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उदयन जानबूझकर उचे स्वर मे इसीलिए बोला क्यूकी दोनो हवलदार को ज़्यादा शक ना हो. दोनो हवलदार आराम से बाहर के मैंन रूम मे बैठ चुके थे. मुनीश और उदयन दोनो लॉक अप मे अंदर गये और साजन से मिले. तीनो बिल्कुल धीमे स्वर मे बात कर रहे थे. उदयन और मुनीश ने जल्दी जल्दी सब सिचुयेशन समझाया और बोला कि वे लोग साजन को भगाने के लिए आए है वरना आज निशा के साथ कुछ भी हो सकता है.
साजन ने तुरंत रिक्षन दिया,’’यार ज़म्फे कंफ़्यू आंफिइटनी ज़म्फ़लदबाज़ी कंफर गंफाया. आम्फुऊसे तमफोड़ी तमफो धमफीराज रामफखानी चंफहिए तँफी.’’
तीनो दोस्त मे थोड़ी चर्चा होने के बाद उदयने उसे अपनी लैंग्वेज मे बोला,’’साजन वांफी अंफर हंफेरे तंफू एमफेस्कापे यांफ़्यू.’’
साजन,” बंफ़ट वांफे ?”
मुनीश,’’यांफर हांफँ दंफ़ोंो यांफाहा अंफाए हंफाई अमफोर निश्ी आमफौर बिरजू जे आमफौर निशा कँफी कांफौज कंफे लाम्फ़िए गम्फाए हंफाई अमफोर उंफ़ुसीने बांफोला हंफाई कँफी तंफेरे को च्मफुदके अंफ़ुसीके पंफस लांफे ज़ंफना हंफाई.’’
साजन,’’नमफो यांफर मंफाई यांफाहा से नंफ़ाही नँफिकल संफकता.’’
उदयन,’’बंफ़ट वांफे ?’’
साजन,’’तंफूँ मंफेरी चँफींटा मंफट कंफरो अमफोर ज़ंफाओ अमफोर जय कमफो बंफी रमफ़ोकॉ. वांफरना बंफहुत अंफनर्थ हमफो ज़म्फएगा यांफर.’’
मुनीश,’’अंफैसा कमफ्या हमफो ज़म्फएगा साजन. तंफू अंफ़गर यांफाहा रामफहेगा तमफो अंफुलता हांफँ संफब् माफ़ूसिबत मंफ़े अंफा ज़म्फाएँगे.’’
साजन अब थोड़ा जल्दबाज़ी मे था और बोला,’’अंफारे यांफर पंफ्लेआसए गमफो फंफास्ट वांफरना हांफँ संफब् मंफ़ुसिबत मे आ ज़म्फाएँगे यांफा. ज़मफो मंफाई कंफहता हांफू वमफो कंफरो. प्लीज़ मंफेरा वांफिस्वास कंफरो अंफुर ज़म्फ़ालडी ज़म्फाके जय कमफो संफंजाओ.’’
लाख कोशिश के बावजूद भी साजन नही माना तो उदयन और मुनीश वापस चलने को तैयार हो गये और जैसे दोनो जाने के लिए खड़े हुए तो दोनो साजन से लिपट गये और दोनो की आँखो मे पानी था, लेकिन साजन बड़ा हिम्मतवाला था उसने दोनो को एकसाथ गले लगाया और कहा,’’दोस्तो प्लीज़ मंफेरी चँफींटा मंफट कंफरना मंफेरा पंफ़ुलिसे कंफुचच नंफ़ाही बंफ़ीगाड़ संफकती. मफाई दंफो दंफिन मंफाई राँफिहा हमफो ज़ंफौंगा अमफोर तंफूँ संफब् ज़म्फ़ालडी यांफाहा संफ़े नँफिकल ज़ंफाओ अमफोर बंफहुत दमफुर चंफाले ज़ंफना कंफुचच दंफीनो कंफे लाम्फ़िए. मंफाई अमफोर रामफानवीर तंफूँ सडंफब् लम्फ़ोगो कमफो बंफचा लांफेंगे. अंफब् ज़म्फ़ालडी ज़ंफाओ दमफेर मंफट कंफरो. यांफाई ज़मफो बंफी चंफाल रामफाहा हंफाई वमफो मंफेरी अमफोर र्क कँफी चंफाल हंफाई संफामजे अमफोर संफब् कमफो यांफे बंफटा भी दंफेना. प्लीज़ गमफो फंफास्ट आमफौर ज़म्फ़ालडी संफब् कमफो रमफ़ोकॉ.’’
उदयन और मुनीश जैसे ही बाहर निकले. साजन ने फिर से दोनो को बुलाया और कहा,’’उदयन और मुनीश तंफूँ दम्फोनो पंफहेले मंफेरे घमफर ज़ंफाओ अमफोर वांफाहा संफ़े मंफेरे बंफेड रंफूँ संफ़े अंफेक पम्फर्सेल लांफेके ज़ंफाओ अमफोर अंफुसे कंफाही संफाफे ज़ँफ़गाह पे छ्चमफूपा दंफेना. मंफाई यांफाहा संफ़े नँफिकलने कंफे बंफड़ वांफापा लांफे लांफुँगा.’’
फिर वो पार्सल कहाँ पड़ा है वो साजन ने उदयन और मुनीश को बताया और दोनो जल्दी पोलीस स्टेशन से निकल गये.
पोलीस स्टेशन से निकलकर दोनो जल्दी से साजन के बंग्लॉ पर पहुचे. दोनो ने बंग्लॉ के माली से बातचीत कर के (जब साजन भी बंग्लॉ पर नही होता तो एक नौकर को चाबी दे दी जाती थी और वोही सबकुछ संभालता था) साजन के बेडरूम मे गये और जैसे निशानी बताई थी वैसे वहाँ से पार्सल उठाया और वहाँ से निकल पड़े. फिर दोनो ने सोचा कि इस पार्सल मे क्या होगा तो उसने फटाफट खोल के सबकुछ देखा तो उदयन और मुनीश की आँखे फटी रह गयी और केवल 6 या 7 मिनिट्स मे सबकुछ जल्दी जल्दी देखकर दोनो ने उस पार्सल की सब चीज़ को एक छोटी साइज़ की प्लास्टिक बॅग मे रखा और उसे मजबूती से पार्सल टेप चिपका दिया और उस पर कुछ निशानी की और फिर जीप लेकर चले बींदायका जंगल मे नीशी और बिरजू को रोकने और जय का पिच्छा करने. उस वक़्त घड़ी मे बराबर 6.45 मीं हुए थे. मतलब बराबर उसी वक़्त के आसपास मिस्टर. सिन्हा आरके के फार्महाउस से निकले थे. लेकिन दोनो मे अंतर ये था कि हाइवे से जंगल मे जाते ही उदयन और मुनीश जय के पिछे कम दूर थे जब कि मिस्टर. सिन्हा काफ़ी दूर थे, क्यूकी आरके का फार्महाउस जंगल के दूसरे छ्चोड़ पर आया हुवा था और उदयन और मुनीश उस से जल्दी पहुचनेवाले थे क्यूकी साजन के घर से निकल के केवल 15 या 20 मीं वे लोग जंगल के अंदर पहुचनेवाले थे.
क्रमशः……………………….