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जय ने सिर हिलाकर हा कहा और दोनो वाहा जाकर बैठ गये. यहा से दोनो हॉस्टिल बराबर दिखती थी और दोनो बिल्कुल सब को दिखाई दे वैसे ही बैठे थे. स्ट्रीट लाइट का प्रकाश बिल्कुल पड़ता था जहा वे बैठे थे.
जय,”बाकी फ्रेंड्स कहा है?’’
नीशी,”पता नही कौन कहा जाकर क्या कर रहा है, साजन तो पी रहा होगा शायद.’’ इतना कहकर उसने अपनी फॅवुरेट क्लशसिस मेंथोल सिगरेट निकली और जलाकर एक लंबा कश लिया और दूसरी जय को ऑफर की.
जय,”मैं नही पीता.’’
नीशी,”फोर्स नही करूँगी लेकिन बता देती हू तू ज़रूर शुरू करेगा.’’
जय हॅस्कर बोला,’’देखा जाएगा लेकिन अभी तो नही पीता हू.’’
थोड़ी देर दोनो चुप रहे फिर जय बोला,”क्या बात है नीशी?’’
नीशी काश खिचकर बोली,”कुछ नही बस यू ही बैठ नही सकती तेरे साथ क्या?’’
‘’बैठ तो कोई भी सकता है, लेकिन तू सब को छ्चोड़कर यहा मेरे साथ अकेली बैठने नही आई, ज़रूर कुच्छ बात है, बोल क्या बात है वरना मैं चलता हू.’’ कहकर वो उठ खड़ा हुवा.
निशिने हाथ पकड़कर उसे धक्का दिया और फिर से ज़मीन पर बिठा दिया और बोली,”बड़े जिद्दी हो यार, चल बता देती हू, मुझे ये जानना है कि क्या वजह है कि तुझे चक्कर आ गया था, क्या सचमुच कोई बात है या साजन की हरकत देखकर चक्कर आ गया था.’’
जय हस्ने लगा,”साजन की हरकत देखकर मुझे क्यू चक्कर आता भला, लेकिन सच्ची मे मेरे पापा की कसम बस, मुझे ऐसा बचपन से होता है.’’
‘’पापा के बहुत करीब लगते हो?’’ नीशी ने कश खिचकर पुचछा, लेकिन उसके पुछने पर एक दर्द जो था वो जय की आँखो से च्छूप ना सका.
जय ने सिर धीरे से हिलाकर हा की और धीरे से बोला,”नीशी, जिंदगी भी अजीब है, मेरे पापा का कोई पता नही और मुझे उसकी याद सताती है, लेकिन तेरे पापा करीब है तो तू उसके करीब नही.’’
नीशी चौक पड़ी और देखती ही रह गयी फिर उसने पुचछा,”ये तेरे को किस ने बताया कि मेरी मेरे पापा से नही बनती है.’’
जय हस पड़ा और बोला,”अभी अभी तूने.’’
नीशी बोली,”क्या?’’
‘’हा यार मैने तो तेरी आँखो से पढ़कर सिर्फ़ एक अनुमान किया था लेकिन सच तो अभी तूने ही बता दिया.’’ जय ने हॅस्कर बोला.
‘’ओह नो, तू आदमी है या जादूगर, तू ज़रूर साइन्स का नही लेकिन स्यकॉलोगी का स्टूडेंट होना चाहिए था. मन की बात आँखो से ही पढ़ लेता है.’’ नीशी बोल पड़ी.
‘’नही नीशी, मुझे ईश्वर ने कुदरती बक्षिस दी है कि अगर कोई दर्द तुम्हारे दिल मे हो तो मुझे ज़रूर नज़र आ जाता है.’’ जय ने आकाश की ओर देखते हुए कहा.
‘’बड़े दिलचशप इंसान हो, ठीक है मुझे बताओ ना कि असल मे बात क्या थी’’ नीशी ने फिर पुच्छ लिया.
‘’देख नीशी तुझे अकेले मैं सब बता रहा हू, वाहा मैं बताता तो शायद कोई मेरी हसी उड़ाता’’ जय ने प्रॉमिस माँगा.
‘’प्रॉमिस बस ये बात सिर्फ़ हंदोनो तक रहेगी, अब बता’’ नीशी ने प्रॉमिस दिया.
‘’बचपन से कभी कभी मेरी आँखो के सामने अंधेरा च्छा जाता है, फिर थोड़ी देर मे एक लड़की निर्वस्त्र हालत मे मुझे दिखाई देती है, लेकिन सिर्फ़ उसकी छाती दिखती है और फिर धीरे धीरे एक संत महात्मा दिखाई देते है और मेरा मन बिल्कुल शांत हो जाता है. कभी कभी मेरे बाई ओर एक नस दुखती है, जिसे माइग्रन की नस कहते है. जिस दिन ये होता है, मुझे ना ही तो कोई आवाज़ सहन होती है और ना ही तो रोशनी सहन होती है. नस पर स्ट्रोक आते है. आँखो से पानी बहना शुरू हो जाता है. जैसे जैसे दिन आगे बढ़ता है, मेरा दर्द नस से लेकर बढ़कर सिर तक पहुच जाता है और जब रात की नींद होती है तभी ये दर्द जाता है.’’ जय ने सच्चाई बताई.
