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किस्मत का खेल पार्ट --51
गतान्क से आगे.......
अचानक अंकल घुटनो के बल पर खड़े हुए और निशा की दोनो टाँगे अपने कंधे पर ले ली और फिर से साधन अंदर डाल दिया. अब निशा मूह खोल कर के रो रही थी, क्यूकी अंकल ने हाथ हटा दिया था, उसे मालूम था कि अब निशा को च्छुरी या मूह दबाने की ज़रूरत नही पड़ेगी, नीचे के दर्द से ही वो उठ नही पाएगी. अंकल ने दोनो पैर पकड़ के वाइड किया और तेज़ी से धक्के देने लगे. 5 मिनट के बाद अंकल को कुच्छ याद आया और उसने अपना साधन बाहर निकाल के ज़ोर शोर से हिलाकर आआआअहह ऊऊऊहह कर के सारा रस निशा की छाती पर छ्चोड़ दिया.
2 मिनट अंकल ऐसे ही पड़े रहे फिर जल्दी से खड़ा होकर एक पुराना कपड़ा लिया और अपना साधन पौछ डाला फिर निशा का पेट और फिर निशा की योनि मे घुसाकर सबकुच्छ साफ कर डाला और जल्दी से उसे पेंटी पहना दी. निशा अभी भी सोई सोई रो रही थी. लेकिन अंकल ने उसे एक ही झटके मे खड़ा किया और स्कर्ट को नीचे सरका लिया और बोले,’’देख अगर किसी को बोला तो बॉम्बे की बाज़ार मे फैक दूँगा, जहा रात को कई बार तेरे साथ बलात्कार होगा. इस से अच्छा है कभी कभी मारे साथ सोया कर समझी. अब जा रोना बंद कर, देख तू मा ना बन जाए इतना मैने ध्यान रखा है और आगे भी रखूँगा. चल जल्दी से मूह हाथ धो डाल और नॉर्मल हो जा. किसी को पता नही लगना चाहिए कि मैने क्या किया है. वरना मैं पोलिसेवाला हू रंडी बनाकर अदालत मे ले जवँगा, कोई तुझे नही बचाने आनेवाला यहा समझी.’’
निशा घबराकर बाथरूम मे चली गयी और वाहा खूब रोई फिर सारे कपड़े निकालकर ठंडे पानी से नहाने लगी. लेकिन नीचे योनीमार्ग पर तो ठंडा पानी भी दाह दे रहा था. दर्द थोड़ा ज़रूर कम हुवा था, लेकिन जो दर्द दिल मे उतर गया था वो कहा निकलेगा. एक पिता समान अंकल ने आज उस पर बलात्कार किया था. सारी पुरुष जात को अब उसकी नज़र कोसती फ़िरेगी. निशा एक बार फिर मूह खुल्ला कर के रोई. लेकिन उस बेचारी को बचानेवाला वाहा कोई नही था.
फिर तो कभी वीक मे दो बार, कभी महीने मे 6 या 7 बार अलग अलग तरीके से अंकल ने बलात्कार का सिलसिला चालू कर दिया. बस वो वीर्य बाहर निकाल देते थे, ता की निशा मा ना बन पाए और उसका राज़, राज़ ही बनकर रह जाए.
निशा 18 साल की हुई तब तक उसके अंकल उसे नौचते रहे. एक दिन निशा और उसके अंकल का फॅमिली (अंकल को संतान थी ही नही तो अंकल और आंटी) राजस्थान की यात्रा पर गये थे और जयपुर के पुराने किल्ले पर देखने गये थे. किल्ले पर उतरते वक़्त अंधेरा हो चला था. निशा उसकी मा से थोड़ी पिछे रह गयी और किल्ले के अंदर अंकल ने उसे फिर से दबोच लिया और मोस्ट ऑफ अंकल निशा के लिए स्कर्ट ही खरीदते थे क्यूकी सेक्स मे आसानी हो जाती थी और अगर ड्यूरिंग सेक्स कोई आता था तो जल्दी से स्कर्ट नीचे और किसी को पता भी नही चलता था कि क्या हो रहा है. किल्ले के अंधेरे मे अंकल ने जल्दी से पेंट की ज़िप खोल डी और निशा की स्कर्ट उची कर के पेंटी को उतारा और साधन को अंदर डाल के ज़ोर से धक्का देने लगे. निशा मना करती रही लेकिन अंकल ने जल्दी से धक्के मारना चालू किया. अब निशा को दर्द नही होता था. क्यूकी पिछले चार सालो से लगातार वो सेक्स झेल रही थी. उसे कोई फ़र्क नही पड़ता था कि उसके साथ क्या हो रहा है. वो सिर्फ़ एक साधन बन के चुपचाप तमाशा देखती थी और उसके अंकल उसे साधन की तरह अलग अलग तरीके से इस्तेमाल किया करते थे.
