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इतना कहकर निशा नीचे उतरी और धीरे से मूड गयी और अपना मूह साजन के साधन पर ले गयी और धीरे से चूमा फिर अपने दाँत उस पर गाढ दिए. साजन धीरे से तड़प उठा और निशा ने धीरे से पूरा साधन अपने मूह मे ले लिया और उसे चूमने और चाटने लगी. धीरे धीरे साजन का तनाव बढ़ता गया और साजन ने अचानक निशा के पेंट की ज़िप खोल दी और धीरे धीरे प्रेशर से जीन्स उतारने लगा. निशा ने भी पैर इधर उधर कर के पूरा सहयोग दिया और उसकी पेंट उतर गयी. ब्लॅक पेंटी को भी एक ही ज़टके से साजन ने उतार दिया और अपना मूह निशा की योनि पर रख दिया. साजन ने धीरे धीरे निशा की योनि की दीवारो को काटना और चूमना शुरू किया और इसके आनंद के आवेग मे निशा ज़ोर से साजन का साधन अंदर बाहर करने लगी.
दोनो धीरे धीरे मदहोश होते चले गये और फिर साजन से नही रहा गया और उसने एक ही ज़टके से निशा को दूर किया और उल्टा होकर निशा के कंधो को पकड़ा और उसके दो पैरो को अपने एक हाथ से पकड़ा और खुद उसके बीच आकर सो गया और फिर दाया हाथ से अपना साधन निशा के यौवन छिद्र पर रखकर एक ज़बरदस्त धक्का दिया और निशा चाहक उठी. उसके लिए कोई दर्द की बात नही थी. कई बार वो ये आनंद ले चुकी थी. सॅटटॅक से साजन का शिश्न योनि द्वार से बुलेट ट्रेन की तरह गर्भाशय के द्वार तक चला गया. साजन ने धीरे धीरे से शुरू कर के फास्ट धक्के चालू कर दिए. खुद साजन इतना बेकाबू बन उठा कि उसने निशा के दोनो हाथ बेड पर सिर से उपर उठाकर अपने हाथ से लॉक कर दिया और निशा के होठ को अपने होंठो से काटना शुरू किया और छाती से दोनो स्तन को क़ैद कर लिया और पैरो से निशा के दोनो पैरो को जोड़ दिया. पेट से निशा की नाभि को कुचल दिया और फिर निशा के दोनो पैर सिकुड़कर एक हो गये तो छ्होटे योनि की गहराई मे साजन ने तेज करार धक्के देने चालू कर दिए.
अब निशा के मूह से औउउउउउउच ऊऊहह आआआअहह की चीख निकलनी शुरू हो गयी. क्यूकी उसकी योनि इतनी तेज़ छिल रही थी की यौवन रस तेज़ी से बहने लगा था. गहरी चिकनाहट की आवाज़ पूरे रूम मे गूंजने लगी. साजन का पेट ज़ोर से निशा के पेट पर गिरता था इसीलिए सॅट सॅट की आवाज़े आ रही थी. साजन ने फिर अपना मूह उचा किया और तेज़ी से हाफने लगा. आज पूरे दिन की थकान से वैसे ही दोनो चूर थे और उपर से तेज़ धक्के अपनी कमर से साजन दे रहा था और निशा उसे झेल रही थी. दोनो बुरी तरह हफने लगे.
लेकिन फिर भी साजन नही रुका. उसने निशा के दोनो पैरो को उचा किया और दोनो पैरो के बीच बैठ गया और फिर बैठे बैठे ही करार धक्के चालू रखे. ये धक्के निशा के लिए परम तृप्ति साबित हुए. निशा दो मिनट मे ही आआआआआहह कर के झाड़ गयी. लेकिन साजन ने उसकी ओर नही देखा और धक्के की स्पीड और बढ़ाई. वो जानता था की झड़ने के बाद निशा ज़्यादा नही झेल पाएगी. और सच मे निशा बुरी तरह थक गयी. लेकिन उसने साजन को साथ देना जारी रखा और नीचे से उसके बस मे नही था फिर भी कमर उच्छालकर साजन का साथ देने लगी.
साजन का अंतिम समय धीरे धीरे नज़दीक आता गया और साजन ने आँखे बंद कर ली और मूह से आआआआअहह आआआअहह आवाज़े निकालकर नीशी के दोनो स्तनो को बेरहमी के साथ मसलता हुवा और तेज़ धक्के देने लगा. ये धक्के निशा की बच्चेदानी पर बेरहम चोट पहुचाते रहे. पहली बार झड़ने के बाद दुबारा यौवन रस बहाने की जैसे निशा की योनि मे ताक़त ही नही रही थी. निशा ने दर्द से फिर आँखे बंद कर ली. उस के सहन से बिल्कुल बाहर था. निशा के सर पर बैचेनी छाने लगी. लेकिन जैसे आज साजन का साधन थकने को तैयार ही नही था.
निशा ने एक बार आँखे खोलकर साजन को देखा वो लेकिन आँखे बंद कर के फुल स्पीड से निशा की चटनी करने पर तुला हुवा था. निशा ने आख़िर साजन को ध्यान से जगाया और खुद को दूर किया और बेड पर दोनो हाथो से घोड़ी बन गयी. साजन ने फिर साधन को उसकी योनि मे डाला और निशा की कमर पकड़कर फिर से चोट चालू कर दी. निशा के लिए ये आसान से तो और दर्द बढ़ गया. लेकिन निशा जानती थी की इस से साजन जल्दी ख़त्म हो जाएगा. और सच मे दो मिनट मे ही साजन ने निशा की कमर कस के पकड़कर आआआहह कर के पहला वीर्यपात किया. दूसरी और तीसरी धारा से साजन निढाल हो के निशा पर गिर पड़ा. उसकी आँखे नींद और मदहोशी मे बंद हो गयी और बुरी तरह से हफने लगा. निशा ने धीरे से उसे अपने बाजू पर सुलाया और खुद ने जल्दी से सब साफ किया और फिर कपड़े पहनकर किचन मे गयी. फ्रेश होकर पानी पीकर वापस आई तो साजन बेरहमी से अपने नाक से आवाज़े निकालता हुवा गहरी निंद्रा की आगोश मे चला गया था.
आख़िरकार बॅंक रॉबरी के बाद दोनो प्रेमियो ने चैन की सास लेकर पहला सेक्स एंजाय किया था. निशा भी मुस्कुरकर उसकी बाजू मे आकर सो गयी और थोड़ी ही देर मे गहरी निंद्रा मे चली गयी.
क्रमशः.................