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रणवीरसींह,’’ठीक है साजन मैं इसके बारे मे मयोरसब से बात कर लूँगा.’’
साजन खड़ा होकर आगे आया और गुस्से मे दाँत भिचकर बोला,’’नही रणवीर्भाई, सोच लो अगर मेरे डॅड को पता चला तो आप मुझे मार डालोगे फिर भी मैं एक काम आप का नही करूँगा. ये सौदा है समझ लो आप की ज़ुबान पे ताला और सामने आप का कोई भी काम मुझे मंजूर है.’’
जय खड़ा हो के आगे आया,’’नही साजन ये क्या कर रहे हो. पहले काम तो सुन लो बाद मे सौदा करो.’’
साजन,’’नही जय फिरहाल हमारे पास कोई चारा नही है. सब खेल इनलोगो के हाथ मे है. बस मैं इतनी ही कीमत चुक्का सकता हू. जिसको गवा दिया उसे छ्चोड़ी, लेकिनजो ज़िंदा है उसकी तो फिकर करनी ही होगी.’’ इतना कहकर साजन ने जय के सामने हल्के से आँख मिचकर इशारा किया कि अभी मिली ज़िंदा है.
लेकिन रणवीरसींह ने ये हरकत देख ली और बोला,’’बिल्कुल ठीक कह रहे हो साजन और अपने दोस्त को समझा भी लो कि अगर उसकी बहन ज़िंदा चाहिए तो चुपचाप हमारा काम करे और अपनी बहन को सही सलामत ले के जाए. वरना हम क्या कर सकते है वो तुम आड्वोकेट की लड़की से पुच्छ लेना.’’
जय सहम्कर खड़ा रह गया और साजन बोला,’’बोलिए क्या काम करना होगा?’’
रणवीरसींह,’’तुम्हे हमारे लिए एक बॅंक लुटनी होगी.’’
साजन और जय दोनो चौक उठे. क्यूकी दोनो को ये आशा थी कि रणवीरसींह कोई ऐसा काम देगा जो मिली से रिलेटेड हो, लेकिन ये बॅंक लूटने का प्रस्ताव कोई बॉम्ब विस्फोट से कम नही था.
दोनो दोस्तो की चेहरे की रेखाए तंग हो गयी और साजन तो खड़ा हो के बोला भी,’’रणवीर्भाई क्या हम चोर या डाकू दिखते है की बॅंक लूटने का सोच भी सके?’’
रणवीरसींह अट्टहास कर के बोला,’’चोर लुटेरा, अबे साजन ये शब्द भी कम है आप लोगो के लिए. अगर हम नेताओ की जमात इकट्ठी हो के अगर पोलीस और सरकार को आप के पीछे लगा दे तो आप लोग चोर लुटेरे नही देशद्रोही भी बन जाओगे.’’
साजन होठ सख्ती मे बिडकर उसे देखता ही रहा. उसे समझ मे नही आता था कि वो क्या करे? जय ने उठकर बोला,’’रणवीर सर मान लिया कि हमने आपलोगो के खिलाफ एक आवाज़ उठाई थी. ये भी मान लिया कि इसके बदले मे आप सिर्फ़ इसीलिए हमे बॅक्स रहे है कि हम उसके बदले मे आप का कोई काम कर दे. लेकिन ये बॅंक लुटाना आप अच्छी तरह जानते है कि हमारे बस की बात नही है.’’
रणवीरसींह,’’जय तुम जैसे खिलाड़ी के लिए ही ये सब से आसान काम है.’’
जय,’’वो कैसे भला?’’
रणवीरसींह,’’देखो जो नुकसान तुम लोगो ने हमारी राजकीय इमेज पर लगाया है उसका भरपाई करना तो पड़ेगा ही ना.’’
जय,’’लेकिन और भी तो तरीके हो सकते है ना.’’
रणवीरसींह,’’ठीक है आप लोग बताओ कैसे भरपाई करोगे मेरा नुकसान?’’
जय और साजन एकदुसरे को देखते रहे फिर साजन बोला,’’रणवीर्भाई कम से कम थोडा सोचने का वक़्त तो दो.’’