जयपुर के किल्ले पर जब निशा के अंकल ने उसे दबोच के रखा था तभी वाहा साजन और उसके कुच्छ दोस्त वाहा आए और दूर से देखा तो एक कपल वाहा एंजाय करते हुए उसने देखा. वे लोग हस्ते हुए वाहा से पास होने लगे, अंधेरे मे कुच्छ ज़्यादा दिखाई नही दे रहा था, लेकिन निशा को अचानक हिम्मत आ गयी और उसने कसमसकर एक लात अपने अंकल के साधन पर लगाई और भाग कर वो लड़को के पिछे गयी और प्लीज़ मुझे बचाईए कहकर भागने लगी.
साजन और उसके दोस्त ने एक लड़की को भागते हुए वाहा देखा और निशा दौड़कर वाहा पहुच गयी और बोली,’’प्लीज़ मेरे अंकल से मुझे बचाओ वो मुझ पर रेप कर रहे है.’’
पीछे ही निशा का अंकल आया और उसने अपनी ज़िप बंद कर ली थी और निशा का हाथ पकड़कर खिचा और बोले,’’साली हरामजादि देखता हू कौन तुझे बचाता है ?’’
अब साजन के एक दोस्त ने निशा के अंकल को एक लात लगाई और बोला,’’हरामी अपनी बेटी के समान लड़की पर रेप करता है, इतना ही जलता है तो बाजार मे चला जा ना. घर की बेटी की इज़्ज़त को क्यू लूट रहा है.’’
निशा का अंकल खड़ा हुवा और बोला,’’तू जानता है मैं एक पोलिसेवला हू. एक पोलिसेवाले पर हाथ उठाते हो, अंदर कर दूँगा सब को.’’
साजन और उसके दोस्त हस्ने लगे और साजन बोला,’’ओ बुढ्ढे, इसका बाप यहा का एसपी है, मेरा बाप यहा का मेयर है, ये तीसरे का बाप वकील है, चौथे का बाप होमे मिनिस्टर का चचेरा भाई है. अब भागता है कि और पहचान कराउ.’’
निशा का अंकल भाग गया और साजन ने कहा,’’डरो मत बचाने वाला कभी भी इज़्ज़त पे हाथ नही डालता, हमारे साथ आओ कोई तुम्हारा बाल भी च्छू नही सकता.’’
निशा ने हाथ जोड़कर बोला,’’थॅंक यू, लेकिन नीचे उतरते ही वो फिर वोही करेगा’’ इतना कहकर निशा रो पड़ी. साजन ने उसे दिलासा दिलाया और सब नीचे आए. निशा के अंकल ने नीचे उतरकर अंटी और निशा की मा को बोला था की निशा अभी आ रही है, क्यूकी सच्चाई वो बता नही सकता था इसीलिए चुपचाप देख रहा था. जब निशा गरूर से साजन और उसके दोस्तो के साथ नीचे उतरी तो अंकल के होश उड़ चुके थे उसने दूर से ही सब को हाथ जोड़कर माफी माँगी और कुच्छ नही बोलने का इशारा किया.
लेकिन साजन ने आकर निशा के बारे मे सब को बता दिया और पोलीस की धमकी दी. निशा ने भी अपनी मा को पहलिबार सबकुच्छ एक कोने मे जाकर बता दिया जो साजन को पता नही चला. निशा की मा ने एक ज़ोर का थप्पड़ अंकल को लगाया और फिर निशा को बाँहो मे भरकर रोने लगी. साजन उसे अपने घर ले गया और रात को दोनो को समझाया और निशा को नागपुर अड्मिशन दिला दिया और उसकी मा को वही जयपुर मे ही एक भाड़े का मकान दिलाया और काम भी दिलाया. निशा की पढ़ाई का खर्चा तो समाधि ट्रस्ट उठाता था और उसकी मा का निभाव हो जाता था.
बस यही मेरे ज़िंदगी है कहकर निशा ने नज़रे उठाकर सब के सामने देखा. अब वो बिल्कुल नॉर्मल थी, क्यूकी आज बरसो के बाद उसने पहलिबार पूरी कथा किसी को सुनाई थी. पिच्छाले डेढ़ साल से वो साजन के साथ इसी हॉस्टिल मे रहती थी. साजन को मन ही मन मे चाहती थी, लेकिन वो जानती थी कि कहा साजन और कहा वो, इसीलिए कभी बता ना सकी और ऐसे ही दिन बीत ते चले गये.
