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Guest
फिर थोड़ी और बहस हुई और विक्रम ने सब को समझा कर शांति से बाहर ले के गया और विवाह की विधि सम्पन हुई. सब मेहमआनो ने खाना खाया और रात तक मिजबानी चलती रही. थके हुए किशोरीलाल, राजेश्वरिदेवी, बंसी ने दोनो बच्चे समेत विक्रम से बीदा ली और अपने अपने रूम मे चले गये तब तक कृष्णा और विक्रम ऐसे ही सुबह से थके हुए बैठे रहे और बाद मे विक्रम के रूम से थोड़ी दूर पचवे कमरे को सुहागरात के रूप मे सजाया गया था वाहा जाने लगे. दोनो रूम के अंदर आ गये और विक्रम और कृष्णा दोनो थोड़ी देर तो बैठ ही गये. दोनो थकान से चूर हो चुके थे. खास कर के विक्रम को पिच्छाले दो दिन से बिल्कुल आराम नही मिला था. आँखे लाल हो चुकी थी. सब से पहले वो फ्रेश हो ने चला गया और नाहकर फ्रेश होने के बाद वाइट कलर के खुलते कपड़ो मे वापस आ गया और कृष्णा फ्रेश होने चली गयी. फुलो की महक वातावरण को मादक बना रही थी और विक्रम कृष्णा के इंतेज़ार मे बेड पे बैठा और फूल से खेलने लगा और आनेवाली घड़ियो का इंतेज़ार करने लगा. विक्रम के माइंड मे ये भी चल रहा था की ये शांति, ये सुहागरात आनेवाले तूफान पहले की शांति है. कल से ही एक नये ज़लज़ले का सामना करना पड़ेगा.
कृष्णा ने फ्रेश होकर शादी का जोड़ा उतारकर पिंक कलर की निघट्य पहन ली थी. विदेश मे वो जानती थी की रात को लॅडीस क्या पहेन्ति है. पिंक नाइटी और अंदर पिंक अंडरगार्मेंट्स पहनकर वो बाथरूम से बाहर निकली. उसकी नज़र नीची थी, लेकिन जब थोड़े वक़्त कुच्छ हिलचल नही हुई तो उसने नज़रे उठाकर देखा तो बेड पर विक्रम खर्राटे ले रहा था. बेड के बीच ही पैर फैलाकर आधा बैठा और अहदा सोया हुवा विक्रम हाथो के सहारे कूसिओं पर रख के जैसे इंतेज़ार करते करते ही नींद की आगोश मे खो गया था. आदमी मशीन नही आदमी ही होता है और उसे आराम की भी ज़रूरत होती है. लेकिन विक्रम को करीब तीन दीनो से आराम नही मिल रहा था और उसके ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन और सबसे बड़ी रात सुहागरात के दिन ही उसके ना चाहते हुवे भी सो चुका था. लंबे सफ़र कर के जब पातिदेव अपनी पत्नी को लेकर वापस आते है तो रात को कई पातिदेव सुहागरात तो क्या, बात तक करने जैसे नही रहते.
कृष्णा को उसे देखते ही हसी आ गयी और उसने सोचा की वो विक्रम को डिस्टर्ब नही करेगी. वैसे उसको फुल रेस्ट मिल चुका था और उसे मालूम था की कल रात के बाद आज की रात तो विक्रम ज़रूर उसे नही छ्चोड़ेगा तो वो मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो के आई थी. लेकिन विक्रम की हालत देखकर उसने आराम से अपने बाल अच्छे किए. और आराम से बेड के पास आई. थोड़ी देर वो रुकी और विक्रम का मासूम चेहरा देखने लगी. उसे बहुत प्यार आने लगा. बड़ी मिन्नतो के बाद आज उसके नसीब ये खुशिया आई थी. आज विक्रम ने शराब भी नही पी रखी थी और उसका चेहरा चमक रहा था. कृष्णा विक्रम का निर्दोष चेहरा पहली बार देख रही थी. उसको विचार आया की अगर उसके पिता ने ग़लती ना की होती और अगर विक्रम के पिताजी ने वो अग्रीमेंट ना बनाया होता तो शायद विक्रम कभी भी शराब ज़्यादा नही पीता और उसे कभी भी प्रिन्स के सामने अपने जिस्म की नुमास नही करनी पड़ती. आज तक कृष्णा ने विक्रम को शराब के नशे मे ही देखा था. लेकिन एक निर्दोस पति के स्वरूप मे विक्रम कोई वरदान के स्वरूप दिख रहा था.