रणवीरसींह ज़ोर से हस पड़ा और फिर अचानक एक ज़ोर की झपट साजन को लगाई. साजन उचल के कुर्सी पर धदम से गिरा और कुर्सी उठ के दो फीट दूर जा के गिरी और साजन मूह के बल पर ज़मीन पे गिरा. आज तक किसी ने साजन पर हाथ नही उठाया था. साजन का नीचे का होठ कॉर्नर से टूट गया और वाहा से खून निकल ना शुरू हो गया. आँखो के सामने कुच्छ क्षण के लिए अंधेरा च्छा गया और जय सिर्फ़ देखता ही रह गया. वही पड़े पड़े साजन ने पलटकर रणवीरसींह के सामने देखा तो उसके चेहरे की रेखाए तंग थी, आँखो मे बेकाबू गुस्सा और आँखे बड़ी हो चुकी थी. थोड़ी देर वो ऐसे ही पड़ा रहा और जय ने आगे बढ़कर साजन को सहारा देकर उठाया और उसका लहू पौछ दिया.
फिर जय ने मुड़कर रणवीरसींह की ओर देखा और बोला,’’रणवीर्भाई अगर ऐसा ही है तो हम मरने को तैयार है. लेकिन हम बॅंक नही लूटेंगे जो करना है वो कर लो हमारे साथ.’’
इस बार रवि ने एक झपट जय को लगाई. लेकिन जे चौकन्ना था उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और झपट उसके कोहनी पर लगी. फिर भी एक प्रहार ज़रूर जय के हाथो पर पड़ा और वो साजन पर गिरनेवाला था लेकिन साजन ने उसे सहारा देकर खड़ा किया.
साजन भी अब बोला,’’रणवीर्भाई ऐसे तो आप मार भी डालोगे तो भी हमे परवा नही. जिस दिन से इस मार्ग मे हम आए थे, हमे पता ही था कि एक ना एक दिन आप जैसे राक्षासो का सामना करना ही पड़ेगा. हम तैयार है मार खाने के लिए और मर मिटने के लिए. लेकिन हमे कोई परवा नही की तुमलोगो को जो करना है करो.’’
रवि और मारने को आगे बढ़ा लेकिन रणवीरसींह ने हाथो के इशारे से उसको रौक दिया और आराम से एक सिगरेट जलाई और दो सिगरेट दोनो दोस्तो को दी और एक रवि को दी. साजन और जय ने भी रिड गुनेहगार की मफक अपनी अपनी सिगरेट जलाई और कश खिचने लगे और आराम से रणवीरसींह को देखने लगे.
थोड़ी देर के बाद रणवीरसींह फिर से हस्ने लगा और आराम से चेर पर बैठ गया और धीरे से बोला,’’साला मैं तो भूल ही गया था कि आप लोग तो क्रांतिकारी हो. आराम से मर जाओगे, लेकिन किसी धमकी से डरोगे नही.’’
दोनो दोस्त आराम से कश खिच रहे थे.
रणवीरसींह फिर आगे बोला,’’साजन और जय तुम जानते हो रवि का फेवोवरिट शौक कौन सा है?’’
दोनो दोस्त एकदुसरे के सामने देखने लगे.
रणवीरसींह फिर आगे बोला,’’रवि को सब से ज़्यादा शौख है बलात्कार कर ने का. वो तो उस दिन आड्वोकेट की लड़की इसीलिए बच गयी, क्यूकी मैने मना किया था. वरना पुच्छ लो ऋषि मेडम भी बच नही पाई थी,’’
साजन और जय चौक पड़े और रवि को देखा तो साला सिगरेट पीता हुवा हस रहा था और बोला भी,’’साली क्या मस्त बेंगोली माल थी. नीशी नही तो ऋषि सही, लेकिन मज़ा आ गया था परसो. सच रणवीर्भाई मुझे तो आश्चर्य हो रहा था कि दो बच्चे की मा मे भी इतना सेक्सी फिगर भरा पड़ा था कि मज़ा आ गया साली के साथ.’’