गतान्क से आगे.......
अचानक अंकल घुटनो के बल पर खड़े हुए और निशा की दोनो टाँगे अपने कंधे पर ले ली और फिर से साधन अंदर डाल दिया. अब निशा मूह खोल कर के रो रही थी, क्यूकी अंकल ने हाथ हटा दिया था, उसे मालूम था कि अब निशा को च्छुरी या मूह दबाने की ज़रूरत नही पड़ेगी, नीचे के दर्द से ही वो उठ नही पाएगी. अंकल ने दोनो पैर पकड़ के वाइड किया और तेज़ी से धक्के देने लगे. 5 मिनट के बाद अंकल को कुच्छ याद आया और उसने अपना साधन बाहर निकाल के ज़ोर शोर से हिलाकर आआआअहह ऊऊऊहह कर के सारा रस निशा की छाती पर छ्चोड़ दिया.
2 मिनट अंकल ऐसे ही पड़े रहे फिर जल्दी से खड़ा होकर एक पुराना कपड़ा लिया और अपना साधन पौछ डाला फिर निशा का पेट और फिर निशा की योनि मे घुसाकर सबकुच्छ साफ कर डाला और जल्दी से उसे पेंटी पहना दी. निशा अभी भी सोई सोई रो रही थी. लेकिन अंकल ने उसे एक ही झटके मे खड़ा किया और स्कर्ट को नीचे सरका लिया और बोले,’’देख अगर किसी को बोला तो बॉम्बे की बाज़ार मे फैक दूँगा, जहा रात को कई बार तेरे साथ बलात्कार होगा. इस से अच्छा है कभी कभी मारे साथ सोया कर समझी. अब जा रोना बंद कर, देख तू मा ना बन जाए इतना मैने ध्यान रखा है और आगे भी रखूँगा. चल जल्दी से मूह हाथ धो डाल और नॉर्मल हो जा. किसी को पता नही लगना चाहिए कि मैने क्या किया है. वरना मैं पोलिसेवाला हू रंडी बनाकर अदालत मे ले जवँगा, कोई तुझे नही बचाने आनेवाला यहा समझी.’’
निशा घबराकर बाथरूम मे चली गयी और वाहा खूब रोई फिर सारे कपड़े निकालकर ठंडे पानी से नहाने लगी. लेकिन नीचे योनीमार्ग पर तो ठंडा पानी भी दाह दे रहा था. दर्द थोड़ा ज़रूर कम हुवा था, लेकिन जो दर्द दिल मे उतर गया था वो कहा निकलेगा. एक पिता समान अंकल ने आज उस पर बलात्कार किया था. सारी पुरुष जात को अब उसकी नज़र कोसती फ़िरेगी. निशा एक बार फिर मूह खुल्ला कर के रोई. लेकिन उस बेचारी को बचानेवाला वाहा कोई नही था.
फिर तो कभी वीक मे दो बार, कभी महीने मे 6 या 7 बार अलग अलग तरीके से अंकल ने बलात्कार का सिलसिला चालू कर दिया. बस वो वीर्य बाहर निकाल देते थे, ता की निशा मा ना बन पाए और उसका राज़, राज़ ही बनकर रह जाए.
निशा 18 साल की हुई तब तक उसके अंकल उसे नौचते रहे. एक दिन निशा और उसके अंकल का फॅमिली (अंकल को संतान थी ही नही तो अंकल और आंटी) राजस्थान की यात्रा पर गये थे और जयपुर के पुराने किल्ले पर देखने गये थे. किल्ले पर उतरते वक़्त अंधेरा हो चला था. निशा उसकी मा से थोड़ी पिछे रह गयी और किल्ले के अंदर अंकल ने उसे फिर से दबोच लिया और मोस्ट ऑफ अंकल निशा के लिए स्कर्ट ही खरीदते थे क्यूकी सेक्स मे आसानी हो जाती थी और अगर ड्यूरिंग सेक्स कोई आता था तो जल्दी से स्कर्ट नीचे और किसी को पता भी नही चलता था कि क्या हो रहा है. किल्ले के अंधेरे मे अंकल ने जल्दी से पेंट की ज़िप खोल डी और निशा की स्कर्ट उची कर के पेंटी को उतारा और साधन को अंदर डाल के ज़ोर से धक्का देने लगे. निशा मना करती रही लेकिन अंकल ने जल्दी से धक्के मारना चालू किया. अब निशा को दर्द नही होता था. क्यूकी पिछले चार सालो से लगातार वो सेक्स झेल रही थी. उसे कोई फ़र्क नही पड़ता था कि उसके साथ क्या हो रहा है. वो सिर्फ़ एक साधन बन के चुपचाप तमाशा देखती थी और उसके अंकल उसे साधन की तरह अलग अलग तरीके से इस्तेमाल किया करते थे.
