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जय नीशी के पास गया और रिक्वेस्ट की कि सब प्लेयर्स थके हुए है तो सुबह ही प्रॅक्टीस के लिए जाएँगे, लेकिन नीशी अटल रही और सब को प्रॅक्टीस के लिए ले गयी. दो घंटे की थकान के बाद सब खिलाड़ी थक गये और जय ने प्रॅक्टीस बंद करने के लिए बोला और फिर सब वापस आ गये. लेकिन जय देख रहा था कि नीशी इस बार कुच्छ खोई खोई सी है. इसीलिए जय अचानक नीशी के कमरे मे जा पहुचा तो वाहा नीशी नही थी, पुछने पर किसी ने बताया कि वो स्टेडियम की टेरेस पर गयी है, जे वाहा पहुचा तो नीशी वाहा एक कोने पर खड़ी रहकर नीचे प्रॅक्टीस करते हुए दूसरे टीम के खिलाड़ियो को देख रही थी, उसका ध्यान जय की तरफ नही था. जय थोड़ी देर देखता रहा और फिर धीरे से नीशी के पास गया और धीरे से उसने अपना बाया हाथ नीशी के कंधे पर रखा.
अचानक नीशी पलटी और एक ज़ोर की लात जय के पैर पर लगी और जय धदाम से ज़मीन पर गिर गया. जय को कमर पर गहरी चोट आई और उसकी आँखे बंद हो गयी और वो आँखे मिचकर थोड़ी सेकेंड्स बैठ गया, कुच्छ ही सेकेंड्स मे थोड़ी सी राहत हुई और उसने नज़रे उठाकर नीशी के सामने देखा तो देखता है कि नीशी का चेहरा बिल्कुल तंग है, आँखे फटी हुई, नाक से तेज़ सांस फूली हुई, हाथ की मुट्ठी ज़ोर से बंद थी और चेहरा फटा हुवा था. उसकी धड़कन तेज़ थी और वो हाफ़ रही थी. जय गिर गया उसका जैसे उसे कोई अफ़सोस नही था, आँखो से जैसे तीर निकलकर जय को चुभ रहे थे.
बड़ी मुश्किल से जय खड़ा हुवा और अपना हाथ कमर पर मसलता हुवा बोला,’’क्या हुवा नीशी, अचानक मुझ पर हमला क्यू कर दिया, मुझे ज़्यादा चोट आती तो मैं शायद क्रिकेट खेल नही पाता यार.’’
नीशी ने तेज़ आवाज़ मे कहा,’’अगर इतनी चोट से तकलीफ़ होती है तो क्रिकेट खेलना बंद कर दे जय, और मुझे कभी भी पिछे से मत छुना वरना शायद पता नही कहा चोट पहुच सकती है.’’
जय थोड़ी देर कुच्छ नही बोला और फिर धीरे स्वर मे कहा,’’ठीक है यार, मैं हमेशा ख़याल रखूँगा कि तुझे आवाज़ देकर ही पास आउन्गा.’’
नीशी की सांस कुच्छ ठंडी हुई और उसने लंबी आह लेकर धीरे से आँखे जो फटी थी उसे धीरे से नीचा किया तो फटी रहने से आँखो मे जो पानी उतर आया था उसमे से दो बूँद आँखो से गिरी और उसने अपने चेहरे पर हाथ फिराकर जैसे अपनी बैचैनि दूर करने की कोशिश की और इधर उधर देखने लगी.
जय धीरे से नज़दीक आया और बोला,’’नीशी क्या बात है ? क्यू इतनी डरी हुई हो ?कुच्छ बुरा हुवा है तेरे साथ क्या ?’’
नीशी ने फिर से नज़रे उठाकर गुस्से से देखा और बोली,’’जय मैं पहले भी कह चुकी हू कि सिर्फ़ क्रिकेट पर ध्यान दो, मुझ से कभी भी कुच्छ सवाल मत करना. मेरे पास तुझे बताने के लिए कुच्छ भी नही है. मैं अपनी ज़िंदगी मे खुश हू और मुझे कोई हमदर्दी नही चाहिए. इसीलिए मेहरबानी कर के भगवान बन ने की कोशिश मेरे साथ मत करना.’’