साजन उठ के रवि पर हमला करने जा रहा था लेकिन जय ने हाथ पकड़कर उसे फिर बिठा दिया और आराम से कश खिचकर बोला,’’ठीक है रणवीर्भाई ऋषि मेडम तो मर चुकी है फिर भी हम बॅंक लूटने को तैयार नही है.’’
रणवीरसींह,’’जय और साजन, ऋषि मेडम तो मर चुकी है, लेकिन तुम्हे इतना तो याद होना चाहिए कि आप लोगो की एक अमानत अभी भी मेरे पास है.’’
बस यही दोनो दोस्त भूल चुके थे कि क्या करने आए थे और क्या करने जा रहे थे. दोनो समझ गये कि बात अब मिली तक आ पहुचि है.
साजन झट से बोल पड़ा,’’नही रणवीर्भाई, अगर मिली को कुच्छ हुवा तो हम काम तो नही करेंगे लकिन आप को ज़िंदा भी नही छ्चोड़ेंगे याद रखना.’’
अब चौकने की बारी रणवीरसींह और रवि की थी. रवि के मूह से तो निकल भी पड़ा,’’मिली? रणवीर्भाई ये कौन है ?’’
तभी साजन और जय को लगा की शायद उन्होने बड़ी भूल कर दी थी. जय सोचने मे पड़ गया कि मिली के नाम से ये दोनो चौक क्यू पड़े? क्या ये लोग मिलिको जानते ही नही है? क्या मिली यहा नही है? अगर मिली यहा नही है तो कहा है?
लेकिन आगे कुच्छ सोचे इसके पहले रणवीरसींह ने पुछा,’’साजन ये मिली कौन है?’’
साजन जय के सामने देखने लगा और रणवीरसींह ने आगे बढ़कर साजन का गला पकड़ा और दबाया और बोला,’’जल्दी बता ये मिली कौन है वरना यही तेरा खेल ख़तम कर दूँगा और पता भी नही चलेगा कि तू ज़िंदा है या मर गया.’’
क्रमशः.................
साजन खड़ा होकर आगे आया और गुस्से मे दाँत भिचकर बोला,’’नही रणवीर्भाई, सोच लो अगर मेरे डॅड को पता चला तो आप मुझे मार डालोगे फिर भी मैं एक काम आप का नही करूँगा. ये सौदा है समझ लो आप की ज़ुबान पे ताला और सामने आप का कोई भी काम मुझे मंजूर है.’’
जय खड़ा हो के आगे आया,’’नही साजन ये क्या कर रहे हो. पहले काम तो सुन लो बाद मे सौदा करो.’’
साजन,’’नही जय फिरहाल हमारे पास कोई चारा नही है. सब खेल इनलोगो के हाथ मे है. बस मैं इतनी ही कीमत चुक्का सकता हू. जिसको गवा दिया उसे छ्चोड़ी, लेकिनजो ज़िंदा है उसकी तो फिकर करनी ही होगी.’’ इतना कहकर साजन ने जय के सामने हल्के से आँख मिचकर इशारा किया कि अभी मिली ज़िंदा है.
लेकिन रणवीरसींह ने ये हरकत देख ली और बोला,’’बिल्कुल ठीक कह रहे हो साजन और अपने दोस्त को समझा भी लो कि अगर उसकी बहन ज़िंदा चाहिए तो चुपचाप हमारा काम करे और अपनी बहन को सही सलामत ले के जाए. वरना हम क्या कर सकते है वो तुम आड्वोकेट की लड़की से पुच्छ लेना.’’
जय सहम्कर खड़ा रह गया और साजन बोला,’’बोलिए क्या काम करना होगा?’’
रणवीरसींह,’’तुम्हे हमारे लिए एक बॅंक लुटनी होगी.’’
साजन और जय दोनो चौक उठे. क्यूकी दोनो को ये आशा थी कि रणवीरसींह कोई ऐसा काम देगा जो मिली से रिलेटेड हो, लेकिन ये बॅंक लूटने का प्रस्ताव कोई बॉम्ब विस्फोट से कम नही था.