जयपुर के किल्ले पर जब निशा के अंकल ने उसे दबोच के रखा था तभी वाहा साजन और उसके कुच्छ दोस्त वाहा आए और दूर से देखा तो एक कपल वाहा एंजाय करते हुए उसने देखा. वे लोग हस्ते हुए वाहा से पास होने लगे, अंधेरे मे कुच्छ ज़्यादा दिखाई नही दे रहा था, लेकिन निशा को अचानक हिम्मत आ गयी और उसने कसमसकर एक लात अपने अंकल के साधन पर लगाई और भाग कर वो लड़को के पिछे गयी और प्लीज़ मुझे बचाईए कहकर भागने लगी.
साजन और उसके दोस्त ने एक लड़की को भागते हुए वाहा देखा और निशा दौड़कर वाहा पहुच गयी और बोली,’’प्लीज़ मेरे अंकल से मुझे बचाओ वो मुझ पर रेप कर रहे है.’’
पीछे ही निशा का अंकल आया और उसने अपनी ज़िप बंद कर ली थी और निशा का हाथ पकड़कर खिचा और बोले,’’साली हरामजादि देखता हू कौन तुझे बचाता है ?’’
अब साजन के एक दोस्त ने निशा के अंकल को एक लात लगाई और बोला,’’हरामी अपनी बेटी के समान लड़की पर रेप करता है, इतना ही जलता है तो बाजार मे चला जा ना. घर की बेटी की इज़्ज़त को क्यू लूट रहा है.’’
निशा का अंकल खड़ा हुवा और बोला,’’तू जानता है मैं एक पोलिसेवला हू. एक पोलिसेवाले पर हाथ उठाते हो, अंदर कर दूँगा सब को.’’
साजन और उसके दोस्त हस्ने लगे और साजन बोला,’’ओ बुढ्ढे, इसका बाप यहा का एसपी है, मेरा बाप यहा का मेयर है, ये तीसरे का बाप वकील है, चौथे का बाप होमे मिनिस्टर का चचेरा भाई है. अब भागता है कि और पहचान कराउ.’’
निशा का अंकल भाग गया और साजन ने कहा,’’डरो मत बचाने वाला कभी भी इज़्ज़त पे हाथ नही डालता, हमारे साथ आओ कोई तुम्हारा बाल भी च्छू नही सकता.’’
निशा ने हाथ जोड़कर बोला,’’थॅंक यू, लेकिन नीचे उतरते ही वो फिर वोही करेगा’’ इतना कहकर निशा रो पड़ी. साजन ने उसे दिलासा दिलाया और सब नीचे आए. निशा के अंकल ने नीचे उतरकर अंटी और निशा की मा को बोला था की निशा अभी आ रही है, क्यूकी सच्चाई वो बता नही सकता था इसीलिए चुपचाप देख रहा था. जब निशा गरूर से साजन और उसके दोस्तो के साथ नीचे उतरी तो अंकल के होश उड़ चुके थे उसने दूर से ही सब को हाथ जोड़कर माफी माँगी और कुच्छ नही बोलने का इशारा किया.
लेकिन साजन ने आकर निशा के बारे मे सब को बता दिया और पोलीस की धमकी दी. निशा ने भी अपनी मा को पहलिबार सबकुच्छ एक कोने मे जाकर बता दिया जो साजन को पता नही चला. निशा की मा ने एक ज़ोर का थप्पड़ अंकल को लगाया और फिर निशा को बाँहो मे भरकर रोने लगी. साजन उसे अपने घर ले गया और रात को दोनो को समझाया और निशा को नागपुर अड्मिशन दिला दिया और उसकी मा को वही जयपुर मे ही एक भाड़े का मकान दिलाया और काम भी दिलाया. निशा की पढ़ाई का खर्चा तो समाधि ट्रस्ट उठाता था और उसकी मा का निभाव हो जाता था.
बस यही मेरे ज़िंदगी है कहकर निशा ने नज़रे उठाकर सब के सामने देखा. अब वो बिल्कुल नॉर्मल थी, क्यूकी आज बरसो के बाद उसने पहलिबार पूरी कथा किसी को सुनाई थी. पिच्छाले डेढ़ साल से वो साजन के साथ इसी हॉस्टिल मे रहती थी. साजन को मन ही मन मे चाहती थी, लेकिन वो जानती थी कि कहा साजन और कहा वो, इसीलिए कभी बता ना सकी और ऐसे ही दिन बीत ते चले गये.