‘’कमाल है, लेकिन इसका क्या मतलब है’’ नीशी ने कहा.
‘’पता नही, लेकिन मेरी मा कहती है कि मेरा जन्म कोई खास मकसद के लिए हुवा है जिस से इस पृथ्वी के उद्धार मे मेरे से कुच्छ होनेवाला है. मैं ये तो नही जानता कि क्या होनेवाला है लेकिन मेरी मा बताती है तो मेरे लिए सोने के समान है’’ जय ने दिल से कहा.
फिर जय और नीशी के बीच फॅमिली की बाते हुई और नीशी को पता चला कि जय के फादर बचपन से ही गायब है और कहा है वो किसी को पता नही है, शायद उसकी मा को पता है लेकिन वो बताती नही और जय को इसका कोई अफ़सोस नही है.
तभी पिछे से साजन निकल आया और उसके साथ दो तीन लड़कियो और लड़को का ग्रूप था और सब हस्ने लगे और साजन बोला,’’साला तू क्या पृथ्वी का उद्धार करनेवाला है ये तो बता ?’’
साजन पूरा नशे मे था और जय की मज़ाक उड़ा रहा था. जय नज़रे उठाकर हस्ने लगा और बोला,’’साजन ये सब तेरे बस की बाते नही है.’’
‘’ठीक… है…… भाई,,, लेकिन ये ……..तेरे बस …… की बात नही है.. ‘’ साजन ने एक लड़की को बाँहो मे भरते हुए बोला.
जय हस पड़ा और खड़ा हुवा और दो हाथ से साजन के पैर पड़ा और बोला,”ठीक है कामदेव आप सही हो ये मेरे बस की बात नही है, इसे आप ही सम्भालो’’ कहकर वो वापस जाने लगा.
‘’अरे रठाते हो क्यू मेरी जान, तुम आराम से बैठो ना, वैसे भी नीशी को एक तू ही तो मिला है, वरना सब के साथ तो लड़ती फिरती है’’ साजन ने नीशी को छेड़ते हुए कहा.
‘’तो क्या दूसरो की तरह इस वक़्त तेरे साथ फिरू?’’ कहकर नीशी ने एक चपत फिर साजन को लगाई और सब हस पड़े.
कुच्छ भी हो लेकिन साजन और नीशी कभी लड़ते भी थे लेकिन उसकी दोस्ती अटूट थी.
क्रमशः..............
जय,”बाकी फ्रेंड्स कहा है?’’
नीशी,”पता नही कौन कहा जाकर क्या कर रहा है, साजन तो पी रहा होगा शायद.’’ इतना कहकर उसने अपनी फॅवुरेट क्लशसिस मेंथोल सिगरेट निकली और जलाकर एक लंबा कश लिया और दूसरी जय को ऑफर की.
जय,”मैं नही पीता.’’
नीशी,”फोर्स नही करूँगी लेकिन बता देती हू तू ज़रूर शुरू करेगा.’’
जय हॅस्कर बोला,’’देखा जाएगा लेकिन अभी तो नही पीता हू.’’
थोड़ी देर दोनो चुप रहे फिर जय बोला,”क्या बात है नीशी?’’
नीशी काश खिचकर बोली,”कुछ नही बस यू ही बैठ नही सकती तेरे साथ क्या?’’
‘’बैठ तो कोई भी सकता है, लेकिन तू सब को छ्चोड़कर यहा मेरे साथ अकेली बैठने नही आई, ज़रूर कुच्छ बात है, बोल क्या बात है वरना मैं चलता हू.’’ कहकर वो उठ खड़ा हुवा.
निशिने हाथ पकड़कर उसे धक्का दिया और फिर से ज़मीन पर बिठा दिया और बोली,”बड़े जिद्दी हो यार, चल बता देती हू, मुझे ये जानना है कि क्या वजह है कि तुझे चक्कर आ गया था, क्या सचमुच कोई बात है या साजन की हरकत देखकर चक्कर आ गया था.’’
जय हस्ने लगा,”साजन की हरकत देखकर मुझे क्यू चक्कर आता भला, लेकिन सच्ची मे मेरे पापा की कसम बस, मुझे ऐसा बचपन से होता है.’’
‘’पापा के बहुत करीब लगते हो?’’ नीशी ने कश खिचकर पुचछा, लेकिन उसके पुछने पर एक दर्द जो था वो जय की आँखो से च्छूप ना सका.
जय ने सिर धीरे से हिलाकर हा की और धीरे से बोला,”नीशी, जिंदगी भी अजीब है, मेरे पापा का कोई पता नही और मुझे उसकी याद सताती है, लेकिन तेरे पापा करीब है तो तू उसके करीब नही.’’