दोनो दोस्तो की चेहरे की रेखाए तंग हो गयी और साजन तो खड़ा हो के बोला भी,’’रणवीर्भाई क्या हम चोर या डाकू दिखते है की बॅंक लूटने का सोच भी सके?’’
रणवीरसींह अट्टहास कर के बोला,’’चोर लुटेरा, अबे साजन ये शब्द भी कम है आप लोगो के लिए. अगर हम नेताओ की जमात इकट्ठी हो के अगर पोलीस और सरकार को आप के पीछे लगा दे तो आप लोग चोर लुटेरे नही देशद्रोही भी बन जाओगे.’’
साजन होठ सख्ती मे बिडकर उसे देखता ही रहा. उसे समझ मे नही आता था कि वो क्या करे? जय ने उठकर बोला,’’रणवीर सर मान लिया कि हमने आपलोगो के खिलाफ एक आवाज़ उठाई थी. ये भी मान लिया कि इसके बदले मे आप सिर्फ़ इसीलिए हमे बॅक्स रहे है कि हम उसके बदले मे आप का कोई काम कर दे. लेकिन ये बॅंक लुटाना आप अच्छी तरह जानते है कि हमारे बस की बात नही है.’’
रणवीरसींह,’’जय तुम जैसे खिलाड़ी के लिए ही ये सब से आसान काम है.’’
जय,’’वो कैसे भला?’’
रणवीरसींह,’’देखो जो नुकसान तुम लोगो ने हमारी राजकीय इमेज पर लगाया है उसका भरपाई करना तो पड़ेगा ही ना.’’
जय,’’लेकिन और भी तो तरीके हो सकते है ना.’’
रणवीरसींह,’’ठीक है आप लोग बताओ कैसे भरपाई करोगे मेरा नुकसान?’’
जय और साजन एकदुसरे को देखते रहे फिर साजन बोला,’’रणवीर्भाई कम से कम थोडा सोचने का वक़्त तो दो.’’
रणवीरसींह ज़ोर से हस पड़ा और फिर अचानक एक ज़ोर की झपट साजन को लगाई. साजन उचल के कुर्सी पर धदम से गिरा और कुर्सी उठ के दो फीट दूर जा के गिरी और साजन मूह के बल पर ज़मीन पे गिरा. आज तक किसी ने साजन पर हाथ नही उठाया था. साजन का नीचे का होठ कॉर्नर से टूट गया और वाहा से खून निकल ना शुरू हो गया. आँखो के सामने कुच्छ क्षण के लिए अंधेरा च्छा गया और जय सिर्फ़ देखता ही रह गया. वही पड़े पड़े साजन ने पलटकर रणवीरसींह के सामने देखा तो उसके चेहरे की रेखाए तंग थी, आँखो मे बेकाबू गुस्सा और आँखे बड़ी हो चुकी थी. थोड़ी देर वो ऐसे ही पड़ा रहा और जय ने आगे बढ़कर साजन को सहारा देकर उठाया और उसका लहू पौछ दिया.
फिर जय ने मुड़कर रणवीरसींह की ओर देखा और बोला,’’रणवीर्भाई अगर ऐसा ही है तो हम मरने को तैयार है. लेकिन हम बॅंक नही लूटेंगे जो करना है वो कर लो हमारे साथ.’’
इस बार रवि ने एक झपट जय को लगाई. लेकिन जे चौकन्ना था उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और झपट उसके कोहनी पर लगी. फिर भी एक प्रहार ज़रूर जय के हाथो पर पड़ा और वो साजन पर गिरनेवाला था लेकिन साजन ने उसे सहारा देकर खड़ा किया.
साजन भी अब बोला,’’रणवीर्भाई ऐसे तो आप मार भी डालोगे तो भी हमे परवा नही. जिस दिन से इस मार्ग मे हम आए थे, हमे पता ही था कि एक ना एक दिन आप जैसे राक्षासो का सामना करना ही पड़ेगा. हम तैयार है मार खाने के लिए और मर मिटने के लिए. लेकिन हमे कोई परवा नही की तुमलोगो को जो करना है करो.’’