कृष्णा ने धीरे से उठाकर नाइट लॅंप जलाया और मैं लाइट्स ऑफ कर दिया. खास विक्रम की चाय्स से ब्लू और ग्लोरी पिंक कलर के 4 नाइट लॅंप पूरे कमरे को मदहोश बना रहे थे. कृष्णा के आने से पहले विक्रम ने पॅरिस का रूम फ्रेशनेर आफिल लेव्लिन लगाया हुवा था. उसकी मादक खुसबू मे कृष्णा एक अजीब रोमांच महसूस कर रही थी. उसे कभी भी कल्पना नही हुई थी की कभी उसकी ज़िंदगी मे ऐसी सुहागरात आनेवाली है जहा उसका सच्चा प्यार विक्रम शादी के बाद उसके साथ ऐसे कमरे मे सुहागरात की सेज पर एकसाथ हो. लेकिन किस्मत ने बाजी पलटी थी और आज सचमुच वो अपने प्यार के साथ एक ही बेड पर थी. बस मुश्किल ये था की विक्रम बड़े बड़े खर्राटे ले रहा था और कृष्णा का जिस्म गर्मी पकड़ रहा था. नाइट लॅंप की रोशनी मे कृष्णा खड़ी हुई और आईने के सामने आई. पिंक नाइटी मे उसका सुंदर बदन और घाटीला लग रहा था. उसने अपने जिस्म पर नज़र डाली और देखा की खुद की साँसे तेज़ हो रही है. वो खुद अपनी ही नज़ारो का सामना नही कर पाई और दो हाथो से मूह च्छूपा लिया और थोड़ी देर मे वापस बेड पर आके बैठ गयी. विक्रम ऐसे ही हाथो के सहारे जैसे उसका इंतेज़ार कर रहा हो वैसे मूह खुल्ला रख के सो रहा था.
अचानक कृष्णा की नज़र विक्रम की वाइट कलर की ट्राउज़र पर गया. वाहा नींद मे भी विक्रम का औजार तना हुवा था. एक ध्यान से कृष्णा उसे देखती रही. कृष्णा थोड़ी देर देखती रही फिर बाद मे अपने आप ही उसका हाथ विक्रम के साधन पर गया. नींद मे भी कृष्णा का हाथ पड़ते ही विक्रम के औजार को झटके आने लगे. कृष्णा की तंद्रा टूट गयी और एक ही झटके से उसने अपना हाथ वापस ले लिया. उसको खुद अपने आप पर ही हसी आई और फिर उसे मस्ती सूझी और फिर उसने हाथ वही लगाया और फिर नतीजा वही. दूसरा झटका आया और फ़ौरन उसने अपना हाथ हटा लिया. तीन चार बार ऐसा करने से विक्रम का ट्राउज़र तन के खिच गया.
फिर कृष्णा ने सोचा की ज़्यादा तंग नही करते हुए वो आराम से विक्रम से उल्टा होकर सोने लगी.
‘’आग लगाकर सोना माना है’’ एक आवाज़ आई और कृष्णा फ़ौरन उठ खड़ी हुई. उसने जल्दी दौड़कर लाइट्स जलाई तो देखा की विक्रम की आँखे खुल्ली थी और वो वैसे ही पड़ा था जब वो नींद मे था. कृष्णा का मूह खुल्ला रह गया और गले मे सूखा पड़ गया उसे अंदाज़ा हो गया कि उसने क्या कर डाला था. अब इसका अंत क्या होनेवाला था ये सोचकर ही उसकी योनि ने पानी छ्चोड़ना चालू कर दिया. छाती तेज़ से धड़कने लगी. वो लाइट्स के पास ऐसे ही आँखे फाड़ फड़कर खड़ी रही. उसे कुच्छ नही सूझ रहा था कि वो क्या करे.
क्रमशः..............
कृष्णा ने फ्रेश होकर शादी का जोड़ा उतारकर पिंक कलर की निघट्य पहन ली थी. विदेश मे वो जानती थी की रात को लॅडीस क्या पहेन्ति है. पिंक नाइटी और अंदर पिंक अंडरगार्मेंट्स पहनकर वो बाथरूम से बाहर निकली. उसकी नज़र नीची थी, लेकिन जब थोड़े वक़्त कुच्छ हिलचल नही हुई तो उसने नज़रे उठाकर देखा तो बेड पर विक्रम खर्राटे ले रहा था. बेड के बीच ही पैर फैलाकर आधा बैठा और अहदा सोया हुवा विक्रम हाथो के सहारे कूसिओं पर रख के जैसे इंतेज़ार करते करते ही नींद की आगोश मे खो गया था. आदमी मशीन नही आदमी ही होता है और उसे आराम की भी ज़रूरत होती है. लेकिन विक्रम को करीब तीन दीनो से आराम नही मिल रहा था और उसके ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन और सबसे बड़ी रात सुहागरात के दिन ही उसके ना चाहते हुवे भी सो चुका था. लंबे सफ़र कर के जब पातिदेव अपनी पत्नी को लेकर वापस आते है तो रात को कई पातिदेव सुहागरात तो क्या, बात तक करने जैसे नही रहते.
