैसी लगी हमारी आवभगत? कहें तो आज वैसी ही खातिर आगे चालू रखें?" रजत ने पूछा

"कल ज़रा जल्दबाजी मच गयी मांजी, आपके रूप का ही यह प्रताप है आज आराम से आप की सेवा कर सकते हैं हम सब मिलके" जीजाजी मुस्कराते हुए बोले

"बड़े आए मेरी माँ की सेवा करने वाले! मुझे तो माँ से ठीक से मिलने भी नहीं दिया तुम लोगों ने, आज माँ सिर्फ़ मेरी है मेरी" सिमर दीदी मचल कर बोली

माँ खुश थी थोड़ा शरमाते हुए बोली "बेटे, मैं क्या कहू, कल तो तुम लोगों ने मुझे स्वर्ग में पहूचा दिया पर क्या नोचा है मुझे, मेरा बदन अब तक दुख रहा है वैसे मेरी बेटी की ससुराल वालों के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हू, मुझे बहुत आनंद दिया है तुम लोगों ने मिलकर"

शन्नो जी हँसते हुए बोलीं "आज अब थोड़ा अलग होगा मज़े ले लेकर काम किया जाएगा बीना, तेरा बेटा अमित बड़ा खूबसूरत है, पिछली बार बस दो दिन रहा, ठीक से उसे जान भी नहीं पाए हम लोग, ख़ास कर मेरे बेटे आज सोचते हैं कि जान पहचान पूरी कर लें, हम दोनों की और साथ में बहू भी, और रजत, दीपक और अमित की आपस में"

रजत ने मुझे आँख मार कर कहा "बिलकुल ठीक है अम्मा अमित को तो ठीक से चख भी नहीं पाए हम लोग"

मेरे मन में मीठी उलझन होने लगी थी मैं समझ गया कि क्या होने वाला है पर अब मुझे मज़ा आने लगा था मैंने भी बोल दिया "हाँ, मज़ा आएगा मांजी पर क्या हम लोग अलग कमरे में जाकर गप्पें मारें और आप औरतें दूसरे कमरे में जाएँगी?"

"अरे नहीं, ये ट्रेन थोड़े ही है लेडीज़ और जेंट कम्पार्टमेन्ट वाली, सब साथ साथ देखेंगे एक दूसरे को" शन्नो जी बोलीं
 
रात को हम सब फिर से दीदी के कमरे में इकठ्ठे हुए औरतें एक दूसरे के कपड़े उतारने लगीं जीजाजी और रजत फटाफट नंगे हो गये और मिलकर मेरे कपड़े उतारने लगे साथ साथ वे मुझे चूमते जाते "अमित राजा, आज आएगा मज़ा, आज तुझे सेक्स का सब बचा हुआ आनंद भी मिल जाएगा, जो तूने आज तक नहीं लिया"

जीजाजी मेरी छाती सहलाते हुए मेरे निपालों को छूआ कर बोले "भैया, बड़ा चिकना लडका है, एकदम मस्त है"

"तू भी कम नहीं है दीपक, आ अमित, आजा ठीक से देख ले कि तेरी बहन का पति कितना चिकना जवान है" रजत मुझे गोद में लेकर सोफे में बैठते हुए बोले जीजाजी मेरे सामने बैठ कर मेरा लंड चूसने लगे

"छोटे, तू तो अमित के लंड पर मर गया है, अभी से सोच ले, कहाँ लेगा?" रजत बोले और फिर अचानक मेरा सिर अपने हाथों में लेकर अपनी ओर मोडकर मेरे होंठों को चूसने लगे पहली बार कोई मर्द इस तराहा से मुझे चूम रहा था मैंने शुरू में अपना मुँह बंद रखा पर फिर मुँह खोल कर जेठजी की जीभ चूसने लगा वे मेरे निपलो को उंगलियों में लेकर बड़े मस्त तरीके से मसल रहे थे उनका तन्नाया लंड मेरी पीठ पर रगड रहा था

उधर शन्नो जी और दीदी मिलकर माँ के बदन का रस चूसने में लग गये थे दीदी माँ की चूत से लग गयी थी और शन्नो जी माँ के होंठ चूस रही थीं माँ ने उन्हें कुछ कहा तो शन्नो जी मुस्काराकर माँ का सिर अपनी जांघों में लेकर लेट गयीं "ज़रूर चूसो बीना, तुझे नहीं चुसाऊन्गि तो किस को चुसाऊन्गि"

"उठ छोटे, अब नहीं रहा जाता, काम की बात करें, बोल क्या करेगा अमित के साथ" रजत ने जीजाजी से पूछा

"भैया, मैं तो इसे अंदर लूँगा आज, जब से अमित को देखा है मेरी गान्ड कुलबुला रही है" जीजाजी मेरे लंड को मुँह से निकालकर बोले