जय की बिल्कुल बोलती बंद हो गयी और वो कुच्छ नही बोला और तेज़ी से नीशी वाहा से चली गयी, जैसे उसकी दुखती नस पर जय ने हाथ रख दिया था. जय को बिल्कुल इस आटिट्यूड पर बहुत बुरा लगा और वो सहम गया. उसको क्या सूझी वो रूम पर गया और अपना बॅट लेकर पॅड बाँधकर फिर से प्रॅक्टीस के लिए उतर पड़ा. वो जोरो का थका हुवा था और उपर से कमर पे चोट लगी थी, तो शायद ठीक से खेल नही पा रहा था और नतीजा कि दूसरे दिन की पहली मॅच मे जय फैल हो गया, ज़ीरो पर आउट और टीम सिर्फ़ 13 रन्स से हार गयी. जय को कमर पर गहरी चोट आने से बॅटिंग पे तकलीफ़ महसूस हो रही थी.
दोपहर को दो बजे मॅच ख़तम होते ही, नीशी ने सब की लेफ्ट राइट ले ली और बहुत भला बुरा कहा, जैसे उसका आटिट्यूड ही बदल गया था. वो चाहती थी कि टीम एक होकर जीत के ही आए और खास कर के जय को उसने टारगेट बनाकर खास कहा क़ि अगर उसको इतनी मामूली चोट से तकलीफ़ है तो आज से ही क्रिकेट छोड़ दे और जय को बराबर की लग गयी.
शाम को जय लगातार तीन घंटे तक प्रॅक्टीस करता रहा, सब थक गये तब उसने नीशी को रिक्वेस्ट किया कि वो बोलिंग करे और फिर और डेढ़ घंटे तक प्रॅक्टीस किया. ऐसा लगातार सेमी फाइनल तक किया और जय को सफलता मिलने लगी और टीम जीतने भी लगी. धीरे धीरे टीम स्पिरिट बढ़ने लगा, लेकिन नीशी अभी भी संतुष्ट नही थी और वो चॅंपियन बनना चाहती थी. दूसरे दिन सेमिफाइनाल मे भी जय की टीम जीत गयी. अब फाइनल मॅच फिर से इस साल भी चंडीगढ़ की टीम के सामने था. दोपहर दो बजे मॅच समाप्त हुवा और शाम को फिर नीशी सब को प्रॅक्टीस पर ले गयी. तीन घंटे मे सब थक गये तो सब को पॅक अप कराया और नीशी जय के पास आई और आँख मिलाकर बोला,’’जय तुम अभी मेरी बोलिंग का सामना करोगे और मैं तुझे सिखाती हू कि कल तुझे कैसे खेलना है चंडीगढ़ के स्पिन अटॅक से.”
जय को अभी भी दर्द तो था ही लेकिन कुच्छ हद तक कम हो गया था उसने बॅटिंग प्रॅक्टीस चालू की. नीशी ने उसके बॅट से डेढ़ फीट दूर एक राउंड ज़मीन पर खिच दिया और बोली,’’जय इस जगह से मेरी हर बोल टर्न होगी, सावधानी से खेलना और हर बोल तेरे बॅट पर आनी चाहिए, अभी हिट्टिंग मत करना पहले स्टेडी खेलने की कोशिश करना.’’
क्रमशः.................
अचानक नीशी पलटी और एक ज़ोर की लात जय के पैर पर लगी और जय धदाम से ज़मीन पर गिर गया. जय को कमर पर गहरी चोट आई और उसकी आँखे बंद हो गयी और वो आँखे मिचकर थोड़ी सेकेंड्स बैठ गया, कुच्छ ही सेकेंड्स मे थोड़ी सी राहत हुई और उसने नज़रे उठाकर नीशी के सामने देखा तो देखता है कि नीशी का चेहरा बिल्कुल तंग है, आँखे फटी हुई, नाक से तेज़ सांस फूली हुई, हाथ की मुट्ठी ज़ोर से बंद थी और चेहरा फटा हुवा था. उसकी धड़कन तेज़ थी और वो हाफ़ रही थी. जय गिर गया उसका जैसे उसे कोई अफ़सोस नही था, आँखो से जैसे तीर निकलकर जय को चुभ रहे थे.
बड़ी मुश्किल से जय खड़ा हुवा और अपना हाथ कमर पर मसलता हुवा बोला,’’क्या हुवा नीशी, अचानक मुझ पर हमला क्यू कर दिया, मुझे ज़्यादा चोट आती तो मैं शायद क्रिकेट खेल नही पाता यार.’’
नीशी ने तेज़ आवाज़ मे कहा,’’अगर इतनी चोट से तकलीफ़ होती है तो क्रिकेट खेलना बंद कर दे जय, और मुझे कभी भी पिछे से मत छुना वरना शायद पता नही कहा चोट पहुच सकती है.’’
जय थोड़ी देर कुच्छ नही बोला और फिर धीरे स्वर मे कहा,’’ठीक है यार, मैं हमेशा ख़याल रखूँगा कि तुझे आवाज़ देकर ही पास आउन्गा.’’
