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रास्ते मे चहल पहल ज़्यादा थी. अभी अभी एक ट्रेन आई हुई थी और पॅसेंजर्स बाहर निकले हुए थे. भीड़ ज़्यादा होने की वजह से लोगो का ज़्यादा ध्यान इस स्टेशन वेगॉन पर नही था. स्टेशन वॅगन को देखकर लगता था कि कोई टीम की वॅन वाहा आई है, या पॅसेंजर वॅन है. इस रास्ते मे ऐसे वेहिकल आना कोई बड़ी बात नही थी. क्यूकी लाइन मे और भी 5 से 6 वेहिकल्स पार्क किए हुए पड़े थे.
दोपहर 12.22 :
एक मारुति ऑम्नी सामने की ओर से आई. सीट पर वही ड्रेसिंग मे एक नौजवान ड्राइव कर रहा था. वो साजन था, बाजू मे एक फेटतीश लड़की थी और पिछे एक और थोड़ी कम फेटतीश लड़की थी. वे दोनो नीशी और निशा थे. ऑम्नी एक्शत स्टेशन वेगेन से 20 कदम की दूरी पर पार्क की गयी और थोड़ी देर दोनो ड्राइवर्स (बिरजू और साजन) ने एक दूसरे को देखा. दोनो ड्राइवर्स ने आँखो से इशारा किया और थोड़ी देर रुकने का इशारा किया. यू ही टाइम चलता गया. थोड़ी ही मिनट मे एक नवयुवान चलता हुवा बॅंक के करीब आ रहा था. वो जय था उसने आँखो से साजन और बिरजू को इशारा किया.
दोपहर 12.30:
स्वाभाविक रूप से साजन नीचे उतरा और जय की तरफ मूड के आँखो से पुचछा. लेकिन बिरजू ने इशारा किया की स्टेट ट्रेआसोरी की वॅन अभी भी पार्क्ड है. उसे जाने के बाद ही आगे बढ़ना संभव है. इसीलिए साजन फिर से ऑम्नी मे चला गया. उसने अंदर जा के अपने लिए सिगरेट जलाई और उसने और नीशी ने बारी बारी कश खिचाना शुरू किया.
दोपहर 12.32:
ट्रेषरी की वॅन के कर्मचारी बॅंक से बाहर निकले और वॅन मे बैठे और वॅन स्टार्ट हुई और ट्रॅफिक को चीरती हुई कॉर्नर से टर्न ले लिया. रॉबरी की टोटल 7 मिनट वेस्ट हो चुकी थी. अंदर का महॉल बिल्कुल शांत था. बॅंक के शेष कर्मचारी और मॅनेजर काउंटिंग मे बिज़ी थे. आज कुच्छ ज़्यादा ही अमाउंट आई हुई थी और जल्दी से काउंटिंग कर के अपने अपने काम पे लग जाना था. बॅंक का पाटयाला अभी सेफ डेपोसिते वॉल्ट मे था और वाहा सफाई कर रहा था.
दोपहर 12.34
रणवीरसींह बॅंक से बाहर निकला और बाहर आके अपनी पॉकेट से एक सिगरेट निकाल के जलाई. ये इशारा था जय के लिए. बॅंक के बराबर सामने की और से जय निकला. रेड जेर्से के पिछे लंबा हॅंड बॅग था. जैसे कोई क्रिकेट किट जैसा लग रहा था. नकली मशींगून के पिछे का हत्था बिल्कुल बॅट के हत्थे जैसा कलर किया गया था.
जय दौड़ा और साथ मे ही अपने चेहरे पर मास्क लगाया आंड शाउटेड,’’कॉंफाँ अमफों मजनू (कम ऑन मजनू).’’
साजन (मजनू) ने भी मास्क पहन लिया और एक ऐसा ही थैला निकाला और दोनो बॅंक के पास रणवीर्सीह तक नज़दीक पहुच गये. रणवीरसींह ने कान मे धीरे से कहा,’’मैने 7 करोड़ मंगाए है और गिनती चल रही है. गेट इन फ्रेंड्स. बेस्ट लक.’’