"वो तो ठीक है पर मुझे तो अमित के गोरे गोरे चूतड चाहिए अपने आगोश में बोल अमित तैयार है?" रजत बोले मैं अब वासना से थरथरा रहा था रजत का लंड गान्ड में लेने की कल्पना से डर भी लगता था और उत्तेजना भी होती थी

"बहुत बड़ा है रजत जी, दर्द तो नहीं होगा?" मैंने पूछा

"अरे मेरी जान, तुझे दर्द नहीं होने देंगे, मस्त मख्खन का इंतज़ाम करके रखा है पर बात ठीक है, पहली बार ले रहा है तू, ऐसा कर, पहले दीपक का ले ले, मुझसे छोटा है ना! दीपक आ जा, अमित को तैयार कर ले, पहली बार मरा रहा है, धीरे धीरे मारना अमित, तू पहले मरा ले, झडे बिना, बहुत आनंद पाएगा गान्ड मरवाने का असली आनंद तभी आता है जब लंड खड़ा हो" रजत अब खुल कर बोल रहे थे मेरी सारी शरम दूर हो गयी थी, मैं भी उत्सुक था कि देखें कैसा लगता है इतने सुंदर हैम्डसम मर्दों के साथ मैं कुछ भी करने को अब तैयार था

रजत ने मुझे पलटा और मेरी गान्ड चूसने लगे "छोटे, क्या माल है यार! मुझे तेरी याद आ गयी जब मैंने पहली बार तेरी मारी थी

रजत ने मुझे सोफे का सिरहाना पकडकर झुका कर खड़ा किया रजतजी मेरी गुदा में मख्कन मलने लगे साथ साथ वे फिर पीछे खड़े हो गये "भैया, तुम आमित का लंड सभालो"

"बीना उधर देख, तेरे बेटे को मेरे बेटे कैसे चोद रहे हैं" शन्नो जी ने कहा माँ ने मेरी ओर देखा मेरी आँखों की खूआरी देख कर उसे बहुत अच्छा लगा "कितना खुश लग रहा है मेरा बेटा सच बताऊ दीदी, सिमर के साथ चुदाई करते हुए मुझे बार बार लगता था कि जैसे मुझे मेरी बेटी के साथ यह सुख मिल रहा है, वैसे ही मेरे बेटे को मिले, उसके भाग हैं जो इतने अच्छे खूबसूरत मर्द उसे मिले मज़ा करने को बेटे, पूरा मज़ा ले ले, आराम से चुदवा"

जीजाजी ने बहुत देर मेरी मारी "क्या गान्ड है भैया, एकदम टाइट, अमित, अब मेरी मार कर देखना, तेरा माँ या दीदी से ज़्यादा मेरी गान्ड में तुझे मज़ा आएगा"

कुछ देर में वे झड गये पहली बार गरम वीर्य की फुहार गान्ड में छूटी तो मैने समझा कि औरतों को भी क्या मज़ा आता होगा मेरा लंड और तन्ना गया था रजत ने बड़ी सफाई से मुझे मस्त रखा था, मेरा लंड चूस चूस कर पर झड़ाया नहीं था

जीजाजी ने लंड निकाला और जाकर पलंग पर ओम्धे लेट गये "अब आजा अमित, मज़ा कर ले"

क्रमशः……………..

 
ससुराल सिमर का—13

गतान्क से आगे……………

रजत ने मुझे पलंग पर चढाया "चढ जा अमित, मख्खन की ज़रूरत नहीं लगेगी, मखमली गान्ड है मेरे भाई की, तेरी ही तरह"

रजत जी ने नीचे बैठकर मेरा लंड मुँह में ले लिया और मेरे चूतड पकडकर फैला दिए जीजाजी ने अपना लंड पेल दिया सुपाडा अंदर गया तो तकलीफ़ हुई जीजाजी रुक रुक कर पेलने लगे, जल्द ही उनका पूरा लंड मेरी गान्ड में था मुझे उतना दर्द नहीं हुआ जितना मैंने सोचा था बात यह है कि कई बार मैंने अकेले में गान्ड में मोमबत्ती डाल कर देखी थी जीजाजी का बहुत बड़ा भी नहीं था, रजत का होता तो मैं ज़रूर चिल्ला उठता

थोड़ा रुक कर जीजाजी बोले "संभाल अमित, अब चोदता हू" और खड़े खड़े मेरी गान्ड मारने लगे मेरा शरीर हिलने लगा रजत मन लगाकर मेरा लंड चूस रहे थे जीजाजी एक सधी लय में मेरी मार रहे थे पच पच पच आवाज़ आ रही थी