कृष्णा को उसे देखते ही हसी आ गयी और उसने सोचा की वो विक्रम को डिस्टर्ब नही करेगी. वैसे उसको फुल रेस्ट मिल चुका था और उसे मालूम था की कल रात के बाद आज की रात तो विक्रम ज़रूर उसे नही छ्चोड़ेगा तो वो मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो के आई थी. लेकिन विक्रम की हालत देखकर उसने आराम से अपने बाल अच्छे किए. और आराम से बेड के पास आई. थोड़ी देर वो रुकी और विक्रम का मासूम चेहरा देखने लगी. उसे बहुत प्यार आने लगा. बड़ी मिन्नतो के बाद आज उसके नसीब ये खुशिया आई थी. आज विक्रम ने शराब भी नही पी रखी थी और उसका चेहरा चमक रहा था. कृष्णा विक्रम का निर्दोष चेहरा पहली बार देख रही थी. उसको विचार आया की अगर उसके पिता ने ग़लती ना की होती और अगर विक्रम के पिताजी ने वो अग्रीमेंट ना बनाया होता तो शायद विक्रम कभी भी शराब ज़्यादा नही पीता और उसे कभी भी प्रिन्स के सामने अपने जिस्म की नुमास नही करनी पड़ती. आज तक कृष्णा ने विक्रम को शराब के नशे मे ही देखा था. लेकिन एक निर्दोस पति के स्वरूप मे विक्रम कोई वरदान के स्वरूप दिख रहा था.
कृष्णा ने धीरे से उठाकर नाइट लॅंप जलाया और मैं लाइट्स ऑफ कर दिया. खास विक्रम की चाय्स से ब्लू और ग्लोरी पिंक कलर के 4 नाइट लॅंप पूरे कमरे को मदहोश बना रहे थे. कृष्णा के आने से पहले विक्रम ने पॅरिस का रूम फ्रेशनेर आफिल लेव्लिन लगाया हुवा था. उसकी मादक खुसबू मे कृष्णा एक अजीब रोमांच महसूस कर रही थी. उसे कभी भी कल्पना नही हुई थी की कभी उसकी ज़िंदगी मे ऐसी सुहागरात आनेवाली है जहा उसका सच्चा प्यार विक्रम शादी के बाद उसके साथ ऐसे कमरे मे सुहागरात की सेज पर एकसाथ हो. लेकिन किस्मत ने बाजी पलटी थी और आज सचमुच वो अपने प्यार के साथ एक ही बेड पर थी. बस मुश्किल ये था की विक्रम बड़े बड़े खर्राटे ले रहा था और कृष्णा का जिस्म गर्मी पकड़ रहा था. नाइट लॅंप की रोशनी मे कृष्णा खड़ी हुई और आईने के सामने आई. पिंक नाइटी मे उसका सुंदर बदन और घाटीला लग रहा था. उसने अपने जिस्म पर नज़र डाली और देखा की खुद की साँसे तेज़ हो रही है. वो खुद अपनी ही नज़ारो का सामना नही कर पाई और दो हाथो से मूह च्छूपा लिया और थोड़ी देर मे वापस बेड पर आके बैठ गयी. विक्रम ऐसे ही हाथो के सहारे जैसे उसका इंतेज़ार कर रहा हो वैसे मूह खुल्ला रख के सो रहा था.
अचानक कृष्णा की नज़र विक्रम की वाइट कलर की ट्राउज़र पर गया. वाहा नींद मे भी विक्रम का औजार तना हुवा था. एक ध्यान से कृष्णा उसे देखती रही. कृष्णा थोड़ी देर देखती रही फिर बाद मे अपने आप ही उसका हाथ विक्रम के साधन पर गया. नींद मे भी कृष्णा का हाथ पड़ते ही विक्रम के औजार को झटके आने लगे. कृष्णा की तंद्रा टूट गयी और एक ही झटके से उसने अपना हाथ वापस ले लिया. उसको खुद अपने आप पर ही हसी आई और फिर उसे मस्ती सूझी और फिर उसने हाथ वही लगाया और फिर नतीजा वही. दूसरा झटका आया और फ़ौरन उसने अपना हाथ हटा लिया. तीन चार बार ऐसा करने से विक्रम का ट्राउज़र तन के खिच गया.
फिर कृष्णा ने सोचा की ज़्यादा तंग नही करते हुए वो आराम से विक्रम से उल्टा होकर सोने लगी.
‘’आग लगाकर सोना माना है’’ एक आवाज़ आई और कृष्णा फ़ौरन उठ खड़ी हुई. उसने जल्दी दौड़कर लाइट्स जलाई तो देखा की विक्रम की आँखे खुल्ली थी और वो वैसे ही पड़ा था जब वो नींद मे था. कृष्णा का मूह खुल्ला रह गया और गले मे सूखा पड़ गया उसे अंदाज़ा हो गया कि उसने क्या कर डाला था. अब इसका अंत क्या होनेवाला था ये सोचकर ही उसकी योनि ने पानी छ्चोड़ना चालू कर दिया. छाती तेज़ से धड़कने लगी. वो लाइट्स के पास ऐसे ही आँखे फाड़ फड़कर खड़ी रही. उसे कुच्छ नही सूझ रहा था कि वो क्या करे.
क्रमशः..............