दोपहर 12.40
पल्न के 10 मिनट लेट : जय धीरे से बॅंक मे घुसा, उसी वक़्त साजन भी उसके साथ बॅंक मे घुसा. हाथ के इशारे से मुनीश, बिरजू, उदयन, नीशी, निशा, संजयभाई और अमरभाई बारी बारी बॅंक मे आए. लग रहा था कोई क्रिकेट टीम बॅंक मे आई थी. देशी तमन्चे के हिसाब से साजन का थेला सब से भारी था. सब के हाथ मे कुच्छ ना कुच्छ ज़रूर था. सब ने बॅंक मे घुसते पहले किसी का ध्यान ना हो इस तरह फटाफट मास्क लगा लिए थे. अभी सेक्यूरिटी गार्ड्स मे से एक टाय्लेट मे गया था और दूसरे का ध्यान सामने वाली काउंटिंग की रूम मे था, इससलिए उसका ध्यान पिछे घुसी हुई पूरी टीम पर नही था और ये रॉबरर्स के लिए बड़ी आसानी बन गयी की वे आराम से एक एक कर के सब बॅंक के अंदर घुस चुके थे और ग्लास डोर अंदर से बंद कर के कब्जा ले लिया था.
दोपहर 12.41 :
सब से पहले संजयभाई, अमरभाई और मुनीश सेक्यूरिटी गार्ड्स का ध्यान ना हो उसी तरह धीमी दौड़ से बॅंक के कॉरिडर से दाई और अंदर सेफ डेपॉज़िट वाल्ट के पास आके जैसे बॅंक के कर्मचारी ही हो ऐसे ही दो स्विच बाँध की ओर सेफ डेपॉज़िट का दरवाजा खोल के सीधे अंदर दाखिल हो गये. काउंटर का क्लर्क का भी ध्यान नही था. अब पहलेवली सेक्यूरिटी गार्ड्स का ध्यान उस तीन पर पड़ा. चेहरे पर मास्क देखकर उसकी आँखे फट गयी और उसने अपने शोल्डर से बंदूक उतरी और अभी निशान लगाने वाला ही था.
दोपहर 12.22 :
एक मारुति ऑम्नी सामने की ओर से आई. सीट पर वही ड्रेसिंग मे एक नौजवान ड्राइव कर रहा था. वो साजन था, बाजू मे एक फेटतीश लड़की थी और पिछे एक और थोड़ी कम फेटतीश लड़की थी. वे दोनो नीशी और निशा थे. ऑम्नी एक्शत स्टेशन वेगेन से 20 कदम की दूरी पर पार्क की गयी और थोड़ी देर दोनो ड्राइवर्स (बिरजू और साजन) ने एक दूसरे को देखा. दोनो ड्राइवर्स ने आँखो से इशारा किया और थोड़ी देर रुकने का इशारा किया. यू ही टाइम चलता गया. थोड़ी ही मिनट मे एक नवयुवान चलता हुवा बॅंक के करीब आ रहा था. वो जय था उसने आँखो से साजन और बिरजू को इशारा किया.
दोपहर 12.30:
स्वाभाविक रूप से साजन नीचे उतरा और जय की तरफ मूड के आँखो से पुचछा. लेकिन बिरजू ने इशारा किया की स्टेट ट्रेआसोरी की वॅन अभी भी पार्क्ड है. उसे जाने के बाद ही आगे बढ़ना संभव है. इसीलिए साजन फिर से ऑम्नी मे चला गया. उसने अंदर जा के अपने लिए सिगरेट जलाई और उसने और नीशी ने बारी बारी कश खिचाना शुरू किया.