जीजाजी के गोरे चूतड बहुत खूबसूरत थे मैं उन्हें चूमने लगा, फिर गान्ड में मुँह लगाकर चूसने लगा "असली चोदू है तू अमित, गान्ड का शौकीन लगता है वैसे दीपक की गान्ड बहुत मस्त है, तेरी देखू, स्वाद दीपक से कम नहीं होगा" कहकर रजत मेरी गान्ड चूसने लगे

मैंने जीजाजी के उपर चढ कर अपना सुपाडा उनकी गुदा पर रखा और पेल दिया एक बार में आधा लंड अंदर चला गया मैं अचरज में था इतनी मुलायम तो मेरी माँ या दीदी की भी गान्ड नहीं थी एक और धक्के में मैंने लंड पूरा गाढ दिया जीजाजी चूतड हिलाने लगे "मज़ा आ गया अमित, तेरे इस कसे लौडे को लेने की मैं उसी दिन से सोच रहा था जब सिमर ने तेरे बारे में बताया था अब पेल अंदर बाहर" मैं जीजाजी की गान्ड चोदने लगा

"एक मिनिट रुक राजा, अब मुझे भी अंदर ले ले पहले, फिर साथ साथ मारेंगे" कहकर जेठजी ने मेरे चूतड फैलाए और लौडा पेलने लगे अब मैने समझा कि गान्ड मराना क्या होता है उनका लंड बड़ा था, ऐसा लग रहा था कि गान्ड फट जाएगी मैं दर्द से सी सी करने लगा तो उन्होंने पेलना बंद कर दिया और मेरे निपल मसलने लगे "बस, अब नहीं होगा दर्द, पहली बार तो थोड़ा होता है, औरतों को कैसे भी होता है चुदाते समय"

जीजाजी अपनी गान्ड सिकोड सिकोड कर मेरे लंड को मस्त कर रहे थे दो मिनिट बाद रजत फिर पेलने लगे, इस बार दर्द कम हुआ और उनका लंड मेरे चूतडो के बीच पूरा समा गया मुझे अजीब सा लग रहा था, गान्ड ठस के भरी हुई थी, ऐसा लग रहा था कि पेट तक लंड चला गया है पर मज़ा भी आ रहा था

"चल अब चोदता हू तेरे भाई की गान्ड, बहू देख रही है ना?" सिमर दीदी को रजत बोले फिर माँ की ओर मुड कर बोले "माँ जी, आपके बेटे की कुँवारी गान्ड का उद्घाटन रजत और मेरे लंड से होना था देखिए बड़ा प्यारा बेटा है आपका अब देखिए उसे कैसा सुख देते हैं आज" और हचक हचक कर मेरी गान्ड चोदने लगे
 
जीजाजी उठकर कुर्सी की पीठ पकडकर खड़े हो गये मैं जीजाजी के चूतड पकडकर चोद रहा था और जेठजी मन लगाकर मेरी गान्ड मार रहे थे "साले मादरचोद, आज तेरी गान्ड को फुकला कर दूँगा तेरी माँ के भोसडे जैसा अरी ओ चुदैल रंडी मांजी, आपके बेटे की कैसी शामत करेंगे अब देखना, साले की गान्ड ऐसी खोल देंगे कि हाथ चला जाएगा" उत्तेजना से मेरे निपल मसलते हुए वे बोले

गाली गलौज का दौर शुरू हो गया था जीजाजी बोले "अरे साले, मार ज़ोर से, तेरी दीदी की मैं रोज मारता हू, आज देखू तुझ में कितना दम है"

मैंने हान्फते हुए उनके चूतडो के बीच लंड पेलते हुए कहा "जीजाजी, आज आपको पता चलेगा गान्ड मराना क्या होता है, आपकी छिनाल अम्मा की कसम, आज आप की गान्ड इतनी गहरी चोदून्गा कि आपके मुँह से निकल आएगा मेरा लंड"

उधर माँ जो अब तक खामोश इस चुदाई का मज़ा ले रही थी, इस नोंक झोंक में शामिल हो गयी "सिमर, आ, तेरी सास की चूत की गहराई देखू, बहुत बक बक करती है, मेरी बुर देखो, मैं एक साथ इनके दोनों चोदू बेटों को अंदर ले लूँ पूरा अमित बेटे, फाड़ दे तेरी बहन के इस हरामी आदमी की गान्ड और वो जो बक रहा है उसका भाई, उसके लंड को ऐसा निचोड़ अपनी गान्ड से कि साला कल उठ ना पाए" सिमर भी माँ की आवाज़ में आवाज़ मिला कर मुझे उकसा रही थी