नीशी की सांस कुच्छ ठंडी हुई और उसने लंबी आह लेकर धीरे से आँखे जो फटी थी उसे धीरे से नीचा किया तो फटी रहने से आँखो मे जो पानी उतर आया था उसमे से दो बूँद आँखो से गिरी और उसने अपने चेहरे पर हाथ फिराकर जैसे अपनी बैचैनि दूर करने की कोशिश की और इधर उधर देखने लगी.
जय धीरे से नज़दीक आया और बोला,’’नीशी क्या बात है ? क्यू इतनी डरी हुई हो ?कुच्छ बुरा हुवा है तेरे साथ क्या ?’’
नीशी ने फिर से नज़रे उठाकर गुस्से से देखा और बोली,’’जय मैं पहले भी कह चुकी हू कि सिर्फ़ क्रिकेट पर ध्यान दो, मुझ से कभी भी कुच्छ सवाल मत करना. मेरे पास तुझे बताने के लिए कुच्छ भी नही है. मैं अपनी ज़िंदगी मे खुश हू और मुझे कोई हमदर्दी नही चाहिए. इसीलिए मेहरबानी कर के भगवान बन ने की कोशिश मेरे साथ मत करना.’’
जय की बिल्कुल बोलती बंद हो गयी और वो कुच्छ नही बोला और तेज़ी से नीशी वाहा से चली गयी, जैसे उसकी दुखती नस पर जय ने हाथ रख दिया था. जय को बिल्कुल इस आटिट्यूड पर बहुत बुरा लगा और वो सहम गया. उसको क्या सूझी वो रूम पर गया और अपना बॅट लेकर पॅड बाँधकर फिर से प्रॅक्टीस के लिए उतर पड़ा. वो जोरो का थका हुवा था और उपर से कमर पे चोट लगी थी, तो शायद ठीक से खेल नही पा रहा था और नतीजा कि दूसरे दिन की पहली मॅच मे जय फैल हो गया, ज़ीरो पर आउट और टीम सिर्फ़ 13 रन्स से हार गयी. जय को कमर पर गहरी चोट आने से बॅटिंग पे तकलीफ़ महसूस हो रही थी.
दोपहर को दो बजे मॅच ख़तम होते ही, नीशी ने सब की लेफ्ट राइट ले ली और बहुत भला बुरा कहा, जैसे उसका आटिट्यूड ही बदल गया था. वो चाहती थी कि टीम एक होकर जीत के ही आए और खास कर के जय को उसने टारगेट बनाकर खास कहा क़ि अगर उसको इतनी मामूली चोट से तकलीफ़ है तो आज से ही क्रिकेट छोड़ दे और जय को बराबर की लग गयी.
शाम को जय लगातार तीन घंटे तक प्रॅक्टीस करता रहा, सब थक गये तब उसने नीशी को रिक्वेस्ट किया कि वो बोलिंग करे और फिर और डेढ़ घंटे तक प्रॅक्टीस किया. ऐसा लगातार सेमी फाइनल तक किया और जय को सफलता मिलने लगी और टीम जीतने भी लगी. धीरे धीरे टीम स्पिरिट बढ़ने लगा, लेकिन नीशी अभी भी संतुष्ट नही थी और वो चॅंपियन बनना चाहती थी. दूसरे दिन सेमिफाइनाल मे भी जय की टीम जीत गयी. अब फाइनल मॅच फिर से इस साल भी चंडीगढ़ की टीम के सामने था. दोपहर दो बजे मॅच समाप्त हुवा और शाम को फिर नीशी सब को प्रॅक्टीस पर ले गयी. तीन घंटे मे सब थक गये तो सब को पॅक अप कराया और नीशी जय के पास आई और आँख मिलाकर बोला,’’जय तुम अभी मेरी बोलिंग का सामना करोगे और मैं तुझे सिखाती हू कि कल तुझे कैसे खेलना है चंडीगढ़ के स्पिन अटॅक से.”
जय को अभी भी दर्द तो था ही लेकिन कुच्छ हद तक कम हो गया था उसने बॅटिंग प्रॅक्टीस चालू की. नीशी ने उसके बॅट से डेढ़ फीट दूर एक राउंड ज़मीन पर खिच दिया और बोली,’’जय इस जगह से मेरी हर बोल टर्न होगी, सावधानी से खेलना और हर बोल तेरे बॅट पर आनी चाहिए, अभी हिट्टिंग मत करना पहले स्टेडी खेलने की कोशिश करना.’’
क्रमशः.................