दोपहर 12.32:
ट्रेषरी की वॅन के कर्मचारी बॅंक से बाहर निकले और वॅन मे बैठे और वॅन स्टार्ट हुई और ट्रॅफिक को चीरती हुई कॉर्नर से टर्न ले लिया. रॉबरी की टोटल 7 मिनट वेस्ट हो चुकी थी. अंदर का महॉल बिल्कुल शांत था. बॅंक के शेष कर्मचारी और मॅनेजर काउंटिंग मे बिज़ी थे. आज कुच्छ ज़्यादा ही अमाउंट आई हुई थी और जल्दी से काउंटिंग कर के अपने अपने काम पे लग जाना था. बॅंक का पाटयाला अभी सेफ डेपोसिते वॉल्ट मे था और वाहा सफाई कर रहा था.
दोपहर 12.34
रणवीरसींह बॅंक से बाहर निकला और बाहर आके अपनी पॉकेट से एक सिगरेट निकाल के जलाई. ये इशारा था जय के लिए. बॅंक के बराबर सामने की और से जय निकला. रेड जेर्से के पिछे लंबा हॅंड बॅग था. जैसे कोई क्रिकेट किट जैसा लग रहा था. नकली मशींगून के पिछे का हत्था बिल्कुल बॅट के हत्थे जैसा कलर किया गया था.
जय दौड़ा और साथ मे ही अपने चेहरे पर मास्क लगाया आंड शाउटेड,’’कॉंफाँ अमफों मजनू (कम ऑन मजनू).’’
साजन (मजनू) ने भी मास्क पहन लिया और एक ऐसा ही थैला निकाला और दोनो बॅंक के पास रणवीर्सीह तक नज़दीक पहुच गये. रणवीरसींह ने कान मे धीरे से कहा,’’मैने 7 करोड़ मंगाए है और गिनती चल रही है. गेट इन फ्रेंड्स. बेस्ट लक.’’
दोपहर 12.40
पल्न के 10 मिनट लेट : जय धीरे से बॅंक मे घुसा, उसी वक़्त साजन भी उसके साथ बॅंक मे घुसा. हाथ के इशारे से मुनीश, बिरजू, उदयन, नीशी, निशा, संजयभाई और अमरभाई बारी बारी बॅंक मे आए. लग रहा था कोई क्रिकेट टीम बॅंक मे आई थी. देशी तमन्चे के हिसाब से साजन का थेला सब से भारी था. सब के हाथ मे कुच्छ ना कुच्छ ज़रूर था. सब ने बॅंक मे घुसते पहले किसी का ध्यान ना हो इस तरह फटाफट मास्क लगा लिए थे. अभी सेक्यूरिटी गार्ड्स मे से एक टाय्लेट मे गया था और दूसरे का ध्यान सामने वाली काउंटिंग की रूम मे था, इससलिए उसका ध्यान पिछे घुसी हुई पूरी टीम पर नही था और ये रॉबरर्स के लिए बड़ी आसानी बन गयी की वे आराम से एक एक कर के सब बॅंक के अंदर घुस चुके थे और ग्लास डोर अंदर से बंद कर के कब्जा ले लिया था.
दोपहर 12.41 :
सब से पहले संजयभाई, अमरभाई और मुनीश सेक्यूरिटी गार्ड्स का ध्यान ना हो उसी तरह धीमी दौड़ से बॅंक के कॉरिडर से दाई और अंदर सेफ डेपॉज़िट वाल्ट के पास आके जैसे बॅंक के कर्मचारी ही हो ऐसे ही दो स्विच बाँध की ओर सेफ डेपॉज़िट का दरवाजा खोल के सीधे अंदर दाखिल हो गये. काउंटर का क्लर्क का भी ध्यान नही था. अब पहलेवली सेक्यूरिटी गार्ड्स का ध्यान उस तीन पर पड़ा. चेहरे पर मास्क देखकर उसकी आँखे फट गयी और उसने अपने शोल्डर से बंदूक उतरी और अभी निशान लगाने वाला ही था.