रवि और मारने को आगे बढ़ा लेकिन रणवीरसींह ने हाथो के इशारे से उसको रौक दिया और आराम से एक सिगरेट जलाई और दो सिगरेट दोनो दोस्तो को दी और एक रवि को दी. साजन और जय ने भी रिड गुनेहगार की मफक अपनी अपनी सिगरेट जलाई और कश खिचने लगे और आराम से रणवीरसींह को देखने लगे.
थोड़ी देर के बाद रणवीरसींह फिर से हस्ने लगा और आराम से चेर पर बैठ गया और धीरे से बोला,’’साला मैं तो भूल ही गया था कि आप लोग तो क्रांतिकारी हो. आराम से मर जाओगे, लेकिन किसी धमकी से डरोगे नही.’’
दोनो दोस्त आराम से कश खिच रहे थे.
रणवीरसींह फिर आगे बोला,’’साजन और जय तुम जानते हो रवि का फेवोवरिट शौक कौन सा है?’’
दोनो दोस्त एकदुसरे के सामने देखने लगे.
रणवीरसींह फिर आगे बोला,’’रवि को सब से ज़्यादा शौख है बलात्कार कर ने का. वो तो उस दिन आड्वोकेट की लड़की इसीलिए बच गयी, क्यूकी मैने मना किया था. वरना पुच्छ लो ऋषि मेडम भी बच नही पाई थी,’’
साजन और जय चौक पड़े और रवि को देखा तो साला सिगरेट पीता हुवा हस रहा था और बोला भी,’’साली क्या मस्त बेंगोली माल थी. नीशी नही तो ऋषि सही, लेकिन मज़ा आ गया था परसो. सच रणवीर्भाई मुझे तो आश्चर्य हो रहा था कि दो बच्चे की मा मे भी इतना सेक्सी फिगर भरा पड़ा था कि मज़ा आ गया साली के साथ.’’
साजन उठ के रवि पर हमला करने जा रहा था लेकिन जय ने हाथ पकड़कर उसे फिर बिठा दिया और आराम से कश खिचकर बोला,’’ठीक है रणवीर्भाई ऋषि मेडम तो मर चुकी है फिर भी हम बॅंक लूटने को तैयार नही है.’’
रणवीरसींह,’’जय और साजन, ऋषि मेडम तो मर चुकी है, लेकिन तुम्हे इतना तो याद होना चाहिए कि आप लोगो की एक अमानत अभी भी मेरे पास है.’’
बस यही दोनो दोस्त भूल चुके थे कि क्या करने आए थे और क्या करने जा रहे थे. दोनो समझ गये कि बात अब मिली तक आ पहुचि है.
साजन झट से बोल पड़ा,’’नही रणवीर्भाई, अगर मिली को कुच्छ हुवा तो हम काम तो नही करेंगे लकिन आप को ज़िंदा भी नही छ्चोड़ेंगे याद रखना.’’
अब चौकने की बारी रणवीरसींह और रवि की थी. रवि के मूह से तो निकल भी पड़ा,’’मिली? रणवीर्भाई ये कौन है ?’’
तभी साजन और जय को लगा की शायद उन्होने बड़ी भूल कर दी थी. जय सोचने मे पड़ गया कि मिली के नाम से ये दोनो चौक क्यू पड़े? क्या ये लोग मिलिको जानते ही नही है? क्या मिली यहा नही है? अगर मिली यहा नही है तो कहा है?
लेकिन आगे कुच्छ सोचे इसके पहले रणवीरसींह ने पुछा,’’साजन ये मिली कौन है?’’
साजन जय के सामने देखने लगा और रणवीरसींह ने आगे बढ़कर साजन का गला पकड़ा और दबाया और बोला,’’जल्दी बता ये मिली कौन है वरना यही तेरा खेल ख़तम कर दूँगा और पता भी नही चलेगा कि तू ज़िंदा है या मर गया.’’
क्रमशः.................