नीशी चौक पड़ी और देखती ही रह गयी फिर उसने पुचछा,”ये तेरे को किस ने बताया कि मेरी मेरे पापा से नही बनती है.’’
जय हस पड़ा और बोला,”अभी अभी तूने.’’
नीशी बोली,”क्या?’’
‘’हा यार मैने तो तेरी आँखो से पढ़कर सिर्फ़ एक अनुमान किया था लेकिन सच तो अभी तूने ही बता दिया.’’ जय ने हॅस्कर बोला.
‘’ओह नो, तू आदमी है या जादूगर, तू ज़रूर साइन्स का नही लेकिन स्यकॉलोगी का स्टूडेंट होना चाहिए था. मन की बात आँखो से ही पढ़ लेता है.’’ नीशी बोल पड़ी.
‘’नही नीशी, मुझे ईश्वर ने कुदरती बक्षिस दी है कि अगर कोई दर्द तुम्हारे दिल मे हो तो मुझे ज़रूर नज़र आ जाता है.’’ जय ने आकाश की ओर देखते हुए कहा.
‘’बड़े दिलचशप इंसान हो, ठीक है मुझे बताओ ना कि असल मे बात क्या थी’’ नीशी ने फिर पुच्छ लिया.
‘’देख नीशी तुझे अकेले मैं सब बता रहा हू, वाहा मैं बताता तो शायद कोई मेरी हसी उड़ाता’’ जय ने प्रॉमिस माँगा.
‘’प्रॉमिस बस ये बात सिर्फ़ हंदोनो तक रहेगी, अब बता’’ नीशी ने प्रॉमिस दिया.
‘’बचपन से कभी कभी मेरी आँखो के सामने अंधेरा च्छा जाता है, फिर थोड़ी देर मे एक लड़की निर्वस्त्र हालत मे मुझे दिखाई देती है, लेकिन सिर्फ़ उसकी छाती दिखती है और फिर धीरे धीरे एक संत महात्मा दिखाई देते है और मेरा मन बिल्कुल शांत हो जाता है. कभी कभी मेरे बाई ओर एक नस दुखती है, जिसे माइग्रन की नस कहते है. जिस दिन ये होता है, मुझे ना ही तो कोई आवाज़ सहन होती है और ना ही तो रोशनी सहन होती है. नस पर स्ट्रोक आते है. आँखो से पानी बहना शुरू हो जाता है. जैसे जैसे दिन आगे बढ़ता है, मेरा दर्द नस से लेकर बढ़कर सिर तक पहुच जाता है और जब रात की नींद होती है तभी ये दर्द जाता है.’’ जय ने सच्चाई बताई.
‘’कमाल है, लेकिन इसका क्या मतलब है’’ नीशी ने कहा.
‘’पता नही, लेकिन मेरी मा कहती है कि मेरा जन्म कोई खास मकसद के लिए हुवा है जिस से इस पृथ्वी के उद्धार मे मेरे से कुच्छ होनेवाला है. मैं ये तो नही जानता कि क्या होनेवाला है लेकिन मेरी मा बताती है तो मेरे लिए सोने के समान है’’ जय ने दिल से कहा.
फिर जय और नीशी के बीच फॅमिली की बाते हुई और नीशी को पता चला कि जय के फादर बचपन से ही गायब है और कहा है वो किसी को पता नही है, शायद उसकी मा को पता है लेकिन वो बताती नही और जय को इसका कोई अफ़सोस नही है.
तभी पिछे से साजन निकल आया और उसके साथ दो तीन लड़कियो और लड़को का ग्रूप था और सब हस्ने लगे और साजन बोला,’’साला तू क्या पृथ्वी का उद्धार करनेवाला है ये तो बता ?’’
साजन पूरा नशे मे था और जय की मज़ाक उड़ा रहा था. जय नज़रे उठाकर हस्ने लगा और बोला,’’साजन ये सब तेरे बस की बाते नही है.’’
‘’ठीक… है…… भाई,,, लेकिन ये ……..तेरे बस …… की बात नही है.. ‘’ साजन ने एक लड़की को बाँहो मे भरते हुए बोला.
जय हस पड़ा और खड़ा हुवा और दो हाथ से साजन के पैर पड़ा और बोला,”ठीक है कामदेव आप सही हो ये मेरे बस की बात नही है, इसे आप ही सम्भालो’’ कहकर वो वापस जाने लगा.
‘’अरे रठाते हो क्यू मेरी जान, तुम आराम से बैठो ना, वैसे भी नीशी को एक तू ही तो मिला है, वरना सब के साथ तो लड़ती फिरती है’’ साजन ने नीशी को छेड़ते हुए कहा.
‘’तो क्या दूसरो की तरह इस वक़्त तेरे साथ फिरू?’’ कहकर नीशी ने एक चपत फिर साजन को लगाई और सब हस पड़े.
कुच्छ भी हो लेकिन साजन और नीशी कभी लड़ते भी थे लेकिन उसकी दोस्ती अटूट थी.
क्रमशः..............