उधर शन्नो जी चिल्ला चिल्ला कर अपने बेटों को प्रोत्साहित कर रही थीं "इस लडके का कचूमर निकाल दो बेटे, बच के वापस ना जाने पाए इसकी माँ की बुर तो मैं आज ऐसी निचोड़ दूँगी कि फिर कभी इसमें रस नहीं आएगा"

सब अब घमासान चोद रहे थे परिवार सेक्स का असीम सुख सबको पागल कर रहा था एक एक करके सब झडे और लस्त होकर ढेर हो गये

"मज़ा आ गया भाई, बहुत दिनों में ऐसा मज़ा आया अम्मा, ये लडका तो हीरा है अम्मा" जेठजी सुख में डूबे हुए बोले "और इसकी माँ रस की ख़ान है अपनी बेटी जैसी, देखो, बुर से कितना पानी बह रहा है!" शन्नो जी माँ की बुर पर मुँह लगाकर बोलीं

आराम करने के बाद आगे चुदाई शुरू हुई बस अब ज़रा आराम से मज़ा लिया गया हम तीनों मर्दों ने मिलकर सब औरतों को एक एक करके तीनो छेदों में एक साथ चोदा माँ की काफ़ी कुटाई हो चुकी था इसलिए उसे दस मिनिट बिना झडे चोद कर हम दीदी पर टूट पड़े दीदी को पहली बार तीन लंडों का सुख मिला वह इतनी झडी कि सुख से एकदम ढीली हो गयी
 
शन्नो जी पहले ना नुकुर कर रही थीं, ख़ास कर गान्ड मराने को जेठजी नाराज़ हो गये "माँ आज नखरा कर रही है, बरसों से हमसे मराती आ रही है, हम सब में बड़ा लंड तेरा है अमित, तू मार इसकी गान्ड"

ज़बरदस्ती मैंने शन्नो जी की पहाड सी गान्ड में लंड घुसेडा उनके दोनों बेटे पहले ही उनकी चूत और मुँह में जगह बना चुके थे इसलिए बेचारी गों गों के सिवाय कुछ कर भी नहीं पाईं लगता है उन्हें दुखा होगा क्योंकि जब भी मैं लंड उनकी गान्ड में पेलता, उनका शरीर ऐंठ सा जाता पर मज़ा भी उन्होंने लिया, खूब चूतड उछाल उछाल कर चुदवाया और गान्ड मराई

इस मस्तानी रात की निरंतर चुदाई से सब इतने थक गये थे कि सो कर सब देर से उठे शन्नो जी ने दूसरे दिन और रात का सेक्स बंद कर दिया बोलीं कि बहुत हो गया, अब ज़रा एक दिन आराम करके दूसरे दिन से ज़रा मन लगाकर चुदाई करेंगे, ऐसे जानवरों जैसे नहीं

चौबीस घंटे के आराम से हम फिर ताजे तवाने हो गये थे सुबह उठने के बाद नहा धो कर जब मैं और माँ वापस आए तो हमे पकडकर अलग अलग कमरे में ले जाया गया दीदी और जीजाजी ने मुझे पकड़ा था और शन्नो जी और जेठजी ने माँ को

माँ बोली "अरे ये क्या कर रहे हो? और मेरे बेटे और मुझे ऐसे अलग अलग कमरे में क्यों ले जा रहे हो?"

जेठजी बोले "वो इसलिए मांजी कि गाय को दुहने के पहले खूटे से बाँध दिया जाता है वैसे ही आज आप को बाँध कर दूहा जाएगा" और वे कमरे के अंदर माँ को ले गये

मुझे दूसरे कमरे में ले जाकर जीजाजी ने पलंग पर लिटा दिया दीदी ने मुझे नंगा करके मेरे हाथ पैर पलंग के चारों कोने में बाँध दिए मैं अब थोड़ा घबरा गया था पर दीदी जिस तरह से शैतानी से हँस रही थी, मैं समझ गया कि ये लोगे कोई कामुक खेल खेलने वाले होंगे मेरे और माँ के साथ मैंने फिर दीदी से पूछा

दीदी बोली "अरे ये यहाँ की प्रथा है, मैं जब आई थी नई घर में तब ऐसा ही हुआ था असल में ये लोग तुम्हें और माँ को मन भर कर हर तरह से भोगना चाहते हैं, वो भी एक एक करके अकेले में अब सब अलग अलग काम में होते हैं, कोई आफ़िस, कोई घर का काम इसलिए तुम दोनों को ऐसे तैयार करके बाँध दिया है जब जिसका जी चाहेगा और जिसके पास जैसा समय होगा, तुम लोगों को चोद जाया करेगा"

जीजाजी मेरे शरीर को प्यार से सहलाते हुए बोले "तेरी दीदी को हमने ऐसे ही हफ्ते भर कमरे में बंद रखा था खाना पीना भी वहीं होता था

क्रमशः……………..

 
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